रांची से भास्कर का प्रकाशन मुश्किल

कानूनी अड़चनें आईं सामने : डीबी कार्प को नोटिस : टाइटिल विवाद फिर प्रकट हुआ : संजय अग्रवाल ने की प्रेस कांफ्रेंस : रांची में अखबार लांच करने से ठीक पहले भास्कर समूह के मालिकों का आपसी झगड़ा सड़क पर आ गया है. ‘दैनिक भास्कर’ टाइटिल के पांच मालिकों में से एक ने रमेश चंद्र अग्रवाल व उनके बेटों वाली कंपनी डीबी कार्प को कानूनी लड़ाई में घसीट लिया है.  रांची से दैनिक भास्कर अखबार लांच करने की तैयारियों की सूचना मिलने के बाद ‘दैनिक भास्कर’ टाइटिल के पांच मालिकों में से एक ने इस कदम को कानूनी तौर पर चुनौती दी है. चुनौती देने वाले शख्स का नाम है संजय अग्रवाल. वे दैनिक भास्कर टाइटिल के पांच मालिकों में से एक हैं.

संजय अग्रवाल (निदेशक, दैनिक भास्कर, झांसी) ने पटना और रांची के सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई. उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ टाइटिल के अन्य मालिकों की बिना सहमति के अखबार लांच किए जाने की प्रक्रिया को अवैध बताते हुए इसे रोकने की अपील की है. इन दोनों जिलों के जिला अधिकारियों ने डीबी कार्प (पूर्व में इस कंपनी का नाम राइटर्स पब्लिशर्स लिमिटेड था) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. अब डीबी कार्प के मालिकों को दस्तावेजों के जरिए यह साबित करना होगा कि दैनिक भास्कर टाइटिल पर कोई विवाद नहीं है और वे अखबार का प्रकाशन करने में सक्षम है.

लेकिन अगर दस्तावेजों की बात करें तो संजय अग्रवाल खुद को दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई के पक्ष में खड़ा बताते हैं. उनका कहना है कि जितने भी वैध दस्तावेज हैं, वे सब यही बताते हैं कि दैनिक भास्कर टाइटिल के पांच मालिक हैं और बिना सबकी सहमति के नए स्थान से अखबार निकालना असंभव है. संजय के मुताबिक उन्होंने शुरू में कहा गया कि यह फेमिली मैटर है, इसे मिल-बैठ कर निपटा लेंगे. लेकिन जब लगा कि अन्य लोग सीरियस नहीं हैं और बरगलाने के लिए ही ये बातें कह रहे हैं, तब उन्होंने पूरे मामले में अदालत और कानूनी का सहारा लिया.

संजय अग्रवाल ने दिल्ली में आज एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर अपनी बात को मीडिया के समक्ष रखा. साथ ही दैनिक भास्कर टाइटिल को लेकर चल रहे विवाद के सभी दस्तावेजों की फोटोकापी पत्रकारों में वितरित की. इस मौके पर संजय अग्रवाल की ओर से जो प्रेस रिलीज जारी की गई है, वो इस प्रकार है-

 


 

Press Release

We are here to talk about the current status of the ownership dispute of the newspaper title Dainik Bhaskar. This started back in the year 1985 when one of our family member decided to go against the rules and regulations to open another company with the intentions of occupying Dainik Bhaskar. The matter was bought to the Supreme Court.

As per the Supreme Court’s judgement in 2003, RNI released an order which confirmed that the title Dainik Bhaskar would be co-owned by 5 owners. I was one of them. At that time i was publishing the newspaper Dainik Bhaskar from Jhansi, Uttar Pradesh. After this, the other co-owners started publishing the newspaper from various other states without my consent. I opposed but was told that the matter would be solved with in the family.

But then i realised that others were not serious at all regarding this dispute and were about to start the newspaper in other states, that too without informing me, and so i was forced to take this matter to appropriate authorities and here i am, to put forward my side of this situation.

A few days ago, i came to know from the media that D.B. Corp. was all set to publish the newspaper in Ranchi (Jharkhand) and Patna (Bihar). Then i legally filed an objection before the concerned authorities of Ranchi and Patna under the press and registration of book act and today we have results. District Magistrate has now issued a notice to the DB Corp (formerly known as Writers Publishers Ltd.). Now i am giving you all the Documents regarding the ownership dispute of the title Dainik Bhaskar and expect your cooperation.

Sanjay Agrawal

Dainik Bhaskar

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Comments on “रांची से भास्कर का प्रकाशन मुश्किल

  • Arup chatrjee says:

    mukesh ambani auranil anbani ki aapsi ladayee ke fayde nuksan dekhne ke bad bhi aam udyogpatiyo ne to sabak nahi li,lekin desh ka sabse bada akhbar chalane ka dawa karne wale log bhi chhoti baaton ke liye badi galti karen achha nahi lagta.bhaskar ke ranchi edition ke liye kayee log bharti bhi kiye jaa chuke hain.aur is naye viwad ke baad unka kya hoga.

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  • RAJESH VAJPAYEE UNNAO says:

    nihsandeh sanjayji ko utna he weight aur importance deyni chahiyae jitna rest 4 malik apni chah rakhtein hai.
    sanjayji katai katai galat nahi.

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  • amit aanand says:

    Media house ka war aur internal khabar bhadas ujagar karta raha hai.aaj bhaskar ke malikana hak rakhne wale logo ka aamne samne aana billi ka rasta katne jaisa hai.kal lobing ke karan employes bhi yahi karenge.ranchi ke media houses ki yahi kahani hai.reporter naukri bachane ke chakar main editor ko sabji bhi pahucha rahe hain.ab patrakarita nahi buisness khel chalu hai

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  • Manish Chandra says:

    Kripya batayen Ab kiski marji chalegi.
    Pathko ki yaa Akhbaar ki
    Abhi to Ranchi me Bhaskar ke Hording me Likha hai AB AAPKI MARJI CHALEGI.
    Aage dekhen hota hai kya.

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