सहारा के पुराने लोग गालियां खा रहे हैं?

एक चिट्ठी आई है. किन्हीं महिला की मेल आईडी से. उन्होंने अपना परिचय व फोन नंबर आदि नहीं भेजा दिया है. उन्होंने मेल में सहाराश्री को एक पत्र भेजे जाने की बात बताई है और पत्र की कापी को भड़ास4मीडिया के पास भेजा है. इस पत्र के जरिए उन्होंने अपना दर्द बयान किया है. सहारा में वरिष्ठ पद पर नए आए कुछ लोगों पर उन्होंने गाली-गलौच करने का आरोप लगाया है.

पता नहीं, पत्र में सच्चाई का प्रतिशत कितना है. एक बार पढ़ें और अगर आप सहारा से जुड़े हों तो अपना फीडबैक नीचे कमेंट के रूप में जरूर दें. लेकिन ध्यान रखें, कमेंट में कोई ऐसी बात न कहें जो निजी आक्षेप या स्तरहीन किस्म का हो. यह मंच आपका है और इसकी गरिमा व स्तर का ध्यान भी आपको रखना होगा. सहाराश्री को हिंदी में जो पत्र भेजा गया है, उसे हूबहू प्रकाशित कर रहे हैं. पत्र में कई गल्तियां हैं, अशुद्धियां हैं, जिससे जाहिर होता है कि पत्र लेखक की हिंदी भ्रष्ट है और कापी कूड़ा है. नीचे दिए गए पत्र को पढ़ते हुए आप यह एहसास कर सकते हैं. उनके पत्र को सिर्फ इसलिए प्रकाशित कर रहे हैं ताकि उनकी पीड़ा सार्वजनिक हो सके और अगर गाली-गलौज जैसा कल्चर शुरू हो रहा है तो इस पर आत्मानुशासन के जरिए लगाम लगाने का प्रयास किया जा सके. यह भी स्पष्ट नहीं है कि पत्र लेखक महिला हैं या पुरुष हैं. संभव है पहचान बदलने के उद्देश्य से किसी पुरुष पत्रकार साथी ने महिला का वेश धारण कर लिया हो.

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया


माननीय सहाराश्री के नाम एक अतिआवश्यक पत्र

माननीय सहाराश्री जी क्या सहारा परिवार के पुराने लोग कुड़ा-कचरा है?

माननीय सहाराश्री जी! चरण स्पर्श प्रणाम। मोहदय हम सहारा इंडिया परिवार से पिछले पंद्रह वर्ष से जुड़ी है। जब हम इस परिवार से जुड़ी थी। तब हमें शपथ दिलायी गयी थी कि हमें इस परिवार के सम्मान को हमेशा बनाकर रखना है। परिवार के सदस्तयों के साथ हमेशा सम्मान के साथ बात करनी है। किसी को कभी भी कोई अपशब्द नहीं निकालने है। इस परिवार की परंपराओं को हमेशा बचाकर रखना है।

माननीय सहाराश्री जी हम तब से लेकर अब तक इन धारणाओं को बचाएं रखे है। हमारी कोशिश हमेशा यह रहती हैं कि हम सहारा इंडिया परिवार के सम्मान को हमेशा बचाएं रखे। और रखते भी है। मोहदय,हम लोग इस समय सहारा टीवी में कार्यरत है। जो निश्चित तौर पर मीडिया में अपनी एक नयी पहचान बनाये हुए है। खास तौर पर प्रदेशिक चैनलों की बात करें तो।

लेकिन मोहदय,पिछले कुछ दिनों में इन चैनलों में कुछ ऐसे कार्यकर्ता आएं है। जो खुलेआम इस परिवार के पुराने लोगों को कुड़ा-कचरा कहने से भी नहीं चुक रहे है। मोहदय, हमने अपनी दिन-रात की मेहनत और संघर्षों के बल पर इन तमाम चैनलों को एक नया आयाम दिया है। लेकिन कुछ नये चेहरे इस परिवार में आकर हमें ही गाली-गलौच करने लगे है।

