नीरा के चलते ही अटल बिहारी वाजपेयी ने अनंत कुमार का मंत्रालय बदल दिया था

नीरा राडिया से अनंत कुमार की नजदीकियों के चलते ही प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय लेकर संस्‍कृति मंत्रालय भेज दिया था. नीरा के चलते ही अनंत कुमार का अपने परिवार से झगड़ा भी शुरू हो गया था. यह खुलासा वरिष्‍ठ वकील आरके आनंद ने अपनी किताब “Close encounters with Niira Radia” में किया है.

आरके आनंद लिखते हैं, ”नीरा से बतियाते हुए मुझे ऐसा लगता था कि वह कोई बड़ा दांव मारने जा रही है, लेकिन वह क्या दांव मारने जा रही है इसके बारे में मुझे कभी पता नहीं चल पाया. उस वक्त मुझे इस बात का जरा भी अहसास नहीं था कि नीरा राडिया अपने व्यावसायिक हितों को साधने के लिए राजनीतिक संपर्क बढ़ाने में लगी हुई है.”

आरके आनंद आगे लिखते हैं, ”यह मेरे लिए शॉकिंग था. एक दिन नीरा से मिलने मैं उसके फार्महाउस पहुंचा तो देखा एनडीए सरकार के एक मंत्री अनंत कुमार नीरा के साथ वेस्‍टर्न म्‍यूजिक के धुन पर थिरक रहे थे.” आरके आनंद के अनुसार, ”नीरा के चलते अनंत कुमार की पत्‍नी ने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से अपने पति को बचाने की गुजारिश की थी, जिसके बाद पीएम ने अनंत कुमार का मंत्रालय बदल दिया था.

अपनी किताब में आरके आनंद हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री राव वीरेंद्र सिंह के बेटे राव धीरज सिंह का भी जिक्र करते हुए लिखा है कि सहारा इंडिया के लिए काम कर चुके राव धीरज सिंह नीरा राडिया के साथ ही उसके फार्म हाउस में रहते थे. राव धीरज ने भी दिसम्‍बर 2010 में खुलासा किया था कि अनंत कुमार के कारण ही नीरा राडिया को सीक्रेट फाइलें आसानी से मिल जाया करती थी. अनंत ने ही नीरा की मुलाकात रतन टाटा से कराई थी.

आरके आनंद ने हरआनंद पब्लिकेशन से प्रकाशित अपनी किताब में और भी कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. आनंद लिखते हैं कि उनकी मुलाकात नीरा से उनकी पत्‍नी की दवाइयों के चलते हुई थी, जो बाद में नीरा के उनके बगल में रहने आने के बाद और घनिष्‍ठ हो गई थी.

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Comments on “नीरा के चलते ही अटल बिहारी वाजपेयी ने अनंत कुमार का मंत्रालय बदल दिया था

  • R K Anand ke baare me bhi likh diya hota ki wo ek aisa waqil rahe hain jo ki apne amir clients ke liye gawah tak kharidne ki koshish me lage rahte the…

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  • tribhuwan says:

    खुद एक नंबर का झूठा और जुगाड बाज़ी में लगा रहने वाला वकील है. इसकी किसी बात पर ऐतबार करना ही धोखा खाने जैसा है

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  • अनंत कुमार अकेले नहीं हैं ….ऐसे चोट्टों-लफंगों की ज़मात भाजपा में भी बहुतायत में आ गयी है जो डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय की विरासत को अपनी बाप की कमाई समझ बेदर्दी से उड़ाने में लगी रहती है. अगर ऐसे अवसरवादी दो कौड़ी के लोग भाजपा में नहीं होते तो आज इस पार्टी का कोई मुकाबला करने वाला नहीं था. चुकि काबुल में भी गधे पाए जाते हैं अतः भाजपा में होना कोई आश्चर्य नहीं है लेकिन कर्णधारों को थोडा सम्हलना होगा.

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  • पंकज झा says:

    बेनामी टिप्पणी करने को मैं कायरता समझता हूँ. ऊपर की टिप्पणी मेरी ‘पंकज झा’ की है. शायाद कुछ तकनीकी गडबडी के कारण नाम डिस्प्ले नहीं हो पाया था. एक बार और इस टिप्पणी के माध्यम से दलालों को लानत भेजता हूँ.

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