गाजीपुर के पत्रकारों ने पेड न्यूज से विरत रहने की खाई कसम

जिला प्रशासन ने गाजीपुर के पत्रकारों को दिलाई पेडन्यूज से विरत रहने की शपथ। तमाम कवायदों के बावजूद पेडन्यूज पर लगाम लगा पाने में खुद को असफल देख जिला प्रशासन ने पत्रकारों को पेड न्यूज से विरत रहने की प्रतिबद्धता हेतु शपथ दिलाई।

जनसंदेश टाइम्‍स गाजीपुर में भी नही टिक पाए राजकमल

जनसंदेश टाइम्स गाजीपुर के ब्यूरोचीफ समेत कई कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा। लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहे राजकमल राय के स्थान पर अविनाश प्रधान को पुनः ब्यूरो प्रमुख का कार्यभार सौंपा गया। इसके पहले अविनाश प्रधान को हटाकर राजकमल राय को ब्यूरोचीफ बनाया गया था। किन्तु इनकी कार्यप्रणाली से नाराज कई जनप्रतिनिधियों की मंशानुरूप संस्थान …

सोनभद्र के जिला निर्वाचन अधिकारी की मुख्य निर्वाचन आयुक्त से शिकायत

पेड न्यूज पर अंकुश लगाने की भारतीय प्रेस परिषद और चुनाव आयोग की कोशिश पर सोनभद्र के जिला निर्वाचन अधिकारी पानी फेर रहे हैं। चुनाव आयोग शिकायत का संज्ञान ले चुका है लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारी अखबार मालिक को पेड न्यूज मॉनिटरिंग कमिटी के सदस्य पद से हटाने के लिए तैयार नहीं हैं जबकि यह अखबार ना ही सोनभद्र से प्रकाशित होता है और ना ही इसका मालिक और संपादक सोनभद्र जिले का पत्रकार है। सोनभद्र में ‘पेड न्यूज मॉनिटरिंग कमेटी’ के सदस्य के रूप में स्वंतत्र नागरिक/पत्रकार की श्रेणी में योग्य व्यक्ति का चयन नहीं करने की शिकायत पर जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा उचित कार्रवाई नहीं किए जाने के संबंध में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखा गया पत्रः

The cult of cronyism : Who does Narendra Modi represent and what does his rise in Indian politics signify?

Who does Narendra Modi represent and what does his rise in Indian politics signify? Given the burden he carries of the 2002 anti-Muslim massacres, it is tempting to see the Gujarat chief minister’s arrival on the national stage as a watershed moment in the escalation of communal politics. Certainly the cult-like following he has amongst the sangh parivar faithful and a wider section of the Hindu middle class is due to the image he has of a leader who knows how to “show Muslims their place”. For these supporters, his refusal to do something so simple – and tokenistic — as express regret for the killings that happened under his watch is seen not as a handicap but as further proof of his strength.

देश में अब भी करोड़ों ऐसे लोग हैं जो अरविन्द केजरीवाल को ईमानदार सम्भावना मानते हैं

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे पहले कभी नहीं देखा! 67 में जनता पहली बार निराश हुई थी और छह राज्यों से काँग्रेस साफ़ हो गयी थी! फिर 1977 और 1989 भी देखा, समझा और भुगता! ये सब बड़ी-बड़ी आशाओं के चुनाव थे. बड़े बदलावों की आशाओं के चुनाव! वे आशाएँ अब निराशा के कफ़न ओढ़ इतिहास के ताबूत में दफ़न हैं. वैसे चुनाव कोई भी हों, कैसे भी हों, छोटे हों, बड़े हों, वह आशाओं के चुनाव ही होते हैं. वोट या तो किसी निराशा के विरुद्ध होते हैं या किसी नयी आशा के तिनके के साथ!

सुरेंद्र मिश्र ने नवभारत मुंबई और आदित्य दुबे ने सामना हिंदी से इस्तीफा देकर नई पारी शुरू की

नवभारत, मुंबई के प्रमुख संवाददाता सुरेंद्र मिश्र ने संस्थान से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपनी नई पारी अमर उजाला के साथ शरू की है. श्री मिश्र अमर उजाला के मुंबई ब्यूरो में बतौर प्रमुख संवाददाता कार्य करेंगे. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले मिश्र पिछले 9 वर्षों से नवभारत में राजनीतिक बीट पर कार्य कर थे. इसके पहले वे पंजाब केसरी व आज अखबार में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. एक साल के भीतर नवभारत (मुंबई) को चार लोग छोड़ चुके हैं. सूत्रों के अनुसार प्रबंधन के लापरवाहीपूर्ण रवैए की वजह से नवभारत के पुराने लोग लगातार नौकरी छोड़ कर जा रहे हैं.

आजमगढ़ः संप्रदायिकता नहीं, जातीय वर्चस्व की जंग में मुलायम

मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हो सकते हैं, समाचार माध्यमों में इस इस तरह की अटकलें पहले से ही थीं परन्तु हर बार पार्टी की ओर से इसका खण्डन किया जाता रहा। मंथन इस बात पर चल रहा था कि सपा के इस क्षेत्र में खिसकते जातीय आधार पर कैसे काबू पाया जाए? ऐसे में सपा द्वारा यह कहना कि सांप्रदायिकता के खिलाफ आजमगढ़ में मुलायम सिंह चुनाव मैदान में हैं, यह महज एक शिगूफा है, जिसे क्षेत्र का मुसलमान समझ रहा है।

लाख रुपए दीजिए, न्यूज़ चैनल आईडी और जिले की कमान लीजिए

देहरादून में मीडिया की अड्डेबाज़ी अब भू माफियाओं ने सम्हाल ली है। कलम को गिरवी रखने का खेल तो काफी समय से चल रहा था लेकिन अब न्यूज़ चैनल की आईडी बेच कर लाखों में पत्रकार बनाने का खेल भी शुरु हो गया है। इसके चलते ईमानदारी से पत्रकारिता करने वाले खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। ख़बर है कि देहरादून में कुछ दिनों पूर्व शुरू हुए न्यूज़ चैनल राष्ट्र ख़बर ने जिस तेज़ी से ग्राउंड बनाना शुरु किया था उसी तेज़ी से चैनल ने कमाई करने की छूट भी अपने यहां के पत्रकारों को देनी शुरु कर दी। लोकसभा चुनाव का मौसम था तो लगे हाथ कुछ लोगो ने मीडिया का चोला पहन कर धन उगाही का सपना देख लिया था। लेकिन सपना पूरा होने से पहले ही इस न्यूज़ चैनल की हकीकत लोगों के सामने आ गयी।

पलवल में पत्रकार और उसके परिजनों को हत्या के प्रयास में फंसाने की साज़िश का पर्दाफाश

पलवल में व्यापारी पर हुए जानलेवा हमले के मामले का खुलासा जिला पुलिस कप्तान राकेश कुमार आर्य ने पत्रकार वार्ता के दौरान किया। घटना की साजिश रचने और अंजाम देने वालों को भी पत्रकारों के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने इस मामले में व्यापारी के तीन साथियों को भी गिरफ्तार किया है, जबकि व्यापारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। एसपी ने कहा की व्यापारी ने योजना के तहत दूसरे लोगों को फंसाने के लिए चाक़ू मारने की साजिश रचि थी। इसमें और भी लोगों का हाथ होने की सम्भावना बतायी गई है। मामले में आरोपी बने वैश्य समाज के प्रधान और पत्रकार ओमप्रकाश गुप्ता, उनके बेटे और भाई को निर्दोष बताया गया है। इस तरह का झूठा मामला पलवल में पहली बार उजागर हुआ है। यह मामला हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और युपीए अध्यक्षा श्रीमति सोनिया गांधी और राहुल गांधी की चौखट तक पहुंच भी पहुँच गया था।

बच्चों का भविष्य संवारना छोड़ नेताओं का चाटुकार और मीडिया का दलाल बना शिक्षामित्र

चित्रकूट कार्यालय : समाजसेवा एवं पत्रकारिता का लबादा ओढने वाला एक शिक्षा मित्र इन दिनों एक राजनेता की चाटुकारिता एवं मीडिया की दलाली के लिए सुर्खियों में है। नेताओं से पत्रकारों को मैनेज करने का ठेका लेने वाला यह कथित शिक्षामित्र बिना नियमित स्कूल जाये वेतन लेकर जहां शिक्षक के पवित्र पेशे को कलंकित कर रहा है। वहीं एक गैर राजनैतिक संगठन का स्वयंभू अध्यक्ष बनकर यह शिक्षामित्र फर्जी बयानबाजी कर अधिकारियों को भी गुमराह कर उन्हे अपने प्रभाव में लेकर दलाली करने का काम कर रहा है।

मोदी देश के अगले प्रधानमंत्री बन गए तो उन्हें समाजवादी पार्टी को शुक्रिया कहना भूलना नहीं चाहिए

Vikas Mishra : बात 1990 की है। इलाहाबाद के सलोरी मुहल्ले में सालाना उर्स था मजार पर। बहुत मजा आ रहा था। कव्वाल झूम झूमकर गा रहे थे। हारमोनियम पर पैसे भी चढ़ रहे थे। बीच बीच में अचानक कोई भीड़ में से उठता झूमने लगता और लोग उसे उठाकर मजार पर लाकर उसका सिर वहां पटकते थे। वो शांत हो जाता था। ऐसा सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ हो रहा था। हर तीन-चार मिनट में कोई झूमने लगता था। मैंने लोगों से पूछा-ये क्या हो रहा है। बताया गया कि उसे 'झाल' आ गया है। ये झाल उस पर आता है, जिस पर मजार वाले बाबा खुश होते हैं।

बेहूदा अमेरिका खुद के अलावा शेष सबको चोर या बे-ईमान समझता है!

पंकज कुमार झा :  होंगे अमेरिकन अमीर. हम अपने घर में उनसे ज्यादा सुखी और संतुष्ट हैं. चोट्टों का अहंकार तो देखिये. भाई का काफी आग्रह था एक बार घूमने आने का. यहाँ एक मित्र को बताया तो वे भी काफी जिद्द करने लगे. अंततः तय किया कि चलो हो ही आया जाय एक बार. हालांकि मेरी ऐसी कोई विशेष रूचि कभी नहीं रही. भारत को ही ढंग से देख लिया जाय तो इस जीवन के लिए काफी है. पर फिर भी प्लान किया है. लेकिन वीजा की प्रक्रिया देख कर सर पीटने का मन कर रहा है. बेहूदा अमेरिका खुद के अलावा शेष सबको चोर या बे-ईमान समझता है क्या?

प्रोफेसर कौशल किशोर और इंडिया टीवी के खिलाफ बनारस में मुकदमा

वाराणसी : आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने गुरुवार की रात न्यूज चैनल के कार्यक्रम में उन पर हमला करने के आरोप में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कौशल किशोर तथा उनके समर्थकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी है।

नोएडा में मीडिया कर्मी अंकित गुप्ता के घर चोरी

नोएडा : शहर के पॉश सेक्टरों में शामिल सेक्टर-15ए में बदमाशों ने मीडिया कर्मी के घर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। बदमाश घर से लाखों रुपये कीमत का सामान चोरी कर ले गए। मीडियाकर्मी ने चोरी की शिकायत कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस से की है।

वरिष्ठ पत्रकार सरोज मित्तल का मुंबई में निधन

मुंबई : आजादी के बाद देश में महिलाओं के अधिकारों और उनकी असमान सामाजिक स्थिति को उजागर करने वाली प्रमुख पत्रकार सरोज मित्तल का कल तीसरे पहर साढे चार बजे मुंबई के बांद्रा स्थित आवास पर निधन हो गया। उनकी उम्र 73 साल थी। वे साठ के दशक में देश में उभरी महिला पत्रकारों की पहली पीढ़ी में शुमार थीं। उन्होंने महज 20 साल की उम्र में ही देश में महिलाओं की प्रतिनिधि पत्रिकाओं फेमिना और ईव्ज वीकली में महिलाओं के मुद्दों पर लिखना शुरू कर दिया था।

दलित बहन-बेटियों पर की गई टिप्पणी से उजागर हुआ रामदेव का कुलषित चरित्र

रामदेव नाम का ढोंगी बाबा असल में घिनौने चरित्र का और रुग्ण मानसिकता का शिकार है जो दूसरों का उपचार करने की बात करता है लेकिन उसका स्वयं का मस्तिष्क विकृत हो चुका है। जिसे दलित समाज की बहन-बेटियों की इज्जत को तार-तार करने में शर्म नहीं आती, उसे इंसान कहना ही इंसान को गाली देना है। जो पुरुष एक औरत की इज्जत लूटता है तो उसको फांसी की सजा की मांग की जाती है। रामदेव ने तो देश की करोड़ों दलित बहन-बेटियों की इज्जत को तार-तार कर दिया है, अब रामदेव को कितनी बार फांसी पर लटकाया जाना चाहिये, इस बारे में भी देश के लोगों को सोचना होगा। अन्यथा ये भी साफ कर देना चाहिये कि इस देश में दलित स्त्रियों की इज्जत का कोई मूल्य नहीं है!

बनारस, धर्म निरपेक्षता और वामपंथ

बनारस से भाजपा प्रत्याशी के रूप में नरेन्द्र मोदी के चुनाव लड़ने की बात के सामने आते ही धर्म निरपेक्ष बौद्धिकों के द्वारा प्रतिरोध का उठना स्वाभाविक था। नरेन्द्र मोदी का बनारस से चुनाव लड़ने के पीछे भाजपा का मकसद अयोध्या के बाद बनारस को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना, हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण तथा देश में सांप्रदायिकता की राजनीति को आगे बढ़ाना था। उसी वक्त से ही धर्म निरपेक्ष व प्रगतिशील समाज के बीच इस विचार का जोर पकड़ना शुरू हो गया कि मोदी को शिकस्त देने के लिए उनके खिलाफ धर्म निरपेक्ष दलों को एकजुट होकर लड़ना चाहिए।

पत्रिका ने छह संपादकों को जबरन मैनेजर बनाया, अन्य 15 नामों की सूची तैयार

पत्रिका ने अपने ही छह पत्रकारों के हाथ की कलम छीन ली है। उनके हाथ काट दिए हैं। उन्हें जबरन मैनेजर बनाया जा रहा है, जबकि उनकी इस तरह के काम की ना तो मंशा है और ना ही वे इसे करना चाहते हैं। पत्रिका ने बीकानेर के संपादक सुनील जैन और अजमेर के संपादक दौलत सिंह चौहान को कुछ दिन पहले ही संपादक के पद से हटा कर इन शाखाओं का मैनेजर बना दिया था। नौकरी करनी थी, इसलिए मजबूरी में वे प्रबंधन के इस फैसले पर चुप रहे। इसके बाद पत्रिका ने गत २४ मार्च को भीलवाडा के संपादक जयप्रकाश सिंह, कोटा के संपादक संदीप राठौड और पाली के संपादक राकेश गांधी को उनके पदों से हटा दिया और उन्हें एक महीने तक भोपाल में मैनेजर बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। अब इन्हें पत्रिका में कहा गया है कि किसी भी सूरत में संपादक का काम नहीं करना है। पत्रकारिता को मार दो और मैनेजर बन जाओ, सर्कुलेशन बढ़ाओ, विज्ञापन लाओ।

तनूजा शंकर डीडी नेशनल में चैनल एडवाइजर बनीं, श्रीकांत प्रत्यूष नक्षत्र न्यूज के मैनेजिंग एडिटर बने

खबर है कि डीडी नेशनल में तनूजा शंकर ने चैनल एडवाइजर के पद पर ज्वाइन किया है. तनूजा पत्रकारिता के अलावा शिक्षण, रंगमंच, फिल्म आदि क्षेत्रों से भी जुड़ी हुई हैं. वे कई न्यूज चैनलों में काम कर चुकी हैं. दूरदर्शन के कायापलट के इस दौर में तनूजा को कई जिम्मेदारियां दी गई हैं.

सितारगंज में अमर उजाला और श्री न्यूज़ के पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

उत्तराखंड से खबर है कि अमर उजला के सितारगंज रिपोर्टर यामीन मालिक के खिलाफ सितारगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज़ किया गया है. शिकायतकर्ता अफरोज का कहना है कि उनकी दुकान के पास राजा और यामीन के भाई मोइन  का किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. मोईन ने अपने भाई यामीन को फोन कर मौके पर बुला लिया.

गाजीपुर पुलिस को चुनाव में मीडियाकर्मियों से भी खतरा!

गाजीपुर के कासिमाबाद से खबर है कि शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिए थाना पुलिस ने बहादुरगंज नगर पंचायत के सभी प्रमुख समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों पर भी धारा-107/116 की कार्रवाई करते हुए उन्हें पाबंद कर दिया। पाबंद हुए पत्रकारों में अशोक राय, कुतुबुद्दीन खां, मो. यूनुस, राजेश मौर्य, संतोष गुप्त प्रमुख हैं।

बाबा रामदेव : मूतने से लेकर हनीमून तक…

कुछ तो सोचकर बोलो बाबा…  बड़ी हैरानी हो रही है आजकल बाबा रामदेव की बात सुनकर…  बाबा रामदेव को मैने खूब कवर किया उनके आन्दोलन के दौरान… बातें तो उनकी पहले भी  लोगोँ को चुभती थीं लेकिन मर्यादा मे रहतीं थीं लेकिन आजकल जाने बाबा को क्या हो गया है… शुक्रवार को लखनऊ मे कह डाला कि राहुल गांधी तो हनीमून  मनाने के लिये दलित के घर जाता है…. अगर वो किसी दलित की बेटी से शादी कर लेता तो वो भी दौलतमंद हो जाती…. अब बताइये बाबा के इस अनमोल वचन का क्या अर्थ निकाला जाये?

हे टाइम्स आफ इंडिया वालों, श्रद्धा में बह रहे मीडिया में तथ्य बह जाएं तो क्या आश्चर्य?

Dinesh Dadsena : लगता है कि बनारस में कारपोरेट मीडिया/भाजपा समर्थित कथित 'सुनामी' के सबसे पहले शिकार ख़ुद पत्रकार हो गए हैं और यह 'सुनामी' उन्हें पूरी तरह बहा ले गई है. सबूत चाहिए तो कल टीवी पर और आज के अखबारों में बनारस में नमो के नामांकन की रिपोर्टिंग पढिए. जिस श्रद्धा और भक्ति से रिपोर्टिंग की गई है, उसमें सबसे पहले तथ्यों को अनदेखा किया गया है.

अपराध करते हुए पकड़वाने के लिये गुप्त रूप से किया गया स्टिंग ऑपरेशन अवैधानिक और अनैतिक है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी व्यक्ति को अपराध करते हुए पकड़वाने के लिये उसका गुप्त रूप से किया गया स्टिंग ऑपरेशन अवैधानिक और अनैतिक है। अत: स्टिंग ऑपरेशन करने को वैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। केवल यही नहीं आश्‍चर्यजनक रूप से सुप्रीम कोर्ट स्टिंग ऑपरेशन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने को वैधानिक करार दे चुका है! जिसका सीधा और साफ सन्देश यही है कि आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को रिश्‍वत लेते, गैर कानूनी काम करते और भेदभाव करते हुए गुप्त रूप से कैमरे में कैद करने अर्थात् स्टिंग ऑपरेशन करने वालों के विरुद्ध तो निश्‍चित रूप से कार्यवाही होगी, लेकिन जिन लोगों को स्टिंग ऑपरेशन में पकड़ा जायेगा, उनको मासूम-निर्दोष मानते हुए और ये मानकर कि उनको गुप्त रूप से तथा अनैतिक तरीके से फंसाया गया, उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जायेगी।

पत्रकार को धमकाकर जोशी ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर किया आघात: झा

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी द्वारा इंटरव्यू के दौरान जी न्यूज के पत्रकार सुमित अवस्थी को धमकी दिये जाने की घटना की इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (आईएफडब्ल्यूजे) के राष्ट्रीय सचिव कृष्णमोहन झा ने कड़ी निंदा की है। श्री झा ने कहा है कि मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता खुद को लोकतंत्र का सजग प्रहरी बताते हुए मूल्यों और मुद्दों के संदर्भ में खुद के अग्रणी होने का दावा करते हैं लेकिन साक्षात्कार के दौरान पत्रकार को सरेआम धमकी देकर जोशी ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर जिस तरह आघात किया है उससे उनकी तानाशाही व अहंकरी प्रवृत्ति बेनकाब हो गई है।

सूचना आयुक्त ने वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता को जेल भिजवाया

सूचना का अधिकार कानून के इतिहास में सम्भवतः यह पहली घटना होगी जब सूचना आयुक्त ने आरटीआई कार्यकर्ता को अपने कक्ष से धक्के मार कर न केवल बाहर निकलवा दिया बल्कि पुलिस द्वारा पिटवाया और रिपोर्ट दर्ज करा कर रात के 10 बजे घर से गिरफ्तार भी करवा दिया।

अरे मूर्ख रामदेव, तुमने सच बोलकर संघियों-भाजपाइयों की ठगी पर पानी फेर दिया!

Arvind Shesh : रामदेव ने राहुल गांधी पर हमला करने बहाने दलित समाज को जिस तरह ज़लील किया है, वह आरएसएस और भाजपा के सामाजिक दर्शन की ही अभिव्यक्ति है। गड़बड़ सिर्फ यह हो गई कि रामदेव नाम के इस मूर्ख बाबा ने इतना भी ध्यान रखना जरूरी नहीं समझा कि चुनाव चल रहे हैं और उसकी इस मूर्खता का नुकसान उसके भाजपाई मालिकों को हो सकता है। अभी संघी और सबकी ठगी का दौर चल रहा है, उसमें रामदेव ने एक तरह से कूड़ा कर दिया है।

मशहूर कवि दुष्यंत कुमार ने धर्मयुग के संपादक को जो कविताएं लिख भेजीं, उसे आप भी पढ़ें

Vivek K Gupta : मशहूर कवि दुष्यंत कुमार की धर्मयुग के संपादक को लिखी ये कविता आज की परिस्थिती में भी कितनी प्रांसगिक है…दुष्यंत कुमार जी की लेखनी को शत शत प्रणाम, दुष्यंतजी के सहारे ही कम से कम पसीजिए तो हुजूर……

पहाड़ी और ब्राह्मण वोट के लिए राजनाथ सिंह ने एनडी तिवारी के चरणों में सर झुका दिया

Sanjay Sharma : राजनाथ सिंह मोदी की हालत खराब करना चाहते थे पर खुद फंस गए. कभी कल्वे जब्बाद के घर जा कर टोपी पहन कर अपने सामने मोदी जी के खिलाफ बयान दिलवा रहे हैं तो कभी लाल जी टंडन की चरण वंदना कर रहे हैं. आज तो हद कर दी उन्होंने. एनडी तिवारी के घर पहुंच गए. चरणों में सर झुका दिया कि शायद पहाड़ी और ब्राह्मण वोट मिल जाये.

कहीं सहारा बनारस और कानपुर की यूनिट न बंद हो जाये!

सहारा में काम करने वालों की हालत पतली होती जा रही है। सेलरी न मिलने से परेशान चल रहे सहाराकर्मियों का भविष्य खतरे में दिख रहा है। सुना जा रहा है कि बनारस और कानपुर यूनिट को बंद करने की तैयारी चल रही है। इसके पीछे अनुमान है कि एक तो खर्च अधिक और आमदनी कम होना और ऊपर से मजीठिया लागू किये जाने का कोर्ट का आदेश।

एनएन यूपी उत्तराखंड ने महज दो महीने में दो नम्बर की कुर्सी पर कब्ज़ा जमा लिया!

यशवंत जी प्रणाम , भाई आपने हमेशा मेरी खबर को प्रकशित किया है इसके लिए आपका तहेदिल से धन्यवाद।  न्यूज़ नेशन के नए नवेले चैनल एन एन यूपी उत्तराखंड ने महज दो महीने और कुछ दिन में ही दो नम्बर की कुर्सी पर कब्ज़ा जमा लिया है.

मजीठिया पाने की जंग लंबी है, लेकिन लड़ना हमें ही होगा, आइए जानें कैसे लड़ें

मित्रों, मैं भी आपकी ही तरह एक पत्रकार हूं, जो देश के एक तथाकथित प्रतिष्ठित समाचार पत्र के लिए काम कर रहा है। आज किसी भी समाचार पत्र के दफ्तर जाएं, सभी साथी एक कॉमन विषय पर चर्चा करते मिलेंगे। कहीं खुलेआम, तो कहीं दबे स्वर में। वह विषय है, क्या मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का हमें लाभ मिलेगा? अगर मिलेगा तो कब मिलेगा? कैसे मिलेगा? कितना मिलेग? अगर, नहीं मिलेगा तो क्यों नहीं मिलेगा? क्या चारा है अखबार मालिकों के पास? ऐसा कैसे हो सकता है कि ना मिले? आप ट्रेनी हों या संपादक? दिल पर हाथ रख कर पूछिये कि क्या इन विषयों पर अपने साथियों से चर्चा नहीं हो रही इन दिनों?

मीडिया की नजर में मौत की कीमत मोबाइल

यूं तो लखनऊ में हर दर्जे का पत्रकार मौजूद है, सबकी अपनी अलग पहचान है, कोई काम से जाना जाता है … कोई काम कम अपने नाम से ज्यादा जाना जाता है. तो किसी के चर्चे सरे बाजार हुआ करते हैं … लेकिन आजकल एक बहुत मजबूत टाइप खबर फैली हुयी है जो सौ फीसदी सही है … क्योकि आँखों देखी जो है … आलाधिकारियों तक इसके चर्चे है … मामला अपराध से जुड़ा है तो पुलिस अधिकारी भी बहुत मजे से चटखारे लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर हम तो लेने देने में बदनाम हैं लेकिन सबकी खबर लिखने छापने वाले आजकल खूब जुबानी हेडलाइन में छाये हुए हैं …  होना भी चाहिए … क्योकि आजमगढ़ से लखनऊ आकर बीडीएस करने आई प्रिया की मौत मामले में राजधानी लखनऊ के पत्रकारों ने मोबाइल के लिए खुद को बेंच दिया …

राजनाथ और राजकमल ने जनसंदेश टाइम्स से इस्तीफा दिया, डा. रविशंकर बने आकाशवाणी बनारस के केंद्राध्यक्ष

बनारस से खबर है कि जनसंदेश टाइम्स से राजनाथ तिवारी ने इस्तीफा दे दिया है. वे सिटी टाइम्स वाराणसी से जुड़ गए हैं. राजनाथ को सिटी टाइम्स का संपादक बनाए जाने की चर्चा है. सिटी टाइम्स अखबार को शैलेंद्र मणि ने शुरू किया है जो पहले जनसंदेश टाइम्स और दैनिक जागरण में संपादक रह चुके हैं. यह अखबार फिलहाल लखनऊ और इलाहाबाद से छप रहा है. जनसंदेश टाइम्स से कई लोगों के सिटी टाइम्स में जाने की संभावना है.

कलयुग के महाभारत में काशी कैसे कुरुक्षेत्र बन गयी

गंगा और बुनकर। एक काशी के आस्तित्व की पहचान तो दूसरा प्रतीक और रोजी रोटी। नरेन्द्र मोदी ने बनारस में पर्चा भरते वक्त इन्ही दो मुद्दों को उठाया। लेकिन इन दोनों मुद्दों के साए में अगर बनारस का जिक्र होगा और वह भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर तो फिर आने वाले वक्त में काशी के भाग्य बदलेंगे या काशी देश की सत्ता परिवर्तन भर का प्रतीक बनकर रह जायेगा। हो जो भी लेकिन सच यही है कि बुनकर मजदूर बन चुका है और गंगा किसी बरसाती नाले में तब्दील हो चली है। दरअसल, गंगा की अविरल धारा अब गंगोत्री से काशी तक सिर्फ लोगों के जहन में ही बहती है। शहर दर शहर, गांव दर गांव। सौ पचास नहीं बल्कि ढाई हजार गांव इसी गंगा पर पूरी तरह आश्रित है और गंगा सिर्फ मां नहीं बल्कि आधुनिक दौर में जिन्दगी भी है। रोजगार है। कारखाना है। उद्योग है। सरकारी योजनाओं को समेटे है गंगा। लेकिन बिगड़े बच्चों की तरह गंगा को मां मानकर भी किसी ने गंगा के उस सच को नहीं देखा जिसके दायरे में गंगा का पानी पीने लायक नहीं बचा और सैंट्रल पौल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड को कहना पड़ा कि कन्नौज, कानपुर, इलाहबाद और काशी में तो गंगा नहाने लायक तक नहीं है।

बाल श्रमिक की फोटो लेने पर पत्रकार अखिलेश से होटल मालिक ने की मारपीट

सिवनी । बस स्टैंड बरघाट में शिव होटल के संचालक संजय सूर्यवंशी ने एक पत्रकार के साथ हाथापाई कर दी। पत्रकार ने होटल में काम करने वाले नाबालिगों की फोटो लेने का प्रयास किया था। बरघाट थाने में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करवा दी गई है। पत्रकार अखिलेश दुबे समाचार संग्रहण हेतु बरघाट गए हुए थे। बस स्टैंड पर उन्होंने शिव होटल में बाल श्रमिकों को कार्य करते देखा। उन्होंने अपने कैमरे से इसकी तस्वीर लेना चाहा। तभी होटल संचालक संजय सूर्यवंशी ने उन्हें गालियां बकते हुए उनके साथ मारपीट की।

पत्रकार श्याम लाल यादव के घर चोरी

पत्रकार श्याम लाल यादव के घर चोरी होने की खबर है. वे गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित सेक्टर-5 में रहते है. श्याम लाल यादव के फ्लैट को चोरों ने निशाना बनाते हुए लाखों के माल पर हाथ साफ कर दिया. श्यामलाल अपने परिवार के साथ 22 अप्रैल को प्रतापगढ़ में अपने रिश्तेदार की तेरहवीं में गए थे.

