वो इंडिया टीवी छोड़ देंगे मुझे करीब एक महीने पहले पता था

जनाब कमर वाहिद नकवी साहब ने इंडिया टीवी को छोड़ दिया, या इंडिया टीवी ने नकवी साहब को छोड़ा। इस वक्त भारत के मीडिया (खासकर इलेट्रॉनिक मीडिया) में यह दो सवाल तबियत से उछल-कूद/ धमा-चौकड़ी मचा रहे हैं।

सवाल-
1- नकवी जी ने इंडिया टीवी क्यों छोड़ा?
2- अगर इंडिया टीवी ने नकवी जी को नमस्ते किया, तो क्यों?
3- आजतक से नकवी जी के बलबूते इंडिया टीवी पहुंचे बंधु-बांधवों का भविष्य क्या होगा?
4- वो कौन सी शर्त थी नकवी जी की, जिसे इंडिया टीवी पूरी कर पाने में असमर्थ हो गया
5- इंडिया टीवी की नकवी जी से क्या-क्या अपेक्षायें थीं, जिन पर नकवी जी खरे उतरने को राजी नहीं हुए?
6- नकवी जी का स्वभाव, काम-काज का तरीका रजत शर्मा को हजम नहीं हुआ?
7- क्या रजत शर्मा की कुटिल मुस्कराहट के पीछे का सच नकवी जी को जल्दी ही समझ आ गया?
8- क्या नकवी जी के जाने से पहले रजत शर्मा ने उनके स्थान पर चिपकाने के लिए किसी और महाराजा की तलाश पूरी कर ली थी और नकवी जी से इस रहस्य को रजत शर्मा छिपा पाने में नाकाम रहे?
9- नकवी जी ने महाभारत के संजय की मानिंद दूरदृष्टि से सब कुछ पहले ही देख लिया, कि आईंदा इंडिया टीवी में क्या घमासान होने वाला है, और दुर्गति के दिन देखकर खुद को धृतराष्ट्र बनाने से नकवी साहब खुद को वक्त रहते इत्तिमनान से बे-द़ाग बचा ले गये?
10- क्या नकवी जी का कोई नया प्रोजेक्ट लाने का सपना पूरा होने के काफी करीब आ चुका था, इसलिए उन्होंने इंडिया टीवी की किसी छीछालेदर में फंसने से पहले ही खुद को पाक-दामन निकाल लिया?

यह तमाम सवाल अगर मेरे जेहन में चहलकदमी कर रहे हैं, तो इनमें से या फिर इनसे मिलते-जुलते कुछ सवालात, बाकी मीडिया जगत से जुड़े लोगों के जेहन में भी उठा-पटक मचा रहे होंगे।
इंडिया टीवी से अलग नकवी साहब हुए…मगर बयानबाजी न इंडिया टीवी ने करना मुनासिब समझा न नकवी जी ने। हां हमारे जैसों जरुर इस प्रकरण पर "शोध-पत्र" तैयार कर लिए।

मेरा इससे कोई सरोकार नहीं है, कि इस प्रकरण में के पीछे की सच्चाई क्या है। हां इतना जरुर है, कि नकवी जी इलेक्शन के बाद इंडिया टीवी से चले जायेंगे या वे इंडिया टीवी छोड़ देंगे। इसका चर्चा लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से चंद दिन पहले ही शुरु हो गयी थी। मेरे साथ यह चर्चा भी किसी एक पत्रकार बंधु ने ही की थी। यह चर्चा हुई थी जनसत्ता अपार्टमेंट (वसुंधरा) के एक फ्लैट में। चरचा इस कदर सही साबित हो जायेगी, इसका उस वक्त मुझे गुमान भी नहीं था।

वरिष्‍ठ पत्रकार संजीव चौहान के एफबी वॉल से साभार.

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