राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार पर जानलेवा हमला

शाहजहांपुर के परौर में राष्ट्रीय सहारा अखबार के पत्रकार बृजनंदन शुक्ला को कुछ हमलावरों ने घेर कर धारदार हथियार और रायफल की बटों से पीट कर बुरी तरह घायल कर दिया.  बृजनंदन शुक्ला के परिजनों ने घटना की तहरीर परौर थाने में दर्ज करा दी है.

आरोप है कि  परौर के प्रधान गिरंद से बृजनंदन शुक्ला से रंजिश चल रही थी. तहरीर में कहा गया है कि घोड़ों पर सवार होकर आये हमलावरों में परौर के ग्राम प्रधान गिरंद, उसका बेटा और उसके  कुछ रिश्तेदार भी शमिल थे.  अत्यंत गंभीर  रूप से घायल बृजनंदन शुक्ला को कलान  सीएचसी के डाक्टरों ने तुरंत शाहजहांपुर जिला अस्पताल भेज दिया.

 

हरिवंश को राज्य सभा में भेजेगा जद (यू)

हिंदी दैनिक प्रभात खबर के प्रधान संपादक और देश के जाने-माने पत्रकार हरिवंश कुमार को  जनतादल (यू) ने राज्यसभा का टिकट दिया है. प्रभात खबर बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और असम समेत कई प्रदेशों से प्रकाशित होता है.

विख्यात पत्रकार हरिवंश को जनता दल का राज्य सभा प्रत्याशी बनाए जाने पर विभिन्न संगठनों और पत्रकारों ने खुशी व्यक्त की है. राज्य सभा  के लिए नामांकन 28 जनवरी तक होगा तथा सात फरवरी को चुनाव होना है. उनके अलावा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कहकशां और कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर को भी  जनता दल (यू) ने राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है. राज्य सभा में जनता दल (यू) के  शिवानंद तिवारी, साबिर अली और एनके सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है. उन्हीं के स्थान पर इन तीनों को प्रत्याशी बनाया गया है.

हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य बनाए जाने पर सोशल मीडिया में भी प्रसन्नता की लहर है. पत्रकार बिकास के. शर्मा अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं:

Bikash K Sharma : अभी अभी सूचना मिली कि प्रभात खबर (रांची) के प्रधान संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश जी को जनता दल (यु ) ने राज्य सभा से उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है.. हरिवंश सर को बधाई, उनके जैसे गंभीर लेखकों को उच्च सदन में बहुत पहले स्थान मिलना चाहिए था.. हमलोग बचपन से जिनको पढ़ते आये, एक दो मौकों पर सुनने का मौका मिला, उन्हें अब संसद में मुद्दों पर बोलते हुए देखकर प्रसन्नता होगी..

 

प्रभाष जी के जन्मोत्सव में नामवर सिंह क्यों झुंझलाए

ये चौथा अवसर था. प्रभाष परंपरा न्यास ने एक बार फिर प्रभाष जी का जन्मदिन मनाया. मैं भी भाषण, भजन और भोजन की प्रभाषीय परंपरा का प्रत्यक्षदर्शी एक बार फिर बना. हर बार एक नया आनंद मिलता है प्रभाष परंपरा न्यास के कार्यक्रमों में. आनंद तो इस बार भी मिला, लेकिन इस बार आनंद में कुछ खटक सा गया. भाषण की श्रंखला में सांसद राव इंद्रजीत सिंह और टीएन चतुर्वेदी बोल चुके थे. अब बारी नामवर सिंह जी की थी. थोडी़ सी ना नुकुर के साथ नामवर सिंह जी बोले तो पहले उन्होंने नेताओं को धोया. नेताओं के बहाने राव इंद्रजीत ही निशाने पर थे. उसके बाद उन्होंने उस संस्था को ही धोना शुरु कर दिया जिसके वे खुद अध्यक्ष हैं. यानि उन्होंने प्रभाष परंपरा न्यास पर ही टीका टिप्पणी शुरु कर दी.

उस सभा की ही मीनमेख निकालनी शुरु कर दी, जिसके संवैधानिक सभापति भी थे. एकबारगी लगा कि नामवर सिंह जी सभा के सभापति नहीं बल्कि सभा में बुलाए गए वक्ता हैं… और वो कार्यक्रम के स्वरूप से खुश नहीं हैं. प्रभाष परंपरा न्यास के कार्यक्रमों में नामवर सिंह पहले कभी इस रूप में नहीं दिखे थे.
    पिछले साल के ही कार्यक्रम में दिए गए उनके भाषण को याद कीजिए, उन्होंने कहा था कि प्रभाष जी उत्सवधर्मी थे. भाषण, भजन और भोजन उन्हें प्रिय था. इस बार नामवर सिंह को पता नहीं क्या हुआ-बोले हम जिन्हें अपना आदर्श मानते हैं उनके जन्मदिन का भी उत्सव मना लेते हैं और उडा़ देते हैं. प्रभाष जी महज उतसवधर्मी नहीं थे. उनके जन्मदिन पर कुछ ठोस होना चाहिए. केवल एक दो भाषण की जगह संगोष्ठी-सेमिनार होने चाहिए. खूब बहस होनी चाहिए. गोष्ठी में शामिल होने के लिए वक्ताओं को छह महीने पहले से विषय बताना चाहिए. वो उस पर तैयारी करके आएं. जो वक्ता गोष्ठी में बोल पाएं उनके और जो न बोल पाएं उन सभी के लेख एक पत्रिका में प्रकाशित किए जाएं. तब ठोस काम होगा. प्रभाष जी अगर कहीं से देख रहे होंगे तभी उन्हें संतुष्टि मिलेगी.
    नामवर सिंह के ये समालोचनात्मक उपदेश बहुत अच्छे हैं. इन उपदेशों में बुराई भी कोई नहीं है. मगर, ऐसा मेरा मानना है कि नामवर सिंह जी ने जिस मंच से ये बातें कहीं वो मंच उनसे ये अपेक्षा नहीं रखता था. वो अपनी ये सभी टीका टिप्पणी या सुझाव प्रभाष परंपरा न्यास की उस सभा में उठा सकते थे जिसमें प्रभाष जी के जन्मदिन के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम तय होने थे. नामवर सिंह अध्यक्ष के अधिकार से प्रभाष परंपरा न्यास के न्यासियों को अपने सुझावों पर अमल करने के लिए बाध्य भी कर सकते थे.  इतना नहीं तो कम से कम प्रभाष परंपरा न्यास के अध्यक्ष के नाते नामवर सिंह जी “जो उचित है” उसको क्रियान्वित करने के निर्देश तो बाकी न्यासियों को दे ही सकते थे. उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया.
    अब सवाल यह उठता है कि नामवर सिंह जी ने प्रभाष परंपरा न्यास के आंतरिक मंच की जगह प्रभाष जी के जन्मदिन पर हो रहे सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच को ही अपनी टिप्पणी के लिए क्यों चुना? क्या प्रभाष परंपरा न्यास की बैठकों में बाकी न्यासियों ने अपने ही अध्यक्ष को सुझाव देने से रोक दिया था? या प्रभाष परंपरा न्यास के न्यासियों ने अपने अध्यक्ष के सुझावों को अनसुना कर दिया? क्या प्रभाष परंपरा न्यास अब अपने अध्यक्ष की अवहेलना और उपेक्षा कर रहा है? क्या प्रभाष परंपरा न्यास के अध्यक्ष नामवर सिंह के सुझाव न्यास की परंपरा के अनुकूल नहीं थे, इसलिए न्यासियों ने अनदेखा कर दिया? या  नामवर सिंह जी ने अपनी टीका-टिप्पणियों के जरिए कोई कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश की है?
    सवाल-संशय कुछ और भी हो सकते हैं, लेकिन इन सभी सवाल-संशय या विवाद को जन्म नामवर सिंह जी ने ही दिया है. हालांकि, नामवर सिंह जी ने भाषण सुना-दिया, भजन का आनंद लिया और भोजन भी किया. ठीक उसी तरह जैसा कि वो पहले के आयोजनों में करते रहे थे. आखिर अपने ही मंच पर, अपने ही आयोजन को लेकर उनके मन में झुंझलाहट क्यों थी?
और उनकी ये प्रतिक्रिया उनके 'कद' और 'पद' के अनुरूप कही जा सकेगी?

साधना न्यूज ने मांगी राजीव शर्मा से लिखित माफी, नकद भुगतान किया

भड़ास फॉर मीडिया पर खबर छपने के बाद साधना न्यूज प्रबंधन को झुकना पड़ा. साधना न्यूज के आउटपुट एडिटर राजीव शर्मा का संघर्ष सफल हो गया है. आखिरकार साधना न्यूज के प्रबंधन को राजीव शर्मा से माफी मांगनी पड़ी. साधना के प्रबंधन ने राजीव शर्मा को एक पत्र लिख कर कहा है कि आपको दिया गया चेक संख्या 141205 कतिपय कारणों से अनादृत हो गया है जिसके लिए हम आपसे माफी मांगते हैं (…the cheque no. 141205 got dishonored due to some technical reasons. We, apolozise for the same. As discussed over the phone we hereby pay you Rs…in cash, in place of cheque no.141205.)

इस पत्र के साथ ही साधना प्रबंधन ने राजीव शर्मा को उनके बकाये धन का नकद भुगतान भी कर दिया है. पत्र के अंत में साधना के प्रबंधन ने दोबारा माफी मांगते हुए लिखा है, चेक अनादृत होने के कारण आप को जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, हम उन सभी के लिए आपसे पुनः क्षमा मांगते हैं (We again apologize for the entire situations you

राजीव शर्मा
राजीव शर्मा
have gone through due to the same). ध्यान रहे कि राजीव शर्मा को साधना प्रबंधन ने तीन जून को उनके बकाया वेतन का चेक जारी किया था और राजीव शर्मा ने भी लगभग एक महीने से चले आ रहे विवाद को अपने इस्तीफे के साथ समाप्त कर दिया था.

दस जून को राजीव शर्मा के बैंक ने उन्हें बताया कि चेक जारी करने वाले यानि शार्प आई एडवरटाइजिंग प्राईवेट लिमिटेड बिहार प्रोजेक्ट के खाते में पर्याप्त रकम नहीं है. इसलिए चेक बाउंस हो गया है. इस चेक पर उपरोक्त कम्पनी की तरफ से किसी मयंक गुप्ता ने हस्ताक्षर किए थे. चेक बाउंस होते ही राजीव शर्मा ने इसकी जानकारी अपने मित्र -परिचितों को दी और कानूनी कार्रवाई की सलाह ली. इस घटना की जानकारी भड़ास फॉर मीडिया को मिली तो भड़ास ने राजीव शर्मा के संघर्ष को सहारा देते हुए चेक बाउंस होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की. नतीजतन, अपनी प्रवृत्ति से विपरीत साधना प्रबंधन को माफी मांगते हुए राजीव शर्मा को नकद भुगतान करना पड़ा.

साधना न्यूज के इतिहास में बकाया पैसा वापस मिलने के चंद उदाहरण ही हैं. सबसे पहले एनके सिंह के कार्यकाल में बिहार की एक पार्टी के कुछ लाख वापस हुए थे. उसके बाद एसएन विनोद की धमकी के बाद भोपाल की पार्टी के पैसों की वापसी किश्तों में शुरी हुई और अब राजीव शर्मा को  बकाया पैसा वापस मिला है. इनके अलावा साधना न्यूज के ज्यादातर बकायदार चकवे की तरह बारिश के मौसम में स्वाति नक्षत्र का इंतजार ही कर रहे हैं.

क्या साधना न्यूज चैनल कंगाल हो गया? चेक बाउंस होना शुरू

घटिया प्रबंधन और ओछी सोच के चलते साधना न्यूज चैनल कंगाली के कगार पर खड़ा हो गया है. अब उसके खातों में अक्सर पैसा भी नहीं रहता और कर्मचारियों के चेक बाउंस हो रहे हैं. तीन जून को साधना प्रबंधन ने एडिटर आउटपुट राजीव शर्मा से सेटलमेंट  के बाद शार्प आई प्राइवेट लिमिटेड बिहार प्रोजेक्ट की मुहर लगा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, झण्डेवालान रानी झांसी रोड नई दिल्ली का एक चेक जारी किया.

तेईस मई के दिनांकित चेक क्रमांक 141205 पर खाता संख्या 30917847589 अंकित है और उस पर किसी मयंक गुप्ता के हस्ताक्षर बताए जाते हैं. दस जून को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सेक्टर 11 नोएडा की शाखा ने बताया कि उपरोक्त खाते में पर्याप्त धनराशि न होने से चेक वापस हो गया है.

साधना न्यूज के प्रबंधन के इस रवैये से भन्नाये राजीव शर्मा साधना के प्रबंधन को अदालत में घसीटने की तैयारी कर रहे हैं. यह तो सभी को मालूम है कि चेक बाउंस के मामले गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आते हैं. ज्ञात हो कि इसके पहले साधना मैनेजमेंट ने मध्य प्रदेश की एक पार्टी के साठ लाख रुपये मार लिए थे, लेकिन एसएन विनोद की जिद के कारण और कई तरह की धमकियों-चेतावनियों के बाद साधना प्रबंधन अब वो पैसा किश्तों में लौटा रहा है.

बताया जाता है कि साधना प्रबंधन की प्रकृति है कि फ्रेंचाइजी या पार्टनर के रूप में मीडिया में आने को इच्छुक लोगों को पटाकर पहले उनके पैसे लेना फिर उन्हें बाहर कर देना. पैसे फंस जाने के बाद वो संबंधित पार्टीज इधर उधर प्रयास करने के बाद थक हारकर बैठ जाया करती हैं. मध्य प्रदेश में इससे पहले एक और पार्टी के साथ साधना वाले छल कर चुके हैं.

साधना न्यूज चैनल से बीरेंद्र द्विवेदी और राजेश कुमार का इस्तीफा

साधना न्यूज के दो विकेट और गिर गये हैं. साधना न्यूज के बिहार-झारखण्ड चैनल से राजेश कुमार और मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ चैनल से बीरेंद्र द्विवेदी ने इस्तीफा दे दिया है. राजेश कुमार ने इंडिया न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की है. बीरेंद्र के बारे में पता चला है कि उन्होंने साधना न्यूज के साथ-साथ मीडिया को भी तिलांजलि दे दी है.

प्रबंधन के उपेक्षित व्यवहार और तेलाही करने वाले जूनियरों से भी कम वेतन मिलने से बीरेंद्र काफी त्रस्त थे. अपने साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाने की काफी कोशिश की लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई. अंत में थक हार कर बीरेंद्र द्विवेदी ने साधना न्यूज और मीडिया दोनों से स्वतः मु्क्ति हासिल कर ली. बीरेंद्र साधना न्यूज से इस चैनल की लांचिंग समय से ही जुड़े हुए थे.

साधना न्यूज चैनल से राजीव शर्मा, अमित तिवारी, योगेश जोशी, अमित सिंह, संतोष दुबे का इस्तीफा

लगभग एक महीने तक अवकाश पर रहने के बाद साधना न्यूज चैनल के आउटपुट एडिटर राजीव शर्मा ने प्रबंधन को त्याग पत्र सौंप दिया है. राजीव शर्मा एक बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं और एक नये चैनल के साथ शीघ्र ही सामने आएंगे. साधना न्यूज के एंकर हेड अमित तिवारी ने भी इस्तीफा दे दिया है.

अमित तिवारी के बारे में पता चला है कि वो एक नेशनल चैनल के एमपी-छत्तीसगढ़ संस्करण में नमूदार होंगे. साधना न्यूज के ही एमपी छत्तीस गढ़ चैनल के आउटपुट हेड योगेश जोशी भी लंबे समय से कार्यालय नहीं आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है.

साधना न्यूज चैनल के अंदरूनी हालात खराब होने की वजह से इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की लम्बी फेहरिश्त है. साधना न्यूज के कर्मचारी इस्तीफा देकर दूसरे संस्थानों में डेरा जमा रहे हैं. एमपी-छत्तीसगढ चैनल से संतोष दुबे और उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड से अमित कुमार सिंह चौहान ने भी साधना न्यूज को बाय-बाय बोल दिया है.

संतोष दुबे ने पी-7 के साथ और अमित कुमार सिंह चौहान ने जी न्यूज यूपी के साथ नई पारी शुरू की है. अनुभवी कर्मचारियों के चले जाने से साधना न्यूज चैनल का स्तर भी बद से बदतर हो चुका है.

मध्य प्रदेश में ‘लोकमत’ के लोकार्पण से पहले सिर मुंडाते पड़ गए ओले

महाराष्ट्र से पब्लिश होने वाला अखबार लोकमत, मध्यप्रदेश में अपनी जड़ें जमाने की तैयारी में है. इसका पहला संस्करण केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा से प्रकाशित होना है. लेकिन लोकमत के लिए मध्य प्रदेश में सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ने का मुहावरा सटीक बैठ रहा है.

लोकमत के छिंदवाड़ा संस्करण के उद्घाटन के लिए पहले 2 जुलाई की तारीख तय की गई थी. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने उद्घाटन समारोह में पहुंचने के लिए अपनी सहमति भी दे दी थी. चूंकि चुनाव नजदीक हैं और पॉलिटिकल रेवेन्यू की संभावनांए बढ़ी हैं इसलिए लोकमत के उद्घाटन समारोह के कर्ताधर्ता चाहते थे कि वो बीजेपी और कांग्रेस दोनों को एक साथ एक ही तराजू में तौल दें.

उद्घाटन समारोह के कर्ताधर्ता मुख्य मंत्री और बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के पास भी निमंत्रण लेकर पहुंचे. कांग्रेस के नेता लोकमत के कर्ताधर्ताओं की मंशा समझ गए और उन्होंने बीजेपी के नेताओं के साथ मंच शेयर न करने की अपरोक्ष भावना से 2 जुलाई को आने में असमर्थता जाहिर कर दी. लोकमत के कर्ताधर्ताओं ने चुपचाप दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से सलाह की और उद्घाटन की तारीख दो जुलाई की जगह बारह जुलाई निर्धारित कर दी.

बड़ी चालाकी से उन्होंने शिवराज सिंह और रोहाणी की दोबारा सहमति भी ले ली. राज्य की अभिसूचना इकाई ने जब शिवराज सिंह को बताया कि लोकमत के उद्घाटन की तारीख कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के कहने पर बदली गई है तो शिवराज सिंह और ईश्वर दास रोहाणी ने समारोह में शामिल होने से इंकार कर दिया और विधान सभा सत्र का हवाला देते हुए लोकमत वालों के पास समारोह में शामिल न हो पाने के लिए अपना खेद पत्र भेज दिया है.

लोकमत के प्रबंधन ने अब यह तय किया है कि उद्घाटन 12 जुलाई की सुबह होगा और शाम को रात्रि भोज. समारोह में कांग्रेसी नेता रहेंगे और रात्रि भोज बीजेपी के नेताओं के साथ किया जाएगा. यह तो सभी को मालूम है कि लोकमत, ‘कांग्रेसी दर्डा परिवार’ का अखबार है और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. इसलिए लोकमत प्रबंधन चाहता था कि कांगेस और बीजेपी दोनों को साध कर चला जाए.

शायद लोकमत वाले भूल गए कि एक म्यान में दो तलवारें कभी नहीं रहती. अब उन्हें यह डर भी लग रहा है कि सरकार की उपेक्षा के साथ मध्य प्रदेश में अखबार शुरु करना टेढ़ी खीर हो सकता है और पानी में रह कर मगरमच्छ से बैर रखना भी बुद्धिमानी वाला खेल नहीं है. सो लोकमत प्रबंधन ने उद्घाटन समारोह के बाद रात्रि भोज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुलाने के लिए ऐड़ी चोटी के जोर लगा दिए हैं.

लोकमत के वरिष्ठ पत्रकार सतीश सुदामे का निधन

औरंगाबाद से प्रकाशित लोक मत के मुख्य  उपसंपादक सतीश सुदामे का एक हादसे मे  रविवार की सुबह निधन हो गया.सुदामा अपने घर की छत से  आम तोड रहे थे अचानक  वो 25 फिट नीचे गिर गए और उनके सिर में गहरी चोट आई.

उन्हें तत्काल एक निजी  हस्पताल मे भर्ती करवाया गया.डाक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.रविवार दोपहर उनके पार्थीव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया.सतीश सुदामे के परिवार में वृद्ध माता-पिता और और एक पुत्र व पुत्री भी है.सतीश प्रसिद्ध गज़लकार भी थे.हाल ही में उनका एक गज़ल संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है. पत्रकार हमला विरोधी संघर्ष समिति की और से सतीश को विनम्र श्रद्धांजलि.

उत्तराखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार गिरीश तिवारी का दिल का दौरा पड़ने से निधन

देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार गिरीश तिवारी का आज दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। गिरीशचन्द तिवारी साप्ताहिक उत्तरांचल नमन के मुद्रक व संपादक थे। वे लगभग 50 वर्ष के थे। राज्य गठन से पूर्व तिवारी लखनऊ में भी पत्रकारिता कर चुके थे।

श्री तिवारी 1985-86 के दौरान तरुण हिन्द (ऋषिकेश) के लिए काम करते थे। सन् 1991 से 2000 तक वे लखनऊ में रहे। साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी के करीबी रहे तिवारी अल्मोड़ा के निकट हवालबागके निवासी थे। अविवाहित रहे श्री तिवारी पत्रकारिता में मस्तमौला शख्सियत थे। श्री तिवारी की मृत्यु पर देहरादून में पत्रकारों और पत्रकार संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। उत्तराखण्ड के गठन से पूर्व श्री तिवारी ने लखनऊ में सक्रिय पत्रकारिता में योगदान दिया। श्री तिवारी की असमय मृत्यु पर देहरादून के पत्रकारों और पत्रकार संगठनों ने शोक व्यक्त किया है।

 
 

स्ट्रिंगरों का करोड़ों का मेहनताना साधना वालों ने हड़पा

आर्थिक बदहाली और भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके साधना न्यूज के स्ट्रिंगर्स लामबंद हो रहे हैं. अब ये सभी साधना न्यूज चैनल के मालिकों के खिलाफ दिल्ली में धरना प्रदर्शन और आंदोलन करने जा रहे हैं. आर्थिक शोषण और उत्पीड़न के शिकार संवाददाता-स्ट्रिंगरों  ने साधना न्यूज चैनल के मालिकों और प्रबंधकों के कारनामों की पूरी फेहरिश्त तैयार की है. इस फेहरिश्त में कुछ 'आधिकारिक दस्तावेज' भी शामिल हैं. 

ये दस्तावेज भडा़स को भी भेजे गए हैं. पहली नजर में सभी दस्तावेज ऑरिजनल लगते हैं और स्ट्रिंगरों के आरोपों की पुष्टि भी करते हैं. स्ट्रिंगर्स का आरोप है कि साधना वाले उनका लगभग दो करोड़ रुपये से ज़्याद का भुगतान दबा कर बैठ गए हैं. ये रकम अधिकतम सात हजार रुपए प्रतिमाह प्रति स्ट्रिंगर की दर से है. साधना वालों की इस हरकत से स्ट्रिंगरों के सामने भुखमरी के हालात बन गए हैं. इन स्ट्रिंगरों में से काफी कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने पचास-पचास हजार रुपये बतौर सिक्योरिटी साधना न्यूज चैनल में जमा किये हैं. इन स्ट्रिंगरों की सिक्योरिटी तो अभी तक वापस की नहीं गई है, अब उनका मेहनताना भी हजम करने का षडयंत्र चलाया जा रहा है. जब स्ट्रिंगर अपना बकाया भुगतान मांगते हैं तो उनकी जगह किसी दूसरे को आईडी दे दी जाती है.

कुछ स्ट्रिंगर्स ने साधना न्यूज चैनल में सिक्योरिटी जमा करने के लिए के अपनी मां-पत्नी के जेवर गिरबी रख कर कर्ज उठाया था. ये जेवर डूबे, सिक्योरिटी भी डूबी और मेहनताना मिलने के आसार भी नहीं हैं. साधना वालों ने जब मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ चैनल शुरु किया तो स्ट्रिंगरों का मेहनताना 450 रुपये प्रति स्टोरी था. बिहार-झारखण्ड चैनल शुरु करने के कुछ दिनों के भीतर ही मेहनताना 200 रुपये प्रति स्टोरी कर दिया. स्ट्रिंगरों के मुताबिक बीते साल 2012 में साधना वालों ने अपनी आर्थिक स्थिति का वास्ता देते हुए कहा था कि स्ट्रिंगरों को प्रति स्टोरी भुगतान की जगह अधिकतम सिर्फ सात हजार रुपये प्रतिमाह ही मिलेंगे लेकिन स्टोरीज पहले की तरह ही भेजनी होंगी. साधना वालों के इस फरमान से कई स्ट्रिंगरों ने काम छोड़ दिया और अपना बकाया पैसा मांगा वो भी अभी तक नहीं दिया गया है.

साधना में पेड स्टाफ सिर्फ नोएडा में है या फिर भोपाल,रायपुर,इंदौर, लखनऊ, पटना, रांची और देहरादून में दो-दो एक-एक पेड स्टाफ है चैनल में लगभग सभी स्टोरी स्ट्रिंगरों की ही चलती हैं. साधना न्यूज के  पेड स्टाफ के नियुक्ति पत्र में भी वसूली का लक्ष्य भी लिखा जाता है. साधना न्यूज के मौजूदा प्रबंधकों की बेईमानी-छल और प्रपंची नीतियों की वजह से ही साधना न्यूज चैनल का डिस्ट्रीब्यूशन भी निल हो गया है. साधना न्यूज चैनल छोटे-बड़े शहरों और कस्बों में तो बंद पड़ा ही है, राज्यों की राजधानियों जैसे भोपाल, रायपुर, पटना, रांची, लखनऊ में भी साधना न्यूज चैनल काफी लम्बे समय से बंद पडा़ हुआ है.
देर से ही सही मगर अपने हितों की हिफाजत के लिए लामबंद हुए स्ट्रिंगरों ने साधना न्यूज चैनल के खिलाफ दिल्ली पहुंच कर आंदोलन की योजना बनाई है. आंदोलन शुरु करने का दिन व समय तय करने के लिए ये सभी स्ट्रिंगर्स दिल्ली में इकट्ठा हो रहे हैं. कुछ स्ट्रिंगरों ने सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी से भी सम्पर्क साधा है. जहां से उन्हें सकारात्मक संकेत मिले हैं.

सोशल मीडिया और न्यू मीडिया अतिवादी ताकतों के हाथ में जा रहा!

सोशल मीडिया ने आज आम जनमानस को अपनी बात कहने का मौका दिया है. जहाँ पहले मुख्यधारा मीडिया का संपादक ही तय करता था की कौन सी बात बाहर आनी है और कौन सी नहीं वहां आज सोशल मीडिया पर सिर्फ खबर बनाने के लिए बातें नहीं हो रही हैं बल्कि उन समस्यायों के निवारण के लिए मिलकर आवाज़ उठाने का भी काम हो रहा है.

सबसे बड़ी बात की जो मध्यवर्ग हमेशा ही रोटी कपड़ा और मकान को ही अपना मुख्या मुद्दा मानता आ रहा था और जिसकी वजह से ये माना जाता था की यह आन्दोलनो में नहीं आ सकता न्यू मीडिया की वजह से ही इसने दुनिया के बड़े आन्दोलनो की अगुवाई की. मिस्र, ट्यूनीशिया के आन्दोलन भारत में अन्ना आन्दोलन , निर्भया के समर्थन में आन्दोलन इसके प्रबल उदाहरण हैं.

इस बात से इतना तो सिद्ध हो जाता है कि सोशल मीडिया या न्यू मीडिया जिनमे फेसबुक , ट्विटर, ब्लॉग, ऑनलाइन पोर्टल आदि हैं, ने पारंपरिक मीडिया के एकाधिकार को तोड़ा है और इन्होने एक व्यापक मंच तैयार किया जिसकी वजह से मुख्यधारा मीडिया भी अपने आप में परिवर्तन करने या कम से कम दिखने को तो बाध्य हुआ ही है. लेकिन इस बात पर खुश होकर ताली पीट लेने से काम नहीं चल पायेगा क्यूंकि वास्तव में ये सिर्फ एक पक्ष है हम सिर्फ प्रभाव से खुश हैं किन्तु प्रभाव का परिणाम देखे बिना हमें कोई निष्कर्ष निकल लेने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.

वास्तव में अगर हम चश्मा हटाकर और सच को स्वीकार करने की हिम्मत के साथ अवलोकन करे तो हम पायेंगे की सोशल मीडिया और न्यू मीडिया अतिवादी ताकतों के हाथ में जा रहा है ट्यूनीशिया और मिस्र जैसे देशों में जहाँ आज़ादी और समानता को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुए आन्दोलन की परिणति कट्टरपंथी सरकारों में हुई है कुछ वैसी ही स्थिति भारत में भी हो गयी है. आज अगर फेसबुक जो की सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा प्रभावी है पर अगर देखा जाय तो वास्तव में अतिवादी विचार बहुतायत में फैले हुए हैं. वाम, दक्षिण, भाजपा, कांग्रेस, क्षेत्रीय पार्टियाँ, फेमिनिस्ट , हिन्दू, मुस्लिम यहाँ तक की जातियों के भी पेज अब बन चुके हैं और इनकी टिप्पणिया इतनी एक दूसरे के प्रति इतनी घृणा से भरी हुई हैं कि इन्हें देख कर कही से नहीं कहा जा सकता कि ये आगे जा कर समानता और आज़ादी की बात करने वाले हैं. इसने आज 'आलोचना जो कि इसलिए ताकि सुधार हो सके' की जगह 'आलोचना जो कि नष्ट कर सके' वाला भाव ले लिया है. एक दूसरे कि आलोचना में गाली गलौच तक उतर कर यह माध्यम अपने असर को निकट भविष्य में कम ही करेगा.

इसकी वजह यह है कि जहाँ मुख्यधारा मीडिया में संपादक होता है और उसकी जिम्मेदारी बनती है ऐसे कंटेंट को रोकने की, जो समाज में विद्वेष फैलाएं उसके स्तर को दूषित करे, वही सोशल मीडिया में इसका पूर्णतया अभाव है, यहाँ लोग अपनी सामान विचारधाराओं के साथ ही संवाद कर रहे हैं और विरोधी विचारो के साथ अछूतों सा व्यवहार कर रहे हैं इनमे वे लोग भी बहुतायत में हैं जो जाति और वर्ग को मिटने की बात किया करते हैं और यहाँ पर एक नए ही समर्थक वर्गों का अस्तित्व तैयार कर रहे है जो उसी तरह की घृणा लिए हुए उभर कर सामने आ रहा है. हालांकि सभी यही कहेंगे की यहाँ पर संपादक हो नहीं सकता जो किसी के कंटेंट को रोके और मै भी इस बात से सहमत हूँ  किन्तु जब हमने मीडिया की जिम्मेदारी,  उसका नेक काम खुद करना शुरू कर दिया है तो हमें ही उसकी समीक्षा और उसके दायित्वों का निर्वहन भी करना होगा वरना वो दिन दूर नहीं जब इस पर सामाजिक आंदोलनों के प्रयास में स्वयं असामाजिक होते चले जायेंगे.

लेखक विवेक सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक हैं और इलाहाबाद में ही रहकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. सोशल मीडिया और न्यू मीडिया पर इनकी खासी सक्रियता रहती है.  विवेक से मुलाकात vicky.saerro@gmail.com के जरिए की जा सकती है.

