7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

जी हां. ये सच है. जो लोग चुप्पी साध कर बैठे हैं वे जान लें कि सात फरवरी के बाद आप मजीठिया के लिए अपने प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगे. सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल पूरे हो जाएंगे और एक साल के भीतर पीड़ित पक्ष आदेश के अनुपालन को लेकर याचिका दायर कर सकता है. उसके बाद नहीं. इसलिए दोस्तों अब तैयार होइए. भड़ास4मीडिया ने मजीठिया को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील उमेश शर्मा की सेवाएं भड़ास ने ली है.

( File Photo Umesh Sharma Advocate )

इस अदभुत आर-पार की लड़ाई में मीडियाकर्मी अपनी पहचान छुपाकर और नौकरी करते हुए शामिल हो सकते हैं व मजीठिया का लाभ पा सकते हैं. बस उन्हें करना इतना होगा कि एक अथारिटी लेटर, जिसे भड़ास शीघ्र जारी करने वाला है, पर साइन करके भड़ास के पास भेज देना है. ये अथारिटी लेटर न तो सुप्रीम कोर्ट में जमा होगा और न ही कहीं बाहर किसी को दिया या दिखाया जाएगा. यह भड़ास के वकील उमेश शर्मा के पास गोपनीय रूप से सुरक्षित रहेगा. इस अथारिटी लेटर से होगा यह कि भड़ास के यशवंत सिंह आपके बिहाफ पर आपकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ सकेंगे. इस पूरी प्रक्रिया में आपका नाम कहीं न खुलेगा न कोई जान सकेगा. दूसरी बात. जो लोग अपने नाम पहचान के साथ लड़ना चाहते हैं, उससे अच्छा कोई विकल्प नहीं है. उनका तहे दिल से स्वागत है. ऐसे ही मजबूत इरादे वाले साथियों के साथ मिलकर भड़ास मजीठिया की आखिरी और निर्णायक जंग सुप्रीम कोर्ट में मीडिया हाउसों से लड़ेगा.

बतौर फीस, हर एक को सिर्फ छह हजार रुपये शुरुआती फीस के रूप में वकील उमेश शर्मा के एकाउंट में जमा कराने होंगे. बाकी पैसे जंग जीतने के बाद आपकी इच्छा पर निर्भर होगा कि आप चाहें भड़ास को डोनेशन के रूप में दें या न दें और वकील को उनकी शेष बकाया फीस के रूप में दें या न दें. यह वैकल्पिक होगा. लेकिन शुरुआती छह हजार रुपये इसलिए अनिवार्य है कि सुप्रीम कोर्ट में कोई लड़ाई लड़ने के लिए लाखों रुपये लगते हैं, लेकिन एक सामूहिक लड़ाई के लिए मात्र छह छह हजार रुपये लिए जा रहे हैं और छह हजार रुपये के अतिरिक्त कोई पैसा कभी नहीं मांगा जाएगा. हां, जीत जाने पर आप जो चाहें दे सकते हैं, यह आप पर निर्भर है. बाकी बातें शीघ्र लिखी जाएगी.

आपको अभी बस इतना करना है कि अपना नाम, अपना पद, अपने अखबार का नाम, अपना एड्रेस, अपना मोबाइल नंबर और लड़ाई का फार्मेट (नाम पहचान के साथ खुलकर लड़ेंगे या नाम पहचान छिपाकर गोपनीय रहकर लड़ेंगे) लिखकर मेरे निजी मेल आईडी yashwant@bhadas4media.com पर भेज दें ताकि यह पता लग सके कि कुल कितने लोग लड़ना चाहते हैं. यह काम 15 जनवरी तक होगा. पंद्रह जनवरी के बाद आए मेल पर विचार नहीं किया जाएगा. इसके बाद सभी से अथारिटी लेटर मंगाया जाएगा. जो लोग पहचान छिपाकर गोपनीय रहकर लड़ना चाहेंगे उन्हें अथारिटी लेटर भेजना पड़ेगा. जो लोग पहचान उजागर कर लड़ना चाहेंगे उन्हें अथारिटी लेटर देने की जरूरत नहीं है. उन्हें केवल याचिका फाइल करते समय उस पर हस्ताक्षर करने आना होगा.