शादाब मुज्तबा, सुनील नायर और विक गुंडोत्रा के बारे में सूचनाएं

न्यूज 24 के आउटपुट हेड शादाब मुज्तबा ने आज तक ज्वाइन कर लिया है. वे आजतक से ही सात साल पहले न्यूज24 में आए थे. शादाब ने सुप्रिय प्रसाद के साथ न्यूज 24 तब ज्वाइन किया था, जब वो न्यज 24 के लिए अपनी टीम तैयार कर रहे थे. शादाब आज तक से उनके साथ आने वाले लोगों में आखिरी थे औरे वापस लौटने वालों में भी शादाब सबसे आखिरी हैं. शादाब ने नई पारी के बारे में फेसबुक पर लिखा है– ''अजीत अंजुम जी की अगुवाई में न्यूज 24 ने सबकुछ दिया.. नाम.. जिम्मेदारी.. काम करने की आजादी.. बॉस और सुपर बॉस तक सीधी पहुंच। सात साल ठाठ से अच्छे और बहुत अच्छे लोगों के साथ काम किया ..कहते हैं कि जिंदगी बदलाव मांगती है सो बदलाव ने आज अपना हक वसूल लिया। आजतक के साथ मैं पहले भी चार- पांच साल तक काम कर चुका था और सात साल बाद फिर सुप्रिय सर की टीम में शामिल हो गया।''

सुनील जी की कर्म स्थली केसला में 5 मई को अस्थि विसर्जन

सुनीलजी की कर्म स्थली केसला में (इटारसी से २० किमी) ५ मई को उनकी अस्थियों का विसर्जन  उनके निवास स्थान पर स्थित जलाशय में किया  जाएगा.  इस दिन उनके और उनके साथी जनारायण और किशनजी की याद में एक सम्मेलन भी रखा है. इस सम्मलेन में उनके काम को आगे बढ़ाने के बारे में विचार होगा. आप लोग ५ मई सुबह या ४ मई की रात तक केसला पहुंचें. स्थानीय साथियों का हौसला बढ़ाएं.  केसला इटारसी स्टेशन से २० किमी दूर है. अपने आने और जाने के समय की  सूचना दें. अपने साथ ओढने के लिए चादर ले आएं,  यहाँ हल्की-फुल्की व्यवस्था रखेंगे.

भारत सरकार का दावा- रक्षा सौदों में हो रहे आत्मनिर्भरता के गंभीर प्रयास

भारत सरकार ने यह दावा किया है कि वह रक्षा सौदों में पूर्ण आत्म-निर्भरता के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा अपने पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए आदेश के सन्दर्भ में भेजे सुझावों के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने उन्हें अवगत कराया है कि नवीनतम रक्षा अधिप्राप्ति प्रक्रिया (डीपीपी)-2013 में बाई (इंडियन) तथा बाई एंड मेक (इंडियन) श्रेणी को बाई (ग्लोबल) श्रेणी से प्राथमिकता दी गयी है। इसी प्रकार बाई एंड मेक (इंडियन) श्रेणी को सरल बनाया गया है ताकि रक्षा उत्पादों के अवांछनीय आयात पर रोक लगाई जा सके।

सूचनाः ओमेक्स बिल्डर वापस नहीं कर रहा आरडब्लूए को आईएफएमएस मनी

ओमेक्स बिल्डर ने अपनी ओमेक्स हाईट विभूति खण्ड योजना में काफी धांधली की है। बिल्डर यहां की रेजीडेण्ट वेलफेयर एसोसियेशन को आईएफएमएस मनी वापस नहीं कर रहा है। मार्च 2010 से जून 2011 तक उसने मेसर्स सानवी को मेन्टीनेन्स एजेन्सी नियुक्ति किया था। जुलाई 2012 से एसोसियेशन को मेन्टीनेन्स का कार्य सौंप दिया गया था लेकिन आईएफएमएस मनी रूपये 4.5 करोड़ नहीं वापस किये। जुलाई 2012 से अबतक करीब दो वर्ष होने जा रहा है लेकिन ओमेक्स आईएफएमएस मनी वापस करने का नाम नहीं ले रहा है। पहले बिल्डर ने कई शर्तें रखी ऐसोसियेशन ने सारी शर्तें मान ली, एफीडेविट भी साइन कर दिया अब बिल्डर द्वारा नियुक्त एजेन्सी सानवी कम्पनी द्वारा फ्लैटों में गलत पुराने मेन्टीनेन्स बिल भेजे जा रहे हैं। मेसर्स सानवी के श्री अमित बन्सल का मो0नं0 09711800560 है।

रॉबर्ट बढेरा की संपत्ती पर अमेरिकी अखबार के खुलासे के निहितार्थ

पिछले कई दशकों में देखा गया है कि किस तरह दुनिया भर में अमेरिकी हितों की रक्षा करने के लिए अमेरिकी सरकार, प्रेस और पूरा समाज एकजुट होता रहा है। लोकतंत्र का झंडाबरदार बना घूमने वाला अमेरिका शेष विश्व में कैसे अपनी कठपुतली सरकारें बनवाता है, यह देखा-सुना सच है। सच को झूठ और झूठ को सच में बदलने में माहिर अमेरिकी समाज के दोहरे मानक हैं, अपने लिए कुछ और तथा दूसरों के लिए कुछ और। उनका अपना मतलब हल हो जाना चाहिए, बाकी दुनिया जाये भाड़ में। मानवता, नैतिकता, आदर्श, सिद्धांत आदि सब का प्रयोग सिर्फ और सिर्फ वे अपने ही हित में किस तरह करते हैं, या फिर महज कागजी चीज के तौर पर इनकी अनदेखी-अनसुनी कर इन्हें हाशिये पर डाल दिया जाता है, इसका अनुभव पूरी दुनिया आये दिन करती रहती है।

इतनी आसान नहीं दलित वोटों में सेंधमारी

नरेन्द्र मोदी के अम्बेडकर प्रेम के निहितार्थ

अखिल हिन्दूवादी मजबूत राष्ट्र के निर्माण का सपना दिखाकर भारतीय जनता पार्टी सदैव बहुसंख्यक हिन्दूओं के भावात्मक मुद्दों की राजनीति करती रही है। लेकिन इस राजनैतिक एजेंडे के बल पर लगभग 27 दलों के गठबंधन के सहारे पहले 13 दिनों और बाद में 13 महिनों के लिए अपना राज्याभिषेक करवाकर वह पिछले दस सालों से केन्द्र की सत्ता से वनवास भोग रही है। कुर्सी से दूरी की पीड़ाएँ एवं सत्ता पाने की भाजपा की छटपटाहट अब पूरी शिद्दत से सामने आ रही है। इसी के चलते नेतृत्व के स्तर पर इस बार उसने सवर्ण हिन्दू कैंडिडेट के स्थान पर अन्य पिछड़ा वर्ग से सम्बद्ध नरेन्द्र मोदी को आगे किया है। जाति के आधार पर अन्य पिछड़ा लेकिन वफादारी के स्तर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संध का कट्टर हिन्दूवादी सच्चा सिपाही।

‘येन केन प्रकारेण’ चुनाव जीतने की लालसा, खर्चीले चुनावों की जनक है

एक टी वी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के दौरान यह पता चला कि चुनावों में पैसे का कितना योगदान है और इसके दम पर क्या कुछ नहीं किया जा सकता। डमी प्रत्याशी खड़ा करके किसी जीतने वाले प्रत्याशी के वोट किस तरह काटे जा सकते हैं। इसमें निर्दलीयों और छोटी -छोटी पार्टियों की क्या भूमिका होती है, यह तथ्य सामने आता है। कॉर्पोरेट लॉबिंग का क्या मतलब है और बड़ी पार्टियां किसके इशारों पर चलती हैं, यह भी स्पष्ट हो जाता है। अतः यह अनुमान लगन कठिन नहीं कि भारत में, भ्रष्टाचार का मुख्य सूत्र, भारत की राजनीतिक व्यवस्था के भीतर है। यदि यहां भ्रष्टाचार को समाप्त करने की कोई भी सार्थक पहल की जाती है तो उसमें अवश्य ही राजनीतिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव एक अत्यावश्यक आधार होगा।

आवश्यक है चुनावों की वित्त पोषण प्रणाली का पारदर्शी होना

अपने घर से लेकर बाहर तक मैं चुनावों के दौरान अक्सर यह बात सुनता हूं कि हारने वाले उम्मीदवार को मत देकर लोगों ने मत ख़राब कर दिया। या चुनावों के बाद वे पछताते हुए पाये जाते हैं कि उन्होंने जिसे वोट दिया था वह तो हार गया और उनका वोट बरबाद हो गया। आखिर यह कैसी मानसिकता है? क्या तुलसीदास ने इसीलिए लिखा था 'समरथ को नहीं दोस गुसाईं'। इस मानसिकता का उत्स कहाँ है? यदि गौर से इस बारे में सोंचा जाये तो हम देखते हैं कि हम सांस्कृतिक गुलामी से कभी मुक्त नहीं हो पाये। कभी राजाओं, नबाबों की गुलामी, उनके कारिंदों, जमीदारों, जागीरदारों की गुलामी, तो कभी उच्च वर्ण की गुलामी, या फिर पुरुषवर्चस्व की गुलामी। अंग्रेजों की गुलामी, प्रशासनिक अमले की गुलामी, और भारतीय राजनेताओं की गुलामी। और सर्वोपरि धन की गुलामी।

भगाणा पीड़ितों की लड़ाई देश में उत्‍पीड़न से मुक्ति की लड़ाई में तब्‍दील होः स्‍वामी अग्निवेश

नई दिल्‍ली: भगाणा सामूहिक बलात्‍कार पीड़ितों के लिए गुरूवार (24 अप्रैल) को जंतर-मंतर पर कैंडिल मार्च का अयोजन किया गया। मार्च में बड़ी संख्‍या में महिला संगठनों के लोग, जेएनयू के छात्र व बुद्धिजीवियों समेत लगभग 50 सामाजिक संगठनों के लोगों ने भाग लिया। मार्च के पूर्व आयोजित सभा में 27 अप्रैल को गृह मंत्री सुशील शिंदे के आवास का घेराव का फैसला लिया गया। कार्यक्रम के आयोजको ने इसके लिए दिल्‍ली के अलावा विभिन्‍न प्रदेशों के जागरूक व संवेदनशील लोगों को भी दिल्‍ली पहुंचने का आह्वन किया है।

राजनीति का नया ‘अभिषेक’

आसान जीत की ओर बढ़ रहे अभिषेक सिंह का राजतिलक लगभग तय है लेकिन इसके बाद खुद को साबित करने की चुनौती मुंहबांये खड़ी है. अब तक राजनांदगांव से खुद को दाँव पर लगाने वालों की सच्चाई यह है कि राजनीतिक रोटियां सेंकने के सिवाय वे कोई खास चमत्कार नहीं कर सके अत: परिवार से लेकर जनता-जनार्दन तक में आशा की यह डोर बंधी है कि शुक्ल-युग का अवसान होने के बाद देश के राजनीतिक-शीर्ष पर युवा छत्तीसगढिय़़ा की जो कमी राज्य महसूस कर रहा है, अभिषेक इसे भरने में कामयाब होंगे, ठीक राहुल गांधी, सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह.

विकीलीक्स का खुलासा- सुब्रमण्यम स्वामी ने इंदिरा गांधी की चुनावी रणनीति व स्वास्थ्य से संबंधित सूचनाएं अमेरिकी खुफिया एजेंसी को दी थीं

: Subramanian Swamy gave US Political Intelligence on Indira Gandhi's election strategy and health : WikiLeaks latest cable reveals BJP's Subramanian Swamy's relations with US Intelligence Agencies and how he passed secret information about serious issues that concern our country to US Intelligence agencies. BJP has been vaguely accusing AAP of being a CIA Agent or a Pak Agent, whenever AAP raises issues of corruption by BJP.

सागरिका घोष को मोदी की आलोचना करने वाले ट्वीट न करने की हिदायत!

Brijesh Singh : कई मीडिया संस्थानों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कैसे वहां मोदी की आलोचना का स्थान खत्म हो रहा है. मीडिया जगत से जुड़े लोग बताते हैं कि कैसे मोदी के प्रति आलोचनात्मक रवैया रखने के कारण टीवी 18 समूह के अंग्रेजी समाचार चैनल सीएनएन आईबीएन में वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष पर लगातार दबाव बना हुआ है. उन्हें मोदी की आलोचना करने वाले ट्वीट न करने की हिदायत तक दी गई है.

नरेंद्र मोदी के बनारस यात्रा के उड़नखटोले खर्च को लेकर अफलातून अफलू ने दर्ज कराई शिकायत

Aflatoon Afloo : उड़कर आना-जाना ! जब किसी दल का नेता जहाज या हेलिकॉप्टर से चुनाव प्रचार में आता है तो आम तौर पर यह खर्च 'दल द्वारा किए गए खर्च' में दिखाया जाता है। इस बार चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया था कि यदि उम्मीदवार ऐसे किसी उड़न खटोले से आए नेता के साथ आया होगा तो उस खर्च का एक हिस्सा उम्मीदवार के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।

दैनिक जागरण जींद के चीफ रिपोर्टर योगेंद्र गुप्ता का निधन, पत्रकार पंकज कर्मवाल को पितृशोक

खबर है कि दैनिक जागरण जींद के चीफ रिपोर्टर योगेंद्र गुप्ता का आज निधन हो गया.  वे पिछले तीन महीने से गुड़गांव के मेदांता हास्पिटल में भर्ती थे. एक सड़क हादसे में बुरी तरह जख्मी होने के बाद मेदांता में उनका इलाज चल रहा था. युवा पत्रकार योगेंद्र गुप्ता को बचाया नहीं जा सका. उनके निधन पर जागरण के पत्रकारों, शुभचिंतकों और पत्रकार संगठनों ने शोक व्यक्त किया है.

अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए रायपुर के युवा पत्रकार बिकास कुमार शर्मा का चयन

रायपुर। पत्रकारिता के अंतरराष्ट्रीय स्तरीय विशेष प्रशिक्षण के लिए शहर के युवा पत्रकार बिकास कुमार शर्मा का चयन अमेरिकी संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट (आइसीएफजे) ने किया है। प्रशिक्षण शिविर का आयोजन 28 अप्रैल से 2 मई तक नेपाल की राजधानी काठमांडू में होगा।

रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी का इंटरव्यू लेने में सफल हुए युवा पत्रकार आयुष कुमार (देखें वीडियो)

नरेंद्र मोदी की पत्नी को पत्रकारों द्वारा खोज निकालने का दूरगामी असर ये हुआ कि खुद मोदी को अब चुनाव नामांकन के दौरान लिखना पड़ा कि वे शादीशुदा हैं और उनकी पत्नी हैं. एक अन्य नेता राम विलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी को इस बात का मलाल है कि उनका नाम पहली पत्नी के रूप में पासवान ने नामांकन के समय नहीं भरा.

सेटिंग-गेटिंग-फिटिंग-एडजस्टिंग…

तरह-तरह के सेटिंग-गेटिंग के खेल के लिए मशहूर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में एक बार फिर एक प्राध्यापक महोदय आंख बंद-डिब्बा गायब का जुगाड़ सेट कर रहे हैं. प्राध्यापक महोदय, नाट्य विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. दो साल पहले संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली से डिपुटेशन पर आये थे. अकादमी में प्रोग्राम अधिकारी थे, वर्धा के परिसर में आये तो सीधे एसोसिएट प्रोफेसर बन गये थे. जब वे अचानक आकर इस पद पर विराजमान हुए थे तब भी अंदरखाने में कानाफूसी हुई थी कि नाट्य कला विभाग में जब यह पद ही सृजित नहीं हुआ था, उससे संबंधित कोई विज्ञापन ही नहीं निकला था तो फिर कहां से आकर विराजमान हो गये थे.

रायगढ़ नवभारत के नाम पर दलाली

नवभारत की पहचान आजादी की लड़ाई से लेकर अब तक एक विश्वासनीय अखबार के रूप में रही है। लेकिन कुछ जगह अब इस  विश्वास को कैश कराया जाता है। जहां यह खेल खुलेआम चल रहा है वह है नवभारत का रायगढ़ एडीशन। अभी यहां ब्यूरो चीफ प्रमोद अग्रवाल को बनाया गया है जो सिर्फ अपने मतलब का समाचार बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हैं और अच्छे समाचार रोक देते हैं। समाचारों को अपने हिसाब से कैश करने का प्रयास करता है।

फेसबुक ने पत्रकारिता के फील्ड में लगाई एक और छलांग, FBNewswires सेवा लांच

जनपत्रकारिता का पर्याय बन चुके फेसबुक ने पत्रकारिता के फील्ड में एक और छलांग लगाई है. फेसबुक ने FBNewswires लांच किया है. ये ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जिससे कोई भी रीयल टाइम न्यूज कंटेंट, रिलेटेड फोटो, वीडियो पा सकेगा. फेसबुक ने इसे एक ऑनलाइन न्यूज कंटेंट का खजाना बताया है. फेसबुक ने इस सर्विस को न्यूज कॉर्पोरेशन स्टोरीफुल के साथ पार्टनरशिप में उतारा है. इस FBNewswires के जरिए फेसबुक उन कंटेट को प्रोवाइड कराएगा जिसे सोशल मीडिया पर पोस्ट या शेयर किया गया हो.

संजीव श्रीवास्तव जी फोकस न्यूज़ की गलतियों पर ध्यान दीजिए

हिन्दी न्यूज चैनलों में गुणवता और स्क्रीन एलर्टनेस में गिरावट दिखना अब आम हो गया है। मसलन, थके हुए विजुअल्स, हेडलाइन्स कुछ और हेडलाइन्स-विजुअल्स कुछ और। कामचलाऊ शब्दों का उपयोग। एंकरिंग का मतलब बिना किसी भाव भंगिमा के सिर्फ टीपी पढ़ना। ग्राफिक्स पैकेजिंग में भारी झोल आदि-आदि। सिर्फ एक-दो चैनलों को छोड़ गुणवत्ता में ऐसी गिरावट सभी चैनलों की स्क्रीन पर आमतौर पर देखने को मिल जाती है। मैं हमेशा चैनलों को वॉच करता रहता हूं और जहां गलतियां दिख जाती हैं वहीं पर मेरी आंखें रुक जाती हैं।

मजीठिया से बचने के लिए फॉर्म पर कर्मचारियों के दस्तखत ले रहा पंजाबी जागरण प्रबंधन

दैनिक जागरण समूह के पंजाबी जागरण अखबार के कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड भूल जाने के लिए बोल दिया गया है। सूचना  है कि आज (शुक्रवार) सभी रिपोर्टरों और कर्मचारियों को एक फॉर्म पर दस्तखत करने के लिए हेड ऑफिस जालंधर बुलाया गया है। जागरण के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पंजाब में कोई भी अखबार मजीठिया वेज बोर्ड नहीं देगा इसलिए पंजाबी जागरण के कर्मचारी भी किसी खुशफहमी में न रहें।

दैनिक नवज्योति से गौरव श्रृंगी और सुदर्शन न्यूज से नवीन चौहान का इस्तीफा

कोटा के पत्रकार गौरव श्रृंगी 1 मई से राजस्थान पत्रिका के भीलवाड़ा संस्करण के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे. वे पिछले दो साल से कोटा दैनिक नवज्योति अखबार में बतौर रिपोर्टर अपनी सेवाएं दे रहे थे. इस दौरान उन्होनें कई एक्सक्लूसिव खबरें दी. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होनें मार्च 2012 में ही कदम रखा था. 

टोटल टीवी और खबरें अभीतक न्यूज चैनल के संवाददाता ओमप्रकाश गुप्ता की असलियत

पलवल से टोटल टीवी और खबरें अभीतक न्यूज चैनल के संवाददाता ओमप्रकाश गुप्ता पर जानलेवा हमले के तहत मुकदमा दर्ज… आरोपी फरार… फिर भी टोटल टीवी और खबरें अभीतक पर चल रही हैं आरोपी के नाम से खबरें… पलवल जवाहर नगर कैप मार्किट के व्यापारी पर दोबारा हमला करने के मुख्य आरोपी संजय गुप्ता को अदालत ने 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है… आरोपी संजय गुप्ता को अलग-अलग 2 मामलों में दूसरी बार पेश किया गया क्योंकि दुकानदार मोहित बजाज पर 18 अप्रैल की सायं को दोबारा चाकू से कातिलाना हमला हुआ… 
 

मजीठिया के चलते सहारा में हस्ताक्षर रजिस्टर हटाया गया!

सहाराश्री के मुसीबतों के चलते भी सहारा के कुछ अधिकारी अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आ रहे हैं। राष्ट्रीय सहारा कानपुर आफिस में जहां पिछले माह से स्ट्रिंगर्स को वेतन नहीं दिया जा रहा है वहीं 18 अप्रैल से हस्ताक्षर रजिस्टर भी हटा लिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि मजीठिया के चलते सहारा में यह किया जा रहा है।
 

न्यूज़ नेशन से जी न्यूज पहुंचे रितेश आनंद

न्यूज़ नेशन में बतौर एसोसिएट प्रोड्यूसर कार्यरत रितेश आनंद ने न्यूज़नेशन को अलविदा कह दिया है. रितेश ने अपनी नई पारी की शुरुआत ज़ी न्यूज़ में बतौर प्रोड्यूसर की है. 

केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो जागरण नहीं देगा मजीठिया!

खबर है कि दैनिक जागरण ने मजीठिया नहीं देने का मन बना लिया है.यह अखबार भी अपने इंप्लाइज को सिर्फ इनक्रीमेंट थमा कर चुप्पी साध लेगा. खबर ये भी है कि जागरण प्रबंधन ने शीर्ष स्तर पर मीटिंग करके तय किया है कि अगर 16 मई को बीजेपी की सरकार केंद्र में बनती है तो जागरण में किसी को भी मजीठिया नहीं दिया जाएगा. सुनने में आया है कि नोएडा में जो मशीन आपरेटर प्रोडक्शन में काम करते हैं उन्होंने बगावत कर दिया है. उनका कहना है कि मजीठिया मिलेगा तो काम करेंगे अन्यथा नहीं करेंगे.
 

India tv is not a neutral channel and it was never to be

: Somnath bharti and goons : These elections are going to make us believe that still India is not open for debates. We want to force people to step into our shoes or face consequences. India tv is not a neutral channel and it was never to be. The incident show signs of downfall of democracy and upliftment of violence. Sometimes I think Bapu was the only non-violent person we had in our history. As we see in normal routime life too.

मियां और कम्युनल

Shahid Khan : मियां सब से ज़्यादा कम्युनल हैं! कम्युनल हुये तो सालों साल मोहम्मद ज्योति बासु जीतते रहे! एक बार फिर कम्युनल हुये तो ममता बानो जीतने लगीं! पहले कभी कम्युनल हुये तो सैयद नेहरु जीतने लगे! फिर कम्युनल हुये तो इंदिरा बेगम जीतने लगीं! एक बार कम्युनल होके वो मोहम्मद राजीव अंसारी को भी जिता चुके हैं!

सफेद-कुर्ते पाजामे में पुतले की तरह लग रहे मोदी और बनारस में नामांकन

Avinash Das : रहस्य में सर्वाधिक आकर्षण होता है. बीएचयू के बाहर लंका चौराहे पर महामना पं मदन मोहन मालवीय की मूर्ति पर मोदी को सुबह नौ बजे आना था, पर वो ढाई घंटे बाद आये. उनका हेलीपैड बीएचयू के प्रांगण में तैयार किया गया था.

मुझे दुःख है कि सुनील भाई के निधन की खबर अखबारों में नहीं आयी

Vimal Kumar : मुझे दुःख है कि जाने-माने एक्टिविस्ट सुनील भाई के निधन की खबर अखबारों में नही आयी. एक आध में आयी हो तो कह नहीं सकता. मैंने भी खबर चलायी थी. हमारा मीडिया इतना असंवेदनशील और दलाल किस्म का है कि समझ में नहीं आता . कई लेखकों के जीने मरने की खबर भी नहीं देता लेकिन मोदी और राहुल का बकवास रोज़ दिखाता रहता है.

जाने-माने कवि और ‘आप’ प्रत्याशी बल्ली सिंह चीमा गिरफ्तार कर लिए गए

Rising Rahul : एक जनकवि का मुकदमा… पहला आरोप…  दरअसल वो मोदी से ज्‍यादा आतंक नहीं फैला रहे थे। वो अमित शाह की तरह नरमुंड नहीं तलाश रहे थे। वो सोनिया राहुल की तरह अरबों रुपयों का घोटाला ढंकने के लिए भगवान को नहीं याद कर रहे थे। वो तो बस अपने साथ चल रहे भूखे साथियों को अपनी खेती के पैसे से खाना खिला रहे थे और खुद भी खा रहे थे। … इस आरोप में जनकवि को गिरफ्तार कर लिया गया। बात इतनी सी ही नहीं है, आरोप भी एक नहीं है…

जियो टीवी के खिलाफ शिकायत की समीक्षा के लिए बनायी गयी कमेटी

इस्लामाबाद : चर्चित टीवी एंकर हामिद मीर पर जानलेवा हमले का आरोप आईएसआई पर मढने के लिए जियो टीवी का लाइसेंस रद्द करने की रक्षा मंत्रालय की शिकायत की समीक्षा के लिए पाकिस्तान के मीडिया नियामक ने एक तीन सदस्यीय कमेटी बनायी है. सैयद इस्माइल शाह, परवेज राठौड और इसरार अब्बासी की कमेटी जियो के खिलाफ आवेदन पर गौर करेगी और मामले के बारे में पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) बोर्ड को अवगत कराएगी.

