हमारे चारों ओर उंची जाति के लोग रहते हैं, वे नहीं चाहते थे कि हम उनके बीच रहें

केरल में निर्भया जैसी दरिंदगी से उबाल, घटनास्थल से लौटी महिलाओं की टीम ने किया की खुलासा

-संदीप ठाकुर-

नई दिल्ली। दुराचार और जघन्य हत्या की रोंगटे खड़े कर देने वाली यह
वारदात दिल्ली के निर्भया कांड से भी कहीं ज्यादा वीभत्स और दिल दहला
देने वाली है। यह केवल एक गरीब मेहनती और महत्वाकांक्षी दलित लड़की की
कहानी नहीं है बल्कि समाज के दबे कुचले उन हजारों-लाखों लड़कियों के
अरमानों की भी दास्तान है जो तमाम मुश्किलों के बावजूद न सिर्फ कुछ कर
गुजरने की चाह रखतीं हैं, परंतु चाहतों के असली जामा पहनाने का हौसला
लेकर दिन रात मेहनत करतीं हैं। लेकिन समाज के दबंगों को उनकी यह तरक्की
हजम नहीं होती।

तारीख 28 अप्रैल, 2016
समय: दोपहर 1.30 से 5 बजे के बीच
जगह: केरल के एर्नाकुलम जिले के पेरुमबावूर तालुक्का का गांव रायमंगलम्

सरकारी लॉ कॉलेज की छात्रा माशा (परिवर्तित नाम) अपने एक कमरे के घर में
अकेली थी। अचानक हथियारों से लैस कुछ अज्ञात लोग घर में घुस आए और
दलित वर्ग से संबंध रखने वाली 30 साल की माशा को दबोच लिया। उसके साथ
बलात्कार किया। दुराचारियों ने उसके जननांग में धारदार हथियार डाल कर
घुमाया जिससे उसका गर्भाशय और आंतें कट गईं। उसके शरीर पर धारदार हथियार
से 30 गहरे वार किए गए। इनमें से एक वार तो 13 सेंटीमीटर गहरा था। उसके
सिर पर किसी ठोस वस्तु से प्रहार भी किया गया था। इतना ही नहीं, खून में
सनी लाश का कपड़े से गला भी घोंटा गया था। यह खुलासा युवती के
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है।

गरीब, दलित और वंचित परिवार की युवती से साथ हुई इस वारदात ने इलाके में
थोड़ी सी हलचल तो मचाई लेकिन पुलिस की कथित लापरवाहीपूर्ण भूमिका के
कारण मामला दब सा गया है। लेकिन इस मामले की गंभीरता के चर्चे जब दिल्ली
के राजनीतिक गलियारों तक पहुंचे तो यहां से मामले की सच्चाई जानने के
लिए नेताओं, समाजसेविका-सेविकाओं के दलों का जाना शुरू हुआ। इन्हीं में
महिलाओं का एक दल भी जांच के लिए गया था जिसका नाम है जिया (ग्रूप ऑफ
इंटेलेकचुअल एंड एकेडीमिशियन)। जीया की चेयरपर्सन मोनिका अरोड़ा, सदस्य
ललिता निझावन, सर्जना शर्मा और डॉ प्रेरणा मल्होत्रा ने घटनास्थल से
लौट कर मामले की जानकारी देते हुए इस वीभत्स हत्याकांड की जांच सीबीआई
को सौंपे जाने की मांग को लेकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने की
बात कही। उन्होंने बताया कि मीशा का एक कमरे का मकान नहर के किनारे है
जिसमें न तो शौचालय है और न ही बाथरुम। खाते पीते लोगों के बीच मीशा
अपनी परित्याक्ता मां राजेश्वरी के साथ रहती थी। राजेश्वरी दाई का काम
करती है। उसने मीशा को उंची शिक्षा दिलाई। मीशा ने कोट्टायम
विश्वविद्यालय से एम.ए किया था और सरकारी कॉलेज से लॉ कर रही थी। मीशा
की छोटी बहन 16 साल की उम्र में ही अपने प्रेमी से साथ भाग गई थी।