माननीय,कुछ दिन पहले इस परिवार के सबसे तेज और कमाऊ एक प्रदेशिक चैनल में एक नये कार्यकर्ता ने चैनल प्रभारी के तौर पर पद ग्रहण किया है। लेकिन इन वरिष्ठ कार्यकर्ता की भाषा-बोली इस कदर की हैं कि यह कार्यकर्ता कहीं से भी इस पद के लायक नहीं होने चाहिए थे। मोहदय,इस चैनल में आज भी कई ऐसे कार्यकर्ता कार्यरत हैं,जिन्होंने इस चैनल की नींव रखी। इस चैनल को आगे बढ़ाने में हमेशा इनकी भूमिका सराहनीय रही। लेकिन इसके बावजूद आज तक इन कार्यकर्ताओं को सम्मान के लायक आखिर क्यों नहीं समझा गया। यह बहुत ही दुःखद हो शर्मसार करने वाला है। मोहदय आज तक जितने भी छोटे-बड़े टीवी चैनल हैं,उनमें हमेशा से पुराने से पुराने लोगों को सम्मान दिया जाता हैं,लेकिन हमारे यहां पुराने लोगों को गालियां दि जा रही है। वह भी खुलेआम…।

माननीय, हो सकता हैं कि कुछ कार्यकर्ता अपने काम पर पूरी तरह से ध्यान नहीं देते हो। लेकिन क्या इसके लिए किसी को यह कहा जा सकता हैं कि….मैं गुड्डा हूं…मैं दंबग हूं….सहारा का पुराना स्टाफ पूरा कुड़ा है…मैं एक-एक को देख लूंगा…कार्यलय के अंदर भी और बहार भी..क्योंकि मेरी गाड़ी में एक बंदूक और एक डंडा हमेशा रहता है। मैं सब को देख लूंगा…।

माननीय पिछले पंद्रह वर्षों में हमने इस परिवार में कई वरिष्ठों को आते-जाते देखा। आज भी उपेंद्र जी,विजय राज जी और कई और वरिष्ठ इस परिवार से जुड़े हैं। लेकिन इनमें से कोई भी इतनी गंदी भाषा-बोली में बात नहीं करता है। लेकिन जिस तरह से इन दिनों हमारे परिवार में यह नये कार्यकर्ता अपनी भाषा-बोली का प्रयोग कर रहे है। यह हम सब के लिए शर्म की बात है।

माननीय, सहारा इंडिया परिवार में आज भी बहुत अच्छा काम करने वाले बहुत अच्छे बुद्धिजिवी लोग है। यहीं नहीं भारत का कोई ऐसा चैनल नहीं है। जिसमें इस परिवार से गए लोग काम नहीं कर रहे हों। सहारा परिवार के हर चैनल में आज भी पूराने लोग बहुत अच्छा काम कर रहे है। एक-आदा को छोड़ दें तो,लेकिन इसके बावजूद भी आज तक हमें नहीं लगता की पुराने लोगों को वह सम्मान दिया जाता हो जो दिया जाना चाहिए। मोहदय, यह बहुत ही दुःखद हैं कि एक या दो साल का अनुभव लेकर किसी दूसरे चैनल से कोई भी पत्रकार आता हैं, और आते ही सहारा के पुराने कार्यकर्ताओं को गाली-गलोच कर अपनी जेब गर्म कर कुछ दिन में निकल जाता हैं,और आखिर में सब कुछ संभालना पड़ता हैं,पुराने ही लोगों को।

माननीय, हम आपसे सिर्फ आपसे यह जानना चाहते हैं कि आखिर हमारा दोष क्या है? जो एक-एक अनुभव हीन आदमी आकार हमें गाली-गलोच कर हमारे ऊपर थुक कर चला जाता है। यदि हम में कमी हैं, तो उसकी सज़ा दी जाएं। लेकिन कम से कम इस तरह का बरताव करने की इजाजत तो कम से कम इन नए कार्यकर्ताओं को न दि जाएं। मोहदय,अभी कुछ दिन पहले ही हमारे परिवार के एक पुराने प्रदेशिक चैनल में एक नए वरिष्ठ कार्यकर्ता आए है। जिनका कुल मिलाकर अनुभव के बारे में यदि आप जानना चाहें तो, आपको ज्ञात होगा कि इन का अनुभव पांच से छैः साल मात्र का हैं।