हामिद मीर पर हमले के विरोध में पाकिस्तानी पत्रकार ने पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ पर जूता फेंका

लाहौर से खबर है कि पाकिस्तान के लोकप्रिय समाचार एंकर हामिद मीर पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने आज पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ की ओर जूता फेंका। पर्ल कॉंटिनेंटल होटल में शरीफ दक्षिण एशिया श्रम सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे जिसमें दक्षेस देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। उसी दौरान पत्रकार ने उनपर जूता फेंका। हालांकि सुरक्षा अधिकारियों ने पत्रकार को सभागार से बाहर निकाल दिया। पत्रकार इमदाद सधीर एक सिंधी प्रकाशन आवाज वेब टीवी से जुड़े हुए हैं।

बलिया में अनोखा नामांकन : गधे पर लोकतंत्र (देखें वीडियो)

लोकसभा के इस चुनावी रेस में कोई हेलीकाप्टर तो कोई चार्टेड प्लेन से दौड़ रहा है ….पर यूपी के बलिया लोकसभा सीट से निर्दल प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने आये नवीन राय उर्फ़ चुन्नू राय ने तो देश के सभी प्रत्याशियों को पीछे छोड़ दिया । जी हां, नवीन राय गधे पर सवार होकर बलिया कलेक्ट्रेट तक नामांकन करने पहुंचे। उनके रोड शो में कुल 14 गधे थे।

जियो न्यूज टेलीविजन को ‘कारण बताओ’ नोटिस

इस्लामाबाद:  पाकिस्तानी इलेक्ट्रानिक मीडिया रेगुलेशन एथारिटी ने कल जियो न्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जियो न्यूज के विरूद्ध आरोप है कि उसने गुप्तचर एजेन्सी इंटर सॢवसेज इंटेलिजेन्स (आई.एस.आई) को बदनाम कर राष्ट्रीय हित के विरूद्ध काम किया है। रेगुलेटरी एथारिटी ने जियो न्यूज चैनल से 6 मई तक कारण बताओ नोटिस का जवाब मांगा है। इसके पहले मंगलवार को रक्षामंत्रालय ने एथारिटी को चैनल के विरूद्ध कार्रवाई के लिए लिखा।

दौसा में मतदान के दौरान हिंसा में चार पत्रकार घायल

दौसा। राजस्थान के दौसा जिले में लोकसभा चुनावों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। इसके चलते जिले की महवा तहसील में ग्रामीण और पुलिस बल आमने-सामने हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए, वहीं पुलिस को लाठीचार्ज और फायरिंग करनी पड़ी। वहीं सिकराय तहसील में मतदान दल पर भेदभाव के आरोपों के बाद मतदान रोक दिया गया। हालांकि बाद में सुरक्षा में बढ़ोत्तरी के बाद पुन: मतदान शुरू हो गया।

रिफत जावेद के पर करते, संजय ब्रागटा की बल्ले-बल्ले, सरबोजीत और नवीन झुनझुनवाला को नई जिम्मेदारी

टीवी टुडे ग्रुप के चारों चैनलों के मैनेजिंग एडिटर इनपुट रिफत जावेद का काम अब संजय बरागटा को दिया गया है. संजय बरागटा अभी तक 'दिल्ली आज तक' को संभाल रहे थे. रिफत जावेद की भिड़ंत ढेर सारे पत्रकारों से हुई थी. कई रिपोर्टरों और सीनियरों से उनके तनाव की खबरें आ रही थीं. ये नहीं पता चल पाया है कि रिफत जावेद को पूरी तरह टीवी टुडे ग्रुप से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है या उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी गई है.

भास्कर में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी, डीएनए और बिजनेस भास्कर के कई एडिशन बंद होंगे

दैनिक भास्कर समूह ने भले ही अपने कर्मियों को इनक्रीमेंट का लेटर दे दिया है लेकिन ढेर सारे कर्मचारियों के गले  पर छंटनी की तलवार भी लटका रखा है.  डीएनए अखबार और बिजनेस भास्कर अखबार के कई एडिशन बंद होने की सूचना से सैकड़ों पत्रकार और मीडियाकर्मी परेशान हैं. ये लोग अब नई नौकरी खोज रहे हैं. डीएनए और बिजनेस भास्कर के कुछ संस्करणों को बंद करने का फैसला किया है. इससे इन समाचार पत्रों में काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों में निराशा का माहौल है.

Why India TV not broadcasting the footage of the attack?

On the India TV panel was Kaushal Kishore Mishra, a BJP member and professor from Benaras Hindu University. Mishra was the most enthusiastic on the panel and, egged on by a vociferous crowd, seemed to be on a roll. About 20 minutes into the discussion, Somnath Bharti said something that contained the word Modi. Mishra stood up from his chair, visibly agitated and furious, and asked Bharti to keep quiet. It was then that another member on the panel – presumably representing AAP, since he asked Mishra to let Bharti speak – intervened.

भास्कर समूह ने मजीठिया नहीं, इनक्रीमेंट दे दिया

खबर है कि दैनिक भास्कर वालों ने अपने पत्रकारों को मजीठिया तो नहीं दिया लेकिन दस से सोलह फीसदी तक का इनक्रीमेंट दे दिया है. भास्कर ग्रुप में कार्यरत लोगों को इनक्रीमेंट का लेटर दिया जा रहा है. किसी का दस फीसदी तनख्वाह बढ़ी है तो किसी की सोलह से बीस फीसदी.

सतीश के. सिंह फिर लौटे लाइव इंडिया, बने एडिटर इन चीफ

कई न्यूज चैनलों की यात्रा करने के बाद सतीश के. सिंह अंततः लौट के पुराने घर आ गए. समृद्धि जीवन नामक एक विवादित चिटफंड कंपनी द्वारा संचालित लाइव इंडिया ग्रुप के वे एडिटर इन चीफ बने हैं. इस समूह के एडिटर इन चीफ पद से एनके सिंह ने इसलिए इस्तीफा दे दिया था क्योंकि ग्रुप के मालिकान अपने घर की निजी शादी समारोह का लगातार लाइव प्रसारण अपने चैनल पर कर रहे थे. कई अन्य मुद्दों पर विवाद और विरोध के बाद एनके सिंह ने सरोकारी पत्रकारिता के पक्ष में झंडा बुलंद करते हुए इस्तीफा दे दिया. तबसे लाइव इंडिया को नए एडिटर इन चीफ की तलाश थी.

सोनिया गांधी के इशारे के बाद अमरिंदर ने दिया था टाइटलर पर बयान!

यशवंत जी, आप पत्रकारिता में निष्पक्ष नीति रखते हैं। पत्रकारिता में आपके हिम्मत को बयां करती स्टोरीज मैं पढ़ता रहता हूं, इसलिए एक लेख भेज रहा हूं जो हाल में विवादित अमरिंदर सिंह द्वारा जगदीश टाइटलर पर दिए बयान के यथार्थ को दर्शाता है। यशवंत जी, मुझे ये कहने और मेरे विश्वस्त सूत्रों से जानकारी के मुताबिक सच बताने में गुरेज नहीं कि अमरिंदर सिंह का जगदीश टाइटलर पर बयान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर था। ज्यादा लंबी बात नहीं करनी, आप इंडिया टुडे की उस रिपोर्ट को पढ़े होंगे, जिसमें सोनिया गांधी ने खुद कैप्टन अमरिंदर सिंह को फोन किया था। याद दिला देता हूं। इस खबर को ‘आज तक’ ने भी चलाया था।

‘इंडिया टीवी’ का मोदी ने किया उद्धार, टीआरपी ‘आजतक’ के बराबर

इसे कहते हैं आम के आम गुठलियों के दाम. मोदी से अनैतिक डील कर अच्छा खासा माल कमाने वाले इंडिया टीवी ने मोदी के फिक्स इंटरव्यू के कारण टीआरपी में भी अच्छी खासी छलांग लगाई है. रजत शर्मा की फिक्स अदालत में मोदी से पूछे गए फिक्स सवाल वाले कार्यक्रम को चुनाव के वक्त इंडिया टीवी पर इतनी बार दिखाया गया और इसे आलोचकों व प्रशंसकों दोनों ने इतनी बार देखा कि यह कार्यक्रम इंडिया टीवी के लिए बंपर टीआरपी की सौगात लेकर आया. 

टीवी शो के दौरान सोमनाथ भारती की हुई पिटाई, सीएनएन-आईबीएन वालों ने बचाया

वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच का चुनावी घमासान हिंसा में बदलता दिख रहा है। आज एक टीवी कार्यक्रम में आप नेता सोमनाथ भारती पर हमला बोल दिया गया और जमकर उनकी पिटाई की गई। आरोप लगा है बीजेपी कार्यकर्ताओं पर। सोमनाथ अस्सी घाट पर टीवी शो में शामिल होने आए थे। यहीं पर कुछ लोगों ने शो के दौरान ही सोमनाथ की जमकर पिटाई कर दी। उनकी कार पर भी हमला किया गया और शीशे चकनाचूर कर दिए गए। साथ उनके ड्राइवर की भी पिटाई की गई।

ISI ने कहा, Geo TV बंद करो

पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी ISI ने कहा है कि वहां के लोकप्रिय टीवी समाचार चैनल जियो टीवी को बंद कर दिया जाए. यह आग्रह उसने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से किया जिसने सरकार से दरख्वास्त की है कि वह इस चैनल को बंद करे. पाकिस्तानी वेबसाइट दन्यूज.कॉम ने इस्लामाबाद से खबर दी है कि ISI की शिकायत पर रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को वहां के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी से कहा है कि वह इस टीवी न्यूज चैनल के खिलाफ कार्रवाई करे क्योंकि उसने जासूसी एजेंसी के खिलाफ आरोप लगाए हैं.

Geo TV के खिलाफ पाक की शिकायत पर अमेरिकी मीडिया चिंतित

जियो न्यूज चैनल के खिलाफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय द्वारा देश की मीडिया नियामक प्रधिकरण में की गई शिकायत को लेकर चिंता जताते हुए एक शीर्ष अमेरिकी मीडिया संस्था ने सुरक्षा सेवाओं से संयम बरतने को कहा है। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपेजे) के एशिया कार्यक्रम समन्वयक, बॉब डिएट्ज ने कहा, हमने पाकिस्तान मीडिया इलेक्ट्रॉनिक प्राधिकरण से कहा है कि इस दुर्भावनापूर्ण शिकायत पर कार्रवाई नहीं करें। हमने पाकिस्तान की सुरक्षा सेवाओं से कहा है कि मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचाने और संयम बरतें। उन्होंने कहा, आईएसआई मीडिया में इन आरोपों के खण्डन के लिए स्वतंत्र है, लेकिन उसे कवरेज को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

समा टीवी के पत्रकार शहजाद इकबाल की हत्या

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मियांवाली जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक स्थानीय टीवी पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, समा टीवी के पत्रकार शहजाद इकबाल को मियांवाली कस्बे में चार हथियारबंद लोगों ने पकड़ लिया और उस पर अंधा-धुंध गोलियां चलानी शुरू कर दी। इकबाल को अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

सहारा कर्मचारियों के भत्‍तों में भी जबर्दस्‍त कटौती, असमंजस का दौर

: कर्मचारियों से जबरिया वसूली से भी नहीं मिलेगी सुब्रत को राहत : पांच हजार से लेकर पांच लाख रूपये वसूला जा रहा है सहाराकर्मियों से :  लखनऊ : सहारा इंडिया के मुखिया को उनके मौजूदा कारागारी-जीवन से मुक्ति दिलाने के लिए दस हजार करोड़ रूपयों की रकम जुटाने की बहु-प्रचारित कवायदें भी अब सहारा इंडिया की अन्‍य योजनाओं की तरह ही हवा-हवाई हो चुकी हैं। हालांकि इस काम के नाम पर सहारा इंडिया के प्रबंधकों ने भारी-भरकम रकम जमकर जबरिया उगाहा है।

पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथारिटी को जियो टीवी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश

इस्लामाबाद : आईएसआई की शिकायत पर पाकिस्तान रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथारिटी (पेमरा) को निर्देश दिया है कि वह जियो टेलीविजन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करे। जियो टेलीविजन नेटवर्क ने पिछले दिनों पाक पत्रकार हामिद मीर पर हुए हमले के लिए आईएसआई को जिम्मेदार ठहराया था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक पेमरा अध्यादेश 2002 की धारा 33 के तहत मीडिया नियामक को अपनी शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले इस शिकायत को पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने स्वीकृति दे दी थी।

अनुराधा प्रसाद का ‘इतिहास गवाह है….’

इन दिनों 'न्यूज 24' पर एक प्रोग्राम प्रसारित हो रहा है…नाम है 'इतिहास गवाह है..' नाम तो बहुत ही गंभीर है…मगर इसमें एंकर की प्रस्तुति प्रोग्राम के विषय-वस्तु से बिल्कुल ही अलग-थलग दिखाई पड़ती है….मानों ब्लैक कॉस्टयूम में, उजले मोतियों में गुंथी माला पहन एंकर निर्मल बाबा के प्रोग्राम की एंकरिंग करने जा रही हों….

लोकसभा चुनाव में हो रहे अपार सम्मान से पत्रकारों के छलक आए आंसू

फर्रुखाबाद व कन्नौज में 2 दिग्गज चुनाव के मैदान में हैं। एक हैं विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद तो दूसरी हैं उप्र के मुख्यमंत्री की पत्नी डिंपल यादव। फर्रुखाबाद व कन्नौज के पत्रकार बड़ी उम्मीद के साथ चुनाव में लगे पड़े थे की कुछ न कुछ तो बड़ा मिलेगा। फर्रुखाबाद के हालत तो बड़े ही मजेदार थे ज्यादातर पत्रकार सोंच रहे थे किसी भी प्रत्याशी ने कुछ किया नहीं है। पिछले 5 साल तक सलमान ने भी कुछ नहीं किया तो अब चुनाव में जरूर कुछ न कुछ मिलेगा। वहीं फर्रुखाबाद में जब चुनाव के एक दिन रह गया तो फिर क्या सलमान खुर्शीद ने जिले के चुनिंदा वरिष्ठ पत्रकारों को माइक्रोमैक्स का एक मोबाइल दे दिया। डिब्बा पैक होने की वजह से पत्रकार बड़े खुश दिखे। खोला तो निकला मंहगा वाला मोबाइल। अब तो फर्रुखाबाद के पत्रकारों के ख़ुशी के आसू रोके नहीं रूक रहे हैं। वहीं कन्नौज में डिम्पल यादव ने सभी वरिष्ठ पत्रकारों को 50000 रूपये के सम्मान ने नवाजा है।

साथी, भगणा की लड़कियां अब भी आपकी राह देख रहीं हैं!

कल दोपहर में हरियाणा भवन, दिल्‍ली पर भगणा बलात्‍कार पीड़ितों के आंदोलन का बहिष्‍कार करने वाले इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया संस्‍थानों के दफ्तर से शाम को आंदोलनकारियों को फोन आया कि वे आंदोलन का 'बहिष्‍कार' नहीं कर रहे। ख़बर दिखाएंगे। संभवत: उनका फैसला मीडिया संस्‍थानों में खूब पढ़े जाने वाले भड़ास फॉर मीडिया व अन्‍य सोशल साइटस पर इस आशय की खबर प्रसारित होने के कारण हुआ।

एबीपी न्‍यूज़ के घोषणा पत्रः ‘लगे रहो नमो भाई आरएसएस’

एबीपी न्‍यूज के घोषणा पत्र में 'लगे रहो नमो भाई आरएसएस' कुछ खास बातेंः

1. व्‍यंग और विनोद जीवन से खत्‍म हो गया तो जीवन कहां रह जाएगा।
मतलब
– चुनावी रैलियों पर शहजादा व जीजा की बात कही जा रही है केवल व्‍यंग व विनोद के भाव से कही जा रही है।

मजीठिया का लाभ न मिलने से निराश दैनिक भास्कर ग्रुप के एक मीडियाकर्मी का पत्र

दैनिक भास्कर ग्रुप में पिछले एक वर्ष से काम कर रहे एक साथी ने मेल लिख कर भड़ास से अपनी पीड़ा साझा की है। एमबीए डिग्रीधारी और साढ़े तीन वर्षों का तजुर्बा रखने वालो इस साथी को मात्र 11200/- रुपए मिलते हैं जबकि उसने एमबीए की पढ़ाई के लिए बड़ा लोन भी लिया था। उसे बड़ी उम्मीद थी कि मजीठिया लागू होगा और उसके वेतन में बढ़ोत्तरी होगी। लेकिन सभी कुछ उसकी उम्मीदों के विपरीत हो रहा है। पढ़िए भड़ास को भेजा गया पत्रः

बंद होगा भास्कर समूह का ‘डीएनए’ अख़बार, कर्मचारियों के सामने रोज़ी का संकट

इंदौर। दैनिक भास्कर समूह का इंग्लिश अख़बार डीएनए 29 अप्रैल को बंद होने जा रहा है। ऐसे में 54 कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। डीएनए के अचानक बंद करने का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मजीठिया लागु किया जाना इसका भी एक कारण हो सकता है।

नवीन जिन्दल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की ज़ी न्यूज़ के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की शिकायत

नई दिल्ली, 23 अप्रैल। कुरुक्षेत्र से 16वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नवीन जिन्दल ने जी न्यूज, उसके चेयरमैन सुभाष चंद्रा और भारतीय जनता पार्टी के कुरुक्षेत्र से प्रत्याशी राजकुमार सैनी के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून, आदर्श चुनाव आचार संहिता और भारतीय दंड संहिता का घोर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। जिन्दल ने कहा है कि जी न्यूज ने प्रचार की अवधि समाप्त होने के बाद भी उनके खिलाफ मनगढ़ंत खबरें खूब चलाईं। इस चैनल के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सैनी के लिए मंच से वोट मांगे और मेरे एवं मेरी पार्टी कांग्रेस के खिलाफ दुष्प्रचार में जी मीडिया के सभी चैनलों का इस्तेमाल किया। अपने तथ्यों के पक्ष में सभी प्रमाण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने जी मीडिया, चेयरमैन सुभाष चंद्रा और भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सैनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मजीठिया से बचने के लिए ‘आज समाज’ की चाल, कर्मचारियों से वापस मांगे नियुक्ति पत्र

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका ख़ारिज होने के बाद मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने से बचने के लिए अखबार मालिक तरह-तरह के टोटके आजमा रहे हैं। इस संबंध में भड़ास पर दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, पंजाब केसरी द्वारा मजीठिया से बचने के लिए की जा रही कोशिशों की खबरें पहले ही प्रकाशित हो चुकीं हैं। अब खबर आ रही है कि 'आज समाज' अखबार भी मजीठिया से बचने के लिए कुछ पैंतरेबाजी कर रहा है। आज समाज ने अपने सभी कर्मचारियों से उनके पुराने नियुक्ति पत्र वापस करने के लिए कहा है। प्रबंधन का कहना है कि इनके स्थान पर नए नियुक्ति पत्र कर्मचारियों को दिए जाएंगे। प्रबंधन द्वारा उठाए गए इस कदम से सभी कर्मचारी सतर्क हो गए हैं।

क्या लखनऊ से सपा के लोकसभा प्रत्याशी अभिषेक मिश्रा आईआईएम में प्रोफेसर थे?

लखनऊ से सपा के लोकसभा प्रत्याशी अभिषेक मिश्रा के नाम के आगे 'प्रोफेसर' लिखे पोस्टर, बैनर, पर्चे सभी जगह दिखाई दे रहे हैं। अभिषेक मिश्रा स्वयं को देश की प्रतिष्ठित संस्था आईआईएम अहमदाबाद का भूतपूर्व प्रोफेसर बताते आये हैं। पर हकीकत में अभिषेक मिश्रा आईआईएम अहमदाबाद में कभी प्रोफेसर रहे ही नहीं हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कैसे अभिषेक मिश्रा सरीखे व्यक्ति जनता के समक्ष झूठे तथ्य रखकर अपने आप को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं और कभी विधान सभा पहुंच जाते हैं तो कभी लोक सभा के प्रत्याशी बनकर वोट मांगते दिखाई देते हैं। सारा सिस्टम मूकदर्शक बना मात्र तमाशा देखता रहता है, पर करता कुछ भी नहीं है।

अमीषा पटेल की कवरेज को गए पत्रकार की जेब कटी

इलाहाबाद: फिल्म अभिनेत्री अमीषा पटेल की कवरेज के लिए पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार शिव त्रिपाठी का जेबकतरों ने बटुआ उड़ा दिया। शिव त्रिपाठी एक डेली न्यूज पेपर से जुड़े हैं। सोमवार को वह शाहगंज एरिया में सभा की कवरेज के लिए पहुंचे थे। इस दौरान किसी ने उनकी जेब काट कर बटुआ निकाल लिया। पर्स में कुछ कैश, दो एटीएम कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस था। उन्होंने इस चोरी की रिपोर्ट शाहगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज करायी है।

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालयः विद्यार्थियों को नहीं मिली छात्रवृत्ति, कुलसचिव को ज्ञापन

भोपाल 22 अप्रैल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के विद्यार्थियों ने पिछले 2 वर्षो से छात्रवृत्ति न मिलने के कारण कुलसचिव चंदन सोनाने को ज्ञापन सौंपा। ज्ञात हो कि प्रशासनिक लापरवाहियों के चलते पिछले 2 वर्षो से विश्वविद्यालय के अनुसुचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति नही मिल पायी है। जिसके चलते कई छात्रों अपने शिक्षण कार्य को निरंतर चला पाना संभव नही हो पा रहा है। जिसके कारण आज पूनः कुलसचिव महोदय को छात्रवृत्ति के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया इसके पूर्व भी कई बार आवेदन प्रतिवेदन किये जा चुके है। किन्तु छात्रवृत्ति अभी तक किसी छात्र-छात्रा को प्राप्त नहीं हुई है।

अनिवार्य मतदान की व्यवस्था पर ज़रूरी है व्यापक बहस

कुछ साल पहले आज की अपेक्षा कम मतदान होता था, इससे चिंतित इंतजामिया ने लोगों को प्रेरित करने के लिए अभियान चलाने प्रारंभ किए। आज सरकार से लेकर हर राजनीतिक दल, हजारों स्वयंसेवी संगठनों सहित मीडिया और बाजारवाद के तमाम मंच लोगों को वोट जरूर डालने के प्रति जागरूक कर रहे हैं। मतदान को राष्ट्र, समाज हित में और पुनीत कर्तव्य बता रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने विगत दिनों अहमदाबाद में कहा है कि चुनाव के बाद केंद्र में उनकी सरकार बनी तो देश में अनिवार्य मतदान की व्यवस्था लागू की जायेगी। उन्होंने सुझाया है कि वोट नहीं देनेवालों को दंडस्वरूप अगले चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित करने की व्यवस्था बनायी जा सकती है।

चुनावों के पीछे की चालबाज़ियां: आनंद तेलतुंबड़े

मौजूदा चुनावी प्रक्रिया, इसके जातीय पहलू और जनता के हितों के अनुकूल एक मुनासिब चुनावी प्रणाली के विकल्पों पर आनंद तेलतुंबड़े का विश्लेषण. अनुवाद: रेयाज उल हक   कुछ ही दिनों में सोलहवें आम चुनावों की भारी भरकम कसरत पूरी हो जाएगी. और इसी के साथ भारत के सिर पर लगे दुनिया के सबसे महान …

मोदी को कट्टर ही बनाए रखना चाहते हैं मदनी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना मदनी के इस कथन ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि मैं तिलक नहीं लगा सकता तो मोदी भी टोपी क्यों पहनें। उनकी बात बहुत ही तार्किक, सीधी-सीधी गले उतरने वाली और वाजिब लगती है। इसी से जुड़ी हुई ये बात भी सटीक महसूस होती है कि जब मुस्लिम इस्लाम के मुताबिक अपनी रवायत पर कायम रखता है और उसे बुरा नहीं माना जाता तो किसी हिंदू के अपने धर्म के मुताबिक चलते हुए मुस्लिम टोपी पहनने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। कुछ ऐसा ही मसला दोनों धर्मों के धर्म स्थलों को लेकर है। मुस्लिम मंदिर नहीं जाता तो  इसे सहज में लिया जाता है, मगर कोई हिंदू मस्जिद अथवा दरगाह से परहेज रखता है तो उसे कट्टर क्यों माना जाना चाहिए। मगर सच ये है चंद हिंदुओं को छोड़ कर अधिसंख्य हिंदुओं को दरगाह, गिरिजाघर अथवा गुरुद्वारे में माथा टेकने में कोई ऐतराज नहीं होता।

न्यूज़ फर्स्ट टीवी से जुड़े सलीम सैफी

न्यूज़ फर्स्ट टीवी के साथ वरिष्ठ पत्रकारों का जुड़ना जारी है। ताज़ा कड़ी में वरिष्ठ टीवी पत्रकार सलीम सैफी ने न्यूज़ फर्स्ट टीवी को ज्वाइन किया है। उन्हें न्यूज़ फर्स्ट टीवी में एडिटर स्पेशल एसाइनमेंट बनाया गया है। इससे पहले वो इसी पद पर समाचार प्लस चैनल के साथ जुड़े हुए थे। सलीम सैफी के पास टीवी का लंबा अनुभव है। वो आज तक समेत कई चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। सलीम सैफी से पहले वरिष्ठ पत्रकार रवि शर्मा भी बतौर कार्यकारी संपादक संस्थान के साथ जुड़ चुके हैं। वो दैनिक जागरण, अमर उजाला और जनवाणी समेत कई अख़बारों में अहम पदों पर काम कर चुके हैं। उनके पास लगभग 25 साल का अनुभव है।

23 अप्रैल को होगा भारत भास्कर अवॉर्ड का आयोजन

रायपुर। भारत भास्कर अवॉर्ड का आयोजन 23 अप्रेल को वृन्दावन हॉल में शाम 6 बजे होगा। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की 11 अलग अलग विधाओं के लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। दैनिक भारत भास्कर की वेब साइट http://www.bharatbhaskar.com भी इसी आयोजन का हिस्सा होगा। वेब साइट के समाचार सम्पादक आशीष मिश्रा हैं। भारत भास्कर के प्रधान सम्पादक संदीप तिवारी और प्रबंध सम्पादक अहफ़ाज़ रशीद ने आज इस बात की जानकारी दी।

शशिशेखर इन दिनों पाठक परिवार को उपकृत करने में लगे हैं

दैनिक 'हिन्दुस्तान' के सम्पादकीय पृष्ठ पर पिछले काफी दिनों से अमितांशु पाठक और उनके भाई किंशुक पाठक के लेख नियमित तौर पर चित्र के साथ छप रहे हैं। तमाम जाने-माने लेखकों, पत्रकारों को उनसे ईष्या हो सकती है क्योंकि ये युवा स्तम्भकार हिन्दुस्तान के सभी संस्करणों में प्रमुखता से छपते हैं। अमितांशु पाठक का परिचय स्वतंत्र पत्रकार के रूप में दिया होता है गोया वे जाने-माने पत्रकार रहे हों। जानकार बताते हैं कि वे कुछ समय तक 'नई दुनिया' के लिए वाराणसी से फीचर आदि लिखते थे। वाराणसी में उनके काफी ठाठ रहे हैं। वे बड़ी बड़ी गाड़ियों में चलते और पुलिस-प्रशासन में उनकी हनक भी थी लेकिन कानाफूसी के अनुसार, मायावती के शासनकाल में महत्वपूर्ण पद पर रहे एक पुलिस अधिकारी ने उनके साथ कुछ ऐसा व्यवहार किया कि वे लम्बे समय तक नेपथ्य में चले गए। अब वे इन स्तम्भ के साथ प्रकट हुए हैं।

जंतर मंतर और हरियाणा भवन पर जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन

नई दिल्‍ली : मंगलवार को दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भगाणा की गैंग-रेप पीड़ित ल‍ड़कियों को न्‍याय दिलाने के लिए जोरदार प्रदर्शन किया तथा हरियाणा भवन पहुंच कर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर जेएनयू छात्र संघ के नेताओं ने हरियाणा व केंद्र सरकार विरोधी नारे लगता तथा खाप पंचायतों की संस्‍कृति को ध्‍वस्‍त करने की बात कही।

ओपी श्रीवास्तव ने मेरी कीमत लगाने की जुर्रत की थी… बावजूद इसके ओपी के व्यवहार से बेहद प्रभावित हुआ था

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग सात)

फिर मैं समझ गया अपनी ही केंचुल में सिमटे वामपंथियों का चरित्र

हम लोगों ने छेड़ दी फैसलाकुन जंग, आमरण अनशन शुरू

ताजा-ताजा बने चचा-भतीजा के बलुआ रिश्तों की पींगों का अन्‍तर्भाव

ज्यादातर वामपंथियों में होता है खुद के प्रति श्रेष्ठतम सम्मान का पाखण्ड

लखनऊ: वैसे आपको एक बात बताऊंगा जरूर, कि ओपी श्रीवास्तव के व्यवहार से बेहद प्रभावित हुआ था। बावजूद इसके कि उन्होंने मेरी कीमत लगाने की जुर्रत की थी। लेकिन उन जैसे व्यक्ति से उससे ज्या‍दा और क्या हो सकता था। माना कि वे सहारा इंडिया के दूसरे नम्बर की हैसियत रखते थे, लेकिन पहले दर्जे वाली हैसियत वाले सुब्रत राय के कोसों-योजनों दूर निचले पायदान पर ही तो। जो कुछ भी उन्होंने मुझसे कहा उससे ज्यादा वे कर भी तो नहीं सकते थे, यह मैं खूब जानता था। लेकिन मेरा मानना है कि उन्होंने अपना श्रेष्ठ्तम प्रदर्शन किया, मेरे सन्दर्भ में। यकीन मानिये, कि मैं सहारा इंडिया में ओपी श्रीवास्तव और बाद के विवेक सहाय जैसे लोग सहारा इंडिया के पाप-कुण्ड के अक्षुण-निष्पाप आत्मा हैं। वे वाकई सोचते और करते थे, बिना किसी ढिंढोरा मचाये हुए। हां, सुब्रत राय नामक जैसा फोबिया उन लोगों पर अगर हावी रहता था, तो उसमें हैरत या अचरज क्यों? उन्होंने अगर मुझे एक लाख रूपयों की रिश्वत की पेशकश की थी, तो भी उसमें उनका प्रोफेशनलिज्म ही तो था। हां, इतना जरूर था कि चूंकि मैं उस आन्दोलन का सर्वाधिक मजबूत पहरूआ था, इसलिए उन्होंने मुझे खरीदने का प्रस्ता‍व रखा। अब इसमें हमारे आंदोलन को तबाह करने की मंशा थी, इसलिए मैंने उसे खारिज कर दिया था। लेकिन जो शैली उन्होंने अपनायी उसका तो मैं आज तक मुरीद हूं।

