‘ZEE MP-CG’ के पत्रकार कन्हैया ने एडिटर दिलीप तिवारी का असली चेहरा प्रबंधन को दिखाया, पढ़ें पत्र

जी मीडिया समूह के प्रतिभाशाली टीवी पत्रकार हैं कन्हैया शुक्ला. इन्होंने करियर की शुरुआत ही जी मीडिया से की थी. पहले वो नोएडा में असाइनमेंट पर थे. बाद में उनके टैलेंट को देखते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ भेजा गया. रायपुर में कन्हैया ने जमकर काम किया और सबको अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. प्रबंधन ने भी कन्हैया को समुचित सम्मान और शाबासी से नवाजा.

लेकिन कुछ ऐसे लोग जिन्हें दूसरों की प्रतिभा, तरक्की, मेहनत कभी नहीं भाती, उन्होंने कन्हैया को काटने की कोशिश शुरू कर दी. कन्हैया शुक्ला को तरह तरह से परेशान किया जाने लगा. उनके बारे में नकारात्मक फीडबैक दिया जाने लगा. यहां तक कि लखनऊ के मूल निवासी कन्हैया को घर जाने के लिए छुट्टी तक देने में राजनीति होने लगी.

इस सबसे आजिज कन्हैया ने चैनल के भीतर के हालात को लेकर प्रबंधन को एक पत्र लिख दिया. यह पत्र वैसे तो जी एमपी-सीजी के एडिटर दिलीप तिवारी को संबोधित है लेकिन इसे प्रबंधन के हर शख्स के पास भेजा गया है ताकि असली हालात से सभी लोग वाकिफ हो सकें. इस पत्र की इन दिनों जी मीडिया ग्रुप में काफी चर्चा है. आप भी पढ़ें….

ZEE MP-CG के एडिटर महोदय माननीय दिलीप तिवारी जी के बारे में …

सर,

आपको 19 साल हो गए ZEE में काम करते हुए… बड़ा अहम है आपको की आप जो चाहोगे कर लोगे… ZEE का मैनेजमेंट सिर्फ आपकी बात सुनेगा और आप जिसको चाहोगे उतना परेशान कर लोगे… तो सुनिए आप न तो अच्छे एडिटर हैं न ही अच्छे इंसान… पता नही क्यों, कोई किस लालसा में आपको बर्दास्त करता है… जो लोग करते हैं जरूर उनकी मजबूरी होगी जैसा कि आप डराते हो या आपका व्यवहार है… पता नही कितनों ने आपकी वजह से संस्था छोड़ दिया…. पर आपका धन्यवाद… आप के साथ काम करके मुझे ये तो अहसास हो गया है कि काम भले न करो, बेरोजगार ही रहो, पर किसी गंदे सोच वाले इंसान के साथ कभी काम न करो… मैं जिंदगी भर आपसे नफरत करूँगा कि आप के साथ भी मैंने काम किया… आज मैं ये बात इसलिए कह रहा हूँ कि मेरे जैसे पता नहीं कितनों ने आपको बर्दास्त किया है पर आपका कुछ नहीं हुआ क्योंकि आपको घमंड है कि आप 19 साल से काम कर रहे हो और चेयरमैन सर आपके बहुत करीब हैं… आप डरते हो और जलते हो दूसरे की काबलियत से और सोचते हो कि कहीं इसके काम की तारीफ न हो, नहीं तो मुझे कौन बधाई देगा…