तकनीकि तौर पर भी इन्हें इतना अनुभव नहीं प्राप्त हैं, जितना कि हमारे परिवार के पुराने लोगों को है। लेकिन इसके बावजूद भी यह वरिष्ठ कार्यकर्ता हर किसी कार्यकर्ता को इस कधर परेशान किए हुए हैं कि हमें लगता हैं कि एक दिन कुछ कार्यकर्ता आत्महत्या करने की कगार पर अवश्य पहुंच जाएगें, यहां इनकी गाड़ी में रखे डंडे-बंदुक का जबाव इन्हें ही दे देगा। क्योंकि यह वरिष्ठ कार्यकर्ता सहारा के पुराने काम करने वाले मेहनती लोगों को भी अपनी पांव की जुती समझ रहे है। इससे साफ जाहिर होता हैं कि इससे पहले इन्हें शायद कभी इतना बड़ा कैबिन और ऐसा पद कभी सपने में भी नहीं मिला हो,या इन्होंने कभी इस पद के बारे में सोचा भी ना हो..यह तो यहीं हुआ की अंधे का बटेर मिल गई…..।

माननीय सहाराश्री जी हम आपसे चरण स्पर्श निवेदन करते हैं कि,आप कुछ अच्छा करने के लिए हमारे परिवार से कुछ अच्छे वरिष्ठों को जोड़ना चाहते है। लेकिन ये वरिष्ठ प्यार और मिलकर काम कराने की जगह यदि धमकी दें और खुद को गुड्डा कह कर अन्य कार्यकर्ताओं को धमकाए। ऐसे में क्या इस विश्व के सबसे बड़े परिवार की शान-बान बनी रहेगी। मोहदय,हम सब लोग अपने इस परिवार में काम करने ही आते है। हम भी चाहते है,हमारे परिवार का नाम रोशन हो। विश्व के श्रेष्ठ मंचो पर सहारा इंडिया परिवार का नाम श्रेष्ठता से लिया जाए लेकिन जिस तरह कुछ लोग, कुछ नये परिवार के कार्यकर्ता पुराने लोगों पर अपना वजूद थोप रहे है। इससे कैसे इस परिवार के आन-बान बनेगी,मोहदय यह देख बहुत दुःख होता।

माननीय सहाराश्री जी हमें उम्मीद ही नहीं,विश्वास भी हैं कि आप हमारी समस्याओं पर गौर कर इन वरिष्टों को समझाएंगें की इस परिवार की छवि को बनाये रखने में पुराने लोगों की कितनी भूमिका रही है।

सहारा प्रणाम

कॉपी प्रेषित-

कर्तव्य कौनसिल, सहारा इंडिया परिवार लखनऊ

माननीय सहाराश्री जी, सहारा शहर, लखनऊ

Comments on “सहारा के पुराने लोग गालियां खा रहे हैं?

  • अमित गर्ग. जयपुर. राजस्थान. says:

    आज कल पत्रकारों को चरण स्पर्श की बीमारी सी लग गयी है. तभी तो आगे बढ़ेंगे. काम नहीं हो रहा तो कोई बात नहीं चाटुकारिता तो मज़े से कर ही लेते हैं.

