हरीश पाठक, अब सुधर जाइए

राष्ट्रीय सहारा, पटना में स्थानीय संपादक द्वारा डांटे जाने के बाद अत्यधिक तनाव के चलते अचानक एक जर्नलिस्ट के बेहोश होने की घटना के बारे में कई नए तथ्य पता चले हैं. भड़ास4मीडिया की जांच से खुलासा हुआ है कि इस घटनाक्रम के लिए पूरी तरह जिम्मेदार स्थानीय संपादक हरीश पाठक हैं. संतोष चंदन, जो कुछ महीने पहले तक दिल्ली में सहारा समय न्यूज चैनल के हिस्से हुआ करते थे, अपनी मर्जी से पटना गए और अपनी मर्जी से टीवी की बजाय प्रिंट को चुनकर उसके हिस्से बने. ऐसा पत्रकारीय समझ और बेहतर काम करने की इच्छा-तमन्ना-भावना के कारण.

आज के दौर में जब लोग पटना-लखनऊ-भोपाल आदि से दिल्ली की तरफ भागते हैं, कोई जर्नलिस्ट दिल्ली से खुद ट्रांसफर लेकर पटना जा रहा हो और टीवी की बजाय प्रिंट को पत्रकारिता के लिए बेहतर आप्शन के रूप में चुन रहा हो, तो समझा जा सकता है कि वह संवेदनशील जर्नलिस्ट होगा. समझदार जर्नलिस्ट होगा. नया कुछ करने की आकांक्षा रखने वाला जर्नलिस्ट होगा.

संतोष चंदन के बैकग्राउंड के बारे में पता चला है कि वे रंगकर्मी और एक्टिविस्ट रहे हैं. वाम आंदोलनों से बेहद करीब का उनका रिश्ता रहा है. थिएटर के मोर्चे पर काफी कुछ किया है उन्होंने. ‘समकालीन जनमत’ पत्रिका से जुड़े रहे हैं. उधर, दूसरी तरफ हरीश पाठक हैं जो खुद को साहित्यकार बताते हैं. पत्रकारिता में लंबे समय से हैं. उनकी कई किताबें भी हैं. पर आफिस में जिस तरह का उनका व्यवहार अपने सहकर्मियों के साथ होता है, वह न सिर्फ अशोभनीय बल्कि अशालीन भी है. प्यून से लेकर पेज मेकर तक और ट्रेनी से लेकर एनई तक, ज्यादातर लोग, आफिस के 90 फीसदी लोग हरीश पाठक के व्यवहार से परेशान रहते हैं. छोटी छोटी बातों पर अत्यधिक गुस्सा करना, झिड़कना, डांटना, फटकारना, दबाव में लेना… यह सब रूटीन का हिस्सा है.

भड़ास4मीडिया के पास लंबे समय से हरीश पाठक के व्यवहार को लेकर कई तरह की शिकायतें व मेल आती रही हैं पर इन मेलों पर कभी इसलिए ध्यान नहीं दिया गया क्योंकि माना गया कि कुछ लोग इरादतन हरीश पाठक को बदनाम करने के मकसद से ‘मेल भेजो अभियान’ चला रहे होंगे. पर हाल में जो घटना हुई और उस घटना के बारे में जिस तरह से झूठ बोलकर हरीश पाठक ने अपना बचाव करने की कोशिश की, वह शर्मनाक है. हरीश पाठक ने संतोष चंदन के स्वास्थ्य को लेकर ही कई तरह के सवाल खड़े कर दिए.

हद तो ये है कि बेहोश होने के बाद हास्पिटल भर्ती हुए और अब घर पर आराम कर रहे संतोष चंदन को हरीश पाठक ने आज तक फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी तक नहीं ली. कोई खुद को साहित्यकार और पत्रकार कहे और उसके अंदर संवेदना बिलकुल ना हो, ये कैसे हो सकता है? साहित्यकारों के लिए तो खासतौर पर कहा जाता है कि उनके लिए मनुष्य की गरिमा और मर्यादा ही सबसे बड़ा सवाल होता है. लेकिन हरीश पाठक की असंवेदनशीलता देखिए कि उनके सामने उनका जो सहकर्मी उनकी डांट-फटकार से तनाव बर्दाश्त न करने के कारण बेहोश हो गया, वे उसका हालचाल पता करने तक न पहुंचे और न ही फोन किया.

