हिंदुस्तान भागलपुर में अब ‘यस सर’ वाले ही बच गए हैं!

भागलपुर हिन्दुस्तान ऑफिस से एक साथ नौ लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सुबह फोन कर इस्तीफा देने को कहा गया। दीपक उपाध्याय, विनीत कुमार, आदित्य नाथ और तरुण ने इस्तीफा दे दिया। मनीष, सत्य प्रकाश निजी कारणों से ऑफिस नहीं पहुंच सके।

प्रभात रंजन ने इस्तीफा देने से मना कर दिया। उन्होंने कोर्ट जाने की बात कही। जानकारी के अनुसार प्रसन्न सिंह से भी इस्तीफा मांगा गया है।

कोराना काल में चल रहे कॉस्ट कटिंग के नाम पर स्थानीय संपादक ने खूब मनमानी की। चुन चुन कर उन सभी लोगों को बाहर कर दिया जो यदा कदा उनसे सवाल कर देते थे। अब सिर्फ जी सर करने वाले ही दफ्तर में बचे हैं।

गीतेश्वर प्रसाद ने बड़ी सफाई से अपनी जाति (भूमिहार) के लोगों को बचा लिया। छंटनी लिस्ट में एक मात्र भूमिहार का नाम है वह है प्रसन्न सिंह। बताया जाता है कि प्रसन्न से संपादक की बनती नहीं थी। प्रसन्न संपादक का सारा हिसाब किताब स्टेट एडिटर बंधु जी तक पहुंचा देते थे। इस बात की भी चर्चा है कि प्रसन्न बंधु जी की शरण में गया है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “हिंदुस्तान भागलपुर में अब ‘यस सर’ वाले ही बच गए हैं!

  • भागलपुर के बारे में निहायत अनर्गल बातें लिखी गई हैं। संपादक सर से दर्जन भर बार मिला हू्ं। उनकी सोच संकीर्ण हो ही नहीं सकती। क्या किसी को हटाने या तरक्की देने में जाति, धर्म या क्षेत्र देखने की जरूरत है। निश्चित रूप से हटाए गए लोगों का ही यह विधवा प्रलाप है। बाहर हुए तीन लोग भूमिहार जाति से हैं, इसलिए आपकी यह जानकारी भी विश्वसनीय नहीं है, कि भूमिहारों को बचाया गया है। फिर कोई राष्ट्रीय समाचार पत्र राजनीतिक मुखपत्र नहीं होता, कि कार्रवाई में ये सब देखे। इसलिए ऐसी घटिया बातें लिखने वालों को सौ बार सोचना चाहिए और सूचनाओं को क्रास चेक करना चाहिए। – जेपी सिन्हा

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  • पल्लव says:

    JP Sinha ji
    आप भागलपुर हिन्दुस्तान के संपादक गीतेश्वर सिंह के चमचे या दलाल होंगे, जो उनकी काले कारनामों को नहीं देख पाये। क्योंकि आप तीन भूमिहार का जिक्र कर रहे हैं, दम है तो तीनों का नाम बताइए। आप नहीं बता पाएंगे। अभी भागलपुर हिन्दुस्तान में भूमिहारों और चाटुकारों की ही तूती बोल रही है। संपादक से लेकर कर्मचारी तक। गीतेश्वर सिंह को ऐसे में पाठक भी भूमिहार ही खोज लेनी चाहिए, इससे एक जाति होने से परिवार जैसा महसूस होगा। …और हां, विज्ञापन दाता भी भूमिहार से ही खोज लेना चाहिए।

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  • पल्लव says:

    JP Sinha ji
    आप भागलपुर हिन्दुस्तान के संपादक गीतेश्वर सिंह के चमचे या दलाल होंगे, जो उनकी काले कारनामों को नहीं देख पाये। क्योंकि आप तीन भूमिहार का जिक्र कर रहे हैं, दम है तो तीनों का नाम बताइए। आप नहीं बता पाएंगे। अभी भागलपुर हिन्दुस्तान में भूमिहारों और चाटुकारों की ही तूती बोल रही है। संपादक से लेकर कर्मचारी तक। गीतेश्वर सिंह को ऐसे में पाठक भी भूमिहार ही खोज लेनी चाहिए, इससे एक जाति होने से परिवार जैसा महसूस होगा।

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  • हरे राम ठाकुर says:

    जेपी जी आप हिन्दुस्तान अख़बार से जुड़े लगते हैं। आपको हरे राम के जितनी जानकारी लगती है। थोड़ा बताइए गीतेश्वर जी के बारे में । जैसे सुना है कि जगदीशपुर में बालू माफिया ने उनकी पिटाई की थी, बॉस ये क्या मामला है।

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  • प्रसन्न सिंह says:

    यह हम भी सुने हैं कि चार हजार लेने गए थे जहां दोनों की ठुकाई हो गयी। इस बात की चर्चा मीडिया जगत में भी तेज है। इनलोगों पर केस होने की भी चर्चा है। बालू माफिया ने मुख्यमंत्री, प्रेस कॉंसिल समेत कई अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है। आने वाला समय मे इसका खुलासा हो सकता है। DPRO के पास भी पटना से कार्रवाई हेतु पत्र आया है।

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