निदा फाजली ने कहा: अमिताभ की तुलना नहीं की थी कसाब से, मीडिया ने लगायी है आग

 

मशहूर शायर निदा फाजली ने मीडिया पर उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वो कभी अमिताभ बच्चन की तुलना आतंकवादी अजमल कसाब से नहीं कर सकते। यह विवाद हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका 'पाखी' को फाजली के भेजे पत्र के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि लेखक सलीम जावेद ने गढ़ी थी जिस तरह कसाब को आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद ने बनाया था।
 
फाजली ने एक संवाद एजेंसी से कहा, ‘‘मैंने कभी अमिताभ को आतंकवादी नहीं कहा। मीडिया ने मेरे बयान को सनसनी फैलाने के लिये तोड़ मरोड़कर पेश किया और नया विवाद पैदा कर दिया। मैने एंग्री यंग मैन की छवि के बारे में बयान दिया था, अमिताभ के बारे में नहीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अमिताभ बेहतरीन कलाकार हैं और बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। हर कलाकार की तरह हालांकि उनकी भी सीमाएं हैं।’’ 
 
दरअसल सारा विवाद तब शुरु हुआ जब निदा फाजली के एक पत्र की भाषा पर चर्चा शुरु हुई। उन्होंने पत्र में लिखा था, ‘‘अमिताभ को एंग्री यंग मैन की उपाधि से क्यों नवाजा गया। वह तो केवल अजमल कसाब की तरह गढ़ा हुआ खिलौना है। एक को हाफिज मोहम्मद सईद ने बनाया और दूसरे को सलीम जावेद ने गढ़ा। खिलौने को फांसी दे दी गई लेकिन खिलौना बनाने वाले को पाकिस्तान में उसकी मौत की नमाज पढने खुला छोड़ दिया।’’ उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा, ‘‘मेरा आशय यहां एंग्री यंग मैन की छवि से था। दूसरे मेरा मानना है कि एंग्री यंग मैन की छवि को सत्तर के दशक में सीमित क्यों कर दिया गया और फिर अमिताभ को ही एंग्री यंग मैन क्यों कहा गया। क्या 74 वर्षीय अन्ना हजारे को हम भूल गए। तब से ज्यादा गुस्सा तो आज है।’’ 
 
फाजली की इस तुलना से साहित्यिक दुनिया में बहस छिड़ गई थी। कवि व चिंतक असद जैदी ने फाजली की इस टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा था, "निदा साहब ने जो समानांतर रेखा खींची है वह सही है। सत्तर के दशक में अमिताभ ने कई ऐसे फासीवादी किरदार बड़े पर्दे पर निभाए जो गैर लोकतांत्रिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने वाले थे और ऐसे किरदारों को नायक बनाकर दर्शकों के बीच लाया जा रहा था। यह आज के आतंकवाद की तरह ही थे। यह किरदार निश्चित रूप से सलीम जावेद की जोड़ी ने ही गढ़ा था।"
 
उधर कथाकार असगर वजाहत ने निदा फाजली के बयान की निंदा की थी। असगर वजाहत के मुताबिक ये तुलना हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण है। फिल्मों में किरदार निभाते अमिताभ के स्थान पर उनके व्यक्तिगत जीवन को देखने की जरूरत है। लिखने वाले की बौद्धिक दरिद्रता पर अफसोस करना चाहिए। उन्होंने कहा, "कसाब को ना तो हाफिज सईद ने गढ़ा है और ना ही अमिताभ को सलीम जावेद ने। कोई भी व्यक्ति अपने परिवेश, शिक्षा और संस्कार से बनता और बिगड़ता है। इन दोनों को समानांतर रखना मूर्खतापूर्ण और हास्यास्पद होगा।"
 
सोशल मीडिया में यह मुद्दा पिछले दो दिनों से खासा गर्म था और अमिताभ के फैंस निदा फाजली को देशद्रोही तक करार दे चुके थे। वे इसे कसाब की मौत पर उसके समर्थक शायर की बौखलाहट करार देकर सांप्रदायिक रंग देने में जुटे थे। शायर की सफाई के बाद शायद विवाद कुछ ठंढा हो सके।

दिल्ली गैंगरेप केस: मीडिया पर रोक के आदेश को चुनौती, पुलिस को नोटिस

 

नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने 16 दिसंबर को 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार के मामले में सुनवाई की रिपोर्टिंग करने से मीडिया पर पाबंदी के एक मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका पर दिल्ली पुलिस से आज जवाब मांगा है।
 
जिला न्यायाधीश आर के गाबा ने सोमवार को पुलिस को नोटिस जारी किया और नौ जनवरी को सुनवाई की तारीख तय की।
 
जिला न्यायाधीश ने कहा,‘इस स्तर पर दिल्ली सरकार के लिए अतिरिक्त सरकारी अभियोजक (एपीपी) संज्ञान लेंगे। एपीपी की दलील है कि उन्हें संबंधित अभियोजक से तथ्यों और सूचना एकत्रित करने की जरूरत है।’
 
वकील डीके मिश्रा और वकील पूनम कौशिक के आवेदन में कार्यवाही बंद कमरे में करने के मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है और आरोप लगाया गया है कि अदालत कक्ष में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
 
‘देश के नागरिकों’ की ओर से अपने आवेदन में वकीलों ने कहा, ‘आदेश जारी करते हुए मेट्रेापोलिटन मजिस्ट्रेट ने अनेक आशंकाएं जताई हैं और राष्ट्र के प्रतिनिधियों के तौर पर वहां एकत्रित वकीलों तथा मीडियाकर्मियों पर आरोप लगाए हैं जो आहत हुए हैं।’
 
मजिस्ट्रेट की अदालत ने आज मीडिया को अदालत में मामले की कार्यवाही की रिपेार्टिंग करने और इसका प्रकाशन करने से रोका था। दिल्ली पुलिस ने मामले में बंद कमरे में सुनवाई के लिए आवेदन किया था।
 
अदालत ने इस बात को ध्यान में रखते हुए बंद कमरे में कार्यवाही का आदेश दिया था कि अदालत कक्ष बार सदस्यों और आम जनता से भरा पड़ा था जिनका मामले से कोई लेना देना नहीं था। वे लोग वहां से जाने को तैयार नहीं हुए जिसके चलते आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका। (एजेंसी)

मीडिया को भी नहीं मिलेगी दिल्ली गैंगरेप की सुनवाई में रिपोर्टिंग की इजाजत

 

दिल्ली गैंगरेप मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में अब दस जनवरी को होगी। सोमवार 7 जनवरी को इस मामले में सभी आरोपियों को चार्जशीट भी उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही इस मामले में नाबालिग आरोपी की जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में भी सुनवाई टल गई जो अब 15 जनवरी को होगी। इन सबके बीच केस अब तक फास्ट ट्रैक कोर्ट को ट्रांसफर नहीं हुआ है।
 
रिपोर्ट के मुताबिक साकेत कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने आदेश में कहा कि इस मामले को लेकर पैदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए इसकी जांच और सुनवाई सहित सारी कार्यवाही अदालत के बंद कमरे में होगी। उल्लेखनीय है कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 327 के दूसरे भाग का तीसरे प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए अदालत कक्ष में मौजूद सभी व्यक्तियों को अदालत कक्ष खाली करने का निर्देश दिया जाता है।
 
न्यायाधीश ने कहा कि इस अदालत की अनुमति के बगैर इस मामले से जुड़ी किसी सामग्री को छापना वैध नहीं होगा। गौरतलब है लोक अभियोजक राजीव मोहन ने बंद कमरे में सुनवाई करने की याचिका दायर की थी। इससे दो दिन पहले दिल्ली पुलिस ने एक परामर्श जारी करके कहा था कि इस मामले की सुनवाई की रिपोर्टिंग नहीं की जा सकती, क्योंकि अदालत धारा 302 (हत्या), 376 दो (जी)(सामूहिक बलात्कार) और भारतीय दंड संहिता के अन्य प्रावधानों के तहत दाखिल आरोप पत्र पर पहले ही संज्ञान ले चुकी है।

 
उधर गैंगरेप के पांच आरोपियों राम सिंह, मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर की आज साकेत कोर्ट में पेशी हुई। कोर्ट में सुनवाई चली और फिर कोर्ट ने कहा कि दिल्ली गैंगरेप की सुनवाई बंद कमरे में होगी। सुनवाई के वक्त सिर्फ आरोपी और वकील ही कोर्ट रूम में मौजूद थे। वहीं, दिल्ली गैंगरेप मामले में जांच का काम तेजी से चल रहा है। दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए कुछ सबूतों को हैदराबाद के सीएफएसएल भेज दिया है।
 
दिल्ली पुलिस के दो अधिकारी सबूतों से भरे दो बक्से लेकर वहां पहुंचे हैं। पुलिस के अधिकारियों ने इन सबूतों को हैदराबाद के सीएफएसएल के अधिकारियों को आज सौंप दिया है। छठे आरोपी के स्कूल सर्टिफिकेट के मुताबिक नाबालिग बताया जा रहा है। जिसकी तफ्तीश जारी है। नाबालिग आरोपी के स्कूल के प्रिंसिपल को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया। नाबालिग आरोपी को गिरफ्तारी के बाद से ही बाल सुधार गृह में रखा गया है। उसके मामले में भी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में 15 जनवरी को सुनवाई होगी।
 
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 16 दिसंबर को चलती बस में हुई वारदात में इस नाबालिग आरोपी ने ही सबसे खौफनाक हरकत की थी। उसने दो बार बलात्कर कर लड़की की आंत पर वार किया था। उसे चलती बस से फेंकने की सलाह भी उसी लड़के ने दी थी। इससे पहले रविवार को पेशी के बाद चार आरोपियों की न्यायिक हिरासत 19 जनवरी तक बढ़ा दी गई। 
 
इस केस में दो आरोपियों ने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है जबकि दो आरोपियों ने कानूनी सहायता की मांग की है। इसी बीच आज आरोपियों की पेशी से पहले साकेत कोर्ट में वकीलों ने हंगामा शुरू कर दिया। कानूनी मदद मिलने के खिलाफ वकीलों ने हंगामा किया है। मालूम हो कि साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन ने पहले ही घोषणा कर दी थी की वो आरोपियों का केस नहीं लड़ेंगे। वकील कोर्ट से आरोपियों को वकील देने का विरोध कर रहे हैं। हंगामा इतना ज्यादा बढ़ किया कि महानगर दंडाधिकारी को कुर्सी छोड़कर अपने चेंबर में जाना पड़ा। बाद में हंगामा शांत होने पर सुनवाई दोबारा शुरू हुई।
 
रविवार को सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपियों पवन और विनय ने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई थी। कानून के जानकारों के मुताबिक उन्होंने फांसी जैसी कड़ी सजा से बचने के लिए यह कदम उठाया। वहीं दो आरोपियों राम सिंह और उसके भाई मुकेश ने कानूनी सहायता देने की मांग की थी।
 
इससे पूर्व कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस इस मामले में लिप्त नाबालिग आरोपी को छोड़कर अन्य सभी आरोपियों को लेकर साकेत कोर्ट पहुंची। इस मामले में हो रही सुनवाई पर देशी-विदेशी मीडिया की नजरें टिकी हुई हैं। सरकारी गवाह बनने की बात कहने वाले दोनों आरोपी वे ही हैं, जिन्होंने गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेशी के दौरान खुद को फांसी दिए जाने की मांग की थी।
 
कानून के जानकारों का कहना है कि दोनों आरोपियों को सरकारी गवाह बनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं। सामूहिक दुष्कर्म के चार आरोपियों को न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने पर रविवार को साकेत कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी ज्योति कलेर के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने चारों को 19 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। हालांकि इनकी सोमवार को संबंधित अदालत में पेशी होगी।
 
पेशी के दौरान इन आरोपियों को सरकार की ओर से वकील मुहैया कराने की पेशकश की गई, लेकिन विनय शर्मा और पवन गुप्ता ने इन्कार कर दिया। उन्होंने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जाहिर की। इसके लिए अदालत ने उनसे संबंधित अदालत में अर्जी देने को कहा। वहीं आरोपी राम सिंह और मुकेश ने कानूनी मदद के लिए अदालत से वकील की मांग की। इन्हें वकील मुहैया कराया जाएगा।
 
ग़ौरतलब है कि महानगर दंडाधिकारी नम्रता अग्रवाल की अदालत में तीन जनवरी को इन आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट पेश की थी। कोर्ट ने बीते शनिवार को चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए सात जनवरी तक के लिए पेशी वारंट जारी किया था, लेकिन आरोपियों की 14 दिनों की न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने पर रविवार को इन्हें अदालत में पेश किया गया। इस दौरान मीडिया रिपोर्टिंग पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने की बात अदालत ने नहीं कही। 
 
वरिष्ठ अधिवक्ता डीबी गोस्वामी के अनुसार किसी आरोपी सरकारी गवाह बनाने का अधिकार सिर्फ जांच एजेंसी का होता है। अदालत सिर्फ यह देखती है कि जांच एजेंसी ने किसी को मजबूर करके तो सरकारी गवाह नहीं बनाया है। वहीं, जांच एजेंसी तब सरकारी गवाह बनाती है जब उनका केस कमजोर होता है। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं है। 
 
गौरतलब है कि वसंत विहार में पिछले 16 दिसंबर को चलती बस में फिजियोथेरेपिस्ट युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। बुरी तरह से जख्मी युवती को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में 29 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

दिल्ली गैंगरेप: युवती का नाम बताया पिता ने, फोटो छिपाने की अपील

 

 
दिल्ली गैंगरेप मामले में इसके चश्मदीद अवींद्र पांडे के मीडिया के सामने आने के बाद अब इस घटना की भेंट चढ़ी युवती के पिता भी दुनिया के सामने आ गए हैं। उन्होंने पहली बार एक अंग्रेजी अखबार से की गई बातचीत में अपनी बेटी और उसके दर्द की सच्चाई को बयां किया है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने अपनी आत्मरक्षा में प्राण गंवाए हैं। वह चाहते हैं कि उनकी बेटी का नाम दुनिया जाने और उन सभी को उससे हिम्मत मिले जो आए दिन इस तरह की घिनौनी हरकतों का सामना करती हैं।
 
एक अंग्रेजी अखबार से की गई बातचीत में उन्होंने युवती के पिता ने बताया कि उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी ने बहादुरी से उन दरिंदों का सामना किया। उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी बताया है और कहा है कि दुनिया को उसका नाम जानना चाहिए, क्योंकि उनकी बेटी ने कोई गलत काम नहीं किया है। वह अपनी जान की हिफाजत करते हुए मरी है और दुनिया की दूसरी औरतों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन सकती है।
 
इस बातचीत में उन्होंने अपनी बेटी के नाम को उजागर करने की अनुमति देने के साथ उसका फोटो कहीं भी न दिखाए जाने की अपील भी मीडिया से की। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में मौजूदा कानूनों को नाकाफी बताते हुए उनमें बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन अपराधों को रोकने वाले कानून को उनकी बेटी का नाम दिए जाने से उन्हें कोई एतराज नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह उसके लिए एक सम्मान की बात होगी।
 
अपनी इस बातचीत में उन्होंने उस वक्त का भी जिक्र किया जब वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी। उन्होंने कहा कि बेइंतहा पीड़ा सहने के बाद भी वह जब उसके पास होते थे, तब वह खुश होती थी। उन्होंने कहा कि उस खौफनाक रात को वह और उनकी पत्नी बेटी के ग्यारह बजे तक घर न पहुंचने से परेशान थे। उन्होंने उसके और अवींद्र के मोबाइल पर भी फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उन्हें करीब सवा ग्यारह बजे अस्पताल से फोन आया जिसमें बताया गया कि उनकी बेटी के साथ कोई हादसा हुआ है। वह तुरंत वहां गए और बाद में उन्होंने अपनी पत्नी और दोनों बेटों को भी वहां बुला लिया।
 
उन्होंने बताया कि जिस दौरान उनकी बेटी अपने बयान दे रही थी तो उनकी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह उसको सुन सकें, लिहाजा वह वहां नहीं रुक पाते थे। बाद में उनकी पत्नी उन्हें इसकी जानकारी देती थी। लेकिन वह इतने खौफनाक थे कि उन्हें यहां पर बयान नहीं किया जा सकता है। इस भारत की बेटी के पिता ने उन खबरों का भी खंडन किया जिसमें युवती के अपने पुरुष मित्र से शादी करने की बात कही जा रही थी। उन्होंने साफ कहा कि यह संभव ही नहीं था क्योंकि वह अलग अलग जाति के थे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी डाक्टर बन कर अपने परिवार को बेहतर जिंदगी देने की ख्वाहिशमंद थी।
 
गौरतलब है कि 16 दिसंबर की रात को दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप के बाद छह आरोपियों युवती और उसके मित्र को चलती बस से बाहर फेंक दिया था। इसके बाद दोनों को ही दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन युवती की हालत बेहद खराब होने के बाद उसको सिंगापुर के अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए भेजा गया था, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना के सामने आने के बाद से ही इसको लेकर प्रदर्शन का दौर जारी है। (जागरण)

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हर दिन एक न्यूज़ चैनल होता है सूचना और प्रसारण मंत्री की निगरानी में

 

खबर है कि सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी इन दिनों भारत के सभी न्यूज़ चैनलों की निगरानी में जुटे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर छपी खबर की मानें तो मंत्री जी हर रोज एक चैनल को अपनी निगरानी में रखते हैं और उसे ही ऑफिस या घर हर जगह देखते रहते हैं।
 
मंत्री महोदय चैनल में प्रसारित होने वाले कंटेंट और चैनल के नज़रिये पर पूरा ध्यान देते हैं। ये अलग बात है कि वे इस निगरानी पर क्या रिपोर्ट बना रहे हैं इस बारे में कुछ भी नहीं बोल रहे। हालांकि वे इतना जरूर मानते हैं कि ज्यादातर न्यूज़ चैनलों पर आधे से ज्यादा समय में न्यूज़ नहीं प्रसारित होता है।

हमार-फोकस के कर्मियों को नहीं मिला बकाया पीएफ, मिल कर करेंगे कार्रवाई

 

 
हमार टीवी और फोकस टीवी से नाता तोड़ चुके मीडियाकर्मियों ने चैनलों के मालिक मतंग सिंह से अपना बकाया पीएफ वसूलने के लिए एक साझा अभियान चलाने का फैसला किया है। ग़ौरतलब है कि दोनों चैनलों के कर्मियों का पीएफ करीब साढ़े चार साल से उनकी तनख्वाह में से कट रहा था जबकि सरकार के पास कुछ ही महीनों का आधा-अधूरा पीएफ ही जमा करवाया गया है। इस बात का पता अधिकतर कर्मियों को तब चल पाया जब वे नौकरी छोड़ने के बाद अपने पीएफ का पता करने उसके दफ्तर गये। 
 
हैरानी की बात ये है कि पीएफ की रकम को जमा न करना एक गंभीर अपराध है, लेकिन मतंग सिंह पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई। हालांकि करीब दो साल पहले नौकरी छोड़ने वाले मीडियाकर्मियों ने पीएफ कार्यालय के उन अधिकारियों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज़ करवाई थी जिन्होंने बकाया रकम वसूलने में गंभीरता नहीं दिखाई थी, लेकिन अभी तक उस मामले में कोई परिणाम नहीं आया है।
 
अभी कुछ महीनों पहले चैनल छोड़ने वाले मीडियाकर्मियों ने पुराने कर्मियों के साथ मिलकर नये सिरे से कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। ये दोनों चैनल पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के नाम पर चल रहे हैं जिसमें पूर्व सांसद मतंग सिंह के स्वामित्व वाली कुछ कंपनियां हैं। इस ग्रुप में काम कर चुके और पीएफ न पाने वाले सभी कर्मियों से अपील की गयी है कि वे cpositv@gmail.com पर अपनी शिकायत दर्ज़ करवाएं।
 
(हमार-फोकस के कुछ पूर्व मीडियाकर्मियों की अपील पर आधारित)

‘इंडिया’ और ‘भारत’ के बीच लड़ाई और भागवत की ‘छीछालेदर’

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि रेप की घटनाएं इंडिया में ज्यादा होती है और भारत में कम। खबर है कि इस बयान के मीडिया में आने के बाद इंडिया से महिलाओं का भारत की ओर बड़ी संख्या में पलायन शुरू हो गया है। मौके की नजाकत को देखते हुए भारत सरकार ने भी इंडिया से आने वाली महिलाओं के लिए वीजा की अनिवार्यता लागू कर दी है और इंडिया के लड़कों के भारत आने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया है।

मोहन भागवत के इस विवादास्पद बयान पर इंडिया की सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया है और भारत सरकार को ये नसीहत दी है कि वो इंडिया के आंतरिक मामलों में दखल ना दे…. इंडिया की सरकार ने कहा कि अगर इसी तरह के उलूल-जुलूल बयान भारत के जिम्मेदार लोग देते रहे तो इंडिया और भारत के बीच के पारस्परिक सम्बन्ध खराब हो सकते हैं।

इन सब बातों के बीच हिन्दुस्तान में रहने वाली महिलाओं ने राहत की साँस ली है…. क्योंकि हिन्दुस्तान में रेप की घटनाएं बिलकुल भी नहीं होतीं….. मीडिया ने जब हिन्दुस्तान के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता से जब ये पूछा कि हिन्दुस्तान में रेप की घटनाएं ना होने का क्या कारण है ?? आपने अपने हिन्दुस्तान को इस बीमारी से कैसे बचा के रखा है?? तो नेता जी ने बताया कि हमारे राष्ट्रवादी स्कूलों में बचपन से ही ये सिखाया जाता है कि सभी हिन्दुस्तानी भाई- बहन है …. हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व है। इस बात से हिन्दुस्तान के लड़कों में भारी निराशा व्याप्त हो गई है |
 
दूसरी ओर भारत और इंडिया के बीच मौजूदा तनातनी वाले हालत के मद्देनजर भारत सरकार ने एक मशहूर टीवी चैनल इंडिया टीवी प्रतिबन्ध लगा दिया है…. (इंडिया न्यूज़ और एनडीटीवी इंडिया की भी बारी है) भारत सरकार का कहना है कि वो नहीं चाहते ही इंडिया की बिगड़ी हुई सभ्यता और संस्कृति को देख कर भारत के लोग भी बिगड़ें।
 
इस प्रतिबन्ध के बाद इंडिया टीवी ने "भारत टीवी" नाम से एक नया चैनल लॉन्च करने का फैसला किया है | जिसका प्रसारण सिर्फ भारत में किया जायगा | इंडिया न्यूज और एनडीटीवी इंडिया वाले भी ऐसी ही प्लानिंग में जुट गये हैं।
 
भारत और इंडिया के बीच बिगड़े हालात का फायदा उठाते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान ने भी पाकिस्तान के खिलाफ अपनी हार का ठीकरा इंडिया के ऊपर फोड दिया। हुआ यूँ कि एक पत्रकार ने धोनी से पूछा कि पाकिस्तान ने इंडिया को फिर हरा दिया … इस बारे में आपका क्या कहना है?? तो धोनी ने जवाब दिया :- ये सवाल आप जाकर इंडिया के कप्तान से पूछें .. जिसे बेशर्मो कि तरह हारने की आदत हो गई है… भारत ने तो वर्ल्ड कप जीता है।
 
सोनी चैनल ने भी घोषणा कि है कि वो इंडियन आइडॅल कि तर्ज़ पर जल्द ही "भारत आइडॅल" की शुरुआत करेगा। 
 
उधर अरविन्द केजरीवाल अभी तक ये तय नहीं कर पाये हैं कि वो भारत का समर्थन करें या इंडिया का। इसी बीच बाबा रामदेव ने एक बार फिर से काला धन भारत वापस लाने की मांग की है जिसका इंडिया ने ये कह कर विरोध किया है कि सारा काला धन इंडिया का है, क्योंकि स्विस बैंक ने जो रिपोर्ट दी है उसने कहीं ये नहीं लिखा है काला धन भारत का है .. उसमे लिखा है कि काला धन इंडिया का है … इसलिए धन तो इंडिया में ही आयगा .. चाहे वो काला हो या सफ़ेद |
 
इसी बीच रामजेठमलानी ने ये कह कर फिर विवाद पैदा कर दिया कि सीता का हरण भारत में हुआ…. द्रौपदी का चिर हरण भारत में हुआ और बदनाम इंडिया को किया जा रहा है…. ये दोगली नीति नहीं चलेगी…. और वो भारत आरएसएस प्रमुख के खिलाफ कोर्ट में केस करेंगे इंडिया को बदनाम करने के आरोप में।
 
इधर कुछ बुद्धिजीवी टाइप के लोगों ने महेश भट्ट और जावेद अख्तर के नेतृत्व में इंडिया के लिए मोहन भगवत के इस अपमानजनक बयान के बाद गेटवे ऑफ इंडिया से इंडिया गेट तक कैंडल मार्च निकालने का फैसला किया है |
 
ताजा समाचार मिलने तक भारत और इंडिया के बीच तनातनी जारी थी।
 
(फेसबुक के हास्य-व्यंग्य आधारित ग्रुप 'छीछालेदर' पर प्रकाशित पोस्ट पर आधारित)

अब दिखेगा सरकारी क्षेत्र की कंपनियों का हाल पीएसयू टीवी पर

 

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शीर्ष निकाय स्कोप ने ग्रामीण भारत सहित सभी क्षेत्रों में पहुंच बनाने के लिए पीएसयू टीवी चैनल शुरू करने की योजना बनाई है।
 
इसके अलावा स्कोप ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों के लिए एक स्वतंत्र पीएसई प्रबंधन संस्थान खोलने के लिए दुनिया के बेहतरीन अकादमिक संस्थानों को आमंत्रित किया है।
 
हाल ही में स्कोप की 39वीं वार्षिक आम सभा में  महानिदेशक यूडी चौबे ने कहा कि उन्होंने भविष्य में दो नयी पहल पीएसयू टीवी शुरू करने और एक प्रबंधन संस्थान खोलने की तैयारी की है।
 
समझा जाता है कि स्कोप के पीएसयू टीवी के जरिये लोगों को सरकारी कंपनियों के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिल पाएगा। हालांकि अभी चैनल की विस्तृत योजना पर विचार नहीं हुआ है, लेकिन इस बारे में जल्दी ही रूपरेखा तैयार की जाएगी।

मतंग सिंह के चैनलों में पैसे आए, हुई रीलांचिग, लेकिन पुराने कर्मियों का पीएफ अब भी बकाया

 

खबर है कि मतंग सिंह के फोकस टीवी और हमार टीवी की रीलांचिंग कर दी गयी है। कुछ ही दिनों पहले खबर आयी थी कि मतंग सिंह ने जिंदल ग्रुप के मुखिया नवीन जिंदल से अपने चैनलों में पैसा लगवाया है। हालांकि अभी किसका पैसा और कितना पैसा लगा है इस मामले में कोई भी पक्ष ठीक-ठीक जानकारी नहीं दे रहा है, लेकिन कुछ ही दिनों पहले चैनल के बचे-खुचे कर्मचारियों के कई महीनों से चले आ रहे बकाये वेतन का पूरा भुगतान कर दिया गया है। इतना ही नहीं, खबर ये भी है कि चैनलों में विदेशों से मशीनों की एक शिपमेंट भी आ गयी है जिसके इंस्टालेशन का काम भी जोरों से चल रहा है। 
 
हालांकि कई महीनों से ब्लैकआउट पर चल रहे चैनलों का प्रसारण सैटेलाइट से शुरु हुआ है या नहीं इस पर भी अभी साफ तस्वीर नहीं मिल पायी है। संस्थान से जुड़े सूत्रों का दावा है कि चैनलों का सैटेलाइट प्रसारण शुरु हो गया है जबकि डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के सूत्र बता रहे हैं कि  अभी चैनल कहीं दिख नहीं रहा है और केवल इनहाउस टेलीकास्ट ही चल रहा है।
 
उधर कुछ ही दिनों पहले संस्थान छोड़ कर जा चुके और  करीब दो ढाई साल पहले छोड़ चुके सैकड़ों कर्मचारियों के पीएफ को जमा नहीं करने का मामला एक बार फिर गर्मा रहा है। चैनलों के पूर्व कर्मचारियों ने साझा तौर पर कानूनी कार्रवाई कर अपने पीएफ वसूलने की तैयारी कर ली है। कई बार चेयरमैन और दूसरे अधिकारियों से इस बारे में बात करने के बाद भी मामला नहीं सुलझने पर  अब मीडियाकर्मियों ने कुछ कानूनी विशेषज्ञों का सहारा लेकर एक साझा मंच तैयार किया है जो जल्दी ही कार्रवाई शुरु करेगा। अब देखना है चैनल में लगाए गये पैसे से ये हिसाब-किताब भी चुकता होता है या नहीं।
 

बिपाशा बसु को घूर कर देखने से मुंबई हो गयी ‘असुरक्षित’

मीडिया की महानता देखिये.. अगर दिनरात बॉडीगार्ड्स से घिरी रहने वाली बिपाशा बसु को कोई जिम में घूर कर देख लेता है तो मुंबई 'असुरक्षित' घोषित हो जाती है। फिल्मी सितारों और आइटम गर्ल्स के पीआर में जुटी मीडिया को ये भी समझ नहीं आया कि ये खबर छाप कर वो अपनी खिल्ली ही उड़ा रही है।

बिपाशा ने मीडिया को बताया कि वो जिस जिम में अपनी सेहत बनाने के लिये वर्जिश करने जाती हैं वहां कोई व्यक्ति उन्हे 'गलत तरीके से' घूर रहा था। अब उन्हें डर लग रहा है। अब मीडिया की बहादुरी ये हो गयी कि वो उन लाचार और कमजोर तबके की असुरक्षित लड़कियों की तुलना उस बिपाशा बसु से कर रही है जो अपनी सुरक्षा के इंतजामों पर हर साल लाखों रुपये खर्च करती हैं।

अब सवाल ये उठता है कि इस खबर का आइडिया किसके दिमाग में आया..? देश भर में दिल्ली के गैंग-रेप कांड पर हो रही चर्चा के बीच ये बयान उन्हें ऐसी चाटुकार मीडिया के जरिये सुर्खियां बटोरने का मौका जरूर दे गया। क्या बिपाशा बसु ये बताने की कोशिश कर रही हैं कि वो अभी भी इतनी हॉट हैं कि कोई उनका पीछा कर सकता है..??

अभी पूनम पांडे और वीना मलिक बाकी हैं..

(पत्रकार धीरज भारद्वाज की फेसबुक वॉल से साभार)

जयपुर के पत्रकारों ने किया प्रेस क्लब अध्यक्ष की सदबुद्धि के लिये यज्ञ

जयपुर में पिंकसिटी प्रेस क्लब अध्यक्ष किशोर शर्मा द्वारा पत्रकार आवास योजना और खुलने वाली प्रस्तावित पत्रकार यूनिवर्सिटी को एक ही स्थान पर रखने के लिए मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के विरोध में शनिवार को पत्रकारों ने प्रेस क्लब के बाहर स्थित कल्पवृक्ष के नीचे सदबुद्धि यज्ञ किया।

प्रेस क्लब अध्यक्ष की इस कारगुजारी के कारण पत्रकार आवास योजना जिसका काम लगभग अन्तिम चरण में है, उसके क्रियान्वयन पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। क्योंकि अब सरकार यह कह सकती है कि दोनों को साथ-साथ करने के लिए समय चाहिए इसलिए आवास योजना भी अब पत्रकार यूनिवर्सिटी के साथ ही होगी। तब तक प्रदेश में चुनावी आहट शुरू हो जाएगी। 

हकीकत यह है कि मार्च में प्रेस क्लब के चुनाव आने वाले हैं और यही एक मात्र मुद्दा ऐसा है जिसके आधार पर पिछले पांच सालों से प्रेस क्लब की राजनीति की जा रही है। प्रेस क्लब अध्यक्ष किशोर शर्मा को लगता है कि यदि यह मुद्दा नहीं रहा तो वे आने वाला चुनाव कैसे लड़ेंगे क्योंकि प्रेस क्लब के लिए वे आज तक कुछ नहीं कर पाए। प्रेस क्लब आज तक घाटे में ओवरड्राफ्ट पर चल रहा है और क्लब में अनुशासन नाम की कोई बात नहीं बची है। अध्यक्ष व महासचिव अपने आंतरिक कलह के कारण क्लब के किसी साधारण सदस्य का कोई भला नहीं कर पा रहे हैं। 

सद्बुद्धि यज्ञ में भाग लेने के लिए प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सत्य पारीक और वीरेन्द्रसिंह राठौड़ भी पहुंचे थे। साथ ही कार्यकारिणी के सदस्य व आवेदक पत्रकार भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी को इस बात को लेकर आक्रोश था कि आखिर प्रेस क्लब अध्यक्ष किशोर शर्मा ने एनवक्त पर ऐसा पत्र लिखकर ये हरकत क्यों की?

