क्या ‘जनतंत्र टीवी’ को मध्य प्रदेश के किसी उद्योगपति ने ले लिया है?

नोएडा से संचालित जनतंत्र टीवी को लेकर बड़ी खबर आ रही है। चर्चा है कि ये चैनल मध्यप्रदेश के किसी उद्योगपति ने ले लिया है और अब वो इसे नए सिरे से लांच करने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जनतंत्र टीवी को लेकर डील हो चुकी है और हैंड ओवर टेक ओवर की प्रक्रिया में है।

भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि अब ये चैनल बड़े पैमाने पर लांच होगा जिसे न केवल प्रमुख डीटीएच प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव को संपादकीय टीम को मजबूत किया जाएगा। पूर्व में इस चैनल को लेकर तमाम अफवाह और भ्रम फैलते रहे। संगीत ऑडियो इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन अमित वैद ने जनतंत्र टीवी की अगस्त 2017 में पंचकुला से शुरूआत की थी लेकिन चैनल का प्रबंधन ठीक न होने से मुश्किलें शुरू हो गईं। इसके बाद चैनल को नोएडा के सेक्टर-4 में संचालित किया गया। यहां नए सिरे से संपादकीय-तकनीकी टीम बनाई गई। करीब तीन महीने में चैनल कुछ खास नहीं कर सका। तीनों डीटीएच पर लाने के वायदे पर लाई गई संपादकीय टीम राजस्व के मोर्चे पर विफल हो गई तो चैनल के दुर्दिन शुरू हो गए।

जुलाई महीने में ही सैलरी का संकट खड़ा हो गया। इसके बाद जनतंत्र टीवी में ग्रुप एडिटर के तौर पर अमिताभ श्रीवास्तव लाए गए और एक्जीक्यूटिव एडिटर सत्येंद्र भाटी जोड़े गए। लेकिन आर्थिक संकट खड़ा होने से वो भी कुछ नहीं कर पाए। कंटेट पहले से बेहतर होने के बावजूद प्रबंधन सैलरी देने से पीछे हटने लगा तो हालात और बिगड़ गए। अगस्त महीने में सैलरी भी महीने के आखिर में मिली और फिर फिर सितंबर के आखिरी सप्ताह भी सैलरी न आने से कर्मचारियों का गुस्सा भड़कने लगा। नौबत यहां तक आ गई कि मान-मनोव्वल के बावजूद 27 सितंबर को कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी और चैनल में बुलेटिन जाना बंद हो गए।

जनतंत्र टीवी को संचालित करने वाले अमित वैद पहले से ही प्रयास कर रहे थे कि चैनल को कोई पार्टनर मिल जाए लेकिन जब हालात इतने बिगड़ गए तो उन्होंने चैनल मध्यप्रदेश के किसी उद्योगपति को सौंपने का मन बना लिया। सैलरी और अन्य दूसरे लाखों के भुगतान से उबरने के लिए उन्होंने ये डील फाइनल कर दी जिसके एवज में चैनल की डील का बड़ा एमाउंट उन्हें दिया गया। इसी रकम से चैनल के कर्मचारियों की सैलरी का तत्काल भुगतान कर दिया गया और दूसरे बकाया भी चुका दिए गए हैं।

इसी महीने के पहले हफ्ते में चैनल का जिम्मा नया प्रबंधन संभाल ले लेगा। इसकी भनक चैनल के कई कर्मचारियों को भी हो चुकी है जिससे उन्हें भरोसा जग गया है कि अब चैनल नए कलेवर में पूरी मजबूती के साथ संचालित होगा। सूत्रों के मुताबिक इस चैनल को ग्रुप एडिटर अमिताभ श्रीवास्तव और उनकी टीम ही संभालेगी।

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Comments on “क्या ‘जनतंत्र टीवी’ को मध्य प्रदेश के किसी उद्योगपति ने ले लिया है?

  • नही ऐसा नहीं हुआ है और अंतिम निर्णय के तौर पर इसे अमित वैध नए प्रबंधन के साथ ही चलाएंगे।

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  • Ankit parasia says:

    आप को ज्ञात हो कि, इस चैनल को कोई उद्योगपति नहीं बल्कि, मध्य प्रदेश के दिग्गज पत्रकार सुदेश तिवारी ने खरीदा है।

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  • 4 महीने पहले मेरे द्वारा लिखे इस कॉमेंट को पढ़े, उस समय मैं इस चैनल की भविष्वाणी कर दी थी

