‘न्यूज24’ के पत्रकार प्रशांत देव श्रीवास्तव पर मकान कब्जाने का आरोप

Yashwant Singh : न्यूज़24 का एक पत्रकार प्रशांत देव श्रीवास्तव इंदिरापुरम, गाज़ियाबाद में जिस मकान में किराए पर रहता है, उसी को कब्जाने की फ़िराक़ में है। वह मकान मालिक को पुलिस वालों से धमकवा रहा है। रेंट एग्रीमेंट की अवधि पूरी होने के बाद एक लीगल नोटिस मकान मालिक को भेज दिया है कि बेटे पढ़ रहे हैं नजदीक के स्कूल में इसलिए उसे मकान में रहने दिया जाए। 😀

इस बंदे की चिरकुटई देख कर मकान मालिक ने फोन पर नाली का कीड़ा तक कह डाला (ऑडियो मेरे पास आ गया है, जल्दी ही सब भड़ास पर अपलोड होगा) लेकिन मीडिया की ताकत के घमंड में यह पत्रकार दूसरे के मकान में बेशर्मी से काबिज है और दबाव बनाए है कि मकान मालिक उसी को मकान औने पौने दाम में बेच दे।

मकान मालिक का एक मैसेज मेरे पास अभी-अभी आया है-

“Prashant ne abhi kisi police wale se phone karaya tha. Police wala kah raha hai ki aap ne prashant ko damki di hai, aap ki complent hai. phir maine usko puri baat batai. maine bola ki apna makan khali karne ka anurodh karna dhamki kab se ho gaya… Agar aap ke pass sabut hai to aap complain register karo aur mujhe bulao, mai aata hu.”

इस पत्रकार की हरकत के बारे में शुरुआती खबर भड़ास पर छप चुकी है। मुझे लगता है इन्हीं प्रशांत जैसों के चलते बहुत सारे मकान मालिक पत्रकारों को मकान किराए पर देने से मना कर देते हैं!

सबसे दुखद बात ये है कि मेरे घर-परिवार के कुछ लोग इस पत्रकार से पूर्व परिचित होने के नाते उसे सपोर्ट कर रहे हैं और मुझे कह रहे हैं कि मैं आंखें बंद कर लूं, कब्जा हो जाने दूँ।

मैँ कोई जज, थाना, पुलिस तो नहीं लेकिन मीडिया इंडस्ट्री को कवर करने के कारण दायित्व बनता है कि एक पत्रकार से जुड़े इस मामले को भी कवर करूं और इसमें सच का साथ दूँ। जल्द ही पीड़ित मकान मालिक के वीडियो इंटरव्यू और अन्य ऑडियो-डॉक्यूमेंट्स के साथ खबर अपलोड होगी भड़ास पर।

अगर तुझे पत्रकार होने का अहंकार है तो पीड़ित के साथ भी एक पत्रकार खड़ा हो गया है। देखते हैं, या तो नौकरी कर पाओगे न्यूज24 चैनल की या फिर मकान ही कब्जा कर पाओगे। दोनों काम एक साथ तो नहीं कर सकते प्रशांत!

(कृपया इस पोस्ट को न्यूज़24 की मालकिन अनुराधा प्रसाद जी, राजीव शुक्ला जी, सुधीर शुक्ला जी समेत समस्त पदाधिकारियों को फेसबुक-ट्वीटर पर टैग करें ताकि उनके यहां कार्यरत पत्रकार की गुंडई से उन्हें वाकिफ कराया जा सके जिसके चलते न्यूज24 की ब्रांड वैल्यू पर नकारात्मक असर पड़ रहा है.)

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.


