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सबसे आगे रहने का दावा करने वाले दैनिक भास्कर ने छापी 5 साल पुरानी खबर

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प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद इन दिनों डिजिटल मीडिया की क्रांति है। हर मीडिया हाउस पाठक तक सबसे पहले खबर पहुंचाकर खुद को आगे रखने में जुटा है। इसी दौड़ में दैनिक भास्कर ऐप भी शामिल है जो सबसे आगे रहने का दावा करता है। ऐप का प्रमोशन करने के लिए भास्कर ने टैगलाइन बनाई है- ‘सच करीब से दिखता है।’ लेकिन भास्कर का असली सच जानकर आप हैरान रह जाएंगे!

खुद को नंबर वन और आगे रहने का दावा करने वाले भास्कर ने आज 16 मई 2021 को एक खबर अपने ऐप पर प्रकाशित की है। राजस्थान प्रदेश के शिक्षा विभाग से जुड़ी इस खबर में बताया है कि अब प्रदेश के विद्यार्थी असम की संस्कृति से रूबरू होंगे। गौर करने वाली बात है कि यह खबर बाइलाइन लगाई गई है यानि इसमें रिपोर्टर का नाम भी लिखा है।

अब चौंकाने वाली बात ये है कि जिस खबर को शिक्षा मंत्रालय की पहल बताकर प्रकाशित किया गया है वो खबर पांच साल पुरानी है। यही खबर पत्रिका समूह के डेली न्यूज में पांच साल पहले 25 नवंबर, 2017 को प्रकाशित हो चुकी है। आज भास्कर ने इस पुरानी खबर को राज्य-शहर कैटेगरी में पूरे प्रदेश में प्रकाशित किया है। भड़ास के जागरूक पाठक ने हमें दोनों खबरों के लिंक उपलब्ध करवाए हैं। आप भी देखिए और भास्कर की पत्रकारिता स्तर का अंदाजा लगाइए।

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