राहुल गांधी को मीडिया की जरूरत नहीं!

उज्जैन। राहुल गांधी को अपनी बात युवाओं और जनता तक पहुंचाने के लिए मीडिया की जरूरत नहीं है. इसकी बानगी देखने को मिली कांग्रेस महासचिव राहुल के मध्‍य प्रदेश के दौरे के दौरान. राहुल युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए मध्‍य प्रदेश का दौरा कर रहे हैं. उज्‍जैन में हुए एक कार्यक्रम में कांग्रेस महासचिव की आम लोगों को एक झलक मिलना तो दूर मीडिया को भी उनकी झलक नहीं मिल सकी.

मीडिया को इस कार्यक्रम से दूर रखा गया. खासकर न्यूज चैनल को तो उनके कार्यक्रम से विशेष रूप से दूर रखा गया. चैनलों पर उनके कार्यक्रमों के एक अंश तक देखने को नहीं मिले. असल में राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में मीडिया वालों की मौजूदगी नहीं चाहते थे. इलेक्टानिक मीडिया के लोगों से तो उनके कैमरे और अन्य साजो-सामान कार्यक्रम स्‍थल से आधा किलोमीटर दूर ही रखवा लिए गए. कुछ मीडिया वाले तो उनके कार्यक्रम को कवर करने के लिए इन्दौर से भी आये थे. वे भी कवरेज के लिए बस यहां से वहां भटकते रह गए.

राहुल का कार्यक्रम कवरेज करने के लिए पत्रकारों को अपने रिश्‍तों की दुहाई देनी पड़ी. कवरेज के लिए प्रिंट मीडिया के कुछ पत्रकार कांग्रेस नेताओं से अपने रिश्‍तों की दुहाई दी. कुछ ने कवरेज के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता बनकर पास बनवाए. तब जाकर प्रिंट मीडिया के लोग इस कार्यक्रम को कवर कर पाए. इस घटना के बाद अधिकारियों एवं नेताओं का कहना था कि राहुल को मीडिया की जरूरत नहीं है बल्कि राहुल मीडिया की जरूरत हैं.

Comments on “राहुल गांधी को मीडिया की जरूरत नहीं!

  • Pankaj Dixit says:

    मायावती के बाद राहुल गाँधी ने भी मीडिया को नकार दिया है| ये मीडिया जगत के लिए सोचनीय है| कहीं ये मीडिया की आबादी के मुकाबले कम पहुच का होना तो नहीं| या मीडिया असरहीन हो रही है
    पंकज दीक्षित
    सम्पादक
    जेएनआई न्यूज़ मोबाइल न्यूज़ अलर्ट सेवा

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  • राहुल के दौरों को भगवान के क्रियाकलापों की तरह दिखाने का नतीजा है। आदमी को इतना उपर चढा दोगे भाई मेरे तो क्‍या होगा। बहस में नहीं पड़ना चाहता लेकिन ओबी वैन के छाते खोल खोल कर राजकुमार राहुल और उनकी बहन की प्रशंसा करने का फल मिलना शुरू हो गया है। आजकल देखिये दीपक चौरसिया नाम का दाढीफोश किस तरह से प्रोग्रामिग टीम लगवाकर बिहार में लालू की सभा को कवर कर रहा है।

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  • R.K.Singh Mau says:

    राहुल गान्धी का सच जानना हो तो यु तुब पर इनकी और इनके इटली के म़ा माओ व् अमर्किन दोस्तों की पुरी करतूत देख लो ……अमरीका ने इनहे कठपुतली बना रखा है ……….बात दूर की है…….! मीडिया तो पगला गई है …… ये केंद्री विगज्ञापन पाने के लिये इतना होता है ……बेकार का रिपोर्टरों को परेसान कीया जाता है …….

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  • भाई साहब मीडिया की जरूरत सबको पड़ती है। नेताओं को खासतौर से। राहुल बेवकूफ है। वह अभी जोश में है और होश खो बैठा है। देखो मायावती को। पहले मीडिया को गाली देती थी लेकिन अब अपने एक चंपू से कहकर अखबार निकलवा रही है, क्योंकि मीडिया ने उसकी मां बहन एक कर दी है। राहुल भी ऐसे ही किसी से कह कर अखबार निकलवाएंगे।

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  • s.p.chauhan ghaziabad says:

    rahul gandhi k karyakramo me media ko pravesh n dene k liye khud media hi doshi hea.rahul ki khabar kabar karna band kar de agar media to rahul or kangresi apni aukat me aajayenge.ya jis din kangres ki sarkar nahi rahegi satta me us din ve media ko rojana chay par bulayenge. me to ajj tak nahi samajh paya ki aakhir rahul gandhi ki arthik niti kya he jisse ve desh ko number 1 banayenge. ve kabal rajkumar hen aur ham bhartiya gulam mansikta se abhi nahin ubre hen. hamre desh me or kangres me unse achchhe bahut yuva hen. rahul ko kebal ek mp ya kangres party ke mahasachiv ki tarah kabar karna suru kare media to ve okat me aajayenge. meri rahul ko shubhkamnayen.

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  • Ravinder Singh says:

    Neta ho ya Abhineta……. Har kisi ko naam or rajniti chamkane ke liye MEDIA ka sahara lena padta hai…… inka picha karo to apne aapko Laad sahab Samjhte hai…… Or bhul jaaooo to duum hilate bhage aate hai…. Media ko apni garima Barkara rakni chahiye…..

    Ravinder Singh (web journalist)

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  • narendra vishwakarma says:

    राहुल गान्धी कि क्य कहे जब बो अपनी पर्टि कि बरिश्ट नेता जमुन देवि को हि भूल गये एम पी मे आने के बद उन्के परीजनो से मिलना भी उचित नहि समझा क्या यहि हे रहुल गांधि का सिस्ताचार

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  • arvind singh says:

    rahul gandhi ka aaj bharat me bada krej hai, usake liye jimmedar kaun log hai. yahi media waale,ab rahul gandhi ko media ki jaroorat nahi, sach bhi hai unaka kaam ho gaya to fir ab media unake liye kis khet ki mooli hai, to is halat ke jimmedar bhi to yahi media waale hi hai, kyu jaate hai kahi bina bulaye,kyu karate hai netao ,abhinetao ki chaaploosi, kyu nahi jan hit ki khabaro se sarokaar rakhate,agar sach me patrakarita karani hai to janata ke liye kyu nahi karate, kyu nahi dikhate aur chhapate netao ki sachhai, kis tarah chunav jitate hai neta, kya-kya hathkande apanaate hai neta kya nahi pata hai poore desh ko, samaz me nahi aata ki kis majboori me apane aster se girkar kahi jaate hai patrakaar, agar wastaav me patrakarita kare to sabhi ke chehare se nakaab hat jayega aur janata dekhegi inka asali chehara,wahi dikhana chahiye media ko.apane aap pata chal jayegi hakeekat.

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  • Media group ke maalikon(DOG) ke saamne to boti phek dete hai aur bechaare patrakar pareshaan hote hai.We patrakar maadarjaat hai jo jn-pahchaan bata kar coverage karte hai

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