चंदा वसूल कर घर की छत बचाते हैं अरिंदम चौधरी के संस्थान में मीडियाकर्मी

 

मैनेजमेंट गुरु श्री श्री 1001 अरिंदम जी महाराज जी की कृपा से उनकी मीडिया कंपनी प्लानमैन में सबकुछ बहुत कुशल मंगल से चल रहा है। माफ़ कीजिएगा ये दरअसल हम नहीं बल्कि ऐसा खुद चाचा चौधरी और उनके चमचे सोचते है। उनके अनुसार जो टुकड़े वो उनके कर्मचारियों के आगे 2-3 महीनों में फेंकते है उससे उनका घर धन-धान्य हो हीं जाता है। पर सूरते हाल ये है कि प्लानमैन कर्मचारी यहां रहकर काम कहीं और का करके पेट पाल रहे है या फिर दफ्तर में हीं चंदा कराकर अपनी जरूरतों को पूरा करने पर विवश है। 
 
बात बीते दिनों की हीं है जब यहां के एक कर्मचारी को उसके मकान मालिक ने घर से बाहर फेंकने की धमकी दे दी, क्यों कि उस बेचारे ने 3 महीनें से घर का किराया नहीं दिया था। इस बात का जिक्र जब उसने संपादक महोदय से किया तो वहां से भी उसे निराशा हीं हांथ लगी। मोटी रकम उठाने वाले  संपादक महोदय को उससे न तो कोई सहानुभूति थी और ना हीं चहरे पर कोई शिकन। 
 
अंतत: वक्त के मारे और टेकनिकल टीम के प्यारे उन बंधू को प्लानमैन के हीं कुछ कर्मचारियों ने पैसे चंदा किये और फिर लगभग 10000 हजार की रकम उसे दे दी।  इस तरह से भाई साहब की छत तो बच गयी पर इन हालातों को देखकर यहीं लगता है कि आनेवाले समय में प्लानमैन कर्मचारियों के दिन और भी दूभर होने वाले है। 
 
(एक पत्रकार द्वारा भेजे गये मेल पर आधारित)

चित्रा त्रिपाठी ने इंडिया न्‍यूज एवं मनिंदर ने जनसंदेश टाइम्‍स ज्‍वाइन किया

चर्चित ऐंकर चित्रा त्रिपाठी ने इंडिया न्यूज ज्वाइन कर लिया है। यहां पर उन्हे ऐंकर और सीनियर प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी दी गई है। इसके पहले वो सहारा समय नेशनल में प्राइम टाइम न्यूज़ ऐंकर के तौर पर कार्यरत थीं और रात्रि 9 बजे का प्राइम नाइन पैनल डिस्कशन शो की ऐंकरिंग करती थीं। सहारा के पहले वो न्यूज-24 और ईटीवी में भी काम कर चुकी हैं। उन्हे मीडिया फेडरेशन ऑफ इंडिया ने बेस्ट न्यूज कास्टर का पुरस्कार भी दिया था। चित्रा गोरखपुर विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में गोल्ड-मेडलिस्ट हैं और उनका पिछले साढ़े 8 वर्षों का टीवी ऐंकरिग तथा रिपोर्टिंग का करियर किसी भी विवाद से परे रहा है।

चित्रा की क्षमताओं को देखते हुए उनका तबादला नोएडा से सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन सुब्रत राय सहारा के मुंबई स्थित दफ्तर में कर दिया गया था। वहां उन्हे सुब्रत राय सहारा की कोर कैबिनेट में शामिल किया गया था। वो सहारा श्री के साथ कई खास प्रोजेक्ट्स के सिलसिले में विदेश-यात्राओं पर भी गई थीं और 2012 लंदन ओलंपिक को भी लंदन जाकर कवर किया था।

चित्रा के करीबी सूत्रों का कहना है कि कॉरपोरेट जगत में शिफ्ट होने की वजह से वो मीडिया से दूर हो गई थीं, जबकि उन्हें टीवी पत्रकारिता से जुड़े रहने की इच्छा थी। इसके अलावा उनका तीन वर्ष का बेटा भी नोएडा में ही रहता है, जिसको उनकी जरूरत थी। इसीलिए उन्हें सहारा से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि पहले चर्चाएं थीं कि चित्रा फिर से सहारा नेशनल की स्क्रीन पर नजर आ सकती हैं मगर उन्होंने इंडिया न्यूज पर दिखने का फैसला किया। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों की मतगणना के दिन चित्रा और राशिद हाशमी ने ही मोर्चा संभाले रखा था।

उधर पत्रकार मनिंदर सिंह के बारे में खबर है कि उन्‍होंने जनसंदेश टाइम्‍स अखबार ज्‍वाइन कर लिया है. उन्‍हें सब एडिटर बनाया गया है. मनिंदर इसके पहले भी कई अखबारों और न्‍यूज चैनलों में काम कर चुके हैं. इनकी गिनती तेजतर्रार पत्रकारों में की जाती है.

क्या आजतक वाले अपनी महिला स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं?

 

अंजना कश्यप के साथ छेड़छाड़ की घटना की जितनी निंदा की जाये, कम है, लेकिन आजतक और हेडलाइंस टुडे का ये शोर ढकोसला ही लग रहा है। टीवीटुडे प्रबंधन अपने स्टाफ को भगवान भरोसे छोड़ने पर आमादा है। इन दिनों कॉस्ट कटिंग के नाम पर टीवीटुडे ने मॉर्निंग पिकअप बंद करवा दिया है। मॉर्निंग शिफ्ट सात से बढ़ा कर साढ़े सात बजे से कर दी गयी है, लेकिन सुबह आना अपनी व्यवस्था से ही है।
 
अगर साढ़े सात बजे नोएडा फिल्म सिटी पहुंचना है तो जनकपुरी या पूर्वी दिल्ली के किसी इलाके से आने के लिये छह बजे या उससे भी पहले चलना पड़ता है। सर्दी में पांच-छह बजे कितना अंधेरा रहता है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। ऐंकरों को तो ऑटो, बस या मेट्रो में पहचान छुपाने के लिये मुंह पर स्कॉर्फ या रुमाल बांधना पड़ता है। ऐसे में आजतक और हेडलाइंस टुडे पर आम परिवार की बच्चियों को बलात्कारियों से सुरक्षा दिलाने की बहस कितनी जायज़ है ये कोई भी समझ सकता है।
 
बताया जाता है कि ये सारा मसला कुछ महीनों पहले तब से शुरु हुआ है जब से नए हेड ऑफ ऑपरेशंस राहुल कुलश्रेष्ठ ने ज्वाइन किया है। उन्होंने अपनी मोटी तनख्वाह को जस्टिफाई करने के लिये स्टाफ पर होने वाले खर्चे को ही कम करने का फैसला किया है। लेकिन उन्हें क्या पता कि छोटी तनख्वाह वालों को अपनी इज्जत कैसे बचानी पड़ती है?
 
(टीवीटुडे की इंप्लॉयी द्वारा भेजी गयी खबर पर आधारित)

क्या अंजना कश्यप के साथ छेड़छाड़ से सबक लेगा इंडिया टुडे?

 

 
आजतक की महिला संवाददाता अजंना ओम कश्यप के साथ दिल्ली की एक सड़क पर छेड़छाड़ हुई । क्या India today group और आजतक ने इससे कोई सबक लिया है ? 
कुछ ही दिनों पहले ये ही मीडिया ग्रुप वाले अपनी मैग्जीन पर अश्लील पोस्टर लगाकर नारी देह की भद्दी नुमाइश कर रहे थे । अब नशे मे टुन्न किसी बिगड़ैल मनचले ने 'पोस्टर वाली' समझ कर पूछ लिया, "चलती क्या" तो इतनी बिलबिलाहट क्यूँ ? अपने गिरेबान में भी झाँके मीडिया, कि इस सक्रंमणकालीन भारतीय समाज के आगे वो क्या परोस रहा है?
 
 
सेणीदान सिंह चारण उदरासर: योगेश जी जो अश्लीलता परोसते हैं उनके साथ ये होने पर दुनिया क्या सोचेगी? धार्मिक समाचार प्रसारित करने पर भी ये कभी ढंग के कपड़े पहनकर स्टूडियो में नही बैठतीं तो जब सड़क पर जाएगी तो ये सब होगा ही न.. जब ये तमाम शहरों में अश्लीलता पर सर्वे कर लेती है (हाल ही इंडिया टुडे का आया संस्करण जिसके कवर पर ही नग्न तस्वीर थी) तब भी उतेजना तो कम नहीं होती होगी ऐसे ये अंजना कश्यप किस मुंह से कह रही है उसके साथ छेड़छाड़ हुई?
 
Yogesh Garg: किसी महिला के कपडो से उसका चरित्र तय करना मूर्खता है , यहां बात इलेक्ट्रानिक माध्यम द्वारा फैलती अश्लीलता की है । व्यक्तीगत रुप से महिला संवाद दाता को ही दोषी ठहराना गलत है
 
राकेश कुमार सिंह: Bebak likha hai Garg ji.
 
Rashmi Pranay Wagle: Kisi bhi Mahilaa ke saath is prakaar ki Ghatnaa honaa Galat hai … chahe usakaa Kaam / Vyawasaay kuchh bhi ho .
 
Yogesh Garg: किसी महिला के कपडो से उसका चरित्र तय करना मूर्खता है । लेकिन वो महिला उस मीडिया का हिस्सा हो जहाँ नारी के अर्धनग्न या लगभग नग्न ही पोस्टर द्वारा प्रचार किया जाता हो तो उस महिला को छीँटाकशी और फब्तियोँ का सामना भी करना पड सकता है इस पोस्ट का इतना ही मतलब है और ये हमारे समाज का एक व्यवहारिक कटु सत्य है , नैतिक रुप से तो महिला पर फब्ती और छीँटाकशी अपराध है ही इसके लिये दोषी को सजा मिलनी चाहिये ।
 
Piyush Diwan: well said…
 
(योगेश गर्ग 'फेसबुक चौपाल' के मॉडरेटर हैं ये आलेख उनकी फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

सहारा मीडिया की डूबती-उतराती नैया के खेवनहार होंगे राव वीरेंद्र सिंह?

 

 
सहारा मीडिया से खबर है कि राव वीरेंद्र सिंह को पूरे न्यूज मीडिया का हेड बनाया गया है। सिंह का नाम सहारा के लिये कोई नया नहीं है। सन् 2010 में यूपी-उत्तराखंड से एनसीआर के हेड बनाए गये राव वीरेंद्र सिंह को साल के आखिर तक उपेंद्र राय ने बंगलुरु भेजने का फैसला कर लिया था, जिसपर उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। उपेंद्र राय का कद घटने लगा तो उनकी इसी साल सितंबर में वापसी भी हो गयी। 
 
वापसी पर पहले उन्हें यूपी-उत्तराखंड चैनल का प्रमुख बनाया गया था जहां वे 2010 में एनसीआर का हेड बनने से भी पहले थे। अब ताजा उलटफेर में वो दिल्ली की सबसे पावरफुल कुर्सी पर बिठा दिये गये हैं। बताया जाता है कि उन्हें किसी को भी निकाल बाहर करने या रखने का पूरा अधिकार सौंपा गया है। इस फैसले पर दस्तखत खुद सुब्रत राय सहारा ने अपनी नयी दिल्ली के औरंगजेब रोड स्थित कोठी पर देर रात किये।
 
अब माना जा रहा है कि सहारा में एक बार फिर उलटफेर की सूनामी आएगी। हालांकि कुछ लोगों में ये भी चर्चा है कि खरबों की देनदारी चुकता करने के बाद सहारा अपने करीब 200 करोड़ के मीडिया बजट में कटौती करने की योजना बना रहा है, जिसमें राव वीरेंद्र सिंह की भूमिका भी अहम रहेगी। 
 

छत्तीसगढ़ पुलिस का अनोखा कारनामा: बलात्कारी पत्रकार का नाम छिपाया, पीड़िता को किया सरेआम बदनाम

 

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में पुलिस और भ्रष्ट पत्रकारों की मिलीभगत का एक नया नमूना सामने आया है। पुलिस बलात्कार के आरोपी पत्रकार का नाम छिपा कर पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने में जुट गयी है।
 
पिछले 13 दिसंबर को चैनल इंडिया नाम के अखबार के संपादक रजत बाजपेयी पर उसकी एक महिला संवाददाता ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज़ करवा दिया था। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने भारी हील-हुज्जत के बाद मुकदमा तो दर्ज़ कर लिया, लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा कि आरोपी संपादक रजत बाजपेयी की इज्जत उछलने न पाए।
 
 
बताया जाता है कि रजत के पिता भी एक राष्ट्रीय चैनल के पत्रकार हैं और पिता-पुत्र की पुलिस में अच्छी जान पहचान है। इसी का असर रहा कि पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज़ करने में न सिर्फ़ आनाकानी की बल्कि जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की उसमें भी आरोपी का नाम गायब कर दिया। दिलचस्प बात ये है कि पुलिस नियमावली में दिये गये दिशा-निर्देशों को ताक पर रख कर प्रेस विज्ञप्ति में पीड़िता का असली नाम और पता डाल दिया।
 
खबर है कि पीड़िता पर पुलिस अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर ये दबाव बना रहे हैं कि वो ये मामला वापस ले ले। इतना ही नहीं, स्थानीय मीडिया को भी खबर न छापने की सख्त हिदायत दी गयी है।
 
इस बारे में भड़ास4मीडिया पर पहले प्रकाशित खबर:

सुबह गैंगरेप करने वालों को भूल कहीं और जुट जाएगा मीडिया

 

संसद से लेकर सड़क तक लोग तुमसे हमदर्दी जता रहे हैं… अस्पताल आकर खुद यूपीए चेयरपर्सन ने तुम्हारा हालचाल जाना…टीवी, रेडियो, अखबार सब तुम्हारी ही बातें कर रहे हैं… फेसबुक तो तुम्हारे हमदर्दों के आंसुओं से बुरी तरह से भीग गया है… लेकिन ये बताते हुए मुझे दुख हो रहा है कि तुम्हारे ये सारे हमदर्द कल सुबह छह बजे से अचानक गायब हो जाएंगे…. फांसी, नपुंसकता, हैवानियत, दरिंदगी और पुलिस रिफॉर्म जैसे शब्दों के स्थान पर गोधरा, राष्ट्रवाद, 2014, एसआईटी, दिल्ली की गद्दी और छप्पन इंच के सीने का अनहद नाद होगा…पढ़ी-लिखी लड़की हो समझती ही होगी…. प्राथमिकता का जो मामला है.
 
(रजनीकांत सिंह सहारा समय के चैनल हेड हैं। ये पोस्ट उन्होंने फेसबुक पर लगायी है।)
 

प्रभात शुंगलू बने श्री न्यूज के कंसल्टिंग एडीटर, मिली खुशियों की हैट्रिक

 

हाल ही में पत्रकारों के जीवन पर किताब लिख कर चर्चा में आए प्रभात शुंगलू के लिए तिहरी खुशी का मौका है। उनकी किताब 'न्यूजरुम लाइव' के खासी हिट रहने की खबर है ही, एक अर्से से चल रही उनके रोमांस की चर्चा भी शादी में परिवर्तित हो गयी है। वे और एबीपी न्यूज की पत्रकार संगीता तिवारी वैवाहिक बंधन में बंध गये हैं। ताज़ा खबर ये है कि उन्हें न्यूज चैनल श्री-7 में बतौर सलाहकार संपादक अनुबंधित कर लिया गया है।
 
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की शिक्षा हासिल किये प्रभात का द स्टेट्समैन, टाइम्स ऑफ इंडिया, टीवीआई, आजतक, आईबीएन-7, राज्यसभा टीवी और न्यूज एक्सप्रेस का लंबा कॅरीयर रहा है।

गुजरात में मोदी की हैट्रिक करवा दी टीवी चैनलों के एक्जिट पोल्स ने

 

कई दिनों से सुर्खियों में शुमार गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए एक्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। सभी पोल यही बोल रहे हैं कि गुजरात में नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने जा रही है। सभी एक सुर में कह रहे हैं कि 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा की सीटें बढ़ेंगी। पोल यह भी कह रहे हैं कि 68 सीटों वाली हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाएगी।

 
एक्जिट पोल के नतीजों में इस तरह का मतैक्य बहुत दुर्लभ बात है। जिन टेलीविजन चैनलों ने पोल कराए हैं (कुछ का कहना है कि उन्होंने सर्वेक्षण ही कराया है), उनके बीच सीटों की संख्या पर मतभेद है। टाइम्स नाउ-सी वोटर सर्वेक्षण के अनुसार गुजरात में भाजपा को 119 से 129 के बीच सीटें हासिल होंगी और कांग्रेस को 49 से 59 सीटें मिलेंगी। हेडलाइंस टुडे-ओआरजी सर्वेक्षण (एक्जिट पोल नहीं) में भाजपा को 118 से 128 के बीच और कांग्रेस को 50 से 56 के बीच सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
 
इंडिया टीवी का अनुमान है कि भाजपा को 124 और कांग्रेस को 54 सीटें हासिल होंगी। न्यूज 24-चाणक्या के एक्जिट पोल में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दी गई हैं। उसमें 129 से 140 सीटों पर भाजपा की फतह का अनुमान जताया गया है और कांग्रेस के खाते में 40 सीटें (11 कम या ज्यादा हो सकती हैं) दिखाई जा रही हैं। एसी-नीलसन और एबीपी न्यूज के एक्जिट पोल में भाजपा को 116 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि कांग्रेस को 60 सीटें मिलने का अनुमान है। 
 
ज्यादातर चैनल इस बात पर भी सहमत हैं कि भाजपा के बागी नेता केशूभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) की भी इन चुनावों में बोहनी हो जाएगी। हालांकि ज्यादातर चैनल उसका आंकड़ा 2 से 6 के बीच बता रहे हैं। मतदान के बाद सियासी हवा भांपने का एक और तरीका सटोरियों की चाल है। सटोरिये गुजरात में भाजपा को 90 से 100 सीट मिलने पर 100 रुपये पर 40 रुपये का भाव दे रहे हैं। पार्टी को 120 से ज्यादा सीटें मिलने की सूरत में 100 रुपये पर 350 रुपये का भाव चल रहा है। कांग्रेस को 50 सीट मिलने की सूरत में 100 रुपये पर 30 रुपये का भाव दिया जा रहा है।

 

गुजरात: सीटों का अनुमान

पार्टी

सीट

2007

सीट 2012

(न्यूज 24-चाणक्या)

सीट 2012

इंडिया न्यूज – सी वोटर

सीट 2012

एबीपी – नीलसन

सीट 2012

आज तक – ओआरजी

भाजपा

117

140 ± (प्लस/माइनस) 11 सीटें

120

126

118-128
कांग्रेस

59

40 ± (प्लस/माइनस) 11सीटें

58

50

50-56
अन्य

6

2 ± (प्लस/माइनस) 3 सीटें

4

6

4-6

 

हिमाचल प्रदेश: सीटों का अनुमान (चाणक्या)

पार्टी

वोट

2007

वोट

2012(न्यूज24-चाणक्या)

सीट

2007

सीट 2012

(न्यूज 24 – चाणक्या)

सीट 2012

(इंडिया न्यूज – सी वोटर)

कांग्रेस

39%

44 ± 3%

23

40 ± (प्लस/माइनस) 7 सीटें

31 ( ±4)
भाजपा

44%

39 ± 3%

41

23 ± (प्लस/माइनस7 सीटें

34 ( ±4)
अन्य

17%

17 ± 3%

4

5 ± (प्लस/माइनस) 3 सीटें

( ±4)

 

मशहूर उद्योगपति जेपी गौड़ के भतीजे राजीव गौड़ की ट्रेन से कट कर मौत, स्टेशन मास्टर सस्पैंड

बीना में स्थापित जेपी पावर प्लांट के यूनिट हेड व जेपी ग्रुप के एक्सीक्यूटिव प्रेसीडेंट राजीव गौड़ की रविवार को सदर्न एक्सप्रेस से गिरने के कारण मौत हो गई। 48 वर्षीय राजीव जेपी ग्रुप के अध्यक्ष जेपी गौड़ के बड़े भाई प्रेम प्रकाश गौड़ के लड़के थे। वे मंडीबामोरा से भोपाल जाने के लिए ट्रेन में सवार हो रहे थे। बताया जाता है कि एसी कोच का दरवाजा नहीं खुला और वे ट्रेन के गेट पर करीब 10 किमी तक लटके चले गए। रेलवे प्रशासन ने मंडीबामौरा के सहायक स्टेशन मास्टर अरविंद कुमार साहू को सस्पेंड कर दिया है तथा कुल्हार स्टेशन के सहायक स्टेशन मास्टर अमित कुमार के समस्त रिकार्ड आरपीएफ पुलिस ने जब्त कर लिए।

गौड़ को रविवार की सुबह बीना स्टेशन से भोपाल के लिए दिल्ली से हैदराबार की ओर जाने वाली दक्षिण एक्सप्रेस [सदर्न] से जाना था। उनका रिजर्वेशन ट्रेन के एसी कोच बी-3 में था, परंतु ट्रेन निकल जाने के कारण वह भोपाल रोड से जा रहे थे। जब वह कुरवाई पहुंचे तो उन्हें पता चला कि ट्रेन लेट है तो वह मंडीबामोरा स्टेशन पहुंच गए। वह जब स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन आगे बढ़ने लगी थी और एसी कोच का गेट बंद था। वह गेट खुलवाने के लिए गेट के बाहर खडे़ हो गए और ट्रेन की गति बढ़ गई।

गौड़ के साथ उनका सुरक्षा गार्ड रामचरन गुर्जर भी था। सुरक्षा गार्ड ने जब देखा कि गौड़ गेट पर लटके हैं तो वह स्टेशन प्रबंधक मंडीबामौरा के पास गया और ट्रेन को रकवाने की बात कही। स्टेशन प्रबंधक ने कुल्हार मैसेज भी किया गया, लेकिन ट्रेन नहीं रुकी। वहां से मैसेज आया कि एक व्यक्ति ट्रेन से गिर गया है। सुरक्षा गार्ड ने घटनास्थल पर जाकर देखा तो राजीव गौड़ का शव पड़ा था। बताया जाता है कि गौड़ की कुल्हार स्टेशन पर खंभा नंबर 948/13 के पास गिरने से मौत हो गई। उनके सिर में गंभीर चोट आई थी और एक हाथ भी टूट गया था।
 
गंजबासौदा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने जेपी ग्रुप के जेपी ग्रुप के वाइस प्रेसीडेंट विजेन्द्र सोनी सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में शव बरामद किया और उसे परीक्षण के लिए शासकीय अस्पताल ले गए, लेकिन वहां पोस्टमार्टम विशेषषज्ञ नहीं होने से शव को परीक्षण के लिए भोपाल भेज दिया गया है।
राजीव गौड़
रेल प्रशासन ने बीना के स्टेशन प्रबंधक को जांच के लिए भेजा था। घटना स्थल पर मंडी बामोरा, बरेड, गंजबासौदा और बीना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहीं सागर के आईजी डीआईजी, एसपी घटना स्थल पर पहुंचे थे। सस्पैंड हुए स्टेशन मास्टर अरविंद कुमार साहू ने बताया कि दक्षिण एक्सप्रेस में कुछ एसी कोच फैक्ट्री से बनकर आए हुए नए डिब्बे लगे हुए थे। जिनमें पैसेंजर को बैठना अलाउ नहीं किया गया था और न ही इन डब्बों में कोई पैसेंजर बैठा हुआ था। डब्बे पूरी तरह खाली थे। गौड़ के बैग से बीना-भोपाल तक का एसी का टिकट, 22 हजार रुपए नकद और एक लैपटॉप मिला है।
 
जानकारी के अनुसार ट्रेन के डब्बे से लटके गौड़ ने करीब 10 किमी तक सफर किया। इसके बाद डब्बे से हाथ छूट जाने के कारण गिर गए और उनकी मौत हो गई। एसी के जिस कोच में गौड़ को बैठना था वह ट्रेन के पीछे की ओर था जबकि वह जल्दबाजी के कारण आगे लगे हुए नए डिब्बे के गेट पर लटक गए। ट्रेन मंडी बामोरा स्टेशन पर 9.14 मिनट पर आई थी और यहां ट्रेन का स्टॉपेज मात्र 2 मिनट का है। यह ट्रेन सुबह 8 बजे बीना पहुंचती है, लेकिन आज लेट होने के कारण 8.50 पर आकर 9 बजे बीना से रवाना हुई थी।


राजीव गौड़ से संबंधित अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें- राजीव गौड़ डेथ स्टोरीज

 

देखिये फॉक्स न्यूज की ठलुआगिरी, रविशंकर के निधन की खबर पर गलत तस्वीर लगाई

भारतीय चैनलों में छोटी-मोटी गलतियों पर हंगामा मचाने वाले चैनल हेड और आला प्रोड्यूसरों को शायद फेसबुक पर प्रचलित हुई इस तस्वीर से कोई सबक मिल जाए।

 

ये तस्वीर अमेरिका के मशहूर समाचार चैनल फॉक्स न्यूज की है जिसने मशहूर सितारवादक पंडित रविशंकर की मौत पर  खबर तो फौरन प्रसारित की, लेकिन हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गयी।  शायद तस्वीर तलाशने वाले ने गूगल का सहारा लिया औऱ पंडित रविशंकर की बजाय धर्मगुरु श्री श्री रविशंकर की तस्वीर चस्पा कर दी।

ग़ौरतलब है कि पंडित रविशंकर अमेरिका में ही रहते थे जबकि महेश योगी के शिष्य रह चुके धर्मगुरु श्री श्री रविशंकर ने अमेरिका आदि पश्चिमी देशों में अपनी जबर्दस्त ब्रांडिंग करवा रखी है। इन देशों में इंटरनेट पर 'रविशंकर' नाम सर्च करने से धर्मगुरु रविशंकर ही सबसे पहले अवतरित हो जाते हैं।

शायद इसी ब्रांडिंग का खामियाज़ा भुगतना पड़ा है धर्मगुरु को क्योंकि भारत के उत्तराखंड स्थित रविशंकर के आश्रम में फोन की घंटियां उनके 'निधन' पर शोक व्यक्त करने वाली आईएसडी कॉल्स के कारण लगातार घनघना रही हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार धीरज भारद्वाज के फेसबुक वॉल से साभार)

इंडिया टुडे भी दूसरे मीडिया की तरह कनफ्यूज है गिलानी के मामले में

मुस्लिमों की गिरफ़्तारी पर इंडिया टुडे का नया अंक आया है। संतोष कुमार, मो. वक़ास और Dilip C Mandal की बाइलाइन से पहली स्टोरी है।

अच्छी है, मेहनत करके लिखी गई है, ज़रूर पढ़ी जानी चाहिए, लेकिन पता नहीं स्टोरी करते समय संजीदगी कितनी थी, कितनी नहीं थी, एस ए आर गिलानी (डीयू वाले) को इसमें इफ़्तिख़ार गिलानी (पत्रकार) लिख दिया गया है।

'गिलानी' (एस ए आर, इफ़्तिख़ार और सैयद अली शाह) के मामले में मीडिया जो चूक लगातार करता रहा है इंडिया टुडे ने भी उसे दोहराया!

(राज्यसभा टीवी के रिसर्चर दिलीप खान के फेसबुक वॉल से साभार)

आखिर आ ही गया अफजल गुरु पर केंद्रीय गृह मंत्री का बयान

 

आखिर वही हुआ जिसके लिये कल भूमिका बनाई जा रही थी.. गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बयान दे ही दिया कि 'आतंकवादियों के मसीहा' अफजल गुरु की दया याचिका पर ध्यान दिया जाएगा। ग़ौरतलब है कि कल ही एक समाचार एजेंसी ने अफजल गुरु को मौत से बेखौफ़ बता कर महिमामंडित किया जा रहा था.. और आज ही शिंदे साहब ने बयान दे दिया।

 
कल जेल अधिकारी का बयान आईएएनएस समाचार एजेंसी ने जारी किया था तो आज ग़ह मंत्री का बयान पीटीआई के जरिये आया है।  खास बात ये है कि शिंदे साहब ने किसी खास पत्रकार के सवाल पर ये जवाब दिया है और अफजल के साथ फांसी की सजा पाए छह और अपराधियों की सज़ा पर पुनर्विचार की बात की है। 
 

दिलचस्प बात ये है कि कल जिस हिन्दुस्तान अखबार के पोर्टल ने अफजल को महिमामंडित करने वाली रिपोर्ट को सबसे पहले छापा था आज उसी पोर्टल ने इस खबर को भी सबसे पहले अपने यहां जगह दी है। अंग्रेजी अखबारों में भी जगह मिलने लगी है। आखिर केंद्रीय गृह मंत्री का बयान है, बड़ी एजेंसी से बड़ा प्रचार तो मिलना ही था।
 
मेरा ये मानना है कि ये साफ तौर पर आतंकवादियों से मिला हुआ एक तंत्र है जो मीडिया का उपयोग कर अफजल गुरु को बचाने की साजिश कर रहा है। क्या पता इस तंत्र में मीडिया और सरकार के कितने लोग शामिल हैं? 
 
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये आलेख उनके फेसबुक वाल से साभार लिया गया है। उनसे dheeraj@journalist.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

 

कौन हैं ख़बर के बहाने अफजल गुरु को ‘बेखौफ़’ बता कर महिमामंडित करने वाले?

 

अफजल गुरु का दिल कसाब की फांसी पर कितना धड़का, कितना नहीं ये तो किसी को नहीं पता, लेकिन समाचार एजेंसी आईएएनएस को उसकी खासी फिक्र हो गयी है। ये एजेंसी इस आतंकवादी को न सिर्फ एक बहादुर और निडर लड़ाका साबित करने की कोशिश में हैं, बल्कि उसे धार्मिक भी बताने में जुटी है।
 
बिन मौसम की बरसात की तरह एजेंसी ने कुछ जेल अधिकारियों से बातचीत के हवाले से ये खबर छाप दी कि अफजल को मौत का खौफ़ नहीं है। मानों अफजल देशद्रोही आतंकवादी नहीं, भगत सिंह हो गया। एजेंसी ने न सिर्फ जेल के आधिकारिक प्रवक्ता सुनील गुप्ता का बयान लिया, बल्कि एक 'अनाम' अधिकारी का भी हवाला दिया है।
 
अब भला कोई ये बताए कि क्या तिहाड़ जेल ने अफजल का कोई मनौवैज्ञानिक टेस्ट करवाया था जो उसके प्रवक्ता को पता चल गया कि वो फांसी से डर नहीं रहा है? या फिर जेल के अधिकारी ये उम्मीद कर रहे थे कि कसाब के फांसी की ख़बर सुन कर अफजल गश खाकर गिर पड़ेगा? 
 
