‘डकैती’ डाल रहे हैं स्ट्रिंगर!

इटावा जनपद की चंबल घाटी से डकैतों का तो सफाया हो गया लेकिन टीवी चैनल के नाम पर डकैती डाल रहे स्ट्रिंगर इटावा जनपद मे सड़कों पर घूम कर पीड़ित लोगों की जेबों पर खबर के नाम पर डकैती डाल रहे हैं। समाज में सम्मान के नजरिये से देखे जाने वाले पत्रकारों का इटावा में चरित्र ही बदल गया है। इलेक्ट्रानिक मीडिया ने तो हद ही कर दी है।

टीवी चैनलों के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने इटावा में अपने स्ट्रिगरों की योग्यता और उनके चरित्र व कारनामों पर खुद पर्दा डालना शुरू कर दिया है। इटावा मे टीवी चैनलों के लिये काम करने वाले कई ऐसे लोग स्ट्रिंगर बन बैठे हैं जो कि जेबकट, उठाईगीरे हैं। ये लोग न्यूज चैनलों के नाम पर दलाली करते घूम रहे हैं। खास बात यह है कि ये स्ट्रिंगर देश के जाने माने टीवी चैनलों के लिये काम कर रहे हैं। महीने में चार या पांच खबरों के पारिश्रमिक से तो इनका खर्चा चलने से रहा। तो दलाली व जेबकटी हर कीमत पर होनी है।

इटावा जनपद में टीवी चैनलों के स्ट्रिंगर का चरित्र इतना गन्दा होगा, ये तो यहां की जनता ने भी नहीं सोचा था। कम से कम देश के जाने माने न्यूज चैनलों के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को इतना तो देखना चाहिये कि जो व्यक्ति उनके चैनल के लिये काम कर रहा है, उसका सामाजिक चरित्र क्या है और उसकी शैक्षिक योग्यता क्या है। इन स्ट्रिंगरों का एक बार इन्टरव्यू लेने की जहमत उठायें और पत्रकारिता के योग्य लोगों का चयन करें जिससे पत्रकारिता को बदनाम करने वाले दलाल, जेबकट व उठाईगीरे पवित्र पत्रकारिता को कलंकित न कर सकें। क्योकि खबर के फुटेज देना ही सब कुछ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है खबर कौन दे रहा है।

इटावा में दलाल, जेबकट व उठाईगीरे पत्रकार पेनड्राइव के दम पर पत्रकारिता कर रहे हैं क्योंकि खबर पर फोनो ब्यूरो चीफ का चलता है इसलिये इनकी पोल नहीं खुलती। तो चैनल वालों सावधान हो जाओ। स्ट्रिंगर बनाने से पहले उनकी जांच अवश्य कर लो क्योंकि जब मकान भी किराये पर उठाया जाता है तो उसकी भी जांच पड़ताल की जाती है। अब तो होटलों मे भी बिना आइडेन्टी प्रूफ के कमरा नहीं मिलता। नौकर भी पूरी जांच के बाद लोग रखते हैं। तो फिर आप तो पत्रकारिता के पवित्र पेशे में एक स्ट्रिंगर की नियुक्ति कर रहे हैं जो कि जनपद में आपके टीवी चैनल का संवाददाता कहलायेगा। तो, भाइयों सावधान रहो।

इटावा के पत्रकार विकास मिश्रा की रिपोर्ट

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Comments on “‘डकैती’ डाल रहे हैं स्ट्रिंगर!

  • Mithilesh kumar says:

    Stringar agar Ugahi kar raha hai to iske liye purn Rupse chaneel ke Parpandan or uske adhikari jimewar hai, koyki chhanel wali Digridhari or yog Jarnalist ks nahi rakte hai, koyki unko Paisa dena Padta hai. kam paisa ke chhakar ayog thath chritrahin logo ko patrkarita ka hisa banakar patrkarita ko kalankit karne ka kam kar rahe hai

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  • विकास जी तुम इटावा. की बात कर रहे हो हो यह हॉल तो हर जगह है.अपने आप को नंबर वन कहने वाले एक राष्ट्रीय चैनल ने तो रामनगर (उत्तराखंड) में एक राज मिस्त्री को ही अपना स्ट्रिंगर बना दिया है.इन चेनलो को तो सिर्फ फुटेज की जरुरत होता है ,चाहे वो कोई उठायेगिरा दे या कोई क्रिम्निल .यही चरित्र है आजकल समाज सुधारने का दावा करनेवाले चेंनलो का .

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  • M. RIZWAN QURESHI says:

    विकास मिश्रा जी आपने मन के जज्बात जिस तरह शब्दों में पिरोये है हम उसका सम्मान करते है, आपके इन शब्दों में मीडिया की वर्तमान स्थिति का हाल वया हो रहा है, दोस्त आपने हकीक़त कहा है मीडिया की मंडी में होनहार पत्रकारों की जरुरत नहीं है क्योकि होनहार पत्रकारों को पैसा जो देना पड़ेगा, दोस्त मेरा मानना है दलाल, जेबकट व उठाईगीरे पत्रकारो के साथ साथ चैंनल प्रबंधन के खिलाफ मुहीम चलाने की जरुरत है इसके लिए पुरे देश के पत्रकारों को एक जुट होना भी जरुरी है! विकास मिश्रा जी और यशवंत जी अगर आप लोग कोई मुहीम चलते है तो हम आपके साथ है….

