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मोदी राज में हर दिन लोगों को कुछ और ग़रीब बनाया जा रहा है!

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रवीश कुमार-

मीडिया ने आम लोगों में महंगाई की समझ संकुचित कर दी है। यह रिपोर्ट उस बंद समझ के लिए एक खिड़की खोलती है। हम अभी तक नहीं जान पाए कि लगातार दाम बढ़ने से लोगों पर किस किस तरह का असर पड़ा है।

कोई अगर कार से साइकिल पर आया है तो वह खुद को अपमानित भी महसूस करता होगा या वह किसी और नज़रिए से हालात को देख रहा है। बच्चे का स्कूल बदलवाना बड़ा झटका होगा। लोग एक लीटर भरा रहे हैं या बीस रुपये पचास रुपये का भरवा रहे हैं।

क्या ये लोग समझ पा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने उनका बेड़ा ग़र्क कर दिया? आर्थिक सलाहकार बड़े बड़े सपने दिखाकर अकादमिक की दुनिया में लौट जा रहे हैं लेकिन उन सपनों को ध्वस्त होते यहाँ देखा जा सकता है।

हर दिन लोगों को कुछ और ग़रीब बनाया जा रहा है। धर्म मिल गया है हर नेता को। राजनीति में जब से धर्म का प्रचलन बढ़ा है नेता भी बाबाओं की तरह फ्राड हो गए हैं। वे धार्मिक देवी देवताओं के बहाने इन सवालों से बच जा रहे हैं। तय आपको करना है।

राजनीति में नीति और जवाबदेही की बात करनी है या नेता से धार्मिक प्रवचन सुनना है। मेरी राय में आप दूसरा रास्ता ही चुनें। नेताओं ने आपकी बुद्धि की सीमा जहां तक तय की है उसी में रहें। धर्म का गौरव बढ़ता नज़र आएगा और कॉम्बो ऑफ़र में आपकी ग़रीबी भी।

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