खास बात ये है कि इस खबर को सबसे पहले और प्रमुखता से छापने वाले समाचार समूह वे ही हैं जो इन दिनों सरकार की खुशामद में जी-जान से जुटे हैं। हिन्दुस्तान, जागरण और जी न्यूज। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि कैसे अफजल के सहयोगियों की सजाएं कम कर दी गयीं और कौन लोग फांसी के विरोध में जुटे हैं।
 
अब जबकि राष्ट्रपति के यहां से भी अफजल की फांसी की सजा माफ करने की उम्मीद खत्म हो चुकी है, ये एजेंसी और समाचार माध्यम क्या साबित करने में जुटे हैं वे ही जानें, मेरा तो मानना है कि ये भी एक तरह का देशद्रोह है।
 
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये आलेख उनके फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है। उनसे dheeraj@journalist.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

याहू 14 दिसंबर से बंद करेगा अपनी चैटरुम सेवा

याहू की लोकप्रिय चैट सर्विस याहू चैटरूम्स को बंद किया जा रहा है। कंपनी की ओर से मिली जानकारी के अनुसार पब्लिक चैट को स्थाई रूप से बंद किया जा रहा है। यह मशहूर चैट सर्विस साल 2005 में उस समय विवादों में आनी शुरू हो गई थी जब कंपनियों ने इस सेवा पर अपने विज्ञापन देने बंद कर दिए थे।

इसकी वजह सेक्स संबंधी अवैध चैट रूम का याहू पर मौजूद होना माना गया था। याहू कंपनी की ओर से आए एक ब्लॉग में लिखा गया है कि ये सेवा अब इस वेबसाइट के इस्तेमाल करने वालों के लिए पर्याप्त लाभ नहीं पहुंचा रही है। याहू चैट रूम्स 14 दिसंबर से गायब हो जाएंगे। इसके साथ ही पिंगबॉक्स भी बंद किया जा रहा है। इनसे संबंधित कुछ अन्य फीचर अगले साल जनवरी के अंत तक हटा दिए जाएंगे।

याहू ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि कभी-कभी सख्त फैसले लेने होते हैं ताकि उन चीजों पर ज्यादा ऊर्जा खर्च कर सके जिनसे यूजर्स को वेबसाइट पर अच्छा अहसास मिल सके। इसी वर्ष जून में हब्बो होटेल नाम की बच्चों पर केंद्रित लोकप्रिय सोशल नेटवर्किग को अस्थाई रुप से बंद कर दिया गया था। इस वेबसाइट पर आरोप थे कि इसका प्रयोग बाल यौन शोषण के लिए किया जा रहा है। ब्रिटेन के चैनल 4 ने दो महीने तक चली अपनी एक खोजी खबर में दिखाया कि कैसे उस वेबसाइट पर लॉग इन करने के तुरंत बाद सेक्स के बारे में खुल्लमखुल्ला बातचीत जारी हो जाती है।

याहू मैसेंजर को 1998 में लांच किया गया था लेकिन साल 2005 के आते-आते इसकी चैटरूम सेवा विवादों में घिरने लगी थी। इसी साल याहू ने इस मैसेंजर के कई पब्लिक चैट रूम्स को बंद कर दिया था। याहू के पब्लिक चैट रूम सेक्स संबंधी चैट की बहुतायत से विज्ञापन देने वाले भी दुखी थे। साल 2005 में कुछ चैट रूम बंद किए गए थे। इन्हें बंद करते वक्त याहू ने घोषणा की थी वे अब सिर्फ 18 वर्ष या उससे अधिक के व्यक्तियों को ही अपने मैसेंजर का प्रयोग करने देंगे।

शाहीन ढाडा के परिवार ने महाराष्ट्र छोड़ गुजरात में शरण ली, मोदी समर्थकों के चेहरे खिले

 

महाराष्ट्र के पालघर फेसबुक विवाद के बाद सुर्खियों में आई शाहीन ढाडा अब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिये मुस्लिम वोट पाने का मुद्दा बनने वाली हैं। ढाडा के परिवार ने महाराष्ट्र छोड़ दिया है। शाहीन के परिवार ने महाराष्ट्र छोड़ कर गुजरात में शरण ली है और कभी भी वापस नहीं लौटने का फैसला लिया है। बताया जाता है कि शिवसैनिकों के आक्रामक रवैये को देखते हुए शाहीन ढाडा और उसके परिवार ने महाराष्ट्र छोड़ने का फैसला लिया है। 
 
ग़ौरतलब है कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की मौत के बाद पालघर की रहने वाली शाहीन नाम की लड़की ने फेसबुक पर कमेंट किया था। जिसके बाद शिवसैनिकों ने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी और उनके रिश्तेदार के नर्सिंग होम में तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने शाहीन और उसकी सहेली को गिरफ्तार कर लिया था और बाद में जब पूरे देश में महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की किरकिरी हुई तो दोनों को छोड़ा गया।
 
इस मामले को जांच के लिए कोंकण आईजी को दे दी गई थी। और आईजी की दी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर ठाणे के एसपी रविंद्र शेगावकर को निलंबित कर दिया गया। साथ ही पालघर थाने के इंस्पेक्टर श्रीकांत पिंगले को भी निलंबित कर दिया गया। जबकि वहीं शिवसेना ने कार्रवाई करने वाले पुलिस वालों का बचाव किया और कहा कि शाहीन के कमेंट की वजह से राज्य में हालात खराब हो सकते थे। इसलिए पुलिस ने ठीक काम किया था। 
 
शिवसेना ने पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के विरोध में पालघर बंद रखा था। इस मामले में लड़कियों को 15-15 हजार के मुचलके पर जमानत देने वाले जज रामचंद्र बागड़े का भी ट्रांसफर कर दिया गया।
 
सूत्रों का कहना है कि मोदी समर्थक इसे महाराष्ट्र पुलिस और राज्य सरकार की नाकामी बता कर गुजरात को मुस्लिमों के लिये सुरक्षित राज्य बताने की तैयारी में हैं। हालांकि अभी तक किसी राजनेता के ढाडा परिवार से संपर्क करने की सूचना नहीं है, लेकिन जब चुनाव जोर पकड़ेंगे तो इसे मुद्दा बनाया जा सकता है।

अलविदा अदिति, ईश्वर को भी पछताना होगा इस फैसले पर

दिल्ली के लोदी रोड शवदाह-गृह में अदिति अग्नि को सुपुर्द हो गयीं। उस सड़क से न जाने कितनी ही बार पिछले दो दशकों में गुजरी थी। आज उसे वहां लाया गया था। बूढ़े माता-पिता, भाई और, मित्रजनों विशेषकर कश्मीर से प्रवासित लोग जो अदिति को 'दिल से चाहते थे', सबों की आँखें नम थीं। जैसे जिन्दगी रुक सी गयी हो और सभी ईश्वर को कोस रहे हों उसके "गलत निर्णय' पर।

 
 
लोग कहते हैं मृत्यु का समय तय होता है। ईश्वर जितनी साँसों में इस म्रत्यु-लोक में कार्य संपन्न करने के लिए लोगों को, जीवों को, भेजता है, जो इसे संपन्न कर लिया वह मरने के बाद भी अमर हो गया – लोगों के दिलों में। अदिति अपने जीवन के 35 वसंत में यह कार्य पूरा कर गयी। यह अलग बात है की ईश्वर ने उसे अपना जीवन जीने का मौका नहीं दिया। हाथों में मेंहदी लगाने का मौका नहीं दिया। शादी का जोड़ा पहनने का मौका नहीं दिया। सिर्फ एक और महीने की तो बात थी। ईश्वर  उसकी अतृप्त इक्षाओं को पूरा करे, उसे शांति दे, प्रार्थना है।
 
सन 1992 की बात है। पीवी नरसिम्हाराव प्रधान मंत्री थे। आम-बजट की चर्चाएँ चल रही थीं। भारत के महान से महानतम अर्थशास्त्र के हस्ताक्षर देश को नयी आर्थिक नीति के बारे में अपने-अपने विचार दे रहे थे। मैं उस समय आनन्द बाज़ार पत्रिका समूह के 'सन्डे पत्रिका' में एक अदना सा संवाददाता था। दिल्ली की धरती पर बस समझें 'अवतरित' ही हुआ था। आम तौर पर जब बिहार का कोई 'प्राणी' दिल्ली 'टपकता' है तो मुखर्जी नगर की ओर ही कदम बढ़ता है – एक आशा और विश्वास के साथ कि कोई न कोई मित्र "पनाह" देगा ही, चाहे कुछ दिनों के लिए ही सही। मैं भी उसी श्रेणी में था।
 
नयी दिल्ली स्टेशन पर जब "लखनऊ मेल" विराजी और मैं मुगलों की बस्ती में अपना कदम रखता, तब तक "दिल्ली के दरिंदों" ने मेरे बटुए का कत्लेआम कर दिया था। जेब में हाथ डालते ही ऊँगली "कहीं और टकरा गयी". मैं समझ गया दिल्ली में क्या दर्द है! बहरहाल नयी दिल्ली स्टेशन के उस कुली को धन्यवाद देता हूँ जिसने बिना मेहनताना लिए मुझे अजमेरी गेट की ओर ले जाकर मुखर्जी नगर का मार्ग-दर्शन करवाया। अपने छोटे भाई के मित्रों के यहाँ ठिकाना बनाया और फिर अपनी दुनिया बसाने का मार्ग प्रशस्त करने दिल्ली की पत्रकारिता और पत्रकारों की दुनिया में "डुबकी" लगाने निकल पड़ा।
 
तीसरे दिन जब दफ्तर पहुंचा सभी ने "धनबाद माफिया डॉन" के नाम से स्वागत किया। तत्कालीन संपादक वीर सिंघवी कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से घिरे गुफ्तगू कर रहे थे, लेकिन मेरा "स्वागत गान" को सुनकर हंस दिए और कहे "शिवनाथ फ्रॉम धनबाद… वेलकम" उन्हीं संपादकों के बीच बैठे थे राजीव शुक्ला साहेब। इनकी पहुँच या यूँ कहें कि उनकी 'केमेस्ट्री' उन दिनों भी सत्ता के गलियारे में "जबरदस्त" थी।
 
दूसरे ही दिन मुझे डेल्ही स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के महान प्राध्यापक कौशिक बसु से मिलने को कहा गया और उनसे बजट पर सन्डे मैगजीन के लिए लिखने का अनुरोध करने को कहा गया। दफ्तर और घर के रास्ते के बीच कौशिक बसु का विभाग था, इसलिए यह कार्य कुछ "तुरत में आसान" लगा।
 
मैं सुबह-सुबह डेल्ही स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स पहुँच गया। उन दिनों मोबाईल फोन का जमाना नहीं था इसलिए मैं घन्टों उनके विभाग में उनका प्रतीक्षा किया… आखिर वो भी शिक्षक थे। पहली बार दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्रों का पहनावा, तौर-तरीका, बात-चीत करने के अंदाज़ को नजदीक से देखने-परखने-समझने का मौका मिला। मन अन्दर से तो गदगद था क्योंकि अक्सर बिहारी छात्र या बिहार के युवक जब दिल्ली टपकते हैं तो इन्हीं बातों को 'दिल्ली की धरोहर' की तरह लेकर मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा और अन्य पिछड़े जिलों के चौराहे पर झोपड़ी में चलने वाली चाय और कचरी की दुकानों पर बैठकर अपने मित्रों को अनवरत-बार सुनाते हैं जैसे कोई 'वेद' सुना रहे हों और श्रोता भी टकटकी लगाकर उस समय का अंदाज अपने मानसपटल पर कर उन्मोदित होते रहते हैं।
 
बहरहाल, कौशिक बसु से मिलने और अपने संपादक की याचना को सुनाने के बाद नीचे सीढ़ी की ओर बढ़ा ही था कि दो आवाजें एक साथ टकराई। एक कौशिक साहेब की थी और दूसरी एक कश्मीरी लड़की जो कौशिक साहेब से मिलने की इच्छा रखती थी। उसने कहा "सर, आप कौशिक साहेब से मिलने जा रहे हैं, मैं आपके साथ चल सकती हूँ?" मैंने कहा, आप मेरे साथ क्यों, मैं आपके साथ चलता हूँ। हम दोनों एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। मन अन्दर से 'भयभीत' भी था कहीं 'कोई चक्कर' तो नहीं है? कौशिक साहेब कहीं गुस्सा तो नहीं हो जायेंगे? फिर दोनों कौशिक साहेब के कमरे में गए। एक बार दोनों को उन्होंने देखा और पूछा : "झा साहेब, ये मैडम कौन हैं?" मैंने बेबाक कहा: "सर, ये बाहर खड़ी थीं और आपसे मिलने की इच्छा रखती थीं… मैं अन्दर आ रहा था तो इन्होंने साथ आने की जिज्ञाषा जतायी।" वह कौशिक साहेब का एक इंटरव्यू लेना चाहती थी।
 
यही हमारी पहली मुलाकात थी आदिती कॉल से जो कल तड़के अपने जीवन का 35 वां वसंत देखे और हाथों में मेंहदी, चूड़ी, शादी का लहंगा लगाये-पहने बिना अपने बूढ़े माता-पिता भाइयों को, पत्रकार मित्रों, विशेषकर कश्मीरी पंडित समूह को छोड़कर "अलविदा" कर गयीं। ईश्वर के इस कार्य पर हम कोई "सन्देश" नहीं करेंगे, शायद यही "नियति" थी उसकी, लेकिन "काश ईश्वर ने इशारा किया होता".
 
सन 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 दिनों बाद लुढ़क गयी थी, एक दिन हम दोनों भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय के पीछे स्थित दो-कमरे वाले घर में पहुंचे। गोविन्दाचार्य उसी में रहते थे। गोविन्द जी को हम दोनों को बहुत अच्छी तरह जानते थे। मैं 70 के दशक में जब पटना में था और पटना विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के खजांची रोड स्थित आया जाया करता था, गोविन्द जी हम सभी छात्रों का मार्ग-दर्शन किया करते थे। उस दिन गोविन्द जी अकेले थे और 13-दिनों की सरकार के अस्तित्व पर मंथन कर रहे थे। 
जैसे ही हमलोगों ने दरवाजे पर दस्तक दिया, गोविन्द जी खिलखिला उठे और बोले "अरे, तुम दोनों आ गए। यशु भाई (मेरा घर का नाम है) आप बहुत दिनों से खिचड़ी नहीं खिलाये, भूख जोरों से लगी है, आप सीधा किचेन में जाएँ। और आदिति को कुछ कागजात दिए जिसे लिखना था। फिर हम तीनों खिचड़ी और आलू चोखा दबाकर खाए।
 
इसी मंथन के दौरान एक बात सामने आई कि इलाहाबाद से कुछ पंडितों को बुलाया गया है (इसका श्रेय मुरली मनोहर जोशी को जाता है), पंडितों ने सलाह दी है कि पार्टी कार्यालय के दो गेटों में से एक को, जो अभी खुला था और आम-रास्ता था, को बंद कर दूसरे गेट को, जिसमे लगे ताले में जंग लग गयी है और मुद्दत से बंद पड़ा है, उसे कार्यालय में आने-जाने का रास्ता बनाया जाये। मैंने गोविन्द जी से पूछा ऐसा क्यों? गोविन्द जी तड़ाक से जबाब दिए – "पंडितों का कहना है कि इस गेट के सामने पीपल का एक वृक्ष, जो अवरोधक है सत्ता के लिए। इस वृक्ष अब भी काट देने की सलाह दी गयी है। अब तो सत्ता भी वास्तु से चलता है, मानव-कल्याण पिछली सीट पर चली गयी है।"
 
मैं उन दिनों इंडियन एक्सप्रेस (दिल्ली) में कार्य करता था। शाम में दफ्तर पहुंचा तो राजकमल झा से इस बात की चर्चा की। वे उछल गए और मैथिली में उन्होंने कहा: "शिवनाथ, अहाँ की की देखैत छी। जबरदस्त कहानी। आ ई कहानी में गोविन्द जी के कोट – सोना में सुहागा". उस दिन वह कहानी एक्सप्रेस के फ्लायर में छपा। दूसरे दिन जब हम और आदिति मिले तो मंडी हाउस के चौराहे पर लोट-पोट कर हंस रहे थे।
 
1998 लोक सभा चुनाव के दौरान आदिति को बीजेपी मैनिफेस्टो विभाग में बुलाया गया जिसे सभी पार्टियों की मैनिफेस्टो पर मंथन करना था। उसी सप्ताह मिली और बोली: "सर ये पार्टी के लोग कितने चोर होते हैं। सभी पार्टी के मेनिफेस्टो को पढ़ते हैं और अच्छी-अच्छी बातों को जो सभी पार्टियाँ लोगों को लुभाने के लिए बनती है, अपने-अपने शब्दों में रोचक बनाकर अपना मेनिफेस्टो बना लेते हैं"
 
कश्मीरी आतंकवादियों के दहशत से अपनी जमीं को छोड़कर पलायन किये लाखों कश्मीरी पंडितों के परिवारों में एक आदिति के माता-पिता भी थे जो दिल्ली में अपना ठिकाना ढूंढ़ रहे थे। आदिती सबसे बड़ी थी और इसके दो छोटे भाई थे। लेकिन अपनी मेहनत, तपस्या से धीरे-धीरे सपनों को समेत कर एक घर का रूप दी इसने अपने माता-पिता के साथ। सभी बड़े हुए, पढ़े-लिखे और रोजी रोजगार में लगे।
 
1992 के बाद 2012 तक शायद ही कोई बात हमारे घर की होगी जो वह नहीं जानती थी। जब आकाश का जन्म हुआ तब घर आई और आकाश को एक "खिलौना" दी, आज उस खिलौने के साथ आकाश दिन-भर रोया। 
 
पिछले महीने जब उससे मुलाकात हुयी तो बहुत खुश थी। मैंने पूछा "क्या बात है?" उसने कहा की "जल्द ही आपको कुछ अच्छी खबर मम्मी देगी।" मैं इशारा समझ गया। आज भी भारत में बहुत ऐसी लड़कियां हैं तो खुले विचारों के होने के बावजूद 'शादी' के मामले अपने माता-पिता के फैसले पर निर्भर करती हैं। उसकी शादी जनवरी के आसपास होने वाली थी। पर ऐसा नहीं हो पाया। ईश्वर को मंजूर नहीं था। अब ईश्वर के निर्णय को भारत की किसी अदालत में चैलेन्ज तो नहीं किया जा सकता। लेकिन ईश्वर को कल भले ही अपने निर्णय पर पश्चाताप नहीं हुआ हो इस मासूम की जिन्दगी को लेकर, परन्तु कल वह भी पछतायेगा अपने कर्मो पर, अपनी गलतियों पर।
 
(कई अखबारों में रह चुकीं पत्रकार अदिति कौल को पिछले दिनों अचानक डेंगू ने हम सब से छीन लिया। 2007 में उन्हें मातृश्री पुरस्कार भी मिला था। तब वो टाइम्स ऑफ इंडिया में थीं। अदिति कौल को वरिष्ठ पत्रकार शिवनाथ झा की भावभीनी श्रद्धांजलि उनके पेसबुक वॉल से साभार)

इंडिया टुडे का सेक्स सर्वे और रवीश कुमार का ब्लॉग

सेक्स सर्वे आए दिन होने लगा है। तमाम पत्रिकाएं सर्वे कर रही हैं। सेक्स सर्वेयर न जाने किस घर में जाकर किससे ऐसी गहरी बातचीत कर आता है। कब जाता है यह भी एक सवाल है। क्या तब जाता है जब घर में सिर्फ पत्नी हो या तब जाता है जब मियां बीबी दोनों हों। क्या आप ऐसे किसी को घर में आने देंगे जो कहे कि हम फलां पत्रिका की तरफ से सेक्स सर्वे करने आए हैं या फिर वो यह कह कर ड्राइंग रूम में आ जाता होगा कि हम हेल्थ सर्वे करने आए हैं।

एक ग्लास पानी पीने के बाद मिसेज शर्मा को सेक्स सर्वे वाला सवाल दे देता होगा। मिसेज शर्मा भी चुपचाप बिना खी खी किए सवालों के खांचे में टिक कर देती होंगी। और सर्वेयर यह कह कर उठ जाता होगा कि जी हम आपका नाम गुप्त रखेंगे। सिर्फ आपकी बातें सार्वजनिक होंगी। मिसेज शर्मा कहती होंगी कोई नहीं जी। नाम न दीजिए। पड़ोसी क्या कहेंगे। सर्वेयर कहता होगा डोंट वरी…पड़ोसी ने भी सर्वे में जवाब दिए हैं। मिसेज शर्मा कहती होंगी…हां….आप तो…चलिए जाइये।

ज़रूरी नहीं कि ऐसा ही होता हो। मैं तो बस कल्पना कर रहा हूं। सर्वे में शामिल समाज को समझने की कोशिश कर रहा हूं। क्या हमारा समाज हर दिन सेक्स पर किसी अजनबी से बात करने के लिए तैयार हो गया है। हर तीन महीने में सेक्स का सर्वे आता है। औरत क्या चाहती है? मर्द क्या चाहता है? क्या औरत पराई मर्द भी चाहती है? क्या मर्द हरजाई हो गया है? क्या शादी एक समझौता है जिसमें एक से अधिक मर्दो या औरतों के साथ सेक्स की अनुमति है? क्या सेक्स को लेकर संबंधों में इतनी तेजी से बदलाव आ रहे हैं कि हर दिन किसी न किसी पत्रिका में सर्वे आता है?

हो सकता है कि ऐसा होने लगा हो। लोग नाम न छापने की शर्त पर अपनी सेक्स ज़रूरतों पर खुल कर बात करते हों। समाज खुल रहा है। सेक्स संबंधों को लेकर लोग लोकतांत्रिक हो रहे हैं। क्या सेक्स संबंधों में लोकतांत्रिक होने से औरत मर्द के संबंध लोकतांत्रिक हो जाते हैं? या फिर यह संबंध वैसा ही है जैसा सौ साल पहले था। सिर्फ सर्वे वाला नया आ गया है। सर्वे वाला टीन सेक्स सर्वे भी कर रहा है। लड़के लड़कियों से पूछ आता है कि वो अब कौमार्य को नहीं मानते। शादी से पहले सेक्स से गुरेज़ नहीं। शादी के बाद भी नहीं। सेक्स सर्वे संडे को ही छपते हैं। सोमवार को नहीं। क्या इस दिन सेक्स सर्वे को ज़्यादा पढ़ा जाता है।

आज के टाइम्स आफ इंडिया में भी एक कहानी आई है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लड़के लड़कियों ने बताया है कि वो शादी संबंध के बाहर सिर्फ सेक्स के लिए कुछ मित्र बनाते हैं। फन के बाद मन का रिश्ता नहीं रखते। सीधे घर आ जाते हैं। इस कहानी में यही नहीं लिखा है। जब पति पत्नी को पता ही होता है कि उनके बीच दो और लोग हैं। तो सेक्स कहां होता होगा। घर में? इसकी जानकारी नहीं है। सिर्फ कहानी है। ऐसी कि आप नंदीग्राम छोड़ सेक्सग्राम की खबरें पढ़ ही लेंगे। सेक्स संबंधों में बदलाव तो आता है। आ रहा है। हमारा समाज बहुत बदल गया है। लेकिन वो सर्वे में आकर सार्वजनिक घोषणा करने की भी हिम्मत रखता है तो सवाल यही उठता है कि वो अपना नाम क्यों छुपाता है। क्या सिर्फ 2007 के साल में ही लोग शादी से बाहर सेक्स संबंध बना रहे हैं? उससे पहले कभी नहीं हुआ? इतिहास में कभी नहीं? अगली बार कुछ सवालों का सैंपल बनाकर मित्रों के बीच ही सर्वे करने की कोशिश कीजिएगा। पता चलेगा कि कितने लोग जवाब देते हैं। या नहीं तो किसी बरिस्ता में बैठे जोड़ों से पूछ आइयेगा। जवाब मिल गया तो मैं गलत। अगर मार पड़ी तो अस्पताल का बिल खुद दीजिएगा।

(रवीश कुमार एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये आलेख उनके ब्लॉग पर छपा है। वहीं से साभार) 

पत्राकारों को भी कर देनी चाहिए अपनी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा?

 

ज़ी न्यूज के गिरफ्तार संपादक सुधीर चौधरी कई लिहाज़ से नंबर वन रहे हैं। वे पहले ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने महज़ 35 साल की उम्र में बीएमडब्ल्यू कार (तत्कालीन कीमत लगभग 40-45 लाख) खरीद ली। वे पहले ऐसे चैनल हेड रहे जिन्होंने इस पद की नौकरी पाने से पहले चैनल की डील करवा दी। 
 
वे पहले ऐसे चैनल हेड रहे जिन पर दूसरे चैनल की फूटेज़ चुरा कर प्रसारित करने और एक नारी की इज्जत उछालने का मुकदमा चला। वे पहले ऐसे चैनल हेड रहे जो एक बार जिस चैनल से निकले उसी चैनल में तीन गुना सैलरी पर सबसे ऊंचे पद पर वापस लौटे। 
 
कुछ खट्टे, कुछ मीठे अनुभवों के साथ सुधीर चौधरी जहां कइयों के लिए निंदा का विषय हैं वहीं कइयों के लिए आदर्श भी हैं। पत्रकारों में चर्चा आम है कि जो शख्स 40 लाख की कार पर बैठता है उसके पास कितने करोड़ की जमापूंजी होगी इसका अंदाजा कैसे लगाया जाए?
 
उधर समीर अहलूवालिया को बैठे-बिठाए शोहरत मिल गयी वर्ना वो तो दूसरे बिजनेस पत्रकारों की तरह कंबल ओढ़ कर घी पी रहे थे। एक शख्स ने बाकायदा फोन करके बताया कि समीर साहब दिल्ली और कई शहरों में कई फ्लैटों के अलावा एक आलीशान फॉर्म हाउस के भी मालिक हैं। उनकी संपत्ति करोड़ों से भी ज्यादा की गिनती में है।
 
दूसरे कई पत्रकारों के भी करोड़ों बटोरने की खबरें यदा-कदा आती रहती हैं। दिलचस्प बात ये है कि वे पत्रकार ही एक-दूसरे पर कीचड़ भी उछालते या उछलवाते रहते हैं जिन्होंने खुद भारी दौलत जमा कर रखी है। अगर कोई उनसे उनकी संपत्ति के बारे में पूछ दे तो वे बौखला जाते हैं। हालांकि सारे ऐसे नहीं हैं। ज्यादातर पत्रकार आज भी फक्कड़ ही हैं लेकिन बदनाम हो रहे हैं। 
 
सवाल ये उठता है कि क्या जैसे मीडिया के दबाव में राजनेताओं और अधिकारियों ने सार्वजनिक मंचों पर अपनी संपत्ति की घोषणा शुरु कर दी है, वैसे ही पत्रकारों को भी अपनी संपत्ति घोषित नहीं कर देनी चाहिए। दुनिया से भ्रष्टाचार मुक्त और बेदाग होने की अपेक्षा करने वाले पत्रकार अपना चेहरा दिखाने में क्यों झिझक रहे हैं?

सुपारी किलर निकला चैनल वन का उत्तराखण्ड ब्यूरो चीफ

 

देहरादून। उत्तराखण्ड में न्यूज चैनलों की आड़ के साथ-साथ मीडिया में आपराधिक लोगों की गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। न्यूज चैनल के संचालक उत्तराखण्ड में ऐसे लोगो को मीडिया की कमान सौंप रहे हैं जिनका चरित्र आपराधिक रहा है। बीते दिवस उत्तराखण्ड तिवारी सरकार में स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के उपाध्यक्ष खजान गुडडू की हत्या की सुपारी देने वाले चैनल वन के उत्तराखण्ड व्यूरो चीफ धनश्याम सुयाल को उसके साथियों सहित एसटीएफ व देहरादून पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने खुलासा किया है कि पकड़ा गया गिरोह रामनगर, देहरादून, हरिद्वार व कई अन्य जगहों पर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने की फिराक में था। पूर्व राज्य मंत्री खजान को जेल से हत्या की सुपारी ली गयी थी। पुलिस इनके अन्य सम्पर्क करने वाले लोगों की भी तलाश कर रही है।

 

उत्तराखण्ड में मीडिया के नाम पर पत्रकारिता करने वाले चैनल वन के ब्यूरों चीफ को पुलिस ने जिस तरह गिरफ्तार किया है उससे साबित हो रहा है कि ऐसे चैनल पत्रकारिता की आड़ में अपराधियों को संरक्षण दे रहे है और पत्रकारिता को भी दूषित किया जा रहा है जबकि मीडिया के अन्दर आपराधिक लोगों की धुसपैठ नही होनी चाहिए। लेकिन 24 धण्टे का न्यूज चैनल वर्ष 2010 से किस तरह एक अपराधी को उत्तराखण्ड का ब्यूरो चीफ बना कर काम करता रहा इससे चैनल की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 
लगातार मीडिया के गिरते जा रह स्तर को ऐसे न्यूज चैनलों ने अपराधी मीडिया का दर्जा दे दिया है पुलिस इस मामले में अन्य लोगो की भी तलाश कर रही है और पुलिस को इनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं। इस घटना के बाद उत्तराखण्ड में मीडिया के अन्दर काम करने वाले ईमानदार पत्रकारों में ऐसे लोगो के खिलाफ रोष व्याप्त है।
 
(उत्तराखंड से नारायण परगाई की रिपोर्ट)
 

ऐक्ट्रेस मनीषा कोइराला को कैंसर है, अस्पताल में भर्ती हुईं

 

मुंबई से खबर है कि बॉलिवुड ऐक्ट्रेस मनीषा कोईराला को कैंसर है। मनीषा को तीन दिन पहले वहां के जसलोक हॉस्पिटल में ऐडमिट कराया गया है। सूत्रों के अनुसार यहां उनका कैंसर का इलाज किया जाएगा।
 
गौरतलब है कि मनीषा नवंबर के शुरुआत से ही काठमांडू में थीं। नेपाल में वह अपना नया घर बना रही हैं। कुछ दिन पहले खबर आई कि वह बीमार हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट पर बताया गया उन्हें फूड पॉइजिंग हुआ था। इसके बाद मनीषा एक दिन बेहोश भी हो गईं। कई दिनों से बीमारी के चलते मनीषा तुरंत मुंबई आ गईं और यहां उनके कई टेस्ट किए गए।
 
फिलहाल उनकी मां सुषमा उनके साथ हैं। उनके पिता प्रकाश कोईराला और भाई सिद्धार्थ कोईराला के भी आज रात मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।
 
करीबी दोस्त ने बताया कि कैंसर की खबर को मनीषा ने बड़ी बहादुरी के साथ लिया और बिल्कुल हिम्मत नहीं हारी। सूत्र ने बताया कि वह इस बीमारी को लेकर काफी पॉजिटिव हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि वह कैंसर के खिलाफ जंग जीतेंगी।
 
गौरतलब है कि सुभाष घई की फिल्म 'सौदागर' से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली मनीषा कोईराला काफी समय से फिल्मों से दूर थीं और हाल ही में उन्होंने राम गोपाल वर्मा की भूत-रिटर्न्स से वापसी की है।(एनबीटी)

जी ग्रुप ने भरी संपादकों की कुर्सियां, क्या सुधीर समीर को होगा नमस्ते जी?

जी नेटवर्क ने अपने दोनों चैनलों जी न्यूज और जी बिजनेस के लिए नये संपादकों की घोषणा कर दी है। खबर है कि मैनेजमेंट ने राकेश कार को जी न्यूज़ का संपादक नियुक्त किया गया है। ये जगह सुधीर चौधरी के जेल जाने से खाली हुई है।

उधर जी बिजनेस की कमान मिहिर भट्ट को सौंपे जाने की खबर है। जी बिजनेस के संपादक समीर आहलूवालिया के जेल चले जाने के बाद ये कुर्सी भी खाली पड़ी है। गौरतलब है कि दोनो संपादकों को कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल ने स्टिंग ऑपरेशन में चैनल के लिये ब्लैकमेलिंग करने के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया था।

हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों पदों पर नियुक्त किये गये नये संपादक कब तक इस कुर्सी पर रहेंगे। जी नेटवर्क में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या सुधीर और समीर वापस आएंगे तो उन्हें कोई नयी जिम्मेदारी सौंपी जायेगी या उन्हें 'नमस्ते जी' कह दिया जाएगा?


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पुण्य प्रसून बाजपेयी ने जी न्यूज़ से इस्तीफा दिया..?

 

खबर है कि पुण्य प्रसून बाजपेयी ने जी नेटवर्क से इस्तीफा दे दिया है। बताया जाता है कि 27 नवंबर के उनके विवादास्पद बुलेटिन के बाद जब उनकी चारों तरफ आलोचना होने लगी तो उन्होंने मैनेजमेंट से अगले दिन के बुलेटिन मे अपना स्टैंड इस पचड़े से अलग रखने की कही, लेकिन सीईओ आलोक अग्रवाल और मालिकान इस बात पर अड़े रहे कि उऩ्हें अपने 'आपातकाल' वाले कदम पर ही कायम रहना होगा। 

 
बताया जाता है कि मालिकों ने पुण्य प्रसून को साफ संकेत दे दिया था कि अगर  वृंदावन में रहना है तो राधे-राधे कहना होगा, यानी जी न्यूज पर मंगलवार को उन्होंने हाथ मलते हुए जिस आपातकाल की घोषणा की थी उसपर न सिर्फ कायम रहना होगा, बल्कि उसे आगे भी बढ़ाना होगा। सूत्रों का कहना है कि पुण्य प्रसून इसके लिए तैयार नहीं हुए।
 
उधर सोशल नेटवर्किंग वेबसाईटों फेसबुक और ट्वीटर पर उनकी जमकर आलोचना हुई ही, वरिष्ठ पत्रकारों ने भी उन्हें झिड़क दिया। फेसबुक पर तो उनकी इतनी निंदा हुई कि उन्हें वहां से गायब होना पड़ गया। अब फेसबुक पर पुण्य प्रसून का प्रोफाइल ढूंढे नहीं मिल रहा। संभवतः उन्होंने अपना प्रोफाइल अस्थाई तौर पर डिएक्टिवेट कर दिया है। 27 नवंबर के बाद 28 नवंबर के बुलेटिन ‘बड़ी खबर से भी वे गायब रहे।
 
भड़ास4मीडिया ने उनका पक्ष जानने के लिए कई बार उनसे फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन लगातार बजता रहा और किसी ने रिसीव नहीं किया।
 

दो दिन के पुलिसिया रिमांड पर गये सुधीर चौधरी और समीर आहलूवालिया

नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने कथित तौर पर धन की उगाही से संबधित जिंदल समूह द्वारा दायर किये गये मुकदमें में ‘जी समूह’ के गिरफ्तार वरिष्ठ संपादकों को दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. अब उनकी अगली पेशी 30 नवंबर को होगी.

नवीन जिंदल से सौ करोड़ रुपये जबरन वसूली की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किए गए जी न्‍यूज के संपादक सुधीर चौधरी एवं जी बिजनेस के संपादक समीर आहलूवालिया को बुधवार की दोपहर को कोर्ट में पेश किया गया. अपराध शाखा की टीम ने दोनों संपादकों को कड़ी गहमागहमी के बीच कोर्ट में पेश किया. आज अवकाश होने के बावजूद कोर्ट में काफी भीड़ रही.

मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने दोनों संपादकों की जमानत याचिका खारिज कर दी तथा उन्‍हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजे जाने का आदेश दिया. पुलिस ने कोर्ट के सामने निवेदन किया था कि दोनों संपादकों से पूछताछ के लिए कस्‍टडी दी जाए. जिस पर कोर्ट ने दो दिन का रिमांड दे दिया. दो दिन बाद फिर पुलिस दोनों संपादकों को कोर्ट में पेश करेगी.

उधर जी न्यूज ने मांग की है कि कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल द्वारा दाखिल जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किये गये उसके दो संपादकों को तत्काल रिहा किया जाए. संस्थान ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई ‘गैरकानूनी’ तथा ‘किसी और मकसद’ से की गयी है. कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड पर आरोप लगाने वाली खबरों को प्रसारित नहीं करने के लिए कंपनी से 100 करोड रुपये मांगने की कोशिश करने के आरोपों का खंडन करते हुए जी न्यूज के सीईओ आलोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि संप्रग.2 सरकार अपनी ‘गलतियों’ के चलते मीडिया को ‘डरा धमका रही’ है.

जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलूवालिया को जिंदल की कंपनी की ओर से अक्तूबर में दाखिल शिकायत के आधार पर कल रात गिरफ्तार कर लिया गया. अग्रवाल और जी समूह के वकील आर के हांडू ने गिरफ्तारी और इसके समय पर सवाल खडा करते हुए कहा कि जानबूझकर छुट्टी वाले दिन से पहले गिरफ्तारियां की गयीं ताकि नियमित जमानत नहीं मिल सके.

हांडू ने कहा कि गिरफ्तारी उस धारा के तहत की गयी है जो गैर जमानती अपराध पर लागू होती है ना कि जमानती के लिए. हांडू ने कहा, ‘‘गिरफ्तारी की क्या जरुरत थी. यह किसी और मकसद से किया गया है.’’   अग्रवाल ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद ने पहले जी के संपादकों को रिश्वत के तौर पर पैसा देने की और बाद में यह पैसा कंपनी को देने की पेशकश की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जिंदल ने जी के कई वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल सीधे बल्कि कई अन्य लोगों के जरिये प्रभावित करने का भी प्रयास किया जिनमें उनके भाई पृथ्वी जिंदल, रिश्तेदार सीताराम जिंदल और दिग्विजय सिंह, रमन सिंह तथा अजरुन मुंडा जैसे नेता भी हैं.

अग्रवाल का यह भी दावा है कि इन लोगों ने जिंदल के खिलाफ खबरों को प्रसारित नहीं करने का अनुरोध भी किया था. उन्होंने कहा कि जिंदल और जी के अधिकारियों की छह मुलाकातों में कुल छह घंटे की बातचीत हुई और यदि कोई इस बातचीत का केवल पांच प्रतिशत निकालता है तो इसे किसी भी तरह से तोडा मरोडा जा सकता है.

जिंदल ने आज इस घटनाक्रम पर अपनी ओर से कोई भी टिप्पणी करने से मना करते हुए कहा, ‘‘मामला अदालत में विचाराधीन है. दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मैं इस पर टिप्पणी नहीं करुंगा.’’ हालांकि जब जिंदल से उनके, उनकी कंपनी के अधिकारियों और जी के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का केवल 14 मिनट का अंश जारी करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने इसकी पडताल की है और सबकुछ सार्वजनिक किया जाएगा.

क्या जिंदल की कंपनी की तरफ से स्टिंग आपरेशन का मकसद कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल पावर की कथित संलिप्तता से ध्यान हटाना था, इस पर जिंदल ने तल्ख लहजे में कहा, ‘‘ठीक है, आप अपना ध्यान नहीं भटकाएं.’’ गिरफ्तारी के समय के सवाल पर हांडू ने कहा कि प्राथमिकी जहां दो अक्तूबर को दर्ज की गयी थी वहीं गिरफ्तारी कल ऐसे वक्त की गयी जब दोनों संपादक जांच में सहयोग दे रहे हैं.

उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिस का कहना है कि उनके पास फोरेंसिक रिपोर्ट है. तो वे सीधे आरोपपत्र क्यों नहीं दाखिल करते. गिरफ्तारी की क्या जरुरत है? सामान्य मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता.’’ अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमने बातचीत से कभी इनकार नहीं किया.’’ उन्होंने कहा कि जब दोनों पुलिस की जांच में शुरु से सहयोग दे रहे हैं तो गिरफ्तारी क्यों की गयी.


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आपको लोगों ने ईमानदार समझा लेकिन आप तो बड़े वो निकले : अजीत अंजुम

 

Ajit Anjum: हमने कब कहा कि हम ईमानदार हैं …आपको लोगों ने ईमानदार समझा लेकिन आप तो बड़े वो निकले ……हमने कब कहा कि हम सरोकारी हैं लेकिन आप तो सरोकारों के खजांची बनते थे …फिर एक ही घंटे में जिंदगी भर की जमा पूंजी क्यों लुटा बैठे ……….
 
Purushottam Singh: jaane dijiye sar bhram tuta….subh se pata nahi kanha much chhipaye baithe hai……..hahahahhahaha
 
Manoj Shrivastav: Sir….chhor dijie!
 
Abhishek Tiwari: Wo Isliye Ki Wo Jamaa Kiye Hi The Lutaane Ke Liye . . . . . . Khud To Dube Pure Kaaynat Par Chhite Laga Baithe . . . . . .
 
Rahul Chauhan: Kuch jyada hi naraz lag rahe hain apne dost se..
 
Ravish Kumar: ये लाइन थोड़ी गड़बड़ है सर आपकी । पर्सनल बना रहे हैं क़्या । थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए । मतलब कहीं आप खुद को जस्टिफाई तो नहीं कर रहे हैं । आपका इरादा भले न ऐसा हो लेकिन मुझे ऐसा ही लगा । क्या इस नतीजे पर पहुँचा जाए कि हम सब ढोंगी हैं , जो कि हैं भी , ये साबित होना भी चाहिए लेकिन इससे सवाल हल्के हो जाते हैं । मुझे ऐसा लगा ।
 
Ajit Anjum: रवीश , बात यहां मुद्दे की है , अगर आप जमाने भर को कठघरे में खड़ा करके सवाल पूछते हैं …अगर दूसरों को रीढ़ विहीन घोषित करते हुए खुद को सीधे खड़े रखने और दिखने की कोशिश करते हैं और अगर आप वही करते हैं, जो बाकी कर रहे हैं तो जवाब तो आपको भी देना चाहिए…. ( जब मैं आप कह रहा हूं तो जाहिर है आपको नहीं कह रहा हूं….)
 
Ajit Anjum: सवाल हल्के क्यों हो जाते हैं रवीश ……ये तो ज्यादा बड़े सवाल हैं….जो पूछे जाने चाहिए ….जो सबसे सवाल पूछते हैं , जो सबको सवालों के घेरे में रखते हैं , जो नैतिकता और सरोकार की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठकर परोपदेशे पाण्डित्यं की मुद्रा में होते हैं , उनसे क्यों नहीं सवाल पूछे जाने चाहिए ….आपने क्यों नहीं तय की थी अपनी लक्ष्मण रेखा ……और अगर आप भी इतनी ही मजबूर हैं तो कहिए कि जब तक मजबूरियों के इम्तेहान से आप गुजरे नहीं थे , तभी तक सरोकारी थे……..
 
Ajit Anjum: और हां …ये मैं किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं कह रहा हूं . अगर आप किसी व्यक्ति से जोड़कर मेरे कमेंट को देख रहे हैं , उसके लिए आप खुद जिम्मेदार हैं …………मैंने किसी का नाम नहीं लिया ….मेरी भावनाओं को कोई चेहरा मत दीजिए …..निराकार में कोई आकार मत खोजिए ……..
 
सिंह उमेश: SIR EK KADAM AAGE BHI HAI DEKHIYE AUR VICHAR KARIYE……HUM WAHIN DOSHI HAIN JAHAN GUNJAISH HAI YAHAN TO HUM MAANNE KO HI NAHI TAIYAR HAIN AUR NA MANNE KI KOI DAWA NAHI SIVAY NEECHE LIKHI BATON KI YAHI EK DAWA HAI JO KARGUJAR HAI SIR 
उम्मीद की सहर होते ही शाम होती है, खुदा ये सल्तनत तेरी है
हर दफ़े उम्मीद करता हूँ तेरे सहर का, क्या हर दफ़े गलती मेरी है
सजाया मुझे जख्मों में अब नासूर करते हो, क्या यही रज़ा तेरी है
गुनाहे अजीम भी पसंद है ग़र तुझे ,गुनाहगार तुम हो, तो क्या तोहमतें ही मेरी है__
उमेश सिंह
 
Dhiraj Bhardwaj: जगजीत सिंह की एक गज़ल है…
देखा जो आइना तो मुझे सोचना पड़ा,
खुद से न मिल सका तो मुझे सोचना पड़ा..
 
Praveen Dube: media guide lines…need of the hour….lakshman rekha must be defined…for all sides….
 
 
Umashankar Singh: ख़बर के रूप आने वाले भ्रष्टाचार से जुड़े हर मामले में मीडिया ने अगर 'थोड़ा ठहर कर', 'कानून-सम्मत फैसले का इंतज़ार कर', या 'किसी भी आरोपित की व्यक्तिगत मान-मर्यादा' का ख़्याल करने का सऊर और संयम दिखाया होता तो इसके नवीनतम लाभार्थियों में नितिन गडकरी भी होते। इस ख़ास गिरफ्तारी के मौक़े पर यही लाभ 'मीडियाकर्मियों' को भी मिलता। लेकिन 'दूसरों' से जुड़ी ख़बर बांचने के टाईम में हम 'मीडिया के अरविंद केजरीवाल' बन जाते हैं और 'ख़ुद' से जुड़ी ऐसी सच्चाई आने पर कानून मंत्री की तरह बात करने की कोशिश करते हैं। वैसे तथ्यपरक रिपोर्टिंग और भावनाप्रधान फेसबुक पोस्टिंग में कुछ तो अंतर होता है। 🙂
 
(वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज़-24 के संपादक अजीत अंजुम की फेसबुक वॉल से साभार)

फेसबुक और ब्लॉग कितनी सफाई कर पाएंगे.. साफ-साफ क्यों नहीं गरियाया..?

सुधीर चौधरी और समीर आहलूवालिया की गिरफ्तारी को ज़ी न्यूज़ ने मीडिया का गला घोंटने वाला बताया और रात दस बजे पुण्य प्रसून बाजपेयी हाथ मलते हुए गला फाड़ चिल्लाते हुए हाय-तौबा मचाने लगे.. 

आज की तुलना एमरजेंसी के दिनों से करने लगे.. कई दिग्गजों के फोनो भी लिए गये। क़मर वहीद नक़वी, राहुल देव, एनके सिंह.. आदि-आदि.. ज्यादातर लोगों ने इन गिरफ्तारियों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
 
बस, मानो यहीं से पुण्य प्रसून को आत्मबल मिल गया। कहने लगे सब इसे दुर्भाग्यपूर्ण ठहरा रहे हैं.. नैतिक समर्थन दे रहे हैं… पत्रकारों पर हमला मान रहे हैं.. और भी न जाने क्या-क्या.. 
 
जब नक़वी जी और राहुल देव से पूछा गया कि वो कुछ ही दिनों पहले इसी मसले पर हुए एक सेमिनार में दिए अपने उस बयान से कैसे पलट गये जिसमें ज़ी न्यूज़ के संपादकों को गलत ठहराया था.. तो उन्होंने फौरन अपना फेसबुक पर सफाई दी… स्टेटस अपडेट डाला.. "हमने कभी सुधीर-समीर की तरफ़दारी नहीं की… वो हमारे बयान तोड़े-मरोड़े गये थे.."
 
अब सवाल ये उठता है कि इन दिग्गजों ने ऐसे राजनेताओं की तरह के बयान दिये ही क्यों थे जिन्हें तोड़ा-मरोड़ा जा सके..? सीधा-साफ कहते, "भइया, तुम्हारे संपादकों ने जो ब्लैकमेलिंग की कोशिश की थी, हम उसकी निंदा करते हैं.." या फिर अपनी स्थिति फोनो पर पैच किये जाने से पहले ही स्पष्ट कर देते तो शायद उनका फोनो शामिल ही नहीं किया जाता। 
 
आम आदमी तो चोर को मुंह पर चोर नहीं कह पाता, लेकिन पत्रकार, खासकर वरिष्ठ पत्रकारों से साफगोई की उम्मीद की जाती है। ऐसे में सामने वाले से अपने संबंधों के नाते चुप रह जाना न सिर्फ समाज को गलत संदेश देता है, बल्कि अपनी उस छवि के लिए भी नुक़सानदेह होता है जो उन्होंने बरसों मेहनत करके बनायी है।
 
वैसे ये दिग्गज तो बड़े हैं.. नामचीन हैं.. और अनुभवी भी.. हम उन्हें भला क्या सीख देंगे..? लेकिन बात सोच-समझ कर बोलने की है.. अगर उसी में चूकेंगे तो फेसबुक और ब्लॉग कितनी सफाई कर पाएंगे..?
 
Comments:
 
Qamar Waheed Naqvi: धीरज जी, बेहतर होता कि आप मेरा फ़ोनो सुनने के बाद कुछ कहते.
 
Yogesh Garg: जी न्यूज के सम्पादक दोषी भले ही हो लेकिन कोल स्केम में नवीन जीन्दल का बच निकलना अधिक दुर्भाग्य पूर्ण है।
 
Dhiraj Bhardwaj: सर क्षमा करें अगर मैंने कुछ गलत कह दिया हो तो.. पुष्कर जी की वेबसाइट मीडियाखबर.कॉम पर और आपकी वॉल पर देखने से ऐसा महसूस हुआ कि पुण्य प्रसून को आपके बयान को तोड़ने-मरोड़ने का मौका मिल गया..
 
Deepak Singh: agree with Yogesh Garg.
 
Yogesh Garg: कोल स्केम पर अब चैनल मीडिया की खामोशी ये स्पष्ट करने के लिये पर्याप्त है कि जी न्यूज मैनेज नही हो पाया या उसने ज्यादा रकम मांग ली थी । इस हमाम में सब नंगे है ।
 
Qamar Waheed Naqvi: कल रात में ही मैंने न्यूज़ 24 को भी फ़ोनो दिया था और आज दिन में लाइव इंडिया को. उनसे तो मुझे कोई शिकायत नहीं हुई. वे फ़ोनो भी सुने जा सकते हैं. मैं ख़ुद तो देख नहीं पाया, लेकिन कल रात ही किसी ने बताया था कि ज़ी सम्पादकों के इस कृत्य की राहुल जी ने काफ़ी कड़े शब्दों में भर्त्सना की थी.
 
Dhiraj Bhardwaj: हक़ीकत यही है योगेश जी.. लेकिन जमाने का दस्तूर है.. जो पकड़ा गया वही चोर है.. अगर छोटी-मोटी रकम पर मान जाते तो वहां भी कुछ नहीं दिखता..
 
Yogesh Garg: भ्रष्टाचार को बढावा देने के लिये वो नपुसंक मीडिया चैनल सबसे ज्यादा दोषी है जो कोल स्केम की खबरे दिखाने के बजाय जी न्यूज के सम्पादको की गिरफ्तारी पर ताली पीट पीट कर हंस रहे है।
 
Pushkar Pushp: धीरज जी , नकवी जी ने ज़ी न्यूज़ की तरफदारी कभी नहीं की. मैंने उनका फोनो सुना था. पुण्य प्रसून जी ने उनसे बात की थी. नकवी जी ने साफ़ शब्दों में इसे मीडिया और पत्रकारिता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था. लेकिन ज़ी न्यूज़ ने शातिराना तरीके से एकाध शब्दों को इधर – उधर करके लिख दिया कि संपादकों की गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण . वैसे नकवी जी स्टेटमेंट यहाँ चस्पा कर दे रहा हूँ ताकि किसी तरह का शक – सुबहा खतम हो जाए. दरअसल गलती आपकी नही , ज़ी न्यूज़ की है. ज़ी न्यूज़ अपनी साख बचाने के लिए नकवी जी की साख के साथ खिलवाड कर रहा है. “My phono on arrest of Zee News Editor Sudhir Chaudhaary and Zee Buisness Editor Sameer Ahulwalia is being misreported by Zee Channels. I strongly condemned the conduct of two editors in this case and said that it is an unfortunate event for all us journalists. I also said that in my view police decided to arrest them after it has fully satisfied that a prima facie case of extortion and criminal conspiracy exists against these two journalsits. I also said since police acted after forensic investigation of the CD, there is now no doubt on the authenticity of the CD on the basisi of whichthis case stands . I was asked that police didn’t take any action against those journalists whose conversations were there in Radia tapes, I said that case was related with ethical misconduct of the journalists and I condemned the conduct of those journalists but Sudhir and Sameer’s case is of criminal misconduct. Therefore police action doesn’t seem wrong to seem wrong to me. – Q.W.Naqvi.”
 
Gh Qadir: giraftari jis vajah se huyee hai voh media k liye durbhagypoorn hai..
 
Dhiraj Bhardwaj: मैंने भी ज़ी न्यूज़ की शरारत पर ही उंगली उठाने की कोशिश की है नक़वी सर.. लेकिन आप भी ये मानेंगे कि उन्हें ये स्पेस मिल पाया इसके लिए बयानों की साफगोई में कमी ही जिम्मेदार है.. आपने फेसबुक जैसे खुले मंच पर इतना कुछ कहा, इसके लिए भी साधुवाद के हक़दार हैं.. महाभारत की लड़ाई में अश्वत्थामा के वध की घोषणा की तरह ही ये मामला पेचीदा है.. हमने कहीं आपकी नीयत पर सवाल नहीं उठाया है..
 
Satish Pancham: "दुर्भाग्यपूर्ण" शब्द कोई कायमचूर्ण तो नहीं है कि हर उम्र, वर्ग, पेशे के लिये बिंदास इस्तेमाल किया जा सके ….. अब पत्रकार धरे गये तो धरे गये….जी न्यूज वाले उसे अपने हिसाब से कायमचूर्ण की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं….हद है। रही बात मीडिया के लिये दुर्भाग्य होने की तो किस किस के दुर्भाग्यता कहा जाय……छोड़िये……की फर्क पैंदा ऐ 🙁
 
Satish Pancham : लोग यदि भूल गये हों तो याद दिला दूं कि निर्मल बाबा को बड़ा करने में न्यूज चैनल ही थे, सुबह से वह News channels पर किसी को लड्डू बांटता, किसी को समोसे खिलाता…किसी को कचौड़ी खिलाकर ठीक करता लेकिन तब यही सौभाग्यपूर्ण मीडिया मुंह बंद कर बैठा रहा….वो तो जब फेसबुक, इंटरनेट पर मोर्चा खुलना शुरू हुआ उस शख्स के खिलाफ तब जाकर मीडिया की मजबूरन आंख खुली और ऐसे बोला जैसे उसे सोते से जगाया गया हो. तब मीडिया का दुर्भाग्य नहीं था शायद….संभवत: तब सौभाग्यकाल चल रहा था।
 
Qamar Waheed Naqvi: धीरज जी, ये कुछ एसएमएस हैं, जो कल रात मुझे मिले. आप उसे नहीं सुन पाये, यह मेरा दुर्भाग्य है:
Great Phono Dada! Intni bebaki se shayd aur koi yeh batein nahi kah pata. It was real pleasure to hear you on Zee News. Rakesh
Ur statement is being run by zee news in wrong contest. It looks that ur against Sudhir and Sameer's arrest. Rakesh
Sir, aapka phono kuchh aur kah raha hai aur Zee me flash chala raha hai- sampaadko ki giraftari durbhaagyapoorn- Qamar Wahi Naqvi (Naval, Lucknow)
Dada amazing comment on Zee awesome . Regards Manish
 
Vipin Rathore: कुछ लोग इंटरनेट पर जी न्यूज़ के संपादकों की गिरफ्तारी की चर्चा करते समय यह भूल जाते हैं कि नवीन जिंदल कितने दूध के धूले हैं और देशहित में कितना काम कर रहे हैं। हिम्मत है तो जिंदल के भी राजनीति और व्यवसाय की जांच करा लो…शर्म आती है देश की मीडिया जगत की दोगलई पर..
 
Ramakant Roy: मैं कहूँगा कि जिंदल पर भी उसी तत्परता से कार्यवाई होनी चाहिए.
 
Dhiraj Bhardwaj: नक़वी सर, आपकी साफगोई का मैं भी कायल हूं, लेकिन अगर ऐसा ही था तो आपको ज़ी न्यूज़ से शिकायत क्यों है..? आपका फोनो तो रात को चला था.. आज सुबह का किस्सा सुनिये.. ज़ी न्यूज़ वालों ने भाजपा के मीडिया सैवी नेता मुख्तार अब्बास नकवी से अपने पक्ष में बयान दिलवा लिया, फिर फुल प्लेट में खबर चला दी कि "नक़वी ने कहा: एमरजेंसी जैसे हालात.." मेरे पास भी कई मित्रों के फोन आए जिन्होंने आपका फोनो पूरा सुना है.. सबने आपकी तारीफ की, लेकिन उनकी भी ये शिक़ायत रही कि अगर आप उन्हें दो टूक सुना देते तो ज़ी वालों को मनमानी व्याख्या करने का मौका नहीं मिलता.. अगर अब भी आपको इस आलेख से शिक़ायत हो तो कहें, मैं इसे वापस ले लेता हूं क्योंकि मैंने इसे आपके खिलाफ नही लिखा था..
 
Qamar Waheed Naqvi: मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं.

 
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये आलेख और प्रतिक्रियाएं उनकी फेसबुक वॉल पर हैं। उनसे dheeraj@journalist.com पर संपर्क किया जा सकता है)

बाल ठाकरे की सुरक्षा में भारी खामियां खोजी थी हेडली ने

 

मुंबई पर आतंकी हमलों की साजिश रचने वाले डेविड हेडली ने आतंकवादियों से कहा था कि बाल ठाकरे बहुत आसान निशाना हैं। हेडली ने 2008 में बांद्रा स्थित मातोश्री के आसपास भी छानबीन की थी। यह राजफ़ाश पत्रकार हुसैन जैदी ने अपनी जल्द प्रकाशित होने वाली किताब 'हेडली ऐंड आई' में किया है।
 
जैदी की किताब महेश भट्टे के बेटे राहुल भट्ट और लश्कर के आतंकवादी डेविड हेडली की दोस्ती पर आधारित है। मुंबई में आतंकी हमलों के लिए निशानदेही करने आए हेडली के मित्र रहे हैं। अपनी किताब में जैदी ने विस्तार से बताया है कि हेडली ने शिव सैनिक और जिम इंस्ट्रक्टर विलास की मदद से बाल ठाकरे के घर मातोश्री की पूरी छानबीन की थी।
 
पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हेडली दक्षिण मुंबई के एक जिम में अक्सर आता-जाता था। यहीं उसकी मुलाकात राहुल भट्ट और विलास से हुई थी। जैदी ने लिखा है कि हेडली ने मातोश्री की भारी सुरक्षा में कई खामियां खोज ली थीं।
 
जैदी की यह किताब हफ्ते भर में बाजार में आ जाएगी। इसके बारे में पीटीआई से बात करते हुए जैदी ने बताया कि किताब में हेडली के वे बयान भी हैं जो उसने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को शिकागो में दिए थे। जैदी बताते हैं कि हेडली ने ठाकरे का फैन होने के बहाने 15 मिनट तक मातोश्री में तस्वीरें खींची थीं।
 
मातोश्री घूमने के बाद हेडली ने राहुल भट्ट से कहा था कि बाल ठाकरे बहुत आसान निशाना है। हेडली ने कहा, "थोड़े से जुनूनी लोग आराम से सुरक्षा भेद कर ठाकरे तक पहुंच सकते हैं। मुझे समझ नहीं आया कि पुलिस उस सुरक्षा व्यवस्था पर इतना गर्व क्यों करती है।" 
 
2008 में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होटल मेरियट पर हमले की खबर को देखते हुए उसने राहुल से कहा था कि तुम देखना एक दिन मुंबई पर भी ऐसा ही हमला होगा।
 
सुरक्षा से संबंधित मुद्दों में इतनी रुचि दिखाने वाले हेडली के इरादों से राहुल आखिर वक्त तक अंजान थे। 10 नवंबर, 2008 यानी मुंबई हमले से 16 दिन पहले उसने सेटेलाइट फोन की मार्फत राहुल से संपर्क किया। फोन पर उसने राहुल को हिदायत दी थी कि वह कुछ दिनों तक दक्षिण मुंबई की तरफ न जाए।
 
26/11 के बाद दिसंबर महीने में उसने राहुल को फिर से फोन कर उसके व उसके परिवार के सुरक्षित होने की जानकारी ली और यह भी बताया कि उसे हमले के बारे में पहले से जानकारी थी।
 
हेडली ने लाहौर में गोल्फ खेलने का प्रशिक्षण लिया था। इस बहाने उसने महालक्ष्मी स्थित विलिंगटन गोल्फ क्लब के कई चक्कर लगाए। हमले की जांच शुरू होने के बाद फोन काल्स की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने राहुल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। 
 
मातोश्री के बाद हेडली दादर स्थित शिवसेना मुख्यालय शिवसेना भवन भी गया। उसने वहां मौजूद जनसंपर्क अधिकारी राजाराम रेगे से मुलाकात की थी। रेगे ने हेडली के साथ मिलकर कारोबार करने की योजना भी बनाई थी। इसे लेकर दोनों ने एक-दूसरे को कई ई-मेल भेजे थे।
 
दहशतवाद फैलाने के अपने मिशन को कामयाब बनाने के लिए हेडली महानगर के  सिद्धिविनायक मंदिर भी गया था। तब राहुल और विलास भी उसके साथ मौजूद थे।  उसने मंदिर से कुछ धागे भी खरीदे। उसमें से एक धागा मुंबई हमले के समय पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब की कलाई पर भी बंधा हुआ देखा गया था। इस दौरान राहुल और हेडली के बीच अच्छे संबंध बन गए थे। (एजेंसियां)
 

 

कसाब की ख़बर पर नज़र रखने में चूक गया मीडिया -जोगिंदर सिंह

 

सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह मुंबई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब की फांसी के बारे में किसी को कानों-कान खबर न लगने को मीडिया की नाकामयाबी मानते हैं। जोगिंदर सिंह का मानना है कि मीडिया ने इस संवेदनशील मसले को हल्के में ले लिया इसीलिये इस खबर से चूक गया।
 
जोगिंदर सिंह ने एक अखबार को कहा, "सरकार कभी भी ऐसे मामलों की पब्लिसिटी नहीं करती। फांसी देना बेहद संवेदनशील मामला होता है। मीडिया खबर को फॉलो करने में नाकाम रही। यदि पत्रकारों ने पिछले एक महीने के डेवलपमेंट्स को फॉलो किया होता तो सरकार इसे राज रखने में कामयाब नहीं रह पाती। दरअसल कसाब की फांसी का मामला इतना लटक गया था कि देश समेत पत्रकारों ने भी इसमें इंट्रेस्ट खो दिया था।"
 

आसान नहीं है राघवेन्द्र मुदगल की आवाज़ को खामोश कर देना

 

राघवेन्द्र से मेरा परिचय काफी पुराना था। उनका एक करीबी मित्र संजीव, जो पटना का ही रहने वाला है, मेरे काफी नज़दीक है। एक दिन अचानक उसका फोन आया कि वो और राघवेन्द्र पटना के एक पुलिस थाने में हैं और पुलिस उनपर मुकद्दमा बनाने जा रही है। मैं आनन-फानन में वहां पहुंचा, तो पता लगा कि वहां के एक स्थानीय दबंग ने उनके खिलाफ़ शिक़ायत की है।
 
 
जब डिटेल जानकारी मिली तो हंसी भी आई और गुस्सा भी। दरअसल, राघवेन्द्र सुबह चाय पीने निकले थे और चाय की दुकान पर कुछ स्थानीय लोगों ने उनसे एंकरिंग के डॉयलाग सुनाने की गुज़ारिश की। राघवेन्द्र भी मूड में आ गये उन्होंने न सिर्फ कुछ संवाद सुनाए, बल्कि बिहार में मौज़ूद गुंडा राज पर भी कुछ व्यंग्यात्मक टिप्पणियां कर दी। वहां मौज़ूद कुछ दबंगों को उनकी बात नागवार लगी और उन्होंने राघवेन्द्र को हड़का कर चुप कराने की कोशिश की। राघवेन्द्र भला कहां मानने वाले थे। बजाय चुप बैठने के, वो और जोर देकर अपनी बात कहने लगे। मामला बढ़ा और पुलिस तक पहुंच गया। मैंने किसी तरह उनका झगड़ा निपटवाया तब जाकर उन्हें छुट्टी मिली।
 
जब हम बाहर निकले तो मैंने हंस कर चाय की दुकान पर 'ज्ञान बांटने' की वज़ह पूछी, तो बड़े ही शायराना अंदाज़ में उन्होंने जवाब दिया, "बात जगह की नहीं, तथ्य की थी और अगर मैं उनसे सहमत नहीं हूं, तो चुप नहीं रह सकता।" मैंने तभी महसूस किया कि वो एक बड़े ही दमदार क्राइम रिपोर्टर थे। हालांकि वो दिल्ली में थे और मैं पटना में, इसलिए उनसे कभी-कभार ही मुलाक़ात का मौका नसीब हुआ, लेकिन एक-दो बार की मुलाक़ातों ने मेरे जेहन में उनके बारे में जो राय बनायी वह यह है कि वो अव्वल रिपोर्टर थे क्राइम रिपोर्टिंग की दुनिया के, लेकिन असल में वो मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं के प्रति बेहद संजीदा थे। 
 
इंतकाल के ठीक पंद्रह दिनों पहले उनसे मेरी बात हुई थी। वो बता रहे थे कि कैसे उन्हें किसी ने ऑफिस में माथे पर टीका लगा कर आने पर 'पंडित जी' कह कर टोका और कैसे वे झगड़ कर नौकरी छोड़ आए। मेरा ये मानना था कि वे किसी नौकरी से बंध कर रहने वाले पत्रकार ही नहीं थे। वो बेहद स्वतंत्र विचार के पत्रकार थे और उन्हें मालिकों की गुलामी और संपादकों की बंदिशें बर्दाश्त नहीं थी। वे ब्राह्मण थे और धार्मिक मान्यताओं और परम्पराओं में भरोसा करनेवाले थे लेकिन कोई उन्हें पंडित कह कर बुलाए, ये उन्हें मंजूर नहीं था।  वे हमेशा चाहते थे कि उनके दोस्त मित्र और संपादक उनकी पहचान या फिर उनके बारे में कोई राय उनके माथे के टीके से नहीं बल्कि उनके कामकाज के तरीके और उनके रोजमर्रा के व्यवहार से कायम करें। उन्होंने हमेशा पत्रकारिता की… कभी उस तरह नौकरी नहीं की, जिस तरह की चाकरी आमतौर पर आम पत्रकार करते हैं। 
 
राघवेन्द्र जब बेकारी के दिनों में थे तो पटना के पीटीएन चैनल में मैंने उन्हें काम करने का ऑफर दिया। वे आए, एक अलग ही नज़रिये के साथ। उन्होंने जो प्रोग्राम बनाए वो आज तक याद किए जाते है। मुझे याद है कि कैसे उनके दिनों में बिहार के मंत्रियों और आला अधिकारियों ने उनके कार्यक्रमों के लिए मुझे खासतौर से फोन कर बधाई दी थी। आज बेहद अफसोस होता है एक ऐसे मित्र को खो देने की जिसे शिद्दत के साथ चाहने के बावजूद शायद मैं उसे कभी अपना नहीं बना पाया या फिर उनका खास बनाने में बहुत कामयाब नहीं रहा। फिर भी जब भी उन्हें समय मिलता था, वो मुझे फोन करते थे।
 
फोन पर अक्सर राघवेन्द्र पत्रकारिता के पेंचीदा जीवन और संघर्ष की चर्चा करते थे। वैसे आज कई क्राइम रिपोर्टर पत्रकारिता की दुनिया में अपना नाम रौशन कर रहे हैं, लेकिन मेरा मन है कि राघवेन्द्र हमेशा उनके लिए एक मिसाल बने रहेगें। अपने मूल्यों और नैतिकता के साथ समझौता करके पत्रकारिता करना और अपने मूल्यों और नैतिकता के लिए हमेशा अपने मालिकों और संपादकों से संघर्ष करते हुए राघवेन्द्र की तरह पत्रकारिता करना अलग बात है।
 

मुझे आज भी यक़ीन नहीं होता कि राघवेन्द्र हमारे बीच नहीं हैं। मेरा ये मानना है कि राघवेन्द्र का शरीर बेशक शिथिल पड़ गया है, लेकिन उनकी आवाज़ को खामोश कर पाना नामुमकिन है।
 
(श्रीकांत प्रत्युष एक जाने-माने पत्रकार हैं। वे एक अरसे से ज़ी न्यूज़ के बिहार प्रमुख हैं और पीटीएन चैनल के भी सर्वेसर्वा हैं। ये आलेख उनकी वरिष्ठ पत्रकार धीरज भारद्वाज से बातचीत पर आधारित है।)

संझिया अरग के बाद अपडेट नहीं हुआ नीतीश कुमार का फेसबुक पेज

 

 
पटना में छठपूजा के दौरान हुए भीषण हादसे के बाद से जहां एक तरफ फेसबुक और ट्विटर पर बिहार सरकार की निंदा करने वाले स्टेटस अपडेट और पोस्टों की बाढ़ आ गयी है वहीं 'मीडिया सैवी' नीतीश कुमार का फेसबुक पेज खामोश पड़ा है। 
 
सोमवार शाम लगभग 5 बजे नीतीश कुमार के पेज पर छठपूजा के लिए सजे सूपों की तस्वीर के साथ एक संदेश ('संझिया अरग' के वक्त मुख्यमंत्री गंगा घाट पहुंच कर छठव्रतियों से आशीर्वाद लेंगे… आस्था के महापर्व छठ की शुभकामनाएँ…..) आया था। इस संदेश को मुख्यमंत्री जी के मॉडरेटरों और प्रशंसकों ने 318 जगह शेयर किया था और 2100 से भी ज्यादा लोगों ने पसंद किया है। कमेंट में अधिकतर शुभकामना संदेश हैं और इक्का-दुक्का निंदा वाली टिप्पणियां भी, लेकिन इसके बाद से इस पेज पर सन्नाटा पसरा हुआ है। न कोई आधिकारिक अपडेट, न कमेंट।
 
नीतीश कुमार का ये फैन पेज फेसबुक पर खासा लोकप्रिय है। इसे लाइक करने वालों की तादाद साढ़े तैंतीस हज़ार से भी ज्यादा है। पेज पर नीतीश कुमार के बारे में लिखा है कि उनमें प्रधानमंत्री बनने की क्षमता पूरी है। पेज के मुताबिक, " एक बार फिर लोग ये कहने लगे हैं कि नीतीश में प्रधानमंत्री वाला मेटेरियल और मेटल मौजूद है। शासन का एक अपना मॉडल खड़ा कर दिया है नीतीश ने। इधर नीतीश बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ते हैं और उधर दिल्ली में कांग्रेस के अधिवेशन में सोनिया और मनमोहन सिंह उसी नीतीश मॉडल को फॉलो करते नजर आते हैं।"
 
इस पेज पर उनकी छवि नरेंद्र मोदी से अलग बताने की कोशिश की गयी है। पेज पर लिखा है "बिहार के ऱणभूमि पर उन्होंने अभी-अभी बड़े-बड़े सूरमाओं को पछाड़ा है । मनमोहन, सोनिया, राहुल, लालू, पासवान सब उनके सामने धराशाई हुए हैं। नरेन्द्र मोदी बिहार आना चाहते थे , वह भी पीएम के कैन्डिडेट हैं , पार्टी उनकी अखिल भारतीय छवि के बारे में चितिंत रहती है, लेकिन नीतीश को नहीं मंजूर था तो नरेन्द्र मोदी बिहार नहीं आ सके ये नीतीश की ताकत है।"
 
बहरहाल, कुछ लोगों ने पेज पर पोस्ट भी डाले हैं जिनमें हादसे का ज़िक्र है। हालांकि ईमानदारी की तारीफ़ करने वाली बात ये है कि इन निंदा वाले कमेंट्स और पोस्ट्स को भी डिलीट नहीं किया गया है, लेकिन पेज की सेटिंग कुछ इस तरह की है कि उन्हें प्रमुखता से नहीं पढ़ा जा सकता।

आतंकियों के हमले में आठ पत्रकार घायल, टीवी चैनल बंद

 

इज़रायली वायु सेना द्वारा गाज़ा पट्टी पर की गई बमबारी के बाद यरूशलेम स्थित टीवी चैनल "अल-कुद्स" के प्रसारण बंद हो गए हैं। इसका कारण यह बताया गया है कि उस 11-मंज़िला इमारत पर एक रॉकेट फटने से इस टीवी चैनल के कार्यालय को भारी क्षति पहुँची है।
 
छह पत्रकार घायल हुए हैं। इज़रायली विमानों द्वारा रात के समय की गई बमबारी में एक बच्चे सहित दो फ़िलिस्तीनी मारे गए और कम से कम 20 लोग घायल हो गए। मीडिया की इमारत को दूसरी बार निशाना बनाया गया है। 
 
इस बीच, इज़रायल द्वारा विमानों और रॉकेट लांचरों से गाज़ा पट्टी पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। उधर हमास की सशस्त्र शाखा "ऐज़्ज़ेद्दीने अल-क़सम ब्रिगेड" ने रविवार को हिब्रू भाषा में एक वीडियो जारी किया है जिसमें इस बात की चेतावनी दी गई है कि इज़रायल के विरुद्ध आत्मघाती हमलों का एक अभियान शुरू किया जा सकता है।

क्या ‘डरे हुए’ मीडिया ने किया ठाकरे का ‘कारपेट कवरेज़’?

