कांग्रेस के एजेंट अमर सिंह को एक्सपोज करने की जरूरत

: भड़ास पर अब न छपेगा अमर का कोई लेख, वचन या ब्लाग लेखन : इंडिया टीवी पर रजत शर्मा वाले कार्यक्रम आपकी अदालत को कल देख रहा था. इस कार्यक्रम में जज बने थे अमर उजाला के संपादक अजय उपाध्याय. कथित कठघरे में बैठे थे अमर सिंह. अमर सिंह ने वही सारी बातें कहीं जो उन्होंने पिछले दिनों मीडिया वालों से बातचीत के दौरान कही थी. उड़ि बाबा… जेनुइन है… उसी अंदाज में. शांति भूषण और प्रशांत भूषण की धज्जियां उड़ाए जा रहे थे.

अचानक बोले कि इन लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लखनऊ में जाकर लड़ाई लड़नी चाहिए जहां स्वास्थ्य विभाग के दो अफसरों का कत्ल हो चुका है. आपको याद होगा कि पिछले ही दिनों राहुल गांधी ने लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग के दो अफसरों की हत्या होने और स्वास्थ्य विभाग की एक योजना के लिए केंद्र से मिले पैसे की बंदरबांट से संबंधित सवालों वाली आरटीआई दाखिल की. मायावती शासन के करप्शन के इशुज को उठाने में जोरशोर से जुटी हुई है कांग्रेस. इससे दोहरा लाभ है. एक तो करप्शन से कांग्रेस को जोड़े जाने के अभियान को कमजोर किया जा सकेगा और करप्शन का इशू डायवर्ट होकर यूपी में जाएगा तो मायावती कमजोर होंगी और चुनावों में इसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा.

सपा से भगाए जाने के बाद तनहाई झेल रहे अमर सिंह किसी मजबूत पार्टी में जाने के चक्कर में हैं. और सत्ताधारी कांग्रेस से मजबूत उन्हें कोई दिख नहीं रहा. दूसरे, कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जहां अमर सिंहों को अपनी कला व कलाकारी दिखाने का पूरा मौका मिलता है. जोड़तोड़, रैकेट, मैनेज, संकट मोचन, खरीद-बिक्री आदि कुकृत्यों के लिए कांग्रेस सबसे ज्यादा तत्पर रहती है क्योंकि कांग्रेस के नेताओं को लगता है कि वही इस देश के जेनुइन शासक हैं और अगर उन्हें किसी भी प्रकार से सत्ता से दूर रहने को कहा जाता है तो वो ठीक नहीं, उन्हें हर हाल में सत्ता में आना है, चाहे इसके लिए कितने ही अमर सिंहों की मदद लेनी पड़े या कितने ही जोड़तोड़ करने को मजबूर होना पड़े.

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे मनमोहन, सोनिया की कांग्रेस पार्टी को इस समय जरूरत एक ऐसे ही कलाकार अमर सिंह की थी. अमर सिंह अभी कांग्रेस में शामिल नहीं हुए हैं लेकिन कांग्रेस से बाहर रहकर उन्होंने जो काम कर दिया वो काम कांग्रेस के दिग्विजय सिंह भी नहीं कर सके. भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए उठ खड़े हुए अन्ना के आंदोलन को भटकाने के वास्ते अमर सिंह ने जो सीडी कांड की व्यूह रचना रची, वो षडयंत्र सफल रहा. लोग प्रशांत भूषण और शांति भूषण पर सवाल उठाने लोग.

सवाल उठाने वाले लोग हमारे आप जैसे खाते पीते शहरी मध्यवर्ग है जो हर पर पेंडुलम की तरह दाएं बाएं होता रहता है, अपना खुद का कोई स्थायी कनविक्शन नहीं होता. उनका तर्क ठीक लगा तो उनके पाले में हो गए और उनका कहा जंचा तो उनके लिए वाह वाह करने लगे. अमर सिंह ने अन्ना के आंदोलन के उफान के निशाने को कांग्रेस से हटाकर तितर बितर कर दिया है. ठीक ही कहा जाता है कि इस व्यवस्था में जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएगा, उस आवाज उठाने वालों को ही लोग निपटा देंगे. रजत शर्मा ने कल अपनी अदालत में अमर सिंह को जमकर एक्सपोजर दिया. उनकी बातों, उनके तर्कों को व्यापकता के साथ बड़े जनमानस तक पहुंचाया.

