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सफेद-कुर्ते पाजामे में पुतले की तरह लग रहे मोदी और बनारस में नामांकन

Avinash Das : रहस्य में सर्वाधिक आकर्षण होता है. बीएचयू के बाहर लंका चौराहे पर महामना पं मदन मोहन मालवीय की मूर्ति पर मोदी को सुबह नौ बजे आना था, पर वो ढाई घंटे बाद आये. उनका हेलीपैड बीएचयू के प्रांगण में तैयार किया गया था.

उत्सुक लोगों की विकराल भीड़ को जवानों ने नियंत्रित कर रखा था. तमाम छतों से मीडियाकर्मी हटा दिये गये, फिर भी बीएचयू गर्ल्स हॉस्टल की छत पर लड़कियां जमी रहीं. सफेद-कुर्ते पाजामे में पुतले की तरह लग रहे मोदी आये, तो उन्होंने न सिर्फ जमीन पर धूप में तप रही भीड़ का अभिवादन किया, बल्कि गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों को भी हाथ जोड़ कर याचक की तरह देखा.

बमुश्किल पांच मिनट वहां खड़े रहने के बाद वे उतरे. फूलों से लदी उनकी कार उन्हें लेकर हैलीपैड की तरफ चल दी. वहां से वे काशी विद्यापीठ की तरफ उड़ चले. लंका से करीब चार-पांच किलोमीटर दूर. हम वहां पहुंच नहीं पाये, क्योंकि शहर के तमाम रास्ते बंद कर दिये गये थे. केवल पैदल यात्रा संभव थी. पर हमारी गाड़ी गली-कूचों से होते हुए किसी तरह कचहरी रोड पहुंची. मीडिया की गाड़ी होने के बावजूद हमें कई फर्लांग पहले से पैदल चलने के लिए कहा गया. वह एक सुनसान रास्ता था, जो विवेकानंद की प्रतिमा तक पहुंचता था. यहां भी पुलिस की गोल घेरेबंदी थी, जिसके बाहर लोगों-समर्थकों की विशाल भीड़ रह रह कर नारे लगा रही थी. नारा वही था – "हर हर मोदी, घर घर मोदी". तमाम विवादों के बाद भी इस नारे से कोई परहेज नजर नहीं आ रहा था. मोदी यहां तक रोड शो करते हुए आये. वे लहुराबीर से चले थे.

यहां भी बमुश्किल पांच मिनट वे विवेकानंद जी के बगल में खड़े होकर हाथ हिलाते रहे. छतों दीवारों पर खड़े लोगों ने उन पर फूलों की बारिश करनी चाही, पर मोदी इतने दूर थे कि फूल उन तक पहुंचने के बजाय सड़क पर बिछ जा रहे थे. उन्हीं फूलों को रौंदते हुए मोदी नामांकन के लिए कचहरी में घुस गये.

(हादसा : मेरा मोबाइल आज गेस्ट हाउस में रह गया था. संग ले आता तब भी शायद तस्वीर नहीं उतार पाता. पुलिस वाले तमाम लोगों पर तीखी नजर रखे हुए थे और कोई जेब में भी हाथ डाले चल रहा था, तो उसे हाथ बाहर निकाल कर चलने का निर्देश दे रहे थे.)

पत्रकार और फिल्मकार अविनाश दास के फेसबुक वॉल से.


Shahid Khan : मोदी जी, हवाई 'दहाज' में उड़ी-उड़ी अईलें! हुवां से कुदक्का मार लग्ज़री गाड़ी में ढुकी गईलें! तीन सौ मीटर सरकलें! फेर हुवां से 'हेलीकपटर' में सटसटाई के घुंसी गईलें! फेर सवा किलोमीटर उड़लें! फेर यूनिवर्सिटी के मैदान में गर्दा उड़ाई के कूदी गईलें! हुवां से अब खुल्ला-गाड़ी में मूंड़ी निकाल पब्लिक ओरी मुंह करी हाय-बाय करत हव्वन… आउर अपना के फ़क़ीरचंद चायवाला बतावत हव्व्न! राजेन्द्रघाट से कैमरामैन पांड़े जी संग हम खावं साहेब, बनरसिया न्यूज़! रहीं सब के आगा! कर दिहीं सबके पाछा!

शाहिद खान के फेसबुक वॉल से.

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