हम लोगों की कोशिश है कि 15 जनवरी को संबंधित संस्थानों के प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा की तरफ से लीगल नोटिस भेजा जाए कि आपके संस्थान के ढेर सारे लोगों (किसी का भी नाम नहीं दिया जाएगा) को मजीठिया नहीं मिला है और उन लोगों ने संपर्क किया है सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए. हफ्ते भर में जिन-जिन लोगों को मजीठिया नहीं मिला है, उन्हें मजीठिया के हिसाब से वेतनमान देने की सूचना दें अन्यथा वे सब लोग सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने को मजबूर होंगे.

हफ्ते भर बाद यानि एक या दो फरवरी को उन संस्थानों के खिलाफ याचिका दायर कर दी जाएगी, सुप्रीम कोर्ट से इस अनुरोध के साथ कि संबंधित संस्थानों को लीगल नोटिस भेजकर मजीठिया देने को कहा गया लेकिन उन्होंने नहीं दिया इसलिए मजबूरन कोर्ट की शरण में उसके आदेश का पालन न हो पाने के चलते आना पड़ा है.

और, फिर ये लड़ाई चल पड़ेगी. चूंकि कई साथी लोग सुप्रीम कोर्ट में जाकर जीत चुके हैं, इसलिए इस लड़ाई में हारने का सवाल ही नहीं पैदा होता.

मुझसे निजी तौर पर दर्जनों पत्रकारों, गैर-पत्रकारों ने मजीठिया की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ने के तरीके के बारे में पूछा. इतने सारे सवालों, जिज्ञासाओं, उत्सुकताओं के कारण मुझे मजबूरन सीनियर एडवोकेट उमेश शर्मा जी से मिलना पड़ा और लड़ाई के एक सामूहिक तरीके के बारे में सोचना पड़ा. अंततः लंबे विचार विमर्श के बाद ये रास्ता निकला है, जिसमें आपको न अपना शहर छोड़ना पड़ेगा और न आपको कोई वकील करना होगा, और न ही आपको वकील के फीस के रूप में लाखों रुपये देना पड़ेगा. सारा काम आपके घर बैठे बैठे सिर्फ छह हजार रुपये में हो जाएगा, वह भी पहचान छिपाकर, अगर आप चाहेंगे तो.

दोस्तों, मैं कतई नहीं कहूंगा कि भड़ास पर यकीन करिए. हम लोगों ने जेल जाकर और मुकदमे झेलकर भी भड़ास चलाते रहने की जिद पालकर यह साबित कर दिया है कि भड़ास टूट सकता है, झुक नहीं सकता है. ऐसा कोई प्रबंधन नहीं है जिसके खिलाफ खबर होने पर हम लोगों ने भड़ास पर प्रकाशित न किया हो. ऐसे दौर में जब ट्रेड यूनियन और मीडिया संगठन दलाली के औजार बन चुके हों, भड़ास को मजबूर पत्रकारों के वेतनमान की आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए एक सरल फार्मेट लेकर सामने आना पड़ा है. आप लोग एडवोकेट उमेश शर्मा पर आंख बंद कर भरोसा करिए. उमेश शर्मा जांचे परखे वकील हैं और बेहद भरोसेमंद हैं. मीडिया और ट्रेड यूनियन के दर्जनों मामले लड़ चुके हैं और जीत चुके हैं.

दुनिया की हर बड़ी लड़ाई भरोसे पर लड़ी गई है. ये लड़ाई भी भड़ास के तेवर और आपके भरोसे की अग्निपरीक्षा है. हम जीतेंगे, हमें ये यकीन है.

