दर्द-ए-स्ट्रिंगर

एक दुखी स्ट्रिंगर का कविता पाठ : कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार / एक जूनून, एक सपना था, लगता देश ये अपना था  / कुछ करने की ख्वाहिश थी मन में, सच की आग धधकती तन में / बढ़ गया अनजान पथ पर करने को सपना साकार  / कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार

अख़बार पढ़े, ख़बरें पढ़ीं, अशांत मन की जिज्ञासा बढ़ी / सोचा इन्हें जो लिखता होगा, शायद वह शब्द देवता होगा / इस बीच अख़बार छोड़ देखने लगा टीवी समाचार / कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार

“कोट टाई वाले नारद” बन गए आदर्श मेरे / खुद इनके जैसा बनने के, पाल लिए सपने बहुतेरे/ जैसे तैसे पैसे जुटाए, एडमिशन ही ले ही आये / डिग्री लायक फीस नहीं थी सो डिप्लोमा का आया विचार / कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार

आखिर कागज पत्तर लेकर चले नौकरी ढूंढने हम / बिन सिफारिश और रिश्तेदारी थे बहुत अकेले हम / आखिर हो गई हमसे जीवन की इकलौती भूल / बन गए स्ट्रिंगर इक चैनल के, और चुन ली हमने धूल / इस शब्द का मतलब था काँटों का संसार  / कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार

अदभुत है स्ट्रिंगर का पद, सुन लो सभ्य समाज / खुद की जान लड़ाता है जो फिर भी रहे उदास / न नाम मिले जिसको और न ही मिले समय पर पैसा / जरा सी देर हुई खबर में तो सुनेगा ऐसा वैसा  / फिर भी पापी पेट की खातिर सहता दुर्व्यवहार  / कहने को है वह पत्रकार ,पर है बिलकुल बेकार

गर्मी सहे वह ठण्ड सहे और सहे बरसात  / एसी वाले साहब की सहे फ्री में डांट / अपना कैमरा, अपने खर्चे बस काम कम्पनी का करता है / चाहे कोई भी मौका हो वो बिलकुल नहीं डरता है / पर लाठीचार्ज में पिट गया तो मिलता नहीं उपचार  / कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार

दंतेवाड़ा से कुपवाड़ा तक जान लड़ाए वो / हर छोटी बड़ी खबर पर नजर गढ़ाए वो / पर उसकी फसल को काटने कोई दिल्ली से आ जाता है / असली हीरो यहाँ बारहवां खिलाडी बन जाता है  / पर याद रखिये जो वह करता है तुम्हे दुश्वार  / कहने को है वह पत्रकार पर है बिलकुल बेकार

चंद गुजारिश है आपसे सुनिए अरज हमारी / न कोई वेतन न कोई भत्ता मांगे हिस्सेदारी / अपने ही संस्थान में इज्जत और सम्मान दे दीजे / हमारे ख़बरों का समय से भुगतान कर दीजिये / बूढी माँ को दवा चाहिए, बच्ची मांगे फीस  / ६ महीने से चेक न आया मन में यही है टीस/ दो रास्ते मेरे सामने या तो दलाल मैं बन जाऊं / या फिर किसी गहरे कुँए में जाकर अपनी जान गवाऊं / दोनों ही डगर कठिन हैं पर चुनना तो मजबूरी है / आत्मसम्मान की खातिर शायद मरना ही जरुरी है / पर इक स्ट्रिंगर की मौत से नहीं जगेंगीं ये मृत आत्माएं  / इसके लिए तो सबको मरना होगा इक बार / कहने को है वह पत्रकार पर है बिलकुल बेकार…….

इन लाइनों के रचनाकार सचिन हैं. सचिन ने अपने बारे में सिर्फ ‘सचिन’ के अलावा और कुछ भी बताने से मना किया है, सो फिलहाल इस कविता के रचयिता का नाम जानकर ही संतोष करें.

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Comments on “दर्द-ए-स्ट्रिंगर

  • bhimmaanohar says:

    dost nirash hone ki jarurat nahi hai, jaruri nahi journalist bankar desh sewa ki jaye ya phir stringer bankar pariwar ko mushibat me dala jaye, isliye chod do is field ko, yeh field aise hai jahan bade bade repoters anchor duniya ki ankho me dhul jhonkte hai, aur jhoot bolkar channelo ko trp dilate hai, kisi channel me himmat nahi chahe wah ndtv ho ya phir aur koi channel, hamesha se stringers ka shosan hota hai hota rahega jab tak sabhi channel walon ke maa bahann ek nahi kar di jati.
    09359139815.

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  • 🙁
    100 aane sach…..sachin jee badhai…apni kavita se stringers ke dard ko vayaan karne ke liye..
    faisla ho zindgi bhar stringer nai bane rahoge…DO Somthing…Change the field…..
    [b]Manzile aur bhi hain ..[/b].

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  • akhilesh dwivedi says:

    dost dont worry…..sbki dekhte chlo aur apni sochte chalo…….apna din b aayega
    tmhari iss dard-e-kavita ne mere antarman ko jhakjhor diya hai hm aasha karte hai ki AC wale sahbon ko bhgwaan sadbudhi den

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  • sachin ji aapke duk dard ko mai achhe tarah samjta hoon . kyon ki mai bhi inhi paristityoon se gujar chuka hoon . ant me jeeet aapki hogi husla mat harna . aur ac me baith kar mooh chodi karne waale c headoon ko karara jawab dena . inhe kya pata ki chilchilate dhoop aur bhari thand me story kaise hoti hai ,, best of luck

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  • wah sachin ji wah……………..
    aapne is kavita me stringers ka dard banya kiya he. patrakarita me bhi ek samantvaad panap raha hai. jo stringer ke pasine se apni kothi lambi gaadi mehnge public school me bacho ki padhayi bibi ke mehnge aabhushan or videsho me parivar ke sath chutti bitane ki cha rakhta hai…. lekin usko बूढी माँ को दवा चाहिए aur बच्ची ki फीस ki koi chinta nahi hai …. aaj sahi mayene me patrakaar wo hai jo A RAJA ke liye curreption ke gambheer aaropo ke bawajood unko cabinate me liye jane ke liye lobing karte hai…………????????????????????????????????????????????????????

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  • amar anand says:

    bahut marmik peeda vyakt ki hai aapne.ye aawaz un kanon tak pahunchna zaroori hai jahan aapki samasya ka samadhan hai.

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  • Ravinder Kumar srivastava says:

    kya baat hai kaya likha hai vaikiye me ek stinger aapni jaan par khel kar khbre ikthi karta hai par jab paise dene ki baari aati hai to channel valoki aama mar jaati hai ham log apni jaan par khel kar khbre ikthi krrte hai par jab channel se pucho to khehte hai ki bahi pane pass hi rakho jab jrurt hogi to mngva lege eaise me koi stinger kaise pane aap ko survive karege pani jeb se paise khrach kar story katra hai aur mahine bhar uska intzar karta hai par had to tab hoti hai ki jab use bola jaata hai ki bill pass hone me abhi time lagega maar kha kar khbre ikthi karter hai apni jaan par khel kar encounter cover kare ham par uske badle me kuch nahi sir do bol good job ….

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