ट्विटर पर विनोद कापड़ी – यशवंत सिंह संवाद के कुछ अंश…

विनोद कापड़ी ट्विटर पर खूब सक्रिय रहते हैं. इस टीआरपी मास्टर यानि विनोद कापड़ी के मुंह से देश, सरोकार, जनता नैतिकता आदि की बात सुनना दुनिया के आठवें आश्चर्य जैसा लगता है, लेकिन बाजारू आश्चर्यों, तलछट चमत्कारों के इस दौर में आश्चर्य-चमत्कार होते रहते हैं. कापड़ी को बड़ी चिंता है कि देश की जनता कैसी है जो अन्ना का जन्मदिन भूल जाती है, आईपीएल का सट्टा भूल जाती है, 2जी स्कैम भूल जाती है, वाड्रा भूल जाती है…

पर खुद अपनी अंतरआत्मा में झांककर कापड़ी बता सकते हैं कि आखिर जनता को इन सब चीजों को भुला देने की भांग किसने पिलाई है? उसी मीडिया ने जिसके बड़े दिग्गज बनते फिरते हैं विनोद कापड़ी. न्यूज चैनलों को न्यूज से नान-न्यूज की तरफ ढकेलने का श्रेय जिन कुछ लोगों को जाता है उसमें शीर्षस्थ एक विनोद कापड़ी है. जमकर टीआरपी आ जाए, बस यही मंशा जिस शख्स की होती हो वह खबर चलाने से पहले यह कैसे चिंता कर सकता है कि इसका असर देश, जनता, समाज पर क्या होगा?

पर यही लोग, यही भरे पेट वाले लोग, खाली टाइम में ट्विटिया करते हैं कि देश की जनता अजीब है जो सब भूल जाती है… अरे महराज, काहें आप देश की जनता को कोस रहे हैं, आप अपने टीआरपी और टीवी चैनल को देखिए, देश की जनता सब याद रखती है. भूलते तो आप लोग हो देश की जनता को…

खैर, आज बहुत दिनों बाद मेरा ट्विटर पर जाना हुआ. विनोद दुआ से संबंधित समाचारों, जानकारियों के चक्कर में ट्विटर पर पहुंचो तो वहां विनोद कापड़ी मिल गए. महान विनोद कापड़ी जो फर्जीवाड़े का मास्टर है, जिसने ऐसा फर्जीवाड़ा पुलिस स्टेशन में लिखवाया कि भड़ास वालों को जेल में दो ढाई महीने रहना पड़ा. यानि मुझे. तो, जो खुद फर्जी कहानियां गढ़ने का उस्ताद हो, झूठी तहरीर देने का मास्टर हो, सेटिंग-लायजनिंग से पत्रकारों को पुलिस-जेल दिखवाने का अपराधी हो, वह जब नैतिकता देश सरोकार की बात करता है तो अजीब लगता है.

पर यह बाजार का ऐसा दौर है कि जो जितना बड़ा पतित है, वह उतनी बड़ी हस्ती है. और ऐसे पतितों को सत्ता-सिस्टम गले लगाकर रखता है, हमारे आप जैसों को सड़क छाप मानकर दुरदुराया करता है. पर कभी ऐसे ही सड़क छाप वाले कमजोर दिखने वाले आम जन बहुत मजबूत पड़ जाते हैं कापड़ी साहब… पर यह बात आपको नहीं समझ में आएगी क्योंकि आप शीशे के घर में बैठकर दुनिया देखते हैं, वह भी आधी-अधूरी दुनिया. आपको मोटी सेलरी, सत्ताधारी नेता और बड़े पुलिस अफसर, बड़े मीडिया मालिक… बस यही सब अच्छे लगेंगे, आम पत्रकार और आम जन कतई नहीं.. ट्विटर पर कापड़ी साहब को कुछ जवाब दिया… उसी का स्क्रीनशाट नीचे है.

कापड़ी साब जैसे लोग कभी कभी अपनी भड़ास निकालने के लिए आम आदमी और देश का नाम लेकर चिंतित हुआ करेंगे, जैसे कि इस देश के नेता आम जन व देश का नाम लेकर चिंतित होते रहते हैं और घोटाले पर घोटाले करते जाते हैं… उसी तरह हे कापड़ी जी, आप आम जन और देश का नाम लेकर चिंतित होते रहिए और आम जन व देश के मन-मिजाज को नाश मारने वाले प्रोग्राम दिखाते रहिए… या बड़ी खबरों को छिपाकर छोटी मोटी ह्यूमन एंगल की कहानियां रोने धोने गाने के किस्से दिखाते रहिए…

हिम्मत है तो काहे नहीं आप वाड्रा साहब के धोखाधड़ी की पूरी कहानी दिखाते हैं… अभी हाल में ही पीएमओ ने वाड्रा के बारे में मांगी गई जानकारियों को परम गोपनीय श्रेणी का बताया है… इस खबर पर पैकेज-प्रोग्राम बनाकर प्राइम टाइम में क्यों नहीं दिखाते… ऐसा इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि रजत शर्मा तुमको ऐसा नहीं करने देगा और रजत शर्मा के तार सीधे हर बड़े नेता से जुड़े हैं… तो, कापड़ी साहब, बकचोदी बंद करिए और अपनी नौकरी करिए… टीआरपी की चिंता करिए…देश और जनता आप जैसों के बगैर भी जिंदा थे, हैं, रहेंगे.

-यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया

+91 9999330099

वेज बोर्ड लागू करने की निगरानी के लिए तमिलनाडु सरकार ने स्पेशल सेल बनाया

कई प्रदेशों में वेज बोर्ड का कुछ अता-पता नहीं है लेकिन तमिलनाडु सरकार ने बड़ी पहल करते हुए मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने को लेकर एक स्पेशल सेल बनाने का फैसला लिया है. सेल का काम यह देखना होगा कि वेज बोर्ड को ठीक से किस किस ने लागू किया और किसने नहीं. तदनुसार सेल अपनी रिपोर्ट देगा और सरकार इस पर एक्शन लेगी. इस बारे में पूरी खबर द हिंदू अखबार ने बिजनेस लाइन में प्रकाशित की है. पूरी खबर इस प्रकार है…

Special cell soon to monitor implementation of Wage Boards for journalists

Chennai : The Tamil Nadu Government will create a special cell to monitor the implementation of Wage Boards for working journalists and non-journalist newspaper employees based on the recommendations of Majithia Wage Boards, says a State Government order.

The creation of the special cell was based on a request from the Union Ministry of Labour and Employment to State governments in March last year to create special cells to oversee the progress of the implementation, to constitute a Tripartite Monitoring Committee and gear up the State labour enforcement machinery to ensure speedy and prompt implementation of the recommendations of the wage boards.

The Centre had already notified the recommendations of the Majithia Wage Boards, which is subject to the decision of the Supreme Court of India in a writ petition.

After careful examination, the State Government decided to implement the recommendations of Majithia Wage Boards for Working Journalists and Non-Journalist Newspaper employees, the order issued by the Labour and Employment Department says.

विनोद दुआ जी एनडीटीवी वालों को असली जायके का मजा दिला रहे हैं

ट्विटर पर विनोद दुआ प्रकरण छाने लगा है. हर कोई अपने अंदाज में बयां कर रहा है. यहां तक कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तक को इस प्रकरण में खूब रस मिल रहा है. चर्चित कार्टूनिस्ट मंजुल लिखते हैं कि विनोद दुआ वर्सेज प्रणय राय वाला मैच जेडीयू वर्सेज बीजेपी से अच्छा जा रहा है. कुछ लोग एनडीटीवी के सूत्रों के हवाले से खबर भी बता रहे हैं कि प्रणय राय और विनोद दुआ में बिग इगो क्लैश शुरू हो चुका है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रणय राय ने 'जायका इंडिया का' का प्रोग्राम एनडीटीवी से गिरा दिया. देखिए कुछ ट्विट्स…

@anilkohli54
Sources in ndtv tell, trouble started after Roy pulled out Jayka India ka! It is confirmed that both r on a big ego clash

@auldtimer
This is confirmed that he's on a ego clash. And to yr Q, Yes. What Roy was to Eng audience, Dua was to Hindi heartland then.

‏@MANJULtoons
This Vinod Dua vs Prannoy Roy is getting better than JDU vs BJP.

@abdullah_0mar
NDTV वाले जो हमेशा BJP की आन्तरिक लड़ाई के पीछे पढ़े हुए थे आज से उनकी आन्तरिक लड़ाई शुरू हो गयी हैं ! Vinod Dua इस बात के लिए शुक्रिया !

‏@abdullah_0mar 22m
Vinod Dua ji तो अलसी जायके का मज़ा NDTV वालों को दिला रहे हैं !

मनु भाई सिंगापुरी ‏@manu_bajaj

Major blow to @ndtv. Vinod Dua, allegedly Alleged Pronoy Roy of destroying his Political Career. Sources.

Reviewer ‏@india_review
If Chef Vinod Dua is unhappy a NDTV he should join Master Chef as resident chef

@coolfunnytshirt
Vinod Dua khaane ke bahut shaukeen hain.. Aajkal woh Prannoy Roy ko kha rahe hain..

@deepakwahi2
It's good that vinod dua has taken #ndtv head on. This channel is run by crooks.and these scoundrels need to shown door.RT if agree

@harshaperla
I understand your anger on NDTV. But please go through old posts of alleged Vinod Dua's fb account. Anybody can understand it is fake

@rainy_leone
Kya Vinod Dua ji, when Congress won in 2004 u joined NDTV… now u know it will lose so leaving ?? waah… political career in journalism..

@MANJULtoons
I want Arnab to grill Prannoy on Vinod Dua. Panel may have Barkha, Sagrika, Rajdeep, etc. Karan must sit with the audience & keep quiet.

@ethicalman3
Vinod Dua should be head chef of Taj after quiting NDTV


pranay vinod

प्रणय राय के खिलाफ विनोद दुआ की भड़ास… देखें स्क्रीनशाट… ताकि सनद रहे…

यहां हम विनोद दुआ के लिखे का स्क्रीनशाट दे रहे हैं. कल को दुआ जी अपनी पोस्ट फेसबुक से हटा दें तो ये न कहा जा सके कि भड़ास वालों ने दुआ साहब की गलत भड़ास प्रकाशित की है… देखना है कि अपने गुस्से का विनोद दुआ सार्थक, यानि मीडिया में ट्रांसपैरेंसी लाने बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं या फिर अपने निज हित खातिर निहित स्वार्थी खुन्नस ही निकालते रह जाते हैं..


pranay vinod

विनोद दुआ जी, ”पोलिटिकल करियर आन टीवी” नामक चीज क्या है?

विनोद दुआ ने एफबी पर जो कुछ स्टेटस डाले हैं प्रणय राय के खिलाफ, उसमें एक जगह उन्होंने लिखा है … Or else we shall seek you out for tryiing to put an end to my political carrer on TV…. माई पोलिटिकल करियर आन टीवी…. यह तो नई जानकारी है… टीवी पर या टीवी में पोलिटिकल करियर!!! ट्विटर पर शिव मिश्रा ने विनोद दुआ को इस नायाब जानकारी को बाहर लाने के लिए धन्यवाद दिया है, कुछ यूं…

Shiv Mishra ‏@mishrashiv

''Thank you Vinod Dua for disclosing there is something called; "political carrier on tv.''


pranay vinod

कुछ समझ में आ रहा है ”तेल-खेल-फिल्म-मीडिया-राजनीति-व्यापार-धन” का समीकरण….??

Yashwant Singh : वीरप्पा मोइली ने कहा है कि तेल आयात लाबी उन जैसे पेट्रोलियम मंत्रियों को धमकाती हैं…

मुकेश अंबानी देश में तेल के बड़े कारोबारी हैं…

अंबानी का पैसा राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद की कंपनियों में लगा है..

राजीव शुक्ला भी देश की सरकार के एक मंत्री हैं….

दिल्ली पुलिस कमिश्नर की बेटी अंकिता कुमार उन पांच कंपनियों में डायरेक्टर हैं जो राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद की हैं…

आईपीएल कमिश्नर रह चुके राजीव शुक्ला के बेहद करीबी मित्र हैं शाहरुख खान और इनका भी पैसा शुक्ला जी की पत्नी की कंपनियों में लगा है…

शाहरुख खान भी आईपीएल की टीमों के मालिकों में से एक हैं….

दिल्ली पुलिस ने आईपीएल सट्टा प्रकरण में राजीव शुक्ला से कोई पूछताछ नहीं की…

कुछ समझ में आ रहा है ''तेल-खेल-फिल्म-मीडिया-राजनीति-व्यापार-धन'' का समीकरण….??

'महान लोग' ऐसा ही सब 'महान' 'महान' काम करते रहते हैं और हम कुछ पगले खामखां हाय हाय करते रहते हैं… कुछ बदलेगा कभी??

केंद्रीय मंत्री का खुलासा- तेल आया लॉबी हम पेट्रोलियम मंत्रियों को धमकाती है

http://www.bhadas4media.com/vividh/12268-2013-06-14-14-16-31.html

राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद की पांच कंपनियों में डायरेक्टर है दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार की बेटी अंकिता कुमार

http://www.bhadas4media.com/print/12267-2013-06-14-13-49-51.html

Ankit Kumar पूरी दाल ही काली है भाई….
        
Raakesh Mehra भाइयों अब तो मन करता हे कमंडल ले और चले केलाश ।
        
Deepak Shukla gathjod se sarkar chal rhi to ye kya hai……chor chor mau…
      
Salahuddeen Ansari isi ko net work kehtey hein.
        
Ashutosh Sharma बड़ा गूढ़ रहस्य छिपा है इस चोर बाज़ार में
         
Sanjay Sharma True..
         
डा. पंकज भारद्वाज CHORI KAB TAK
         
Vikrama Singh उट की चोरी निहुरे निहुरे —–
         
Dileep Kumar Mishra और फिर कैसे कमाया जाये पैसा,,, आपके पास कोई और तरीका है?,,, पैसा भी तो कमाना है,, कोई तरीका बताइए की इमानदारी से मैं BMW ले लूँ और बेटे को Pajero दिलवा दूँ
         
Mahavir Pandey yah bhadas nahi, dhamaka hai.
         
Anurag Jagdhari भाई, जिस भी धातु के बने हो अच्छे हो, बिलकुल भी मत बदलना …
         
Sanjaya Kumar Singh अनुराग जगधारी जी, टैक्स चोरों से मिलीभगत करने में और ज्यादा मिलेगा। सरकार जो देती है उसे तो अफसर बांट लेंगे। सूचना देने वाला मुफ्त में मारा जाएगा। मुद्दा ये है कि जिसे तरीका मालूम है वो कमा रहा है। कमाने का तरीका सीखाया जा सकता तो आईआईएम में इसकी भी पढ़ाई हो रही होती।
 
Naresh Soni मोइली ने जोर का दिमाग चलाया है… अभी तक इल्जाम लग रहे थे कि मुकेश अंबानी को फायदा देने के लिए गैस के दाम बढ़ाने की पैरवी कर रहे हैं… अब मामले को जबरदस्त ट्विस्ट दिया है… ऐसा माहौल बनाया कि तेल लॉबी की धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे… हम तो हीरो हैं….See More
        
पंकज कुमार झा कुछ नही बदलेगा.
        
Asif Suleman Khan are bap re kitna mehnat karte hn ye bade log……… ham se to itti mehnat kabhi na ho paegi isliye apn aise hi sahi… bmw na sahi bhagwan ne facebook to de hi diya h…ek din in sabka bmw yahin se puncture hoga
         
Acharya Sushil Gangwar Bhai ye to maal kamane ka jariya .. jai ho
 
Sanjay Chandna सब साला चोर………
 
Nevil Clarke Likhte raho in choron ke bare mein , kabhi to junta jagegi!

Anil Sharma bahut khub,is mein bhi Modi ka haat lagta hai-ha ha ha

Ravi Bansal Duniya gol hai,har baap ka double role hai :rolleyes1:

Vinayak Sharma पत्रकारों का भी कोटा होना चाहिए राजनीतिज्ञ और मंत्री बनने में…….राजीव शुक्ल की ही तरह………बाकी सब जुगाड़ कर लेंगे……!

Jaikumar Jha बेहद शर्मनाक है ये लूट का गठजोड़ ….

Pradeep Dey और श्रीमती अनुराधा प्रसाद (शुक्ला) भाजपा के बडे और वकिल नेता रविशकर प्रसाद जी की बहन है…….. यानि इसमे राजनैतिक तौर पे भी सारा तेल- खेल- मेल -फेल फिक्स (तय) है…..

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

इलाहाबाद में बदमाशों ने थानेदार को दिनदहाड़े मार डाला

इलाहाबाद। लचर कानून व्यवस्था के कारण खाकी कमजोर साबित हो रही है जबकि अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। 14 जून को बदमाशों ने यमुनापार के बारा क्षेत्र में दिनदहाड़े एक थानेदार को गोली मार मौत के घाट उतार दिया। सुबह इलाहाबाद-बांदा मार्ग पर बिरहिया गांव के सामने बदमाशों की ताबड़तोड़ फायरिंग से आसपास का इलाका दहल गया। कार पर सवार बदमाश बारा थाना के एसओ राजेंद्र प्रसाद दुबे को मार डालने के बाद बड़ी आसानी से मौके से निकल जाने में कामयाब भी रहे।

थानेदार की दिनदहाड़े हत्या की खबर से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना पाकर एडीजी कानून व्यवस्था अरूण कुमार भी लखनऊ से यहां पहुंचे। चारों तरफ नाकेबंदी कर बदमाशों की तलाश की जा रही है। पुलिस विभाग से लेकर अन्य प्रशासनिक अफसर भी मौके पर आ पहुंचे हैं। एसटीएफ व क्राइम ब्रांच की टीमों को बदमाशों की धरपकड़ के लिए लगाया गया है। घटना के बारे में बताया जा रहा है कि सुबह जसरा के पेट्रोलपंप पर बदमाशों के आने की सूचना मिलने पर एसओ राजेंद्र प्रसाद दुबे ने अकेले ही उनका पीछा किया। थोड़ी दूर पहुंचने के बाद बदमाशों ने एसओ को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ कई फायर किए।

गोली लगते ही एसओ राजेंद्र प्रसाद दुबे घायल होकर जमीन पर गिर गए। थोड़ी देर बाद ही उनकी मौत हो गई। खबर लिखे जाने तक कोई बदमाश पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका है। घटनास्थल के आसपास कई थानों की पुलिस और पीएसी लगा दी गई है। एसएसपी मोहित अग्रवाल ने बताया कि जल्द ही बदमाश पकड़ लिए जाएंगे।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट

दिलीप अवस्थी दिल्ली तलब होंगे और आशुतोष शुक्ला बनेंगे नए आरई?

लखनऊ : नवभारत टाइम्‍स की लखनऊ में दस्‍तक ने यहां के जमे-जमाए प्रमुख अखबारों के सम्‍पादकों की कुर्सी हिला दी है। हिन्‍दुस्‍तान के आरई नवीन जोशी की कुर्सी हिलने के बाद अब दैनिक जागरण के आरई दिलीप अवस्‍थी का भविष्‍य भी नभाटा से जुड़ गया है। आशुतोष शुक्‍ल के लखनऊ के आरई होने की चर्चा है। कहा जा रहा है कि नभाटा ने अगर जागरण को कोई बड़ा नुकसान कर दिया तो फिर डैमेज कंट्रोल आसान नहीं होगा।

लखनऊ शहर में दैनिक जागरण और हिन्‍दुस्‍तान में सर्कुलेशन मार्जिन बहुत कम है। नभाटा ने अगर जागरण को ज्‍यादा काट दिया तो लखनऊ शहर में उसके नम्‍बर एक का ताज छिन जाएगा और इसका गुडविल पर ऐसा असर पड़ेगा, जिसकी भरपाई सम्‍भवन नहीं होगी। इसी के मददेनजर जागरण प्रबंधन पहले ही अपने को मजबूत कर कोई काम करने वाला आरई लखनऊ में बिठाना चाहता है और दिलीप अवस्‍थी को दिल्‍ली बुलाना चाहता लेकिन दिलीप अवस्‍थी इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।  

सूत्रों के अनुसार दिल्‍ली में वह संजय गुप्‍ता को बार-बार भरोसा दिला रहे हैं नभाटा से पार पाना उनके लिए बहुत मुश्‍किल नहीं है। चूंकि वह टाइम्‍स आफ इंडिया में लम्‍बे समय रहे हैं, वहां अभी उनकी गहरी जड़े हैं और हर रणनीति उन्‍हें पता चल रही है। लेकिन आशुतोष शुक्‍ला के लिए दिल्‍ली में लाबिंग शुरू हो गई है। उन्‍हें बधाईयां भी मिलने लगी है। आशुतोष शुक्ला अभी दैनिक जागरण, वाराणसी के संपादक हैं। (कानाफूसी)

जागरण छोड़ संदीप भी पहुंचे नभाटा, रोहित भी जाएंगे

लखनऊ : दैनिक जागरण लखनऊ के चीफ फोटोग्राफर संदीप रस्‍तोगी ने शुक्रवार को संस्‍थान से इस्‍तीफा देकर नवभारत टाइम्‍स ज्‍वाइन कर लिया। जागरण की सिटी टीम का हिस्‍सा रोहित मिश्रा का भी इस्‍तीफा एक दो दिन के भीतर होना तय है। नभाटा में उनका भी चयन हो गया है। जागरण लखनऊ से लोकल टीम से कुल सात संवाददताओं ने नभाटा के लिए अप्‍लाई किया हुआ था, जिनमें से रोहित को छोड़कर शेष सभी छह खारिज हो गए हैं। इनमें से एक संवाददाता ने दोबारा टेस्‍ट लेने का अनुरोध किया है।

भड़ास तक सूचनाएं bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचाएं.

प्रणय राय ने मुझसे धोखा किया है, मैं उससे बदला लूंगा : विनोद दुआ

विनोद दुआ बेहद गुस्से में हैं. उन्होंने कहा है कि प्रणय राय ने उनके साथ धोखा किया है और वो इस शख्स से बदला लेकर रहेंगे. विनोद दुआ का साफ कहना है कि मैं उसे निपटा कर रहूंगा. कुछ महीने लग सकते हैं पर यह काम करके रहूंगा. प्रणय राय को विनोद दुआ ने भारतीय ब्राडकास्टिंग का चोर करार दिया है जो अमेरिका से फंडेड है.

विनोद दुआ के एफबी-ट्विटर स्टेटस से पता चलता है कि उनकी नाराजगी इस बात से है कि प्रणय राय ने विनोद दुआ को लेकर एक वीकली पोलिटिकल प्रोग्राम का वादा किया था पर वह पूरा नहीं किया. इसी से भड़के विनोद दुआ कहते हैं कि प्रणय राय ने उनके भरोसे की हत्या की है. विनोद दुआ का आरोप है कि अब तो प्रणय राय की परसनल सेक्रेट्री हन्ना तक उनका फोन नहीं उठाती. इसी कारण उन्हें मजबूरन पूरे मामले को पब्लिक डोमेन में लाना पड़ रहा है.

विनोद दुआ का कहना है कि वे खुद एनडीटीवी या प्रणय राय के पास नहीं गए थे. खुद प्रणय राय ने उन्हें बुलाया था. विनोद दुआ के मुताबिक मैंने कभी प्रणय राय से नहीं कहा कि मुझे तुम्हारे यहां काम करना है. विनोद दुआ कहते हैं कि मेरा करियर प्रणय राय ने डिजाइन नहीं किया, इसलिए इसका अंत भी वे नहीं कर पाएंगे. विनोद दुआ बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2004 में प्रणय राय से पूछा था कि वे एनडीटीवी के साथ कितने साल का करियर प्लान करें. इस पर प्रणय राय ने कहा था कि पूरी उम्र भर का. पर अब वो बात तक नहीं कर रहा.

विनोद दुआ कहते हैं – ''अभी देखना… इस देसी अंग्रेज दून स्कूल वाले की (बार्न एक्रास द कोलोनियल डिवाइड) मैं हिंदुस्तान का प्राउड मिडिल क्लास बदला कैसे लेता हूं''. विनोद दुआ चुनौती देते हैं प्रणय राय को कि अगर तुम्हारे में साहस पैदा हो जाए तो हम लोग फेस टू फेस बैठेंगे नहीं तो तुम मेरा टीवी पर पोलिटिकल करियर खत्म करके दिखाओ.


pranay vinod

ये विनोद दुआ को क्या हो गया, प्रणय रॉय की ऐसी तैसी कर रहे एफबी-ट्विटर पर!

विनोद दुआ और एनडीटीवी एक दूसरे के पर्याय से लगते हैं. खाना-पकाना खिलाते-पिलाते-दिखाते विनोद दुआ को यह मान लिया गया था कि उनकी आगे की उम्र ऐसे ही अच्छे से खाते-गाते एनडीटीवी के सौजन्य से कट जाएगी. पर विनोद दुआ तो गुर्र र्गुर कर रहे हैं एनडीटीवी और प्रणय राय के खिलाफ. यकीन न हो तो विनोद दुआ का एफबी और ट्विटर एकाउंट पर उनकी लैटेस्ट पोस्टिंग पढ़ लीजिए. यहां कुछ दिया जा रहा है… कोई बताए कि आखिर हुआ क्या है…

Vinod Dua : This chap has betrayed me and I will take my revenge.

Vinod Dua : I am convinced,,,,it's time to kill them….it may take me some months but kill I will them……..these thieves of Indian Broadcasting. Funded by us.

Vinod Dua : I trusted you to design a weekend political programme which you promised. You have betrayed my trust. I am putting it in public domain 'cause even your PS Hanna is not taking my calls. It was you who invited me to work with you. I never asked to work with your outfit. Since you did not design my carrer i will not allow you to put an end to mine. How i wish that when i asked you in 2004 that for how long should i plan my future with you …..you said .."for the rest of your life"…but then you are given to appease the moment Not with me Bro.

Vinod Dua : Abhi dekhna…iss desi agrez Doon School wale ki (born across the colonial divide) mein hidustan ka proud middle class bacca kaise leta hoon.

Vinod Dua : We shall meet face to face whenever you have the balls/courage Prannoy Roy. Or else we shall seek you out for tryiing to put an end to my political carrer on TV.


pranay vinod

केंद्रीय मंत्री का खुलासा- तेल आयात लॉबी हम पेट्रोलियम मंत्रियों को धमकाती है

नई दिल्ली: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि तेल आयात लॉबी उन्हें धमकाती है। नौकरशाही की तरफ से देरी की जाती है, विघ्न उत्पन्न की जाती हैं और अन्य लॉबियां भी यह नहीं चाहतीं कि हम आयात बंद कर दें। मोइली ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि तेल आयात लॉबी से हर किसी पेट्रोलियम मंत्री को धमकियां मिलती रही हैं।

उल्लेखनीय है कि जयपाल रेड्डी को जब पेट्रोलियम मंत्री के पद से हटाया गया था तब भी आरोप लगा था कि सरकार ने पेट्रोलियम लॉबी के दबाव में झुककर यह फैसला किया है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने तब आरोप लगाया था कि रिलायंस को जयपाल रेड्डी से मुश्किल हो रही थी इसलिए उन्हें हटाया गया। रेड्डी को हटाकर वीरप्पा मोइली पेट्रोलियम मंत्री बनाए गए थे। इससे यह बात एक बार फिर साबित हो गई है कि मंत्रियों पर तेल लॉबी का भारी दवाब रहता है।

मोइली ने शुक्रवार को कहा कि तेल लॉबी मेरे फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। सरकार ने तेल आयात खर्च को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार का टारगेट 2030 तक तेल आयात व्यय शून्य स्तर पर लाने का है। उन्होंने कहा कि वह लॉबी के दबाव में आने वाले नहीं हैं और अपने फैसले पर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। मोइली से जब पूछा गया कि वह लॉबी का नाम क्यों नहीं बताते, उन्होंने कहा, 'मैं लॉबियों को नजरंदाज करता हूं। लेकिन मेरा सवाल है किसी के पास बेहतर सुझाव है तो मुझे बताएं या भेज सकते हैं। आलोचना करने में बुराई नहीं है लेकिन व्यक्तिगत आलोचना करना ठीक नहीं है।'

उनसे एक बार फिर यही सवाल दोहराया गया तो उनके जवाब था, 'मैं यह फैसला आप पर छोड़ता हूं। बस बहुत हुआ। इतिहास इसका गवाह है।' मोइली से जब पूछा गया कि जयपाल रेड्डी को तेल लॉबी के दबाव में हटाया गया था तो भी वह इस सवाल से कन्नी काट गए। उन्होंने कहा, 'इस बारे में आप उनसे ही पूछिए। इस बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है और इसके भी जवाब दिए जा चुके हैं।'

राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद की पांच कंपनियों में डायरेक्टर है दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार की बेटी अंकिता कुमार

आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के सनसनीखेज खुलासों के बाद से ही सभी लोगों के दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल कौंध रहा है कि इस पूरे प्रकरण में आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला की क्या भूमिका रही होगी? क्या दिल्ली पुलिस राजीव शुक्ला की भूमिका की भी जांच करेगी? अगर दिल्ली पुलिस ने राजीव शुक्ला की तरफ से आंखें मीच रखीं हैं तो उसके क्या कारण हैं? दबी जुबान से इन कारणों का ज़िक्र भी सभी लोग करते हैं, आशंका, संभावना और कयास भी लगाते हैं लेकिन आज तक खुल कर कह पाने की हिम्मत किसी में नहीं हुई है।

पहली बार एक अंग्रेज़ी अखबार ने बड़े हौले से राजीव शुक्ला की इस दुखती रग पर हाथ रखा है। दरअसल, यह दुखती रग राजीव शुक्ला की कम और दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार की ज्यादा है। संभवतः अपने मुखिया की इसी दुखती रग की वज़ह से दिल्ली पुलिस ने अभी तक राजीव शुक्ला पर हाथ डालना तो दूर, निगाह घुमा कर भी नहीं देखा है।

टाइम्स ऑफ इण्डिया ग्रुप के दिल्ली से प्रकाशित अखबार इकोनॉमिक्स टाइम्स ने 'राजीव शुक्ला- मीट द मैन हू इज़ द मिनिस्टर, नेटवर्कर, बीसीसीआई मैनड्रेन एंड बिजनेसमैन' शीर्षक से रिपोर्ट को एक खास डिफेंसिव एंगल से छापा है। शुरू से लेकर आखिरी पैरा तक लगता है कि अखबार आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी में राजीव शुक्ला की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहा है। राजीव शुक्ला के रसूख और व्यवहार कुशलता की भी डींगें इसमें शामिल है। साथ ही राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद की कम्पनियों में अम्बानीज़, शाहरुख खान तथा कुछ अन्य लोगों के सक्रिय वित्तीय निवेश का भी खुलासा किया गया है।

सबसे बड़ा खुलासा रिपोर्ट के अंतिम से पांचवें पैरा में किया गया। इसमें लिखा गया है कि 'दिल्ली पुलिस का क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग-सट्टेबाजी पर इनवेस्टीगेशन और आईपीएल के तीन क्रिकेटरों की गिरफ्तारी, और इन गिरफ्तारियों से आईपीएल टूर्नामेंट पर विवादों के बादल और ये खबर मीडिया की हार्ड कोर सुर्खियां उस समय बन रही हैं जब राजीव शुक्ला के सम्बंध दिल्ली पुलिस के एक अति उच्चस्तरीय अधिकारी से हैं।

दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार उनके पारिवारिक मित्र हैं और नीरज कुमार की उनतीस वर्षीया बेटी अंकिता कुमार, अनुराधा प्रसाद (राजीव शुक्ला की पत्नी) की पांच कम्पनियों की डायरेक्टर हैं। ये कम्पनियां हैं- बीएजी बिजनेस वेंचर, ई24 ग्लैमर, एपरोच फिल्म्स, न्यूज 24 ब्रॉडकास्ट और धमाल 24 रेडियो नेटवर्क। हालांकि राजीव शुक्ला का कहना है कि वो बीएजी ग्रुप की किसी भी कम्पनी के शेयर होलडर या डायरेक्टर नहीं हैं, किंतु अनुराधा प्रसाद ने इस बारे में जानकारी के लिए किए गए आग्रह पर कोई प्रति उत्तर नहीं दिया।'

मीडिया के पंडित लोग इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी रिपोर्ट के इस खास पैरा के दो आश्य लगा रहे हैं- पहला यह कि आईपीएल में सट्टेबाजी-स्पॉट फिक्सिंग और श्रीसंत सहित तीन क्रिकेटरों की गिरफ्तारी के पीछे सिर्फ और सिर्फ राजीव शुक्ला का हाथ है और दूसरा आशय यह है कि आईपीएल की आड़ में चल रहे इस गोरख धंधे के खुलासे के बाद भी दिल्ली पुलिस ने राजीव शुक्ला पर हाथ सिर्फ इसलिए ही नहीं डाला क्योंकि पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार से राजीव शुक्ला के घनिष्ठ सम्बंध हैं। इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी खबर का हिंदी भावार्थ जल्द ही आप भड़ास पर पढ़ेंगे।


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अपनी आधी उम्र से कम उम्र वाली तीसरी पत्नी को भी तलाक देंगे मीडिया मुगल मर्डोक

लंदन। मीडिया मुगल रुपर्ट मर्डोक ने अपनी तीसरी पत्नी वेंडी डेंग से तलाक लेने के लिए न्यूयॉर्क की अदालत में अर्जी दायर की हैं। अर्जी में कहा गया है कि उनके रिश्ते में इतनी दरार आ गई है जिसे भरा नहीं जा सकता। न्यूज कारपोरेशन के मालिक मर्डोक और वेंडी की शादी 1999 में हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। वर्ष 2011 में चाइना मूल की वेंडी उस वक्त काफी चर्चा में आई थीं जब फोन हैकिंग मामले की सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति ने मर्डोक पर शेविंग क्रीम का झाग फेंकने की कोशिश की और वेंडी ने आगे बढ़कर उसे रोका। 82 वर्षीय मर्डोक की मेंडी से मुलाकात 1997 में हांगकांग में एक पार्टी के दौरान हुई थी। उसके दो साल बाद दोनों शादी के बंधन में बंध गए थे।

शादी के कुछ हफ्ते पहले ही मर्डोक ने अपनी दूसरी पत्नी को तलाक दिया था। 44 वर्षीय डेंग ऑस्ट्रेलिया में जन्मे मीडिया मुगल से आयु में 38 वर्ष छोटी हैं। 1996 में येल यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के दौरान उन्होंने कैलिफोर्निया स्थित एक चीनी रेस्त्रां में काम भी किया था। बाद में मर्डोक के एशियाई मीडिया कंपनी स्टार टीवी में उन्हें हांगकांग में नौकरी मिली। इसी दौरान यात्रा पर आए मर्डोक को उन्होंने पहली बार देखा।

मर्डोक के प्रवक्ता स्टीवन रुबेनस्टेन ने उनके तलाक लेने की पुष्टि की है। अमेरिकी नागरिक मर्डोक को अपनी दूसरी पत्नी को तलाक के समय 1.7 अरब डॉलर [करीब 98 अरब रुपये] की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। वेंडी और मर्डोक के बीच विवाह पूर्व समझौता है और दोनों बच्चों के नाम शेयर भी हैं। वेंडी मर्डोक के मीडिया बिजनेस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल, फॉक्स न्यूज और स्काई न्यूज चैनल के मालिक मर्डोक ही हैं। मर्डोक ने अपनी पहली पत्नी पैट्रिका बुकर को शादी के 11 साल बाद 1967 में तलाक दे दिया था। उसी साल उन्होंने अन्ना मारिया तोरव से शादी की। उनकी यह शादी 31 साल तक चली। दूसरी पत्नी से मर्डोक को एक बेटी और दो बेटे हैं।

82 वर्ष के रूपर्ट की पत्‍नी वेंडी उनसे 38 वर्ष छोटी हैं और इनके दो बच्‍चि‍यां ग्रेस और कोल भी हैं। मर्डोक के प्रवक्‍ता के मुताबि‍क दोनों अब अपने संबंधों को नि‍भाने में असहज महसूस कर रहे हैं, इसलि‍ए तलाक की प्रक्रि‍या शुरू की गई है। रूपर्ट इससे पहले भी दो शादि‍यां कर चुके हैं। चीनी मूल की वेंडी 1997 में रूपर्ट से तब मि‍ली थीं जब वह हांगकांग गए थे। तब वेंडी स्‍टार न्‍यूज के लि‍ए काम करती थीं और दोनों एक कॉकटेल पार्टी में मि‍ले थे। रूपर्ट ने अपने दूसरे तलाक के कुछ दि‍न बाद ही वेंडी से शादी कर ली थी।

एक रि‍पोर्ट के मुताबि‍क रूपर्ट और वेंडी ने शादी से पहले ही एक एग्रीमेंट कर लि‍या था। एग्रीमेंट के मुताबि‍क उन्‍होंने अपने बच्‍चों के लि‍ए काफी सारे शेयर छोड़े हैं। तलाक का यह मामला मर्डोक की कंपनी न्‍यूज कॉर्प के दो हि‍स्‍सों में बंटने के ठीक दो दि‍न बाद सामने आया है। मर्डोक इन दोनों ही फर्मों के चेयरमैन हैं और उनका मानना है कि शादी से पहले हए एग्रीमेंट की वजह से उनके बि‍जनेस पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। रूपर्ट के पास वॉल स्‍ट्रीट जरनल, फॉक्‍स न्‍यूज, स्‍काई, 20 सेंचुरी फॉक्‍स स्‍टूडि‍यो आदि हैं।

जब रूपर्ट मर्डोक फोन हैकिंग के मामले में फंसे थे, तब 44 वर्षीय वेंडी ने एक प्रदर्शनकारी को थप्‍पड़ मार दि‍या था। वेंडी चीन के एक फैक्‍ट्री मालि‍क की बेटी हैं और 19 वर्ष की आयु में अमेरि‍का पढ़ाई करने के लि‍ए आई थीं। 1968 में जन्‍मीं वेंडी चीन के जुजोऊ शहर की रहने वाली हैं। अमेरि‍का आने के बाद उन्‍होंने कैलीफोर्निया के एक रेस्‍टोरेंट में भी काम कि‍या और येल यूनि‍वर्सिटी से 1996 में ग्रेजुएशन की डि‍ग्री ली। बाद में उन्‍हें स्‍टार टीवी में नौकरी मि‍ल गई और वह हांगकांग चली गईं। यहां उनकी मुलाकात मर्डोक से हुई। वहीं दूसरी तरफ ऑस्‍ट्रेलि‍या में जन्‍मे रूपर्ट ने अब अमेरि‍का की नागरि‍कता ले ली है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की मीडिया रिपोर्टर एमी चोज़िक ने ट्वीट करके बताया है कि तलाक़ के लिए दी गई अर्ज़ी में कहा गया है कि उनकी शादी के रिश्ते में ऐसी दरार आ गई है जिसे भरा नहीं जा सकता। दो वर्ष पहले रूपर्ट फोन हैकिंग को लेकर काफी मुसीबतों में फंसे थे। उनके ब्रिटिश अखबार ने कुछ लोगों के फोन हैक कि‍ए थे। उस वक्‍त इन दोनों में इतना प्रेम था कि जब मर्डोक फोन हैकिंग के मामले में ब्रि‍टेन की संसद की सुनवाई में गए थे तो एक प्रदर्शनकारी ने मर्डोक पर क्रीम केक फेंकने की कोशि‍श की थी। वेंडी उस प्रदर्शनकारी पर गुस्‍से से लाल हो गई थीं और उसे तमाचा मार दि‍या था।

पति का आरोप- मेरी पत्नी लक्ष्मी गौतम, जो सपा विधायक है, आजकल अपने प्रेमी के साथ रह रही

चंदौसी की सपा विधायक लक्ष्मी गौतम के पति दिलीप वार्ष्‍णेय का कहना है कि उनकी पत्नी लक्ष्मी जो विधायक हैं, आजकल अपने प्रेमी मुकुल अग्रवाल के साथ रह रही हैं। सपा विधायक लक्ष्मी गौतम के पति दिलीप वार्ष्‍णेय रात के अंधेरे में टीडीआई सिटी कालोनी में के ई ब्लाक के फ्लैट में कुछ लोगों के साथ पहुंचे। फ्लैट में चंदौसी के मुकुल अग्रवाल को देखकर वह भड़क गए उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।

दिलीप का दावा है कि लक्ष्मी गौतम उनकी पत्नी हैं, वह यहां प्रेमी मुकुल अग्रवाल के साथ रह रही हैं। लक्ष्मी का कहना है कि दिलीप वार्ष्‍णेय से उनकी शादी नहीं हुई है। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में थे। साथ-साथ रहने के दौरान उनके दो बच्चे भी हैं। अब दिलीप से उनके कोई संबंध नहीं हैं। उनका कहना था कि दिलीप वार्ष्‍णेय उनको बदनाम करने की धमकी देकर दो करोड़ रुपए मांग रहे थे। उन्होंने मुकुल अग्रवाल को पार्टी कार्यकर्ता बताते हुए प्रेमी होने से इंकार किया।

बदायूं जिले के फैजगंज बेहटा स्थित प्राइमरी स्कूल में अध्यापक दिलीप वार्ष्‍णेय के साथ ही वर्ष 2005 में लक्ष्मी गौतम भी शिक्षा मित्र थीं। दोनों के बीच वहीं संबंध हो गए और दोनों चंदौसी में बिना शादी के ही साथ-साथ पति-पत्नी की तरह रहने लगे। लक्ष्मी गौतम अनुसूचित जाति की हैं, जबकि दिलीप वैश्य हैं। विधानसभा चुनाव में आरक्षित सीट चंदौसी से लक्ष्मी गौतम अपने पिता की जाति के आधार पर ही नामांकन कराने में सफल रहीं। दलित व वैश्य वोट के आधार पर वह जीत भी गईं। इस दौरान दोनों के दो बच्चे भी हुए, साथ ही लक्ष्मी गौतम ने भी पति के नाम की जगह कई अभिलेखों में दिलीप वार्ष्‍णेय का नाम लिखा।

इससे पहले, बीवी से अप्राकृतिक सेक्‍स और दहेज उत्‍पीड़न के आरोपी यूपी के फिरोजाबाद से बसपा के घोषित लोकसभा प्रत्‍याशी चौधरी बशीर का मामला सामने आया। चौधरी बशीर के खिलाफ कुकर्म और दहेज उत्पीड़न के मुकदमे से उनकी बस्ती गरमा गई है। बीवी द्वारा लगाए गए सनसनीखेज आरोपों के बाद समाज के लोग भी बशीर के पाले में खड़े होने से बच रहे हैं। बशीर की बस्ती में सोमवार रातभर चली पंचायत के बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका। उधर पुलिस ने बशीर की बीवी के कलमबंद बयान के बाद मेडिकल टेस्‍ट कराया है।

बिहार में जेडी (यू) नेता भगवान कुशवाहा भी ऐसे ही मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। विधवा रीता के यौन शोषण के मामले में गुरुवार को पुलिस तथा मजिस्ट्रेट की निगरानी में डीएनए टेस्ट के लिए कुशवाहा और रीता के साथ उसकी दो बेटियों के खून के नमूने लिए गए। डीएनए टेस्ट का आदेश शेखपुरा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने दिया है। कुशवाहा चेवाड़ा ब्लॉक जदयू के अध्यक्ष हैं। पुलिस ने बताया कि कुशवाहा पर उनके ही गांव बेलखुंडी की विधवा रीता देवी ने शादी का प्रलोभन देकर लंबे समय तक यौन शोषण करने का मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की प्राथमिकी अरियरी थाना में 27 जून, 2012 को दर्ज हुई थी। रीता ने कुशवाहा को अपनी दो बेटियों का बाप भी बताया है। (भास्कर)

रिपोर्टर बनाने वाले हर विज्ञापन सही नहीं होते, पढ़िए इस लड़की की दास्तान

आए दिन यहां वहां अखबार, मैग्जीन, वेबसाइट में रिपोर्टर-पत्रकार बनाने के विज्ञापन छपते रहते हैं. ऐसे सभी विज्ञापन सच नहीं होते. अब तो बदमाशों ने यह तरीका अपना लिया है और रिपोर्टर बनाने के नाम पर मासूमों का शोषण करने लगे हैं. आगरा में ऐसे ही एक प्रकरण में एक लड़की के साथ बहुत अत्याचार किया गया.

वह एक अखबार में छपे एक विज्ञापन के झांसे में आ गई जिसमें रिपोर्टर बनाने के लिए संपर्क करने की बात कही गई थी. उसके साथ बहुत बुरा हुआ. रेप किया गया. ब्लू फिल्म बनाई गई. ब्लैकमेलिंग हुई. आरोपी पकड़े जा चुके हैं. पर इस घटना से मीडिया वाले भी हिल गए हैं कि आखिर कैसे कैसे लोग इस पेशे की तरफ रुख कर रहे हैं. पढ़िए पूरी खबर, जो अमर उजाला अखबार में प्रकाशित हुई है…

भड़ास तक अपनी बात पहुंचाने के लिए bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकते हैं.

नंबर दो पर ‘एबीपी न्यूज’ और ‘इंडिया टीवी’ दोनों चैनल

23वें हफ्ते की टीआरपी में नंबर दो की पोजीशन पर दो न्यूज चैनल हैं. एबीपी न्यूज और इंडिया टीवी दोनों ही दूसरे पायदान पर हैं क्योंकि दोनों के स्कोर 15.3 हैं. इंडिया टीवी 1.3 गिरकर 15.3 पर पहुंचा है जबकि एबीपी न्यूज 0.2 चढ़कर नंबर दो पर कायम है. डीडी न्यूज ने जोरदार बढ़त ली है और पांचवें नंबर का चैनल बन चुका है. न्यूज24 पर टामियों की कृपा कायम है. शुक्लाजी जबसे मंत्री बने हैं तबसे न्यूज24 की बल्ले बल्ले है. आजकल सरकार की नजर टैम पर तिरछी है तो डीडी न्यूज की भी टीआरपी ठीकठाक आ रही है. आंकड़े इस प्रकार हैं..

WK 23 2013, (0600-2400)
Tg CS 15+, HSM:
Aaj Tak 17.7 dn 0.2
ABP News 15.3 up 0.2
India TV 15.3 dn 1.3
ZN 10.1 dn 1.1
DD 9.0 up 3.6
News 24 7.6 dn 0.1
NDTV 7.1 dn 0.2
IBN 5.4 dn 0.8
India news 4.9 up 0.8
Tez 3.5 dn 0.3
Samay 2.2 dn 0.4
Live India 1.9 dn 0.2

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट पांच)

बदतर प्रदेश के सेक्रेटरी मित्तल साहब ने ऐसी मेहरबानी दिखाई कि कुम्भ मीडिया सेंटर में तमाम हेर-फेर और घपलों घोटालों के बावजूद परमातमम ग्रुप को पेमेंट का चेक मिल चुका था। श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस बात को लेकर होड़ लगी हुई थी। गजगोबर सिंह घूम-घूम कर चारों तरफ गाता घूम रहा था, घूमते-घूमते वो टेक्निकल हेड पीदक सेन जी के क्यूबिकल में पहुंचा और बोला- ‘टच वुड भगवान जी कृपा है… हनुमान की कृपा है चेक मिल गया… अब कोई साला रिट लगाए या आरटीआई डाले, हमें जो काम करना था वो पूरा हो गया… आज की डेट में तो हम गारनटी के साथ कह सकते हैं … अभी दो चार महीने अपनी नौकरी पक्की…. बाकी बाद में देखा जाएगा…''

पीदकसेन जी बोले– ''अर्रे सर झण्डेवालान में तो चर्चा हैं कि सीईओ साहब नखलऊ न गए होते चेक ही न मिलता। चेक हासिल करने लिए उन्हें ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया वो न होते तो चेक की जगह लेने के देने पड़ जाते, वित्तल साहब को खुश करने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े हैं सीईओ साहब को तब कहीं जा कर चेक मिला ...''

