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प्रभात खबर का ग्रुप संपादक बनने तथा हरिवंश के दायित्व मुक्त होने के बाद प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने दूसरी बार रेज़िडेंट एडिटर लेवल पर बड़ा बदलाव किया है। अगस्त महीने में जीवेश रंजन सिंह को देवघर एडिशन का संपादक तथा अजय कुमार को बिहार में स्टेट एडिटर बनाया गया था। दो महीने बीतते बिताते जीवेश रंजन को देवघर से चलता कर दिया गया। हालांकि जीवेश ने यहां बदलाव के कई काम किये। अखबार को माइलेज भी मिला। किन्तु दो दिन पूर्व उच्च प्रबंधन स्तर पर एक बड़ा निर्णय लिया गया।

कई लोग इधर-उधर किये गए हैं, तो कुछ का पर कतर दिया गया है। कुछ लोगों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। जीवेश रंजन को देवघर से हटाकर एकबार फिर भागलपुर भेजा गया है। जीवेश इससे पूर्व भी यहां संपादक रह चुके हैं। वर्तमान संपादक ब्रजेंद्र दुबे को यहां से हटाने के बाद कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गयी है। संभवतया उन्हें मुख्यालय से अटैच किया जाएगा।

देवघर में संपादक पद पर पंचायतनामा के संपादक तथा डिजिटल विंग के प्रमुख संजय मिश्रा को भेजा गया है। श्री मिश्रा इससे पूर्व भी देवघर के स्थानीय संपादक रह चुके हैं। मुजफ्परपुर एडिशन के संपादक शैलेंद्र पर भी गाज गिरी है। उन्हें हटाकर पटना में ब्यूरो प्रमुख मिथिलेश को जिम्मेदारी दी गयी है। शैलेन्द्र की अभी कहीं तैनाती नहीं हुई है। अब तक ग्रुप में अहम ओहदा संभालने वाले कॉर्पोरेट एडिटर राजेन्द्र तिवारी को डिजिटल विंग का प्रमुख बनाया गया है।

झारखंड के स्टेट एडिटर अनुज सिन्हा का उत्तरदायित्व बढ़ाया गया है। उन्हें पंचायतनामा का दायित्व सौंपा गया है। आने वाले दिनों में सीनियर लेवल पर कई बदलाव होने की संभावना है। साथ ही जूनियर लेवल पर भी बदलाव के संकेत हैं। बीते कई वर्षों से जूनियर लेवल पर कोई फेरबदल नहीं हुआ है। नए प्रधान संपादक इस स्तर पर भी बदलाव को लेकर गंभीर हैं।

प्रभात खबर में कई वर्षों से कर्मियों का प्रमोशन बंद

प्रभात खबर ग्रुप में पिछले सात-आठ वर्षों से एडिटोरियल सेक्शन के कर्मियों का प्रमोशन नहीं हो रहा है। जिनकी बहाली सब एडिटर, सीनियर सब एडिटर या चीफ सब में हुई थी, आज भी उसी पद पर काम कर रहे हैं। हरिवंश के प्रधान संपादक रहते प्रमोशन की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चला गया। इसका खमियाजा कर्मियों को उठानी पड़ रही है। कर्मी क्षुब्ध हैं। नए प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी के राजकाज में रुका पड़ा प्रमोशन होने की आशा एकबार फिर जगी है।

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  • Guest - Well Wisher of B4M

    आदरणीय यशवंत जी,
    ऐसा लगता है कि अब भड़ास में कुछ मीडिया हाउस के बारे में सिर्फ पॉजीटिव खबरें आती हैं. वहां की निगेटिव खबरों को माल-पानी लेकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसका एक उदाहरण तो आपका यह पोस्ट ही है. सुबह में आपने डाला था कि जीवेश रंजन सिंह दो हफ्ते में ही देवघर में विवादों में आ गये और उन्हें भागलपुर भेज दिया गया. शाम में पूरी पोस्ट बदल गयी और नये प्रधान संपादक जी की तारीफ में अंत में कई फर्जी लाइनें डाल दी गयीं.
    दूसरा बड़ा उदाहरण है- नया प्रधानसंपादक पुराने संपादकों को हटा कर अपने लोगों और विवादित व दागदार चेहरों को बड़ी जिम्मेवारियां दे रहा है, लेकिन भड़ास इस पर आंखें बंद किये हुए है. आपने इस पोस्ट में ही लिखा है कि भागलपुर के संपादक बृजेंद्र दुबे और मुजफ्फरपुर के संपादक शैलेंद्र को नयी जिम्मेवारी नहीं दी गयी है, लेकिन आपने इसे फॉलो करने की जरूरत नहीं समझा. ताजा स्थिति यह है कि बृजेंद्र दुबे को अपमानित कर जबरन इस्तीफा ले लिया गया है. शैलेंद्र को भी इस्तीफा देने कहा गया था, लेकिन वे अवकाश पर चले गये हैं. बिहार की यूनिटों में कार्यरत कई और सीनियर लोगों पर इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. प्रधानसंपादक ने अपनी मनमानी को लागू कराने के काम में बिहार के एडिटोरियल कोआर्डिनेटर अजय कुमार को लगाया है, जो टारगेटेड व्यक्ति के खिलाफ अत्यंत निगेटिव रिपोर्ट तैयार करते हैं और फिर एचआर उस पर कार्रवाई करता है.
    क्या हम उम्मीद करें कि भड़ास इस पर अपनी चुप्पी तोड़ेगा?
    या फिर आप प्रभात खबर में नौकरी खो रहे पत्रकारों का साथ देकर अपने पेट पर लात नहीं मारेंगे?
    आपका,
    भड़ास का एक शुभचिंतक और प्रभात खबर में जॉब के लिहाज से बद से बदतर होते हालात से दुखी एक कर्मचारी.

    from Bhagalpur, Bihar, India

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