तोड़फोड़ से तय होगा प्राध्‍यापक!

: माखनलाल प्रकरण में महिला आयोग नहीं पुरुष राहत आयोग की तर्ज पर निर्णय : गत सप्ताह राज्य महिला आयोग सुर्खियों में रहा. महिला आयोग के कार्यक्षेत्र पर भी प्रश्न चिन्ह लग गये और कार्यप्रणाली हास्यास्पद हो गई. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्व विद्यालय की एक व्याख्याता ने पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष के विरुद्ध मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई. महिला आयोग ने शिकायत को रूझान लेकर पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष एवं अन्य अधिकारियों को सुनवाई हेतु बुलाया.

28 सितम्बर को आयोग ने सुनवाई की तारीख निश्चित की गई. सुनवाई में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष एवं कुल सचिव उपस्थित हुए परंतु शिकायतकर्ता व्याख्याता उपस्थित न हो सकी. महिला आयोग का काम क्षेत्र एवं क्षेत्राधिकार सिर्फ इतना है कि पीड़ित महिला की शिकायत की जांच करना एवं शिकायत सही होने पर समुचित कार्यवाही की मात्र सिफारिश करना. शिकायत सही नहीं होने पर शिकायत निरस्त करना.

परंतु 28 सितम्बर को महिला आयोग ने सुनवाई में मुद्दा यह बना लिया कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष को हटाया जाना उचित है अथवा नहीं. इतना ही नहीं सुनवाई में मीडिया को भी अनुमति दी गई एवं आरोपित विभागाध्यक्ष को सेलिब्रेटी की तरह सम्मान दिया गया, जिसमें यह प्रतीत हो रहा है कि शिकायतकर्ता पक्ष विभागाध्यक्ष है. आरोपित पक्ष महिला है तथा पुरूष उत्पीड़न की जांच महिला आयोग द्वारा की जा रही है.

महिला आयोग ने भी पीड़ित महिला की शिकायत को दरकिनार करते हुए कुल सचिव को निर्देश दिया कि विभागाध्यक्ष को तुरंत बहाल किया जाए तथा उसकी सूचना आयोग को अविलंब भेजी जाए. कुल सचिव द्वारा भी सहमति दे दी गई. इतना ही नहीं आयोग एवं विभागाध्यक्ष द्वारा आरोपी छात्रों के पंजीबद्ध मुकदमें वापस लेने पर भी जोर दिया गया जो कि महिला आयोग के कार्यक्षेत्र एवं न्यायक्षेत्र के बाहर था. आयोग ने ऐसे कार्य किया जैसा कि न्यायालय में मुकदमा चल रहा है.

न्यायालय भी अपने न्यायक्षेत्र में कार्य करता है परंतु आयोग ने तो हद कर दी. आयोग की इस बहाली के निर्देश को मीडिया द्वारा भी सुनवाई का चित्र प्रकाशित कर यह संदेश दिया है कि महिला उत्पीड़न की शिकायत करने पर आरोपित पक्ष को अपने न्यायक्षेत्र के बाहर जाकर भी निर्देश दे सकती है. आयोग द्वारा 28 सितम्बर को की गई अवैधानिक कार्यवाही चर्चा का विषय बन गई है.

अब प्रश्न यह है कि क्या महिला आयोग को कुलपति के आदेश को वापस लेने का निर्देश देने का अधिकार है? कतई नहीं यदि है तो क्या आयोग ने इस विषय पर विचार किया कि 23 सितम्बर द्वारा विश्वविद्यालय में लगभग 2 लाख की सम्पति को तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया, इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या कुलपति द्वारा विभागाध्यक्ष को हटाये जाने के निर्णय को छात्रों के तोड़फोड़ एवं गैर-कानूनी आंदोलन कर दबाव डालने का अधिकार है. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की सम्पत्ति का नुकसान छात्रों ने किया इसकी किसी को चिंता नही.

तोड़फोड़ का जिम्मेदार कौन?

23 सितम्बर को माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष को हटाये जाने पर छात्रों ने विरोध प्रकट करते हुए विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ की एवं लगभग 2 लाख रुपए की सम्पत्ति का नुकसान पहुंचाया. आक्रोशित छात्र विभागाध्यक्ष की बहाली की मांग पर अड़ गए एवं क्रमिक अनशन भी किया गया. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने 23 सितम्बर को 20 छात्रों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट थाना एमपी नगर में दर्ज कराई. पुलिस ने भारतीय दंड विधान की धारा 147, 427 एवं 294 के तहत प्रकरण दर्ज किया. परंतु पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई.