आप के सवालों और सुझावों का स्वागत है.

यशवंत सिंह
एडिटर
भड़ास4मीडिया
+91 9999330099
+91 9999966466
yashwant@bhadas4media.com


मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एडवोकेट उमेश शर्मा द्वारा लिखित और भड़ास पर प्रकाशित एक पुराना आर्टकिल यूं है…

Majithia Wage Board Recommendations : legal issues and remedies

 

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Comments on “7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

  • manmohan shrivastav says:

    यशवंतजी की इस सूचना को पढ़ने वाले सभी साथियों से निवेदन है कि अखबारों के शोषण के खिलाफ कमर कस लें। ये मौका फिर नहीं आएगा। मजीठिया के लिए धर्मयुद्ध शुरू हो गया है आगे आएं।

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  • Kashinath Matale says:

    Dear, Yashwant Jee,
    Bar Bar Majithia Wage Board for newspaper employees ki news publish karneke liye bahot bahot dhanyawad. Majithia WB ki news abhi bhadas4media.com par dikhti hai.
    Maine bahot bar comment kiya hai, ki jaha jaha MWB ka implemetation huya hai, Uske hisab se salary kaisi honi chahie. Parntu abhitak Umesh Sharma ji ne kuchh nahi bataya. DA kitne point ka milna chahiye. (167 ka base or 189 base hona chahiye, Annual increment after maximum revised scale ke bab milna chahiyae ya nahi. DA ka calculation ke liye Variable Pay Basic me add karna chahiye ya nahi. ETC.
    Maine bhadas4media.com par bhi bahot kuchh likha hai, parntu abhitak sahi javab kisine bhi nahi diya. Existing emolulemet protect hona chahiye ya nahi. DA ka calculation 1July 2010 se karna hai ya 11-11 2011 se karna hai. Notification ke hisab se DA 1July 2010 se calculate karna chahiye, parntu majority of managements 11-11-11 (189 base ) banakar DA calaculate kar rahe hai.
    Yehi sawal ke jawab ya clarification maine mange the, taki hum age ki ladhai SC me Ladh sake.
    Tribune, Dainik Bhaskar aur jaha jaha MWB implement huya hai un employees ke salary slip bhadas4meddia.com ya kgmmatale@gmail.com par post ke liye bola tha, taki implementation ke bareme jyo confusion hai, vah dur ho sake.
    Please post the salary slip any employee who are geting the Salary as per MWB. Ya please post the method step by step how to calculate the Salary as per MWB for any old non-journalist employee (Factory/Administrative Staff giving example as BAsic + VDA+ IR @30% existing emoluments) and after Fixation new Basic DA, VP HRA Tr A etc.
    So more employees may ready for legal fight in SC.
    Thanks

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  • Sir,
    Mein toh gair patrkar hu.par mein ye kehna chunga ki
    patrkaro ki asli patrkarita siddh karne ki bari aaye hai.
    is se pata chalega ki kon asli patrkar hai.aur kon bas aise hi patrkarita karte baithe hai.Asali youdh to ab hai.Agar ye youdh nahi jeet pate to patrakarita chod dena chaye.

    It’s time to prove to I am real journalism

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  • Maina suna hai ki jis ne majithia lene k liye patrika managment se baat ki hai uska transfer karne or us Jhuti FIR karne ki dhamki de rahe hai Sath hi Rajsthan patrika main aisa ek apne karam chari k sa kar diya hai use kolkatta transfer bhi kar diya hai us per FIR KAR chori ka arop laga kar Uska future kharab karne ki dhamki de di hai. Or aram chariyon ko isse sabak lene ke liye kah diya gaya hai

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  • purushottam asnora says:

