मैं जेल गया तब भी मेरे न्यूज चैनल ने मुझे सेलरी दी

: इंटरव्यू (पार्ट-दो) : मुंतज़र अल ज़ैदी (इराकी पत्रकार) :

मुंतज़र अल ज़ैदी पिछले दिनों दिल्ली में थे. इराक में बुश पर जूता फेंककर दुनिया भर में चर्चित हुए ज़ैदी बेहद समझदार और तार्किक व्यक्ति हैं. न्यूज एक्सप्रेस के एडीटर (क्राइम) संजीव चौहान ने मुंतज़र अल ज़ैदी से कई सवाल किए और जै़दी ने सभी जवाब ऐसे दिए जिसे पढ़-सुनकर उनके प्रति प्यार बढ़ जाता है. पेश है इंटरव्यू का आखिरी पार्ट…

सवाल- दुनिया कह रही है मुंतज़र ने जूता कल्चर को जन्म दिया है…जो कि गलत है, ऐसा नहीं करना चाहिए था।

जबाब- अगर मैं, और मेरा जूता फेंकना गलत था, तो फिर इराक में बेकसूरों पर बम बरसाने वालों को क्या कहेंगे ?

सवाल- आपने बुश पर जूता फेंका। इसके बाद भारत में भी इस तरह की जूता फेंकने की कई घटनाएं हुईं। एक पत्रकार ने तो भारत के गृहमंत्री पर जूता फेंक कर मारा। यानि आपके द्वारा दिया गया जूता-कल्चर दुनिया फालो कर रही है?

जबाब- नहीं। बिल्कुल मुझे फालो नहीं करना चाहिए। हर किसी पर जूता फेकेंगे, तो जूते की मार की चोट कम हो जायेगी। जब तक आप पर, आपके देश और आपके समाज पर कोई बम-गोली न बरसाये, तब तक जूता न उठायें। जो जूते के लायक है, उसे जूता दें और जो गुलदस्ते के काबिल है, उसका इस्तकबाल गुलदस्ते से करें।

सवाल-  आपने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बुश पर जूता फेंका, तो आपके चैनल के आधिकारियों और आपके हमपेशा साथियों (जहां आप नौकरी करते थे) की प्रतिक्रिया क्या थी? क्या आप नौकरी से बाहर कर दिये गये?

जबाब- सब खुश थे। देश खुश था। इराक के हमदर्द खुश थे। जब तक मैं जेल में रहा उतने महीने (…..करीब नौ महीने) की मेरी तनख्वाह मेरे घर भिजवाई गयी। और जब जेल से बाहर आया, तो पता चला कि न्यूज चैनल ने मुझे और मेरे परिवार को रहने के लिए एक फ्लैट का भी इंतज़ाम कर दिया था।

सवाल- जूता कांड के बाद आप इराक के हीरो बन गये, फिर भी आपको वीजा किसी अरब या यूरोपीय देश ने नहीं दिया, सिवाये भारत के? इसे क्या समझा जाये? मुंतज़र अल ज़ैदी की मुखालफत या इन देशों पर अमेरिका का भय?

जबाब- मुझे किसी ने दिया हो वीजा न दिया हो। क्यों नहीं दिया? सबका निजी मामला है। लेकिन भारत ने मुझे वीजा देकर साबित कर दिया, कि उसे किसी का डर नहीं है। मुझे लगता है कि वाकई आज भी दुनिया में भारत ही सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।

सवाल- कैसे-कैसे लगवा पाये भारत का वीजा? क्या क्या मशक्कत करनी पड़ी?

जबाब- दिल्ली में रहने वाले इमरान जाहिद साहब मेरे दोस्त हैं। उन्होंने बात चलाई थी। मैं गांधी जी को करीब से छूना, देखना, उनसे बात करना चाहता था। मेरी साफ मंशा, इमरान भाई और महेश साहब (भारतीय फिल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट) की कोशिशें कामयाब रहीं। और अब मैं गांधी और आपके सामने हूं।

सवाल- हिंदुस्तान की सर-ज़मीं को छुए हुए दो दिन हो गये हैं, कल चले जायेंगे आप इराक ? यहां से हमवतन (इराक) क्या लेकर जा रहे हैं?