कुलपति द्वारा विभागाध्यक्ष की हटाए जाने का आदेश सही है अथवा गलत, इसका निर्णय तो न्यायालय ही कर सकता था, परंतु यह निर्णय छात्रों ने अपने गैर-कानूनी आंदोलन से करवा लिया एवं विभागाध्यक्ष को पुन: बहाल किया गया. अर्थात कानून एवं व्यवस्था का विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं. विश्वविद्यालय का कोई भी प्रशासनिक निर्णय जोर-जबरदस्ती से तोड़फोड़ में बदला जा सकता है. वह इस गैर-कानूनी आंदोलन से प्रमाणित हो गया है. इसका असर भविष्य में भी होगा जब छात्र ही तय करेंगे कि कौन सा प्राध्यापक रखा जाए किसे हटाया जाए. कुलपति को भी छात्रों से पूछकर निर्णय लेना होगा. यह गंभीर विचारणीय प्रश्न है.

जी के छिब्‍बर स्‍वतंत्र लेखन करते हैं.

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Comments on “तोड़फोड़ से तय होगा प्राध्‍यापक!

  • महोदय छिब्बर जी
    सबसे पहले तो आप राज्य महिला आयोग के अधिकारों और दायरों का अध्ययन करके अपने ज्ञान को दुरुस्त करें.
    – आपके तर्कों से लग रहा है कि ऐसी संवेधानिक संस्थाओं पर आपका भरोसा नहीं है. आपकी माने तो ऐसे सारे आयोगों को बंद ही कर देना चाहिए.
    – क्या आपको पता है कि उक्त शिक्षिका ने विभाग अध्यक्ष पर क्या आरोप लगाये हैं ? और इन आरोप के दायरे मैं कौन-कौन आ रहा है ?
    – क्या आपको पता है कि राज्य महिला आयोग के नोटिस पर जब किसी को पद से हटाया जा सकता है तो वाही आयोग जब कुर्सी पर बैठाने का आदेश देता है…तब आपको दिक्कत है. अद्भुत !
    – आरोप लगाने वाली मेडम ही सुनवाई में उपस्थित नहीं हुई, इसे क्या माने…जबकि मामला बेहद संवेदनशील हो चला था.
    – क्या आपको पता है उक्त शिक्षिका की नियुक्ति आरक्षण नियमों के विरुद्ध हुई है. क्या आपने आयोग की सुनवाई को कभी देखा है…यदि नहीं तो एक बार जाकर देख लें.
    – क्या आजाद देश के छात्रों को यह तय करने का भी हक़ नहीं है कि वह किनसे पड़ेंगे और किनसे नहीं.
    – आपको विश्वविद्यालय के २ लाख रूपये के नुकसान की चिंता है, अच्छी बात है. चिंता यह भी करें कि विश्विद्यालय के सेंटर्स से कितनी रकम वसूली गयी है, जिसके आरोप सेण्टर संचालकों ने लगाये हैं. चिंता यह भी करिए कि विश्विद्यालय के कम के ठेके किस राज्य में दिए जा रहे हैं और वहां का विश्विद्यालय से क्या सम्बन्ध है.
    आशा है आप खुली आँखों से चीजों को देखने की कोशिश करेंगे.

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  • bujurgon ne kahavate aise hi nahi kahi balki aap jaise kuch maharathiyon ke vyavahar ka adhyanan karne ke baad hi ki hai ki adhjal gagri chhalkat jaye isliye lekhani chalane se pahle vishay ki poori jaankari hona zarrori hai. bina tathyon ke baat nahi karni chahiye or khastor se un chhatron ke bare mein jo kal aap hi tarah patrarita me jaane wale hain.

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  • jis cheez ke baare mein puri tarah pata na ho us par likhte nahin hain. aur PPSingh Vibhagadhayaksh hain pradhyapak nahin, aapki jankari ka liye main bataun.

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  • छ्ब्बर जी – सबसे पहले आप से ये पूछना चाहुगा की आज तक आप ने कोई आन्दोलन किया है ? अगर नहीं तो आप को बता दू की आन्दोलन गैर क़ानूनी नहीं हुआ करते वे उस कानून के खिलाफ ही हुआ करते है जिस कानून की बात आप कर रहे है. आज़ादी की लड़ाई में अगर आन्दोलन अंग्रेजो के आदेश पर हुए होते तो आज आप कही कोने में आज़ादी की चाह में बैठे होते. दूसरी बात इतना संवेदनशील मामला होने पर की जाच शुरू होने से पहले ही दूसरे पाच को दोसी मान उसे पद से हटा दिया गया लेकिन आयोग में पहला पछ ही उपस्थित नहीं हुआ इसे आप क्या कहेंगे ?
    आप से अनुरूद है की आप इसके हर पहलु को समझे ..

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  • Ankur Vijaivargiya says:

    meghna ji se niveden hai ki apni bhasha durust kare. is tarah ke shabd batatae hai ki aapki patrkarita aur bhasha ka kya statr hai.
    Aur kaun kis ka chaplus hai ye pura makhanlal janta hai.[b][/b]

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  • Aap log chibbar ji ke bare mei itni gandi comment kar rhai hai magar chibbar sahab varist adhivakta aur jane mane kanuni estambkar hai.

    Air such batau jo tod phod karta hai arajakta paida karta hai vo arajak hi hota hai. Aap sab kisi ek saksh ke chaplus ho.