बताया जा रहा है कि डिप्टी चीफ रिपोर्टर संतोष चंदन को हरीश पाठक ने सिटी की सारी खबरों के एक-एक अक्षर तक को पढ़ने और दुरूस्त करने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी. जब संतोष चंदन प्रत्येक खबर को पेजीनेशन व प्रिंटिंग के लिहाज से ओके करते थे तब हरीश पाठक उसे चेक करते थे. संतोष चंदन को जो काम दिया गया है, वह कतई आसान काम नहीं है. बेहद जिम्मेदारी भरा काम है. बेहद सावधानी व दिल-दिमाग लगाकर किए जाने वाला काम है. यह काम अगर किसी से डांट फटकार करके लिया जाएगा तो स्पष्ट है कि वह न सिर्फ गल्तियां करेगा बल्कि तनाव में उसकी कार्यक्षमता घटेगी.

घटना के दिन आफिस में मौजूद एक जर्नलिस्ट का कहना है कि आजकल के संपादक अपने आगे किसी को कुछ समझते ही नहीं हैं. वे मान लेते हैं कि उनके सामने बैठा हर शख्स मोटी चमड़ी वाला है, जितना डांटो-फटकारो, कोई असर नहीं पड़ेगा. संतोष चंदन सुलझे और संवेदनशील जर्नलिस्ट हैं. उन्हें ऐसी किसी स्थिति की उम्मीद न थी. वे सहारा के दिल्ली आफिस में काम कर चुके हैं. उन्हें अंदाजा नहीं था कि पटना में राष्ट्रीय सहारा अखबार के अंदर माहौल इस तरह का होगा. अगर उन्हें तनिक भी अंदाजा होता तो वे यहां न आए होते या फिर प्रिंट की जगह टीवी में ही रहे होते.

पता नहीं इस घटना के बाद से हरीश पाठक ने अपना व्यवहार और तौर-तरीका बदला है या नहीं, परंतु उन्हें अगर नहीं पता हो तो वे जान लें कि अच्छा एडिटर वही होता है जो अपने सहकर्मियों का विश्वास व दिल जीतकर साथ लेकर चले. असली कप्तान वही होता है जो टीम में ऊर्जा भर दे, टीम स्पिरिट डेवलप करा दे. कई विद्वान लोग इतने खराब टीम लीडर होते हैं कि अच्छी खासी टीम चौपट कर देते हैं. कई बुरे कहे जाने वाले लोग इतने अच्छे टीम लीडर होते हैं कि बेहद पस्त व त्रस्त टीम में जान फूंककर उसी के जरिए सभी मैच जीतकर ट्राफी पर कब्जा कर लेते हैं.

दुनिया भर की बड़ी कंपनियां कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयोग कर रही हैं, हम हिंदी वाले इसके बारे में या तो जानते नहीं या फिर जानने बूझने के बावजूद अपनी लठैती पर अड़े रहते हैं. आफिसों में कम से कम तनाव हो, इसके लिए कई तरह की कवायद की जा रही है. स्माइल करने, प्रेम से बोलने, योगा करने, संगीत सुनने…. रोजाना ऐसी खबरें हम अखबार वाले ही छापते हैं. पर जब खुद के आफिस की बात आती है तो हम भूत बन जाते हैं और सामने वाले को डराने लगते हैं.

