पत्रकारिता कॉलेज खा गया छात्रों का पैसा!

को खां क्या चल रिया हेगा? केन लगे, कन्ने कट गए, सर पर दे रिया हे मिला मिला के… झीलों की नगरी भोपाल का अपना एक खास अंदाज है. भोपाल शहर अपनी खूबसूरती के लिए पूरे देश में जाना जाता है. साथ ही पत्रकारों की उद्गम स्थली अगर भोपाल को कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. भोपाल में समय के साथ बहुत तरक्की हुई… मध्य प्रदेश में इसे एजुकेशन हब की उपाधि मिली… तो कई प्राईवेट समूहों ने यहाँ अपना वर्चस्व कायम किया.

ऐसे ही अपनी एक अलग सल्तनत बनाये हुए है पीपुल्स समूह… जो कि स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कदम बढ़ा रहा है. मीडिया के बढ़ते ग्लैमर को देखते हुए पीपुल्स समूह ने 2007 में पीपुल्स पत्रकारिता शिक्षण संस्थान के नाम से एक पत्रकारिता महाविद्यालय की शुरुआत की. मध्य प्रदेश की पत्रकारिता से जुड़े कई नामचीन चेहरे इससे जुड़े… लेकिन अंदरूनी कलह और कॉलेज की गन्दी राजनीति के चलते धीरे-धीरे ये सब लोग यहाँ से खिसकते गए. समस्या कॉलेज में पढ़ाई की थी, प्रयोगात्मक रूप से छात्रों को सक्षम बनाने की थी. 2007 से करीब डेढ़ साल तक महाविद्यालय को सुचारू रूप से चलाने का श्रेय तात्कालीन प्राचार्य विनोद तिवारी को जाता है. ये उनका व्यक्तित्व था कि वे व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर या प्रबंधन स्तर पर छात्रों की हर समस्या को सुलझा लेते थे… लेकिन विनोद तिवारी के जाने के बाद कॉलेज की स्थिति ‘धोबी के कुत्ते’ की तरह हो गई. न अब वह घर का रहा और न घाट का. बी.एन.गोस्वामी, पंकज पाठक, संदीप श्रीवास्तव …एक-एक कर सबने प्राचार्य का पद संभाला…लेकिन फिर कॉलेज का अंतर्कलह…और फिर शुरू हुआ इस्तीफों का दौर.

अंत में समूह की प्रबंधन टीम के हिस्सा आस्मां रिजवान को कॉलेज के प्राचार्य का पदभार सौंपा गया… अभी तक आस्मां रिजवान, पीपुल्स समूह के मैनेजमेंट कॉलेज में व्याख्याता के तौर पर पढ़ाती थी. ऐसे में जब बागडोर आस्मां रिजवान ने संभाली तो पत्रकारिता के कॉलेज को उन्होंने मैनेजमेंट कॉलेज की लाठी से हांकना शुरू कर दिया…शायद पत्रकारिता कॉलेज चलने का अनुभव  उनमें नहीं था. वे शायद भूल गईं थी कि उन्हें लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की उद्गम स्थली को क्रियान्वित करना है… हर छात्र कल के लोकतंत्र की आवाज है.

अपनी तानाशाही आदत से मजबूर आस्मां रिजवान ने पहले तो सत्र के बीच में ही महाविद्यालय की फीस में इजाफा कर दिया…जबकि विवरण पुस्तिका में ऐसा कुछ भी उल्लिखित नहीं था… छात्रों को प्रवेश के समय पूरी फीस के बारे बता दिया गया था… यदि उन छात्रों को बीच सत्र में फीस बढ़ने की बात पता होती तो शायद कई छात्र यहाँ पर प्रवेश नहीं लेते… लेकिन एक साल की पढ़ाई के बाद अचानक फीस में हुई बढ़ोत्तरी को छात्रों ने अपने भविष्य को देखकर स्वीकार कर लिया… 2007-10 के बीच बीएससी (ईएम) करने वाले छात्रों का कोर्स जून 2010 में समाप्त हो गया…. छात्रों ने जब विद्यालय में जमा अपनी काशन मनी की मांग की… तो महाविद्यालय प्रबंधन की और से उन्हें झुनझुना पकड़ा दिया गया… जबकि महाविद्यालय में प्रवेश के समय छात्रों को जो विवरण पुस्तिका मिली थी उसमे साफ़ तौर पर महाविद्यालय काशन मनी, पुस्तकालय काशन मनी का जिक्र किया गया है.

यशवंत जी काशन मनी का मतलब पैसों की पुनर्वापसी होता है… लेकिन महाविद्यालय प्रबंधन ने छात्रों को 500 रुपये देकर चलता कर दिया… बस अपनी प्रबंधकीय आवाज़ से छात्रों की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है…. बस तानाशाही रवैये से चल रहा है कॉलेज. कालेज की फीस विवरण पुस्तिका एवं वापस की गई धनराशि का चेक संलग्‍न है.

काशनमनी

चेक

लेखक कृष्‍ण कुमार द्विवेदी पत्रकारिता के छात्र हैं.

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Comments on “पत्रकारिता कॉलेज खा गया छात्रों का पैसा!

  • vinod sir ke baad jab institute sandeep sir ne sambhala tab placment bahut achha hua, students ki problem ko sandeep sir ne apni problem samjha aur solv kiya. sandeep sir is our good teacher as well as good principal and also good manager. sandeep sir ne electronic media dept mein kai logon ko appoint bhi kiya lekin kirti chaturvedi ne inke saath bhi wahi karne ki koshish ki jo paresh sir ke saath kiya tha, kerti mem ke continue prayaso se sab ek ke baad ek resign deker chale gaye, lekin is sabke baad bhi managment ne keerti ji ko nahi hataya. ab bhi samay hai warna keerti mem pims pe tala lagwaker hi niklengi.

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  • collage ki rajniti ka natija chatro ko jhelna padta hai.rahi bat chatro ke kosan mani ki to sayd collage vale bhul gai hai ki is kalug me abhi krishn jinda hai.danv ka raj nahee chalega.

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  • amit singh tiwari says:

    yaswant sir peoples group ke bare me mai or kuch batana chahta hu sir mera nam amit singh tivari hai maine peoples collage me 2009,10 me MJ me admission liya tha admission ke samay kaha gaya tha ki collage ka payas ke nam se 1 paper chalta hai our placement bhi karwa diya jaaega kintu class me jane par pata chala ki sab jhuth hai tin char ladko ne milkar prayas paper taiyar kiya lekin manegment ne print nahi karaya our bola k paisa nahi hai iske bad ki kahani suniye college ne phis bada di >:( our kuch bacho ko form nahi bharne diya jisme maibhi samil hu 😮 eske bad meri padai chhut gyi or principal se es mamle me bat karne par kaha gya ki jada bolo ge to 500 fine lage gi or mere doira tc magne par kaha gya pure course ke fees jama kar ke le jao or noc bhi nahi di gyi or bar bar prathna karne par bhi dhamkaya gya mera mob.no. 9575593810 ye hai jis par mejhe management ke captain amris doira dhamki di gyi ki jyada patrkarita dikhao ge to dekh lu ga principal se kuch mat kaho

    collage ki principal collage me sirph 5-10 min. ke liye hi aati hai vobhi kai kai dino bad aati hai

    MJ ka 3rd sem 1 bhi din nhi laga faikalti ke nam par sirf 2 hi rasna or kirti mam hai jinse kuch nahi banta or mujh ye lagta hai ki vo agr 3rd sem ke 5 paper me kuch bhi bata paye to ye onke liye bahut bari bat hogi

    amit singh tivari
    mob no. 9575593810

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