    मजेठिया वेतन बोर्ड की लडाई लडने के संकल्प के लिए भडास को बधाई। यशवन्त साहब! मीडिया कर्मियों का मनोबल इतना गिर गया है कि माननीय सर्वोंच्च न्यायालय की जबरदस्त पहल का लाभ भी वे नही ले पा रहे हैं। हमारे संगठन जो कई -कई नामों से हैं पत्रकारों को यह भरोसा नही दिला पा रहे हैं कि अपना हक मांगने की एवज उनका उत्पीडन नहीं होगा।
    आपने सामने आने या न आने के विकल्प के साथ मीडियाकर्मियों को जो अवसर दिया है, उसके लिए साधुवाद, अब क्या दिक्कत है सभी पत्रकार-गैर पत्रकारों को मजेठिया बोर्ड की लडाई लडने में। लडेंगे जीत-हार तभी होगी, दुबके रहने से तो हार ही हार होगी।

    Reply
  • मित्रो
    , भड़ास4 मीडिया मे मजीठीया पाने के लिए जो रास्ता चुना है वो दाद के काबील है।अगर अाप अकेले लड़ने से ड़रते है, अापको लड़ने का तरीक मालुम नहीं है,पैसा नहीं है,मेनेजमेन्ट के सामने नहीं अाना है तो भड़ास के साथ जुड़ना एकदम योग्य रास्ता है। हां अापको शायद ड़र हो की वे लोग सच कह रहै है या नहीं ,कहीं हमारे पैसे का गबन तो नही हो जायगा ,कहीं ये लोग फर्जी तो नहीं है तो अाप अापके सुत्रों द्वारा जरुरी बातों को अवश्य परख लें और विश्वास ,संतोष होने पर कंपनी/अखबार वालों से ,नोकरी जाने का भय त्याग कर उनके साथ जुड़जाए। कंपनी के पास कीसीको नोकरी से नीकाल देने का अधिकार मजीठीया के कारण नहीं रहा है वो अापको ड़रा,धमका कर या लोभ -लालच से ही नीपट सकते है तो ड़रो नहीं लड़ो।
    मैं भड़ास की ना तरफदारी करता हुं ना मेरा यहां गुजरात में उससे कोई सरोकार है मैं अापकी तरह एक मीडिया कर्मचारी तो चाहता हुं बस मालिकों से हमारा हक़ हम मांगे और लड़ाई लड़ें,मैंने मेरे साथियों के साथ हाईकोर्ट में केस दाखिल कर ही दिया है। समय समय पर समाचार,अपडे़ट देता रहुंगा

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  • मर्द बनें says:

    आखिरी मौका मर्द बनने का

    दोस्तों यह आखिरी मौका है अपना अधिकार पाने और अपना स्वाभिमान बचाने का.
    अगर आप गिर कर उसी तरह जिंदगी जीने का सोच रहे हैं जिसमें आपके लिए माँ पिताजी के द्वारा उठाए गए कष्ट और आँसू की कोई कीमत नहीं है, बहन की शादी के लिए मदद करने की फूटी कौड़ी नहीं है और शर्म से चेहरा नहीं मिला पाकर भी खुश हैं, पत्नी के बदन ढंकने के लिए कपड़े खरीदने को पैसे नहीं है, बच्चे की परवरिश के लिए जद्दोजहद करते हुए रोजाना ताना सुनना चाहते हैं तो फिर ऐसी नामर्दगी के लिए धन्यवाद.
    वरना इस मौके को मत गंवाएं क्योंकि मजीठिया से ना सिर्फ आपकी उम्मीदें जुड़ी हैं बल्कि आपका और आपके परिवार का एक सुनहरा भविष्य भी जुड़ा है.