 

शिव सेना प्रमुख क्लिक करें बाल ठाकरे की मृत्यु को जिस तरह से भारतीय टीवी चैनलों पर दिखाया गया उसे मीडिया विश्लेषक शैलजा बाजपेई "कारपेट कवरेज" कहती हैं.
 
शैलजा जो कि इन्डियन एक्सप्रेस समूह में काम करती हैं वो कहती हैं कि जिस तरह सीएनएन आईबीएन के राजदीप सरदेसाई और टाइम्स नाउ के संपादक अर्णब गोस्वामी सहित हिन्दी चैनलों के संपादक ठाकरे की अंतिम यात्रा के कवरेज़ पर पूरा दिन टीवी पर खुद बिताते हैं यह कितना जायज़ है.
 
शैलजा सवाल करती हैं, "क्या दुनिया में कोई और समाचार नहीं था बाल ठाकरे के सिवा, कोकराझाड़ की हिंसा का अभी तक कोई अंत नहीं हुआ है, संसद का एक महत्वपूर्ण सत्र शुरू होने वाला है, गाज़ा और इसरायल के बीच का तनाव चरम पर है."
 
शैलजा ठाकरे को दिए गए कवरेज पर टिपण्णी करती हुए कहते हैं कि "ठीक है क्लिक करें ठाकरे के विवादित पहलुओं पर टिप्पणियाँ थीं लेकिन क्या इतना ज़्यादा कवरेज़ और उनकी तारीफों के पुल कि वो निजी जीवन में बहुत ही अच्छे और ईमानदार आदमी थे यह कहना क्या सही है."
 
एक और मीडिया समीक्षक सुधीश पचौरी कहते हैं "किसी आदमी के मरने के बाद उसकी बुराई मत करो यह सही है लेकिन उसके चरित्र को इतना निरमा मत लगाओ कि निरमा भी शर्मा जाए."
 
पचौरी टीवी चैनलों पर आगे सवाल उठाते हुए कहते हैं " मनमोहन सिंह जैसे कम बोलने वाले आदमी को तो आप फांसी दे दो लेकिन जो उग्र है उसके आप बधाई गाओ. यह कहाँ तक सही है."
 
पचौरी आगे कहते हैं कि टीवी चैनलों के कवरेज को देख कर लगा कि चैनल "डरे हुए हैं और वो यह मान कर कवरेज़ कर रहे हैं क्लिक करें शिव सैनिकों में उग्र होने की क्षमता है. इसका अर्थ यह हुआ कि मनमोहन सिंह अगर कल से अपना डंडा तोड़ना और रूतबा दिखाना शुरू कर दें तो आप उनका भी प्रशस्ति गान शुरू कर दें."
 
सुधीश पचौरी का यह भी मानना है की इस कवरेज़ से एक और संदेश आता है की मीडिया ऐसे लोगों को पसंद करता है जो की तानाशाह हों और किसी की ना सुनाता हो.
 
पचौरी कहते हैं " मेरे मन में कोई दुराव नहीं है जो गुजर गया उसको क्या बोलना उससे तो इतिहासकार निपटेंगे लेकिन मीडिया तो बताई वो किससे डरा हुआ था किसे खुश करने की कोशिश कर रहा था ? बाल ठाकरे तो गुज़र गए क्या उनके समर्थकों को या बाज़ार को."
 
हिंदी के प्रमुख समाचार चैनल आईबीएन 7 के प्रबंध संपादक आशुतोष आलोचकों समीक्षकों की टिप्पणियों को सिरे से नकार देते हैं.
 
आशुतोष का कहना है "टीवी चैनलों को गाली देने वाले सोचें कि क्या हमने इसके पहले कभी बाल ठाकरे के इस पक्ष पर चर्चा नहीं की कि वो विभाजन की राजनीति करते हैं, वो भारतीय की मूल अवधारणा के खिलाफ काम करते थे."
 
आशुतोष जोर दे कर कहते हैं "टीवी चैनलों से बाल ठाकरे और उनके शिव सैनिक इसलिए नाराज़ रहते थे क्यों कि वो उनका उनके मन के माफिक कवरेज नहीं करते थे.लेकिन उनकी मृत्यु के दिन यह ठीक नहीं होता. तमाम विवादों के बावजूद यह कौन नकार देगा कि ठाकरे एक चर्चित नेता थे."
 
जो लोग टीवी चैनलों की निंदा कर रहे हैं वो टीवी के चरित्र को नहीं समझते और शायद समझना भी नहीं चाहते.
 
 
(लेखक बीबीसी में संवाददाता हैं और उनका ये आलेख बीबीसी हिन्दी में प्रकाशित हुआ है। वहीं से साभार)

केआरके ने ठाकरे की मौत को रावण का अंत बताया

एक तरफ़ जहां आमची मुंबई का हर छोटा-बड़ा कलाकार मरहूम बाल ठाकरे की शान में कसीदे पढ़ने में जुटा है वहीं फिल्म 'देशद्रोही' और बिग बॉस से चर्चा में आए केआरके यानी कमाल राशिद ख़ान ने उनके व्यक्तित्व खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। बालासाहेब की तुलना केआरके ने रावण से की है।

उन्होंने ट्वीट किया है, "जब रावण मरा था, तब भी पूरी लंका रोयी थी। लेकिन आखिर में वो था तो रावण ही और उसे हमेशा रावण के नाम से ही जाना जाएगा।"

कमाल ने यह भी लिखा है, "बालासाहेब के अच्छे कामों में सन् 1993 के दंगे, हजारों बिहारियों की पिटाई औऱ लोगों के दिलों में उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत का ज़हर घोलना आदि शामिल हैं।" केआरके ने लिखा है, "इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक, जिनको लोग फॉलो करते हैं, और दूसरे जो खुद को जबर्दस्ती फॉलो करवाते हैं। बालासाहेब ठाकरे जी दूसरे किस्म के इंसान थे।"

इतना ही नहीं कमाल खान ने अपनी ट्वीट्स में आम आदमी से सवाल किया है कि असली हीरो और देशभक्त सुनील दत्त की मौत के समय मुंबई बंद क्यों नहीं किया गया। क्या लोगों के दिल में उनके प्रति प्यार और सम्मान नहीं था?"

हमेशा विवादित ट्वीट्स करके कमाल ख़ान भले ही विवादों से बच निकलते हों, लेकिन हो सकता है इस बार ऐसी ट्वीट्स से उनकी मुसीबतें बढ़ जाएं क्योंकि शिवसैनिकों का गुस्सा पूरे उफान पर है।

थ्री-डी अवतार में वोट मांगे मोदी ने, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी ने बिगाड़ा खेल

गुजरात में चुनाव प्रचार में थ्री डी तकनीक का इस्तेमाल करने का मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी का दांव कमजोर साबित होता दिख रहा है. बार-बार आवाज गायब होने से सूरत में लोग मोदी की सभा छोड़कर चलते बने.  गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को थ्री डी तकनीक से प्रचार का आगाज किया. मोदी खुद गांधीनगर में थे, लेकिन एक ही समय में मोदी ने गुजरात के चार शहरों में जनसभा की.

मोदी के भाषण को लोग अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में देख पा रहे थे. बड़े मैदानों में लगी स्क्रीन पर मोदी का लाइव टेलीकास्ट हुआ.  मोदी की इस अनोखी जनसभा को देखने के लिए लोग भी काफी उत्सुक दिखे. लेकिन बार-बार आवाज गायब होने से लोग भी परेशान हो गए.  सूरत में तो पहले ही भीड़ कम थी ओर जब थ्री डी प्रचार में थोड़ी दिक्कत हुई तो बचे-खुचे लोग भी उठ कर जाने लगे.

तकनीकी दिक्कतों के बावजूद नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. कांग्रेस के उस बयान का भी जवाब दे दिया जिसमें उनकी तुलना बंदर से की गई थी.  उन्‍होंने कहा, 'ये मोदी तो चूहा है चूहा. आपको चूहे का महत्‍व पता नहीं. अरे चूहा तो विघ्‍नहर्ता गणेश जी का वाहन है. मुझे गर्व है कि हमारी पीठ पर विघ्‍नहर्ता गणेश विराजमान होते हैं. और इस वजह से गुजरात में कोई विघ्‍न नहीं होता है.'

हालांकि इस तकनीकी गड़बड़ी से मोदी के प्रचार पर पानी फिरता नजर आ रहा है, लेकिन न मोदी के प्रशंसक मायूस हैं और ने ही उनके लिए 'बिग बॉस' छोड़कर आए नवजोत सिंह सिद्धू.  बीजेपी सांसद नवजोत सिंह सिद्धू के मुताबिक, इस तरह से थ्री डी प्रचार विश्‍व में पहली बार हुआ है. इतिहास बना है. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकॉर्ड में जोड़ने वाले को मान मिलता है और तोड़ने वाले को मान. मोदी ने सर ने विज्ञान का सहारा लेकर लोगों और दिलों को जोड़ा है.  गौरतलब है कि गुजरात में 13 और 17 दिसंबर को मतदान होना है. नतीजे 20 दिसंबर को आएंगे. (एबीपी)

कस्तूरी टीवी के रिपोर्टर नवीन सूरिन्जे को जबरिया फंसाया कर्नाटक पुलिस ने

मंगलोर में कस्तूरी टीवी के रिपोर्टर नवीन सूरिन्जे की गिरफ्तारी पर दक्षिण भारत के लगभग सभी पत्रकार संगठन एकजुट होने लगे हैं। नवीन को 28 जुलाई को शहर में हुई एक बर्थ डे पार्टी में लडकियों पर हमला करने वाले हमलावरों के साथ ही 7 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया है। 

दिलचस्प बात ये है कि नवीन को साढ़े तीन महीने बाद उसी मामले में 44वां आरोपी बनाया गया है जिसके बाकी 43 आरोपियों की पहचान उसी टेलीविजन फूटेज से की गयी है जिसे नवीन ने अपने कैमरामैन के साथ मिल कर रिकॉर्ड किया था। मंगलोर, बंगलौर और कर्णाटक के कई शहरों में पुलिस की इस उटपटांग कार्रवाई की तीखी आलोचना हो रही है। जांच में ये भी पता चला है कि नवीन को जुलाई में लड़कियों पर हो रहे हमले की सूचना उपद्रवियों में से किसी ने नहीं दी थी। इसका मतलब ये हुआ कि दंगाइयों से सांठ-गांठ का आरोप पूरी तरह निराधार है।

उधर नवीन की जमानत याचिका पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है क्योंकि 13 नवम्बर को मंगलोर की निचली अदालत ने सुनवाई टल गयी। नवीन के समर्थकों का कहना है कि कर्नाटक की भाजपा सरकार अपने समर्थक उत्पातियों की गिरफ्तारी से बौखला गयी है और बदला लेने के लिए खबर दिखाने वाले पत्रकार को ही फंसा रही है।

 

नारायणसामी का सच सामने लाने को पीटीआई ने ज़ारी किया इंटरव्यू का टेप

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी और समाचार एजेंसी पीटीआई की तकरार में मंत्री महोदय का पलड़ा हल्का होता दिख रहा है। पिछले एक-दो दिनों तक चले आरोप-प्रत्यारोप के बाद आख़िरकार समाचार एजेंसी पीटीआई ने उनके झूठ पर से पर्दा उठा ही दिया। एजेंसी ने अपने संवाददाता के साथ मंत्री की हुई बातचीत का वह टेप जारी कर दिया है जिसमें नारायणसामी कहते हुए पाए गए हैं कि सरकार सीएजी को बहुसदस्यीय बनाने के प्रस्ताव पर सक्रियता से विचार कर रही है।

ग़ौरतलब है कि दो दिनों पहले पीटीआई ने एक ख़बर में कहा था कि केंद्रीय मंत्री वी. नारायणसामी ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को बहुसदस्यीय बनाने की बात कही थी। इसके बाद से नारायणसामी और सरकार की आलोचना शुरू हो गई थी और इसके परिणामस्वरूप मंत्री महोदय अपने बयान से पलट गए थे। उसके बाद पीटीआई ने बातचीत का ऑडियो टेप जारी किया, जिसमें नारायणसामी का झूठ सामने आ गया। 

कैग को बहुसदस्यीय संस्था बनाए जाने के अपने पहले के बयान से सरकार रविवार शाम को पलट गई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने एक साक्षात्कार में समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया था कि कैग को बहु सदस्यीय निकाय में तब्दील किए जाने पर सरकार विचार कर रही है।

पीटीआई से साक्षात्कार के दौरान नारायणसामी से पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक वीके शुंगलू की इस सिफारिश के बारे में पूछा गया था कि कैग को बहु सदसयीय निकाय बनाया जाना चाहिए। मंत्री ने जवाब में कहा था, ‘‘इस (कैग को बहु सदस्यीय निकाय बनाए जाने की शुंगलू समिति की सिफारिश) पर सक्रियता से विचार चल रहा है। सरकार इस पर सक्रियता से विचार कर रही है।’’

मंत्री बाद में अपने बयान से पलटते दिखाई दिए और टेलीविजन चैनलों से कहा कि उनके बयान को ‘तोड़ मरोड़ कर’ पेश किया गया है। जबकि समाचार एजेंसी का कहना है कि वह अपनी खबर पर कायम है। नारायणसामी ने चैनलों से कहा था कि उन्होंने पीटीआई के संवाददाता से शुंगलू समिति की छह रिपोर्ट सरकार के विचाराधीन होने के बारे में कहा था, लेकिन अब टेप में उनकी सच्चाई सामने आ गई।

 

अमिताभ बच्चन ने बिहार पुलिस को धमकाया तो इसका फ़ायदा किसे मिला?

अमिताभ बच्चन अभिनेता हैं.. नूडल्स के जरिये दो मिनट में खुशियां फैलाते हैं। ठंढा तेल हो या मोटरकार, कुछ भी बेचने में पीछे नहीं रहते। टीवी पर सोलह सवालों में आम आदमी को करोड़पति भी बना रहे हैं। यही अमिताभ बढ़-चढ़ कर समाज सुधार की बातें भी करते हैं। पल्स पोलियो अभियान में मुफ्त में संदेश भी दिया था।

शायद बिहार में पुलिस ने उनके इसी चेहरे को सच्चा समझ लिया और कैमूर के नक्सली इलाके अघौरा में शिक्षा और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के संदेश वाले पोस्टर में उनकी तस्वीर लगवा दी। कैमूर पुलिस ने पोस्टर में अमिताभ की तस्वीर और केबीसी के लिए लिखी गई कविता का भी इस्तेमाल कर डाला। बस गलती ये हो गयी कि अमिताभ को या केबीसी का प्रसारण करने वाले चैनल को इस बारे में कुछ बताया नहीं। 

अब अमिताभ ठहरे सुपर स्टार। अपने जमाने के एंग्री यंग मैन। गुस्सा तो आना ही था, सो पुलिस को हड़का लिया। मुंबई पुलिस तो थी नहीं, जिसके ऐनुअल फंक्शन में बिना फीस लिए हाज़िरी बजाने पहुंचना पड़े तो भी कोई अफसोस नहीं। बिहार, वो भी नीतीश कुमार के स्टेट का मामला.. मोदी, अमर सिंह, सोनिया.. किसी से कोई समीकरण नहीं रखने वाले को कैसे अपने ब्रांड बेचने दें? ट्विटर पर धमकी दे डाली, "ये तो मानहानि है, हटा लो वर्ना…"

बिहार पुलिस के मुखिया अभयानन्द। वो भी खुद को कम नहीं समझते थे। एक तो नीतीश कुमार का वरद हस्त, उपर से सुपर-30 नाम के कोचिंग इंस्टीट्यूट के फाउंडर रहने की शोहरत। शायद सोच रहे थे (या हो सकता है, उनके मातहत अधिकारियों ने ही खुशामद के लिए सोचा हो) कि आनंद कुमार ने 30 छात्रों के दम पर कोचिंग का बिजनेस चमका दिया तो उसी ब्रांड को बिग-बी के फोटो से भी एंडोर्स करवा देंगे। सरकार को निःशुल्क कोचिंग का लारा लप्पा दिखा कर मीडिया पब्लिसिटी भी करवा लेंगे सुपर-30 का। लेकिन एक ट्वीट ने रातों-रात सारे किए-कराए पर पानी फेर दिया। 

अमिताभ ने जो कहा कि वे इस बारे में अपने वकीलों से बात कर रहे हैं, तो डीजी साहब ने फौरन कैमूर के पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किया कि हर जगह से अमिताभ के पोस्टर हटवा दिया जाए। कैमूर जिले के एसपी उमाशंकर सुधांशु ने फौरन आदेश की तामील की। फिर मीडिया को बताया कि अब पोस्टर हटा लिए गए हैं, लेकिन इस नक्सल प्रभावित जिले में युवाओं को माओवादियों के प्रभाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया था। उन्होंने सारी गलती अपने मत्थे मढ़ ली और माफ़ी भी मांग ली। सुधांशु ने व्यंग्यात्मक माफ़ीनामे में कहा, “मैं अमिताभ बच्चन से माफी मांगता हूं कि उनके पोस्टर युवाओं को शिक्षित और प्रेरित करने के लिए इस्तेमाल किए गए।”

अभयानंद साहब इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। पुलिस अधिकारी बार-बार पत्रकारों को समझा रहे हैं कि उन्होंने अमिताभ बच्चन के फोटो का इस्तेमाल किसी दुर्भावना से नहीं, बल्कि पूरी तरह जनहित में किया। पुलिस यह भी कह रही है कि इसका कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था। हालांकि सुपर-30 कोई व्यावसायिक उद्यम है या नहीं, इस सवाल को सभी टालने में जुटे है। अमिताभ बच्चन की तस्वीर का अघौरा के लोगों पर कितना असर होता ये तो नहीं पता, लेकिन कोचिंग की ब्रांडिंग तगड़ी हो रही थी ऐसा बिहार के कई दूसरे कोचिंग इंस्टीच्यूट वालों का मानना है। 

ग़ौरतलब है कि पुलिस ने ये पोस्टर ‘अधौरा-30’ नाम के एक अभियान में इस्तेमाल किए थे। अधिकारियों के मुताबिक़ इसका मकसद ‘सुपर-30’ की तर्ज़ पर नक्सल प्रभावित अधौरा खंड के 30 प्रतिभाशाली युवाओं को चुनना है जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा। लेकिन ये अभियान कितना निज़ी होगा और कितना सरकारी ये किसी को नहीं पता। कम ही लोगों को पता है कि सुपर-30 में तीस छात्रों को मुफ़्त कोचिंग देकर आईआईटी में दाख़िला दिलाने की प्रसिद्धि के कारण इंस्टीच्यूट के पास हजारों की संख्या में पेड ऐडमिशन भी आते हैं जिनसे कोचिंग के संचालकों को करोड़ों की आमदनी होती है।

निज़ी कोचिंग वाले बेशक सरकार से 30 युवकों को पढ़ाने का कोई खर्च न लें (जैसा कि वे सुपर-30 में भी करने का दावा करते हैं), लेकिन चुनने और उन्हें ट्रेनिंग के दौरान रखने का खर्च कितना आएगा ये स्पष्ट नहीं है। पोस्टरों को डिज़ाइन करवाने, बनवाने और लगवाने का खर्च कितना आया और उसकी पब्लिसिटी होने से सुपर-30 की ब्रांडिंग कितनी होती ये भी सोचने का विषय है। फिर अघौरा-30 के पोस्टर की कॉपीराइटिंग भी इस स्तर की नहीं थी कि उसे सुपरस्टार के स्तर का कहा जा सके।

बहरहाल, अमिताभ कैमूर में लगे अपने पोस्टर को लेकर कितने संज़ीदा हैं और उन्होंने इसपर ट्वीट क्यों किया ये कइयों की समझ से परे है। क्योंकि अब ये पोस्टर बेशक़ हट गया हो, लेकिन जो इसका मूल मक़सद था, यानी मीडिया की पब्लिसिटी हासिल करना, वो सुपर स्टार की टिप्पणी के बाद कम होने की बज़ाय और भी ज्यादा अच्छी तरह पूरा हो गया।

लेखक धीरज भारद्वाज जाने-माने पत्रकार हैं और प्रिंट, टीवी तथा वेब तीनों माध्यमों पर उनका अच्छा नियंत्रण है।

ए2जेड के नहीं, ए टू जेड के रिपोर्टर ने किया था धंधे वालियों का स्टिंग ऑपरेशन

 

ए2जेड चैनल के वेश्यावृत्ति वाले स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित ख़बर पर उस वक्त भले ही चैनल के किसी अधिकारी ने बात करने से इंकार कर दिया हो, अब उन्होंने स्पष्टीकरण भेजा है।
 
चैनल के सूत्रों का दावा है कि साउथ वेस्ट दिल्ली के द्वारका में जो सेक्स रैकेट का स्टिंग ऑपरेशन किया था वो उनके चैनल के रिपोर्टर ने नहीं, बल्कि पूर्वी दिल्ली के घोंडा इलाके में मौज़ूद एक केबल नेटवर्क चैनल 'ए टू जेड वारदात' के रिपोर्टर ने किया था। चैनल के मेल के मुताबिक़ "नजर हर जुर्म पर" के टैगलाइन वाले इस चैनल के नाम में कुछ समानता है जिसके कारण उनके चैनल को बदनामी मिल रही है। 
 
 
मेल में कहा गया है कि जिस चैनल के रिपोर्ट्स द्वारा स्टिंग ओपरेशन करके कुछ लोगो को गिरफ्तार करवाए जाने की खबर पिछले दिनों कुछ अखबारों व मीडिया पोर्टलों में छपी उसका करोलबाग से चलने वाले ए2जेड न्यूज चैनल से कोई लेना-देना नहीं है।
 
मेल में लिखा है, "दो दिन पहले इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने भी बिना पुलिस की एफआईआर को ठीक से पढ़े इस सैटेलाइट न्यूज चैनल ए2जेड का नाम छाप दिया। जिसकी मीडिया जगत में काफी भर्त्सना हुई है। साथ ही एक चैनल को बिना वजह बदनाम करने की कोशिश करने वाले अखबार व मीडिया पोर्टलों से स्पष्टीकरण छापने की मांग भी की जा रही है। इस एफआईआर में साफ साफ लिखा है कि उक्त 'ए टू जेड वारदात' नाम का एक चैनल है जिसनें पुलिस से मिल कर कालगर्ल्स को पकडवाया। इस चैनल ने अपने नाम में '2' नहीं लिखकर इंगलिश में 'टू' और आगे 'वारदात' लिखा हुआ है। ए2जेड न्यूज चैनल के प्रबंधकों ने संबंधित विभागों, अखबारों व मीडिया पोर्टलों से आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है।"
 

ब्लैकमेलिंग के मामले में फिर फंसे इंडिया टीवी के मीडियाकर्मी, डॉक्टर से मागी थी फिरौती

दर्शकों के बीच इंडिया टीवी की छवि चाहे जैसी भी हो, दिल्ली पुलिस की क्राइम डायरी में चैनल की प्रसिद्धि दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। अभी दक्षिण दिल्ली में चैनल की क्राइम रिपोर्टर भूमिका शर्मा की ब्लैकमेलिंग का केस ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इसके और दो मीडियाकर्मी ऐसे ही एक दूसरे मामले में पूर्वी दिल्ली जिला पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। मामला एक यूनानी डॉक्टर से ब्लैकमेलिंग का है और इनका तीसरा साथी रंगे हाथ पैसा लेते गिरफ्तार हुआ है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक मंडावली इलाके के एक यूनानी डॉक्टर मुकेश कुमार ने रिपोर्ट लिखवायी थी कि कुछ तथाकथित पत्रकारों ने उन्हें मरीजों को अंग्रेजी दवा लिखते हुए फिल्मा लिया है और अब उनसे पांच लाख रुपये मांग रहे हैं। पुलिस के मुताबिक तीनों ने मुकेश कुमार को धमकाया था कि अगर वो पैसे नहीं देंगे तो उनकी वीडियो फिल्म इंडिया टीवी पर प्रसारित कर दी जाएगी। तीनों डॉक्टर को लगातार फेन पर भी धमकी दे रहे थे। 

पुलिस ने जाल बिछा कर डॉक्टर से डेढ़ लाख रुपये पर सौदा निपटाने के लिए कहा। तीनों 'पत्रकारों' ने तय किया कि वे वीडियो क्लिप को पेन ड्राइव में दे देंगे और तयशुदा रक़म ले लेंगे। सौदे के अनुसार ये अदला-बदली मयूर विहार के एक निजी अस्पताल में होनी थी। शुक्रवार को करीब 9:45 बजे रात को इनमें से एक आरोपी हिमांशु मिश्रा को पुलिस ने रंगे हाथ ग़िरफ्तार कर लिया। हिमांशु की निशानदेही पर पुलिस ने फौरन सौरभ त्रिपाठी और सचिन मिश्रा को धर दबोचा। जांच में पता चला कि ये दोनों इंडिया टीवी के मीडियाकर्मी हैं।

पुलिस के मुताबिक़ तीनों ने स्वीकार किया है कि वे डॉक्टर से फिरौती मांग रहे थे। हिमांशु जबलपुर युनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक है और बेरोज़गार जबकि बाकी दोनों इंडिया टीवी के तक़नीकी विभाग में कार्यरत हैं। पुलिस इस जांच में जुटी है कि क्या ये तीनों कहीं इंडिया टीवी के किसी संपादक के इशारे पर तो काम नहीं कर रहे थे? ग़ौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली जिला पुलिस ने हाल ही में ऐसे ही एक अन्य मुकदमे में इंडिया टीवी की क्राइम रिपोर्टर भूमिका शर्मा पर मामला दर्ज़ किया है। उस मामले में भी पुलिस चैनल के संपादकों की संलिप्तता की जांच कर रही है।

उधर इंडिया टीवी के जीएम (एचआर) पुनीत टंडन ने मीडिया को बताया है कि पूर्वी दिल्ली में पकड़े गए मीडियाकर्मी उनकी एडिटोरियल टीम का हिस्सा नहीं थे और उन्हें भी भूमिका की तरह ही सस्पैंड कर दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि रंगे हाथ पकड़े गये आरोपी का भी चैनल से कोई वास्ता नहीं है। टंडन के मुताबिक़ इंडिया टीवी ने इन मामलों की आंतरिक जांच भी शुरु कर दी है।


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पढ़िए भास्कर बाबा के उपदेश : ‘खुशी’ के लिए पोर्न साइटें देखें महिलाएं

अभी पोर्न साइटों के विज्ञापन पर मचा हंगामा शांत भी नहीं हुआ है कि दैनिक भास्कर डॉट कॉम फिर अपनी अश्लील हरकतों से चर्चा में आ गया है। जयपुर की एक पाठक ने फोन करके बताया कि अब भास्कर डॉट कॉम ने न सिर्फ महिलाओं के पोर्न देखने की वकालत की है बल्कि उन्हें आचार्य रजनीश के उपदेशों की तरह बाक़ायदा सीख भी दी जा रही है कि पोर्न देख कर कैसे तनाव कम किया जा सकता है।

वेबसाइट के मुताबिक, "हो सकता है पोर्न फिल्में देखना आपको पसंद न हो, लेकिन यदि आप तनाव में हों और इससे राहत पाना चाहतीं हैं, तो पोर्न देखने का आइडिया बुरा नहीं है। इससे आप तनावरहित हो जाएंगी। यदि ऑफिस में दिन बुरा बीता हो या फिर ब्वॉयफ्रेंड के साथ झगड़ा हुआ हो, तो पोर्न देखने का आइडिया आजमा कर आप पछताइएगा नहीं।"
पढ़ने में न आ रहा हो तो तस्वीर पर क्लिक कर दें…


वेबसाइट ने उत्तेजक तस्वीरों के साथ छपे इस फ़ीचर में आगे लिखा है, "पोर्न वीडियो से बेहतर और कोई साथी नहीं हो सकता। इसमें आप अपने फंतासी पार्टनर के साथ खूब मजे कर सकती हैं।"

अगर ये पेज किसी ख़बर के लिहाज़ से होता तो किसी मनोवैज्ञानिक या सर्वे रिपोर्ट का हवाला होता, लेकिन ये शुद्ध रूप से उपदेश की शैली में है। इतना ही नहीं, भास्कर डॉट कॉम ने तो पोर्न साइटों की वक़ालत में यहां तक लिख दिया है कि महिलाएं इन्हे 'एजुकेशनल टूल' की तरह देखें। अब भास्कर वाले किस-किस महिला को क्या-क्या सिखाना चाहते हैं या समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं ये शायद वे ही तय करेंगे।

