एक अमरउजालाइट की नज़र में ‘जनवाणी’

: पहले दिन के अखबार की समीक्षा : महीनों का शोरगुल सन्नाटे में टूटा। उनके आमद की हवा ऐसी बनाई गई जैसे मायावती के किसी जिले में आने की होती है। लेकिन आए तो दीवालिया होकर… विचारों से… और खबरों से भी। मेरठ की मार्केट में आज से गॉडविन ग्रुप के अखबार जनवाणी ने प्रवेश कर लिया है। जनवाणी ने अपने आने की खबर से जो जलवा पैदा कर रखा था, आया तो फ्लाप शो हो गया। मेरठ के जमे-जमाए अखबारों ने अपने दाम गिराकर और दहशत पैदा कर दी थी। लेकिन जनवाणी आज बाजार में आया तो मार्केट और पत्रकार बिरादरी की प्रतिक्रिया अजीब रही।

कुछ का कहना था कि इसका मुकाबला करने के लिए तो दैनिक प्रभात अखबार ही काफी है। सच्चे पत्रकारों को निराशा हुई, अच्छा अखबार निकलता तो कंपटीशन में और मजा ही आता। निकम्मों ने राहत की सांस ली। समूह संपादक यशपाल सिंह ने पहले पेज पर छपे विशेष संपादकीय में अखबार के चरित्र को लेकर बढ़-चढ़कर दावे किए हैं…ऐसा होगा… वैसा होगा। लेकिन उसी संकल्पपत्र के ठीक बगल में छपी एक खबर इसका डंके की चोट पर खंडन करती है। सनसनी से दूर रहने और सच के दावों के ठीक उलट ”आपरेशन थियेटर में सेक्स” की सनसनीखेज बेसिर-पैर की खबर छापी गई है। यह खबर किसी सरकारी अस्पताल में किसी समय किसी स्टाफ द्वारा आपरेशन थियेटर में बने किन्हीं महिलाओं के अश्लील एमएमएस पर आधारित है।

इस खबर में न तथ्य हैं और न ही कोई ठोस आधार। चीफ रिपोर्टर और संपादक जी की  सेंसिबिलिटी पर तरस खाया जा सकता है कि लांचिंग इश्यू में पहली ही खबर सेक्स की परोसी गई है। न्यूज चयन के इस आधार पर इसे फेमिली न्यूजपेपर बनाने के बजाय चाय-पाने के खोखों का अखबार बनाने की ख्वाहिश दिखती है। हिंदी पत्रकारों की यौन कुंठा की हद है ये। इस नवप्रवेशी अखबार के संबंध में मिले फीडबैक में चिकित्सक वर्ग के साथ ही अन्य सजग पाठकों ने इसे बेबुनियाद खबर बताया है। डाक्टर वर्ग तो डरा भी है कि कुछ लोग अपने पुराने हथकंडे अपनाकर उन्हें ऐसी ही खबरों से ब्लैकमेल करने की हरकत कर सकते हैं जैसा कि वे पहले दूसरे अखबारों में करते आए हैं।

20 पेज के मुख्य अखबार में 12 पेज कलर हैं और साथ में आठ पेज का शहर पर आधारित प्रवेशांक। गैर-रंगीन पेजों की छपाई में लोच्चा है। अखबार ने हफ्ते में चार दिन अलग-अलग विषयों पर सप्लीमेंट देने की घोषणा की है। स्थानीय खबरों में बासी और जाने-पहचाने समाचारों को ही पेश कर दिया गया है। मेरठ के अलावा राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और प्रदेश की खबरें एजेंसी की है जो अन्य अखबारों के मजबूत नेटवर्क से बुरी तरह पिटेगी। पाठक सिर्फ बाकी लोकल न्यूज के लिए तो अखबार लेने से रहा। फुल-फुल पेज विज्ञापन देने की कोशिश में अखबार के करेक्टर का ख्याल ही नहीं रखा गया है। पाठक की समझ में ही नहीं आया कि किस न्यूज सेक्शन में कितने पेज हैं या होंगे। मुख्य अखबार में एक पेज फीचर का है। जनवाणी का बहुप्रतीक्षित अंक कंटेंट, न्यूज प्रेजेंटेशन या विजन के स्तर पर कहीं से कोई छाप नहीं छोड़ रहा है। छपाई भी बेअसर है। आज के अंक को देखकर यह पक्का है कि जनवाणी नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह जाएगा। वाहे गुरु…वाहे गुरु…

लेखक अमर उजाला, मेरठ में कार्यरत हैं. उन्होंने यह समीक्षा मेल के जरिए भड़ास के पास पहुंचाया है. खुद अपना नाम प्रकाशित न करने का अनुरोध किया है. इस समीक्षा को यहां प्रकाशित करने का मकसद स्वस्थ आलोचनात्मक टीका-टिप्पणी को बढ़ावा देना है ताकि नए आने वाले अखबारों के कंटेंट को बेहतर बनाने में मदद मिल सके.