आखिर में, हरीश पाठक से एक विनम्र अपील…

प्लीज सर, अब सुधर जाइए. अपने सहकर्मियों से प्रेम से काम लीजिए. सबको सम्मान और गरिमा दीजिए. अनुशासन बिलकुल बनाए रखिए, डिकोरम का पालन हर हाल में कराते रहिए. पर यह सब बिना डांटे-फटकारे संभव है. बेवजह तनाव पैदा किए बिना भी यह सब संभव है. आप भी कभी सब एडिटर रहे होंगे. कभी चीफ सब एडिटर बने होंगे. कभी न्यूज एडिटर हुए होंगे. तो उन दिनों में आप अपने संपादक से जैसे व्यवहार की अपेक्षा करते थे, वैसा ही व्यवहार आप अपने अधीनस्थों से करें तो आपके प्रति हम लोगों के मन में सम्मान का भाव बढ़ जाएगा. आप उम्र और अनुभव दोनों में बड़े हैं, उम्मीद है, कभी-कभी छोटे-मोटे लोगों की भी सलाह-बात मान लिया करेंगे.

आपका ही

यशवंत सिंह

एडिटर

भड़ास4मीडिया

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Comments on “हरीश पाठक, अब सुधर जाइए

  • विमलेश गुप्‍ता शाहजहापुर says:

    विलकुल सही लिखा है कि कभी-कभी छोटे-मोटे लोगों की भी सलाह मान लेने मे फायदा ज्‍यादा और नुकसान कम होता हैा

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  • अमित गर्ग. राजस्थान पत्रिका. बेंगलूरु says:

    केवल किसी एक हो ही मत सुधारिए या सुधरने के लिए कहिए, बल्कि पत्रकारिता में ऐसी बहुत सारी गंदगी है जिसे साफ करने के लिए कहने की जगह खुद झाडू लेकर साफ करना होगा। वरना यह गंदगी जिस तेजी से फैल रही है उसमें सामाजिक-स्वच्छ पत्रकारिता का दब जाना स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है। अब ऐसे लोग भी पत्रकारिता कर रहे हैं जो खुद को भगवान नहीं तो भगवान से कमतर भी नहीं आंकते। भले ही संपादकों-प्रभारियों की दया पर चल रही इनकी खुद की नौकरी का ही इन्हें पता ना हो। नौकरी इसलिए लिखा कि पत्रकारिता का मतलब इनके लिए किसी का भविष्य बनाने-बिगाडऩे की सोच तक ही सीमित है। ये बात और है कि इनसे होना जाना कुछ भी नहीं है, सिवाय कोरी हवाई बातों के।

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  • Apne sahi likha hai. Harish patahak bahut badtamiz admu hain. Mumbai men unke hazaron kisse abhi tak zinda hain. Sharab ke nashe me to ve behad ghatiya harkaten karte hain.

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  • ravishankar vedoriya 9685229651 says:

    ese pado per bete log jo apne pad ka phayda uttkar apne adineste se bura bartav karte hai vo keval afsar ho sakte hai ek budjivi patrakar nahi ho sakte unke is pad per ane ko bhi sak ke dayre mai dekha jata hai
    jo bhi ho pathak ji aap apni juban per lagam do nahi to apse bada wala koi bhi apko bhi kuh bhi kah sakta hai

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  • ROCKY RANJAN PATNA says:

    MAI V RASHTRIYA SAHARA KA WORKER HO. SAMPADAK SIR PUR YAH AAROP GALAT HAT. PATAKH SIR AGER DATHTEY HAI TO WO HAMERE HIT KE LEA. AUR AKBHAR KE LEYE. NEHI BOLANG TO LOG SAHI DANGH SE KAM NAHI KARANGGE. PATAKH SIR KE AANE SE PALHE AUR AUB KABHAR ME KAPHI AANTER HUYA HAI, KABHAR ME BAUTH SUDHAR HUYA HAI.

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  • WRITTEN BY ASA PATNA 26 JUNE 2010