मुझे नहीं लगता कि रजत शर्मा की अदालत में कभी अन्ना हजारे बुलाए गए होंगे क्योंकि अन्ना ड्रामेटिक नहीं हैं, कलाकार नहीं है, किसी और के एजेंडे पर काम नहीं करते. अन्ना सरल सहज मनुष्य हैं. ऐसे वक्त में जब करप्शन बहुत बड़ा मुद्दा बनता जा रहा हो और इस मुद्दे को लीड करने लायक कोई लीडर न मिल रहा हो, अन्ना का प्रकट होना चमत्कार की तरह था पर उस चमत्कार को साजिश करने में माहिर कांग्रेसियों ने अमर सिंहों के साथ मिलकर मिट्टी में गाड़ने की तैयारी कर दी.

जो अमर सिंह अपनी निजी जिंदगी में शुचिता, ईमानदारी और नैतिकता का दावा नहीं कर सकता, वह दूसरों पर कीचड़ उछाल रहा है, इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है. और ऐसे शख्स के आगे हमारी मीडिया लहालोट हुए जा रही है. अमर सिंह के अभिनयपूर्ण डायलाग्स सुनना मिडिल क्लास को पसंद आता है क्योंकि इस शहरी मिडिल क्लास को लालू भी बहुत पसंद आता था. लालू चाहे जो कहें, उससे मिडिल क्लास को मतलब नहीं था, मतलब था उनके संवाद अदायगी की भाव भंगिमा से. और, वो लालू आज किधर हैं, किसी को पता नहीं. बिहार का बंटाधार कर चुके लालू का योगदान इतना रहा है बिहार में कि उन्होंने पिछड़े समुदाय की आवाज को अभिव्यक्ति दी लेकिन विकास कुछ नहीं किया. उसी पिछड़े समुदाय ने, जिसके हीरो लालू थे, लालू को आउट कर दिया, सिर्फ बड़बोलापन नहीं चलेगा, यह कहकर.

लालू तो फिर भी जमीन वाले नेता थे. अमर सिंह की कौन जमीन है. अमर सिंह जब कहते हैं कि वे बेहद बीमार आदमी हैं और दो बच्चियों के पिता हैं, और तमाम तरह की दवाइयों पर उनका शरीर चल रहा है, तो एक बार दर्शक सोचने लगता है कि आदमी जेनुइन है. पर जब अगले ही पल वे भ्रष्टाचार की लड़ाई को पटरी से उतारने की खातिर बयान देने लगते हैं तो दर्शक समझ जाता है कि ये आदमी किसी बड़े एजेंडे के तहत बात व काम कर रहा है. वो एजेंडा है कांग्रेस को लाभ पहुंचाना.

अमर सिंह की मजबूरी है किसी बड़ी पार्टी का दामन थामना. क्योंकि वे जनता के आदमी नहीं हैं. उनकी जड़ें भ्रष्टाचारी पार्टियों से सिंचित होती रही हैं, जनता के दुख-दर्द व सरोकार से नहीं. सो, वो चाहें जितने भी बीमार हों, उनकी मजबूरी है कि वे अपनी कलाकारी से कांग्रेस के आकाओं का हित साधें ताकि अपनी आगे की बचीखुची जिंदगी के लिए खाद-पानी की व्यवस्था कर सकें. जरूरत हमें आपको है कि हम अमर सिंहों के मंसूबे को समझें और उन्हें अपने अपने स्तर पर एक्सपोज करें. आज से मैं वादा करता हूं कि अमर सिंह का कोई बयान या लेख या ब्लाग लेख भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित नहीं किया जाएगा क्योंकि बुरे लोगों की अच्छी बात को भी स्थान देने का मतलब होता है बुराई का साथ देना. मैं अमर सिंह से हजार गुना बेहतर और अच्छा मानता हूं प्रशांत भूषण और शांति भूषण को.

दूसरे, भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध में बहुत ज्यादा बुरे लोगों को हटाने के लिए कम बुरे लोगों का साथ देने का मौका मिले तो हमें साथ देना चाहिए क्योंकि बदलाव हर हाल में होना चाहिए. सत्ताधारी ताकतें यही चाहती हैं कि विरोध की आवाज बंट जाए, भोथरी हो जाए और इस प्रकार वे यथास्थितिवाद कायम करने में सफल रहें. मैं सभी से अपील करूंगा कि वे अन्ना के आंदोलन में तन मन धन से शिकरत करें और नाटकीय अमर सिंहों, दिग्विजय सिंहों को न सिर्फ एक्सपोज करें बल्कि इनकी हिस्ट्रीशीट भी प्रकाशित-प्रसारित करें.

