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सेवा में,
सम्मानित चैनल हेड / सीनियर्स / रिपोर्ट्स / स्टाफ
नेशनल वायस चैनल

आप और हम लोगों ने नेशनल वायस न्यूज़ चैनल को बड़ी मेहनत से आगे बढ़ाया और कम समय में मेहनत के बलबूते पर आगे तक लेकर गए और उस मेहनत की मलाई किसी ओर को समर्पित की गई। हमने दिन रात मेहनत कर लगभग दो साल तक चैनल को अपने खून पसीने से सींचा मगर हमारे सीनियर्स, चैनल के उच्चाधिकारियों ने हमारी मेहनत की मलाई खूब अच्छे से खाया और अपना पेट भरा। साथ ही उनका भी भरा जो उनके चाटुकार थे। मैंने अपनी मेहनत से चैनल को खूब काम करके दिया। खुद भूखा रहा। मगर चैनल को भूखा नहीं रहने दिया। उसका पेट भरता रहा। अपने करियर को देखते हुए घर में झूठा दिलासा देता रहा कि मैं एक अच्छे चैनल में काम कर रहा हूँ। मुझे अच्छा मेहनताना मिलता है। दिल टूट गया जब मेरे पिताजी ने एक दिन कहा कि अपनी कमाई से कुछ घर भी लेकर आया कर। मगर उन्हें कहाँ पता था कि मेरी मेहनत की कमाई तो चैनल के बड़े लोगों में बंट रही है।

सभी को यह बता दूं मुझे पत्रकारिता में लंबा समय हो गया है। मगर मैंने कभी चैनल के नाम पर दलाली नहीं की। मैंने मेहनत की और मेहनताना के नाम पर कुछ नहीं मिला। चैनल के उच्च साथियों से पता चलता कि हमें अगले माह से वेतन दिया जाएगा। मैं दुबारा काम शुरू कर देता। मगर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। ईमानदारी का बड़ा अच्छा फल मिला। उसके लिए आप सभी का तहे दिल से धन्यवाद। उच्च अधिकारियों द्वारा लुभावने लड्डू जो दिए जाते रहे, उनका भी धन्यवाद। आप लोगों को मान गए कि आप लोग मैनेज करने में एक्सपर्ट हैं। मेरी अन्य सभी साथियों के लिए एक सलाह। आप लोगों को भी लुभावने वादे किये जा रहे हैं मगर वह पूरे नहीं होने वाले। बाकी क्या कहूं। सभी तो विद्वतजनों में गिने जाते हैं।

बड़े बुजुर्ग कह कर गये है कि जो गरीब की मेहनत को कुचलता है तो उसका जरूर बुरा होता है। मगर मैं यह नहीं चाहूंगा। मैं तो यह चाहूंगा कि आप लोगों का चैनल दिन रात तरक्की करे। सिर्फ इस बात से डरता हूँ चैनल को किसी मेहनती व्यक्ति की दिल से हाय न लग जाये क्योंकि जिसने मेहनत की होगी वह व्यक्ति चैनल के लिए की गयी मेहनत पर जरूर रोया होगा। दुःख तो इस बात का होता है जब चैनल का वरिष्ठ अधिकारी ये बात बताने पर जवाब देता है कि चैनल किसी रिपोर्टर से पूछ कर काम नहीं करता। बाद में वह अपने ही रिपोर्टर को कहता है कि आपको बात करने की तमीज नहीं। वैसे चैनल की दुकान चला रहे उस व्यक्ति को बता दूं, धंधे की इज्जत करना सीखो, साथ ही उनकी भी जो लोग आपकी दुकान चलाने में आपका सहयोग दे रहे हैं। हर आदमी बिकाऊ नहीं होता।

आप लोगों के साथ काम करने का मौका मिला उसके लिए आप सभी का धन्यवाद. और एक जरुरी बात... जितने भी लोग यह सोचते है की आपका ये चैनल ETV चैनल को टक्कर दे रहा है या देगा तो वह सरासर गलतफहमी में जी रहा है। अपने दिल से पूछें कि चैनल उस नेटवर्क के बराबर है या नहीं। यह चैनल कभी एक जगह पर नहीं टिक सकता। इसका उदाहरण यह खुद ही देता रहा है। कभी नोएडा तो कभी लखनऊ। सोचनीय विषय यह जो खुद ही एक जगह पर टिका नहीं हो वह दूसरे को कैसे टिका पायेगा। हो सके तो चैनल जो वायदे किये थे, जो बिल मंगवाए थे, उन्हें पूरा करे। भगवान न करे कि कोई मेहनत का मेहनताना न मिलने पर भूखा सोये। 

धन्यवाद
कुलदीप थपलियाल
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People in this conversation

  • Guest - कुलदीप

    Bhai sahi baat hai.

  • Guest - sudarshan

    Gurgaon me bhi yahi haal dekhne ko mila. चाटुकार जीभ घिसने तक चाटते रहते है। सब भूल जाते है।और बॉस भी उसे दो अनमोल रत्नों की तरह सम्हाल कर रखता है। भले ही रिपोर्टर न हो कर वो तेली हो

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