पोल खोलने पर पत्रकार आजाद खालिद के पीछे पड़ गया पूरा प्रशासन

: गाजियाबाद पुलिस कर रही पूरे परिवार को प्रताडि़त : उत्‍तर प्रदेश में व्‍याप्‍त सरकारी भ्रष्‍टाचार के खिलाफ खबरें छापने की कीमत एक पत्रकार को छुपकर चुकानी पड़ रही है. प्रशासन तंत्र पत्रकार आजाद खालिद और उनके परिवार को बुरी तरह प्रताडि़त कर रहा है. पुलिस ने उनके परिवार पर बिजली चोरी का आरोप जड़कर इस तरह से उनके भाई को उठाकर ले गई, जैसे किसी आतंकवादी को घेरकर पकड़ा जाता है. आजाद खालिद का आरोप है कि यह सारी कार्रवाई गाजियाबाद के जिलाधिकारी के आदेश पर की जा रही है.

आजाद खालिद का परिवार साप्‍ताहिक अखबार ‘द मैन इन अपोजिशन’ का प्रकाशन करता है. आजाद खालिद के पिता इस अखबार के संपादक हैं. बताया जा रहा है कि इन लोगों ने जीडीए और अन्‍य विभागों में हो रही गड़बड़ी की कई खबरें प्रकाशित कीं. जिनमें करोड़ों की लागत से बने फ्लाई ओवर में घोटाला, अल्‍प आयवर्ग के लिए बनाये जाने वाले आवास की जमीन को जर्जर बताकर बिल्‍डर के हाथों बेच देना, इस तरह की कई खबरें अखबार में प्रकाशित हुई थी. आजाद खालिद ने कहा कि इन सारी खबरों को तथ्‍यों और सबूतों के आधार पर लगाया गया था.

आजाद खालिद ने बताया कि इन खबरों के छपने के बाद 24 सितम्‍बर 2010 को सूचना निदेशक नवल कांत तिवारी ने मुझे अपने ऑफिस बुलवाया तथा कहा कि आप ये सब बंद कर दीजिए. अन्‍यथा आपके अखबार को बंद कर दिया जाएगा, इसे चलने नहीं दिया जाएगा. आप हमारी पॉवर को नहीं जानते हैं. आपसे डीएम हृदयेश कुमार काफी नाराज हैं. इसलिए आपकी भलाई इसी में है कि ऐसी खबरें छापना बंद करिए और इसका खंडन करिए. आजाद खालिद ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

आजाद खालिद ने धमकी मिलने के बाद 25 सितम्‍बर 2010 को एक शिकायती पत्र प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, सीबीआई, उत्‍तर प्रदेश के गृह सचिव समेत तमाम लोगों को भेजकर मामले की जांच कराने तथा उनके परिवार की रक्षा करने की गुजारिश की.  आजाद ने बताया कि इसी बीच एक बार जब मैंने एक समाचार के मामले में डीएम हृदयेश कुमार से उनका पक्ष लेने के लिए फोन किया तो उन्‍होंने धमकाया कि अखबार नहीं चलने दिया जाएगा, ऐसी खबरें छापना बंद करो और इसका खंडन करो नहीं तो बहुत मुश्किल में पड़ जाओगे.

इस बीच प्रेस काउंसिल की तरफ से पत्र आया लेकिन प्रशासनिक दबाव में उस डाक को मेरे पास पहुंचने ही नहीं दिया गया. इसके बाद दोबारा रिमांइडर आया जिसमें आजाद को सारे सबूत उपलब्‍ध कराने के निर्देश दिए गए थे अन्‍यथा शिकायत खारिज किए जाने की चेतावनी थी. इसके बाद आजाद ने सारे सबूत प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को उपलब्‍ध कराते हुए अपने साथ घटित घटनाओं से भी अवगत कराया. इसके बाद एक लिखित शिकायत डाक विभाग से भी किया. जिस पर उन्‍हें अब इस तरह की गलती दोबारा न होने का आश्‍वासन दिया गया.