    SRI HARISH PATHAK EK ACCHE SAMPADAK HAIN AUR APNE SAMAY ME UNHONEN RASHTRIYA SAHARA, PATNA KO KAPHI ACCHA SWAROOP PRADAN KIYA HAI. VE KHUD DER RAT TAK AKHBAR ME RAHTE HAIN AUR SABHI CHIJON KI MONITERIIG KARTE RAHTE HAIN. JAHAN TAK SRI HARISH PATHAK DWARA LOGON KO DANTANE KA SAWAL HAI, MAI EK BAT SPAST KAR DOON KI RASHTRIYA SAHARA JAISE ACCHE AUR UDAR SANSTHA ME YADI KAM NAHI KARNE WALE KUCH LOGON KO DANTA NAHI JAI TO YE LOG AKHBAR KA KABARA NIKAL DENGE. HAR SANSTHAN ME SENIOR GALTI HONE PAR APNE JUNIOR KO DANT-TA HAI, YAH KOI NAI BAT NAHI HAI. SRI HARISH PATHAK YADI DANT-TE HAIN TO PHIR MITHAI BHI TO KHILATE HAIN. SRI HARISH PATHAK KISI KO HANI PAHUNCHNE WLAE AADMI NAHI HI HAIN HAIN.PRINT MEDIA KE DUSRE AKHBARON ME JO STHITI HAI AUR WAHAN KE SAMPADKON KA JO YAYAHAR HAI ,LAGTA HAI YE LOG US SEWAKIF NAHI HAIN. YASHWANT JI, AISE LOGON KO SAMJHAIYE KI POLITICS KARNE KI BAJAI AKHBAR KE UTTHAN KI DISHA ME KAM KAREN.

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  • awanindra ashutosh says:

    Maine ye poora lekh padha, jis tarah aapne Harish ji bare mein likha hai, kya usi tarah unka aur santosh chandan ki pratikriya bhi hamein mil sakti hai? main prateekshrat hoon.

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  • Ajay,Patna says:

    Harish Pathak ne Rashtriya Sahara Patna ki chabi kharab kar di. Sab kuch sachaai janane ke bad jo Harish ki tarifdari kar rahe hain ye unke chatukar hain aur sahara india pariwar me bhram phaila rahe hain. Jo tatashtha rahega uska bhi likha jayega itihas.

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  • patrakarita me is tarah ki bate hona ab bahut mamuli baat ho gai hai, desh bhar me bahut se log aise is vidha me aa gaye hai jinaka isase koi sarokaar hi nahi hai to fir samvedana kaha se aayegi, ab apane aap ko sahityakaar kahane aur samvedanseel hone me to bada fark hai na.jo bhi log aaj is chhetra me badi kursiyon par baithe hai wo apane sahayogi ko jar khareed gulaam se jyaada kuchha bhi nahi samajhate.isi tarah ke ek sampadak hai mumbai me. dainik yashobhoomi akhabaar ke sampaadak hai.karyaalaya ko poora kunaba bana liye hai.unhi ke teen bhai proof reader hai aur ek chacha hai jo retired shikchhak hai aur o unako karyalay me baithakar bematab ki 15000 rs. payment dilate hai. 2-3 staff bahar ke hai to unako itana pratadit karate hai ki us nimnatam star ko yaha kaha hi nahi jaa sakata.koi karmachari agar bimaar ho jaye aur chhutti mage to kahate hai bahana kar raha hai. duniya ke saare sampadako me apane aap ko sabase mahaan kahate hai. unaki najaar me saare patrakaar bhrastha hote hai. aur o khud itane bharasta hai ki kaha hi nahi jaa sakata. ek dibba mithai jo dede usaki khabar chhapati hai. jo mithai nahi deta usaki khabar nahi chhapati. isa tarah ki patrakarita ke ve samwaahak hai.

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  • viplava awasthi says:

    yaswant ji….
    Maine bhi ek baar sacchi patrikarita yani ki print join karne ka faisla kiya…delhi se Kanpur Jagran pahuncha…RE the Sri Pandey ji….bahut bariya insan …call kiya to interview ko bula liya….interview kya khana poorti ki coz 4 saal ka experience jo tha…so appoint ho gaya …halaqi salary delhi ke mukable half…lekin wahi hua jiska mujhe na to yakin tha aur na hi ahsaas….chief reporter kanpur jagran ne dikhaya apna rang… 14-16 hours kaam karne ke baad bhi bhai sahab khush nahin the…khush kaise hote mujhe nahin pata chala …shayad expectation kuch aur hi thi…jo maine delhi mein electronic ki reporting karte hue nahin sikhi…so bhaiya 4 month ke baad salary leker delhi wapas aa gaya..aur ab sammanit channel mein samman se kaam ker raha ho…moral of the story is ……mein dam ho to print ki taraf jayein…nahin to delhi jindabad….