ए-2-ज़ेड चैनल के पत्रकार ने ‘स्टिंग ऑपरेशन’ से पकड़ा ‘धंधे वालियों’ को

 

टीवी चैनलों के स्टिंग ऑपरेशनों से कभी सरकार की नींवें हिल जाती थीं तो कई स्टिंग ऑपरेशन ऐसे भी हुए जिन्होंने भ्रष्ट तंत्र की ईंट से ईंट बजा कर रख दी, लेकिन जब छुटभैये चैनलों की भरमार हो गयी है तो ज़ाहिर तौर पर स्टिंग ऑपरेशन भी उसी स्तर के होंगे। खुद को आसाराम बापू का परम समर्थक बताने वाले खबरिया चैनल ए-2-ज़ेड के एक रिपोर्टर ने एक ऐसे ही अनोख़े स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया है जिसमें उन्होंने दो ऐसी महिलाओं को गिरफ़्तार करवाया है जो कथित तौर पर जिस्मफरोशी का धंधा करती थीं।
 
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के अडिशनल कमिश्नर ए के ओझा के मुताबिक उन्होंने द्वारका में दो महिलाओं को ए-2-ज़ेड न्यूज़ चैनल के एक पत्रकार राकेश कुमार की शिकायत पर पकड़ा है। राकेश ने रविवार को द्वारका के एक मकान में उन महिलाओं का 'ऑफर' देते हुए 'स्टिंग ऑपरेशन' किया है। पुलिस ने दोनों महिलाओं पर अनैतिक व्यापार (निषेध) कानून के तहत मुकदमा दर्ज़ किया है।
 
पुलिस में दर्ज़ एफआईआऱ के मुताबिक पिछले शुक्रवार यानी 2 नवंबर को राकेश कुमार ने एक सूत्र से मिली जिस्मफरोशी की 'ख़बर' पर द्वारका के सैक्टर 19-बी में रहने वाली एक महिला को 'लड़की' के लिए फोन किया। महिला ने उस वक्त तो उसका नंबर नोट कर लिया और दो दिनों बाद यानी रविवार 4 नवंबर को फोन कर बुला लिया। राकेश के अनुसार महिला ने उस वक्त उनसे कहा कि अभी अच्छी लड़कियां आई हुई हैं। उस महिला ने कथित तौर पर राकेश को एक स्कूल के पास बुलाया और एक फ्लैट में ले गए।
 
राकेश ने पुलिस को बताया कि उसने इसी दौरान अपने चैनल के कैमरामैन को बुला लिया और उन महिलाओं की रिकॉर्डिंग कर ली। रिकॉर्डिंग में महिलाएं कथित तौर पर जिस्मफरोशी के लिए ढाई हज़ार रुपए मांग रही थीं। राकेश ने महिला को अपना साइन किया हुआ नोट देकर झांसे में ले लिया, फिर एटीएम से बाकी पैसे लाने का बहाना बनाया और उसी नोट को सबूत के तौर पर पेश कर दोनों को पकड़वा दिया।
 
ख़ास बात ये है कि ए-2-ज़ेड के प्रबंधन ने इस बारे में कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।
 

मनीष तिवारी का ओहदा बढ़ा, कैबिनेट की बैठकों में ले सकेंगे हिस्सा

 

सूचना और प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार संभाले मनीष तिवारी ने भले ही राज्यमंत्री के तौर पर सरकार में कदम रखा हो, लेकिन वो अब कैबिनेट की बैठकों में भी औपचारिक तौर पर हिस्सा ले सकेंगे। इतना ही नहीं, वे आर्थिक मामलों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कैबिनेट कमेटियों में भी हिस्सा ले सकेंगे।

 

उन्हें ये अधिकार देने के लिए कैबिनेट सेक्रेटेरियट ने बाक़ायदा आदेश पारित किया है। इस तरह उनका दर्ज़ा कैबिनेट मंत्री के स्तर का बना दिया गया है। भारत के संवैधानिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राज्यमंत्री को इस तरह की तरक्की दी गयी हो। ऐसा माना जा रहा है कि ये अनोखा प्रयोग तिवारी की राहुल गांधी से नज़दीकियों के कारण किया गया है।
 
ग़ौरतलब है कि हाल ही में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर (जीओएम) ऑन मीडिया का पुनर्गठन किया था। इस समूह में शामिल नए लोगों में सूचना व प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के अलावा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ, कानून मंत्री अश्विनी कुमार प्रमुख हैं।
 
नयी व्यवस्था के मुताबिक़ वित्त मंत्री पी चिदंबरम कैबिनेट के प्रवक्ता होंगे। राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी के लिए कमलनाथ प्रवक्ता होंगे और उनकी अनुपस्थिति में अश्विनी कुमार इस जिम्मेदारी को निभाएंगे।

ये है अरुण पुरी को लिखा रुक्मिनी सेन का ओरिजिनल मेल

टीवी टुडे ग्रुप की इंटरटेनमेंट एडीटर रुक्मिनी सेन ने शनिवार यानी 3 नवंबर को इस्तीफा दिया था। सोमवार को उनकी मुंबई दफ्तर के कान्फ्रेंस रूम में सुप्रिय प्रसाद से बातचीत हुई थी। इसके बाद रुक्मिनी ने अरुण पुरी को मेल भेजा था, जिसकी कॉपी भड़ास 4 मीडिया के पास है। हम हूबहू ये मेल छाप रहे हैं।

Dear Mr Purie,


Supriya Prasad and I had a meeting yesterday regarding my resignation letter. The meeting ended up being very offensive and humiliating.
 

The conversation unfolded like this-
 

– So Are you leaving this job for that man?
– Where does he live?
– Oh I know because you changed your FB status!
– Why are you in a long distance relationship?
– Will you marry him?
– Boyfriend waala maamla bekaar hai.
– Oh but I am sure you have many boyfriends.
– Which number is this one?
– Will you never get married? Live like this? with many?
 

When I gave him the CD for anchors and mentioned the boy in the CD is good. He reacted with 'I have no interest in men'.
 

Supriya Prasad has never been my friend. I have always been very professional with him. Kept my distance to be specific. He has dropped SBB left, right and centre.
 

I was meaning to process what has happened and write to you. Now Arijit of HR calls me and tells me today is my last day. I don't have to serve my notice! Guess something has scared the organization deeply. Is it my sms to Supriya Pd? Is it my FB status?
 

Will you take any action against him? Will you put him in a behaviour change workshop?
 

Considering you re-hired a habitual offender guess this kind of behaviour is ok with you too??
 

I will watch the action taken. I am not pleading. Not complaining. I am offended and I blame you and no one less for putting me through this feudal, uncouth, uncivilzed, masculine, priviledged and POWERFUL behaviour.
 

Shame!!!!
Rukmini Sen
Editor (Entertainment) – Editorial TVTN
TV Today Network Ltd.
Videocon Tower,
E-1, Jhandewalan Extn.,
New Delhi-110055
+91-11- 23684878,23684888

आजतक की इंटरटेनमेंट एडीटर रुकमिनी सेन ने छोड़ी नौकरी, अरुण पुरी और सुप्रिय पर निकाली भड़ास

आजतक की (और पूरे टीवी टुडे नेटवर्क की भी) इंटरटेनमेंट एडीटर रुकमिनी सेन ने अपने पद से एक महीने का नोटिस देते हुए इस्तीफ़ा दे दिया है. टीवी टुडे नेटवर्क मैनेजमेंट ने इस्तीफे को आज ही स्वीकार भी कर लिया.. रुकमिनी ने अपने फेसबुक वाल पर मैनेजमेंट की इस हड़बड़ी और गड़बड़ी के कारणों पर 'प्रकाश' डाला है।

अंग्रेजी में लिखे अपने स्टेटस अपडेट्स में उन्होंने टीवी टुडे के मालिक अरुण पुरी और आजतक के मैनेजिंग एडीटर सुप्रिय प्रसाद पर जम के भड़ास निकाली है। जरा आप भी नज़र डालें।


5 नवंबर, रात 9 बजे:

Rukmini Sen : Resigned yes yes:):).


5 नवंबर रात 11 बजे:

Rukmini Sen : Hey big male boss- You can ask your colleague about her future plans when she puts in her papers. You can't ask her whether she is leaving to be with her partner/boyfriend. Not the way you did. Ok fine you have asked and I have forgiven that. We have known each other for years. You have always been known to be a bit uncouth, severely feudal, shamelessly patriarchal. So forgiven. However, You must not follow it up with another question which sounds like – Is this a long distance relationship? and then 'Why are you in a long distance relationship? Marriage? Why no marriage? Anyways I am sure you have many boyfriends! So whats the count? Kaun sey number waala hai?' You know I know you are on my friend list. I am letting you be there!! You must read this… and then think…most men hurl jargons like 'why did she bring up this late??' So I am bringing it up today itself. And I can take your name… I will eventually…For now you just ruminate over when will I do that? how? Where? and BTW SHAME! SHAME!!! Had I known you were capable of this…I would have never resigned…and given you such a tough time…:):).. But really Shame Shame!


6 नवंबर, सुबह 9 बजे:

Rukmini Sen : A month of Notice Period. I will be in office every day. A month of solid engagement… Look out for this space friends…Lets learn together how to call a bully a bully…how to deal with Sexual Harrasment at work place…No one can cast aspersions on your 'Character', No person has the right to ask what are you doing in your personal space (until and unless you are violating anybody)…and you don't have to MARRY for social acceptance and professional credibility. Whether you are in a same sex relationship, multiple partnership…whether you are monogamous, polygamous , in a live in relationship… from North East, East or down South…whether you are a Dalit or a tribal… or a WOMAN…you have equal rights to a life of dignity, respect, equal opportunity, promotions and increments like your STRAIGHT, MALE, UPPER CLASS, UPPER CASTE, MARRIED, BULLY, NORTH INDIAN colleagues!!!


6 नवंबर, दोपहर 1 बजे:

Rukmini Sen : Recieved a call from TV Today's HR. They are being generous. Have told me today is my last day. I don't have to serve my month long notice. I asked why the generosity!:) Reportedly Mr Rahul Kulashretra, Mr Supriya Prasad and Ms majumdar have taken this call in a meeting!! WOW!! Wonder why?? I didn't take the name of the offender as I needed to think through whether I shoud do it before making a formal complaint against him to Aroon Purie. I was also thinking whether Aroon Purie is capable of any justice considering he re-hired a man as MANAGING EDITOR after sacking him once for sexual harrasment!!! Anyways as we are fighting a larger fight and thus I wrote to him after this chat with the HR guy. I am not going out silently on this MR PURIE, MR KULASHRESHTRA and ofcourse dear dear SUPRIYA PD. The offender is SUPRIYA PRASAD. However, I blame Aroon Purie for subjecting me to this experience!! If the leader is not clear about these values why should his dogs be?

सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा बने संदीप वाधवा, उपेंद्र राय का कद होगा छोटा

सहारा मीडिया समूह से एक बड़ी खबर ये आ रही है कि उसके सभी मीडिया वेंचरों की रिपोर्टिंग समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी संदीप वाधवा को सौंप दी गई है। संदीप वाधवा सहारा के कई वेंचरों में अलग अलग वरीय भूमिकाओं में एक अर्से से हैं, लेकिन उन्हें अब सहारा के तीनों मीडिया का सर्वेसर्वा बनाया गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि अब तक सहारा मीडिया के प्रमुख रहे उपेंद्र राय का कद छोटा करने की कवायद शुरु कर दी गई है और इस दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। बताया जाता है कि इस आशय का नोटिस आज शाम सहारा के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है।

‘सिर्फ सुधीर और समीर पकड़े गए जबकि ऐसे सफेदपोश चोरों की भरमार है’

ज़ी-जिंदल प्रकरण पर जब सीएमएस-मीडिया ख़बर ने सेमिनार आयोजित करने के लिए फेसबुक पर इवेंट बनाया तो संयोगवश मैं भी ऑन लाइन था। मैंने फौरन उसे ऐक्सेप्ट कर लिया। मुझे लगा, इस मुद्दे पर बहस बेहद जरूरी है। ये भी देखने की इच्छा हुई कि आख़िर कौन-कौन ऐसा दूध का धुला है जो सुधीर चौधरी पर पत्थर फेंकने की दावेदारी रखता है?

तयशुदा जगह पर पहुंचा तो देख कर थोड़ा अटपटा लगा कि इस मुद्दे पर अपने-अपने चैनलों पर चीख-चीख कर खुद को बेदाग साबित करने में जुटा कोई भी चैनल हेड या उसका प्रतिनिधि (न्यूज़ एक्सप्रेस को छोड़ कर) भी नहीं आया। टीवी के कुछ बड़े नाम, जैसे क़मर वहीद नक़वी, एन के सिंह, राहुल देव आदि मौज़ूद तो थे, लेकिन सब ने सीधा ज़ी न्यूज़ या जिंदल को दोषी ठहराने की बजाय व्यवस्था की कमियों पर ही जोर दिया। सेमिनार एक गोलमेज़ सम्मेलन की शक्ल में था जिसमें करीब-करीब सबों ने अपनी बातें रखीं।

कुछ ऐसे नौजवानों की टीम भी थी जो बड़े नामों को छोटा दिखा कर ही संतुष्ट होने में जुटी थी। किसी ने संपादक को गलत माना तो किसी ने मालिक को, लेकिन ऐसे लोग खुद शान से बता रहे थे कि वे कितने महीनों या कितने सालों से बेरोज़गार हैं। हालांकि इस मुद्दे पर लगभग सभी एकमत दिखे कि सुधीर चौधरी ने बड़ा पाप कर डाला और मीडिया वालों की धो डाली। तकरीबन सभी ने ये भी माना कि सिर्फ सुधीर और समीर ही पकड़े गए हैं, जबकि ऐसे सफेदपोश चोरों की भरमार है जो बेनकाब नहीं हुए हैं।

बीईए की तरफ़ से महासचिव एन के सिंह ने बड़े ही विस्तार से बताया कि क्यों और कैसे सुधीर चौधरी को बीईए से निकाला गया, लेकिन ये बताने में टालमटोल कर गए कि जब वो पहले से ही उमा खुराना मामले के दोषी थे तो उन्हें सदस्यता और एक्ज़ीक्यूटिव बॉडी में स्थान कैसे मिल गया था? नक़वी जी ने कहा कि इस तरह के मामलों में पत्रकारों को सेल्फ रेग्यूलेशन यानी आत्म-नियंत्रण की जरूरत है क्योंकि सरकार से कोई नियम-कानून बनाने को कहना भी प्रेस की आज़ादी के लिए आत्मघाती कदम होगा।

व्यवस्था और संपादकों पर दोष देने वाले तो लगभग सभी थे, लेकिन कुछ अलग हटके भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत ने एक ज़िक्र छेड़ा कि आख़िरकार संपादक बने पत्रकार से जब विज्ञापन लाने के लिए कहा जाता है तो उसे बुरा क्यों लगता है जबकि सीईओ बनते वक्त उसे कुछ भी बुरा नहीं लगता..? दरअसल सीईओ एक ऐसा पद है जिसे एडीटोरियल के अलावा मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन भी रिपोर्ट करते हैं। ज़ाहिर सी बात है कि सभी विभागों से जवाब मांगने वाले संपादक महोदय को उन विभागों के काम-काज़ न करने पर मालिक से फ़टकार तो मिलेगी ही।

अधिकारी ब्रदर्स के अखबार गवर्नेंस नाउ के संपादक बीवी राव शायद सेमिनार में मौज़ूद इकलौते नौकरीपेशा पत्रकार थे। उन्होंने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका का उदाहरण देकर कहा कि भारत में भी मीडिया घरानों को 'क्रॉस मीडिया क्रिटिसिज़्म' यानी एक-दूसरे के बारे में खबरें दिखाने या आलोचना करने की जरूरत है और तभी वे सेल्फ रेग्यूलेटेड हो पाएंगे। मसलन अगर ज़ी न्यूज़ ने गलत किया तो दूसरे समाचार चैनलों पर उसके बारे में खबरें दिखनी चाहिए और अखबार भी एक-दूसरे की नीतियों पर सवाल खड़े करें।

हालांकि ऐसा होने में इस बात का ख़ासा डर है कि अख़बार आपस में ही उलझ कर न रह जाएं और सरकार या पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतलियां न बन जाएं।

लेखक धीरज भारद्वाज एक जाने-माने पत्रकार हैं और कई वर्ष ज़ी नेटवर्क में भी काम कर चुके हैं.


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आईजी ने तो अपनी गलती मान ली, क्या भास्कर भी मानेगा?

 

एबीपी न्यूज़ के प्रोमो में करीब एक पखवाड़े से छाई गुमशुदा गौरी भोसले की कहानी एक तरफ जहां यूपी पुलिस के लिए किरकिरी बना वहीं मीडिया भी अपनी सीमाएं भूलने में पीछे नहीं रहा। एक तरफ जहां एबीपी न्यूज़ मामले से पल्ला झाड़ने में जुटा है वहीं दूसरी तरफ खुद को राष्ट्रीय बताने वाले कुछ अखबार भी एक बलात्कार पीड़ित महिला की तस्वीर और पहचान छापने से परहेज़ नहीं कर रहे। 
सहारनपुर के बहुचर्चित 'फर्ज़ी गौरी' कांड में पुलिस ने जहां अपनी गलती मान ली है वहीं मीडिया गलतियों पर गलतियां दोहराए जा रहा है। 
 
 
दैनिक भास्कर ने तो बाक़ायदा युवती की तस्वीर और पहचान छापते हुए यूपी पुलिस की गलतियों का बखान किया है, लेकिन खुद अपने पोर्टल पर युवती की तस्वीर और पहचान जाहिर कर दिया है। मीडिया के कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक बलात्कार की शिकार महिला का न सिर्फ नाम और पहचान बदलना जरूरी है बल्कि इस बात का खास खयाल रखा जाना चाहिए कि उसकी या उसके परिजनों की तस्वीर या उनसे संबंधित जानकारी न छापी जाए।
 
ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने जहां एक 'फर्जी' गौरी को बरामद कर खुद ही अपनी किरकिरी करवा ली वहीं चैनल के सूत्रों से पता चला है कि गौरी भोसले वास्तव में कोई युवती न होकर स्टार प्लस पर जल्दी ही आने वाले एक सीरीयल की किरदार है। एबीपी न्यूज पर लंदन की 21 वर्षीया गौरी भोंसले को लापता दिखाया जा रहा था जो वास्तव में सीरीयल का नए अंदाज़ का विज्ञापन है। गौरी के मिलने पर एक टोल फ्री नंबर पर सूचना देने की बात भी प्रसारित की जा रही थी। 

नैशनल हेराल्ड मामले में राहुल करेंगे कानूनी कार्रवाई

 

राहुल गांधी ने जनता पार्टी के प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ ‘सभी कानूनी कार्रवाई’ करने की धमकी दी है। स्वामी ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी के अधिग्रहण को लेकर सवाल उठाए थे और उनको एवं सोनिया गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाए कि कम्पनी को कांग्रेस ने 90 करोड़ से ज्यादा का ऋण दिया।
 
राहुल गांधी के कार्यालय ने स्वामी को भेजे संदेश में कहा, ‘‘1 नवम्बर की दोपहर को आपके संवाददाता सम्मेलन की ओर हमारा ध्यान गया है। आपके द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत, निराधार और मानहानिपूर्ण है।’’ इसने कहा, ‘‘आपका संवाददाता सम्मेलन जिन कारणों से बुलाया गया है, उसे कोई भी आसानी से समझ सकता है।’’
 
इसमें कहा गया है, ‘‘आपके तथाकथित संवाददाता सम्मेलन में घोटालों को लेकर जो आरोप लगाए गए उसके खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई करने को हम प्रतिबद्ध हैं। आपको सूचित करते हैं कि आपके संवाददाता सम्मेलन के मकसद एवं गैरजिम्मेदाराना विषयवस्तु के खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे।’’ (खबर)

महज़ 40 साल की उम्र में कैंसर ने छीना खेल पत्रकार सिद्धार्थ मिश्र को

 

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के खेल संपादक सिद्धार्थ मिश्रा का महज़ 40 साल की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया। वो पिछले कुछ महीनों से कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने खेल पत्रकारिता को नया आयाम दिया था।
 
 
टाइम्स स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म के तेज-तर्रार प्रोडक्ट रहे सिद्धार्थ ने 2008 ओलिंपिक्स के दौरान अपने अखबार के खेल पृष्ठ को स्टेडियम का रूप दिया था, जिसकी खूब चर्चा हुई थी। उन्होंने 1997 में दिल्ली में टाइम्स ऑफ इंडिया ज्वाइन किया था। विभिन्न डेस्कों पर रहने के बाद वे वहां दिल्ली टाइम्स के डेस्क इंचार्ज़ बनाए गए थे।
 
2006 में उन्हें टाइम्स के स्पोर्ट्स विभाग में सहायक संपादक बनाया गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम फिल की डिग्री प्राप्त मिश्रा ने 2008 में कुछ महीने न्यूज एक्स चैनल में भी काम किया, लेकिन जल्दी ही उन्हें न्यू इंडियन एक्सप्रेस से ऑफर आ गया।
 
हालांकि क्रिकेट पर उनकी कमाल की पकड़ थी, लेकिन उन्होंने दूसरे खेलों के लिए जोरदार काम किया था। उनके शोकाकुल परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्री तथा एक पुत्र है।

श्री न्यूज़ के न्यूज़ रुम में जूतम पैज़ार, ठुक्कम-ठुकाई

हाल ही में श्री एस 7 से श्री न्यूज़ बने चैनल में आज न्यूज़रुम ही खबर का केंद्र बन गया। आरपीएम के नाम से मशहूर एक्जीक्यूटिव एडीटर राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा ने अपने ख़ास-म-खास गुर्गे सैफुल्लाह उस्मान ने  एक गेस्ट कोऑर्डिनेटर के साथ न्यूज़रुम में जम कर मारपीट की और उसे धमकी भी दी कि अगर जुबान खोली तो नौकरी से भी जाओगे।

चैनल इन दिनों पढ़े-लिखे पत्रकारों की बजाय मारपीट और गाली-गलौच का अड्डा बनता जा रहा है। ये उस्मान पहले भी चैनल में कई लोगों से मार-पीट कर चुका है। करीब डेढ़ दो महीने पहले उसने एक गरीब ड्राइवर को जमकर पीटा क्योंकि उसने रात में खास लोगों को मिलने वाली ड्रॉपिंग में बेवज़ह इधर उधर घूमने से मना कर दिया था। ड्राइवर के मुंह से खून तक फूट पड़ा था।

दिलचस्प बात ये है कि आरपीएम अपने गुर्गों को रोकने की बज़ाय उन्हें शह दे रहे हैं। उन्होंने आज चैनल में हुई इस मारपीट की घटना के बाद पागलों की तरह चीखना-चिल्लाना शुरु कर दिया। कहने लगे, "अब मैं यहां काम नहीं कर सकता… यहां काम करने का माहौल नहीं रह गया।" ये अलग बात है कि उसके पांच-दस मिनट बाद ही आरपीएम कैंटीन में इस 'पिटाई' के जश्न में शामिल हुए और उस्मान समेत पांच-छह लोगों के साथ खूब हंसी ठिठोली हुई।

बताया जाता है कि आरपीएम के इस ड्रामे से चैनल प्रबंधन भी नाराज़ है लेकिन उसे खुल कर हटाने की हिम्मत किसी की नहीं हो रही है। दरअसल आरपीएम चैनल के मालिकों की करीबी माने जानी वाली महिला के खास हैं। चैनल का माहौल इस क़दर खराब हो रहा है कि कुछ ही महीने पहले वरिष्ठ पत्रकारों की पूरी टीम छोड़ कर जा चुकी है।

हाल ही में चैनल की कायापलट के लिए लाए गए अजय उपाध्याय पिछले 15 दिनों से ऑफिस नहीं आ रहे हैं। उनकी टीम के अरविंद नाथ झा और अरविंद मोहन आदि भी पिछले चार-पांच दिनों से आना बंद कर चुके हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजी गयी ख़बर पर आधारित.

‘घोटालेबाज’ खुर्शीद को मिला प्रमोशन, सूचना-प्रसारण मंत्रालय का कद घटा

 

एक तरह से मनमोहन सरकार ने साफ कर दिया कि उसे मीडिया की परवाह नहीं है। पिछले कई दिनों से घोटाले के मामले में मीडिया में जम कर बदनाम हुए सलमान खुर्शीद को विदेश मंत्रालय का इनाम दिया गया है, जबकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय का कद छोटा कर दिया गया है। इतना ही नहीं, आईपीएल घोटाले में बदनाम होकर मंत्रीपद छोड़ने वाले शशि थरूर को भी दोबारा राज्यमंत्री बनाया गया है।
 
साल 2014 के आम चुनाव से पहले केंद्रीय कैबिनेट में किए गए सबसे बड़े बदलाव के तहत सात नए कैबिनेट मंत्रियों, दो राज्यमंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और 13 राज्यमंत्रियों को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शपथ दिलाई। सलमान खुर्शीद नए विदेश मंत्री और अश्वनी कुमार कानूनमंत्री बने हैं। रहमान खान को अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय, अजय माकन आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री बनाए गए हैं।
 
दिनशा पटेल को खान मंत्रालय, पल्लम राजू को मानव संसाधन विकास मंत्री, हरीश रावत को जल संसाधन मंत्री और चंद्रेश कुमारी को संस्कृति मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है।
 
वीरप्पा मोइली को इस फेरबदल में पेट्रोलियम मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया को बिजली राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सचिन पायलट निगमित मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए हैं वहीं, चिरंजीवी को पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का प्रभार दिया गया है। तारिक अनवर को कृषि राज्यमंत्री बनाया गया है।
 
मनीष तिवारी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कमान तो सौंपी गयी है लेकिन उन्हें ओहदा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का ही दिया गया है। कैबिनेट के इस फेरबदल में 16 नए चेहरे शामिल किए गए, जबकि 5 को प्रमोशन मिला। सरकार में शशि थरूर की वापसी हुई। 22 में से 6 मंत्री आंध्र प्रदेश, 3 पश्चिम बंगाल, 2 केरल, 2 पंजाब, 2 गुजरात और दिल्ली व उत्तराखंड से 1-1 मंत्री शामिल किए गए। कैबिनेट के इस फेरबदल में 21 मंत्री कांग्रेस, जबकि 1 एनसीपी का शामिल किया गया।
 
ग़ौरतलब है कि नए मंत्रियों का रास्ता साफ़ करने के लिए कई मौजूदा मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया था। ऐसा माना जा रहा है कि इस बदलाव में बड़ी भूमिका राहुल गांधी की है जिन्हें कांग्रेस संगठन में भी आधिकारिक तौर पर नंबर दो की हैसियत मिलने वाली है।उधर, शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे कैबिनेट का आखिरी फेरबदल बताया है।
 
शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची इस प्रकार है:-
कैबिनेट :
1. के रहमान खान
2. दिनशा पटेल
3. अजय माकन
4. पल्लम राजू
5. अश्विनी कुमार
6. हरीश रावत
7. चंद्रेश कुमारी कटोच
 
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
1. मनीष तिवारी
2. चिरंजीवी
 
राज्यमंत्री
1. शशि थरूर
2. केके सुरेश
3. तारिक अनवर
4. जयसूर्या प्रकाश रेड्डी
5. रानी नारा
6. अधीर रंजन चौधरी
7. एएच खान चौधरी
8. एस सत्यनारायण
9. निनोंग इरिंग
10. दीपा दासमुंशी
11. पोरिका बलराम नाइक
12. डॉ (श्रीमति) कृपा रवि किल्ली
13. लालचंद कटारिया
 

ज़ी-जिंदल प्रकरण में उलझा टाइम्स ग्रुप भी, ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ गरियाने का मामला

अपने राजफ़ाश करने वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवीन जिंदल बेशक पत्रकारों के साथ सवाल-जवाब सेशन से बचकर निकल लिए हों, टाइम्स नाउ पर अर्णब के कार्यक्रम में खूब जम कर बरसे। टाइम्स नाउ और ग्रुप के सभी अखबारों ने इस मसले को जम कर उछाला। ये वही टाइम्स ग्रुप है जिसकी कुछ ही दिनों पहले दुनिया भर में थुक्का-फ़जीहत हो चुकी है, लेकिन इस बार उसके आक्रामक होने का कारण कुछ और ही है।

दरअसल सुधीर चौधरी, समीर आहलूवालिया और जिंदल के अधिकारियों बीच हुई बातचीत में टाइम्स ग्रुप के तीन-चार वेंचरों का नाम आया है। समीर आहलूवालिया ने जहां इकोनॉमिक टाइम्स के फ्रंट पेज के बिके होने का आरोप लगाया था वहीं सुधीर चौधरी ने उनके मीडिया नेट के इरादों पर सवाल उठाया था।
 
दोनों संपादकों ने न सिर्फ दिल्ली टाइम्स और बॉम्बे टाइम्स के पूरे बिके होने की बात कही वहीं ये भी कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया भी 'उन्हीं की तरह' ब्लैकमेलिंग के कारोबार में शामिल है।
 
उधर टाइम्स ग्रुप के सीईओ रवि धारीवाल ने अपनी एडीटोरियल पॉलिसी को पाक-साफ बताया है। उनके मुताबिक ज़ी ग्रुप के संपादकों के बयान 'पूरी तरह बेबुनियाद और झूठे' हैं। उन्होंने ये तो माना कि दिल्ली टाइम्स और बॉम्बे टाइम्स में एडवरटोरियल कंटेंट छपते हैं, लेकिन ये भी कहा कि उनका कोई आधार नहीं है।
 
बहरहाल, ज़ी ग्रुप के खिलाफ़ मोर्चा खोले टाइम्स ग्रुप ने बेशक जिंदल को अपनी बातें खुल कर बोलने का मंच दिया हो, लेकिन वो ये भूल रहा है कि एडिट की हुई सीडी में जिंदल ने ही जानबूझ कर टाइम्स ग्रुप वाले कमेंट डलवाए थे जो कि ऑफ द रिकॉर्ड बातों की खुफिया रिकॉर्डिंग थी।
 
किसने क्या कहा?