सहारा प्रबंधन ने मुझे दी थी एक लाख की रिश्वत वाली पेशकश

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग छह)

सहारा इण्डिया के पाप-कुण्ड में केवल ओपी और सुबोध ही निष्पाप दिखे

देर रात तक चकल्लस और क्रांतिकारी गीतों और नाटकों का रिहर्सल

लखनऊ: हमारे अखबार में एक विज्ञापन प्रतिनिधि हुआ करता था केके श्रीवास्तव। थोड़ा घमण्डी, लेकिन कम से कम मुझसे और अचिन्त्य अधिकारी से खुला हुआ था। कारण यह कि जब वह एच-रोड वाले मकान में आया, तब तक हम लोग आफिस बंद होने के बाद खूब मस्तीन किया करते थे। बाथरूम में तो गजबै कार्रवाइयां हुआ करती थीं। अचिन्त्य जब यहां आया तो सबसे पहले मैंने उसे सम्पूर्ण नंगा किया। फिर श्याम अंकुरम का नम्बर आया। एक नया क्लर्क भर्ती हुआ अभय श्रीवास्तव। वह भी गोरखपुर का था। रेल कालोनी में उसके पिता रहते थे। वह भी यहां नंगा हो गया। इसके बाद तो तय यह हुआ कि दफ्तर का काम निबटने के बाद से पूरे परिसर में हम लोग केवल नंगे ही रहते थे। चार के चारों नंगे।

सुब्रत राय ने नौकरी छीनी तो श्रमिक जगत ने हमें सिर-माथे पर लिया

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग पांच)

लखनऊ के श्रमिक आंदोलन का ऐसा जोश अब स्वप्न से परे है

राजकुमार केसवानी ने की थी भोपाल औद्योगिक नर-संहार की भविष्यवाणी

लखनऊ: आज के पत्रकारों को यह अहसास करने का मौका तक नहीं मिला होगा कि इस देश में कोई भीषणतम औद्योगिक नर-संहार भी हो चुका है। जी हां, हम यूनियन कार्बाइड हादसे की बात कर रहे हैं जिसकी भोपाल वाली कीटनाशक दवा बनाने वाली यूनिट में एमआईसी(मिक) यानी मिथाइल आइसो सायनाइड की टंकी रिसने लगी और इस हादसे में करीब चालीस हजार लोगों की मौत हो गयी। इतना ही नहीं, करीब सवा पांच लाख लोगों पर स्थाई तौर विकलांगता का प्रभाव पड़ा।

28 मई 1985 को सुब्रत राय ने मुझे बर्खास्त कर दिया, मजदूर हितैषी तडि़त कुमार दादा ने जारी कराया आदेश

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग चार)

पारिवारिक संस्था व सर्वहारा की डींग मारते पाखण्डी बुर्जुआ लोग

लखनऊ: अखबार को शुरू हुए दो साल शुरू हो चुके थे। कर्मचारियों में खुसफुसाहट शुरू हो गयी थी कि वेतन बढ़ना चाहिए। सम्पादकीय लोगों में भी चर्चा पकड़ रही थी। कि अचानक अप्रैल-85 को ऐलान हुआ कि सभी कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ गयी है। दिल धकड़ने लगा था। किसी से भी पूछने लगो तो जवाब ही नहीं मिलता था। जिस जिसी से भी पूछता, तो जवाब मिलता कि लेटर मिलने के बाद ही पता चलेगा। आखिरकार एक दिन लेटर मिल ही गया। हालांकि सबको गोपनीय पत्र से सूचित किया था, लेकिन यह बात छुप कहां होती है। दो-एक दिनों में ही पता चला कि तडित दादा का वेतन साढ़े छह हजार, वर्मा जी का साढे चार हजार, सम्पादकीय लोगों का 12 सौ से ढाई हजार के बीच मिला था। मेरा व श्याम की पदोन्नति हो गयी थी और हम लोगों को कॉपी-होल्डर के बजाय सीधे प्रूफ रीडर बनाते हुए 660 रूपया महीना मिलेगा।

पत्रकारिता के बड़े पदों को छेंके हुए ओछे बौने लोग

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग तीन)

पत्रकरिता में खोखले सुरंग-जीवीयों को करीब से देखा मैंने

मौका मिलते ही पाखण्डी बन जाते हैं आदर्श बघारते लोग

लखनऊ: आपको एक बात बता दूं कि इस पूरे अखबार में सुब्रत राय ने एक बार भी हस्तक्षेप नहीं किया। हां, एक बार सुब्रत राय के नाम से एक पत्र जरूर प्रकाशित हुआ। पूरे दौरान केवल तीन बार ही प्रेस में आये और बारीकी से यहां को देखा-समझा। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह अखबार पूरी तरह शांत रहा था। गुटबाजी और तेल लगाने की परम्परा यहां पनप गयी। मसलन, सन-84 में इंटर की परीक्षाओं के दौर में मेरे दाहिने हाथ पर तेल खौलती कटोरी गिर गयी थी। बड़ा फफोला पड़ गया था। बेहिसाब जलन थी। उसी हालत में मुझे एक राइटर देकर परीक्षा करायी गयी। अगले दिन जब परीक्षा देकर मैं आफिस पहुंचा, तो काम करने के बीच ही मुझे झपकी आ गयी। कि अचानक सुब्रत राय मुआयने पर पहुंचे। मैं कुर्सी की पुश्त पर टेक लगाये हुए था। सुब्रत राय ने कंधे पर हाथ रखा तो मैं जाग गया। चूंकि मैं यहां का पहला कर्मचारी था, इसीलिए वे मुझे खूब पहचानते थे।

दूसरों की मजबूरियां दो कौड़ी में खरीदने सुब्रत राय को महारत है

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग दो)

मुझे गर्व है कि दिग्गजों ने मेरे भविष्य की दिशा तय की

नौकरी मिली तो मछली-भात, और बेरोजागार हुए तो क्रांति-कामी

लखनऊ : साप्ताहिक शान-ए-सहारा अखबार के लिए आफिस खोजने के लिए दो दिनों में ही मैंने सात मकान छान मारे। अपनी टुटी लेडीज साइकिल के बल पर। तडित दादा तो कुछ देर के लिए सुब्रत राय के अलीगंज वाले मकान में कुछ देर के लिए ही आते थे, फिर बाकी अपने घर में ही। दरअसल, खाली वक्त में दादा को मछली की याद सबसे ज्यादा सताती थी ना, इसीलिए। और दादा की खासियत यह है कि वे खाली वक्त तब ही पाते हैं, जब नौकरी उनके हाथ में होती है। नौकरी मिली तो मछली-भात, और जब बेरोजगारी मिली तो क्रान्तिकारिता। लेकिन हम लोगों के प्रति दादा ही नहीं, पूरा परिवार भी स्नेह-प्यार की वर्षा करता था। मैं भी खाली ही था, न घर-बार न परिवार। सो, ज्यादातर वक्ता दादा की सेवा में ही रहता था मैं।

सुब्रत राय का इलाज या तो मजदूर होते हैं, या फिर सुप्रीम कोर्ट

कुमार सौवीरः नंगे अवधूत की डायरी में दर्ज सुनहरे चार बरस (भाग एक)

श्रमिकों के तेवर के सामने सुब्रत राय की अकड़-फूं निकल गयी

चुटकियों में निपट गया साप्ताहिक शान-ए-सहारा का झंझट

लखनऊ : सुब्रत राय और सहारा इंडिया का यह सिर्फ किस्सा ही नहीं है, एक खबर की मुकम्मल पंच-लाइनें हैं। इसे समझने के लिए आपको देखना होगा कि अपना चेहरा काला करने वाले लोग अपनी हराम की कमाई को फंसते देख कर कैसे चुप्पी साध लेते हैं, जबकि खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को वापस हासिल करने वाला श्रमिक जब अपनी औकात पर उतरता है, तो कयामत की तरह कहर तोड़ देता है। जी हां, मैं सहारा इंडिया और सुब्रत राय के ही बारे में बात कर रहा हूं, जब श्रमिकों के तेवर के सामने सुब्रत राय की अकड़-फूं निकल गयी थी। श्रमिकों ने जब भी, तनिक सी भी तेवर-त्योरी चढ़ायी, सुब्रत राय ने बाकायदा आत्म समर्पण कर दिया।

वाराणसी प्रकरणः पत्रकार ही घोंप रहे अपने साथियों की पीठ में खंजर

वाराणसी: शहर के व्‍यस्‍ततम चौराहे पर पुलिसवालों ने अपनी घायल महिला रिश्‍तेदार को अपने घर ले जाने की कोशिश कर रहे दो पत्रकारों के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि भरे-बाजार उनकी जमकर पिटाई भी कर दी। पत्रकारों के साथ हुए इस हादसे से खफा पत्रकारों ने यह पूरा मामला एसएसपी के सामने पेश किया। लेकिन इसके पहले कि इस मामले पर कोई कार्रवाई शुरू होती, शहर के कुछ दलाल पत्रकारों ने वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक के साथ काना-फूंसी की और मामला हमेशा-हमेशा के लिए रद्दी की टोकरी तक चला गया।

सुप्रीम कोर्ट परिसर में यौन उत्पीड़न की शिकायत पर मुख्य न्यायाधीश का पहला आदेश

सुप्रीम कोर्ट परिसर में यौन उत्पीड़न के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने आरोपी अधिवक्ता के सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रवेश पर 6 महीने के लिए पाबंदी लगा दी।

ज़ी न्यूज़ ने किए एक तीर से दो शिकार

ज़ी न्यूज़ और नमो की दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। कुरुक्षेत्र में 'ज़ी न्‍यूज' के मालि‍क सुभाष चंद्रा ने नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा किया था और कहा था कि 'मैं भी हरि‍याणा का सूं, यो ज़ी चैनल भी समझो थारा ही सै।' ज़ी न्यूज़ और कांग्रेस के बीच छत्तीस का आंकड़ा नवीन जिंदल के चलते है।

मैं बनारस हूं, मेरे मर्म को समझिए

एक बार फिर चुनावी बयार के बीच मैं बनारस हूं। राजनीतिक उपेक्षा और तिरस्कार का शहर बनारस। कहने को सबसे पुराना शहर, सांस्कतिक राजधानी पर सबसे बेहाल और बदहाल। राजनीतिज्ञों के लिए इस बार मैं दिल्ली की सत्ता पाने की पहली सीढ़ी हूं। शोर है, होड़ है, चर्चाए है, विरोधी है, समर्थक हैं। नारे हैं, पोस्टर हैं सबको अपनी बात कहकर आगे निकल जाने की जल्दी है। इन सबके बीच मैं अपने जख्मों के साथ उन पर मरहम रखने के इंतजार में खड़ा हूं।

कोबरापोस्ट पड़ताल: सिक्ख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस की संदिग्ध भूमिका का खुलासा

चैप्टर 84: 1984 में हुए सिक्ख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस की भूमिका पर कोबरापोस्ट की तहकीकात। पहली बार कैमरे पर कोबरापोस्ट 1984 के सिक्ख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस की संदिग्ध भूमिका का खुलासा करता है, जिसके चलते देश की राजधानी मे 3000 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया …

फासीवाद को स्वर देते श्री श्री रविशंकर

अभी कुछ दिन पहले ही, ‘आध्यात्मिक गुरू और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों को लोकसभा चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क था कि क्षेत्रीय पार्टियों के लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण ही केन्द्र में मिली-जुली सरकारें बनती है और जिसके लिए उन्होंने ’खिचड़ी’ शब्द इस्तेमाल किया। उनका मानना था कि खिचड़ी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, तथा रुपए के अवमूल्यन के लिए जिम्मेदार होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर केन्द्र में अगली सरकार मिली-जुली बनती है, तो भारतीय रुपए की कीमत काफी नीचे चली जाएगी। उनका विचार था कि मुल्क में अमरीकी समाज जैसा राजनैतिक सिस्टम लागू होना चाहिए जहां केवल दो ही दल हैं। उन्होंने अपने अनुयायियों से भी अपील की कि, वोट देने से पहले वे राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में जरूर रखें।

दिल्ली में मीडिया ने किया रेप पीड़ित दलित लड़कियों के आंदोलन का बहिष्‍कार

दिल्ली। यह कितनी अजीब बात है कि भागाणा (हरियाणा) में गैंग रेप की शिकार हुई बालिकाओं के लिए दिल्‍ली में चल रहे आंदोलन का आज मीडिया ने घोषित रूप से बहिष्‍कार कर दिया। जैसा कि आप जानते होंगे कि भगाणा के लोग गैंग-रेप की शिकार हुई बालिकाओं के साथ पिछले 6 दिनों से दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं। आज (22 अप्रैल, 2014) जेएनयू के सभी छात्र संगठनों के साथियों ने भगाणा के पीड़ितों को साथ लेकर हरियाणा भवन पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान आयोजित जन-सभा में एक साथी ने भगाणा प्रकरण को तवज्‍जो नहीं देने को लेकर मीडिया को ब्राह्मणवादी कहा। इस पर वहां खड़े पत्रकारों ने आंदोलन के जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए इसके बहिष्‍कार करने की घोषणा कर दी। उन्‍होंने आयोजकों का सबक सिखाने की धमकी दी तथा एक ओर गोल बनाकर खड़े हो गये।

क्या फर्क पड़ता है कि हरिसिंह जाटव मर गया

बरेली। विगत 17 अप्रैल को आंवला लोक सभा क्षेत्र के देवचरा में एक मतदान बूथ पर हरिसिंह जाटव ने केरोसिन डाल कर आत्मदाह कर लिया था। हरिसिंह वोट डालने के लिए जयपुर से अपने घर आया था। वह राम भरोसे इंटर कॉलेज मतदान केंद्र के बूथ संख्या 310 पर वोट डालने भी गया। लेकिन मतदान पर्ची न होने के कारण मतदान कर्मियों ने उसे वोट नहीं डालने दिया। बार-बार मना किए जाने से क्षुब्ध हरिसिंह ने आत्मघाती कदम उठा लिया। फिर जैसा कि होना था, प्रशासन ने हरिसिंह को विक्षिप्त औऱ शराबी बता कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की और अपनी रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग को ये बात लिख भेजी।

नेता ने कहा – इस महिला पत्रकार का रेप करो, किस करो

अपने ओहदे की लाज न रखते हुए एक नेता सारी मर्यादाओं को लांघ गया। इस नेता ने पत्रकार सभा के दौरान अपने समर्थकों से एक गर्भवती महिला पत्रकार का रेप करने के लिए कहा। उसे जरा भी शर्म नहीं आई कि वो कहां है और क्या कह रहा है। हद तो तब हो गई जब नेता के कहने पर उसका एक समर्थक महिला पत्रकार को चूमने का प्रयास भी किया।

अलगाववादियों ने किया महिला पत्रकार का अपहरण

कीव। यूक्रेन के स्लेवियांस्क शहर में रूस समर्थक अलगाववादियों ने ..युद्ध अपराध.. का आरोप लगाकर एक यूक्रेनी महिला पत्रकार का अपहरण कर लिया है। पत्रकार के वकील ओलेग वेरेमिएंको ने बताया कि उग्रवादियों ने उनकी मुवक्किल इरमा क्रात का कल अपहरण कर लिया।

मुरली मनोहर जोशी ने जी न्‍यूज के सुमित अवस्‍थी को धमकाया

नई दिल्ली। भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के एक इंटरव्यू ने पार्टी को एक नई मुश्किल में डाल दिया है। अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर सवाल पूछे जाने पर बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी इस कदर भड़क गए कि उन्होंने जी न्यूज के रिपोर्टर सुमित अवस्‍थी को इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग डिलीट करने को कहा और धमकी तक दी।

‘फुटेज डिलीट करो, नहीं तो बाहर नहीं जा पाओगे’

लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का ज़ी न्यूज को दिया गए एक अधूरा साक्षात्कार उनके और उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है तो दूसरी ओर लोकसभा चुनाव में भाजपा को घरेने के लिए नए मुद्दे की तलाश कर रही कांग्रेस को यह अधूरा साक्षात्कार एक नया हथियार दे सकता है। इस साक्षात्कार में जोशी भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर सवाल न पूछने के लिए ज़ी मीडिया के रिपोर्टर को धमकी दे रहे हैं लेकिन उनकी यह धमकी कैमरे में कैद हो गई।

मतदान न कर पाने से क्षुब्ध व्यक्ति ने किया आत्मदाह, न्यायिक जाँच की मांग

आँवला लोकसभा क्षेत्र के देवचरा में मतदान  केंद्र के भीतर कथित रूप से मतदान न कर पाने से क्षुब्ध हरिसिंह की मृत्यु की न्यायिक जाँच की मांग

महोदय,
            उपरोक्त
विषयक निम्नांकित तथ्य आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं:

1. दिनांक 17 अप्रैल 2014 को मतदान के दौरान आंवला लोक सभा क्षेत्र के देवचरा में राम भरोसे इंटर कॉलेज मतदान केंद्र के बूथ संख्या 310 के वोटर संख्या 1309 हरि सिंह को कथित रूप से मतदाता पर्ची न होने की वजह से कई प्रयासों के बाद भी वोट नहीं डालने दिया गया। इससे कुपित होकर उसने मतदान प्रक्रिया के दौरान ही मतदान केंद्र के अंदर तमाम सुरक्षा बलों, सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों व मतदाताओं की मौजूदगी में ही केरोसिन डालकर आत्मदाह कर लिया। 90 प्रतिशत जल जाने के कारण कुछ ही देर में जिला अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गयी।

अमर उजाला के इस साथी पत्रकार को सलाम

लखनऊ। लोक सभा चुनाव में जहां पेड न्यूज़ के किस्सों की भरमार हैं और मीडिया पर तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं वहीं अमर उजाला के एक साथी पत्रकार की ईमानदारी प्रशंसा योग्य है। वाक़या समाजवादी पार्टी के कैसरबाग कार्यालय पर शनिवार को हुयी एक बैठक का है। कवरेज के लिए वहां ‘अमर उजाला’ का संवाददाता भी पहुंचा। संवाददाता ने जब बैठक के विषय में कुछ और जानकारी चाही तो मीडिया प्रभारी ने बताया कि इसके लिए उसको लोकसभा प्रत्याशी प्रो. अभिषेक मिश्र के चुनाव कार्यालय चलना पड़ेगा। इसके बाद वो मीडिया प्रभारी अमर उजाला संवाददाता को चुनाव कार्यालय पर ले गया जहां एक छोटे  कमरे में सपा के ही एक दूसरे नेता ने हजार के नोटों की गड्डी निकाली और संवाददाता की ओर बढ़ा दी।

हाईकोर्ट ने कहा हज पर जाने वालों को दी जाएं बेहतर सुविधाएं

शाहजहाँपुर(उप्र), 21 अप्रैल। इमरोज़ होटल, कच्चा कटरा, में एक प्रेस कांफ्रेंस में बोलते हुए हाजी मोहम्मद असलम खां वारसी ऐडवोकेट ने बताया कि भारत के हाजियो के साथ हज के समय बहुत नाइंसाफी, हक्तल्फी, बेमानी होती थी। पैसा होटलो में रोकने का लिया जाता लेकिन उन्हे पुरानी खस्ता हाल इमारतों में रोका जाता था। जबकि दुनीया भर के हाजी होटलो में रुकते है। इसके खिलाफ एक जनहित याचिका हाईकोर्ट इलाहबाद में दायर की गयी थी। याचिका पर हाई केर्ट ने फैसला दिया है कि भारत के हाजियो को वही सहूलियतें दी जाएं जो और मुल्को की हज कमेटी के ज़रिये जाने वाले हाजियो को मिलती है।

न्यूज़ चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम में मारपीट, सपा विधायक पर एफआईआर

लखनऊ। एक न्यूज़ चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम में बहस के दौरान हुई मारपीट के मामले में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने मैनपुरी में एक दूसरे पर एफआईआर दर्ज करायी है।

अगर मोदी की सरकार आई तो क्या अख़बार मालिकों के अच्छे दिन आएंगे?

अच्छे दिन आने वाले हैं, मगर अख़बार मालिकों के, अगर मोदी की सरकार आई तो…। इसी साल 7 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सभी अख़बार मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड सम्बन्धी केन्द्रीय श्रम मंत्रालय के 2011 के आदेश को उसी तिथि से लागू करने का आदेश दिया था। उसके बाद एबीपी, राजस्थान पत्रिका जैसे कई संस्थानों ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं, जिनके ख़ारिज हो जाने के बाद अब इसे लागू करना ज़रूरी हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ही इसकी काट में जुटे अख़बार मालिकों ने नई रणनीति बनाई है।

ये नेता हैं या गुंडे?

जिन-जिन लोगों को हिंदी फिल्में देखने का शौक़ है वह सब अमरीश पूरी, प्रेम चोपड़ा, गुलशन ग्रोवर, शक्ति कपूर, सदाशिव अमरापुरकर, प्राण और इसी प्रकार के दुसरे विलन को अच्छी तरह जानते हैं। ये फिल्मी विलेन गाँव वालों को या आम जनता को धमकी देते रहते हैं की यदि तुमने हमारा काम नहीं किया तो हम तुम्हें उठवा लेंगे, तुम्हारे घर वालों को उठवालेंगे या फिर यह कि तुम्हारी ज़मीन छीन लेंगे। यह सब फ़िल्मी गुंडे हैं और ऐसी हरकतें सिर्फ फिल्मों में करते हैं मगर अफसोस की बात यह है कि हमारे प्यारे देश भारत में जिन नेताओं को जनता की रक्षा के लिए चुना जाता है वही आये दिन जनता को और अपने विरोधियों को धमकी देते रहते हैं।

सुब्रत रॉय की ज़मानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुरक्षित

नई दिल्ली, 21 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने आज सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय और दो निदेशकों की ज़मानत याचिका पर अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया है। ये तीनो 4 मार्च से न्यायिक हिरासत में हैं। न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुब्रत राय और दो निदेशकों की जमानत के लिए दस हजार करोड़ रुपए का भुगतान करने के सहारा के प्रस्ताव पर भी विचार करने की सहमति दे दी है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

राजनीतिक पत्रिका ‘न्यूज बेंच’ का हिंदी और अंग्रेजी संस्करण बाजार में

ग्रांड कॉन्सेप्ट्स मीडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने एक राजनीति केंद्रित मासिक पत्रिका ‘न्यूज बेंच’ का प्रकाशन हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में किया है। न्यूज बेंच के प्रवेशांक की कवर स्टोरी है ‘नरेद्र मोदी के असली दुश्मन’, जिसमें खुलासा किया गया है कि नरेंद्र मोदी को 24 अकबर रोड ‘कांग्रेस’ चाहे अजय भवन ‘वामदल’ से कोई खतरा ही नहीं है। उन्हें असली खतरा अंग्रेजीदां अभिजात्य बुद्धिजीवियों और अपनी ही पार्टी के उन घाघ नेताओं से हैं, जो लगातार उनकी टांग खीचने में लगे हुए हैं। 76 पृष्ठों वाली इस पत्रिका ने पूरे देश के राजनीतिक नब्ज़ को टटोलने के साथ अन्य क्षेत्रों को भी अपने भीतर समेटने का प्रयास किया है।

न्यूज़ फर्स्ट से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार रवि शर्मा

मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार रवि शर्मा ने गौरी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को ज्वाइन किया है। संस्थान में उन्हें कार्यकारी संपादक बनाया गया है। रवि शर्मा लंबे समय से प्रिंट मीडिया से जुड़े रहे हैं। वो दैनिक जागरण, अमर उजाला और जनवाणी समेत कई समाचार पत्रों में अहम पदों पर काम कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट तेजपाल की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई को तैयार

नई दिल्ली, 21 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल की ज़मानत अर्ज़ी सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। मुख्य न्यायाधीश की बैंच ने सुनवाई करते हुए गोवा पुलिस से चार हफ्तों में जवाब देने को कहा है। तेजपाल पर अपनी एक जूनियर महिला सहयोगी से दुष्कर्म का आरोप है।

ये चुनावी इंकलाब सिवाय ज़़ुबानी जमा-खर्च और कुछ नहीं

वाराणसी। न शहादत दिवस है और न ही जन्म दिवस फिर भी अपने शहर बनारस की सरज़मीन पर इंकलाब-जिदांबाद के नारे को सुन रहा हूं तो भगत सिंह की बातें इंकलाब का मतलब अन्याय पर टिकी व्यवस्था का खात्मा है, जेहन में गूंज रहा है। चुनावी मौसम में इस नारे के औचित्य को समझना चाहता हूं पर समझ छोटी पड़ रही हैं। नारे लगाने वाले राजनीतिक दल कौन सा इंकलाब लाना चाहते हैं। इनका इंकलाब कब आयेगा, ये तो नहीं पता पर अफसोस काश भोली-भाली आवाम इन्हें समझ सकती? जान पाती इनके मंसूबों को? इनके चेहरों को पहचान पाती? वैसे ये शहर एक लम्बे समय से किसी इंकलाब की बाट जोह रहा है, जो यहां के हालात में आमूल-चूल परिवर्तन ला दे।

सुंदर ने अपनी पहली मोहब्‍बत को अपनाया है, बीवी के साथ

लखनऊ: आर सुंदर ने आखिरकार पत्रकारिता को टाटा बाय-बाय कर दिया है। मतलब यह नहीं कि वह अब अभिव्‍यक्ति के असीम क्षेत्र को छोड़ने जा रहा है, बल्कि उसने पत्रिकारिता के परम्‍परागत क्षेत्र को छोड़कर अध्‍यापन को अंगीकार कर लिया है। वह भी फोटोग्राफी। लखनऊ के रामस्‍वरूप विश्‍वविद्यालय में अब वह सहायक प्रोफेसर के तौर पर अपने छात्रों को कैमरे के कमाल और बारीकियों-तकनीकियों से रू-ब-रू करायेगा।

दिव्य भास्कर ने लिया धीमंत से इस्तीफा, कल्पेन को नोटिस

दिव्य भास्कर, अहमदाबाद में बतौर पॉलिटिकल एडिटर काम कर रहे धीमंत पुरोहित का चुनावो के दौरान ही इस्तीफा ले लिया गया है। एक अन्य पत्रकार कल्पेन मकवाणा को इस्तीफे का नोटिस दे दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि, नरेन्द्र मोदी का फर्जी इन्टरव्यू फ्रन्ट प्रेज प्रकाशित होने और बाद में माफी मांगने के कारण धीमंत पूरोहित के सामने काफी सवाल खड़े होने लगे थे। इसके बाद एक और घटना में भी दिव्य भास्कर को माफी मांगनी पड़ी थी। कहा जा रहा है कि, दिव्य भास्कर स्टेट एडिटर अवनीश जैन ने ही धीमंत की बतौर पोलिटिकल एडिटर नियुक्ति की थी और आज जैन ने ही धीमंत का इस्तिफा ले लिया है।

क्या राज ठाकरे की इतनी न्यूज-वेल्यू है कि मीडिया उससे अपनी औकात नपवाए?