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  • Appu.... Patna says:

    yashwant ji aapko badhai……..:) aap partrakarita ke uchh garima ko barakar rakh rahe hai… aapne sahara patna ke sampadak ke bare me jo likha hai wo sahi hai… maine inke sath mumbai me kaam kiya hu, ye bara ghatiya kisam ke aadmi hai itka patna me pool khul gaya hai8)

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  • aayush,Patna says:

    Pathak ji iske pahle grihsobha me aanchar (pickle) aur murabba kaise banaya jata hai ki tarkib likhte the. sweter bhi bunane ki kala kai logon ko sikhai. Ab pathak ji sahara karmiyon ko mrrabba bana rahe hain to isme kya burai hai. Lage raho mumbai babu. pathak ji ki kala ko dad dena chahiye. aap chiranjivi hon.

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  • Harish Pathak, ke kisse hazar, sahara ki yeh naukri hee, jhoot bol kar lee hai, ki, wo iskee pahele, Navabharat Group kliya kam kar rahe thee, aur manayvar, Yashwant jee, apne bhi yeh khabar bahut bada chada kar chapi thee, haan, wo jis sansthan mein kam kar rahe thee, usee band karawane ka kam jaroor kiya tha, sal phar tak Hindi mein staff nahi bharti kar sake, mumbai ke sarak see log pakkar kar latee thee aur unhee sham tak nikal deetee thee, delhi office bhi band karwa diya aur malik ki dug-dugi bajwa dee, kabhi apnee ko Hindi Hindustan ka Resident Editor baatee hein to kabhi sahityakar,jhoot aur muft ki daru wo bhi gallon mein, unka purana pesha hai, wo fraud hein aur kooch nahi, accha hei apki ankh khul gayi, manyawar, unhee news kissee kahtee hein yahi nahi patta aur wo kitnee bare sampadak hein, iska patta ek GK test dekar ho sakta hai, aur ek news ki English mein copy dee do, aur kaho harish jee iska anuwad kar deein sab saphast ho jayega, bhala ho aisee sansthan ka, jisee sasta sampadak chaiyee, ab 20- 25 hazar mein aap kaisa sampadak chatee hoo

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  • कमल शर्मा says:

    यशवंत जी, आपने काफी सुलझी हुई बात लिखी। उम्‍मीद की जा सकती है इसे पढ़कर हरीश पाठक जी सुधर जाएं। गुस्‍से वाला व्‍यवहार हमेशा छवि को बिगाड़ता है, फिर चाहे कितने भी ज्ञानी हो। लेकिन शांति से किया गया कार्य और व्‍यवहार लोगों के दिल में जगह बना लेता है। हरीश पाठक जी यदि सुधर जाते हैं तो अच्‍छी खबर होगी उनके सहकर्मियों के लिए। यदि ये नहीं सुधरते तो उपेन्‍द्र राय को पूरा मामला देखना चाहिए और इनके कुछ समय बाहर बैठाना चाहिए ताकि चकाचौंध की दुनिया से जमीन पर आने से आंखें खुल सकें।

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  • vidrohi,Patna says:

    PATHAK KE KARIBI KA KAHNA HAI KI UNKA RISTA MUMBAI ME RAHE EK VARISHTHA SAHARAKARMI SE RAHI HAI.PATHAK JI KA KOI BAL BANKA NAHI KAR SAKTA HAI.LEKIN ISME SACHAI KAM DIKHTI HAI.NAHI TO GALTION KE LIYE PATHAK JI KE VETAN SE KATAUTI KYON HOTI.

