पत्रकार की जाति : राजदीप सरदेसाई और प्रभाष जोशी तक अपने ब्राह्मण नस्ल का महिमामंडन कर चुके हैं!

Mukesh Kumar : ये अच्छी बात है कि पत्रकारों ने अपने जातीय गर्व को सरे आम प्रकट करना शुरू कर दिया है और उसे उन्हीं की बिरादरी से चैलेंज भी किया जा रहा है। इससे मीडिया में जातिवाद की परतें खुलेंगी। लोगों को पता चलेगा कि पत्रकारों में जातीय अहंकार किस-किस रूप में मौजूद है और वह कंटेंट के निर्माण में किस तरह से काम करता होगा।  हम सब जानते हैं कि मीडिया भी इसी जातिवादी समाज का हिस्सा है, इसलिए उसी रूप में जातिवाद भी वहाँ मौजूद है, मगर उसे मानने से हम इंकार भी करते रहे हैं। मीडिया को ऐसी पवित्र गाय की तरह पेश करते रहे हैं कि मानो वह जाति, धर्म और दूसरे विभाजनों से ऊपर है और अगर समतावाद कहीं है तो मीडिया में ही।