प्रकाश दुबे के सितारे गर्दिश में?

इन दिनों दैनिक भास्कर नागपुर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई लोगों के सितारे गर्दिश में करने वाले यहां के संपादक प्रकाश दुबे के सितारे अब गर्दिग में आने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण हर रविवार को नागपुर से तैयार होने वाले कला संस्कृति पृष्ठ का बंद होना है। प्रबंधन ने इस पेज का प्रकाशन बंद करा दिया है। इस पेज पर स्थानीय लेखकों की रिपोर्ट और आलेख होते थे। सूत्रों के मुताबिक इसे प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल ने सीधे निर्देश देकर बंद कराया है। वे इस पृष्ठ में प्रकाशित होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से नाराज थे।

यही हाल संपादीकय पेज का है। भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित होने वाला संपादकीय पेज ही हर संस्करण में केवल संपादकीय और पाठकों के पत्र बदल कर प्रकाशित किया जाता है। लेकिन नागपुर में भोपाल से आने वाले संपादकीय पेज से वरिष्ठ पत्रकारों व लेखकों के आलेख निकलवा कर कुछ खास लोगों के आलेख प्रकाशित किए जाते थे। चर्चा है कि संपादकीय पेज में स्थानीय स्तर पर छेड़छाड़ को भी बंद करा दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि मनमोहन अग्रवाल के नियुक्त लोगों को नागपुर में परेशान किया जाता था और उन्हें अखबार छोडऩे के लिए मजबूर किया जाता था। यहां से छोड़ कर गए पत्रकार कई अच्छे संस्थानों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कई पीड़ित पत्रकारों ने कुछ दिन पूर्व भोपाल में सामूहिक रूप से मनमोहन अग्रवाल से मुलाकात की। इस मुलाकात में प्रकाश दुबे की शिकायत की गई। कई प्रमाण भी सौंपे गए।

बताया जाता है कि इन शिकायतों को मनमोहन अग्रवाल ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद उन्होंने सबसे पहले नगर के संपादकीय विभाग को तत्कालीन समय में नागपुर में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले की किसी भी खबर को प्रकाशित नहीं करने का आदेश दिया। नागपुर में आयोजित होने वाले इस मेले को लेकर कई तरह की शिकायतें प्रबंधन को दी गई थी। सूचना है कि दुबे के सितारे गर्दिश में आने से उन लोगों को सबसे ज्यादा तनाव हैं, जो दुबे के खास माने जाते हैं। उन्हें भी इस बात का एहसास हो गया है कि जैसे ही दुबे की विदाई होगी, उन पर भी गाज गिरना तय है।

दैनिक भास्कर, नागपुर में काम कर चुके एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर इस पत्र के तथ्यों से किसी को असहमति है तो वह अपना मत या वक्तव्य नीचे कमेंट बाक्स के जरिए दे सकता है.

Comments on “प्रकाश दुबे के सितारे गर्दिश में?

  • arati singh says:

    yah patr bhejne wale patrakar ko kuch nahi aata malik ko delhi ka bata kar mota betan pa liya tha, jab pol khuli to malik ne hi use bhagaya tha abhi wah patrakar rajsthan me kam kar raha hai. khabre chori karke waha bhi chhap raha hai

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  • bheji gayi report bogas hai bhaskar nagpur ne kisi ko nahi nikala kuch nikmme log khud chale gaye hai.
    lokmat samachae ki re lonching ki tayyari me bhaskar me matbhed paida karne ka yah asafal prayas hai.
    sampadak-malik k aapsi taal-mel ka behtar namuna bhaskar nagpur k siva shayad hi khhi hoga.

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  • sachin jhade says:

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  • sachin jhade says:

    प्रिय अराती सिंह,
    तुमने तथ्यों की ओर ध्यान न देकर अपने लिजलिजे सम्पादक की तरफ से पत्र लिखने वाले पत्रकार पर जो कमेण्ट किया है, उसकी सच्चाई तो मुझे नहीं मालूम पर मुझे इतना पता है कि प्रकाश दुबे एक एेसे सम्पादक हैं जो हिन्दी जानने वाले, जनोन्मुखी सोच रखने वाले अपने स्टाफ पर गुर्राते हैं और अशुद्ध लिखने वाले, अपनी बीट खा- खाकर मोटे होने वाले तथा सपाट मनो मस्तिष्क वाले ठर्रेबाज पत्रकारों की तारीफ में प्राय: कसीदे पढ़ते रहते हैं।
    इन्दौर के एक पत्रकार का किस्सा तुम्हें सुनाते हैं जिसे मालिक अच्छी खासी वेतन का गुड़ दिखाकर इन्दौर से नागपुर अपने अखबार में ले गया- जहां आपके प्रकाशजी ने उसकी कठिन परीक्षा लेनी शुरू कर दी। दुबे जी हालांकि उस पत्रकार की कलम व उसके तेवरों से पूर्व परिचित थे परन्तु उन्होंने उसे पेज नं. 3 जो राष्ट्रीय -अन्तर्राष्ट्रीय खबरों का पुरानी टेलीप्रिन्टर शैली का पेज था, वह पेज लगाने का काम सौंप दिया और फिर सुबह- शाम उसकी इस बात के लिए रगड़ाई करते कि तुमने फला न्यूज नीचे क्यों लगा दी, बीच में क्यों न दी। ऊपर वाली खिसकाते नहीं बनती थी? यह ज्ञान है आपका आदि आदि।
    इसी पेज में संडे के दिन दुबेजी का गपशप कॉलम जाता है, इसमें वे शरद पवार, देवी सिंह शेखावत व गडकरी आदि की फोटो हर हफ्ते- दो हफ्ते में लगाने के बहाने कुछ न कुछ लिख देते हैं। यह कॉलम लगाना बड़ी परीक्षा का विषय है क्योंकि इसमें कोई शब्द अशुद्ध नहीं जाना चाहिए, वाक्य चाहे अशुद्ध छपता रहे। किसी गपशप में यह जिक्र था कि ‘‘फलां साहब के मन में खराश आ गई।’’ इंदौर से ला कर पेज लगाने के काम में लगाए गए उस जाने -माने पत्रकार ने सोचा कि दुबे जी के लिखने में चूक हो गई है या प्रूफ रीडिंग गलत हो गई है, मन में तो खटास आती है, खराश तो गले में होती है। उसने खराश को खटाश कर दिया। फिर क्या था दूसरे दिन दुबे जी पिल पड़े कि क्या तुम मुझसे अधिक हिन्दी जानते हो। दिन भर में उन्होंने उस पत्रकार को कई बार केबिन में बुलाया और बाहर भगाया। बेचारा बड़ी हसरत से बीबी- बच्चों को लेकर तथा दौड़धूप कर बाइक का इंटर स्टेट पंजीयन बदलवा कर नागपुर पहुंचा था। पर अंतत: उसने काम छोड़ दिया। आज कल वह दैनिक जागरण जम्मू में अच्छा खासा सम्पादकीय काम कर रहा है। तल्ख सच्चाई के अच्छे उदाहरण कई हैं, पर पत्र के कमेंट्स में और कितना लिखा जा सकता है। कभी फुर्सत में।
    सचिन झाड़े
    अमरावती (महाराष्ट्र)