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  • hindi to sudharye mahoday/mahodaya pahli nazar me hi patr kisi purush ka lagta hai kyoki mahila patrkar pair nhi chuti ye chuti ho to alag bat hai

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  • pintu tomar says:

    महोदया जब आपको इतनी शिकायत है तो क्यों आप खुद ही क्यों नहीं इस का विरोध करती है | जब आप पुरानी है तो निसियत तौर पर आपको तेर्हिज़ दी जाएगी | और जब आप बार बार इसे आपने परिवार का मसला बता रही है तो क्यों इस मामले को सब के सामने लायी है | परिवार का मसला तो घर में ही सुलट जाता है

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  • अंकित शर्मा says:

    कि आपके इस पत्र को देख कर ये तो साफ़ हो जाता हैं कि आप पुरुष हैं लेकिन आपके अनुसार आप इस परिवार में पिछले काफी समय से हैं आपके अनुसार आप १५ सालो से इस चैनल में हैं आप इसे एक आपना परिवार मानते हैं जाब आपने सहारा श्री को और सहारा कोंसेल इ मेल कर दिया तो फिर आपको यह मेल भड़ास मीडिया . काम पर सार्वजनिक करने कि क्या आवश्यकता थी इस मेल से साबित होता हैं कि आप सहारा परिवार के सुभचिंतक और वफादार कतीई नहीं हैं जिस परिवार से आपको रोजी रोटी मिली सम्मान मिला जिसने आअपकी प्रतिष्ठा बडाई उन्ही कि बातो को सार्वजनिक करके आपने साबित किया कि आपको गद्दार कि श्रेणी में किया जाय क्या आप अपने निजी परिवार कि निजी बाते भी इसी तरीके से अपने मोहल्ले में सार्वजानिक करते हैं| क्या बचपन में जब आपके पिता यह मास्टर ने आपको दाता था तब भी आपने क्या वो बाते सार्वजनिक कि थी

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  • संजीव सिंह says:

    एक बात तो साफ है कि, जिस किसी भी संस्थान की कमान किसी नए व्यक्ति को दी जाती है तो, प्रबंधन को भी उनसे काफी उम्मीदें होती है…यही वजह है कि, कुछ लोग इसका नाजायज फायदा उठाकर अपने चहेतों को य़ा तो प्रमोट करना शुरु कर देते हैं..या फिर अपने लोगों को चैनल में लाने की कवायद…लेकिन शायद वो भूल जाते हैं कि, पत्रकारिता करने वालों की डिक्सनरी में गाली गलौच नाम की कोई चीज नहीं होती है..जो लोग अपने सहकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए की, गालियां सिर्फ उनकी ही जुबान से निकलने के लिए नही बनी है…चैनल के बाहर और भी दुनियां है..और वहां किसी भी वक्त लोग एक दूसरे से टकरा सकते हैं…खैर इस पत्र में कितनी सच्चाई है…ये तो पता नहीं..लेकिन गाली गलौज देने वाले व्यक्ति का फ्लोर पर ही चप्पल से स्वागत करना चाहिए

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  • RAJESH VAJPAYEE JANSANDESH UNNAO says:

    yeh jis tarah say apni vyatha katha likh rahey hai ussay yeh saaf hai ki yeh mahoday rao berendra singh k esaaray par unka bola emla likh rahey hai ya ho sakta hai ki yeh koi kaamchor ho aur nikaaley jaanay k bhay say avasaad ki estithi may pahuch gaya ho.
    rajesh jansandesh unnao

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  • Behad chaalaki se likha gaya letter hai . Jismein apna ullu seedha karne aur chaaplusi karne ke saath-saath dusaron ki burayee karne ki gahri durgandh aa rahi hai . Kisi aur patrakaar se inke baare mein bhi puchtaach zaroori hai . Taaki maloom ho sake ki ye *Sajjan* kitne *Laayak* hain. Ye patrakaar mahoday Imaandaar to kahin se nahin hain. Sirf chaaplusi aur dusaron ko bura kah kar apni manmaani karna chaahte hain. Behad gandagi hai inke patra mein, sirf apna ullu seedha karne ki khaatir ! Media, aise logon ki is *Aisee* aadat ko dur se hi *Pranaam* kar de to behtar hai.

