मीडियाकर्मियों का केस लड़ने मुंबई पहुंच गए एडवोकेट उमेश शर्मा, देखें वीडियो

देश भर के मीडिया कर्मियों के पक्ष में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा सोमवार को मुम्बई के श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के कर्मचारियों के 17 (2) के मामले में मुम्बई के बांद्रा स्थित लेबर कोर्ट में चल रही सुनवाई में कुछ इश्यू को लेकर चल रही बहस के दौरान अचानक हनुमान बनकर प्रकट हो गए।

इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह ने अपने फेसबुक वॉल पर कुछ यूं लिखा है-

”दोस्तों आप सबको एक जानकारी देना चाहता हूं। आज सोमवार को मेरे 17(2) के मामले की मुम्बई के लेबरकोर्ट में सुनवाई थी। कंपनी ने दो बड़े वकील बुला लिए थे। आज प्राइमरी इश्यू को लेकर कंपनी वाले हमारे 17(2) के दावे को खारिज करने की बात कर रहे थे। अचानक मुझे आश्चर्य हुआ जब उमेश शर्मा सर का फोन आया कि मैं मुम्बई में हूं, आप कहां हैं। मैंने कहा कि मैं लेबर कोर्ट में हूं। मैंने सर से निवेदन किया कि आप तुरंत आइये। उमेश सर आये वो भी बिना कोट और बिना व्हाइट टाई के, जो वकील लोग लगाते हैं। मेरे साथी हरीश और नागेश ने तुरंत उमेश सर के लिए व्हाइट गले की पट्टी की व्यवस्था की और उमेश सर ने हमारे पक्ष में दो घंटे तक जोरदार बहस की। सामने वाले वकील भी उनको अचानक देखकर आश्चर्य में पड़ गए। अब इस पर 28 को फैसला होगा। दरअसल मैने शुरुआत में 17 (1) के क्लेम में कुछ इश्यू डाल दिये थे कि कंपनी ने हमे नियुक्तिपत्र नहीं दिया। हमारे सेलरी स्लिप से पोस्ट गायब है। हमे एलटीए नहीं मिलता है। हमे प्रमोशन नहीं मिला है वगैरह वगैरह। इसी पर कंपनी का कहना था कि ये 17 (1) या 17(2) में नही आता। 17(2) में मामला सिर्फ पैसे के विवाद होने पर होना चाहिए। इसके लिए कंपनी का कहना था कि हमारे 17 (2)के आवेदन को रद्द किया जाये।”

एडवोकेट उमेश शर्मा का मुम्बई की तपती गर्मी में लिया गया इंटरव्यू देखिए…

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Comments on “मीडियाकर्मियों का केस लड़ने मुंबई पहुंच गए एडवोकेट उमेश शर्मा, देखें वीडियो

  • madan tiwary says:

    यह मामला 17 (2 ) में आएगा , क्योकि जब बकाए की रकम का विवाद रेफर होगा तो मैनेजमेंट नियुक्ति पत्र या सैलरी स्लीप के आधार पर अपना कर्मचारी मानने से इनकार करेगा । 17 ( 2 ) adjudication के लिये यानी न्यायार्थ के लिए है जिसके तहत ,लेबर कोर्ट, कागजात तलब कर सकता है, गवाह और साक्ष्य ले सकता है , कामगार के पास अगर नियुक्ति पटे4 या सैलरी स्लिप नही है तो अखबार ने बाई लाइन न्यूज छपा हो तो उसके आधार पर भी वह पत्रकार होने का दावा कर सकता है । हालांकि यह सही है कि जब question of amount dues का प्रश्न पैदा होगा तभी मामला 17 ( 2 ) के तहत लेबर कोर्ट में adjudication के लिए रेफर किया जाएगा । लेबर कोर्ट अखबार के सभी कागजात,एकाउंट को न्यायालय में उपस्थित करने के लिए आदेश दे सकता है क्योकि सर्वप्रथम कोर्ट को यह निर्णय करना होगा कि दोनों में से किसका कथन सही है ,मजिठिया वेज बोर्ड एंव डब्ल्यू जे एक्ट के तहत पत्रकार परिभाषित हैं । मैनेजमेंट द्वारा नियुक्ति पत्र या सैलरी स्लिप नही होने के आधार पर मामला खारिज नही होगा ।

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  • madan tiwary says:

    20 जे के बारे में उच्चतम न्यायालय अपने कंटेम्प्ट केस में पारा 20 में स्पष्ट कर चुका है, वह तभी मान्य है जब उसके तहत पूर्व से मिल रहा वेतनमान मजिठिया बोर्ड अवार्ड के वेतनमान से ज्यादा लाभदायक हो ।
    डब्लू जे एक्ट की धारा 13 स्पष्ट कहती है कि अवार्ड से कम वेतन का भुगतान नही किया जाएगा । पंकज कुमार के मामले में भी 166 पत्रकारों का हस्ताक्षर युक्त कागज को दैनिक जागरण ने प्रस्तुत किया था ।

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