चौथे खंभे के जिन दिग्गजों को हम जैसे लोग लोकतंत्र के पहरुये, रक्षक-उद्धारक समझ रहे थे, वे बेहद बौने साबित हुए। राज ठाकरे ने टीवी चैनलों पर नामी पत्रकारों की ऐसी-तैसी कर दी। इन तथाकथित बड़े पत्रकारों के लिए भीगी बिल्ली बन जाना, मुआवरा भी छोटा साबित हुआ। पहली बार पत्रकारों को इतना दयनीय रूप में देखा। ये स्थिति न केवल शर्मनाक, वरन भविष्य के लिहाज से चिंताजनक भी है। आपातकाल के बारे में सुना है कि तब इंदिरा गांधी ने मीडिया को थोड़ा झुकने के लिए कहा था और उसकी परिणति रेंगने के रूप में सामने आई थी। लेकिन अब भारतीय मीडिया, खासतौर टीवी मीडिया रेंगने से भी आगे की दुर्गति को प्राप्त हो गया है।

सारधा समूह के न्यूज चैनल की प्रमुख रहीं अर्पिता घोष को ईडी का नोटिस

कोलकाता। बालूरघाट संसदीय क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार औऱ सारधा समूह के न्यूज चैनल की प्रमुख रहीं अर्पिता घोष को केन्द्रीय जांच एजेन्सी इंफोर्समेन्ट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। ईडी बहुचर्चित सारधा घोटाले की जांच कर रहा है। अर्पिता से सारधा समूह के न्यूज चैनल से संबंधित कागजात और खातों के बारे में पूछा गया है। उनका कहना है कि वे नोटिस का जवाब देंगी और अगर जाना पड़ा तो 24 अथवा 25 अप्रैल को स्वयं ईडी के ऑफिस जाएंगी।

राज ठाकरे धमकाता रहा और संपादक भीगी बिल्ली बनकर बैठे रहें

पिछले दो तीन दिनों में मैंने राजदीप सरदेसाई और टाइम्स नाउ के मठाधीश एंकर को राज ठाकरे का साक्षात्कार लेते हुए टीवी पर देखा। मोटी मलाई खाकर बड़े बड़े स्टुडिओज में ही बैठकर देश का विजन सेट करने की गफलत पाले इन बड़े चेहरों की बेचारगी निश्चित तौर पर भारतीय मीडिया जगत की गिरावट का प्रबल उदाहरण बनकर सामने आई।

आरटीआई के ज़रिए तेजपाल ने अपने मुक़दमे के खर्च का ब्यौरा मांगा

पणजी। अपनी एक जूनियर महिला सहयोगी से दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद तहलका के संस्थापक संपादक तरूण तेजपाल ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत अपने मुकदमे की पूरी छानबीन और अभियोजन पर हुए खर्चे की जानकारी मांगी है। आरटीआई के माध्यम से तेजपाल ने चार सवालों के साथ गोवा पुलिस के समक्ष एक आवेदन पेश किया है। तेजपाल ने पूछा है कि इस मामले में वकीलों को कितनी धनराशि का भुगतान किया गया है। इसके अलावा कितने पुलिसकर्मी इस मामले की जांच कर रहे हैं। तेजपाल ने यह भी पूछा है कि उनके मामले में कितनी बार गोवा-मुंबई और गोवा-दिल्ली-गोवा के बीच विमान यात्राएं की गई हैं।

मतदाता को डराने-धमकाने की राजनीति और ख़ामोश चुनाव आयोग

जब बात सत्ता पाने की राजनीति को लेकर हो तो उसमें अच्छी नीति की संभावना न के बराबर ही होती है। राजनीति और झूठ का रिश्ता इतना गहरा हो गया है कि सत्ता सुख के लिए जनता को ललचाना, बहकाना, खरीदना, झूठे वादे करना ये सब राजनीति की प्रवृत्ति बन चुकी है, और एसे में जब कोई नेता वोट के लिए मतदाताओं को डराना शुरू कर दे तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं। हमारे राजनेताओं का स्तर इतना गिर चुका है कि वें वोट बैंक के लिए किसी भी अमानविय घटना को अंजाम देने के लिए एकदम तैयार बैठे हैं। 9 चरण वाले लोकसभा चुनाव 2014 का दौर जारी है, 6 चरण पूरे हो चुके हैं और तीन चरण अभी भी बाकी हैं और ऐसे में अमित शाह और आजम खान का मुद्दा अभी शांत हुआ नहीं था और आचार संहिता के उल्लंघन की प्रतियोगिता अभी चल ही रही थी कि मतदाताओं को डराने व धमकाने के जो नए मुद्दे सामने आए हैं वो लोकतंत्र के निर्वाचन प्रणाली में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए अशुभ संकेत है।

एक मई से भोपाल में लॉन्च होगा ‘हरिभूमि’

'हरिभूमि' के भोपाल संस्करण के लॉन्चिंग की तैयारियां पूरी हो गई हैं। 'हरिभूमि' भोपाल के संपादक डॉ. संतोष मानव के नेतृत्व में भोपाल में काम-काज शुरू हो गया है। 1 मई को इसके बाजार में आने की संभावना है। यह अखबार रोहतक, नई दिल्ली, बिलासपुर, रायपुर, जबलपुर से पहले ही प्रकाशित हो रहा है। एडिटोरियल, विज्ञापन, सर्कुलेशन सभी टीमों का गठन किया जा चुका हैं। अख़बार का डमी निकलना भी प्रारंभ हो गया है। हजारों लोगों को अब तक ग्राहक बनाया जा चुका है। भोपाल में होर्डिंग, स्टीकर से प्रचार-प्रसार भोपाल में एक नए अखबार के आने का माहौल बन चुका है।

रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र कर का सड़क दुर्घटना में निधन

रायपुर। रायपुर (छत्तीसगढ़) के वरिष्ठ पत्रकार और यहां से निकलने वाले दैनिक समाचार पत्र आज की जनधारा के मैनेजिंग एडिटर देवेंद्र कर उनकी धर्मपत्नी और बहन का शनिवार (19.4.14) को एक सड़क दुर्घटना में दुखद निधन हो गया। देवेंद्र कर जी के निधन से छत्तीसगढ़ का पत्रकार जगत सकते में है। छत्तीसगढ़ में लगभग 25 सालों से पत्रकारिता के विविध आयामों में सक्रिय देवेंद्र कर बेहद मिलनसार व्यक्ति थे। देवेंद्र कर अपने पत्रकार साथियों के दुख सुख में हमेशा उनके साथ सहभागी रहते थे।

यूपी पुलिस ने दिया चतुर्थ श्रेणी कर्मियों पर गलत हलफनामा

आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस गलत हलफनामा दायर कर घुमावदार तरीके से खुद को बचाने के प्रयास में है। पुलिस डिपार्टमेंट क्लास IV एम्प्लाइज एसोसियेशन द्वारा दायर पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीजीपी, यूपी को यह हलफनामा दायर करने को कहा कि ये कर्मचारी नियम के विपरीत कहीं तैनात नहीं किये गए हैं।

भारत में फलता-फूलता मुक़दमेबाजी उद्योग

भारतीय न्यायातंत्र उर्फ मुकदमेबाजी उद्योग ने बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध करवा रखा है। देश में अर्द्ध–न्यायिक निकायों को छोड़कर 20,000 से ज्यादा न्यायाधीश, 2,50,000 से ज्यादा सहायक स्टाफ, 25,00,000 से ज्यादा वकील, 10,00,000 से ज्यादा मुंशी टाइपिस्ट, 23,00,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी इस व्यवसाय में नियोजित हैं और वैध–अवैध ढंग से जनता से धन ऐंठ रहे हैं। अर्द्ध-न्यायिक निकायों में भी समान संख्या और नियोजित है। फिर भी परिणाम और इन लोगों की नीयत लाचार जनता से छुपी हुई नहीं हैं। भारत में मुक़दमेबाजी उद्योग एक चक्रव्यूह  की तरह संचालित है, जिसमें सत्ता में शामिल सभी पक्षकार अपनी-अपनी भूमिका निसंकोच और निर्भीक होकर बखूबी निभा रहे हैं। प्राय: झगड़ों और विवादों का प्रायोजन अपने स्वर्थों के लिए या तो राजनेता स्वयं करते हैं या वे इनका पोषण करते हैं। अधिकाँश वकील किसी न किसी राजनैतिक दल से चिपके रहते हैं और उनके माध्यम से वे अपना व्यवसाय प्राप्त करते हैं, क्योंकि विवाद के पश्चात पक्षकार सुलह–समाधान के लिए अक्सर राजनेताओं के पास जाते हैं और कालांतर में राजनेताओं से घनिष्ठ संपर्क वाले वकील ही न्यायाधीश बन पाते हैं।

स्मृति-शेषः तुमको तो दिल्ली आना था देवेंद्र….

तुमको तो दिल्ली आना था, कहां चले गए देवेंद्र? मैं तो इंतजार कर रही थी कि कब तुम दिल्ली आओ कब तुमसे ढेर सारे गाने सुनूं। कहीं साथ बैठकर खाना खाएं और ढेर सारी गपशप हो। पर रायपुर छोड़ने के बाद से यह सपना ही रह गया। तुम जब भी आए कितनी हडबडी में आए। कोई ऐसा करता है क्या? मुझे याद आ रहा है कटोरा तालाब में नए साल का जश्न। कितनी अच्छी महफिल जमाई थी न अपन ने, मेरी छत पर। रीतेश, अमित कुमार, तुम ,डाक्टर इंगले और मेरा परिवार। रात भर हारमोनियम बजा-बजाकर हर कोई सुरा -बेसुरा गाता रहा। मैं तुम्हे बेसुरा नहीं कह सकती। कितना अच्छा गाते हो तुम पर… उस दिन पत्नी से मासांहारी भोजन बनवाकर लाए थे तुम। जानते थे न कि दीदी न नॉनवेज बनाती है न खाती हैं।

बाबा रामदेव पर आचार संहिता के उल्लंघन का मुक़दमा दर्ज

फतेहपुर(उत्तर प्रदेश)। योग गुरू बाबा रामदेव के खिलाफ चुनाव आयोग के निर्देश पर शनिवार की रात आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया। बिना अनुमति प्रेस कांफ्रेंस करने और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी व केजरीवाल पर निजि टिप्पणी करने को आयोग ने गंभीरता से लिया है। सदर कोतवाली में बाबा रामदेव के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। बाबा रामदेव को फतेहपुर औरखागा तहसील में योग शिविर करने की अनुमति मिली थी, लेकिन उन्होंने बिना प्रशासन की इजाज़त के भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में शनिवार दोपहर आवास-विकास कालोनी में प्रेस वार्ता की।

ईस्ट इंडिया कंपनी की नयी कहानी- अम्बानी और अडानी

आवश्यकता आविष्कार की जननी है। साल 2012-13 का दौर भी कुछ ऐसा ही वक़्त लगा था। तब हिन्दुस्तान को लगा कि आज़ादी की दूसरी क्रान्ति शुरू हो गयी है। अन्ना नाम के शख्स ने एक उम्मीद जगाई और केजरीवाल नाम के "नायक" का जन्म हुआ। इस दौर में लोगों की सोच में ख़ासी तब्दीली आई। महज़ घर में टी.वी. के सामने बैठ नेताओं को कोसने और देश की दुर्दशा पर घड़ियाली आंसू बहाने वाला तबका भी घर से बाहर निकला। "आज़ादी की दूसरी लड़ाई" में, आंशिक तौर पर ही सही, पर शामिल हुआ। "आप" का जन्म हुआ। अरविन्द केजरीवाल ने, आम आदमी का पैसा चूसने वाले क्रोनी कैप्टिलिज़्म के प्रतीक अम्बानी-अडानी और वाड्रा जैसे तथा-कथित प्रॉपर्टी डीलरों की जमात की खुलेआम मुख़ालफ़त की। पर अचानक नयी फिल्म आयी। "महानायक" नरेंद्र मोदी का अवतार सामने आया। ऐसा "अजूबा" अवतार जिसका फैन आम आदमी हो गया।

मीडिया पर क्यों हो रहे चौतरफा हमले?

मीडिया में साख की कमी है ये तो जानी हुई बात है। लेकिन पिछले कई दिनों से मीडिया(खासकर टीवी चैनल्स) पर जिस तरह आरोपों के हमले हो रहे हैं वो असहजता पैदा करने वाले हैं। शनिवार को भी राज ठाकरे और उसके बाद आजम खान ने जिस अंदाज में भड़ास निकाली वो ध्यान खींचने के लिए काफी है। राज के बयान में उदंडता का भाव है वहीं आजम ने लगातार मीडिया पर नरेन्द्र मोदी से पैसे खाने का आरोप  लगाया है। एबीपी न्यूज के एक कार्यक्रम में आजम ने बदमिजाज लहजे में एंकर अभिसार को मोदी से पैसे मिलने का जिक्र किया। इस चैनल ने कोई प्रतिकार नहीं किया। बेशक पत्रकारिता की परिपाटी है कि सवाल पूछने के बाद पत्रकार को जवाब सुनना होता है चाहे जवाब कितना भी उत्तेजना पैदा करने वाला क्यों न हो। लेकिन केजरीवाल की तरफ से पत्रकारों को जेल भेजने वाली धमकी के बाद से ये सिलसिला सा बन गया है।

स्मृति-शेषः अपने जिंदादिल अंदाज़ और बेबाकी के लिए बहुत याद आएंगें देवेंद्र कर

रायपुर के दैनिक अखबार ‘आज की जनधारा’ के संपादक-प्रकाशक देवेंद्र कर का रविवार एक सड़क दुर्धटना में निधन हो गया। यह लेख उनकी स्मृति में लिखा गया है।
 

मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि अपने बहुत प्यारे दोस्त, सहयोगी और एक जिंदादिल इंसान देवेंद्र कर के लिए मुझे यह श्रद्धांजलि लिखनी पड़ेगी। तीन दिन पहले की ही बात है देवेंद्र का फोन आया था वे मुझसे पूछ रहे थे “आखिर मप्र कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने मेरे खिलाफ बयान क्यों दिया है। ऐसा क्या लिख दिया सर।” वही चहकता अंदाज पर भोपाल और रायपुर की दूरी को पाट देने वाली हंसी। “सर विवाद आपका पीछा नहीं छोड़ते।” फिर वही परिवार का हाल “भाभी कैसी हैं बात कराइए।” मैंने कहा आफिस में हूं, घर जाकर भूमिका से बात कराता हूं। पर बात नहीं हो पाई। अब हो भी नहीं पाएगी। प्रभु को इतना निर्मम होते देखना भी कठिन है। एक परिवार से तीन शव निकलें, यह क्या है महिमामय परमेश्वर। इस दुर्घटना में देवेंद्र ,उनकी पत्नी और बहन तीनों की मौत मेरे लिए हिलाकर रख देने वाली सूचना है। उनके बहुत प्यारे दो बच्चे भी घायल हैं।

कथा सेबी के काले दूध और सोनिया-मन मोहन-चिदंबरम के रचे लाक्षागृह की!

स्कूल के दिनों में कहीं पढ़ा था कि किसी देश के लिए सेना से भी ज़्यादा ज़रुरी होती है न्यायपालिका। सच जिस देश और समाज में न्या्य न हो उस के पतन को कोई रोक नहीं सकता। इसी लिए न्याय व्यवस्था किसी भी सभ्य समाज की अनिवार्य ज़रुरत है, अनिवार्य पहचान है। लेकिन क्या यह न्याय व्यवस्था? जो अपने विवेक से काम करने के बजाय कुछ राजनीतिक स्वार्थ में न्यस्त लोगों का खिलौना बन जाए? यह न्याय व्यवस्था?

एक औरत का अकेले हनीमून पर जाना !

: पुरुष सत्ता को चुनौती देती और हिंदी सिनेमा में बदलती घर की औरत की दास्तान! : क्या कोई औरत अकेले हनीमून पर जा सकती है? बिना पुरुष साथी के? जिस को कि पति कहते हैं? हमारे भारतीय समाज में, हिंदी समाज में? हिदी सिनेमा में ? अभी-अभी।  बिलकुल अभी गई है एक औरत अकेली हनीमून पर। और इस औरत का अकेले हनीमून पर जाना न सिर्फ़ दिलचस्प है बल्कि इस बहाने बदलती हुई एक भारतीय स्त्री का एक मानीखेज दर्पण और उस की दुनिया भी हमारे सामने उपस्थित है। उस की यह हनीमून यात्रा एक जोरदार तमाचा है पुरुष सत्ता के चेहरे पर जिस की गूंज बहुत देर तक सुनाई देती है। और कि सुनाई देती रहेगी।

आखिर कौन है वह जो सहारा के लाखों साथियों की रोटी से खेल रहा है?

'न्याय को अंधा कहा गया है। मैं समझता हूँ न्याय अंधा नहीं, काना है, एक ही तरफ देखता है' -हरिशंकर परसाई।…….. सहारा और सेबी के मामले में सहाराश्री की गिरफ़्तारी के बाबत हरिशंकर परसाई की यह बात कई बार मान लेने को जी करता है। क्यों कि सुप्रीम कोर्ट सारी बातें, सारी दलीलें सिर्फ़ सेबी की ही सुन पा रहा है, देख पा रहा है।

नए जमाने का एनबीटी सपा का मुखपत्र बनने की राह पर!

युवाओं की बातें कहने और सुनने का लक्ष्‍य लेकर लखनऊ की सरजमीं पर दूसरी बार उतरा नवभारत टाइम्‍स अपना पुराना इतिहास दोहराने की राह पर बढ़ चला है. युवाओं की टीम और युवा संपादक के बीच 'जागरण सोच' नए जमाने के नए अखबार पर भारी पड़ रहा है. फैंटेसी के साथ लखनऊ की में कदम रखने वाला एनबीटी अब पुराने सनातनी अखबार की तरफ बढ़ चला है. अब इसमें ना तो नयापन नजर आ रहा है और ना ही तेवर. स्‍कीम खतम होने के बाद सर्कुलेशन भी बुरी तरह गिर चुका है.

पत्रकार सरताज से लूट के मामले में पांच के खिलाफ मुकदमा

गाजियाबाद ज़िले में एक पत्रकार के साथ अभद्रता व बदतमीजी करने और कैमरा छीनने के मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों के विरुद्ध लूट का मुकदमा दर्ज़ किया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. अभी तक कोई भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है. पत्रकार के साथ यह घटना बीते 16 अप्रैल को घटित हुई थी.

सीरिया में अपहृत चारों फ्रांसिसी पत्रकार आजाद

सीरिया में एक साल से क़ैद फ़्रांस के चार पत्रकारों को आज़ाद कर दिया गया है. फ़्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने शनिवार को यह जानकारी दी. एक बयान में ओलांद ने कहा, "आज सुबह बहुत राहत के साथ यह पता चला कि चारों फ़्रांसिसी पत्रकारों को आज़ाद कर दिया गया है." बयान के मुताबिक़ रिहा किए गए पत्रकार एडवर्ड एलियास, डिडियर फ्रांसुआ, निकोलस हेनिन और पिएरे टोर्रेस की सेहत अच्छी है. चारों पत्रकारों को जून 2013 में सीरिया में अपहृत किया गया था.

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मीर पर जानलेवा हमला

करांची। पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार और जियो न्यूज़ के संपादक हामिद मीर को, अज्ञात हमालावरों ने शनिवार शाम गोली मार दी। मीर पर हमला करांची एयरपोर्ट से जियो न्यूज के दफ्तर जाते समय हुआ। खबर है कि हमलावर एयरपोर्ट से ही उनकी गाड़ी का पीछा कर रहे थे। गाड़ी पर अचानक फायरिंग की गई जिसमें पिछली सीट पर बैठे मीर के शरीर के निचले हिस्से में तीन गोलियां लगीं। समझदारी का परिचय देते हुए गाड़ी का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल मीर को  एक अस्पताल तक ले गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब ख़तरे से बाहर है।

‘फिसल गए तो हर-हर गंगे’ वाले नकवी साहब बेचारे अफ़सोस जता रहे होंगे

पंकज कुमार झा : कोई कमर वहीद नकवी थे इंडिया टीवी में. नहीं रहे अब वहां. उनके जाने के बाद से सारे सिक्युलर इतने ज्यादे आहत हैं जितना क्रिकेट में पाकिस्तान की हार पर भी नहीं होते. खैर. इंडिया टीवी के दफ्तर तक चल कर पहुचे थे नरेंद्र मोदी 'आपकी अदालत' में. वही फार्मेट, वही होस्ट रजत शर्मा, सदा की तरह एक बुद्धिजीवी जज, ढेर सारी जनता और टोकरी भर-भर टीआरपी. हर पांच मिनट पर ट्रक भर विज्ञापन. मोदी जी के अलावा कुछ भी विशेष नहीं. सब पूर्ववत. हर रिपीट टेलीकास्ट के बाद बढ़ता उत्साह. ट्विटर पर नम्बर वन (या टू) ट्रेंड करता हुआ.

जिया उल हक़ की हिदुस्तानी औलादों को, एक धक्का और दो!

Ashok Kumar Pandey : वे गांधी की हत्या करते हैं,वे बाबरी ढहा देते हैं, वे दंगों में बढ़ चढ़ के हिस्सेदारी करते हैं, वे उज्जैन में पीट पीट कर प्रोफ़ेसर की जान ले लेते हैं, वे कभी किसी लेखक पर हमला करते हैं कभी पेंटर पर, वे बनारस में अपने विरोधी पर हमला करते हैं, लखनऊ में अपने विरोधी की प्रेस कांफ्रेंस में गुंडे भेजकर हमला करवाते हैं….

शैंपेन की बोतल गिफ्ट में लेने के आरोप पर दिया इस्तीफा

आस्ट्रेलिया में एक राज्य है जिसका नाम न्यू साऊथ वेल्स है और सिडनी इस राज्य की राजधानी है और मैं सिडनी का स्थायी निवासी हूं। न्यू साउथ वेल्स के स्टेट प्रीमियर (मुख्यमंत्री) ने हाल में ही इस्तीफा दिया क्योंकि उनके ऊपर एक कंपनी से 3000 डालर की एक शैंपेन की बोतल गिफ्ट में लेने का आरोप था।

राज ठाकरे ने राजदीप से कहा- ‘पीछे होकर बैठो… हाथ नीचे करो… अर्नब गोस्वमी मत बनो…. अभी तुम्हारा भौकना बंद हो गया…’

Prashant Tandon :  Must watch interview of Raj Thackeray… ''पीछे हो कर बैठो… interview है interrogation नहीं…हाथ नीचे करो…अर्नब गोस्वमी मत बनो….बीच में मत बोलो.. अभी तुम्हारा भौकना बन्द हो गया…''

अमूल वालों के ‘बेसहारा परिवार’ कार्टून पर सहारा ने भेजा लीगल नोटिस

निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपए न लौटने पर सहारा समूह की बाजार में गिरी साख पर कार्टून बनाना अमूल को महंगा पड़ गया है.  कार्टून में चुटकी लेने पर सहारा समूह ने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन को कानूनी नोटिस भेजा है.

जी वालों की मानहानि याचिका पर नवीन जिंदल कोर्ट में तलब

जी मीडिया की ओर से दायर मानहानि याचिका मामले में सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी स्वाति कटियार ने कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल को समन जारी कर तलब किया है. अदालत ने सांसद को 28 जुलाई के दिन पेश होकर जवाब दायर करने के लिए कहा है.

अमेरिका में दूसरा सबसे खराब काम माना गया अखबार के पत्रकार की नौकरी

अमेरिका में एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार अखबार के संवाददाता की नौकरी दूसरा सबसे खराब काम माना जाता है. फर्म करियरकास्ट के अध्ययन के अनुसार अमेरिका में गणितज्ञ की नौकरी सबसे अच्छी और लकड़ी उद्योग में मजदूरी सबसे खराब मानी जाती है. दूसरी सबसे खराब नौकरी अखबारों के संवाददाता की है. रपट के अनुसार पिछले पांच साल में संवाददाता बनने का आकषर्ण तेजी से घटा है और 2022 तक इसमें और गिरावट आने का अंदेशा है क्योंकि बहुत की समाचार प्रकाशक कंपनियां अखबार का काम बंद कर रही है.

पत्रकार पर गुस्साए राज ठाकरे बोले- ‘इस बार सवाल पूछा तो माइक निकाल दूंगा’

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे एक साक्षात्कार के दौरान समाचार चैनल के एंकर पर भड़क गए। राज ने एंकर से कहा कि आप घुमा-फिरा कर एक ही सवाल बार-बार पूछ रहे हो, मैं जवाब दे चुका हूं। अगर इस बार पूछा तो माइक निकाल दूंगा। दरअसल, नरेंद्र मोदी को लेकर राज से एक ही सवाल बार-बार पूछा जा रहा है, जिससे राज गुस्सा गए।

सूर्यकांत द्विवेदी का कारनामा, बीमार फोटोग्राफर को नौकरी से निकाला

हिंदुस्तान अखबार मेरठ के संपादक सूर्यकांत द्विवेदी एक के बाद एक ऐसे कुकर्म करते हैं कि चर्चा में छाए रहते हैं. ताजी सूचना ये है कि उन्होंने एक ऐसे बीमार फोटोग्राफर को अपने यहां से नौकरी से निकाल दिया जिसे पैसों की सख्त जरूरत थी. विजय स्वामी मेरठ में हिंदुस्तान अखबार में साढ़े तीन साल से बतौर फोटोग्राफर नौकरी कर रहे थे. उन्हें हार्ट की प्राब्लम हुई तो अस्पताल में भर्ती हुए जहां उनकी बाईपास सर्जरी की गई.

पाबंदी के बावजूद एनडीटीवी ने दिखाया ओपनियिन पोल, ‘आप’ की शिकायत पर चुनाव आयोग ने दी चेतावनी

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस. संपत को चार मामलों में शिकायत की है. इसमें एक शिकायत न्यूज चैनल एनडीटीवी की भी है.  चुनाव आयुक्त से शिकायत में प्रशांत भूषण ने कहा कि एनडीटीवी ने चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद ओपिनियन पोल दिखाया है और इसे वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया है.

लगा जैसे राज ठाकरे राजदीप सरदेसाई की क्लास लगा रहे हों

: इंटरव्यू या बेअाबरू होने का नया तरीका : आज सुबह सुबह कंप्यूटर चलाया। राज ठाकरे के साथ अर्णब गोस्वामी का इंटरव्यू देखने के लिए, लेकिन बदकिस्मती देखिए, मैं आईबीएन ख़बर की वेबसाइट पर पहुंच गया, जहां राज ठाकरे और सीएनएन आईबीएन के चीफ इन एडिटर राजदीप सरदेसाई राज ठाकरे का इंटरव्यू ले रहे थे।

विफल रहीं चुनाव आयोग की कोशिशें, मप्र में कम रहा मतदान प्रतिशत

आमतौर पर माना जाता है कि जब वोट ज्यादा पड़ते हैं तो सत्ता में बदलाव निश्चित है लेकिन कल मध्यप्रदेश में मतदान प्रतिशत ने नक्सली समस्या से ग्रस्त पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का सिर ऊंचा कर दिया है क्योंकि छत्तीसगढ़ में 66% व मप्र में 55% वोटिंग हुई। ट्विटर, फेसबुक जैसी सोशल साइट्स पर दिन-दुगने रात-चौगुने नमो-नमो का जाप करने वाले तथाकथित विकास के चहेते भी लगता है वोटिंग के दिन भी अपना एडमिन धर्म नहीं छोड़ पाए, मतदान के दिन भी ट्विट करने में व्यस्त रहे। रही बात विपक्षी कांग्रेस की तो वहां 2-4 सीटों पर प्रत्याशिेयों की दमखम रही वहीं, शेष सीटों पर पार्टी ने पहले से ही हार मान ली और कार्यकर्ता भी निराश है एवं उसका परंपरागत वोटर भी इस बार कुछ सोच नहीं पाया।

पैसों की खातिर हेयर सैलून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगे हैं फिल्मी सितारे

राजस्थान की राजधानी जयपुर में फिल्म प्रमोशन के नाम पर होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस अब फैन्स कॉन्फ्रेंस बनकर रह गई हैं। पिछले कुछ अरसे से देखा जा रहा है कि यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस के नाम पर पत्रकारों की अच्छी-खासी संख्या जमा कर ली जाती है, लेकिन मीडिया को फिल्मी सितारों से बातचीत की बजाय अन्य लोगों की भीड में धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। फिल्म प्रमोशन कंपनियों तथा निर्माता-निर्देशकों की धनपिपासु प्रवृति के चलते इन दिनों हालात ये हो गए हैं कि फिल्मी सितारे पैसों की खातिर हेयर सैलून तक में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने लगे हैं। मीडिया की मजबूरी यह है कि उन्हें कवर करने के लिए उसे ऐसी जगहों पर जाना पड़ता है जहां उनसे खुलकर बातचीत करना तो दूर, पत्रकारों को खड़े रहने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती।

सामाजिक न्याय के एजेण्डे पर लड़ा जा रहा है वर्तमान लोकसभा चुनाव

सदियों से ऊंच-नीच की घृणा पर आधारित सामाजिक व्यवस्था में बदलाव का चक्र पूर्ण हुए बिना देश का सुचारु तरीके से आधुनिक लोकतांत्रिक प्रशासन की ओर अग्रसर होना संभव नहीं है। पिछले कई चुनाव से सामाजिक न्याय का एजेण्डा सर्वोपरि बना हुआ है। हालांकि जातिवादी वर्चस्व के दिन फिर लौटने का दिवास्वप्न देखने वाले मोदी को लेकर कुछ और ही राग अलाप रहे थे। उग्र हिन्दुत्व के संवाहक के रूप में मोदी की छवि को देखने की वजह से उन्हें यह मुगालता था कि इससे उनके दो मकसद हल होंगे। एक तो ऊंच नीच से मुक्त और भाईचारे पर आधारित होने के कारण पूरी दुनिया में बढ़त बनाने वाले इस्लाम को मोदी हिन्दुस्तान की सरजमीं पर शिकस्त देकर सैकड़ों वर्ष पहले उनसे परास्त होकर अपमानित हुए पूर्वजों का बदला पूरा होगा। दूसरे शोषित समाज में बराबरी के लिये जो कसमसाहट पैदा हुई है उसे भी कालीन के नीचे दबाया जा सकेगा लेकिन प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित होने के बाद मोदी ने अपनी पुरानी केंचुल धीरे-धीरे उतार फेंकी और शोषित समाज में नव अंकुरित स्वाभिमान को आक्रामक चेतना में बदलते हुए नये हिन्दुस्तान की जरूरत के मुताबिक अपने को ढालना शुरू कर दिया। अम्बेडकर जयंती पर मोदी का भाषण इस कवायद का चरमोत्कर्ष था जिसके बाद से यथास्थितिवादियों में खलबली मची हुई है। वे हतप्रभ हैं और समझ नहीं पा रहे कि जिस वर्ण व्यवस्था के पुनरुत्थान के लिये उन्होंने मोदी का कंधा इस्तेमाल करने की योजना बनायी थी। मोदी की नई सोच की वजह से वह कहीं इतिहास की कब्र में हमेशा के लिये दफन न हो जाये।

सिर्फ लोकप्रियता पाने के लिए दायर की गई दहेज़ की रोकथाम हेतु पीआईएलः हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा दहेज़ के कुप्रभावों को रोकने के लिए बनाए गए उत्तर प्रदेश दहेज़ प्रतिषेध नियमावली 1999 के पूर्ण अनुपालन हेतु दायर पीआईएल को ख़ारिज कर दिया।

रायपुर के पत्रकार विजय मिश्रा के भाई का सड़क दुर्घटना में निधन

रायपुर, 18 अप्रैल 2014। दतरेंगा के पास शुक्रवार की सुबह दैनिक अग्रदूत के पत्रकार विजय मिश्रा के भाई और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संजय मिश्रा (49 वर्ष) का अज्ञात वाहन की चपेट में आ जाने से निधन हो गया।

कहां हो दलितों के ‘मसीहाओं’, पुलिस नहीं सुन रही इस दुराचार पीड़िता की

इलाहाबाद। वाह रे पुलिस! दलित और कमजोर तबके के लोगों को कानूनी मदद तो दूर, खुद आरोपी से मिलकर उसकी मदद करने में पुलिस जुट गई है। एसपी के एफआईआर दर्ज करने का आदेश थाना आफिस में पड़ा धूल फांक रहा है। भुक्तभोगी बालिका एफआईआर कराने को दर-दर भटक रही है। सवाल उठता है, आखिर समाज के शोषित और कमजोर तबके को न्याय मिल पाना यूपी में टेढ़ी खीर साबित होता जा रहा है। सभी को न्याय और कानून सबके लिए का सरकारी नारा क्या सिर्फ थोथा नारा बनके रह गया है। चुनाव में तो नेताओं की बाढ़ है, सबके अपने बड़े-बड़े दावे और वादे हैं। दलित शोषित को न्याय दिलाने का दिनरात राग अलापने वाले हे राजनीति के मठाधीशों! आखिर इस गरीब दलित बालिका और उसके परिजनों को न्याय कैसे मिलेगा?