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  • chitti such hai….sahara me gali galoch ka culture nahi hai..aur jo admi khod ko gunda meeting me bata raha ho uske khilaf aap umeed karte hai kii koi khul ke samne aayega…..hamare bhi baal bachhe hai…..yashwatji jis meeting me yeah baat kahi gaye usme to yeah bhi bataya gaya tha kii aapne gunde ke khilaf jisne likha uska naam bhi unko bata diya hai…..phir aap per bharosa kaise kare…..sahara me abhi hum dukhi hai…..naam, phone number aapko bata de to kahi hamare parivar besahara na ho jaye……aakhir aap ko who janab apna dost jo bata rahe hai

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  • amitsharma21 says:

    ये तो पता नहीं कि चिट्ठी महिला ने लिखी है या पुरुष ने लेकिन एक बात सही लिखी है कि सहारा परिवार में सब कुछ अचछा नहीं चल रहा है। नए प्रबंधन में चापलूसी का बोलबाला है। बिहार-झारखंड हो, यूपी चैनल हो या फिर एमपी चैनल हो अगर पिछले छह महीनों में हुए बदलावों को देखेंगो तो एक भी व्यक्ति नहीं मिलेगा जो अपनी काबिलियत से चैनल हेड या आउटपुट हेड बना हो। मेरा दावा है कि इस फोरम पर कोई भी व्यक्ति एक भी नाम नही गिना सकता । सब किसी न किसी जान पहचान से पहुंचे हैं। और वास्तव में वरिष्ठों को साइड लाइन कर दिया है। रही बात नाम छुपाने की तो दोस्तो आज नौकरी सबसे ज्यादा अहम है। आदमी घुटघुट कर भी नौकरी करता है क्योंकि उसे पता हैकि सड़क पर आने के बाद कोई नहीं पूछता । इसलिए वो नाम छुपाकर ही सही आवाज़ उठाता है। जिसने भी ये चिट्ठी लिखी है कम से कम उसने किसी तरह से आवाज तो उठाई वरना सहारा समय में तो ज्यादातर वरिष्ठ घुट घुटकर ही नौकरी कर रहे है जबतक उन्हें बेहतर जगह नौकरी नहीं मिलती

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  • pramod kaushik says:

    Bhadas4media par is tarah ka ptra sarvjanik kar yeh vyakti kewai dabaav ki rajniti karna chahata hai.
    kaam karne wale ko kisi tarah ka dar nahi hona chhiye, shayad yeh janab (pata nahi mahila hain ya purush) bhi abhi tak kewal chatukarita ke dum par hi sahara me jame hain.Channel ki behtari ke liye agar koi varisth achcha kam karne ke liye kahega to chatukaro aur ayogya vyaktiyon ko to pareshani hogi hi. kaam karne wale ko kaisa dar

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  • Na to main Sahara se jura hun, aur na hi isse jude kisi paksh ko janta hun. Lekin itna jarur keh sakta hun, ki agar main boss hota, aur meri team mein asie gandi HINDI likhne wala koi hota to, pehle din hi kaan pakad ke bahar nikal diya hota. Letter likhne wale ko is baat ka shukriya ada karna chahiye ki naya boss abhi bhi inhen jhel raha hai……Lambe samay se Sahara mein kam karne ka dawa karne wale lekhak ko Hindi likhni nahi aati hai …aur charan sparsh jaisi bhasa to chatukarita hai.

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  • kartv vyayogi says:

    yah b aat sahi hai ki sahara tv ka kalchar kharab ho gaya hai main bhi ek dasak se adhik samnay se sahara pariwar ki garima ke karan isse juda hua hun aur hum ne yahan bahut accha kaam bhi kiya hai aur channel kabhi bahut bade mukamn par raha hai par pata nahin kuyn sahara media achha karne ke bad pichhad gata hai.
    main saharasri ki deerghayu ki kaman a karta hun kunki unke rahate hi is bisal pariwar ka bhavisya surkshit hai uske baad bhagwan malik hai.

    gali kalchar ki sahara pariwar main kalpana bhi nahin kar sakte thhe lekin ab wah bhi aa gaya har meeting main gali har jagah gali mahila ya purush pkark n ahin padta

