‘परमानंद पांडेय का IFWJ से कोई रिश्ता नहीं, भड़ास पर छपी खबर तत्काल हटाएं’

श्रीमान यशवंत सिंह जी
संपादक, भड़ास4मीडिया

मैं आपको कई बार सूचित कर चूका हूँ और साक्ष्य (दस्तावेज) भी भेज चूका हूँ कि परमानन्द पांडे का IFWJ से कोई मतलब नहीं है. आप भी भलीभांति अवगत हैं कि ये एक वकील हैं और इसका पत्रकारिता से कोई रिश्ता नाता नहीं हैं. हाँ पत्रकारों से फीस लेकर उनके केस लड़ना ही एक रिश्ता है.

रजिस्ट्रार दिल्ली सरकार और कोर्ट भी हमारे पक्ष मे आदेश दे चुकी है. आपको दिल्ली की पटियाला कोर्ट का 29 जनवरी 2019 का आदेश भेज रहा हूँ. पढ़ लें. 29 जनवरी को जज साहब ने कहा था कि रिंकू यादव (जो परमानन्द पांडे के फ़र्ज़ी संगठन के कोषाध्यक्ष हैं) ने आज तक (डेढ़ साल में) कोई ऐसा दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किया है जो ये साबित करे कि BV Mallikarjuniah, Parmanand Pandey या रिंकू यादव IFWJ के पदाधिकारी हैं. जनवरी से आज जुलाई तक भी ये कोई साक्ष्य नहीं दे पाए हैं. आखरी सुनवाई 3 जुलाई को थी.

मेरा आप से अनुरोध है कि आप अपनी वेबसाइट “भड़ास4मीडिया” का इस्तेमाल इन फर्जी लोगों को नहीं करने देंगे. IFWJ के सेक्रेटरी जनरल श्री विपिन धूलिया जी एवं दिल्ली IFWJ के अध्यक्ष श्री राजीव रंजन नाग जी एवं देश भर में IFWJ के सदस्य आपके द्वारा प्रसारित परमानन्द पांडेय के पत्र का खंडन करते हैं. कृपया इस पोस्ट को तत्काल हटाने का कष्ट करें.

सादर

विश्वदेव राव

सचिव IFWJ


पढ़िए वो पोस्ट जिसे हटाने की बात कही जा रही है-

IFWJ Writes to Prime Minister for Scrapping PIB, RNI, DAVP and Press Council of India

ifwj के कें. विक्रमराव गुट के पदाधिकारी विश्वदेव राव के पत्र का जवाब ifwj के परमानंद पांडेय गुट के पदाधिकारी रिंकू यादव ने यूं दिया है-

‘हिम्मत है तो भड़ास को धमकाने की बजाय ifwj की खबर भेजने वाले पर मुकदमा करो!’



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One comment on “‘परमानंद पांडेय का IFWJ से कोई रिश्ता नहीं, भड़ास पर छपी खबर तत्काल हटाएं’”

  • Ish Madhu Talwar says:

    लगभग पैंतीस साल से विक्रम राव अध्यक्ष पद की कुर्सी से चिपके हैं। इतने ही साल से परमानंद पांडे महासचिव हैं। जब तक पांडे विक्रम राव के साथ थे, तब तक तो वे पत्रकार थे और पत्रकारिता की आड़ में पर्यटन की दुकान चलाने वाले विक्रम राव को संगठन ने निकाल दिया तो पांडे अब पत्रकार नहीं, वकील हो गए। पहले वकील नहीं थे क्या? और विक्रम राव भी अब कौनसे पत्रकार रह गए हैं। जब विक्रम राव पत्रकरिता से इतर पर्यटन का धंधा कर सकते हैं तो पांडे वकालत क्यों नहीं कर सकते?

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