पूरे प्रकरण को समझने के लिए इस खबर को भी पढ़ें-

न्यूज24 के पत्रकार से दुखी मकान मालिक ने चैनल मालकिन अनुराधा को भेजा पत्र


उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं-

Shweta R Rashmi यशवंत सिंह जी खबर में कुछ घोटाला है. जैसे जो कब्ज़ा करना चाहेगा वो क्यों बेचने का दबाव डालेगा. इस मकान मालिक की पिछली खबर भी मैंने पढ़ी थी. इसने मकान किसी और को बेचने की बात की थी. अगर इसे बेचना ही है और प्रशांत को खरीदना है तो कब्ज़ा कहां से बीच में आया. दूसरी बात, मीडिया के लोगों के अलावा बाहरी लोगो को भड़ास का ज्यादा मालूम नहीं. फिर ये आप तक चिट्टी लेकर कैसे आया. दूसरा हर बात कॉल करके बता रहा है? दाल की पूरी हांडी काली दिख रही है. प्रशांत को भी इस खबर पर टैग कीजिये ताकि दूसरी तरफ की बात भी पता चले.

Yashwant Singh : प्यासा पानी तक पहुंच ही जाता है, मीडिया का मारा भड़ास तक पहुंच ही जाता है.. ये सवाल तो नोएडा के सीएमओ डा. अजय अग्रवाल के बारे में भी पूछा जा सकता है कि वे भड़ास तक कैसे पहुंचे. आप जब मीडिया से पीड़ित होते हो तो कई जगह हाथ पांव मारते हो, कोई न कोई आपको सलाह दे देता है कि भड़ास के पास जाओ. बाकी, कहानी बहुत सीधी है. मकान किसी और को बेचना था. इसके लिए जब प्रशांत से कहा गया तो उसने मकान खुद खरीदने की बात कही. ये मौखिक बातचीत थी. मोटामोटी सहमति हो गई थी. चुनाव आ गए. बात आई गई हो गई. अब मकान मालिक किसी दूसरे को बेचना चाहता है, प्रशांत को नहीं. सो, उससे खाली कराना चाहता है. वो अब खाली नहीं कर रहा. खाली न करने के तमाम बहाने बना रहा है. वह यह भी कह रहा कि उसे ही मकान बेचा जाए. संपत्ति जिसकी है, उसकी मर्जी वह किसे भी बेचे, किसी भी किराए पर दे. आप मीडिया वाला होकर गुंडई नहीं कर सकते. आप उसे खुद इस पोस्ट में टैग कर दें. वह मेरी फ्रेंड लिस्ट में नहीं है इसलिए मैं टैग नहीं कर पा रहा. मैं चाहूंगा उसका भी पक्ष आए. मकान मालिक और प्रशांत के बीच बातचीत का ये टेप भी सुन लीजिए. काफी कुछ स्पष्ट हो जाएगा….

Shweta R Rashmi : यशवंत जी, आपकी बात में दम है, बिलकुल. पर कुछ मकान मालिक भी गधे की पूंछ होते है. ये बात ठीक है कि जिसकी संपत्ति है वही मालिक है.

Yashwant Singh : श्वेता जी, मकान मालिक कितने भी गदहे हों लेकिन किरायेदार उनका मकान कैसे कब्जा कर सकता है. रेंट एग्रीमेंट का टेन्योर खत्म होने के बाद मकान खाली करने से कैसे इनकार कर सकता है. मकान को तरह तरह लोगों से धमकियां कैसे दिलवा सकता है?

Shweta R Rashmi यशवंत जी आप मुझ से उस एंगल पर बात कर रहे है जो मैंने उठाया नहीं, मेरा सवाल सिर्फ ये है कि दाल में कुछ काला है, दोनो ही दूध के धुले नहीं है। और कोई किसी के साथ भी ऐसा नही कर सकता है ये गलत है पर मामला एक तरफ का नही होना चाहिए।

Yashwant Singh श्वेता जी इस मामले में सच एकतरफा है. अगर आपको नहीं दिख रहा तो मैं क्या करूं. आप दिए गए एड्रेस पर जाएं और जांच कर मुझे एक रिपोर्ट दें. पूरा का पूरा हूबहू छापूंगा. जबरन दोनों पक्ष को दोषी ठहराना ग़लत है. मेरे बेहद करीबी कुछ लोग प्रशांत के पक्ष में मुझ पर दबाव बनाए कि खबर न छापूं. इसलिए मैंने चीजों की गहराई से पड़ताल की. प्रशांत को खूब टाइम भी देिया. लेकिन वह अपने पक्ष में कुछ नहीं बता दिखा भेज पाया. आप जो चाहे सोचो, आप मुक्त हो.