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  • vikram dutt says:

    बड़ी ही मुद्दे की बात कही है आपने ! ये हालत सब जगह है की जिस सख्स को पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है वो पत्रकार बन बैठा ! और तो और ब्यूरो की और दिल्ल्ही से आने वालो की चमचागिरी करने में माहिर है तो उसे रिपोर्टर बनने में कोई तकलीफ नहीं है ! रही बात उठाईगिरी की तो इस मामले में जोधपुर और कम से कम राजस्थान अभी पीछे है ये बात अलग है की यहाँ भी गधे और घोड़ो का एक ही भाव लगाया जाता है ! असल में दिल्ली में एयर कंडीशन में बैठने वाले गधों को पत्रकारिता नहीं आती और ये सच्चाई है की इसी कारन से आज मीडिया की मट्टी पलित हो गई है ! ये सच्चाई, भले सबको कड़वी लगे लेकिन आज किसी भी चैनल को खबर नहीं चाहिए, उन्हें फालतू के कचरे से ही फुर्सत नहीं है, इसके अलावा कई चैनल है जो पिछले एक बरस से पैसा ही नहीं दे रहे सोचिये इमानदार पत्रकार की क्या हालत हो रही है ! जिन्हें क ख ग की परिभाषा से कोई ताल्लुक नहीं है वो आज कर्णधार बन बैठे है ! आपको साधुवाद है की आप कम से कम इस सच्चाई को छापते है तो है भले ही लोगो को इस सच्चाई से जलन होती है…….

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  • sharma.verma says:

    kuch yahi haal panjab mein bhi hai….jitne bhi stringers desh ke top 5 hindi news ne panjab ke bade bade shehro mein rakhe hain..wo bhi sarkari kaamo mein apni dalali aur logo ko blackmail kar moti kamai kar rahe hai…kyonki unki story to mahine mein do ya chaar hi lagti hai..to badi gaadio mein ghoomna aur bachcho ko convent mein padana in dalalgiri ke kaamo se hi to chalta hai…Ludhiana aur jallandhar mein to bade hindi channels ke stringers sheher ke king bane bethe hain..channel ko tasali hai ki ye paise nahi mangte aur kaam bhi ho jaat hai…par dusri aur se loot agar ho to wo aankhein band kar lete hain..lage rahe panjab ke patarkaar dalalo…

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  • hey aisa ni hai ki ye sirf etawah, main ho reha hai ye up ka haal hai…just becz of some rong persion’s…?.im mass comm student of isomes(BAG) films student.i have don nine month internship in news 24 but humara to intervew tak ni hua just becz these tipe of persions.hay seniors plz growup.agar road chaap stringers ko logo to aisa hi hoga.aisa ni hai ki hum hi paresaan honge.aage aapki waari hai plz plz plz plz.soch kr karo jo bhi kerna hai mere terah kaafi hai jinhe stringer ship bhi ni milti.hum middle class se hain koi sorce ni hai.ye humari badluck ni hai.aapke channels ki humare nation ki sabhi ki bad luck hai….:'(

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  • Bhai,lagbhag yahi haal agra ka bhi hai.Ab in channel walon ko kaun samjhaye ki stringer ki dhandhebaazi se unki saakh par bhi batta lag raha hai.

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  • akhilesh kumar vashishth says:

    tv channelo ka etah me bhi yahi hal hai. kal he to tv channel ke do stringer pite hai. unhone pitane ka bhi paisa le liya.

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  • manish bhattacharya says:

    sunnane me bht hi dukhzd lagta hai kuki samaj ka ye pratinidhi agar samaj ki arajakta me lipt ho jayega to kaise khabro ki vastvikta rhegi

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  • allahabad media says:

    mishra ji aap ki baat sey mai poori tarah sey sahmat nahi hu..agar kabhi vakt ho to allahabad aaye yaha ka media abhi bhi is gandagi key kichad mey utra nahi hai….yaha ki media ka mizaaj aur tever aisa hai ki aisa aadami yaha tik nahi paata…

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  • Satnaam Singh says:

