सुब्रत राय सहारा, आपके मीडियाकर्मियों को भी फोर्स की जरूरत है

सुब्रत राय बड़ा दाव खेलना जानते हैं. वे छोटे मोटे दाव नही लगाते. इसी कारण उन्हें अपने छोटे-मोटे तनख्वाह पाने वाले मीडियाकर्मी याद नहीं रहते. और जिन पर इन मीडियाकर्मियों को याद रखने का दायित्व है, उन स्वतंत्र मिश्रा जैसे लोगों के पास फुर्सत नहीं है कि वे अपनी साजिशों-तिकड़मों से टाइम निकालकर आम सहाराकर्मियों का भला करने के बारे में सोच सकें. इसी कारण मारे जाते हैं बेचारे आम कर्मी.

इसी का नतीजा है कि इस दीवाली पर सहारा के मीडियाकर्मियों को सिर्फ 3500 रुपये का बोनस देने का निर्णय लिया गया है. इतना कम बोनस तो राज्य सरकार के चतुर्थ ग्रेड कर्मियों को भी नहीं मिलता. सहारा में साल भर से न कोई प्रमोशन मिला है और न ही इनक्रीमेंट. प्रमोशन-इनक्रीमेंट के लालीपाप देने के कई बार कई लोगों ने वादे किए पर अमल किसी ने नहीं किया. सहारा के पास अपने इंप्लाइज को देने के लिए पैसे नहीं होते, लेकिन जब खेलकूद की बात आती है तो इनके पास अथाह पैसा जाने कहां से आ जाता है. ताजी सूचना आप सभी ने पढ़ी होगी कि सहारा इंडिया परिवार ने विजय माल्या के स्वामित्व वाली फॉर्मूला-वन टीम में 42.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है.

इस खरीद के लिए सहारा इंडिया परिवार ने 10 करोड़ डालर का निवेश किया है. इसके बाद फोर्स इंडिया का नाम बदलकर सहारा फोर्स इंडिया कर दिया गया है. देश में खेलों के सबसे बड़े प्रमोटर और संरक्षक के रूप में सहारा इंडिया का नाम लिया जाता है. पर जब बात सहारा मीडिया की आती है तो प्रबंधन के पास पैसा नहीं होता. सहारा के लोग कई तरह की परेशानियों में जी रहे हैं. पीएफ से लेकर हेल्थ तक के मसले पर सहारा के कर्मी खुद को ठगा हुए महसूस करते रहते हैं. पर उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं होती क्योंकि सहारा में प्रबंधन के खिलाफ मुंह खोलने का मतलब होता है नौकरी से हाथ धोना.

उपेंद्र राय और स्वतंत्र मिश्रा के बीच की रार में आम सहाराकर्मी खुद को पिसा हुआ पा रहा है. जो लोग कथित रूप से उपेंद्र राय के खास थे, वे अब किनारे लगाए जा चुके हैं और जो लोग स्वतंत्र मिश्रा के करीबी माने जाते थे उन्हें फिर से बड़े पदों व बड़े दायित्वों से नवाजा जा रहा है. देखना है कि इन सब तिकड़मों-चालबाजियों के बीच सहारा प्रबंधन अपने कर्मियों पर धनबौछार करना याद रखता है या फिर 3500 रुपये की छोटी रकम देकर ही अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लेता है.

सहारा में कार्यरत एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर इस पत्र के मजमून पर किसी को आपत्ति हो तो वह  अपना विरोध नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए दर्ज करा सकता है या फिर bhadas4media@gmail.com के जरिए भड़ास संचालकों तक पहुंचा सकता है.

Comments on “सुब्रत राय सहारा, आपके मीडियाकर्मियों को भी फोर्स की जरूरत है

  • YASHWANT JEE YAH BONSH BHI SAHARA TAB DE RAHEE HAI JAB 8.33% DENE KI TALWAR SARKAR NE LATKA DE HAI.KAMCHARIYON KO DENE ME PRABANDHAN KE JAN NIKAL JATEE HAI.SUNA HAI YAU HEE SAHARASHRE KISEE KO DAMREE NAHE. JISHSE BHAWISYA ME LABH KI SAMBHAWNA HOTEE HAI USE HEE DETEN HAI. AB SAHARASHREE MORKH TO THAHRE NAHEE JWO LANGREE GHOREE PAR DANW LAGA DE. RASHTRIYA SAHARA AKHBAR ME SHALON SE LOG 2500-2500 PAR KAM KAR RAHE HAI WO BHI PARTTIME NAHEE FHOOLTIME.YE PAISA BHE UNHE TDS KATKAR DIYA JATA HAI. RAHEE BAAT KHARIDNE KI TWO ISH MAMLE ME YE KISEE BANIYA SE KAM NAHEE HAIN.. INKA BAS CHLE TWO YE TAJMAHAL AUR LALKILA KHAREED LEYN ;D

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  • Maheshwar Pd says:

    Ye sab kahane ki baat hai bhadasi sahab… Sahara me ab ka, karne wale bhi kaha raha gaye hai… media ke sare nikamme wahi hai hai ab…. tabhi to Sahara ki ye halat ho gai hai. ye nikamme ese hai bolte hai ki management kharab hai company kharab he lekin jate phir bhi kahi nahi hai… Sahara jo kar rahi hai theek kar rahi hai.. kam se kam salary to time se aur saste me khana de rahi hai. kaam karne wale aaj aur channels me bari jagaho me pahuch gaye hai.. aur ye nikamme jo likhte hai yahi retirement plan me hai… bhadasi ye sab patri mat publish kiya karo…

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  • Bda admi aise hi to log bante hain…doosroo ka hak maar ke… ab Halanki Amar singh jaise log kudh hi giraft me hain to sahara prabandhan yahi sab na karega..

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  • pankaj.piyush says:

    yashwant jee jisne bhi 3500 bonsh milnee ki sambhawna jahir ke usko sukriya. suna hai. kaheen-kaheen 2015 rupye thama kar mediakamiyo ko unkee awkat bata dee.tathakathit patrakaro ne bhi bhate bhoot ki langotee maan rkh laya.sahara ke pash khilareyon ko dene/lootane ke liya paise hai,kampniyo ko khareedne, apna smarajye khara kane ke liya paisen hai, bonee kapoor ke risikesh aagman (apne piita ki ashthee vsarjan ke liya) par lotane ke liye paise hai lekin kamchariyo ko denne ke liye nahee hai wo bhi tab jab sansthan arboon me khel raha hai

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