Shweta R Rashmi यशवंत जी, मेरी भी लिस्ट में नहीं है प्रशांत. खबर भड़ास ने लिखी है तो हम लोगों के लिए भड़ास की विश्वसनियता ज्यादा जरूरी है।

Yashwant Singh श्वेता जी, विश्वसनीयता है तभी तो डंके की चोट पर मुद्दा उठा रहा हूं और आपको जांच कर रिपोर्ट भेजने की चुनौती दे रहा हूं. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि न मकान मालिक और न उसके भाई, और न प्रशांत, तीनों से इस प्रकरण को लेकर नहीं मिला मैं. क्योंकि सारा मामला पानी की तरह साफ है. मकान कब्जाने के चक्कर में प्रशांत इतने दांव पेंच खेल रहा कि वह खुद ही एक्सपोज हो रहा है.

Kuldeep Singh Gyani : ऐसे ही चंद बद्तमीज पत्रकारों की वजह से आज लगभग देश भर व खासतौर से उत्तम प्रदेश में पत्रकारों को जैसे तैसे नौकरी तो मिल जा रही है लेकिन अगर गृह जनपद से इतर कहीं और ज्वाइनिंग मिलती है तो बिना जलालत झेले किराए पर मकान नहीं मिलता…और आपके अनुसार कुछ बेचारे इस घिनौनी घटना पर आपका भी सहयोग चाह रहे हैं…बेहद शर्मनाक

Ashish Awasthi : इसको गिरा के पेलना चाहिए । पत्रकारिता घुस जाएगी सारी

Yashwant Singh : हिंसा मार्ग वाले अपन लोग नहीं हैं भाई। कलम में बहुत ताकत होती है आशीष भाई। हम लड़ेंगे क़लम से।

Smita Dwivedi : अभी हम लोगों को बरेली में इसलिए ही मकान नहीं मिला की पत्रकार हैं यह समस्या तो बढ़ती जा रही हैं ढोंगी पत्रकारों के चक्कर में। बहुत सही किया भइया ऐसी खबर को अहमियत देने के लिए…

Raghwendra Tiwari : आप बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं जो सत्य के साथ खड़े हैं। भगवान आपको शक्ति और सामर्थ्य दें। इस क्रम में किसी कानूनी सलाह की जरूरत पड़े तो मुझे अवगत करा सकते हैं।

राहुल सांकृत्यायन : ऐसे लोगों की वजह से कल को रहने को छत न मिले दिल्ली में 🙄

Tarun Kumar Tarun : मतलब जिस थाली में खाए,उसी में छेद करने के फिराक़ में! इसे पहले तो पत्रकार ही मत कहिए! ऐसे लोग मीडिया का गंधदेव हैं! रसूख के बल पर हरामखोरी की आदत मीडिया में जड़ जमा रही है।

आचार्य संतोष संतोषी : बेहतरीन कार्य यशवंत भाई साहब। पुलिस वालों का तो कार्य अब यही रह गया है कि ये सब करें और निर्दोषों को सताएं।

Praveen Singh : वकीलों की तरह जर्नलिस्ट्स को कमरा नहीं मिलेगा ऐसे लोगों की वजह से

Vikas Mishra : ऐसे लोगों का समर्थन करना भी नहीं चाहिए।

Vinod Dubey : ऐसे ही कुछ कीड़े हैं जिनकी वजह से सब बदनाम हैं, ऐसे लोगों को एक्सपोज करना जरूरी है।

Manish Srivastava : पत्रकारिता के कलंक

Akhilesh Tripathi : ऐसे ही छिछोरे लोगों ने पत्रकारिता को बदनाम कर रखा है भैया।

Brahmaveer Singh : सर्वश्रेष्ठ निर्णय…. समाज को साफ करने के लिए इससे बेहतर कुछ भी नहीं है

रवि कुमार राठौर : मैंने ट्वीटर पर अनुराधा प्रसाद समेत कई लोगों को टैग कर ट्वीट कर दिया है.

