इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन बंद होने की चर्चाएं

ऐसा कहा जा रहा है कि इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन के लिए ये महीना आखिरी होगा. अक्टूबर से इस मैग्जीन के न छपने की चर्चाएं हैं.

सूत्रों के मुताबिक लगातार छंटनी के बावजूद इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन में सेलरी का खर्च छपने वाले विज्ञापनों से ज्यादा है. इसके चलते ये इंडिया टुडे का हिंदी संस्करण घाटे में चल रहा है.

तमाम प्रयासों के बावजूद जब इसे फायदे में नहीं लाया जा सका है तो अब आखिरी उपाय के बतौर इसे बंद कर सिर्फ डिजिटल एडिशन निकालने की तैयारी की जा रही है.

ज्ञात हो कि इंडिया टुडे मैग्जीन हिंदी के अलावा तमिल, तेलगू, मलयालम आदि कई भाषाओं में छपती रही है. हिंदी को छोड़ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में इस मैग्जीन का प्रकाशन कई बरस पहले ही बंद कर दिया गया था.

अब हिंदी पर भी गाज गिराए जाने की तैयारी है.

सिर्फ इंडिया टुडे अंग्रेजी का ही प्रिंट में अस्तित्व रहेगा.

कोरोना के चलते विज्ञापनों से कमाई में जबरदस्त गिरावट आने से पत्र-पत्रिकाओं के मालिकान घाटा कम करने के लिए या तो मीडियाकर्मियों की छंटनी कर रहे हैं या फिर घाटे वाले मीडिया वेंचर को ही तौबा कह दे रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन में सरकारी विज्ञापनों का रेट प्राइवेट विज्ञापनों से कई गुना ज्यादा है. प्राइवेट विज्ञापनदाताओं को वन प्लस वन की स्कीम भी दी जा रही है. यानि एक पन्ना के साथ दूसरा पन्ना फ्री. पर सरकारी विज्ञापन के साथ ऐसा कुछ नहीं है. इस तरह इस मैग्जीन के प्रबंधन सरकार से ज्यादा पैसा लेकर सरकारी राजस्व की अवैध हड़प कर रहे हैं.



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