हाई कोर्ट ने आईपीएस अमिताभ के तबादले पर मांगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा 30 जनवरी 2014 को मात्र 15 दिन में अभियोजन से नागरिक सुरक्षा विभाग में हुए तबादले पर दायर याचिका पर राज्य सरकार ने जवाब माँगा है।

हरियाणा के भगाणा गांव की गैंग रेप पीड़ित लड़कियों के समर्थन में उतरे जेएनयू के छात्र

नई दिल्‍ली, 18 अप्रैल: हरियाणा के हिसार जिले के भगाणा गांव की गैंग रेप की शिकार चार नाबालिग लड़कियां अपने सैकड़ों परिजनों के साथ पिछले दो दिनों से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठी हैं। इनकी मांग है कि कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी व भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्‍याशी नरेंद्र मोदी इनके गांव का दौरा करें तथा हरियाणा में दलितों-पिछड़ी महिलाओं के साथ निरंतर हो रही बलात्‍कार की घटनाओं से निजात दिलाएं।

जनता से सीधा संवाद, राजनीति में नई परम्परा की शुरूआत

वाराणसी। परम्परागत राजनीति से अलग हटकर चुनौती, विरोध और सवाल-जबाब के जरिए राजनीति की नयी परिभाषा गढ़ने चली आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार की शाम कटिंग मेमोरियल स्थित गोकुल लान में जनता से सीधा संवाद स्थापित कर लोकसभा चुनावों में एक नई परम्परा की शुरूआत की। बनारस में अब तक हुए लोकसभा के चुनावों के इतिहास में षायद ऐसा पहली बार हुआ कि खुद चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी ने जनता के सवालों के सीधे जबाब दिया, नही तो चुनावी सभाओं, रैलियों में पहुंचे नेता अपनी ही कहकर चलते बनते है।

शेखर गुप्ता ने अपनी किताब विवेक गोयंका को समर्पित की

इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता की बहुप्रतीक्षित किताब 'ANTICIPATING INDIA' बाज़ार में है लेकिन थोड़े परिवर्तन के साथ। किताब का जैकेट कवर और टैग लाइन बदली हुई है। पहले की टैग लाइन ' IF MODI WINS ON SUNDAY' बदल कर अब हो गई है 'THE BEST OF NATIONAL INTEREST.' शेखर गुप्ता की ये किताब, शनिवार को प्रकाशित उनके कॉलमों का संकलन है।

रवीश की रिपोर्ट इस चुनावी मौसम में सबसे बड़ी राहत है और टीवी की सबसे बड़ी उपलब्धि भी

Manorma Singh : बनावट, बनावटी तेवर, तय सवाल, झूठ-मूठ का आक्रामक लहज़ा, इन सब के बीच रवीश का अनगढ़, एक हद तक आत्मीय और एकदम सीधे सीधे लोगों तक पहुँचने और उन्हें आतंकित किये बगैर एकदम सहज बल्कि उन्हीं के बीच का होकर रिपोर्ट करना इस चुनावी मौसम में सबसे बड़ी राहत है और टीवी की सबसे बड़ी उपलब्धि भी !

विज्ञापन ऐसा ताक़तवर माहौल रच देता है कि कमज़ोर मज़बूत को देख कर बोलने लगता है : रवीश कुमार

नफ़ासत का ओढ़ा हुआ पुलिंदा लग रहा था । शख़्स की ज़ुबान से नाम ऐसे छलक रहे थे जैसे महल की सीढ़ियों से शख़्सियतें उतर रही हों । ऐसा लगा कि कोई मुझे उन नामों के बीच बाँध कर ले जाने आया है । उसने क़दर में भी कोई कमी नहीं की । फिर क्यों जाते जाते कह गया कि आपका शो देखा जाता है । आपको समझना चाहिए । जो तटस्थ हैं समय लिक्खेगा उनका भी अपराध । मेरा क्या अपराध हो सकता है और यह कोई कवि कह रहा है या किसी का कोतवाल । मैं कहां गया और किससे मिला इसमें उसकी दिलचस्पी कमाल की थी । धीरे से कही गई वो बात कविता तो नहीं ही थी । धमकी ?

‘आप की अदालत’ में पुष्पेष पंत की जगह मैं जज होता तो मोदी को जेल भेजता..

इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में रजत शर्मा ने हाल ही में नरेन्द्र मोदी पर 'मुकदमा' चलाया। जज साहब पुष्पेष पंत ने उन्हें बरी किया। पास किया। मैंने वो इंटरव्यू बाद में यू-ट्यूब पर देखा तो देखते समय कुछ नोट्स भी लिए। मैं अगर जज होता तो मोदी को बरी करने के बजाय जेल भेजता। एक झूठ हो तो बरी हो सकते थे वो, लेकिन पूरे इंटरव्यू में झूठ-दर-झूठ बोलते रहे और स्टूडियो में दर्शकों के रूप में बैठे बीजेपी कार्यकर्ता मोदी के पक्ष में नारे लगाते रहे। कई बातें नोट करना भूल गया। फ़िलहाल 14 प्वाइंट्स हैं। आप भी ज़रा ग़ौर फ़रमाइए।

एएनआई से नॉन स्टॉप इंटरव्यू में मोदी जी की अक्ल और समझ दिख गई

Shadab Mujtaba : मोदी की अक्ल और समझ पर तरस आती है। एएनआई से अपने नॉन स्टॉप इंटरव्यू में टोपी पहनने के सवाल पर मोदी जी फरमाते हैं कि क्या सोनिया गांधी ने कभी टोपी पहनी? जनाब मोदी आप मुसलमानों का वोट मांग रहे हैं तो कम से कम इतनी तो मालूमात रखनी चाहिए कि महिलाएं टोपी नहीं पहनती। क्या सलीम खान या सरेशवाला ने होमवर्क नहीं करवाया था? बातचीत आगे बढ़ी… इंटरव्यू लेने वाली मोहतरमा ने कहा कि सोनिया जी तो मजारों पर चादर चढ़ाती है और आप?

नरेन्द्र मोदी के इस इंटरव्यू ने अब एक नए पैटर्न का जन्म दे दिया है

Vineet Kumar : जनता और मीडिया से सीधे मुंह बात नहीं करने औऱ उन्हें लगातार इग्नोर करके कैसे नयी मीडिया स्ट्रैटजी बनती है, इसे आप नरेन्द्र मोदी के संदर्भ में बेहतर समझ सकते हैं. नरेन्द्र मोदी ने मीडिया के लिए अपने को इस तरह एक्सक्लूसिव बनाया कि कोई लाख कोशिश कर ले, अगर चैनल का मालिक स्वयंसेवक (रजत शर्मा जैसे) नहीं है तो उससे बात ही नहीं करेंगे. ऐसे में अच्छा-खराब, क्रिटिकल सवाल करने से कई गुना ज्यादा पूरा मामला इस बात पर आकर टिक गयी कि जो बात कर ले वही सबसे बड़ा पत्रकार. अब देखिए स्ट्रैटजी.

मध्य प्रदेश के श्रम आयुक्त ने मजीठिया वेतन बोर्ड सिफारिश लागू कराने का आदेश जारी किया

मध्य प्रदेश के श्रम आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिला श्रम अधिकारियों को एक नोटिस जारी किया है. इसमें कहा गया है कि सभी जिला श्रम अधिकारी अपने-अपने जिले में पत्रकारों और गैर-पत्रकारों के लिए गठित मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराएं.

कालेधन के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले बाबा रामदेव कालेधन का बचाव करते हुए कैमरे में कैद हो गए (देखें वीडियो)

अलवर में एक सभा के दौरान भाजपा उम्मीदवार महंत चांदनाथ और बाबा रामदेव मंच पर मौजूद थे. इस दौरान चांदनाथ मंच पर लगे कैमरों को भूल गए और बाबा रामदेव से कहने लगे कि उन्हें अपने क्षेत्र में पैसे के लेनदेन में बड़ी दिक्कत पेश आती है. चांदनाथ ने बाबा को उनका पैसा पकड़े जाने की बात बताई. बाबा ने तुरंत उनका हाथ दबाते हुए कहा, 'बावला है क्या, पैसे की बात यहां मत कर, मीडिया सुन रहा है.'

मीडियाकर्मियों से दुर्व्यवहार में विधायक के सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ एफआईआर

यूपी में हापुड़ के लोनी से खबर है कि दो दिन पहले लोनी विधायक जाकिर अली के सुरक्षाकर्मियोंद्वारा पत्रकार के साथ किए गए अभद्र व्यवहार व उसका कैमरा छीनने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है। खन्ना नगर कॉलोनी निवासी एक पत्रकार सरताज खान मंगलवार दोपहर को क्षेत्रीय बसपा विधायक जाकिर अली के कार्यालय पर उसके सुरक्षा कर्मियों द्वारा एक व्यक्ति की पिटाई की कवरेज के लिए पहुंचे थे, जहां सुरक्षाकर्मियों ने सरताज के साथ गाली-गलौच करते हुए उसका कैमरा छीन लिया गया था।

जेल में ही रह गए सुब्रत राय, सहारा के नए प्रस्ताव पर सोमवार को विचार

न्यायिक हिरासत से रिहाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय के 10 करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश का पालन करने के लिए सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय की तरफ से गुरुवार को एक नया प्रस्ताव पेश किया गया है. यह 24 हजार करोड़ रुपये की उस राशि का एक हिस्सा है, जो राय को निवेशकों को लौटाना है. नए प्रस्ताव में सहारा ने कहा है कि तीन कार्य दिवस के अंदर 2,500 करोड़ रुपये जमा कर दिए जाएंगे और शेष 2,500 करोड़ रुपये और 5,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी अगले 60 दिनों के अंदर जमा कर दी जाएगी.

दैनिक जागरण में छंटनी की फिर तैयारी! सुधीर बैंसला और राजू सजवान का तबादला

दैनिक जागरण में काम करने वाले पत्रकारों की फिर शामत आने वाली है। संस्थान में वर्षों से कार्यरत लोगों को किनारे करने के लिए योजना तैयार हो रही है। फरीदाबाद यूनिट में पिछले दस साल से कार्यरत रिपोर्टर सुधीर बैंसला का तबादला सोनीपत कर दिया गया है।

शराबी डिप्टी सीएमओ का कोतवाली में उत्पात (देखें वीडियो)

शराब का नशा जब सिर पर चढ़ जाये तो हंगामा खड़ा होना लाजिमी है। शराब का ऐसा ही नशा गाजीपुर में एक सरकारी मेडिकल आफिसर के सिर पर चढ़ा, और साहब ने सदर कोतवाली परिसर में जमकर हंगामा मचाया। शराब के नशे मे झूम रहे मेडिकल आफिसर कोतवाली में सरेआम बेलिबास हो गये और पुलिस वालों को जमकर हड़काया।

समाजवादी जन परिषद के महासचिव सुनील को ब्रेन हैमरेज

समाजवादी जन परिषद के महासचिव सुनील को ब्रेन हैमरेज होने की खबर है. कल ब्रेन हैमरेज के बाद बेहोशी और शरीर के बाएँ हिस्से के पक्षाघात के चलते इटारसी से भोपाल ले जाया गया. देर रात ऑपरेशन हुआ. मध्य प्रदेश के कई इलाकों में गरीबों की लड़ाई लड़ने वाले सुनील के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना उनके जानने वाले, परिचितों और शुभचिंतकों ने की है.

मोदी के खिलाफ पर्चा भरने जा रहे नेता की कार सीज़

इलाहाबाद। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ संसदीय क्षेत्र वाराणसी से पर्चा दाखिल कर उनके खिलाफ चुनाव में ताल ठोंकने जा रहे एक युवा नेता संजीव मिश्रा की झंडा लगी कार को पुलिस ने सीज कर दिया। घंटों पुलिस से मिन्नतें करने के बाद भी पुलिस का दिल नहीं पसीजा। पुलिस ने चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन करने के मामले में लिखापढ़ी करते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आखिरकार संजीव मिश्रा की मोदी के खिलाफ पर्चा दाखिल करने की हसरत मन में ही धरी रह गई।

पंजाब केसरी भी अपने कर्मचारियों से ले रहा ‘शौकिया पत्रकारिता’ करने का शपथपत्र

दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान के बाद अब सूचना है कि पंजाब केसरी भी मजीठिया से बचने की जुगाड़ कर रहा है। पंजाब केसरी प्रबंधन अपने कर्मचारियों से दस रुपए के ग़ैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर एक शपथ पत्र ले रहा है। शपथ पत्र का प्रारूप पंजाब केसरी द्वारा उपलब्ध कराया गया है। इसमें शपथकर्ता को अपने पूर्णकालिक मूल व्यवसाय की जानकारी देते हुए ये घोषणा करनी है कि पत्रकारिता उसकी मुख्य आजीविका न हो कर मात्र एक शौक है। औऱ यह भी कि उसके मूल व्यवसाय से होने वाली आमदनी उसके जीवन-यापन के लिए पर्याप्त है।

गोदौलिया प्रकरणः संदीप की लड़ाई उसका अखबार लड़े न लड़े, आईसीएन मीडिया ग्रुप उसके साथ है

मिर्ची। अपने कंधे पर जनसुरक्षा का दायित्व उठाने की सौगंध लिए घूम रही पुलिस ने जमीन छोड़ दिया है। शब्दों को अक्षरशः परिभाषित कर रही है जिले के दशाश्वमेघ थाने की पुलिस। नैतिकता, मानवाधिकार, और मानवीय संवेदनाओ को ताख पर रख चुकी पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहती है। अमानवीय चेहरा दिखाते हुए दशाश्वमेघ थाने के गोदौलिया चौराहे पर दो पुलिसकर्मियों ने आम जनता को अपने कोपभाजन का शिकार बनाने के साथ-साथ मीडियाकर्मी संदीप त्रिपाठी, भाई अरुण त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार और संदीप त्रिपाठी के चाचा राजनाथ त्रिपाठी पर ताबड़तोड़ डंडे का प्रयोग, वर्दी का रौब, नियम कानून की धज्जिया उड़ाने के बाद दिखा दिया कि असली गुंडे हम है।

टीवी एंकर के साथ बलात्कार, आरोपी सांसद को सजा

बीजिंग : टीवी एंकर के साथ बलात्कार के आरोपी और सार्वजनिक निधि में घोटाला करने के दोषी चीनी सांसद को गबन और धोखाधड़ी के मामले में स्थानीय अदालत ने 11 वर्ष कारावास की सजा सुनायी। स्थानीय टीवी की लोकप्रिय एंकर वांग देचुन ने 2012 में माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट सिना वेइबो पर एक पोस्ट लिखकर शुआंगचेंग सिटी इंडस्ट्री कॉरपोरेशन के पूर्व महाप्रबंधक और हेइलोंगजिआंग प्रांत के शुआंगचेंग पीपुल्स कांग्रेस के उपप्रमुख सुन देजिआंग पर उससे बलात्कार करने और उसे जबरन यौन संबंध में धकेलने का आरोप लगाया था।

यूपी कैडर के वरिष्ठ आईएएस चंद्रभानु का हार्ट अटैक से निधन

Lalajee Nirmal : दलित परिवार में जन्मे वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी श्री चंद्रभानु जी का विगत 11 अप्रेल को ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया. अम्बेडकर महासभा ने आज उन्हें श्रद्धान्जलि अर्पित की. अगस्त 1967 में यू.पी. के महराजगंज में पैदा हुए चंद्रभानुजी पहली बार में ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुन लिए गये थे. वे लखनऊ, कानपुर, जौनपुर के जिलाधिकारी तथा सचिव मुख्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे. अम्बेडकर महासभा के वे आजीवन सदस्य थे.

यूपी के गरीब महानुभाव और आम आदमी विरोधी सरकार

आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा एमपी, एमएलए तथा विभिन्न आयोग, निगम आदि के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को प्रदत्त सुरक्षाकर्मियों के सम्बन्ध में प्राप्त सूचना से साफ़ दिखता है कि राज्य सरकार आम आदमी की तुलना में इन महानुभावों के प्रति कितना अधिक उदार भाव रखती है. गृह विभाग की पत्रावली के अनुसार जब राज्य सरकार 2008 में नयी सुरक्षा नीति बना रही थी तो उसे महसूस हुआ कि इन महानुभावों को सुरक्षा व्यय का 25% देने में बहुत असुविधा हो रही है.

नेटवर्क18 डिजिटल की दुर्गा रघुनाथ बनीं सीईओ, जागरण में राज कौशिक और रमेश मिश्रा को नई जिम्मेदारी

नेटवर्क18 डिजिटल का सीईओ दुर्गा रघुनाथ बनी हैं. इसके पहले वह इसी ग्रुप की वेबसाइट फर्स्टपोस्ट डाट काम की सीईओ थीं. नेटवर्क18 समूह अंबानी का है जिसे राघव बहल संचालित करते हैं. इसी समूह के डिजिटल कंटेंट की कंपनी है नेटवर्क18 डिजिटल. इसे पहले वेब18 के नाम से जाना जाता था. इस कंपनी के अधीन मनीकंट्रोल डाट काम, आईबीएनलाइव डाट काम, फर्स्टपोस्ट डाट काम, बर्रप डाट काम, फर्स्टबिज डाट काम और न्यूज18 डाट काम जैसे उपक्रम हैं. रघुनाथ नेटवर्क18 समूह के साथ वर्ष 2011 से हैं. नेटवर्क18 समूह के सीओओ अजय चाको हैं.

यूबीआई के जरिए ‘कॉल मनी’ का भी धंधा करता है सहारा

Prabhat Ranjan Deen : यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के ऋण घोटाले की खबर छपते ही कई प्रमुख उद्योगपतियों ने अखबार से सम्पर्क साधा : ऋण के बंटवारे में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का घोटाला उजागर करते हुए हमने 'वॉयस ऑफ मूवमेंट' के अगले अंक में यूबीआई और सहारा के आपसी 'मेलजोल' से भी पर्दा उठाने की बात कही थी।

नरेंद्र मोदी के मुक़ाबले में अरविंद केजरीवाल ध्रुव बन रहे हैं

Anand Pradhan : बनारस में हूँ. कल रात ट्रेन में साथ आ रहे बनारसी सह-यात्रियों से लेकर सुबह आटोवाले हरिलाल तक और दूसरे कई लोगों से बातचीत के बाद इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि बनारस में मुक़ाबला इकतरफ़ा नहीं है.

वाह रे कारपोरेट मीडिया का ‘लोकतंत्र’! मेक्सिको के कुछ सबक

पी. कुमार मंगलम का यह लेख मेक्सिको में चुनावों और प्रायोजित आंदोलनों तथा दलों के जरिए फासीवादी, जनविरोधी उभारों और जन संघर्षों को दबाने के साम्राज्यवादी प्रयोगों की रोशनी में भारत में पिछले कुछ समय से चल रही लहरों की (पहले ‘आप’ की लहर और अब मोदी की) पड़ताल करता है।   नरेंद्र मोदी या …

संजय बारु की किताब से उठे सवाल और मीडिया की भूमिका

पिछले दिनों दो पुस्तकें बाज़ार में आईं, जिन्होंने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया। पहली पुस्तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार रहे वरिष्ठ पत्रकार संजय बारु की है और दूसरी पुस्तक कोयला मंत्रालय में सचिव रह चुके पी सी पारिख की है। इन दोनों पुस्तकों में मोटे तौर पर सोनिया गांधी के लोगों द्वारा चलाई जा रही सरकार के कामकाज के तौर तरीक़ों पर टिप्पणियाँ की गईं हैं। पारिख की किताब की चर्चा तो इसलिये हो रही है कि उन्होंने सोनिया गांधी की पार्टी की सरकार द्वारा आवंटित की गई कोयला खदानों की चर्चा की है। कोयले की खदानों का आवंटन इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ का सबसे बड़ा घोटाला कहा जा सकता है। इस पर देश के उच्चतम न्यायालय ने केवल आलोचना ही नहीं की, बल्कि कुछ खदानों के आवंटन को रद्द भी करना पड़ा। इस घोटाले में फँसे ऊँचे लोग अभी भी न्यायालयों का चक्कर काट रहे हैं। पारिख की कथनी का महत्व इस लिये बढ़ जाता है कि वे खदान आवंटन के इस सारे नाटक के दर्शक मात्र नहीं थे बल्कि उनके सामने ही इस घोटाले का स्क्रिप्ट लिखा जा रहा था। पारिख का कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस घोटाले के बारे में जानते ही नहीं थे बल्कि इसमें परोक्ष रुप से अपनी मौन स्वीकृति भी दे रहे थे।

प्रधानमंत्रियों के शहर इलाहबाद को आखिर मिला क्या?

आनंद भवन, स्वराजभवन इलाहाबाद में है और पूरी दुनिया उसे गांधी और नेहरू परिवार के बारे में वहीं से जानती है फिलहाल मैं इलाहाबादी ही हूँ और पूरे इलाहाबाद की तरफ से आप सभी से या पूछना चाहता हूं की आखिर क्या कारण था की आज आप को इलाहाबाद से कोई प्यार नहीं चलो मान भी लिया की राजीव, सोनिया, राहुल या प्रियंका का कोई कोई लेना देना न हो लकिन क्या जवाहर लाल नेहरू का भी कोई लेना देना इलाहाबाद की जनता या इलाहाबाद से नहीं था, कोई नाता ……………!

इतने सारे न्यूज चैनलों पर एक साथ मोदी का इंटरव्यू! अदभुत है मीडिया मैनेजमेंट!!

A Ram Pandey : एबीपी न्यूज, न्यूज नेशन, एनडीटीवी, जी टीवी, इन्डिया न्यूज, आईबीएन7, न्यूज एक्सप्रेस, लाइव इन्डिया, फोकस न्यूज, समय, इन्डिया टीवी, न्यूज24 और सुदर्शन टीवी सब चैनलों पर एक साथ मोदी का इन्टरव्यू। इन्टरव्यू लेने वाली मैडम को पहली बार टीवी पर देख रहा हूं। यह चमत्कारिक इवेंट मैनेजमेंट है, पैसे का खेल है या फिर कुछ और… पता नहीं…

एनडीटीवी ने तेजी से रंग बदला है

Ram Janm Pathak : यह अब कोई छिपा तथ्य नहीं है कि कई प्रमुख चैनलों में मुकेश अंबानी का पैसा लगा है। कुछ चैनल तो खुलेआम पूरी बेशर्मी से केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। और अपनी इसी बेहयाई एकतरफेपन की वजह से ही बेनकाब भी हो चुके हैं। एक-दो चैनल थे जो दबे गले से कभी कभार केजरीवाल को भी कवरेज दे देते थे, ताकि निष्पक्षता का मुलम्मा उन पर चढ़ा रहे। लेकिन, ऐसे चैनल भी अब अपनी केंचुल उतार रहे हैं। इनमें एनडीटीवी ने तेजी से रंग बदला है।

लोग मीडिया से चिढ़ कर मोदी को वोट देने जा रहे हैं!

Priyanka Dubey : पिछले एक साल से 'मोदी-मोदी' का राग आलाप रही भारतीय मीडिया को इस बात का अंदाज़ा बिल्कुल नहीं की ज़मीन पर लोग मीडिया से चिढ़ कर, नाराज़ होकर मोदी को वोट देने जा रहे हैं. लोग पक चुके हैं और खुलेआम मीडिया पर फासिस्ट और जजमेंटल होने का आरोप लगा रहे हैं. किसी को किसी भी माध्यम से आ रही किसी भी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं रहा.

यूपी में जंगलराज : पांच दिन तक गायब रहे पुलिस अधीक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं

Prabhat Ranjan Deen : उत्तर प्रदेश सरकार के एक महत्वपूर्ण महकमे का पुलिस अधीक्षक अचानक गायब हो गया। चार-पांच दिनों तक गायब रहा। नौकरशाही के शीर्ष गलियारे में पांच दिनों तक सनसनी मची रही। पुलिस अधीक्षक की पत्नी ने भी बवाल मचा दिया। एसपी की तलाशी में लखनऊ पुलिस को लगाया गया। खुफिया यूनिट लगाई गई। फोन सर्विलांस पर डाला गया। लेकिन कुछ पता नहीं चला। मंगलवार को वह अफसर अचानक अवतरित हो गया और बड़े आराम से ड्यूटी सम्भाल ली। पुलिस प्रशासन भी इस मसले को ऐसे ले रहा है जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

टीआरपी : एबीपी न्यूज तीसरे नंबर पर, न्यूज24 और आईबीएन7 की हालत पतली

पंद्रहवें हफ्ते की टीआरपी आ गई है. एबीपी न्यूज तीन नंबर पर खिसक गया है. इंडिया टीवी को फायदा पहुंचा है और नंबर दो की अपनी कुर्सी हथिया ली है. सबसे खराब हालत न्यूज24 और आईबीएन7 की है. ये चैनल क्रमश: आठवें और नौवें नंबर पर पहुंच गए हैं.