    ये हालत सब जगह है की जिस सख्स को पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है वो पत्रकार बन बैठा, चंडीगढ़ में भी मीडिया [टीवी चैनल] का बहुत बुरा हाल है, चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस में गिफ्ट बहुत मिलते है, फ्री लांसर और स्टिंगर टीवी चैनल के LOGO ( ID ) उठा कर सिर्फ गिफ्ट के लिए फिएल्ड मे घूमते रहते है , उनका न्यूज़ से कोई लेना देना नहीं है, वह सिर्फ मीडिया को बदनाम कर रहे है, और बड़े बड़े टीवी चैनल ने स्ट्रिंगर को अपने LOGO ( ID ) दिए हुए है और वो मीडिया को बदनाम करने के लिए हुए है, उनको मीडिया की ऐ बी सी भी नहीं आती सिर्फ उनका मकसद गिफ्ट तक है और जनता को ब्लैक मेल करते है, और मीडिया को बदनाम करते है, ये लोग न्यूज चैनलों के नाम पर दलाली करते घूम रहे हैं। खास बात यह है कि ये स्ट्रिंगर देश के जाने माने टीवी चैनलों के लिये काम कर रहे हैं इलेक्ट्रानिक मीडिया ने तो हद ही कर दी है।

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  • rajkumar gupta says:

    अरे भैया यह तो हर जगह है हर शहर में इस तरह कि दूकान खुल गयी है खबर तो चलती नहीं बस ब्लैक मेलिंग कर अपनी जेब भर रहे है क्या कहे बाबू इन बेईमानो को अब तो हिम्मत ही नहीं रही.. भईया इन डकैतों को छूट इसलिए है कि यह लोग अपने बड़ों को भी हर माह भुगतान अदा करते है इनपर अगर लगाम लगानी है तो पहले ऊँचे पदों पर आसीन उन सौदागरों को सबक सिखाना होगा लेकिन सवाल यह है कि इनके गले में घंटी कौन बंधेगा अब कौन बचाएगा इन बेईमानो से अवाम को ज्यादाह्तर सिर्फ ठाग्बाज़ी ही कर रहे है यही तो पत्रकार और पत्रकारिता को बदनाम जिए हुये है…..हुममे हिम्मत नहीं क्योंकि मुझे तो सौदागरों ने ही ठगा है

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  • sanjiv kaushal says:

    yahan jin logon ne apne comments bheje hain mein unki manodasha samjh sakta hoon. mudda bilkul sahi hai, par kya print media ke baare mein aaye din jo blackmailing ki khabren chap rahi hain un par koi tippani dekhne ko nahin mili. har kasbe,shehar mein akhbaron , magzine chapne walon ke daftar hain, paise lekar patarkaar bnaye ja rahe hain. stringer ki khabar to mahine mein shayad ek do hi chal pati hain, par print walon ki dehshat is se kahin adhik hai.paisa leker beat di jaati hai.paid khabren likhi ja rahi hain. iske ke liye kaun doshi hai. nichle tabke par hi comment karne se koi budhijivi nahin ban jata.ye baat bhi sach hai ki docait elec mein bhi hain par print se kam.jo log imaandari se kaam kar rahe hain unki hoslaafzai bhi jaroori hai.[/b]

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  • devesh pal singh says:

    vikas mishra ki ye report main sirf tv channelon ke stringero par dalaali ka aarop lagaya hai jo puri tarah se theek nahi hai | ye sahi hai ki media ke kshethra main kuch ais etatvo ka bhi pravesh ho gaya hai jo iske yogya nahi hai parantu sirf tv channelon ke stringer hi chor aur dacait hai ye dushit maansikta ka prateek hai | jab ki stringers apni jaan hatheli par rakh kar ghatna sthal par mauke ke visual shoot karne ke liye pahuchata hai aur issi karan bahut baar unka aamna saamna apradhi aur maafyon se hota hai |parantu stringers vigyapan chhapane ke naam par vasuli nahi karta | agar sabhi apne girebaan main jhakeein to pata lagega ki asli chor kon hai | jis tarah se vigyapan ke naam par maafiyon ko mahimamandit kar logo ke saamne parosa jata hai us se samaj par vipreet prabhav padta hai ye kisi ne nahi socha | jab aap maafiyon s evigyapan maagege to unka chahera logo ke saamne kaise be naqaab kar payange yah to sirf logon ko uallu baka kar apni dukan chalani ki baat hai rahi baat ayogya logo ke is kshetra main aane ki to vikas ji iska imaandari se manan kare ki kya sirf eletronic media main hi aise log hai print media main nahi ? sabhi jante hai ki tarah akhbaar main kaam karne wale black mailing karte hai aur khabaron ko chand paise ke liye baichte hai etah ki hi baat lijiye ki pichle u p board exam main ek parshith akhbar ke reporter par ek skool prabandhak ne balck mailing ka aarop lagaya aur jab iski shikayat karne wo akhbar ke zila karyalay pahucha to wahan uski koi baat sune baigar hi uske saath maar peet ki aur farji mukdama bhi us par lagba diya | main to yahi kahna chahunga ki dusre par tohmat lagane se pahle hum ko imandari s emanan karna chahiye aur bakai asamajik tatvo ko is kshetra main aane se rokna chaiye na ki sirf bhashan baji katrni chahiye q ki is samasya se eletronic aur print dono hi saman roop se grasit hai …

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  • patkaar ka lekhni padne ke liye muh ki pyaas ba nayno ki aas adhuri rah jati hai.
    patkarita me aaj bhi kuch log yese hai jo apni khoon se patkarita ko sech rahe hai .

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