जबाब- जिंदादिल भारत की मिट्टी की खुश्बू, यहां के लोगों से मिला प्यार और भारत की सर-ज़मीं पर जीया हर लम्हा, हिंदुस्तान की मेहमानवाजी अपने साथ लेकर जा रहा हूं।

सवाल- भारत में गांधी जी की समाधि ही देखने की तमन्ना क्यों थी ? कहने को दुनिया का अजूबा और प्यार का प्रतीक ताजमहल भी भारत में ही है।

जबाब- इराक ने कुर्बानियां दी हैं। गांधी ने कुर्बानी दी। वे आज़ादी के नुमाईंदे और आइकॉन थे। उन्होंने अत्याचारों के खिलाफ जिस चिंगारी से आग लगाई, वो देखिये (गांधी समाधी पर जल रही लौ की ओर इशारा करते हुए) आज भी जल रही है। ताजमहल पर भी क्या ऐसी ही लौ जलती है?

सवाल- आप गांधी से प्रभावित दिखते हैं, ज़िंदगी में गांधी का सा कुछ किया भी है?

जबाब- जेल के भीतर ही तीन दिन तक अनशन पर बैठ गया था।

सवाल- द लास्ट सैल्यूट लिखने के पीछे क्या मंशा थी ?

जबाब- “द लास्ट सैल्यूट”  एक बेगुनाह पर अत्याचारों का सच है। बिना मिर्च-मसाले के। वो सच जिसे भोगा पूरे देश ने,  लेकिन आने वाली पीढ़ियों के पढ़ने को कागज पर इतिहास लिखा सिर्फ मैने (मुंतज़र अल ज़ैदी ने)।

सवाल- इराक और भारत में फर्क?

जबाब- इराक का मैं बाशिंदा हूं। भारत के बारे में पढ़ा-सुना है। सिर्फ दो-तीन दिन ही रह पा रहा हूं यहां (हिन्दुस्तान की सर जमीं पर) । इराक में अमेरिका का अत्याचार है, और भारत में अपना लोकतंत्र। आप खुद अंदाजा लगा लीजिए दोनो देशों में । कौन पॉवरफुल है?

समाप्त

इंटरव्यू का पहला पार्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें– वे पीटते रहे, थक गए, मैं बेहोश हो गया

Comments on “मैं जेल गया तब भी मेरे न्यूज चैनल ने मुझे सेलरी दी

  • sarvjeet bawa says:

    संजीव चौहान ji aap dwara lia gya interview wakia rochak tha… bahut bahut badhai ……. journalist bawa yamunanagar haryana….09354826323

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  • ZAKI JOURNALIST, KARACHI, PAK says:

    यकीं जानिये संजीव साहिब आपकी शख्शियत से मैं बहुत मुतमइन हूं। दोस्ती को आगे बढ़ाने के लिए आपके मोबाइल नंबर और मेल आईडी की दरकार है….आपका दोस्त
    जर्नलिस्ट ज़की,
    कराची, पाकिस्तान

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  • amit agarwal says:

    kisi k ek aasu par hajaro dil dapte hai kisi ka umr bhar un hi rona bekaar jata hai ……………beta al jaid tum to joota maar kar hero ban gaye tuhare naam ka to joota park ban gaya hai jis company ka joota tha uska free mei prchaar ho gaya ………..wah ri kismat hoor ki baho mei langoor itni shrat apni life ki poori reporting mei nahi milti jitni sohrat joote ki mahima se mil gai………………………………………………………….

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  • ओर एक हमारे यहा के मीडीया समूह है की अपने रिपोर्टर पर कुछ परेशानी आई नही की सबसे पहले हाथ ये ही खींचते है

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  • sachendra singh says:

    dr sir mere nam govind singh my address is vill pratappur post viroh thana chaubepur dist kanpur nagar (up) sir mere gar pr 10 oct 2014 ko rat me kuch loge ne chori ki jisme meri sari jewelry aur 35000cash le gye maine chaubepur thane me tahrir di but koi karvai nhi hu aur sir aj tak meri fir bhi nhi likhi gyi mai roj thane jate hu muje bate bana kar bhej dete hai aur roj yhi karte hai aur na hi co sir ne kuch kiya mai ye news pa ko ape bhatije se bijwa rha hu plz sir meri help kare mahan dya hoti
    sir mera sab kuch chal gya hai is chori me meri help kare sir
    mere pas sucidie kare ke alwa kuch bhi nahi bacha hai plz help me sir plz

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