मेरे एक डॉक्टर मित्र खुद ‘शक्काइटिस’ रोग से पीड़ित थे

मैं सौ फीसद पत्रकार हूँ। क्या बात है किसी को कोई शक? शक का इलाज भी होता है बशर्ते शक्की चाहे तब। हमारे इर्दगिर्द कई ऐसे भी मानव प्राणी हैं, जिन्हें ‘शक्काइटिस’ नामक भयंकर बीमारी ने जकड़ रखा है। मैं चाहता हूँ कि इन लोगों को शक की इस बीमारी से निजात मिले। ऊपर वाले की मर्जी, जब वह चाहेगा तभी ऐसा मुमकिन होगा। शक की बात चली तो अर्सा पहले के एक ऐसे व्यक्ति की याद आने लगी जो पेशे से चिकित्सक हैं। अच्छी खासी पढ़ाई करके (एम.बी.बी.एस. की) वह निजी प्रैक्टिस करना शुरू कर दिए थे। उनकी शादी हुई थी, वह बेचारे परेशान रहा करते थे।

बालेन्दु दाधीच की किताब ‘तकनीकी सुलझनें’ का विमोचन

नई दिल्ली। नई दिल्ली। चर्चित तकनीकविद् और वरिष्ठ पत्रकार बालेन्दु शर्मा दाधीच की नई पुस्तक 'तकनीकी सुलझनें' का 15 अप्रैल को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनैशनल सेंटर में लोकार्पण किया गया। भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त श्री आर्य कुमार जगेसर ने कई हिंदी विद्वानों, वरिष्ठ पत्रकारों, तकनीक-विशेषज्ञों तथा हिंदी प्रेमियों की मौजूदगी में पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम का आयोजन सोसायटी ऑफ इंडियन पब्लिशर्स, ऑथर्स एंड आर्टिस्ट्स (सिपा) की तरफ से किया गया था। तकनीकी सुलझनें में आम कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग, प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा आदि विषयों से जुड़ी समस्याओं को सरल, सुबोध भाषा में सुलझाने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकप्रिय कवि अशोक चक्रधर ने की। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव, कोशकार अरविंद कुमार, भाषा-तकनीक शास्त्री डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा आदि ने भी समारोह को संबोधित किया।

मजीठिया से बचने के लिए अपने पत्रकारों को ‘शौकिया-पत्रकार’ बना रहा ‘हिन्दुस्तान’

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका ख़ारिज होने के बाद मजीठिया वेज बोर्ड लागू करना अखबार मालिकों की मजबूरी है। लेकिन इससे बचने की जुगत सभी अखबार मालिक पहले से ही कर रहे हैं। मजीठिया से बचने के लिए जागरण प्रबंधन ने इनपुट, आउटपुट तथा प्रोडक्शन डेस्क के अंतर्गत सभी कर्मचारियों को बांटना पहले ही शुरू कर दिया था। अब खबर है कि मजीठिया से बचने के लिए हिन्दुस्तान प्रबंधन भी सभी पत्रकारों से एक समझौता-पत्र साइन करवा कर उन्हे 'शौकिया पत्रकार' बना रहा है।

प्राकृत भाषा की प्रथम समाचार पत्रिका का विमोचन

प्राकृत भाषा में निकलने वाले प्रथम अखबार " पागद भासा " के प्रथम अंक का विमोचन दिनांक 13.04.2014 को महावीर जयंती के शुभ दिन पर परमपूज्य आचार्य विद्यानंद मुनिराज एवं पूज्य आचार्य वर्धमान सागर जी के करकमलों से कुन्दकुन्द भारती,नई दिल्ली में संपन्न हुआ। प्राकृत भाषा में विश्व में पहली बार निकलने वाले इस अख़बार के संस्थापक संपादक डॉ. अनेकांत कुमार जैन हैं तथा प्रकाशक JIN FOUNDATION, NEW DELHI है। ज्ञातव्य है कि इसी वर्ष डॉ. जैन को प्राकृत भाषा एवं वांग्मय के लिए भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी जी ने महर्षि युवा राष्ट्रपति पुरस्कार-वादरायण व्यास सम्मान से सम्मानित करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं एक लाख रूपए प्रदान किये थे। डॉ. जैन ने उस राशि को प्राकृत भाषा एवं जैनागम के संरक्षण एवं संवर्धन में ही उपयोग करने का संकल्प लिया है। इस पत्र का प्रकाशन उसी की एक शुरुआत है। इस प्रथम शुरुआत के लिए अनेक विद्वानों ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

पत्रकारों को ठगने में एक हैं लालू और नीतीश

पत्रकार मित्रों ,
                     याद
है आपको पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना। नीतीश सरकार ने जिसे बड़े धूम धड़ाके से शुरू किया था। सरकार की अन्य घोषणाओं की तरह यह भी एक छलावा ही साबित हुआ। बिना प्रक्रिया पूरी किये सरकार ने आनन- फानन में पत्रकारों से 1796 रूपये भी जनसम्पर्क विभाग के खजाने में जमा करवा लिया। लेकिन अब तक पत्रकारों को बीमा कार्ड नहीं मिला। करीब दो महीने हो गये। मिले भी कैसे? पैसा बीमा कंपनी को दिया ही नहीं गया है। दे भी कैसे। अभी तक नियमावली ही नहीं बनी है। यानी योजना लागू करने की मंशा ही नहीं थी। मंशा थी आँखों में धूल झोंक कर चुनाव में पत्रकारों की सहानुभूति हासिल करने की। वरना बिना नियमावली बनाये कैसे पत्रकारों से पैसे जमा कराये गये?

उत्तराखंड सरकार विज्ञापनों पर लुटा रही पैसा (देखें आंकड़े)

चुनावी मौसम में उत्तराखंड में नेता फिर से दावों और वायदों की पोटली लेकर जनता की दहलीज़ पर दस्तक दे रहे हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे नेता हैं जो कभी कभार ही अपने इलाके की जनता के दुख दर्द में शरीक हुए होंगे। इसे उत्तराखंड और यहां के लोगों की बदकिस्मती ही कहेंगे कि राज्य बनने के 13 साल में यहां आठ मुख्यमंत्री बदल गए हैं। 1 फरवरी 2014 को हरीश रावत ने सीएम पद के शपथ ली। बहुगुणा के कुर्सी छोड़ने के बाद सूबे के लोगों को उम्मीद थी कि नए सीएम कुछ अलग करेंगे। लेकिन हरीश रावत से भी लोगों को मायूसी ही हाथ लगी है। सरकार के पास कहने को बहाना है कि आचार संहिता लगी है। असल मायने में उत्तराखंड में कांग्रेस ने सरकार तो जैसे तैसे बना ली लेकिन पार्टी के भीतर की आपसी लड़ाई और सरकार के समर्थन दे रहे दूसरे विधायकों ने सीएम को भी परेशानी में डाले रखा।

चुनाव, दारू, रुपया, टीवी, झंडा औऱ……पत्रकार!

विशेष समाज के लोगों ने कवरेज के लिए पत्रकारों को बांटी थैली

रोहतक में एक समाज विशेष के लोगों ने कल होने वाले अपने कार्यक्रम के लिए पत्रकारों को थैली बांटी। पत्रकारों को थैली देने की सलाह एक प्रतिष्ठित अखबार के फोटोग्राफर ने दी। जिसकी सलाह पर पत्रकारों को फोन कर कार्यालयों के नीचे बुलाकर थैलियां वितरित की गई। ऐसा ही एक फोने मेरे पास आया तो मुझे मामले का पता चला। फोन करने वाले युवक ने कहा कि सर मैं आपके दफ्तर के नीचे आकर फोन करुंगा, प्लीज आप नीचे आ जाना। इस पर मैंने ऐसा करने की वजह पूछी तो सामने वाले ने कहा कि सर आप पूरी साल हमारी सेवा करते हैं, इसलिए हम कुछ सम्मान के रुप में एकांत में देंगे। इस पर मैंने साफ मना किया तो युवक ने फोन काट दिया।

हिमाचल का हमीरपुर भाजपा का गढ़ है पर इस बार चुनावी हवाएं मोदी से प्रभावित नहीं

Krishan Bhanu : पांच दिनों से लगातार "चुनावी भ्रमण" पर हूँ… मेरे हिमाचल प्रदेश में केवल चार संसदीय सीटें हैं. इनमें से तीन अत्यंत प्रतिष्ठित हैं. एक, धूमल के कारण…दूसरी, वीरभद्र सिंह और तीसरी, शांता कुमार के कारण. इनमें से एक संसदीय सीट, हमीरपुर का तीन दिवसीय दौरा कर चुका हूँ.. दो दिन से मंडी में हूँ….. और "चुनावी भ्रमण" बिना रुके थमे जारी है….. हमीरपुर बेशक भाजपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार चुनावी हवाएं "मोदी" से प्रभावित होती नहीं दिख रहीं हैं…

संजय गुप्ता के नए फरमान से दैनिक जागरण एनसीआर के रिपोर्टर कर रहे त्राहिमाम

दैनिक जागरण के मालिकों की दुविधा अदभुत है. कभी वे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की पत्रकारिता की बात करने-कराने लगेंगे तो कभी संसाधन देने के मामले में निम्न स्तर का बनियापा दिखाने लगेंगे. ताजी सूचना है कि टाइम्स आफ इंडिया से दैनिक जागरण की तुलना करते रहने वाले दैनिक जागरण के संपादक संजय गुप्ता ने अपने एनसीआर के सभी रिपोर्टरों के लिए फरमान जारी कर दिया है कि उन्हें प्रतिदिन 2700 वर्ड तक का आउटपुट देना होगा. इससे कम देने पर अबसेंट मान लिया जाएगा.

भूपेंदर चौबे और राहुल कंवल में प्रभु चावला की आत्‍मा!

Abhishek Srivastava : आज चार दिन बाद टीवी देखे। हर जगह नरेंदरभाई दिखे। हमारे अजीज़ Navin Kumar शाम 6 बजे न्यूज एक्सप्रेस पर श्‍वेत-श्‍याम राजनीति पर पहला पैकेज चलाते-चलाते बीच में ही बोल्‍ड कर दिए गए। अचानक बगैर किसी सूचना के पैकेज गिरा दिया गया और एएनआइ के इंटरव्‍यू में भए प्रकट कृपाला दीनदयाला। नवीन कुमार ने खून का घूंट पीकर ब्रेक ले लिया और बाद में एक और पैकेज चलाकर बिना किसी पैनल परिचर्चा के कट लिए।

बाल रंगने के चक्कर में पीएम मनमोहन की मीटिंग की भी परवाह नहीं करती थीं शोभना भरतिया!

: बारू की किताब में सिद्धार्थ वरदराजन, वीर सांघवी, प्रणय राय, विनोद मेहता और शेखर गुप्ता के बारे में क्या-क्या कहा गया, यहां जानिए :  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू की पुस्तक 'द एक्सीडैंटल प्राइम मिनिस्टर' में मीडिया की कई हस्तियों के बारे में भी खुलासे किए गए हैं. हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की मालकिन शोभना भरतिया से लेकर टाइम्स आफ इंडिया की मालकिन इंदू जैन तक के बारे में रोचक जानकारी दी गई है. बताया गया है कि प्रधानमंत्री सुबह 8.30 बजे नाश्ते पर सम्पादकों और मीडिया मालिकों के साथ मुलाकात किया करते थे.

सलमान खान के पिता सलीम खान ने नरेंद्र मोदी की वेबसाइट उर्दू में लांच की

एक तरफ जहां देश भर में मुसलमान लोग नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोट देने की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं सलमान खान के पिता सलीम खान ने नरेंद्र मोदी के लिए उर्दू में वेबसाइट लांच की है.
सलीम खान 'शोले' फिल्म के पटकथा लेखक हैं. सलीम खान ने मुंबई में अपने घर पर भाजपा नेता शाइना एनसी के साथ नरेंद्र मोदी पर उर्दू वेबसाइट शुरू की.

इंडिया टुडे हिंदी से दिलीप मंडल के इस्तीफे की कानाफूसी, ईटीवी में मनीष का तबादला

खबर आ रही है कि इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन से मैनेजिंग एडिटर दिलीप मंडल ने इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक दिलीप मंडल को प्रबंधन ने लोकसभा चुनावों तक रुकने को कहा है. यह नहीं पता चल पाया है कि दिलीप मंडल ने इस्तीफा क्यों दिया. इस बारे में जब जानकारी के लिए दिलीप मंडल को फोन और एसएमएस किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने एक साल के लिए असाधारण अवकाश मांगा

यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने अखिल भारतीय सेवा अवकाश नियमावली 1955 के नियम 15 के अंतर्गत दिनांक 01 जुलाई 2014 से एक वर्ष के बिना वेतन के असाधारण अवकाश के लिए आवेदन किया है.

इंडिया टीवी पर मोदी के फिक्स इंटरव्यू के खिलाफ चुनाव आयोग में कांग्रेस ने की शिकायत

इंडिया टीवी पर प्रसारित भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के फिक्स इंटरव्यू के खिलाफ कांग्रेस ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस ने आयोग से मोदी और भाजपा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने समाचार चैनल इंडिया टीवी के कार्यक्रम 'आप की अदालत' में दिखाए गए मोदी के इंटरव्यू को पेड न्यूज करार दिया।

‘फोकस हरियाणा’ का निकला दीवाला, पत्रकारों को वेतन नहीं

कोयले की दलाली में मुंह काला होने के बाद उद्योगपति व सांसद नवीन जिंदल ने हरि‍याणा में अपना न्‍यूज चैनल 'फोकस हरि‍याणा' शुरू करके चेहरे को कुछ हद तक उजला करने की कोशि‍श की।
इस चुनाव में अपने चैनल से खूब प्रचार कि‍या। ऐसा लगता है कि चैनल उनके लि‍ए चुनाव तक चेहरे की कालिख साफ करने का साबुन भर था। लेकिन चैनल का दीवाला भी पि‍टना शुरू हो गया है। स्‍ट्रींगर तनख्‍वाह न मि‍लने से इतने खफा हैं कि फतेहाबाद में चैनल के एक रि‍पोर्टर ने वि‍रोध स्‍वरूप चैनल की आईडी को प्‍लास्टिक की पाइप में डालकर अपने घर के बरामदे में टांग दि‍या।

हिंदी-अंग्रेजी में लांच होगी पोलिटिकल मैग्जीन ‘न्यूज बेंच’, अनिल पांडेय बने संपादक

द संडे इंडियन हिंदी मैग्जीन के एक्जीक्यूटिव एडिटर अनिल पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत नई लांच होने वाली मैग्जीन 'न्यूज बेंच' के साथ की है. 'न्यूज बेंच' मैग्जीन की लांचिंग 19 अप्रैल को दिन में ढाई बजे कांस्टीट्यूशन क्लब में की जाएगी.

सेबी के खिलाफ़ विज्ञापनों पर सुब्रत राय ने मांगी माफ़ी

नई दिल्ली : सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा ने सेबी और कुछ मीडिया घरानों के खिलाफ़ लगातार विज्ञापन दिए जाने के मसले पर सार्वजनिक माफ़ी मांगी है. सुप्रीम कोर्ट में सहारा-सेबी मामले की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले ये माफ़ीनामा कई अखबारों में छपा है. नपे-तुले शब्दों में दिए गए इस विज्ञापन में कहा गया है कि सेबी और मीडिया घरानों के खिलाफ़ पहले छपे विज्ञापन 'अवांछित मज़बूरियों' की वज़ह से दिए गए थे. सुब्रत रॉय इस समय जेल में बंद हैं और सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेने की लगातार कोशिश कर रहे हैं.

सहारा के बैंक खातों पर रोक हटाने को तैयार है सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि वह सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय की जमानत देने के लिए दस हजार करोड़ रुपए के बंदोबस्त के लिये समूह के बैंक खातों पर लगी रोक समाप्त करने और संपत्ति बेचने की अनुमति दे सकता है। न्यायालय ने सहारा से इस बारे में विवरण मांगा है।

राजगढ़ के दो पत्रकारों ने बनवाए फर्जी रेलवे पास

राजगढ़, मध्यप्रदेश। जिले के ब्यावरा स्थित रेलवे स्टेशन पर जनसंपर्क विभाग में अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को दिए जाने वाले रियायती रेलवे यात्रा पास के दुरूपयोग का मामला प्रकाश में आया है। रेलवे स्टेशन मास्टर एलआर मीणा ने बताया कि जनसंपर्क संचालनालय भोपाल से जारी अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्ड के आधार पर रेलवे रियायती यात्रा पास जारी किये जाते हैं। लेकिन ब्यावरा के दो पत्रकारों ने फर्जी तरीके से दस्तावेज बनाकर उनके आधार पर रियायती यात्रा पास जारी करवा लिए हैं।

आई विटनेस न्यूज़ से कई लोगों का इस्तीफा, अविनाश पहुंचे हरियाणा न्यूज़

हरियाणा से हालिया लांच हुए 'आई विटनेस न्यूज़" चैनल से लोगों के जाने का सिलसला जारी है। लांच के तुरंत बाद आउटपुट हेड अख़्लाक़ उस्मानी ने इस्तीफा दे दिया था। इस चैनल के लॉन्चिंग टीम में रही एंकर नेहा कालिया ने भी चैनल को अलविदा कह दिया। एंकर सचिन वर्मा ने भी चैनल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। प्राइम टाइम एंकर अविनाश कुमार सिंह ने भी चैनल से इस्तीफा दे दिया है।

चुनाव में फलफूल रहा खबरों का धंधा, कहीं पत्रकार मांग रहे तो कहीं प्रत्याशी खुद दे रहे पैसा

सुलतानपुर। अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान के पत्रकारों द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी से खबर छापने के लिए कैमरा व पांच हजार रुपये के मामले ने तूल पकड़ लिया है। फेसबुक व सोशल मीडिया पर इनके और भी कारनामे उजागर किए जा रहे हैं। हालांकि इन संवाददाताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इतना जरूर है कि अमर उजाला ने विज्ञापन छापकर विज्ञापन दाताओं को आगाह जरूर किया है।

आकाशवाणी पटना के उर्दू बुलेटिन ‘‘इलाकाई खबरें’’ ने पूरे किये 25 साल

16 अप्रैल, 1989 समय…….अपराह्न 3 बजकर 15 मिनट ……………बिहार में रेडियो सेट पर एक आवाज गूंजती है।……..ये आकाशावाणी पटना है…..अब आप शानू रहमान से……इलाकाई खबरें…..सुनिये……।

यह दिन, समय, क्षण बिहार की मीडिया के लिए एक यादगार दिन बन गया। इतिहास के पन्नों में यह दिन दर्ज हुआ, बिहार में उर्दू समाचार बुलेटिन का आकाशवाणी से प्रसारण को लेकर। आकाशवाणी पटना के प्रादेशिक समाचार की शुरूआत यों तो 28 दिसम्बर, 1959 को ही शुरू हो गया था। हालांकि 26 जनवरी, 1948 को आकाशवाणी, पटना केन्द्र का उद्घाटन हुआ था। जहां तक रेडियों पर समाचार प्रसारण का बिहार से संबंध की बात है तो हिन्दी के बाद सबसे ज्यादा बोली जाने वाली उर्दू भाषा को तरजीह दी गयी। केन्द्र सरकार ने बिहार को भी उर्दू बुलेटिन के लिए चुना। बिहार में उर्दू बुलेटिन की शुरूआत 16 अप्रैल, 1989 को हुआ। इसके बाद ‘‘इलाकाई खबरें’’ बिना रूके-थके लगातार प्रसारित होते हुए 25 साल का सफर तय कर लिया है। इलाकाई खबरें, उर्दू बुलेटिन ने कई उतार-चढ़ाव को पार किया।

अगर पुलिस और दैनिक जागरण नितिन श्रीवास्तव को बचाते हैं तो मैं आत्मदाह कर लूंगी: बीना शुक्ला

दैनिक जागरण प्रेस सर्वोदय नगर कानपुर में कार्य के दौरान मुझे(बीना शुक्ला) नितिन श्रीवास्तव, प्रदीप अवस्थी, संतोष मिश्रा, दिनेश दीक्षित आदि लोगों ने कार्यालय में बंधक बना कर छेड़खानी और बदतमीजी की थी। इन लोगों ने मुझे बदनाम करने की भी कोशिश की। दिनांक 30.05.2012 को मैंने शिकायती प्रार्थना पत्र थानाध्यक्ष काकादेव, कानपुर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कानपुर, पुलिस महानिरीक्षक, कानपुर जोन, महिला आयोग एवं भारतीय प्रेस परिषद को दिया था। लेकिन अभियुक्तों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुयी। तब मैंने न्यायालय के माध्यम से नितिन श्रीवास्तव आदि के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354 घ(1) (प) 342, 504, 506, 500 के अंतर्गत मुकदमा (सं. 217/2013) थाना काकादेव कानपुर नगर में पंजीकृत कराया। दिनांक 13.09.2013 से आईओ की जांच की कार्यवाही चल रही है।

देश में चल रही है रिलायंस की समानांतर सरकार : गोपालकृष्ण

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर और वरिष्ठ नौकरशाह गोपालकृष्ण गांधी ने कहा है कि देश में रिलायंस की समानांतर सरकार चल रही है। देश में व्याप्त कॉरपोरेट की लालच भरी प्रवृत्ति का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा कि कोई ऐसा देश नहीं है जहां किसी एक कंपनी के पास इतनी ताकत है। गांधी के मुताबिक रिलायंस का देश की प्राकृतिक, वित्तीय, व्यावसायिक और मानव संसाधनों पर जबर्दस्त कब्जा है।

इंडिया टीवी मैनेजमेंट को नक़वी जी का एहसानमंद होना चाहिए, लेकिन पोल खुलने से वह उलटवार कर रहा

Mukesh Kumar :  नक़वी जी पर ये तोहमत आँकड़ों पर खरी नहीं उतरती… क़मर वहीद नक़वी जी के इंडिया टीवी छोड़ने का असली कारण क्या है ये उनको पता है या फिर उनके निकट के लोगों को। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं लिखा-कहा है, इसलिए लोग कयास लगाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने तो अपने इस्तीफ़े में भी शायद कोई कारण नहीं बताया है।

लखनऊ में चुनावी और दल्‍ले पत्रकारों ने बढ़ाई पत्रकारिता की हरियाली

लखनऊ में तमाम राजनीतिक दलों के मीडिया सेल देखने वाले परेशान हैं. परेशानी का कारण खबरों का छपना या खिलाफ खबरें छपना नहीं बल्कि चुनावी पत्रकारों की भरमार है. दूसरे दल्‍ले पत्रकार इन लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं. लखनऊ में आजकल अचानक पत्रकारों की भारी बाढ़ आ गई है. ऐसा लगने लगा है जैसे पत्रकारों का सैलाब ही लखनऊ की सरजमीं पर बह कर आ गया हो.

वो इंडिया टीवी छोड़ देंगे मुझे करीब एक महीने पहले पता था

जनाब कमर वाहिद नकवी साहब ने इंडिया टीवी को छोड़ दिया, या इंडिया टीवी ने नकवी साहब को छोड़ा। इस वक्त भारत के मीडिया (खासकर इलेट्रॉनिक मीडिया) में यह दो सवाल तबियत से उछल-कूद/ धमा-चौकड़ी मचा रहे हैं।

वाजपेयी के दत्तक दामाद वरिष्ठ संपादकों की देख-भाल में निजि रुचि रखते थे

संजय बारू की किताब 'The Accidental Prime Minister: The Making and Unmaking of Manmohan Singh' राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाए हुए है। बारू लिखते हैं कि सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को ऐसा टाइट कर रखा था कि वो स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते थे। लेकिन इन राजनीतिक बातों से इतर, बारू की किताब मीडिया जगत की उन महीन बातों पर भी रोशनी डालती है जो आम लोगों के सामने नहीं आ पातीं।

लुटेरे अंबानी के खिलाफ पत्रकार परंजय की किताब पर मीडिया में चर्चा न होगी

Abhishek Srivastava : चुनावी किताबों की फेहरिस्‍त में आज एक और नाम शाम साढ़े छह बजे जुड़ने जा रहा है। यह किताब न तो भाजपा के लिए कांग्रेस के खिलाफ़ चुनावी औज़ार है, न ही कांग्रेस के लिए फिक्‍शन करार दी जा सकने वाली कोई आसान चीज़। इसे न तो पीएमओ में अपनी पहुंच बनाने वाले किसी पत्रकार ने लिखा है, न ही किसी आरोपित नौकरशाह ने।

यूपी में पत्रकारों से रिश्वत लेता है एक अधिकारी (देखें वीडियो)

यूपी का एक ऐसा अधिकारी जो पत्रकारों से रिश्वत लेता है. जी हाँ, यूपी के हमीरपुर जिले के एक ऐसे अधिकारी हैं जिनकी नियुक्ति तो शासन और प्रशासन की नीतियों को प्रकाशित करवाने और अन्य सरकारी सूचनाओं को जारी करवाने हेतु की गयी है लेकिन वो महानुभाव मीडिया से ही पैसे लेने से नहीं चूकते. हमीरपुर के सूचनाधिकारी विजय बहादुर वर्मा के लिए चुनाव किसी पर्व से कम नहीं होता. वो चाहे लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व लोकसभा का चुनाव हो, विधानसभा, जिलापंचायत चुनाव हो या फिर कोई वीवीआईपी प्रोग्राम. ये जनाब इन सबका बेसब्री से इंतज़ार करते हैं.

‘देशबन्धु’ के पत्रकार को समाचार रोकने के लिए प्रलोभन देने और डराने-धमकाने का प्रयास

रायपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल में फर्जी तरीके से कार्य कर रही महिला एएलपी माधुरी श्याम कुंवर का असली रूप अब सामने आने लगा है। उसके फर्जीवाड़ा की जानकारी सामने आने के बाद वह अब मीडिया पर दबाव डालने के लिए अपने गिरोह के एक सदस्य को लगातार मीडिया प्रतिनिधि के पीछे लगाई हुई है। जो रेलवे में हुई शिकायतकर्ताओं के नाम, पते और समाचार पत्र समूह में कार्यरत् लोगों के नाम जानने के लिए लगातार मीडिया पर दबाव डाल रहे हैं और उसने आज धमकी भी दी है कि यदि इसी प्रकार खबरें प्रकाशित की तो इसका अंजाम भी भुगतना पड़ेगा।

सीरिया में तीन टीवी जर्नलिस्ट शहीद

सीरिया के मालूला नगर में लेबनान के अलमनार टीवी चैनल के साथ काम करने वाले तीन पत्रकार आतंकवादियों के हमले में शहीद हो गए। अलमनार टीवी चैनल के अनुसार, संवाददाता हमजा हाज हसन, तीकनीकी विभाग के कर्मचारी हलीम अलवा और कैमरामैन मोहम्मद मुनतिश सोमवार को सशस्त्र आतंकवादियों की ओर से होने वाली फायरिंग में शहीद हो गए।

शशिशेखर के बेटे की खबर और आजकल की पत्रकारिता

Sanjaya Kumar Singh : पत्रकारों और पत्रकारिता का महत्त्व लगातार कम हो रहा है। रोज नए उदाहरण सामने आ रहे हैं और इन्हीं में एक है, दैनिक हिन्दुस्तान के संपादक के बेटे के मतदाता पहचान पत्र में पिता का नाम गलत छप जाने की खबर जिसे अखबार ने प्रमुखता से छापा है। ऐसा नहीं है कि संपादक के बेटे के कार्ड में पिता का नाम गलत छपना खबर नहीं है।

रवीश कुमार ने ज़मीन पर बैठे दलित पंचू को खाट पर बिठाकर सच्ची पत्रकारिता की

Mohammad Anas : रवीश ने ज़मीन पर बैठे पंचू को ही खाट पर नहीं बैठाया था बल्कि पंचू जैसे करोड़ों दलितों की अस्मिता/सुरक्षा और प्रेम को भी खाट पर बैठाया था. जियो रवीश. आप गंगा पार के उस ब्राह्मण बहुल गाँव में हैं जहाँ हर घर से एक आईएएस और दो पीसीएस ऑफिसर हैं. जब घर में रह रहे बुजुर्गों में ब्राह्मणवाद बचा रह गया है तो उन बच्चों में कितनी भीतर तक धंसा होगा जो देश के विभिन्न कोने में कार्यरत हैं. ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद!