इन्दौर में 30 अगस्त को जो इवेंट हुआ ” एक शाम देश के नाम ” वो बहुत शानदार प्रोग्राम हुआ जो मैंने मैनेज किया ..जिसकी तारीफ सिर्फ आप को छोड़ के सबने की है ..सिर्फ आपने नही की क्यों कि आप के मुह से निकल ही नही सकता किसी के लिए भी प्रोत्साहन के शब्द ..आपको बता दूं कि और दूसरे चैनल के लोगों ने तारीफ की है ..बहुत ही शानदार किया आपने कार्यक्रम ..इस इवेंट में आपके सामने गुंजाराव सर , मनीष सेठ सर , मुनीश शर्मा सर , और जसविंदर सर भी थे ..जिन्होंने तारीफ की है ..और मैं खुद अपनी प्रंशसा करता हूँ अब मेरा कांफिडेंस और बढ़ गया है कि ये भी मैं कर सकता हूँ ….इस बार 1000 लोग आए अगली बार तो मैं 5000 लोगों को भी बुला के कर सकता हूँ और इससे भी बेहतर ..आपको इतनी नफरत हो गई इस इवेंट की सफलता से की आप परेशान करने लगे और मेरा ट्रांसफर छत्तीसगढ़ कर दिया …मेरी तक़दीर आपके भीख पर नही चल रही न ही आप बदल सकते हो…

मुझे लोग चाहते हैं तो ये मेरा व्यवहार है ..आपको कोई पसंद नही करता क्यों कि आप की सोच घटिया है ..आप ऐसे ही रहोगे हमेशा ..आप अपनी सोच और अपना तरीका अपने पास रखो आपके काम आएगा और जिसको परेशान करना है करो ..मुझे दुख है कि मैं एक ऐसे इन्शान की वजह से संस्था छोड़ रहा हूँ जिसको न कोई पसंद करता है न ही काम करना चाहता है ..इस इवेंट के लिए जो तारीफ लोग कर रहे हैं वो मुझे नही जानते सम्पादक जी ..वो आपकी तारीफ कर रहे हैं कार्यक्रम बहुत अच्छा था ..आज तक आपके इमेज के लिए मैंने क्या – क्या नही किया ..जैसे आप ऊपर मैनेजमेंट में ढ़िढोरा पीट सको की सर देखो ये हो गया काम …

आपकी शिकायत ये है कि कार्यक्रम में कलेक्टर नहीं आया ..वहां सांसद , मंत्री , विधायक , सेना के ऑफिसर , फौज के जवान , महापौर, कमिश्नर, डीआईजी, पुलिस के सभी आलाधिकारी, पुलिस के जवान, BSF के आईजी, डीआईजी और पूरी BSF के जवान इसके अलावा बहुत से लोग आए ..ये नहीं दिखा आपको..? ..कमियां तो आपमे बहुत हैं सर ..सिर्फ कलेक्टर नहीं आया और आपने मेरी क्षमता पर सवाल उठा दिए ..और फिर से मुझे छतीसगढ़ ट्रांसफर कर दिया..पांच साल में सिर्फ छत्तीसगढ़ से यहां फिर यहां से वहां ..और ये कह रहे कि नहीं जाओगे तो रिजाइन दे दो ..

ऐसे तो आपके कहने पर कोई नहीं आता न ही आपको कोई जानता है जब तक हम न बताएं कि ये हमारे एडिटर सर हैं …आपने तो भोपाल में कई ऐसे कार्यक्रम किये जिसमें मुख्यमंत्री को आपने आमंत्रित उनके घर जा के किया ..और मुख्यमंत्री नहीं आये ..? तो आप क्यों नहीं रिजाइन दे देते..? उसमें तो कार्ड में, चैनल में प्रोमो तक में मुख्यमंत्री के आने के लिए कहा गया था ..आप भूलते बहुत जल्दी हैं… बहुत सी बात ऐसी हैं जो शायद मुझे नहीं लिखना चाहिए कि आपकी इज्जत बनाने के लिए मैंने क्या – क्या लाइन-अप किया है जिससे मेरे एडिटर का सम्मान ऊपर मैनेजमेंट में बना रहे और मैनेजमेंट आपकी क्षमता पर सवाल न करे कि एडिटर हो और ये नहीं करवा सकते .. आपकी तारीफ करें ..

आज ये बात इस लिए बोल रहा हूँ कि अगर आज नहीं बताऊंगा सबको.. तो जिंदगी भर अफ़सोस रहेगा मुझे ..की आप की सोच और ज़िद जीत गई और मैं इतना सब करके भी ठगा महसूस करूँगा .. आज इस लेटर के बाद मुझे सकून है बहुत दिन से मैं मानसिक दबाव झेल रहा हूँ ..मेरी तारीफ कर तो नहीं सकते… आपने तो इवेंट में आई सिंगर जिसने पूरे प्रोग्राम में समां बांध दिया, आपने उसको और उसके पिता को गंदी गाली दी ..क्योंकि उसने अच्छा गाया…आप से यही उम्मीद की जा सकती है ..