    हरियाणा चुनाव से पहले पंचकूला छोड़ सैलरी हड़प कर भागा जनतंत्र टीवी… नोएडा में चैनल के नाम पर हो सकता है फर्जीवाड़ा… आवाज़ आपकी बनने का दावा करने वाला एक चैनल है जनतंत्र टीवी, नाम तो कहीं सुना नहीं, लेकिन कहते हैं कि करीब आठ महीने तक हरियाणा के पंचकूला शहर से चला, अब इस चैनल की लूट कथा सामने आई है, इस चैनल को दिल्ली के एक रियल एसटेट कारोबारी अमिल बैद्य नाम का शख्स चलाता था, शुरु में चैनल के प्रोमो देखकर लगता रहा कि चैनल वाकय में कुछ करेगा. एक के बाद एक प्रोमो और कुछ भरोसेमंद नाम के पत्रकारों के साथ इस चैनल की शुरुआत हुई।
    लेकिन कहते हैं कि जब मन में चोर हो तो भगवान भी आपका क्या भला करेगा, मालिक चैनल चलाने को मजाक समझा, इस चैनल में कुछ विश्वसनीय चैनलों के लोग काम कर रहे थे मालिक ने उनके ऊपर दिल्ली के ठेकेदारों की फौज लाकर लाद दी, हुआ क्या जैसे तैसे कर कंटेट का मजाक बनाया गया। खैर मालिक, कहते हैं कि उन्हें इसका कोई फर्क नहीं पड़ता दिल्ली में अच्छा खासा कारोबार जो है, मालिक ने दिल्ली की एक फौज पर भरोसा किया। चैनल चलते चलते रह गया। एक के बाद एक लोग चैनल को छोड़ते गए, और मालिक कहता गया कि फर्क कहां पड़ता है किसी के जाने से।

    चैनल की बैठक हुई और कहा गया कि एनडीटीवी की तरह सभी कर्मचारियों को चैनल अपने शेयर देगा, और सैलरी में भी इजाफा होगा। अगले ही कुछ दिन में चैनल में फैसला हुआ कि अब हमसे न हो पाएगा, मालिक ने अगले साल हरियाणा में होने वाले चुनाव से पहले ही हथियार डाल दिया, चैनल को दिल्ली ले जाने को कह दिया गया। अगले दिन फिर बोला गया कि चैनल को दिल्ली से नहीं पंचकूला से चलाएंगे, ये बात इसलिए कि कहीं पत्रकारों के मन में ये न रह जाए कि चैनल जा रहा है और भविष्य को देखते हुए कुछ फैसले ले लिए जाएं, इस बात से बचने के लिए मालिक ने झूठ का सहारा लिया और कह दिया कि कर्मचारी भगवान है, शेयर होल्डर्स नहीं चाहेंगे तो चैनल नहीं जाएगा।

    लेकिन कुछ दिन बाद रातों रात पंचकूला से सामान गाड़ी में लादकर नोएडा के सेक्टर-4 में उतारा गया। क्योंकि सेक्टर-4 से ही अब चैनल चलाने का इंतजाम जो किया गया था। आप सोच में पड़ गए होंगे कि रातों- रात क्यों आना पड़ा, मिनिस्ट्री भाग रही थी क्या, अरे भाई बेचारे पत्रकारों की सैलरी जो नहीं देनी थी। डेढ़ महीने की सैलरी डकराने वाली जनतंत्र टीवी में आजकर विज्ञापन निकला है, जिसमें काम में ललक रखने वाले योग्य उम्मीदवारों की नौकरी निकली है, सवाल पूछा जा सकता है कि योग्यता का तो पता नहीं लेकिन भाग कर आ गए हो तो सैलरी भी दोगे या नहीं।

    जब सैलरी देने के पैसे मालिक के पास नहीं है तो चैनल क्यों खोल लिया? पंचकूला में जनतंत्र टीवी के नाम पर खूब लूट खसूट हुई है, जिन लोगों की पहली नौकरी थी उन्हें कहा गया कि आपकी सैलरी से पीएफ भी कट रहा है लेकिन 8 महीने काम कराने के बाद पीएफ तक नहीं दिया, पीएफ तो दूर उसका नंबर तक नहीं दिया। डेढ़ महीने की सैलरी को डकार लिया गया, सुबह जब लोग ऑफिस गए तो वहां ताला लटका था, देश में ऐसा चैनल तो कम से कम कहीं नहीं था, जो अपने कर्मचारियों से बेवफाई करे, आज तक कोई भी चैनल रात को सामान उठाकर भागा है देश में कहीं? अगर नहीं तो नोएडा में नेशनल चैनल जनतंत्र टीवी के नए ऑफिस सेक्टर 4 में जाकर अनुभव जरुर पूछने का कष्ट करें। पत्रकारों और पत्रकारिता पर भरोसा रखने के लिए हजारों भविष्य के जनहित में जारी
    लोगों का पैसा हड़प कर भागा जनतंत्र टीवी

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