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व सीएमडी और मौजूदा सीआरएम आठ लाख की कम्पनी हेलीकॉप्टर के लिए सौ करोड़ लेकर फुर्र

Prabhat Ranjan Deen : आप हेलीकॉप्टर खरीदने का सपना देखते हों तो चिंता न करें, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया आपको ऋण देने के लिए तैयार है। बस आपको बैंक के सीएमडी और सीआरएम को पटाना होगा। सीएमडी और सीआरएम यानी चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक और चीफ रीजनल मैनेजर… बस उनकी 'सेवा-भक्ति' करिए, हेलीकॉप्टर के लिए ऋण ले लीजिए।

एनडीए को बहुमत देने वाले एनडीटीवी की असलियत जान लें

Sanjay Tiwari : एनडीए को बहुमत देने के एनडीटीवी के ऐलान से मैं भी कम हैरान न था. सबसे 'बड़ा सत्य' सबसे बड़े आलोचक को कैसे दिख गया? अब समझ आया. मोदी की पीआर एजंसी एपको वर्ल्डवाइड हंसा रिसर्च के साथ मिलकर अपना काम बिल्कुल सही तरीके से अंजाम दे रही है. अब कहीं शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बची. मोदी की सरकार बन रही है बे! सर्वे दिखाई नहीं देता है क्या? (वेब जर्नलिस्ट संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से)

Reliance Fraud Company : जनता को डायरेक्ट लूटते हैं ये रिलायंस वाले… मुझको भी ठगा इस धोखेबाज कंपनी ने…

Yashwant Singh : मैंने महीनों पहले रिलायंस का 8010292708 नंबर का एक सिम लिया. इस सिम को 3जी इंटरनेट यूज करने के मकसद से खरीदा. इससे कभी काल नहीं करता. सिम लेने के बाद जब महीने भर इस्तेमाल किया. शुरुआती 3जी इंटरनेट पैक खत्म हुआ. दुबारा 3जी इंटरनेट पैक आनलाइन रिचार्ज किया. अचानक सिम चलने में दिक्कत आने लगी. बार-बार डिसकनेक्ट हो जाता. इस सिम को डीलिंक कंपनी के डोंगल में डालकर इस्तेमाल करता हूं.

गुजरात मॉडलः जिसमें मुसलमानों को मोदी से ‘असहमत’ होने का अधिकार नहीं है

जैसे-जैसे चुनाव बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम मुसलमान में बदल रहा है। कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों की कोशिश है कि मोदी का भय दिखाकर उनके वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जाए। लेकिन जिस तरह से मुसलमानों के वोट बिखरे हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी कोशिश कामयाब नजर होती नजर नहीं आ रही है। सवाल उठता है कि क्या मुसलमानों में नरेंद्र मोदी का भय नहीं है, या सुनियोजित तरीके से उनके वोटों का बिखराव कराकर भाजपा की राह आसान की गई है। कयास लगाए जा रहे थे कि मोदी को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के मुसलमान बसपा को ही वोट करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुसलिम वोट बिखर गए। 10 अप्रैल को हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी 10 सीटों पर कमोबेश यही नजारा देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में अगले चरण में यह ट्रेंड बदलेगा या ऐसे ही चलता रहेगा, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

जिया राजा बनारस, ई बड़ा कप्तान त खुद के कासी वाला काल-भैरव समझत हव्वैं

वाराणसी: यह शख्स खुद को काशी का कोतवाल समझता है। बावजूद इसके, कि यह काल-भैरव के बाल बराबर तक नहीं, लेकिन खुद को काल-भैरव की प्रतिमूर्ति समझता है। जबकि है एक अदना-सा एक दारोगा। इसके जैसे दारोगाओं का ट्रांसफार राजनीतिक आकाओं की मर्जी पर होता है। वे जब चाहें, उस जैसे दारोगाओं की बदली चुटकियों में हो सकती है। जिया राजा बनारस। जी हां, यही है वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार। त जिया राजा बनारस। पूरा तीन दिन बीतने वाला है, लेकिन गोदौलिया चौराहे पर दो बड़े पत्रकारों पर लाठियां चटकाने वाले पुलिसवालों की करतूतों को दण्डित करने के बजाय, टाल-मटोल करना शुरू कर दिया है। जिया राजा बनारस।

मोदी के आर्थिक विकास मॉडल में भारी मुनाफा देख रहे हैं कॉर्पोरेट घराने

12 सितंबर 2003 को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने, गुजरात नरसंहार के डरावने भूत से मोदी और संघ का रास्ता आसान कर दिया। इसे मोदी की बेगुनाही के तौर पर प्रचारित किया जाने लगा और मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का आधा रास्ता, भाजपा और संघ द्वारा साफ मान लिया। बाकी का आधा रास्ता साफ करने के लिए सामाजिक सद्भावना हेतु मोदी ने तीन दिन के उपवास की घोषणा करके किया हुआ मान लिया। गुजरात नरसंहार के लिए जिम्मेदार महाशय अब सामाजिक सद्भावना के लिए उपवास करते दिखते हैं। नरेंद्र मोदी को गले लगाने के लिए लालायित पूंजीपति वर्ग को यह पर्याप्त बहाना प्रदान कर देता है। याद कीजिये वर्ष 2009 में संपन्न 'वाइब्रेंट गुजरात' सम्मेलन में, प्रधानमंत्री पद हेतु, भारत के दो बड़े उद्योगपतियों अनिल अंबानी और सुनील मित्तल ने खुले तौर पर मोदी का समर्थन किया था। अनिल अंबानी ने कहा था, 'नरेंद्र भाई ने गुजरात का भला किया है, और जरा सोचिए, जब वह देश का नेतृत्व संभालेंगे, तो क्या होगा।' वहां मौजूद रतन टाटा ने भी केवल दो दिन के भीतर नैनो के लिए जमीन की व्यवस्‍था करने वाले मोदी की तारीफ की थी। इसके दो वर्ष बाद 2011 में हुए इसी सम्मेलन में मुकेश अंबानी ने कहा, 'गुजरात एक स्वर्ण दीपक की भांति जगमगा रहा है, और इसकी वजह नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि है।' 2013 में अनिल अंबानी ने मोदी को राजाओं का राजा कह कर संबोधित किया था।

नईदुनिया में आंतरिक फेरबदल और मजीठिया से बचने की जुगाड़

नईदुनिया में आतंरिक बदलाव जारी हैं। हाल ही में कई संपादकों को इ्धर से उधर किया गया है। इंदौर के संपादक गंगेश मिश्रा को जबलपुर तबादला किया गया है। जबलपुर के संपादक दविाकर को भोपाल भेजा गया है और भोपाल के संपादक विनोद पुरोहित को इंदौर का संपादक बनाया गया है।

वाराणसी गोदौलिया-काण्डः एसएसपी ने जल्द कार्यवाही नहीं की तो मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे पत्रकार

वाराणसी: देश की धार्मिक राजधानी मानी जाने वाली वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अपने सिपाहियों द्वारा यहां के पत्रकारों की सरेशाम हुई पिटाई को हजम कर लेना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि इस पत्रकारिता जगत के चेहरे पर पड़ी पुलिसवालों की इस बेहद शर्मनाक करतूत को थाने की रोजनामचा पर दर्ज न कराया जाए। बल्कि वे इस मामले में अपना एक नया नजरिया पेश कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि इस हरकत के दोषी पुलिस सिपाहियों पर वे अनुशासनिक कार्रवाई करें। उनका तर्क है कि अगर इन सिपाहियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय अगर आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा तो वादी यानी पत्रकारों को अनावश्यक झंझटों का सामना करना पड़ेगा।

धर्मेन्द्र, आदित्य, अरविंद, रफ़ीक औऱ मनोज के बारे में सूचनाएं

आगरा से खबर है कि धर्मेन्द्र पाराशर ने 'कल्पतरु एक्सप्रेस' को अलविदा कह दिया है। धर्मेन्द्र यहाँ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। वह 2012 में टद सी एक्सप्रेसट छोड़कर कल्पतरु से जुड़े थे ।

मोदी का मिशन बनाम संघ का टारगेट

मोदी को पीएम की कुर्सी चाहे 272 में मिलती हो लेकिन संघ का टारगेट 395 सीटों का है। संघ के इस टारगेट का ही असर है कि अगले एक महीने में मोदी के पांव जमीन पर तभी पड़ेंगे, जब उन्हें रैली को संबोधित करना होगा। यानी हर दिन औसतन चार से पांच रैली। और यह तेजी मोदी के रैली में इसलिये लायी जा रही है क्योंकि मोदी के पांव जिस भी लोकसभा सीट पर पड़ते हैं, उस क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवकों में उत्साह भी आ जाता है और क्षेत्र में लोग संघ परिवार के साथ संबंध बनाने से भी नहीं चूक रहे। स्वयंसेवकों के लिये टारगेट का नाम बूथ जीतो रखा गया है। इसके तहत कम से कम 395 सीटों पर बीजेपी पूरा जोर लगाएगी। 100 से ज्यादा सीटें ऐसी, जिस पर जीत पक्की। 120-130 सीटें ऐसी, जिन पर थोड़ी मेहनत से ही जीत तो पक्की। यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड से कम से कम 90 सीटें जीतने का टारगेट। लेकिन पहली बार सवाल सिर्फ पीएम की कुर्सी को लेकर टारगेट का नहीं है बल्कि देशभर में आरएसएस अपने स्वयंसेवकों की संख्या कैसे दुगुनी कर सकती है, नजरें इस पर भी हैं और इसीलिये समूचे संघ परिवार के लिये 2014 का चुनाव उसके अपने विस्तार के लिये इतना महत्वपूर्ण हो चला है और यह मोदी के मिशन 272 पर भी भारी है।

शाहदरा थाने के एसआई ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार के साथ की बदसलूकी

दिल्ली। दिल्ली पुलिस गाहे-बगाहे किसी ना किसी बात को लेकर चर्चा में बनी ही रहती है। कभी वाक्या होता है चोर के साथ चोर-सिपाही का खेल खेलने का, कभी किसी की बिना बात के ही इज्जत उतार फैंकने का तो कभी बिना कुछ किये भी कुछ कर जाने का। कुछ ऐसा ही वाक्या हुआ बीती 30 मार्च को जब पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने में एसएचओ से मिलने गये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार हेमन्त कुमार शर्मा का वहां सादी वर्दी में मौजूद सब-इंस्पेक्टर मेहराब आलम ने माँ-बहन की गालियों के साथ स्वागत किया। अफसरी का भूत सर पर लिये आलम यहीं नहीं रुका जबकि पत्रकार ने विनती की कि आप इतना मत बोलिये, बिना बात के इतना बोलना शोभा नहीं देता।

वाराणसी में पत्रकारों की पिटाई पर ‘ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन’ ने जताया रोष

वाराणसी। सोमवार की शाम हरहुआ चौराहे स्थित यश कम्प्यूटर्स बजरंग कटरा में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन, उप्र, के वाराणसी जनपद के सदस्यों की एक अपातकालीन बैठक बुलाई गयी जिसमें गोदौलिया में वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ तिवारी व संदीप त्रिपाठी के साथ सिपाहियों द्वारा की गयी बदसलूकी की निंदा की गयी।

‘हिन्दुस्तान’ ने खबर तब लगाई जब प्रधान संपादक के बेटे का वोटर कार्ड गलत बना

हिन्दुस्तान अखबार के 07 अप्रैल के नोएडा संस्करण में एक समाचार छापा गया है। जिसमें वोटरों की परेशानी का जिक्र है। चुनाव आयोग ने वोटरों को दिए पहचान पत्रों में पिता का नाम गलत कर दिया है। इस खबर में एक आई कार्ड छापा गया है। यह आई कार्ड समर्थ शेखर नाम के युवक का है। लेकिन लोगों को यह जानकर ताज्जुब होगा कि समर्थ शेखर कोई और नहीं हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर के पुत्र हैं। मुद्दा यह नहीं है कि समर्थ शेखर के कार्ड में गलती होने पर समाचार नहीं छापा जा सकता है। मुद्दा यह है कि नोएडा में करीब दो महीने से यह समस्या बड़ी संख्या में वोटर झेल रहे थे। तब इस अखबार को कुछ नहीं नजर नहीं आया। जबकि दैनिक जागरण, अमर उजाला और नवभारत टाइम्स ऐसी खबरें पहले ही छाप चुके थे। हिन्दुस्तान के पत्रकारों को समस्या तब समस्या लगी, जब प्रधान संपादक के बेटे का कार्ड गलत आ गया। शायद यही है तरक्की का नया नजरिया।

पुलिस वाले ने पूछा- क्या करने जा रहे हैं?, मैंने कहा- आत्महत्या

Madan Tiwary : यूपी पुलिस वर्दीवाली आतंकवादी है. मेरे साथ भी दो वाकया हुआ… पहला 24 मार्च को पर्चा बांटते समय जब तीन दरोगाओं ने मिलकर पर्चा बांटने से रोकने की कोशिश की… दूसरा वाकया आज का है.. अस्सी घाट पर किनारे बिछी चौकी पर कुछ देर के लिए बैठने जा रहा था.. तभी एक पुलिस वाले ने विसिल बजाया और चिल्लाया- इधर आइये..

मोदी की इस हरकत की निंदा न करना आरएसएस का दोहरापन

Anil Sinha : मोदी ने सिर्फ जशोदाबेन के साथ अन्याय नहीं किया है। उन्होंने आरएसएस को भी धोखे में रखा और अविवाहित बता कर प्रचारक बन गए। आरएसएस का दोहरापन देखिये कि इस जानकारी के आम होने के बाद भी मोदी की इस हरकत की निंदा नहीं कर रहा है।

नक़वी का इस्तीफा पत्रकारिता के उच्चतम मानकों के अनुरूप : राहुल देव

नरेंद्र मोदी और रजत शर्मा के बीच फिक्स इंटरव्यू के खिलाफ नकवी के इंडिया टीवी से इस्तीफे का मीडिया जगत ने तहेदिल से स्वागत किया है. वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव अपने फेसबुक वाल पर लिखकर नकवी को इस कदम के लिए बधाई दी है. उन्होंने कहा- ''नरेन्द्र मोदी वाली 'आप की अदालत' पर वहीद नक़वी का इंडिया टीवी के समाचार निदेशक पद से इस्तीफा पत्रकारिता के उच्चतम मानकों के अनुरूप है। बधाई।''

इलाहाबाद में पत्रकार की हत्या, बीजेपी नेता नामजद

इलाहाबाद से खबर है कि वोट क्लब के पास एक स्थानीय पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई. घटना का कारण जमीनी रंजिश है. धनुहा के रहने वाले पत्रकार विश्वंभरनाथ तिवारी की हत्या का मुकदमा बीजेपी नेता विद्यासागर पाण्डेय और अमित बंसल नामक युवक के खिलाफ दर्ज किया गया है. घटना में उसके बेटे अमित की हालत गंभीर बनी हुई है.

बीजेपी वालों ने ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा आजतक न्यूज चैनल से चुराया!

इंडिया टीवी पर रजत शर्मा और नरेंद्र मोदी के बीच फिक्स इंटरव्यू और चैनल के संपादक कमर वहीद नकवी का इस्तीफा प्रकरण अभी शांत भी नहीं हुआ कि एक नया मामला सामने आ गया है. यह मामला नारा चोरी का है. बीजेपी पर आरोप है कि उसने 'अबकी बार मोदी सरकार' नारा को आजतक न्यूज चैनल से चुराया है. इस बारे में आजतक न्यूज चैनल से जुड़े एक पत्रकार विकास मिश्र ने हंसी-हंसी में जानकारी फेसबुक पर अपने वाल पर दी है.

‘तहलका’ को बेचना चाहते हैं केडी सिंह… है कोई खरीदार?

वरिष्ठ पत्रकार प्रांजय गुहा ठाकुरता ने द हूट वेबसाइट पर एक लेख लिखा है. इसमें उन्होंने जानकारी दी है कि 'तहलका' के असली मालिक केडी सिंह इसे बेचना चाहते हैं. ज्ञात हो कि तहलका में मेजारिटी शेयर केडी सिंह का है. केडी सिंह के पास 65.75 प्रतिशत शेयर है. तरुण तेजपाल का बहुत कम हिस्सा है इसमें. केडी सिंह काफी पैसे वाले हैं और अलकेमिस्ट कंपनी के मालिक हैं.

कमर वहीद नकवी प्रेस कांफ्रेंस कर नरेंद्र मोदी और रजत शर्मा की फिक्सिंग का खुलासा करेंगे!

शनिवार को इंडिया टीवी पर प्रसारित हुआ नरेंद्र मोदी का फिक्स इंटरव्‍यू चैनल के संपादकीय निदेशक (एडिटोरियल डायरेक्‍टर) कमर वहीद नकवी के इस्‍तीफा देने के बाद विवादों और सवालों के दायरे में आ गया है. इस इंटरव्‍यू के बाद इंडिया टीवी से नकवी ने इस्तीफा देने के बाद भास्‍कर वालों से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और एक-दो दिन में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर वह सारी बात स्‍पष्‍ट करेंगे.

खुदकुशीः हंसते चेहरे के पीछे पनपता अवसाद

खुदकुशी.… जो मानसिक रूप से स्वस्थ हैं वो ये शब्द सुनते ही सिहर जाते हैं। जो किसी अवसाद से ग्रस्त है वो किसी को बताते तक नहीं और मन ही मन इस खतरनाक फैसले के लिए खुद को मजबूत कर लेते हैं। गौर कीजिएगा मैंने कहा मजबूत। जीने की इच्छा का त्यागना एक ऐसा रोग है जो दिमाग में एक बार घुस जाए तो धीरे-धीरे अपनी जड़े मजबूत करता है और फिर वो होता है जिसे हम-आप सुनकर भी दहल जाएं। इस विषय पर लिखने का संदर्भ है एक 27-28 साल के युवा का ऐसा ही एक खतरनाक और रुला देने वाला फैसला।

रजत शर्मा, आप मैनेज्ड हो गए!

Vineet Kumar : रजतजी, जरा सोचिए कि जब आपके ही चैनल के बड़े पद पर बैठे शख्स (नकवीजी) को मोदी की अदालत सजने पर इतनी तकलीफ हुई कि इस्तीफा तक दे दिया तो उन दर्शकों पर क्या असर पड़ा होगा जो पिछले 21 सालों से खास सम्मान और भरोसे के साथ इस शो को देखती रही. कॉमेडी नाइट विद कपिल में आपका बेहद ही तकलीफदेह बचपन, घंटाघर के दस बाइ दस का कमरा और उसकी दास्तान सुनकर मेरी भी आंखों में आंसू आ गए, कितनी तकलीफ झेलते हुए आपने "इंडिया टीवी एम्पायर" खड़ा किया जिसके बारे में बीबीसी एक मुलाकात और ओपन मैगजीन में सुन-देख चुका हूं..

कांग्रेस प्रत्याशी ने सीईसी से रिटर्निंग ऑफिसर झालावाड़ को तत्काल हटाने के लिए पत्र लिखा

सेवा में,
           माननीय श्री वी. एस. सम्पत
           मुख्य चुनाव आयुक्त,
           भारत निर्वाचन आयोग,
           नई दिल्ली।

विषय:– रिटर्निंग ऑफिसर झालावाड़ को तत्काल हटाने एवं मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश की सीमा के 20 किमी क्षेत्र में लगे मतदान केन्द्रों पर अतिसंवेदनशील घोषित किये जाने के क्रम।

महोदय,
             राजस्थान
की झालावाड़-बारां संसदीय सीट (25) के लिए आगामी 17 अप्रेल 2014 को मतदान होना है, लेकिन यहां भाजपा द्वारा श्री दुष्यंत सिंह को अधिकृत प्रत्याशी के रूप में उतार दिये जाने से राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए यह अत्यधिक प्रतिष्ठा वाला संसदीय क्षेत्र है। क्योंकि श्री दुष्यंत सिंह उनके इकलौते पुत्र है और किसी भी सूरत में ये इस सीट को खोना नहीं चाहते, जबकि खुफिया रिपोर्टस को देखा जाये तो, यह सीट बीते 10 दिन में बदली हवा के साथ राजस्थान की 7 उन सीटों की श्रेणी में आ गयी, जहां कांग्रेस भाजपा के मुकाबले ज्यादा भारी है। यहीं वजह है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने यकायक इस संसदीय क्षेत्र में अपना पूरा ध्यान केन्द्रित करते हुए दौरे बढ़ा दिये।

वाईसी अग्रवाल, कुमार राकेश, अमित कुमार की नई पारी, राहुल जोहरी का प्रमोशन, संजीव श्रीवास्तव का नया शो

वाईसी अग्रवाल ने दैनिक भास्कर ज्वाइन कर लिया है. अग्रवाल को दैनिक भास्कर (बिहार-झारखंड) का मैनेजिंग एडिटर बनाया गया है. अग्रवाल पटना में बैठेंगे. दैनिक भास्कर बिहार-झारखंड के चीफ रीजनल ऑफिसर आर स्वामीनाथन ने वाईसी अग्रवाल की नियुक्ति की पुष्टि की.  वाईसी अग्रवाल इससे पहले हिन्दुस्तान अखबार में हुआ करते थे. उन्हें कई तरह के विवादों के बाद हिंदुस्तान से जाना पड़ा था.

वाराणसी में पुलिस ने दो पत्रकारों को लाठियों से बुरी तरह पीटा

वाराणसी: गोदौलिया पुलिस ने एक वरिष्ठ पत्रकार समेत दो पत्रकारों पर बीती शाम बुरी तरह लाठियां बरसायीं। यह पुलिसवाले बुरी तरह घायल एक महिला को पैदल जाने पर मजबूर कर रहे थे। पत्रकारों ने जब इस पर ऐतराज किया तो पुलिसवालों ने भद्दी गालियां देते हुए इन पत्रकारों को जमकर पीट दिया। उधर इस हादसे पर वाराणसी के पत्रकार खासे नाराज हैं।

सीरियली हीरो छाप एंकर और ऑनसाइकल सीएम

रेलम पेल मची है। जिसको देखिए वही मुंह उठाए भागा जा रहा है। हंफरी छूट रही है तो छूटे अपन तो भइया सबसे तेज़ हैं। हम सबसे अलग करेंगे। अच्छा? फलां ने इंटरव्यू फलाने सीएम का किया? कैसे किया? सोफे पर उल्टा बइठके? अच्छा रुको हम कुछ सोचते हैं। ज़रा कहो न यार सीएम लंगड़ी खेलते हुए इंटरव्यू देंदे मज़ा आ जाएगा। ज़मीनी नेता के तौर पर छवि बनेगी सो अलग।

समाचार वक्ता या राजनीतिक प्रवक्ता? दलाली और पत्रकारिता में क्या है फ़र्क?

पिछले कई दिनों से लगातार टी.वी.चैनल्स चुनावी ख़बर परोस रहे हैं। ये कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी खबर ये है कि वोटों के ध्रुवीकरण की तर्ज़ पर अब न्यूज़ चैनल्स का भी ध्रुवीकरण हो चला है, जिसका विशुद्ध पैमाना आर्थिक लें-दें है। अपनी-अपनी "सरंक्षक" पार्टियों के प्रति "वफादारी" का परिचय ये चैनल्स खुल कर दे रहे हैं। इन चैनल्स को ध्यान से देखें और उनकी भाषा पर ध्यान दें तो समझ में आ जाएगा कि "पेड" न्यूज़ को कूटनीतिक तौर पर कैसे "नॉन-पेड" न्यूज़ का अमली जामा पहनाया जा रहा है।

Kejariwal Topples Modi in TV News Coverage : 2014 Lok Sabha Election Coverage Analysis

: CMS Media Lab Analysis of TV News Coverage of 2014 Lok Sabha Election : This preliminary CMS Media Lab analysis is based on the 15 days coverage from March 1 to 15, 2014 of five prominent television news channels. Channels included in the analysis are : Aaj Tak, ABP News, Zee News, NDTV 24×7 and CNN IBN. Findings are based on the Prime Time coverage (8-10 pm) of these five TV news channels.

मालिकों का दुमछल्ला बने रहने वाले संपादकों को नकवी जी ने आइना दिखाया है

Yashwant Singh : इंडिया टीवी से Qamar Waheed Naqvi के इस्तीफे का स्वागत करता हूं. हिम्मत का काम किया है नकवी जी ने. जब रजत शर्मा और इंडिया टीवी पूरी तरह मोदीमय हो गए हों, ऐसे में पढ़े-लिखे और समझदार संपादक नकवी जी का वहां बने रहना न सिर्फ जघन्य था बल्कि अक्षम्य भी.

हाई कोर्ट के जज ने पूछा- ‘क्या कॉमनमैन और पीएम आपकी नज़र में बराबर हैं?’

मैंने हाल में स्पेशल सिक्यूरिटी ग्रुप अधिनयम 1988 को संविधान के अनुच्छेद 14  के विपरीत होने के कारण विधिविरुद्ध घोषित करने और एसपीजी सुरक्षा मात्र आवश्यकता के अनुसार प्रदान किये जाने हेतु इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पीआईएल (रिट याचिका मिस बेंच संख्या 2967/2014) दायर किया गया. पीआईएल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट ने लगातार यह कहा है कि सरकारी सुरक्षा मात्र किसी पद के साथ नहीं दिया जाना चाहिए, भले ही वह पद कितना भी बड़ा हो. इसे हर व्यक्ति-विशेष के अलग-अलग आकलन के बाद ही दिया जाना चाहिए और मात्र पूर्व प्रधानमंत्री या इनके परिवार के सदस्य होने के कारण नहीं दिया जा सकता क्योंकि इनमे कुछ लोग अवांछनीय हो सकते हैं अथवा उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं हो सकती है. इसी प्रकार इस सीमित समूह के बाहर के लोगों को उनकी जरूरत के बाद भी यह सुरक्षा नहीं दिया जाना पूर्णतया गलत है.

बड़े खतरे को भांप कर: कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ बनाई ‘आपात’ रणनीति!

नौ में से चार चरणों का मतदान हो गया है। इस दौरान चुनावी रुझान को देखकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपने लिए बड़ा खतरा भांप लिया है। 10 अप्रैल को तीसरे चरण के चुनाव में 14 राज्यों की 91 सीटों पर मतदान हुआ। इस दौरान जिस तरह से ज्यादातर चुनाव क्षेत्रों में मोदी मुहिम का जादू चलता महसूस किया गया, उससे कांग्रेस नेतृत्व की बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक खतरा सिर के ऊपर खड़ा देखकर राहुल गांधी ने अपने कोर ग्रुप के सहयोगियों से विमर्श का दौर शुरू किया है।

संपादक से दुखी पत्रकार मनोज का इस्तीफा, राजेश बाजपेई की नई पारी, अमृतेश कार्यमुक्त

हिंदुस्तान, गोरखपुर से खबर है कि दिनेश पाठक के संपादक बनने के बाद कई प्रतिभाशाली पत्रकार उनके रवैये से खुद को उपेक्षित और आहत महसूस कर रहे हैं. इसी क्रम में मनोज सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. सीनियर जर्नलिस्ट मनोज सिंह इन्नोवेशन डेस्क पर हुआ करते थे. संपादक दिनेश पाठक के बुरे बर्ताव के कारण वे इस्तीफा देने को मजबूर हुए. मनोज सिंह पढ़े लिखे और तेजतर्रार पत्रकार माने जाते हैं.

समर्थ और ताक़तवर एक तरफ़ जमा हो गये हैं, असमर्थ और कमज़ोर इधर उधर भटक रहे हैं…

Sheetal P Singh : समर्थ और ताक़तवर एक तरफ़ जमा हो गये हैं। असमर्थ और कमज़ोर इधर उधर भटक रहे हैं, उनके अगुआ बँटे हुए हैं या ये कहना सही होगा कि बाँटे जा चुके हैं। TV अख़बार रेडियो वीडियो सब खिलखिला रहे हैं। वे जीत रहे हैं। कहीं छुपिये वे आपको ढूँढ लेते हैं और हँसते खिलखिलाते अपनी जीत का V चिन्ह आपको दिखा देते हैं। ऐसा ख़ुशनुमा माहौल लगातार हफ़्तों महीनों सालों तक पसरा हुआ है, बस हम ख़ुश नहीं हैं। बीमार हैं हम, हमारे तमाम दोस्त भी। इस बसन्त के मौसम में भी हमारे पास बिसूरने का सामान भरा पड़ा है।

अरे, पहले अपनी ब्याहता का तो उद्धार करो!

Om Thanvi : 2001, 2002, 2007 और 2012 के चार विधानसभा चुनावों के परचों में नरेंद्र मोदी इस तथ्य को छुपाते रहे कि शादीशुदा हैं। कल वड़ोदरा में लोकसभा की उम्मीदवारी का परचा भरते हुए उन्होंने घोषित कर दिया कि शादीशुदा हैं। पत्नी का नाम – जशोदाबेन। कानून के मुताबिक उम्मीदवार को पति-पत्नी दोनों की संपत्ति भी बतानी होती है। बरसों गुमनामी और अभावों भरी जिंदगी जीने वाली मोदी की ब्याहता जशोदाबेन चिमनलाल मोदी के पास होगा क्या?