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  • AWADH, PATNA says:

    SRI HARISH PATHAK EK ACCHE SAMPADAK HAIN AUR APNE SAMAY ME UNHONEN RASHTRIYA SAHARA, PATNA KO KAPHI ACCHA SWAROOP PRADAN KIYA HAI. DARU, CHOKARI AUR NOTE NAHI LANE WALE KO PARASAN KIYA HAI

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  • YASHWANT JI, SABSE PEHLE MAI YE KEH DO KI AGAR HARISH PATHAK JI KI JAGAH MAI HOTA TO AB TAK AAPKI WEBSITE AUR APPKE KHILAAF MAANHAANI KA MUKADMA KAR CHUKA HOTA. INDEPENDENCE KA MATLAB NAGGA NAACH NAHI HOTA. HARISH PATHAK AUR DPS PANWAR DONO HI MAAMLON ME AAPNE NAGGA NAACH KIYA HAI. AAPNE HARISH PATHAK KO SUDHAR JAANE KI NASIHAT DI HAI. KYA AAP BATA SAKTE HAI KI AAP SAHARA GROUP KE GROUP EDITOR HAI YA DIRECTOR, AGAR AAP KUCH BHI NAHI HAI TO AAPKI HIMAAT KAISE HUI AISA LIKHNE KI. JANHA TAK HARISH PATHAK KI BAAT HAI TO COMPANY KE GRAPH ES BAAT KE SABUT HAIN KI UNKE KAARAN PATNA UNIT KI HAALAT KAAFI SUDHAR GAI HAI. UNIT GHAATE SE UBER KE NO PROFIT NO LOSS ME AA CHUKA HAI. JANHA TAK CHANDAN JI KA MAAMLA HAI TO MAI YE PUCHNA CHAHUNGA KI AGAR HARISH PATHAK HEART KE PATIENT HOTE AUR DELHI ME HONE WALI MEETING ME UNHE ACHANAK KUCH HO JAE TO KYA YE GALTI UPENDRA ROY YA RANVIJAYA SINGH KI HOGI. EK BAAT AUR KANHUGA AAPNE YE KHABAR UN LOGON KE BOLNE PER LAGAE HAI JINHE KAAM NAHI KARNE KE KAARAN YA TO SIDE LINE KAR DIYA GAYA YA JINKI BIT CHIN LI GAI. AAPNE UN LOGON SE BHI BAAT KI JINHE HARISH PATHAK NE BLACK MONEY KAMANE NAHI DIYA. BUREAU KE JIS REPORTER SE AAPKI BAAT HOTI HAI WO KHUD KIS HAD TAK GIRA HAI ISKA PATA JAROOR KAR LIJIYEGA. USKE CALL DETAILS NIKALI JAE TO SACHHAI SAAMNE AA JAEGI. WO SAHARA ME BUREAU KA STAFF REPORTER HOTE HUE BHI SAROJ SINGH KE SATH CHAUTHI DUNIYA ME KAAM KAR RAHA HAI. YASHWANT JI. AGAR BEBAAK KHABAR LIKHNE KA ITNA HI NASHA HAI TO JARA IS REPORTER KI KAHANI KO PATA KAR WEBSITE PER LAGA KAR DEKHO. AGLI BAAR SOCH SAMAJH KAR LIKHIYEGA. OK

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  • R.SRIVASTVA says:

    BILKUL SAHI LIKHA GAYA HAI. HARISH PATHAK JI KAB KIS SAMAY PALAT JAATE HAI KOI THIK NAHI HOTA. JAB CHAHA KARIB BULATE HAI AUR KAAM NIKALTE HI HATA DETE HAI. SAHARA ME CR KI CHAIR SAHI LOGON KE PAAS NAHI TIKTI HAI. GOOD NEWS

