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दैनिक जागरण के संपादकीय विभाग की अक्लमंदी देखिए!

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हर्ष कुमार-

फेसबुक पर जब कभी ‘दैनिक जागरण’ को लेकर कुछ लिखता हूं तो साथी पत्रकारों का जबर्दस्त समर्थन मिलता है। सब का मानना है कि दैनिक जागरण हिंदी अखबारों में काम करने के लिहाज से सबसे घटिया संस्थान है। वैसे हिंदुस्तान व अमर उजाला भी अब ज्यादा पीछे नहीं हैं।

अब ‘दैनिक जागरण’ के संपादकीय विभाग की अक्लमंदी देखिए। जागरण अकेला अखबार है जिसमें सोशल मीडिया को इंटरनेट मीडिया लिखा जा रहा है। अगर भगवंत मान ट्वीट करते हैं तो भी इंटरनेट मीडिया और फेसबुक पोस्ट लिखते हैं तो भी इंटरनेट मीडिया। हद है बेवकूफी की।

पता नहीं किसके दिमाग की उपज है इंटरनेट मीडिया शब्द? अरे भाई साफ बताओ ना कि फेसबुक पर लिखा या ट्वीट किया। जागरण के मालिकान ने इसे कैसे मंजूर कर लिया ये भी मेरी समझ से बाहर है। जागरण के संपादक संजय गुप्ता जी तो सुना है जागरण की तुलना सीधे टाइम्स आफ इंडिया से ही करते हैं।

इंटरनेट मीडिया जैसे शब्दों के प्रयोग को पिछड़ापन ही कहूंगा। यही वजह है कि दैनिक जागरण जैसा 15 साल पहले छपता था वैसा ही आज भी छपता है। कोई नयापन नहीं, उसी तरह का ले आउट और वैसा ही पेजिनेशन व खबरों का प्रस्तुतिकरण।

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