अपने पुराने पत्रकारों को परेशान कर रहा है पत्रिका प्रबंधन!

राजस्थान पत्रिका में आजकल पुराने वफादार साथियों की काफी अनदेखी की जा रही है। उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। पन्द्रह साल पहले जब दैनिक भास्कर राजस्थान में आया था, तब पत्रिका से कोई भी नौकरी छोड़ कर भास्कर में नहीं गया था। भास्कर के तमाम तरह के टोटकों का मुकाबला राजस्थान पत्रिका ने अपने कर्मचारियों की ताकत के जरिए किया था। इसके बाद पत्रिका के मालिकों को भास्कर का ऐसा जुनून सवार हुआ कि भास्कर के कर्मचारियों की जमकर भर्ती की गई।

भर्ती के बाद भास्कर से आए नए और कम अनुभवी कर्मचकारियों को पत्रिका ने अपने पुराने और वफादार कर्मचारियों के ऊपर बैठा दिया। इसके बाद अब पत्रिका के अधिकांश संस्करणों का स्वरूप भास्कर जैसा ही हो गया है। जयपुर में ये भास्कर को आज तक नहीं पकड़ सके। अन्य स्थानों पर भी हालत कमजोर हो रही है। आंकड़े और सर्वे अलग बात हैं। पत्रिका की खबरों की विश्वसनीयता कम हो रही है। गंभीरता घट रही है। धार खत्म हो रही है। खंडन छापने पड़ रहे हैं। पत्रिका की मूल विचारधारा के लोगों को उपेक्षित करने का नतीजा सामने है। जिन लोगों ने अपने जीवन को पत्रिका को दे दिया और संस्थान के संघर्ष के दौर में भी साथ नहीं छोड़ा, उन्हें परेशान किया जा रहा है। संपादकों को कहा है कि पन्द्रह-बीस साल नौकरी कर चुके पत्रकारों को साइड लाइन करो। उन्हें इतना परेशान करो कि वे नौकरी छोड़ जाएं।

सालाना वेतन वृद्धि में कमी करो। किसी ना किसी बहाने से पैसे की कटौती करो। उन्हें काम करने के अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। जानबूझ कर पीछे धकेला जा रहा है। ऐसे लोगों में काफी तनाव है। जिंदगी के इस मोड़ पर जब वे अपने अनुभव का सही इस्तेमाल कर अखबार को धार दे सकते हैं, तब उन्हें परेशान किया जा रहा है। अपमानित किया जा रहा है। परिवार की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे में पत्रकार परेशान हो रहे हैं। हालात यह है कि अगर कोई बड़ा अखबार राजस्थान में आ गया तब पत्रिका वालों को अक्ल आएगी। कार्यकारी संपादक नीहार कोठारी कह रहे हैं कि पुराने लोगों को लात मार कर निकाल दो। कुलिश जी के पुण्य से पनपे इस वटवृक्ष को सैंकड़ों परिवारों की बददुआएं कहां ले जाएंगी। भगवान जाने। भाई कृपया आप वरिष्ठ पत्रकारों की पीड़ा को प्रकाशित करने का कष्ट करें। आपके आभारी रहेंगे। हमारा नाम नहीं प्रकाशित करें।

पत्रिका के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

Comments on “अपने पुराने पत्रकारों को परेशान कर रहा है पत्रिका प्रबंधन!

  • DR. MAYA SHANKAR JHA says:

    कुछ अनुभव बहुत बडे प्रहार कर जाते है , कुछ नये अनुभव दे जाते है कुछ बहुत बडी सीख दे जाते है , और आप जो लाते है उनमे ये सब होता है ! एक सम्पुर्ण लेख जिसमे सब है , मलय है चीनी है और भारत है , आबादी कम है लेकिन फिर भी दम है । संस्कृति परम्परा …को जिवित रखते हुये वो भारतीयता का अहसास करा रहे है और हम … सब ….. राष्ट्रपिता को पूरा राष्ट्र नमन कर रहा है – याद कर रहा है. पर
    संस्कृति परम्परा को बापू की बकरी याद आ रही है. आप आप है,भारत आप को याद कर रहा है

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  • surendra mehta editor aapnaandaj says:

    karnataka hubli me rajsthan patrika ko panpane me patrakar surendra mehta ka aham yogdan hai. unke prayaso se hi patrika ne uttar karnataka me jami. lekin yojana ko murt roop dene ke bad patrika parbhandhan ne unko bahar ka rasta dikhane ka prayas ki to ve khud hi rajinama dekar patrika chod gai abh ve khud hubli me hi rahate hai lekin unhone apane karyakal me jo patrika ko pragati par laya vah abhi aaisa kam nahi ho raha hai. unhone circulation,marketing, kannanda,marathi, english anuvad v ah editorial ke sath hindi bhashi logo ka jansampark achha banaya tha. ve yaha se reporter se cheif reporter se bureauincharge banaye gaye the. ab yaha par bhi halat patrika ki kharab hai. ab ve dakshin bharat hindi dainik ke uttar karnataka ke prabhari ke pad par karya kar rahe hai. patrika ki niti bharastha hai. surendra mehta

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  • sahi bat ha. patrika me khabaro ke cantent ko lekar lagatar galtia ho rahi ha. jodhpur me jahrili sarab ki khabar me patrika pahle din pit gaya. agle din 13 logon ki death hui, lekin patrika ne chapa 23 ki death. cheif ministor ne patrika ki khacar ka ek tarah se khandan kiya. phir patrika ne khabar chapi. usame death 19 batai. galti chipane ke liye ye number khabar ki tut ki last line me diya gaya. bazar me th-thu hui, lekin na sapadak ko iska koi afsos hua na hi managmet ko. sab apni pith thapthapate rahete hai. junuvary and july me patrika me khub biline ati ha. desk wale bhi likhne lagate hai. unne patta hai patrika me paisa ese hi badata hai.

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  • patrika en dino me apane sidnato hat kar chal raha hai.esa karna unaki majburi hai kiyoki patrika prabandhan ko ab paisa kamana hai n ki shri kulish ji ke aadrash ab patrika nahi pepar hai :'([b][/b]

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  • Sunil Jain says:

    Patrika me kaam karne wale logo ko ab pata chal hi gaya ke Hum patrika ke karmchari nahi “GULAM” Hai. “GULAB” Kothari ne apna naam Badal Kar “GULAM” Kothari Rakh liya hai. Patrika me ab pahle jaisi baat nahi rahi karmchari ko Bina Bajah Pareshan kiya jata raha hai. Hamari Baddub hai ki yah Jaldi Band ho jae.

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  • mayank sharma says:

    HUM “KUTTE HAI. SABHI JANTE HAIN KI PATRIKA SIRF SARKAR KI GULAM PATRIKA HAI. CHAHE SARKAR KISI KI BHI HO HAME TO SARKAR KE NETAO KA PICHBADA CHATNE KA MATLAB. YADI KISI KO PADHNA HAI TO HAMARI TO CHATEGA HI OR NETAO KI BHI CHATNI PADEGI HI. JABADASTI KI HAI KISI NE KI BAH RAJASTHAN PATRIKA HI PADHE

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