इंडिया टीवी प्रबंधन और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के चलते तनु को नहीं मिल रहा इंसाफ

NOIDA JULOOS

नोएडा। इंडिया टीवी की पूर्व एंकर तनु शर्मा के साथ हुए अन्याय के खिलाफ बुधवार को दर्जनों पत्रकारों, जेएनयू छात्र संगठन, महिला और मजदूर संगठनों के पदाधिकारियों ने बुधवार को नोएडा सेक्टर- 16, फिल्म सिटी में एक सभा की और जुलूस निकाला। इस दौरान तनु शर्मा के साथ बरते गए इंडिया टीवी मैनेजमेंट के रवैये की घोर भर्त्सना की गई। सभा में माना गया कि मैनेजमेंट के आपराधिक, गैरजिम्मेदाराना और उत्पीड़नकारी रुख के चलते तनु शर्मा को खुदकुशी की कोशिश के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह मैनेजमेंट उन्हें बचाने में जुट गया है। इतना ही नहीं उसने पूरे मामले के लिए तनु शर्मा को ही जिम्मेदार ठहराने की साजिश शुरू कर दी गई है। इसके बाद सभा में शामिल लोगों ने जिलाधिकारी कैंप कार्यालय तक तनु शर्मा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जुलूस निकाला।

सभा के आयोजक महेंद्र मिश्रा ने कहा कि इंडिया टीवी मैनेजमेंट के अलावा पुलिस और प्रशासन के स्तर से भी बड़ी लापरवाही बरती गई है। उन्होंने इस मामले में बराबर की आरोपी ऋतु धवन का नाम एफआईआर में नहीं शामिल किया।

एपवा सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि मीडिया में महिलाओं की स्थिति बड़ी दयनीय है। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने पीड़िता से बात नहीं की है लेकिन उससे बात करने के बाद अगर वह चाहेगी तो महिला संगठन उसकी लड़ाई को आगे ले जाने का काम करेंगे। इतना ही नहीं, उसकी गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में विशाखा गाइडलाइंस के लिए जो कमेटियां भी बनी हैं वो भी अपना काम पारदर्शिता से नहीं कर रही हैं। मीडिया संगठनों में ये कमेटियां अपना काम पारदर्शिता से करें इसके लिए पत्रकारों को अपने संगठन बनाने होंगे जो इन कमेटियों पर निगाह रखें।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया का कहना था, पत्रकारों की स्थिति बड़ी दयनीय है लेकिन वह खुद के शोषण के खिलाफ ही आवाज नहीं उठा पाते। उनके भीतर से डर निकालना भी जरूरी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपने ही वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने का भी मामला उठाते हुए कहा कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न होने पर सभी को इसी मजबूती से अपनी आवाज उठानी होगी। उन्होंने इस सभा-जुलूस में शामिल हुए जेएनयू छात्रसंघ और मजदूर संघ के पदाधिकारियों की तरीफ की और कहा कि समाज के सभी हिस्सों के लोगों को एक-दूसरे के शोषण के खिलाफ खड़े होना पड़ेगा।

प्रशांत टंडन ने कहा, ऐसा माना जा रहा है कि ये सब कुछ इंडिया टीवी मैनेजमेंट और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से संभव हुआ। मैनेजमेंट के दबाव का नतीजा कहिए या फिर प्रशासन की लापरवाही घटना के इतने दिन बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं, इंडिया टीवी मैनेजमेंट की एकतरफा शिकायत पर पुलिस ने तनु शर्मा के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया है और सारे आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्होंने उन्होंने तनु शर्मा के खिलाफ निंदा अभियान भी छेड़ दिया है।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष अकबर चौधरी ने कहा, ऐसे दौर में जबकि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक परवान चढ़ रही है। संसद से 20 किमी की दूरी पर एक महिला न्याय से कोसों दूर है। मीडिया संस्थानों में कार्यरत हजारों लोग तनु शर्मा जैसे हालात से गुजर रहे हैं। इनमें से कोई फिर उसी तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर ना हो इसके लिए गौतम बुद्ध नगर जिलाधिकारी से निम्न छह बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की गई।

1-एफआईआर में तनु शर्मा को खुदकुशी की कोशिश के लिए मजबूर करने वाली ऋतु धवन का नाम भी शामिल किया जाए।
2-आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।
3-इंडिया टीवी मैनेजमेंट की शिकायत के आधार पर तनु शर्मा के खिलाफ लगाई गई धाराएं पूरी तरह से एकतरफा और बेबुनियाद हैं। उन्हें तत्काल रद्द किया जाए।
4-सभी मीडिया संस्थानों में विशाखा गाइडलाइंस लागू कराने की गारंटी की जाए।
5-तनु शर्मा को ससम्मान नौकरी पर बहाल कर उसे उचित मुआवजा दिया जाए।
6-मीडियाकर्मियों की शिकायतों और उनके निपटारे के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और कारगर संस्था का गठन किया जाए।

ज्ञापन देने के दौरान वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया और प्रशांत टंडन, एपवा सचिव कविता कृष्णन और पत्रकार महेंद्र नाथ मिश्र मौजूद रहे। ज्ञापन की कॉपी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय और राज्य महिला आयोग और गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी को भी भेजी गई। प्रदर्शन में भारत सिंह, राहुल पाण्‍डेय, सुरेंद्र ग्रोवर, नीतीश कुमार सिंह, दि‍नेश सिंह, आशीष भारद्वाज, महेश सुल्‍तान आदि उपस्‍थि‍त रहे।

प्रेस विज्ञप्ति

 



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Comments on “इंडिया टीवी प्रबंधन और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के चलते तनु को नहीं मिल रहा इंसाफ

  • Dhananjay Sinha says:

    These cannot be stopped unless and until the media professionals stop to compromise with their self respect on work place…

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