सहारा : राकेश शुक्‍ला जुड़े, अजय शर्मा की वापसी, राय लाबी दुबकी, ब्राह्मण लाबी फार्म में

सहारा मीडिया से दो खबरें हैं. वरिष्‍ठ पत्रकार तथा रिलायंस ब्रॉडकास्‍ट के बिग मैजिक के लिए कार्यक्रम बनाने में जुटे राकेश शुक्‍ला के बारे में खबर है कि उन्‍होंने सहारा मीडिया ज्‍वाइन कर लिया है. उन्‍हें स्‍ट्रेटजी, प्‍लानिंग और आपरेशन का हेड बनाया गया है. बताया जा रहा है कि वे सहारा के भविष्‍य के कुछ बड़े प्रोजेक्‍ट को हैंडल करेंगे. इससे पहले राकेश शुक्‍ल पी7 न्‍यूज से जुड़े हुए थे.

आजतक चैनल से इस्‍तीफा देने के बाद राकेश शुक्‍ल दुबई और सिंगापुर बेस्‍ड प्रापर्टी चैनल को हेड किया. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद वे पी7 न्‍यूज चले गए थे. पी7 न्‍यूज से जब उन्‍होंने इस्‍तीफा दिया तब उनके पास कुछ नॉन न्‍यूज चैनलों के ऑफर थे, परन्‍तु उन्‍होंने इससे इनकार करते हुए न्‍यूज चैनल के साथ जुड़े रहने को ही प्राथमिकता में रखा. इस दौरान वे रिलायंस नेटवर्क के लिए एक कार्यक्रम तैयार कर रहे थे.

दूसरी खबर है कि सहारा मीडिया के नार्थ हेड अजय शर्मा जिनका तबादला जाते जाते उपेंद्र राय ने बंगलुरू के लिए कर दिया था, उन्‍हें स्‍वतंत्र मिश्र ने फिर से वापस उसी पद पर बुला लिया गया है. अजय अब फिर से नार्थ को हेड करेंगे. इससे अब माना जाने लगा है कि सहारा में अब उपेंद्र राय का साम्राज्‍य कमजोर पड़ने लगा है. उपेंद्र के समय में हावी रहने वाली राय लाबी अब बैकफुट पर है. उपेंद्र के समय में दबी-कुचली ब्राह्मण लाबी स्‍वतंत्र मिश्र के सहारा मीडिया के हेड बनने के साथ ही अपने फार्म में आ गई है.

जिस तरह से स्‍वतंत्र मिश्रा ने उपेंद्र राय के फैसले को पलटते हुए कुछ दिन के भीतर ही अजय शर्मा को फिर से नार्थ का हेड बना दिया है. वह उपेंद्र राय की घट चुकी ताकत बताने के लिए काफी है. इसके साथ ही स्‍वतंत्र मिश्र ने उपेंद्र के समय में उड़ने वाले लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारियां शुरू कर दी है. कब किस पर पंजा लग जाए किसी को खबर नहीं है. राय लाबी पूरी तरह से दुबकी हुई है. इसके साथ ही सहारा के भीतर एक बार फिर से उठापटक और बदलाव का दौर तेज होने वाला है, परन्‍तु धीरे-धीरे. भले ही उपेंद्र राय को सहारा मीडिया का ग्‍लोबल हेड बना दिया गया हो तथा स्‍वतंत्र मिश्र को उपेंद्र को ही रिपोर्ट करने की बात कही गई हो, परन्‍तु अभी तक जो रिपोर्ट कार्ड दिख रहा है, उसमें तो उपेंद्र राय कहीं से पास होते हुए नहीं दिख रहे हैं, जबकि स्‍वतंत्र मिश्र डिस्टिंक्शन ला रहे हैं.

