अगले माह रिटायर हो रहा हूँ, कोई पेंशन है नहीं इसलिए तय किया हूँ कि मुफ्त में नहीं लिखूंगा : प्रियदर्शन

प्रियदर्शन- महंगा होता जीवन सस्ता होता लेखन : साल 1993 में मैं दिल्ली आया था- अगले तीन साल मैंने फ़्रीलांसिंग की। 1995 में शादी की तब भी फ्रीलांसर ही था- एक तरह से बेरोज़गार। स्मिता के घरवाले परेशान थे कि लड़का करता क्या है। लेकिन फ्रीलांसिंग में मैं फिर भी इतने पैसे कमा लेता था … Continue reading अगले माह रिटायर हो रहा हूँ, कोई पेंशन है नहीं इसलिए तय किया हूँ कि मुफ्त में नहीं लिखूंगा : प्रियदर्शन