Comments on “एक अमरउजालाइट की नज़र में ‘जनवाणी’

  • अमर उजाला के पत्रकार की जनवाणी पर इससे अलग प्रतिक्रिया नहीं हो सकती थी। इसलिए उनकी प्रतिक्रिया निष्पक्ष नहीं हो सकती। उन्होंने अपना नाम भी नहीं दिया है। शायद इसलिए कि कल जनवाणी में नौकरी मांगने जाना पड़ सकता है। एक तरह से इसको अमर उजाला की प्रतिक्रिया भी कही जा सकती है। अमर उजाला एक पुराना अखबार है। उसका पहले ही दिन जनवाणी को फलॉप घोषित कर देना उसकी खिसियाहट को दर्शाता है। पत्रकार ने अखबार की समीक्षा किसी फिल्म की समीक्षा की तरह लिख मारी है। उन्हें मालूम होना चाहिए कि अखबार फिल्म की तरह एक शो नहीं होता। अखबार 365 दिन छपता है। इन दिनों में निरंतर सुधार भी होता रहता है। जनवाणी एक प्रयास है। कुछ कमियां रह सकती हैं। पता नहीं पत्रकार कितने दिनों से पत्रकारिता में हैं। जब अस्सी के दशक में अमर उजाला मेरठ में आया था तो यहां पर नवभारत टाइम्स और हिंदुस्तान दिल्ली से आते थे। इन दोनों अखबारों के सामने उजाला और जागरण कहीं नहीं ठहरते थे। कंटेंट के मामले में तो जीरो थे। वक्त लगा था उजाला और जागरण को भी नभाटा और हिंदुस्तान की आदत छुड़ाने में। यह भी याद रखा जाना चाहिए कि उजाला और जागरण को मेरठ के 1987 के सांदायिक दंगों ने स्थापित किया था। जनवाणी का सैटअप नया है। उजाला कंटेंट पर बात न ही करे तो बेहतर होगा। अखबारों के पन्नों पर कटी लाशों की तस्वीरें छापना कैसी पत्रकारिता है।

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  • अमर उजाला के पत्रकार की जनवाणी पर इससे अलग प्रतिक्रिया नहीं हो सकती थी। इसलिए उनकी प्रतिक्रिया निष्पक्ष नहीं हो सकती। उन्होंने अपना नाम भी नहीं दिया है। शायद इसलिए कि कल जनवाणी में नौकरी मांगने जाना पड़ सकता है। एक तरह से इसको अमर उजाला की प्रतिक्रिया भी कही जा सकती है। अमर उजाला एक पुराना अखबार है। उसका पहले ही दिन जनवाणी को फलॉप घोषित कर देना उसकी खिसियाहट को दर्शाता है। पत्रकार ने अखबार की समीक्षा किसी फिल्म की समीक्षा की तरह लिख मारी है। उन्हें मालूम होना चाहिए कि अखबार फिल्म की तरह एक बार को शो नहीं होता। अखबार 365 दिन छपता है। इन दिनों में निरंतर सुधार भी होता रहता है। जनवाणी एक प्रयास है। कुछ कमियां रह सकती हैं। पता नहीं पत्रकार कितने दिनों से पत्रकारिता में हैं। जब अस्सी के दशक में अमर उजाला मेरठ में आया था तो यहां पर नवभारत टाइम्स और हिंदुस्तान दिल्ली से आते थे। इन दोनों अखबारों के सामने उजाला और जागरण कहीं नहीं ठहरते थे। कंटेंट के मामले में तो जीरो थे। वक्त लगा था उजाला और जागरण को भी नभाटा और हिंदुस्तान की आदत छुड़ाने में। यह भी याद रखा जाना चाहिए कि उजाला और जागरण को मेरठ के 1987 के सांदायिक दंगों ने स्थापित किया था। जनवाणी का सैटअप नया है। उजाला कंटेंट पर बात न ही करे तो बेहतर होगा। अखबारों के पन्नों पर कटी लाशों की तस्वीरें छापना कैसी पत्रकारिता है।