Laxmikant Dubey : ऐसे लोग ही तो पत्रकारिता को बदनाम कर दिए। मैं आज तक कभी गाड़ी पर प्रेस नहीं लिखा। कहीं निजी कार्यक्रम में कोई अपने किसी संबंधी से परिचय भी किसी से कराता है तो परिचय कराने वाले से पहले ही कह देता हूं कि अपना मित्र बताइएगा पत्रकार नहीं। आपके पास मित्र की वजह से आया हूं पत्रकार नहीं।

Majid Siddiqui : अच्छी लगी आपकी बात। काम और लोगों के प्रति ईमानदार रहना आसान है। बस रोज़ मेहनत करनी पड़ती है और सतर्क रहना पड़ता है। सराहनीय और अनुकरण करने योग्य है आपकी सोच।

Maithily Gupta : आप हमेशा इसी तरह सच के साथ खडे होते रहें.

Dhiraj Kumar : यही कारण है कि पत्रकारों को किराये पर घर भी झूठ बोल कर लेना पड़ता है। वैसे लाला जी मकान कब्जा करे, ये बात गले से नीचे नहीं उतर रही 😀

Madhvendra Kumar : जे बात, असली इलाज

Ranjeet Kumar : ई सा सुधरहिय न

Anubhav Tripathi : बहुत सही कदम हमे गर्व है आप पर

पंकज कुमार झा : अफ़सोसनाक।

Rajesh Yadav : बहुत बढ़िया यशवंत जी

Aroon Kumar Sachaan : Salaam Apko Yashwant Singh Ji.

न्यूज़24 का एक पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव इंदिरापुरम, गाज़ियाबाद में जिस मकान में किराए पर रहता है, उसी को कब्जाने की…

Yashwant Singh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಜುಲೈ 7, 2019

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Comments on “‘न्यूज24’ के पत्रकार प्रशांत देव श्रीवास्तव पर मकान कब्जाने का आरोप

  • Saraswat.ashish@gmail.com says:

    Aaj k time main naami patrakaro ne dhanda bana rakha hai …. Ek bada patrakar mere bhi paise leke bhag gya … Phone bhi nahi uthata … Watsapp par mujhko hi daat ta hai …. Kuch ho sakta hai

    Reply
  • prasghant dev srivastava says:

    डियर, यशवंत ( भडास फार मिडिया)

    एक जॉर्नलिस्ट कि हैसियत से मैं पिछले करीब 20 सालों से मीडिया में काम कर रहा हु, आपने मुझे बदनाम कर, मेरे प्रोफेशनल carrier की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिससे मैं बहुत आहत हू।
    खबर लिखने का पहला सिद्धांत है कि दोनो पक्षो की बात आनी चाहिए , खासकर जिस पर आप आरोप लगा रहे है उसके बारे में उसका पक्ष जरूर लेना चाहिए, लेकिन आपने ऐसा नही किया, जब आपने पहली बार मेरे खिलाफ लिखा, लिखने के पहले आपने मुझसे बात करके मेरा पक्ष नही जाना। आपको इस बात का अंदाज़ा नही है कि आपके इस व्यवहार से मैं और मेरा परिवार किस प्रताड़ना के दौर से गुजर रहा है।
    मेरे जैसे साधारण पत्रकार के ऊपर इस तरह का हमला क्यो? ये मेरी समझ से बाहर है, .
    सालों की कड़ी मेहनत और लगन से मीडिया में ये जगह बनाई है , मेरा आपसे निवेदन है कि बिना पूरी बात जाने इस तरह से मुझे बदनाम ना करे।
    जहां तक फ्लैट के विवाद की बात है या जो आरोप आपने मेरे ऊपर लगाया है मकान कब्जा करने का वो पूरी तरह से बेबुनियाद है, मेरे खिलाफ माफियाओं का षड्यंत्र है . सोशल मीडिया पर आपके द्वारा दुष्प्रचारित की गई हर बात का जवाब मेरे पास है। लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हू की इस पूरे षड्यंत्र के पीछे बिल्डर माफिया, प्रॉपर्टी डीलर माफिया सक्रिय है, जिससे मैं और मेरा परिवार खौफ में है,।