यशवंत

bhadas4media@gmail.com

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Comments on “कांग्रेस के एजेंट अमर सिंह को एक्सपोज करने की जरूरत

  • yashwant ji, you have set an exemplary example by boycotting Amar Singh.
    Perhaps this will now help to start the process of media getting back its credibility after the Nira radia exposures…we are with you and with everyone who is ready to fight the curse of high – profile corruption…

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  • किसी भी चैनल पर अमर सिंह के खिलाफ कुछ नहीं प्रसारित होता…. पूछिये क्यों,,,, क्योंकि अमर सिंह हर चैनल और अखबार को लाभ दिलवाते रहते हैं… निवेश कराते रहते हैं… चैनल वाले अमर सिंह के चारण हैं…. कुछ नए और छोटे चैनल तो अमर सिंह के चरणों पर लोटते रहते हैं…. ऐसे में उम्मीद न्यू मीडिया से ही है… अमर सिंह के साथ साथ रजत शर्मा जैसे पत्रकारों का भी बहिष्कार करना चाहिए जिनको धंधे से आगे कुछ दिखाई नहीं देता… एक समझदार आदमी धंधा और देश-समाज, दोनों में संतुलन बनाकर चलता है… पर हमारे देश का दुरभाग्य है कि यहां धन्धेबाज देश बेच देने पर आमदा है और जो देशभक्त है वो भूखे मरने को मजबूर… यही असंतुलन क्रानति का कारण बनेगा…. अमर सिंह का बहिस्कार करके अचछी पहल की है…

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  • yashwant aap to kathmullaon ki bhasa bol rahe hain janab. kya amar singh se deal nahi hui. etv ke jagdish chandra kaatil ke baare mein apne khayaal maaf kijiyega sampadkiya se abgat karaiye. Rajasthan ka ye no. corrupt IAS apki biradari ke logo ka nitiniyanta bana hua hai. kya aapki lekhni mein unke liye INK hai. Hai to likhiye nahi to mooh kala kar dalali kijiye.

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  • jara aap apne bare me v bata dijiye ki aap kitne bade dalal hain…….kya ye sahi nahi hai ki kuch bade patrakaron ke karan hi apki dukan chal rahi hai……..jara apne giraban main v jhakiye yashwant babu………..ajit anjum aur anuranjan jha se to pahle se hi paia kha rahe hain aap ….iske alawa chote chote channel ko v blackmail karne ka khel aap karte rahte hain…….kuch din pahle aap v amar singh banna chah rahe the….unki dawat ke maje udaa aaye the aap…aaj wahi amar singh aaj apko bure lagne lage…lagta hai amar singh ne apko latia ke bhaga diya isliye unke bare me aap khunnash nikal rahe hain

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  • Anil Saxena says:

    एक अच्छा फैसला, एक अच्छा कदम. अगर हर अखबार और चैनल वाला यह सोच ले कि विवादों को जन्म देकर अपना हित साधने वाले, दुष्टों का माल खाकर संतो पर पत्थर फेकने वालों की ताकत अब मीडिया नहीं बनेगा तो निश्चित ही यह उजाले की ओर एक बड़ा कदम होगा. देर आये, दुरुस्त आये.

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  • Hitendra Kumar Shahi says:

    chliye yesantji jaldi sadbuddhi aa gayi. kal tak aap tatha kuchh so called intellectuals Amar singh ke ajende ko shakti pradan karne ke liye jantar- mantar par pradashan ka ahwan kar rahe the.

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  • prabhat kiran singh says:

    अमर सिंह जोकर की भूमिका में आ चुके हैं। कैरियर खत्‍म हो चुका है, मारे मारे फिर रहे हैं। लखनउ आते हैं तो कोई नहीं पूछता। आपने ठीक निर्णय लिया है यशवंत जी।

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  • Dinesh Joshi, joshi_dj_dinesh@yahoomail.com says:

    आपके लेख से संबंधित तीन बाते
    १ आपकी अदालत एक मनोरंजन कार्यक्रम के अलावा और कूच्ह नही हे. दर्शक इसे इसी रूप में देखते हे. मैने भी देखा.
    २ आपके अचानक अमर सिंह के खिलाफ हो जाने का कारण समझ से परे हे. शायद अमर उजाळा के संपादक को शो में देखकर आप नाराज हो गये. क्योकी भूषण बंधू के खिलाफ तो वो बहुत दिनो से बोल रहे थे अब ताल आप कहा थे.
    ३ अमर सिंह बिन पैंदी के लोटे के हे बस. जो उनका साथ दे वो हिरो बाकी सब चोर.