Comments on “सहारा : राकेश शुक्‍ला जुड़े, अजय शर्मा की वापसी, राय लाबी दुबकी, ब्राह्मण लाबी फार्म में

  • अनूप says:

    सहारा समूह, परिवार की हर समय बात करता है लेकिन परिवार में जातिगत लॉबी हर समय हाबी रहती है शायद यही कारण है कि यहां कोई ज्यादा समय तक अपने जौहर नही दिखा पता दिखाता है उनका चबूक सिर्फ कर्मचारियो पर चलता है जो चैनल में काम ईमानदारी से करते,मोटी सैलरी पर काम करने सहारा परिवार चूना लगाकर चले जाते,अगर सहारा श्री जी इन बातो ध्यान न दिया तो उनका परिवार टूट जायेगा या फिर किसी और के हाथ की कठपुतली बन जायेगा

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  • pankaj piyush says:

    anoop ji jowhar dekhane wale ki sahara ko jaroorat nahe hai. vah sahara ke liye khota sikka hota hai. yaha log apne kabiliyat par nahe telahe karke fharashse arshse par pahooch jatee hai. jara sochiye 1-2 do mah pahle swataetra mksra kaya the..aur 15 sal pahlee kaya the.. 15 sal pahle juniyar kraim reportar the.. kaya kaya karke unit hed hooye, sath waloo ko sab maloom hai..unse seeniyar rashtriya sahara me N.E. hai. upendra mishra 15 sal pahle 1500 par sanwadsoootra the.. ye saharah hai..ise hee kahte hai vishwa ke sabse bade (bhawnatmak) pariwar ki khuoobee..

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  • amit kumar says:

    सहारा समय से जुडकर कई सालों से काम करने वाले भाईयों का सहारा अब छिनने लगा है क्‍योंकि यहां पर काम करने स्ट्रिंगरों की जगह जुगाड वाले भाईयों को ज्‍यादा तवज्‍जो मिलने लगी है.. ताजा मामला गोरखपुर का है जहां पर एक जुगाडु स्ट्रिंगर का जुगाड जिले के पुलिस विभाग के बडे हाकिम से है और उस हाकिम का सहारा के न्‍यूज विभाग के परतन्‍त्र हाकिम से, सो जुगाडु स्ट्रिंगर भाई की लाटरी निकल गई है और सुनने में आ रहा है कि वो एक हफ्ते में उसी से सहारा प्रणाम कहवाने के लिये उतावले हैं जिससे उन्‍होने खबरों का ककहरा पढा था और जो उनको इस जिले में स्‍थापित किया था. इसलिये अब सहारा समय में जुडना हो तो बस जुगाड खोजिये, आपका काम अपने आप हो जायेगा.
    जय हो सहारा ;););)

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  • ravi kumer says:

    सहारा में स्वतंत्र मिश्र भले ही आ गए हों,ज़्यादातर स्टॉफ परतंत्र जैसी जिन्दगी ही जिएगा।सहारा में नौकरी करने का मतलब है हद दर्जे की गुलामी।वैसे तो गुलामों जैसी जिन्दगी हर चैनल में है..लेकिन सहारा में तो इसकी पराकाष्ठा है।जिनके पास सहारा ग्रुप के जितने ज़्यादा राज़ हैं..वहीं वहां लंबी पारी खेल सकता है।वहां जर्नलिस्ट नहीं नॉन जर्नलिस्ट और दलाल होना पहली योग्यता है..राकेश शुक्ला जैसे लोग इस खांचे में एकदम फिट बैठते हैं।जहां-जहां रहे चैनल का माहौल खराब किया..वैसे सहारा में उनके करने के लिए कुछ ज़्यादा नहीं है।हां ये सच है कि अगर उनकी चली तो चैनल को यमलोक जाने से कोई रोक नहीं पाएगा

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  • Ek bhumihar Upendra rai ne Swatantra mishra ki jo halat ki wo use bhule nahi honge.Ab pata nahi kya sochkar wo ek doosra bhumihar le aaye hain naam hai rakesh Shukla.Unki aisee zar katega ye ki phir kahi katha banchte nazar aayenge swatntra mishra jai ho

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