काला धन सफेद बनाने के लिए खुला था स्वराज एक्सप्रेस!

संजय कुमार-

दिल्ली से चलाए जा रहे स्वराज एक्सप्रेस न्यूज चैनल का सच: भाग-1

दिल्ली के बहादुरशाह जफर मार्ग स्थित मिलाप भवन से चलाए जाने वाले स्वराज एक्सप्रेस चैनल में संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और कानून की रक्षा की आड़ में काले धन को सफेद करने का खेल चल रहा था। जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत कई अन्य राज्यों में आरकेडीएफ के नाम से प्राइवेट यूनिवर्सिटी चलाने वाले मध्य प्रदेश के उद्योगपति डॉ सुनील कपूर का पैसा लगा था। जिनके घनिष्ठ रिश्ते राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के साथ हैं।

आरकेडीएफ समेत इन्हीं के 5 अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले देशभर के लाखों छात्रों से डोनेशन के नाम पर हर साल कई सौ करोड़ रुपए वसूल किए जाते हैं। इन्हीं काले धन को सफेद बनाने के लिए डॉ सुनील कपूर ने 2018 में एक नई कंपनी डबल टिक मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाई।

डॉ सुनील कपूर ने इस कंपनी में अपने पुत्र सिद्धार्थ कपूर के अलावा भारत के उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के ओएसडी रह चुके गुरदीप सिंह सप्पल, श्रुति कपूर, अमृता राय, मुकेश कुमार मोहता, जनक कपूर, साधना कपूर एवं अन्य को डायरेक्टर और शेयर होल्डर बनाया।

दिल्ली में डबल टिक मीडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का संचालन गुरदीप सिंह सप्पल, अमृता राय और मुकेश कुमार मोहता करते थे। इस चैनल या कह लीजिए न्यूज के धंधे को विश्वसनीय बनाने के लिए इन्होंने विनोद दुआ साहब, भारत भूषण जैसे कई नामी पत्रकारों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा और कई दूसरे बड़े न्यूज चैनलों के कई वरिष्ठ पत्रकारों को नौकरी पर रखा।

ऐसा लगता है इनके काले धन को सफेद बनाने का इनका टार्गेट पूरा हो गया है। इसीलिए 15 सितंबर को ये लोग चुपचाप चैनल में ताला लगाकर भाग गए। इसके लिए लाइसेंस धारक से मिलीभगत कर चैनल का सिग्नल भी खुद ही ऑफ करा दिया ताकि बहाना मिल सके।

इस कंपनी और इसके डायरेक्टरों ने विनोद दुआ साहब का बकाया समेत सभी कर्मचारियों की सैलरी तक हड़प ली है और लेबर कोर्ट में कानून से बचने के लिए बड़ी बेशर्मी के साथ एक के बाद एक झूठ बोल रहे हैं। इन्होंने चैनल के डिबेट शो में आने वाले दिल्ली के 200 वरिष्ठ पत्रकारों का पैसा भी मार रखा है।

साथ ही देशभर के 200 अंशकालिक पत्रकारों का भी करीब 15 लाख रुपए बकाया नहीं दे रहे हैं। जिनके लिए अलग-अलग शहरों में इनके खिलाफ एफआईआर की तैयारी चल रही है। लोकतंत्र, संविधान, कानून और धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देने वाले गुरदीप सिंह सप्पल, अमृता राय और मुकेश कुमार मोहता ने यहां काम करने वाले 150 से ज्यादा कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र तक नहीं दिया।

अब जबकि मामला दिल्ली के श्रमायुक्त के सामने हैं तो कोई डायरेक्टर बैक डेट पर इस्तीफा दिखा रहा है तो कोई कह रहा है कि सारी जिम्मेदारी डॉ सुनील कपूर के बेटे सिद्धार्थ कपूर की है।

इस बीच पर्दे के पीछे 15 करोड़ रुपए के उपकरण के बंदरबांट का खेल भी चल रहा है। जिसे बेचकर सभी कर्मचारियों का हिसाब-किताब कानूनी तौर पर आसानी से किया जा सकता है। भाई साहब, संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, कानून की रक्षा और जनवादी अधिकारों पर गोल-गोल भाषण देना और बात है और इसका पालन करना और बात है। आपलोग कहीं से पत्रकार नहीं हो सकते।

आप कारोबारी हो, जिसके कई चेहरे हैं। इनके चैनल रैकेट के कारोबार का पूरा खुलासा जल्द ही करुंगा। ताकि इनके चेहरे से नकाब उतर सके। काला काला और सफेद सफेद साफ-साफ दिख सके।

लेखक संजय कुमार स्वराज एक्सप्रेस चैनल में कार्यकारी संपादक हुआ करते थे।

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