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  • Yashwant Ji – Aap ne Bahut acchi tarah se pahchana hai ki Purush Patrakar jab Mahila ka vesh dharan kar leve tho uski bokhalahat kis kadar hoti hai.
    Bade sahab Respected sahara sri Ke lambe sambodhan maine LUCKNOW,BHOPAL me attend kiye hai Vartamaan ka samarpan hi kartavyanistha banata hai Na ki Beeta hue kal se Badli hui patrakarita Nahi ki ja sakti SAHARA TV Regional Channel me NEWS ka side Acche public approch rakne walo ke pass raha hai.rahi baat patrakarita me uthapatak aam baat hai lekin sahara sri ko
    charan sparsh kar vinti karne wale yeh bhi bataye ki hamne sahara Tv ki badoulat kitne ki kamayee ki kyo Hame hataya Gaya. Kishyanee Bilee kambha Noche wali kahawat charitarth hoti hai.

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  • field reporter says:

    patra ki bhasha nahi bhawna padhi jati hai.jis kisi ne yah patra likha hai,nishchit rup se usake sentiment ko chot pahunchi hai.itana hi nahi is patra ke madhyam se inhone tathakathit ‘saharian culture’ par bada sawal bhi khada kiya hai.sahara ke top management ko ise gambhirta se lete huye abilamb aise udand wyakti ko bahar ka rasta dikhana chahiye,tabhi sahara ki sakh bach sakti hai barna aage bhagwan hi malik hain.

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  • field reporter says:

    patra ki bhasha nahi bhawna padhi jati hai.jis kisi ne yah patra saharashree ke nam likha hai,usaka sentiment kahi-n-kahi se awashya aahat hua hai.sahara ke top Management ko ise gambhirta se lete huye aise wykti ko turant bahar ka rasta dikhana chahiye kyonki purani kahabat hai ki ak sada aam puri tokari ko barbad karne ke liye kaphi hota hai.’sahariyan culture’ki duhayee dene wale ,kabhi apane ghar ke andar bhi jhankane ki koshis kiya karen,anytha aage bhagwan hi malik hai.

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  • सहारा इंडिया परिवार के अंदर जो कुछ हो रहा है उसकी कल्पना सहारा जैसे अनुशासित संस्थान में तो नहीं ही की जानी चाहिए ,खास कर सहारा समय के बिहार/झारखण्ड चैनल में पिछले कुछ महीनो में जिस तरह से अनुशासनहीनता और अराजकता का साम्राज्य कायम हो गया है उससे एक ही व्यक्ति नहीं इस चैनल के तमाम रिपोर्टर /फिल्ड रिपोर्टर त्रस्त है .इसकी जानकारी ऊपर बैठे अधिकारियों को दिये जाने के बाद भी उसे पूरी तरह अनसुना किया जा रहा है. यही कारण है कि आज एक पीड़ित सहारा कर्मी को सहारा परिवार के मुखिया से इसकी शिकायत करने की नौबत आ गयी और अब बात संस्था की देहलीज से बाहर निकल कर आम लोगो तक पहुचने लगी है .एक तरफ सहारा श्री देश के चुनिन्दा खिलाडियों को पुरस्कार देकर सम्मानित करने और सहारा परिवार की वाह -वाही लूटने में व्यस्त है वही उनके सहारा बिहार/झारखण्ड चैनल के रिपोर्टर /फिल्ड रिपोर्टर गालियाँ सुनने और अपमानित होने को मजबूर है. जिस व्यक्ति ने भी सहारा श्री को पत्र लिख कर वास्तविकता से अवगत कराने का प्रयास किया है वह धन्यवाद का पात्र है और आपने भी इस पत्र को अपने पोर्टल पर स्थान देकर सैकडो रिपोर्टर /फिल्ड रिपोर्टर की भावनाओ को जुबान देने का सरहनिये कार्य किया है .