सर इन्दौर में हुआ इवेंट “एक शाम देश के नाम” बहुत ही शानदार था और गर्व है मुझे अपने आप पर…मुझे आपकी तारीफ़ की उम्मीद कभी न थी न है ..मुझे पता है कि मेरे लिए आपकी वजह से ZEE संस्था में हमेशा के लिए दरवाजे बंद मिलेंगे पर मुझे सकून है कि मैंने ये भी कर दिखाया कि आपके बारे में जो सभी सोचते हैं उसको सबको बता दिया …मैं हार नहीं सकता, आप जैसे सोच वाले इंसान से ..मैंने खुद अपना इस्तीफ़ा दे दिया है क्योंकि आपकी इस बीमारी का कोई ईलाज नहीं है क्योंकि कल को आप मेरा रिपोर्ट कार्ड खराब करके निकाल दो तो मैं आपको ये मौका नहीं दे सकता…पर जरा आप सोचना की आपके सीनियर आपके जैसे होते तो आप कहाँ होते ..?

इवेंट की कुछ फोटो अटैच की हैं दिलीप सर मेल में आपके लिए ..जरूर देख लीजिएगा क्योंकि इवेंट के दिन आपने पीछे देखा नहीं..और आज तक जितने इवेंट आपने किये उसकी सब की तस्वीर निकाल के मिला लीजिएगा …शायद आप कुछ तो समझ सकें ..कार्यक्रम के दिन आप सिर्फ मंत्री जी के आगे-पीछे आवभगत में ही व्यस्त थे… आप गोविंदा और मेरी गलती निकालते रहे ..गोविंदा और मैंने जो किया है वो कोई कर भी नहीं सकता ..आप इंदौर ऑफिस में डेस्क से कैमरामैन को फोन करवा रहे हैं कि कन्हैया ऑफिस में बैन है, आना नहीं चाहिए ..मुझे ऑफिसियल ग्रुप से डिलीट करवा दिया ..गजब, पता नही था कि 19 साल में कंपनी आपकी हो गई है ..

धन्यवाद आपका संपादक महोदय … मैंने एक अच्छी संस्था खो दी आपके चलते ..


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Comments on “‘ZEE MP-CG’ के पत्रकार कन्हैया ने एडिटर दिलीप तिवारी का असली चेहरा प्रबंधन को दिखाया, पढ़ें पत्र

  • दिलीप तिवारी एक नंबर का बदमाश व्यक्ति है उसके पास कोई योग्यता नहीं है इसलिए योग्य व्यक्तियों को वह संस्थान से बाहर करवाता है Zee News का प्रबंधन ही मुर्ख है तो इस तरह के घटिया आदमी को अपने साथ रखता है

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  • कन्हैया शुक्ला जी आप इकलौते पत्रकार नहीं हैं जिसके साथ ऐसा करने वाले तथाकथित (कूपमंडूप दोगला निकम्मा चापलूस स्तरहीन और दो कौड़ी का संपादक) ऐसा कर रहा है यह हर संस्थान में हर मेहनत करने वाले पत्रकार के साथ हो रहा है। संस्थानों और उनके मालिकों को अपनी आस्तीन में पल रहे ऐसे सपोलों का फन समय रहते कुचलना होगा। वार्ना संस्थानों का बेड़ा ग़र्क होना तय है। आपकी मेहनत और जज्बे को सलाम आप अपना काम करते रहिए। महाकाल उचित समय में निश्चित न्याय करेंगे।

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  • मनीष सोनी says:

    ये शुरू से हरामी रहा है। पंडितो के नाम पर कलंक है साला।
    कितनो का कैरियर बर्बाद किया ,ये कुत्ते की मौत मरेगा।
    इसकी जांच हो जाये तो इसकी असलियत सामने आएगी।

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