    मैं भड़ास के पाठकों को ये बताना चाहता हूँ की मैं वैलिड रेंट एग्रीमेंट पर हू , और मकान मालिक ने खुद ये घर किराया पर मुझे दिया है, जिसका वो किराया लेता है, मैं जबरदस्ती इनके घर में नही घुसा हूँ। समय पर किराया देता हूं , और अपनी मजबूरी परेशानी को देखते हुए टेनेंसी एक्सटेंड करने की request भेजी है,। आपको हैरानी होगी ये जान कर की मुझे आज तक ये नही पता है कि लवलेश कड़वे कहाँ रहता है, उनका भाई कहाँ रहता है, उसका पता क्या है, सिर्फ फ़ोन पर सम्पर्क हो सकता है, वो भी जब वो करना चाहे।

    मैं ये बात साफ कर देना चाहता हूँ की रिकॉर्ड के हिसाब से इस मकान का मालिक लवलेश कड़वे है , मैं सिर्फ किरायदार हू। मुझे समझ नही आता कि मेरे मकान मालिक ने इसे इतना विवादित क्यो बनाया, ? जो बात बैठ कर आपस मे सुलझ सकती है उसके लिए इतना बवाल क्यो ?

    मैं इस बात से आशंकित हूँ की इसके पीछे बिल्डर माफिया का षड्यंत है, जो इसका मकान हड़पना चाहते है, । आश्चर्य की बात है कि मै अपने मकान मालिक लवलेश कड़वे को अप्रैल के महीने से फ़ोन कर रहा हूँ की आकर बात करिये , या फिर मुझे बताइये कहा आना है , लेकिन वो नही आये,। मुझे उलझा कर रखा सीधे कानूनी नोटिस भेज दिया जो मुझे मिला नही। मकान मालिक नोटिस भेजे तो कानून की बात और अगर मैं कानून की बात करूं तो एतराज क्यों? मैं अपने मकान मालिक ये यही कहना चाहता हूँ की या तो कानूनी रास्ता पकड़ो, या फिर आपस मे बैठ कर बात करो, किसी एक जगह रहो।

    अब मेरे खिलाफ राजेश कड़वे का षड्यंत्र और आतंक सुनिए…. जो खुद को लवलेश कड़वे का भाई बताता है। जानकारी के मुताबिक ये एक वैशाली का बदनाम प्रॉपर्टी डीलर रहा है, और लवलेश कड़वे ने ये बात कभी नही बताई की वो उसका भाई है। अप्रैल 2019 के महीने में लवलेश कड़वे प्रॉपर्टी डीलर के साथ मेरे घर मे घुस गया, बिना मेरी मौजूदगी में, घर मे पत्नी बच्चे अकेले थे …फ्लैट बेचेने की बात लेकर, ।
    मै शहर से बाहर था मैंने फौरन मकान मालिक लवलेश को फ़ोन पर ये बात बताई… लवलेश ने फोन पर जबाब में कहा कहा ” ऐसी कोई बात नही है.. मुझे फ्लैट नही बेचना है आप फ्लैट में आराम से रहिये”।

    ( हर फ़ोन रिकॉर्डिंग का दावा करने वाले इस बातचीत की रिकॉर्डिंग ऑडियो भी सुनाये )