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  • Anchal Sinha says:

    Yashwant jee, aalekh achchha hai. Is samay sabse bari zaroorat Congress aur usake tamaam agenton ka pardafash karna hai. Lekin desh ka dubhagya hai ki Hamare Media ko , khaastaur se Visual media, ko in tamaam dalaalon ko pramukhta dene me, Mahngi shaadion aur kewal manoranjan aur salmaan khaan ko hi parosane ki beemaari ho gayee hai. Kya DD news ke alaawa kisi visual me koi samachar hota hai ? Kaash desh me ek sachchha news channel hota !

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  • मदन कुमार तिवारी says:

    क्या अब भडास पर भी सेंसरशिप लगेगा ? फ़िर भडास का अर्थ क्या रह गया ? मेरे जैसे लोग, जो हर किमत पर सेंसरशिप चाहे वह मीडिया मे हो या खुद के जिवन में स्वंय को , भडास से अलग हो जाना पसंद करेंगे । आपको इससे कोई असर नही पडेगा वैसे भी आप सेलिब्रिटी होने के की राह पर हैं, बन जाये अच्छी बात है। व्यक्तिगत संबंधो के स्तर पर जो रिश्ता है वह मेरी तरफ़ से बना रहेगा । जब सेंसरशिप, जातिवाद , संप्रदायवाद के खिलाफ़ घर में लडाई की शुरुआत कर सकता हूं । बीबी, परिवार से लड सकता हूं तो आप जैसे मित्र से भी एक लडाई सही । जाति में धोबी को अपने यहां खाना बनाने के लिये रखकर जातिवाद के खिलाफ़ लडाई की शुरुआत की थी मैने और सफ़ल हुआ । यहां तक की मेरे यहां आनेवाले रिश्तेदारों को भी उसका बनाया खाना पडा। मैं अमर सिंह को नाम से जानता भर हूं कभी मिला नही और न हीं मिलने की कोई ईच्छा है । परन्तु आपने यह लिखा है कि “ बुरे लोगों की अच्छी बात को स्थान देने का मतलब होता है बुराई का साथ देना “यही कारण बताया है आपने अमर सिंह के किसी लेख को प्रकाशित न करने का । आप शांतिभुषण और प्रशांत भुषण को क्या मानते हैं इससे भी मुझे कोई मतलब नही है । मैं तो इलाहाबाद वाले मामले में उन दोनो को एक ऐसा आदमी मानता हूं जिसने न सिर्फ़ तिकडम बाजी की है बल्कि एक मकान मालिक के विश्वास को ठेस पहुचाने और वकील वाली तिकडमबाजी से जमीन हडपने का काम किया है । आप कामिनी जायसवाल द्वारा शांतिभुषण के तरफ़ से अमर सिंह को भेजे गये कानूनी नोटिस को देखे तो बहुत सारी बाते समझ में आयेगी । रह गई अन्ना हजारे का साथ देने की बात , काश अन्ना हजारे का अनशन भ्रष्ट्राचार के खिलाफ़ होता , दुर्भाग्य से वह मात्र एक कानून को पास करने की जिद तक सीमित था। वैसे भी यह अपना –अपना नजरिया है , मैं यह टिपण्णी पुरी जिम्मेवारी के साथ बिना एक बुंद पिये लिख रहा हूं और बहुत हीं कष्ट हो रहा है लिखते हुये । भडास मेरी दिनचर्या का एक हिस्सा बन चुका था परन्तु आपके औरंगजेबी फ़रमान ने आहत किया है । भडास अपना लगता था , आज यह यशवंत नाम के एक आदमी कि मिलकियत लग रहा है चलिये भ्रम जितनी जल्दी टुट जाय वह अच्छा होता है । अब ज्यादा लिखना भी नही चाहता । मेरी शुभकामनायें आपके साथ है , जब सदबुद्धि आ जाये तो याद कर लिजियेगा ।

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  • Ganesh Chander Yadav says:

    मैं सभी से अपील करूंगा कि वे अन्ना के आंदोलन में तन मन धन से शिकरत करें और नाटकीय अमर सिंहों, दिग्विजय सिंहों को न सिर्फ एक्सपोज करें

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