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  • kumar krishna mokama says:

    pahli baar bhabas padha hoon aur isse antim banana chahoong kyonki baat ko kaafi behuda tarike se rakhi gayee hai aur comments bhi kafi behuda type hain. khair vicharon ki abhivyakti ki swatantrata hai aur azaadi kise pyaari nahi lagti hai lekin azaadi behudgi jaisi nahi honi chahiye.
    Beshak main rashtriya sahara ke liya kaam karta hoon aur danke ki chot par sweekaar karta hoon ki apne editor harish pathak ka samarthak hoon , isme chhipaaane wali koi baat nahi hai
    Mera ek swabhav raha hai sach ko sweekar karne ka aur usse jordaar tarike se rakhne ka aur isme personal relations kabhi badhak nahi ban sakte hain

    main ek block level reporter aur bahut chhota aadmi hoon par harish sir ke karan kabhi aisa nahi laga
    maine jo ab tak dekha hai uske mutabik pathak sir kam se kam ek achchhe insaan jarur hain
    dcr chandan ji ko daant padi ya nahi ye main nahi jaanta hoon coz main janna v nahi chahta hoon pr itna jarur kahunga aur danke ki chot par kahunga ki aaj tak harish sir ne mere liye tum shabd ka prayog ta nahi kiya hai aur wo kisi ke liye karte v nahi hain.
    jab mere jaise chhote aadmi ke liye tum ka prayog nahi karte to fir aisa kaise ho sakta hai ki kisi ko wo itna daant de ki koi behosh ho jaye daant ke karan
    sampada ji abhi kai virodhi hain aur BECHAIN & VYAKUL BHARAT type aadmi mauke ki talaash me rahte hain
    main panwaar sir ke time me aaya thha , saroj sir ke time mebhi kaam kiya aur ab harish sir ke time me bhi kaam kar raha hooon
    sabon ke time me maine apne style me aur khul kar reporting ki hai aur patna region iska gawaah hai par ek baat jarur kahunga ki HARISH PATHAK ke time me RASHTRIYA SAHARA PATNA EDITION pahle se behtar hua hai
    thoda unch-neech kam jyaada bardasht hona chahiye
    ek baat aur
    yashwant jee tone thoda down rakhiye aapki shali thheek nahi hai
    media popularity chahta hai aap v apwaad nahi hain par fir v ye jarur kahunga ki mamle me sachchai nahi hai ,
    HARISH PATHAK IS A GOOD PERSON BY NATURE AND A GOOD TEAM LEADERBY WORK

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  • vidrohi,Patna says:

    HARISH PATHAK EK VIVADIT AUR TAHSIL ASTAR KE PATRAKAR HAIN.YEH ASPASTA HO GAYA HAI. KALAI KHOLNE KE LIYE DHANYAVAD. HARISH PATHAK KI EK DEN HAI. UNHONE RASHTRIRA SAHARA INDIA PARIWAR KO YUDHA KA MAIDAN BANA DIYA HAI. PATHAK KE NAM PER AB DHELA MARNE KI PARAMPARA SHURU HO GAI HAI.

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  • vidrohi,Patna says:

    YASHVANT JI AISA LAGTA HAI KI PATHAK JI KE ISARE PAR KUCH COMMENT AA RAHA HAI. PATHAK APNE CHAMCHON SE AAPKO DARANE KI KOSHIS KAR RAHE HAI. AWADH HO YA SWAPNIL IKKA DUKKA HI DARBARI HAIN. SWAPNIL TIWARI KO RASHTRIYA SAHARA NOIDA NE AKHBAR SE NIKAL DIYA THA. KAI MAHINO TAK SWAPNIL SADAK PER BHATKTE RAHE PHIR BHI NAUKARI NAHI MILI. YE AB PATNA ME HARISH KI CHATUKARITA SE MALAI MAR RAHE HAI. YE SAB SAHARA ME SAMBHAV HAI. YASHVANT JI AAPNE PATRAKARITA KO NAI ANKH DI HAI. BAHUT LOGON NE AAPKO DARANE KI KOSHIS KI. UNKA VAJUD JANTA JANTI HAI.

    Reply
  • दिनेश शाकुल says:

    यशवंत जी, आपकी टिप्पणी पढ़कर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि ये एक नियोजित षंडयंत्र है. आप किसी निश्चित स्वार्थ के तहत ये कैरेक्टर एसेसिनेशन कर रहे हैं. मैं हरीश पाठक को करीब तीस वर्षों से जानता हूं वो एक संवेदनशील और रचनाधर्मी व्यक्ति हैं. दरअस्ल सुधरने की सलाह आप स्वयं को दें.

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