    मैं निश्चन्त होकर रहने लगा क्योकि फ्लैट किराये पर देने के पहले मकानमालिक से ये बात हुई थी कि फ्लैट बिकने वाला नही है, और मैं इसमे शिफ़्ट हो गया। लेकिन राजेश कड़वे इस फ्लैट को बेचने पर आमादा था, चौकाने वाली बात ये है कि राजेश प्रॉपर्टी डीलरों को तभी भेजता था मेरे घर मे, जब मैं शहर से बाहर होता था, ऐसा कई बार हुआ मेरी गैरमौजूदगी में प्रॉपर्टी डीलर घर मे घुसते थे, परिवार परेशान होता था, और मैं शहर में नही होता था, और मेरा मकान मालिक लवलेश कड़वे मुझसे फ़ोन पर बात नही करता था। परेशान होकर मैन राजेश कड़वे को फ़ोन पर बताया कि फ्लैट बेचना चाहते हो तो मुझे ही दे दो, एक दो मीटिंग के बाद मेरी डील फ्लैट खरीदने की हो गई। इस बीच राजेश कड़वे ने फ़ोन पर मुझसे 2 लाख रुपए की मांग की, कहा एडवांस चेक से हमारे एकाउंट में जमा कर दो , मैने फ़ोन पर राजेश कड़वे को कहा मकान मालिक को तो बुलाओ, एग्रीमेंट पर sign तो मकान मालिक के ही होंगे। राजेश कड़वे ने हैरान करने वाला जवाब दिया

    “राजेश कड़वे ने फ़ोन पर मुझसे कहा कि 2 लाख एकाउंट में जमा कर दो मैं corrier भेजकर मकान मालिक का sign करा दूंगा ”

    क्या कभी सेल एग्रीमेंट ऐसे बनता है?

    क्या कोई इस तरह से घर खरीदने का एडवांस दे सकता है?
    मकान मालिक लवलेश चुप क्यों है?
    राजेश कड़वे मुझसे फ्रॉड करके पैसे हड़पना चाहता था। राजेश कड़वे की नीयत में खोट थी , राजेश ने फ़ोन पर मुझे बताया की उसने फ्लैट बेचने का अग्रीमेंट किसी और से कर लिया है… इस पर मैंने उसे निवेदन करते हुए कहा कि मैं प्राइस मैच करने के लिए भी तैयार हूं । मेरे परिवार को ये घर पसंद है हम इसे खरीद लेंगे । मैन सभी बात मकान मालिक लवलेश को भी बताई, तय कीमत से 5000 ज्यादा की रकम देने का निवेदन किया । फिर भी वो मुझे फ्लैट नही देना चाहते है तो ये उनका अधिकार है। मेरा निवेदन था, कोई जबरदस्ती नही।, क्योकि लवलेश मकान मालिक है उसको पूरा अधिकार है अपना फ्लैट किसे बेचे।

    ( ये बात अप्रैल 2019 के महीने की है। हर फ़ोन रिकॉर्डिंग का दावा करने वाले इस बातचीत की रिकॉर्डिंग ऑडियो भी सुनाये )

    महीनों मकान मालिक लवलेश ने मुझसे बात नही की.. और अचानक दो दिन पहले फ़ोन किया और मेरी बातचीत की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया में वायरल कर दी। और खुद एक्सपोज़ हो रहा है, मुझे अपशब्द बोलकर। इस विवाद के बीच किराया भी लेता रहा, आज की तारीख में जितना किराया बनता है उससे ज्यादा की रकम उसके खाते मे मेंरी ओर से जमा है। फिर भी मेरी ओर से कोई विवाद नही है, सज्जनता से बैठ कर बार करने से समस्या तुरंत सुलझ जाएगी।

    डिअर, यशवंत ,
    मेरे खिलाफ एक तरफा मत लिखो, और सच लिखो। मैं एक पत्रकार हू , एक रेपुटेड संस्था में काम करता हु, इसकी आड़ लेकर मुझे और मेरी संस्था को बदनाम मत करिये। आपको ये बता दूँ मेरे साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ मैं लड़ूंगा, हर हाल में लड़ूंगा, ..…. ये जानते हुए की इसमे बिल्डर माफिया सक्रिय है, मेरी जान को भी खतरा हो सकता है , लेकिन एक पत्रकार के लिए इजज्जत और सम्मान सबसे बड़ी चीज है। इस पर हमला बोलने वालों के खिलाफ कानूनी आवाज जरूर बुलंद करूँगा।

    प्रशांत देव श्रीवास्तव
    (पीड़ित )

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