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  • kisi ne thek kaha hai ki khisyani billi khamba noche. aur aisa hi kuch amar ujala is mahanubhav ne kiya hai. jab janwani me unhe kuch nahi dikha toh itni mehnat se comment dene ki jarurat hi nahi thi. mujhe lagta hai sayad health wali news par unki class lag gayi aur unhone apna gussa janwani par ye comment karke nikal liya

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  • dinman pathak says:

    मेरठ में अमर उजाला का सम्पादकीय नेतृत्व दुनिया का सबसे बढ़ा लतीफा है। मुझे इसमें विदेशी ताकतों का हाथ लगता है जो वो अमर उजाला को बंद कराना चाहते है इसलिये संपादन की कमान इतने दक्ष और सुलझे हुए आदमी को सौप दी। जय हो दिवेदी जी की।

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  • kamal.kashyap says:

    amar ujala, dainik jagran,, jise lala logo ke pass aab sirf apne chamco se samiksha karvane ke alava aur kaam nahi rahe gya…. manyavar aab ye kyo bhul gye ki jab au aur dj market maine aye the to unki saili bhi kuch is type ki thi…. aur rahi baat janwani ki to janwani ane wale samay maine shikar par hoga….aap ke liye bhi janwani ke darwaje kule hai subkamnye

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  • मदन कुमार तिवारी says:

    एक पाठक जी आपने लेख के लेखक की नाम न देने के कारण आलोचना की लेकिन आपने भी तो नाम नही दिया । आप ने अपने आप को एक पाठक बताया है , आपको किस बात का डर है की नाम नही दिया । डियर कुछ तो हिम्मत करों यारो । कायरों की तरह तो रोज जिते मरते हो । एक बार मर्द बनकर तो दिखाओ ।

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  • Prateek Ankush says:

    Janwani Jab kafi ho-Hangame ke bad ‘product’ bankar bajar me utara , to aur bhi sannate pasar gaya. khabaroan ko lekar, content ko lekar
    samajhdari bhari Drishtihinata dikhi. lead khabar matlab….kuchh nahi!
    khair..Associate editor yani sah sampadak ka bhi nazar imprint line me
    maujud hai. ise clash of civilization yani clash of ego se jodkar dekha ja raha hai. Samuh sampadak …ka matlab samajh me nahi aaya. kaha aur kaun sa samuh! Godwin group ka chief PRO?
    janwani ke utarane ke bad Dainik jagran ke meerut incharge(NE…) Vijay Tripathi ko kisi ne phone kiya…Badhai ho Janwani launch hone par. Tripathiji bole main Yashpalji nahi, Vijay tripathi jagran se bol raha hoon.
    Pathak ne kaha Tripathiji mai aap hi ko badhai de raha hoon.
    Janwani ne darasal Jagran ko hi idhar pareshan kar rakha tha, isliye..Vijay ji ko hi jyada badhai mil rahi hai, kyoki Ravi sharama, Yashpalji kuchh bigad nahi paye.
    Dusara phone subharti media ke CEO-GP. Editor R.P. singh ko gaya.
    Badhai..Janwani ke liye!..jee wrong no. mai Prabhat se bol raha hoon.
    Pathak ne kaha Singh sahab maine aap hi ko phone lagaya hai. Padosh
    me ek naya ilaka Godwin media taiyar hai. puri team lekar wahi kyoan nahi chale jate! Singh sahab kash bhawana se bhar gaye…sadhan-bade nam ke alawe bhi kuchh jaruri hai akhbar chalane ke liye.
    khair janta-aur aam jan yani patrakaroan yani majduroan ke shubhsuchak hai ki Ek aur vikalap maujud hai meerut or hindi patrakarita me.

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  • जल्द ही मेरठ के साथ साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी जिलो में छाने वाला है दैनिक जनवाणी नहीं देखंगे जागरण उजाला पाठको के बीच
    अफवाहें तो उड़ती ही रहती है जल्द ही सच सबके सामने आ जायेगा और भारत का नो. १ अख़बार बन जायेगा | पत्रकार साहब ऐसे गलत आलोचना करके अपनी सोच का गलत परिचय न दे

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  • जल्द ही मेरठ के साथ साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी जिलो में छाने वाला है दैनिक जनवाणी नहीं देखंगे जागरण उजाला पाठको के बीच
    अफवाहें तो उड़ती ही रहती है जल्द ही सच सबके सामने आ जायेगा और भारत का नो. १ अख़बार बन जायेगा | पत्रकार साहब ऐसे गलत आलोचना करके अपनी सोच का गलत परिचय न दे

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  • Kuldeep Singh Rajput says:

    It’s not good to comment each other. We are one to make one universe.
    Bureau Chief GZB. Dainik DESHBANDHU
    9350990139

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