जीवन और समाज की कहानी सुनातीं कुछ तस्वीरें

तस्वीरें सीधे दिल और दिमाग पर असर करती हैं. और कई कई बार देखने के बाद तस्वीरों से कई कई नए अर्थ निकलते हैं. फेसबुक पर कुछ ऐसी तस्वीरें मिलीं, जो ठिठक कर सोचने को मजबूर करती हैं. जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने अपने एक युवा दिनों की तस्वीर डाली है, यह लिखकर- ”पुत्र डॉ मिहिर ने कहीं घर के कबाड़ से मेरा यह फ़ोटो ढूंढ़ निकाला है! पता नहीं कब किसने कहाँ खींचा था. फिर भी, सुकूते-आरज़ी … “फूल खिले शाखों पे नए और रंग पुराने याद आए!”…”

ओम थानवी के युवा दिनों की तस्वीर और उनका लिखा यह स्टेटस, बहुतों को कमेंट करने के लिए मजबूर कर गया. तस्वीर हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं, कमेंट पढ़ने के लिए ओम थानवी के पास जा सकते हैं, क्लिक करें- फेसबुक पर ओम थानवी

हरनोत साहब शिमला में हैं. साहित्याकर हैं. इन्होंने फेसबुक पर कुछ तस्वीरें डालकर अपने देश-समाज की दयनीय हालत की पोल खोली है. हिमाचल प्रदेश में एक मंदिर के गेट व मंदिर की रसोई के गेट पर साफ-साफ लिखा है कि यहां शूद्रों का अंदर आना मना है. हद है ये. मनुष्य के साथ मनुष्य द्वारा इस तरह का बर्ताव कब तक जारी रहेगा, समझ में नहीं आता. हरनोत साहब ने चित्र प्रकाशित करते हुए जो स्टेटस लिखा है, वो ये है- ”ये सभी चि‍त्र हि‍माचल प्रदेश के जि‍ला बि‍लासपुर में स्‍थि‍त प्रसि‍द्ध तीर्थस्‍थल और प्राचीन मन्‍दि‍र परि‍सर मार्कण्‍डेय के हैं जो मैंने हाल ही में अपनी यात्रा के दौरान लि‍ए हैं। हम भले ही आज इक्‍कीसवीं सदी में पहुंच गए हैं लेकि‍न कुछ लोगों की यह कुंठि‍त और रूढि‍वादी मानसि‍कता हमें नि‍रन्‍तर पीछे की ओर धकेल रही है। इस घटि‍या मानसि‍कता के आगे वि‍कास और प्रगति‍ के दावे कि‍तने खोखले हो जाते हैं। राजनीति‍ और धर्म के मायने बदल जाते हैं। इंनसानि‍यत शर्मसार हो जाती है।” तस्वीरें यहां दे रहे हैं, कमेंट्स को फेसबुक पर जाकर पढ़ सकते हैं- फेसबुक पर हरनोत

और ये आखिरी तस्वीर किसकी है, ध्यान से देखिए और जरा सोचिए. नहीं समझे. तो बता रहे हैं. ये हैं मुकेश कुमार. नए लांच होने वाले न्यूज चैनल न्यूज एक्सप्रेस के एडिटर इन चीफ. इसके पहले मौर्या के लांचिंग एडिटर इन चीफ थे. कई चैनलों और अखबारों में काम कर चुके हैं. साहित्य के क्षेत्र में भी इनका काम है. मुकेश कुमार सराकोर वाली पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. उनका जीवन भी सादा और सहज है. अपनी विनम्रता, ज्ञान और सादगी के चलते वे पत्रकारिता में एक्टिविस्ट की तरह नजर आते हैं. और, युवावस्था की इस तस्वीर से मुकेश कुमार का एक्टिविज्म भी झलकता है.

Comments on “जीवन और समाज की कहानी सुनातीं कुछ तस्वीरें

  • धीरेन्द्र says:

    वैसे ही जैसे कई जगह लिखा पाया जाता है कि गैर मुस्लिम प्रवेश न करें..

    Reply
  • Shuddhchetan says:

    Faraq yeh hai keh muslimom ko gair mazhab ke samajhte hain, lekin yeh shudra to hindu samajh jate hain. Agar veh kahen keh hum hindu nahin rahenge, to hahakar rav uthega. To ya inhem bahishkrt karen, ya antarbhukt karen; lekin donom ek sath kaise ho sakte?

    Reply

Leave a Reply to धीरेन्द्र Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *