श्रम अफसरों के धमकाने के मामले से नई दुनिया प्रबंधन के होश उड़े

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित प्रसिद्ध अखबार नई दुनिया में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन हासिल करने के लिए यहां कार्यरत सभी पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। इसके लिए वे न्यायपालिका से लेकर सरकारी तंत्र के हर उस पुर्जे को आजमाने में मशगूल हैं जो उनकी इस मांग को पूरा कराने में निर्णायक सहायता कर सके। या कहें कि उन्हें मजीठिया दिलवा सके। इस जीवनदायी महान काम के लिए कर्मचारियों ने श्रम विभाग का भी दरवाजा खटखटाया है। खुशी की बात यह है कि श्रम महकमा खुलकर उनकी मदद में उतर आया है।

वीरवार एक अक्टूबर को नई दुनिया रायपुर के ऑफिस में श्रम अधिकारियों का दल आ धमका। मजीठिया को लेकर अधिकारियों ने प्रबंधन से अनेक सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि नई दुनिया मालिकान ने कर्मचारियों को मजीठिया वेज की बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन एवं सुविधाएं देने के लिए अब तक क्या और कितने कदम उठाए हैं? उठाए हैं तो कितने? नहीं उठाए हैं तो क्यों नहीं? मतलब यह कि श्रम अफसरों ने मजीठिया की बाबत प्रबंधन से हर तरह की जानकारी मांगी। उन्होंने प्रबंधन से कर्मचारियों के नाम, पद, उन्हें मिलने वाले वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं का पूरा ब्योरा देने का निर्देश दिया है।

साथ ही अखबार की सालाना आय-कमाई का भी ब्योरा कंपनी से उपलब्ध कराने को कहा है। जाहिर है श्रम अफसरों की इस एक तरह की आकस्मिक कार्रवाई से नई दुनिया प्रबंधन के होश उड़ गए हैं। उन्हें कम से कम श्रम विभाग (जिसे मालिकान-प्रबंधन अपना पालतू ही समझता है या समझता रहा है) से ऐसी उम्मीद नहीं थी। लेकिन उनकी इस उम्मीद पर तुषारापात करते हुए श्रम विभाग ने अपना असली-वास्तविक रंग दिखा दिया है। इस रंग ने मालिकान-प्रबंधन को बदरंग-बेहाल-बेचैन-व्याकुल कर दिया है। नींद उड़ा दी है। उसे समझ ही नहीं आ रहा है कि ये हो क्या गया, हो क्या रहा है?

बहरहाल, श्रम विभाग की यह कार्रवाई कर्मचारियों को थोड़ी राहत देने वाली है। अनवरत बढ़ रही महंगाई के घटाटोप में अल्प वेतन-मजदूरी पाने वाले कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड ने काफी उम्मीद जगाई है। उन्हें लगता है कि नया वेतनमान मिलने लगे तो जिंदगी की गाड़ी थोड़ी पटरी पर आ जाए। जीवन में थोड़ी खुशियों का संचार हो जाए। लगे कि अखबार में दीन-दुनिया का दुख-दर्द शब्दों में ढाल कर परोसने वाले उन जैसे मुलाजिमों के  जीवन के किसी कोने में सुख-सुविधा, शांति, निश्चिंतता भी बसती है।

बता दें कि नई दुनिया का मालिकाना हक भी उस दैनिक जागरण के पास है जिसके कर्मचारी बेहद कम पगार में गुजारा करते हैं या कर रहे हैं। लेकिन मजीठिया वेज बोर्ड की अधिसूचना के बाद उसे पाने के लिए इस वक्त सबसे मजबूत-सशक्त लड़ाई में जुटे हुए हैं। शुक्रवार दो अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन करके उन्होंने अपनी लड़ाई को व्यापक आयाम-विस्तार दे दिया है। इस आयोजन को पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारियों के हर तबके, हर क्षेत्र का खुला समर्थन मिला है। आंदोलन को इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट, इंडियन एक्सप्रेस कर्मचारी यूनियन, दिल्ली एवं अन्य जगहों के पत्रकार संगठनों का जमकर समर्थन-सहयोग मिला है।

चंडीगढ़ से पत्रकार भूपेंद्र प्रतिबद्ध की रिपोर्ट. संपर्क bhupendra1001@gmail.com

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Comments on “श्रम अफसरों के धमकाने के मामले से नई दुनिया प्रबंधन के होश उड़े

  • patrkaro ko vytan ky liy yudh ka samana karna par raha hysathiyo ek ho jao modi sarkar my vytan na milla to koi sarkar nahi dila paygi dosto apany haako ki batt karna sikho kub tak marty rahogy aatmgilani sy ubro aawaz bulland karo,nokri chorni ho to choro halat esy hy ki wo bachygi bhi nahi

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  • Sujata Madhok says:

    Thank you for this report. It is good to know that the Labour Dept in Raipur took the Nayi Duniya-Jagran management to task regarding non-implementation of the Majithia Wage Board. The Delhi Union of Journalists supports the struggle of victimised Jagran employees and all other newspaper employees who are fighting for their legal rights.

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