    Aaap sab M. L. mei kuthiyala ji ko bardast nahi kar pa rahhe ho.

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  • makhanlal ka purwa chhatra aur patrakar says:

    yashwant ji, bhadas ko sirf bhadas nikalne ka madhyam banana ho to swatantra lekhan ke naam par kuchh bhi post kar den, aur aisa is pure prakran me kai baar dikha. magar media se judi bharosemand site ke liye jaroori hai ki samwedanshil mamlon me thodi taftish jaroor kar len. is site par patrakar ya chhatra-patrakar aate hai aur we aam aadmi ki tarah bilkul anbhigya nahi hote, hasyaspad aur bebuniyad samacharo-vicharon se site ki vishwasniyata par sawal khada hota hai, aur ye bhi ki is site ka istemaal koi… bhi kisi tarah kar sakta hai…

    chhibbar mahashaya, SWATANTRA LEKHAN me kya hawai baaten hi hoti hain, bebuniyadi aur prayojit… nishpakshta barten maharaj… sirf kisi media sansthan se nahi juda hona swatantra lekhan nahi… aur information jutane aur use pakka karne ke baad hi likhen, agar prayojit ho to bhi…
    1. adam kad darwaje ke kaanch ki keemat 2 lakh nahi hoti bhai, aap khud jakar mauke ka jayaja len, aur crime ki report likhne ki ise seekh maanen, salah bhar nahin…
    2.khabron me sirf 5 ke khilaf fir ki baat aayee thi… magar aapne sahi sankhya me bhi ek number jod di, 19 ke bajae 20 likh dala…
    —-Fir ki copy hai kya aapke paas, hai to kahan se aayee? kya rti se nikalwaya? copy sirf aaropi aur muddai ko di jaati hai. lekhan se jahir hai aap muddai paksh ke hain ( copy ko lekar mere upar bhi aap sawal khada kar sakte hain, par main aapki tarah swatantra patrkar nahi hun, aur bhi kuchh likhunga to aapse tulna ho jaegi aur isse aapka kad badhega, jiske kabil aap nahin ) … kuthiyala ji ko kahen, chhatron ka utpeedan band karen
    3. aap batayen, tod-fod par utaru 20 students sirf ek kaanch todenge… hasyaspad… itni kamjor to nahi hoti jawani… yuwawastha kya aapne nahi jiya hai… ya aap bhi kuthiyala mahoday ki tarah shikhandi hain, mahila ko aage kar teer chalate ho… sharm karo yaar…
    4. mahila ke shikayat patra me utpeedan shabd kahhin nahi, saboot juta sako tabhi sangeen mamlon haath daalo chhibar
    5. kuthiyala ne 32 ghante ka jo waqt liya kanooni salah jutane me, tumse behtar kya unhen kanooni visheshagya nahi mil paya, kyon majboor hue ayog ka aadesh manne ko… ab ye galthethrai mat karna ki unhone turant salah maan li… aadesh dophar me, poora din gujar diya, dusre din bhi pura khatam… 8pm to raat hi mana jaega, kyun???
    6. yah dhyan rakho chhibbar mahodaya, kiske paas kitne adhikar hain aur kitni taqat, wo jab istemaal karega tabhi pata chalega… samwaidhanik sanstha ke aage kuthiyala aur aap kuchh bhi nahi…
    7. ab tak fir wapas nahi hua student ke khilaf, jabki prashasan ke ashwasan ke baad hi anshan se uthe the chhatra… kya unhe mansik utpeedan aur prashan dwara khauph paida karne ke khilaf human right commission nahi jana chahiye…
    8. vc ne do girls students ke khilaf fir darj karaya hai, balwa karne ka arop, todfod ka arop… kya unhen mahila aayog me vc ke khilaf mahila utpeedan ka mamla darj nahi karna chahiye????

    kya-kya likhun… chhibbar mahodaya, mai aapke madhyam se kuthiyala ji ko salah de raha hun, thodi bhi sharm-haya baki ho to isteefa de den aur samman poorwak pradesh chhor den… jo hindustaan ka dil hai… warna bade be-aabroo ho tere kuche se nikle hum… keh rote firenge… students padhne aaye hain, unhen padhne do yaar… mamla khatm karo ab… unke man me system ke prati, vc ke prati ghrina mat bharne do… aaj kuthiala hain vc, kal ko koi aur hoga jo shayayad behtar insaan ho, us par bhi bharosa banne me waqt lagega… kisi bhi sanstha ke mukhiya ka pad ek sansthan ke mafiq hota hai, use badnam mat karo…

    yashwant ji, apne site ko aap shor mat banne den, ise buland awaz banayen…

    makhanlal ke purwa chhatra aur patrakar

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  • M.L.university k bare me ek sher arj hai, ”Barbad -e -gulista karne ko jaha ek hi bulbul kafi hai ! Har Shakh pe bulbul baitha hai ,anjam e Gulista kya hoga” ..bye Naina ranjan

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