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  • ha ha ha ha..@ Poona aur Arati singh nam ka koe patarkar nagpur me nahi hai…
    kya Shishir Dewedi nikkame the… jo kud chor kar chale gye..

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  • amit singh baba says:

    prakash dube g ko mai bahut nahi janta per bhadas 4 media k bahane kUCHH LOG APNI bhadas NIKALNE ka MAUKA PA GAYE HAIN. ISKE Yashvant g badhai k paatra hain jo logo ko apni bhadas nikalne ka mauka diye agar koi inshan apni bhadas na nikale to us se kabhi balaTkar jaise apradh ki ummeed bad jati hai . bhadas 4 media NE KAI LAOAGO KI BHADAS NIKALKAR UNKE DAMAN KO BAHAR NIKALA . SO VO KUNTHIT HONE SE BACH GAYE.PER IS TOPIK ME JIYADA BAHAS KARNE WALO K PASS LAGTA HAI KOI AUR KAAM NAHI HAI WO IS TARAH SE APNI BHADAS NIKALKAR PATA NAHI KITNI KAILORI URJA ROJ KHATM KARTE HAI .KASH YE LOG PATRKARITA K PESHE KE PRATI IMANDAR RAHE KAUN KISKA SITARA GARDISH ME HAI IS KAHABAR SE VICHLIT LOG ITNE NAMARD HAI KI HAKEEKAT ME UNME SE KISI NE BHI APNI SAHI I D KA PRAYOG NAHI KIYA> AISE NAPUNSHAK LOG PATRAKARITA ME HAI SHAME SHAME K ALWA KUCHH KHNE KA MAN NAHI HAI.SABHI KO DIWALI KI SHUBHKANAYE-AMIT SINGH BABA 09303310918

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  • sabko pata hai kisko khujli ho rahi dubey ji se.parde mein rahkar var karne wale tera muh kala.yad kar muflisi ke din jb tu bihar mein bhokho mar raha tha.typing ko patarkarita manne wale gire patra kahlane ki teri aukat nahi hai. sale ek bar mil na mara tere ko.jhoote makkar insan apni aukat mein rah. malik ke pair dho peene wale. sabki shikayat karne wale teri to aisi ki taisi.nagpur mein tune jo gul khilayae hain vo pata hai sabko aa tu yahan batate tere ko.

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  • SUNDER SHARMA says:

    are baba yeh dubeji jo hei na yeh SHANKARJI KA ROOP HEI.KYNKI YEH BHOLE HEI. enke aas paas na jane kitne PAPI bhare pade hei LEKIN bhole hone ke wajh se enhe kuch dikhaie nahi deta. wahi log oonki wat laga rahe hei.

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  • 😀
    dube ji aur bhole baba.
    bhole baba to ManMohan Agrawal hai jo Dube jaise chutiye ko jhel raha hain……
    waise jayad din ka mehman nahi hai dubee…
    office me chehara to dekho kiase bidae ke dar se puri tarah utar gya hain……

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  • SIDDHARTH DESMUKH says:

    ho gaye mansha PURI DUBEJI KI TARKKI KR DIEA HEI MANGMENT NE OK, ab dubeji pure vidrbha ke denik aur chhindwara ke edition dekhenge,nagpur ke DENIK BHASKAR ME sri SHALMANI SONI dekhenge jinhe bhopal se mangment ne laya hei ,. nikal gaye na dubeji ke prati bhadas oonhe to chapluso ne hataya ab shalmani soni ko chapluso se savdhan rahna honga khaskar city wale se jo apne ko main kahalta hei..

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  • @ SIDDHARTH DESMUKH nam ka koe parni nagpur me nahi hia…… ha ha ha… ye dube ji ka promotaion nahi hian unhne prmotaion ke nam par demotaion kiya gya hain…
    bechre debe ji ke chaploosh ye samjh hi nahi paa rhe hain ki pradhan sampadak Mamnohan Agrawal hai.. aur Bhaskar Group ka editor sharwan garg hain. national editor kalpnik hain…
    bhopal se aane wala sara material yaha nagpur me use karte hain….8 page lockal jod ka dube ji kya tir marte the….usem v dukandari ki news jyad hoti thi….
    ab bechare dube ji ke manspurtro ka kya hoga……

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