इस बीच यूपी राजस्‍व परिषद की तरफ से भी एक पत्र आया जिसमें जांच से शिकायतकर्ता को भी अवगत कराए जाने के निर्देश दिए गए थे. इसमें सबसे विचित्र बात यह थी कि आजाद खालिद ने जिस जिलाधिकारी के खिलाफ शिकायत की थी, जांच करने की जिम्‍मेदारी उसी जिलाधिकारी को सौंपी गई थी.  इसके बाद से जिलाधिकारी और अधिक खिन्‍न हो गए. इस बीच लगातार आजाद खालिद के परिवार को प्रताडि़त किए जाने का उपाय किया जाने लगा.

इसी बीच परसो पुलिस दल भारी-भरकम लाव लश्‍कर के साथ आजाद खालिद के घर पहुंची. परिजनों द्वारा यह पूछे जाने पर कि आखिर उन लोगों की गलती क्‍या है. इस पर पुलिस ने बताया कि आपलोग रेजिडेंसियल इलाके में कामर्शिलय काम कर रहे हैं. जब आजाद के परिजनों कहा कि यहां क्‍या कामर्शियल हो रहा है, तो पुलिस वालों ने कम्‍प्‍यूट को दिखाते हुए कहा कि यह कामर्शिलय के लिए ही तो है. इसके बाद पुलिस उनके घर की तलाशी लेकर तमाम कागजात उठा ले गई.

आजाद ने बताया कि जब कम्‍प्‍यूटर वाले मामले में पुलिस की बात नहीं बनी तो उसने मामले को बदल कर कहा कि स्‍वीकृत नक्‍शे के अंगेस्‍ट एक तार डाला हुआ है. इसके बाद पुलिस ने बिजली चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया. आजाद ने बताया कि कोई भी आकर देख सकता है कि सभी जगहों पर कवर वाले तार लगे हुए हैं, आखिर कैसे कोई इन तारों में कटिया लगाकर चोरी कर सकता है. उन्‍होंने बताया कि पुलिस परेशान करने के लिए बिजली चोरी का झूठा मुकदमा लिख लिया.

उन्‍होंने कहा कि पुलिस इतने से ही नहीं मानी उसने अखबार छापने वाले प्रेस को भी सील कर दिया. मेरे पिता के खिलाफ धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. बीती रात पुलिस ऐसे उनके घर पर पहुंची जैसे किसी आतंकी को गिरफ्तार करने पहुंची हो, इसके बाद मेरे छोटे भाई को गिरफ्तार करके ले गई. जिसका इस मामले से कोई भी लेना देना नहीं है. पुलिस ने धमकी दी है कि उसका करियर बरबाद कर दिया जाएगा. हमारे परिजनों को चेतावनी दी है कि खालिद को लाओ नहीं तो सभी को बरबाद कर दिया जाएगा.

आजाद खालिद ने कहा कि अगर हमारी खबर गलत है तो इसके लिए कानूनी प्रावधान है उसके तहत कार्रवाई कीजिए सजा दीजिए. अगर मेरे पास अपने खबरों के पक्ष में सबूत न हो तो जो कार्रवाई करनी हो करिए, परन्‍तु अगर मेरे खबर सही हैं तो उनकी भी जांच की जानी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि अगर मैं गलत हूं तो सरकार और प्रशासन मुझे मरवा दे, मैं अपना खून माफ कर दूंगा, परन्‍तु अगर अधिकारी गलत हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए. उन्‍होंन कहा कि इस भ्रष्‍ट सरकार और उसके नुमाइंदों के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ूंगा और जो कुछ करना होगा करूंगा. जरूरत पड़ी तो जान देने से भी पीछे नहीं हटूंगा.