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  • MP

    उपरोक्त बात एकदम सत्य है । लोगों को नोकरी जाने का ड़र लगता है जो एकदम बेवजह है क्योंकी एकदम साफ बात यह है मजीठीया पर कोर्ट का अघ्यादेश लागु होने के बाद के कोई भी अखबार मालिक कीसी भी कर्मचारी को वो चाहे नया हो ,पुराना हो ,कोन्ट्राक्ट पर हो या टेम्पररी हो उसे अखबार / कंपनी सीर्फ ट्रान्सफर कर सकती है कीसी भी सुरत में उसे नोकरी से नीकाल नहीं सकती है। हां कंपनी अपनी बात मनवाने के लिए अाप के साथ शाम,दंड,दाम,भेद का प्रयोग करके अापसे माफीनामा या रीजाईन लिखवाएगी और अाप उस समय उनकी बात मान लोगे तो ही फसोगे बाकी अपनी बात पर कायम रहोगे और कानुनी कार्यवाही करोगे तो कंपनी को झुकना ही पडे़गा ,कंपनी अापसे समाधान करने अाएगी परंतु इसके पहेले अापके समय रहेते हुए कंपनी /अखबार के खिलाफ कोर्ट कार्यवाही जरुर करनी होगी।
    बस सबको मनमें से ड़र दुर करके सामने पडना है, सोचो सामना करोगो तो जीवन भर का सुख मिलेगा नहींतो जीवनभर की शांति प्राप्त होगी अगर कंपनी अापको नीकालनी की बात करेगी तो फीर उसे बहुत कुछ अापको सीनीयारीटी के हिसाब से भुगतान करना पडेगा हमारे दोनो हाथो में लड्ड है। बस डर छोडे़ं और जंग शुरु करें।
    अाप यह कतई ना समझना मै अापको सलाह दे रहा हुं मैंने और मेरे साथीयों ने हमारे पुराने साथी जो कंपनी/अखबार छोड़ कर गए है उन्हें साथ ले कर ठोस काम कीया है जो मैं अापको समय समय पर यहां बताता रहुंगा क्योंकी हम भी कुछ ठोस परिणाम ,काम बनने के इन्तजार मेें हैं।
    अाशा है अाप नोकरी जाने का भय छोड़ कर तुरंत कानुनी कारवाइ करोंगे।

    Reply
  • जागो राजस्थान पत्रिका सम्पादकीय विभाग के नपुंसक हिजड़ो जागो अभी भी समय इस गद्दार चोर भृष्ट अय्याश दोगले मै ही राधा मै कृष्ण के भूतो न भविष्यत् रचनाकार डा गद्दार गुलाब कोठारी के खिलाफ अंतिम जंग छेद दो बरना ये साला हरामखोर रांडवाज दो कोडी आदमी एक पैसा भी नहीं देगा
    भड़ास के साथ जुड़कर अपना हक़ मांगने मैं कोई बुराई नहीं इस हरामजादे कुत्ते आप लोगो के साथ कितना अत्याचार किया अगर आप लोगो के अन्दर जरा भी स्वाभमान के एक बी बून्द हैं तो बस अपने लक्ष्य पर लगजाओ ये साला अपने आप आपके तलवे चांटे को तैयार होगा बरना हरामखोर एक पैसा भी नहीं देगा
    एक पुराने साथी होने के नाते हमारी सलाह फिर अगर आप गुलाम बनकर जीना चाहते हो तो आप स्वतंत्र हैं ये सेल बी आम डब्ल्यू मई घूमगे और आप ज्यादा से ज्यादा एक मोटर साइकल से ज्यादा नहीं खरीद पायोगे हा अप भी कर सकोगे लकिन िकसले लयेगे आप को इस गुलाब कोठारी के तरह भृष्ट ऐयास चोर बनना पड़ेगा
    भगवन आप का भला करे अभी भी समय जागो बही लोगो जागो

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  • himanshu111 says:

    #Kashinath Matale
    Kashinath ji pehle aap apni salary slip share kariye ta ke aapko koi bata sake ke kahan problem hai. Aur doosre logo ko bhai pata chale kaise calculation ho rahi hai. Aap khud to salary slip share kijeye. Phir main tribune ki karta hoon.
    Himanshu
    Chandigarh

    Reply
  • Kashinath Matale says:

    Dear Himanshu jee Namaskar

    17th June 2014 ko Bhadas4media.com par sabse pahale maine apni aur PTI ki salary slips post ki hai. s par comments bhi hai. Heading hai ….. Majithia Wage Borad ke implementation me uniformity nahi hai.

