झारखण्ड के पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित करने के लिए जेजेए का चरणबद्ध आंदोलन

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तंज़ीला तासीर-

रांची। प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित किया लेकिन झारखंड में ऐसा नहीं किया गया। झारखण्ड के पत्रकारों ने झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित करने को लेकर आंदोलन के तीसरे चरण में सोशल मीडिया में झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को टैग किया और ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए अपनी मांग दुहराई।

ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकार अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की श्रेणी में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकार कोविड काल में अपनी जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कोरोना संक्रमण काल में वास्तविकता को जन-जन तक पहुंचाने वाले पत्रकार भी वास्तव में कोरोना योद्धा हैं। अधिमान्य पत्रकारों को भी अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।’

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी राज्य के पत्रकारों को अग्रिम मोर्चा का कोविड योद्धा घोषित किया था। इस संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि पत्रकार निर्बाध रूप से खबरें देकर और लोगों को कोरोना वायरस से संबंधित मुद्दों से अवगत कराकर राज्य की बहुत सेवा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘राज्य के 6944 श्रमजीवी पत्रकार गोपबंधु संबादिका स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत शामिल किए गए हैं। उन्हें दो लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है।’

भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ की मांग पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पत्रकारों को कोरोना योद्धा मानते हुए उत्तरप्रदेश में कोरोना संक्रमण से मरने वाले पत्रकारों के लिए 10 लाख रुपये आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संस्थापक शाहनवाज़ हसन ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से झारखण्ड के पत्रकारों को काफ़ी आशाएं हैं। उन्होंने कहा भी है कि वे इस विषय पर जल्द ही निर्णय लेंगे परन्तु अबतक पत्रकारों के लिए कोरोनाकाल में झारखण्ड सरकार द्वारा किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं प्रदान की गयी है। पत्रकारों के लिए टीकाकरण से अधिक यह ज़रूरी था कि उन्हें कोरोना योद्धा घोषित किया जाता। दिवंगत पत्रकारों के परिजनों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए झारखण्ड सरकार को तमिलनाडु एवं बंगाल सरकार का अनुसरण करना चाहिए।

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