Comments on “पोल खोलने पर पत्रकार आजाद खालिद के पीछे पड़ गया पूरा प्रशासन

  • इमरान ज़हीर, मुरादाबाद says:

    यही होता है भाई , पोल खोलो और जोखिम मुफ्त में ले लो यही है पत्रकार की जिंदगानी | सरकार में बैठे ऐसे कथित अधिकारी ऐसी खबरों के बाद पूरा दबाव बनाने की कोशिश करते है और इसका या तो खंडन करने की बात करते है या फिर उस पत्रकार को फ़साने की पूरी कोशिश करते है| कुछ ऐसा ही मामला मेरे साथ भी घटने को तैयार था लेकिन मुझे ही फ़साने की कोशिश कर रहा एक कथित अधिकारी की कोशिश बेकार गई| बिजली विभाग में अधिकारियों द्वारा ली गई रिश्वत की खबर जब जर्नलिस्ट टुडे में प्रकाशित हुई तो इन अधिकारीयों से जवाब तलब किया गया था जिसके बाद ये अधिकारी उस उपभोगता से ये लिखवाने की जुगत में थे की उनसे कोई रिश्वत नहीं मांगी गई है लेकिन उपभोगता ने ऐसा कुछ नहीं लिखा और फिर अधिकारी उपभोगता के घर के चक्कर लगाते रहे की किसी तरह से उससे लिखवा लिया जाये| उपभोगता के पास जब कोई दाल नहीं गली तो उसे पैसे का प्रलोभन भी दिया गया लेकिन उपभोगता दवरा पैसे न लेने पर खुद की नौकरी चली जाने और अपने बच्चो के भविष्य की चिंता बता कर उसकी मदद करने के लिए निवेदन किया जाने लगा साथ ही उसे रिश्वत की रकम भी वापस कर दी गई| इसके बाद उपभोगता ने अधिकारी से पैसे वापस कर दिए जाने की जानकारी एक पत्र के माध्यम से उच्चाधिकारी को दी साथ ही इन कथित अधिकारीयों पर इनके बच्चो के भविष्य को देखते हुए कोई भी कार्यवाही न करने का निवेदन भी किया|
    [b]यहाँ इस बात को कहने का मकसद सिर्फ इतना है की इन जैसे कथित अधिकारी खुद की पोल खुलने के बाद पत्रकारों को फ़साने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है और ऐसा ही आज़ाद खालिद साहब के साथ हुआ और न जाने कितने पत्रकारों के साथ हो रहा होगा|
    [/b]

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  • PARDEEP MAHAJAN says:

    पत्रकार खालिद के साथ जो हो रहा है वो किसी के साथ हो सकता है इसलिए इस पत्रकार को जो भी मदद चाहिए होगी वो हमारा संगठन करेगा – अमित मिश्रा ( महासचिव -ALL INDIA JOURNALIST FRONT )-9810755653 (www.allindiajournalist.com )

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  • Ye kya hai yaar, U.P. ka prashashan hi Leden team ki tarah kaam karta hai, pata nahin ye kab mitega.
    Jab ek sampadak ki ye halat ho sakti hai, phir aam admi ki kya aukat

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  • ADIL SAIFI says:

    KHALID BHAI AAP SACHAI KE KEMAT ADAA KAR RAHE HO AGAR AAP KE KALAM NE SACH UGLA HAI TO JEET AAPKE NESHCHINT HAI MAGAR ES TUFFAN SE KASHTE AAPKO HE NEKALNE HAI
    HAMARE DUA AAPKE SATH

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  • shiv prasad semwal says:

    kamal k aadmi ho yaar. apse to hamko b himmat milti hai. e batao k isme ham apki kis tarh madad kar sakte hai?