    You read on Google as bhadas4media.com Kashinath Matale, will get all details that posted myself at time to time.
    Dear Hinamshu Jee in the said salary slip of myself Rs 2968/- paid as Other Allowance means the arrears for the Month on April 2014, because Hitavadaa implemented the MWB late one month and arrears given of that month.

    Thanks and Regards

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  • prem.mishra says:

    jabalpur patrika ke sampadak aalok mishra ne kah diya hai ki ve veerendra rajak. manoj dixit jaison ko bharibharkam ven dilwa denge. baki sabhi to bhadve hain. kisi ki himmat nahi hai ki aawaj utha saken. aalok mishra ne ye bhi kah rakha hai ki malik ne unhe freehand kar rakha hai. chahe jiski ma bahan karen.

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  • meediyaa reportar says:

    Sahara media ke hinjare patakaaron ab to jago. Ye mat sovho maalik jail ke andar hai aise me kort jaanaa gaddaaree hogee. Vah bilkul alg muddaa hai..

    Reply
  • meediyaa reportar says:

    Yah antim maukaa hai doston ..apne hak ke liye tho eekjut karo.. Ek jut Karen keep liye hard tareekaa apnaao SMS karo, phone karo , bhadas par adhik se adik kment karo..aakhir me mai bhee to yahee kar rahaa hu …

    Reply
  • meediyaa reportar says:

    Mmitra, sirf kament na padho..is abhiyaan ka hiss a bhee nano.. Ek saal se baraabar began nahee mil rahaa hai ,, 2 mash baad milaa vo aadhaa 6000 karaj lekar is abhiyaan ka hissaa banungaa naukree rahe yaa jaay..kisee ne kahàà hai “jab lohaa harm ho tabhee chat kare…

    Reply
  • mai divvya marathi maharastrase hu hamare yaha sab namard hai koi kuch nahi kar rahe hai bas aapasme hi bat karte hai mera band chuct chuka hai mai court jauga …bhalehi job jaye…

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  • Mat chuko chuhan….pattrakarita ke behtar kal ke liye…varna pidiyan barbad ho jayengi…..pattkari garima khatam ho jayegi….ab koi nai kah sakta ki hamare pas leader nai hai….

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  • jabalpur patrika ka sampadak aalok mishra hai to jurnalist badiya. Lekin uska EGO sb kachra kar deta hai. Isi EGO ke chakkar me aalok badnaam ho raha h. Chapluso ko paal ke khud ka, company ka, apne sathiyo ka nuksaan kar rha h. Agar ye aalok apne EGO aur chapluso k chakkar me pit bhi jaye to koi badi bat nhi.

    Reply
  • aisa kyo ho raha h ki sabki sunne wale patrakaro ki malik nahi sun rahe… aisa kyo h ki suvidhaye na dene ke bavjud sampadak/malik log behtar kaam chahte h… aisa kyo h ki malik apne karmchariyo ki kheriyat nahi puchhte, unki takleef me madad nai karte… aisa kyo h ki chaplus aage bad jate hai aur imaandar, mehnati piche rah jate h… aisa kyo hai ki haq dabane k bavjud maliko ko sharm nhi aati… aisa kyo hai… Khair, WO SUBAH KABHI TO AYEGI.

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  • वेद्पाल धंखड़ says:

    इंडिया टुडे ग्रूप ने किसी को भी मजेठिया नही दिया. जो भी मजेठिया चाहता हे उसे निकाल दिया जाता हे मैनेजमेंट अपने आप को कानून और कोर्ट से उपर मानती हे

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