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  • VIjay Kumar says:

    इस पत्र में जिस तरह से एक मिडिया कर्मी ने ,अपने को बड़ा मिडिया हाउस बताने वाले सहारा समूह के अंदर हो रहे उत्पीडन,शोषण और इससे उपजी अराज़क स्थिति का जिक्र किया है,वह किसी भी मिडिया हाउस के लिए बहुत ही शर्मनाक और शर्मसार करने वाली स्थिति है.नौबत यहाँ तक आ गयी है कि एक छोटे कर्मी को भी अपनी पीड़ा की शिकायत सीधे सहारा श्री से करनी पद रही है.मतलब साफ है कि जिनके ऊपर जिम्मेवारी है इस तरह की शिकायतों पर गंभीरता पूर्वक बिचार कर कारगर कदम उठाने की,उनके कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रही है या उनके द्वारा जन-बूझ कर ऐसे निकम्मे और अक्षम लोगों को कहीं न कहीं से बचाने की कोशिश की जा रही है.सहारा मिडिया पर फ़िलहाल एकछत्र राज कर रहे उपेन्द्र राय जी बात-बात में आध्यात्म और नैतिकता की दुहाई देने में माहिर हैं ,लेकिन उनकें नाक के नीचे गाली -गलौज ,प्रताड़ना और शोषण की जो अपसंस्कृति फल-फूल रही है ,उससे नज़रे चुराना उनके भी दोहरे मापदंड को प्रमाणित कर रहा है.यही कारण है कि सहारा में काम कर रहे रिपोर्टर ,फील्ड रिपोर्टर और अन्य कर्मी, खास कर बिहार-झारखण्ड चैनल में कार्यरत सभी स्तर के कर्मियों को अपनी फरियाद सहारा श्री और कर्तव्य कौन्सिल से करनी पड़ रही है और अब तो इस मिडिया हाउस के अंदर व्याप्त अराजकता और दमन-शोषण की कहानी सार्वज़निक होने लगी है -इससे शर्मनाक स्थिति किसी भी मिडिया हाउस के लिए हो ही नहीं सकती है.

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  • सहारा श्री को संबोधित इस पत्र से इतना तो साफ है कि सहारा में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है.अपने को एक अनुशासित संस्था बताने वाली इस मीडिया हाउस को आखिर ऐसे हाथों में क्यों सौप दिया गया है जो खुद ही अपना कब्र खोदने में लगे हुए हैं.आखिर सहारा के मनेजमेंट को हो क्या गया है?पत्र में लिखी हुयी बातें अगर सत्य हैं ,तो यह समझ से परे है कि किसी भी मिडिया हाउस में ऊपर बैठे लोगों को अपने कर्मियों को गलियां देने या उन्हें डंडे और गोली-बन्दूक की धमकियाँ देने की छूट आखिर किस नियम कानून के तहत मिली हुयी है?अभी तक तो ये बात सहारा श्री तक पहुँचाने की कोशिश हुयी है ,ऐसे मामले अगर अदालत तक पहुँच गए तो मनेजमेंट को जबाब देना मुश्किल हो जायेगा ,संस्था की जो बदनामी होगी वो अलग.अब भी देर नहीं हुयी है ,सहारा समूह को अगर अपने आदर्शों और मूल्यों की तनिक भी परवाह है और इस समूह में काम करने वाले किसी भी कर्मी के सम्मान और प्रतिष्ठा का अगर उन्हें जरा भी ख्याल है तो ऐसे लोगों को तुरंत बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए जिनकी वज़ह से इस पूरे समूह की भद्द पिट रही है .

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  • Ye baat sirf sahara TV ki hi nahin hai. Pure Sahara Group me yahi haal hai. Is patra me sirf nayee baat ye hai ki atank machane wale senior naye hai. Bahar se aaye hain. Pure Sahara group me niche ke staff ko unaka imidiate boss apana personal gulam samajhata hai. Sahara Group me agar offices me gupt roop se nazar rakhi jaye to pata chal jayega ki jyadatar cebin wale (specially who did not have any professional carriear) apane matahat ko apane ghar ka noukar hi samajhate hai. Isake alawa ek our bahot achchi baat hai ki in sabase aapako agar nizat pana hai to aap sahara se regine kar de.

    To ji kisi ne bhi ye letter likha hai use main ye kahana chahunga ki saharasri ko likhane se koi fayada nahin hoga, ya to bardast karo ya fir apana rasta dhondo

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