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  • Kamaljeet singh says:

    Agar …mr, khalid sahi hai …toh sabhi patrkar bhaiyo ko unka sath dena chaheye…..waise bhi u.p. Me patrkaro ki bahut buri dasha hai …… U.p, me bhrast prashashan ka bolbala hai ……

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  • Kamaljeet singh says:

    Agar …mr, khalid sahi hai …toh sabhi patrkar bhaiyo ko unka sath dena chahiye…..waise bhi u.p. Me patrkaro ki bahut buri dasha hai …… U.p, me bhrast prashashan ka bolbala hai ……aur uske khilaf awaaz ko buland karna he padega…..jai hind

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  • Pradeep Raghav says:

    I don’t know much about the content that the News paper of Azad Khalid published, but the ordeal that the family is passing through is really pathetic, We, all should raise our voice against the illigal torture being inflicted upon the Family of Azad Khalid. If he has done something wrong, there is law for everything, and actions should be taken according to that.

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  • स्वतंत्र और इमानदार पत्रकारिता स्वस्थ लोकतंत्र का चौथा खम्भा है..खालिद साहब का संघर्ष यह साबित करता है की आज भी इमानदार और स्वतंत्र पत्रकारिता की मशाल ठंडी नहीं हुई है… मेरा सभी इमानदार पत्रकार मित्रों से आग्रह है की इस मामले में यथासंभव प्रयास कर खालिद साहब (स्वतंत्र पत्रकारिता) की लौ न बुझने दें…

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  • kulshresth says:

    पत्रकार आज़ाद खालिद ने जो भी जिलाधिकारी के बारे में लिखा है उसकी जांच हो अगर जिलाधिकारी दोषी है तो उनके खिलाफ कारवाई की जाये यदि पत्रकार ने कुछ गलत छापा है तो उन्हें दण्डित किया जाये लेकिन जिस तरह खबर के बाद जिलाधिकारी ने बोखला कर धमकी और उसके बाद कारवाई की है उस से दाल में कुछ काला लग रहा है ……धीरेन्द्र भाईसाब ने बिना पूरा तथ्य जानेये कैसे घोषित कर दिया की प्रशासन जो कर रहा है वो ठीक है ? वैसे आजकल सच्ची पत्रकारिता करने वाले इक्का दुक्का ही दीखते है …जितनी ऊँची दूकान उतने ही फीके पकवान….आज़ाद खालिद माममले में मीडिया की ख़ामोशी निंदनीय है……यशवंत जी आपकी हिम्मत की दाद देनी होगी के आपने इस मुद्दे को उठाया …काश आज तोमरजी जिन्दा होते तो जरुर मीडिया की आवाज़ कुछ अलग होती…..

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  • s.Bharti says:

    u.p mein kiya chal raha hai ye kisi ko batane ki jarurat nahin.aur ajad ji kese patrakar hain yeh sab ko janne ki jarurat hai.ajad khalid ne wahi mudde uthaye jinko log chip kar sirf characha karte hain.yadi mayawati ke bahi anand ke naaam par pardesh mein loot machi ho toh usko uthana kahan ka jurm hai.ajad khalid aaj bhi ek toote scooter par ghoomte hain.unki 93 model car ab chalne layak nahin rahi hai.jitna ham janate hain ghajiabad ke patrkaron ki halat bahut achchi nahin hai.aaj tak aur ibn 7 ka strnger kabhi kabade ka kaam karta tha.aaj bhi wo script likhwane ke liye dusro ka mohtaj hai.sath hi sahara ka strger hatya ke mamle mein aropi hai.iske alawa print ke patrakaron ko bhi prashasan ne bula kar behan ji ki dhamki suna di.ye wahi behan ji hain jinki fauj ne ibn ke head ashutosh ko bahut bedardi se mara tha aur sab patrkar aaj tak chup hai.ajad ji ki khabar sahi hai ya galat ye koi bata nahin.lekin kiya desh ke kisi kanun me ye sab jayaj hai jo sunne mein aa raha hai.ajad ji ka sath agar poora samaj aur patrkar dete toh shayad noida me police ke tandav ki kavrej ka rukh kuch aur hota.patrakro apn majburi aur hito ke liye ek awaj ko kuchal ne se bachaw.

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