इतना सुनते ही गजगोबर सिंह उबल पड़ा– साले सबके सब बकवास करते हैं पीदकसेन जी, किसी की हिम्मत है वित्तल साहब से बात करने की, सेक्शन अफसर से बात करने में तो पीछे से हवा निकल जाती है। आपके सीईओ कह रहे थे चलो गजगोबर वित्तल जी से बात कर लो, मैंने कहा- मैं नहीं जाऊंगा कहीं। मैं फोन किए देता हूं आप ही मिल लीजिए। जैसे वो निकले मैंने वित्तल साहब से कहा- देखिए भाई साहब कम्पनी का मामला है इसलिए हम तो कुछ कह नहीं सकते, बड़ी अंग्रेजी बक रहे थे हमारे सीईओ साहब आपके लिए और अखिलेश जी के बारे में। अभी जब आपके पास पहुंचें तो जरा कायदे से निपटा दीजिएगा। जैसे ही सीईओ पहुंचे उसने ऐसा लताड़ा की पैंट में ही पेशाब निकल गई। पसीना पोंछते हुए बाहर निकले। सारा स्टाफ हंस रहा था। मेरे पास पल-पल की खबर आ रही थी। कब ड्रॉफ्टिंग हुई कब रिपोर्ट लगी, कितने बजे चेक बना, कब साईन हुआ…और पीदक जी, जब चेक लिफाफे में डाला गया तब उस पर मेरा नाम लिखा गया, ''मिस्टर गजगोबर सिंह, चैनल हेड, यूपी-उत्तराखंड, चापना न्यूज… उसके बाद फिर हमारे पास मैसेज आया कि सर चेक ले जाइए। मैं वहां पहुंचा ही था कि एक बाबू ने आपके सीईओ से मजा लेने के लिए बोल दिया कि सर चेक बन गया है, जैसे सेक्शन अफसर पास पहुंचे और चेक मांगा तो मालूम है सेक्शन अफसर ने क्या कहा, उसने पूछा- आप कौन? इनका जबाव था- भाई मैं सीईओ परमातम ग्रुप, फिर उसने कहा- चेक तो चैनल हेड गजगोबर सिंह को ही मिलेगा, उन्हीं के नाम की डाक बनी है। सीईओ फिर भी खड़े होकर अपनी बेइज्जती करवा रहे हैं और कह रहे हैं कि मैं उनका सीनियर हूं, सीईओ हूं, सीईओ परमातम ग्रुप का… आप समझते नहीं हैं। इस पर तो वो सेक्शन अफसर इन पर चढ़ बैठा, बोला सीनियर होंगे आप परमातम ग्रुप के, बदतर प्रदेश के सीनियर नहीं हैं…आप सीधे-सीधे बाहर जाते हैं या सर को शिकायत करूं।

अच्छा, मेरे पास खबर आ ही गई थी कि चेक बन गया है। मैं पहुंच ही गय़ा था। मजा आ रहा था, चुपचाप खडा़ पीछे से देख रहा था। जब आपके सीईओ सेक्शन अफसर की डांट-डपट से घायल होकर वापस मुड़े तो मैं तुरंत सामने आया…और बोला सर चेक ले लिया क्या… वो बोले- कहां ले लिया यार गजगोबर सिंह जी, ये तो बिना बात ही भड़क रहे हैं… तब मैंने कहा- कोई बात नहीं सर मैं ले लेता हूं। इन बाबुओं के मुंह क्या लगना, आप चलिए। समझे पीदक जी, ऐसे मिला था चैक..तूतिये साले हमें खोदना सिखाने चले थे। हमारे मालिक भी तो ना पीदक जी तूतिये हैं। कुछ भी समझना ही नहीं चाहते।

बातें करते-करते पीदकसेन और गजगोबर सिंह ऑफिस के बाहर तक आ गए थे। पीदकसेन ने सिगरेट सुलगाई और एक लम्बा कश लिया। पीदकसेन को मलाल इस बात का था कि वीडिया सेंटर की टेक्नीकल विड उसी ने तैयार की थी। टेंडर फायनल होने से पहले उसी ने अपने कम्पटीटर्स और अफसरों के तर्कों को झेला-जबाव दिया था… और वो खुद आज वीडिया सेंटर के श्रेय से कोसों दूर है। बहरहाल पीदक अपनी टीस को ज्यादा देर दबा कर नहीं रख सका। कुछ ही देर बाद उसने अपने सभी दूरसंचार संयत्रों का उपयोग किया। खबर जंगल में आग की तरह चारों ओर फैल गई कि सीईओ तो फुद्दू बना गए। चेक तो गजगोबर सिंह ने ही हासिल किया है।

भाण्ड को सब कुछ बर्दाश्त है बस अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं है। भाण्ड मुंह से कुछ नहीं कहता लेकिन चाल ऐसी चलता है अच्छा-अच्छा पानी मांग जाए। भाण्ड के सामने सबसे पहले यह सवाल था कि गजगोबर सिंह के दावे को झूठा कैसे साबित किया जाए। भाण्ड ने आनन-फानन में लौंडा मालिक को पाठ सिखाया कि हमें अपने स्टाफ के सामने वीडिया सेंटर की सफलता के किस्से गढ़ने चाहिए और वीडिया सेंटर गए सभी स्टाफ को ईनाम दिया जाना चाहिए। गजगोबर सिंह को लगा कि भाण्ड की चाल सफल हो गई तो उसका दावा झूठा माना जाएगा और स्टाफ में मैसेज यह जाएगा कि चेक सीईओ ही लाए हैं।

गजगोबर सिंह ने लौंडा मालिक की जगह पापा मालिक को सलाह दी कि ईनाम-वीनाम से गलत मैसेज जाएगा क्योंकि मीडिया सेंटर में चुन-चुन कर ऐसे लोगों की ड्यूटी लगाई गई थी जिनकी विदाई कुम्भ के साथ ही हो जानी थी। गजगोबर सिंह ने लाख समझाया पर पापा मालिक भी नहीं पसीजे और गजगोबर सिंह की मौजूदगी में लौंडा मालिक और भाण्ड ने वीडिया सेंटर का सारा श्रेय खुद लूटा और ईनाम कर्मचारियों में बांट दिया। यहां भी गजगोबर सिंह के हिस्से में ठेंगा ही आया और पीदक के हिस्से में कुल अढाई हजार टका। गौर करने वाली बात यह भी है कि भाण्ड ने इस मौके पर अपने चिरप्रतिद्वंदी विनोद जी को भी ऐसी पटखनी दी कि वो चारों खाने चित दिखाई दिए।

मीडिया सेंटर भेजे जाने वाले लोगों की लिस्ट बनाने का जिम्मा विनोद जी को ही दिया गया था। स्पष्ट निर्देश थे कि लिस्ट में उन्हीं लोगों को शामिल किया जाए जिनकी छंटनी करनी है। लिहाजा विनोद जी ने सभी हेड्स को गोपनीय रूप से बुलाया और अपेक्षाकृत कम उपयोगी कर्मचारियों के नाम लिए और लिस्ट बना दी। वीडिया सेंटर में काम करने वाले 75 लोगों में से चालीस चांपना न्यूज से थे। यानी उन सभी चालीस की छुट्टी तय थी। कुम्भ की समाप्ति से पहले कुछ लोगों को इशारतन बता भी दिया गया था कि कोई दूसरा घर ढूंढ लें, लेकिन सभी को लौंडा मालिक के हाथों ईनाम दिलवाकर भाण्ड ने गजगोबर सिंह के हाथ से बाजी छीन ही ली साथ ही स्टाफ को यह संदेश दे दिया कि छंटनी करवाने वाले एसएन विनोद थे और बचाने वाला सीईओ।

सच्चाई यह है कि चांपना से कर्मचारियों को वीडिया सेंटर में परमातम का कर्मचारी बनाकर भेजने की चाल सीईओ भाण्ड की ही थी। कुम्भ के साथ ही परमातम एपीएल भी खत्म हो जानी थी। …और जब परमातम एपीएल ही नहीं तो फिर उसके कर्मचारियों को तो स्वतः बर्खास्तगी में जाना ही था। खैर चेक हासिल करने का श्रेय लूटने की जंग को यह श्रेय जरूर जाता है कि उन चालीस में से लगभग सभी अपनी-अपनी जगह काम कर रहे हैं। एक-दो ही थे जो खुद ही चले गये। बेचारा गजगोबर सिंह और विनोद जी कसमसाकर रह गए लेकिन भाण्ड का कुछ भी टेढ़ा नहीं कर पाए।

चर्चा यह चली कि चांपना के कर्मचारियों को ईनाम मिला है और ये खबर कहीं और नहीं तो कम से कम भड़ास पर तो छपनी ही चाहिए। गजगोबर सिंह को लगा कि अब फिर उसी को घेरा जाएगा। बोला- सर वो यशवंत नम्बर एक का हरामी है…साला कुत्ता है, टुकडा़ डालते रहो तो पूछ भी हिलाता रहेगा और छापता भी रहेगा…टुकड़ा डालना बंद कर दो तो काटने को दौड़ता है। गजगोबर फिर आगे बोला- मैंने सर कई बार कहा है कि उसका महीना बांध दो, इम्पलाईज की सेलरी पर इतना खर्च हो ही रहा है तो समझ लीजिए एक कुत्ता और पाल लिया। सर, आपको क्या बताऊं, जब ये जेल गया था तो मैंने राजा भइया से कह कर इसका जेल में वीवीआईपी अरेंजमेंट करवाया था। वो सारी फेसिलिटीज दिलवाई थीं जो इसी के बगल में बंद आईएएस को नहीं मिल रही थी। पचासों हजार रुपये इसके घर पहुंचवाए थे कि इसके बीवी-बच्चे भूखे न मरें। कमीना एक भी अहसान नहीं मानता। अभी एक खबर छपी, उस पर हमारे लखनऊ के एक साथी के नाम से फर्जी कमेंट भी इसने छाप दिया। मैंने कहा कि, यार कम से कम वो कमेंट तो हटा दो। कमीने ने कमेंट नहीं हटाया। गजगोबर सिंह ने बला अपने ऊपर से टालते हुए कहा कि सर विनोद जी के आजकल बहुत अच्छे संबंध हैं भड़ास से। अभी कुछ दिन पहले उसने विनोद जी का इंटरव्यू भी छापा है। विनोद जी बीच में ही बोले- अरे वो तो तुम लोगों ने ही अरेंज करवाया था। उसने तो छापा भी है तुम्हारे नाम से। बात आई गई हो गई।

मैडम सिंह का चापना न्यूज में आगमन हो चुका था। मैडम से कहा गया कि आपको फिल्हाल बदतर प्रदेश का असाइनमेंट देखना है। चैनल हेड गजगोबर सिंह के पिछवाडे़ को हवा भी नहीं लगी और उनके चैनल में मैडम सिंह की नियुक्ति हो गई। गजगोबर सिंह को पता चला तो उसने धरती आसमान एक कर दिया लेकिन मैडम सिंह को टस से मस न करवा सके। मैडम सिंह आईं तो किसी भगवा सिफारिश पर थीं, फिर भी उनकी एक शर्त थी कि वह गजगोबर सिंह को रिपोर्ट नहीं करेंगी। गजगोबर को यह शर्त बर्दाश्त न थी। मैडम सिंह की लौंडा मालिक और भाण्ड को को रिपोर्टिंग है। गजगोबर सिंह यहां भी मात खा गए। अब गजगोबर सिंह बस नाम के चैनल हेड हैं। ज्यादातर वो लखनऊ में ही सैटिंग-गेटिंग में मस्त रहते हैं। अब पता चला है कि नोएडा प्रवास के दौरान गजगोबर सिंह ने मैडम सिंह के भी तलवे चाटने शुरू कर दिए हैं। कभी भूखे भेड़िये जैसा रुख ऱखने वाला गजगोबर सिंह आज उसी मैडम सिंह के आगे वोडाफोन के पग (सेवा में हर पल तत्पर छोटा सा प्यारा सा कुत्ता) जैसा बना रहता है। अपनी कुर्सी छोड़ मैडम सिंह के क्यूबिकल में घण्टों बैठा रहता है। चिचियाते- मिमियाते घण्टों गपियाता रहता है।

गजगोबर सिंह नोएडा कम लखनऊ सैटिंग गैटिंग में ज्यादा लगा रहता… राजू को हटवाया और वास्तव को ब्यूरो चीफ वनवा दिया। कहते हैं कि उसे बीयर वार का ठेका दिलवा दिया। इसी बार में गजगोबरसिंह सुंदरियों के साथ सुरा पान करते हैं। प्रदेश भर में निल डिस्ट्रीब्यूथन के बावजूद चांपना को विज्ञापन देने वाले कर्मचारी अधिकारी भी इसी बार में गजगोबरसिंह की सुंदरियों के साथ सुरा पान करते हैं। बेचारा गजगोबर सिंह कुछ भी करता है मगर चांपना को हिस्सा तो मिलता है ना…दिलवाता है ना, कहीं न दिखने वाले चैनल को विज्ञापन… ! फिर भी गुप्ताज चाहते हैं कि सारी मलाई उन्हें ही मिले, मुंह भी मीठा रहे और सिर भी चिकना रहे और गजगोबरसिंह बैठ कर सिर्फ चौकीदारी करे, मुंह न मारे। बेचारा मुंह मार लेता है या थोड़ी सी मलाई खुद भी या किसी और को भी खिलवा देता है तो लौंडा मालिक उसे दल्ला दलाल और न जाने क्या क्या खुलेआम कहकर सरे आम बेइज्जत करते हैं…

…जारी…

इससे पहले के पार्ट्स पढने के लिए क्लिक करें- अथश्री चांपना न्यूज इंटरनल कथा

श्री कुमार स्वामी के खिलाफ एफआईआर के लिए दी गई शिकायत पढ़ें

सेवा में, थाना प्रभारी, गोमती नगर, लखनऊ, विषय: श्री ब्रह्मर्षि कुमारस्वामी के विरुद्ध औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा  7 तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखवाने हेतु

महोदय,

हम आदित्य ठाकुर पुत्र- श्री अमिताभ ठाकुर व डा. नूतन ठाकुर और तनया ठाकुर पुत्री- श्री अमिताभ ठाकुर व डा. नूतन ठाकुर निवासी-5/426 विराम खण्ड, गोमतीनगर, लखनऊ हैं. हम कक्षा 12, पुलिस मॉडर्न स्कूल तथा द्वितीय वर्ष, बीए,एलएलबी चाणक्य नैशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र हैं. हमारे पिता श्री अमिताभ ठाकुर उ.प्र. में एक आईपीएस अफसर हैं और हमारी माँ डा. नूतन ठाकुर एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. अपनी पढ़ाई के साथ साथ हम दोनों कई सामाजिक कार्यों में भी अपने स्तर पर निरंतर हिस्सा लेते हैं. क्योंकि हम अपने आप को भारत के ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में देखते हैं, हम अंधविश्वास के खिलाफ निरंतर अपनी आवाज़ उठाते हैं.

इस तहरीर के माध्यम से हम आपके समक्ष कुछ ऐसी ही घटना सामने ला रहे हैं जिसमे श्री ब्रह्मर्षि  कुमारस्वामी नामक एक व्यक्ति हमारे देश में स्थापित क़ानून का उल्लंघन करने और लोगों की समस्याओं को चमत्कारिक ढंग से हल करने का दावा करते हुए समाज में अंधविश्वास को फ़ैलाने का कार्य करते दिख रहे हैं. श्री कुमारस्वामी भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धाम से सम्बन्ध रखते हैं, जिसका पता सी-27,  ग्रेटर कैलाश इन्क्लेव, पार्ट-I,  नयी दिल्ली-110048, फोन नंबर-   011- 41639067-69  011- 46772250  to  54, 011- 65577933  to  37, 011-26241880 से 84, ईमेल-:- prabhukripa999@gmail.com , info@cosmicgrace.org, prabhukripapatrika@gmail.com है.

श्री  ब्रह्मर्षि कुमारस्वामी  जी अपने आप को 21वीं सदी का एक पहुंचा हुआ आध्यात्मिक गुरु बताते हैं. इसके साथ ही वह दावा करते हैं कि उन्होंने प्राचीन किताबों से कुछ ऐसे मंत्र खोज कर निकाले हैं जिनके एक अनूठे ढंग से उच्चारण करने से लोगों की आर्थिक, मानसिक और शारीरिक समस्याएँ हल होंगी. इस मंत्र को उन्होंने बीजमंत्र का नाम दिया है और इसे वह अपने समागमों में अपने भक्तों को बांटते हैं. चूँकि यह आस्था का विषय है अतः हम इस सम्बन्ध में कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहते और ना ही हमें टिप्पणी करने का अधिकार है.

हमारी आपत्ति उस स्थान से शुरू होती है जब उनके कई दावे प्रथमद्रष्टया ही अतिशयोक्ति से भरी हुई अथवा असत्य लगती हैं. हमारी समझ में इस प्रकार के असत्य और भ्रामक दावे अपराध की श्रेणी में आते हैं क्योंकि श्री कुमारस्वामी इन दावों के बल पर ही तमाम भक्त बनाते हैं और निश्चित रूप से इस प्रक्रिया में इन भक्तों द्वारा उन्हें विभिन्न रूपों में धन प्रदान किया जाता है जो इन भक्तों को अनुचित हानि और श्री कुमास्वामी को अनुचित लाभ की श्रेणी में आता है.

श्री कुमारस्वामी का वेबसाईट (www.cosmicgrace.org/) कई सारे ऐसे दावे करता है जो प्रथमद्रष्टया ही अतिशयोक्ति से भरी हुई अथवा असत्य लगती हैं. उनका वेबसाईट दावा करता है-“ He has been honored by Government of India, State of Alberta in Canada, State of New York and State of New Jersey in USA, to name a few. He has served as an Advisor to the Ministries of Industry, Labor, Health and Family Planning by the Government of India.” हमारी जानकारी में श्री कुमारस्वामी को भारत सरकार द्वारा कोई आधिकारिक पुरस्कार नहीं दिया गया है. इसी प्रकार उन्हें किसी बाहरी देश अथवा इन देशों के प्रान्तों द्वारा भी कोई आधिकारिक पुरस्कार दिये जाने की बात हालत प्रतीत होती है. श्री कुमारस्वामी द्वारा भारत सरकार के उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य मंत्रालय आदि के सलाहकार के रूप में कार्य करने का दावा भी सही नहीं दिखता है.

श्री कुमारस्वामी द्वारा अपने वेबसाईट पर यह दावा किया गया कि- “A multi-step clinical test was conducted on His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji at a research lab in Bangalore, India which is run by Govt. of India’s Ministry of Science and Technology.” अर्थात भारत सरकार के विज्ञानं तथा तकनीकी मंत्रालय द्वारा बंगलोर के एक सरकारी प्रयोगशाला में अलग से उन पर प्रयोग हुए. यहाँ किसी प्रयोगशाला का स्पष्ट नाम नहीं दे कर भ्रामक रूप से इस तरह बातें कहीं गयी दिखती हैं जिनसे लोगों में भ्रम बना रहे और श्री कुमारस्वामी के अपने उद्देश्य की पूर्ति हो जाए और लोग उनके बारे में दिग्भ्रमित रहें. श्री कुमारस्वामी का यह दावा भी पूरी तरह असत्य दिखता है.

उनके वेबसाईट पर कहा  गया है कि “His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji's endless powers were witnessed by the senior editors and journalists at the London headquarters of BBC. The audience was stunned to see him diagnose people's ailments on the phone during a live TV show. The show stirred a deep interest among medical scientists and they wanted to know about the dimension of science that Gurudev uses to diagnose ailments” अर्थात बीबीसी पर उन्हें बुलाया गया और उनके चिकित्सकीय प्रतिभा से सारे दर्शक स्तब्ध रह गए. हमारी जानकारी में ऐसा कोई कार्यक्रम बीबीसी द्वारा कभी प्रसारित नहीं किया गया और यह भी श्री कुमारस्वामी द्वारा कहे जा रहे असत्य संभाषणों में एक प्रतीत होता है.

उन्होंने अपनी वेबसाइट  पर यह भी दावा किया है कि उनके मानने वालों में इंग्लैंड की महारानी, भारत के कई पूर्व  राष्ट्रपति, कई राज्यों के  गवर्नर और मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. उन्होंने यह भी दावा किया है कि उन्होंने अमेरिका  के पूर्व राष्ट्रपति बिल  क्लिंटन की कुर्सी बचाई. एक जगह उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास विश्व भर में  कुल पचास करोड़ अनुयायी  हैं. उन्होंने अपनी वेबसाईटों  पर यह भी दावा किया कि उनके बीजमंत्रों द्वारा उनके भक्तों को एड्स, बहरापन, गूंगापन, कैंसर, नशे  की लत आदि बीमारियों और कष्टों से मुक्ति मिल गयी. हम श्री कुमारस्वामी के वेबसाईट के सम्बंधित पृष्ठ की प्रति यहाँ साक्ष्य के रूप में संलग्न कर रहे हैं.

हमने जब इन समस्त दावों  के सम्बन्ध में इंटरनेट  पर खोजना शुरू किया तो यह पाया कि श्री कुमारस्वामी  के किये गए इन तमाम दावों  की किसी भी अन्य स्तर पर कोई  पुष्टि होती नहीं दिखी. मात्र  उनके स्वयं के वेबसाईट  और उनके ब्लॉग के अलावा  इन्टरनेट पर श्री कुमारस्वामी  के बारे में लगभग शून्य  जानकारी है. उनके किसी भी दावे की किसी अलग निष्पक्ष एजेंसी अथवा समाचारपत्र आदि  से कोई पुष्टि होती नहीं दिखी. आज के समय इन्टरनेट इतना ताकतवर हथियार है कि वह किसी भी व्यक्ति  के बारे में लगभग सभी तथ्य ला कर सामने रख देता है. ऐसे  में एक व्यक्ति जो स्वयं  को देश-विदेश में इतना महान व्यक्ति बताता हो जिसे अमेरिकी और ब्रिटिश राष्ट्राध्यक्ष तक जानते और सम्मानित करते रहे हों, उनके विषय में पूरे इन्टरनेट पर उनके अपने वेबसाईट  के अलावा बहुत कम जानकारी  मिलने पर हमें लगभग पूर्ण  विश्वास हो गया था कि इस मामले में असत्य संभाषण कर लोगों को ठगने, उनके सामने  खुद के विषय में बड़े-बड़े  दावे और भ्रान्तिपूर्ण तथ्य प्रस्तुत कर स्वयं को महिमामंडित कर लोगों को भ्रमित करने और गलत ढंग से प्रतिरूपण  कर लोगों में विश्वास  पैदा कर अपना हित साधने  की स्थिति हो सकती है.

साथ ही साथ हमें विश्वास  नहीं हुआ कि कोई व्यक्ति  कुछ जादू-टोटकों से ऐसी  गंभीर समस्याओं ने निवारण कर सक्ता है. अतः हमने दिनांक 16/1/2013 को ब्रह्मर्षि  श्री कुमारस्वामी को एक लीगल नोटिस भेजा जिसके द्वारा हमने कुल 10 प्रश्नों, जिनमें यह साफ लग रहा था कि श्री कुमारस्वामी द्वारा लोगों को गुमराह किया जा रहा हैं, पर उनसे 1 महीने की अवधि में स्थिति स्पष्ट करने का निवेदन किया. हमें अपने पत्र का कोई जवाब न मिला, इसीलिए यह अवधि ख़त्म होने पर हमने फिर से दिनांक 20/02/2013 को पत्र भेजा. इसकी भी अवधि निकल गयी और हमें अपने प्रश्नों का किसी भी प्रकार का उत्तर न मिला. हम अपने इन दोनों पत्रों की प्रति भी यहाँ संलग्न कर रहे हैं जो यह स्पष्ट कर देगा कि पुलिस के पास आने से पूर्व हमने श्री कुमारस्वामी के बढे-चढ़े दावों की सत्यता जानने का अपने स्तर पर पूरा प्रयास किया था.

इसी बीच में हमारे सामने  कई उदाहरण आये जिसमे ब्रह्मर्षि श्री कुमारस्वामी ने अखबारों  और इन्टरनेट के माध्यम से गूंगापन, बहरापन, एड्स जैसी बीमारियों को हल करने का दावा करते हुए विज्ञापन निकाले थे. उदाहरानार्थ श्री कुमारस्वामी द्वारा दिनांक 22/11/2012 के वाराणसी संस्करण में प्रथम पृष्ठ पर निकले विज्ञापन में तमाम असाध्य रोगों के इलाज के खुलेआम दावे किये गए थे. कृपया ज्ञातव्य हो कि इनमे कई ऐसी बीमारियों के इलाज का भी दावा था जो औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तीजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 का उल्लंघन है तथा इस अधिनियम की धारा 5 के अनुसार निषिद्ध हैं, जैसे बहरापन, गूंगापन, कैंसर, दिल की बीमारियों का प्रचार करना या विज्ञापन निकालना. इस अधीनियम की धारा 7 के अंतर्गत किसी भी ऐसे व्यक्ति जो कि धारा 5 का उल्लंघन करता है उसको सजा का प्रावधान है. श्री ब्रह्मर्षि द्वारा किए गए कृत्य इस अधिनियम के धरा 5 का उल्लंघन करते दिखते हैं. हम श्री कुमारस्वामी द्वारा निकलवाये गए उपरोक्त विज्ञापन की प्रति भी इस पत्र के साथ संलग्न कर रहे हैं.

यहाँ एक अन्य तथ्य भी विशेष  रूप से द्रष्टव्य है कि श्री कुमारस्वामी द्वारा अपने सम्बन्ध में जो विभिन्न  दावे किये जाते हैं जिनके  संबंध में हमने उनसे इन दावों के प्रथमद्रष्टया  अविश्वसनीय होने की दशा में  इन पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया था लेकिन हमारे  द्वारा दो-दो बार अनुरोध के बाद भी उन्होंने अपनी बात  नहीं रखी, जिससे हमारी आशंका  प्रबल होती है.

सबसे पहले तो यह कि श्री कुमारस्वामी  तथा/अथवा उनसे सम्बंधित संस्था या समूह विभिन्न लोगों  से धन प्राप्त करती है. यह सही है कि वे किसी से जबरदस्ती धन नहीं मांगते और लोग स्वतः  ही अपनी मर्जी से धन देते हैं. लेकिन लोगों को इस प्रकार धन देने के लिए श्री कुमारस्वामी  और उनके लोगों द्वारा जो गलत  तथ्य प्रस्तुत किये जाते हैं  या असत्य संभाषण किया जाता है, जिनका हमने ऊपर विस्तार  में वर्णन किया है, वे लोगों  के धन देने की प्रक्रिया को दूषित और आपराधिक बना  देते हैं क्योंकि लोग  इन गलत तथ्यों और असत्य  साथ ही हमें बताए गए तथ्यों के अनुसार श्री कुमारस्वामी  को उनके कार्यक्रम/समागम  अथवा अन्यथा धन देते हैं. किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समक्ष भ्रांतिपूर्ण तथ्य प्रस्तुत कर अथवा स्वयं के विषय में असत्य दावे कर लोगों को मतिभ्रमित करना और उनके मन भ्रम पैदा कर ऐसी  स्थिति उत्पन्न कर देना छल का आपराधिक कृत्य है और इस प्रकरण में भी उपरोक्त  तथ्यों के आधार पर प्रथमद्रष्टया  ऐसा प्रतीत होता है. यहाँ प्रथमद्रष्टया यह बात भी सामने आती है कि श्री कुमारस्वामी  द्वारा किये गए दावे अर्थात स्वयं को वह बताना जो वे नहीं दिखते, प्रतिरूपण की भी श्रेणी में आता दिखता  है.

इसीलिए आपसे अनुरोध है कि आप ऊपर वर्णित समस्त तथ्यों तथा हमारे द्वारा पूर्व  में प्रेषित पत्र दिनांक 16/1/2013  तथा 20/02/2013 तथा श्री कुमारस्वामी के वेबसाईट पर किये गए विभिन्न दावों को ध्यान में रखते हुए औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तीजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा 7 तथा भारतीय दंड अधिनियम में छल, प्रतिरूपण द्वारा छल तथा अन्य सम्बंधित उचित धाराओं के अंतर्गत श्री ब्रह्मर्षि कुमारस्वामी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर नियमानुसार विवेचना कराये जाने  की कृपा करें.

पत्र संख्या- TT/BKS/01       भवदीय,
दिनांक-    /06/2013

(आदित्य ठाकुर)
(तनया ठाकुर)

5/426 विराम खंड

गोमती नगर, लखनऊ

Legal notice by Tanaya and Aditya

To,
Respected Sri Brahmrishi Shri Kumar Swami,
Bhagwan Sri Lakshmi Narayan Dham
5/120, Sant Nirankari Colony,  
Delhi 11000
    
      

Subject- Legal Notice as regards certain facts and claims being made by you
 
Respected Sir,

  We are Aditya Thakur, 14, and Tanaya Thakur, 17, residents of 5/426 Viram Khand, Gomti Nagar, Lucknow. We are students of Class 11th Police Modern School, Lucknow and 1st Year BA LLB at Chanakya National Law University, Patna respectively. We take enthusiastic part in social activism and are deeply concerned to fight against the social problems being faced by our country in our times. One of our main concerns is to fight against mental-slavery and superstition present in our society. We are also against people who spread misbeliefs among people, lie to present themselves in a self-glorifying fashion and blatantly fool the populaces of the nation. We have deep respect in our constitution and with solemn faith in it and the ideals enshrined in it, we are sending you this legal notice.

Recently, we came to know about you, that is Respected Sri Brahmrishi Shri Kumar Swami, and your organization, Bhagwan Shri Lakshmi Narayan Dham. On your blog- http://brahmrishikumarswamiji.blogspot.in , we came to know about various claims made by you, that you have been honoured by various governmental organizations, primarily in the United States, Canada and the UK. While reading your blog, we also came across a claim made by you that you saved Mr. Bill Clinton’s career as the President of the United States, without even letting the President know about it. There were many other such claims too. While we are not making any comments on the validity of such claims, most of the statements published on your website seem to need proper authentication and verification, which seems to be often lacking. Taking in account your position as a ‘spiritual leader of India’, we want the truth to come out and through this letter we seek from you, the answers and explanations to the many claims you have made on your blog and also made in front of various newspapers and other forms of the media.

The points on which we pray to kind present your explanations of are as follows:

    On your website- www.cosmicgrace.com, there is a link that goes like- “SPECIAL MESSAGES BY QUEEN UK”. But on clicking the link we are redirected to a photograph of you presenting a poem titled “The Westminster Bridge” to British MP Mr. Stephen Pound. Above it is a receipt that your poem has been received. We can’t see in any case, that this receipt is a special message by Queen Elizabeth II. The whole link appears as a hoax to fool people into believing that you are very close to the Queen and the Queen has personally acknowledged your religious acts, while the document presented is nothing more than a mere receipt regarding a poem.

 

    On your blog- http://brahmrishikumarswamiji.blogspot.in, you have claimed that April 29th was declared as ‘'Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji Day' in New York. You asserted your claim by adding the following text to your claim:  “It was witnessed for the first time in American history that a day was dedicated to a spiritual figure from India. In a unique decision by the State Senate of New York, April 29, 2011 was declared as 'Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji Day'. Senator Jack M. Martins announced this decision along with a written Proclamation. He handed over this Proclamation to Brahmrishi Shree Kumar Swamiji during a special felicitation ceremony. Honoring Brahmrishi Shree Kumar Swamiji the Senator said, "His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji is working towards bringing a peaceful world free from violence, hatred and strife.” You have also attached a link which redirects us to a photo of you with New York Senator Jack M Martins. Your statement says that you have been honoured by the New York Senate. But the link you have provided as evidence to your claims says that- “Senator Jack M. Martins attended a special ceremony at the Nassau County Legislature for members of the Indian-American community. Senator Martins presented a Senate Proclamation in honor of Brahmrishi Shri Kumar Swami Ji, who is one of the most renowned and revered spiritual leaders of India with 310 million followers around the world. Senator Martins proclaimed April 29, 2011 as "Brahmrishi Shri Kumar Swami Day" in State of New York.” The link describes that you were given this honour in a special ceremony at the Nassau County legislature. Also the link describes the honour as a personal honour by Mr. Jack M Martins, Senator and not an honour by the New York State Senate. Hence, many important issues arise here, including the facts like- “Are the Nassau County Legislature and the New York Senate the same things? Does Mr. Jack M Martins, who is a senator, hold the power to single-handedly act as the New York Senate? On what basis has this claim been made by you?”

 

    There are various inconsistencies in your press releases presented to many newspapers and available on your website. In your blog http://bslndmedia.blogspot.in/ it has been stated that you gave an invocation at the opening of the session of the New York State Senate on April 27, 2011.  You gave the same speech, probably at the same occasion, on May 2, 2011 according to your other blog- http://brahmrishikumarswamiji.blogspot.in. The same was published in your press release to Dainik Jagran. The inconsistencies in the dates raise serious doubts about your integrity. Thus we kindly request you to explain the very important inconsistencies in these various claims made by you and your organization?

 

    On your blog- http://brahmrishikumarswamiji.blogspot.in, you stated, “Major political and spiritual heads, intellectuals, scientists, and people from all walks of life including Queen Elizabeth have benefited from these secrets and publicly approved their practice.” You said this referring to your beej-mantras and the dubious so-called ‘science’ of cosmic sounds. These claims prima-facie sound first-hand vague and baseless. We fail to understand how you claim that various personalities benefitted from your ‘secrets’. If such people really benefitted from you, can you provide us with a list of such people (major political and spiritual heads, intellectuals and scientists) who benefitted from your secrets? Also, can you explain how these people got positive responses from your endeavours? We also request you to kindly explain about your claim that Queen Elizabeth II has ‘publicly approved this practice’. Else, this statement might be seen as a deliberate attempt to attract followers by presenting a ‘king of kings’ image before the people, and might legally be taken as an absolutely incorrect statement.

 

    In various online forums and in numerous press-releases and advertisements, you have claimed that your beej-mantras or the ‘divine science of cosmic sounds’ can get rid of the most major ailments. Numerous times you have claimed that your beej-mantras can even cure diseases that medical science has failed to cure. On sites like – http://mahamandleshwarkumarswamiji.blogspot.in/p/blog-page.html, we come to know about various experiences of by your followers. You also tell about your exploits in various advertisements, for example the one published in Dainik Jagran. Some of your patients have also said that you cured them of the incurable- HIV AIDS. Also, one of your claims showed that a woman got rid of her husband’s alcoholism by using your beej-mantras. You have also claimed, in a particular advertisement published in the Dainik Jagran, that you have solved ailments like hearing impairment, visual impairment and muteness by using your special powers. All of your claims prima-facie seems to be impossible. Also many of your assertions, such as you can treat blood cancer and AIDS need exact and definite corroborations. We would request you to kindly give definite examples, including all the relevant details (names, father’s name, address, phone number etc) so as to trace the particular individuals to trace them and to verify these claims regarding each of your claims like curing AIDS, blood cancer, making a deaf hear, letting a blind see, making a lame walk etc, which would act as definite examples of your claims.

 

    You have claimed that Mr. Bill Clinton continued his presidency because of you. We are unable to understand how Mr. Bill Clinton benefited from your beej-mantra recital. This claim definitely seems to need clear-cut explanations and authentication. Hence, we kindly request you to present facts regarding these claims of yours.

 

    In various advertisements you have claimed that you have got more than 310 million followers. That is an impressive number and can be easily used by anyone to present himself/herself as a highly revered personality. But very likely, there does not seem to be any substantial back-up to explain/substantiate this claim that you have followers in such a large number. Hence, here again, we request you to kindly explain the statistics presented by you regarding your claims for a very wide following.

 

    Your blog brahmrishikumarswamiji.blogspot.in claims that the International media has also followed and welcomed you. But a Google search on the Internet hardly provides any article about you in the International Media and even the India Media. The only few articles that we found on typing your name “Brahmarishi Kumar Swami” were the website and the blogs directly related to you or a few Articles which presented you as a False God-man. One of these was the web-page http://www.indiatvnews.com/video/godman-kumar-swami-challenged-by-devotee-for-fake-mantra-6052.22.html dated: Jun 23, 2012 which read-“Godman Kumar Swami challenged by devotee for fake mantra. This is the amazing story of a small-time ayurveda medicine seller from Delhi's down-market Nirankari Colony metamorphosing into a global hi-flying godman named Brahmrishi Kumar Swami, feted by New York State Senate.” Similarly, there was another webpage http://www.jaisiyaram.com/blog/fake/7461-brahmrishi-kumar-swami-wants-1-trillion-dollar-for-temple-in-vrindavan-22-feb-11.html which is highly critical of you. There is the third webpage http://www.fake-guru.com/fake-gurus/69-fraud-fake-guru-brahmrishi-kumar-swami.html titled Fraud "Fake Guru" Brahmrishi Kumar Swami which again says-“nd big that all others and everything else looks small. He shows such numbers that amaze everybody: in a local newspaper advertisement he claims that 31 crore (310 Million) people had benefitby his program. There are testimonials of different people with their pictures printed beside them. Most of the testimonials are from foreign NRIs which is somehow always more convincing for Indians. It must be something strong when it is proofed by people from rich countries. To make this impression more strong he has put his photo with US diplomats, too, while he is being honoured and rewarded by the US Gov., which nearly gives the impression that he is a good friend of Mr. president Barak Obama.”There is the fourth webpage http://www.indiatvnews.com/news/india/ayurveda-doc-turned-billionaire-godman-kumar-swami-16577.html titled Ayurveda doc turned billionaire godman Kumar Swami challenged by devotee for fake mantra which says-“The self-styled godman claims to perform miracles and cure patients with the help of 'beej' mantras, but one of his devotees 78-year-old Ramesh Chandra Adhir, a resident of Solan, challenged his miracle power by filing an FIR last year. Adhir's six-year-old great grandson Manav could not speak nor hear since birth. Two years ago, after watching the swami's claims about his miracle powers on TV, he rang up the Laxmi Narayan Dham, and paid Rs. 2100   through demand draft on February 16, 2011 seeking the swami's divine intervention. Adhir got the 'beej mantra' written on the Laxmi Narayan Dham letter pad on which Manav's picture was pasted and he was advised to carry out Shri Durga Saptashati Satchandi Path. For one and a half year, the prayers were performed but there was no improvement in Manav's condition. "I was cheated. The child was not cured at all", says Adhir. He then rang up the Laxmi Narayan Dham, and tried to meet the godman at his samagam on May 12 and 13 in Solan, but was not allowed to meet him.”
    Thus none of these Media reports seem even slightly favourable to you. Other than these Indian Media reports, we could not find any substantial International/National Media reports which would substantiate your assertion that the International Media seem to be following you in any manner. We would kindly request to clarify the position as regards your assertion, not being seen substantiated by facts.

 

    That your blog http://brahmrishikumarswamiji.blogspot.in/ gives a picture of yours where you are supposedly seated with Mr. Nelson Gift, with a caption-“Sadgurudev in discussion with the Foreign Minister of Trinidad, Mr. Nelson Gift in the Port of Spain.” The exact date of this event is not mentioned but it seems to have taken place in 2007 because references to your visits in 2007 are made at this place. Two serious anomalies seem to come here. The first is that the person’s name is Mr Knowlson Gift and not Mr Nelson Gift as presented in your blog. The second is that as per the Wikipedia information on Mr Knowlson Gift, http://en.wikipedia.org/wiki/Knowlson_Gift-“He served as foreign minister until October 2006”. Thus there seems to be no question of their meet in 2007 with Mr Gift being the Foreign Minister. The third point is that the photograph also seems to be decrepit and imposed/concocted. We humbly request you to kindly explain the correct situations in these regards.

 

 

    That the same blog says-“Sunday Mercury's headline proclaimed 'He is Bigger than Elton'.  The spokesperson of Swamiji, said the cash raised from the event will be used to help the people in miseries. Thousands of people have been helped by the mystic and he has an amazing presence which people can immediately feel when they are around him". Queen Elizabeth sent Mayor Counselor Ms. Sady Smith as her representative to felicitate Param Pujya Brahmrishi Shri Kumar Swamiji and present him a memento on behalf of the British government.” These facts are also not substantiated by any of the Internet sources and we have our strong doubts that such words were written by Sunday Mercury. We also have our strong doubts that the Queen herself sent any person as her representative. We kindly request you to get these facts substantiated through definite evidences/documents.

Summing it up, the above facts seem to give an impression as if you are deliberately creating a public image of yourself that would appeal to the people by constant efforts of dropping names of American and British politicians and by claiming curing incurable diseases and making happen medically impossible things, without actually substantiating them. On occasions you have claimed yourself to be related to Mr. Barack Obama and Queen Elizabeth II, because linking these people helps create a positive image in public mind.

The two of us think that society should pursue in a forward rational way rather than being reactionary and superstitious, wherein your claims seem to need detailed explanations and authentication. Thus we two, being responsible citizens of this country request you to kindly respond to this legal notice of ours and to kindly explain facts and provide logical and factual explanations to the above queries within a period of 30 days. If you fail to respond within the specified time period, we would be left with no other option than to move to the honourable court seeking suitable legal redressal.

Regards,

 

Lt No- AT/Kumar/01                                                              (Aditya Thakur) (Tanaya Thakur)

Date-16/1/2013      5/426 Viram Khand, Gomtinagar

Lucknow.  #8115707172

 

 

 
 
      

 

 

 

 

Claims on website of Sri Kumarswami–

HIS HOLINESS BRAHMRISHI SHREE KUMAR SWAMIJI

A Ray of Hope to Millions around the World
An Introduction to His Work and Vision

His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji

is, an internationally acclaimed spiritual power of this century. His message of interfaith harmony is simple, precise and focused on welfare of the whole humanity. He has successfully acquired the ancient secrets and has delivered them in simple practicable form; and their affects can be validated by modern science.

“Gurudev” as His Holiness is popularly called by his followers, has extensively travelled the Globe with a mission to instill the virtues of equality and brotherhood in the people belonging to different religions. Through his conventions in several countries in Asia, North America, Europe, Africa and Middle East, he has spread the message of equality, brotherhood and human welfare amongst people belonging to different religions. His conventions draw people from all walks of life including intellectuals, political leaders, film personalities, bureaucrats, medical practitioners and scientists.

Gurudev makes people aware of the power of Cosmic Grace at his conventions and conveys the attained cosmic wisdom. He has decoded the Ancient Traditional Science Secrets or Beej Mantras from the sorrows and sufferings. More than 500 million people around the world are practicing these Ancient Traditional Science Secrets regularly and have been benefitted by them.

Gurudev has been conferred with Various Awards and Honors Internationally. He has been honored by Government of India, State of Alberta in Canada, State of New York and State of New Jersey in USA, to name a few. He has served as an Advisor to the Ministries of Industry, Labor, Health and Family Planning by the Government of India

The Spiritual Journey of His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji

His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji was born on 22 January, 1954 in a farming family in Karanpur, Rajasthan, India. His spiritual quest started in early teens and carried through his adulthood when he studied and practiced various spiritual streams. At the young age of twelve years, he wanted to rise above the complexities of life as a result his life took the direction of spiritual search. In his quest for search for wisdom he became associated with many spiritual saints in India such as J. Krishnamurti, Osho, Nirankari Baba, Vimla Thakaar, Maa Anandmayi, Shree Omkarnath Thakur, Yogi Swami Ram, Lahari Baba, Harihar Baba, Devaria Baba, Shivpuri Baba, Swami Sahajanand, Taat Baba, Vishwatma Baba, Pathik Ji Maharaj and Kunja Baba.

He acquired deep knowledge in Ayurveda, an ancient science of medicine. Later, he was regarded as one of the best Ayurvedic physicians in the world. Gurudev has been the personal physician to many Presidents, Prime Ministers, State Chief Ministers and Ambassadors of many countries. He has given a new direction to the modern medical science by combining the knowledge with Ancient Traditional Science.

In Gurudev’s words “He has acquired the Ancient Traditional Science Secrets after a long and arduous spiritual journey”.

Ancient Traditional Science Secrets

The Ancient Traditional Science Secrets, according to Gurudev, consist of short and simple “Names of God” in a word. These simple words are combined to create Beej Mantras. Practicing the divine Beej Mantras for a short time every day, frees one from sorrows and problems of mind, body and finance. Gurudev has simplified the practicing of Beej Mantras. He provides the Beej Mantras for free, at the conventions organized in various parts of the world. More than 500 million people around the world are practicing these Beej Mantras regularly and have been benefitted by them.

Essence of All Religions in an Easy and Scientific Format

Ancient Traditional Science Secrets have been derived from the ancient scriptures of all the religions and have been molded into a scientific format; practicing them for a short period, twice a day brings immense positive results in one’s life. One need not follow a specific religious doctrine or philosophy to practice the scientific tools of eternal wisdom.

Science Meets Spirituality

Since the beginning of the nineties, His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji has travelled around India and the world to convey his message. Initially, the scientists and spiritual thinkers were not ready to look at spirituality from a scientific angle. However, Gurudev’s path of presenting a scientific form of spirituality helped eradicate several speculations. Today, more and more people from the science fraternity are eagerly embracing and accepting the tools of Ancient Traditional Science Secrets.

Scientific Tests of the Spiritual Powers of His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji

A multi-step clinical test was conducted on His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji at a research lab in Bangalore, India which is run by Govt. of India’s Ministry of Science and Technology.

In the first step, Gurudev’s physical examination was conducted when he was in a deep meditative state. The medical doctors were astonished to find that while the monitoring instruments indicated normal heartbeat and brain activity; no pulse was detectable. After prolonged analysis the scientists and doctors accepted that his physical body has reached a state which is unexplained by current modern medical science.

In the second step, Gurudev was asked to visually look at other patients at the facility and provide their medical diagnosis without knowing their prior medical history. The patients were brought to him one by one. He would look at the patient for a few seconds and diagnose their medical issues in detail. The doctors were surprised as his diagnosis was absolutely accurate in each case.

An European woman was also examined by Gurudev as part of this exercise. After looking at her, Gurudev told her that she was suffering from a very serious disease which she had not disclosed to the doctors. Although startled, the woman was not ready to accept his statement. Gurudev looked at her with compassion and told her that she had AIDS. Astonished at the revelation, she fell at Gurudev’s feet and accepted that the diagnosis was correct and she had deliberately not disclosed the information to any of the medical doctors at the facility.

There are numerous such examples which illustrate Gurudev’s spiritual powers to diagnose and heal a patient by looking at them.

Live TV Show on BBC and Complete Diagnosis by Looking at a Picture or Listening to the Voice

His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji's endless powers were witnessed by the senior editors and journalists at the London headquarters of BBC. The audience was stunned to see him diagnose people's ailments on the phone during a live TV show. The show stirred a deep interest among medical scientists and they wanted to know about the dimension of science that Gurudev uses to diagnose ailments. TV Asia and MA International have also invited Him for the live shows. Dr. Shah, the director of TV Asia also interviewed him. The print and electronic media of the world is eager to know the Secrets of Ancient Traditional Science. Gurudev is followed by journalists wherever he goes during his world tours.

Ancient Traditional Science Secrets: Cosmic Solution to Physical, Mental & Financial Problems

Gurudev has become a guiding light to the medical world, although his cosmic persona is beyond the reach of science. People are recovering from physical and mental ailments. There are thousands who had reached to the brink of suicide because of depression and hypertension and are now living a happy life with the help of Ancient Traditional Science Secrets. The neurologists and psychiatrists are surprised at the speedy recovery from psychological disorders with the help of such a simple method in patients who had no hope left for any cure. At the Ancient Traditional Science Secret Conventions many such people share their experiences.

The experiences mentioned about the problems etc. relate to the individual concerned. We do not claim having cured anyone. It is all grace of God. Through the recitation of Ancient Traditional science Secrets we easily find solutions to help solve our physical, mental & Financial problems.

The Amazing experiences observed are through the grace, which is contained in the Holy Bible, the Vedas, Sri Gurugranth Sahibji, Qoran-e-Pak, the Dhammapada and the Jinvani.

Medical Bureau for Research on Ancient Traditional Science Secrets

His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji has proposed the formation of a medical research center for study of the Ancient Traditional Science Secrets scientifically. He wants that the results and effects of Ancient Traditional Science Secrets should be scientifically examined so that science can also utilize them to cure the incurable diseases. In doing so, Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham has formed a medical bureau. The international research team consists of the prominent medical scientists and doctors. The Medical Bureau is headed by the former Health Minister of Punjab and a prominent physician, Dr. Baldevraj Chawla M.D.

Dr. Chawla is the Director of the Medical Bureau. Under His guidance a team of doctors has collected case studies, evidences and is preparing a report on the effects of Ancient Traditional Science Secrets. This report will be made public and presented to the world.

The Governments of many states in India have welcomed the formation of the Medical Bureau. In a recent Ancient Traditional Science Secrets convention held in Amritsar, the Chief Minister of Punjab, Sardar Prakash Singh Badal applauded the medical bureau's formation and offered land and other help for the formation and assistance for the same. A well-known international cricketer and current Member of Parliament in India has donated ten million Rupees to the bureau.

Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham

Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham is one of the largest spiritual organization in the world today, functioning on the principles of Ancient Traditional Science Secrets – a dimension unexplored so far. The core mission of the organization is the human welfare at a global level.

Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham has become a ray of hope to millions – bringing health, wealth and happiness to them. Incurable diseases have been cured by the Secrets of Ancient Traditional Science. Those who had lost all hope in life have regained their hope to live. The principles of Ancient Traditional Science Secrets are based on the eternal splendor of the Indian tradition. Hence, the whole world has started looking towards India with a renewed respect and interest. Various sectors of science have also accepted the effectiveness of the Secrets of Ancient Traditional Science. His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji is the inspiration behind establishing Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham. Started as one man's mission, today the organization is spreading globally.

The little seed that Gurudev sowed has transformed into a huge banyan tree; a tree that has become the last resort to millions. Gurudev has dedicated his whole life to nurture the organization Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham.

Ancient Traditional Science Secrets Conventions in India

So far, more than 500 Ancient Traditional Science Secret Conventions have been organized at a very large scale in various states of India such as Punjab, Haryana, Himachal Pradesh, Uttar Pradesh, Uttrakhand, Rajasthan, Maharashtra, Gujarat, Andhra Pradesh, West Bengal and New Delhi. The number of devotees gathered in these conventions to receive the Beej Mantras range from thousands to millions.

The conventions are often attended by the Governors, Chief Ministers, Cabinet Ministers, bureaucrats and technocrats of various states. Intellectuals, artists and medical professionals are among the people from other walks of life who attend the conventions along with thousands of people from all over the world.

These conventions are widely covered by the print media. Live broadcast is also done for the devotees and the general masses those who are unable to attend the convention.

Worldwide Ancient Traditional Science Secrets Conventions

His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji, in his tireless efforts of human welfare and world peace, has traveled across the globe. Among the ever increasing huge numbers of participants in his conventions, the number of medical scientists is increasing significantly as he has shown them a scientific angle of spirituality. Thus, the scientists and medical experts have started believing in the power of Ancient Traditional Science Secrets.

During his travels, Gurudev meets the government officials, elected representatives of various countries along with the experts of the science fraternity to bridge the gap between the spiritual and scientific understanding.

Human Welfare Activities by Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham

Bhagwan Shree Lakshmi Narayan Dham organizes various human welfare activities such as Blood Donation Camps, Free medical check-up camps, Free Charitable Dispensaries, Free distribution of Medicines, Free Distribution of sewing machines etc.

Gurudev has been honored and felicitated by the governments of many countries for his most valuable contributions to human welfare.

Various National / International Honors & Felicitations

The immense efforts of His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji in the direction of human well-being and bringing spirituality closer to science for wider results have been appreciated at the government level internationally.

Gurudev has been a recipient of various Honors & Awards in India. Some of the honors he has received are:

*  Dr. Rajendra Prasad Award

*  Aruna Asaf Ali Award

*  Bhagwan Shree Dhanwantri Award

*  Former President of India, Late Giani Zail Singh felicitated him at Rashtrapati Bhawan in the presence of prominent intelligentsia and    experts from the medical fraternity for his work of spiritual poetry, Maykhana.

*  Former President of India, Dr. APJ Abdul Kalam felicitated him for his work for human welfare.

Other notable honors conferred on Gurudev outside of India:

*  His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji, on his visit to The State of Alberta in Canada in July 2010, was invited by the     Legislative Assembly of Alberta, Canada where he was welcomed and honored by Shri N. Bhardwaj, Chairman of Economic Cell on     behalf of Canada Government by presenting a Certificate of Welcome.

*  In the same month, the Senate and General Assembly, State of New Jersey, America Passed a Resolution unanimously stating His     Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji as highly esteemed spiritual sage.

A New History Written in United States of America on May 2, 2011

His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji Honored by New York State Senate

May 2, 2011 became a golden milestone in the Indian History. It was the day when a new chapter was added to the history in the land of United States of America. For the first time in the history of India, an Indian Saint His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swami Ji, was invited and was honored in the New York State Senate. It is the vast magnitude of his worldwide work for the human welfare that inspired the New York State Senate to felicitate Him by passing a resolution in His honor. His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji also addressed the Senate.

April 29, 2011 Declared as Brahmrishi Shree Kumar Swamiji Day in New York

On April 29, His Holiness Brahmrishi Shree Kumar Swamiji was felicitated with 9 citations in the assembly hall of Nassau County, New York. Many senators, senior judges of the Supreme Court of United States, the Mayor of the County, and state officials were present at the occasion.

New York Assemblyman Tom McKevitt joined Senator Jack Martins in presenting a Senate Proclamation declaring April 29 as ‘Brahmrishi Shri Kumar Swami Day’ in the State of New York, a rare honor conferred only upon highly distinguished and eminent individuals who have contributed something exceptional to the society.

श्री कुमार स्वामी के खिलाफ लखनऊ में तनया और आदित्य ने एफआईआर दर्ज कराया

एलएलबी द्वितीय वर्ष की छात्रा तनया ठाकुर और उनके भाई कक्षा 12 के छात्र आदित्य ने आज ब्रह्मर्षि श्री कुमारस्वामी नामक धर्मगुरु के खिलाफ लखनऊ के गोमती नगर थाने में औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा 7 एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 419 व 420 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया. श्री कुमारस्वामी भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धाम से सम्बन्ध रखते हैं.

एफआईआर के अनुसार श्री कुमारस्वामी ने अपनी वेबसाईटों पर अपने अनुयायियों में इंग्लैंड की महारानी सहित 31करोड से अधिक अनुयायी होने की बात कही थी. उन्होंने न्यू योर्क सीनेट द्वारा उनके नाम पर एक दिन घोषित करने, भारत सरकार के विज्ञानं तथा तकनीकी मंत्रालय द्वारा बंगलोर के एक सरकारी प्रयोगशाला में उन पर अलग से प्रयोग होने, बीबीसी पर उनके चिकित्सकीय प्रतिभा का प्रदर्शन किये जाने, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की कुर्सी बचाने जैसे कई दावे किये हैं.

आदित्य व तनया के अनुसार उन्होंने इन तमाम दावों के असत्य औत भ्रामक प्रतीत होने पर इनकी पुष्टि करने हेतु लीगल नोटिस भेज कर श्री कुमारस्वामी से जवाब मांगे थे परन्तु उनकी की तरफ से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ. इसके साथ ही श्री कुमारस्वामी द्वारा बीजमंत्रों से भक्तों के एड्स, बहरापन, गूंगापन, कैंसर, नशे की लत आदि बीमारियों और कष्टों से मुक्ति दिलाने का दावा किया गया था और इस सम्बन्ध में विज्ञापन प्रकाशित किए गए थे. इस प्रकार के विज्ञापन औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम का उल्लन्घन हैं. पूर्व में इन दोनों छात्रों द्वारा निर्मल बाबा के खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराया गया था.

सरस्वती पुत्र के लिये लक्ष्मी पुत्र बनने की चाह त्यागें : हुसैन

नीमच। पत्रकारिता संघर्ष का रास्ता है, जिसको सरस्वती पुत्र बनना है वह पत्रकार बनता है। इस मार्ग पर लक्ष्मी पुत्र बनने की चाह का त्याग करना पड़ता है। यह संघर्ष का रास्ता है। इस पर चलना कठिन है, जो चलते है वे आगे पहुंच जाते है। उक्त विचार ख्यातिनाम पत्रकार पद्मश्री मुजफर हुसैन ने वीणा गोपाल ट्रस्ट के बैनर पर आयोजित पत्रकारिता सम्मान समारोह में अपने मित्र वरिष्ठ पत्रकार व मीसाबंदी स्व.  गोपाल खण्डेलवाल को श्रद्धा पुष्प अर्पित करते हुए व्यक्त किये।

आपने कहा कि गोपाल खण्डेलवाल मेरे सहपाठी थे, गोपाल मध्यप्रदेश पुलिस में डिवाईएसपी के लिये चयनित हुये किंतु उन्होने उस नौकरी को ठुकराकर पत्रकार व अध्यापक बनना पसंद किया। गोपाल ने कभी समझौता नहीं किया, ईश्वर मुझे भी पत्रकारिता के उस मार्ग पर चलने का साहस देना। पत्रकारिता संवैधानिक नियमों के विपरीत न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिये।

आपने बताया कि 26 मई को पत्रकारिता दिवस आता है 26 मई नारद जयंती होती है। दुनिया के प्रथम पत्रकार नारद मुनि, गणेश और वेदव्यास थे, जिन्होने अपनी विवेकता एवं कुशलता के दम पर अतिथि संवादो का आदन इस प्रकार किया कि आपस में विश्वसनीयता भी बरकरार रही। नारदजी जो बात कहे वह कभी रद नही हो सकता है विष्णु के भक्त नारद थे। एक देवता से दूसरे देवता को नारदजी ने संदेश प्रदान किया। बुद्धि का देने वाला ही नारद कहलाता है नारद का पेन उनकी वीणा थी। कर्नाटक के उत्तर व दक्षिण में नारद के दो मंदिर है। आपने मंच से सांसद रघुनंदन शर्मा व विधायक यशपालसिंह सिसोदिया से कहा कि मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर पर डाक टिकिट जारी करवाने का प्रयास करे।

जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने पत्रकार गोपाल खण्डेलवाल को नमन करते हुए कहा कि एक अच्छी शुरूआत खण्डेलवाल परिवार द्वारा की गई। ऐसे प्रयास आज के युग में कठिन परिश्रम है समाज को आईना दिखाने वाले का सम्मान भी होना चाहिये। खण्डेलवाल परिवार ने पत्रकारो के सम्मान के कार्य की जो शुरूआत की है वह सराहनीय है। आपने कहा कि देश के 80 प्रतिशत लोगो को जीवन का उद्येश्य की जानकारी नही है। हम हर दिन की मुस्कराहट मे ही खुंशी ढूंढे आर्थिक युग में अंधी दौड शुरू हुई आज संयुक्त परिवार से एकल परिवार पर मनुष्य आ रहा है ऐसे अभिनव आयोजन निरंतर आयोजित होते रहे।

मंदसौर विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने कहा कि पत्रकारिता काफी चुनौती पूर्ण कार्य है। अखबार चलाने के लिये काफी श्रम व परिश्रम करना पड़ता है। मालवा में पत्रकारिता अखबार क्रांति के लिये नीमच जिला अग्रणी है । अखबार चलाना कठिन काम है। मन्दसौर भी नीमच का अनुसरण करता है। उन्होंने श्री खण्डेलवाल के बारे में बोलते हुए कहा कि उनके जैसा, सरल, सौम्य, मृदुभाषी व्यक्तित्व उन्होंने कभी नहीं देखा। स्व. गोपाल खण्डेलवाल के निधन से रिक्त स्थान कभी पूरा नही हो सकता हैं। अखबार चलाना कठिन काम है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्य सभा सांसद रघुनंदन शर्मा ने संघ व स्व. गोपाल खण्डेलवाल से जुडे अपने संस्मरणों को उपस्थित श्रोताओं को सुनाते हुए कहा कि लगभग 43 वर्ष पूर्व खण्डेलवालजी ओैर मेरा संपर्क हुआ था। गोपाल और मेरे संबंध काफी लम्बे अरसे से रहे हैं, लेकिन गोपाल ने कभी भी इस रिश्ते का राजनैतिक फायदा उठाने का प्रयास नहीं किया। जब भी मै नीमच आता हूं उनके प्रेम का अभाव लगता है, उनकी कमी को दूर करने का प्रयास उनके दोनो सुपुत्र वरूण व विवेक करेंगे। मैं सदैव उनके परिवार के साथ खड़ा हूं। उनके परिवार द्वारा उनकी स्मृति में किये जा रहे इस नैक कार्य की ख्याति पूरे प्रदेश तक फेले यह मेरी शुभकामना है।

तेजी से पकने लगी तीसरे मोर्चे की ‘खिचड़ी’

भाजपा में नरेंद्र मोदी का राजनीतिक कद बढ़ते ही, एनडीए में दरार का संकट और गहरा गया है। भाजपा और जदयू का गठबंधन खतरे में फंस गया है। जो तैयारियां हैं, उनको देखते हुए आसार यही हैं कि अगले 36 घंटों में जदयू, भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए से कुट्टी करने का फैसला ले लेगा। मोदी प्रकरण की आंच से जदयू नेतृत्व के तेवर काफी गर्म हो गए हैं। ऐसे में जदयू सुप्रीमो शरद यादव ने नया राजनीतिक विकल्प तलाशने की बात स्वीकार की है।

तीसरे मोर्चे का तानाबाना बुनने के लिए पहले से ही कुछ कोशिशें होती रही हैं। ये कोशिशें कोई ठोस आकार नहीं ले पा रही थीं। लेकिन ‘मोदी फैक्टर’ के चलते नए सिरे से राजनीतिक जोड़तोड़ के समीकरण बनाए जाने लगे हैं। शुरुआती दौर में जदयू, तृणमूल कांग्रेस और बीजद के बीच तालमेल बनाने की पहल शुरू हो गई है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों भाजपा की गोवा कार्यकारिणी बैठक में मोदी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बना दिया गया था। इसी के बाद एनडीए के अंदर राजनीतिक उठापटक तेज हुई। खासतौर पर जदयू नेतृत्व बेचैन हो गया है। वह किसी कीमत पर मोदी को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जबकि भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अगला लोकसभा चुनाव मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। यह अलग बात है कि पार्टी ने औपचारिक तौर पर मोदी को पीएम ‘चेहरा’ घोषित नहीं किया। लेकिन महज इस ‘बहाने’ से ही जदयू नेतृत्व को फुसलाना मुश्किल हो गया है। यह अलग बात है कि शुरुआती दौर में शरद यादव के तेवर ज्यादा विद्रोही नहीं थे। वे यही कहते नजर आ रहे थे कि मोदी का ‘प्रमोशन’ भाजपा का अंदरूनी मामला है। जब उन्हें पीएम उम्मीदवार बनाया जाएगा, तब हम गठबंधन में रहने या बाहर जाने पर विचार करेंगे।

लेकिन जदयू में भी मोदी प्रकरण को लेकर अंदरूनी खींचतान बढ़ने की खबर है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का खेमा अब मोदी प्रकरण पर भाजपा नेतृत्व को कोई रियायत नहीं देना चाहता। नीतीश ने भी भाजपा से गठबंधन तोड़ने का मन बना लिया है। पार्टी के  महासचिव शिवानंद तिवारी कहते हैं कि जिस तरह से मोदी को महिमामंडित किया गया है, ऐसे में भाजपा की नीयत साफ हो गई है। इस मामले में संघ नेतृत्व के दबाव में भाजपा ने समर्पण कर दिया है। यहां तक की इन लोगों ने अपने वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के विरोध को भी कुचल डाला। ऐसे में अब समय आ गया है कि जदयू नेतृत्व दो टूक फैसला ले ले। शिवानंद कहते हैं कि सेक्यूलर राजनीतिक सिद्धांत पर वे लोग कोई समझौता नहीं कर सकते। देश हित में यही है कि विपक्ष के सेक्यूलर दल हाथ मिलाकर देश को नया राजनीतिक विकल्प दें।

जदयू के कई नेताओं ने मोदी के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। शिवानंद तिवारी ने मोदी पर तीखा कटाक्ष किया है। कह दिया है कि मोदी इन दिनों लौह पुरुष सरदार पटेल की बहुत बात करते हैं। यदि 2002 में सरदार पटेल जिंदा होते, तो गुजरात के दंगों में मोदी का ‘कारनामा’ देखकर अवाक रह जाते। वे अगले ही क्षण कान पकड़कर मोदी को मुख्यमंत्री की गद्दी से उतार देते। बिहार जदयू के वरिष्ठ नेता एवं नीतीश सरकार ने कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह ने तो मोदी के खिलाफ ‘वाणी युद्ध’ ही शुरू कर दिया। वे यहां तक बोल गए कि अब भाजपा की कमान एक दंगाई दागी के हाथ में आ गई है। दंगाई शख्स हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक में सैद्धांतिक तौर पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने का फैसला हो चुका है। बस, औपचारिक ऐलान होना ही बाकी रह गया है।

अपने सिपहसालारों की इस तीखी बयानबाजी से शरद यादव कुछ दुखी नजर आए। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि बयानबाजी में ना जाइए। हम लोग एक दो दिन में बैठक करके फैसला ले लेंगे। इतना जरूर है कि मोदी प्रकरण मेंं जदयू के विश्वास को तोड़ने की कोशिश हुई है। जिस तरह से मोदी को आगे बढाया जा रहा है, वह अब भाजपा का अंदरूनी मामला ही नहीं रहा। जदयू के इन निर्णायक तेवरों को देखकर भाजपा के रणनीतिकारों ने बीच बचाव की कोशिशें तेज कर दी हैं। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने   कल यहां शरद यादव से मुलाकात की। जबकि राजनाथ सिंह, आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी ने नीतीश से फोन पर बात की। भाजपा के इन दिग्गजों ने जदयू नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वे जल्दबाजी में गठबंधन तोड़ने का फैसला न करें। क्योंकि इससे कहीं न कहीं कांग्रेस का राजनीतिक फायदा हो सकता है।

नीतीश कुमार ने यही कहा है कि मोदी प्रकरण पर स्थिति गंभीर है। जब तक भाजपा नेतृत्व यह घोषणा नहीं करता कि वह मोदी को किसी भी हालत में पीएम चेहरा नहीं बनाएगा, तब तक बात नहीं बन सकती। भाजपा वाले ऐसा आश्वासन देने की स्थिति में अभी नहीं हैं। जदयू सूत्रों के अनुसार नए राजनीतिक विकल्प के लिए पार्टी ने अपनी पहल तेज कर दी है। शरद यादव ने अपने दूत के रूप में पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी को कोलकाता भेजा था। बुधवार को त्यागी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता ने पहले ही सेक्यूलर दलों को तीसरे मोर्चे की तैयारी के लिए ‘न्यौता’ दिया है। उन्होंने साझा ‘फेडरल फ्रंट’ बनाने की बात की है।

इस संदर्भ में ममता की बात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से हो चुकी है। नवीन और नीतीश दोनों ने साझा मोर्चा के लिए सकारात्मक रुख अपनाया है। इसी बात को आगे बढ़ाने के लिए जदयू ने केसी त्यागी को खास जिम्मेदारी दी है। त्यागी का कहना है कि समय की मांग है कि भाजपा और कांग्रेस से अलग एक राजनीतिक विकल्प देश को मिले। क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने नौ सालों में देश को तमाम तरह के संकटों में डाला है। जबकि भाजपा नेतृत्व एक बार फिर सांप्रदायिक राजनीति के प्रयोग पर आमादा दिखाई पड़ता है।

नवीन पटनायक ने ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए राजनीतिक मुहिम शुरू की है। इसी सिलसिले में उन्होंने दिल्ली में बुधवार को एक बड़ी रैली की थी। जदयू और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने इस मुद्दे पर नवीन को अपना सैद्धांतिक समर्थन भी दिया। तीन दलों की इस नई पहल को देखते हुए कई और राजनीतिक क्षत्रपों ने इसमें अपनी दिलचस्पी जता दी है। खासतौर पर टीडीपी के प्रमुख चंद्र बाबू नायडू ने कह दिया है कि वे तीसरे मोर्चे के हिमायती हैं। वे कोशिश कर रहे हैं कि सभी प्रमुख विपक्षी सेक्यूलर दल नया विकल्प देने के लिए एकजुट हों। ममता ने कह दिया है कि नवीन और नीतीश से बात करके, बात और आगे बढ़ाई जाएगी। ‘झारखंड विकास मोर्चा’ के नेता बाबू लाल मरांडी भी ‘फेडरल फ्रंट’ के हिमायती हो गए हैं। उन्होंने ममता बनर्जी से मुलाकात कर ली है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस से चोट खाने के बाद मरांडी अपने लिए नया राजनीतिक गठबंधन तलाश रहे हैं।

बिहार में भाजपा और जदयू की साझा सरकार है। यहां पर विधानसभा की 243 सीटे हैं। जदयू के पास 118 सीटे हैं, जबकि बहुमत के लिए 122 विधायकों की दरकार है। चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन की जुगाड़ जदयू ने कर ली है। ऐसे में भाजपा के बगैर नीतीश सरकार बरकरार रह सकती है। समझा जाता है कि यह सब राजनीतिक प्रबंधन, गठबंधन से बाहर जाने की कवायद का हिस्सा है। भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना ने मोदी के मुद्दे पर नीतीश के रवैए से नाराजगी जाहिर की है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा गया कि नीतीश, भाजपा की बदौलत ही मुख्यमंत्री बने बैठे हैं। यदि उन्होंने भाजपा से 18 साल पुराना गठबंधन तोड़ा, तो यह फैसला उन्हें बहुत महंगा पड़ेगा। वे यह न भूलें कि बगैर भाजपा के वे सत्ता का मुंह नहीं देख पाएंगे। शिवसेना और कई संघ परिवारियों के कटाक्षों ने दोनों दलों के बीच रार और बढ़ा दी है। दोनों दलों के बीच राजनीतिक तलवारें उठ गई हैं। अब इनका म्यान में वापस जाना मुश्किल हो गया है। सो, तीसरे विकल्प की खिचड़ी भी एक खास रणनीति के तहत पकाई जाने लगी है।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengarnoida@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

4रीयल न्यूज में यश मेहता साइडलाइन, बीरेंद्र को कमान

'4रीयल न्यूज' से एक बड़ी सूचना आ रही है कि यहां अब तक सर्वेसर्वा के रूप में काम देख रहे यश मेहता को साइडलाइन कर दिया गया है. उनकी केबिन में बीरेंद्र बैठ रहे हैं जो चैनल के डायरेक्टरों में से एक हैं. 4रीयल न्यूज चैनल डेरा सच्चा सौदा से संबद्ध है और डेरा सच्चा सौदा की तरफ से ही यश मेहता, बीरेंद्र आदि को चैनल का कामधाम देखने के लिए नोएडा बिठाया गया है.

चैनल के अंदर कई तरह के उठापटक, आरोप-प्रत्यारोप आदि को लेकर डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन ने चैनल का कामधाम देखने के लिए अब बीरेंद्र को कह दिया है. यश मेहता भी चैनल में बने रहेंगे लेकिन अब चैनल की कमान बीरेंद्र के हाथों में होगी. सूत्रों के मुताबिक इस बड़े बदलाव के बाद चैनल में काफी कुछ फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है.

 

शाश्वत चिंतन :: इस ‘रेवड़’ के लिए ‘सुरक्षित चरागाहें’ कहां हैं?

जहाँ तक मुझे याद पड़ रहा है करीब दो दशक हुये देश के नीति निर्माताओं ने प्रचार शुरू किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐसा उफान आने वाला है जो न भूतो न भविष्यत होगा। उस समय बहती गंगा में हाथ वही धो पायेंगे, जिनके पास उन अवसरों को लपकने लायक डिग्रियाँ होंगी। तरह-तरह के लेख और प्रचार सामग्री इस बाबत अखबारों और बाकी मीडिया में आने लगीं जिससे ऐसा माहौल बना मानो, भारतीय अर्थव्यवस्था में तमाम ऐसे नये क्षेत्र खुलने ही वाले हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ खपेंगे।

ये नये क्षेत्र उन परंपरागत क्षेत्रों के अलावा होने थे, जिनमें आमतौर पर छात्र जाया करते हैं मसलन डाक्टर, इंजीनियर, वकील, या दीगर सरकारी नौकरियाँ। यह तय है और इसे अन्यथा लेने की जरूरत नहीं है कि करीब दो दशक पहले तक लोगों की पहली पसंद सरकारी क्षेत्र के रोजगार होते थे, निजी क्षेत्र का नंबर उसके बाद था। प्राइवेट नौकरियाँ दोयम दर्जे की और असुरक्षित मानी जाती थीं।

हाल ही में थोड़े समय के लिये प्राइवेट नौकरियों पर बहार आई थी। लेकिन मंदी में इनका हाल देखने के बाद अब फिर से इन्हें दोयम दर्जे का ही माना जाने लगा है। लेकिन उदार अर्थव्यवस्था के उस शुरूआती दौर में जो माहौल बनाया गया उसमें यह भी प्रचार किया गया कि आर्थिक उदारीकरण के दौर में ज्यादा रोजगार निजी क्षेत्र में होंगे न कि सरकारी क्षेत्र में। अभी माता-पिता और  विद्यार्थी इस शोर को समझ पाते कि धड़ाधड़ डिग्रियां बांटने वाले निजी संस्थान खुलने लगे। मजे की बात कि जहां एक सरकारी संस्थान या कालेज को विकसित होने में दशकों लग जाते हैं, वहाँ ये निजी संस्थान रातों रात विकसित हो गये।

सरकारी कालेजों और विश्वविद्यालयों में योग्य फैकल्टी नहीं मिलने का रोना बरसों से रोया जा रहा है, वहीं इन निजी संस्थानों को रातों रात योग्य फैकल्टी भी मिल गई और जब अर्थव्यवस्था ही उदार हो गई तो फिर मानव संसाधन विकास मंत्रालय क्यों नहीं उदार होता। उसने भी संस्थान खोलने के लाइसेंस उदारता से बांट डाले। इतना हुआ तो भी गनीमत थी, बहती गंगा में हाथ सरकारी संस्थाओं ने भी धोने शुरू कर दिये। तमाम डिग्री कालेजों और युनिवर्सिटीज में इस शोर-शराबे के साथ रोजगार मूलक कोर्सेज शुरू कर दिये गये कि चट डिग्री लीजिये और पट नौकरी (रोजगार) पाइये।

गौर कीजिये, जिस समय ये हल्ला मचना शुरू हुआ उस समय भारतीय समाज में दो-तीन परिवर्तन उल्लेखनीय थे, पहला सूचना क्रांति और उससे पैदा हुए रोजगारों का फायदा एक छोटे से तबके को हुआ था। दूसरा आबादी में एक ऐसा तबका तैयार हो गया था जो धनी तो बन गया था लेकिन परंपरागत और पुश्तैनी रूप से शिक्षित नहीं था। तीसरा निजी क्षेत्र और खास तौर से भारतीय परिपेक्ष्य में निजी क्षेत्र कितना असुरक्षित और बेईमान हो सकता है, इसका व्यापक अनुभव अभी लोगों को मिलना बाकी था, जो कालांतर  में हाल ही में आयी मंदी के दौरान मिला। उस समय तो यही शोर था कि अब जो कुछ करेगा, निजी क्षेत्र ही करेगा, सरकारी संस्थाओं और नौकरियों के दिन अब गिने-चुने ही ठहरे। देखिये सूचना उद्योग ने कैसी छलांग लगाई है।

सयाने और पुराने लोग अगर स्मृति पर जोर डाले तो उन्हे याद आयेगा कि उस समय जिले-जिले में आई0टी0 हब बनाने की योजनाओं का ढिंढोरा था और हैदराबाद को साइबराबाद बनाने वाले आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंदबाबू नायडू राष्ट्रीय नायक थे। एक उल्लेखनीय बात और थी डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वकील सरीखे जो परपरांगत पेशे थे उन पेशो मे लगे लोगो की चकाचौंध देखकर बड़ी संख्या में लोग उन्ही पेशों मे ही जाना चाहते थे, लेकिन सरकारी संस्थाओ में सीटे सीमित थीं और अभी भी हैं। इधर नये-नये खुले निजी शिक्षण संस्थानो ने सपने दिखाये कि हमारे यहाँ आइये और मन चाही डिग्रियाँ लीजिए इसके लिए मेरिट और प्रवेश परीक्षा का कोई झंझट नही है।

तो साहब इस चहुँ ओर हल्ले या कह लीजिये हाँके से दिग्भ्रमित होकर आम जन रूपी रेवड़ (जानवरों का झुण्ड) निजी शैक्षणिक संस्थान रूपी शिकार गाहों में घुस गया और उसे डिग्रियाँ भी मिल गई। यह अलग बात है कि शिकारियों ने एक-एक डिग्री का मूल्य दस से पंद्रह लाख रूपये वसूला। डिग्रियाँ पाने के बाद जब यह रेवड़ सुरक्षित चारागाहों (मोटी पगार की नौकरियाँ) की तलाश में निकला तो देखा कि वहाँ सन्नाटा था। दिग्भ्रमित करने के लिये किये गये हल्ले के विपरीत वास्तविकता यह थी कि नौकरियाँ सीमित संख्या में ही थी और वो भी असुरक्षित। कई जगह तो नियोक्ताओं ने छात्रों को यह भी बताया कि आपकी डिग्री का कोई मोल ही नहीं है। नौकरी तो नहीं मिलेगी, हाँ अगर वे चाहें तो उपभोक्ता अदालत में जाकर डिग्री देने वाली संस्था से जुर्माना और क्षतिपूर्ति अलबत्ता वसूल सकते हैं।

इस पूरे माहौल से फिलहाल कैसी अफरा-तफरी मची है, उसके उदाहरण तो तमाम है, लेकिन अंदाजा लगाने के लिये दो ही पर्याप्त होगें। एक बड़े अखबार में सर्वे के हवाले से बताया गया कि अकेले उत्तर प्रदेश में पाँच लाख इंजीनियर बेरोजगार है। अब प्रदेश में इंजीनयरिंग, एम0बी0ए0 और दूसरे रोजगार परक पाठ्य क्रमों की लगभग दो तिहाई सीटें खाली रहती है। वहाँ एडमिशन के लिये छात्रों से गुहार लगाई जा रही है। महौल को भाँप कर और उससे घबराकर अब कई विश्वविद्यालयो ने अपने यहाँ के रोजगार मूलक पाठ्य क्रमों को बंद कर दिया है और प्राप्त सूचना के मुताबिक देश भर के चौंसठ निजी शैक्षणिक संस्थानों ने सरकार को आवेदन दिया है कि वे अपने यहाँ अब एम0बी0ए0 कोर्स नही चलाना चाहते , इन्हे बंद करने की इजाजत दी जाये।

इन सबसे ऊपर कोढ़ मंे खाज तब हुई जब तीन-चार साल पहले आई वैश्विक मंदी की आंधी में भारत में भी वे नौकरियाँ सबसे पहले धराशाही हुई, जो इन रोजगार परक पाठ्यक्रमों की बदौलत मिली थीं और जिनके बारे में प्रचार था कि उदार अर्थव्यवस्था के दौर में ये सुरक्षित और चमकदार भविष्य की गारंटी है।

इस पूरे परिप्रेक्ष्य में सबसे मार्मिक पहलू यह है कि लोगों ने अभी भी कोई सबक नहीं सीखा है। जहाँ देखो 'एजूकेशनल हब'

अनेहस शाश्वत
अनेहस शाश्वत
खोलने और विकसित होने की चर्चा और विज्ञापन चहुँओर है, लेकिन इस एजूकेशन हब से निकलने वाले के लिये सुरक्षित चारागाह देश में कहां हैं, यह विज्ञापन कहीं नहीं दिखाई देते। क्या इससे यह नतीजा निकालना अनुचित होगा कि अभी भी देश के नीति नियन्ता आमजन को रेवड़ समझ कर हांकते हैं या फिर नीतियाँ बना कर उनका शोर मचानें में उनके निहित स्वार्थ हैं, मसलन रातों-रात खडे़ होने वाले ये निजी संस्थान ब्लैक मनी से बनाये गये है, अब यह बात जगजाहिर है।

लेखक अनेहस शाश्वत वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान समेत कई अखबारों में वरिष्ठ पदों पर विभिन्न शहरों में सेवारत रहे.  सक्रिय पत्रकारिता से संन्यास लेकर शाश्वत अब धर्म, अध्यात्म और समाज सुधार के क्षेत्र में सक्रिय हो चुके हैं.

कांग्रेस नेता और उसके भाई ने पत्रकार को धमकाया

: विक्रम आंजना के खिलाफ थाने में दिए आवेदन वापस लेने के लिए बनाया दबाव, बोले दोनों भाई- तेरी हत्या करवा देंगे : पत्रकार मूलचंद खींची ने कैंट थाने में दर्ज कराई शिकायत :  नीमच । कांग्रेस नेता राजकुमार अहीर और उसके भाई दिनेश अहीर द्वारा पत्रकार मूलचंद खींची को धमकाने का मामला सामने आया है। राजस्थान छोटीसादगड़ी के विधायक उदयलाल आंजना के भानजे विक्रम आंजना के खिलाफ कैट थाने में पत्रकार खींची ने शिकायत दर्ज करवाई थी, उसी शिकायत को वापस लेने के लिए पत्रकार पर दबाव बनाया और हत्या करवाने की धमकी दी।

शनि मंदिर के पास रोटरी क्लब भवन में रोटरी पदाधिकारियों को 12 जून को रात करीब 11 बजे कार्यक्रम चल रहा था, उसी दौरान पत्रकार मूलचंद खींची के पास राजकुमार अहीर और उसके भाई भू माफिया दिनेश अहीर पहुंचा। पत्रकार ने दर्ज कराई शिकायत में उल्लेख किया गया कि भू माफिया दिनेश अहीर और उसका भाई राजकुमार अहीर ने गंदी-गंदी गालियां दी और बोले कि तेने विक्रम आंजना के खिलाफ 3 जनवरी 2013 को आवेदन क्यों दिया। वो हमारा आका है और हम नीमच के डॉन है। मैने ही चंद्रकला बैरागी को स्कीम नंबर 34 में एक मकान में मरवाया था और उसकी मां माधुरी अभी तक गायब कर रखी है। मैने ही टीआई एसएस उदावत को एक लाख तोड़बटटे के लिए दिए थे वो केस अभी तक अनसुलझा है।

दोनों भाई बोले कि तुझे जान से मरवा सकते है, हत्या करवा सकते है, अफीम के झूठे केस में फंसवा सकते है, तेरे परिजनों का अपहरण कर सकते है। क्योंकि तेने विक्रम आंजना से पंगा ले रखा हैं। शिकायत वापस ले, नहीं तो तेरे साथ कुछ भी कर सकते है, क्योंकि विक्रम आंजना हमारा चुनावी खर्च उठाता है और मदद करता है। उसके खिलाफ जाने वाले व्यक्ति को हम किसी भी हाल में छोड़ते नहीं है। रोटरी क्लब के कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पत्रकार को बचाया। गुरुवार को नीमच कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। टीआई एसआर पाटीदार का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी। अगर ऐसी बात है तो कठोर कार्रवाई होगी।

 
 

आज़म खान बॉस्टन बदसलूकी- यूएस सरकार अन्यमनस्क

जहाँ वाशिंगटन स्थित भारतीय उच्चायोग और न्यू योर्क स्थित महावाणिज्य दूतावास ने उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री आज़म खान के 24 अप्रैल 2013 को लोगन अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा, बोस्टन पर अमेरिकी कस्टम एवं बोर्डर प्रोटेक्शन बल के अधिकारियों द्वारा बदसलूकी के मामले को बहुत तत्परता के साथ अमेरिकी विदेश विभाग के सामने उठाया था, वहीँ अमेरिकी अधिकारी इस मामले में कोई विशेष सरोकार दिखाते नहीं नज़र आ रहे हैं.

ये तथ्य लखनऊ स्थित आरटीआई कार्यकर्ता नूतन ठाकुर को वाशिंगटन स्थित भारतीय उच्चायोग के प्रेस, सूचना और संस्कृति काउंसेलर एम श्रीधरन द्वारा भेजे गए उत्तर से सामने आये हैं. आरटीआई सूचना के अनुसार, भारतीय उच्चायोग ने अमेरिकी विदेश विभाग में प्रमुख उप सहायक सचिव ज्यॉफ प्याट और महावाणिज्य दूतावास ने विदेश मिशन कार्यालय में क्षेत्रीय निदेशक थोमस गैलो को 25 अप्रैल  को ही इस सम्बन्ध में पत्र प्रेषित किया था.

इन दोनों पत्रों में इस घटना पर गंभीर आपत्ति और खेद व्यक्त किया गया था और यह निवेदन किया गया था कि वे इस सम्बन्ध में हस्तक्षेप कर ऐसे आवश्यक उपाय सुनिश्चित करे जिससे इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृति नहीं हो सके, पर आरटीआई उत्तर के अनुसार “अभी तक अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा इस सम्बन्ध में कोई प्रतिक्रिया तक नहीं मिली है.”

पत्रकार ने बनारस के एसएसपी के खिलाफ प्रेस काउंसिल चेयरमैन और यूपी के डीजीपी को पत्र लिखा

सेवा में, माननीय मारकंडेय काटजू, अध्यक्ष, भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली , विषय –  वाराणसी के एसएसपी अजय मिश्र द्वारा विद्वेषपूर्ण ढंग से पत्रकारों पर दर्ज किये  गए मुकदमे की विवेचना गैर जनपद अथवा स्वतंत्र जाँच एजेंसी से कराने तथा दोषी पुलिस कर्मियो के विरुद्ध आवश्यक क़ानूनी कार्यवाही करने के सम्बन्ध में, महोदय, प्रार्थी राम सुंदर मिश्र पुत्र श्री ज्ञान दत्त मिश्र निवासी बी 2/245 A भदैनी, थाना भेलूपुर,जनपद वाराणसी का रहने वाला है तथा पेशे से पिछले 14 वर्षो से पत्रकारिता कर रहा है। जी टीवी, एस टीवी, हमार टीवी, ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड में कार्य करने के उपरांत वर्त्तमान में न्यूज़ स्ट्रीट ब्राडकास्ट प्राईवेट लिमिटेड में स्ट्रिंगर रिपोर्टर है। प्रार्थी आपसे निम्न निवेदन कर रहा है-

1. यह कि समाचार प्लस, सहारा समय उत्तर प्रदेश ,ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश /उत्तराखंड आदि  चैनलो द्वारा दिनांक 23.06.2013 को " मणिकर्णिका घाट लाशो पर सट्टा " करके समाचार प्रसारित किया गया जिसमे दो लोगो को घाट पर प्रति घंटा शवों की आमद के हिसाब से रुपयों की जीत हार करते दिखाया गया।

2. यह कि उपरोक्त समाचार को समाचार प्लस , सहारा समय उत्तर प्रदेश ,ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश /उत्तराखंड ने प्रमुखता से स्थान देते आम लोगो के साथ प्रशासनिक अमले के विचार को प्रसारित किया ।

3. यह कि उपरोक्त समाचार को दिनांक 23.05.2013 समय लगभग 11  से 12 बजे दोपहर में प्रसारित करते हुए सहारा समय उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड  के ब्यूरो निमेश राय ने आम आदमी के साथ वाराणसी के एसएसपी अजय मिश्र को फ़ोन लाइन  पर जोड़ते हुए सीधा संवाद जनता और रिपोर्टर से स्थापित करते हुए प्रसारित किया |सीधे जुडी जनता ने एसएसपी से कई सवाल पूछते हुए वाराणसी पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किये ।

4. यह कि जनता और संबाददाता द्वारा कटघरे में खड़े एसएसपी अजय मिश्र पत्रकारों से इतने नाराज हुए  कि उन्होंने आनन् फानन में थाना चौक में अपराध संख्या 84/13 धारा  13 जुआ अधिनियम में दो अज्ञात ब्यक्तियो के खिलाफ दर्ज कर प्रसारित करने वाले सभी चैनलों को 160 सीआरपीसी की नोटिस देकर थाना चौक में पत्रकारों से पूछताछ की गयी ।पत्रकारों ने पुलिस के पूछताछ में पूर्ण सहयोग किया।

5. यह कि पूछताछ के बाद एसएसपी अजय मिश्र ने पूरा मामला पत्रकारों पर मोड़ते हुए उपरोक्त मुकदमे में से धारा 13 जुआ अधिनियम से बढाकर आईपीसी की 420,467,468,177,295A,298 जैसी गंभीर धाराओ में न्यूज़ नेशन के स्ट्रिंगर रिपोर्टर काशीनाथ शुक्ल व उसके कैमरामैन आसिफ को मुल्जिम बनाते हुए आसिफ को तीन  दिन तक थाने बैठाकर प्रताड़ित करते रहे और आखिर कर जेल भेज दिया ।

6. यह कि न्यूज़ नेशन के स्ट्रिंगर रिपोर्टर काशी नाथ शुक्ल को पकड़ने के लिए पुलिस काशीनाथ शुक्ल के धर दविश देने लगी ,यही  नहीं परिजनों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस काशी नाथ शुक्ल की माँ ,बहन और गर्भवती पत्नी के साथ मारपीट ,गाली गलौज तथा बदसलूकी भी की।

7. यह कि वाराणसी पुलिस द्वारा  काशीनाथ शुक्ल के परिजनों के उत्पीडन की शिकायत प्रार्थी ने राष्ट्रीय महिला आयोग तथा उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ,एडीजी ला आर्डर तथा पुलिस महानिरीक्षक वाराणसी जोन को ई मेल द्वारा की । इसके उपरांत पुलिस ने काशीनाथ शुक्ल के  परिजनों का उत्पीडन बंद किया ।

9. यह कि इस  मामले को संज्ञान में लेते हुए लखनऊ की सामाजिक सामाजिक कार्यकर्ती नूतन ठाकुर जी ने अजय मिश्र द्वारा पद कर दुरुपयोग करते हुए पत्रकारों के ऊपर दर्ज मुकदमो की प्रेस कौंसिल में अपना लिखित शिकायत दर्ज कराई .

10. यह कि एसएसपी अजय मिश्र द्वारा पत्रकारों के ऊपर किये जा रहे उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का विरोध प्रार्थी द्वारा क़ानूनी और लोकतांत्रिक ढंग से किया जा रहा है । जिससे  नाराज एसएसपी अजय मिश्र प्रार्थी का तरह तरह से उत्पीडन कर रहे है।

11. यह कि इसका प्रमाण  सामने आया जब थाना चौक प्रभारी वाईपी शुक्ल द्वारा प्रार्थी को 160 सीआरपीसी की नोटिस दिनांक 10.06.2013 जारी किया गया । जबकि इस पुरे प्रकरण में (समाचार से सम्बंधित से) प्रार्थी को न तो कोई जानकारी थी और ना ही प्रार्थी के चैनल द्वारा प्रसारित हुआ है ।

12. यह कि  उपरोक्त तथ्यों से स्वयं स्पष्ट है कि  एसएसपी अजय मिश्र बदले की भावना से ग्रसित  हो वाराणसी के पत्रकारों का उत्पीडन कर रहे है और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए  पत्रकारों पर फर्जी फर्जी मुकदमे दर्ज कर रहे है ।

13. यह कि ऐसे एसएसपी अजय मिश्र द्वारा बदले की भावना में पत्रकारों के ऊपर दर्ज कराये गए मुक़दमा अपराध संख्या 84/2013 धारा 420,467,468,177,295A,298 आईपीसी थाना चौक जनपद – वाराणसी की विवेचना में निष्पक्षपूर्ण  होना सम्भव नहीं है ।

प्रार्थना

अतः श्रीमान जी से अनुरोध है कि समाचार प्रदर्शित होने से नाराज एसएसपी अजय मिश्र द्वारा विद्वेषपूर्ण कार्यवाही करते हुए  थाना – चौक जनपद – वाराणसी में दर्ज मुक़दमा अपराध संख्या 84/2013 धारा  420,467,468,177,295A,298 आईपीसी की विवेचना गैर जनपद की पुलिस अथवा अन्य स्वतंत्र जाँच एजेंसी से कराते हुए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ आवश्यक क़ानूनी कार्यवाही करने की कृपा करे  ताकि निष्पक्षपूर्ण विवेचना हो एवं पत्रकारों के जान माल की सुरक्षा हो सके  ।

प्रार्थी
राम सुंदर मिश्र
संवाददाता  
न्यूज़ स्ट्रीट
9336933552,9918701615

सेवा में
              
पुलिस महानिदेशक
उत्तर प्रदेश , लखनऊ

विषय-  वाराणसी के एसएसपी अजय मिश्र द्वारा विद्वेषपूर्ण ढंग से पत्रकारों पर दर्ज किये  गए मुकदमे की विवेचना गैर जनपद अथवा स्वतंत्र जाँच एजेंसी से कराने के सम्बन्ध में

महोदय,

प्रार्थी  राम सुंदर मिश्र  पुत्र श्री ज्ञान दत्त मिश्र निवासी बी 2/245 A भदैनी , थाना भेलूपुर,जनपद वाराणसी का रहने वाला है  तथा पेशे से पिछले 14 वर्षो से पत्रकारिता कर रहा है। जी टीवी, एस टीवी ,हमार टीवी ,ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड में कार्य करने के उपरांत वर्त्तमान में न्यूज़ स्ट्रीट ब्राडकास्ट प्राईवेट लिमिटेड में स्ट्रिंगर रिपोर्टर है । प्रार्थी आपसे निम्न निवेदन कर रहा है-

1.  यह कि समाचार प्लस , सहारा समय उत्तर प्रदेश ,ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश /उत्तराखंड आदि  चैनलो द्वारा दिनांक 23.06.2013 को " मणिकर्णिका घाट लाशो पर सट्टा " करके समाचार प्रसारित किया गया जिसमे दो लोगो को घाट पर प्रति घंटा शवों की आमद के हिसाब से रुपयों की जीत हार करते दिखाया गया।

2.  यह कि उपरोक्त समाचार को समाचार प्लस , सहारा समय उत्तर प्रदेश ,ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश /उत्तराखंड ने प्रमुखता से स्थान देते आम लोगो के साथ प्रशासनिक अमले के विचार को प्रसारित किया ।

3. यह कि उपरोक्त समाचार को दिनांक 23.05.2013 समय लगभग 11  से 12 बजे दोपहर में प्रसारित करते हुए सहारा समय उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड  के ब्यूरो निमेश राय ने आम आदमी के साथ वाराणसी के एसएसपी अजय मिश्र को फ़ोन लाइन  पर जोड़ते हुए सीधा संवाद जनता और रिपोर्टर से स्थापित करते हुए प्रसारित किया |सीधे जुडी जनता ने एसएसपी से कई सवाल पूछते हुए वाराणसी पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किये ।

4. यह कि जनता और संबाददाता द्वारा कटघरे में खड़े एसएसपी अजय मिश्र पत्रकारों से इतने नाराज हुए  कि उन्होंने आनन् फानन में थाना चौक में अपराध संख्या 84/13 धारा  13 जुआ अधिनियम में दो अज्ञात ब्यक्तियो के खिलाफ दर्ज कर प्रसारित करने वाले सभी चैनलों को 160 सीआरपीसी की नोटिस देकर थाना चौक में पत्रकारों से पूछताछ की गयी ।पत्रकारों ने पुलिस के पूछताछ में पूर्ण सहयोग किया।

5. यह कि पूछताछ के बाद एसएसपी अजय मिश्र ने पूरा मामला पत्रकारों पर मोड़ते हुए उपरोक्त मुकदमे में से धारा 13 जुआ अधिनियम से बढाकर आईपीसी की 420,467,468,177,295A,298 जैसी गंभीर धाराओ में न्यूज़ नेशन के स्ट्रिंगर रिपोर्टर काशीनाथ शुक्ल व उसके कैमरामैन आसिफ को मुल्जिम बनाते हुए आसिफ को तीन  दिन तक थाने बैठाकर प्रताड़ित करते रहे और आखिर कर जेल भेज दिया ।

6. यह कि न्यूज़ नेशन के स्ट्रिंगर रिपोर्टर काशी नाथ शुक्ल को पकड़ने के लिए पुलिस काशीनाथ शुक्ल के धर दविश देने लगी ,यही  नहीं परिजनों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस काशी नाथ शुक्ल की माँ ,बहन और गर्भवती पत्नी के साथ मारपीट ,गाली गलौज तथा बदसलूकी भी की।

7. यह कि वाराणसी पुलिस द्वारा  काशीनाथ शुक्ल के परिजनों के उत्पीडन की शिकायत प्रार्थी ने राष्ट्रीय महिला आयोग तथा उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ,एडीजी ला आर्डर तथा पुलिस महानिरीक्षक वाराणसी जोन को ई मेल द्वारा की । इसके उपरांत पुलिस ने काशीनाथ शुक्ल के  परिजनों का उत्पीडन बंद किया ।

9. यह कि इस  मामले को संज्ञान में लेते हुए लखनऊ की सामाजिक सामाजिक कार्यकर्ती नूतन ठाकुर जी ने अजय मिश्र द्वारा पद कर दुरुपयोग करते हुए पत्रकारों के ऊपर दर्ज मुकदमो की प्रेस कौंसिल में अपना लिखित शिकायत दर्ज कराई .

10. यह कि एसएसपी अजय मिश्र द्वारा पत्रकारों के ऊपर किये जा रहे उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का विरोध प्रार्थी द्वारा क़ानूनी और लोकतांत्रिक ढंग से किया जा रहा है । जिससे  नाराज एसएसपी अजय मिश्र प्रार्थी का तरह तरह से उत्पीडन कर रहे है।

11. यह कि इसका प्रमाण  सामने आया जब थाना चौक प्रभारी वाईपी शुक्ल द्वारा प्रार्थी को 160 सीआरपीसी की नोटिस दिनांक 10.06.2013 जारी किया गया । जबकि इस पुरे प्रकरण में (समाचार से सम्बंधित से) प्रार्थी को न तो कोई जानकारी थी और ना ही प्रार्थी के चैनल द्वारा प्रसारित हुआ है ।

12. यह कि उपरोक्त तथ्यों से स्वयं स्पष्ट है कि  एसएसपी अजय मिश्र बदले की भावना से ग्रसित  हो वाराणसी के पत्रकारों का उत्पीडन कर रहे है और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए  पत्रकारों पर फर्जी फर्जी मुकदमे दर्ज कर रहे है ।

13. यह कि ऐसे एसएसपी अजय मिश्र द्वारा बदले की भावना में पत्रकारों के ऊपर दर्ज कराये गए मुक़दमा अपराध संख्या 84/2013 धारा 420,467,468,177,295A,298 आईपीसी थाना चौक जनपद – वाराणसी की विवेचना में निष्पक्षपूर्ण  होना सम्भव नहीं है ।

प्रार्थना

अतः श्रीमान जी से अनुरोध है कि थाना – चौक जनपद – वाराणसी में दर्ज मुक़दमा अपराध संख्या 84/2013 धारा  420,467,468,177,295A,298 आईपीसी की विवेचना गैर जनपद की पुलिस अथवा अन्य स्वतंत्र जाँच एजेंसी से कराई जाय ताकि निष्पक्षपूर्ण विवेचना होते  हुए न्याय हो ।

प्रार्थी
राम सुंदर मिश्र
संवाददाता  
न्यूज़ स्ट्रीट
9336933552,9918701615

प्रतिलिपि —

1 –  एडीजी ला एंड आर्डर
2 –  आईजी वाराणसी जोन
3 –  डीआईजी वाराणसी जोन

गांव के दबंगों ने शादी की जिद पर अड़ी प्रेमिका को जला डाला

देवरिया : जिले में प्यार के दुश्मन दबंगों ने प्यार करने वाले प्रेमी और प्रेमिका के प्यार पर पहरा लगा दिया और जब देखा कि दोनो नहीं मान रहे है तो गांव में एक पंचायत बुलाई। पंचायत के दौरान गांव वालों के सामने पहले प्रेमी और प्रेमिका की पिटाई की तथा बाद में प्रेमिका की मां को भी दो-चार चाटा मार कर उसे मुंह बन्द करने की हिदायत दी। लेकिन उसके बाद भी जब प्रेमिका और उसकी मां शादी की जिद पर अड़े रहे तो न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी की कहावत चरितार्थ करने के लिए एक दबंग ने प्रेमिका के घर में घुस कर उस पर मिटटी का तेल छिड़क कर उसे आग के हवाले कर दिया।

लगभग 80 प्रतिशत जली हुई प्रेमिका को जिला अस्पताल लाया गया जहां डाक्टरों ने चिन्ताजनक स्थित को देखते हुए उसे गोरखपुर मेडिकल कालेज, गोरखपुर भेज दिया है। जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में नामजद एवं कुछ अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर नामजद दो अभियुक्तो को गिरफतार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार श्रीवास्तव ने घटना के बारे में बुधवार को बताया कि जिले के एकौना थाना के करहकोल गांव की अन्जू पुत्री रोधश्याम सिंह और रंजीत पुत्र जयहिन्द सिंह जो दोनो बालिग हैं और आपस में प्यार करते हैं तथा शादी करना चाहते है। प्रेमी के परिजनों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। जिसको लेकर बुधवार को गांव में पंचायत हुई।

जहां शादी की जिद पर अड़ी प्रेमिका की मां को प्रेमी के घर वालों तथा अन्य दबंगो ने मारा पीटा तथा गाली एवं धमकी दी। इसके बाद एक दबंग राम हौसला सिंह तथा कुछ अन्य लोगों ने जबरन प्रेमिका को उसके घर में घुस कर मिटटी का तेल डालकर जला दिया और भाग गए। पुलिस अधीक्षक श्री श्रीवास्तव ने बताया कि एकौना थाने में मुकदमा दर्ज कर नामजद चार में से दो व्यक्तियों को गिरफतार कर लिया गया है और शेष अभियुक्तों की गिरफतारी के लिए दबिश दी जा रही है।

पत्रकारों की गोष्ठी में रिजवान अहमद बोले- पुलिस और जीआरपी की छवि आम जन में ठीक नहीं है

राजकीय रेलवे पुलिस के महानिदेशक रिजवान अहमद ने पत्रकारों से कहा है कि वह अपने दायित्वों का इमानदारी से निर्वहन करें क्योकि उनकी कलम में बड़ी ताकत है। समाज को दिशा देने तथा समाज के उत्थान में उनकी अहम भूमिका है। उन्होने कहा कि पत्रकारों को अपनी खबर को सावधानीपूर्वक चलाना चाहिये तथा ऐसी खबर से बचना चाहिये, जिससे सामाजिक विद्वेष फैले। राजकीय रेलवे पुलिस के महानिदेशक ने विभाग के भ्रष्ट व कामचोर पुलिस कर्मियों के विरूद्ध जंग का ऐलान करते हुये चेतावनी दिया कि वह ऐसे लोगो को विभाग में नहीं रहने देंगे।

उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की बलिया शाखा द्वारा गुरूवार को बिल्थरा रोड के जायसवाल धर्मशाला में आयोजित चौथा स्तम्भ और चुनौतियां विषयक गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये श्री अहमद ने पत्रकारों की महत्ता, उनके कर्तव्य व समाज उत्थान में उनकी भूमिका पर विषद रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियों को भी रेखांकित किया। राजकीय रेलवे पुलिस के महानिदेशक ने रचनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता पर विशेश रूप से बल देते हुये चिंता प्रकट किया कि नैतिक व मानवीय मूल्यों में कमी आ रही है। उन्होंने देश के गौरवशाली परम्परा व मिली जुली तहजीब का बखान करते हुये लोगो से इस धरोहर को संजोकर रखने का आहवान किया।

राजकीय रेलवे पुलिस की बदशक्ल छवि से चितिंत विभाग के महानिदेशक रिजवान अहमद ने अपील की कि पुलिस कर्मी अपने कार्य, व्यवहार व आचरण में सुधार लायें अन्यथा इसके अंजाम अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस व जीआरपी की छवि आम जन में ठीक नहीं है। आम जन में यह धारणा है कि जीआरपी के लोग ही अपराध करते हैं। यह धारणा सही नहीं है। 5 फीसदी पुलिस कर्मी ही जनता को त्रस्त करते है, जिससे विभाग की छवि खराब होती है। 5 फीसदी पुलिस कर्मी ही रक्षक के रूप में भक्षक हैं। अपने गृह क्षेत्र में मिले सम्मान से आहलादित श्री अहमद ने कहा कि घर में मिले सम्मान से उन्हे बेहद हर्ष का अनुभव हो रहा है। राजकीय रेलवे पुलिस के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारों के समक्ष विश्वसनीयता व निष्पक्षता बड़ी चुनौती है।

सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने कहा कि पत्रकारों को अपनी लेखनी का प्रयोग जनकल्याण के लिये करना चाहिये। उन्होंने अखबारो व इलेक्ट्रानिक मीडिया में नकारात्मक खबरों के बढ़ते प्रचलन पर चिंता प्रकट करते हुये कहा कि ऐसी खबरें नहीं छपनी चाहिये, जिससे सामाजिक ताना-बाना बिगड़ता तथा सामाजिक परिवेश दूशित होता हो। उन्होने आश्वस्त किया कि मणिसाना आयोग की रपट को लागू कराने का मामला वह लोकसभा के आगामी सत्र में उठायेंगे। पेड न्यूज के मामले में भी वह काफी मुखर हैं।

इस मौके पर अतिथियो को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। विधायक जय प्रकाश अंचल, उप जिलाधिकारी मुनव्वर अली, क्षेत्राधिकारी बृजेश कुमार सिंह, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आद्याशंकर यादव, धर्मदेव यादव, अशोक जायसवाल, शिव कुमार हेमकर, विजय यादव, अभयेश मिश्र, घनश्याम गुप्ता, नवीन मिश्र, राजेश ओझा, शशिकान्त ओझा, पशुपति नाथ, डाक्टर अखिलेश सिंहा, कृष्ण कान्त पाठक, अमित कुमार, अमर नाथ गुप्ता सहित अनेक लोगो ने विचार रखे। अरशद हिन्दुस्तानी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। समारोह में अतिथियो को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित कर हुआ। अध्यक्षता बनवारी लाल जालान व संचालन संगठन के जिलाध्यक्ष अनूप कुमार हेमकर ने किया।

प्रस्तुति : अनूप कुमार हेमकर

बनारस और चंदौली में दो पत्रकारों से लूट, यूपी में कानून-व्यवस्था की हालत खस्ता

यूपी में ला एंड आर्डर की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है. अब तो मीडिया वाले भी दहशत में आ गए हैं. कब कौन कहां लुट जाए, कुछ नहीं पता. ताजी सूचना के मुताबिक यूपी के बनारस और चंदौली जिले में दो पत्रकारों से लूट की वारदात हुई. वाराणसी में बदमाशों ने दैनिक जागरण के पत्रकार विजय सिंह के साथ मारपीट कर सोने की चेन, ब्रेसलेट, तीन अंगूठी व 25 हजार रुपये लूट लिए.

करीब तीन लाख रुपये का सामान बदमाशों ने लूटा है. विजय सिंह गाड़ी से थे. किसी का फोन आया तो वे गाड़ी रोक कर बात कर रहे थे. वहां पहले से खड़े दो बदमाशों ने गाड़ी के बंद शीशे खटखटा कर खोलने का इशारा किया. विजय ने जैसे ही शीशा खोला, बदमाशों ने कनपटी पर पिस्तौल सटा दी और गले में पड़ी चेन झपट ली. फिर अंगूठी, ब्रेसलेट व जेब में मौजूद 25 हजार नकद भी निकलवा लिए. पिस्तौल से चेहरे पर वार भी किया. बदमाश भागने से पहले गाड़ी की चाभी व मोबाइल बैटरी भी निकाल ले गए.

उधर, चंदौली से सूचना है कि लुटेरों ने पी7न्यूज चैनल के स्ट्रिंगर को लूटा है. पत्रकार का कैमरा, माइक आईडी, पर्स भी ले उड़े. जिस दौरान ये वारदात हुई, उस समय क्राइम मीटिंग की तैयारी चल रही थी. यूपी में बढ़ रहे अपराध से पत्रकार भी अछूते नहीं रहे. चंदौली जिले के एसपी अपने मातहतो को बुला कर अपराध नियंत्रण के लिए क्राइम मीटिंग कर रहे थे तो दूसरी तरफ अपराधी क्राइम करने में मशगूल रहे.

बाइक सवार लुटेरो ने पी7न्यूज के स्ट्रिंगर विनय तिवारी को एनएच2 पर असलहा दिखा कर लूट लिया.विनय तिवारी चंदौली से खबर भेजने के बाद अपनी मोटर साइकिल से सैयदराजा स्थित अपने घर जा रहे थे. जैसे ही वे लीला पुर चेक पोस्ट के आगे बढ़े बाइक सवार दो अज्ञात लोगो ने उनसे सैयदराजा की दूरी पूछा. विनय जैसे अपनी बाइक धीमी किये, एक बदमाश ने उनके बाइक की चाभी घुमा कर आफ कर दिया और दूसरे ने कट्टा सटा कर उनसे उनका बैग छीन लिया और पर्स निकालने को कहा.

विनय ने अपना पर्स निकालकर उसके हाथ में रख दिया जिसके बाद वे लोग वहां से बड़े ही आसानी से निकल लिए. घटना से भयभीत विनय ने चंदौली कोतवाली पहुंच कर आप बीती बतायी और घटना के बाबत लिखित तहरीर दे दी है. विनय तिवारी ने यह भी बताया कि लुटेरे जिस बाइक पर सवार थे वो बिना नंबर की थी और उनका मोबाइल हेलमेट के भीतर रहने के कारण बच गया जिससे उन्होंने पुलिस को सूचना दी.

शशांक शेखर सिंह का जाना

जिस व्यक्ति की अंत्येष्ठी होने वाली थी वह कभी मेरे पसंदीदा लोगों में नहीं थे. मैं स्वयं चाहे जैसा भी होऊं- अच्छा या बुरा, नीतिपरक या अनैतिक, पर मेरे मन में हमेशा वैसे लोगों के प्रति ही सम्मान की भावना रही है जो वास्तव में विधि का उसकी सम्पूर्णता में पालन करने में विश्वास रखते हैं. उदाहरण के लिए यदि मैं कोई नाम यकबयक लूँ तो मुझे देवेश चतुर्वेदी की याद आएगी जो पिथोरागढ़ और देवरिया में मेरे जिलाधिकारी रहे थे और जिनके लिए कानून से बड़ा कुछ नहीं दिखता था.

मैंने शशांक शेखर सिंह, जिन्हें बहुधा ट्रिपल एस नाम से भी पुकारा जाता था, के बारे में जितना भी सुना था, उससे हमेशा उनकी इमेज से कुछ कटा-कटा सा रहता था. मेरी सोच में वे एक ऐसे व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते थे जो कानून के लिए नहीं बना था बल्कि जिनके लिए स्वयं क़ानून अपने आप को बदल दिया करता था. फिर मैं अकेला ऐसा आदमी नहीं था जो उनके बारे में इस तरह सोचता हो. नौकरशाही में एक बड़ा हिस्सा अपनी निजी बातचीत में इस तरह के विचार रखता दिख जाता था.

लेकिन जैसी कहावत है- “सफलता से बड़ा कोई मन्त्र नहीं” और शशांक शेखर ने उत्तर प्रदेश और उनकी राजधानी लखनऊ यानि कि हमारे इस शहर पर कुछ इस प्रकार राज किया जैसा विरले ही नौकरशाह को अवसर मिला हो.

वर्ष 2007-2012 की अवधि ने उनकी इस ख्याति में और भी श्रीवृद्धि की और इस दौरान यदि लखनऊ का कोई एक नौकरशाह दिल्ली या अन्य प्रदेशों में जाना जाता था तो वे थे शशांक शेखर. यदि कहें तो वे इस शहर की सत्ता और ताकत के प्रतिनिधि बन गए थे. लखनऊ राजधानी बनने के समय से ही उत्तर प्रदेश की राजनैतिक और प्रशासनिक ताकत का केन्द्र माना जाता रहा है और शशांक शेखर में एक साथ प्रशासनिक और राजनैतिक ताकत का भरपूर मिश्रण खुलेआम दिखता था. यदि हम इस रूप में देखें तो वे इस शहर की बुनियादी सोच और चरित्र के शानदार प्रतिनिधि बन कर छाए रहे थे.

जब उनकी आकस्मिक मौत की खबर आई तो इसने अन्य लोगों की तरह मुझे भी विस्मृत कर दिया. भावना का जो ज्वार मुझमे आया वह उस हद तक सहानुभूति और लगाव के कारण नहीं बल्कि मृत्यु से जुडी अजीबोगरीब कशिश, भयावहता और सम्मोहन से जुड़ा हुआ था.

जब मैं कल दफ्तर से घर लौट रहा था तो भैंसाकुंड, जो एक बार पुनः इस शहर की एक खास निशानी है और शहर का खामोश हस्ताक्षर भी, पर भारी भीड़ देख कर समझ गया कि ये शशांक शेखर की अंत्येष्ठी से जुड़े लोग हैं.

यहाँ मैंने एक बार पुनः यह समझा कि कोई व्यक्ति शशांक शेखर के प्रति व्यक्तिगत कैसी भी भावना रखता हो पर सच्चाई यही है कि वे उन लोगों में रहे जिन्होंने इस शहर की नब्ज को पहचाना और यहाँ अपनी बुद्धि, विवेक, प्रतिभा और मेहनत से ताकत का सूत्र समझा और उसे हासिल किया. उनके शव के इर्द-गिर्द लिप्त माहौल खुदबखुद यह बता रहा था कि मरने वाला व्यक्ति जोई साधारण शख्सियत नहीं था बल्कि रसूखवाला था, वही रसूख जिसे हासिल करने के लिए पूरे प्रदेश से लोग यहाँ आते हैं पर हर कोई उतना सफल नहीं होता जितने शशांक शेखर हुए.

शशांक शेखर चले गए- शहर का एक और ताकतवर आदमी भैंसाकुंड वासी हो गया लेकिन शहर की आपाधापी और सफलता की चाह तो निरंतर चलती रहेगी. आखिर नवाबों की यह नगरी आज भी सत्ता का केन्द्र जो है.

लेखक अमिताभ ठाकुर यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.

करप्शन के एक बड़े मामले में निशंक को कोर्ट की तरफ से नोटिस

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक करप्शन के एक बड़े मामले में फंसते नजर आ रहे हैं. आय से अधिक संपत्ति को लेकर दायर एक जनहित याचिका में नैनीताल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रमेश पोखरियाल निशंक से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की तरफ से जाने-माने वकील प्रशांत भूषण अदालत में पेश हुए और निशंक पर आरोपों के बारे में बताया.

जनहित याचिका में कहा गया है कि निशंक ने एक सोसाइटी गठित कर बेटी को उसका कोषाध्यक्ष बनाया और अपने ड्राइवर बालकिशन को सचिव. इस सोसाइटी के नाम सरकार से मुफ्त में पचास बीघे जमीन आवंटित कराया. फिर इसमें सौ करोड़ रुपये का निवेश कराया. इस पैसे के जरिए मेडिकल कालेज बनाया जा रहा है. अवैध तरीके से जमीन आवंटन और अघोषित सौ करोड़ रुपये का निवेश सवाल खड़ा करता है कि यह सब नियमों को ताक पर रखकर किया गया है.

प्रशांत भूषण के पक्ष व तर्क को सुनने के बाद निशंक को कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. ज्ञात हो कि निशंक पर करप्शन के चार्जेज समय समय पर लगते रहे हैं. जब वे सीएम थे तब भी करप्शन को लेकर ढेर सारे मामले सामने आए थे. कोर्ट में करप्शन का प्रकरण जाने के बाद निशंक की मुसीबत बढ़ गई है क्योंकि अगर आरोप साबित हुए तो फिर निशंक का राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है.

नवीन जिन्दल को खुला पत्र

प्रिय जिन्दल साहब, अभी उड़ीसा में ग्रामीणों पर आपके सुरक्षाकर्मियों द्वारा किये गये हमले के चित्र और वीडियो देख रहा था| चित्र में एक डेढ़ साल के बच्चे का टूटा हुआ पैर, एक सत्तर साल की बूढी का खून से लथपथ चेहरा| अस्सी साल के एक बूढ़े की डबडबाई आंखे और सिर से बहता खून| एक दूसरे वीडियो में अस्पताल के बिस्तर पर अपनी टूटी हुई टांग् के कारण तीन महीने तक काम पर न जा पाने की विवशता में सिसकता हुआ एक मजदूर दीख रहे हैं | ये सब देखते हुए मैं क्रोध और शर्म का अनुभव कर रहा था| इसमें शर्म मुझे खुद पर आ रही थी कि ये सब हमारे रहते हुए हो रहा है| और क्रोध किस-किस पर आ रहा था? वो इस पत्र में मैं लिखूंगा |

जिन्दल साहब, एक सर्वे के मुताविक आप इस देश में सबसे ज्यादा तनख्वाह पाने वाले व्यक्ति हैं| आपकी तनख्वाह सढ़सठ करोड सालाना से ज्यादा है| यानि करीब पांच करोड़ महीना से ज्यादा | और सरकारी आंकड़ों के मुताविक इस देश में एक औसत ग्रामीण अगर अट्ठाईस रुपया रोज भी कमा ले तो सरकार उसे सम्पन्न मानने लगती है| यानि सरकारी हिसाब से इस देश के संपन्न व्यक्ति और आपकी आमदनी के बीच ढाई करोड़ गुना का अंतर है|

मैं ये बात कतई स्वीकार नहीं करूँगा कि आप इसलिए ज्यादा अमीर हैं क्योंकि आप उस अट्ठाईस रूपये कमाने वाले ग्रामीण व्यक्ति से ढाई करोड़ गुना ज्यादा मेहनत करते हैं| आपकी सारी अमीरी उन गरीबों की जमीनों के नीचे दबी हुई दौलत को बेचकर बनाई गई है, जिनको आपने मार-मार कर लहूलुहान कर दिया है| क्या किसी को छुरा मार कर उसका पैसा छीनने वाले गुन्डे और इन गरीबों का खून बहाकर पैसा कमाने की आपकी इन हरकतों के बीच आपको कोई अंतर दिखाई देता है ? माफ कीजियेगा आपको ऐसा न भी लगता हो पर जिन गरीबों की जमीन आपने गुंडों और पुलिस की मदद से छीन ली है वो आपको छुरा मार गुन्डे से कम नहीं समझते|

आपको इस देश के सभ्य शहरी आपकी देशभक्ति के लिये पहचानते हैं| क्योंकि आपने सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा कर के ये फ़ैसला करवाया था कि देश का हर नागरिक अपने घर पर रोज तिरंगा झंडा फहरा सकता है| लेकिन क्या आपको लगता है कि आपके गुंडों की मार से लहूलुहान लोगों का अपने घर पर वो तिरंगा लहराने का मन करता होगा, जिसकी शपथ लेकर सरकार और पुलिस आपके लिये उन गरीबों की जमीन छीन चुकी है और आपने मुआवजे मांगने वाले गरीबों पर वहशी हमला कर दिया| और तिरंगे की शपथ लेने वाली पुलिस जनता पर होने वाले इस हमले के समय चुपचाप खड़ी देखती रही !

जिन्दल साहब ये तिरंगा झंडा खून से लथपथ ग्रामीणों और आपको एक बराबर नागरिक माने जाने का प्रतीक है| शुक्र मनाइये कि इन गरीबों को अभी इस तिरंगे द्वारा जनता को दी गई बराबरी की ताकत का पता नहीं चला है वर्ना ये गरीब आपका गिरेबान पकडकर आपको आपके महल से खींचकर बाहर निकाल लेते और आपको पास के थाने तक पीटते हुए ले जाते और उस तिरंगे की सच्ची शपथ लेने वाला थानेदार आपको एक साधारण गुन्डे की तरह हवालात में बंद कर देता| लेकिन जिन्दल साहब आप तो इस तिरंगे को खून में डुबोने पर तुले हैं| तिरंगे को लाल झंडा बनाने का काम मत कीजिये| वर्ना कहीं ऐसा न हो कि गरीब तिरंगे को अपने खून में डुबोकर फहरा दे और आपको भी मजदूरों की लाइन में खड़ा कर दिया जाये और आप भी दिन भर मजदूरी करने के बाद शाम को अट्ठाईस रूपये ही लेकर घर पहुंचें |

आप मैनेजमेन्ट कालेज चलाते हैं| क्या आपके यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पता है कि आप पढ़ाते कुछ और हैं और वास्तव में मैनेजमेन्ट करते बर्बर तरीकों से हैं | क्या आपके द्वारा जो कानून पढाने का कालेज चलाया जाता है उसके विद्यार्थियों को पता है कि उनके कालेज का मालिक किस तरह कानून और संविधान को रौदता है? अपने लिये मुआवजे की मांग करने वाले गांव के लोगों को सताने के लिये आप उन पर दूर के प्रदेशों में फर्जी मुकदमे ठोक देते हैं जिससे आइन्दा कोई भी आपके खिलाफ कभी आवाज़ न उठा पाए ! आप जमीन लेने से पहले कानून में अनिवार्य सरकारी जन सुनवाई के नाम पर अपने गुंडों की मदद से जमीन छीनने के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों पर खूनी हमले करते हैं ! आवाज़ उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस को रिश्वत देकर आप जेलों में डलवा देते हैं ! अभी कुछ दिनों पहले छत्तीसगढ़ में हाई कोर्ट ने आपके खिलाफ एक सम्मन जारी किया लेकिन आपकी कंम्पनी ने सारे क़ानूनों को ठेंगा दिखाते हाई कोर्ट का वो नोटिस लिया ही नही ! क्योंकि रायगढ़ जिले की सारी पुलिस की गाडियां आपकी पैसे से खरीदी गयी हैं और सारे पुलिस थाने आपके पैसे से बनाए गये हैं अब इस पुलिस की क्या मजाल जो आपको कोर्ट के आदेश की तामील करवा सके ? क्या अपने ला कालेज में कानून पढने वाले छात्रों को आप ये वाली गैर कानूनी हरकतों के बारे में भी बता सकते हैं ?
आपके लिये जमीने छीनने के लिये बंगाल के जंगल महल का इलाका आज सरकारी फौजों से भर दिया गया है ! ये गरीब फ़ौजी उस इलाके में अपनी ज़मीन बचाने के लिये लड़ने वाले गरीबों से युद्ध कर रहे हैं ! गरीब एक दुसरे को मार रहे हैं ! और अन्त में गरीबों की लाशें बिछाकर जो जमीन छीनी जायेगी आप उस ज़मीन के नीचे की सार्वजनिक खनिजों की दौलत को विदेशियों को बेच कर अपने लिये और दौलत कमाएंगे !

इस भयंकर अनैतिक लूटपाट को आप शायद व्यवसाय कहते होंगे ? लेकिन आपकी ये हिंसक बेशर्म हरकतें इस देश के करोड़ों ग्रामीणों में लगातार गुस्सा भडका रही हैं ! हम कोशिश करेंगे कि गरीब का गुस्सा ज्यादा और जल्दी भडके ताकि वो भारत के संविधान में वर्णित समता और आर्थिक, सामजिक न्याय की गारंटी को जमीन पर उतार सके ! और उस लोकतंत्र को वास्तविक बना दे जिसका आप तिरंगे की ओट में रोज गला घोंट रहे हैं ! अगर आप इस पत्र को पढ़ने के बाद महसूस करें कि मैंने कोई भी बात् असत्य लिखी है तो मैं आपसे इन मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा करने के लिये तैयार हूं !

हिमांशु कुमार

रायपुर

छत्तीसगढ़


(लेखक हिमांशु कुमार जाने-माने सोशल एक्टिविस्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.)

Zee Media Lauds CBI for FIR, Nation-wide Probe on Prime Accused of Coal Gate Scam

New Delhi: As government considers more autonomy to the premier investigating agency, a group of thorough professionals on Tuesday registered a case under Section 120-B read with 420 of Indian Penal Code and Section 13(1) (d) of Prevention of Corruption Act (PC Act, 1988) against the then minister of state for coal Shri Dasari Narayan Rao; Member of Parliament Shri Navin Jindal, Director of Jindal Steel and Power Ltd (JSPL); four Delhi-based private firms; one Hyderabad based private firm, and others, in relation to alleged irregularities in allocation of Amarkonda Murgadangal coal block in the State of Jharkhand.

Zee Media compliments CBI for its blunt statement, “it is alleged that two steel and iron companies based in Delhi misrepresented facts to get coal blocks. Also, there was alleged investment in a Hyderabad based firm from the group of companies based at Delhi.”

It is the CBI’s assertion of professionalism that while one of the Accused, Shri Navin Jindal, an influential politico-corporate in the country, was overseas on holiday, the Agency’s sleuths were conducting raids at 19 locations in Delhi and Hyderabad.

Only thanks to a thorough CBI probe, the relationships between JSPL, Gagan Sponge, Jindal Realty and New Delhi Exim, besides Saubhagya Media, all booked for alleged cheating and misrepresentation of facts in bagging Amarkonda Murgadangal block in Birbhum district of Jharkhand in 2008, may finally emerge.

Zee Media has consistently focused the Nation’s attention to massive irregularities in allocation of all coal blocks during the period 2006-2009, as has been registered by CBI on reference of Central Vigilance Commission (CVC). For this we have been relentlessly attacked by the Accused and his Accomplices within the system. Our Editors have even faced illegal detention and our management has been maligned and unfairly targeted.

Today’s CBI FIR against a resourceful politico-corporate like Shri Jindal reaffirms what Zee Media, and discerning sections of the Media have consistently reported, as also serious conflict of interest in his continuance inside the Parliamentary Standing Committee on Home Affairs.

It is equally worrying that in their Report on the so-called paid media, the Parliamentary Standing Committee on Information Technology leaned on depositions by Representatives of the Accused to recommend a government-mandated Media Regulator in the country. It must be emphasized that the Proceedings were conducted ex parte and the Committee’s Recommendations came out without serving the basic tenet of natural justice, which is to hear both sides. PR

अजीत कुमार बने राष्ट्रीय उजाला में जीएम, पांच संस्करण की तैयारी

नई दिल्ली। दिल्ली के पत्रकार अजीत कुमार पाण्डेय ने तेजी से बढ़ते हुए मीडिया ग्रुप दैनिक राष्ट्रीय उजाला प्राइवेट लिमिटेड में बतौर जनरल मैनेजर ज्वाइन किया है। बता दें कि इसके पहले अजीत कुमार दैनिक जागरण, अमर उजाला और दिल्ली से प्रकाशित लोकसत्य समाचार पत्र को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

अजीत कुमार ने भड़ास4मीडिया को बताया कि राष्ट्रीय उजाला का जुलाई मे दिल्ली संस्करण शुरू करने के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश मे लॉंचिंग कि तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा उर्दू, अंग्रेजी और कुछ क्षेत्रीय भाषाओं में भी समाचार पत्र को शुरू करना है।

अजीत कुमार ने बताया कि दैनिक राष्ट्रीय उजाला समाचार नोयडा से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय उजाला समाचार पत्र नकारात्मक सोच के साथ नहीं बल्कि एक नई उर्जा के साथ सकारात्मक सोच को मॉडल बनायेगा और आम जनता से जुड़ी खबरों को पहली प्राथमिकता के साथ कवर करेगा.

15 जुलाई से बंद 160 वर्ष पुरानी तार उर्फ टेलीग्राम सेवा

डाक तार विभाग में क्रमशः कम हो रहे कर्मचारियों की परिस्थितियों में छंटनी का नया बहाना मिल गया है। खुशी हो या गम, शादी हो या मौत, नियुक्ति हो या कोई बेहद जरुरी सूचना, तार लेकर डाकिये के पहुंचते ही दिलों की धड़कने बढ़ जाती थीं। कम से कम मोबाइल क्रांति से पहले यह हाल था। अब इंटरनेट क्रांति भी हो गयी। किसी को तार का इंतजार नहीं रहता और न कोई तार भेजता है।

इसी के मद्देनजर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने अपनी 160 वर्ष पुरानी तार (टेलीग्राम) सेवा को 15 जुलाई से बंद करने का निर्णय लिया है। दो महीने पहले बीएसएनएल ने विदेश में दी जा रही तार सेवा को भी बंद कर दिया था।बीएसएनएल के वरिष्ठ महाप्रबंधक शमीन अख्तर ने निर्देश जारी कर दिया है कि 15 जुलाई, 2013 से तार सेवा को बंद कर दिया जाएगा।  बीएसएनएल ने कहा कि तार सेवा के कर्मियों को कंपनी द्वारा दी जा रही अन्य सेवाओं में नियुक्त कर दिया जाएगा।कम से कम इस महकमे में अब नई नियुक्तियां होंगी नहीं।

अब तार (टेलीग्राम) दिल के तारों को कभी नहीं झनझनायेगा। टेलीग्राम आने पर लोग घबरा तक जाते थे कि कहां क्‍या हो गया, कुछ गलत तो नहीं हो गया….जब तक टेलीग्राम पढ़ नहीं लिया जाता….लोगों की घबराहट कम नहीं होती थी। अब कभी आपको तार नहीं आएगा और न भेज सकेंगे। टेलीग्राम सेवा बंद करने का फैसला हो गया है। आज स्मार्टफोन, ईमेल और एसएमएस आदि आधुनिक संचार के माध्यमों के प्रचलन ने सादगीपूर्ण टेलीग्राम को कहीं पीछे छोड़ दिया है। लेकिन कभी इसी संचार सेवा के माध्यम से लोगों को कई खुशी व दुख की खबरें प्राप्त होती थीं। लेकिन नई तकनीक व नए संचार के माध्यमों के चलते तार सेवा को बाहर का रास्ता देखना पड़ रहा है।दूर देश से अपने परिचितों को जल्दी से जल्दी संदेश भेजने का माध्यम तब टेलीग्राम या तार ही हुआ करता था। इसके लिए देश के सभी इलाकों में सरकार ने तार-घर खोले हुए थे। 90 के दशक से पहले तक यह टेलीग्राम सेवा, त्वरित सूचना संप्रेषण के लिये अहम मानी जाती रही है। उसके बाद टेलीफोन सेवाओं में आयी प्रगति के चलते धीरे-धीरे कर 'तार' की उपयोगिता कमतर होती गयी।अब एसएमएस, ईमेल, मोबाइल, फोन सेवाओं के हुए तगड़े विस्‍तार ने टेलीग्राम को हमसे दूर कर दिया या लोग भूल से गए हैं। मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, चेन्‍नई जैसे बड़े एवं मध्‍यम शहरों में जहां पहले तार घरों में लंबी लंबी लाइनें दिखाई देती थी, वहां अब दिन भर में मुशिकल से कोई आ पाता है। अमरीका के सैम्‍युल मोर्स ने 1844 में मोर्स कोड की खोज की थी तो संचार जगत में बड़ी क्रांति आ गई थी लेकिन ईमेल और एसएमएस ने तो समूची दुनिया ही बदल दी।

बीते तीन-चार दशकों से प्रधान डाकघर से जुड़े डाकघरों में नये डाकियों की नियुक्ति नहीं की गयी है।मुख्य डाकघरों, जिनमें कोलकाता जीपीओ भी शामिल है, ठेके पर काम लेने का चलन हो गया है।  नेशनल पोस्टल पॉलिसी- 2012 की सिफारिशों केतहत डाक विभाग के निजीकरण की योजना है। डाक विभाग से टेलीपोन सेवा और तार विभाग को पहले ही अलग कर दिया गाया था। टेलीफोन सेवा का निजीकरण पूरा हो गया है। वीएसएनएल को बेच दिया गा। देश में स्पेक्ट्रम देश में स्पेक्ट्रम घोटालों की चर्चा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। तार सेवा खत्म होने के बाद अब बस, डाक सेवा के निजीकरण का काम अधूरा रह गया है, जो बहुत जल्द पूरा होने वाला है।

बहुत जल्दी डाक विभाग से चिट्ठी पत्री का किस्सा भी खत्म होने वाला है क्योंकि पोस्ट कार्ड का भी किस्सा खत्म हो गया। कुरियर सर्विस ने भारतीय डाक की हवा निकाल दी।भारत संचार निगम लिमिटेड के (टेलीग्राफ सेवाओं के) वरिष्ठ महाप्रबंधक शमीम अख्तर द्वारा नयी दिल्ली स्थित कारपोरेट कार्यालय से जारी किए सर्कुलर के मुताबिक टेलीग्राफ सेवाएं 15 जुलाई, 2013 से बंद कर दी जाएंगी।यह सर्कुलर विभिन्न दूरसंचार जिलों और सर्किल कार्यालयों को भेजा गया और इसमें कहा गया है कि टेलीग्राम सेवाएं 15 जुलाई से बंद हो जाएंगी।  इसके फलस्वरूप बीएसएनएल प्रबंधन के अंतर्गत आने वाले सभी टेलीग्राफ कार्यालय 15 जुलाई से टेलीग्राम की बुकिंग बंद कर देंगे।सर्कुलर में कहा गया है कि दूरसंचार कार्यालय बुकिंग की तिथि से केवल छह महीने तक लॉग बुक, सेवा संदेश, आपूर्ति स्लिप को रखना होगा।

डाक विभाग द्वारा यू पी सी की सेवा समाप्त कर दी गयी है। यूपीसी एवरीभिएशन है। अंडर (यू) पोस्टिंग(पी) सर्टिफिकेट(सी)। यू पी सी में डाक विभाग का कुछ भी अतिरिक्त खर्च नहीं होता है बल्कि डाक विभाग को इससे लाभ होता है। उपभोक्ता साधारण डाक को उचित टिकट लगाने के बाद उसे लेटर बॉक्स में डालने के बजाय पोस्ट ऑफिस में दे देता है। उपभोक्ता इस लिफाफे के साथ एक सादे कागज पर तीन रूपये का टिकट लगा देता है और उस टिकट युक्त कागज पर पोस्ट ऑफिस उक्त पत्र की प्राप्ति के सबूत के तौर पर मात्र एक मुहर लगा देता है। उपभोक्ताओं को यह छूट होती है कि तीन रूपये के टिकट पर एक साथ तीन लिफाफे यू पी सी के तहत दे सकता है। नाम से स्पष्ट है कि पोस्ट किए गए लिफाफे का महज एक प्रमाण पत्र उपभोक्ता को मिल जाता है। जिस देश में 76 प्रतिशत से ज्यादा आबादी 20 रूपये से कम पर गुजारा करती है वैसे समाज में इस तरह की सेवा की उपयोगिता का अंदाजा लगाया जा सकता है।लेकिन डाक विभाग ने यह सेवा समाप्त करके डाक विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की है। डाक विभाग ने पहले से ही रजिस्टर्ड डाक काफी महंगा कर दिया है।रजिस्टर्ड डाक महंगा किए जाने के पीछे देश में कूरियर कंपनियों को बढ़ावा देने योजना रही है।

देश में पहली बार टेलीग्राम (तार) सेवा सन 1853 में आगरा से कोलकाता के बीच शुरू हुई थी। अंग्रेज सरकार अपने सारे दस्तावेज इसी के जरिए भेजती और मंगाती थी। आजादी के बाद भी लोगों ने इसका खूब लाभ उठाया। यहां तक कि समुद्र में सबमरीन केबिल डालकर विदेशों से भी टेलीग्राम मंगाए जाने लगे।तार सेवा शुरू होने पर आगरा एशिया का सबसे बड़ा ट्रांजिट दफ्तर था। यहां से रावलपिंडी तक लाइन थी और यह 24 घंटे संचालित होता था। शहजादी मंडी के कार्यालय में सैकड़ों कर्मचारी थे, लेकिन अब केवल 22 हैं। जीएम ने बताया कि टेलीग्राम सेवा में अब मासिक 4-5 हजार रुपये की कमाई हो रही है, जबकि खर्च लाखों में हैं। तार सेवा का समय भी परिवर्तित करके सुबह सात से रात 10 हो गया है।

लेकिन पिछले दो-तीन दशक में इंटरनेट, ब्रॉडबैंड, मोबाइल और 3जी सेवाओं के चलते लोगों का रुझान तार सेवा से काफी घटा है। रिकॉर्ड दस्तावेज या सबूत के लिए चंद लोग ही इसका प्रयोग करते हैं। आंकड़ों के अनुसार आगरा में 1980 में हर रोज टेलीग्रामों की संख्या 15000 से ज्यादा थी, अब केवल 40-50 टेलीग्राम होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राम साल में एक या दो होते हैं। लगातार घाटे में चलने से शासन ने अब इस संचार सुविधा को बंद करने की तैयारी की है।

दिवंगत अर्जुन सिंह  22 अक्तूबर 1986 से 14 फरवरी 1988 तक ही संचार मंत्री रहे थे। उस दौर में टेलीफोन आम आदमी की पहुंच के बाहर थे। फिर भी छोटे कार्यकाल के बावजूद श्री सिंह ने देश में न केवल संचार क्रांति की मजबूत आधारशिला रखी, बल्कि बहुत से साहसिक फैसले लिए। सैम पित्रोदा का असली नाम भी अर्जुन सिंह के संचार मंत्री काल में ही हुआ। सेंटर फार डिवलपमेंट आफ टेलीमेटिक्स (सी-डाट) के कार्यकलापों को श्री सिंह का खुला समर्थन मिला जिस नाते  स्वदेशी प्रौद्योगिकी को पंख लगे।

भारत सरकार ने जनवरी 1985 में डाक विभाग और दूरसंचार विभाग को अलग कर उनका पुनर्गठन कर दिया था। श्री सिंह ने दूरसंचार सेवाओं के साथ श्री सिंह का ध्यान हमेशा डाक सेवाओं की गुणवत्ता के विकास पर रहा है। आज संचार क्रांति तथा मोबाइल-इंटरनेट युग में बहुत तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं।  खास तौर पर मोबाइल फोनो के आंकड़े बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन 1995 से पहले आंकड़े इतने तेजी से नहीं बढ़ते थे और किसी के घर फोन लगना एक बड़ी घटना होती थी। अरसे तक संचार का  सारा दारोमदार केवल डाक सेवाओं और स्थिर फोनों के साथ टेलीग्राम पर टिका हुआ था। तब टेलीफोन स्टेटस सिंबल बना हुआ था और फोन लगना बहुत टेढी खीर था। बहुत से लोग 10-10 साल से टेलीफोन विभाग का चक्कर लगाते-लगाते थक गए थे पर उनकी प्रतीक्षा सूची खत्म नहीं होती थी।

1986-87 में 3.47 लाख टेलीफोन लगने के साथ भारत में कुल टेलीफोनों की संख्या बढ़ कर 39.89 लाख हो गयी। 1986-87 में मीटर के आधार पर हुई एसटीडी और स्थानीय कालों की संख्या 1648 करोड हो गयी,जबकि 1985-86 में यह  1382 करोड़ थी। वर्ष 1987-88 में मीटर की गयी कालों की संख्या 1933.4 करोड़ पार कर गयी। 1986-87 में 819 नए ग्रामीण टेलीफोन एक्सचेंज लगाए गए ,जबकि गांवो में संचार सुविधाओं के विकास के तहत 1558 पीसीओ लगे। अर्जुन सिंह ने तार सेवाओं (टेलीग्राम) के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया। तार वितरण सेवा में व्यापक सुधार का फैसला करते हुए अर्जुन सिंह ने यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि  500 प्रमुख शहरों तथा कस्बों में 99 फीसदी तार 12 घंटों में बांट दिए जायें। कार्यरूप में यह फैसला साकार भी हुआ और सर्वेक्षणों में प्रगति का शानदार परिणाम निकला।

राजीव गांधी भारत में विश्वस्तरीय संचार तंत्र चाहते थे। उनकी ही पहल पर 1984-85 में भारत में पहली बार मोबाइल टेलीफोन सेवा की दिशा में गंभीर पहल हुई। कार टेलीफोन के नाम से यह सेवा  31 दिसंबर 1985 को बहुत सीमित आधार पर दिल्ली में शुरू की गयी थी।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​ की रिपोर्ट.

साधना न्यूज ने मांगी राजीव शर्मा से लिखित माफी, नकद भुगतान किया

भड़ास फॉर मीडिया पर खबर छपने के बाद साधना न्यूज प्रबंधन को झुकना पड़ा. साधना न्यूज के आउटपुट एडिटर राजीव शर्मा का संघर्ष सफल हो गया है. आखिरकार साधना न्यूज के प्रबंधन को राजीव शर्मा से माफी मांगनी पड़ी. साधना के प्रबंधन ने राजीव शर्मा को एक पत्र लिख कर कहा है कि आपको दिया गया चेक संख्या 141205 कतिपय कारणों से अनादृत हो गया है जिसके लिए हम आपसे माफी मांगते हैं (…the cheque no. 141205 got dishonored due to some technical reasons. We, apolozise for the same. As discussed over the phone we hereby pay you Rs…in cash, in place of cheque no.141205.)

इस पत्र के साथ ही साधना प्रबंधन ने राजीव शर्मा को उनके बकाये धन का नकद भुगतान भी कर दिया है. पत्र के अंत में साधना के प्रबंधन ने दोबारा माफी मांगते हुए लिखा है, चेक अनादृत होने के कारण आप को जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, हम उन सभी के लिए आपसे पुनः क्षमा मांगते हैं (We again apologize for the entire situations you

राजीव शर्मा
राजीव शर्मा
have gone through due to the same). ध्यान रहे कि राजीव शर्मा को साधना प्रबंधन ने तीन जून को उनके बकाया वेतन का चेक जारी किया था और राजीव शर्मा ने भी लगभग एक महीने से चले आ रहे विवाद को अपने इस्तीफे के साथ समाप्त कर दिया था.

दस जून को राजीव शर्मा के बैंक ने उन्हें बताया कि चेक जारी करने वाले यानि शार्प आई एडवरटाइजिंग प्राईवेट लिमिटेड बिहार प्रोजेक्ट के खाते में पर्याप्त रकम नहीं है. इसलिए चेक बाउंस हो गया है. इस चेक पर उपरोक्त कम्पनी की तरफ से किसी मयंक गुप्ता ने हस्ताक्षर किए थे. चेक बाउंस होते ही राजीव शर्मा ने इसकी जानकारी अपने मित्र -परिचितों को दी और कानूनी कार्रवाई की सलाह ली. इस घटना की जानकारी भड़ास फॉर मीडिया को मिली तो भड़ास ने राजीव शर्मा के संघर्ष को सहारा देते हुए चेक बाउंस होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की. नतीजतन, अपनी प्रवृत्ति से विपरीत साधना प्रबंधन को माफी मांगते हुए राजीव शर्मा को नकद भुगतान करना पड़ा.

साधना न्यूज के इतिहास में बकाया पैसा वापस मिलने के चंद उदाहरण ही हैं. सबसे पहले एनके सिंह के कार्यकाल में बिहार की एक पार्टी के कुछ लाख वापस हुए थे. उसके बाद एसएन विनोद की धमकी के बाद भोपाल की पार्टी के पैसों की वापसी किश्तों में शुरी हुई और अब राजीव शर्मा को  बकाया पैसा वापस मिला है. इनके अलावा साधना न्यूज के ज्यादातर बकायदार चकवे की तरह बारिश के मौसम में स्वाति नक्षत्र का इंतजार ही कर रहे हैं.

TV18 launches News18 India

TV18 Broadcast, India’s premier news and entertainment network, announced the launch of ‘Newsl8 India’, a 24-hr television news channel designed to give global audiences a window into the world’s largest democracy. Newsl8 India will be distributed in the UK and other International markets by IndiaCast, a strategic joint venture between TV18 and Viacoml8 and one of India’s largest multi-platform content aggregators. Following the entry into UK, Newsl8 India will be launching across the globe including key diaspora markets such as the US, Canada, Middle east and Australia.

Being a part of one of India’s most respected news stables across television and digital media, Newsl8 India is well-positioned to set a new benchmark amongst South Asian media offerings globally. Led by some of the most credible faces in Indian journalism, Newsl8 India is being produced by the same award winning editorial team that runs TV18’s market leading news services.

Networkl8 Group, owner of TV18 and one of India’s largest media companies, is home to some of the country’s most influential news brands including the nation’s most awarded English news channel (CNN-IBN), No.l English and Hindi business channels (CNBC-TV18 & CNBC Awaaz) and a suite of market leading digital brands in the current affairs & opinion and financial news spaces (ibnlive.com, moneycontrol.com, firstpost.com). Cumulatively, the news services of the group reach out to more than 100 million viewers on an average every month and the group’s digital news brands attract over 18 million unique visitors on an average every month, according to TAM and comScore respectively.

 

Unlike other Indian news services available in international markets which are essentially re-transmissions of the local domestic channels in India, Newsl8 will offer a dynamic and customized blend of programming that reflects the interests and needs of the large and highly engaged diaspora spread across the globe.

Through a power packed format including bulletins, news feature shows, exclusive interviews and rich graphics, Newsl8 India will deliver a wide gamut of content spanning general and business news. From the latest in politics and current affairs to the inside track in Bollywood, from the latest trends in the economy to the top newsmakers, the channel will be a one-stop destination for all the latest from the sub-continent. Program schedules will also reflect the day part viewing habits of respective markets, thereby ensuring greater relevance and impact for audiences.

Commenting on this, Raghav Bahl, Founder & Editor, Networkl8 said “India’s resurgence on the world stage is evident from the almost insatiable global interest in its present as well as its future. This presents a compelling opportunity to deliver a service that fulfills this need in a relevant manner and Newsl8 India is our answer”

Adding further, B. Sai Kumar, Group CEO, Networkl8 commented “We believe that apart from mass entertainment, news can be another major growth driver for good quality Indian content, if it is distilled well for global audiences. Newsl8 India is a pioneering and innovative service designed to do so and in the process bring the best in Indian journalism to households around the world in a unique way”

Speaking on this development, Rajdeep Sardesai, Editor-in-Chief, IBN Network said “It is an honour and a delight to be part of the launch of Newsl8 India in the United Kingdom and bring India's most credible and formidable news network to a global audience. At a time when the world is watching India, we hope to be the world’s window into India” (indiainfoline)

ABP News given UK licence for launch

Hindi news channel, ABP News is set for a relaunch in the coming weeks after media regulator Ofcom awarded the station a licence to broadcast in the UK. ABP News – formely Star News, was available for a short time in its new avatar before Star TV Network dropped it from its bundle last year.

After eight years of association, Star TV India and the Ananda Bazaar Patrika (ABP) Group parted ways resulting in the rebranding of Star News to ABP News. Last year, Media Content and Communication (MCCS) announced that Hindi news channel, Star News will be rebranded to ABP News.

ABP News is expected to be launched by Globosat, the same company behind the distribution of Sahara One in the UK. However, the company refused to comment at this stage.

ABP News will be the latest Asian news channel to launch in the saturated UK market. Recently, Pakistani channel, Geo Tez launched in the market, followed by ZEE News – which officially begins broadcasting later this month. CNN IBN from Viacom18 is also set for launch in the coming weeks.

स्ट्रिंगर से पैसे लेने के चक्कर में सूर्यकांत की कुर्सी गई, अनिल भास्कर मेरठ हिंदुस्तान के नए संपादक

 दैनिक हिंदुस्तान, मेरठ के संपादक सूर्यकांत द्विवेदी की कुर्सी चली गई है. सूत्रों के मुताबिक उन्हें हिंदुस्तान के दिल्ली आफिस से अटैच किया जा रहा है. मेरठ का नया संपादक अनिल भास्कर को बनाया गया है जो अभी तक हिंदुस्तान, बनारस में संपादक के पद पर काम कर रहे हैं. सूर्यकांत द्विवेदी पर मेरठ के मवाना जिले के पत्रकार संदीप नागर ने आरोप लगाया कि उनके काफी पैसे सूर्यकांत ने लिए हैं और लौटाए नहीं.

धोखाधड़ी के इस प्रकरण की जांच हिंदुस्तान प्रबंधन ने अपने स्तर पर कराई और मामले को सच पाया. हालांकि शशि शेखर ने सूर्यकांत को बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन हिंदुस्तान प्रबंधन ने सूर्यकांत को कुर्सी से हटाने का फरमान जारी कर दिया है. सूर्यकांत कब तक दिल्ली आफिस से जुड़े रहेंगे, इस पर भी संदेह जताया जा रहा है.

भड़ास तक सूचनाएं bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

केके उपाध्याय या तीरविजय सिंह होंगे हिंदुस्तान लखनऊ के नए संपादक, नवीन जोशी पटना जाएंगे!

हिंदुस्तान में एक चर्चा बहुत तेज है कि नवीन जोशी की लखनऊ से विदाई होने वाली है. उन्हें पटना भेजे जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है. लखनऊ में कौन आएगा, इसको लेकर दो चर्चाएं हैं. या तो तीरविजय सिंह को संपादक बनाकर लखनऊ बिठाया जाएगा या फिर केके उपाध्याय को पटना से लखनऊ भेजा जाएगा. दोनों ही लोग हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशिशेखर के बुहत करीबी हैं.

सूत्रों के मुताबिक इस फेरबदल पर फैसला हफ्ते भर के भीतर होना है. बनारस, मेरठ, अलीगढ़ आदि यूनिटों में फेरबदल के बाद अब सबकी निगाहें लखनऊ में होने वाले फेरबदल पर है.

भड़ास तक अपनी बात bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

हिन्दुस्थान समाचार ने सौंपा सुभाष निगम को राष्ट्रीय ब्यरो व अनिल वर्मा को दिल्ली का दायित्व

नई दिल्ली। हिन्दुस्थान समाचार के दिल्ली केन्द्र में पुराने व अनुभवी पत्रकारों को जोड़ा जा रहा है। पिछले दो दशक से अधिक समय तक यूनीवार्ता में काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुभाष निगम को राष्ट्रीय ब्यरो प्रमुख और एचटी मीडिया में विवाद के कारण झारखण्ड जागरण से जुड़े अनिल वर्मा को दिल्ली ब्यूरो में अच्छे-खासे मानदेय पर लाया गया है। इसके अलावा हेमन्त कुमार विश्नोई जो पहले नवभारत टाइम्स से जुड़े रहे अब कार्यकारी संपादक के नाते हिन्दुस्थान समाचार को पिछले एक साल से दिशा देने में लगे हैं।

इनके आने के बाद इसी महीने यहां पर राष्ट्रीय ब्यूरो के लिए नयी टीम भी बनाई गयी है। इस टीम में आज समाज में काम कर रही स्वाति जैन, महामेधा में काम कर रहे आलोक कुमार, श्रुति संवर्धनी से नीतू राय और कई पत्र-पत्रिकाओं में लेखन का काम कर रही वंदना शर्मा को जोड़ा गया है। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में  हिन्दुस्थान समाचार ने देश के लगभग सभी राज्यों में अपने काम का विस्तार करते हुए चार सौ से अधिक छोटे व मझोले समाचार पत्रों को अपना सब्सक्राइबर बनाया है।

अब इसी को और विस्तारित करते हुए एजेन्सी की नजर बड़े समाचार पत्रों पर है जिसके लिए राजधानी में इस नयी टीम को लगाया गया है। वैसे देखा जाए तो बहुभाषी संवाद समिति के नाते इस एजेन्सी ने अपना विस्तार और ग्राहक अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में अच्छा-खासा बना लिया है लेकिन हिन्दी भाषा के समाचारों को लेकर अभी तक कुछ खास करिश्मा नहीं कर पायी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड व बिहार को छोड़ दिया जाए तो अन्य राज्यों में इस एजेंसी की सेवा लेने वाले समाचार पत्र न के बराबर हैं। अब देखना यह है कि इस नयी टीम के आने के बाद राजधानी दिल्ली सहित राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमांचल, जम्मू-कश्मीर में यह एजेंसी अपना पांव पसारने में सफल हो पाती है कि नहीं।

”न्यूज 18 इंडिया” नाम से ग्लोबल न्यूज चैनल लाने वाले है नेटवर्क18 समूह

रीजनल या नेशनल नहीं, ग्लोबल न्यूज चैनल लाने जा रहा है नेटवर्क18 समूह. नाम है 'न्यूज18 इंडिया'. इस चैनल को अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, मिडिल ईस्ट और आस्ट्रेलिया को खासकर ध्यान में रखकर लांच किया जा रहा है. चौबीसों घंटे के इस न्यूज चैनल को ग्लोबल मार्केट को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

अमेरिका समेत कई देशों में इस चैनल के डिस्ट्रीब्यूशन का काम इंडीकास्ट देखेगा. नेटवर्क18 के संस्थापक और एडिटर राघव बहल का कहना है कि विश्व पटल पर भारत के उभार को देखते हुए यह जरूरी है कि देश का एक ऐसा न्यूज चैनल दुनिया के सामने हो जो भारत की सही तस्वीर पेश करे.

मनोज पमार बने बनारस के संपादक, अलीगढ़ की जिम्‍मेदारी रामकुमार को

: अनिल भास्‍कर जाएंगे मेरठ : हिंदुस्‍तान से खबर है कि अलीगढ़ के संपादक मनोज पमार को बनारस का संपादक बनाया गया है. अलीगढ़ में एनई रामकुमार को नया संपादकीय प्रभारी बनाया गया है. सूत्रों का कहना है कि कल मनोज पमार को विदाई दी गई वहीं रामकुमार का स्‍वागत किया गया. रामकुमार लंबे समय से हिंदुस्‍तान से जुड़े हुए हैं. उन्‍होंने अपना प्रभार संभाल लिया है. 
दूसरी तरफ खबर आ रही है कि बनारस के नए स्‍थानीय संपादक के रूप में मनोज पमार एक दो दिन में ज्‍वाइन कर सकते हैं. हालांकि उनके ज्‍वाइन करने की तिथि की जानकारी नहीं मिल पाई है. बनारस के स्‍थानीय संपादक अनिल भास्‍कर को मेरठ भेजा जा रहा है. संभव है कि ये भी अगले कुछ दिनों में मेरठ के लिए रवाना हो जाएं. मेरठ के संपादक सूर्यकांत द्विवेदी को कहां भेजा जाएगा इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले बनारस यूनिट को मजबूत करने के लिए मनोज पमार को यहां भेजा जा रहा है. उनके नेतृत्‍व में ही अलीगढ़ यूनिट ने हिंदुस्‍तान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा. 

‘चैनल वन’ के न्यूज डायरेक्टर संजय पाठक समेत 18 पत्रकारों का इस्तीफा!

एक बड़ी खबर 'चैनल वन' से आ रही है. बताया जा रहा है कि इस चैनल के संपादक संजय पाठक समेत 18 पत्रकारों ने एक साथ चैनल से वाकआउट कर दिया है. कुछ लोगों का कहना है कि इन लोगों ने इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे की वजह क्या है, इस बारे में भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक अजीज बर्नी को चैनल वन में डायरेक्टर बना कर लाए जाने से संजय पाठक और उनकी टीम के लोग खफा थे. साथ ही ये लोग प्रबंधन पर वादाखिलाफी का भी आरोप लगा रहे हैं. प्रबंधन ने जो जो वादे इन लोगों से किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया. कुछ का कहना है कि इस्तीफे का तात्कालिक कारण एडिटोरियल की किसी महिला पत्रकार का ग्राफिक के किसी लड़के से हुआ झगड़ा है.

ग्राफिक के लड़के को अजीज बर्नी की तरफ से सपोर्ट मिला और लड़की को संजय पाठक की तरफ से. यह झगड़ा खूब आगे बढ़ा और दोनों पक्षों में जमकर तकरार हुई. बाद में संजय पाठक और उनकी टीम के लोग वाकआउट कर गए. बताया जा रहा है कि संजय पाठक समेत 18 पत्रकारों की प्रबंधन से बातचीत जारी है. देखना है कि यह मसला सुलझता है और सभी लोग वापस काम पर आते हैं या प्रबंधन इनका इस्तीफा स्वीकार करता है. चैनल वन की हिस्ट्री रही है कि यहां कोई भी संपादक देर तक नहीं टिक पाता.

इस प्रकरण के बारे में अगर आपको भी कुछ पता हो तो नीचे कमेंट बाक्स में लिखें या भड़ास तक मेल bhadas4media@gmail.com भेजें. नाम गोपनीय रखा जाएगा.

मंत्री जी कहिन- ”मायावती जैसी बदसूरत औरत को आप लोग पांच साल कैसे झेल सकते हो?” (देखें वीडियो)

महिलाओं के सम्मान और गरिमा को लेकर प्रदेश के राजनेता पूरी तरह लारवाह बने हुये है। यहां तक प्रदेश की पूर्व महिला मुख्यमंत्री के लिए भी राजनेता गलत शब्दों और भावों का सार्वजनिक प्रयोग करने मे पीछे नहीं है। उ.प्र. सरकार के पर्यटन मंत्री और सपा के प्रदेश महासचिव ओम प्रकाश सिंह ने भी सार्वजनिक भाषण के दौरान कुछ ऐसा ही कारनामा किया है।

मामला गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र मे आयोजित सपा के कार्यकर्ता सम्मेलन का है जिसे संबोधित करते हुये उन्होंने पूर्व सीएम मायावती पर अमर्यादित टिप्पणी करने से भी गुरेज नही किया।  उन्होंने जमकर मायावती पर गलत और अशालीन शब्दो का इस्तेमाल कर महिलाओं की गरिमा और सम्मान को खुलेआम ठेस पहुंचायी। उप्र के पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने सपा कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा- ''आप लोग मायावती जैसी बदसूरत औरत को पांच साल कैसे झेल सकते हो?'' ओम प्रकाश की इस टिप्पणी पर सियासत गर्माने के पूरे आसार हैं।

मंत्री के भाषण का वीडियो ये है, सुनने के लिए क्लिक करें…

http://www.bhadas4media.com/video/viewvideo/728/news-incident-event/mayawati-ko-badsurat-aurat-kaha-omprakash-singh-ne.html

गाजीपुर से केके की रिपोर्ट.

यूपी के कैबिनेट मंत्री ने मायावती के लिए यह क्या कह डाला! (देखें वीडियो)

Shambhu Dayal Vajpayee : उप्र के पर्यटन मंत्री ने गाजीपुर में जनसभा में कहा कि '' आप लोग मायावती जैसी बदसूरत औरत को पांच साल झेल सकते हो तो ………'' । ये मंत्री कोई ओम प्रकाश बताये जाते हैं। क्‍या ऐसे शख्‍स को मंत्रि परिषद से बर्खास्‍त कर आपराधिक धाराओं में मामला नहीं चलाया जाना चाहिए ? आप निजी तौर किसी से नफरत कर सकते हैं, उसके विचारों से असहमत हो सकते हैं , पर क्‍या आप अखिलेश सरकार के मंत्री हैं , इस लिए एक बडी पार्टी की प्रमुख और तीन तीन बार मुख्‍यमंत्री रह चुकीं सम्‍मानित नेता को कुछ भी कहने की छूट दी जानी चाहिए ?

Riyaz Hashmi ऐसे व्यक्ति को मंत्री पद पर रहने का नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। यह तो मंत्री पद की संवैधानिक शपथ के विपरीत और नस्लभेद की श्रेणी में आता है। राजाराम पांडेय तो एक आइएएस अधिकारी की तारीफ करने के बाद बर्खास्त हो गए, लेकिन ओमप्रकाश शायद नहीं किए जाएंगे, क्योंकि उन्होंने किसी आइएएस को नहीं बल्कि मायावती को निशाना बनाया है। भगवान इन नेताओं को सदबुद्धि दे।
 
Shambhu Dayal Vajpayee रियाज भाई , आज कल नेताओं में किसी के बारे में कुछ भी बोल कर चर्चा में आने की खतरनाक प्रवृत्ति बढ रही है।इससे समाज में विद्वेष फैलता है। ऐसे गैर जिम्‍मेदार लोगों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए।
 
Bareilly Live ऐसे लोग मानसिक दिवालियापन के शिकार हैं इनको तत्काल बर्खास्त पर आपराधिक मुकदम दर्ज करवाना चाहिए किन्तु यह देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे लोगों के खिलाफ र्को कार्रवाई नहीं होती…ऐसे लोग जुबान फिसन गयी…या फिर मीडिया ने बयान को तोड़मरोड़कर छाया या दिखाया… की बात कहकर छूट जाते हैं
   
Ajai Bharti Sir u are very right there has to be some defenive administrative action against him
    
Shambhu Dayal Vajpayee Bareilly Live : इसमें तो जुबान फिसलना जैसा भी नहीं कह सकते। बाकायदा अपने भाषण में कहा है। चूंकि मायावती जी के बारे में कहा है इस लिए संभव है कि मुख्‍यमंत्री या सपा नेतृत्‍व मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई न करे।
     
Shambhu Dayal Vajpayee Ajai Bharti : जी डाक्‍टर साहब, मंत्री होकर अगर उसे वरिष्‍ठ नेता का और वह भी महिला का सम्‍मान करना नहीं आता तो उसे पद रहने का अधिकार नहीं है और उसे सबक मिलना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार शंभू दयाल बाजपेयी के फेसबुक वॉल से.


मंत्री के भाषण का वीडियो ये है—

http://www.bhadas4media.com/video/viewvideo/728/news-incident-event/mayawati-ko-badsurat-aurat-kaha-omprakash-singh-ne.html

अथ श्री महाफिक्सर कथा

जब मैं आचार्य सत्यवचन से मिलने पहुँचा तो वे किसी असंतुष्ट नेता की तरह पके हुए बैठे थे। मुझे पता नहीं था किस वजह से, पंडिताइन से झगड़े के कारण या किसी यजमान द्वारा मनचाही दक्षिणा न दिए जाने के चलते। मगर जैसे ही मैंने आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का ज़िक्र छेड़ा वे ऐसे फट पड़े, जैसे मोदी को फेंकू या राहुल को पप्पू कहने पर उनके समर्थक फट पड़ते हैं। कहने लगे-ये टीवी अख़बार वाले नादान हैं, नालायक हैं। कुछ अता-पता है नहीं, बस दिन-रात फिक्सिंग का रोना लिए बैठे हैं।

मैंने कहा- मीडिया की चिंता वाज़िब है, क्योंकि बात ही ऐसी है। आख़िरकार इतने बड़े टूर्नामेंट में पैसे के बल पर नतीजे बदले जा रहे हों और उनमें क्या खिलाड़ी, क्या प्रबंधक और क्या टीम मालिक सब शामिल हों तो उनका जलना, उबलना, पिघलना सब जायज़ है।

ख़ाक़ जायज़ है, वे उसी लपलपाती ज़बान से बोले-आप भी उसी बिरादरी के हैं इसलिए उनकी तरफदारी तो करेंगे ही। मगर मैं सत्यवचन सच कहता हूँ कि आप लोगों को न भारतीय संस्कृति का पता है न इतिहास का। एक घटना की पूँछ पकड़ ली और लगे उछल-कूद मचाने। थोड़ा पढ़-लिख लिया होता तो ऐसी मूर्खता की बात न करते।

अब फटने की बारी मेरी थी। मैंने भी ममता बैनर्जी की मुद्रा अख़्तियार करते हुए कहा-अब इसमें धर्म, संस्कृति और इतिहास कहाँ से आ गया। मामला खेल का है और सट्टबाज़ों द्वारा मैचों के नतीजों को प्रभावित करके दर्शकों के साथ धोखाधड़ी करने का है। आप इसे कहाँ से कहाँ लिए जा रहे हैं। यही नहीं, एक ही साँस में आप सारे पत्रकारों को बेवकूफ़ भी घोषित किए जा रहे हैं। ये तो सरासर ज़्यादती है।

यही तो तुम पत्रकारों के साथ मुश्किल है। दिन-रात जिस तिस के बारे में भी अंट-शंट बोलते रहोगे तब कुछ नहीं और अगर किसी ने एक लाइन कह दी तो मिर्ची लग जाती है। शुक्र है तुमने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला नहीं बताया, वर्ना पत्रकारों का अगला क़दम यही होता है। ख़ैर अब धीरज धारण कर ध्यान से ज्ञानवाणी सुनो- आईपीएल में जो हुआ केवल वही फिक्स नहीं था, बल्कि दुनिया भर में जो कुछ हो रहा है, वह सब फिक्स है।

मैं इस गुगली से अवाक था। समझने की कोशिश करने लगा कि आख़िरकार आचार्य सत्यवचन कहना क्या चाह रहे हैं। मेरी भौचक मुखमुद्रा को देखकर वे प्रसन्न हो गए और प्रफुल्लित होकर बोले- तुम्हारी ये मुद्रा ही बताती है कि तुमने शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया है इसलिए तुम ज्ञानशून्य हो। अच्छा ये बताओ ग्रह, नक्षत्र, तारे, पृथ्वी सबकी गति, दिशा आदि तय है या नहीं?

मैंने कहा है।

यानी वे सब फिक्स हैं। इसी तरह से दिन-रात और ऋतु परिवर्तन भी फिक्स हैं? मैंने दबी आवाज़ में कहा हाँ।

तुम ये भी जानते होगे कि हर प्राणी का प्रारब्ध निश्चित है, उसी के अनुसार उनकी जीवनचर्या पूरी होती है। वे अपने भाग्य से बँधे होते हैं और उनके कर्म पहले से फिक्स होते हैं?

मैं इसे नहीं मानता। भाग्य वगैरा कुछ नहीं होता। मनुष्य अपना भाग्य खुद बनाता है।

आचार्य कुपित होकर बोले-ये तुम नहीं तुम्हारा अहंकार बोल रहा है। ये अटल सत्य है कि इस नश्वर संसार मे सब कुछ फिक्स है। हर प्राणी उसी फिक्सिंग के हिसाब से काम करता है। श्रीसंत, मयप्पन या श्रीनिवासन किसी की क्या बिसात कि वे अपनी मर्ज़ी से कुछ फिक्स कर लें। वे जो कर रहे हैं उस…ऊपर की ओर देखते हुए कहा…महाफिक्सर के आदेश पर कर रहे हैं। वह नहीं चाहेगा, तो इस संसार में एक पत्ता भी नहीं खड़केगा।

देखिए आप फालतू की बात कर रहे हैं…ये नियतिवादी, पुराणपंथी तर्क मैं बहुत सुन चुका हूँ। आपकी मानें तो किसी का कोई दोष ही नहीं है, क्योंकि वे सब तो आपके महाफिक्सर के आदेश पर कर रहे हैं।

दोष उनका अगर है तो उनकी सज़ा भी फिक्स की जा चुकी है। अगर महाफिक्सर ने किसी को दोषमुक्त माना है तो कोई भी उसका कुछ नहीं कर सकता।

आपके कहने का मतलब है कि कोई कुछ न बोले, कुछ न करे। जिसकी जो मर्ज़ी आए करे, क्योंकि आपके महाफिक्सर की यही इच्छा है।

नहीं ज़रूर करो….मगर मत भूलो कि तुम लोग भी जो कर रहे हो वह भी उसी की मर्ज़ी से हो रहा है। ये अखिल ब्रम्हांड उस महाफिक्सर के लिए आईपीएल जैसा ही तो है। वह खेलता रहता है, खिलाता रहता है। उसे सारे मैचों के परिणाम पहले से पता होते हैं क्योंकि उसी ने तो उन्हें फिक्स किया है।

वे गीता का पाठ पढ़ाने ही वाले थे कि मेरा धैर्य चुक गया। उन्होंने यदा यदा हि धर्मस्य उच्चारा ही था कि मैंने बोल पड़ा- अब आप ये कहेंगे कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होगी प्रभु अवतार लेंगे और जो कुछ होगा उन्हीं के करने से होगा, क्योंकि वह भी फिक्स है? आचार्य जी ने मुस्कराते हुए सहमति दर्शाई।

मैंने चिढ़ाते हुए कहा-क्या इस फिक्सर मंडली में ब्रम्हा, विष्णु, महेश, इंद्र आदि शामिल हैं? हर प्राणी के के कर्मों का बही-खाता रखने वाले चित्रगुप्त भी फिक्सिंग में हाथ बँटाते होंगें

आचार्य की भृकुटियाँ तनने लगीं और गौर वर्ण लाल होने लगा। मैंने विदा लेने के अंदाज़ में उठते हुए कहा-महाराज असली महाफिक्सर तो कुबेर हैं और वे ऊपर नहीं इसी पृथ्वीलोक में विराजमान हैं। ये कुबेर मंडली सब कुछ फिक्स कर रही है। इसने धर्म, समाज, राजनीति, अर्थशास्त्र सबको फिक्स कर दिया है और क्षमा कीजिएगा, आप जो कुछ कह रहे हैं वह भी उन्हीं की फिक्सिंग का परिणाम है। शास्त्रों और पुराणों से फुरसत मिले तो इस पर ज़रा विचार कीजिएगा, आपका ज्ञानवर्धन होगा….चलता हूँ…..नमस्कार।

लेखक मुकेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई चैनलों के एडिटर इन चीफ रह चुके हैं.

जिस भी घर की ये बहू है, उस घर को उसका ये ‘पब्लिक नाच’ स्वीकार है तो फिर पल्लू की बाधा क्यों? (देखें वीडियो)

Shruty Dubey : जरा इस नृत्य को देखिए…क्या आपको नहीं लगता कि ये लड़की कमाल की डांसर है…भले ही वो एक चालू फिल्मी गीत पर डांस कर रही है…लेकिन उसके हाव भाव, भंगिमाएं, डांस स्टेप्स लाजवाब है। मगर इसी बीच..अपने आपको नृत्य में खो देने के बावजूद वो अपने सिर का पल्ला बार बार…कई बार सहेजती नजर आ रही है। सिर पर आखिर इतना बोझ क्यों…क्यों नहीं सिर पर लदा पल्ला फेंककर वो सुधबुध खोकर नाच में डूब जाए…

जिस भी घर की ये बहू है…उस घर को उसका ये 'पब्लिक नाच' स्वीकार्य है…तो फिर पल्लू की बाधा क्यों। और ससुराल वगैरह छोड़िये…ये लड़की खुद क्यों नहीं इस बोझ को उतार फेंकती। साफ दिख रहा है कि लड़की कम उम्र की है…शायद हाल ही में शादी हुई हो..उसके नाच से भी साफ जाहिर है कि भीतर से वो खुली-खुली उन्मुक्त सी है….फिर ये पल्ले का नाटक क्यों। मुझे इस नृत्य को देखकर बहुत अच्छा लगा…लेकिन ये पल्ला फांस की तरह चुभ रहा है….

http://bhadas4media.com/video/viewvideo/727/man-and-struggle/pallu-and-dance.html


    Shifalee Pandey : same feeing…same pinch..shruti
 
    Nimish Kumar : ये कुछ दिन पहले मेरे रिपोर्टर ने बताया था। हम इस पर जल्दी ही स्टोरी करने वाले है। वैसे ये हिंदुस्तानी तरीके से की गई अरैंज मैरिज का नतीजा है, जहां मां-बाप की सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी की शादी होती है। सोचिए जरा यदि इस लड़की को एक खुला आसमां मिलता तो? ये शायद किसी डॉस रियलटी शो की सुपरस्टार हो चुकी होती? लेकिन ऐसी हजारों, लाखों प्रतिभाएं हमारे देश में अपने टेलेंट की बलि देते है, साल-दर-साल।
 
    Shruty Dubey : Nimish Kumar थोड़ा सा वैचारिक मतभेद है…हिंदुस्तानी तरीके की अरेंज मैरिज ही नहीं…कथित-तथाकथित लव मैरिज के बाद..परिवार की स्वीकृति के बाद लव मैरिज से आई बहू से भी अपेक्षा वही होती है…जो अरेंज मैरिज के बाद की जाती है। क्या आपको लगता है कि लव मैरिज से ब्याही लड़कियों का ससुराल अचानक ही अल्ट्रामार्डन हो जाता है….?
 
    Shilpi Saurabh Misra : मैं आपसे पुर्णतः सहमत हूँ

श्रुति दुबे के फेसबुक वॉल से.

डांस वीडियो देखने के लिए उपरोक्त तस्वीर पर क्लिक कर दें.


और भी (देखें वीडियो)

शशांक शेखर सिंह के माथे पर मोहिंदर सिंह की मौत अमिट दर्ज है

Kumar Sauvir : शशांक शेखर सिंह के लिए ही शायद छन्नूलाल जी ने यह लाइनें गायीं हैं:- सोना साथ जाएगा ना चांदी जाएगी। सजधज के जिस दिन मौत की शहजादी आयेगी। कहने वाले लोग तो तब भी शशांक शेखर सिंह पर खूब मर्सिया पढ़ते थे और आज भी पढ़ रहे हैं। कहते हैं कि लाखों करोड़ की लूट और करीब 25 हजार करोड की सम्पत्ति वाले यूपी के आईएएस अफसरों को कुत्ता बना डालने वाले शशांक शेखर सिंह के माथे पर मोहिंदर सिंह की मौत अमिट दर्ज है।

राजू शर्मा को इस्तीफा दिलाने में एक बड़ा अध्याय शशांक-संहिता में लिखा जा चुका है। जरा पूछिये किसी नेता-अफसर से, कि एक पायलट रहा शख्स कैसे प्रदेश का कैबिनेट सक्रेट्री बन गया। कैसे बड़े-आला आईएएस अफसर उसके सामने अपनी पूंछ अपने पेट में घुसेड़ लेते थे। कैसे शशांक सिंह ने सरकारी नौकरी में रहते हुए भी जाट आंदोलन करवा दिया और 17 दिनों तक लखनऊ-दिल्ली की ट्रेनें टप्प कर दीं। वह तो हाईकोर्ट ने जमकर लताड़ा, तब शशांक का तेज ढला।

किसी कांग्रेसी से कि पूछिये कि कभी यूपी यूथ कांग्रेस में रहा रामपाल सिंह आज कैसे अरबों की अकूत सम्पत्ति का मालिक बन गया। कैसे अचानक वह नोएडा में एक बड़ा गांव बेनामी हासिल कर गया और जिसके इशारे पर उसके ऊपर करीब 300 करोड़ रूपयों का खर्च कर एक बड़ा ओवर-ब्रिज बना दिया गया। नतीजा, यहां की जमीन खरबों-अरबों तक उचक गयी। और हां, वह महिला कौन है जिसके पति को शशांक शेखर सिंह ने सचिवालय में कोई बहुत बड़ा ओहदा अता किया।

कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

पीटीआई को ढेर सारे पत्रकार चाहिए, आवेदन करें

जानी-मानी न्यूज एजेंसी पीटीआई उर्फ प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को ढेर सारे पत्रकारों की जरूरत हैं. पर पीटीआई को पत्रकार उसकी अंग्रेजी सर्विस के लिए चाहिए और दिल्ली में चाहिए. न्यूज़ कॉर्डिनेटर, कॉपी एडिटर्स / रीराइट पर्सन, सीनियर कॉरसपोंडेंट / रिपोर्ट्स और प्रोबेशनरी जर्नलिस्ट के लिए वैकेंसी है.

हर पद के लिए अलग-अलग योग्यता की मांग की गई है. सभी पदों के लिए पत्रकारिता में 50 फीसदी अंकों के साथ डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए. न्यूज़ एजेंसी बैकग्राउंड वाले आवेदकों को इसमें प्राथमिकता दी जायेगी. इसके लिए 18 जून 2013 तक आवेदन कर सकते हैं. अधिक जानकारी को पीटीआई की वेबसाइट पर जाएं. नीचे पीटीआई की वेबसाइट से कापी करके डिटेल दिया जा रहा है..

The Press Trust of India Ltd.

  • PTI is looking for experienced, dynamic and result oriented journalists for its English service. Journalists with proven skills are required for the following posts, most of them in Delhi.

    1.    News Coordinators

    Must have at least 6 years’ experience in mainline English media in editing and handling news desk operations. They will be required to coordinate news coverage with outstation PTI bureaux. Age not more than 35 years.

    2.    Copy Editors/Rewrite persons

    Must have at least 5 years’ experience in mainline English media. Proficiency in English language and good re-writing skills are a must. Age not more than 33 years.

    3.    Senior Correspondents / Reporters

    Must have at least 5 years’ experience of which minimum 4 years in field reporting in mainline English media. Age not more than 35 years.

    4.    Probationary Journalists

    Candidates should have a minimum of two years’ experience in mainline journalism. Age not over 25 years.

    Minimum qualification for the above posts is a degree/diploma in journalism with minimum 50% marks. Candidates with news agency background will be given preference. Application forms can be downloaded from PTI website www.ptinews.com. Filled up forms should be e-mailed highlighting ‘Post applied for’ to hrm@pti.in by June 18, 2013.

  • General Manager (Administration)
    The Press Trust of India,
    PTI Building,
    4, Parliament Street,
    New Delhi-110001
  • Application form is attached. Job Application

टैम और टामियों से दूर भागने लगे टीवी वाले, श्रीअधिकारी ब्रदर्स ने बोला गुडबॉय

टीआरपी और टैम के बवाल से अब ढेर सारे चैनल पीछा छुड़ाने लगे हैं. लंबा चौड़ा पैसा देकर टैम में शामिल होना टीवी वालों को अब अच्छा नहीं लग रहा है. इसी कारण कई चैनलों ने टैम को गुडबाय बोलना शुरू कर दिया है. श्रीअधिकारी ब्रदर्स टेलिविजन नेटवर्क लिमिटेड के तीनों चैनल मस्ती, दबंग और धमाल टैम रेटिंग से बाहर हो गए हैं.

श्रीअधिकारी ब्रदर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, मार्कंड अधिकारी का कहना है कि हमने तीनों चैनलों को टैम रेटिंग से बाहर निकाल लिया है. लोग रेटिंग की वैल्यू को इतना अधिक महत्व दे रहे हैं. रेटिंग के इस खेल में टैम के प्रति ब्रॉडकॉस्टर्स का असंतोष बढ़ता ही जा रहा है. एमएसएम, एनडीटीवी, टीएनएन और साथ ही नेटवर्क18 ने टैम की सदस्यता समाप्त करने पर सहमति बना ली है.
 

‘आज समाज’ अखबार में सेलरी संकट गहराया

चंडीगढ़। कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा के अखबार के कर्मचारी इन दिनों काफी परेशान हैं. इन्हें कई माह से सेलरी नहीं मिली है. कर्मचारियों को सेलरी के नाम पर आए दिन आश्वासन दिए जा रहे हैं. कर्मचारियों को तीन-तीन माह तक की सेलरी नहीं मिल पा रही है. अप्रैल माह की सेलरी अभी तक लटकी है. एक के बाद एक रिपोर्टर और मार्केटिंग वाले संस्थान छोड़ छोड़ कर भाग रहे हैं. अखबार के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट दत्ता भी अब अखबार को बॉए बाए कह गए हैं. इसको अखबार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

अखबार की साख सेलरी के नाम पर खाक हो चुकी है. पूरे हरियाणा में सरकुलेशन बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है. किसी भी शहर में चार अंकों में कापी नहीं हैं केवल अंबाला, गुडग़ांवा, हिसार और भिवानी को छोड़ दिया जाए तो.  इतना ही नहीं सभी ब्यूरो चीफ को हिदायतें दी गई हैं कि कांग्रेस और सीएम के खिलाफ एक खबर ने भेजी जाए, अगर ऐसा कुछ होता है तो नौकरी से हाथ धोने के लिए तैयार रहें.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

प्रभा वर्मा के अखबारी फर्जीवाड़े पर डीएवीपी की गाज

देहरादून। कई अखबार ऐसे हैं जो सिर्फ डीएवीपी की वेबसाइट पर नजर आते हैं, जनता के बीच कतई नहीं. इन समाचार पत्रों को चलाने वाले सम्पादक राज्य सरकार से विज्ञापनों का खेल बड़े पैमाने पर खेल रहे हैं और राज्य सरकारें भी फाइलों तक सीमित होने वाले इन अखबारों को मोटे विज्ञापन देकर इनकी झोली भर रही है.

उत्तराखण्ड राज्य के 503 समाचार पत्र वर्तमान में डीएवीपी से मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों की सूची में शामिल हैं. ज्यादातर समाचार पत्रों की सिर्फ फाइल कापी छपती है और विभागों से मोटी रकम वसूल रहे हैं. इसका कुछ हिस्सा सुचना विभाग के अधिकारियों की जेबों में भी जा रहा है.

प्रभा वर्मा नामक एक महिला दर्जन भर से अधिक समाचार पत्र संचालित करती हैं. ये महिला गलत तरीके से समाचार पत्रों का प्रकाशन कर डीएवीपी से रेट तक हासिल कर चुकी हैं. इन समाचार पत्रों को जिस प्रिन्टिंग प्रेस में छपना दर्शाया गया था वहां उक्त समाचार पत्र छपते तक नहीं थे. उत्तराखण्ड तहकीकात, टाइटैनिक एक्सप्रैस सहित दर्जन भर से अधिक समाचार पत्रों की सम्पादक के तौर पर प्रभा वर्मा का यह खेल खुल गया.

डीएवीपी ने शिकायत होने पर प्रभा वर्मा के समाचार पत्रों को रेट लिस्ट से हटा दिया. वर्तमान में टाइटैनिक एक्सप्रैस वीकली ही डीएवीपी की रेट लिस्ट में शेष रह गया है. प्रभा वर्मा की तरह उत्तराखण्ड की मीडिया में कई अन्य सम्पादक भी यह खेल बखूबी खेल रहे हैं.

तब शशांक शेखर सिंह ने हेलीकॉप्टर मंगा दिया और हम कुछ घंटे में दिल्ली पहुंच गए

Sanjaya Kumar Singh : मसूरी में रेजडेंसी मनोर के उद्घाटन के मौके पर मैं उस समय की उत्तर प्रदेश सरकार के प्रायोजित दौरे पर गया था। उसी समय यूपी एयर का उद्घाटन हुआ था और पहली उड़ान लखनऊ से देहरादून की थी और फिर हमलोग सड़क मार्ग से मसूरी गए थे। दिल्ली से लखनऊ जाने से समय हमें बताया गया था कि शाम को वापस दिल्ली आ जाना है पर वहां पहुंचकर पता चला कि वहीं रुकने का कार्यक्रम था। नए पांच सितारा होटल में ठहरना किसे बुरा लगता। कोई आने को तैयार नहीं था। पर मैं रुकना नहीं चाहता था।

मैंने संबंधित लोगों से कहा कि मुझे वापस दिल्ली जाना है। बताया गया कि यह बंदोबस्त सिर्फ शशांक शेखर सिंह कर सकते हैं। मैंने उन्हें अपना परिचय दिया और दिल्ली आने की इच्छा जताई। पहले तो उन्होंने वहां के कार्यक्रमों की बात बताई और रुकने का आग्रह किया पर मेरे जोर देने पर मान गए और उस जमाने में मसूरी में वहीं बैठे हुए, जब मैं घर फोन नहीं कर पाने के कारण ही वापस आना चाह रहा था, उन्होंने हेलीकॉप्टर मंगा दिया और रेजीडेंसी मनोर से नीचे किसी क्लब से हमने उड़ान भरी और कुछ घंटे में दिल्ली पहुंच गए। शशांक शेखर सिंह की ताकत के कई किस्से सुने पर यह खुद देखा और भोगा हुआ है। उनके निधन की खबर पढ़कर सारी चीजें याद आ गईं।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

ट्रेन पर डेढ़ सौ नक्सलियों का धावा, ड्राइवर अगवा, आरपीएफ जवान शहीद

धनबाद पटना इंटरसिटी ट्रेन पर नक्सलियों द्वारा कब्जा किए जाने की सूचना है. आरपीएफ और नक्सलियों के बीच फायरिंग शुरू हो गई है. ट्रेन के गार्ड को गोली लगी है. एक यात्री की मौत होने की जानकारी मिली है. दर्जनों लोग घायल हैं. नक्सलियों की संख्या करीब डेढ़ सौ बताई जा रही है.

आरपीएफ के जवानों से हथियार छीनने की कोशिश की है नक्सलियों ने. बिहार के जमुई स्टेशन के करीब की यह घटना है. धनबाद और झाझा से राहत ट्रेनें मौके पर भेजी जा रही हैं. हमले के चलते ढेर सारी ट्रेनों का संचालन ठप पड़ गया है. अभी अभी जानकारी मिली है कि धनबाद पटना इंटरसिटी ट्रेन पर नक्सलियों के हमले में आरपीएफ का एक जवान मारा गया है. ट्रेन का ड्राइवर अगवा कर लिया गया है. सीआरपीएफ की टुकड़ी मौके पर पहुंच गई है.

ज्योतिषियों और स्वघोषित धर्मगुरुओं के लिए सरकारी नियामक की मांग

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ने प्रधानमंत्री से ज्योतिषियों और स्वघोषित धर्मगुरुओं के लिए सरकारी नियंत्रक संस्था बनाए जाने की प्रार्थना की है. उनका कहना है कि भारत में काफी बड़ी संख्या में ज्योतिषि और स्वघोषित धर्मगुरु हैं जिनका लोगों पर पर्याप्त प्रभाव है. इनमे से ज्यादातर लोग अपनी सेवाओं के बदले लोगों से विभिन्न रूपों में धन प्राप्त करते हैं, अतः इनके कार्यों को प्रोफेशन (व्यवसाय) कहा जा सकता है. 

अमिताभ और नूतन के अनुसार चिकित्सा, अभियांत्रिकी, दन्त चिकित्सा, क़ानून, वास्तुशास्त्र जैसे अन्य सभी व्यवसायों की तरह आम आदमी के हितों की रक्षा और इन क्षेत्रों में गलत तथा फर्जी लोगों के प्रवेश के रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर नियंत्रण और नियमन की आवश्यकता है. अतः उन्होंने निवेदन किया है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर ज्योतिषियों और स्वघोषित धर्मगुरुओं तथा प्रवचनकर्ता के लिए दो अलग-अलग व्यावसायिक संस्थाएँ बनायी जाए जिनके सदस्य पूरी तरह उन्ही लोगों के बीच से हों और इनमे कोई भी सरकारी सदस्य नहीं हों, जो इन अध्यवसायों पर अपेक्षित नियंत्रण रख सकें. उनका सुझाव है कि ये संस्थाएं इन क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों की दक्षता, सत्यता और काबिलियत को मापें और इन संस्थाओं द्वारा सत्यापित किये जाने के बाद ही किसी व्यक्ति को इन क्षेत्रों में कार्य करने की अनुमति मिले.

ये है पत्र…

To,
The  Hon’ble Prime Minister of India,
Government of India,  
New Delhi
Subject- Suggestion for forming Government Bodies for Astrologers and God-men/religious entities
 
Dear Sir,
1. We, petitioners No 1 and 2 introduce ourselves as under-
Petitioner No 1- Amitabh Thakur is an officer of the Indian Police Service, Uttar Pradesh Cadre and is also active as regards issues of transparent and accountable governance, along with Right to Information (RTI, for short)
Petitioner No 2- Dr Nutan Thakur is a social activist and freelance journalist associated with transparency in Governance and Human Right issues, along with RTI matters
 
2. That both the petitioners write this representation in their personal capacity as the citizen of this Nation and as concerned individuals.

3. That the two petitioners present a serious matter associated with Astrologers and God-men/religious entities

4. That as is well known, in India there are a very large number of Astrologers and God-men/religious entities. Each of these Astrologers and God-men/religious entities claim themselves to be having supernatural powers. They make very tall claims. Many a times they impersonate others including God..

5. That these Astrologers and God-men/religious entities are important entities in our society. They are omnipresent and can be seen in every nook and corner of the country. These Astrologers and God-men/religious entities operate in various ways. But one thing common to most of them is the fact that the majority seek money on one form or another. It can be some kind of fee, honorarium, gift, donation or any other format.

6. That this act of taking money or other financial resources from the people makes these Astrologers and God-men/religious entities some kind of professional entities. Though they claim themselves as being otherworldly, but the mere fact that they accept monetary support in various forms makes their act a purely temporal work where there is transition of money from one hand to another.

7. That this transition of money is often in lieu of certain acts performed by these Astrologers and God-men/religious entities. They look at the person’s futures, perform some kind of religious acts, give some preaching or sermons  etc.

8. That thus, in totality, this act of providing service in lieu of certain monetary returns (in whatever form it might be presented) makes the act of Astrologers and God-men/religious entities a professional work as well.

9. That thus like every other profession including Medicine, engineering, dentistry, law, architect etc,  these works also need a regulation/control at various levels.

10. That this is because if the State does not come forward to have some kind of appropriate regulatory mechanism for certain acts where lives of billion of people is affected and where there is a direct temporal act of presenting money in lieu of certain returns is being done in almost a professional manner, then it will certainly adversely affect the lives of these people.

11. That the result of completely uncontrolled situation would be that every person would be free to claim himself as Astrologers and God-men/religious entities of the highest order. With no control and no regulation, they would make tall claims as is presently seen in many cases and would cheat by common, illiterate and semi-literate poor and fearful people by showing them all kinds of improper and incorrect ways, paths, does and don’ts etc which these people, having not enough sense to differentiate between cheating and truth, often follow to the hilt and also get cheated.

12. That it is true that there cannot be very exact estimation of every person as Astrologers and God-men/religious entities and the level achieved by them. It is also true that outsiders might not be in a position to evaluate their worth or to exactly place them as regards their caliber. But if one or more National and Regional Committee/Commission/ Council etc are formed by the Government of India and the various State governments which act as a professional body for these Astrologers and God-men/religious entities, then these bodies can certainly check, evaluate and mark the caliber of these entities.

13. That the two petitioners suggest that these Bodies have members only from the professional world or from the field of activity, that is, among the Astrologers and God-men/religious entities. They also suggest that there shall be no official members to these bodies. They suggest these bodies to be autonomous in nature.

14. That thus while the petitioners respect the sanctity and independence of these professions and work and hence they propose Regulatory bodies consisting solely of the persons belonging to these profession/field, who might be chosen by themselves in a suitable manner, yet at the same time they also understand the great need to have such regulatory bodies.

15. That thus the two petitioners hereby propose formation of at least two such Regulatory/controlling/professional bodies, one for the Astrologers and the other for God-men/religious preachers etc, which shall act as the regulatory authority for both Astrologers and also for proclaimed Godmen/religious leaders/occult science practitioners etc.

16. That as proposed above, such Regulatory Bodies shall consist members entirely from these profession/art/field because possibly the outsiders and ignorant people won’t be in a position to understand, appreciate and evaluate the basic caliber and abilities of these people and to certify their genuineness or otherwise.

17. That as explained earlier, there is an immense need to have such regulatory bodies at various levels so as to separate the grain from the chaff, that is to do away with the charlatans, fakes, frauds, phonies and bogus Astrologers, Godmen/religious leaders/occult science practitioners etc from the real ones and thus save the common people from these frauds, who everyone would agree abound in very large number in this country.

18. That the petitioners are writing directly to you because thus action possibly needs the coming together or one or more Ministries and such a coordination might be possible only at the level of the Hon’ble Prime Minister’s office

19. That thus we make the following prayers for the larger public interest—

PRAYER

    To kindly form a Council/Professional body/Regulatory or controlling body consisting completely of astrologers for these persons at National, State and/or Regional levels which shall be evaluating their genuineness or otherwise and fitness or otherwise to practice their art/science and only after this verification any astrologer shall be allowed to practice this art/science and this body shall be acting as the Nodal bodies for the astrologers almost in a way Medical Council of India, Indian Council of Chartered Accountants or Bar Council of India works
    To kindly form a Council/Professional body/Regulatory or controlling body for the God-men, occult science practitioners, professional preachers etc consisting completely of astrologers at National, State and/or Regional levels which shall be evaluating the genuineness or otherwise and fitness or otherwise of these persons to practice their art/science science and only after this verification any such person shall be allowed to practice this art/science and this body shall be acting as the Nodal bodies for the astrologers almost in a way Medical Council of India, Indian Council of Chartered Accountants or Bar Council of India works

Lt No-AT/Astro/01       

Yours,

1. Amitabh Thakur

2.Nutan Thakur

amitabhthakurlko@gmail.com  
nutanthakurlko@gmail.com

Dated- 13/06/2013

एक हैं संजय सिन्हा, आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर हैं

Shambhunath Shukla : सोना जाने कसे और आदमी जाने बसे! … मेरे एक मित्र पत्रकार हैं संजय सिन्हा। आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर हैं। मेरे शुभचिंतक हैं और मैं अपनी गमी व खुशी उनसे जरूर बाटता हूं। बिंदास और हरदम खुश रहने वाले संजय सिन्हा मुझसे कोई दस बरस छोटे होंगे। पर जब वे आईआईएमसी से पत्रकारिता की डिग्री लेकर जनसत्ता में काम करने आए तो मेरे साथ ही उन्हें लगाया गया। लंबी काया के गोरे चिट्टे संजय किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं लगते थे। वे जब आफिस आते तो उनके साथ लड़कियों का झुंड भी आता जो जनसत्ता में ट्रेनिंग के लिए नहीं, संजय का सानिध्य पाने के लिए आतीं।

लड़कियों की चहचहाट से जनसत्ता का न्यूज रूम गुलजार तो रहता पर उतना ही कामकाज प्रभावित होता। एक दिन मैने संजय से कहा कि संजय अपनी रेहड़ ले जाओ। संजय यह सुनते ही लगे रोने और रोते-रोते वे पहुंच गए रेजीडेंट एडिटर बनवारी जी के पास। बनवारी जी से उन्होंने कहा कि मुझे शंभूजी के साथ काम नहीं करना है। बनवारी जी ने कहा कि ठीक है पंद्रह दिन और देख लो फिर बदल देंगे। पर एक हफ्ते के बाद ही संजय फिर से बनवारी जी के पास पहुंचे और बोले- मुझे शंभूजी से कोई शिकायत नहीं है उन्हीं के साथ काम करने दीजिए। संजय का कहना था कि सोना जाने कसे आदमी जाने बसे। यानी शंभूजी के साथ एक हफ्ते काम करने के बाद ही मैं जान सका कि उनकी अहमियत क्या है।

खैर ये संजय सिन्हा उस समय हिंदी पत्रकारिता के लिए अजूबा थे। जिस आदमी की पढ़ाई विदेशों में हुई हो और जिसके चाचा, मामा, पिता सब इतने बड़े अधिकारी रहे हों कि तब यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि हिंदी में ऐसे परिवारों के बच्चे आ जाएंगे। संजय तो पैदा ही चांदी के चम्मच लेकर हुए थे। पर संजय में दो खूबियां उसे उसके क्लास से अलग करती थीं उसका संजीदापन और संवेदनशीलता। अन्याय के विरुद्ध संजय सबसे पहले बोलता और उसका साथ देते दूसरे एक और संजय जो खुद भी बिहार से थे, समृद्ध परिवार से थे लेकिन सामंती रौबदाब वाले परिवार से यानी हमारे संजय कुमार सिंह। एक लाला और दूसरा ठाकुर।

सिन्हा बोलता तो खूब सोच समझकर और यह मानकर कि पासा उसके खिलाफ नहीं जा सकता और संजय सिंह बोलते तो फिर उन्हें मेरे अलावा और कोई रोक नहीं सकता था। इसलिए यह पूरी फौज मेरे साथ ही रखी गई। हर नया संपादक दन दोनों को मेरे साथ से अलग करने की कोशिश करता लेकिन बुरी तरह मुंह की खाता। वह तो संजय सिन्हा बाद में जी न्यूज चले गए और मैं चंडीगढ़ में स्थानीय संपादक बनकर। उसके कुछ ही रोज बाद संजय सिंह ने नौकरी छोड़ दी और आज वैशाली में ठाठ से रह रहे हैं।

संजय सिन्हा के बिंदास बातूनीपन का एक उदाहरण बताता हूं। हम लोग २००१ में जेट एयर की फ्लाइट से कोलकाता जा रहे थे। जब हम बोर्डिेंग पास बनवा रहे थे तो हमारे आगे खड़ी एक विदेशी महिला का सामान ज्यादा था और उससे कहा जा रहा था कि सामान का अलग से भाड़ा दो। उस समय वो बहुत ज्यादा था। महिला बार-बार गिड़गिड़ा रही थी पर बोर्डिेंग पास बनाने वाली महिला मान ही नहीं रही थी। हमारे पास सामान के नाम पर एक पोलीथिन बैग भर था। संजय ने कहा कि इनका सामान हम दोनों लोगों के कोटे में डाल दो। यह सुनते ही उस महिला ने हमें बड़ी ही मनुहार भरी नजरों से देखा। जहाज के अंदर उस महिला की सीट हमारे ही साथ थी। विंडो सीट पर वह महिला थी, बीच में मैं और शुरू की सीट संजय की। उस जमाने में जहाज में बैठते ही परिचारिका एक ट्रे में कुछ टाफियां व रुई के गोले लेकर आया करती थी। संजय ने सारी टाफियां उठा लीं।

परिचारिका दोबारा ट्रे लेकर मेरे पास आई तो संजय ने कहा कि शंभूजी सारी टाफियां उठा लीजिए आखिर साढ़े सात हजार की टिकट ली है कुछ टाफियां तो बटोर ली जाएं। उसके बाद परिचारिका से कहा गया कि हिंदी अखबार लाओ। हिंदी अखबार उसके पास था नहीं सो वह टाइम्स आफ इंडिया लेकर आई। संजय ने कहा कि ये कौन सा अखबार है? वह बोली टइम्स आफ इंडिया। संजय ने कहा कि क्या मैं इसे उलटा पढ़ूं जब मुझे अंग्रेजी आती ही नहीं है तो मैं इसका क्या करूं? फिर संजय मुझसे बोला कि शंभूजी पड़ोस वाली महिला से पूछिए कि बहन जी कहां जा रही हैं? मैने कहा कि मैं नहीं पूछता, तुम पूछो। तब तक वह विदेशी गोरी महिला खुद बोली- मेरा नाम जरीना खान है। मैं फिलहाल कोलकाता जा रही हूं। मेरी ससुराल वहां के चटर्जी परिवार में है और मेरे पिता बांग्लादेशी हैं तथा मां ब्रिट्रिश। और हां मैं हिंदी जानती हूं और तुम लोगों की बातें सुनकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

संजय आज भी मस्त हैं। वे पहले हिंदी पत्रकार थे जिन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में काम कर रही प्रतिभाशाली पत्रकार दीपशिखा सेठ से शादी की थी। शायद यह पहला मौका था जब लड़की अंग्रेजी पत्रकार थी और लड़का हिंदी का। उस समय के इंडियन एक्सप्रेस के संपादक अरुण शौरी ने दोनों अखबारों के बीच फौरन एकदीवाल खड़ी करवा दी थी। इन संजय के छोटे भाई का पुणे में पिछले दिनों निधन हो गया और मैं रोज सोचता रहा कि जाऊंगा पर संजय से संवेदना जताने जा नहीं पाया सिर्फ मोबाइल से मैसेज कर दिया। दुख बहुत हुआ कि हम कितने संवेदन शून्य हो गए हैं कि वसुंधरा से पटपडग़ंज अपार्टमेंट नहीं जा पाया।

संजय सिन्हा का आज फोन आया और कहा कि शंभूजी आप फेसबुक पर इतने सक्रिय हैं कि मैने अपना बंद किया एकाउंट फिर खोल लिया। मैने कहा कि हां फालतू हूं इसलिए। संजय ने कहा नहीं शंभूजी आप अब ज्यादा सक्रिय हैं। और वह लिख रहे हैं जो लोग जीवन भर अखबार के पन्ने काले कर नहीं लिख पाते। आप खुद सोचिए आप जब अखबार में थे और खूब लिखते थे तब कितने लोग आपको पढ़ते थे और रिएक्ट करते थे आज आपको पढऩे वालों की संख्या हजारों में है। संजय सिन्हा का यह कहना मुझे और उत्साहित कर गया। संजय ने कहा कि शंभूजी अगर आप दो साल बाद रिटायर होते तो शायद इतनी लगन और उत्साह से नहीं लिख पाते क्योंकि साठ के बाद आदमी का उत्साह भी ठंडा पडऩे लगता है। संजय सिन्हा जैसे लोग बने रहेंगे तो मैं भला क्यों रिटायर होने लगा।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार को पत्नी शोक

यशभारती से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार की पत्नी श्रीमती शारदा देवी का बुधवार की रात देहान्त हो गया। श्रीमती शारदा देवी लम्बे अरसे से हृदय रोग से पीड़ित थीं और पिछले दिनों उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी। श्रीमती शारदा देवी ने गाजीपुर शहर के बड़ीबाग स्थित अपने आवास पर अन्तिम सांस ली। वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार की धर्मपत्नी के निधन से जिले के साहित्य और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। विजय कुमार की पत्नी के निधन के बाद जिले के तमाम बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और पत्रकारों ने शोक संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत श्रीमती शारदा देवी की आत्मा की शान्ति के लिए ईश्वर से कामना की है। बेहद मृदु स्वभाव की श्रीमती शारदा देवी अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके निधन पर गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन की ओर से शोक सभा कर श्रीमती शारदा देवी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।— गाजीपुर से के.के.की रिपोर्ट

‘तू रोज अपनी फोटो अपने अखबार के पहले पेज पर छाप, तू पार्षद का चुनाव भी जीत जाए तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा’

Shambhunath Shukla : बात १९७३ की है। हमारे एक परिचित सज्जन कानपुर से कांग्रेस के टिकट पर विधायकी का चुनाव लड़ रहे थे। यह वह जमाना था जब लोग कुछ हजार खर्च कर चुनाव लड़ लेते थे। वे सज्जन थे तो ईमानदार पर एक तो वे छात्र राजनीति से निकले थे दूसरे कभी समाजवादी युवजन सभा के अध्यक्ष रह चुके थे इसलिए उनकी छवि एक दबंग और गुंडे की ज्यादा थी। जबकि उन बेचारों ने कभी पंखुरी भी न मारी होगी पर इमेज एक तीरंदाज की। उन दिनों कानपुर में एकमात्र बड़े अखबार ने उनकी खबरों का बॉयकाट शुरू कर दिया। शायद अखबार चाहता था कि वे कुछ विज्ञापन दें। अब उनके पास धेला नहीं।

पार्टी ने कुछ बहुत प्रचार जरूर किया लेकिन निजी तौर पर वे एक पैसा भी न खर्च कर पाने की स्थिति में। तब एक दिन वे ऊबकर अखबार के दफ्तर पहुंचे और सीधे मालिक के केबिन जाकर गरजे- …… बाबू तू रोज अपनी फोटो अपने अखबार के पहले पेज पर छाप और तू विधायकी तो दूर पार्षद का चुनाव भी जीत जाए तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मालिक महोदय की सिट्टी पिट्टी गुम। क्या बोलें। वे सज्जन चुनाव जीते और रिकार्ड मतों से जीते। अखबार या कारपोरेट घराने नरेंद्र मोदी को हीरो तो बना सकते हैं पर चुनाव वे उन्हें चिकमगलूर से भी नहीं जिता सकते।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

बुलंदशहर सेक्स रैकेट में पांच पत्रकार शामिल, पढ़िए इनके नाम

बुलंदशहर। मुम्बई दिल्ली के बाद एनसीआर के बुलंदशहर में सेक्स रैकेट का धंधा जोरों पर था। यूपी पुलिस में तैनात तेजतर्रार आईपीएस वैभव कृष्ण ने सीओ सिटी का पद सम्भालने के बाद सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस के कई कर्मचारी, नेताओं और पत्रकारों के चहरों को बेनकाब किया है। बुलंदशहर के होटलों में ये सेक्स रेकेट का धंधा लम्बे समय से पुलिस, नेता और पत्रकार की तिकड़ी से ऑन डिमांड चल रहा था। मामले के खुलने के बाद खुर्जा गेट चौकी इंचार्ज डीके वशिष्ठ को एसएसपी गुलाब सिंह ने लाइन हाजिर कर दिया।

इस धंधे में बीस से ज्यादा पुलिस के कर्मचारी और शहर के पूर्व सभासद राकेश व एक मौजूदा सभासद ऋषिपाल शामिल है। शर्मिन्दगी की बात है कि इसमें पत्रकार भी शामिल हैं. इस प्रोफेशन में आने वाले लोग पत्रकारिता के मूल उद्देश्य को पीछे छोड़ गये हैं। बुलंदशहर के सेक्स रैकेट में पांच पत्रकारों के नाम आये हैं। इनमें से नदीम खान जो 'बुलन्द सुनामी' अखबार के सम्पादक हैं, दूसरे अली शरर जो 'टी0वी0 100' और 'फॉर रियल न्यूज' का स्ट्रींगर है, तीसरा पत्रकार जहीर खान जो कि 'दैनिक भास्कर' का स्ट्रींगर है, चौथा पत्रकार मनोज चौधरी और पांचवा पत्रकार विक्रम भटनागर है।

ये पांचों पत्रकार कॉल गर्ल संचालिकाओं की सेटिंग पुलिस से कराते थे और सेक्स रैकेट चलाने के लिए बीस हजार रुपये की एकमुश्त रकम लेते थे। इसका खुलासा सेक्स रैकेट संचालिका बाला ने किया। पुलिस लिखापढ़ी में इन नामों को लेने और इन्हें वांटेड करने की तैयारी कर रही है।

भड़ास4मीडिया से बातचीत में आईपीएस वैभव कृष्ण ने बताया कि लगभग आधा दर्जन पत्रकारों के इस रैकेट में शामिल होने की आशंका है। इस बारे में गहराई से छानबीन की जा रही है। काल डिटेल वगैरह निकाले, चेक किये जा रहे हैं। पुलिस जल्द ही तफ्तीश पूरी कर आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करेगी।

मूल खबर ये है-


बुलंदशहर में जिस्म के धंधे से जुड़ी महिलाओं के पास से पत्रकारों के नंबर मिले

टाइम्स नाऊ और ईटी नाऊ के बिजनेस हेड बने कौशिक घोष

टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क (टीएनएन) ने कौशिक घोष को टाइम्स नाऊ और ईटी नाऊ का बिजनेस हेड नियुक्त किया है. घोष मुंबई में बैठेंगे और इन दोनों चैनलों के रेवेन्यू व ब्रांड के काम का नेतृत्व करेंगे. वे टाइम्स नाऊ, ईटी नाऊ और जूम के चीफ एक्जीक्यूटिव आफिसर (सीईओ) अविनाश कौल को रिपोर्ट करेंगे.

घोष स्टार इंडिया, रेडियो मिर्ची, एचसीएल, फ्रंटलाइन और एशियन पेंट्स में काम कर चुके हैं. वे आईआईएम कोलकाता और आईआईटी खड़गपुर के स्टुडेंड रहे हैं. ज्ञात हो कि टीएनएन ने टाइम्स नाऊ के विज्ञापन दरों में तीस फीसदी और ईटी नाऊ के विज्ञापन दरों में सौ फीसदी वृद्धि की है.

भड़ास तक सूचनाएं आप bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

आठ सालों में किनारे लगाने की कई कोशिशों के दौरान आडवाणी ने तीन बार इस्तीफे के तीर चले

भाजपा के शीर्ष पुरुष समझे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने भले तमाम मनुहार के बाद इस्तीफा वापस ले लिया हो, लेकिन पार्टी को अभी पूरी तौर पर 'आडवाणी संकट' से मुक्ति मिलने के आसार नहीं हैं। क्योंकि, जिन वजहों से व्यथित होकर उन्होंने पार्टी के सभी प्रमुख पदों से इस्तीफा दिया था, उनका कोई कारगर निराकरण नहीं हो पाया है। फिर भी, 'अपनों' के चौरफा दबाव के चलते, शायद इस्तीफा वापसी के सिवाय उनके पास कोई और विकल्प ही कहां बचा था?

85 वर्षीय आडवाणी ने सोमवार को संगठन के सभी अहम पदों से इस्तीफे की चिट्ठी भेज दी थी। इस चिट्ठी से संघ परिवार की राजनीति में तूफान-सा आ गया। नाराज 'पितृ पुरुष' को मनाने के लिए भाजपा नेतृत्व ने तेज गति से कवायद शुरू की। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से गुहार लगाई। निवेदन किया कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके किसी तरह 'आडवाणी संकट' से पार्टी को उबारें।

राजनाथ सिंह की इस गुहार पर संघ नेतृत्व ने आडवाणी पर चौतरफा दबाव बढ़वाने की रणनीति फटाफट तैयार कर ली। सूत्रों के अनुसार, एक खास रणनीति के तहत इस काम के लिए सबसे पहले आडवाणी के खास करीबियों का इस्तेमाल किया गया। खासतौर पर अरुण जेटली, वेकैंया नायडु, अनंत कुमार व सुषमा स्वराज को 'मनुहार' के मोर्चे पर लगाया गया। लेकिन, जब आडवाणी ने 'हठयोग' के तेवर दिखाए, तो राजनाथ सिंह ने संसदीय बोर्ड की बैठक बुला ली। देर रात हुई बैठक में संसदीय बोर्ड ने आडवाणी का इस्तीफा नामंजूर कर दिया। इसके बाद सुषमा स्वराज के साथ कई नेता आडवाणी को मनाने पहुंचे थे।

दरअसल, 7 जून से गोवा में भाजपा की तीन दिवसीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हुई थी। इस बैठक का खास एजेंडा, विवादित नेता नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाने का ही था। जबकि, आडवाणी किसी न किसी तरीके से मोदी की 'ताजपोशी' में रुकावटें पैदा करना चाहते थे। इसी के चलते, उन्होंने एक की जगह चुनाव की दो अभियान समितियां बनाने का सुझाव दे डाला था। उन्होंने गोवा बैठक के महज पांच दिन पहले राजनाथ सिंह से कहा था कि राज्यों के चुनाव के लिए अलग अभियान समिति बनाई जाए। क्योंकि, पांच राज्यों में इसी वर्ष चुनाव होने हैं।  लोकसभा के चुनाव अगले साल होने हैं, इसके लिए अलग समिति बने।

लेकिन, राजनाथ सिंह ने इस सुझाव पर आडवाणी को कोई आश्वासन नहीं दिया था। बाद में, यही तय किया गया कि दो समितियां बनने से कई मायनों में राजनीतिक जटिलताएं पैदा होने का जोखिम रहेगा। इससे अच्छा है कि राज्यों के चुनावों के लिए केंद्रीय स्तर पर कोई समिति न बने। लोकसभा चुनाव के लिए अभियान समिति की कमान मोदी को सौंप दी जाए। ताकि, पार्टी कैडर और आम जनता के बीच यही संदेश जाए कि पार्टी हिंदुत्व के अपने मौलिक राजनीतिक एजेंडे से दूर नहीं हुई है।

यूं तो, संघ परिवार का एक प्रभावशाली धड़ा पिछले कई महीनों से दबाव बनाए है कि मोदी को पार्टी का 'पीएम इन वेटिंग' घोषित कर दिया जाए। ताकि, एक बार फिर हिंदुत्ववादी रुझान का राजनीतिक फायदा पार्टी उठा ले। उल्लेखनीय है कि गुजरात की राजनीति में मोदी की छवि एक धुर हिंदुत्ववादी नेता की रही है। पूरे गुजरात में 2002 के दौरान बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इनमें करीब 1000 लोग मारे गए थे। अरबों रुपए की संपत्ति जलाकर स्वाहा कर दी गई थीं। इन दंगों में संघ परिवार के घटकों ने अपना रौद्र रूप दिखाया था।

आरोप है कि भगवाधारी 'दरिंदों' को मोदी सरकार का संरक्षण प्राप्त था। इन दंगों में खासतौर पर मुस्लिम परिवारों की बर्बादी हुई थी। गुजरात की इस शर्मनाक हिंसा के चलते, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की जमकर बदनामी भी हुई थी।

गुजरात के इन दंगों से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी काफी आहत थे। वाजपेयी की छवि एक उदारवादी नेता की रही है। लेकिन, गुजरात के दंगों ने उन्हें भी शर्मसार कर दिया था। क्योंकि, वे आडवाणी और संघ नेतृत्व के दबाव में मोदी को सत्ता से नहीं हटा पाए थे। उन्होंने मोदी को यही सलाह दी थी कि वे राजधर्म निभाना सीख लें। यह राजनीतिक विडंबना ही है कि जिस मोदी के आडवाणी 'कवच' बने थे, अब वही मोदी 11 साल बाद उनके लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

यह अलग बात है कि 1990 के दौर में आडवाणी के छवि राजनीतिक हल्कों में एक कट्टवादी नेता की बनी थी। उन्होंने चर्चित राम-मंदिर आंदोलन की राजनीतिक अगुवाई की थी। 1990 में आडवाणी ने 'सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा' का अभियान शुरू किया था। यही रथयात्रा आडवाणी के राजनीतिक जीवन के लिए 'टर्निंग प्वाइंट' बनी थी। इस दौर में संघ परिवार के अंदर उनकी लोकप्रियता शिखर तक पहुंची थी। 1992 में अयोध्या का विवादित ढांचा संघ परिवारियों ने गिरा दिया था। इसका आडवाणी ने खुलकर नैतिक समर्थन किया था।

आडवाणी की 'राम-मुहिम' के चलते भाजपा का जबरदस्त विस्तार हुआ था। लोकसभा में दो सीटों वाली पार्टी 182 सांसदों वाली हो गई थी। धुर हिंदुत्ववादी छवि से आडवाणी ने भाजपा में ऊंचाइयां जरूर छूईं, लेकिन 1995 तक यह साफ हो गया था कि यही कट्टर छवि उनकी 'राह का रोड़ा' भी है। ऐसे में, आडवाणी ने लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के तरफ से प्रधानमंत्री उम्मीदवार का चेहरा उदारवादी छवि वाले   अटल बिहारी वाजपेयी को बनाया था। 1996 में वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार जरूर बनी थी, लेकिन, महज 13 दिन ही चल पाई थी। बाद में, गठबंधन राजनीति की बैसाखी के सहारे वाजपेयी की सरकार 1998 से 2004 तक रही थी।

वाजपेयी सरकार में आडवाणी गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री की भूमिका में रहे। गृहमंत्री के रूप में उन्होंने 'सरदार पटेल' की तरह अपनी छवि 'लौह पुरुष' के रूप में गढ़ने की कोशिश की। संघ परिवार के कार्यकर्ताओं ने उन्हें 'लौह पुरुष' कहना भी शुरू किया था। लेकिन, इस अभियान के बावजूद आडवाणी अपनी छवि लौह पुरुष वाली नहीं बना पाए। वाजपेयी के व्यक्तित्व के सामने आडवाणी का राजनीतिक कद बौना ही बना रहा। शायद, इसकी उन्हें लंबे समय तक कसक रही।

2002 में आडवाणी लॉबी ने कोशिश की थी कि वाजपेयी को राष्ट्रपति भवन पहुंचा दिया जाए। ताकि, प्रधानमंत्री की कुर्सी आडवाणी के लिए खाली हो जाए। लेकिन, गठबंधन राजनीति में यह प्रयोग संभव नहीं हुआ। 2004 का चुनाव एनडीए ने वाजपेयी के नेतृत्व में ही लड़ा। 'इंडिया शाइनिंग' के बड़बोले जुमले के साथ प्रचार में अरबों रुपए उड़ा दिए गए। लेकिन, बाजी कांग्रेस के हाथ लगी थी। बाद में, वाजपेयी इतना बीमार पड़े कि अब तक वे बेसुध ही हैं। वाजपेयी की बीमारी के चलते 2007 में ही आडवाणी को एनडीए का 'पीएम इन वेटिंग' घोषित कर दिया गया। यानी, पिछले चुनाव में दो साल पहले ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित हो गया था।

लेकिन, इस बार इसी मुद्दे पर भाजपा के अंदर रार बढ़ गई है। दरअसल, पिछले वर्ष दिसंबर में मोदी ने लगातार गुजरात का चुनाव तीसरी बार जीता था। जबकि, कांग्रेस ने सत्ता छीनने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। जीत की इस 'हैट्रिक' के बाद ही भाजपा के अंदर इस मांग ने जोर पकड़ा  कि अब मोदी को राष्ट्रीय राजनीति में आजमाया जाए। उन्हें अभी से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए।

यूं तो मोदी के लिए यह मुहिम अंदर ही अंदर सालों से चल रही थी। लेकिन, गुजरात विधानसभा के चुनावी परिणामों से मोदी का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा। यह अलग बात है कि मोदी की विवादित छवि के चलते एनडीए के अंदर मतभेद रहे हैं। मोदी का नाम उभरा, तो भाजपा के पुराने सहयोगी दल जदयू ने नाराजगी के तेवर दिखा दिए। बिहार में कई सालों से भाजपा और जदयू की मिलीजुली सरकार है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। जदयू अपनी सेक्यूलर छवि के चक्कर में मोदी से दूरी बनाए रखना चाहता है। ऐसे में, नीतीश ने अल्टीमेटम देना शुरू कर दिया था कि यदि मोदी को चुनावी चेहरा बनाया गया, तो उनकी पार्टी एनडीए से अलग हो जाएगी।

मोदी के मुद्दे पर एनडीए में दरार पड़ने का जोखिम सामने है। फिर भी, संघ के दबाव में मोदी के पक्ष में लॉबिंग तेज हुई। पिछले दो महीने से जद्दोजहद चलती रही है कि मोदी को पीएम का चेहरा बनाया जाए या नहीं? अंतत: पहले कदम के रूप में एक बीच का रास्ता निकाला गया। यही कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान समिति का प्रमुख मोदी को बना दिया जाए। ताकि, यही संदेश जाए कि हिंदुत्ववादी मोदी के नेतृत्व में ही एनडीए लोकसभा का चुनाव लड़ेगा। इस बीच मोदी ने अपनी छवि बदलने के लिए गुजरात के 'विकास मॉडल' के एजेंडे को जमकर प्रचारित किया। यह दावा किया कि पिछले 10 सालों में उनकी सरकार के बदौलत गुजरात ने विकास के नए मापदंड बनाए हैं। मौका मिला, तो वे अब पूरे देश का 'कर्ज' उतार देंगे। 

भाजपा के अंदर जब मोदी बयार तेज होने लगी, तो अंदर ही अंदर 'मोदी रथ' को थामने की कोशिशें भी शुरू हुईं। मोदी का रुतबा कई महीनों से बढ़ने लगा था। शायद यह बात आडवाणी और उनकी कोटरी को पसंद नहीं आ रही थी। ऐसे में, आडवाणी और मोदी के रिश्तों में खिंचाव के संकेत कई महीनों से मिलने लगे थे। पिछले साल आडवाणी की 'यात्राओं' के दौर में मोदी ने दूरी बनाई थी। दरअसल, 2009 में करारी चुनावी हार के बाद, संघ नेतृत्व ने आडवाणी को हाशिए पर धकेलने की रणनीति बना ली थी। इसी के तहत उनसे नेता विपक्ष का पद भी छिनवा लिया गया। लेकिन, संघ की तमाम कोशिशों के बाद भी आडवाणी एक दम हाशिए पर नहीं लगे। 

पिछले आठ सालों में आडवाणी को किनारे लगाने की कोशिशें कई बार हुई हैं। ऐसे में, तीन बार आडवाणी इस्तीफे का 'तीर' चला चुके हैं। 2005 में वे छह दिन की पाकिस्तान यात्रा पर गए थे। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मो. जिन्ना को सेक्यूलर नेता बता दिया था। इससे संघ का नेतृत्व भड़क गया था। लिहाजा, दुखी होकर आडवाणी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। किसी तरह से वे बाद में मान गए। लेकिन, दिसंबर आते-आते उन्होंने कुर्सी छोड़ दी थी। 10 जून को इस बार आडवाणी ने फिर इस्तीफे का 'तीर' चलाया। इससे पूरी पार्टी 'लहूलुहान' हो गई है। तमाम मनुहार के बाद इस्तीफा वापस हो गया है। लेकिन, कोई यह गारंटी से नहीं कह सकता कि आडवाणी का दिल-ए-दर्द वाकई में दूर ही हो गया है!

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengarnoida@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

बीत गये दिन भजन बिना रे… (सुनें)

कबीर का लिखा भजन…

भीमसेन जोशी की आवाज…

लाजवाब…

बीत गये दिन भजन बिना रे ।
भजन बिना रे भजन बिना रे ॥

बाल अवस्था खेल गवांयो ।
जब यौवन तब मान घना रे ॥

लाहे कारण मूल गवाँयो ।
अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे ॥

कहत कबीर सुनो भई साधो ।
पार उतर गये संत जना रे ॥


और भी (सुनें)

दो गानें… तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है.. तू मेरे रु ब रू है… (सुनें)

दो गानें…

पहला… तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है..

दूसरा…तू मेरे रु ब रू है…

(सुनें)

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है…

तू मेरे रु ब रू है…


और भी (सुनें)

मीडिया में शोषण के मेरे पांच साल…

मैं कानपुर शहर में पिछले पांच सालों से पत्रकारिता कर रहा हूं. मैं आर्थिक रूप से गरीब परिवार से हूं. मेरे पिता जी इलेक्ट्रीशियन हैं जो रोजाना मुश्किल से १००-१५० रुपये ही कमा पाते हैं. कानपुर शहर के पत्रकार मेरा पिछले पांच वर्षों से शोषण कर रहे हैं. मैं जिनके यहाँ काम करता हूं वो एक नेशनल चैनल के ब्यूरो चीफ हैं. उनको न कैमरा चलाना आता है और न ही स्क्रिप्ट लिखने का काम आता है. सब काम मैं ही करता हूं.

उन्होंने आज तक मेरे नाम से एक भी खबर नहीं भेजी है. वो मुझे १००० रुपया महीना देते हैं विथ पेट्रोल. यह पैसा मेरे पेट्रोल भर का भी नहीं होता है. कानपुर शहर के पत्रकार लोग जूनियर पत्रकारों का ऐसे ही शोषण करते हैं. वो मुझसे अपने घर का भी काम कराते हैं, जैसे सब्जी लाना, झाड़ू लगाना, खाना बनाना, जूठे बर्तन धुलाना, पैर दबवाना आदि. मुझे पिछले दो वर्षों से एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिली.

मैं बहुत डिप्रेसन में हूं. अब मुझे नहीं लगता कि मैं पत्रकार बन पाउंगा. मैंने न जाने कितने लोगों के शोषण की खबरें अपने चैनल में दिखाई है और उनको शोषण मुक्त कराया है. लेकिन मैं खुद मजबूर हूं. अतः मैं चाहता हुं कि आप मेरी आत्मकथा प्रकाशित करें. मुझे बहुत ख़ुशी होगी. मैं समझूंगा कि मेरी भी आवाज़ सुनने वाले कोई है. मैं अपनी कुछ मजबूरियों की वजह से अपना नाम नहीं बता सकता हूं.

धन्यवाद

adarshsingh.1800@rediffmail.com

क्या साधना न्यूज चैनल कंगाल हो गया? चेक बाउंस होना शुरू

घटिया प्रबंधन और ओछी सोच के चलते साधना न्यूज चैनल कंगाली के कगार पर खड़ा हो गया है. अब उसके खातों में अक्सर पैसा भी नहीं रहता और कर्मचारियों के चेक बाउंस हो रहे हैं. तीन जून को साधना प्रबंधन ने एडिटर आउटपुट राजीव शर्मा से सेटलमेंट  के बाद शार्प आई प्राइवेट लिमिटेड बिहार प्रोजेक्ट की मुहर लगा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, झण्डेवालान रानी झांसी रोड नई दिल्ली का एक चेक जारी किया.

तेईस मई के दिनांकित चेक क्रमांक 141205 पर खाता संख्या 30917847589 अंकित है और उस पर किसी मयंक गुप्ता के हस्ताक्षर बताए जाते हैं. दस जून को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सेक्टर 11 नोएडा की शाखा ने बताया कि उपरोक्त खाते में पर्याप्त धनराशि न होने से चेक वापस हो गया है.

साधना न्यूज के प्रबंधन के इस रवैये से भन्नाये राजीव शर्मा साधना के प्रबंधन को अदालत में घसीटने की तैयारी कर रहे हैं. यह तो सभी को मालूम है कि चेक बाउंस के मामले गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आते हैं. ज्ञात हो कि इसके पहले साधना मैनेजमेंट ने मध्य प्रदेश की एक पार्टी के साठ लाख रुपये मार लिए थे, लेकिन एसएन विनोद की जिद के कारण और कई तरह की धमकियों-चेतावनियों के बाद साधना प्रबंधन अब वो पैसा किश्तों में लौटा रहा है.

बताया जाता है कि साधना प्रबंधन की प्रकृति है कि फ्रेंचाइजी या पार्टनर के रूप में मीडिया में आने को इच्छुक लोगों को पटाकर पहले उनके पैसे लेना फिर उन्हें बाहर कर देना. पैसे फंस जाने के बाद वो संबंधित पार्टीज इधर उधर प्रयास करने के बाद थक हारकर बैठ जाया करती हैं. मध्य प्रदेश में इससे पहले एक और पार्टी के साथ साधना वाले छल कर चुके हैं.

दैनिक जागरण से निशांत यादव का इस्तीफा, नेशनल दुनिया के शामली ब्यूरो चीफ बने शाहनवाज अली

लखनऊ से सूचना है कि दैनिक जागरण से एक और विकेट गिरा है. यहां काम करने वाले रिपोर्टर निशांत यादव के बारे में जानकारी मिल रही है कि उन्होंने लखनऊ में ही अमर उजाला ज्वाइन कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक दैनिक जागरण के चीफ रिपोर्टर से नाराजगी के कारण लोग लगातार दैनिक जागरण छोड़ रहे हैं.

नेशनल दुनिया, शामली के ब्यूरो चीफ बनाए गए हैं शाहनवाज अली. शाहनवाज ने दैनिक जागरण, शामली से 2001 में करियर की शुरुआत की थी. 2009 में हिंदुस्तान, मेरठ की लांचिंग के दौरान मुजफ्फरनगर ब्यूरो आफिस में रिपोर्टिंग करते थे. 2010 में अमर उजाला में जूनियर सब एडिटर के रूप में ज्वाइन किया. मार्च 2011 में इन्होंने मुजफ्फरनगर में बतौर सब एडिटर काम शुरू किया. 2012 में भागलपुर बिहार ट्रांसफर किए जाने पर इस्तीफा दे दिया. अब वो अपनी नई पारी नेशनल दुनिया के शामली ब्यूरो चीफ के रूप में शुरू कर चुके हैं. उन्होंने तीन मई को वीरेंद्र आजम सहारनपुर के साथ नेशनल दुनिया ज्वाइन किया.
 

पत्रकार बनाने के लिए पैसे जमा कराने की बात कहने वाले ठग, सावधन रहें इनसे

ठगों ने आजकल मीडिया की तरफ रुख कर लिया है. ठग तरह तरह के कारनामों से मीडिया में कमा रहे हैं. पता चला है कि कुछ लोग पत्रकार बनाने के नाम पर परीक्षा ले रहे हैं और परीक्षा के लिए हजार-दो हजार रुपये अपने बैंक एकाउंट में जमा करवा रहे हैं. यह काम वेबसाइट बनाकर धड़ल्ले से किया जा रहा है. ऐसी ही एक दुकान राष्ट्रीय समाचार पत्र बाल अंतरिक्ष के नाम से चलाई जा रही है.

इन लोगों ने एक वेबसाइट बनाकर पत्रकार बनाने के नाम पर पैसा जमा कराने का खेल शुरू कर दिया है. पूरा डिटेल नीचे है, जो उनकी ही वेबसाइट से कापी करके प्रकाशित किया जा रहा है. कृपया ऐसे ठगों से सावधान रहें और हो सके तो इन्हें फोन करके दो – चार बात जरूर सुनाएं.

नीचे प्रकाशित मैटर पत्रकार बनाने के नाम पर ठगी करने वाली एक वेबसाइट से कापी करके पेस्ट किया गया है. यह नमूने के बतौर है और लोगों को सावधान करने के लिए है, ताकि ऐसी किसी भी ठगी से वे सतर्क रहें और किसी हालत में पैसे न जमा करें. कृपया नीचे प्रकाशित बातों पर भरोसा न करें और इन ठगों व बहुरुपियों के झांसे में न आएं.

-एडिटर, भड़ास4मीडिया


पत्रकार बने ।

बाल अंतरिक्ष समाचार पत्र बक बच्चो का न्यूज पेपर है जो कि अपना विस्तार कर रहा है इसलिए फिक्स सैलरी पर पत्रकार कम मार्केटिग मेनेजरो की नियुक्ति करना चाहता है यह समाचार पत्र शिघ्र साप्ताहिक होने जा रहा है इसलिए जिला, तहसील एवं ग्रामीण स्तर पर अपने प्रतिनिधि अर्थात पत्रकार नियुक्त करने के लिए एक सर्च हन्ट आयोजित कर रहा है इस सर्च हन्ट में मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले तहसीले एवं ग्रामीण स्तर पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त करना है जिले प्रतिनिधियो की संख्या १०० या इससे अधिक हो सकती है। तहसील स्तर पर प्रतिनिधियो की संखया ५०० से अधिक हो सकती है।

पद संख्या एवं वेतन निम्नानुसार है

क्र.     पद     संख्या     वेतन
१.     जिला पत्रकार फुल टाईम     ५०     १५००० से २०००० प्रतिमाह
२     जिला पत्रकार पार्ट टाईम     ५०     १०००० से १५००० प्रतिमाह
३     तहसील पत्रकार फुल टाईम     २५०     ८००० से १२००० प्रतिमाह
४     तहसील पत्रकार पार्ट टार्इ्रम     २५०     ७००० से १०००० प्रतिमाह

योग्यताः- १. जिला पत्रकार पार्ट टाईम /फुल टाईम इस हेतु उम्मीदवार की योग्यता स्नातक होना चाहिये या १२ वी उर्तीण उम्मीदवार के पास कम से कम २ वर्षो का किसी भी फिल्ड का अनुभव होना चाहिए ।
२. तहसील पत्रकार पार्ट टाईम / फुल टाईम इस पद हेतु उम्मीदवार १२ वी उर्तीण या १२ वी अध्ययनरत भी आवेदन कर सकते हैं।
३. प्रत्येक पद के लिए उम्मीदवार की आयु १८ वर्ष पूर्ण होना चाहिए अधिकतम आयु सीमा पूर्णतः स्वतंत्र है ।

आवेदन किस प्रकार करें।

१. आनलाईन ।
२. आफलाइन डाक द्वारा निर्धारित पते पर भेजना ।
१. आनलाईन फार्म की जानकारी ।
अ वेवसाईट के फार्म को सावधानी पूर्वक भरें और उसके साथ अपना बायोडाटा अटेच करें ।
ब बाल अंतरिक्ष (Baal Antriksh) के आई डी बी आई बैंक के खाते मे परिक्षा शुल्क जमा करना परिक्षा शुल्क १०५० रूपये निर्धारित की गई है।
उसके बाद उसकी जमा पर्ची की कापी आनलाईन फार्म के साथ अटेच करें आई डी बी आई बेंक का खाता नम्बर ०००११०२००००४७५२४ में जमा करें आप परिक्षा फीस जमा कर जमा पर्ची फार्म के साथ अटैच कर दे ।
२. आफलाइन फार्म जमा करने की जानकारी :- वेवसाइट के फार्म को डाउनलोड करके सावधानी पूर्वक भरें उसेके साथ अपना बायो डाटा और निर्धारित योग्यताओ की फोटो कापी फार्म के साथ लगाना है साथ ही परिक्षा द्यद्गाुल्क १०५० रूपये आई डी बी आई बैंक खाते नम्बर ०००११०२००००४७५२४ में जमा कर जमा पर्ची की फोटो कापी फार्म के साथ लगाये या फिर १०५० रूप्ये का बैंक डफट फार्म के साथ भेजे और फार्म को निम्नलिखित पते पर भेज दे । पता बाल अंतरिक्ष सम्पादक
७७ बी संगम नगर नवचेतन स्कूल के सामने
इन्दौर म.प्र.
हेल्प लाईन न. +91-8982222100

चयन प्रक्रिया

१. लिखित परिक्षा – आपके द्वारा भेजे गये आवेदनो की जॉच के बाद आपको प्रवेश पत्र भेजे जायेगे जिसमें लिखित परिक्षा की दिनांक व आपका रोल नम्बर एवं परिक्षा का स्थान अंकित होगा
२. लिखित परिक्षा में चयनित उम्मीदवारों का परिणाम घोसित किया जावेगा चयनित उम्मीदवारो को हि साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा
साक्षात्कार
लिखित परिक्षा में चयनित उम्मीदवारों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा साक्षात्कार के लिए १ पद के लिए ७ उम्मीदवारो को मेरिट लिस्ट आधार पर बुलाया जायेगा इसकी सुचना आपको समाचार पत्र या वेवसाईट के माध्यम से सुचित कर दिया जायेगा ।

लिखित परिक्षा का पाठयक्रम
सामान्य ज्ञान , सामान्य विज्ञान , सामान्य अध्ययन एवं बौधिक विसयों पर आधारित होगी ।

परिणाम
१ जुन २०१२ तक समस्त प्रक्रिया पूर्ण कर १५ जुन तक परिणाम घोसित कर दिये जायेगें एवं उसके तुरन्त बाद उम्मीदवारो को ज्वाईन कर प्रशिक्षण पूर्ण करना होगा उसके बाद वे अपना कार्य अपने स्थान पर रहकर कर सकते हैं।

नियम एवं शर्ते

    आवेदन पत्र निर्धारित तिथि तक पहुच जाना चाहिए
    आफ लाईन एवं आन लाईन फार्म के साथ जमा पर्ची लगाना अनिवार्य है अन्यथा आपका आवेदन पत्र निरस्त हो जायेगा।
    निर्धारित आवेदन फार्म पर ही आवेदन स्वीकार किये जायेगें।
    आन लाईन फार्म के साथ जमा पर्ची अटेच होना अनिवार्य है।
    आफ लाईन फार्म डाक, कुरियर आदि के द्वारा ही स्वीकार किये जायेगें।
    उम्मीदवार अपनी सुविधा अनुसार साधारण डाक , रजिस्टर डाक कौरियर किसी के माध्यम से आवेदन भेज सकता है
    चयन प्रक्रिया जो निधारित की गई है उसी आधार पर होगी अंतिम निर्णय बाल अंतरिक्ष के संचालन मण्डल का होगा।
    चयन के निर्धारित आवेदनो से अत्याधिक कम आवेदन प्राप्त होते है तो चयन प्रकिया की तिथि में बदलाव करने का अधिकार बाल अंतरिक्ष के पास सुरक्षित है।
    यह परिक्षा आपको उम्मीदवारी के चयन के लिए योग्यता का परिक्षण मात्र हैं उम्मीदवारी की ग्यारंटी नही
    किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र इन्दौर शहर रहेगा।

हेल्प लाईन नम्बर +91-8982222100

फार्म जोडना है जिसमें आनलाईन आवेदन करने है

स्वतंत्र पत्रकारो के रूप मे कार्य कर हजारो रूपये महिने के कमाये सम्पूर्ण मध्य प्रदेश के समस्त जिले, तहसीलो में स्वतंत्र पत्रकार कम मार्केटिंग मैनेजरो की आवश्यकता है, आप हमारे साथ काम करने के लिए थोडा या इनवेस्टमेंट आपको दिलाएगा स्थायी इनकम हर माह
जिला पत्रकार :-
जिला पत्रकार का कार्य उसके जिले मे जितनी भी तहसीलो के प्रतिनिधि पत्रकारो के माध्यम से कार्य करेगा। साथ ह वह अपने द्याहर के बार्ड स्तर पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर उनके माध्यम से कार्य करेगा।
उसे मात्र एक बार २५ हजार एक बार इन्वेस्ट करना हैं।
जो प्रतिनिधी हमारा जिला प्रतिनिधि बनाता है वह हर माह अपने शहर मे रहकर २०००० से ५०,००० महीने के कमा सकते है।
क्योकि हम उसे देते है उसके द्वारा किए गए सम्पूर्ण कार्य का ४० प्रतिशत उदाहरण के लिए मान लेते है कि आप और आपकी टीम मिलकर २ लाख रूपये कार्य करते है तो आपको मिलेगा उसका ४० प्रतिशतआर्थात ८०,००० रूपये आप अपने प्रतिनिधियो को देने के पश्चात आपके पास ३० से ३५ हजार रूपये बचते है।

तहसील पत्रकारः-
तहसील प्रतिनिधी पत्रकार अपनी तहसील व उसमें सम्मीलित पंचायतो में कार्य करेंगे व अपने सहयोग के लिए अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर सकते है।
और उनके माध्यम से कार्य करेंगे। तहसील पत्रकार हर माह २० से ३५ हजार रूपये प्रतिमाह कमा सकते है इसके लिए उन्हे सिर्फ एकबार १५००० रूपये का इन्वेटमेंट करना होगा।
तहसील प्रतिनिधि हमारा प्रतिनिधी बनता है तो वो हर माह १५ से ३५ हजार रूपये कमा सकता है वो भी अपने शहर एवं अपने गांव में रहकर ।
क्योकि हम देते है उसे उसके एवं उसके प्रतिनिधियो के कार्य का ४० प्रतिशत उदाहरण के लिए मान लेते है कि आप और आप की टीम मिलकर २ लाख रूपये कार्य करते है तो आपको मिलेगा उसका ४० प्रतिशत आर्थात ८०,००० रूपये आप अपने प्रतिनिधियो को देने के पश्चात आपके पास १५ से २० हजार रूपये बचते है।
यह समस्त कार्य को करने का प्रद्गिाक्षण हम देंगे ताकि वे अपने जिले तहसील और गांव मे रहकर हजारो रूपये कमा सकते है।

दैनिक जागरण ही बताए कि अंबाला के बाकी प्रत्याशी कहां गए?

भाई यशवंत जी, मैं आपके भड़ास मीडिया का बहुत बड़ा फैन हूं। वास्तव में जिन काले चेहरों को आप बेनकाब कर आम जनता के सामने ला रहे हैं आज के समय में उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। आज नहीं तो कल आपकी सेवा का फल पूरे देश को मजबूती के रूप में मिलेगा और मीडिया वास्तव में पुन: चौथा स्तंभ बन पाएगी। हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव के दौरान अंबाला जाने का मौका मिला तो यहां की मीडिया की काली करतूतें देखकर दंग रह गया।

अंबाला में एक बड़े अखबार ने जहां पेड न्यूज प्रकाशित करने में बेशर्मी की सभी हदें लांघ ली तो खुद को दुनिया का नंबर एक कहने वाले दैनिक जागरण ने पत्रकारिता का कोई स्तर नहीं रखा। यहां के 20 वार्डों में से वार्ड नंबर 13 में अधिकतम 17 प्रत्याशी थे लेकिन जागरण  ने वहां न केवल 24 प्रत्याशी प्रकाशित किए बल्कि अपना बेहूदा एनलसिस भी दिखा दिया। इस होनहार ने यहीं बस नहीं की उसने वार्ड नंबर 4 से 5 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में दिखाया जबकि वहां मात्र 4 प्रत्याशी ही मैदान में थे।

इसी प्रकार इसी  ने वार्ड नंबर 14 से 19 प्रत्याशी मैदान में दिखाए जबकि वास्तव में वहां से मात्र 12 प्रत्याशी थे। इसी प्रकार वार्ड नंबर 3 से 15 प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन दैनिक जागरण ने इसे 18 दिखाया। वार्ड नंबर 15 में चुनाव मैदान में उतरे 10 प्रत्याशियों के स्थान पर 12 प्रत्याशी, वार्ड नंबर 20 से  चुनाव मैदान में उतरे 11 प्रत्याशियों के स्थान पर 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे प्रकाशित किए हैं।

अब दैनिक जागरण ही बता सकता है कि नंबर एक अखबार में दिखाए गए बाकी प्रत्याशी कहां गए। जिज्ञासावश मैंने कुछ गहराई में जाने की कोशिश की तो सारा मामला साफ हो गया कि अंबाला में चीफ रिपोर्टर के पद पर एक ऐसा कमाउ पूत बैठाया हुआ है जो अपने आका के आशीर्वाद से खूब धन कमा और कमवा रहा है। खबर छपवाने के लिए मोटी सेवा होगी तो स्तर तो घटिया ही रहेगा न। आकाओं का यह सपूत अंबाला यूनिट में किसी को भी टिकने नहीं देता, एक को यह जागरण से आउट करवा चुका है तो दूसरे को ट्रांसफर करवा चुका है। पत्र के साथ चुनाव आयोग की लिस्ट भी भेज रहा हूं, सारी स्थिति खुद ही साफ हो जाएगी। यदि जागरण ऐसे ही रिपोटिंग करता रहा तो वह दुनिया का नंबर एक अखबार तो रहेगा लेकिन केवन नीचे से, धन्य हैं ऐसे पत्रकार जो पत्रकारिता को कलंक लगा रहे हैं।

नोट- यह मेरा पहला पत्र है, आपसे विनती है कि मेरा नाम कहीं प्रकाशित नहीं किया जाए। दोनों संलग्न पत्र स्वयं में प्रत्यक्ष प्रमाण ही हैं। आपको आगे भी ऐसे समाचार भेजता रहूंगा।

सादर

रा.

हिमाचल के बिलासपुर में पत्रकारों के बीच कई गुट, चौथा खंभा बैसाखियों के सहारे

हिमाचल प्रदेश के मध्य में बसे बिलासपुर को हिमाचल का दिल तो कहा ही जाता है लेकिन इसे संघर्षों की धरती भी कहा गया है. विस्थापन के बाद कई ऐसे संघर्ष यहां पर हुए हैं जिनसे लोगों को लाभ कम और हानि अधिक हुई है. राजनीति हो या कोई भी क्षेत्र, गुटबाजी ने बिलासपुर को हमेशा मात दी है. अब पत्रकारिता में भी तीन गुट हो गए हैं. लोग इस फूट का लाभ उठा रहे हैं.

एक गुट का नेतृत्व 1994 से लगातार बिना चुनाव करवाए पत्रकार महासंघ के राज्य अध्यक्ष पद पर बिराजमान पंडित जय कुमार कर रहे हैं तो दूसरे गुट का नेतृत्व हिमाचल पत्रकार फेडेरेशन के राज्य महासचिव कुलदीप चंदेल कर रहे हैं. तीसरा गुट जर्नलिस्ट फैडेरेशन भी बन चुका है और उसका नेतृत्व हिमाचल के प्रदेश महासचिव प्रविंद्र शर्मा के पास है.

जिला मुख्यालय पर प्रेस क्लब चल रहा है, यह अलग बात है कि क्लब के लिए किराए पर लिए गए भवन का ताला कभी नहीं खुलता. प्रेस क्लब के प्रधान संजय शर्मा हैं. बिलासपुर पत्रकार परिषद का भी गठन हो चुका है जिसके प्रधान अजय कुमार उपाध्याय हैं. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि सकारात्मक पत्रकारिता होने के स्थान पर गुटबाजी हो रही है और एक दूसरे की टांग खिचाई अधिक हो रही है.

आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग परेशान है कि पत्रकारिता के माध्यम से जहां बिलासपुर की तरक्की होनी चाहिए पर ऐसा कुछ नहीं हो रहा. पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन बिलासपुर में यह स्तंभ बैसाखियों के सहारे खड़ा है. समस्याओं के अलावा स्वामी भक्ति अधिक हो रही है और कई बार तो पत्रकारिता को छोड़ने को ही मन करता है. न जाने कब सुधरेंगे हम.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

साधना न्यूज चैनल से बीरेंद्र द्विवेदी और राजेश कुमार का इस्तीफा

साधना न्यूज के दो विकेट और गिर गये हैं. साधना न्यूज के बिहार-झारखण्ड चैनल से राजेश कुमार और मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ चैनल से बीरेंद्र द्विवेदी ने इस्तीफा दे दिया है. राजेश कुमार ने इंडिया न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की है. बीरेंद्र के बारे में पता चला है कि उन्होंने साधना न्यूज के साथ-साथ मीडिया को भी तिलांजलि दे दी है.

प्रबंधन के उपेक्षित व्यवहार और तेलाही करने वाले जूनियरों से भी कम वेतन मिलने से बीरेंद्र काफी त्रस्त थे. अपने साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाने की काफी कोशिश की लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई. अंत में थक हार कर बीरेंद्र द्विवेदी ने साधना न्यूज और मीडिया दोनों से स्वतः मु्क्ति हासिल कर ली. बीरेंद्र साधना न्यूज से इस चैनल की लांचिंग समय से ही जुड़े हुए थे.

एसएसपी अजय मिश्रा ने अब मुझे भी गिरफ्त में लेने की तैयारी शुरू कर दी : रामसुंदर मिश्रा

 आज थाना चौक का सिपाही मुझे फ़ोन करके कहा कि आपसे मिलना है… मैंने अपनी व्यस्तता बताते हुए कहा कि मैं वाराणसी कचहरी पर हूं, आप वहीं आ जाइए. जब सिपाही हमसे मिला तो उसने मुझे थाना चौक के प्रभारी वाईपी शुक्ला द्वारा जारी 160 सीआरपीसी की नोटिस थमाई. इसमें लिखा है-

''आपको सूचित किया जाता है विभिन्न टीवी न्यूज़ चैनलों पर प्रदर्शित एवं चित्रित समाचार 'वाराणसी के मर्निकर्णिका घाट पर लाशों पर सट्टेबाजी' के परिपेक्ष्य में आप दिनांक 12.06.2013 को सुबह 11 बजे दिन थाना चौक वाराणसी पर उपस्थित होकर प्रदर्शित समाचार उपरोक्त के सम्बन्ध में अपना साक्ष्य प्रस्तुत करें ताकि थाना चौक पर पंजीकृत अभियोग अपराध सख्या 84/13 धारा 420,467,468,177,295A,298 भादवि की विवेचना में अग्रेतर विधिक कार्यवाही की जा सके.''

मैंने भी बड़े प्यार से उस नोटिस को प्राप्त किया और साफ तौर से लिख दिया कि इस सम्बन्ध में मुझे कोई जानकारी नहीं है. अब देखना ये है कि पुलिस अपनी कार्यवाही क्या करती है.  दरअसल मुझे नोटिस जारी करने के पीछे मात्र कप्तान साहब का नाराजगी है क्योकि मैंने कप्तान की तानाशाही का विरोध किया था. कप्तान साहब के निर्देश पर थाने के सिपाहियों और दरोगाओ ने काशी नाथ शुक्ला की गर्भवती पत्नी, मां और बहन के साथ बदसलूकी व मारपीट की थी जिसकी शिकायत मैंने काशी की पत्नी के कहने पर और पत्रकार होने के कारण राष्ट्रीय महिला आयोग में की. इसका परिणाम रहा कि पुलिस ने काशी के घर दिन रात दबिश देना बंद कर दिया.

उसके बाद से ही मुझे पुलिस की तरफ से तरह तरह की धमकियां मिलने लगीं. इसी दौरान लखनऊ की सोशल एक्टिविस्ट श्रीमती नूतन ठाकुर ने दिनांक 08.06.2013 को इस पूरे प्रकरण की शिकायत प्रेस काउंसिल से कर दी. फिर क्या. कप्तान साहब आखिर कैसे बर्दाश्त कर पाते कि उनकी शिकायत हुई है. थानों के सूत्रों ने मुझे जानकारी दी है कि– ''भैया आपकी गिरफ़्तारी के लिए कप्तान साहब का दबाव थाना प्रभारी पर बहुत है क्योंकि आपही सबसे ज्यादा विरोध कर रहे हैं. सहारा वाले 4 घंटे तक खबर चलायी थी उसी से कप्तान साहब नाराज हैं और उनकी नाराजगी तब और बढ़ गयी जब सहारा वाले निमेश राय ने साहब का सीधा संवाद जनता के बीच ला दिया. तभी से कप्तान साहब बेहद नाराज हैं और रोज थाना प्रभारी साहब से पूछते हैं कि इस मामले में क्या हुआ. इनकी-उनकी गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई.''

अब आप समझ सकते हैं कि बनारस के कप्तान कितने ईमानदार हैं. क्या चाहते हैं कि ऐसे कप्तान को वाराणसी का प्रतिनिधित्व करना चाहिए जिन्होंने पूरे प्रदेश में ईमानदारी का ढिंढोरा तो पीटा है लेकिन उनके काम में कहीं ईमानदारी नाम की चीज दिखती नहीं है. वैसे मैं अब कप्तान साहब के अगले आदेश का इंतजार करुंगा लेकिन बता देना चाहता हूं कि कप्तान साहब, आप मुझे चाहे जेल भिजवा दें, लेकिन औरों की तरह आपके आगे घुटने नहीं टेकुंगा क्योंकि उससे ज्यादा आप मेरा कुछ कर नहीं सकते हैं.

जय पत्रकारिता
जय परशुराम 

रामसुंदर मिश्रा

पत्रकार

वाराणसी


पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें- 

बनारस के एसएसपी अजय मिश्रा ने धाराएं भी उस गरीब पर ऐसी लगायीं कि जैसे वो कोई दंगाई हो

एसएसपी वाराणसी द्वारा पत्रकारों के उत्पीडन की प्रेस काउंसिल में शिकायत

बनारस के एसएसपी बदले की भावना से एकतरफा कार्रवाई कर रहे, पत्रकार क्षुब्ध

बनारस में पुलिस और मीडिया के बीच तनाव बरकरार

प्रायोजित खबर दिखाने के आरोप में न्‍यूज नेशन का कैमरामैन अरेस्‍ट, पत्रकार फरार

बनारस में अब रामसुंदर को अरेस्‍ट कराने की तैयारी!

बनारस में पुलिस ने पत्रकार की गर्भवती पत्‍नी से की मारपीट, शिकायत महिला आयोग को

श्‍मशान पर सट्टा की खबर थी प्रायोजित, पुलिस ने कथित सट्टेबाजों की शिनाख्‍त की

'लाशों की आईपीएल' की प्रायोजित खबर दिखाने वाले आधा दर्जन चैनलों को नोटिस

ईटीवी, लखनऊ से भी एक को तोड़ा नभाटा, लखनऊ ने

लखनऊ : लखनऊ में अपनी एडोटोरियल टीम बनाने में जुटे नभाटा प्रबंधन ने ईटीवी से भी एक को तोड़ लिया है। सूत्रों का कहना है कि केवल ज्‍वाईनिंग की औपचारिकता भर बाकी है।  ईटीवी का यह संवाददाता क्राइम रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है और अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत दैनिक जागरण से ही की थी।

अभी तक जितने भी सीनियर रिपोर्टर नभाटा ने लिए हैं, वो सब के सब जागरण प्रोडेक्‍ट ही हैं। यहां तक की आरई सुधीर मिश्र और एसिस्‍टेंट एडीटर नदीम भी दैनिक जागरण प्रोडक्‍ट ही हैं। (कानाफूसी)

भड़ास तक सूचनाएं bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

तो मोहन भागवत आडवानी के बोकडी काकी हैं!

Virendra Yadav : तो आडवानी जी कोपभवन से बाहर आ गए …. पूरब में एक किस्सा प्रचलित है –"जब बोकडी (बकरी ) काकी कहलीं तब हम खाए लेहलीं ." … दरअसल हुआ यह कि परिवार में एक बुजुर्ग नाराज हो गए और कहा कि 'अब हम न खाब'.. सबने मनाया नहीं माने.

लेकिन जब रात को तेज भूख लगी तो बगल में रखी थाली को चट कर गए .लोगों ने कहा कि अच्छा किया ..तो सफाई दी," बेटवा कहलेस हम ना मनलीं, मेहरारू कहलेस तबहूँ हम ना खयलीं , पतोह कहलेस तबव हम ना मनलीं . मुला जब बोकडी काकी कहलीं तब हम न खुद के रोक पयलीं". तो मोहन भागवत आडवानी के बोकडी काकी हैं.

आलोचक वीरेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से.

आडवाणी मुझे उस पिता की तरह लगे, जो अपने लिए बहू के दो दिन अलाट करवा रहा था

Vikas Mishra : एक फिल्म आई थी 'मातृभूमि'। जहां लड़कियों का अकाल है, लड़कों की शादियां नहीं हो रही थीं। एक घर में पांच कुंवारे बेटे थे और उनका विधुर बाप। रुपये पैसे देकर तिकड़म से वो पांचों के लिए एक लड़की ढूंढ लाया। आंगन में बंटवारा हो रहा था। एक-एक दिन एक भाई..। इस तरह बांटने पर दो दिन बचते थे। तब तक बाप बोला। सालों तुम्हें हमारी फिक्र नहीं होती। मैंने तुम्हें पढ़ाया लिखाया, तुम लोगों के लिए दुल्हन ले आया जीवन भर की सारी जमा पूंजी खर्च करके। मेरा ख्याल नहीं है तुम लोगों को।

फिर तय हुआ कि बाकी दो दिन पिता जी के। लड़की से किसी ने नहीं पूछा और पिताजी बहू के साथ सुहागरात मना आए। ये कहानी ख्याल आई अभी बीजेपी और आडवाणी प्रकरण के बाद। सत्ता उस लड़की की तरह लगी। राजनाथ, मोदी, जेटली वगैरह पांच बेटों की तरह लगे और न जाने क्यों आडवाणी मुझे उस पिता की तरह लगे, जो अपने लिए बहू के दो दिन अलाट करवा रहा था।

वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.

दबंग दुनिया, मुंबई के साथ अमिताभ, मनोज, सुनील, अभिषेक, नीलम, पवन, मिलिंद की नई पारी

दबंग दुनिया, मुंबई में अमिताभ श्रीवास्तव न्यूज़ एडिटर बनाये गए हैं. वे सामना और मेट्रो सेवेन में न्यूज़ एडिटर रह चुके हैं. दैनिक भास्कर, टी वी नाइन में न्यूज़ डेस्क सम्भाल चुके मनोज सराफ ने सीनियर सब एडिटर के रूप में दबंग ज्वाइन कर लिया है.

महानगर और जागरूक टाइम्स में रहे सुनील कुमार यादव और अभिषेक कुमावत दबंग दुनिया न्यूज़ डेस्क पर सब एडिटर होंगे. आईबीएन सेवन की नीलम पाठक, हिंदुस्तान समाचार के पवन ओझा दबंग की रिपोर्टिंग टीम में होंगे. मेट्रो सेवन के फोटोग्राफर मिलिंद ताम्बे ने भी दबंग दुनिया में पदभार ग्रहण कर लिया है.

साइना नेहवाल की बायोग्राफी लिख चुके हैं हेडलाइंस टुडे (साउथ) के नए एडिटर टीएस सुधीर

दक्षिण भारत के वरिष्ठ पत्रकार टीएस सुधीर जो हाल में ही हेडलाइंस टुडे (साउथ) के साथ बतौर संपादक जु़ड़े हैं, साइना नेहवाल की बायोग्राफी भी लिख चुके हैं. टीएस सुधीर जाने-माने ब्लॉगर हैं और दक्षिण भारत की राजनीति पर कई पुस्तकें लिख चुके हैं. दो साल पहले उन्होंने एनडीटीवी के रेजिडेंट एडिटर (साउथ) पद से इस्तीफा दिया था.

वे एनडीटीवी से 16 वर्षों से जुड़े हुए थे. एनडीटीवी के बाद उन्होंने अअपनी नई पारी की शुरुआत बतौर एक्जीक्यूटिव एडिटर, 'द साउथ रिपोर्ट्स' के साथ की थी. टीएस सुधीर को नक्सलवाद, खेल, बिजनेस और राजनीति से जुड़े विषयों में महारथ हासिल है.

स्पोर्ट्स18 के सीईओ सतीश मेनन ने इस्तीफा दिया, वैल्यूएवल ग्रुप में सीईओ बने

नेटवर्क18 से संबद्ध स्पोर्ट्स18 के सीईओ सतीश मेनन ने इस्तीफा देकर वैल्यूएवल ग्रुप में बतौर सीईओ जुड़ रहे हैं. सतीश मेनन पांच वर्षों से नेटवर्क18 के साथ जुड़े थे. नेटवर्क 18 से पहले मेनन जी ग्रुप का हिस्सा भी रह चुके हैं. वे जी स्पोर्ट्स में स्पान्सर्शिप और बिजनेस डेवलपमेंट के अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे.

मेनन निम्बस कम्यूनिकेशन में बतौर स्पोर्ट्स और मीडिया के अध्यक्ष पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. मेनन सहारा वन में सेल्स, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के अध्यक्ष के पद पर कार्य कर चुके हैं. उन्होंने जी न्यूज के अध्यक्ष के रूप में जी टेलीफिल्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने मिडडे, द टाइम्स ऑफ इंडिया और संडे ऑब्सर्वर के साथ भी अपना योगदान दिया है.

हद है : डीएलएफ मामले में रोबर्ट वाड्रा पर आरोप को ‘गोपनीय’ सूचना मानता है पीएमओ!

डीएलएफ से जुड़े रोबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों के बारे में कोई भी सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय नहीं देना चाहता है. वह इन्हें 'गोपनीय' सूचना मानता है और इन्हें आरटीआई एक्ट के तहत दिये जाने से छूट चाहता है. लखनऊ स्थित आरटीआई कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने डीएलएफ-वाड्रा प्रकरण में अपने द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर रिट याचिका के सम्बन्ध में रूटीन सूचनाएँ मांगी थीं कि याचिका की प्रति पीएमओ में कब प्राप्त हुई और उस पर क्या कार्यवाही की गयी. साथ ही उन्होंने सम्बंधित फ़ाइल के नोटशीट की प्रति भी मांगी थी.

पीएमओ ने पहले अपने पत्र दिनांक 01 मार्च 2013 द्वारा यह कह कर सूचना देने से मना कर दिया था कि प्रकरण अभी न्यायालय में विचाराधीन है. कोर्ट द्वारा 07 मार्च को इस याचिका में निर्णय होने के बाद जव ठाकुर ने दुबारा यह सूचना मांगी तो अब पीएमओ ने अपने पत्र दिनांक 06 जून द्वारा यह कह कर सूचना देने से मना कर दिया है कि यह “गोपनीय” सूचना है. उन्होंने इसके लिए एक दूसरे सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंस्टीट्युट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया बनाम शौंक एच सत्या में दिये निर्णय का भी सहारा लिया है जवकि वह प्रकरण “वैश्वासिक नातेदारी” से सम्बंधित था और यह मामला कथित भ्रष्टाचार से सम्बंधित है.

गाजीपुर जिले में ग्यारह साल की लड़की से रेप, पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई

Braj Bhushan Dubey : 42 साल के दरिन्‍दे ने 11 साल की मासूम के साथ किया रेप। दर्ज अपराध के बाद भी पुलिस नहीं कर रही कार्यवाही। इन्‍सान किस प्रकार शैतान होता जा रहा है। इनका इलाज क्‍या है ? इस प्रकार की घटनाएं कैसे रुके, यह एक ज्‍वलन्‍त व बडे महत्‍व का प्रश्‍न है। हमारे निर्वाचन क्षेत्र के एक गांव में 5 मई को घर में अकेला पाकर एक 42 वर्ष के भेड़िये ने 11 वर्षीया दलित लड़की के साथ रेप किया।

लड़की का पिता रिक्‍शा टाली चलाता है। मां बाप मजदूरी करने गये थे उसी बीच उस शैतान ने मौका पाकर हैवानियत की सारी हदें पार कर दिया। गाजीपुर जिले के शादियाबाद थाने में अपराध दर्ज किया गया है आईपीसी की धारा 376 व 506 के तहत। पीड़िता के घर जाकर पूरी बात जाना और आश्वस्त होकर पूरा मामला शासन व उच्‍चाधिकारियों को सन्‍दर्भित करता हूं।

आम आदमी पार्टी के गाजीपुर जिले के अध्यक्ष बृजभूषण दुबे के फेसबुक वॉल से.

जब संपादक गण अपने स्ट्रिंगरों से पैसा लेकर डकार जाएं तो क्या ईमानदार पत्रकार चुप रहे?

Shambhunath Shukla : फेसबुक पर लिखते रहने के कारण अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिवार के लोगों ने कुछ पोस्ट पर आपत्ति जताई है। मैं इसे इसलिए शेयर कर रहा हूं कि लोग बताएं कि मैं गलत हूं या वे कुछ मुगालते में हैं।

1. मैं नरेंद्र मोदी का विरोधी क्यों हूं? मैं हिंदुत्व और ब्राह्मणवाद का विरोधी क्यों हूं? जबकि मैं संस्कृत, पाली, बृज, अवधी व हिंदी का जानकार हूं।

– अब इसका जवाब क्या यह दूं कि संस्कृत अथवा अन्य प्राच्य भारतीय भाषाएं क्या ढक्कन और डब्बा लोगों की ही भाषाएं हैं कि मैं अपनी द्वंदात्मकता के उछाह पर ढक्कन बंद कर दूं।

2. मैं हिंदी पत्रकारों की निंदा क्यों करता हूं? और जब मैं स्वयं अखबारों का संपादक रहा हूं तब क्यों नहीं बोला।

– जिस क्षेत्र में मैने काम किया है उसी के बारे में अच्छी ंतरह जानता समझता हूं इसलिए सब पता है। और जब भी अवसर मिले अन्याय व गलत बात का विरोध करना चाहिए।

3. मैं यह क्यों लिखता हूं कि हिंदी पत्रकारिता में पैसा नहीं है। मसलन मुझे चार महीनों में मात्र ३ हजार रुपये की आमदनी हुई है?

– तो भैया मैं क्या यह लिख दूं कि हिंदी में पैसा बहुत है बशर्ते आप बीट के सिपाही या अधिक से अधिक किसी थानेदार की तरह व्यवहार करोऔर जो भी फंस जाए उसे लूट लो।

4. मैने फेसबुक के माध्यम से कुछ संपादकों के खिलाफ क्यों लिखा?

– जब संपादक गण अपने स्ट्रिंगरों से पैसा लेकर डकार जाएं और मांगने पर पुलिस की धमकी दें तो क्या एक ईमानदार पत्रकार को चुप रहना चाहिए।

5. फेसबुक से मेरा कैरियर नष्ट हो रहा है?

– लेकिन मुझे आज जो कुछ भी पहचान मिली है वह फेसबुक के कारण ही। वर्ना अखबारों में तो मुंह सिए हुए रखना पड़ता था। और मेरा जो कैरियर बनना था मैने बना लिया। अब क्या जीवन भर कैरियर ही बनाता रहूं।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

एंकर अभिज्ञान प्रकाश की कायदे से क्लास ली प्रकाश जावडेकर ने

Vineet Kumar : ये एनडीटीवी की नौकरी थोड़े ही है कि छूट जाएगी. प्रकाश जावडेकर ने आज एंकर अभिज्ञान प्रकाश की कायदे से क्लास ली. जावडेकर का कहना था कि आप संघ और बीजेपी के संदर्भ में इस तरह की हल्की बात नहीं कर सकते. कई बार एंकरों का ओवरस्मार्ट बनना भारी पड़ जाता है. यही काम कर्नाटक चुनाव के समय राजीव प्रताप रुढ़ी ने अर्णव के साथ किया था.

विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

मैडम कल से आपको ये कपड़े न पहनने का ऑर्डर मिला है…

Ila Joshi : हाल फिलहाल में दफ़्तर में हुई औपचारिक पोशाक की सख्ताई की घोषणा के मद्देनज़र आज मैं भी वैसे ही एक परिधान में ऑफिस पहंची, कमीज़-स्कर्ट-जूते…ये पोशाक मैं अपने पिछले कार्यस्थलों में भी पहन चुकी हूँ इसलिए ये सोच बैठी कि ये दफ़्तर के माहौल के अनुकूल है…मगर शाम को चाय पीने के लिए दफ़्तर के गेट से बाहर निकलते निकलते महिला गार्ड ने टोका और कहा कि "मैडम कल से आपको ये कपड़े न पहनने का ऑर्डर मिला है"..

मैं जानती हूँ कि ये उन्हें किसी ने कहने के लिए कहा था, गुस्सा तो मुझे बहुत आया और उन व्यक्ति से मिल दो बात करना चाहूंगी जिन्होंने खुद हिम्मत न कर गार्ड से कहलवाया…अब ये बताइए कि उसी नियमावली में साड़ी एक औपचारिक परिधान है, वही साड़ी जिसमे एक औरत का पेट, कमर और अक्सर क्लीवेज भी दिखाई देती है, क्या मेरी स्कर्ट उस साड़ी से ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी…आज आपको मेरे स्कर्ट पहनने से दिक्कत है कि वो दफ़्तर के माहौल के हिसाब से अनुकूल नहीं है, कल सब औरतों को बुर्का पहनकर आने का नियम बना देना लेकिन क्या उससे दूषित मानसिकता को साफ़ कर पाओगे…

एक कहावत है कि इलाज से परहेज़ बेहतर लेकिन वो हर जगह लागू नहीं होता…बालात्कारी और व्याभाचारी मानसिकता कपड़ों के अन्दर मौजूद जिस्म को भी क्षत-विक्षत कर देती है तब आपके ये सारे नियम रूपी परहेज़ धरे के धरे रह जायेंगे और आप बस औरतों के शरीर ढकते रहना…मेरी मित्रसूची में मेरे कुछ सहयोगी और वरिष्ठ पद के लोग भी हैं जो मेरी उपयुक्त पोस्ट और इस विचार से कतई असहमत नहीं होंगे कि विचारों और नीयत के साफ़ होने का आपके कपड़ों से कोई लेना देना नहीं है…आप जितने नियम थोपेंगे उसके चौगुने विद्रोह के लिए तैयार रहिये!!

इला जोशी के फेसबुक वॉल से.

A journalism prize to an enemy of the Press?

Anyone who has been keeping abreast of current affairs in Venezuela would likely have been surprised by last week's award of the National Journalism Prize to that country's late president, Hugo Chavez. An Associated Press report on the incredulous decision told us that the National Journalism Prize Foundation said that its jury voted unanimously to give Mr Chavez the prize because he gave voice to "the oppressed of the world" and fought a "constant battle against media lies".

Clearly, the National Journalism Prize Foundation jury consists of individuals who share former President Chavez's political views. Indeed this 'prize' is a slap in the face of the ideals of democracy and a free Press, for Mr Chavez, during his tenure in office, had distinguished himself as an opponent of free speech.

Who could forget that in 2007 Mr Chavez pushed one television station off the air simply because it had been strident in its criticism of his presidency. Then, in 2009, the Venezuelan Government revoked the licences of 32 radio stations and two local television stations in order, they said, "to democratise the radio-electric spectrum".

That, of course, was really a move against media opposed to the president and was correctly described as being "motivated by the Government's desire to silence dissent". We recall as well that in 2010 Mr Oswaldo Alvarez Paz, a former presidential candidate and ex-governor of the oil-rich state of Zulia, was placed under house arrest after saying in a television interview that Venezuela had become an operations centre that facilitates drug trafficking. Mr Alvarez, an outspoken critic of the Chavez Government, was charged with inciting hatred and supplying false information.

Probably one of the most egregious acts committed by the Hugo Chavez Admnistration was its decision, in January 2010, to pull from the air a cable television channel for defying new government regulations requiring cable channels to televise the president's speeches whenever government officials deemed it necessary.

Not surprisingly, the media house — Radio Caracas Television (RCTV) — did not share President Chavez's political views, and as such was accused by Mr Chavez of plotting against him and of supporting a failed coup in 2002.

Readers will recall that in 2007, RCTV switched to cable after the Chavez Government refused to renew its licence to broadcast on regular airwaves. The move against RCTV, therefore, was in keeping with the Government's aggression towards the station.

It is therefore ironic that an organisation claiming to uphold the principles of journalism could deem it fit to make such an award to Mr Chavez, a man who expended so much energy in trampling on press freedom.

But maybe we shouldn't be surprised, because during the years when Mr Chavez took action to stifle the Press, we never heard the slightest murmur of protest from the National Journalism Prize Foundation. This is indeed a bad day for journalism everywhere.(jamaicaobserver.com)

बुलंदशहर में जिस्म के धंधे से जुड़ी महिलाओं के पास से पत्रकारों के नंबर मिले

बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर मे पुलिस ने दो स्थानो पर छापा मारकर देह व्यापार मे लिप्त नौ महिलाओं समेत 26 लोगों को गिरफ्तार किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गुलाब सिंह ने संवाददाताओ को बताया कि कोतवाली नगर और कोतवाली देहात क्षेत्र मे पुलिस ने कल रात दो स्थानों पर छापा मारकर देह व्यापार के धंधे मे लिप्त नौ महिलाओ और 17 पुरुषो समेत 26 लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि महिला पुलिर्सकमी सहित बडी संख्या में पुलिस बल के साथ स्थानीय होटल मे रंगरलिया मनाते युवतियों व पुरुषों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार नौ महिलाओं के अलावा बिहार के किशनगंज से देह व्यापार के लिये लाई गई एक लड़की को भी मुक्त कराया गया। दिल्ली से अपने प्रेमियों के साथ आई दो छात्राओं को भी पुलिस ने छापे मे पकड़ा। श्री सिंह ने बताया कि इस धंधे से जुडी महिला संचालिकाएं ग्राहक की मांग पर महिलाओं को सम्पर्क कर बुलाती थीं। धंधे से जुडी महिलाओ के पास से समाज के संभ्रान्त नागरिक, नेता, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और कुछ पत्रकारों के मोबाइल नम्बर भी मिले हैं। गिरफ्तार लोगो के पास से 64 हजार रुपये नकद व 40 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस धन्धे में करीब 70 लड़कियां लिप्त है। (वार्ता)

Journalist thrashed for filming cop-abuse in Thiruvananthapuram

Thiruvananthapuram : The state government has suspended two police officers in connection with the incident.Tension erupted when a group of policemen abused and roughed up a local journalist while he was trying to catch them abusing passengers of a bus here on his mobile. The victim later claimed that some of the police personnel were drunk.

"I tried to shoot the incident of policemen harassing bus passengers on my mobile phone. At this seven to eight police personnel started abusing and hitting me before the ladies and children. I told them that I am a journalist but they did not pay any heed and continued abusing and hitting me. More policemen in civil clothes joined the scene and started to assault me. I am very sure that the policemen in plain clothes were drunk," said Vineesh.

Reportedly, the journalist happened to be on the spot when a policeman was harassing the driver of a private bus, but also passengers. No sooner than the news spread, other mediapersons reached the spot and expressed their strong resentment against police excesses.

At the Museum Police Station where the police personnel, both officers and men in uniform and mufti, scuffled with mediapersons. They pulled Vineesh by his hair and dragged him inside the police station.

Fellow journalists then took a tired and bruised Vineesh to the Thiruvananthapuram General Hospital for treatment. The state government has suspended two police officers in connection with the incident. (ANI)

Pakistani, Russian reporters win journalism award

Washington : A seasoned Pakistani journalist known for courageous muckraking reports and a reporter investigating corruption in Russia have won a prestigious journalism award. The 2013 Knight International Journalism Award recognises excellent reporting that makes a difference in the lives of people around the world, the International Centre for Journalists (ICFJ) announced here.

Umar Cheema, an investigative reporter for Pakistan’s largest English-language daily, The News, has set a new standard for courage and quality journalism in a country where reporters are routinely attacked and murdered, the centre said. Cheema has been a resolute force in investigative journalism, it said. In 2010, he was kidnapped and brutally tortured for writing critical stories about the government. Since then, he has churned out a steady stream of hard-hitting reports.

Roman Anin, a reporter for Russia’s daily Novaya Gazeta, has demonstrated how Russian companies and officials have created a culture of corruption that reaches far beyond the country’s borders.

“These top-notch investigative journalists define bravery,” said ICFJ President Joyce Barnathan. “Their pursuit of the truth, despite serious threats, is inspiring. They fearlessly expose abuses and ultimately change policies.”

Anin and Cheema will be honoured at ICFJ’s awards dinner here Nov 7. (IANS)

कोल ब्लाक के लिए नवीन जिंदल ने सवा दो करोड़ रुपये घूस तत्कालीन कोयला राज्यमंत्री नारायण राव को दिया था

नई दिल्ली : कोयला घोटाले में छोटी कंपनियों को निशाना बनाने वाली सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बाद बड़ी मछलियों पर हाथ डाल दिया है। जिंदल औद्योगिक समूह के प्रमुख व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल और पूर्व कोयला राज्यमंत्री दासरि नारायण राव पर जांच एजेंसी का शिकंजा कस गया है। इस मामले में सीबीआइ ने 12 वीं एफआइआर में इन दोनों नेताओं को आरोपी बनाया है।

इसमें जांच एजेंसी ने कहा है कि कोयला राज्यमंत्री रहते हुए नारायण राव ने जिंदल से 2.25 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर कोयला ब्लाक का आवंटन किया था। मंगलवार को सीबीआई ने दिल्ली स्थित नवीन जिंदल और हैदराबाद स्थित नारायण राव के घर समेत 15 स्थानों पर छापा मारा। जल्द ही इन दोनों से पूछताछ होगी।

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नारायण राव और नवीन जिंदल के बीच रिश्वत की लेन-देन के पुख्ता सुबूत मिलने के बाद ही एफआइआर दर्ज हुई है। उनके अनुसार, एक जनवरी 2007 को जिंदल ग्रुप की दो कंपनियों जिंदल स्टील व पावर लिमिटेड और गगन स्पांज ने झारखंड के अमरकोंडा मुर्गा डांगल कोयला ब्लाक के आवंटन के लिए आवेदन किया।

कोयला ब्लाक पाने के लिए दोनों कंपनियों ने झूठे हलफनामे दिए, जिनमें जमीन और पानी की उपलब्धता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। इसके साथ ही कंपनी ने इसके पहले एक भी कोयला ब्लाक आवंटित नहीं होने का दावा किया, जबकि इस ग्रुप की कंपनियों को पांच कोयला ब्लाक पहले से आवंटित थे। झूठे हलफनामे के बाद जनवरी 2008 में इन दोनों कंपनियों को कोयला ब्लाक आवंटित कर दिया गया।

कोयला ब्लाक आवंटित होने के 11 महीने के बाद दिसंबर 2008 में जिंदल ग्रुप की कंपनी जिंदल रीयल्टी ने नारायण राव की कंपनी सौभाग्य मीडिया में 2.25 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सौभाग्य मीडिया लिमिटेड का शेयर उस समय 28 रुपये में खुले बाजार में बिक रहा था, लेकिन जिंदल रीयल्टी ने इसे 100 रुपये प्रति शेयर की दर पर खरीदा। सीबीआइ का मानना है कि यह रिश्वत की रकम थी, जो जिंदल की ओर से नारायण राव को दी गई थी। वैसे रिश्वत देने में जिंदल ने पूरी सावधानी बरती थी।

रिश्वत की रकम पहले गगन स्पांज से उन्हीं के ग्रुप की कंपनी न्यू दिल्ली एक्जीम के माध्यम से होते हुए जिंदल रीयल्टी में गई थी। सीबीआई ने इन सभी कंपनियों के ठिकानों की तलाशी ली है। नवीन जिंदल के देश के बाहर होने के कारण दिल्ली स्थित उनके घर के कई आलमारियों को सीबीआई ने सील कर दिया है। इनकी चाभी खुद जिंदल के पास है। उनके लौटने के बाद इनकी तलाशी ली जाएगी। इस बीच, जिंदल ग्रुप ने इस मामले की जांच में सीबीआइ को सहयोग का भरोसा दिया। (जागरण)

संपादक कभी इतना बूढ़ा नहीं होता कि नई चीज न सीख सके… देखिए विनोद मेहता को…

42 साल तक हाथ से लिख कर पत्रकारिता करने वाले आउटलुक वाले विनोद मेहता इन दिनों कंप्यूटर के जरिए लिख रहे हैं और वर्ल्ड वाइड वेब (www) के आनंद ले रहे हैं. इस बारे में अंग्रेजी के एक ब्लाग में प्रकाशित हुआ है, जो इस प्रकार है–

After 42 years of handwriting his columns, articles and books on scribblepads—at Debonair,The Sunday Observer, The Indian Post, The Independent, The Pioneer and Outlook —and after hiding the vicious mouse behind his PC all his life, Outlook editorial chairman Vinod Mehta writes his latest Diary on his new laptop, in New Delhi on Tuesday.

“I found the Google Search fantastic,” says the new convert, who has coincidentally discovered the joys of the world wide web.

“I used to ask the librarian to get me George Orwell but now I type in the window, I get more than I bargained for. Even the thesaurus, not only does it give the synonyms and antonyms, it comes up with so many other options.”

Mr Mehta would neither confirm nor deny that he will start tweeting soon.

(sans serif blog)

साधना न्यूज चैनल से राजीव शर्मा, अमित तिवारी, योगेश जोशी, अमित सिंह, संतोष दुबे का इस्तीफा

लगभग एक महीने तक अवकाश पर रहने के बाद साधना न्यूज चैनल के आउटपुट एडिटर राजीव शर्मा ने प्रबंधन को त्याग पत्र सौंप दिया है. राजीव शर्मा एक बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं और एक नये चैनल के साथ शीघ्र ही सामने आएंगे. साधना न्यूज के एंकर हेड अमित तिवारी ने भी इस्तीफा दे दिया है.

अमित तिवारी के बारे में पता चला है कि वो एक नेशनल चैनल के एमपी-छत्तीसगढ़ संस्करण में नमूदार होंगे. साधना न्यूज के ही एमपी छत्तीस गढ़ चैनल के आउटपुट हेड योगेश जोशी भी लंबे समय से कार्यालय नहीं आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है.

साधना न्यूज चैनल के अंदरूनी हालात खराब होने की वजह से इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की लम्बी फेहरिश्त है. साधना न्यूज के कर्मचारी इस्तीफा देकर दूसरे संस्थानों में डेरा जमा रहे हैं. एमपी-छत्तीसगढ चैनल से संतोष दुबे और उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड से अमित कुमार सिंह चौहान ने भी साधना न्यूज को बाय-बाय बोल दिया है.

संतोष दुबे ने पी-7 के साथ और अमित कुमार सिंह चौहान ने जी न्यूज यूपी के साथ नई पारी शुरू की है. अनुभवी कर्मचारियों के चले जाने से साधना न्यूज चैनल का स्तर भी बद से बदतर हो चुका है.

मध्य प्रदेश में ‘लोकमत’ के लोकार्पण से पहले सिर मुंडाते पड़ गए ओले

महाराष्ट्र से पब्लिश होने वाला अखबार लोकमत, मध्यप्रदेश में अपनी जड़ें जमाने की तैयारी में है. इसका पहला संस्करण केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा से प्रकाशित होना है. लेकिन लोकमत के लिए मध्य प्रदेश में सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ने का मुहावरा सटीक बैठ रहा है.

लोकमत के छिंदवाड़ा संस्करण के उद्घाटन के लिए पहले 2 जुलाई की तारीख तय की गई थी. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने उद्घाटन समारोह में पहुंचने के लिए अपनी सहमति भी दे दी थी. चूंकि चुनाव नजदीक हैं और पॉलिटिकल रेवेन्यू की संभावनांए बढ़ी हैं इसलिए लोकमत के उद्घाटन समारोह के कर्ताधर्ता चाहते थे कि वो बीजेपी और कांग्रेस दोनों को एक साथ एक ही तराजू में तौल दें.

उद्घाटन समारोह के कर्ताधर्ता मुख्य मंत्री और बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के पास भी निमंत्रण लेकर पहुंचे. कांग्रेस के नेता लोकमत के कर्ताधर्ताओं की मंशा समझ गए और उन्होंने बीजेपी के नेताओं के साथ मंच शेयर न करने की अपरोक्ष भावना से 2 जुलाई को आने में असमर्थता जाहिर कर दी. लोकमत के कर्ताधर्ताओं ने चुपचाप दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से सलाह की और उद्घाटन की तारीख दो जुलाई की जगह बारह जुलाई निर्धारित कर दी.

बड़ी चालाकी से उन्होंने शिवराज सिंह और रोहाणी की दोबारा सहमति भी ले ली. राज्य की अभिसूचना इकाई ने जब शिवराज सिंह को बताया कि लोकमत के उद्घाटन की तारीख कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के कहने पर बदली गई है तो शिवराज सिंह और ईश्वर दास रोहाणी ने समारोह में शामिल होने से इंकार कर दिया और विधान सभा सत्र का हवाला देते हुए लोकमत वालों के पास समारोह में शामिल न हो पाने के लिए अपना खेद पत्र भेज दिया है.

लोकमत के प्रबंधन ने अब यह तय किया है कि उद्घाटन 12 जुलाई की सुबह होगा और शाम को रात्रि भोज. समारोह में कांग्रेसी नेता रहेंगे और रात्रि भोज बीजेपी के नेताओं के साथ किया जाएगा. यह तो सभी को मालूम है कि लोकमत, ‘कांग्रेसी दर्डा परिवार’ का अखबार है और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. इसलिए लोकमत प्रबंधन चाहता था कि कांगेस और बीजेपी दोनों को साध कर चला जाए.

शायद लोकमत वाले भूल गए कि एक म्यान में दो तलवारें कभी नहीं रहती. अब उन्हें यह डर भी लग रहा है कि सरकार की उपेक्षा के साथ मध्य प्रदेश में अखबार शुरु करना टेढ़ी खीर हो सकता है और पानी में रह कर मगरमच्छ से बैर रखना भी बुद्धिमानी वाला खेल नहीं है. सो लोकमत प्रबंधन ने उद्घाटन समारोह के बाद रात्रि भोज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुलाने के लिए ऐड़ी चोटी के जोर लगा दिए हैं.

मीडिया, मनमोहन, आडवाणी, चिटफंड पर कुछ मजेदार हो जाए (देखें कार्टून)

कुछ शानदार कार्टून लेकर भड़ास फिर हाजिर है. ताजा मसला आडवाणी का है. उन पर एक शानदार कार्टून… मनमोहन पर कई कार्टून हैं… टीआरपी व न्यूज चैनल्स को लेकर एक गुदगुदाने वाला कार्टून है… चिटफंड पैराबैंकिंग कंपनियों के फ्राड पर एक कार्टून है.. एक खबर की कटिंग है, जिसमें एक हिम्मती दुल्हन की दास्तान बताई गई है, सचित्र… मतलब इतना सब कुछ है कि बिना गुदगुदी के, बिना सोचे… वापस न जाएंगे… 🙂











और भी (देखें)

महाचोर और पेडन्यूज माफिया दैनिक जागरण ने खुद पकड़वा दी अपनी चोरी (देखें)

Saroj Kumar : देखिए-देखिए… विज्ञापन के बदले खबर लिखने-बनाने की चोरी पकड़ी गई… दैनिक जागरण, पटना के इस खबर 'डीएवी कैंट एरिया के छात्रों ने कई क्षेत्रों में लहराया परचम' के बॉक्स में क्या लिखा है- "डीएवी स्कूल अपना विज्ञापनदाता है। इस कारण से कृपया कर इस खबर को रंगीन पेज पर सभी फोटों के साथ जगह देने की कोशिश करेंगे"

…वैसे भला हो उस पत्रकार या पेजीनेटर का जिसने अपने वरिष्ठ जो शायद संपादक या मार्केटिंग हेड होगा, का बयान हूबहू खबर के साथ कोट कर दिया और जितनों ने भी दैनिक जागरण की प्रति खरीदी इसे पढ़ लिया…हाहाहा…ये तो किसी से छिपा नहीं है कि छोटे-बड़े सभी विज्ञापन दाताओं के लिए मीडिया खबरें क्रिएट करती है, लेकिन इस तरह चोरी पकड़ी जाना मजेदार है…

Shobha Shami Inki Toh lag gayi

Vivek Singh Jagran wale chor hai.

Konika Arora hahahahaha… great……… actually aisa to sabhi karte hain but chori sirf jagran ki pakdi gayi… hahahahahah…. aisi mistake hoti rehni chahiye…. isnt it????

Prabhu Singh Saroj Kumar ji apko shukriya
 
Abhishek Anand विज्ञापन के बदले उनके पक्ष में कुछ सकारात्मक खबरें प्लान करने का जो यह मॉडल है, सिर्फ जागरण का है नहीं, देशभर के अखबार शायद यही कर रहे हैं। अपवाद को हटाकर देखा जाए। क्या कोई बता सकता है इस अखबारी रेवेन्यू मॉडल के जनक कौन हैं और कब से अखबारों में धरल्ले से लागू है
 
Saroj Kumar दरसल अखबार अगर खुले तौर पर घोषित कर दे कि अमुक हमारा विज्ञापनदाता है तो पाठक आसानी से समझ जाएगा और एक तरह से यह मीडिया की इमानदारी होगी लेकिन मीडिया हाउस ऐसा नहीं करते, इसलिए यह पाठकों को धोखा देना ही है…इसीखबर की तरह अगर अखबार वाले बताने लगें कि अमुक हमारा विज्ञापनदाता है तो फिर दिक्कत ही क्या…
 
Sandip Naik ये पब्लिक है सब जानती है……….
 
Abhishek Anand वैसे अखबार से बाहर, पत्रिकाओं और चैनलों में भी इस मॉडल से खबरें छपती होंगी…
 
Saroj Kumar पूरी मीडिया की यहीं बात है…केवल एक की चोरी की बात थोड़े ही है…
 
Krishna Kant हा हा हा हा हा हा हा हा हा…. सरोज भाई, इसे एक बेशर्मी भरी हंसी समझें। दुर्भाग्‍य से हम आप इस भंड़ुआ मीडिया का हिस्‍सा हैं।
 
Avinash Kumar Chanchal Agar is galti ko media niyam bna le tokoi dikkat hi n ho..
Khabar chhapo lekin likh do ki vigyapandata hai..waise aesa hi kuchh din pahle ranchi me v huaa ta.. @sandip ji yahi dikkat hai janta bahut kuchh nhi jaan pati
 
Avinash Kumar Chanchal Bechare desk wale ki naukari to gyi editor mahoday bane rhenge..malik v..aur akhbaar v..
 
Mohammad Anas पूरे मीडिया में यही होता है ,ये वाली न्यूज़ सिर्फ मज़े लेने के लिए ली जा सकती है ,बाकी ऊँची ऊँची बाते ,बड़ी बड़ी क्रान्ति ,सब ढकोसला है ..सारा कुछ विज्ञापन पर टिका हुआ है ,ये जनता भी जानती है और मालिक भी //
 
सुयश सुप्रभ इस बहस को ढकोसला कहना सही नहीं होगा। गंदगी को साफ़ करने के लिए हिम्मत चाहिए। ऐसी हिम्मत दिखाने वाले लोगों से ही थोड़ी-बहुत उम्मीद बचती है।
 
Avinash Kumar Chanchal Andar gandgi saaf karne ki malik ijajt nhi deta..
Haan, khud ki safai karte rhiye..aur saaf raasta nikalte rhiye- yahi jaroori hai
 
Neeraj Bhatt gazab pakadaa hai
 
Saroj Kumar Mohammad Anas ऊपर की न्यूज केवल मजे के लिए नहीं है, जिस तरह से इस न्यूज के जरिए(भले ही गलती से हुआ हो) पाठकों तक सही से खबर पहुंची ना कि भाई डीएवी वाले हमारे विज्ञापनदाता भी हैं…यह बहस का मुद्दा तो बन ही सकता है ना कि अखबार बेशक किसी विज्ञापनदाता के लिए लिखें लेकिन बताएं भी कि हां अमुक हमारा विज्ञापनदाता है…यह पारदर्शिता होगी…
 
Avinash Kr Banty Ye to sab reporter karte hai. Aur kare v Q nahi. Akhir media house ke bade rahnuma addvertisement ke liye districk lable par target fix kar dawab jo banate. Daily torchar aur matha-pachi. Akhir reporter jo school se add leta hai uska news chapwana unke liye chunauti bani rahti hai. Kai baar news nai chapne par unki sakh girti hai. To aise me gaya adision ke reporter bhai ne likha (wayan me) to kya hua

सरोज कुमार के फेसबुक वॉल से.

नेटवर्क18 समूह की वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की सीईओ बनीं दुर्गा

नेटवर्क18 समूह वालों की वेबसाइट फर्स्टपोस्ट का सीईओ दुर्गा रघुनाथ को बनाया गया है. वे फर्स्ट पोस्ट में ही वाइस प्रेसिडेंट, प्रोडक्ट और एक्जिक्यूटिव न्यूज प्रोड्यूसर हुआ करती थीं.

दुर्गा रघुनाथ
दुर्गा रघुनाथ
नेटवर्क18 समूह अपने वेब व डिजिटल कार्यों को वेब18 के जरिए संचालित करता है जिसके सीईओ लक्ष्मी नरसिम्हा हैं. दुर्गा को वेबसाइट के बिजनेस मॉडल को आगे बढ़ने का काम दिया गया है. दुर्गा वाल स्ट्रीट जर्नल, मिंट और न्यूयॉर्क में हॉपरकॉलिन्स के साथ काम कर चुकी हैं. दुर्गा ढाई साल से नेटवर्क18 के साथ हैं.

ज्ञात हो कि नेटवर्क18 समूह की बिजनेस मैग्जीन फोर्ब्स इंडिया से पिछले दिनों इसके संपादक इंद्रजीत गुप्ता समेत चार लोगों को बेइज्जत करके बाहर निकाल दिया गया. तब यह कहा गया था कि अब वेब व प्रिंट का काम मिला-जुलाकर देखा जाएगा, जिसके तहत फेरबदल किए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि यह समूह अपने मीडिया बिजनेस से पैसे निकालने-निचोड़ने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रहा है.

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आजतक से प्रोड्यूसर दीपक नरेश का इस्तीफा

सूचना है कि आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत प्रोड्यूसर दीपक नरेश ने इस्तीफा दे दिया है. उनका अंतिम वर्किंग डे चार-पांच रोज पहले था. बताया जाता है कि दीपक पंद्रह रोज पहले आफिस से गायब हुए. बाद में लोगों को पता चला कि उन्होंने खुद इस्तीफा दिया है. वे कहां जा रहे हैं, यह पता नहीं चल पाया.

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Employee code… Name… Last working day… Reason- Asked To Go (देखें आजतक की छंटनी लिस्ट)

ये पिछले अप्रैल से इस साल जून आखिर तक की छंटनी लिस्ट है. टीवी टुडे ग्रुप के एचआर की तरफ से ये सभी लोग 'आस्क्ड टू गो' हैं. इस साल जून तक छंटनी किए गए लोगों कुल संख्या 66 है, जिसकी लिस्ट आपके सामने पेश है. बताया जाता है कि अभी ढेर सारे लोगों की छंटनी होनी है. टोटल 150 लोग निकाले जाने हैं. इन सभी को इकट्ठे इसलिए नहीं निकाला जा रहा ताकि कहीं कोई अशांति न पैदा हो जाए, विरोध न शुरू हो जाए. इसलिए एक एक कर छोटे मोटे बहाने ढूंढ नौकरी ली जा रही है.

(देखने पढ़ने में दिक्कत आ रही हो तो उपरोक्त छंटनी लिस्ट के उपर ही क्लिक कर दें)


मजेदार ये है कि देश दुनिया की खबर बताने वाले ये बुद्धिजीवी पत्रकार, मीडियाकर्मी खुद की लड़ाई भी लड़ नहीं पा रहे. विरोध के एक बोल तक नहीं फूट रहे इनके मुंह से. बाकी विषयों पर ये लोग ऐसे लंबे लंबे भाषण देंगे कि मत पूछो. आजतक से छंटनी की ये लिस्ट सामने लाकर भड़ास ने एक बड़ा काम कर दिया है. यह पहली बार है जब किसी इतने बड़े मीडिया संस्थान की छंटनी की आफिसियल लिस्ट बाहर आई है. भड़ास ने यह महान काम भी कर दिखाया.

अब आगे का काम आप लोगों को करना चाहिए. पत्रकार साथियों को करना चाहिए. उन्हें चाहिए कि वे इस लिस्ट को लेबर कोर्ट में एक अप्लीकेशन के साथ सौंपें, मंत्रालयों से शिकायत करें और इस छंटनी की जांच कराएं कि आखिर किस आधार पर इन लोगों को 'आस्क्ड टू गो' कैटगरी में डाला गया और इसके डालने के क्या नियम हैं? 

साथ ही पत्रकार संगठनों को चाहिए कि वो आजतक प्रबंधन की इस बंपर छंटनी की निंदा करें. बीईए और एडिटर्स गिल्ड से भी हम लोग उम्मीद करेंगे कि वे लोग भी इस छंटनी की निंदा करेंगे. पर नहीं, आजकल फैशन है कि अगर बड़ा आदमी पिटा, बड़ी कंपनी गिरी तो पूरा हो हल्ला होगा, सबके बोल फूटेंगे लेकिन अगर कोई आम कर्मचारी, कोई आम कंपनी गिरी फूटी तो डाउनमार्केट कहकर कोई नहीं बोलेगा. उम्मीद करते हैं कि लंबे लंबे प्रवचन देने वाले पत्रकार और वरिष्ठ पत्रकार इस मसले पर कुछ कहेंगे जरूर.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

राज एक्सप्रेस, मुरैना के रिपोर्टर बने कुमार शैलेन्द्र, देशदीपक आईबीसी24 से जुड़ेंगे

मुरैना से खबर है कि यहां राज एक्सप्रेस के जिला ब्यूरो चीफ करतार सिंह व राज श्रीवास्तव ने नये संवाददाता के रूप में कुमार शैलेन्द्र की नियुक्ति की है. कुमार शैलेन्द्र पिछले आठ साल से मीडिया लाइन में सक्रिय हैं. शहडोल से सूचना है कि देशदीपक गुप्ता (सचिन) आईबीसी24 से जुड़ेंगे.

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टीएस सुधीर हेडलाइंस टुडे (साउथ) के एडिटर बने, आजतक में बृजपाल से मार्निंग शिफ्ट सुपर का काम छिना

एक सूचना के मुताबिक टीएस सुधीर ने हेडलाइंस टुडे (साउथ) में एडिटर के तौर पर पारी की शुरूआत की है. उधर, देर से मिली एक जानकारी के मुताबिक 'आज तक' न्यूज चैनल के मार्निग शिफ्ट सुपर बृजपाल सिंह को बदल दिया गया है. बताया जाता है कि पिछले माह जब सरबजीत की मौत हुई तब रात 8:30 के स्पेशल रिपोर्ट का पैकेज अगले दिन भी चला दिया जिसमें कहा गया कि सरबजीत की हालत गंभीर है, मगर तब तक सरबजीत मर चुके थे. इसी गल्ती के आधार पर सुप्रिय प्रसाद ने उसी दिन रात मेल भेज कर बृजपाल से मार्निंग शिफ़्ट सुपर का पद लेकर मनीष कुमार को सौंप दिया.

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अच्छे लोगों की कमी से जूझ रहा प्रभात खबर, देवघर

: गन्दी राजनीती की चलते नौ साल में दस संपादक : प्रबंधन के कान खड़े, टीम बदलने की चर्चा : नौ साल पहले देव नगरी देवघर में यूनिट बैठाने वाले प्रभात खबर का हाल यहां बुरा है. अंदरूनी राजनीति के कारण यहां अच्छे लोग नहीं के बराबर है. प्रबंधन अगर किसी को वहां भेजता है तो पहले से जमे जमाये लोग उनको इतना परेशान करते हैं कि वो भाग लेता है. प्रबंधन को समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर देवघर यूनिट में ये राजनीति कौन कर रहा है.

कुछ दिन पूर्व आरके नीरद को पटना भेज दिया गया, फिर भी राजनीति जारी है. कई बार राजनीति जातिवादी रुख ले लेती है. पिछले दिनों एक संपादक की पोस्टिंग दुबारा होने से डरे कई लोग हिंदुस्तान धनबाद और जमशेदपुर निकल लिये. एक ने तो राज्य ही छोड़ गया.

उधर डेस्क की हालत काफी ख़राब है. ना तो वहां डीएनइ है और ना न्यूज़ एडिटर. डेस्क इंचार्ज का भी पोस्ट खाली है. नए संपादक, जो न्यूज़11 में गए थे, वो फिर देवघर आ गए हैं. अपने ही शहर धनबाद के व्यक्ति ने इनकी काफी मदद की, जिसका कर्जा ये चुकाने के लिए तैयार हैं. पर अब प्रबंधन की नज़र इन दोनों पर है. माना जा रहा है कि धनबाद में एक व्यक्ति को भेजा जाएगा ताकि नए लोगों के आने में ये पुरानी टीम उनको परेशान ना करे. 

पूर्व संपादक संजय मिश्र जब यूनिट में बदलाव और ब्यूरो बदलने की सोच रहे थे तभी उनको इसी पुरानी टीम ने राजनीति कर हटवा दिया. लेकिन प्रबंधन को इसकी भनक लगी और मिश्रा जी को पंचायतनामा देकर प्रबंधन ने दिखाया कि हमारे यहाँ आदमी की कद्र होती है. लेकिन अभी भी हालात ठीक नहीं है. वहां हिन्दुस्तान और जागरण अखबार की ज्यादा पूछ नहीं है. हिन्दुस्तान में पैसे का धंधा खूब होता है. जागरण में पिछले दस सालों में कोई आदमी ना आया है और ना गया है. इसका फायदा सीधा प्रभात खबर को मिल रहा है.

चूंकि कोई प्रतिद्वंदी नहीं है, इसलिए जैसे चल रहा है वैसे चलने दो की नीति प्रभात खबर में काम कर रही है. लेकिन अन्दर ही अन्दर चर्चा है कि अब सम्पादकीय विभाग के वैसे लोगों को वहां से हटा कर दूसरे जगह भेजा जायेगा जो सात साल से ज्यादा से देवघर में हैं और देवघर में नए लोगो को लाया जायेगा. ये भी कहा जा रहा है कि नए लोगों में सिर्फ वैसे ही होंगे जो प्रभात खबर में वर्तमान में हैं या फिर प्रभात खबर के साथ लम्बी पारी खेल चुके हैं. (कानाफूसी)

झांसी के पत्रकारों को जेल भेजने से खफा ललितपुर के पत्रकारों ने ज्ञापन दिया

ललितपुर : झांसी में दबंग दरोगा द्वारा पत्रकारों के साथ किये गये दुर्व्यवहार से ललितपुर के पत्रकारों में भी तीव्र रोष व्याप्त है। जिले के प्रिंट व इलेक्टोनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों ने प्रशासन को दिये एक ज्ञापन में झांसी में पत्रकारों को जेल भेजे जाने और धमकाने जैसे मामलों पर गहरा दुख प्रकट करते हुये कार्यवाही की मांग की है। इस दौरान पत्रकारों ने एक बैठक कर सम्पूर्ण घटनाक्रम की निंदा की है।

श्री न्यूज के संवाददाता अभय श्रीमाली ने इस दौरान कहा कि पत्रकार समाज का आईना है, समाज में जो कुछ भी घटित होता है, उसे पूरी ईमानदारी के साथ जनता के सामने लाना उसका प्रमुख दायित्व है। ऐसे में अगर कुछ लोग उसके जान के दुश्मन बन जाते हैं, तो पत्रकारों की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है। श्रीमाली ने अफसोस जाहिर किया कि झांसी में तो पुलिस प्रशासन ही पत्रकारों का उत्पीड़न कर रहा है।

सहारा उत्तर प्रदेश के संवाददाता दीपक सोनी ने भी झांसी में पत्रकारों के हुये उत्पीड़न के लिये जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ प्रशासन से कार्यवाही की मांग की। समाचार प्लस के संवाददाता शैलेन्द्र जैन व रफ्तार न्यूज के संवाददाता मनोज जैन ने कहा कि अगर यथाशीघ्र झांसी में अनशन कर रहे पत्रकारों को न्याय नहीं मिलता है, तो ललितपुर के पत्रकार भी इस आन्दोलन में कूद जायेंगे। अंत में सर्वसम्मति से झांसी के पत्रकारों को न्याय न मिलने और दोषी पुलिसवाले जे. पी. यादव के विरुद्ध कार्यवाही न होने तक ललितपुर के पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर विरोध करने का निर्णय लिया है। बैठक में जिले के पत्रकारों ने भारी संख्या में भाग लिया।

‘झीनी झीनी बीनी चदरिया’ जैसा उपन्यास फिर से लिखा जाना चाहिए : अब्दुल बिस्मिल्लाह

इलाहाबाद। पूर्वांचल के बुनकरों की समस्या को केंद्र में रखकर 'झीनी झीनी बीनी चदरिया' सरीखा उपन्यास लिखकर चर्चा में आने वाले कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह बुनकरों की मौजूदा दुर्दशा को लेकर दुखी हैं। वे मानते हैं कि हथकरघा जैसे पेशेगत धंधे के जरिए गुजर बसर करने वाले हजारों बुनकर परिवार तंगी और बदहाली के शिकार हैं। मुफलिसी का आलम यह कि कई घरों में दो जून का चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। लंबी सांस लेते हुए अब्दुल बिस्मिल्लाह कहते हैं- अब तो भाई, बुनकरों की बदतर होती हालत को ध्यान में रखकर एक और 'झीनी झीनी बीनी चदरिया' सरीखा उपन्यास लिखा जाना चाहिए। इसे वक्ती जरूरत भी माना जा सकता है।

जामिया मिलिया दिल्ली में छात्र-छात्राओं को हिंदी साहित्य पढ़ाने वाले वरिष्ठ कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह नौ जून को इलाहाबाद में आयोजित एक संगोष्ठी में शिरकत करने आए तो 'भड़ास4मीडिया' से उन्होंने मुलाकात की। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो उनके चर्चित उपन्यास 'झीनी झीनी बीनी चदरिया' से होते हुए बात बुनकरों के मसले तक आ पहुंची। अब्दुल भाई की बेबाक बातचीत और अंदाजे बयां दोनों ही गौरतलब रहे। वे बताते हैं कि – 'झीनी झीनी बीनी चदरिया' उपन्यासद्ध लिखने के लिए लंबी तैयारी करनी पड़ी। पूर्वांचल के कई बुनकर बस्तियों से लेकर उनके टोले-मोहल्ले तक की खाक छाननी पड़ी। बुनकरों की दिनचर्या, उनके रहन-सहन, बोली, हंसी-मजाक करने का अंदाज से लेकर उनकी समस्याओं का न सिर्फ गहराई से अध्ययन करना पड़ा बल्कि उसे महसूस भी किया… तब कहीं जाकर झीनी झीनी बीनी चदरिया सरीखी सशक्त रचना उपन्यास के रूप में सामने आ सकी। इस उपन्यास को पाठकों ने जमकर सराहा।

कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। बाद में इस हिंदी उपन्यास के उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में भी कई संस्करण छपे। पठनीयता के संकट को चोचलेबाजी बताने वाले अब्दुल बिस्मिल्लाह ने कहा कि यह सब कुछ लोगों का दिमागी फितूर हो सकता है बाकी सच यह है कि पठनीयता का कोई संकट जैसा कोई मसला नहीं है। उल्टे सवाल दागा-आपकी रचना को पाठक अगर नोटिस न लेकर उसे खरिज कर रहा है तो इसे पठनीयता का संकट नहीं माना जा सकता। पाठकों की बदलती अभिरूचि का भी ख्याल लेखकों को रखना होगा। इस पर भी सोचना होगा कि आखिर क्या वजह है पाठक किसी रचना को कायदे से नोटिस नहीं ले रहा है।

घूम फिर कर बात फिर से बुनकरों की दुर्दशा पर आकर टिक गई। वे बोले-बुनकर समुदाय दो वर्गों में बंटा नजर आ रहा है। एक वो जो वक्त के साथ खुद को बदलते गए वे तरक्की के रास्ते पर हैं। एक वो जो परंपराओं से आगे नहीं बढ़ सके। वे परेशान हैं। समस्याओं से कुछ ज्यादा ही जूझ रहे हैं। उनकी संख्या भी ज्यादा है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि इधर, बुनकर समुदाय जागरूक हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में खासकर लड़कियों की पढ़ाई लिखाई पर वालदेन ध्यान देने लगे हैं। गार्जियंस लड़कियों को स्कूल-कॉलेज भेजकर ऊंची तालिम दिला रहे हैं। नतीजतन, इस वर्ग से भी लड़कियां डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर आदि बनकर नेम, फेम दोनों ही कमा रही हैं। वजह क्या है कि झीनी झीनी बीनी चदरिया सरीखे मजबूत भाषा शिल्प वाली सशक्त रचना आप दुबारा नहीं दे सके, जबकि ढाई दशक बीत चुके हैं और आप लेखन में सक्रिय भी हैं?

सवाल सुनते ही एकाएक गुस्साए भाई अब्दुल ने डपटा- पूरी तैयारी करके क्यों नहीं आते। पढ़कर आया करिए। अभी थोड़ी देर पहले एक पत्रकार को गलत सवाल पूछने पर कमरे के बाहर का रास्ता दिखा चुका हूं। उनके इस गुस्से के बाद माहौल जो एक बार बिगड़ा तो दुबारा बातचीत को आगे बढ़ाने लायक नहीं बन सका। ऐसे में बातचीत बीच में ही रोकनी पड़ी। चलते-चलते नमस्कार के आदान प्रदान के बीच एक वादा भी हुआ- चलते हैं, जुबान से एक धीमी आवाज निकली। अच्छा, फिर मिलेंगे सर!

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र की बिल्डिंग में सेकंड फ्लोर से नीचे साढ़ियों से उतरते समय मन में टीस और खुशी दोनों ही है। टीस इस बात की कि अब्दुल भाई को आखिर गुस्सा काहे को आया? खुशी इस बात की रही कि जो भी हो, बंदा है पूरा बिंदास। … जो मन में वो मुंह में। कोई दिखावा नहीं, कोई औपचारिकता नहीं। शायद यही है झीनी झीनी बीनी चदरिया के रचनाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह की सफेद झक्कास वाली पतली महीन चादरनुमा लेखकीय जीवन की खांटी पहचान।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय.

प्रेसीडेंसी से इतिहासविद बेंजामिन जकारिया की विदाई!

जिन हालात में फेसबुक मंतव्य के लिए विख्यात इतिहासविद बेंजामिन जकारिया की प्रेसीडेंसी कालेज से विदाई हो गयी, उससे यादवपुर विश्वविद्यालट के शिक्षक अंबिकेश महापात्र की याद ताजा हो गयी। लेकिन इस मामले को लेकर सिविल सोसाइटी की खोमोशी हैरत में डालने वाली है। इंग्शेलैंड के शेफील्ड विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई इतिहास के शिक्षक पद से इस्तीफा देकर स्वायत्त विश्वविद्यालय प्रेसीडेंसी के बुलावे पर वहां की पक्की नौकरी छोड़कर चले आये बेंजामिन जकारिया के साथ जो सलूक परिवर्तन राज में हुआ , वह न केवल शर्मनाक है, बल्कि प्रेसीडेंसी कालेज की उपकुलपति मालविका सरकार जैसी विदुषी प्रशासक की साख को बट्टा लगाने वाला है।

प्रेसीडेंसी के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों में बेंजामिन की भारी लोकप्रियता उनकी आधुनिक दृष्टि और शिक्षा की विशिष्ट शैली की वजह से है। वे सारे छात्र उनके पक्ष में हैं। बेंजामिन पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण करना चाहते थे, जिसके खिलाफ में हैं इतिहास विभाग के बाकी शिक्षक। इसको लेकर लंबे अरसे से खींचातानी चल रही थी।प्रेसीडेंसी के 158 साल के इतिहास में किसी अध्यापक को इस तरह हटाये जाने की कोई नजीर नहीं है।

बेंजमिन ने केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से पीएचडी की और लगातार ग्यारह साल तक शेफील्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाने से इतनी प्रतिष्ठा अर्जित की प्रेसीडेंसी से उन्हें शिक्षकता का आमंत्रण भेजा गया। अब बेंजामिन के साथ जो सलूक हुआ और राज्य के विश्वविद्यालयों में राजनीति जिस कदर हावी है, जैसे वर्चस्ववादी गिरोहबंदी है, इस वारदात के बाद राज्य के किसी विश्वविद्यालय से विदेश की क्या कहें, देश के दूसरे विश्वविद्यालयों को कोई आने को तैयार होगा या नहीं, यह शंका पैदा हो गयी है।

वैसे प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय ने बैंजामिन को इतिहास विभाग का अध्यक्ष बनाने का वायदा करके बुलाया था।लेकिन शायद बेंजामिन को बंगाल के वर्चस्ववादी अकादमिक जगत के बारे में मालूम हीं नहीं था। उन्हें अध्यक्ष पद तो दिया ही नहीं गया बल्कि शुरु से उनके खिलाफ मोर्चाबंदी होती रही। जिसपर दुःखी बेंजामिन ने फेसबुक वाल पर मंतव्य कर दिया। जिसके आधार पर पर मालविकादेवी ने उन्हें हटाने का फैसला किया और बेंजामिन इस्तीफा देकर चले गये। बंगाल में इतिहास चर्चा की यह अपूरणीय क्षति है।

प्रेसीडेंसी के अध्यापकों की लेकिन बेंजामिन जकारिया के खिलाफ ढेरों शिकायतें हैं। आरोप है कि बेंजामिन ने  वरिष्ठ प्रेफेसर रजत राय केसाथ अभव्य आचरण किया है। इसे लेकर उपकुलपते से शिक्षकों ने शिकायत की। इसपर उपकुलपति ने ईमेल के जरिये बर्खास्तगी का संदेश देते हुए बेंजामिन को लिखा कि उनका और प्रेसीडेंसी कालेज का एक साथ कोई भविष्य नहीं है। इसपर बेंजामिन ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा फेसबुक पर भी पोस्ट कर दिया। इसतरह छह महीने के भीतर बेंजामिन कथा का पटाक्षेप हो गया।

अपने इस्तीफे में बेंजामिन ने प्रेसीडेंसी में अव्यवस्था का आरोप लगाया है और तरह तरह की अनियमितताओं का आरोप भी।परीक्षाओं मे गड़बड़ी के भी उन्होंने आरोप लगाये हैं।उपकुलपति मालविका सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है।बेंजामिन के मुताबिक रजनीकांत सर उनके अध्यापक रहे हैं और उनसे दुर्व्यवहार का सवाल ही नहीं उटता। रजत बाबू ने भी इस सिलसिले में कोई शिकायत नहीं की है।उन्होंने अखबारों के जरिए उनके खिलाफ मुहिम चलाने का आरोप भी लगाया।

कुल मिलाकर प्रेसीडेंसी में कोई भारी गड़बड़ी चल रही है, जिसके चलते पिछले चार महीने में चार चार विद्वान शिक्षक प्रेसीडेंसी छोड़कर चले गये।इसके अलावा अनेक शिक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं और उनके भी विश्वविद्यालय छोड़ देने की आशंका है। छात्रों में अपने अनिश्चित भविष्य को लेकर इस सिलसिले में भारी आशंका है और विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​ की रिपोर्ट.

दिलीप अवस्‍थी जागरण के रिपोर्टरों को सिखा रहे लायल्टी!

लखनऊ :  दैनिक जागरण, लखनऊ के रेजीडेंट एडीटर दिलीप अवस्‍थी जो खुद कई बार पाला बदल चुके हैं, अपने रिपोर्टरों को अब लायल्टी सिखा रहे हैं. दिलीप शुक्ला जागरण से पहले टाइम्‍स आफ इंडियां थे. उससे पहले वह विनोद शुक्‍ला के जमाने में भी जागरण में रह चुके हैं. पायनियर, जी न्‍यूज, और इंडिया टुडे में भी रह चुके हैं. यही दिलीप अवस्थी आजकल जागरण के रिपोर्टरों को लायल्टी की सीख दे रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि दिलीप अवस्‍थी ने पिछले दिनों जागरण के रिपोर्टरों की क्‍लास लगाई और उन्‍हें बताया कि नभाटा जाने से उन लोगों को कोई फायदा नहीं होगा क्‍योंकि वहां लिखने की ज्‍यादा आजादी नहीं होगी, सब कुछ दिल्‍ली से तय होकर लखनऊ आएगा और उसी के अनुरूप यहां काम होना है. जागरण में तो वह लोग जो चाहते हैं, लिख देते  हैं.

मीटिंग में तो रिपोर्टर कुछ नहीं बोल पाए लेकिन जागरण के गेट के बाहर गिरिजा चाय वाले की दुकान पर ये रिपोर्टर भड़ास निकाले देख गए. इन रिपोर्टरों का कहना है कि अगर टाइम्‍स ग्रुप इतना ही खराब था तो पंडित दिलीप अवस्‍थी ने वहां जागरण छोड़ नौकरी क्‍यों की थी. यानी खुद करें तो रास लीला और दूसरा करे तो कैरेक्टर ढीला!

उधर, सूत्र बताते हैं कि दिलीप अवस्‍थी ने राज्‍य ब्‍यूरो में अपने एक नहीं बल्कि दो दो आदमी बना लिए हैं. ये दोनों छोटी से छोटी सूचना, हरकत भी दिलीप के संज्ञान में ला देते हैं. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले राज्‍य ब्‍यूरो के कम से कम दो सदस्‍यों का तबादला होना तय है. इनमें से एक को इलाहाबाद और दूसरे को पटना भेजे जाने की बात है.  (कानाफूसी)

अनिल यादव ने पायोनियर से इस्तीफा देकर नवभारत टाइम्स ज्वाइन किया

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अनिल यादव ने दी पायोनियर अखबार से इस्तीफा देकर नई पारी की शुरुआत लखनऊ से ही प्रकाशित होने जा रहे नवभारत टाइम्स के साथ की है. अनिल दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान जैसे अखबारों में कई शहरों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. वे कई वर्षों से पायनियर में कार्यरत थे.

पायनियर की खस्ता हालत के कारण वहां से ठीकठाक पत्रकारों का लगातार पलायन जारी है. अनिल के आने से नवभारत टाइम्स की एडिटोरियल टीम काफी मजबूत हुई है. अनिल दमदार लेखनी वाले पत्रकार हैं. उनकी कई किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें एक यात्रा वृत्तांत और एक उपन्यास है.

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मशहूर गायक मन्ना डे की हालत लगातार नाजुक

वयोवृद्ध एवं सुप्रसिद्ध गायक मन्ना डे की हालत लगातार नाजुक बनी हुई है। वह बेंगलुरू के बाहरी इलाके में स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। शास्त्रीय संगीत से ओतप्रोत उनके गीतों की मधुरता की आज भी कोई सानी नहीं है। यद्दपि  मन्ना ने जिस दौर में गीत गाने प्रारंभ किये उस दौर में हर संगीतकार का कोई न कोई प्रिय गायक था, जो फिल्म के अधिकांश गीत उससे गवाता था। कुछ लोगों को प्रतिभाशाली होने के बावजूद वो मान-सम्मान या श्रेय नहीं मिलता, जिसके कि वे हकदार होते हैं।

हिंदी फिल्म संगीत में इस दृष्टि से देखा जाए तो मन्ना डे का नाम सबसे पहले आता है। यूं मन्ना डे की प्रतिभा के सभी कायल थे, लेकिन सहायक हीरो, कॉमेडियन, भिखारी, साधु पर कोई गीत फिल्माना हो तो मन्ना डे को याद किया जाता था। मन्ना डे ठहरे सीधे-सरल आदमी, जो गाना मिलता उसे गा देते। ये उनकी प्रतिभा का कमाल है कि उन गीतों को भी लोकप्रियता मिली।

प्रबोध चन्द्र डे उर्फ मन्ना डे का जन्म एक मई 1920 को कोलकाता में हुआ। मन्ना डे ने अपने बचपन की पढ़ाई एक छोटे से स्कूल 'इंदु बाबुर पाठशाला' से की। 'स्कॉटिश चर्च कॉलिजियेट स्कूल' व 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज' से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कोलकाता के 'विद्यासागर कॉलेज' से स्नातक की शिक्षा पूरी की। मन्ना डे के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे, लेकिन मन्ना डे का रुझान संगीत की ओर था। वह इसी क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते थे। 'उस्ताद अब्दुल रहमान खान' और 'उस्ताद अमन अली खान' से उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखा।

मन्ना डे के बचपन के दिनों का एक दिलचस्प वाकया है। उस्ताद बादल खान और मन्ना डे के चाचा एक बार साथ-साथ रियाज कर रहे थे। तभी बादल खान ने मन्ना डे की आवाज़ सुनी और उनके चाचा से पूछा, यह कौन गा रहा है। जब मन्ना डे को बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि बस, ऐसे ही गा लेता हूं। लेकिन बादल खान ने मन्ना डे में छिपी प्रतिभा को पहचान लिया। इसके बाद वह अपने चाचा से संगीत की शिक्षा लेने लगे। मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा 'के सी डे' से हासिल की। अपने स्कॉटिश चर्च कॉलेज के दिनों में उनकी गायकी की प्रतिभा लोगों के सामने आयी। तब वे अपने साथ के विद्यार्थियों को गाकर सुनाया करते थे और उनका मनोरंजन किया करते थे। यही वो समय था जब उन्होंने तीन साल तक लगातार 'अंतर-महाविद्यालय गायन-प्रतियोगिताओं' में प्रथम स्थान पाया।

मन्ना डे को अपने कॅरियर के शुरुआती दौर में अधिक प्रसिद्धी नहीं मिली। इसकी मुख्य वजह यह रही कि उनकी सधी हुई आवाज़ किसी गायक पर फिट नहीं बैठती थी। यही कारण है कि एक जमाने में वह हास्य अभिनेता महमूद और चरित्र अभिनेता प्राण के लिए गीत गाने को मजबूर थे। प्राण के लिए उन्होंने फिल्म 'उपकार' में 'कस्मे वादे प्यार वफा…' और ज़ंजीर में 'यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी…' जैसे गीत गाए।

उसी दौर में उन्होंने फिल्म 'पडो़सन' में हास्य अभिनेता महमूद के लिए एक चतुर नार… गीत गाया तो उन्हें महमूद की आवाज़ समझा जाने लगा। आमतौर पर पहले माना जाता था कि मन्ना डे केवल शास्त्रीय गीत ही गा सकते हैं, लेकिन बाद में उन्होंने 'ऐ मेरे प्यारे वतन'…, 'ओ मेरी जोहरा जबीं'…, 'ये रात भीगी भीगी'…, 'ना तो कारवां की तलाश है'… और 'ए भाई जरा देख के चलो'… जैसे गीत गाकर आलोचकों का मुंह सदा के लिए बंद कर दिया। पहले वे के.सी डे के साथ थे फिर बाद में सचिन देव बर्मन के सहायक बने। बाद में उन्होंने और भी कईं संगीत निर्देशकों के साथ काम किया और फिर अकेले ही संगीत निर्देशन करने लगे। कईं फिल्मों में संगीत निर्देशन का काम अकेले करते हुए भी मन्ना डे ने उस्ताद अमान अली और उस्ताद अब्दुल रहमान खान से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेना जारी रखा। संगीत ने ही मन्ना डे को अपनी जीवनसाथी 'सुलोचना कुमारन' से मिलवाया था। मन्ना डे ने केरल की सुलोचना कुमारन से विवाह किया। इनकी दो बेटियाँ हुईं। सुरोमा का जन्म 19 अक्टूबर 1956 और सुमिता का 20 जून 1958 को हुआ। दोनों बेटियां सुरोमा और सुमिता गायन के क्षेत्र में नहीं आईं। एक बेटी अमरीका में बसी है।

वे 1940 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आ गए थे। वर्ष 1943 में फिल्म 'तमन्ना' में बतौर पार्श्व गायक उन्हें सुरैया के साथ गाने का मौका मिला। हालांकि इससे पहले वह फिल्म 'रामराज्य' में कोरस के रूप में गा चुके थे। दिलचस्प बात है कि यही एक एकमात्र फिल्म थी जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था। मन्ना डे की प्रतिभा को पहचानने वालों में संगीतकार शंकर जयकिशन का नाम ख़ास तौर पर उल्लेखनीय है।

इस जोड़ी ने मन्ना डे से अलग-अलग शैली में गीत गवाए। उन्होंने मन्ना डे से 'आजा सनम मधुर चांदनी में हम…' जैसे रुमानी गीत और 'केतकी गुलाब जूही…' जैसे शास्त्रीय राग पर आधारित गीत भी गवाए। दिलचस्प बात है कि शुरुआत में मन्ना डे ने यह गीत गाने से मना कर दिया था। मन्ना डे ने 1943 की "तमन्ना" से पार्श्व गायन के क्षेत्र में क़दम रखा। संगीत का निर्देशन किया था कॄष्णचंद्र डे ने और मन्ना के साथ थीं सुरैया। 1950 की "मशाल" में उन्होंने एकल गीत "ऊपर गगन विशाल" गाया जिसको संगीत की मधुर धुनों से सजाया था सचिन देव बर्मन ने। 1952 में मन्ना डे ने बंगाली और मराठी फिल्म में गाना गाया। ये दोनों फिल्म एक ही नाम "अमर भूपाली" और एक ही कहानी पर आधारित थीं। इसके बाद उन्होंने पार्श्वगायन में अपने पैर जमा लिये।

गीतकार प्रेम धवन ने उनके बारे में कहा था कि 'मन्ना डे हर रेंज में गीत गाने में सक्षम है। जब वह ऊंचा सुर लगाते है तो ऐसा लगता है कि सारा आसमान उनके साथ गा रहा है, जब वो नीचा सुर लगाते है तो लगता है उसमें पाताल जितनी गहराई है, और यदि वह मध्यम सुर लगाते है तो लगता है उनके साथ सारी धरती झूम रही है।' मन्ना डे केवल शब्दों को ही नही गाते थे, अपने गायन से वह शब्द के पीछे छिपे भाव को भी खूबसूरती से सामने लाते हैं। अनिल विश्वास ने एक बार कहा था कि 'मन्ना डे हर वह गीत गा सकते हैं जो मोहम्मद रफी, किशोर कुमार या मुकेश ने गाए हों। लेकिन इनमें कोई भी मन्ना डे के हर गीत को नहीं गा सकता।'  1950 से 1970 के दशको में इनकी प्रसिद्धि चरम पर थी। मन्ना डे ने अपने पांच दशक के कॅरियर में लगभग 3500 गीत गाए। भारत सरकार ने मन्ना डे को संगीत के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए पद्म भूषण और पद्मश्री सम्मान से नवाजा। इसके अलावा 1969 में 'मेरे हज़ूर' और 1971 में बांग्ला फिल्म 'निशि पद्मा' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ गायक' का राष्ट्रीय पुरस्कार भी उन्हें दिया गया।

उन्हें मध्यप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा और बांग्लादेश की सरकारों ने भी विभिन्न पुरस्कारों से नवाजा है। मन्ना डे के संगीत के सुरीले सफर में एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब फिल्मों में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें फिल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिंदी के अलावा बांग्ला और मराठी गीत भी गाए हैं। मन्ना ने अंतिम फिल्मी गीत 'प्रहार' फ़िल्म के लिए गाया था। मन्ना दा ने हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' को भी अपनी आवाज़ दी है जो काफ़ी लोकप्रिय है। मन्ना डे के जीवन पर आधारित "जिबोनेरे जलासोघोरे" नामक एक अंग्रेज़ी वृत्तचित्र 30 अप्रॅल 2008 को नंदन, कोलकाता में रिलीज़ हुआ। इसका निर्माण "मन्ना डे संगीत अकादमी द्वारा" किया गया। इसका निर्देशन किया डा. सारूपा सान्याल और विपणन का काम सम्भाला सा रे गा मा (एच.एम.वी) ने। वर्ष 2005 में 'आनंदा प्रकाशन' ने बंगाली उनकी आत्मकथा "जिबोनेर जलासोघोरे" प्रकाशित की। उनकी आत्मकथा को अंग्रेज़ी में पैंगुइन बुक्स ने "Memories Alive" के नाम से छापा तो हिन्दी में इसी प्रकाशन की ओर से "यादें जी उठी" के नाम से प्रकाशित की। मराठी संस्करण "जिबोनेर जलासाघोरे" साहित्य प्रसार केंद्र, पुणे द्वारा प्रकाशित किया गया।

शैलेंद्र चौहान

shailendrachauhan@hotmail.com

‘प्रदेश टुडे’ जल्द ग्वालियर से, इंदौर के लिए डिक्लेरेशन फाइल

भोपाल और जबलपुर से प्रकाशित शाम के अखब़ार 'प्रदेश टुडे' का ग्वालियर संस्करण जुलाई के अंतिम हफ्ते से शुरू हो रहा है। इस संस्करण के निकलने की तारीख कई बार आगे बढ़ती रही है। इसके संपादक राकेश पाठक का नाम कई महीने पहले ही तय हो चुका है। राकेश पाठक पहले 'नईदुनिया' के स्थानीय संपादक थे, और पिछले साल 'नईदुनिया' बिकने के बाद वहां से बिदा कर दिए गए थे। ग्वालियर में संस्करण की सारी तैयारी हो चुकी है।

इससे भी ख़ास बात ये है कि 'प्रदेश टुडे' के डायरेक्टर्स इंदौर से संस्करण शुरू करने का कुछ ज्यादा ही दबाव बनाया। इसका नतीजा ये रहा कि इंदौर से 'प्रदेश टुडे' के प्रकाशन का डिक्लेरेशन फाइल किया गया है। क्योंकि, इंदौर से जो अखबार के डायरेक्टर्स हैं, पैसा लगाने के बाद भी उनकी दुकान खतरे में है! जमीन, बिल्डर और दूसरे धंधों से जुड़े इन डायरेक्टर्स का इंदौर के स्थानीय प्रशासन पर कोई असर न होने से अकसर वे प्रशासन के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में हुई डायरेक्टर्स की मीटिंग में 'प्रदेश टुडे' के चेयरमेन ह्रदेश दीक्षित को इंदौर संस्करण के लेकर डायरेक्टर्स का काफी दबाव झेलना पड़ा।

बात इस हद तक बढ़ गई थी, कि ह्रदेश दीक्षित को आश्वासन देना पड़ा कि ग्वालियर के बाद इंदौर की तैयारी शुरू की जाएगी। 'प्रदेश टुडे' ने भोपाल में अपनी थोड़ी बहुत जगह जरुर बनाई है, पर इंदौर में शाम का अखबार दमदारी से निकाल पाना मुश्किल है, और इस बात को ह्रदेश भी समझते हैं, पर उनकी मजबूरी है कि वे ये बात डायरेक्टर्स को नहीं समझा सकते! इंदौर में 3 दशक से ज्यादा समय से प्रकाशित हो रहे 'अग्निबाण' के सामने 'प्रदेश टुडे' टिक पाएगा, ये संभव नहीं है! भोपाल और जबलपुर में शाम का कोई दमदार अखबार नहीं था, इसलिए 'प्रदेश टुडे' को जगह मिल गई, पर इंदौर में शाम के अखबारों का बाज़ार जमा हुआ है, जिसे तोड़ पाना 'प्रदेश टुडे' के लिए आसान नहीं लगता! लेकिन, डायरेक्टर्स के सामने ह्रदेश दीक्षित को झुकना पड़ा और डिक्लेरेशन फाइल करना पड़ा!

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

गोवा से दो कदम आगे बढ़ी बीजेपी आडवाणी कांड के बाद सौ कदम पीछे हुई

Arvind K Singh : दो कदम आगे…100 कदम पीछे… दिग्गज राजनेता लाल कृष्ण आडवाणी के इस्तीफे के बाद जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं उससे साफ है कि गोवा से बीजेपी दो कदम आगे बढ़ी थी लेकिन अब 100 कदम पीछे हो गयी है…फिलहाल तो अब बीजेपी को दो मोरचों पर जूझना है..एक आडवाणी को मनाना और दूसरा मोदी जी को शांत रखना..ये बातें भी सामने आ रही हैं कि मोदी जी जिस सीढ़ी का उपयोग करते हैं, उसे काट भी देते हैं…आडवाणी भी उनके शिकार हैं..

मैं आडवाणी जी के साथ देश के तमाम हिस्सों में घूमा हूं और उनकी विद्वता, क्षमता को समझता हूं…तमाम मुद्दों पर उनके विचारों से असहमति के बाद भी उनको मोदी से लाख गुना अच्छा मानता हूं…कई बार सभाओं में आडवाणी जी प्याज और जूते का एक दिलचस्प किस्सा सुनाते थे…पता नहीं वो किस्सा अब किस पर लागू होने जा रहा है..

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

आडवाणी के इस्तीफे से केंद्र में भाजपा सरकार बनने की संभावना कम हुई

Shambhu Dayal Vajpayee : पार्टी में जबरन राजनीतिक वनवास की ओर ठेले जाने की लगातार कोशिशों से आहत शीर्षस्‍थ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी के इस्‍तीफे ने भाजपा और नरेन्‍द्र मोदी के केन्‍द्र में सरकार बनाने की संभावनाओं के गुब्‍बारे को पंक्‍चर कर दिया है। अब अगर आडवाणी जी को किसी तरह मना भी लिया जाता है, हालांकि इसकी संभावनायें बहुत कम हैं, तो भी पार्टी की छवि को हो चुके नुकसान की भरपाई कठिन होगी। स्‍थापना के बाद से भाजपा में यह सब से बडा संकट का दौर है।

इसके और पार्टी को टूटने की स्थिति तक पहुंचाने के जिम्‍मेदार भी संघ, राज नाथ सिंह और मोदी ही हैं। अटल – आडवाणी की पार्टी सत्‍ता के लिए कुछ भी करने के लिए कम और अपने विचारों -सिद्धांतों के लिए सत्‍ता का रास्‍ता तय करने के लिए ज्‍यादा जानी जाती रही है। इसके विपरीत राजनाथ सिेह और मोदी समर्थकों ने आगामी आम चुनावों को लेकर ऐसी लोलुप आतुरता दिखाई है जो आडवाणी जैसे बडे नेता को अपमानित करने की रेखा तक ले जाती है। इससे भाजपा को खडा करने और जनाधार वाले पार्टी नेताओं का क्षुब्‍ध होना स्‍वाभाविक है।

ध्‍यान देने वाली बात है कि राष्‍टी्य स्‍तर मोदी की स्‍वीकार्यता सिद्ध होनी अभी बाकी है। उनकी तमाम राजनीतिक चमक दमक और बहुत कुछ कुछ प्रायोजित सी लगने वाली कथित करिश्‍माई छवि के बावजूद बडे पैमाने पर लोग अभी उनको एक क्षेत्रीय नेता ही मानते हैं। उनका झंडा उठाये घूमने वाले अधिकाशं नेता भी इस हैसियत के नहीं हैं जो अपने दम पर लोक सभा की कुछ सीटें निकलवा सकें। इनमें खुद राजनाथ सिंह भी जो अभी कुल जमा एक या दो विधान सभा और इतने ही लोकसभा चुनाव जीते है।

राजनाथ सिंह का मोदी प्रेम भी यूं ही नहीं जागा है। इसके बहाने वह अपने लिए रास्‍ता बनाने की चालाक चालें चल रहे हैं। खबर है कि आडवाणी जी को इस बार चुनाव न लड़ाने का भी गुपचुप फैसला कर लिया गया है। यानी सरकार बनाने के हालात बनने पर मोदी का ही नाम रहे और और घटक दलों में उनके नाम पर सहमति न बनने पर राजनाथ सिंह स्‍वाभाविक विकल्‍प बन सकें।

वरिष्ठ पत्रकार शंभू दयाल बाजपेयी के फेसबुक वॉल से.

गौरव नौडियाल ने अमर उजाला, देहरादून से शुरू की अपनी नई पारी

गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिला मुख्यालय से दैनिक जागरण के जरिए अपनी दैनिक अखबारों की पत्रकारिता शुरू करने वाले गौरव नौडियाल ने अब अमर उजाला का दामन थाम लिया है. उन्होंने पिछले दिनों ही जागरण को बाय बाय कहा था. 23 वर्षीय गौरव अमर उजाला, देहरादून संग अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे है. सोमवार से उन्होंने अमर उजाला के लिए काम करना शूरू कर दिया है. उनको नगर निगम और स्पोर्ट्स की बीट दी गई है.

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निर्विरोध जीत गये अराबुल इस्लाम, माकपा ने मैदान छोड़ा

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के नाम पर जो चल रहा है, उससे सत्तादल के रिकार्ड करीब तीन हजार उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के अलावा विपक्षी दलों की सांगठनिक विकलांगता का भी भंडापोड़ हुआ है। वाम मोरचा के प्रबल पराक्रमी नेता रेज्जाक अली मोल्ला के गृहक्षेत्र कैनिंग दो पंचायत समिति को तृणमूल कांग्रेस ने लगभग बिना प्रतिद्वंद्विता जीत ली तो भांगड़ दो नंबर पंचायत समिति पर भी तृणमूल का दखल हो गया। जहां विवादास्पद तृणमूल नेता, भांगड के पूर्व विधायक अराबुल इस्लाम न सिर्फ निर्विरोध जीते बल्कि वहां उनके मुकाबले माकपाई उम्मीदवार मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए।

अराबुल के मुकाबले माकाप समेत दो उम्मीदवार थे। लेकिन आखिरी मौके पर दोनों प्रत्याशियों ने अपना पर्चा वापस ले लिया। यही नहीं, इस पंचायत समिति की तीस में से इक्कीस सीटोंपर बिना प्रतिद्वंद्विता के तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार निर्विरोध जीत गये। जाहिर है कि भांगड़ में अराबुल का करिश्मा अभी कायम है।

सत्तारुढ तृणमूल कांग्रेस के बाहुबली नेता अराबुल इस्लाम को भांगड इलाके के बामुनघाटा में आगजनी के एक मामले में 43 दिन की हिरासत के बाद जमानत पर छोड दिया गया। भांगड के पूर्व विधायक पर माकपा समर्थकों के वाहन जलाने में शामिल रहने का आरोप है। अराबुल पर विपक्षी माकपा के विधायक रज्जाक मुल्ला पर भी हमले का आरोप है।  इस मामले में उन्हें पहले ही जमानत दी जा चुकी है। अलीपुर केंद्रीय जेल में बंद रहे अराबुल को  अलीपुर अदालत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जमानत प्रदान की।  मामले में अराबुल को पांचवीं बार प्रयास के बाद जमानत मिली है। इससे पहले उन्हें चार बार जमानत से इनकार किया जा चुका था। हालांकि उन्हें लैदर कांप्लैक्स थाना क्षेत्र में नहीं आने की हिदायत दी गयी है, जहां आगजनी की घटना घटी थी।

गौरतलब है कि छह जनवरी को दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ क्षेत्र के कांटातल्ला इलाके में माकपा विधायक मोल्ला पर हमला हुआ था, जिसमें वह जख्मी हो गए थे। इसके दो दिन बाद आठ जनवरी को घटना के खिलाफ जब वाममोर्चा के जुलूस में शामिल होने के लिए माकपा समर्थक बसों, मेटाडोर में सवार होकर कोलकाता आ रहे थे, बामनघाटा में उन पर फिर हमला हुआ। इस हमले में गोली से तीन लोग जख्मी हुए। एक दर्जन से अधिक वाहनों में आग लगा दी गई। करीब 30 गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। अराबुल की गाड़ी में भी तोड़फोड़ हुई। माकपा ने अराबुल पर आरोप लगाया कि उसी के नेतृत्व में बम व गोली से तृणमूल समर्थकों ने उनपर हमला किया है। उधर अराबुल भी अपने को जख्मी बताते हुए अस्पताल में भर्ती हो गया। माकपा समर्थकों ने अराबुल समेत 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। अराबुल ने भी सत्तार मोल्ला समेत चार सौ माकपा समर्थकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों दलों के करीब 90 समर्थकों को गिरफ्तार किया, परंतु अराबुल की गिरफ्तारी नहीं हुई। इसे लेकर तृणमूल सरकार की काफी किरकिरी हो रही थी और अस्पताल से छुंट्टी मिलने के बाद आखिरकार पुलिस ने गुरुवार को अराबुल को गिरफ्तार कर लिया।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​ की रिपोर्ट.

दबंग दुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर बने रोहित तिवारी

अमर उजाला, दैनिक भास्कर, एसवन न्यूज चैनल व वायस आफ लखनऊ समेत कई मीडिया ग्रुपों में काम कर चुके रोहित तिवारी ने नई पारी की शुरुआत दैनिक दबंग दुनिया के साथ की है. उन्होंने डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर ज्वाइन किया है. वे इंटरटेनमेंट का काम देखेंगे. अमर उजाला, लखनऊ में काम कर चुके रोहित ने दैनिक भास्कर के अपने कार्यकाल के दौरान मनोरंजन जगत की कई खबरें ब्रेक कीं.

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शशिकांत तिवारी ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा दिया, नई दुनिया में चीफ सब बने

शशिकांत तिवारी ने दैनिक भास्कर, खंडवा से इस्तीफा दे दिया है. शशिकांत भास्कर में सीनियर सब एडिटर की भूमिका निभा रहे थे. इसके पहले वो दैनिक जागरण, जमशेदपुर में सीनियर रिपोर्टर हुआ करते थे. उन्होंने नई पारी की शुरुआत नई दुनिया अखबार से की है. नई दुनिया में वे चीफ सब एडिटर बने हैं. चर्चा है कि दैनिक भास्कर, इंदौर में कार्यरत बाहरी लोगों पर नौकरी छोड़ने के लिए काफी दबाव बनाया जा रहा है.

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अमर उजाला से राघवेंद्र शुक्ला, अजय, अमित हटे

अमर उजाला, सिद्धार्थनगर के जिला प्रभारी राघवेंद्र शुक्ला ने इस्तीफ़ा दे दिया है. श्री शुक्ला बहुत दिनों से संपादक से अनुरोध कर रहे थे कि उन्हें गोरखपुर बुला लिया जाये, पर उनके अनुरोध को सुना नहीं गया. अंततः राघवेंद्र ने अमर उजाला को बाय कर दिया. राघवेंद्र पहले दैनिक जागरण देवरिया, बस्ती मे बतौर रिपोर्टर काम कर चुके हैं. चर्चा है कि वे जल्द ही दैनिक जागरण ज्वाइन कर सकते हैं.

एक अन्य सूचना के मुताबिक अमर उजाला गोरखपुर कार्यालय के पीटीएस हेड अशोक सिंह को साइडलाइन कर दिया गया है. दो आपरेटरों अजय और अमित से इस्तीफा ले लिया गया है. दोनों के बारे में बताया गया है कि ये लोग कार्ड इंट्री कर लापता थे.

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दैनिक भास्कर से इस्तीफा देकर नभाटा, लखनऊ से जुड़े तरुण शर्मा

दैनिक भास्कर, श्रीगंगानगर से डिप्टी न्यूज एडिटर तरुण शर्मा के इस्तीफा देने की सूचना है. बताया जा रहा है कि वे लखनऊ से लांच हो रहे नवभारत टाइम्स के साथ जुड़ गए हैं. तरुण ने दैनिक भास्कर में दस साल से अधिक समय तक काम किया है.

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यह पत्रकारिता का स्वर्ण युग है : दिलीप मंडल

: मीडिया विमर्श शृंखला में इंडिया टुडे के संपादक ने पत्रकारिता की नई चुनौतियों के प्रति आगाह किया : आज स्त्री खुलकर बोल रही है- पंकज सिंह : अखबार का काम है, लोक भावना जानना और प्रकट करना- अरुण त्रिपाठी : आगरा। ''मैं अपने को एक संवादकर्मी ही मानता हूं। आंदोलनों के संस्कारों से निकला हूं। यह दौर भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम युग है, यह बात लोगों को सुनने में अजीब लग सकती है। पर मुख्य धारा की पत्रकारिता आज अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में है, पचास साल पहले के अखबारों को आप देखेंगे तो आपको इसका बोध होगा। उस समय भी गांधी और अंबेडकर की वैकल्पिक पत्रकारिता की एक दूसरी धारा थी जो ज्यादा समर्थ थी पर वह मुख्यधारा नहीं थी। आज भी उस पत्रकरिता को लघुपत्रिकाएं अपने ढंग से आगे बढा रही हैं।  आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता को बनाए रखने की है।''  ये विचार कल्पतरु एक्सप्रेस द्वारा मीडिया विमर्श शृंखला के तहत शनिवार को आयोजित व्याख्यान में इंडिया टुडे साप्ताहिक पत्रिका के संपादक दिलीप मंडल ने व्यक्त किए।

बदलती तकनीक के साथ मीडिया में आ रहे बदलाव और आने वाली भविष्य की नई चुनौतियों का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए श्री मंडल ने कहा कि आज मीडिया इतना बढ़ गया है कि उसे मैनेज करना कठिन है। आने वाले दिनों में बहुलता बढ़ने वाली है। सूचनाओं के अनेक स्रोतों के बीच विश्वसनीय होना बहुत कठिन है। दूसरी चुनौती हमारे आडियंस के बदल जाने से हुई है। आज किसी एक अखबार, चैनल और पत्रिका का आधिपत्य नहीं हो सकता। क्या हम वास्तव में अपने पाठक को समझ पा रहे हंै और नया पाठक कौन है? इसकी पहचान करनी होगी। यह वही समय है जब हिन्दी के अखबार तेजी से बढ़ रहे हैं और अंग्रेजी के अखबारों में ठहराव है।

पाठकों की बढ़ती समझ का जिक्र करते हुए दिलीप मंडल ने कहा कि आज मीडिया स्कू्रटनी के दौर से गुजर रहा है। लोग अब मीडिया कर्म को बारीकी से परखने लगे हैं। हम सारे लोग संदेह के घेरे में हैं। इस तरह की चुनौतियां साठ-सत्तर के दशक की पत्रकारिता के समय नहीं थी। सोशल नेटवर्क ने मीडिया के काम को और आसान किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय मीडिया में अकादमिक अनुशासन नहीं है जो आने वाले समय के साथ यह भी शुरू हो जाएगा। संकटों के दौर में पत्रकारिता है लेकिन अच्छे काम की गुंजाइश आज भी है। प्रतियोगिता बहुत बड़ी है और लोग बहुत सजग हैं, बहुत निर्मम हैं।

इससे पहले दिलीप का परिचय देते हुए कल्पतरु एक्सप्रेस के समूह संपादक पंकज सिंह ने कहा कि आंदोलन से निकले और कॉरपोरेट पत्रकारिता में अपनी ऊंची जगह बनाने वाले श्री मंडल ने अन्याय के विरुद्ध होने वाले संघर्षों और बदलाव की इच्छा से होने वाले आंदोलनों में पिछले तीन दशकों में निरंतर भागीदारी की है। इंडिया टुडे के सेक्स विशेषांक के संदर्भ में दिलीप की प्रतिक्रिया के साथ अपनी टिप्पणी जोड़ते हुए पंकज सिंह ने महिला सशक्तीकरण के फलस्वरूप समाज में आ रहे बदलावों पर कहा कि स्त्री यौनिकता का जो उभार आया है उसे भी सामाजिक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में समझने की जरूरत है। पुरुष और स्त्री के संबंधों में बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध और इक्कीसवीं सदी के आरंभ में दुनिया भर के समाजों में स्त्रियों की जो जागृति है उसे हमारे समय की एक बड़ी अभूतपूर्व क्रांति के तौर पर देखा जाना चाहिए।

आज स्त्री खुलकर बोल रही है कि वह अपनी देह की स्वयं मालिक है और उस पर उसका अपना अधिकार है। मातृसत्तात्मक समाज के अवसान के बाद पुरुष प्रभुतावाद के  सदियों लंबे इतिहास में ऐसा होना एकदम नई परिघटना है  और आज ठीक-ठीक कोई नहीं  बता सकता कि आने वाले वर्षों में  इसके  कितने बहुआयामी परिणाम होंगे। कल्पतरु एक्सप्रेस के कार्यकारी संपादक अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा हिन्द स्वराज में गांधी जी ने कहा था कि अखबार का पहला काम है, लोक भावना जानना और उसको प्रकट करना। दूसरा काम है अपेक्षित लोक भावना पैदा करना।

तीसरा काम है , बेधड़क लोक- दोष व्यक्त करना, चाहे कितनी ही अड़चनों और मुसीबतों का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि यह ऐसे शास्वत सिद्धांत हैं जो बीसवीं सदी ही नहीं इक्कीसवीं सदी में भी काम करेंगे। पत्रकारिता के उपकरण जरूर बदल रहे हैं और उसकी तेजी भी बढ़ी है लेकिन अगर वह मानवीय सरोकारों से कटेगी तो उसकी विश्वसनीयता खत्म होगी जो इस दौर की भी जरूरत है और आगे भी रहेगी। उन्होंने पत्रकारिता में बड़े घरानों के टूटते एकाधिकार और आम आदमी के हाथ में  आते औजारों को एक स्वस्थ शुरुआत बताया। इस अवसर पर कल्पतरु एक्सप्रेस मुख्यालय के सभी मीडियाकर्मी, अनेक जनपदों से आए ब्यूरो प्रमुख और अधिकारीगण उपस्थिति थे।

मुठभेड़ में यूं ‘मारे’ और ‘पकड़े’ जाते हैं ‘दुर्दांत नक्सली’

Himanshu Kumar : जब हम दंतेवाडा में काम करते थे ! तो हमारे साथ आश्रम में काम करने एक लड़का आया ! मेरे साथियों ने बताया की पहले वह सलवा जुडूम में एस पी ओ था ! लेकिन बाद में उसे अपने काम से नफरत हो गयी थी और उसने वह काम छोड़ दिया था ! उसने मुझसे कहा की अब वह गाँव वालों के लिए काम करना चाहता है इसलिए हमारे आश्रम से जुड़ना चाहता है ! वह काम करने लगा ! बाद में उसने मुझे कई घटनाएँ सुनाई ! उनमे से दो घटनाएँ आज आपके साथ बाँट रहा हूँ !

उसने बताया की एक बार पुलिस और सी आर पी ऍफ़ ने एस पी ओ के साथ एक गाँव पर हमला किया ! सारे गाँव वाले जान बचाने के लिए जंगल की तरफ भाग गए ! पुलिस दल झोपड़ियों में घुस घुस कर आदिवासियों को ढूँढने लगा ! इस लड़के ने भी एक तरफ बने एक झोपडी के दरवाजे पर लात मारी ! अंदर एक आदिवासी परिवार मौजूद था ! तीन छोटे छोटे बच्चे डर कर थर थर काँप रहे थे ! उनके माँ बाप ने बच्चों की रोने की आवाज़ रोकने के लिए उनके मूंह दबाये हुए थे ! उनके माँ बाप भी रो रहे थे !

उस लड़के ने मुझे बताया की " गुरूजी, वैसे तो ऐसे मामले में हम सबको मार ही देते थे ! लेकिन उस दिन उन्हें देख कर मेरे मन में उनके मर जाने के बाद उनकी लाशों की कल्पना आयी ! मुझे लगा मुझे उल्टी हो जायेगी ! मैंने बच्चों के बाप से कहा की बच्चों को लेकर चुपचाप घर के पीछे से जंगल में भाग जाओ ! वो डर रहा था की मैं शायद उन्हें पीछे से गोली मार दूंगा ! मैंने उसे जोर से धक्का मारा और कहा भाग जल्दी से ! वो पूरे परिवार सहित जंगल में भाग गया !

इधर मेरे दुसरे एस पी ओ दोस्तों को एक घर में एक बूढा आदमी मिल गया ! उन्होंने बुड्ढे के हाथ उसके पीछे बाँध कर उसे उसके झोंपड़े के बरामदे की लकड़ी के खम्बे से बाँध दिया ! पहले तो वो लोग उससे गाँव वालों के बारे में पूछते रहे ! तभी एक पुलिस वाला बोला ये साला हमारे किसी काम का नहीं है टाइम खराब मत करो ! खत्म कर दो इसको ! एक एस पी ओ ने बूढ़े के बरामदे में पडी हुई कुल्हाड़ी उठाई और बूढ़े की गर्दन पर मार दी ! एक बार में ही बूढ़े की गर्दन एक तरफ झूल गई !

दूसरी तरफ हमारी एक टुकड़ी को दो आदिवासी लडकियां मिल गयीं ! उनमे से एक को बुखार था शायद इसलिए वो भाग नहीं पायी !दूसरी लगभग पन्द्रह साल की एक नाबालिग लडकी थी ! वह भी सोई हुई थी ! लगता था उसके घरवालों को उसे जगा कर अपने साथ ले जाने का मौका ही नहीं मिला था !मेरे एस पी ओ दोस्त और सी आर पी ऍफ़ वाले उन लड़कियों को लेकर एक घर में घुस गए ! अंदर से उन लड़कियों के चिल्लाने की और लड़कों के हंसने की आवाजें आ रही थी ! कुछ देर बाद हमारे बड़े साहब आ गए ! उन्होंने पूछा क्या हो रहा है यहाँ ? हमने कहा सर दो औरतों को पकड़ा है !

साहब ने कहा उन्हें इधर लाओ ! लड़के दोनों लड़कियों को धकेलते हुए साहब के सामने लाये ! दोनों लड़कियां बिना कपड़ों के थीं ! साहब ने कहा इन्हें ड्रेस पहनाओ ! इनके बाल काटो और फोटो खींचो !दोनों लड़कियां ज़मीन पर बैठ कर रो रही थी ! हम लोगों ने अपने पिट्ठू से नक्सलियों वाली हरी ड्रेस निकाली ! जबरदस्ती उन लड़कियों को पहनाई ! फिर अपनी बंदूके उनके कंधे पर टाँगी ! एक सिपाही ने उनके बाल नक्सल लड़कियों जैसे काट दिए ! फिर हमने उनकी फोटो खींची ! उन्हें लेकर हम थाने आ गए ! वहाँ पुलिस वाले इनसे दो हफ्ते तक पूछताछ करते रहे ! थाने में रात को बहुत सारे पुलिस वाले और एस पी ओ लड़के इनके साथ गलत काम भी करते थे !

दो हफ्ते बाद पुलिस ने इन लड़कियों को कोर्ट में पेश किया जज साहब ने इन लड़कियों को नक्सली मान कर जेल में भेजने का आर्डर दे दिया !

(टिप्पणी :- मैं इन दोनों लड़कियों के परिवार के सदस्यों को लेकर जे एन यू में एक जन सुनवाई में लेकर आया था ! कुछ महीने बाद दिल्ली में इनके परिवार वालों ने एक प्रेस कांफ्रेंस भी की थी ! मीटिंग हाल में मौजूद हर पत्रकार की आँखें गीली थी ! लेकिन अगले दिन दिल्ली के एक भी अखबार ने यह खबर नहीं छापी थी ! मेरे दंतेवाडा में रहते समय हमने एक इनमे लडकी को ज़मानत पर बाहर निकाल लिया था ! लेकिन बाद में मुझे दंतेवाडा छोड़ना पड़ा !मुझे लगता है दूसरी लडकी अभी भी जेल में होगी )

उस लड़के ने एक और किस्सा बताया !" एक बार हम लोग कोम्बिंग के लिए सबेरे सबेरे एक गाँव में पहुंचे ! गाँव के बाहर ही खेतों की रखवाली करने वाले पांच बूढ़े आदमी आग ताप रहे थे !अचानक अपने चारों तरफ से पुलिस को आते देख कर वो बूढ़े डर कर खड़े हो गए ! एक सिपाही ने गोली चला दी वो पाँचों आदिवासी बूढ़े डर कर भागने लगे ! पुलिस ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी ! तीन बूढ़े वहीं मर गए ! दो बच कर जंगल में भाग गए !

इस बीच हमारी फायरिंग की आवाज़ सुन कर पूरा गाँव खाली हो गया ! तलाशी में हमें गाँव में कोई नहीं मिला ! एस पी साहब ने कहा इन्हें बुड्ढों को ड्रेस पहनाओ ! हम लोगों ने तीनो बुड्ढों की लाशों को अपने साथ लाई गयी नक्सली ड्रेस पहनाई ! एस पी साहब ने कहा बन्दूक रखो ! हम लोगों ने अपने साथ लाई हुई भरमार बन्दूक लाशों के बगल में रख दी ! एस पी साहब ने लाशों के साथ फोटो खिंचवायीं ! हमने गाँव से एक बैलगाड़ी ली और तीनों लाशों को लेकर जिला मुख्यालय आ गये !

एस पी साहब ने फोन कर के पत्रकारों को बुलाया ! पत्रकारों से कहा लिखिए " सर्चिंग अभियान के दौरान नक्सलियों के एक बड़े दल ने पुलिस पार्टी पर घात लगा कर हमला किया ! पुलिस के जवानों ने पोजीशन लेकर नक्सलियों की फायरिंग का मुंह तोड़ जवाब दिया ! लगभग दो घंटे भयंकर गोलीबारी हुई जिसमे हमारे सिपाहियों ने अद्भुत वीरता का परिचय दिया !इस मुटभेड में एस पी साहब के कुशल नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने तीन दुर्दांत माओवादियों को ढेर कर दिया ! यह खबर प्रदेश के सभी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई ! राज्य सरकार ने एस पी साहब का नाम राष्ट्रपति वीरता पदक हेतु भेजा ! अगले वर्ष एस पी साहब को वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया !

(टिप्पणी:- वो एसपी साहब अभी भी छत्तीसगढ़ के एक महत्वपूर्ण जिले के एस पी हैं ! इन विवरणों में मैंने किसी भी स्थान व्यक्ति अथवा समय का उल्लेख नहीं किया है ! परन्तु यदि राज्य शासन चाहे तो इस विवरण की सत्यता को चुनौती दे सकती है ! तब मैं अदालत में सारे विवरण दे दूंगा तथा गवाह भी पेश कर दूंगा)

हिमांशु कुमार के फेसबुक वॉल से.

दैनिक जागरण, बनारस में पेजीनेटरों का टोटा, दो गए अमर उजाला

दैनिक जागरण, बनारस में पेज मेकिंग को लेकर हालात खराब हैं. यहां पेजीनेटरों का टोटा पड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि जीएम के तानाशाही रवैये के चलते यहां ज्‍यादातर कर्मचारी टिकते ही नहीं हैं. पेजीनेटर के पद पर कार्यरत अरविंद तिवारी तथा कैलाश पांडेय इस्‍तीफा देकर अमर उजाला चले गए. दोनों लंबे समय से यहां कार्यरत थे, लेकिन हर बात पर जीएम अंकुर चड्ढा द्वारा यह धमकी दिए जाने, कि दो मिनट में निकाल दूंगा, से ये परेशान हो चुके थे.

सूत्रों का कहना है कि जीएम के इस रवैये से नाराज तमाम पेजीनेटर मौका तलाश रहे हैं. बताया जा रहा है कि दो दिन पहले एक और पेजीनेटर विजय यादव भी किसी वरिष्‍ठ के रवैये से नाराज होकर चला गया. दो दिन से वो कार्यालय नहीं आ रहा है. उसे मनाने का प्रयास किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि संपादक आशुतोष शुक्‍ल संपादकीय के अलावा और किसी मामले में हस्‍तक्षेप नहीं करते हैं, लिहाजा अंकुर को आईटी, मशीन और तमाम विभागों के कर्मचारियों को बात बात पर बेइज्‍जत करने की छूट मिल जाती है.

बताया जा रहा है कि हर किसी को दो मिनट में निकाल बाहर करने की धमकी दी जाती है. कई विभागों के कर्मचारी जीएम के इस रवैये से नाराज हैं तथा यहां से निकलने का मौका तलाश रहे हैं. अभी हाल ही में पेजीनेटरों की कमी के चलते अखबार में गड़बडि़यां भी जाने लगी हैं. इसी तरह मुगलसराय कार्यालय का भी एक ऑपरेटर इंचार्ज के व्‍यवहार से नाराज होकर चला गया. बताया जा रहा है कि कम पैसे में अत्‍यधिक शोषण के चलते कोई कर्मचारी यहां टिकना ही नहीं चाहता है. सब बस मजबूरी में काम कर रहे हैं.

जीएम के व्‍यवहार से नाराज पेजीनेटरों के जाने के बाद अब जागरण में पेजीनेटरों का टोटा पड़ा हुआ है. इसे देखते हुए जीएम ने दैनिक जागरण में ही पेजीनेटरों की आवश्‍यकता का विज्ञापन प्रकाशित करवाया. सूत्र बता रहे हैं कि अभी तक कोई काम का पेजीनेटर दैनिक जागरण से जुड़ नहीं पाया है. और जिस तरह की स्थिति है उसको देखते हुए कहा जा रहा है कि नवसिखिए ही अखबार से जुड़ेंगे. काम जानने वाले जागरण की कार्यप्रणाली के चलते शायद ही अखबार ज्‍वाइन करे.

डीजीपी ऑफिस ने कहा – सूचना नहीं देंगे, शासन से मांगो

उत्तर प्रदेश के डीजीपी का कार्यालय तभी सूचना देगा जब उसकी मर्जी होगी. मर्जी नहीं तो वह कह देता है कि यदि सूचना चाहिए कहीं और से मांगो, हम नहीं देंगे. ऐसे ही दो दृष्टान्त आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के मामलों में हुआ. इन्होंने उत्तर प्रदेश शासन के 15 फ़रवरी 2012 और 27 जून 2012 के दो पत्रों, जिनका आईजी कार्मिक ने 15 मई 2013 के अपने पत्रों में उल्लेख कर ठाकुर को सूचना देने से मना किया था, की छायाप्रति मांगी.

इस पर आईजी कार्मिक का 03 जून 2013 का उत्तर मिला कि यदि ठाकुर को शासन के पत्र की प्रति प्राप्त करनी है तो वे इसे शासन से ही प्राप्त करें, अर्थात वे इसकी प्रति नहीं देंगी. यह नहीं बताया कि वे इन पत्रों की प्रतियां क्यों नहीं देंगी- क्या वे उनके पास उपलब्ध नहीं हैं या आरटीआई एक्ट में उन पर कोई रोक है. बस इतना कह दिया कि हम नहीं देंगे, यदि चाहिए तो शासन से ही पत्र की प्रति लें. चूँकि आईजी कार्मिक का यह उत्तर आरटीआई एक्ट की सीधी अवहेलना है अतः ठाकुर ने पूर्व के कई और उदाहरण रखते हुए इस एक्ट की धारा 18 के तहत मुख्य सूचना आयुक्त को शिकायती पत्र भेजा है.

Editors Guild’s concern over removal of Forbes India editorial

The Editors Guild of India today expressed deep concern over "abrupt" termination" of four editorial team members of Forbes India magazine, including its editor Indrajit Gupta, without extending "elementary courtesy".

In a statement, the Guild said basic security and protection from arbitrary action are essential if senior journalists are to go about their task with "courage and fairness."

Gupta, Managing Editor Charles Assisi, Executive Editor Shishir Prasad and Director (Photography) Dinesh Krishnan had worked with the magazine since its inception and their "sudden removal without resonable notice and even elementary courtesy cuts at the very root of editorial independence," it said.

The Guild said whether terminatiom of the editorial team members was a reaction to their insistence on exercising their contractual rights to employee stock options or was a result of an overall restructuring exercise was a question to be settled in another forum and preferably through negotiations.

"Considering that senior journalists are involved in the dispute with a media house, the Guild would reiterate at this stage that it is essential that all contracts should be honoured," the statement said. (PTI)

आई नेक्‍स्‍ट ने देहरादून लगाया अखबार वेंडिंग मशीन

देहरादून : आई नेक्‍स्‍ट के सर्कुलेशन की बदहाली से परेशान जागरण प्रबंधन अब नए तरीके आजमा रहा है. पर इसका कितना फायदा मिलेगा भगवान ही जाने. क्‍योंकि सवाल अखबार मिलने का नहीं बल्कि अखबार के कंटेंट के बेहतर होने का है. हालांकि देहरादून में आई नेक्‍स्‍ट का कंटेंट अपने सभी एडिशनों से बेहतर माना जाता है. आई नेक्स्ट ने पहली बार 'न्यूज पेपर वेंडिंग मशीन' लगाने की पहल देहरादून से की है. मशीन ने महंत इंद्रेश हॉस्पिटल में काम करना शुरू कर दिया.

उद्घाटन समारोह में हॉस्पिटल के सीएमस ब्रिगेडियर डॉ. वेदप्रकाश, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके बिहारी, आई-नेक्स्ट के सीओओ एवं संपादक आलोक सांवल, संपादकीय प्रभारी कुणाल वर्मा, जागरण के पीएसएम हेड अजय सिंह आदि लोग मौजूद रहे.

पत्रकार मनोज के हत्‍याकांड के गवाह की हत्‍या

पलामू के मोहम्मदगंज के पत्रकार मनोज कुमार हत्याकांड के गवाह उनके 25 वर्षीय भांजे अमित कुमार उर्फ छोटू की गोली मार कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने सोमवार को कोयल नदी के बालू में गाड़े गए छोटू के शव को बरामद किया। उसे तीन गोली मारी गई थी।

हत्‍या के मामले में पुलिस ने नवनीत व सोनू नामक दो युवकों को हिरासत में लिया है। उनकी निशानदेही पर ही शव बरामद हुआ है। पत्रकार मनोज कुमार की हत्या 24 अक्टूबर 2009 को उनके घर के पास ही गोली मारकर कर दी गई थी। इस घटना का गवाह उनका भांजा अमित था।

दूसरी घटना की सूचना मिलते ही एसडीपीओ राहुल देव बड़ाइक व हैदरनगर के थाना प्रभारी चुनुआ उराव घटनास्थल पर पहुंचे और छानबीन की। शव की बरामदगी के लिए बीडीओ हरिवंश पंडित को मजिस्‍ट्रेट नियुक्त किया गया था। एसडीपीओ ने कहा कि एक साजिश के तहत इस हत्या को अंजाम दिया गया है। मामले में संलिप्त सभी अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद से मनोज के परिजन दहशत में हैं। पत्रकारों में भी काफी नाराजगी है।

पुलिस चौकी मे आगजनी और बलवा के आरोपी पूर्व विधायक भेजे गए जेल

गाजीपुर की हंसराजपुर पुलिस चौकी मे आगजनी और बलवा के आरोपी पूर्व बसपा विधायक विजय कुमार ने सोमवार को गाजीपुर सीजेएम कोर्ट मे आत्म समर्पण कर दिया। अदालत ने इस मामले मे पूर्व बसपा विधायक की जमानत अर्जी खारिज करते हुये उन्हे न्यायिक अभिरक्षा मे जेल भेजने का आदेश दिया है। हंसराजपुर पुलिस चौकी कांड के मुख्य आरोपी पूर्व बसपा विधायक विजय कुमार आज अपने तमाम समर्थकों के साथ गाजीपुर जिला न्यायालय पहुंचे और सीजेएम कोर्ट मे सरेंडर करते हुये जमानत अर्जी दाखिल की। अदालत ने आरोपी विधायक की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जिसके बाद विधायक के अधिवक्ता ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत मे जमानत के लिए अपील की, लेकिन अदालत से पूर्व विधायक को कोई राहत नही मिल सकी। उनकी जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्हे न्यायिक अभिरक्षा मे जेल भेज दिया गया। गौरतलब है,कि पिछले 29 अप्रैल को गाजीपुर के शादियाबाद थाना क्षेत्र मे पुलिस पिटाई के बाद हुई युवक की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने हंसराजपुर पुलिस चौकी मे तोड़फोड़ और आगजनी की थी। इस मामले मे पूर्व बसपा विधायक विजय कुमार को पुलिस ने मुख्य आरोपी बनाया है। अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद पूर्व बसपा विधायक ने कहाकि वे पूरी तरह निर्दोष हैं,और सत्ता पक्ष की साजिश के चलते उन्हे फंसाया जा रहा है।उन्होने न्यायालय पर अपना पूरा विश्‍वास जताते हुये कहाकि उन्हे भरोसा है,कि उन्हे इंसाफ मिलेगा।..– गाजीपुर से के.के. की रिपोर्ट, सम्‍पर्क 9415280945

पत्रकार सबसे बदकिस्‍मत पेशेवर हैं : डा. लिंग्दोह

शिलांग। मेघालय की श्रम मंत्री डा. एम एमपरीन लिंग्दोह ने सोमवार को कहा कि पत्रकार सबसे बदकिस्मत पेशेवर हैं। साथ ही उन्होंने पत्रकारों से अपना काम करते समय आत्मविश्लेषण करने की अपील भी की। दक्षिण एशिया मीडिया एकता नेटवर्क द्वारा आयोजित दो दिवसीय के सेमिनार सह कार्यशाला के उद्घाटन के मौके पर डॉ. लिंग्दोह ने कहा कि मुझे लगता है कि पत्रकार सबसे बदकिस्मत पेशेवर हैं।

डॉ. लिंग्दोह ने कहा कि नौकरी होने के बावजूद उनके पास कोई खास अधिकार नहीं होता। वे काफी कठिन जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एक अन्य बड़ा मुद्दा है। लिंग्दोह ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि मेघालय सरकार आवास और स्वास्थ्य सहित उनके कल्याण के लिए हर तरह के प्रयास करेगी। (वार्ता)

अब पत्रकारिता झोले से नहीं, लक्‍जरी गाडि़यों से निकलती है

सोनभद्र : धुंधली किन्तु तल्खी तलाशती आंखों पर सैद्धांतिक फ्रेम का मोटा चश्‍मा, अतिविस्तारित क्षेत्र का आंकलन करता लहराता हुआ लम्बा कुर्ता एवं परम्पराओं की कसौटी पर अनेक सूत्रों में बंधा पायजामा, एक अनूठे सामाजिक दायित्वों का बोझ उठाते कन्धों पर लम्बा सा झोला और अन्त में एक अदभुत शक्ति का सृजन करने वाली कुर्ते की जेब रूपी म्यांन से झांकती तलवार रूपी कलम। ऐसे सैद्धांतिक स्वरूप की परिकल्पना किसी ऐसे भविष्‍य की धरोहर नहीं रही, जिसे गाड पार्टिकल्स जैसी अदभुत एवं आश्‍चर्यजनक उपलब्धि मानकर किसी युग पुरूष के अभ्युदय की अपेक्षा की जाय बल्कि यह वह स्वरूप है जो अब विलीनता के कगार पर खड़ा होने के बावजूद बेहयाई की बांहे सिकोड़ता प्रतीत होने लगा है।

हां, बेशक तथ्यों की जंग और वैश्‍वीकरण का सहारा कुछ भी साबित करने पर आमादा हो परन्तु सच यह है कि तेजी से उत्पन्न होती सामाजिक विकृतियां, खोखली हो चली निष्‍ठा, बेइमान हो चले नजरिये और खरीद फरोक्त की बेबसी पर थिरकती दलीलें यह साफ बता रही हैं कि निष्‍पक्ष पत्रकारिता में व्यावसायिक चाटुकारिता के दखल ने पत्रकार एवं पत्रकारिता के मायने अब बदल दिये हैं। अब न तो सड़कों पगडंडियों से जूझती चप्पलें रहीं न ही दायित्वों कतर्व्यों को समेटने वाला लम्बा झोला रहा और न ही पत्थरों को पिघला देने वाली निष्‍ठा ही शेष रही। हर पग के साथ एक अनूठे संघर्ष का निर्धारण करने वाली पत्रकारिता अब आलिशान लग्जरी गाड़ियों में ठहर गयी है। जहां से झांकने पर बाहर तो सब कुछ साफ ही नजर आता है परन्तु अंदर झांकने पर काले शीशे के बाद का अंधेरा हर पल नियत पर संदेह ही व्यक्त करता है।

खैर पत्रकारिता के परिपेक्ष्य में वैचारिक द्धंद को निरर्थक साबित होने का एक बड़ा कारण निश्चित रूप से मीडिया का विस्तार एवं विस्तार जनित वैश्विक प्रतिस्पर्धा हो सकती है, परन्तु इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता कि दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण नैतिक विचारों का पतन भी है, जहॉ वैश्विक प्रतिस्पर्धा का बहाना बनाकर पत्रकारिता के वास्तविक स्वरूप एवं गरिमा को तहस नहस करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें कोई संदेह नही कि लगातार तकनीकी सफलताओं एवं विकास स्तर ने संचार माध्यमों को सशक्‍त स्वरूप प्रदान किया है, परन्तु आखिर क्यों इस उन्नति ने विपरीत परिणाम देते हुए पत्रकारिता के स्तर को स्वमं कलमकारों के ही बहस का मुद्दा बना दिया। हां, यह अवश्‍य है कि जहां संख्या की बात होती है वहां उन्नति एवं अवनति के वैचारिक द्धंद की अवधारणा पूर्णरूप से निरर्थक ही साबित होती है। कुछ चैतन्य विद्वान एवं विचारक इसे बदले समय की सहमति बतातें हैं, तो फिर क्या? पत्रकारिता के लगातार गिरते स्तर को बदले समय का स्वरूप मानकर सहजता से स्वीकार कर लेना चाहिए। यह समीक्षा अब हर रोज के विवाद को जन्म देने लगी है। जहॉं चन्द रुपये ही पत्रकारिता की योग्यता का निर्धारण साबित होने लगे हैं वही यह निर्धारण समाज सेवा, सत्यनिष्‍ठा से परे अनैतिकता का मापदण्ड साबित होने लगा है।

एक कागज के टुकडे पर प्रेस मालिको द्वारा पत्रकारिता की संवैधानिक संस्तुति तमाम गोरख धंधों की वैकल्पिक सुरक्षा उपलब्ध करा रही है। हर तीसरी गाड़ी पर प्रेस के चमचमाते स्टीकरों का भावार्थ अब सत्यतता की कसौटी नही बल्कि वास्तविक अर्थों में प्रेस एक ऐसा दबाव बन कर रह गया है, जिसे देखकर सामाजिक नियमों के कार्यपालक अनजाने भय से भयाक्रांत हो उठते हैं। ये और बात है कि कार्यपालकों का यह अनजाना भय समीक्षा का एक अलग बिन्दु हो सकता है। परन्तु सामाजिक प्रहरी के तौर पर प्रेस शब्द से जुड़ी अपेक्षाएं एवं मूल्य किसी अन्य अनैतिकता से जुड़ी समीक्षा को अत्यधिक सूक्ष्म ठहराती हैं। ऐसे में प्रतिष्‍ठा बटोरने वाली पत्रकारिता के संज्ञात्मक स्वरूप में परिवर्तन जैसे दलाल, ब्लैकमेलर जैसी उपमाओं पर भी आश्‍चर्य अभिनय ही नजर आता है। आश्‍चर्यजनक तो अब यह भी नहीं लगता कि वाणी और लेखनी पर अपना नियंत्रण खो चुकी पत्रकारिता अब हर चट्टी चौराहे पर अपना मूल्य तय करने लगी है। बेशक यहॉं आपत्ति यदि तार्किक हो तो जायज ही कही जायगी कि पत्रकारिता का विस्तार मात्र तकनीकी क्षेत्रों मे नहीं रहा बल्कि इस परिवर्तित पत्रकारिता ने ट्रेनों, चाय-पान की दुकानों, यहां तक कि खोमचे वालों तक को अपने दायरे में शामिल कर लिया है। और इसका श्रेय भी जाता है ऐसे चन्द कथित पत्रका