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अरे मूर्ख रामदेव, तुमने सच बोलकर संघियों-भाजपाइयों की ठगी पर पानी फेर दिया!

Arvind Shesh : रामदेव ने राहुल गांधी पर हमला करने बहाने दलित समाज को जिस तरह ज़लील किया है, वह आरएसएस और भाजपा के सामाजिक दर्शन की ही अभिव्यक्ति है। गड़बड़ सिर्फ यह हो गई कि रामदेव नाम के इस मूर्ख बाबा ने इतना भी ध्यान रखना जरूरी नहीं समझा कि चुनाव चल रहे हैं और उसकी इस मूर्खता का नुकसान उसके भाजपाई मालिकों को हो सकता है। अभी संघी और सबकी ठगी का दौर चल रहा है, उसमें रामदेव ने एक तरह से कूड़ा कर दिया है।

लेकिन अब एक बात!!! मूर्ख रामदेव के मुंह से क्या यह बात अचानक निकल गई! ऐसी बातें दो मुख्य वजहों से बोली जाती हैं। एक, ध्रुवीकरण के मकसद से और दूसरे, कोई चीज हासिल करने की मंशा में नाकाम रहने पर हताशा में अपने सिर का बाल नोचते हुए पागलों की तरह चीखते हुए।

रामदेव का बयान दरअसल फ्रस्टेटियाए हुए उसके मालिकों की हताशा को रिप्रेजेंट करता है। आरएसएस और भाजपा को समझ में आ गया है, उत्तर प्रदेश में उसकी फर्जी लहर को औकात दिखाने में राज्य के दलितों ने सबसे बाजी मार ली। जैसे आरएसएस ने अपने "कोर वोटर" को पिछले छह महीने में पूरी तरह अपने साथ किया है, उसी तरह उत्तरप्रदेश और बिहार जैसे इलाकों में दलित वोटरों ने ठोस तरीके से तय कर लिया है कि उसे हर हाल में नरेंद्र मोदी और उसके मूलाधार आरएसएस-भाजपा के खिलाफ खड़ा होना है। इसलिए रामदेव की मूर्खता को आरएसएस की खीझ समझिए।

लेकिन जिस तरह रामदेव ने दलित समाज की तमाम महिलाओं के सम्मान पर हमला किया है, उसके बदले अगर सार्वजनिक रूप से उसकी पिटाई की जाए, उस पर थूका जाए और उसे जेल में ठूंस दिया जाए तो यह भी बहुत कम होगा। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि आरएसएस और भाजपा के सामाजिक दर्शन में स्त्रियों और दलितों के लिए यही जगह है और रामदेव ने उसे ही सिर्फ जाहिर किया है। और आरएसएस जानता है कि उसके ब्राह्मणवाद की रीढ़ के रूप में ओबीसी नरेंद्र मोदी या रामदेव ही उसके असली एजेंडे का घोड़ा बनेंगे…! सुनो रामदेव और नरेंद्र मोदी… तुम जगन्नाथ के रथ को सिर्फ कंधा दे सकते हो, जगन्नाथ नहीं हो सकते… तुम सिर्फ सीढ़ियां हो सकते हो, जिस पर पांव रख कर लोग छत पर जाते हैं…! तुम्हारी औकात यही है…!

पत्रकार अरविंद शेष के फेसबुक वॉल से.

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