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उत्तराखण्ड केंद्रित न्यूज़ चैनल HNN 24X7 (हिन्दुस्तान न्यूज़ नेटवर्क ) को एक बड़ा झटका लगा है। HNN से के प्राइम टाइम एंकर अभिषेक शांडिल्य ने चैनल के एमडी अमित शर्मा को  इस्तीफा सौंप दिया है। ख़बर है कि उनपर किसी प्रकार का ख़ास दबाव डाला जा रहा था। अपनी ईमानदारी के लिए कम समय में अपनी पहचना बनाने वाले अभिषेक शांडिल्य का इस्तीफा चैनल के लिए बुरी ख़बर है।

प्राइम टाइम में सीधे सरकार से लोहा लेने वाले अभिषेक शांडिल्य के जाने के बाद सत्ता पक्ष के कई प्रवक्ता राहत महसूस कर रहे हैं। HNN में 8 से 9 के बीच प्राइम टाइम में जनता की आवाज़ के नाम से मशहूर शो में बड़े-बड़े खिलाड़ियों से लोहा लिया...जब बड़े-बड़े पत्रकारों ने सवाल पूछना बंद कर दिया है उस दौर में भी अगर कोई सवाल पूछें तो ज़ाहिर है वो चैनल में ज्यादा दिन तक काम नहीं कर पाएगा। जल्द ही वो एक नए तेवर और नए चैनल के साथ आने वाले हैं।

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  • Guest - उत्तराखंडी

    लगता है कुछ अतिश्योक्ति हो गई है। शांडिल्य जी अच्छे हैं पर इतने भी नहीं उन जैसा कोई है ही नहीं। चैनल को 'झटका' भी नहीं लगा कि वो हिल रहा हो।

  • Guest - पूर्ण सत्य

    अर्द्धज्ञानी हमेशा अज्ञानी से अधिक खतरनाक और नुकसान करने वाला होता है... और आप लोग अभिषेक तिवारी जिसे लोग अब अभिषेक शांडिल्य के नाम से जानते है का साथ देकर कर रहे हैं। जो इंसान अमुक चैनल (जिसकी तनख्वाह से ये पला क्योंकि इस शख्स के पास कहीं काम नहीं था) पर अनर्गल आरोप लगा रहा है, उसी चैनल ने इसे भरपूर मौका दे इसे यहां तक पहुँचाया है। चाटुकारिता, चमचागिरी और रंग बदलना इस इंसान की फितरत रही है। ये शख्स आज अगर कुछ हासिल कर पाया है तो वो सिर्फ अपनी चाटुकारिता और उल्लू सीधा करने के टैलेंट के बूते। वरना जिस इंसान को स्क्रिप्ट लिखनी ही ना आती हो, ख़बरों का सेंस ही ना पता हो, ट्रीटमेंट ही ना जानता हो वो पत्रकार नहीं है। इसे बनाया है इसके 'धृतराष्ट्र' मालिकों ने। पहले कोई मैडम हुआ करती थी और फिर बाद में अमित शर्मा(जिनके गुणगान ये आजकल कर रहा है) । इसे तैयार किया है परदे के पीछे काम करने वाले प्रोड्यूसर्स ने। वो तो वैसे भी थैंक्सलेस जॉब करते हैं। प्राइमटाइम डिबेट मिलने के बाद घमंड इनके सिर चढ़ कर बोलता था। मैडम के जाने के बाद ये थोड़े धरती पर आये लेकिन 'शर्माकृपा' इन पर बनी रही। पिछले दिनों इन्होंने ज़रूरत से ज़्यादा सैलरी इंक्रीमेंट माँगा तो मालिकों ने अपनी असमर्थता जताकर इनकी औरो से ज़्यादा सैलरी बढ़ा दी। पर इन्हें लगा जिस तरह ये अपनी बाकी की मांगें मनवाते थे वैसे ही इनकी ये मांग भी मान ली जायेगी। अपने परिवार के 5 लोगों को (जिन्हें मीडिया का कुछ नहीं आता था) अच्छी सैलरी में लगवाना हो, ऑफिस के कपड़े अपने पास रख लेना हो, कैश बोनस लेना हो या मालिकों के कान भरके किसी को जॉब से निकलवाना हो। ये इनका प्रिय शगल रहा है। इतना बढ़ा चढ़ा कर लिखने से पहले आप इस इंसान का इतिहास भी खंगाल ले और अभिषेक तिवारी उर्फ़ अभिषेक शांडिल्य के मुखपत्र ना बनें। और छुटभैया चैनलों में ना जाने कितने अभिषेक तिवारी आये और गए तो ये किस खेत की मूली हैं। बात बात पर जात और मज़हब पर कटाक्ष करने वाले इंसान का साथ देना जरूरी नहीं है। धन्यवाद।

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