यूपी में ईमानदार अधिकारियों को अस्‍तबल में बांधने की कोशिश

देश में बढ़ रहे दिनोंदिन भ्रष्टाचार को लेकर जहां अन्ना हजारे व उनके समर्थकों ने दिल्ली को हिलाने का काम किया काबिले तारीफ था। चलो एक कोशिश तो रही एक सामान्य इंसान की इस भ्रष्टतंत्र के खिलाफ आवाज उठाने की। लेकिन बात यहीं पे खत्म नहीं होती, भ्रष्टाचार को लेकर अब ईमानदार कोशिश की सतत जरूरत है और देश के सभी राज्यों में अमरबेल की तरह फैला भ्रष्टाचार एक अन्ना या कुछ आम व सामान्य आदमी खत्म कर सके एसा संभव नहीं है।

इसके लिए अगर अन्ना और भ्रष्टाचार का एंटीवायरस तैयार करने वाले वे लोग अगर पारखी नजरिए से शासन में बैठे ”बेरोजगार जैसे” लोगों को अगर इसका हिस्सा बनाएं तो शायद ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। हम अन्य किसी अन्‍य राज्य नहीं, हम देश में सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले राज्य उत्तर प्रदेश की बात कर रहे हैं। अगर ये राज्य देश के सर्वोच्च पदाधिकारियों को दे सकता है तो ये भी कहना गलत नहीं कि इसकी जनसंख्या भी देश के अन्य राज्यों से ज्यादा है। तो स्वाभाविक सी बात है कि जनसंख्या में अगर नंबर वन हैं तो यहां जनता के नुमाइंदे भी बड़ीर तादात में हैं। और जहां पर सफेदपोशों की संख्या इतनी ज्यादा है तो लाजमी है कि भ्रष्टाचार को मिटाने की विचारधारा वाले लोग भी बहुत हैं। अगर इस अभियान में ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग मिले तो इस भगीरथ प्रयास में ज्यादा समय नहीं लगेगा और जल्द ही गंगा की तरह ईमानदारी रूपी पवित्र बयार इन भ्रष्टाचारियों को बहाने में सक्षम होगी।

मैं प्रदेश के एक आईपीएस सुभाष दुबे से काफी समय से परिचित हूं और मैं ही नहीं जिन जनपदों में उनकी तैनाती रही वहां का बच्चा-बच्चा उनकी ईमानदार कोशिशों से वाकिफ है, लेकिन प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य है कि अपराधियों और कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों को ईमानदारी पूर्वक उनको उनकी जगह पहुंचाने वाले आईपीएस सुभाष दुबे आज अस्तबल का घोड़ा ही साबित हो रहे हैं,  न जाने कितने ऐसे सुभाष प्रदेश में मन मसोस कर ऐसे विभागों में फाइलों के ढेर में बैठे हैं, जो उनकी कार्यशैली के अनुरूप नहीं रही है। अपने ईमानदारी से आम लोगों के बीच जगह बनाने वाले से अधिकारी एक विभागीय कोठरी तक सीमित हो गए हैं।

सुभाष दुबे की कार्यशैली एसी है कि वो जिस जिले में गए वहां अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में कोई गुरेज नहीं किया, भले वो शासन सत्ता से जुडे हों या फिर वो ग्रेड वन या ग्रेड टू आफिसर ही क्यूं न हो। अगर इन बातों की सच्चाई शासन सत्ता या आम लोगों को नहीं दिखती है तो आंकडे़ उठा के देखे जा सकते हैं कि उनकी तैनाती के दौरान हुई गिरफ्तारियों और कार्रवाई को। वो जिन जनपदों में रहे वहां के अपराधी जेल की राह पकड़ गए,  जो बडे़ अपराधी बने वो मारे गए। अपराधियों में हताशा और निराशा उन्होंने इतनी भरी कि सिफारिश नेता जी की जब तक आती तब तक गैंगस्‍टर की कार्ररवाई हो चुकी होती। इससे शासन सत्ता के नेता अपनी बेइज्जती जरूर मानते पर आम जनता को इससे राहत जरूर मिलती। जिसका फायदा उनकी विदाई के बाद चार्ज सम्हालने वाले अधिकारी महीनों तक लेते रहे।

हम प्रदेश के सबसे कुख्यात जनपद गाजीपुर की बात बताते चलें कि जहां पर बडे़ माफिया अपने पैर पसारे हैं, वहां भी चंद माह में ही माफियाओं को इस होनहार पूत ने अपने पैर दिखा दिए। कम समय में आम जनजीवन को सामान्य कर जनता के मन से भय निकालने का काम किया, पर अफसोस कि कन्नौज, हाथरस और औरैया की ही तरह उनको नेताओं ने यहां भी रहने नहीं दिया। सफेदपोश ऐसे अधिकारियों की कार्यशैली से कभी संतुष्ट नहीं होते हैं, जिसका खामियाजा मिला कि लखनऊ में एसपी एंटी करप्शन बना कर उनकी प्रतिभा को दम तोड़ने के लिए छोड़ दिया गया। जिस विभाग में उनको बैठाया गया वहां उसका काम भी भ्रष्टाचार को मिटाने का ही है, लेकिन शायद वहां की स्थिति भी एक अस्तबल से इतर नजर नहीं आती। अन्ना देश को बदलना चाहते हैं पर उनके जैसी विचार धारा के लोग शासन सत्ता के अस्तबल में बंधे हुए हैं। अगर अस्तबल में बंधे हुए इन ईमानदार घोड़ों को आजाद कर दिया जाए तो शायद अन्ना का काम आसान नजर आएगा और आम जनता राहत मिलने की उम्‍मीद।

लेखक गौरव त्रिवेदी औरैया जिले में सहारा समय के रिपोर्टर हैं.

Comments on “यूपी में ईमानदार अधिकारियों को अस्‍तबल में बांधने की कोशिश

  • suresh mishra says:

    subhas dubey ji ne jis soch ke saath IPS ki ki naukari shuru ki thi wah aaj bhi kaayam hai . mai samajhataa hun ki wah ta umra isi prakaar bane rahenge . aparaadhiyon ko sarkaari mehmaan banaana aur bhale ko tatkaal nyaay denaa unaki karyashaili ka pramukh hissa hai . rahi baat astbal me baandhane ki to pratibhaa kabhi baandh ke nahi rakkhi ja sakti . din ke baad raat aati hai to raat ke baad din bhi aata hai . mai samajhataa hun ki naye IPS ko unase jaroor seekh leni chahiye . subhaas ji ki pratibhaa , karyashaili aur dabaav mukt hokar kary karne ki shaili ko salaam . suresh mishra , auraiya

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  • धीरेन्द्र says:

    यही हाल संतोष यादव, आई ए एस का है…

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  • vibhakar shukla says:

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  • jo kam subash na sharavasti ma keya o syad he loye kar sakta hi. din ke baad raat aati hai to raat ke baad din bhi aata hai . mai samajhataa hun ki naye IPS ko unase jaroor seekh leni chahiye . subhaas ji ki pratibhaa , karyashaili aur dabaav mukt hokar kary karne ki shaili ko salaam .

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