जांच दल के सदस्यों को आसपास के लोगों ने बताया कि जीवन की लड़ाई
अकेले लड़ते लड़ते राजेश्वरी कुछ तल्ख स्वभाव की हो गई थी। इसलिए उसके
जुबान की मिठास कहीं गुम हो गई थी। अक्सर वह छोटी छोटी बातों पर भी
लड़ झगड़ जाती थी। इतनी बड़ी घटना हो गई और किसी ने कुछ सुना ही नहीं?
सवाल के जवाब में स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना वाले दिन दोपहर में
मीशा के घर से चीख चिल्लाहट की आवाजें आ तो रही थी लेकिन किसी ने उस पर
ध्यान नहीं दिया। इसका जवाब राजेश्वरी व दीपा ने दिया। उन्होंने बताया
कि हमलोग दलित हैं और हमारे चारों ओर उंची जाति के लोग रहते हैं। वे
नहीं चाहते थे कि हम उनके बीच रहें। कई बार हमें धमकी भी मिल चुकी
है, इलाके से कहीं और जा कर रहने की। दीपा ने बताया कि करीब तीन माह
पूर्व मोटर सायकिल सवारों ने मेरी मां को टक्कर मारी थी जिसमें उसे
बहुत चोट आई थी। घटना की सूचना पुलिस को भी दी थी लेकिन कोई एक्शन
नहीं हुआ था। यह घटना केरल में चुनावी मुद्दा भी बना है। जिस इलाके में
मीशा रहती है, वहां विगत 25 बरस से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट का कब्जा है।
पंचायत स्तर से लेकर सांसद तक, सभी कम्युनिस्ट हैं। ये पार्टी अभी
विपक्ष में है। दल की सदस्या प्रेरणा के मुताबिक मृतका की छोटी बहन दीपा के
कहती है कि इस घटना में उसके पड़ोस में रहने वाला कार पेंटर व आटो चालक
शामिल हो सकते हैं। पुलिस मामले की जांच गंभीरता से करे तो अभियुक्त
पकड़े जा सकते हैं। लेकिन इनदिनों केरल में चुनावी मौसम है। पुलिस
प्रशासन उसी में व्यस्त हैं। नई सरकार बनने के बाद कुछ हो तो हो।
मोनिका अरोड़ा ने कहा कि हम इस मामले को छोड़ेंगे नहीं। यह कोई आम
आपराधिक वारदात नहीं है। यह पूरे स्त्री समाज की असिमता और सम्मान से
जीने के हक का प्रश्न है। स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन
उससे कोई भी संतुष्ट नहीं है। इंतजार है पूरे परिदृश्य में सीबीआई के
आने का। देखना है कि जीया मामले को सीबीआई तक पहुंचाने में सरकार पर
दबाव बनाने में सफल होती है या नहीं।

पत्रकार संदीप ठाकुर की रिपोर्ट. संपर्क: sandyy.thakur32@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Comments on “हमारे चारों ओर उंची जाति के लोग रहते हैं, वे नहीं चाहते थे कि हम उनके बीच रहें

  • Desh, khas ker JNU ka Kanhaiyya, Kejriwal, Communist aur Bhrasht Congressi Netaon se poochhna chahiye ki Inka dhong kab tak chalega? kyon nahin in logon ne wahan jaker Dharna-Pradarshan kiya? Modi ka putla kyon nahin foonka? Lekin kaise Foonkenge….! kyonki wahan ki sarkaar to BJP nahin hai. Kanhaiyya kumar ke Chahaon ki aur Congress ke Aajkal ke Judwa Bhai ki hai….! Waah re Desh-bhakt….!

    Reply
  • Ajeet dwivedi says:

    yeh ghatna bahut hi nindaniya hai ghatna ke jimmedaar log par kadi karwai ki jaye……par jis tarah se media main fashion ho gaya hai Har baat ke liye unchi jati ko jimedaar tahrana ye jatiwaad ko badawa deta hai…..Jaisa ki headline di gayi hai ki hamare charo aur unchi jati ke log rahte hai aur wo nahi chate ki ham unke beech rahe shirshak hi jatiwad ko perit karta hai….kisi bhi ghatna par jimmmedar log par kadi karwai karni chaiye parantu use jatiwaad aur kisi samaj se nahi joda jana chaiye.,,asharya hota hai jab samaj ka budhijivi kaha jane wala varg vishesh bhi is atna ko jatiwaad se jodta hai….please aap desh jodiye samaj ko jodiye apne najariye ko pariwartit kariye aur jatiwaad ki apni gandi rajniti aur jatiwaadi rahit samachar band kariye…….

    Reply

Leave a Reply to Ajeet dwivedi Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *