निर्भया के मां-पिता के साथ निशांत चतुर्वेदी का एक देखने योग्य इंटरव्यू (देखें वीडियो)

'न्यूज एक्सप्रेस' न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ निशांत चतुर्वेदी हिंदी टीवी इंडस्ट्री के जबर्दस्त एंकर्स में से एक हैं. वे हर फन के माहिर खिलाड़ी हैं. किसी भी तरह के भाव को बखूबी स्क्रीन पर उतार पाने में सफल रहते हैं, वह भी बेहद सहजता के साथ. खबर का हिस्सा चाहे कोई भी आपदा, घटना, हालात, माहौल हो, उसे पकड़ कर उसकी संवेदना के हिसाब से आगे बढ़ जाते हैं निशांत और फिर हौले से दर्शकों के दिल के तार को जगाकर खुद के जरिए चैनल से कनेक्ट कर पाने में सफल हो जाते हैं.

वाधवानी के तुगलकी फैसले से ‘दबंग दुनिया’ में हड़कंप, नाराजगी जताने पर दस कर्मियों की नौकरी गई (देखें इनटरनल मेल)

जब गैर पेशेवर लोग पत्रकारिता में आते हैं तो ऐसे-ऐसे कारनामे करते हैं कि पूरा पत्रकारिता जगत उनसे कलंकित होता है. इंदौर से प्रकाशित 'दबंग दुनिया' में भी अजीब सी परम्पराएँ जन्म ले रही हैं. ताजी जानकारी के मुताबिक 'दबंग दुनिया' के मालिक और प्रधान संपादक किशोर वाधवानी ने एक नया फरमान जारी किया है. फरमान ये है कि मार्केटिंग वाले अपने साइन किए हुए ब्लैंक चेक ऑफिस में जमा कराएँ, ताकि जिन विज्ञापनों की वसूली नहीं हो, वो मार्केटिंग के उन लोगों से की जाए जो सम्बंधित विज्ञापन लाए थे. इस बे-सिरपैर के फरमान के बाद मार्केटिंग वालों को सांप सूंघ गया है. ऐसी हालत में 'दबंग दुनिया' में मार्केटिंग के अच्छे लोगों का आना रुकेगा और विज्ञापन भी! क्योंकि, वसूली के डर से कोई रिस्क क्यों लेगा? 

राजेश उपाध्याय के पास दिसंबर तक भास्कर नेशनल एडिशन के सफाये का टास्क, कई वरिष्ठों की ले ली नौकरी

दैनिक भास्कर के नेशनल एडिशन की बंदी और इसमें कार्यरत कर्मियों को निकाले जाने को लेकर जो खबरें आई थीं, वो बिलकुल सही हैं. हां, ये जरूर हुआ कि भास्कर दिल्ली एडिशन की बंदी की खबर व छंटनी की खबर आ जाने और मुद्दा बन जाने से दबाव में आए भास्कर प्रबंधन ने आनन-फानन में पीआर वेबसाइट्स पर खबर छपवा दिया कि छंटनी व बंदी जैसा कुछ नहीं है, कोई घबड़ाने की बात नहीं है, सब सामान्य है. पर अब सच्चाई सामने आ रही है. पहले जहां इकट्ठे एकमुश्त छंटनी की जानी थी, अब उसे धीरे-धीरे व टुकड़ों में तब्दील कर दिया गया है.

केदार के दल दल में सियासी दंगल

: केदारनाथ में एक बार फिर से बाबा भोले का जयकारा गूंजने लगा है। लगभग ८५ दिनों तक मंदिर बंद रहने के बाद बुधवार को पुन: विधिविधान के साथ पूजा शुरू हो गई। लेकिन इसके साथ ही सियासी हलचल भी शुरू हो गई है। कांग्रेस सरकार जहां इस मुददे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में जुट गई है वहीं भाजपा ने भी उसे इस मसले पर घेरने की रणनीति बना ली है

पेड न्यूज की समस्या पर दिल्ली चुनाव आयोग गंभीर

चुनाव आयोग ने पेड न्यूज की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए जाएंगे. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव ने कहा कि इस बार पेड न्यूज उन मुद्दों में से एक है जिन पर चुनाव आयोग ध्यान दे रहा है. देव ने कहा कि हम इस संबंध में मीडिया के लोगों से बातचीत करेंगे. उन्होंने कहा कि पेड न्यूज में शामिल मीडिया के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

भाजपा का ”राष्ट्रीय इंतकाल”…. थोड़ा वक़्त है

1984 में, आज की तारीख में दो राष्ट्रीय पार्टी में से एक का तमगा हासिल, भाजपा के पास सिर्फ 2 सीट थी ! इमरजेंसी के बाद कांग्रेस वापिस सत्ता में लौटी थी और जनता पार्टी का वज़न तेज़ी से घट रहा था ! जनता पार्टी के दो कद्दावर , तत्कालीन, मंत्री (विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और सूचना प्रसारण मंत्री लालकृष्ण आडवानी) अलग होकर जनसंघ को भाजपा का मुखौटा पहना चुके थे ! यानि 1980 में भाजपा अस्तित्व में आयी !

स्वतंत्र भारत का प्रथम आतंकवादी नाथूराम गोडसे

भारत को एक लंबे संघर्ष और असीमित बलिदान के बाद 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिली. अभी आजादी का जशन पूरी तरह मनाया भी नहीं गया था कि हमारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर कर दी. यह स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी घटनाक्रम था और नाथूराम गोडसे स्वतंत्र भारत का प्रथम आतंकवादी था. बहुत आश्चर्य होता है जब आज नाथू राम गोडसे को कुछ सांप्रदायिक पार्टियों द्वारा एक राष्‍ट्रीय हीरो बनाने की कोशिश चल रही है.

‘4रीयल न्यूज’ चैनल के खास कार्यक्रम ‘दिल्ली किसकी’ से जानिए ‘आप’, ‘कांग्रेस’ और ‘भाजपा’ का हाल

दिल्ली के दरवाजे पर विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहे हैं तो पार्टीयों और नेताओं ने वोटरों के दरवाजों पर दस्तक देना शुरू कर दिया है… चुनाव में वही नेता जीत हासिल करता है जो वोटरों से ज्यादा जुड़ा हुआ होता है… जी हां,  दोस्तों, '4रीयल न्यूज़' ने 27 अगस्त से एक सिलसिला शुरू किया है, दिल्ली का रुझान जानने का…

पर ब्राह्मण कहाने में उसे गुदगुदी जैसा फील गुड होता था

इसमें कोई दो राय नहीं कि पत्रकारि‍ता के पेशे में ब्राह्म्‍ण व अन्‍य सवर्ण जाति‍यां जरूरत से ज्‍यादा हैं। इनमें भी जबरदस्‍त ब्राह्म्‍णवाद है जि‍से जेपी नाम बदलने का नारा देने के बाद भी खत्‍म नहीं कर पाए। उनके नारे के साथ अपने नाम का नाड़ा बांध चुके ये पत्रकार किस मानसि‍कता से लैस हैं, इसका काफी अच्‍छा खुलासा भारत ने कि‍या है। भारत तेज तर्रार युवा पत्रकार हैं जो फि‍लहाल अपनी तेजी के चलते फेसबुक पर कई संपादकों के बैन का शि‍कार चल रहे हैं। प्रस्‍तुत है पूरा आलेख…

तो इतिहास आप को कूड़ेदान में भी जगह देने को तैयार नहीं होगा मुलायम सिंह यादव!

चार दशक पुराना नीरज का एक गीत है :

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

सपा बैठक स्थल से बाहर निकाले जाने के बाद पत्रकारों और अफसरों में कहासुनी

आगरा में चल रही समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के अन्तिम दिन पार्टी पत्रकारों के सवालों से नाराज़ हो गयी। नतीजा ये हुआ कि बैठक स्थल आईटीसी मुगल होटल में पार्टी की पत्रकार वार्ता रद्द कर दी गयी और सपा के खास माने जाने वाले आगरा के आई.जी. आशुतोष पाण्डे और डीआईजी मीणा ने खुद सारे पत्रकारों को बैठक स्थल से बाहर निकाल दिया। इस बीच आगरा के पत्रकारों ने तो विरोध नहीं किया लेकिन दिल्ली से आये कई समाचार चैनलों के प्रतिनिधियों से अधिकारियों की कहासुनी ज़रूर हुई।

‘पांच राज्यों के विस चुनावों के बाद ही मोदी पर फैसला हो, तो अच्छा है’

हसीन सपने तो दोनों महानुभाव देख रहे हैं। इन सपनों को साकार करने के लिए अपनी तर्इं जमकर खून-पसीना भी बहा रहे हैं। यह अलग बात है कि अपनी सुविधा की राजनीति के लिहाज से वे न्यारी छवियां गढ़ने में जुट गए हैं। सो, त्यागमयी छवि बनाने के लिए कुछ इस तरह की बातें भी की जा रही हैं, मानों सत्ता की कुर्सी से उन्हें कोई बड़ा मोह न हो। इनमें से एक महाशय तो खेले-खाए खिलाड़ी हैं। एक दशक से मुख्यमंत्री बने बैठे हैं। उनका दावा तो यही है कि उनके अलावा स्वतंत्र भारत में अब तक इतना कश्मिाई मुख्यमंत्री शायद ही कोई और हुआ हो। सो, वे अपने राज्य के ‘विकास मॉडल’ के ढोल बजाते पूरे देश में घूमते रहे हैं।

पत्रकार प्रमोद सिंह के आकस्मिक निधन पर शोक सभा का आयोजन चौदह को

मुंबई। पत्रकार प्रमोद सिंह की आकस्मिक मृत्यु होने की वजह से मुंबई मराठी पत्रकार संघ में शोक सभा का आयोजन किया गया है। यह शोक सभा दिनांक 14 सितम्बर 2013, दिन शनिवार सायं 5 बजे महापालिका मार्ग, आजाद मैदान के पास मुबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित की जायेगी। एक दशक तक पत्रकारिता जगत का रास्ता नाप चुके प्रमोद के लिए पत्रकारिता ही नहीं अपितु जि़ंदगी के लिए भी एक छोटी सी यात्रा है।

28 अक्टूबर वीएन राय का कुलपति के कार्यकाल का अंतिम दिन होगा

हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के अगले कुलपति के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 4 अक्तूबर तक लोगों के बायो डाटा मंगवाए हैं. 7 अक्तूबर 2013 को कुलपति खोज समिति की अगली बैठक होनी है. मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 28 अक्तूबर को वर्तमान कुलपति वीएन राय का अंतिम दिन होगा.

नेपाल में पहली बार तीन दिवसीय अन्तरराष्‍ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन

नई दिल्‍ली। इंटरनेट से समूचे विश्‍व में सक्रियता आई है जो कि तीव्र प्रगति की एक अन्‍यतम मिसाल है। इसी दौर में विचारों के दौर को व्‍यापकता और सार्थकता मिली है। जिसमें ब्‍लॉगों की अहम् भूमिका है। सोशल मीडिया तो कल की बात है पर इन सबसे पहले ब्‍लॉगों का अविर्भाव हुआ है।

उत्तर प्रदेश का महिला एवं बाल विकास विभाग अनैतिकता के गर्त में

हमारे राजनैतिक नेतृत्व और नौकरशाहो में लोकहित के कार्यों के प्रति इच्छाशक्ति की कमी तथा नैतिकता के लोप का ही परिणाम है, प्रदेश में स्थापित महिला एवं बाल विकास विभाग में उत्पन्न अनेक विसंगतियां। मसलन प्रदेश के लगभग तीस जिलों में तैनात प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी जो मूलतः बाल विकास परियोजना अधिकारी हैं। इनके द्वारा करोड़ों रूपये का आहरण-वितरण का कार्य किया जा रहा है जबकि वह भी यह जानते हैं कि उन्हें आहरण-वितरण का अधिकार प्राप्त ही नहीं है।

पत्रकार प्रमोद ने सबकी मदद की, लेकिन उनको काम किसी ने नहीं दिया

: प्रमोद सिंह के बहाने मीडिया की पड़ताल : ऐसे मीडिया की वजह से क्यूं मरे कोई? : प्रमोद सिंह नहीं रहे। उनने आत्महत्या कर ली। अपन सन्न हैं। सन्न इसलिए, क्योंकि प्रमोद सिंह जैसे प्रतिभाशाली रिपोर्टर के इस दुनिया से चले जाने के तरीके ने हम सबको एक बार फिर से मीडिया में हमारे काम, उस काम को करते रहने के तरीके, और उसकी जरूरत के साथ साथ जिंदगी के मुकाबले मीडिया की औकात के प्रति हमेशा सजग रहने के प्रति चिंतित करनेवाले सवाल खड़े कर दिये हैं।  जो लोग प्रमोद सिंह को जानते है, वे यह भी जानते हैं कि प्रमोद सिंह मीडिया में कोई इतने बड़े आदमी नहीं थे, कि उन पर मृत्यु लेख लिखे जाएं। लेकिन फिर भी लिखा जाना चाहिए। क्योंकि प्रमोद सिंह का जिंदगी से जाने का माहौल और तरीका दोनों, लिखे जाने के काबिल है।

जिंदल समूह ला रहा नेशनल न्यूज चैनल, सतीश के. सिंह बने न्यूज डायरेक्टर

जी ग्रुप के 'जी न्यूज' चैनल से टक्कर लेने और पछाड़ने के लिए जिंदल समूह ने एक नेशनल न्यूज चैनल लाने की तैयारी शुरू कर दी है. यह चैनल हिंदी में होगा और इसके न्यूज डायरेक्टर बनाए गए हैं सतीश के. सिंह. बताया जाता है कि इस नेशनल न्यूज चैनल के लिए भर्तियों का काम शुरू कर दिया गया है. हिंदी टीवी जर्नलिज्म के कुछ बड़े नामों को भी लाने की कोशिश की जा रही है.

चीन वाले जिला गाजीपुर को ‘चेन-चू’ शब्द से क्यों संबोधित करते हैं?

दौराने पत्रकारिता अपने सम्पादक श्री ईश्वरदेव मिश्र जी के निर्देश पर प्राचार्य श्री कुबेर नाथ राय जी का साक्षात्कार लेने का अवसर मिला। पहली मुलाकात में ही उनके आडम्बरहीन, विद्वतापूर्ण, सरल व्यक्तित्व से मैं सम्मोहित सा हो गया। साक्षात्कार का अंतिम प्रश्न जो जनपद गाजीपुर को चीनी यात्री ह्वेनसांग ने ‘‘चेन-चू’’ से सम्बोधित किया है, विषयक था जिस बावत तमाम विद्वान अलग-अलग अर्थ बताते हैं कोई युद्ध देव का साम्राज्य बताता है जिसे संस्कृत में युद्धरणपुर या गर्जपतिपुर कहा जा सकता है तो कुछ लोग बहादुरों का देश बताकर इतिश्री कर लेते हैं। वाकई इस चेन-चू का सही अर्थ क्या होगा? यह हम सभी को जानने की इच्छा रहती है। प्राचार्य ने जो बताया वह अक्षरशः उन्हीं के शब्दों में-

‘जन-जन जागरण’ के एजीएम बालेन्द्र गुप्ता को दैनिक जागरण के मालिकान से जान का खतरा!

झांसी से प्रकाशित दैनिक 'जन-जन जागरण' दिन प्रतिदिन तरक्की कर रहा है। इस तरक्की के कारण दैनिक जागरण झांसी, कानपुर व अन्य संस्करणों के मालिक बौखला गए हैं, जिसके चलते वह सोची-समझी साजिश करने लगे हैं। दैनिक जन-जन जागरण को झांसी में तरक्की देने में एजीएम बालेन्द्र गुप्ता का अहम योगदान हैं, जिसके चलते वह बालेन्द्र गुप्ता को निशाना बनाने की फिराक में हैं। राह चलते उनको धमकियां मिल रही हैं, जिसके चलते उनको दैनिक जागरण के मालिकों से जान से खतरा है। वह इसकी शिकायत मुख्यमंत्री समेत झांसी डीआईजी व एसएसपी से कर चुके हैं, लेकिन आज तक इस संबंध में किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हुई है। कार्यवाही न होते हुए एजीएम बालेन्द्र गुप्ता ने पुनः इसकी शिकायत पुनः मुख्यमंत्री समेत झांसी डीआईजी व एसएसपी से करेंगे।

बीमारी से जूझ रहे मुंबई के क्राइम जर्नलिस्ट प्रमोद सिंह ने जहर खाकर जान दे दी

मुंबई : एक दशक से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय पत्रकार प्रमोद सिंह ने सोमवार के दिन पृथ्वी लोक को आखिरी सलाम कर लिया। पिछले कई महीनों से बीमारी से जूझ रहे पत्रकार प्रमोद सिंह ने सोमवार को सुबह अपने आवास पर उस समय जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जब घर पर कोई नहीं था।

सियासत का नंगा चेहरा, सांप्रदायिकता और मुजफ्फरनगर

शुक्र है कि सांप्रदायिकता की आग में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झोंक देने की साजिश ज्यादा कामयाब नहीं हुई। उन्माद का दौर कुछ थमता नजर आने लगा है। लेकिन, पिछले 3-4 दिनों में जितनी मार-काट हो चुकी है, वह कम नहीं है। खतरे की घंटी बज गई है। समाज के सेक्यूलर मिजाज के लोगों को आगे आना चाहिए। क्योंकि, यदि सरकार और प्रशासन के भरोसे ही सब कुछ छोड़ दिया गया, तो खतरा यही है कि केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही नहीं, देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक उन्माद फैलाया जा सकता है।

यशभारती से सम्‍मानित गाजीपुर के पत्रकार विजय बाबू का निधन

पूर्वान्चल के वयोवृद्ध पत्रकार विजय कुमार का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।पत्रकार विजय कुमार प्रदेश सरकार की ओर से यशभारती सम्मान से सम्मानित थे।बेहद सरल स्वभाव के विजय कुमार जी ने समाचारपत्र राष्ट्रीय सहारा,दैनिक आज,जनवार्ता समेत कई पत्र पत्रिकाओं मे बतौर पत्रकार अपनी सेवाएं दी थी।

इंजेक्शन देख डरे आसाराम ने नारको टेस्ट से बचाने के लिए डाक्टरों के आगे हाथ जोड़े

जोधपुर से खबर है कि जेल में बंद आसाराम बापू ने मेडिकल टेस्ट के लिए खून देने से इनकार कर दिया. ब्लड सैंपल लेते समय आसाराम बहुत घबराए हुए थे. उन्हें इंजेक्शन लगाकर नारको टेस्ट किए जाने का डर सता रहा था. सोमवार को जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में आसाराम की करीब डेढ़ घंटे तक मेडिकल जांच की गई. डॉक्टरों ने टेस्ट के लिए उनका ब्लड सैंपल लेना चाहा, तो वह आनाकानी करने लगे. कभी वह डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़ते तो कभी उन्हें दुलारने लगते. वह कहने लगे कि मुझ पर जुल्म किया जा रहा है.

Cartoonist Sushil Kalra passed away on September 8, 2013 in Maryland USA

: Sushil Kalra – An HT Cartoonist :  Sushil Kalra was born on a sizzling day, the 13th of June, 1940 at Gujranwala, now Pakistan.  After dabbling a lot in various sciences, he realized his aptitude and joined the College of Arts in New Delhi.  Working as an ad man, he found that the products he campaigned for became more popular than him, and he started scribbling humor drawings under his initials.  Subsequently, he completely drifted into the world of humor and by 1968, was drawing cartoons for Hindustan Times publications. His cartoons used to appear on the front page of Hindi Hindustan and Evening News.

हां, हम स्ट्रिंगर हैं, हमें इसका गुमान है, हमने बचा रखी है अपने दिल में धड़कन, आंखों में पानी और चेहरे पर लज्जा…

प्रिय यशवंत जी, राजेश वर्मा की शहादत के बाद से लगातार भड़ास देख पढ़ रहा हूं। आइबीएन वालों का जमीर अब तो जागे। ये सिर्फ एक राजेश वर्मा की कहानी नहीं है, हजारों राजेश वर्मा जो फर्ज के लिए जान न्योछावर करते हैं, इन्हें इनकी कोई परवाह नहीं होती … परवाह बस टीआरपी और पैसों की होती है।

क़मर मेवाड़ी को देवेन्द्र स्मृति पुरस्कार

राजसमन्द। गांधी सेवा सदन राजसमन्द के संस्थापक, साहित्यकार, पत्रकार, स्वाधीनता सेनानी एवं चिन्तक देवेन्द्र कर्णावट की पुण्य तिथि पर छठा देवेन्द्र स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ साहित्यकार एवं संबोधन त्रैमासिक के सम्पादक क़मर मेवाड़ी को प्रदान किया गया. उन्हें शाल, प्रशस्ति पत्र एवं 210000/- रु की राशि भेंट कर समानित किया गया.

‘के न्यूज’ चैनल से राजीव ओझा और काशीनाथ यादव का इस्तीफा, सेलरी न मिलने से स्ट्रिंगरों में असंतोष

कानपुर से शुरू हुआ 'के न्यूज' चैनल परवान चढ़ने से पहले ही मालिकों की अदूरदर्शिता का शिकार होने लगा है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पत्रकारों को 2 माह बिना आई.डी. और 2 माह बना अथारिटी लेटर के काम करना पड़ा. अब दोनों देने के बाद सैलरी के लिए परेशान किया जा रहा है..

दैनिक भास्कर, सोनीपत के ब्यूरो चीफ पर ब्लैकमेलिंग व उगाही के आरोप लगाते हुए कोलोनाइजर ने भेजा मालिकों को पत्र

Dear Editor Sir, I am writing this mail to you to inform you about a person, Mr. Dharmesh Pandey. He is the Beaureu Chief of Sonipat centre, Dainik Bhaskar. He is a person who selling media for his personal benefits. I had bought a land and after some days he publishes a news in dainik bhaskar saying that the land is illeagal.

बनारस में ‘जी न्यूज’ से क्यों देना पड़ा राम सुंदर मिश्रा को इस्तीफा, पढ़ें पूरा पत्र

सेवा में, श्रीमान इनपुट एडिटर, जी न्यूज़ उत्तर प्रदेश /उत्तराखंड, महोदय, सविनय निवेदन के साथ अवगत कराते हुए बताना चाहता हूं कि मैं पिछले चार वर्षों से चैनल की सेवा कर रहा हूँ। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हमेशा चैनल को आगे रक्खा हूँ। वाराणसी का बम ब्लास्ट रहा हो, सोयेपुर जहरीली शराब कांड, लिकर किंग पूर्व सांसद की जवाहर जायसवाल की गिरफ़्तारी, विधायक अजय राय के गुर्गों द्वारा बीज व्यापारी को जलाने का मामला, सेना की तोप लादे ट्रक से वसूली के मामले के बाद बवाल, ऐसे न जाने कितनी और खबरें। मेरे द्वारा भेजी गई खबरें स्पेशल ही नहीं बल्कि ब्रेकिंग और पूरे दीन की हेडलाइन रही है।

हिन्दुस्तान की गलत खबर से रद्द हुआ छात्रा का नामांकन!

श्रीनगर (उत्तराखंड)। हिन्दुस्तान के श्रीनगर प्रभारी की गलत न्यूज से एचएनबी गढवाल विवि के बिड़ला कैंपस से छात्रसंघ चुनाव में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि (यूआर) के लिए चुनाव लड़ रही एक मात्र महिला प्रत्याशी संगीता बडोनी का नामांकन रद्द कर दिया गया. हिंदुस्तान अखबार में गलत कैप्शन के साथ तस्वीर का प्रकाशन कर दिया गया जिसको संज्ञान लेकर मुख्य चुनाव अधिकारी ने नामांकन रद्द किया.

दैनिक भास्कर, झारखंड की तीनों यूनिटों को मिले संपादक

दैनिक भास्कर, धनबाद के संपादक बसंत झा को रांची का संपादक बिना दिया गया है. धनबाद में राकेश पाठक को संपादक बनाया गया है. रांची में डीएनई संजय सिंह को जमशेदपुर का संपादक बनाकर भेजा जा रहा है. ये जानकारियां एक मेल के जरिए दी गई है. बताया जाता है कि धनबाद से रांची जा रहे बसंत ने अपने पीछे राकेश पाठक को संपादक बनवा दिया है.

सुप्रिय प्रसाद : दुमका से दिल्ली तक… तुम ही तुम हो

Amarendra Kishore :  ज़िंदगी में ऐसे बहुत कम मौके आते हैं जब मेरी भाषा और शैली मेरी सोच, संवेदना और सृजनशीलता के सामने जवाब देने लगती है। आज अपने संस्थान के एक संगी सुप्रिय प्रसाद के बारे में लिखते हुए सालों बाद मेरी शब्द सम्पदा और शैली खुद को कमजोर महसूस कर रही है। मतलब सुप्रिय की उपलब्धि मेरी सोच, शैली और शब्द से बहुत आगे है।

‘फूट डालो राज करो’ की राजनीति के उस्ताद हैं मुलायम, यही फार्मूला बेटे को सिखा रहे

: दंगों के बाद तेजी से होता है वोटों का ध्रुवीकरण : साम्प्रदायिक अनिवार्यता की स्वीकार्यता का बढ़ता ग्राफ : लखनऊ : उत्तर प्रदेश के अमन-चैन को किसकी नजर लग गई है। इस सवाल का जबाव प्रत्येक शांति पसंद नागरिक जानना चाहता है। सपा के डेढ़ वर्ष के शासनकाल में   करीब 50 बार साम्प्रदायिकता की आग में और अनेकों बार मजहबी तनाव में राज्य की जनता झुलस चुकी है। दर्जनों लोग मौत के मुंह में जा चुके हैं। सैकड़ों घायल अस्पतालों में पड़े हैं। कारोबार का नुकसान अलग हो रहा है। उत्तर प्रदेश के बिगड़े हालातों के कारण उद्योगपति भी यहां पैसा लगाने से परहेज कर रहे हैं। कोई इस बात की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है कि क्यों रह-रहकर लोग खून के प्यासे हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश को सरकार की नाकामयाबी की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

दिल की पेन ड्राइव में न जाने कितनी अनुभुतियां समाईं : ममता कालिया

प्रख्‍यात कथा लेखिका ममता कालिया सोमवार को अपनी रचना यात्रा के साथ अपने ही शहर में अपनों से मुखातिब हुईं। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय की ‘मेरी शब्‍दयात्रा’ कार्यक्रम के तहत उन्‍होंने पूरी विनम्रता और साफगोई के साथ अपनी रचना यात्रा के साथ रचना प्रक्रिया को भी साझा किया। मेरे दिल के पेन ड्राइव में राग-विराग एवं रचना संघर्ष सब कुछ ठसाठस भरा है। यह तो ऐसी शब्‍दयात्रा है जिमें रचनाकार कभी पास तो कभी फेल होता है। उन्‍होंने अपनी प्रिय कहानी ‘सुलेमान’ का पाठ भी किया।

बृहत् समांतर कोश की पांच हजार प्रतियां छपी

भारतीय प्रकाशन जगत में एक चमत्कारी घटना थी स्वाधीनता के स्वर्ण जयंती वर्ष संबंधी समारोहों के अंतर्गत नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा समांतर कोश का सफल प्रकाशन. अरविंद कुमार के समांतर कोश ने आधुनिक भारत को पहला संपूर्ण विश्वस्तरीय थिसारस मिला था. इसे बनाने में उन्होंने अपने जीवन के पूरे बीस साल होम दिए थे. बीस साल की लगन और मेहनत के बाद 1996 मेँ प्रकाशित भारत के पहले थिसारस की दोनों खंड. इस का पहला सैट तत्कालीन राष्ट्रपति डाक्टर शंकर दयाल शर्मा को भेँट किया गया था. 1800 पेजों वाले उस कोश का 5,000 (पाँच हज़ार) प्रतियों का पहला संस्करण हाथोंहाथ बिक गया. छह महीने बीतते न बीतते इस की पुनरावृत्ति की 10,000 (दस हज़ार) प्रतियाँ छापी गईं. अब तक उस की छह पुनरावृत्तियाँ हो चुकी हैं.

पत्रकारों को बीमा और मुआवजा देगा ‘राष्ट्रीय पत्रकार एकता मंच’

पत्रकारों पर हो रहे हमलों के बाद पहली बार देश में एक ऐसे संगठन की शुरुआत हो रही है, जो देशभर के सभी पत्रकारों चाहे वो स्टाफ रिपोर्टर हो या कैमरामैन हो या फिर स्ट्रिंगर, सभी को राहत देने का काम करेगा। राष्ट्रीय पत्रकार एकता मंच नाम से गठित इस संगठन की खास बात ये है कि इसके सदस्यों को केवल सौ रुपये वार्षिक सदस्यता सहयोग करना होगा जिसकी एवज में संगठन की और से उस सदस्य को दो लाख रुपये का बीमा मिलेगा। साथ ही अगर किसी कवरेज के दौरान हमले या घटना में किसी स्ट्रिगंर का कैमरा आदि क्षतिग्रस्त होगा तो राष्ट्रीय पत्रकार एकता मंच उसे नया कैमरा देने या फिर मुआवजा देने का काम भी करेगा।

एक जिद, जो देश के पत्रकारों के लिए नजीर बन गई

नई दिल्ली : कहते हैं कि अगर देश को बदलना है और विकास करना है तो अच्छे काम को लेकर जिद करो। जिद करने से एक साहस मिलता है और यह साहस ही जीत दिलाता है। कुछ ऐसी ही जिद राजधानी के मीडियाकर्मियों ने भी की। इस जिद ने न केवल मीडिया को दुष्कर्म संबंधी मामलों की अदालती कवरेज का अधिकार दिलाया, बल्कि उनकी जिद देशभर के पत्रकारों और अदालतों के लिए एक नजीर बन गई।

दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूज चैनल भारत में

हिसार : आज दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूज चैनल भारत में है और हर वर्ष इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे मनोरजन व मीडिया उद्योग की भावी क्षमता का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। यह बात पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के मास कम्यूनिकेशन विभाग के प्रोफेसर डॉ. एनएस जौहल ने जीजेयू के संचार, प्रबंधन एवं तकनीकी विभाग में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी के दौरान कही। वे विभाग में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी मीडिया के बदलते आयाम विषय पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता मीडिया अध्ययन संकाय के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज दयाल ने की।

जानिए, ट्रक वालों से उगाही का रेट देश के किस हिस्से में कितना चल रहा है

हमारे एक चाचा हैं, नाम है मुंशीलाल पर हम उन्हें दद्दू कहते हैं। कुल चार साल मुझसे बड़े हैं लेकिन चाचा हैं सगे सो चाचागिरी कभी-कभी दिखा देते हैं। दद्दू ट्रक चलाते हैं। जब मूड आया तो नौकरी कर ली जब जी चाहा घर बैठ गए। चाची खूब खिसियाईं, रोई, पीटीं पर दद्दू पर असर नहीं। हारकर चाची ने खेती बटाई पर उठाई और खुद ही घर संभाल लिया। दो बेटियां ब्याह दीं और एक बेटा भी। बस एक बेटा बचा है। किस्साकोताह यह कि एक बार मैने चाचा से कहा कि मुझे भी अपने साथ ट्रक पर ले चलो। करीब बारह साल पहले चाचा आ गए कोलकाता और वहां के जनसत्ता में बतौर संपादक मेरा नाम छपा देखकर वे अपने भतीजे से मिलने आ गए।

सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार रामकृष्ण जायसवाल नहीं रहे

सुलतानपुर : उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार रामकृष्ण जायसवाल का मंगलवार को निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। जायसवाल मूलत शिक्षक थे। उन्होंने 1970 में पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और लगभग चार दशक तक विभिन्न समाचार पत्रों की सेवा की। वह कई पत्रकार संगठनों के सदस्य रहे तथा आपातकाल के दौरान जेल गये। आर्यसमाजी जीवन जीते हुए वह विभिन्न विद्यालयों की प्रबंध समिति के सदस्य रहे।

खोजी पत्रकार पुष्प को सफलता, सुप्रीम कोर्ट ने स्टिंग वाली सीडी की सीबीआई जांच की अर्जी को हरी झंडी दी

नई दिल्ली। गुजरात के पूर्व गृहराज्यमंत्री और तुलसीराम प्रजापति फर्जी मुठभेड़ कांड के आरोपी अमित शाह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही एक स्टिंग ऑपरेशन में उन्हें बचाने की कोशिश करते दिख रहे बीजेपी के दो नेताओं पर भी शिकंजा कस सकता है। जिस खोजी पत्रकार ने ये स्टिंग ऑपरेशन किया था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की इजाजत दे दी है कि वो इस मामले की सीबीआई जांच की अर्जी दाखिल कर सके। पत्रकार का आरोप है कि अमित शाह ने इस केस में मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है और इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

सपा सरकार के खिलाफ दिल्ली में यूपी भवन के सामने प्रदर्शन बारह को

Shahnawaz Malik : उत्तर प्रदेश के अमन चैन में सुनियोजित तरीक़े से सेंध लगाने वाली समाजवादी पार्टी के खिलाफ यूपी भवन पर विरोध प्रदर्शन का फैसला लिया गया है। फिरक़ापरस्ती और ऐसी ताक़तों के खिलाफ यह प्रदर्शन इसलिए भी ज़रूरी है ताकि धरती पुत्र और उनके बेटे का असली चेहरा लोगों के सामने आए। क्योंकि सत्ता के कारख़ाने तक पहुंचने के लिए पिता-पुत्र ग़रीब-गुरबों का लहू पीने पर आमादा हैं। अगर इन्हें नहीं रोका गया तो चुनाव से पहले लाशें गिरने का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

मुलायम आखिरी दांव में पीएम की बाजी लूटना चाहते हैं, इसके लिए लाशों पर राजनीति से परहेज़ नहीं

Deepak Sharma : ड्रेकुला पालिटिक्स जानते है आप? नहीं जानते तो आगे पढिये. आपको याद ना आये तो यह घटनाएं और ऐसी कई और घटनाएँ पहले गूगल पर सर्च कर लीजिए.

मीडिया चौपाल-2013 : वेब संचालक, ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया संचालक और आलेख-फीचर लेखकों का भोपाल में दो दिनी जुटान 14 से

प्रिय साथी,  संचार क्रांति के इस वर्तमान समय में सूचनाओं की विविधता और बाहुल्यता है. जनसंचार माध्यमों (मीडिया) का क्षेत्र निरंतर परिवर्तित हो रहा है. सूचना और माध्यम, एक तरफ व्यक्ति को क्षमतावान और सशक्त बना रहे हैं, समाधान दे रहे हैं, वहीं अनेक चुनौतियां और समस्याएँ भी पैदा हो रही हैं. इंटरनेट आधारित संचार के तरीकों ने लगभग एक नए समाज का निर्माण किया है जिसे आजकल "नेटीजन" कहा जा रहा है. लेकिन मीडिया के इस नए रूप के लिए उपयोग किये जाने वाली पदावली – नया मीडिया, सोशल मीडिया आदि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. लेकिन एक बात पर अधिकाँश लोग सहमत हैं कि "मीडिया का यह नया रूप लोकतांत्रिक है. यह लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा दे रहा है. मीडिया पर से कुछेक लोगों या घरानों का एकाधिकार टूट रहा है.

खंडूड़ी की गलती दोहरा रहे बहुगुणा

देहरादून। भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे भुवन चन्द्र खडूड़ी को जिन गलतियों के कारण जनता के कोप का भाजन बनना पड़ा था इस समय कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी उन्हीं गलतियों को दोहरा रहे हैं। इतना तो तय है कि व्यक्तिगत जीवन में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कितने ही साफ सुधरे क्यों न हों लेकिन राजनीतिक धरातल पर उनकी मिट्रटी पलीत  करने में सलाहकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

अड़तालीस घंटे के भीतर पत्रकार पर हमले के दो आरोपी धराए

5 सितंबर की रात दो मीडिया कर्मियों पर पिस्तौल दिखाकर जानलेवा हमला करने व 10 हजार रुपए छीनने के आरोप में पुलिस ने दो मुख्य नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के 48 घंटे के भीतर एसपी नागेंद्र चौधरी के निर्देश पर थाना प्रभारी विनय कुमार राम के नेत्रृत्व में एएसआई दशरथ यादव दल बल के साथ शनिवार रात हांसीपहाड़ी इलाके से दोनों आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार दोनों आरोपियों में चंदन ओझा और प्रेम सिंह उर्फ पकोई शामिल है।

दया शंकर शुक्ल ‘सागर’ ने यूं जीते मकाऊ के जुआघर में छप्पन हजार रुपये

इस वक्त मैं दुनिया के सबसे बड़े जुआघर में हूँ। होटल के इस कसीनो में कोई दो हजार मेजों पर जुआ चल रहा है। मकाऊ में सुबह के पाँच बजे हैं और कसीनो खचाखच भरा है। रात भर जुआ चला और अब भी चलेगा। ये खेल 24 घंटे चलता है। करोडों रुपये का दांव लगता है। दुनिया भर के धनकुबेर हारते हैं लेकिन उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं होती। यहाँ सब जुआरी नहीं हैं, कुछ मेरे तरह दर्शक भी हैं। यहाँ दर्शक बनने पर कोई मनाही नहीं है क्योंकि चालाक कसीनो वाले जानते हैं ये दर्शक भी थोड़ी देर में जुआ खेलने पर मजबूर हो जायंगे। और मेरे साथ यही हुआ। पहले दो दिन मैं यहाँ सिर्फ़ दर्शक था।

उपेक्षा और आर्थिक तंगी का जिक्र करते हुए शोक सभा में रो पड़े वरिष्ठ पत्रकार डा. दामोदर वर्मा

Arun Sathi : मार्मिक पल… जब वरिष्ठ पत्रकार शोक सभा में रो पड़े….. बरबीघा के श्री नवजीवन अशोक पुस्तकालय में यूपी में आईबीएन7 पत्रकार राजेश वर्मा की हत्या पर शोक सभा का आयोजन किया गया था। इसमें सभी पत्रकार जुटे और अपनी अपनी वेदना रखी। इस इस शोक सभा में बोलते बोलते वरिष्ठ पत्रकार डा. दामोदर वर्मा रो पड़े।

नैनीताल के जिस आश्रम में आसाराम ने साधना की, उसे भी हड़पने की कोशिश की थी

नाबालिग लडकी के यौन शोषण के आरोप में जोधपुर सेंट्रल जेल में पश्चाताप साधना कर रहे आसाराम ने अपने चोला बदल के शुरूआती दिनों में नैनीताल के स्वामी लीला शाह आश्रम में ध्यान -साधना की थी। आज से करीब तिरेपन -चौवन साल पहले 1959-60 के आसपास आसाराम का नैनीताल के स्वामी लीला शाह आश्रम में आना शुरू हुआ था। वह आसूमल के आसाराम में बदलने का शुरूआती दौर था। तब आसूमल उर्फ़ आसाराम का हर साल गर्मियों का तकरीबन एक महीना स्वामी लीला शाह के नैनीताल के आश्रम में ही गुजरता था।

अब संत ही बन गए हैं शोषक

जिन्हें जनता सिर आंखों पर बिठाती है। बापू, महाराज, महाप्रभु, जगद्गगुरु से संबोधित करके पूजती है। जो खुद को धर्म का नुमांइदा बताकर सनातन धर्म का ढोल पूरी दुनिया में पीटते फिरते हैं,ऐसे ‘‘संत’’  भी नारियों के शोषक बन गए। पूरी दुनिया को यह त्याग, तप, संयम, नियम और वैराग्य की शिक्षा देते हैं और खुद  ‘सेक्स’ के गहरे गर्त में गिर जाते है। महिला भक्तों को अपनी कामेच्छा पूर्ति का साधन बनाते हैं। भेद खुलने पर मीडिया द्वारा बदनाम करने की साजिश बताते हैं।  ऐसे संत तो पशुओं से बदतर हैं। भक्त ईश्वर की जगह ऐसे धूर्त साधुओं की पूजा करते हैं और असली भगवान भूल जाते है।

एक था ‘तहलका’ : पोस्टर ब्वाय तरुण तेजपाल और मीडिया का बाजार

Yashwant Singh : तरुण तेजपाल बिजूका की तरह टंगे हुए हैं.. उनके पैर न धरती पर हैं और न ही आसमान में.. वे पोस्टर ब्वाय बन चुके हैं.. अतीत में की गई कुछ सरोकारी पत्रकारिता के लिए अब उन्हें टंगने, पोस्टर पर चिपकने का लायसेंस मिल चुका है… ऐसे पोस्टर ब्वाय पत्रकारिता में कई हैं, कई आए और कई गए… ये पोस्खुटर ब्वाय खुद को पत्रकारिता का बहुत बड़ा नाम बताते हैं… संतोष भारतीय को याद करिए… राहुल देव को याद करिए.. दीपक चौरसिया को याद करिए…

प्रयाग पांडेय की किताब का उनकी गैरमौजूदगी में हुआ पिथौरागढ़ में विमोचन

पिथौरागढ़। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की जड़ें बहुत गहरी हैं। समूचा उत्तराखंड राज्य आंदोलन अपनी व्यापकता और आवेग की दृष्टि से बेजोड़ रहा है। आंदोलन में समाज के सभी वर्गों की प्रत्यक्ष और सक्रिय भागीदारी के लिहाज से इस आंदोलन ने विश्व के सभी जन आंदोलनों को कहीं पीछे छोड़ दिया था। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में समाज के प्रत्येक वर्ग की व्यापक और प्रत्यक्ष भागीदारी रही। यह विश्व का अकेला ऐसा आंदोलन था, जिसे सबसे ज्यादा बौद्धिक समर्थन हासिल हुआ।

केएन शांत कुमार बने पीटीआई के नये अध्यक्ष, महेंद्र मोहन उपाध्यक्ष चुने गए

नयी दिल्ली : दो प्रख्यात मीडिया हस्तियों के एन शांता कुमार एवं महेंद्र मोहन गुप्त को आज प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया का क्रमश: अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया. पीटीआई की 65वीं वार्षिक आम बैठक के बाद हुई पीटीआई निदेशक मंडल की बैठक में बेंगलूर स्थित प्रिंटर्स (मैसूर) प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ संपादक एवं फोटो पत्रकार शांत कुमार एवं जागरण समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गुप्त को सर्वसम्मति से निर्वाचित किया गया. शांता कुमार प्रमुख कन्नड़ दैनिक प्रजावाणी के संपादक हैं. साथ ही वह डेक्कन हेराल्ड, प्रजावाणी, सुधा एवं मौर्या के प्रकाशक प्रिंटर्स (मैसूर) के निदेशक हैं. वह तमिल दैनिक दिनामलार के प्रकाशक आर लक्ष्मीपति के बाद पीटीआई के अध्यक्ष बने हैं.

डाक्टरों की गुंडई को अब मिला करारा जवाब, एसएसपी यशस्वी यादव ने किया सराहनीय कार्य

कानपुर : कहते हैं कि वक्त की हर शै गुलाम.. यह जुमला डाक्टरों के उपर देर से ही सही, पर सही उतरा क्योंकि यह शहर बहुत अर्से से डाक्टरों की गुंडई का दंश झेल रहा था लेकिन डाक्टरो की ताकत के आगे हमेशा खाकी घुटने टेकती रही है। अगर शहर के केवल एक ही सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पिछले तमाम सालों में डाक्टरों द्वारा की गई गुंडई की घटनाओं का जिक्र करें तो इस शहर में डाक्टरों की गुंडई का परिदृश्य स्पष्ट हो जायेगा। हैलट अस्पताल शहर का सबसे बडा़ सरकारी अस्पताल है जहां दूर दूर से लोग इलाज कराने आते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या गरीबों की होती है जो बड़े बड़े नर्सिंग होम में अपना इलाज नहीं करा सकते। लेकिन इन गरीब और मजलूमों के साथ जिस तरीके से यहां के डाक्टर पेश आते हैं, वह नाकाबिले बर्दाश्त है।

सत्यनारायण के अनुज का असामयिक निधन

भोपाल : रायसेन जिले में दैनिक भास्कर समूह में कार्यरत पत्रकार सत्यनारायण याज्ञवल्क्य के अनुज विमलनारायण याज्ञवल्क्य का भोपाल के एक अस्पताल में असामयिक निधन हो गया. करीब एक माह पहले इनका न्यूरो संबंधी आपरेशन बैंगलोर में हुआ था और तबसे निरंतर चिकित्सकीय देखरेख में थे.

सेबी, सहारा क्यू शॉप को हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा सहारा क्यू शॉप अग्रिम/बॉण्ड जारी किये जाने की जांच कराये जाने हेतु याचिका मे इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज सेबी और सहारा क्यू शॉप लिमिटेड को नोटिस जारी किया. जस्टिस देवी प्रसाद सिंह एवं जस्टिस अशोक पाल सिंह की बेंच ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ताओं को भी इस बारे मे अब तक की गयी कार्यवाही के सम्बंध मे जानकारी प्राप्त कर कोर्ट को सूचित करने के निर्देश दिये। मामले मे अगली सुनवाई 08 अक्टूबर को होगी।

ललित उपमन्यु, सम्मी कुमार, एपी जैन, रिंकू व्यास, धर्मेश, हरीश के बारे में नई सूचनाएं

इंदौर। दैनिक भास्कर इंदौर संस्करण के न्यूज एडीटर ललित उपमन्यु ने सोमवार को दैनिक भास्कर को अलविदा कह दिया है। उपमन्यु ने कल ही दैनिक दबंग दुनिया में प्रभार संभाल लिया। पिछले दिनों दैनिक भास्कर में अपने दामाद के साथ हुए घटनाक्रम के बाद उपमन्यु वहां असहज महसूस कर रहे थे।

मुसलमानों के खिलाफ कोई रिपोर्ट किसी भी हालत में नहीं ली जाये!

: मुजफ्फरनगर दंगों का असल कारण : मुजफ्फरनगर के दंगों के बारे में कई तरह की बातें हो रही है लेकिन कोई असल समस्या पर बात नहीं कर रहा है. दंगो का मूल कारण जो है उस पर कोई बात नहीं हो रही है. दंगों के पीछे जो मूल घटना रही वो पूरी तरह से विधि-व्यवस्था सम्बंधित घटना थी- छेड़खानी की. लेकिन एक विधि-व्यवस्था की सामान्य सी घटना ने भयावह साम्प्रदायिकता का रूप ले लिया और ऐसा क्यूँ हुआ इसके पीछे का कारण आज़म खान प्रोत्साहित यूपी पुलिस के बीच प्रसारित मौखिक लेकिन बाध्यकारी वो निर्देश है जिसमे पूरे यूपी में थाना-प्रभारियों को सख्त ताकीद है की मुसलमानों के खिलाफ कोई रिपोर्ट किसी भी हालत में नहीं ली जाये. इसकी पुष्टि यूपी पुलिस का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा अधिकारी करता है.

अखिलेश को बौना साबित करने में जुटीं हैं आईएएस अधिकारी अनीता सिंह?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वैसे तो पूर्ण बहुमत की सरकार के मुखिया हैं। अखिलेश यादव में कार्य एवं निर्णय लेने की क्षमता है और उनका व्यक्तित्व मृदुभाषी एवं शालीन है लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बीते 18 महीनों में कुछ प्रकरणों में उनकी जो किरकिरी हुई है, उसकी वजह साफ तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रभावशाली आईएएस अफसर अनीता सिंह बनी हुई हैं।

नागपुर में सहारा समय न्यूज चैनल का फर्जी पत्रकार गिरफ्तार

कई लोगों को ठगने और ब्लैकमेल करने वाला फर्जी पत्रकार नागपुर पुलिस की गिरफ्त में आ गया है. यह व्यक्ति खुद को सहारा समय न्यूज चैनल का सब एडिटर बताता था. इसने कई सफेदपोशों को एक्सपोज करने की धमकी देकर उन्हें ब्लैकमेल किया. इसकी शिकायत जब सहारा समय प्रबंधन से की गई तो सहारा समय की तरफ से ही पुलिस में एक शिकायत दर्ज करा दी गई कि कोई व्यक्ति खुद को सहारा समय का पत्रकार बता कर दूसरे लोगों को धमका रहा है.

संघ परिवार का ‘महामंथन’ : मोदी का रास्ता साफ, लेकिन तुनके रहे आडवाणी!

भाजपा और संघ नेतृत्व के बीच दो दिन तक समन्वय मंथन चलता रहा। इस महामंथन की कवायद के बाद गुजरात के बहुचर्चित मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का रास्ता साफ हो गया है। यह तय कर लिया गया है कि 20 सितंबर के पहले भाजपा का संसदीय बोर्ड ‘पीएम इन वेटिंग’ के तौर पर मोदी के नाम पर मुहर लगा देगा। यह अलग बात है कि तमाम मनुहार के बावजूद बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी, मोदी के मुद्दे पर तुनके ही रहे। यद्यपि, उन्होंने मंत्रणा बैठकों में हिस्सेदारी की। लेकिन, वे तमाम कोशिशों के बावजूद मोदी के मुद्दे पर ‘आम राय’ से सहमत नहीं हुए। उन्होंने यही तर्क रखा कि चार विधानसभा चुनावों के बाद मोदी का फैसला किया जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन, उन्हें जल्दबाजी में यह फैसला करना ठीक नहीं लग रहा। आडवाणी को इस बात का भी रंज रहा कि पार्टी के कुछ जिम्मेदार नेता अंदर ही अंदर उनके खिलाफ विरोध का माहौल तैयार करा रहे हैं। यह तौर तरीका ठीक नहीं है।

पत्रकार वह है जो आठ सौ शब्दों में…

Purushottam Agrawal :  कृतज्ञ स्मरण करता हूँ राजेन्द्र माथुर का जिनसे बहुत कुछ सीखा, एक यह कि "पत्रकार वह है जो आठ सौ शब्दों में अमिताभ-रेखा रोमांस की स्टोरी लिखने में भी समर्थ हो, और प्रधानमंत्री की राजनैतिक असफलता का विश्लेषण भी और गोडोल थ्योरम का महत्व भी…." और एक यह भी कि "पुरुषोत्तमजी हम अखबार निकालते हैं इतिहास का जर्नल नहीं, लेख आप कल दे देते तो अखबार के काम का था, अब इसका ऐतिहासिक महत्व ही रह गया है.."

एनडीटीवी के श्रीनिवासन जैन का उत्तर प्रदेश के सांप्रदायिक दंगों का उत्तेजक कवरेज

Tejendra Sharma :  बी.बी.सी. लन्दन के भूतपूर्व संपादक विजय राणा का कहना है कि आमतौर पर सांप्रदायिक दंगों को कवर करते हुए मीडिया के लिये एक आचरण कोड स्थापित किया गया है कि समुदायों की पहचान नहीं बताई जाती। जब मैंने श्रीनिवासन जैन की रिपोर्ट देखी तो मैंने पाया कि इस वरिष्ठ पत्रकार ने इस कोड की सिरे से परवाह नहीं की। वे अपनी रिपोर्ट में कहते हैं कि मुसलमानों ने दो जाट लड़कों को मार डाला और उसके बाद से जाट मुसलमानों की हत्या कर रहे हैं और मुसलमानों के घर जलाए जा रहे हैं।

फेसबुक पर सक्रिय ‘फेक एनकाउंटर विशेषज्ञ’ फेंकू नेता की भक्तमंडली दंगों की आग को हवा दे रही

Ashutosh Kumar : दो साल पुराने विदेशी वीडियो… फेक न्यूज़- क्लिपों… और दूसरी बेशुमार फेक- सामग्री का प्रचार करके कौन दंगों की आग को लगातार हवा दे रहा है? फेसबुक पर जांच कर के देख लीजिये… ये उसी फेक -एनकाउन्टर विशेषज्ञ फेंकू नेता की भक्तमंडली है. खैर, ये मंडली तो जो है सो है ही. हमारी 'लेखक'- मंडली में भी कुछ लोग हैं जो 'क्रिया-प्रतिक्रिया' , 'आत्मरक्षा ', मुसलमान -होते -ही -हिंसक हैं' जैसे दंगाई मुहावरों को उछालने में लगे हैं.

यूपी में सपा और भाजपा के बीच घिनौना गठजोड़ हो चुका है : कमर वहीद नक़वी

Qamar Waheed Naqvi : उत्तर प्रदेश से अब तक जो भी ख़बरें सामने आयी हैं, उनसे एक ही निष्कर्ष निकलता है कि वहाँ समाजवादी पार्टी और बीजेपी में घिनौना गँठजोड़ हो चुका है, ताकि 2014 के चुनाव में दोनों को फ़ायदा पहुँच सके. मुज़्फ़्फ़रनगर में जिस तैयारी के साथ और जितने सुनियोजित तरीक़े से दंगा भड़काया गया, जिस प्रकार एक फ़र्ज़ी वीडियो को गाँव-गाँव तक फैलने दिया गया, जिस प्रकार दोनों ओर के दंगाई तत्वों को लगातार आम लोगों को भड़काते रहने की छूट दी गयी, जिस प्रकार सरकार का पूरा तंत्र सब कुछ देखते हुए भी जानबूझ कर सब कुछ अनदेखा करता रहा, उसके बाद भी अगर किसी को समझ न आये कि दंगों की साज़िश के पीछे कौन है और यह साज़िश रचने का उद्देश्य क्या है, तो फिर ऐसी 'मासूमियत' पर क्या कहा जाय.

जब मेरठ के दंगों के दौरान हम पत्रकारों ने कर्फ्यू में निकाला था जुलूस

मेरठ के बारे में यह एक ऐसी घटना है जिसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बात 1987 की है। मेरठ में दंगा हो गया और कर्फ्यू लग गया। कर्फ्यू लगे दो दिन हो गए। डी. एम. ने केवल दो स्थानीय संपादकों को पास दिए,  बाकी पत्रकारों को पास देने से मना कर दिया। इस पर विचार करने के लिए मैंने कुछ पत्रकारों को अपने आफिस बुलाया। जागरण से अभय गुप्ता और ओ. पी. सक्सेना, अमर उजाला से सुनील छइंया और हरि जोशी के अलावा एक हिंदुस्तान के पत्रकार जिनका नाम याद नहीं आ रहा, के अलावा चार पांच अन्य पत्रकार समस्या पर विचार करने के लिए सिर जोड़ कर बैठे।

मनीकंट्रोल डाट काम में भी छंटनी, कई पत्रकारों को जाने के लिए कह दिया गया

नेटवर्क18 के कई मीडिया वेंचर्स में से एक मनीकंट्रोल डाट काम में भी छंटनी की जा रही है. इस बिजनेस और फाइनेंस न्यूज पोर्टल से कम से कम आधा दर्जन रिपोर्टरों को इस्तीफा देने के लिए प्रबंधन ने कह दिया है. इन लोगों से जिस कागज पर साइन कराया गया है उस पर लिखा हुआ है कि वे परसनल कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं. बताया जाता है कि मनी कंट्रोल डाट काम के लिए अलग से कोई टीम नहीं रहेगी.

सर्वेक्षण में फेल रहे बहुगुणा

देहरादून : आई फोर इण्डिया ने देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सर्वेक्षण कर जनता से उनकी राय मांगी है। उत्तराखण्ड के संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा इस सर्वेक्षण में बनाई गई चार श्रेणी में से तीन में फेल ही नजर आए हैं। सर्वेक्षण में सरकार और प्रशासन की श्रेणी में विजय बहुगुणा फेल हुए हैं, आपदा प्रबंधन में विजय बहुगुणा को 1.84 अंक मिले, जबकि गरीबी कम करने के मामले में उन्हें 1.08 अंक मिले, मूल्यों के निर्धारण में उन्हें 1.76 अंक मिल पाए, जबकि सरकारी विभागों की स्थिति में उन्हें 1.95 अंक मिल पाए।

बारूद कभी जख्म का मरहम नहीं होती…

जिस मुजफ्फरनगर की आग की लपटें मेरठ के गांवों तक और शामली  तक पहुंच गई है अंतराष्ट्रीय स्तर पर यह शहर उर्दू के मशहूर शायर, अशोक साहिल, खालिद  जाहिद मुजफ्फरनगरी, और मरहूम  मुजफ्फर रज्मी कैरानवी  के नाम से जाना जाता है। अपनी शायरी के द्वारा पुल बनाने के लिये जाना जाता है काबा और काशी को नजदीक लाने वाले शायर अशोक साहिल के इस शहर में लोग आपस में लड़ रहे हैं ये कोई बाहर से आये लोग नहीं हैं ये वही लोग हैं जिनके पुरखों ने कभी अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिये थे जिन्होंने गुलाम भारत की आजादी की लड़ाईयां कांधे से कांधा मिलाकर लड़ीं थीं। मगर आज उनके वंशज सियासी मदारियों के चक्कर में आकर एक दूसरे की जान के दुश्मन बने हुऐ हैं।

आपने पर कतर दिए मेरे, अब मेरी कैद क्‍या रिहाई क्या

: इलाहाबाद क्षेत्रीय केंद्र में जुटे ख्‍यातनाम कवि : सांझा संस्‍कृति के शहर इलाहाबाद में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के क्षेत्रीय  केंद्र इलाहाबाद के सत्‍य  प्रकाश मिश्र सभागार में  जब शहर के तमाम ख्‍यातनाम कवि और शायर काव्‍य पाठ के लिए जुटे तो शाम कवितामय हो गई। भीष्‍म साहनी और फिराक गोरखपुरी की स्‍मृति को समर्पित काव्‍य संध्‍या में सभी कवि और शायरों ने अपनी सर्वोत्‍तम कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की शुरूआत भीष्‍म साहनी की प्रगतिशील चेतना और फिराक गोरखपुरी के सांझा संस्‍कृति के पैरोकार होने को रेखांकित करने से हुई।

दैनिक जागरण, लखनऊ के लोकल इंचार्ज से तंग आकर कई युवा पत्रकारों ने दिया इस्तीफा

दैनिक जागरण, लखनऊ से कुछ दिनों पहले लोकल इंचार्ज से परेशान होकर निशांत ने इस्तीफा दे दिया और अमर उजाला ज्वाइन किया. इसी कड़ी में ताजी सूचना के मुताबिक रजनीश रस्तोगी ने जागरण से इस्तीफा देकर हिंदुस्तान लखनऊ के साथ नई पारी की शुरुआत की है. लोकल इंचार्ज अजय श्रीवास्तव से तंग आकर कुछ महीने पहले आई नई रिपोर्टर निधि सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया है.

सात्विक जीवन जीने वाले इस 37 साल के नौजवान पत्रकार की किडनी फेल होने से मौत हो गई

Riyaz Hashmi : मन बेहद दुखी है और बहुत उदास भी। यकायक खबर मिली कि मेरे प्रिय पत्रकार साथी सत्येंद्र पांडेय नहीं रहे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और इनके परिजनों को दुख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। 2010 की ही तो बात है, जब मेरा स्थानांतरण दैनिक जागरण देहरादून स्टेट ब्यूरो में हुआ था। सत्येंद्र भी स्टेट ब्यूरो में ही थे।

नेताजी अपने ही बेटे की राह में कांटा बने हुए हैं

Shambhunath Shukla :  कल रात NDTV के प्राइम टाइम में मुजफ्फर नगर पर चर्चा हुई। रवीश कुमार ने इस कार्यक्रम में मुझे भी बुलाया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर मंडल में मैने काफी पत्रकारिता की है। जब जनसत्ता में था तब यूपी, बिहार, एमपी व राजस्थान का प्रभारी रहते हुए और जब अमर उजाला के मेरठ संस्करण का संपादक रहा तब भी।

लगता है ‘तहलका’ सब शर्म लिहाज घोल कर पी गया है…

Abhishek Srivastava : ये देखिए, हमारे समय की सबसे ज़रूरी तस्‍वीर.. छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री रमन सिंह के साथ तहलका के संपादक तरुण तेजपाल और उनकी टीम। बताते हैं कि जिसे छत्‍तीसगढ़ में तहलका की फ्रैंचाइजी मिली है, वह एस्‍सार कंपनी का अधिकारी है।

दैनिक जागरण का पत्रकार मोटरसाइकिल चोरी में उत्‍तराखंड पुलिस के हत्‍थे चढ़ा

पीलीभीत से खबर है कि गजरौला से दैनिक जागरण के लिए रिपोर्टिंग करने वाले महेंद्र कुमार को उत्‍तराखंड पुलिस अरेस्‍ट करके ले गई है. महेंद्र पर मोटरसाइकिलों की चोरी करने का आरोप है. बताया जा रहा है कि कुछ आरोपियों के पकड़े जाने के बाद उत्‍तराखंड की हल्‍द्वानी पुलिस के हाथ महेंद्र तक पहुंचे हैं. पुलिस महेंद्र को पकड़कर उत्‍तराखंड ले गई है। उनसे पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि हर बार की तरह दैनिक जागरण महेंद्र को अपना पत्रकार मानने से भी इनकार कर रहा है.

प्रबल प्रताप सिंह ‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर बने

वरिष्ठ पत्रकार प्रबल प्रताप सिंह लाइव इंडिया न्यूज चैनल में बतौर मैनेजिंग एडिटर जुड़ने  वाले हैं. उन्हें लाइव इंडिया ग्रुप से जुड़ने को लेकर आधिकारिक पत्र प्राप्त हो चुका है. सूत्रों  के मुताबिक प्रबल कल मैनेजिंग एडिटर का कार्यभार संभाल लेंगे. इसके पहले प्रबल  आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर हुआ करते थे. युद्ध के मोर्चों पर रिपोर्टिंग के  कारण चर्चित हुए प्रबल प्रताप सिंह के बारे में माना जाता है कि वे पत्रकारिता के प्रत्येक  क्षेत्र पर भरपूर पकड़ रखते हैं.

आर्थिक तंगी से परेशान कैमरामैन ने जान देने की कोशिश की, हालत गंभीर

जानकारी मिली है कि कैमरामैन बालादत्त धानी ने बीती रात आत्महत्या करने की कोशिश की. उन्हें गंभीर हालत में गाज़ियाबाद के यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. उनकी हालत गंभीर बतायी जाती है. सूत्रों के मुताबिक़ आर्थिक तंगी और घरेलू दिक्कतों की वजह से बालादत्त धानी आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठाने को मजबूर हुए.

पत्रकार प्रज्ञा पाठक के जीपी मास मीडिया संस्थान की शुरुआत बारह से

पत्रकार प्रज्ञा पाठक अब उद्यमिता की तरफ कदम बढ़ा चुकी हैं. वे जीपी मास मीडिया नामक एक संस्थान शुरू करने जा रही हैं. इसका शुभारंभ 12 सितंबर को किया जाएगा. यह संस्थान नोएडा के सेक्टर छह में है. प्रज्ञा जीपी ग्रुप की सर्वेसर्वा हैं और यह ग्रुप मीडिया संस्थान के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में कदम बढ़ाने को तैयार है. प्रज्ञा पाठक की तरफ से 12 सितंबर के आयोजन के लिए जो विज्ञप्ति जारी की गई है, वह इस प्रकार है…

भक्‍त पत्रकार और नरेंद्र मोदी की काल्‍पनि‍क मुलाकात

पाठकों की सुवि‍धा के लि‍ए पत्रकार का नाम हम महर्षि रख लेते हैं। महर्षि ने दो दि‍न पहले ही फेसबुक पर घोषणा कर दी थी कि मोदी आ रहे हैं, बहुत दि‍नों बाद उनसे मि‍लना हो रहा है। (हालांकि मोदी की ओर से उन्‍हें टाइम नहीं दि‍या गया था, इसलि‍ए डर भी लग रहा था कि मोदी उनका हाल आसाराम वाला न कर दें)

मुंबई से हिंदी-अंग्रेजी में लांच होगा ‘अब्सलूट इंडिया’ अखबार, द्विजेन्द्र तिवारी संपादक और अजय गर्ग आरई

मुम्बई। जैसे जैसे चुनाव समीप आ रहे हैं, देश में नए अख़बार और न्यूज़ चैनलों की बाढ़ आ रही है। मुंबई में हिंदी और अग्रेजी का एक नया अख़बार आ रहा है। पिछले दिनों इस अख़बार के हिंदी और अंग्रेजी एडिशन के लिए नवभारत टाइम्स और मुम्बई मिरर में वैकंसी निकली गयी थी। इन दिनों दोनों अखबारों के लिए इन्टरव्यू चल रहे हैं। हालाँकि विज्ञापन में अख़बार का नाम नहीं दिया गया था।

आनंद हुड्डा बने ‘खबरें अभी तक’ के चैनल हेड

गुड़गांव : विनोद मेहता के जाने के बाद 'खबरें अभी तक' चैनल को नया प्रमुख मिल गया है। हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार आनंद हुड्डा इसके चैनल हेड और कार्यकारी संपादक की भूमिका में नजर आएंगे। वे पहले इस चैनल के साथ बतौर विशेषज्ञ जुड़े हुए थे। उन्होंने गुड़गांव में यह जिम्मेदारी संभाल ली है। आनंद हुड्डा दो दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में हैं। मूलरूप से रोहतक के रहने वाले हुड्डा को हरियाणा का पहला न्यूज बुलेटिन लाने का सौभाग्य हासिल है। हरियाणा दर्पण नाम से यह न्यूज बुलेटिन जैन टीवी पर प्रसारित होता था। संभवत यही ऐसा पहला न्यूज बुलेटिन था, जो हरियाणा पर आधारित था।

डंके की चोट पर बोलने का दावा करने वाले अब डरपोक क्यों हो गए!

डंके की चोट पर बोलने का दावा करने वाला आईबीएन7 न्यूज़ चैनल डरपोक हो गया है जो अपने मुजफ्फर नगर के शहीद हुए पत्रकार को स्ट्रिंगर कहकर उसका भद्दा मजाक कर रहा है.  यूपी के मुजफ्फर नगर जिले में अपनी संस्था आईबीएन7 नेशनल न्यूज़ चैनल के लिए कुर्बानी देने वाले शहीद पत्रकार भले ही अपने संस्थान आईबीएन7 के लिए डंके की चोट पर काम करने का दावा करता रहा हो लेकिन मुजफ्फर नगर दंगे की एक्सक्लूसिव व सनसनीखेज कवरेज करने के चक्कर में इमानदार और तेजतर्रार पत्रकार को उसकी अपनी ही संस्था आईबीएन सेवेन ने स्ट्रिंगर और फ्रीलांस जर्नालिस्ट कहकर उसका और उसके जैसे तमाम ईमानदार और संस्था के प्रति जिम्मेदार पत्रकारों के साथ भद्दा मजाक किया है.

कैमरामैन ने पत्रकार राजेश वर्मा की मौत के एक-एक पल को अपने कैमरे में कैद किया है!

मीडिया के एयर कंडीशन्ड स्टूडियो में भांग पीकर हिस्टीरियाई अंदाज में चिल्लाने वाले दलालों मठाधीशो को ये नहीं भूलना चाहिए कि जिन खबरों को ये मसाला मारकर चाशनी में डुबाकर सारा दिन स्टूडियोज में खेलते रहते हैं और बाकी वक्त किसी महिला एंकर को अपनी आंखों से नापते जोखते रुदालिया करते रहते हैं, वो खबर किसी दूर दराज के स्ट्रिंगर राजेश वर्मा जैसे लोग अपनी जान की बाजी लगाकर लाते हैं..

भास्कर रीजनल मार्केटिंग, पंजाब से जसवंत सहारन और रवींदर पाल सिंह ने इस्तीफा दिया

लगभग छह वर्षों से दैनिक भास्कर, अमृतसर के साथ जुड़े और रीजनल हेड मार्केटिंग के पद पर कार्यरत जसवंत सहारन ने संस्थान को अलविदा कह दिया है. उन्होंने लुधियाना में दैनिक जागरण के साथ नई पारी की शुरुआत की है. जसवंत श्रीगंगानगर के रहने वाले हैं.

दैनिक जागरण, दिल्ली के आईटीओ आफिस के कई रिपोर्टरों का दायित्व बढ़ा, ट्विटर-एफबी छिना

दैनिक जागरण के दिल्ली स्थित आईटीओ आफिस से खबर है कि यहां कई रिपोर्टरों के कार्य का दायित्व बढ़ा दिया गया है. इन्हें अब लोकल रिपोर्टिंग की जगह स्टेट ब्यूरो में ले लिया गया है. ये अब स्टेट लेवल की रिपोर्टिंग का काम करेंगे. सूत्रों के मुताबिक प्रदीप कुमार सिंह, पवन कुमार, मृदुलिका झा को लोकल से हटाकर स्टेट ब्यूरो में कर दिया गया है. एक अन्य सूचना के मुताबिक आईटीओ आफिस से प्रबंधन ने सभी कंप्यूटरों से फेसबुक और ट्विटर हटा दिया है.

सत्य हमेशा व्याख्याओं पर निर्भर करता है : प्रियदर्शन

आगरा। ‘कल्पतरु एक्सप्रेस’ के हर माह आयोजित होने वाले मीडिया विमर्श की सातवीं शृंखला के अंतर्गत एनडीटीवी-इंडिया के वरिष्ठ संपादक प्रियदर्शन ने कहा कि भाषा हमारे सरोकार से बनती है और सरोकार कोई भारी शब्द नहीं, यह चीजों और स्थितियों के साथ हमारे जुड़ाव से पैदा होता है। इसके बिना खबर बेजान और मृत हो जाती है। सरोकारी पत्रकारिता के लिए मूल शर्त है कि सामने का समाज आपको आंदोलित करता हो।

पत्रिका प्रबंधन पत्रकारों को राजस्थान सरकार से नहीं लेने दे रहा फ्री का लैपटॉप

: पत्रिका को अब पता लगा, यह सरकार की अखबारों को प्रभावित करने की चाल है : विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पत्रकारों को खुश करने की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुहिम राजस्थान पत्रिका के मालिकों को रास नहीं आ रही है। यह और बात है कि यह दोगली नीति पत्रकारों को उनके खिलाफ ही खड़ा होने के लिए उकसा रही है। दोगली कैसे यह आप आगे समझ जाएंगे। गहलोत ने पत्रकारों के लिए पेंशन, इलाज और प्लॉट के बाद लैपटॉप बांटने की नीति अपनाई है। इसकी घोषणा गहलोत पिछले बजट में कर चुके थे। पहले चरण में राज्य सरकार से अधिस्वीकृत पत्रकारों को लैपटॉप बांटना तय हुआ। सबसे पहला नंबर जयपुर का आया। अगले चरण के लिए जनसंपर्क अधिकारियों से उनके जिले के अधिस्वीकृत पत्रकारो की सूची मंगवा ली गई है।

अखिलेश यादव के नाम खुला पत्र

उत्तर प्रदेश एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा है|  इस भेद- भाव की दीवार ने इस बार पश्चमी उत्तर प्रदेश को चुना है| ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है की आखिर बार बार क्यों उत्तर प्रदेश में ही ये हिंसा हो रही है जबकि अखिलेश सरकार बार बार इससे निपटने में विफल है| अखिलेश जी चुनाव जितने के बाद जब आपकी ताजपोशी मुख्यमंत्री के रूप में हुई थी तो सूबे की जनता को आपसे बहुत उम्मीद थी| आपकी सरकार पहली बार पुरे बहुमत से सत्ता में आई थी| 

रमेश नाचीज़ के ग़ज़ल संग्रह ‘अनुभव के हवाले से’ का इलाहाबाद में विमोचन

इलाहाबाद। अकबर की शायरी में आज का समाज बोलता है। अकबर ने अपने दौर में समाज में होने वाली बुराइयों को पहले ही पहचान लिया था, वो सारी चीज़ें आज हमारे सामने आ रही हैं। इसलिए उनकी शायरी को आज के दौर में रेखांकित किये जाने की ज़रूरत है।

अखबार नहीं घुसने दिया तो दैनिक जागरण वालों ने मुजफ्फरनगर के डीएम को तानाशाह लिखा

कुछ लोगों का कहना है कि दैनिक जागरण एकपक्षीय खबरें छापता है और खासकर हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने का काम करता है, इसलिए इस अखबार पर दंगों के दौरान पाबंदी पूरी तरह उचित है. इस पाबंदी से बौखलाए दैनिक जागरण के लोगों ने मुजफ्फरनगर के डीएम को तानाशाह करार दिया है और अखबार न बेचे देने को मीडिया पर सेंसरशिप के विशेषण से नवाजा है.. ये वो खबर है जो दैनिक जागरण की वेबसाइट पर फ्लैश हुई है…

मुजफ्फरनगर में चिंगारी क्यों बनी शोला?

मुजफ्फरनगर के कवाल में 27 अगस्त को हुई मामूली घटना पर एक युवक की हत्या और उसके बाद दो युवकों को मार देने की घटना इतनी बड़ी नहीं थी कि पुलिस और प्रशासन उससे नहीं निपट सकता था। न जानें क्यों धीरे-धीरे सुलगती आग को शोला बनने का इंतजार किया गया, जिसका नतीजा यह है कि आज मुजफ्फरनगर ही नहीं, उसके आसपास का क्षेत्र जंग का मैदान बन गया है। सेना बुलानी पड़ी है। हालात बहुत संगीन हैं।

टीवी टुडे नेटवर्क में पुराने लोगों की छंटनी के बाद अब भर्ती का दौर, कई लोग आए (देखें लिस्ट)

टीवी टुडे नेटवर्क में नये चेहरों की भर्ती होने लगी है। एक तरफ तो प्रबंधन छंटनी और कॉस्ट कटिंग का नाम लेकर लोगों को निकाल रहा है वहीं दूसरी तरफ आए दिन नयी भर्तियां भी की जा रही हैं। HR की तरफ से एक मेल जारी कर नए लोगों की ज्वायनिंग के बारे में जानकारी दी गई है। ये हैं, दीपक मेनन, सीमी पाशा, कुमारजीत सेनगुप्ता, मनोहर रेड्डी, अपर्ना पसालकर और साखी देशपांडे. इनके बारे में डिटेल जानकारी इस प्रकार है…

नईदुनिया मुंबई से अजय का इस्तीफा, दबंग दुनिया जाएंगे ललित उपमन्यु!

दबंग दुनिया के छोटे से कार्यकाल के बाद पंकज मुकाती ने प्रभात खबर पटना में बतौर रेजीडेंट एडिटर ज्वाइन किया है। पंकज दबंग से पहले अमर उजाला इलाहाबाद के संपादक थे। वहां से इस्तीफा देकर उन्होंने दबंग ज्वाइन किया था। खबर है कि दबंग दुनिया से महेश लिलोरिया का हनीमून पीरियड भी खत्म हो गया है। उन्हें भोपाल भेजे जाने की तैयारी है। उनकी जगह भास्कर से साइड लाइन किए गए ललित उपमन्यु को संपादक बनाए जाने की खबर है।

पत्रकारिता के इस प्लांटवादी दौर में कोई भी पत्रकार सुरक्षित नहीं है

Alok Nandan : प्लांटवादी का मीडिया का का एक खतरनाक चेहरा यह भी है कि वह जमीनी स्तर पर लोगों से हाड़तोड़ काम तो लेता है लेकिन उसकी जिम्मेदारी नहीं लेता…राजेश वर्मा आन स्पाट मारा गया…एक पत्रकार के लिए निसंदेह एक शहीद की मौत है यह….प्लांटवादी मीडिया उसकी मौत को रुटीन मौत की तरह लिया… वह भी काफी थूथू के बाद….

यूपी में अखिलेश सरकार के राज में अब तक तीस सांप्रदायिक दंगे, कहां है तीस्ता, अरुंधती, शबनम हाशमी, संदीप पांडे, अशोक वाजपेयी, राजेंद्र यादव…?

संजीव सिन्हा : उत्तर प्रदेश में 30 सांप्रदायिक दंगे। सौ से अधिक लोगों की हत्या। ये कैसा समाजवाद? मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव प्रशासन को संभालने में पूरी तरह विफल। उन्हें मुख्यमंत्री पद से अविलंब बर्खास्त करो। कहां बिल में छुपे हैं साम्प्रदायिकता विरोधी अभियान के कर्ता-धर्ता? कहां है तीस्ता, अरुंधती, शबनम हाशमी, संदीप पांडे, अशोक वाजपेयी, राजेंद्र यादव…….. ? क्यों नहीं कोई हस्ताक्षर अभियान चल रहा है और शांति मार्च निकल रहा है?

आईबीएन के शहीद रिपोर्टर के परिजनों के लिए इंडिया टीवी के कापड़ी और समाचार प्लस के उमेश पैसा जुटा रहे, आईबीएन वाले आशुतोष और राजदीप चुप्पी साध रहे

Yashwant Singh : विनोद कापड़ी, उमेश कुमार समेत कई पत्रकार साथियों ने स्व. राजेश वर्मा के परिजनों की मदद के लिए कोष जुटाने का अभियान शुरू कर दिया है लेकिन जिस चैनल के पत्रकार थे राजेश वर्मा, उस चैनल के संपादक लोग- राजदीप और आशुतोष – चुप्पी साधे हुए हैं…

जेल से लौटने के एक साल और विनोद कापड़ी समेत कइयों के हालचाल

Yashwant Singh : जेल से लौटे एक साल पूरे हो गए. विनोद कापड़ी और साक्षी जोशी को याद कर लेना चाहता हूं कि इन माननीयों के सौजन्य से जीवन के अनुभवों में कुछ बेहद संवेदनशील और सीखने लायक पल, अनुभव जुड़े. पिछले एक सालों के दौरान एक चीज महसूस किया कि विनोद कापड़ी में काफी बदलाव आ चुका है.

उत्‍पीड़न के खिलाफ झांसी के पत्रकारों ने डीएम को ज्ञापन सौंपा

झाँसी में पत्रकारों के लगातार उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में इलेक्ट्रानिक मीडिया क्लब ने डीएम को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही कई अन्य पत्रकार संगठनों के लोग भी जिलाधिकारी कार्यालय ज्ञापन देने पहुंचे। ज्ञापन में जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया है कि इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकार महीने से पुलिस और प्रशासन की मनमानी कार्रवाई से परेशान हैं।

रजनीश ने हिंदुस्‍तान तथा रामानुज ने जनसंदेश टाइम्‍स ज्‍वाइन किया

दैनिक जागरण, लखनऊ से खबर है कि रजनीश रस्‍तोगी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे मेडिकल बीट कवर करते थे. रजनीश ने अपनी नई पारी लखनऊ में ही हिंदुस्‍तान के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां भी मेडिकल बीट की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. हिंदुस्‍तान के साथ यह उनकी दूसरी पारी है. हिंदुस्‍तान से इस्‍तीफा देकर ही वे दैनिक जागरण पहुंचे थे.

स्‍वतंत्र भारत : मालिक लूटे मजा, कर्मचारी काटे सजा

लखनऊ। एग्रो पेपर मोल्डस लिमिटेड जगदीशपुर, एग्रो फाइबर जगदीशपुर, एग्रो पेपर एंड पल्प, एग्रो फाइनेंस एवं प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की नींव पर हुई थी। यही वजह है की चारों कम्पनियां दम तोड़ चुकी है। जहां इन कम्पनियों पर सरकारी और गैर सरकारी वित्तीय संस्थाओं का करोड़ों रुपए बकाया है वहीं निवेशकों का पैसा भी डूब गया है। जबकि इन कम्पनियों का मालिक विलासतापूर्ण जीवन जी रहा है।

प्यार सिखाने वाले बस्ते मज्हब के स्कूल गये…

चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल… सड़कों पर दौड़ती दंगाईयों की भीड़, औरतों की चीख पुकार, मासूम बच्चों के रोने की आवाजें, इससे सहज ही किसी सांप्रदायिक हिंसा का अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल ये नहीं सांप्रदायिक बवाल आखिर क्यों हुआ? सवाल ये है कि उसे रोकने में प्रशासन विफल क्यों हुआ? क्योंकि इस हिंसा के होने के कयास तो काफी समय से लगाये जा रहे थे… अब से लगभग दो महीने पहले कैराना में हुई एक कॉल गर्ल के साथ छेड़खानी की घटना भी काफी गरमायी थी जिसमें भाजपा विधनामंडल दल के नेता हुकुम सिंह और विधायक सुरेश राणा ने उस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।

वो ख़ुदा का फरिश्ता वहां था… तो आज मैं ज़िंदा हूं.

सितंबर का महीना था. डीयू के कॉलेजों में हर बार की तरह छात्र-संघ चुनाव की तैयारियां जोरों-शोरों पर चल रही थी. हम भी कॉलेज छात्र-संघ चुनाव में सक्रिय थे. इस दौरान कॉलेज प्रशासन की तरफ से चुनाव और कैंडिडेटों को लेकर धांधली करने की ख़बरें आनी लगी. हालांकि ये धांधलियां नई नहीं थी. कॉलेज पहले भी चुनावों में अपनी मनमानी चलाता आया था. लेकिन इस बार चुप बैठना ठीक नहीं समझा. जर्नलिज्म का स्टूडेंट होने से दिल में जज्बा और ज़ोश उमड़ा तो सोशल वर्क के दोस्त कृष्ण गोपाल सिहं ने क़ानूनी रास्ता दिखाया. दोनों ने कॉलेज प्रशासन के ख़िलाफ दिल्ली हाईकोट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया.

दैनिक भास्कर, नागपुर के पत्रकार संजय देशमुख से संजीव चंदन की बातचीत सुनें (संदर्भ- वर्धा, वीएन राय और उत्पीड़न)

Sanjeev Chandan : दैनिक भास्कर के नागपुर एडिशन के प्रांतीय डेस्क के इंचार्ज संजय देशमुख से मेरी बातचीत का यह ऑडियो है. सुनिए कि कैसे दैनिक भास्कर में क्राइम रिपोर्टिंग या कोर्ट की रिपोर्टिंग थर्ड पार्टी के प्रेस नोट पर की जाती है… बिना वेरिफिकेशन के… बिना काउंटर चेक के… है न दवाब / लाभ / लोभ की पत्रकारिता …. दैनिक भास्कर की जमात से एक बन्दा हिंदी विवि में हिंदी अधिकारी बना है, इसी लाभ-लोभ की पत्रकारिता करते हुए…. सुनिएं टेप…


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मुजफ्फरनगर में अखबार नहीं बंटने दिया गया, फेसबुक से अफवाहों को पंख लग रहे

Yashwant Singh : मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने अखबार नहीं बंटने दिया. फेसबुक से अफवाहों को पंख लग रहे हैं और स्थिति जटिल होती जा रही है… सेना के हाथ में मुजफ्फरनगर को सौंप दिया गया है… मीडिया वालों सबसे ज्यादा परेशान किए जा रहे… मृतकों की ठीक ठीक संख्या के बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा… हालात बेहद गंभीर हैं…

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मिश्र : जिन्होंने बहुतों को लिखना सिखाया, उन्हें खुद आज फिर से बोलना सीखना है

Ramkrishna Dongre :  स्‍थान- A-325 (चतुर्वेदी साहब का मकान), सेक्टर-31, नोएडा (यूपी)। तारीख- 7 सितंबर, 2013। समय- शाम 5 से पौने छह बजे के बीच का। कभी उन्होंने मुझ जैसे कई युवाओं को पत्रकारिता की एबीसीडी सिखाई थी। आज हमारी बारी है कि हम उन्हें बोलना सिखाएं। या कहें कि उन्हें बोलने के लिए प्रेरित करें। मैं बात कर रहा हूं अखबारी दुनिया की जानी-मानी शख्सियत और वरिष्ठ संपादक गिरीश मिश्र जी की।

दंगे में मारे गए दोनों पत्रकारों से जुड़ी एक-एक खबर ईटीवी पर ब्रजेश मिश्रा ने चलवाई… उन्हें सलाम

Syed Husain Akhtar : ईटीवी उत्तर प्रदेश उत्तराखंड के समाचार संपादक और समन्वयक जनाब ब्रजेश मिश्रा को सलाम है.. मुज़फ्फरनगर की घटना में पत्रकारों की मौत के बाद जब सभी चैनल टीआरपी बटोरने में लगे थे तब वो कंट्रोलरूम में बेचैन टहेल रहे थे… लीक से हट कर वो एक-एक पट्टी चलवा रहे थे… मेरे पास फ़ोन आ रहे थे, 'बहुत बुरा हुआ मुज़फ्फरनगर में, आईबीएन का संवाददाता मार दिया गया, लेकिन उससे ज्यादा अफ़सोस इस बात का कि ईटीवी के अलावा कोई दिखा नहीं रहा'.

तब राजेश वर्मा आपका संवाददाता था आज जब वो मर गया तो ‘स्ट्रिंगर’ हो गया!

Prakhar Shrivastava :  कर्म की बलबेदी पर एक टीवी पत्रकार शहीद हुआ लेकिन जानते हैं खुद उसके चैनल ने उसे क्या तमगा दिया “स्ट्रिंगर”…. आईबीएन 7 पर ब्रेकिंग चली – “स्ट्रिंगर” राजेश वर्मा की दंगों में मौत हो गई…. एंकर ने भी कहा “स्ट्रिंगर” राजेश वर्मा की मौत हो गई… क्यों भाई..जब खबरों पर राजेश का फोनो लेते थे तब उसे “स्ट्रिंगर” क्यों नहीं कहते थे, जब राजेश वर्मा की स्टोरी पर साइन ऑफ आता था उसमें “स्ट्रिंगर” क्यों नहीं लिखा होता था… तब राजेश वर्मा आपका संवाददाता यानि रिपोर्टर था आज जब वो मर (शहीद) गया तो “स्ट्रिंगर” हो गया… शर्मनाक है, बेहद शर्मनाक…

दैनिक जागरण के पत्रकार सत्येंद्र पांडेय का इलाहाबाद में निधन

दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र पांडेय का आज इलाहाबाद में निधन हो गया.. बताया जा रहा है कि पांडेय कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे.. वे किडनी की बीमारी से पीड़ित थे.. पांडेय ने देहरादून लखनऊ सहित तमाम जगहों पर लंबे समय तक पत्रकारिता की थी..

आशुतोष और आईबीएन7 चैनल राजेश वर्मा के आश्रितों को नौकरी के साथ 50 लाख की आर्थिक सहायता दें

Saleem Saifi : मीडिया के टॉप बोस्सेस ने उत्तर प्रदेश की आई.ए. एस अधिकारी दुर्गा नागपाल को सुपर हॉट टी.आर.पी के तौर पर इस्तेमाल कर डाला था मगर हमारे पुराने साथी और होनहार पत्रकार राजेश वर्मा की हत्या को स्क्रॉल में बड़ी ही मुश्कील से जगह दी… आखिर क्यों ..क्या एक जमीनी फील्ड पत्रकार की हसियत एक स्क्रॉल से भी कम है….. मुज़फ्फरनगर से आई.बी.एन 7 चैनल को अपनी सेवाए देने वाले होनहार पत्रकार राजेश वर्मा की हत्या पर मीडिया बॉस आशुतोष और आई.बी.एन.7 चैनल की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती..

‘ब्रेकिंग न्यूज’ कंटेंट नहीं है एक पत्रकार की हत्या!

मुजफ्फरनगर जिले में हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते ही जा रहे हैं| पुलिस विभाग के मुखिया यहाँ का दौरा कर गये, कई वरिष्ठ अधिकारी भी डेरा जमाये बैठे रहे लेकिन इसके बावजूद यहाँ भड़की हिंसा में छः लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा जिनमे वहाँ कवरेज कर रहे आईबीएन7 के पत्रकार राजेश वर्मा और एक फोटोग्राफर इसरार अहमद का नाम भी शामिल है|

विनोद कापड़ी ने स्व. राजेश वर्मा के परिजनों के लिए कोष जुटाने का अभियान शुरू किया

Vinod Kapri India : Support Rajesh Verma – अपने एक साथी राजेश वर्मा की असमय मृत्यु ने सबको झकझोर के रख दिया है, परिवार तो मानो टूट गया है। अभी पता िकया तो जानकारी मिली कि राजेश के बाद उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बिटिया है..दोनो अभी इस स्थिति में नहीं हैं कि घर की जिम्मेदारी उठा सकें… क्या हम सब मित्र मिल कर राजेश के लिए कुछ नहीं कर सकते ? 10000 की राशि से मैं एक (राजेश वर्मा कोष) शुरू करना चाहता हूं…लक्ष्य है कम से कम 5 लाख रुपये.

इंडिया न्यूज की लंबी छलांग, इंडिया टीवी ने नंबर दो से भी हाथ धोया

पैंतीसवें हफ्ते की टीआरपी का अगर विश्लेषण करें तो दो महत्वपूर्ण बदलाव नजर आते हैं. पहली तो ये कि नंबर दो पर लगातार कब्जा जमाए रखने वाले इंडिया टीवी की हालत खराब होती जा रही है. एबीपी न्यूज ने खुद को नंबर दो की कुर्सी पर काबिज कर रखा है और इंडिया टीवी तीसरे दर्जे का चैनल बनने को मजबूर हो गया है. दूसरा बड़ा बदलाव इंडिया न्यूज के लेवल पर है.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी सबसे आगे, 23 सीटें मिलने के आसार

Yashwant Singh : लीजिए, मेरी पार्टी तो दिल्ली में सबसे आगे है.. एक मैसेज आया है, आप भी पढ़ लें… Delhi chunav par HT agency ka survey: Kejriwal ki Aam Admi Party (AAP)- 33 seat, BJP-23 seat, Congress- 11 seat, others- 3seat. Iss msg ko khub frwrd karo .. (यह मैसेज 08144071142 मोबाइल नंबर से भेजा गया है).

राजदीप सरदेसाई जी, सिर्फ आरआईपी से काम नहीं चलेगा, परिवार के लिए कुछ करें

Shravan Kumar Shukla : राजदीप सरदेसाई आईबीएन7 के स्ट्रिंगर के मुजफ्फरपुर दंगे में मारे जाने की घटना पर व्यथित हैं, क्या उन्हें और आईबीएन को नहीं चाहिए कि वह उक्त 'स्ट्रिंगर' के परिवार के लिए 'कुछ' व्यवस्था करे? या आर.आई.पी . लिख देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है?

हम जानना चाहते हैं कि आईबीएन चैनल राजेश के परिवार को क्या आर्थिक सहयोग करने जा रहा है

Chandan Srivastava : आखिरकार आईबीएन-7 ने अपने "स्ट्रिंगर" राजेश वर्मा को अपना "स्ट्रिंगर" मानते हुए खबर तो चला दी. सवाल है कि खबर मे राजेश को "संवाददाता" ना कहकर "स्ट्रिंगर" कहने की चैनल की मंशा क्या है? बिल्कुल राजेश चैनल के "स्ट्रिंगर" ही थे लेकिन जिस शब्द का मतलब आम व्यक्ति को पता ही ना हो उसी शब्द का यूज आखिर चैनल क्यों कर रहा है? "संवाददाता" कहने मे चैनल को क्या तकलीफ है? राजेश ने चैनल के लिए कवरेज करते हुए जान दी, हम जानना चाहते हैं कि चैनल राजेश के परिवार को क्या आर्थिक सहयोग करने जा रहा है?

मायावती के राज में किसी जिले में दंगे में छह लोग मरे हों, याद नहीं आता

Sanjay Sharma :  मुजफ्फरनगर नगर में दस दिन से तनाव चल रहा था और आज हिंसा में 6 लोगों की मौत हो गई जिसमें आईबीएन7 के पत्रकार साथी राजेश वर्मा भी शामिल हैं. दो महीने के भीतर यह पांचवें पत्रकार की हत्या है. दस दिन तक तनाव होने के बाबजूद अगर पुलिस के अफसर हालत नहीं सम्हाल पाए तो फिर उनकी जरूरत ही क्या है? अगर कानून व्यवस्था का यह हाल है तो इस प्रदेश का भगवान ही मालिक है.

मुजफ्फरनगर में दो मीडियाकर्मियों समेत छह की हत्या, कर्फ्यू (देखें राजेश वर्मा की तस्वीरें)

वेस्ट यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में दो समुदायों के बीच पिछले एक सप्ताह से सुलग रही हिंसा की चिंगारी ने आज बड़ा रूप ले लिया. शहर कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला अबूपुरा में आईबीएन-7 के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई. हिंसा में अन्य स्थानों पर भी पांच अन्य लोगों की मौत हो गई है. बताया जाता है कि हिंसा में एक फोटोग्राफर इसरार अहमद की भी मौत हो गई. इस साम्प्रदायिक हिंसा में कई अन्य जगह भी लोगों के मरने व भारी मात्रा में घायल होने की सूचना मिल रही है. जनपद में जगह-जगह हो रही हिंसक घटनाओं में जानमाल का काफी नुकसान हो रहा है. जिला प्रशासन ने नगर के तीनों थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाने के साथ ही पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों की गश्त तेज कर दी है. 

मुजफ़्फ़रनगर उपद्रव कवर कर रहे पत्रकार की मौत का जिम्मेदार कौन?

Anil Bhardwaj : मुजफ़्फ़रनगर में एक दर्दनाक हादसा। IBN-7 के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गयी। वह मुजफ़्फ़रनगर के अबुपुरा में कवरेज करने गये थे। राजेश एक दिलेर, जुझारु और होनहार पत्रकार थे। सुहेब इलियासी के 'इंडियाज मोस्ट वांटिड' से उन्होंने पत्रकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रभु उनके परिवार को इस दुख: को सहने की हिम्मत प्रदान करे। मुजफ़्फ़रनगर में उपद्रव के दौरान कवरेज पर गये पत्रकार की मौत का जिम्मेदार कौन??? उपद्रव को रोक पाने में नाकामयाब अधिकारियों को तुरन्त हटाया जाना चाहिये। अखिलेश सरकार से मांग है कि पत्रकार राजेश वर्मा की पत्नी को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिये।

इस मौत पर आज आप कोई समाचार ना सुने तो यह पत्रकारिता के दोगलेपन की मिसाल होगी

Mukesh Kumar 'Gajendra' : मुजफ्फरनगर से एक पत्रकार साथी ने अभी-अभी फोन पर बताया है कि IBN7 के एक पत्रकार को दंगाइयों ने गोली मार दी है। वहां के हालात बहुत ही खराब हैं। पुलिस-प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि उनके हाथ बंधे हुए हैं। सचमुच यूपी में जंगलराज कायम हो चुका है।

आईबीएन7 अपने पत्रकार की हत्या की खबर नहीं चला रहा, शेम शेम

Yashawnt Singh : मुजफ्फरनगर में कर्फ्यू तक लगा दिया गया. दंगे के दौरान गोली मार कर आईबीएन7 के पत्रकार की हत्या कर दी गई. लेकिन यह सब आईबीएन7 चैनल पर ही प्रसारित नहीं हो रहा. आईबीएन7 से जुड़े पत्रकारों में गहरी नाराजगी है. अब तो आईबीएन7 के जिले जिले के स्ट्रिंगर / रिपोर्टर भी अपने संपादकों को दलाल और हिजड़ा तक कहने लगे हैं. मुजफ्फरनगर में आईबीएन7 के रिपोर्टर राजेश वर्मा की दंगाइयों द्वारा गोली मार कर हत्या किए जाने की खबर टिकर पर ईटीवी व सीएनएन-आईबीएन चला रहे लेकिन आईबीएन7 पर यह खबर फ्लैश नहीं हुई.

‘नास्तिक टीवी’ लाने का गेम प्लान तैयार है, कोई पैसा लगाए : स्वामी बालेंदु

Balendu Swami : मेरे दिमाग में बहुत दिनों से आइडिया है एक नास्तिक टीवी चैनल का जिसमें रेशनल विचार और अन्धविश्वास के खिलाफ जागरूकता लाने वाले तथा रुढियों को तोड़ने वाले कार्यक्रम दिखाए जाएँ. इस देश में जहाँ मीडिया एक बहुत ही सशक्त माध्यम है अन्धविश्वास के प्रसार में!

दंगे में मारे गए पत्रकार राजेश के परिजनों को आईबीएन की तरफ से भरपूर मदद दी जाए

Saleem Saifi : आईबीएन 7 संवाददाता राजेश वर्मा की हत्या .. बड़े ही दुख की बात है कि हमारा काबिल और होनहार पत्रकार साथी राजेश वर्मा अब हमारे बीच नहीं रहा… वो मुज़फ़्फ़र नगर में आईबीएन7 का वरिष्ठ संवाददाता था… वर्मा की जान इंसानियत के दुश्मनों ने गोली मार कर ले ली है… अब ज़रूरत है इंसानियत के दुश्मनों को सख़्त से सख़्त सज़ा दिए जाने की…

आदित्य शुक्ला का हिंदुस्तान से इस्तीफा, अरविंद शर्मा का तबादला, संदीप प्रताप यूनिवर्सिटी से जुड़े

सीनियर सब एडिटर आदित्य शुक्ला ने हिंदुस्तान बरेली से इस्तीफा दे दिया है. वो लांचिंग के समय से ही हिंदुस्तान से जुड़े हुए थे. मेरठ के मवाना से सूचना है कि मवाना हिंदुस्तान कार्यालय में इंचार्ज का कार्यभार देख रहे अरविंद शर्मा को शिकायतों के चलते मेरठ डेस्क पर बुला लिया गया है. सोमवार को संपादक ने तत्काल डेस्क पर कार्यभार ग्रहण करने का आदेश अरविंद शर्मा को दिया है. चर्चा है कि अरविंद शर्मा शीघ ही हिंदुस्तान को अलविदा कह सकते हैं. 

कोलकाता के पत्रकार दिलीप गिरी को छंटनी फल गई, अपनी कंपनी बना भोजपुरी फिल्म शूट कर रहे

कोलकाता के दिलीप गिरी महुआ में हुआ करते थे. महुआ प्रबंधन ने आर्थिक बदहाली के बहाने पिछले साल इसी सितम्बर में कई पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. सैकड़ों पत्रकार बेरोजगार हुए. उनमें कुछ लोगों को रोजगार मिला और बहुत से लोग आज भी बेरोजगार हैं. ऐसे में इस बुरे वक्त का सामना कोलकाता के ब्यूरो चीफ रहे दिलीप गिरी को भी करना पड़ा था.

आईबीएन के स्ट्रिंगर को मुजफ्फरनगर में गोली मार दी, दंगाइयों को काबू नहीं कर पा रही पुलिस

वेस्ट यूपी के मुजफ्फर नगर जिले से सूचना आ रही है कि यहां हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और आज आईबीएन7 के एक स्ट्रिंगर राजेश वर्मा की दंगाइयों ने गोली मार कर हत्या कर दी. स्ट्रिंगर अशांत मुजफ्फर नगर में कवरेज कर रहा था. उसी दौरान कहीं से निशाना साध कर उसे गोली मार दी गई. इस बारे में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है.

”कल ऐसा लग रहा था जैसे दीमक चौर रसिया को हार्ट अटैक आने वाला है…”

Rameshwar Parkash  :  वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार ने इण्डिया न्यूज़ के पैनल पर बैठ कर इण्डिया न्यूज़ और दीपक चौरसिया का ही बलात्कार कर दिया… हा हा हा … सन्त आसाराम बापू के विरूद्ध बदले की भावना से पत्रकारिता कर रहे 'दीमक' चौर रसिया और उनकी टीम की कल उन्हीं के पत्रकार मित्र ने उनके पैनल पर बैठ कर पोल खोल के रख दी..  उन्होंने कहा कि पत्रकारिता हमें किसी पर आरोप लगाना नहीं सिखाती .. TRP की दौड़ में इण्डिया न्यूज़ ने सभी हदें पार कर दी..

आसाराम को लेकर परसनल हो रहे चैनल, कवरेज बंद करें

जोधपुर : नाबालिग से यौन दुराचार के आरोप में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद कथावाचक आसाराम के मामले की मीडिया द्वारा की जा रही कवरेज तथा जांच एजेसी द्वारा अनुसंधान के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां बाहर आने पर आपत्ति उठाते हुये स्थानीय अदालत मे एक अर्जी पेश की गई।  जिला एवं सत्र न्यान्यालय (जोधपुर ग्रामीण) के न्यायाधीश मनोज कुमार व्यास के समक्ष आसाराम के अधिवक्ता मनेन्द्र सिंह एवं प्रदीप चौधरी द्वारा पेश अर्जी मे कहा गया है कि इस मामले से संबंधित मीडिया द्वारा की जा रही कवरेज अधिकृत तथ्यों पर आधारित नहीं होती है तथा आसाराम के व्यक्तिगत जीवन के बारे में समाचारों का प्रकाशन और प्रसारण किया जा रहा हैं जिससे उनकी साख को काफी धक्का लगा है। 

फैसला आने से पहले ही मीडिया द्वारा आसाराम की छवि खलनायकों जैसा बनाना ठीक नहीं

निःसंदेह रूप से संत आसाराम दोषी हैं तो उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दी है. एक सच्चे लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति वह चाहे जितना भी ताकतवर हो, वह कानून से बड़ा नहीं हो सकता. उसे हर हाल में कानून का पालन करना ही होगा. लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं कि दोष सिद्ध होने से पहले ही किसी आरोपी को अपराधी मान उसके चरित्र की इस कदर हत्या कर दी जाए कि वह दोषमुक्ति के बाद भी समाज में सिर उठाकर जी न सके. जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक आरोपी को अपराधी मानने की इजाजत न तो कानून देता है और न ही समाज. यह नैसर्गिक न्याय के अनुकूल भी है. लेकिन त्रासदी है कि संत आसाराम के मामले में उल्टा हो रहा है. आसाराम पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही आश्रम के एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन शोषण किया.

ऋषभदेव शर्मा की छठी काव्यकृति ‘सूँ साँ माणस गंध’ लोकार्पित

हैदराबाद : ‘साहित्य मंथन’ और ‘श्रीसाहिती प्रकाशन’ के संयुक्त तत्वावधान में प्रो.एम.वेंकटेश्वर की अध्यक्षता में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में संपन्न एक भव्य समारोह में वरिष्ठ भाषाचिंतक प्रो.दिलीप सिंह ने कवि प्रो.ऋषभदेव शर्मा की छठी काव्यकृति ‘सूँ साँ माणस गंध’ को लोकार्पित किया. प्रो.दिलीप सिंह ने लोकार्पित पुस्तक की विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्यता की शाश्वत गंध, लोकतंत्र और सृजन की बेचैनी इसका केंद्रीय कथ्य है तथा इन कविताओं को  काव्य सौष्ठव की दृष्टि से श्रेष्ठ रचनाओं की पंक्ति में रखा जा सकता है. उन्होंने मृत्यु और रचना प्रक्रिया से संबंधित कविताओं को भी इस संग्रह की विशेष उपलब्धि माना.

बनारसी मीडिया के ‘राज ठाकरे’

मुंबई वाले राज ठाकरे और बनारस की मीडिया वाले राज ठाकरे, अलग अलग प्रान्तों की मिटटी से बने हुए लेकिन सोचने का तरीका एक सामान। बनारस में 'तोहार टीवी' के मालिक 'पतंग सिंह' से लेकर 'इंडियाना न्यूज़' के 'दीमक चौरसिया' तक के पीआरओ बैठे हुए हैं। इन पीआरओ के घर पैदा हुआ कोई भी बच्चा बेरोजगार नहीं रहता। अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित ,रखने के लिए पीआरओ समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में 'एक' जगह बचा के रखते हैं, ताकि जब इनका बच्चा 'नालायक' साबित हो तो उसे 'मीडियाकर्मी' बनाया जा सके। राज ठाकरे की कुर्सी के सबसे बड़े दावेदार 'तोहार टीवी' के पूर्व 'ब्यौरा चीफ' 'क्रिस डूबे' हैं जिन्होंने 'छनन-मनन' को भी पत्रकार बना दिया। अगर आप इनकी बिरादरी से 'बाहर' के हुए तो आपका सारा 'टैलेंट' जूते चप्पलों को सिलवाने में ही 'दी एंड' हो जायेगा। 

इन फोटोग्राफर साथियों के सम्मान में कुछ बातें

Shambhunath Shukla : 35 साल के अखबारी जीवन में मैने पाया कि हिंदी अखबारनवीसी में सबसे उपेक्षित पत्रकार फोटोग्राफर होते हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वो हर प्रेस कांफ्रेंस का फोटो लाएं, प्रेस नोट लाएं तथा चीफ रिपोर्टर का प्रजेंट भी ले आएं। इसी हिसाब से उसकी रोज की बीट तय की जाती है। पर जो सिर्फ फोटो जर्नलिस्ट होते हैं उनके साथ रिपोर्टर से लेकर ब्यूरो चीफ और संपादक तक सब बड़ा खराब व्यवहार करते हैं। उनकी फोटो छापी नहीं जाती अथवा रात बिरात उन्हें ऐसी कवरेज में लगाया जाता है जो सिर्फ खानापूरी होती है। संपादक चाहता है कि उसके बेटी-बेटी का एडमिशन फोटोग्राफर करवाए, चीफ रिपोर्टर चाहता है कि उसके घर का राशन पानी फोटोग्राफर भिजवाए और रिपोर्टर चाहता है कि ब्रीफिंग भी वही कर लाए। फिर भी कुछ फोटोग्राफर इतनी खराब स्थितियों में भी अदभुत फोटोग्राफी करते हैं। 

सैफई में सहकारी समिति के सचिव की हत्या से सनसनी

Dinesh Shakya : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव सैफई स्थित साधन सहकारी समिति के सचिव लाल सिंह यादव की हत्या से सनसनी फैल गई। सचिव का शव समिति के मैदान मे मिला,उनके शव के आसपास तमाम सरकारी कागज भी फटे हुये है। उनको पीठ मे गोली मारी गई है। मुख्यमंत्री के गांव मे हत्या की खबर मिलने के बाद मुख्यालय से एसएसपी समेत सभी पुलिस अफसर सैफई पहुंचे हुये है साथ ही उनके साथ खोजी कुत्तो का दल भी है लेकिन पुलिस को अभी कोई आरोपी नही मिल सका है।

मुजफ्फरनगर में अफसरों पर राजनीतिक फैसले थोपे जाने से दो समुदाय आमने-सामने आए

Dilnawaz Pasha : हममें से सबसे प्रतिभावान लोग प्रशासनिक सेवाओं में जाते हैं. इसमें कोई शक नहीं है कि वे बेहतर निर्णय लेने और किसी भी स्थिति को नियंत्रण में रखने की क्षमता रखते हैं. लेकिन इन अधिकारियों को निर्देशित किए जाने और इन पर राजनीतिक फ़ैसले थोपे जाने के नतीज़े बेहद घातक हो सकते हैं. मुज़फ़्फरनगर में यही हो रहा है.

वयोवृद्ध पत्रकार हरि दत्त पाठक का गाजियाबाद में निधन

गाजियाबाद : वयोवृद्ध पत्रकार हरि दत्त पाठक का वैशाली इलाके में एक इमारत की 12 वीं मंजिल पर स्थित अपने आवास से गिर जाने से निधन हो गया।  88 वर्षीय पाठक ने हिंदी के कुछ अखबारों के लिए काम किया था। उनके परिवार में उनकी पत्रकार पत्नी मनु हरि और दो बेटे और एक बेटी हैं। उनके दो में से एक पुत्र राकेश हरि पत्रकार हैं। पाठक जी के निधन पर मीडियाकर्मियों ने शोक जताया है।  (भाषा)

हाथ से सीवर और मल-मूत्र की साफ-सफाई करने वाली आबादी के जीवन से जुड़ी ख़बर क्‍लासिफाइड से भी छोटी

Rakesh Kumar Singh : कल लोक सभा में मैन्‍युअल एस्‍कवेंजिंग विरोधी बिल पारित हो गया. कोई ख़ास चर्चा-वर्चा नहीं हुई. ख़बरिया चैनलों ने इस ख़बर को चलाया या नहीं, नहीं मालूम. टाइम्‍स ऑफ़ इंडिया ने ज़रूर इसे जगह दिया. पेज नंबर 21 पर. ‘इंडिया डाइजेस्‍ट’ कॉलम में. बमुश्किल 80-90 शब्‍द!

हिंदुस्‍तान, देहरादून से मनीष देंगे इस्‍तीफा, तीन का तबादला, एक नोटिस पर

हिंदुस्‍तान, देहरादून से खबर है कि मनीष भट्ट इस्‍तीफा देकर अमर उजाला जा रहे हैं. वे यहां पर सिटी रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थे. अमर उजाला में उन्‍हें सीनियर रिपोर्टर बनाया जा रहा है. मनीष पिछले पांच सालों से हिंदुस्‍तान को अपनी सेवाएं दे रहे थे. मनीष के जाने से हिंदुस्‍तान में मैन पॉवर की कमी हो गई है. इसके पहले प्रबंधन ने यहां कार्यरत तीन लोगों का तबादला कर दिया था, जबकि एक पत्रकार नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं.

ब्रजेंद्र निर्मल एवं नितिन अग्रवाल ने कैनविज टाइम्‍स ज्‍वाइन किया

बरेली से खबर है कि हिंदुस्‍तान से इस्‍तीफा देने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार ब्रजेंद्र निर्मल ने अपनी नई पारी कैनविज टाइम्‍स के साथ शुरू की है. उन्‍हें वरिष्‍ठ पद पर लाया गया है. सूत्रों का कहना है कि ब्रजेंद्र को अखबार लांच करने की जिम्‍मेदारी दी गई है. वे इसके पहले बरेली में अमर उजाला तथा हिंदुस्‍तान को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पिछले दिनों उन्‍हें हिंदुस्‍तान में स्‍थानीय संपादक कुमार अभिमन्‍यु के साथ हुए विवाद के बाद इस्‍तीफा देना पड़ा था. उन पर संपादक पर कुर्सी तानने का आरोप लगा था. 

समरेंद्र रावत न्‍यूज एक्‍सप्रेस तथा हरिदत्‍त पंजाब की शक्ति से जुड़े

समरेंद्र रावत ने न्‍यूज एक्‍सप्रेस के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. उन्‍हें ओडिसा में न्‍यूज एक्‍सप्रेस का हेड बनाया गया है. वे ओडि़सा में चैनल की पूरी जिम्‍मेदारी संभालेंगे. इसके पहले प्रबंधन ने चैनल के विस्‍तार के लिए यूपी में योगेश मिश्र, बिहार में विकास झा, झारखंड में दीपक अंबष्‍ठ को अपने साथ जोड़ चुकी है. समरेंद्र ओडिसा के जाने माने टीवी पत्रकार हैं.

डीएनए के साथ चार लोगों ने शुरू की नई पारी

लखनऊ से प्रकाशित डीएनए से चार लोगों ने अपनी नई पारी शुरू की है. चारों को रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. श्रीटाइम्‍स, लखनऊ से इस्‍तीफा दे कर वीर सिंह यादव ने डेली न्‍यूज ऐक्टिविस्‍ट (डीएनए) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. इन्‍हें रिपोर्टर बनाया गया है. वीर इसके पहले दैनिक प्रभात को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

हिंदुस्‍तान, बरेली से एचआर हेड मोहित राजपूत एवं सर्कुलेशन हेड पराग शर्मा का इस्‍तीफा

हिंदुस्‍तान, बरेली से खबर है कि मोहित गुप्‍ता ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे एचआर हेड के पद पर कार्यरत थे. मोहित लंबे समय से हिंदुस्‍तान को अपनी सेवाएं दे रहे थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी टीवीएस के साथ रुद्रपुर से की है. इन्‍हें यहां भी एचआर में वरिष्‍ठ पद पर जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. मोहित हिंदुस्‍तान से पहले भी कई बड़े संस्‍थानों में कार्यरत रह चुके हैं.

स्टार विजय चैनल को नित्यानंद मामले में सात दिन तक माफीनामा चलाने के आदेश

: Nithyananda video –  Channel told to apologise to actress Ranjitha : New Delhi (PTI) : A self-regulatory body of television channels has asked a channel to apologise to actress Ranjitha Menon for showing "morphed" video clips which showed her in bad light with self-styled Godman Swami Nithyananda.

एआईएसएफ ने डीयू छात्रसंघ चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की

नई दिल्ली : ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव पदों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। अध्यक्ष पद के लिए तानिया गिल, उपाध्यक्ष के लिए शाहिद इकबाल और महासचिव पद के लिए अमनदीप उम्मीदवार होंगे।

पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ झांसी के डीएम को सौंपा ज्ञापन

झांसी में पत्रकारों के लगातार उत्पीडन की घटनाओ के विरोध में इलेक्ट्रानिक मीडिया क्लब ने डी एम को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही कई अन्य पत्रकार संगठनों के लोग भी जिलाधिकारी कार्यालय ज्ञापन देने पहुचे। ज्ञापन में जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया है कि इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकार  महीने से पुलिस और प्रशासन की मनमानी कार्रवाई से परेशान है। दैनिक जागरण के संपादक यशोवर्धन गुप्त, आज तक के संवाददाता अमित श्रीवास्तव और ए एन आई के पत्रकार शकील अली हाशमी के खिलाफ लगातार मुक़दमे दर्ज होने की कार्रवाई से जनपद के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। 

सिवान जिले के महाराजगंज प्रखंड में हुआ पत्रकार पर जानलेवा हमला

पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला. पीमसीएच रेफर. हालत नाजुक. नदारद रहे थाना पुलिस के जवान. नागरिकों की नहीं है कोई सुरक्षा. अज्ञात लोगों द्वारा किसी धारदार हथियार से हमला किया गया जिसमें राघवेन्द्र कुमार दब्बू बुरी तरह घायल हो गए. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी स्थिति को देखते हुए पीएचसी महाराजगंज से सिवान रेफर कर दिया गया. सिवान सदर अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद पटना पीमसीएच रेफर कर दिया गया. 

ढाब का मर्सियाः नाही हमरो कोई सहाय

वाराणसी। बाढ़ के चलते पूरी दुनिया से कटा ढाब क्षेत्र के 7 गांव की 40 हजार आबादी आजकल यही मर्सिया पढ़ रही है। न तो इनकी कोई सुनने वाला है और न ही इन्हें किसी भी तरह की अब तक कोई मदद पहुंची है। इसे कहते हैं दोहरी मार, कुदरत के निजाम की मार से बेहाल ढाब क्षेत्र के रेतापार मुस्तफाबाद के जनता सरकारी निजाम की भी मार झेलने के लिए अभिशप्त दिख रही है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित ढाब इलाके के दलित आबादी वाले इस गांव में अब तक सरकारी अफसरानों को झाकने तक की फुरसत तक नहीं मिली हैं।

पूर्वांचल में अनोखा क्यों है गाजीपुर जनपद, आइए जानें :)

जी हाँ! इसी मिट्टी के लाल हैं हम। हमें गर्व है इस बात पर कि हमें  प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े होने का गौरव प्राप्त है। गर्व के अलावा इस बात का डर भी है, खटका लगा रहता है कि कोई हमसे हमारा पिछड़ापन कहीं छुड़ा न लें। अगड़े बनने की हर कोशिश से हम बचते हैं, बल्कि करते ही नहीं, हमें अगड़े बनने से परहेज है तो बस इसलिए कि फिर हम पिछड़े नहीं रह पायेंगे, जो एकमात्र हमारे गौरव का कारण है। हम केन्द्र/प्रदेश सरकारों से रियायतें मांगते रहते हैं कि हमारे पिछड़ेपन का ध्यान रखा जाय। उद्योग धन्धे के लिए विशेष छूट भी मिलता है। (जैसा कि पिछड़े क्षेत्रों को देने का प्राविधान है।)

यूएनआई में करप्शन की सीबीआई जांच कराने को लेकर धरना-प्रदर्शन (देखें तस्वीरें)

समाचार एजेंसी यूएनआई की आर्थिक बदहाली खत्म करने और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराने को लेकर यूएनआई कर्मियों ने एक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया. इस आंदोलन और आयोजन को जर्नलिस्ट सालिडेरिटी फोरम ने ये कहते हुए समर्थन दिया है कि…

यूएनआई के संचालन के लिए सरकार किसी वरिष्ठ और ईमानदार अधिकारी को रिसीवर नियुक्त करे

समाचार एजेंसी यूएनआई के अंदरखाने हालत काफी खराब है. बेईमान, चोर, उचक्के टाइप लोगों ने इस चर्चित न्यूज एजेंसी को नष्ट करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है. कर्मचारी इस संस्थान को जी जान से चाहते हैं पर उनका कहा सोचा होता नहीं. एक पत्रकार प्रधानमंत्री को भेजा गया है, जिसमें यूएनआई की कहानी बताते हुए इसे बचाने की अपील की गई है. आप लोग भी पत्र पढ़ें…

मंत्री और विधायकों की ठेकेदारी-बेईमानी से मैं बहुत परेशान हूं : आजम खां

बाराबंकी। अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री आजम खां ने आज कब्रिस्तानों की बाउन्ड्री में पीला ईटा और शराब निर्माण को लेकर सीएनडीएस के डायरेक्टर को फोन पर भारी मजमें में जमकर लताड़ा और कहा कि तुम लोगों की वजह से मेरा मुंह काला हो रहा है। 24 घंटे के अंदर काम ठीक कर लो नहीं तो एजेन्सी बदल दी जायेगी।

गायब फाइलें और ‘भगवानों’ का संकट

यूपीए-2 की मनमोहन सरकार लगातार किसी न किसी राजनीतिक संकट के दलदल में फंसती रहती है। लंबे समय से उसे राहत की चैन लेने का शायद ही कोई मौका मिला हो। अगले लोकसभा चुनाव की राजनीतिक घंटियां जोर-जोर से बजने लगी हैं। सभी दलों ने चुनावी तीर-तुक्के अपने तरकशों में सजा लिए हैं। ऐसे में, विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता। यहां तक कि बात-बात पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की, रवायत सी बन गई है। इन दिनों संसद का मानसून सत्र अपने अवसान के करीब है। हालांकि, इसकी अवधि बढ़ाने के लिए चर्चा चल रही है। लेकिन, जिस तरह से संसद में लगातार गतिरोध का दौर जारी रहा है, ऐसे में सवाल है कि यदि हंगामा ही करना है तो सत्र बढ़ाने का और स्वांग क्यों हो?

जॉर्ज बुश के ही वारिस ओबामा को ऐसी क्या जल्दी है कि वह हमला करने पर उतारु है?

बराक ओबामा को 2009 में जब नोबेल शांति पुरस्कार मिला तो ऐसा बताया गया कि उनकी वजह से विश्व राजनीति का माहौन बदलने लगा है। वे परमाणु निशस्त्रीकरण की बात कर रहे थे। राष्ट्रों के बाच सहयोग की बात कर रहे थे। मुस्लिम राष्ट्रों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। और सबसे महत्व्पूर्ण उन्होंने कहा कि विदेश नीति अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से तय होनी चाहिए। अब क्या वजह है कि ओबामा पलट गए हैं। उन्हें अमरीकी जनता ने चुना इसलिए था क्योंकि वह युद्ध प्रेमी जॉर्ज बुश से तंग आ चुकी थी। ओबामा ने जब अमरीकी सेना को इराक व अफगानिस्तान से वापस बुलाने का ऐलान भर किया तो उसका सभी ने स्वागत किया। अमरीकी जनता को अपेक्षा थी कि ओबामा शांति स्थापित करेंगे।

पत्रकारिता कोश के संपादक आफताब आलम को राष्ट्रीय एकात्मता पुरस्कार

नवी मुंबई : महाराष्ट्र लोक  कल्याणकारी सेवा संस्था, सी ऍण्ड वी सामाजिक व शैक्षणिक संस्था तथा  माझगांव विद्यार्थी संघ के संयुक्त तत्वावधान  में अनाथ और मंदबुद्धि  के विद्यार्थियों के साथ  पिछले दिनों नवीन पनवेल  स्थित कर्नाटक संघ हॉल  में ईद मिलन व स्नेह सम्मेलन  नामक राष्ट्रीय एकात्मता पर आधारित कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर नृत्य, गीत व नाटक का अनोखा  संगम ‘हिन्दोस्ताँ हमारा’ नामक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान  माँ-आशा हिन्दी स्कूल, डॉ. रूपेश उर्दू स्कूल, भारतीय मानव विकास संस्था व अनिकेत बालगृह के विद्यार्थीयों  ने सांस्कृतिक कार्यक्रम  प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम  के प्रारंभ में बुशरा  शेख नामक बालिका ने पवित्र ग्रंथ कुरान का पाठ किया। 

शिक्षा, शिक्षक दिवस और हम

पांच सितंबर को हमारे  देश के स्कूल कॉलेजों  में पूर्व राष्ट्रपति, शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली  राधा कृष्णन की यौम ऐ पैदाईश के मौके पर शिक्षा दिवस मनाया  जाता है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन गैर राजनीतिक व्यक्ति होते हुए भी देश के राष्ट्रपति बने। इससे यह साबित होता है कि यदि व्यक्ति अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कार्य करे तो भी दूसरे क्षेत्र उसकी प्रतिभा से अप्रभावित नहीं रहते। डॉक्टर राधाकृष्णन बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति थे। उन्हें एक बेहतरीन शिक्षक, दार्शनिक, और निष्पक्ष एवं कुशल राष्ट्रपति के रूप में यह देश सदैव याद रखेगा।

नेशनल दुनिया के संपादकों की सेलरी कटौती की खबर झूठी

भड़ास4मीडिया पर पिछले दिनों छपी नेशनल दुनिया के संपादकों की सेलरी कटौती की खबर सही नहीं है. अखबार से जुड़े एक वरिष्ठ पत्रकार ने इस खबर का खंडन किया और इसे कुछ लोगों की शरारत करार दिया. उल्लेखनीय है कि नेशनल दुनिया से पिछले दिनों कई लोगों को हटा दिया गया. साथ ही यह भी बताया गया कि प्रबंधन ने खर्च बचाने के लिए संपादकों की सेलरी की घटा दी है. ये जानकारियां नेशनल दुनिया से निकाले गए लोगों में से एक ने दी.

सहारा क्यू शॉप बॉण्ड जांच हेतु रिट याचिका

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सहारा क्यू शॉप अग्रिम/बॉण्ड जारी किये जाने की जांच कराये जाने हेतु याचिका दायर किया है. अमिताभ और नूतन के अनुसार उन्होंने दो सहारा क्यू शॉप अग्रिम ख़रीदे थे जिसमे उन्हें सहारा क्यू शॉप कर्मचारियों द्वारा बताया गया था कि उन्हें 6 साल बाद 1000 रुपये के बदले 2335 रुपये मिलेंगे. इसके अलावा एक स्कीम चार्ट दिया गया था जिसमे 6 साल बाद 1000 रुपये के 2354 रुपये हो जाने की बात थी. लेकिन इस बॉण्ड की सामान्य शर्तें और नियम के अनुसार यह योजना मात्र सामान खरीदने के लिए अग्रिम धनराशि है.

मंदिर मार्ग पर मंदिर तोड़ा, विहिप ने किया प्रदर्शन

: पिछले पचास सालों में कभी न बुझी बाबा की धूनी पर भी डाला पानी : नई दिल्ली : बिडला मंदिर के सामने स्थित श्री सिद्ध तपोवन भूमि, लाल आश्रम में बने पुरातन हनूमान मंदिर को तोडे जाने के विरुद्ध आज विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा तथा संत समाज ने जम कर प्रदर्शन किया। विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष श्री बृज मोहन सेठी तथा झण्डेवालान विभाग अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल ने सीपीडब्लूडी के द्वारा की गयी इस कार्यवाही को तुगलकी फरमान बताते हुए मंदिर का तुरंत जीर्णोद्धार कराने की मांग की है।

नीरा राडिया ने 61 टेलीफोन बातचीत में अपनी आवाज की पहचान की थी

नई दिल्ली: एक सीबीआई अधिकारी ने 2 जी स्पेक्ट्रम मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की एक अदालत से कहा कि पूर्व कॉरपोरेट लॉबीइस्ट और मामले में अभियोजन पक्ष की गवाह नीरा राडिया ने टैप की गई 61 टेलीफोन बातचीत में अपनी आवाज की पहचान की है। सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक राजेश चहल ने कहा कि रिकॉर्ड की गई बातचीत 12 मई 2011 को राडिया के आवास पर उनके सामने सुनी गई और उन्होंने अपनी आवाज के साथ-साथ जिन लोगों के साथ वह बातचीत कर रही थीं उनके आवाज की पुष्टि की थी।

जालंधर में एचटी के फोटो पत्रकार प्रदीप शर्मा पर हमला

जालंधर : पत्रकारों पर हमले की घटनाओं में आये दिन वृद्धि हो रही है। जालंधर में भी एक फोटो पत्रकार को एक निजी बस चालक और उसके कई साथियों ने हमला कर घायल कर दिया। पुलिस ने बस चालक और उसके सथियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है और पत्रकार को अस्पताल में भर्ती किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उनकी तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है।

पीड़ित छात्रा के घर में खुद को पत्रकार बताकर घुस गई आसाराम की महिला दूत!

शाहजहांपुर : आसाराम बापू के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले पीड़ित परिवार की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कानूनी जंग के बीच गुरुवार को उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई, जब एक संदिग्ध महिला पत्रकार उनके घर पहुंच गई। उसने पीड़ित छात्रा और मां से मिलने की कोशिश की। हालांकि तुरंत हरकत में आई पुलिस ने पत्रकार को रोक लिया और आई कार्ड मांगा। पूछताछ में सटीक पहचान न बता पाने पर उसे बैंरग लौटा दिया।

मिस्र में अखबार बचाने के लिए लड़ रहे हैं पत्रकार

काहिरा। मिस्र में अंतिम सरकार के दमन के बावजूद मुस्लिम ब्रदरहुड की नीतियों का समर्थक एक पत्रकार तौफिक अपने अखबार को जिंदा रखने की जंग लड़ रहा है। बीते तीन जुलाई को सेना द्वारा मिस्र में किए गए सत्ता परिवर्तन के बाद से पक्ष को जनता के समक्ष रखता आ रहा है। तौफिक को डर इस बात का है कि अगर वह अपनी कलम का प्रयोग कर मुस्लिम ब्रदरहुड का पक्ष जनता के सामने रखेंगे तो सुरक्षाबल तकनीकों का प्रयोग कर उनकी स्थिति का पता लगा सकते हैं। तौफिक ने कहा कि मोहम्मद पैगंबर ने भी कहा है कि जिहाद का अर्थ अन्याय के खिलाफ लड़ना है।

जिया न्यूज का लोगो जारी, सितंबर लास्ट या अक्टूबर फर्स्ट वीक तक चैनल होगा लांच

जिया न्यूज की लांचिंग का काम तेजी से चल रहा है. कई प्रदेशों में स्टेट हेड की नियुक्ति के बाद जिलों-जिलों में संवाददाताओं / स्ट्रिंगरों के एप्वायंटमेंट का काम भी लगभग पूरा हो चुका है. इन दिनों स्टाफ को ट्रेंड, प्रशिक्षित करने का काम चल रहा है. नोएडा आफिस में ड्राइ रन चल रहा है. 

शहरयार खान पी7 न्यूज से जुड़े, जिया न्यूज के साथ महेंद्र, पंकज, रोहित, कुबेर, अमरेश, प्रतीक की नई पारी

शहरयार खान को पी7 न्यूज चैनल का नेशनल हेड (मार्केटिंग-सेल्स) नियुक्त किया गया है. वे इससे पहले साधना और उससे भी पहले न्यूज एक्सप्रेस में हुआ करते थे. उधर, एक अन्य सूचना के मुताबिक जिया न्यूज चैनल के साथ महेंद्र मिश्र और भूपेश पंत जुड़ गए हैं. ये दोनों न्यूज एक्सप्रेस में कार्यरत थे.

झारखंड में दो मीडियाकर्मियों पर हमला और लूट

झारखण्ड के जामतारा जिले के मिहिजाम में दो मीडियाकर्मियों शंकर यादव व पंकज मिश्र पर तीन बदमाशों ने जानलेवा हमला किया. शंकर को आंख में गहरी चोट लगी है. पिस्टल की नोक पर दोनों पत्रकारों से नगदी १० हजार रुपये बदमाशों ने लूट लिए. आरोपी की पहचान तो कर ली गई है परन्तु मिहिजाम थाना पुलिस अब तक आरोपी को दबोचने में नाकामयाब है.

लायसेंसी पत्रकार

पत्रकारों को अब ट्रक ड्रायवर की तरह लायसेंस रखकर चलना होगा, यदि सरकार ने तय कर दिया कि पत्रकारों को भी डाक्टर और वकील की तरह लायसेंस लेना होगा. इस लायसेंस के लिये बकायदा परीक्षा भी पास करनी होगी. केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कह दिया है कि पत्रकारों को भी लायसेंस दिया जाना चाहिये और इसके लिये डाक्टर-इंजीनियर की तरह परीक्षा भी आयोजित होना चाहिये. इसके पहले प्रेस कांऊसिल के अध्यक्ष ने तो पत्रकारों की शैक्षिक योग्यता तय करने के लिये एक कमेटी का गठन तक कर दिया है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई हर दल और हर नेता देता रहा है लेकिन जब जब उनके हितों पर चोट पहुंची है तो सबसे पहले नकेल डालने की कोशिश की गई. पश्चिम बंगाल में ममता बेनर्जी ने जो कुछ किया या कश्मीर और असम में जो कुछ हुआ, वह सब अभिव्यक्ति की आजादी में खलल डालने का उपक्रम है. 

हिंदी दिवस से पहले एक विजय, पीआईबी की वेबसाइट हिंदी में भी

देश का संविधान कहता है कि हिन्दी भारत की राजभाषा है और कामकाज हिन्दी में होना चाहिए पर यह बात भारत सरकार के विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में बैठे अधिकारी हिन्दी के नाम पर पिछले ६६ वर्षों से खानापूर्ति करते आ रहे हैं और अंग्रेजी का वर्चस्व जस का तस है. नवी मुंबई में निवासरत एक युवा हिन्दीप्रेमी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत 'पत्र सूचना कार्यालय' [पसूका] में राजभाषा की घोर उपेक्षा का प्रकरण अपने हाथ लिया, ६ फरवरी २०१३ से लगातार उन्होंने पत्र सूचना कार्यालय के अधिकारियों को ईमेल भेजना आरम्भ किया, कई अनुसमारक भेजे, पर उत्तर ना आया. 

दैनिक भास्कर, बठिंडा : एक ही फोटो छाप दी दो समाचारों में

संपादक, भड़ास4मीडिया, श्रीमानजी, समाचार पत्र समूह दैनिक भास्कर के बठिंडा यूनिट द्वारा छह माह पहले पति-पत्नी को भाई बहन दिखा कर प्रकाशित करने की भूल चाहे सुधारी हो या नहीं, अब एक बार फिर इस यूनिट में मची अफरातफरी का असर इसी यूनिट के एक स्थानीय पुलआऊट में देखने को मिला। अब यह गल्ती पत्रकार की है या डेस्क पर बैठने वाले महोदय की अथवा उनका नेतृत्व करने वाले डिप्टी सम्पादकों अथवा सम्पादक की लेकिन एक ही फोटो को विभिन्न दिनों पर दो समाचारों के साथ प्रकाशित करने के चलते प्रतिद्वंदियों में भास्कर परिहास का विषय बना हुआ है। 

बलात्कार एक धार्मिक समस्या : धर्म ने ही औरत को भोग्या, वस्तु, अपवित्र, आज्ञाकारिणी, पर्देवाली, कमज़ोर और दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया

Swami Balendu : धर्म का चोला पहने आसाराम के ऊपर यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं, उधर बनारस के भी एक महाराज अभयानंद पर बलात्कार के आरोप लगे. पूर्व में भी कृपालु, प्रकाशानंद, सत्य साईं बाबा तथा अन्य बहुत से संत महात्माओं पर इस तरह के आरोप लगे हैं. असल में ये परम्परा बहुत पुरानी है और यौनाचार के प्रसंग धार्मिक ग्रंथों में भी वर्णित हैं. इस विषय पर एक पुराना लेख फिर से यहाँ दे रहा हूँ कि किस तरह हमारा धर्म और संस्कृति औरत के प्रति इस घ्रणित अपराध को बढ़ावा देती है!

आसाराम के गुणगान में कविताओं की तीन किताब लिख चुके हैं वंजारा

: वंजारा का 'लेटर बम' मोदी की राह का कांटा बन रहा : गुजरात के चर्चित आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा का ‘लेटर बम’ भाजपा खेमे में बड़ी खलबली मचाने लगा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस सहित कई और दलों ने नरेंद्र मोदी पर अपने राजनीतिक निशाने तेज कर दिए हैं। इस चर्चित पत्र को लेकर भाजपा के अंदर भी काफी दबाव बढ़ रहा है। इस प्रकरण के बाद पार्टी के अंदर मोदी विरोधी खेमा एक बार फिर सक्रिय होने लगा है। कोशिश की जा रही है कि संघ के दबाव में पार्टी नेतृत्व जल्दबाजी में मोदी को अपना चुनावी चेहरा न घोषित करे। क्योंकि, पता नहीं है कि वंजारा का ‘लेटर बम’ कितनी और क्षति पहुंचा देगा? इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने नए सिरे से मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। जबकि, जदयू ने मांग कर दी है कि वंजारा के पत्र के आधार पर फर्जी मुठभेड़ों के मामले में नरेंद्र मोदी की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच जरूर कराई जाए। 

दिवाकर ने इंडिया न्यूज से इस्तीफा दिया, जोशी बाबा व खान ने दैनिक सवेरा छोड़ा

दिवाकर सिंह ने इंडिया न्यूज को टाटा बाय बाय बोल दिया है. वे स्पोर्ट्स डेस्क पर सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत थे. दिवाकर पांच वर्षों से इंडिया न्यूज के साथ थे. उसके पहले वे न्यूज24 में कार्यरत थे. नई पारी किसके साथ शुरू कर रहे हैं, यह पता नहीं चल पाया है. 

आसाराम कांड से डरे उदासीन मठ के संत प्रेमदास ने अपना लिंग काट डाला

यह मामला अमेठी के माधवपुर गांव का है। उदासीन मठ के महंत स्वामी प्रेमदास आसाराम बापू पर रेप के आरोप लगने के बाद डरे हुए थे। इसी डर की वजह से उन्होंने अपने ही हाथों से अपना गुप्तांग ब्लेड से काट डाला। महंत को आश्रम के लोगों ने गंभीर हालात में स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने महंत की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल सुल्तानपुर रेफर कर दिया। फिलहाल खून बहना बंद हो गया है और अब वह खतरे से बाहर हैं।

बनारस के महंथ स्वामी अभयानंद ने किया बलात्कार

S.a. Asthana : वाराणसी स्थित यामुनेश्वर आश्रम के महंथ स्वामी अभयानंद के आश्रम में सर छुपाने के लिया पहुंची जौनपुर की एक महिला के साथ स्वामी ने जबरिया बलात्कार कर डाला. महिला की शिकायत पर स्वामी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार जौनपुर जनपद की एक चालीस वर्षीय महिला अपने पुत्र के साथ कुछ दिनों के लिए इस आश्रम में आई थी.

सायमा सहर ने जब स्टार न्यूज़ के दो वरिष्ठों पर यौन शोषण का आरोप लगाया तो कोई नहीं बोला

SK Chaudhary Sonu : सायमा सहर संभवतः मीडिया इंडस्ट्री की पहली महिला जिसने सबूत के साथ स्टार न्यूज़ (अब एबीपी न्यूज) के दो वरिष्ठ अधिकारीयों पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. महिला आयोग के साथ-साथ मीडिया का कोई ऐसा दरवाज़ा नहीं था जहाँ उसने न्याय के लिए दस्तक नहीं दिया. महिलाओं के प्रति संवेदनशील दिखने वाले प्राणियों ने तब एक शब्द नहीं कहा था, उन आरोपियों के बारे में, जिनमें महिलाएं भी शामिल है, जो आजकल टीवी स्टूडियों में भारी भरकम मेकअप करके अपने आप को महिलाओं के शुभचिंतक बता रही हैं..

एक बेरोजगार उर्फ आजाद पत्रकार की कविताई

पंडित राजीव शर्मा इन दिनों बेरोजगार हैं. पर कोई फरक नहीं पड़ता उनकी सेहत पर क्योंकि उनकी घर-गहस्थी के तामझाम इतने कम हैं कि वे नौकरी पर रहें या आजाद रहें, जीवन की गति लय पर कोई बेसुरापन नहीं… पिछले दिनों पत्रकारों के एक कार्यक्रम में एक पत्रकार मित्र के साथ गए तो वहां जब उन्होंने पत्रकारों को चंदा मांगते देखा तो अपने पाकेट के आखिरी दस रुपये चंदा स्वरूप दे डाले.

वीरेन डंगवाल छुट्टी पा कर घर आ गए, दस दिनों तक कंप्लीट बेड रेस्ट की सलाह

Ashutosh Kumar :  वीरेन दा हस्पताल से छुट्टी पा कर घर आ गए हैं. स्वस्थ सुचित्त हैं. आपरेशन के बाद कोई जटिलता या चिंताजनक बात अभी तक सामने नहीं आई है. कुछ और जांचें होंगी, तब डाक्टर लोग तय करेंगे कि रेडियोथेरेपी होगी कि नहीं. बस कुछ दिन और..

श्रद्धांजलि : मुझे अपराधबोध हो रहा कि लखनऊ इतनी बार गया पर क्रांति से मिलना क्यों भूल गया

Yashwant Singh : चले गए पत्रकार साथी क्रांति किशोर मिश्र Kranti Mishra. लखनऊ के ऐसे पत्रकार साथी जिनसे फोन और मेल पर लगातार संपर्क-संबंध कई वर्षों से बना हुआ था, भड़ास के चलते. इनका एक दुर्घटना में तीन दिन पहले निधन हो गया. आज मैं क्रांति भाई के मेल सर्च कर रहा था. कई मेल पढ़ डाला. ये साथी इतना सपाट और साफ लिखते थे कि लगता था कि मेरे जैसा ही कोई बंदा है… पर ऐसे चले जाएंगे, मुलाकात भी न हो पाएगी, एक बार भी नहीं.. मैंने कतई कल्पना नहीं की थी…

क्रांति किशोर मिश्र की मौत खराब खून चढ़ाने से हुई, दुर्घटना से नहीं

लखनऊ के तेजतर्रार पत्रकार और सुदर्शन न्यूज के ब्यूरो चीफ क्रांति किशोर मिश्र की मौत एक्सीडेंट की वजह से नहीं बल्कि खराब खून चढ़ाने की वजह से हुई. उन्हें जब दुर्घटना के बाद बरेली लाया गया तो डाक्टरों ने उनकी हालत को खतरे से बाहर बताया. उनके कूल्हे का आपरेशन होना था. वो हुआ. बाद में क्रांति किशोर मिश्र के शरीर में जब खून की कमी महसूस हुई तो उन्हें बाहर का जो खून चढ़ाया गया वह खराब था.

देर तक संसद चलने पर एजेंसियों के गिनती के बचे पत्रकारों को न चाय मिलती है न खाना

Viplav Vinod : लोकसभा में इस समय उत्तराखंड की त्रासदी पर चर्चा चल रही है, लेकिन इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान तीन-चार सदस्यों को छोड़कर कांग्रेस के सभी सदस्य गायब हैं। सदन में मुश्किल 30 सदस्य मौजूद हैं.. इनमें से भी कई सदस्य धीरे-धीरे करके जा रहे हैं। पत्रकार गैलरी में दो-तीन पत्रकार हैं..

आसाराम के खिलाफ मीडिया बायस्ड होकर खबर चला रहा है

Chandan Srivastava : हो सकता है आसाराम ने गुनाह किया हो. लेकिन ईमानदारी से सोचिये क्या इलेक्ट्रॉनिक मीडिआ बायस्ड होकर खबर नही चला रहा?? आसाराम के समर्थकों ने मीडिआ के साथ मारपीट की हालांकि फुटेज मे मीडिआकर्मी भी अटैकिंग मोड में नजर आ रहे थे.. खैर..

सोशल मीडिया और ऑनलाइन एक्टिविज्म पर एलिजाबेथ लॉश को सुनना बेहद दिलचस्प अनुभव रहा

Vineet Kumar : सोशल मीडिया और ऑनलाइन एक्टिविज्म पर एलिजाबेथ लॉश को सुनना बेहद दिलचस्प अनुभव रहा. उन्होंने वर्चुअल स्पेस के लिए "डेटा बेस्ड सिनेमा" का प्रयोग किया और बहुत ही ह्यूमरस अंदाज में ऐसा प्रयोग किए जाने के तर्क को साझा किया. वो इस तरह से कि आप इसे पूरे ब्रह्मांड से गुजर जाते हो, जहां जब मन करे हैश-टैग कर देते हो और आपके पास हमेशा एक मेटा डेटा होता है. इन सबके बीच से कई कहानियां साथ चलती रहती है. बल्कि पूरे सत्र के दौरान हैश-टैग्स का ऐसे मजाकिए अंदाज में इस्तेमाल किया कि जो लोग इस सत्कर्म में अतिसक्रिय हैं, उन्हें एक घड़ी को ये भी लगेगा कि वो गंभीरता और नेट एक्टिविज्म के नाम पर क्या कर रहे हैं ?

आरई राघवेंद्र और सीनियर एनई विजय नारायण सिंह ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा दिया

रांची और रायपुर से एक-एक सूचनाएं हैं. दैनिक भास्कर, रांची के रेजीडेंट एडिटर राघवेंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. उनके बारे में काफी समय से इस्तीफे का कयास लगाया जा रहा था. अभी पिछले ही महीने दैनिक भास्कर, जमशेदपुर से संतोष मानव ने इस्तीफा दिया. झारखंड में यह दूसरा बड़ा झटका है भास्कर के लिए.

प्रभात शुंगलू शारदा यूनिवर्सिटी से जुड़ेंगे, नीलम दुबे साईं प्रसाद मीडिया स्कूल के हेड पद से टर्मिनेट

वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू के बारे में जानकारी मिली है कि वे शारदा यूनिवर्सिटी से जुड़ने वाले हैं. चर्चा है कि वे इस विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के हिस्से होंगे. कुछ लोगों का कहना है कि वे मास काम डिपार्टमेंट के एचओडी होंगे. वहीं कुछ का कहना है कि वह कभी-कभार बच्चों को पढ़ाएंगे और उनका जुड़ाव अस्थायी रहेगा.

‘आउटलुक मनी’ और ‘बिजनेस वर्ल्ड’ पर तलवार, छंटनी व बंदी की कवायद

मीडिया इंडस्ट्री से लगातार अशुभ खबरें आ रही हैं. आउटलुक ग्रुप में मंदी बंदी और छंटनी का सिलसिला जारी है. तीन मैग्जीनों की बंदी और वहां कार्यरत इंप्लाइज को निकालने के बाद प्रबंधन ने अब बिजनेस मैग्जीन 'आउटलुक मनी' को मंथली कर दिया है. पहले यह मैग्जीन पंद्रह दिन पर यानि पाक्षिक निकलती थी. मैग्जीन के मंथली किए जाने के साथ-साथ मैनेजमेंट ने करीब डेढ़ दर्जन लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इनमें से एक दर्जन से ज्यादा लोग संपादकीय के हैं और बाकी एकाउंट व अन्य विभागों के. सूत्रों का कहना है कि अगर इस कवायद के बाद भी बिजनेस मैग्जीन आउटलुक मनी की हालत नहीं सुधरी तो प्रबंधन इसे बंद करने का रास्ता अपना सकता है.

जी ग्रुप, पार्टनर चैनल एएएन7, राजेश सुंदरम और दक्षिण अफ्रीका

एक वेबसाइट आईओएल न्यूज में राजेश सुंदरम और जी ग्रुप के पार्टनरशिप वाले दक्षिण अफ्रीकी चैनल एएएन7 से संबंधित कई स्टोरीज छपी है. राजेश सुंदरम का कहना है कि जी ग्रुप वालों ने दक्षिण अफ्रीका भेजकर एक तरह से उनके जीवन को ही खतरे में डाल दिया था क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में कामकाज का जो माहौल चैनल के अंदर था, वह कतई प्रोफेशनल नहीं था.

दैनिक भास्कर के बाद अरविंद की फेसलुक से नई शुरूआत, हिंदुस्तान रामपुर से विरेंद्र शर्मा का इस्तीफा

दैनिक भास्कर गुडगांव, दिल्ली में पिछले दस साल तक सेवा देने के बाद अरविंद सैनी ने गुडबाय बोल दिया है। अब अपनी नई पारी की शुरुआत दिल्ली-हरियाणा में लांच हो रहे अखबार फेसलुक से की है। उन्हें यहां संपादकीय टीम की जिम्मेदारी दी गई है। छह सितंबर से अखबार की लांचिंग की तैयारी है। इससे पहले अरविंद ने अमर उजाला कुरूक्षेत्र, दैनिक भास्कर नारनौल, दैनिक जागरण गुडग़ांव में काम किया। 16 अगस्त को उन्होंने भास्कर से इस्तीफा दे दिया था।

जागरण डाट काम से आशुतोष, दीपाली, रोहित जुड़े और प्रकाश सिंह गए

जागरण डाट काम से प्रकाश सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने एबीपी न्यूज के साथ नई पारी शुरू की है. वे एबीपी न्यूज की हिंदी वेबसाइट में कंटेंट एडिटर बने हैं. प्रकाश भास्कर डाट काम को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. एक अन्य जानकारी के मुताबिक आशुतोष वर्मा, रोहित गुप्ता और दीपाली ग्रोवर ने पिछले दिनों जागरण डाट काम ज्वाइन किया. रोहित दैनिक भास्कर, दिल्ली के फीचर विभाग में थे. आशुतोष बिजनेस भास्कर में कार्यरत थे. दीपाली ग्रोवर एनडीटीवी की मोबाइल साइट और उनके टेक्नो शो से जुड़ी हुई थीं.

राजेश सुंदरम ने इस्तीफा में तो अच्छा-अच्छा लिखा है, अब क्या हो गया उन्हें? : लक्ष्मी गोयल

नई दिल्ली : पत्रकार राजेश सुंदरम ने लक्ष्मी गोयल पर कई तरह के आरोप लगाए हैं. सबसे गंभीर आरोप तो ये है कि लक्ष्मी गोयल ने उन्हें दिल्ली में देख लेने की धमकी दी है. राजेश सुंदरम के मुताबिक उन्होंने इसी साल लक्ष्मी गोयल के चैनल में ज्वाइन किया था और उन्हें जून में चैनल लांच करने के लिए दक्षिण अफ्रीका भेजा गया. लेकिन वहां उनके साथ बेहद खराब व्यवहार किया गया. वे किसी तरह जान बचाकर लौटे हैं.

सचिन अमर उजाला अलीगढ़ के आरई, भूपेंद्र को रोहतक का जिम्मा

अमर उजाला में दो फेरबदल की सूचनाएं है. अलीगढ़ यूनिट के एडिटर भूपेंद्र सिंह का तबादला रोहतक किया जा रहा है. उनको रोहतक का संपादक बनाया गया है. उनकी जगह पर नए स्थानीय संपादक के रूप में सचिन शर्मा ने कार्यभार संभालेंगे. सचिन अभी तक हिंदुस्तान, आगरा में न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत थे.

दूसरे अखबार या चैनल का नाम लेने को बाध्यता नहीं कर सकते

सूचना और प्रसारण मंत्रालय का यह स्पष्ट मत है कि प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर दूसरे अखबार और न्यूज़ चैनल के विषय में चर्चा करते समय उनका पूरा नाम लेने की बाध्यता नहीं की जा सकती है. सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा इस सम्बन्ध में दायर याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेशों के क्रम में निर्णय लेते हुए मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष का मत है कि प्रेस एवं पुस्तकों का पंजीयन अधिनियम 1867 की धारा 7 के अनुसार संपादक को यह सम्पूर्ण हक जान पड़ता है कि क्या छपा जाए. अतः यह उचित नहीं दिखता कि समाचारपत्रों को दूसरे समाचारपत्रों के विषय में चर्चा करते समय उनका नाम लिखने की बाध्यता की जाए. यह निर्णय समाचारपत्र के संपादक पर ही छोड़ा जाना चाहिए.

दरोगा की बेटी ने मीडिया कर्मी पर लगाया छेड़छाड़ का आरोप

मुरादाबाद। मझोला में रहने वाली दरोगा की बेटी ने एक मीडिया कर्मी के खिलाफ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने पहले उसकी क्लीपिंग बनाई, बाद में टैंपरिंग करके उसे इंटरनेट पर डालने की धमकी देने लगा। नया गांव गागन निवासी दरोगा कानपुर में तैनात हैं। उसकी बेटी दिल्ली रोड स्थित एक निजी इंस्टीटयूट से बीटेक कर रही है। चार माह पहले छात्रा के साथ संस्थान के कुछ लड़कों ने छेड़छाड़ व अपरहरण का प्रयास किया था। इसकी शिकायत छात्रा ने मझोला पुलिस से की थी। इसी दौरान छात्रा ने कुछ मीडिया कर्मियों को बयान दिए थे।

आसाराम समर्थकों का दावा- सिर्फ ‘ए2जेड न्यूज’ और ‘सुदर्शन न्यूज’ ही सच दिखा रहा

एक नाबालिग युवती से कथित तौर पर बलात्कार के आरोपों में घिरे आसाराम बापू के समर्थकों ने समाचार चैनलों का बहिष्कार करने की अपील की है. वो इस मामले की कवरेज को आसाराम का 'मीडिया ट्रायल' करार देते हुए अपने समर्थकों से समाचार चैनलों और उनके सोशल मीडिया पेजों का बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं. ये अपील ऐसे समय में जारी की गई हैं जब आसारम 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जोधपुर की जेल में बंद हैं. बुधवार को अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

पटना में दैनिक भास्कर के आरई प्रमोद मुकेश और प्रभात खबर के आरई पंकज मुकाती बने

पटना में दो बदलावों की सूचना है. अभी तक प्रभात खबर के स्थानीय संपादक रहे प्रमोद मुकेश ने इस्तीफा देकर पटना से लांच होने जा रहे दैनिक भास्कर के साथ नई पारी शुरू की है. उन्हें दैनिक भास्कर का रेजीडेंट एडिटर बनाया गया है. प्रभात खबर में स्थानीय संपादक के रूप में पंकज मुकाती के ज्वाइन करने की चर्चा है.

मुगलसराय के वरिष्ठ पत्रकार राज नारायण ‘राजू’ का निधन

मुगलसराय : वरिष्ठ पत्रकार और नयी पीढ़ी के पत्रकारों के प्रेरणास्रोत वाराणसी से प्रकाशित सांध्य दैनिक अखबार ''गाण्डीव'' के पत्रकार राज नारायण ''राजू'' का 68 वर्ष की उम्र में लम्बी बीमारी के कारण सोमवार को निधन हो गया। दिवंगत पत्रकार का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हुआ। उनके ज्येष्ठ पुत्र राजीव जायसवाल ने उन्हें मुखाग्नि दी। शवयात्रा में नगर के व्यापारी, बुद्धिजीवी, समाजसेवी व कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

एसोसिएट प्रोड्यूसर रितेश आनंद ने आजतक से इस्तीफा देकर न्यूज नेशन ज्वाइन किया

टीवी टुडे नेटवर्क के मीडिया इंस्टीट्यूट (TVTMI) के तेज़-तर्रार और होनहार छात्र रितेश आनंद ने आजतक को अलविदा कह दिया है. वे बतौर असोसिएट प्रोड्यूसर आजतक की आउटपुट डेस्क पर कार्यरत थे. पिछले 5 सालों से वे अपनी सेवाएं आजतक को दे रहे थे.

आई-नेक्स्ट, रांची के डीजीएम सेल्स शशि पांडेय का इस्तीफा

रांची से खबर आ रही है कि पिछले दस वर्षों से जागरण ग्रुप के अखबारों दैनिक जागरण व आई-नेक्स्ट में सेवा दे रहे शशि पांडेय ने इस्तीफा दे दिया है. शशि डिप्टी जनरल मैनेजर सेल्स के पद पर कार्यरत थे. बताया जाता है कि शशि ने सेल्स की दिल्ली टीम और स्थानीय टीम के बीच चरम आंतरिक राजनीति से तंग आकर इस्तीफा दिया.

पाजिटिव मीडिया ग्रुप में दर्जनों मीडियाकर्मियों से जबरन लिखवाया गया इस्तीफा

पहले यह ग्रुप कांग्रेसी नेता मतंग सिंह का चैनल हुआ करता था, अब कांग्रेसी नेता जिंदल का चैनल हो गया है. लेकिन इंप्लाइज की सेहत पर इसका कोई असर नहीं क्योंकि जैसा मतंग सिंह था वैसा ही जिंदल भी निकला. खबर है कि पाजिटिव मीडिया ग्रुप के कई चैनलों में कार्यरत दर्जनों मीडियाकर्मियों से जबरन इस्तीफा लिखवा लिया गया है. इनमें से कई लोग ऐसे थे जो चैनल में कई वर्षों से कार्यरत थे.

नेशनल दुनिया में छंटनी, कई लोग निकाले गए, कइयों की तनख्वाह घटी

छंटनी का दौर जारी है. हर मीडिया हाउस किसी न किसी बहाने से अपने कर्मियों की नौकरी खा रहा है. ताजी सूचना नेशनल दुनिया अखबार से हैं. इस अखबार के दिल्ली आफिस से कई लोगों का इस्तीफा ले लिया गया है. साथ ही कुछ वरिष्ठ लोगों की सेलरी घटा दी गई है. बताया जाता है कि संपादकों की सेलरी में भी कटौती की गई है. जिन लोगों को निकाला गया है उनमें से कुछ पत्रकार काफी वरिष्ठ हैं और कई दशक से मीडिया में हैं.

”आसाराम के प्रवचनों से ही हमारे ग्रुप के सभी चैनलों की शुरुआत होती है और कंपनी को लाखों मिलते हैं?”

: कितना बहादुर है आसाराम की गिरफ्तारी पर खुद की पीठ थपथपाने वाला मीडिया? : करीब 16-17 साल पहले की बात है. मैं उन दिनों ज़ी नेटवर्क के लिये रिपोर्टर था. एक नयी पीआर कंपनी के सीईओ ने मुझसे मिलने की इच्छा जाहिर की. मोबाइल फोन का जमाना नहीं था. पेजर हुआ करते थे. उसने कई बार मैसेज कर और ऑफिस के फोन पर बात करके मुझे बुलाया और कहा कि कुछ पर्सनल काम है. पहले तो मैंने सोचा, किसी खास असाइनमेंट के बारे में चर्चा करनी होगी. मैंने कहा, "ऑफिस आ जाओ" तो वो गिड़गिड़ा कर कहने लगा, "पारिवारिक मामला है वर्ना आपको तकलीफ न देता."

प्राचीन भारत में ‘मिंट, मनी एंड मार्केट’ पर ताजा रिसर्च : अकबर के समय थीं 107 टकसालें

मुंबई। भारत में दसवीं सदी तक 16 हिंदू राजवंशों के पास 60 टकसालें थीं। देवगिरि का यादव राजवंश इनमें सबसे समृद्ध था, जहां अलाउद्दीन खिलजी को 62 तरह के सिक्कों का हैरतअंगेज खजाना हाथ लगा था। उसने ठक्कर पेरू नाम के एक टकसाल विशेषज्ञ को इन सिक्कों का ब्यौरा लिखने के लिए लगाया था, जिसने यहां के खजाने पर एक किताब लिखी थी। अलाउद्दीन ने इसी पूंजी की दम पर दिल्ली में एक ताकतवर हुकूमत कायम की थी। इसी दौलत के बूते देवगिरि का नाम बदलकर दौलताबाद रखा गया।

सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर खुद नियमन करे मीडिया : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि मीडिया में ‘संवेदनशील रिपोर्टिंग की जगह सनसनीखेज रिपोर्टिंग ने ले ली है।’ हालांकि, उसने साफ कर दिया कि मीडिया का नियमन करने का कोई भी प्रयास उसके अंदर से ही होना चाहिए। न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा और न्यायमूर्ति ए के पटनायक की पीठ वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल की दलीलों का जवाब रहे थे कि प्रेस के एक हिस्से को संवेदनशील बनाने के लिए न्यायिक निगरानी की आवश्यकता है। मीडिया का एक वर्ग केरल के प्रसिद्ध श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर से संबंधित मामले की सनसनीखेज रिपोर्टिंग में शामिल है।

एनडीटीवी की आलोचना करने वाली इस पोस्ट को द हूट चलाने वाली सैवंती नैनन ने छापने से मना कर दिया

Abhishek Srivastava : मित्रों, सवेरे मैंने एक पोस्‍ट लिखी थी एनडीटीवी के नियमगिरि पर कार्यक्रम की आलोचना करते हुए। भाई Mahtab Alam ने वाजिब सुझाव दिया कि इसे क्‍यों न अंग्रेज़ी में बनाकर thehoot.org को भेजा जाय। मैंने वैसा ही किया। कुछ देर पहले मेरे पास इस वेबसाइट को चलाने वाली पत्रकार सैवंती नैनन का जवाब आया है जिसमें उन्‍होंने दो अहम बातें कही हैं। पहली यह, कि एक पत्रकार के ''पॉलिटिकली इनकरेक्‍ट'' निजी व्‍यवहार को छापना उनकी साइट पर गलत होगा।

पत्रकार को पंद्रह महीने तक बंधक बनाकर गैंगरेप

एक ‌महिला पत्रकार को आतंकियों ने 15 महीनों तक बंधक बनाए रखा और उससे गैंगरेप करते रहे। उसे छोड़ने के लिए उसके घरवालों से 20 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। इस दौरान आतं‌कियों ने महिला पत्रकार और उसके एक साथी को कई बार पीटा, भूखे रखा और उस पर एक बच्चे को जन्म देने के लिए दबाव बनाया। डेली मेल के अनुसार, म‌हिला पत्रकार अमांडा लिंडहाउट ने बताया कि सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में 23 अगस्त 2008 को उनको और ऑस्‍ट्रेलियाई फोटोग्राफर निगेल ‌ब्रेनान को आतंकियों ने अगवा कर लिया। उस दिन वे दोनों राजधानी से दूर एक शरणार्थी शिविर के दौरे पर जा र‌हे थे।

रिफत जावेद टीवी टुडे ग्रुप के मैनेजिंग एडिटर (इनपुट) बने, अरुण पुरी की तरफ से मेल जारी

जतक और हेडलाइंस टुडे समेत सभी चैनलों के कंबाइन्ड इनपुट हेड बनाए गए हैं रिफत जावेद। वे बीबीसी से आए हैं। सीधे अरुण पुरी के दफ्तर से कल इसका मेल जारी हुआ। यह भी बताया गया कि नए मैनेजिंग एडिटर ग्रुप (इनपुट) रिफत जावेद सीधे अरुण पुरी को ही रिपोर्ट करेंगे, साथ ही चैनल हेड्स को भी। यानी सुप्रिय प्रसाद और राहुल कंवल के बराबर का रुतबा मिल गया है इन्हें। रिफत जावेद मूलत: बिहारी हैं। 2001 में बीबीसी उर्दू सेवा में प्रोड्यूसर होकर जाने से पहले कोलकाता में रेडिफ डॉट कॉम के संवाददाता थे।

जार्ज वर्गीज को सीईओ पद पर बिठाकर विवेक गोयनका ने सभी को जो मेल भेजा वो यूं है

शेखर गुप्ता ने सीईओ पद की जिम्मेदारी छोड़ दी और इस पद को जार्ज वर्गीज ने संभाल लिया है. शेखर गुप्ता अब सिर्फ एडिटर इन चीफ रहेंगे. सारा मैनेजेरियल और कारपोरेट कामधाम जार्ज वर्गीज देखेंगे. इस मौके पर इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के मालिक विवेक गोयनका ने सभी को एक चिट्ठी भेजी है जो इस प्रकार है…

अमर उजाला : फिर सिटी इंचार्ज बने पंकज, अजय को नई जिम्‍मेदारी, सुनील एवं गौरव जुड़े

अमर उजाला, बरेली में कई बदलाव हुए हैं. पिछले दिनों सिटी इंचार्ज के पद से हटाकर डाक में भेजे गए पंकज सिंह की वापसी हो गई है. उन्‍हें फिर से सिटी इंचार्ज बना दिया गया है. उन्‍होंने अपने जिम्‍मेदारी संभाल ली है.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनेता बी.आर.यादव के व्यक्तित्व पर केंद्रित पुस्तक ‘कर्मपथ’ का विमोचन छह को

बिलासपुर। मप्र शासन में मंत्री रहे वरिष्ठ पत्रकार श्री बी.आर.यादव का लोक अभिनंदन और उन पर एकाग्र पुस्तक 'कर्मपथ'  का विमोचन दिनांक 6 सितंबर को दोपहर 1 बजे बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के होटल इंटरसिटी में आयोजित किया गया है। पुस्तक का संपादन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया है।

शहादत दिवस पर मुख्यमंत्री के दो पुष्प भी मयस्सर नहीं हो पाए आंदोलनकारियों को

देहरादून। जो उत्तराखण्ड राज्य शहीदों की शहादत के बाद बना हो, उन शहीदों के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री के दो पुष्प भी उनकी शहादत दिवस पर मयस्सर नहीं हो पाए। राजधानी देहरादून से खटीमा तो दूर है, लेकिन मात्र 22 किलोमीटर तक भी बीते दिन शहीदों के शहादत दिवस पर मसूरी झूलाघर नहीं पहुंच पाए। रस्म अदायगी के लिए वे मंगलवार सुबह मसूरी जाना चाह रहे थे  लेकिन कार से जाने के बजाय दो बार प्रयास के बाद भी हैलीकाप्टर महज 22 किलोमीटर की यात्रा नहीं कर पाए ।

इस बार केजरीवाल और ‘आप’ को क्यों वोट दे देना चाहिए, यशवंत के कुछ फेसबुकिया तर्क-वितर्क

Yashwant Singh : दिल्ली पढ़े लिखों की महानगरी है. इस प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा का शासन रहा है. दोनों दलों के ज्यादातर लोकल और नेशनल नेता करप्ट हैं. ऐसे में तीसरी पार्टी को मौका मिलना चाहिए. आम आदमी पार्टी को एक चांस देना मांगता है. मैंने दिल्ली में वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया है. मेरा वोट तो 'आप' को. लेकिन आपका वोट कहीं कांग्रेस या भाजपा के पाले में न चला जाए, इसका जरूर ध्यान रखिएगा.

‘लालू, नीतीश, पासवान सब भूमिहार परस्त हैं’

पटना : 2 सितंबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार अन्य दिनों से अलग था। मंत्री के नाम पर बस दो मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और रमई राम उपस्थित थे। बाकी अन्य सीटों पर जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान एक आईपीएस अधिकारी से अनौपचारिक बातचीत का मौका मिला। हमारे साथ एक और साथी पत्रकार थे। मैंने अपना परिचय दिया- मेरा नाम वीरेंद्र यादव है। आइपीएस ने कहा- आज से 20 पहले एक यादव पत्रकार मिला था रांची में, महेंद्र यादव और आप दूसरे यादव पत्रकार हैं, जिनसे मेरी मुलाकात हो रही है।

अब तक याद है मेरठ की वह पिटाई

पंकज शर्मा का तबादला दिल्ली हो गया और मैं स्थायी रूप से मेरठ आ गया। यों तो मेरठ से जुड़ी कई यादें हैं मगर इनमें मुख्य है मेरी पिटाई। मेरे साथ जैसा कि नौकरियों के मामले में हुआ है कि अनायास ही मिलती रहीं उसी प्रकार पिटाई के मामले में भी हुआ। किसी से कोई विवाद नहीं था और न ही किसी खबर को ले कर कोई पंगा था। कहने का मतलब कि पिटाई के लिए कोई भी परिस्थिति नहीं थी फिर भी पिटाई हो गई। है ना अजीब बात। हुआ यह कि मेरठ पालिका के कर्मचारियों को कोई युवक नवभारत टाइम्स के नाम पर परेशान कर रहा था। मेरे पास फोन आया तो मैंने कह दिया कि अगली बार जब वह आए तो उसे बिठा लेना और मुझे फोन कर देना।

एक थी संतोष कोली

Dr. Kumar Vishwas : एक थी संतोष… बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की शब्दावली के अनुसार 'दलित' कहलाने वाले एक परिवार की बेटी। चेतना की पहली सीढ़ी पर उसका सामना उस दुकानदार से हुआ, जिसकी दुकान के बाहर 'सरकारी राशन की दुकान' का बोर्ड लगा था। उस दुकान के बारे में उसने सुना था, कि वहां से उसे और उसके परिवार के लिए सस्ता राशन मिलेगा। लेकिन यह भ्रम टूटने में ज्यादा समय नहीं लगा, क्योंकि वहाँ शायद ही कभी राशन मिलता था। लेकिन क्यों? इस बात की पड़ताल करने में जुटी, तो जमाखोरी, कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की एक पूरी काली दुनिया नज़र आई। अब क्या?

बाबाओं, ज्योतिषियों पर नियामक बनाने के लिए आदेश नहीं दे सकते : हाई कोर्ट

लखनऊ : आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा ज्योतिषियों और बाबाओं के लिए सरकारी नियंत्रक संस्था बनाए जाने के लिए दायर पीआईएल की कई बातों से सहमत होते हुए भी इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि वे इस सम्बन्ध में निर्देश पारित नहीं कर सकते. जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस डी के उपाध्याय की बेंच ने कहा कि वर्तमान में भी गलत लोगों पर कार्यवाही किये जाने हेतु औषधि और जादुई उपचार अधिनियम जैसे कानूनी प्रावधान हैं लेकिन इसके आगे इन गतिविधियों को नियंत्रित करने हेतु आदेश करने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं है, भले ही इसकी कितनी भी आवश्यकता हो, क्योंकि यह विधायिका का कार्यक्षेत्र है.

‘इन पत्रकारों ने बाबा को बदनाम किया, अब इन्हें देखना है’

आसाराम समर्थक पुलिस थाने, जेल, कोर्ट परिसर एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर हाथ में ऑडियों एवं विडियो कैमरे लेकर घूम रहे थे। ये लगातार महत्वपूर्ण जानकारियां अहमदाबाद और दिल्ली आसाराम के निकटस्थों को भेज रहे थे। इन लोगों ने जोधपुर में आसाराम मामले की कवरेज कर रहे चैनल एवं समाचार पत्रों के पत्रकारों की फोटो भी फेसबुक पर आसाराम समर्थकों को भेजी जिसमें कहा गया कि इन पत्रकार लोगों ने बाबा को बदनाम किया, अब इन्हें देखना है।

नक्सलियों से संबंध के आरोप में स्वतंत्र पत्रकार समेत दो गिरफ्तार

गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) : महाराष्ट्र के गौंडिया जिले के देवरी गांव के पास एक स्वतंत्र पत्रकार समेत दो लोगों को नक्सलियों के साथ कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार कर लिया गया।  पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार लोगों की पहचान उत्तराखंड के ऋषिकेश के रहने वाले प्रशांत राही उर्फ एबी सांगलीकर (50) और छत्तीसगढ़ के कांकेड़ जिले …

अब पत्रकार भी बन सकेंगे सूचना आयुक्त, सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला

नई दिल्ली: सूचना के अधिकार से जुड़े अपने ही एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयुक्तों और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के मामले में यह फैसला दिया था। हमारे संवाददाता के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि सूचना आयोग में गैर-न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति हो सकती है। नियुक्ति के दौरान विज्ञान और पत्रकारिता से जुड़े गणमान्य लोगों को भी आयोग में शामिल करने पर ध्यान दिया जा सकता है।

सपा नेताओं को गरियाने वाला सपा जिलाध्यक्ष को हटाने की मांग तेज

बस्ती (यूपी) : अपने कारनामों के लिये मशहुर और विवादित सपा के जिलाध्यक्ष फिर से सुर्खियों में आ गये हैं। इस बार आरोप छोटा नहीं बल्कि बेहद गंभीर है। वजह है सपा के ही नेताओं के हाथ लगी वो सीडी जिसमें जिलाध्यक्ष ने सारी मर्यादाओं को भूलकर अभद्र टिप्पणी की है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले सांसद स्व. बृजभूषण तिवारी से लेकर सपा के कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह और राज्य मंत्री श्रीपत सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुये जिलाध्यक्ष के आवाज की एक सीडी सपा के लोगों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को देते हुये कार्यवही की मांग की है।

हिन्दुस्तान, आगरा से सातवां विकेट गिरा, अखिलेश तिवारी पहुंचे ‘गवर्नेंस नाउ’

हिन्दुस्तान आगरा के संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा के रवैये से परेशान लोग हिन्दुस्तान छोड़ते जा रहे हैं। बीते चार माह में यह हिन्दुस्तान आगरा का सातवां विकेट गिरा है। नया नाम सीनियर सब एडीटर अखिलेश तिवारी का है। अखिलेश तिवारी ने आलोक मेहता के संपादकत्व में निकल रही गवर्नेंस नाउ पत्रिका में बतौर उ.प्र. उत्तराखंड स्टेट ब्यूरो चीफ के पद पर ज्वाइन किया है हैं। अखिलेश हिन्दुस्तान आगरा की लॉचिंग के समय से ही थे। बिल्डर्स के खिलाफ चले अभियान में अखिलेश की मेहनत पर कई वरिष्ठों ने हाथ साफ किए। संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा ने उनसे इस बार प्रमोशन का वादा किया था लेकिन बाद में वह अपनी बात से मुकर गए और उन पर दूसरे पक्ष का होने का आरोप मढ़ दिया।

चैनल सलाहकारों की बहाली का प्रसार भारती का नया फंडा

24 को विज्ञापन और 27 को इंटरव्यू। यह नया फंडा है प्रसार भारती का। प्रसार भारती ने पटना, लखनउ, जयपुर और भोपाल में चैनल सलाहकारों की नियुक्ति के लिए 24 अगस्त 2013 को अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराया है। यह पद संपादक के स्तर का माना जाता है। इंटरव्यू का डेट रखा है 27 अगस्त 2013 को दिल्ली स्थित दूरदर्शन मुख्यालय में 11 बजे दिन में। क्या यह संभव है? किसी ट्रेन में आरक्षण मिलने से रहा। अभ्यर्थी पहुंच ही नहीं पायेंगे।

आरएसटीवी की बहाली में बेसिल पर उठी उंगुलियां

राज्यसभा टीवी में बहाली की प्रक्रिया को लेकर ब्राडकास्टिंग इंजीनियरिंग कंसल्टेंट इंडिया लिमिटेड, बेसिल पर उंगलियां उठने लगी है। बेसिल ने राज्यसभा टीवी के लिए कांट्रैक्ट के आधार पर बहाली के लिए अपने बेवसाइट पर सितंबर 2012 के अंतिम सप्ताह में विज्ञापन जारी किया था। बेवसाइट से अनभिज्ञ लोगों को तो इसकी भनक तक नहीं लगी। कुछ ही लोग जान पाये और जिन लोगों ने आवेदन किया उनमें अधिसंख्य को निराशा ही हाथ लगी।

जी न्यूज ने वाकई हनी सिंह का पहला सीरियस इंटरव्यू लिया!

Vineet Kumar : जी न्यूज पर जिस बेशर्मी से हनी सिंह अपनी तारीफों के पुल बांध रहा है,,( मैं बहुत अच्छा आदमी हूं, मैं बहुत ईमाददार हूं, कोई सिंह नहीं लगाता, मैं सिंह ही लाउंगा) उससे रत्तीभर भी कम बेशर्मी से चैनल का दागदार संपादक सुधीर चौधरी उसकी तारीफ में कसीदे नहीं पढ़ रहा है. "हम आम लोगों की भाषा बोलते हैं", "लड़कियां पहले डरती थी लेकिन अब खुलकर सामने आ रही है", "हर लीजेंड के साथ ऐसा होता है तो मेरे साथ भी हो रहा है, पैरेंट्स ने कहा और होगा" जैसे स्लग और पंक्तियों की स्क्रीन पर आवाजाही जा रही है.

आपके तारे, कालचक्र, निर्मल दरबार, लाल किताब, यस आई कैन चेंज जैसे कार्यक्रमों-विज्ञापनों के पीछे चैनल के क्या तर्क हैं?

Vineet Kumar : आजतक के सरोकारी मीडियाकर्मियों से पूछा जाना चाहिए कि आसाराम की पुरानी स्टिंग को लेकर अभी तक उसकी आरती उतार रहे थे, संध्यावंदन कर रहे थे…और जो आपके तारे, एस्ट्रो अंकल उपाय बताते हैं क्या उससे पाखंड के बजाय जागरुकता अभियान को बढावा मिलता है?

राजू राज, सुमीत गुप्‍ता एवं तारकेश्‍वर की नई पारी

आईबीएन7 से इस्‍तीफा देने वाले राजू राज ने अपनी नई पारी जी न्‍यूज के साथ शुरू कर रहे हैं. उन्‍होंने जी न्‍यूज के क्राइम चैनल में स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट के पद पर ज्‍वाइन किया है. राजू राज लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. राजू के जी न्‍यूज ज्‍वाइन करने की पुष्टि नवीन कुमार ने की.

सफेदपोश नटवरलाल! : स्‍वतंत्र भारत अखबार के मालिक पर करोड़ों रुपए बकाया

लखनऊ। 1912 से लेकर 1996 तक 8 राज्यों के उद्योगपतियों के लिए चुनौती बने मिथलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल अपने ठगी के कारनामों से जो शोहरत हासिल की थी, उस राह पर अब उत्तर प्रदेश का एक सफेदपोश नटवरलाल चल रहा है। इस सफेदपोश नटवरलाल ने अपनी ठगी के कौशल के बल पर जहां सरकारी संस्थाओं को करोड़ों रुपए का चूना लगाया वहीं आजादी की पहली किरण का साक्षी दैनिक समाचार पत्र स्वतंत्र भारत के पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया है। इस सफेदपोश नटवरलाल के खिलाफ सरकारी धन को हड़पने के कई मामले चल रहे हैं, लेकिन कुछ आईएएस अफसर और राजनीतिक आकाओं के संरक्षण के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

दैनिक भास्कर के चीफ रिपोर्टर फ्लाइट में आसाराम के ‘प्रवक्ता’ बने!

दैनिक भास्कर इंदौर में तीखी रिपोर्टिंग संत आसाराम बापू के खिलाफ की जा रही है. उसी अखबार के चीफ रिपोर्टर प्रशांत कालीधर पूरी तरह से आसाराम के बचाव में खड़े हो गए. प्रशांत कालीधर संघ परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता हैं.  भाजपा विचारधारा से उनका प्रेम किसी से छिपा नहीं है. पार्टी के इशारे पर कई दफा भास्कर में बीजेपी नेताओं के खिलाफ खबरों को ऐन केन प्रकार से डायल्यूट किया जा चुका है. ताजा मामले के अनुसार कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला के बापू के पक्ष में आने के बाद प्रशांत कालीधर भी भास्कर के स्टैंड के खिलाफ जाते हुए पूरी मीडिया के खिलाफ ही खड़े हो गए है. 

अगले चौदह दिनों में आसाराम को लेकर चलनेवाली न्यूज चैनलों की स्टोरी की ये थीम और स्लग है…

Vineet Kumar : बैकुंठ के चौदह दिन.. कारावास में उपवास… सलाखों में साधना… जेल में हरिओम… बापू का वैराग्य….अगले चौदह दिनों में आसाराम को लेकर चलनेवाली न्यूज चैनलों की स्टोरी की ये थीम और स्लग है..पूरी उम्मीद है कि इस दौरान न्यूज चैनल आसाराम की ऐसी ही और इसी के आसपास छवि बनाने की कोशिश करेंगे जिससे कि सबकुछ जल्द ही सामान्य हो जाएग. 

महिला रिपोर्टर से आसाराम कहता है- आओ, मेरी गोद में सो जाओ, पुलिस को मैं देख लूँगा

आजतक न्यूज चैनल पर एक स्टिंग चल रहा है. आसाराम का स्टिंग है यह. आज तक की रिपोर्टर जाती है मिलने, क्रिमिनल बन कर. मुंबई से भागी हुई बताकर. अगर पूनम (रिपोर्टर का बदला नाम) वहां से निकलती नहीं तो उस दिन उसका भी बलात्कार हो जाता. मामला इतना बिगड़ गया था कि आसाराम ने उसे उसी दिन अपने साथ सोने के लिए कहा.

कुछ महिलाएं और बच्चे रो रहे थे क्योंकि सबको आपदा के बाद से ही डर सताने लगा था…

Mayank Saxena : तारीख याद करता हूं, 24 जून की एक रात मयाली कस्बा…एक छोटे से अजीबोगरीब और अवैध तरीके से कई मंज़िलों में बनाए गए एक होटल में हम रात काट रहे थे…अचानक रात 12 बजे तेज़ बारिश शुरू हो गई…कुछ देर बाद ज़ोर की आवाज़ा हुई, पता चला कि होटल के ठीक सामने तिराहे पर बहने वाला गदेरा (झरना) टूट गया है और वहां से लैंड स्लाइड में पत्थर और मलबा बिजली की तेज़ी से सड़क पर इकट्ठा होने लगा है… ज़्यादातर साथी सोने लगे थे…दूसरे कमरों में कुछ महिलाएं और बच्चे रो रहे थे क्योंकि सब को आपदा के बाद से ही डर सताने लगा था…हम ने कुछ मोमबत्तियां जला कर उनको दी और ढांढस बंधाया… 

मीडिया जिस तरह आसाराम बापू को सबसे बड़ा दुराचारी साबित करने का अभियान चला रहा, वह किसी दृष्टि से पत्रकारिता नहीं है

Awadhesh Kumar : कई मित्र मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं आसाराम बापू के पक्ष में क्यों खड़ा हो गया हूं। सच यह है कि मैं न उनके पक्ष में खड़ा हूं न विपक्ष में। जब मामला पुलिस से न्यायालय तक है तो पक्ष-विपक्ष का प्रश्न कहां है। मेरा प्रतिकार तो मीडिया की भूमिका से है। मैंने अपनी टिप्पणियों में यही कहा है कि मीडिया आरोप के साथ ही जिस तरह आसाराम बापू को सबसे बड़ा दुराचारी साबित करने का अभियान चला रहा है वह किसी दृष्टि से पत्रकारिता नहीं है। किसी का दिन रात पीछा करना, उसे चैन से कहीं आने-जाने न देना कौन सी पत्रकारिता है? मीडिया को पुलिस पर दबाव इस बात का बनाना चाहिए था कि वह बिना किसी के पक्ष-विपक्ष में गए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई करे। 

प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने चहेतों पर धन लुटाने में लगी उत्तराखंड सरकार

देहरादून :  उत्तराखण्ड राज्य में आई देश की सबसे बडी त्रासदी का दुख पूरे देश को है। जिन्होंने अपनो को खो दिया है या जिन्होंने अपने बच्चों, अपने बुजुर्गों, अपने रिश्तेदारों को अपनी आंखों के सामने मलवे के नीचे दफन होते देखा है, उनका दुख तो वही लोग ही जानेंगे। जब सुनने वालों की रूह कांप जाती है और आंखों मे आंसू भर आते हैं तो उनका हाल सभी समझ सकते हैं। वैसे तो सरकार ने आपदा बचाव कार्य तो किए हैं लेकिन उसके उलट उनका प्रचार-प्रसार भी बहुत जोरों से समाचार पत्रों व टीवी चैनलों के माध्यम से किया लेकिन सरकार ने किसी भी विज्ञापन मे जो लोग मृत थे या जो लोग लापता थे, उनका ना ही कोई फोटो जारी किया, ना नाम-पते ही दिखाये। सिर्फ और सिर्फ अपनी बड़ाई के पुलिन्दे बांधे। कुछ इस तरह के प्रचार दिखाए जाते रहे- सरकार ने 16 हैलिकाप्टर लगा रखे हैं… सरकार ने इतने गांवों में राशन भिजवाया है। 

संजय तिवारी तीसरी बार शायद कभी नहीं रोयेगा

Sanjay Tiwari : विस्फोट.कॉम आनलाइन दुनिया में लौट आया है, बहुत सारा सबक सीखते हुए। इस बीच मेरी आंख में दो बार आंसू आये। एक बार तब जब मैंने अपने आपको छोटी सी रकम के लिए असहाय महसूस किया था और दूसरी बार तब जब एक ऐसे मित्र ने मदद की पेशकश की जिन्हें खुद बहुत मदद की दरकार है। चिंता मत करो दोस्त। अब संजय तिवारी तीसरी बार शायद कभी नहीं रोयेगा। (विस्फोट के संस्थापक और संपादक संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.)

नभाटा में पहला दिन : नियुक्ति पत्र देखते ही चिढ़ गया पंकज शर्मा

नौकरी के पहल दिन का व्यक्ति के जीवन में विशेष महत्व होता है मगर मेरे लिए नवभारत टाइम्स में नौकरी के पहले दिन का इस लिए विशेष महत्व है कि मुझ जैसे देहाती आदमी को बिना किसी सिफरिश और भागदौड के वह नौकरी मिल गई जिसके लिए लोग बड़े बड़े नेताओं की सिफारिश लिए घूमते हैं। दूसरे मेरी कोई फैमिली बैकब्राउंड भी नहीं थी।
 

82 दिनों बाद झांसी जेल से बाहर निकले आजतक के पत्रकार अमित श्रीवास्तव

झांसी में पुलिस वालों ने खबरों से चिढ़कर आजतक के पत्रकार अमित श्रीवास्तव के खिलाफ ऐसी घेराबंदी की कि उन्हें दो महीने बाइस दिन तक जेल में रहना पड़ा. पिछले दिनों वे जमानत के बाद जेल से छूटे. अमित श्रीवास्तव के मुद्दे पर पत्रकारों ने जो धरना प्रदर्शन किया, उसमें भी फूट डालकर पुलिस वालों ने कई पत्रकारों को आपस में भिड़ा दिया और कइयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी.

‘विस्फोट’ के अलावा ‘मोहल्ला’ भी संकट में : हम अच्छे हिंदी पोर्टलों को आर्थिक मदद क्यों नहीं दे सकते!

विकास कुमार गुप्ता ने  अपने आलेख ‘संजय और विस्फोट के बहाने हिंदी न्यू मीडिया की पड़ताल’ में सच्चाई बयान की है। आजकल जब बड़े-बड़े मीडिया घराने संकट से जूझ रहे हैं, तो वह हिंदी न्यू मीडिया कब तक जिंदा रह सकता है, जिसके पास आय के साधन न के बराबर हैं। 'विस्फोट' ही क्यों, इस जैसे कई पोर्टल अंतिम सांसें गिन रहे लगते हैं। 'मोहल्ला लाइव' 3 अगस्त के बाद अपडेट नहीं किया गया। क्या यह इस ओर इशारा है कि 'मोहल्ला' भी अब गुजरे जमाने की बात होने वाला है। वैचारिक बहस के लिए जाने, जाने वाला 'मोहल्ला' दम तोड़ देगा, तो बहुत नुकसान होगा। 

इलना की नई टीम का गठन, परेश नाथ पुनः अध्यक्ष

भारतीय भाषाई समाचारपत्र संगठन 'इलना' की 72वीं साधरण वार्षिक सभा आगरा में संपन्न हुई, जिसमें देशभर से आए 160 प्रकाशकों ने हिस्सा लिया व प्रकाशन में आ रही समस्याओं को उठाया. सभा में इलना के वर्तमान अध्यक्ष श्री परेश नाथ के नेतृत्व में पूर्ण विश्वास जताते हुए उन्हें पुनः सर्वसम्मति से निर्विघ्न अध्यक्ष चुना गया. अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री परेश नाथ ने भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषाई समाचारपत्र ही देश के लोकतंत्र की जान हैं. इन भाषाओं के बगैर हमारे दूसरे कोई संवैधनिक या कानूनी अध्किार सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने प्रकाशन जगत के छोटे-बड़े या भाषाओं के अलग-अलग समूहों में बंटने पर चिंता प्रकट की और प्रकाशकों को आगाह किया कि प्रकाशकों के बीच फैलती दूरी प्रकाशनों के लिए खतरा है.

उप्र में पीपीपी कार्ययोजनाओं की स्वीकर्ता समितियों में सिविल सोसाइटी को कोई जगह नहीं

लखनऊ । पीपीपी जिसे अंग्रेजी में 'पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप' और हिंदी में 'जन-निजी भागीदारी' कहा जाता है । यह हैरतअंगेज है कि जिस पीपीपी के नाम की शुरुआत ही 'पब्लिक' शब्द से होती है उसी पीपीपी के तहत स्वीकृत किये जाने वाली कार्ययोजनाओं की स्वीकर्ता समितियों में 'पब्लिक' यानि जनता की आवाज सरकार तक पंहुचाने बाली ‘सिविल सोसाइटी’ के सदस्यों के लिए कोई जगह ही नहीं है। इस तथ्य का खुलासा लखनऊ की सामजिक कार्यकत्री उर्वशी शर्मा द्वारा माँगी गयी एक आरटीआई से हुआ है ।

STOP MEDIA BASHINGS : DUJ

The Delhi Union of Journalists (DUJ) condemns the increasing cases of attacks on both the electronic and the print media by supporters of the Asaram Bapu  following allegations of sexual assault on a young girl . It has called upon the government both at the centre and state not only to immediately take stern action against those responsible for the attacks but to ensure a risk insurance cover for all journalists taking into account the increasing attacks on the press. It has called for immediate steps to ensure a national law codified by an Act of Parliament to ensure protection of working journalists be they from print or electronic media. 

अनिल चंदोला का हल्द्वानी तबादला निरस्त

देहरादून : सूचना विभाग में अपर निदेशक पद पर तैनात डा. अनिल चंदोला का मीडिया सेंटर, हल्द्वानी के लिए किया गया तबादला निरस्त कर दिया गया है। वह अब अपने पद पूर्ववत बने रहेंगे।राज्य में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान और बचाव-राहत कार्यो को लेकर मीडिया में हुई राज्य सरकार की किरकिरी के बाद जुलाई के पहले पखवाड़े में सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में व्यापक फेरबदल किया गया था। शासन ने सचिव सूचना एमएच खान और महानिदेशक सूचना विनोद शर्मा को उनके पदों से हटा दिया। 

इंजीनियर प्रशांत को भी छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया

Chandrika भाई के हवाले से खबर आ रही है कि कामरेड हेम, पांडु और महेश की गिरफ्तारी के विरोध के लिए गढ़चिरोली पंहुचे कामरेड प्रशान्त राही गिरफ्तार कर लिए गये हैं. गौरतलब कि पेशे से इंजीनियर कामरेड प्रशांत 2007 से 2010 तक नक्सल होने के आरोप में गैरकानूनी ढंग से जेल में कैद रखे जा चुके हैं और मुझे ठीक ठीक याद है कि उनके लिए मार्क्सवादी खेमे में भी चुप्पी ही थी और हम कुछ ही लोग थे जो लगातार बोल रहे थे. 

तीन साल बाद दूरदर्शन पर फिर विद्रोही कवि नजरुल के गीत

दूरदर्शन की ओर से प्रतिबंध नहीं था। लेकिन काजी नजरुल इस्लाम के गीतों के रायल्टी विवाद की वजह से दूरदर्शन में विद्रोही कवि नजरुल के गीतों का गायन तीन साल से बंद था। जैसे कि रवींद्र संगीत बंगाल की सांस्कृतिक पहचान है, तो इसी संस्कृति का अविच्छेद्य अंग है नजरुल संगीत। अब यह मामला सुलझ गया है। काजी के परिजनों की ओर से कवि की पुण्य तिथि पर नजरुल संगीत के प्रसारण को हरी झंडी दे दी गयी है।

संजय और विस्फोट के बहाने हिंदी न्यू मीडिया की पड़ताल

वैसे तो मीडिया के तारीफों को लेकर बहुत से सिद्धान्त है और मीडिया की वीरता के बहुत से बखान है। वाशिंगटन पोस्ट से लेकर जापानी मीडिया तक के। लेकिन न्यू मीडिया की कहानी भी कुछ कम नहीं। भारत जैसे विकासशील देश में लगभग 7 करोण 44 लाख उपयोगकर्ताओं में व्याप्त न्यू मीडिया न सिर्फ सरकारी अनदेखी से आहत है वरन पीआईबी सरीखे केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के नजरअंदाजी और कुनीतियों से भी आहत है। न्यू मीडिया को लेकर विज्ञापन और सहयोग से हमारे कार्पोरेट और सरकारी नजरअंदाजी सबके सामने है। जहां पचास कापी छपने वाले पत्रिका, अखबारों को न सिर्फ हजारों, लाखों का विज्ञापन नसीब हो रहा है बल्कि सरकारी और कार्पोरेट सहयोग और वाहवही भी नसीब हो रही है।

संभल के पत्रकारों ने आसाराम समर्थकों की मीडियाकर्मियों से गुंडई के खिलाफ प्रदर्शन किया

उत्तर प्रदेश के नए बने संभल जिले के पत्रकारों ने भी सड़क पर उतर कर मीडियाकर्मियों पर आसाराम समर्थकों के हमले का विरोध किया. आसाराम के समर्थकों द्वारा राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में मीडिया कर्मियों पर हमले के विरोध में देश भर के पत्रकार आवाज बुलंद कर रहे हैं.

देवनाथ ने अमर भारती और शशांक वाजपेयी ने दैनिक भास्कर छोड़ा

अमर भारती अखबार में कार्यरत देवनाथ ने इस्तीफा दे दिया है. देव अमर भारती ग्रुप के मुख्य समाचार संपादक थे. उनके नेतृत्व में अखबार के कई एडिशन की लांचिंग हुई. वे नई पारी की शुरुआत जी न्यूज के साथ करने जा रहे हैं. गोरखपुर के रहने वाले देवनाथ ने कम ही समय में अपनी मेहनत व प्रतिभा के बल पर पत्रकारिता में तरक्की की कई सीढ़ियां चढ़ी.

इंदौर में भास्कर और नईदुनिया ने पेज घटाए, प्रभात खबर ने लेआउट बदला

देश के दो बडे अखबार समूहों पर मंदी का असर दिखने लगा है. इंदौर शहर में दैनिक भास्कर और जागरण ग्रुप के अखबार नईदुनिया ने अपने पेजों की संख्या घटा दी है. पिछले दो तीन दिनों से यहां नईदुनिया और भास्कर 14 पेजों में छप रहे हैं. हालांकि अंग्रेजी अखबार और शहर के दूसरे हिंदी अखबारों ने अब तक अपने पेज नहीं घटाए हैं. 

साधना वालों की दलाली से आजिज संजय शेखर ने इस्तीफा दिया, जिया न्यूज से जुड़े

साधना का एक और महत्वपूर्ण विकेट गिर गया है। छत्तीसगढ़ में चैनल की लांचिग से ही साधना के महत्वपूर्ण स्तंभ रहे और साधना को छत्तीसगढ़ में स्थापित करने वाले स्टेट ब्यूरो चीफ संजय शेखर ने साधना को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कल अपने फेसबुकवाल पर इसकी घोषणा कर दी है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से उनके साधना छोड़ने के कयास लगाये जा रहे थे क्योंकि पिछले कुछ दिनों से साधना में काम करने का माहौल पूरी तरह खत्म हो गया है। मालिक को किसी भी कीमत पर सिर्फ पैसा चाहिए। इसके लिए दलाली करनी पड़े या ब्लैकमेलिंग, मालिक को इससे मतलब नही है।

इन मुख्यमंत्रियों ने डेढ़-दो लाख करोड़ हाउसिंग सेक्टर से कमाये और विदेश भेजे

भारत के संकट (आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक) का एक मूल पेच दबा-ढका है. हालांकि सत्ता की दुनिया से जुड़ा हर इंसान इन असल तथ्यों से वाकिफ है. पर कमोबेश इस राजनीतिक संसार का हर इंसान इसमें गहराई से उतरने की इच्छा से प्रेरित है, इसलिए संकट आमंत्रित कर रही, इस दुनिया की असल खबरें, मुख्यधारा की बहस में हैं ही नहीं. मसलन, टूजी प्रकरण में अनिल अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी की गवाही का प्रसंग ताजा है. जब सीबीआई अदालत ने इस प्रकरण में देश के बड़े कारपोरेट घरानों की टॉप हस्तियों को बुलाना शुरू किया, तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा कि गवाही के लिए हमें क्यों बुलाया जाये? 

तिवारी ने मां की बीमारी के नाम पर अमिताभ ठाकुर से की ठगी, एफआईआर दर्ज

: मेरे गुनाहगार तो स्वामी विवेकानंद हैं : बचपन में ही “हार की जीत” कहानी पढ़ रखी है जिसमे महान कथाकार सुदर्शन ने बाबा भारती और डाकू खडग सिंह के जरिये मनुष्य के विश्वास की महत्ता का वर्णन किया है और यह बताया है कि किस प्रकार मनुष्य के विश्वास की हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं है. कुछ ऐसी प्रकृत्ति भी रही कि स्वयं भी मनुष्यता पर अक्षुण्ण विश्वास रहा. यह तो हुआ कि एक, दो या कुछ लोगों पर शंका रही, अविश्वास रहा पर अपनी सम्पूर्णता में मानवता के प्रति आतंरिक रूप से सदा अत्यधिक उदारता रही. 

इंडियन एक्सप्रेस में खबर छपने के बाद एनडीएमसी ने डिफाल्टर्स की सूची क्यों बदल दी?

नई दिल्ली । आठ दिन पहले की बात है। 24 अगस्त को दी इंडियन एक्सप्रेस में एक समाचार प्रकाशित हुआ। इसके मुताबिक एनडीएमसी ने 1500 डिफाल्टर्स उन सांसदों की सूची वेबसाइट पर जारी की है, जिन्होंने बिजली और पानी का बकाया बिल अदा नहीं किया है। इस सूची में मौजूदा सांसद, पूर्व सांसद और उन सांसदों के नाम भी शामिल थे, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। 126 पेज की इस सूची में कुल मिलाकर यह संख्या 1714 बनती है। इस सूची में राजनाथ सिंह, अंबिका सोनी, अजीत सिंह, लालू प्रसाद यादव, रेणुका चैधरी, मधु कोड़ा और दिवंगत सांसद माधव राव सिंधिया, राजेश पायलट और सुनील दत्त के नाम भी शामिल थे। 

पत्रकारों पर हो रहे हमलों से गुस्साए वाराणसी के मीडियाकर्मियों ने रोड मार्च निकाला

विवादित संत आशाराम के समर्थकों ने मीडिया पर हमला करके यह जता दिया कि उन्हें लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं है. इंदौर और फिर जयपुर में मीडियाकर्मियों से मारपीट ने आशा राम के नाम के साथ एक और विवाद जोड़ दिया है. पत्रकारों पर हो रहे इन हमलों से गुस्साए वाराणसी के मीडिया कर्मियों ने रोड मार्च निकाला. ये मार्च इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोशियेशन के बैनर तले रविदास गेट से काशी हिन्दू विश्वविध्यालय सिंह द्वार तक पहुचने के बाद पुनः रविदास गेट पर समाप्त हुआ। 

भोजपुरी फिल्मों की दुर्गति के कई कारण

पिछला साल करीब 100 गो भोजपुरी फिल्म बनल रहे, आ सच्चाई इहे बा कि ओह में से शायद 5% भी आपन लागत निकाले में सफल  ना भइल। ओह में से कई गो त अभियो बक्सा में बाडी सन, एगो अदद डिस्ट्रीब्युटर के तलाश में। अगर रउआ के रोज नया-नया भोजपुरी फिल्मन के हिट होखे के खबर पढे के आदत बा, त शायद ई रिपोर्ट राउर आँख खोल दी। त का एकर मतलब ई भइल कि भोजपुरी सिनेमा के ई सुनहरा दौर खतम हो चुकल बाटे? हमनी का एह बारे में कई गो भोजपुरी फिल्मकार, अभिनेता, समीक्षक अउर दर्शकन से बात कइनी जा, अउर भोजपुरी फिल्मन के एह हालत के पिछे जवन कारण निकलल, ऊ केहु के भी झकझोरे खातिर काफी बा। 

पुरस्कार का मुद्दा चित पर चढ़ाने का क्या मतलब? : शिवमूर्ति

पिछले दिनों हर साल की तरह सरकारी साहित्यिक पुरस्कारों की घोषणा हुई। पुरस्कृत लोगों का नाम पढक़र लोग पूछने लगे कि ए लोग कौन हैं? दो एक नाम छोडक़र कभी किसी का नाम सुना नही गया। जबकि परिचय में बताया गया है कि किसी ने दस किताबें लिखी हैं किसी ने बीस। जिन्हें मुख्यधारा के लेखक कवि कहा जाता है, चाहे मार्क्सवादी हों चाहे कलावादी या कोई और वादी, उनमें क्षोभ व्याप्त है- भाई, यह क्या हो रहा है। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। पब्लिक मनी अपात्रों में क्यों बाँटी जा रही है?

Cheated by Country Vacation Hyderabad

Hi, I have a strong proof against Country vacation Hyderabad, how they are cheating to the people and innocent people are getting trapped with their so many different – different offers. we group of people went to Police station for complain but they refused to take the complain by saying we can note down FIR if case is of 30+Lacs case. But we were only 10 people and amount was not more than 15 lacs.

पत्रकार श्रेणिक बाफना का रतलाम प्रेस क्लब ने किया सम्मान

रतलाम। तीन दशक से ज्यादा समय से कार्यरत पत्रकार श्रेणिक बाफना के सेवानिवृत्त दिवस को रतलाम प्रेस क्लब ने समारोह पूर्वक मनाया। शहर के चंपाविहार हाल में आयोजित कार्यक्रम में श्री बाफना का शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया एवं उनके अनुभवों का लाभ पत्रकार जगत को मिलता रहे यह कामना की गई।  कार्यक्रम में श्री बाफना के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी ने कहा कि श्री बाफना उसूलों पर चलने वाले एक निर्भिक पत्रकार के रूप में पहचाने जाते हैं। आपने पत्रकारिता को प्राथमिकता देकर रेलवे जैसे विभाग की नौकरी को तिलांजली दी थी। तीन दशक से अधिक समय तक एक ही संस्थान में कार्य करना निश्चित ही बहुत कठिनाई भरा होता है। लेकिन, श्री बाफना ने अपने कार्य को अपनी ही शैली में अंजाम दिया, यह नई पीढ़ी  के लिए अनुकरणीय रहेगा। 

छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रोनिक मीडिया एसोसियेशन ने मीडियाकर्मियों की पिटाई का विरोध किया

रायपुर। आसाराम समर्थकों द्वारा मीडिया कर्मियों की पिटाई का विरोध छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रोनिक मीडिया एसोसियेशन ने भी किया है। एसोसियेशन के सदस्यों ने अपनी एफ़.आई.आर. लिखाने के बाद तेलीबांधा थाने के सामने ही एक बैठक की। एसोसियेशन के संस्थापक सदस्य अह्फाज़ रशीद ने यहाँ कहा कि 24 घंटे के भीतर अगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो एसोसियेशन अगला कदम उठाने को मजबूर होगा। आज की घटना के विरोध में आसाराम के किसी भी आयोजन का बहिष्कार का निर्णय भी लिया गया। 

मुक्ता की नयी पारी, जिया न्यूज़ की मध्य प्रदेश स्टेट हेड

अब तक साधना न्यूज़ से जुडी रहीं मध्य प्रदेश की वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार मुक्ता पाठक ने ख़बरों के नए तेवर और कलेवर को लेकर आ रहे जिया न्यूज़ चैनल के साथ नयी पारी शुरू की है. मुक्ता मध्य प्रदेश में जिया न्यूज़ के स्टेट हेड की ज़िम्मेदारी संभालेंगी। मुक्ता मध्य प्रदेश की पहली महिला टेलीविज़न पत्रकार हैं. साधना से पहले ईटीवी में भी उन्होंने लम्बे समय तक काम किया है. 

उत्तराखंड सरकार को क्यों है केदारनाथ में पूजा कराने की जल्दी!

: जब श्रद्धालु ही नहीं होंगे, तो किसके लिए होगी यह पूजा : देहरादून, 2 सितम्बर। गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक पहुंचने के लिए अभी सड़क बनी नहीं है, पैदल जाना भी दूभर है, ऐसे में प्रदेश सरकार का 11 सितम्बर को केदारनाथ में पूजा कराना किसी के गले नहीं उतर रहा है। मंदिर कमेटी के सदस्यों और धर्माचार्य भी सरकार के इस फैसले पर मजबूर हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोग और प्रदेश के लोग अभी तक यह समझ नहीं पाए हैं कि आखिर केदारनाथ में पूजा कराने की जिद सरकार क्यों कर रही है और यह पूजा किसके लिए की जा रही है। यह सवाल अभी भी मुंह बाहे खड़ा है कि जब केदारपुरी तक आम श्रद्धालु नहीं पहुंच पा रहा है तो इस पूजा का क्या औचित्य। 
 

रायपुर में आसाराम के समर्थकों ने मीडियाकर्मियों से बदसलूकी और मारपीट की

रायपुर : पूरे देश में आसाराम के समर्थकों की गुंडागर्दी जारी है..आसाराम के समर्थकों की गुंडागर्दी रविवार को रायपुर में भी देखने को मिली..रायपुर में आसाराम की गिरफ्तारी को लेकर समर्थक हंगामे पर उतर आए.रायपुर और कोलकाता के बीच NH-6 पर आश्रम के समर्थकों ने जाम लगा दिया.जी न्यूज मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और बंसल न्यूज के मीडियाकर्मियों के कैमरे तोड़ दिए गए.
 

एक चैनल में कांग्रेसी नेता के कथित हजारों करोड़ निवेश के मसले में कुछ अपडेट

इस प्रकरण में कुछ नई जानकारियां आई हैं. पहली तो ये कि कोर्ट की तरफ से उस आईआरएस आफिसर के बयान / कथन आदि को प्रकाशित करने पर रोक है जिन्होंने इस कथित करप्शन का खुलासा किया है. कोर्ट ने ऐसा आदेश आईआरएस अधिकारी के मानसिक रूप से गड़बड़ यानि पागल होने के अस्पताल के सर्टिफिकेट के आधार पर दिया है. दूसरी बात, नेता और चैनल पर आरोप को लेकर सीबीआई की विशेष अदालत ने वर्ष 2011 में इस आईआरएस अधिकारी पर जुर्माना लगाया था क्योंकि अदालत ने इन आरोपों को निराधार पाया और आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज न होने की बात कही है. विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के बारे में उस वक्त स्टेट्समैन में जो खबर प्रकाशित हुई थी, वह इस प्रकार है..