 
समीर: एक अखबार आप तो रोज़ पढ़ते ही होगे… इकोनॉमिक टाइम्स, इसलिए आपको पता है। ऐट लीस्ट वी आर डूइंग अ प्रॉपर डील विद यू… ऐट लीस्ट वी आर नॉट डूइंग फ्रंट पेज स्टोरी व्हिच इज पेड (हमलोग आपसे कायदे का सौदा कर रहे हैं… हमलोग फ्रंटपेज की खबर नहीं छाप रहे जो बिकी हुई हो) ईटी में तो फ्रंट पेज़ स्टोरी बिक रही हैं आजकल…
 
सुधीर: मुझे आमिर खान बता रहा था एक बार… ये मीडिया नेट वाले आमिर खान के पास पहुंच गए… जब थ्री इडियट्स रिलीज़ हो रही थी… बोला कि आप ये लो मीडिया नेट… हम जब आपकी पिक्चर रिलीज़ होगी तो पूरा सपोर्ट करेंगे… और इसमें हम आपको फोर स्टार दे देंगे…
 
सुधीर चौधरी (इस सवाल पर कि क्या देश भर का मीडिया पूरी तरह बिका हुआ है?): हां, मैं आपको बताता हूं कि रिलेशनशिप कैसे बनता है… अब मान लीजिए कि ये वोडाफोन का ऐड है (इकोनॉमिक टाइम्स में)… नेक्स्ट टाइम समथिंग इज़ हैप्पेनिंग अगेंस्ट वोडाफोन… वोडाफोन इसको बोलता है कि बॉस, वहां मेरा ये आ रहा है और ऐसा नहीं है कि वोडाफोन ने गलत काम नहीं किया… किया होगा… तभी फंसा वो… तो वोडाफोन बोलेगा, यार इसमें प्लीज़ थोड़ा देख लो… मैं तुम्हारा क्लाइंट ही हूं… मैं तुम्हारा.. यू आर… वर्किंग टुगेदर… तो उसमें क्या होता है… न्यूज़पेपर का जो मैनेज़मेंट है… थोड़ा सॉफ्ट हो जाता है…
 
समीर: दिल्ली टाइम्स, बॉम्बे टाइम्स पूरा पेड है… ए-टू-बी
 
समीर: हम क्या कर रहे हैं…? एवरीबडी डज़ इट.. एवरीबडी इज़ इन द सेम बिजनेस… स्टॉप.. इफ यू स्टॉप बिज़नेस विद टाइम्स ऑफ इंडिया.. दे विल स्टार्ट… (हर कोई ये करता है… हर कोई इसी कारोबार में है… अगर आप टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ कारोबार रोक देंगे… तो वो 'शुरु' कर देंगे…)


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अंबिका सोनी ने दिया इस्तीफ़ा, अजय माकन को मिल सकता है सूचना और प्रसारण मंत्रालय

 

नई दिल्ली।। कैबिनेट में रविवार को होने वाले फेरबदल के मद्देनजर केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे का दौर जारी है। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस.एम कृष्णा ने इस्तीफा सौंपा तो, आज सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक, पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय और राज्य मंत्री महादेव सिंह खंडेला ने भी इस्तीफे दे दिए। अपने इस्तीफे पर अंबिका सोनी ने कहा कि वह संगठन के लिए काम करती रहेंगी। उधर, वासनिक ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा कल ही सौंप दिया था। उधर, शहरी विकास मंत्री कमलनाथ का प्रमोशन किया गया है। उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
 
चर्चा है कि कुछ और महत्वपूर्ण मंत्री भी इस्तीफा दे सकते हैं। इसमें एचआरडी व आईटी मिनिस्टर कपिल सिब्बल और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री आनंद शर्मा के नाम की भी चर्चा है। इससे पहले कृष्णा ने शुक्रवार दोपहर अपना इस्तीफा मनमोहन सिंह को भेजा, जिसे पीएम ने मंजूर कर लिया। कृष्णा ने कहा कि युवाओं को मौका देने के लिए मैंने अपने पद से इस्तीफा दिया है। बतौर कार्यकर्ता मैं पार्टी के लिए काम करता रहूंगा। माना जा रहा है कि कर्नाटक के सीएम रह चुके कृष्णा को राज्य में कुछ समय बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
 
कैबिनेट में शामिल होने वाले नए मंत्रियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आइए आपको बताते हैं किसके बारे में क्या है चर्चा…
 
1- 'टाइम्स नाउ' के सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को मानव संसाधन मंत्रालय का जिम्मा सौंपा जा सकता है। मंत्री पद संभालने को लेकर राहुल विचार विमर्श कर रहे हैं। उनके कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की भी चर्चा है।
 
2-कृष्णा के इस्तीफे से खाली हुई विदेश मंत्री की कुर्सी कर्ण सिंह या फिर आनंद शर्मा को सौंपी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक आनंद शर्मा इस रेस में आगे दिख रहे हैं।
 
3-अपनी प्रजाराज्यम पार्टी के साथ कांग्रेस में आने वाले ऐक्टर चिरंजीवी को केंद्रीय पर्यटन मंत्री बनाया जा सकता है।
 
4-मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डी. पुरंदेश्वरी का प्रमोशन हो सकता है। उन्हें वाणिज्य मंत्री बनाया जा सकता है।
 
5-खबर है कि गुलाम नबी आजाद मंत्री पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
 
6-पश्चिम बंगाल के सांसद ए. एच. खान को भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। खान कांग्रेस के नेता मरहूम गनी खां चौधरी के भाई हैं।
 
7-बताया जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल में युवाओं को तरजीह दी जाएगी।
 
8-केंद्रीय संसदीय कार्य और कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत का भी प्रमोशन हो सकता है। चर्चा है कि उन्हें कैबिनेट में लाया जा सकता है।
 
9-पवन बंसल को संसदीय कार्य मंत्रालय वापस मिल सकता है।
 
10-खेल मंत्री अजय माकन को मिल सकता है सूचना प्रसारण मंत्रालय।
 
11- आज शाम 6.30 बजे सोनिया गांधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करेंगी। इसमें कैबिनेट फेरबदल पर चर्चा होने की संभावना है।
 
मंत्रियों के इस्तीफे के पीछे हालांकि वजह यह बताई जा रही है कि उन्हें आगामी विधानसभा और आम चुनावों के मद्देजनर संगठन में भेजा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह बात कुछ के लिए ही सही है। इस बहाने विवादित मंत्रियों को भी इस्तीफे का दबाव डालकर साइडलाइन किया जा रहा है। मसलन पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय के कोयला घोटाले में घिरने के बाद उन पर इस्तीफे को लेकर भारी दवाब था। अगर इस्तीफों का यह सिलसिला आगे बढ़ता है और इसमें विवादित मंत्री भी दिखते हैं, तो हैरत नहीं होनी चाहिए। (नभाटा)

ज़ी न्यूज़ ने जिंदल को दी तीन दिन की मोहलत, कहा: आरोप वापस लो या 150 करोड़ दो

कोयले की दलाली में 'हाथ और मुंह काला करने' के आरोपों से घिरे ज़ी न्यूज़ ने अब खुद को बेदाग साबित करने के लिए कानून का सहारा लिया है। ज़ी के न्यूज़ पोर्टल zeenews.india.com ने 'जनता के नाम श्वेत पत्र' टाइप एक लंबी सी रिपोर्ट छापी है जिसमें बताया गया है कि उन्होंने जिंदल को मानहानि का नोटिस भेजा है। खास बात ये है कि इस खबर में ज़ी न्यूज़ की तरफ से किसी अधिकारी या निदेशक का बयान नहीं छापा गया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक ज़ी न्यूज़ ने जिंदल को तीन दिनों के भीतर अपने आरोप वापस लेने को कहा है और ऐसा न करने पर 150 करोड़ की मानहानि का मुकद्दमा झेलने को तैयार रहने की चेतावनी दी है। आप भी पढ़िए और खुद तय कीजिए कि ज़ी के आरोप (या सफाई) में कितना दम है और किसका दामन कितना पाक-साफ है।
 
ज़ी न्यूज ने जिंदल को भेजा मानहानि का नोटिस
 
नई दिल्ली : नवीन जिंदल एवं जेएसपीएल की गत 25 अक्टूबर के संवाददाता सम्मेलन का कड़ा जवाब देते हुए ज़ी न्यूज ने शनिवार को नवीन जिंदल एवं जेएसपीएल को 150 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा। जिंदल ने ज़ी न्यूज पर अपनी गलत छवि पेश करने का आरोप लगाया है। 
 
ज़ी न्यूज ने संवाददाता सम्मेलन में जिंदल द्वारा पेश छेड़छाड़ किए गए साक्ष्यों को पूरी तरह से खारिज करने के साथ ही इसकी निंदा की है। ज़ी न्यूज का मानना है कि टेलीविजन नेटवर्क की विश्वसनीय छवि खराब करने के लिए ऐसा जानबूझकर किया गया है। 
 
ज़ी न्यूज ने अपने खिलाफ लगे आधारहीन एवं मानहानि करने वाले सभी आरोपों को वापस लेने के लिए नवीन जिंदल को तीन दिन का समय दिया है। ज़ी न्यूज ने कहा है कि ऐसा न करने पर जिंदल को दीवानी एवं आपराधिक मामलों का सामना करना होगा।
 
कोलगेट घोटाला मामले में ज़ी न्यूज एक राजनीतिज्ञ एवं उद्योगपित के रूप में नवीन जिंदल के दोहरे चरित्र को उजागर करने में सबसे आगे रहा है। ज़ी न्यूज यह साफ तौर पर समझता है कि कोलगेट पर जारी लगातार कवरेज को रोकने के लिए उस पर आरोप लगाए गए हैं। कोलगेट पर ज़ी न्यूज की कवरेज रोकने के लिए जेएसपीएल की कॉरपोरेट कम्यूनिकेशंस टीम ने सबसे पहले समीर अहलूवालिया को 25 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की जिसे समीर ने सिरे से खारिज कर दिया। 
 
समीर के रिश्वत लेने से इंकार किए जाने के बाद कोलगेट पर खबरों को रोकने के लिए जेएसपीएल ने 100 करोड़ रुपए के विज्ञापन करार की पेशकश की। 
 
ज़ी न्यूज बीते दिनों में कोलगेट घोटाले से जुड़ी सच्चाई को सामने लाता रहा है और आज भी ला रहा है। इसी क्रम में वह जिंदल एवं उनके अधिकारियों से कई बार सम्पर्क में आया। 
 
ज़ी न्यूज के मुताबिक, ‘‘हम जिंदल एवं जेएसपीएल पर ज़ी न्यूज का नाम बदनाम करने का आरोप लगाते हैं क्योंकि उन्होंने संपादित एवं छेड़छाड़ की गई सीडी के जरिए अपने पक्ष को रखा। जिंदल की ओर से पेश की गई सीडी में बातचीत के केवल चुनिंदा भाग दिखाए गए। जिंदल का इतिहास रहा है कि जो कोई भी सच्चाई के साथ उनका सामना करने का साहस दिखाता है, जिंदल गलत तरीके से उसे अपना निशाना बनाते हैं।’’ 
 
1.86 लाख करोड़ रुपए के कोलगेट घोटाले की सच्चाई सामने लाने वाले ज़ी न्यूज सहित अन्य मीडिया हाउसों का मुंह जिंदल द्वारा बंद कराया जा रहा है। जिंदल सच को गलत रूप में पेश कर रहे हैं और सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले लोगों पर मानहानि का आरोप लगा रहे हैं। यहां तक कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में कोलगेट घोटाला मामले में नवीन जिंदल को प्राथमिक लाभार्थी बताया है।
 
ज़ी न्यूज के अनुसार, हमारा मानना है कि नवीन जिंदल एवं उनके अधिकारियों ने अपनी पुलिस शिकायत में ज़ी न्यूज के खिलाफ ऐसे ही निराधार आरोप लगाए हैं और हम इसे कानून की सहज प्रक्रिया में एक बाधा के रूप में देखते हैं। जाहिर तौर पर, हम इसे अपने को बदनाम करने और इस सिलसिले में जांच को प्रभावित करने की एक कोशिश के रूप में देखते हैं। इसलिए, हमने नवीन जिंदल एवं जेएसपीएल को मानहानि का नोटिस भेजा है। 
 
जिंदल एवं जेएसपीएल ने ज़ी न्यूज को भटकाने के लिए जो चाल चली है उसमें समाचार चैनल नहीं फंसेगा और 1.86 लाख करोड़ रुपए के कोयला घोटाले की असली सच्चाई लोगों के सामने लाता रहेगा और अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब सच्ची खबरों से देगा। 
 
ज़ी न्यूज़ के अंग्रेजी पोर्टल में छपी खबर यूं है:
 
Zee News sends defamation notice of Rs 150 cr to Naveen Jindal

 
New Delhi: In a strong reply to Naveen Jindal and JSPL’S press conference on October 25, 2012 where he had alleged wrongdoing on the part of Zee News, Zee News Limited on Saturday has sent a defamation notice to the tune of Rs 150 crore against Mr Naveen Jindal and JSPL. 
 
Zee News has condemned and completely rejected the doctored evidence produced by Jindal. Zee News sees this as a deliberate attempt to malign the trustworthy Television Network. 
 
Zee News has granted a three-day time period to Mr Naveen Jindal to withdraw all his unsubstantiated and defamatory allegations against Zee News, failing which Mr Jindal would face civil and criminal actions initiated by Zee News. 
 
Zee News has always been the forerunner in exposing Naveen Jindal’s double standard as a politician and industrialist in Coalgate scam. Zee News clearly understands that it is to suppress the coverage that Zee News was telecasting on Coalgate, that the Corporate Communications team from JSPL first tried to bribe Samir Ahluwalia with Rs 25 cr, which he declined straightway, and later was offered a Rs 100 crore advertising deal to stop the coverage of Coalgate scam. 
 
Zee News today and in the past has always been in pursuit of seeking truth in the Coalgate scam, and has had several interactions with Jindal and his officials. We accuse Jindal and JSPL of maligning the name of Zee News since they chose to display an edited / doctored CD where only selected portions were shown. Mr Jindal has a history of unfairly targeting those who dare to confront him with the truth. 
 
Attempts by right thinking media houses including Zee News to bring out the truth in the Rs 1.86 lakh crore Coalgate scam are being muzzled by Mr Naveen Jindal by distorting the truth and defaming those on the righteous path. Even the CAG has listed Naveen Jindal promoted JSPL as the primary beneficiary in the Coalgate scam. 
 
We are of the view that similar false allegations have been made by Naveen Jindal and his officials against Zee News in a police complaint and we see it as subversion of the due process of law. Clearly, we see this as an attempt to prejudice and defame us and to overreach the investigation in this regard and have hence sent a defamation notice to JSPL and Mr Naveen Jindal. 
 
Zee News is undeterred by such diversionary tactics adopted by Jindal and JSPL and would stay focused on unraveling the ultimate truth in the Rs 1.86 lacs crore Coalgate scam and has only taken this route to counter the allegations made.


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हमें पैसे दे देंगे तो आपको आगे कोई नुकसान नहीं होगा: सुधीर चौधरी

कांग्रेस सांसद और जाने माने उद्योगपति नवीन जिंदल ने ज़ी न्यूज पर कोयला घोटाले की खबर न चलाने की एवज़ में 100 करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवीन जिंदल ने ज़ी ग्रुप के दो संपादकों सुधीर चौधरी (ज़ी न्यूज़) और समीर आहलूवालिया (ज़ी बिजनेस) के साथ बातचीत का टेप जारी किया.

इस वीडियो में जी न्‍यूज़ के मैनेजिंग एडीटर सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर आहलूवालिया को जिंदल के अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए दिखाया गया है, जिसमें वे पैसों और कोयला घोटाले पर चर्चा कर रहे हैं हम यहां पर ज़ी न्‍यूज़ और जिंदल के अधिकारियों के बीच बातचीत के कुछ अंश पेश कर रहे हैं: 

समीर (ज़ी बिजनेस): हर साल… 25 चार साल के लिए… हो सकता है कि हमारे कहने-सुनने में कुछ इधर-उधर हो गया हो. 

समीर (ज़ी बिजनेस): ये तो पहले से ही आराम से दिखाई जा रही है… अब दूसरा फेज़ यह है कि इसकी जो रिवर्स साइड है उसे भी हल्‍के तरीके से करेंगे. हमारे रिश्‍ते दोनों तरफ से दोनों के लिए फायदेमंद होने चाहिए. 

सुधीर (ज़ी न्यूज़): देखिए, एक तो ये है कि सबसे बड़ी सुरक्षा ये होती है कि इसके बाद कोई ऐसी चीज़ नहीं आएगी… अब इसके बाद कोई निगेटिव नहीं आएगा… इसके बाद कुछ नहीं आएगा… दूसरा ये है कि फिर सोचेंगे कि क्‍या, कैसे वो कराना है, कौन-सी चीज ऊपर डाली है, कौन सी नीचे डालनी है… क्‍योंकि हमारी कवरेज तो वैसे तो जारी रहेगी, क्‍योंकि कोयले पर तो हमारे पास कितनी सारी चीजें हैं… मतलब वो चलती रहेंगी. 

सुधीर (ज़ी न्यूज़): इसको हम जल्दी से जल्‍दी कर लेते हैं, ताकि इससे हम खत्‍म हों और फिर जो आप बोल रहे हैं…

सुधीर (ज़ी न्यूज़): फिर हम क्‍या करेंगे, फिर उस पर आप जो बोल रहे हो न… आगे का रोड मैप… फिर उस पर काम करना शुरू करेंगे.

सुधीर (ज़ी न्यूज़): सबसे बड़ा फायदा जो है वो ये है कि इसके बाद कोई नुकसान नहीं होगा… मैं बता रहा हूं आपके वाले में जो सबसे नाजुक है उसमें आगे नुकसान हो सकता है… वो जो नुकसान है न वो रुक जाएगा.. मतलब आप मुसीबत में फंसने से बच जाएंगे…

समीर (ज़ी बिजनेस): मैं आपसे कुछ अलग या अनोखा नहीं मांग रहा हूं. आप इस पर गौर करें, यह दरअसल दोनों के लिए फायदेमंद है. आप जितना मांग सकते हैं मैं उससे भी ज्‍यादा दूंगा. यह हमेशा ऐसे ही चलेगा. यह भी एकतरफा नहीं होगा. मैं आपसे यही कहना चाहता हूं.


जी-जिंदल स्टिंग सीडी देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें….


इस प्रकरण से संबंधित खबर जो सबसे पहले भड़ास पर प्रकाशित हुई, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…….

 

जिंदल ने जारी की स्टिंग ऑपरेशन की सीडी, ज़ी ने कहा: ‘डमी’ था प्रपोजल

कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल ने गुरुवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया हलकों में हंगामा मचा दिया। उन्होंने ख़बरिया चैनल ज़ी न्यूज़ पर आरोप लगाया है कि उसने एक खबर रोकने के लिए उनसे 100 करोड़ रुपये की घूस मांगी थी। उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में एक स्टिंग ऑपरेशन की सीडी भी जारी की।  

इस सीडी में ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी और ज़ी बिजनेस के संपादक समीर आहलूवालिया जिंदल के अधिकारियों से सौ करोड़ के विज्ञापन के बारे में बात करते दिखाई पड़ रहे हैं।
 
नवीन जिंदल के मुताबिक इन दोनो संपादकों ने खबर रोकने के बदले में उनसे 100 करोड़ रुपए मांगे थे। जिंदल ने मीडिया के सामने दोनो संपादकों से बातचीत की रिकॉर्डिंग भी दिखाई। जिंदल का आरोप है कि कोयला घोटाले की खबर रोकने के बदले ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी और ज़ी बिजनेस के संपादक समीर आहलूवालिया ने जिंदल ग्रुप से सौदेबाजी की। नवीन जिंदल ने दोनों पर आरोप लगाया कि उनसे 13, 17 और 19 सितंबर को कंपनी के लोगों की मीटिंग हुई जिसमें उन्होंने करोड़ों की ये रकम मांगी। उनके मुताबिक पहले 20 करोड़ और बाद में 100 करोड़ रुपए मांगे गए।
 
नवीन जिंदल ने सबूत के तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संपादकों से हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी जारी की। इस रिकॉर्डिंग में नवीन जिंदल और संपादकों के बीच बातचीत होते हुए स्पष्ट दिखाया गया है।
 
वहीं दूसरी तरफ ज़ी न्यूज का कहना है कि सीडी में जो बातचीत दिखाई जा रही है वह असल बातचीत का एक बहुत छोटा हिस्सा है। ज़ी न्यूज़ ने इन आरोपों की सफाई में अपने दोनों चैनलों पर बाकायदा एक कार्यक्रम भी प्रसारित किया। 
 
दोनों संपादकों से इस कार्यक्रम की ऐंकरिंग की जिसमें उन्होंने ये तो माना कि जिंदल ग्रुप को उन्होंने 100 करोड़ के विज्ञापन का कॉन्ट्रैक्ट भेजा था, लेकिन दोनों ने दावा किया कि ये कॉन्ट्रैक्ट 'डमी' यानी झूठा था और इसके जरिये जिंदल को बेनकाब करने की कोशिश की जा रही थी। दोनों संपादकों ने ये भी कहा कि उन्हें 25 करोड़ में खरीदने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन वे नहीं बिके।

 

सन टीवी नेटवर्क ने खरीदी हैदराबाद की आईपीएल क्रिकेट टीम

 

सन टीवी नेटवर्क ने इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की नौवीं टीम खरीदी है. यह टीम हैदराबाद शहर की होगी यानी डेक्कन चार्जस के बाद भी आईपीएल में हैदराबाद की टीम बनी रहेगी.
 
गुरुवार को मुंबई में आईपीएल की गवर्निंग कॉनसिल की मीटिंग हुई और आईपीएल की नौवीं टीम के लिए बोली लगाई गई, जिसे सन टीवी नेटवर्क ने 85.05 करोड़ रुपए की सालाना कीमत पर ख़रीदा. यह रकम साल 2008 में खरीदी गई हैदराबाद की फ्रेंचाइजी की कीमत से सौ फ़ीसदी अधिक है. हैदराबाद टीम के लिए दूसरी बोली पीवीपी वेंचर्स ने 69.03 करोड़ की लगाई थी. आईपीएल के मुताबिक यह सौदा 10 साल के लिए हुआ है.
 
ग़ौरतलब है कि सन टीवी नेटवर्क पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन परिवार का है. इस कंपनी का मुख्यालय चेन्नई में है और यह देश के बड़े टीवी नेटवर्क्स में एक है. सन टीवी के अंतर्गत 32 टेलीविजन चैनल और 45 रेडियो एफएम चलाए जाते हैं. इस चैनल का दबदबा खासकर दक्षिण भारत में है. सन टीवी न्यूज़, फिल्म और मनोरंजन चैनल चलाता है. (एबीपी)

रायपुर ने दी वरिष्ठ पत्रकार राजनारायण मिश्रा को आंसू भरी अंतिम विदाई

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार श्री राजनारायण मिश्र का आज यहाँ मारवाड़ी श्मशान घाट में अत्यंत गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। बड़ी संख्या में पत्रकारों,प्रमुख नागरिकों और समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों ने उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मिश्रा का 80 वर्ष की आयु में कल दोपहर यहां चौबे कालोनी (गीतानगर) स्थित उनके निवास पर देहावसान हो गया था।
 
प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री सुनिल कुमार और जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख सचिव श्री एन. बैजेन्द्र कुमार ने अंतिम विदाई कार्यक्रम में शामिल होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी। रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी, पूर्व मंत्री श्री सत्यनारायण शर्मा, पूर्व विधायक श्री रमेश वल्र्यानी, वरिष्ठ पत्रकार श्री ललित सुरजन, श्री बसंत कुमार तिवारी, श्री दिवाकर मुक्तिबोध, श्री ध्रुव नारायण अग्रवाल, श्री तेजेन्दर सिंह गगन सहित रायपुर प्रेस क्लब एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि अंतिम संस्कार में शामिल हुए। राज्यपाल शेखर दत्त और मुख्यमंत्री रमण सिंह ने कल ही उनके निधन पर दुख व्यक्त किया था।
 
इस अवसर पर आयोजित शोक-सभा में स्वर्गीय मिश्र की पत्रकारिता, उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया और सभी लोगों ने उनके परिवार जनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। राजनारायण मिश्रा ने सन 1959 में 'नयी दुनिया' (अब देशबन्धु) ज्वाइन की थी जहां उन्होंने 31 वर्षों तक काम किया। 1988 में वहां से छोड़ने के बाद उन्होंने कई पत्र पत्रिकाओं में काम किया। वे नागपुर से प्रकाशित साप्ताहिक 'मुक्ति' के संपादक भी रहे। पिछले 14 वर्षों से वे एक स्थानीय अखबार 'संघर्ष के स्वर' में बतौर संपादक काम कर रहे थे।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फैला रहा है अफवाह: फिदेल कास्त्रो

 

क्यूबा के पूर्व क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो ने बेहद कड़े शब्दों में एक आलेख लिखकर उन अफवाहों की भर्त्सना की है जिनमें कहा गया था कि कास्त्रो मृत्यु-शैया पर हैं. फिदेल कास्त्रो ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को आड़े हाथों लिया है और उसे 'झूठा' बताते हुए क्यूबा के सरकारी मीडिया में अपनी तस्वीरें प्रकाशित कराई हैं.
 
86 वर्षीय फिदेल कास्त्रो का कहना है कि उनका स्वास्थ्य अच्छा है और उन्हें ये भी याद नहीं आता कि आखिरी बार उनके सिर में दर्द कब हुआ था. वेनेज़ुएला के नेता इलियास जूसा ने रविवार को कहा था कि एक दिन पहले ही उन्होंने फिदेल कास्त्रो से मुलाकात की थी जो पांच घंटे चली थी. उन्होंने इस मुलाकात की तस्वीर पेश की और कहा कि कास्त्रो की तबीयत बहुत अच्छी है. 
 
फिदेल कास्त्रो की आखिरी छवि सार्वजनिक तौर पर इस साल मार्च में तब नजर आई थी जब उन्होंने क्यूबा की यात्रा पर आए पोप बेनेडिक्ट से संक्षिप्त मुलाकात की थी. सार्वजनिक मंचों पर लंबे समय तक नज़र नहीं आने की वजह से सोशल मीडिया साइट्स पर उनकी तबीयत खराब होने की अटकलें लगाई जा रही थीं और यहां तक कहा जा रहा था कि हो सकता है कि उनकी मौत हो गई हो. 
 
फिदेल कास्त्रो ने अपने आलेख में लिखा है कि वैसे तो इस तरह की ख़बरों की भरमार है, लेकिन लोगों का इन पर भरोसा कम होता जा रहा है. फिदेल कास्त्रो ने लिखा है कि वे लेखन और अध्ययन में व्यस्त हैं, उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूर रहने का फैसला किया है क्योंकि अब उनकी भूमिका अखबारों के पन्नों पर नहीं है. उन्होंने अपने आलेख का समापन इन शब्दों में किया है, ''मुझे तो याद नहीं आता कि सिरदर्द क्या होता है. झूठ सामने लाने के लिए मैं इस आलेख के साथ अपनी ये तस्वीरें पेश कर रहा हूं.''
 
 
फिदेल कास्त्रो की ये तस्वीरें उनके बेटे एलेक्स ने खींची है जिसमें उन्हें चेक वाली शर्ट और काउ-बॉय टोपी में दिखाया गया है. कुछ तस्वीरों में उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी का अखबार ग्रेन्मा पढ़ते हुए दिखाया गया है.
 
क्यूबा में वर्ष 1959 की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो ने देश को नेतृत्व प्रदान किया था. वे वर्ष 1959 से वर्ष 1976 के दौरान देश के प्रधानमंत्री रहे और बाद में राष्ट्रपति भी बने. वर्ष 2006 में उनकी सर्जरी हुई थी जिसके बाद वे सार्वजनिक तौर पर बहुत कम नज़र आने लगे थे. उनके भाई राउल कास्त्रो क्यूबा के कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे.
 
फरवरी वर्ष 2008 में फिदेल कास्त्रो ने देश की बागडोर औपचारिक रूप से राउल के हाथों में सौंप दी थी. राउल कास्त्रो तभी से क्यूबा का नेतृत्व कर रहे हैं. (बीबीसी)

अनिल गुप्ता बने कल्पतरु एक्सप्रेस, आगरा के संपादक

 

वरिष्ठ पत्रकार अनिल गुप्ता आगरा से प्रकाशित अखबार कल्पतरु एक्सप्रेस के स्थानीय संपादक बनाए गए हैं। करीब दो साल पहले सहारा नैश्नल के चैनल हेड के पद पर रह चुके अनिल गुप्ता 1977 से ही पत्रकारिता में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत हिन्दुस्तान समाचार न्यूज़ एजेंसी से की थी और बाद में कई अखबारों व मीडिया घरानों में रहे। 
  
सहारा टीवी से पहले अनिल गुप्ता कुबेर टाइम्स अखबार के न्यूज़ एडीटर रह चुके हैं। इसके पहले वे दैनिक जागरण, आगरा के स्थानीय संपादक भी थे। जागरण से पहले आगरा में ही वो अमर उजाला में करीब आठ वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्यरत थे। उनकी छवि एक गंभीर और समझदार पत्रकार की रही है। सहारा में वे वेब, प्रिंट और टीवी तीनों माध्यमों में काम कर चुके हैं।
 
नवभारत टाइम्स, स्वतंत्र भारत और इकोनॉमिक टाइम्स आदि अखबारों के लिए भी अनिल गुप्ता सक्रिय रूप से काम कर चुके हैं। कल्पतरु एक्सप्रेस से पहले वे एक अतर्राष्ट्रीय टीवी न्यूज और फीचर सेवा आईटीएमएन में बतौर सलाहकार संपादक काम कर रहे थे।

खेल पत्रकार की अनजान लोगों ने की गोली मार कर हत्या

 

पाकिस्तान के कराची में दहशतगर्दों का कहर जारी है और पिछले चौबीस घंटों में कम से कम पांच लोग उनकी गोलियों का शिकार हो चुके हैं। मारे जाने वालों में दो पुलिसवालों के अलावा एक स्थानीय पत्रकार भी शामिल है।
 
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कराची के बग़दादी पुलिस थाने इलाके में खड्डा बाज़ार के पास कुछ अनजान लोगों ने एक व्यक्ति पर गोलियों की बरसात कर दी। उस व्यक्ति की पहचान रज़ा साहिल के तौर पर हुई है जो एक स्थानीय अख़बार में खेल पत्रकार थे। रज़ा के सिर में दो गोलियां लगी थीं।
 
इसके अलावा शहर के दूसरे इलाके में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में दो पुलिस वालों के मारे जाने और कुछ के घायल हो जाने की भी खबरें हैं। दो और लोग दूसरी गोलाबारी की वारदातों में भी मारे गए हैं।
 

बीबीसी ने दबाई थी अपने ऐंकर जिमी सेवाइल के बाल यौन उत्पीड़न की ख़बर

 

ब्रिटिश प्रसारण निगम यानी बीबीसी के बहुचर्चित जिमी सेवाइल यौन उत्पीड़न मामले में एक नया राज़ खुला है। एक नई जानकारी में पता चला है कि बीबीसी प्रबंधन ने इस मामले से जुड़ी खबरों को रद्द करा दिया था। इसके बाद एक वरिष्ठ निर्माता ने धमकी दी थी कि ऐसा करके बीबीसी अपने आपको कानूनी फंदे में फंसा रहा है।

 
जिमी सेवाइल प्रकरण की जांच करने वाले बीबीसी के न्यूजनाइट कार्यक्रम के निर्माता मेरियन जोन्स ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि अगर बीबीसी इस मामले में बनाई गई अपनी खुद की ही खबर को जारी नहीं करता है तो उस पर इस मामले पर पर्दा डालने का आरोप लग सकता है और वह कानून के घेरे में फंस सकता है। 
 
जोन्स ने कहा कि उन्हें पता था कि यह मामला कैसे न कैसे करके मीडिया की सुर्खियों में आ ही जाएगा और बीबीसी पर इस पर पर्दा डालने का आरोप लगेगा।
 
एक अर्से तक बीबीसी के कई कार्यक्रमों की ऐंकरिंग कर चुके जिमी सेवाइल का पिछले वर्ष निधन हो गया था। उनपर पिछले महीने कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया था कि जब वे छोटी बच्चियां थीं तो सेवाइल ने बीबीसी स्टूडियो में उनका यौन उत्पीड़न किया था। यह खबर मौजूदा समय में ब्रिटेन को झकझोरे हुए है और इससे दुनिया के सबसे जाने-माने मीडिया हाउसों में शुमार बीबीसी की खासी किरकरी हुई है।
 
ब्रिटिश पुलिस ने इस मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया है कि यह पता चलने के बाद कि सेवाइल दशकों तक बच्चों का यौन शोषण करते रहे थे, अबतक तकरीबन 200 ऐसे लोग सामने आ चुके हैं, जिन्होंने उत्पीड़ित होने का दावा किया है। ग़ौरतलब है कि बीबीसी पहले भी इस मामले को दबाने के आरोपों से इंकार कर चुका है।

इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार अमृता चौधरी का सड़क हादसे में निधन

 

पंजाब की वरिष्ठ पत्रकार अमृता चौधरी का लुधियाना के पास एक सड़क हादसे में निधन हो गया। चौधरी इंडियन एक्सप्रेस की प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेन्ट थीं और रविवार रात चंडीगढ़ से वापस लौटते वक्त हाइवे पर उनकी टैक्सी की एक इनोवा कार से आमने-सामने टक्कर हो गयी थी।
 
40 वर्षीया अमृता चौधरी की कार रविवार रात करीब दो बजे लुधियाना से 35 किलोमीटर दूर कोहारा के पास टकराई थी। टैक्सी ड्राइवर और चौधरी के एक सहकर्मी को भी हादसे में चोटें आईं, लेकिन वो गंभीर नहीं थीं। सभी को लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां चौधरी की हालत बिगड़ती चली गयी।
 
अमृता चौधरी को निर्भीक पत्रकारिता के लिये जाना जाता था। चौधरी के परिवार में मात्र उनका ग्यारह वर्षीय पुत्र है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और कई अन्य राजनेताओं तथा पत्रकारों ने चौधरी के निधन पर दुख जताया है।

उड़ीसा के वरिष्ठ पत्रकार पूर्ण चंद्र मिश्रा का निधन

 

जाने-माने उड़िया पत्रकार पूर्ण चंद्र मिश्रा का 85 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके परिवार के सूत्रों का कहना है कि मिश्रा पिछले तीन वर्षों से बीमार चल रहे थे और बुढ़ापे से जुड़ी कई बीमारियों से पीड़ित थे।
 
उनके परिवार में दो पुत्र और छह पुत्रियां हैं। पूर्ण चंद्र मिश्र का चार दशक लंबा पत्रकारिता का करीयर रहा था और वे कई पत्र-पत्रिकओं से जुड़े रह चुके थे।
 
उड़िया साप्ताहिक तरुण के सफल संपादक के तौर पर उन्होंने एक अलग पहचान बनाई थी। उन्हें जन सरोकार के मुद्दों से जुड़े एक गंभीर पत्रकार के तौर पर जाना जाता था और प्रदेश के हर वर्ग के लोगों में उनका खासा सम्मान था। 
 
शोक जताते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर साहू ने संवाददाताओं से कहा कि मिश्रा के निधन से प्रदेश की पत्रकारिता में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है। साहू के अलावा स्थानीय विधायक आर सी पटनायक, जिला कांग्रेस प्रमुख भगवान गणतायत और बीजेडी के जिलाध्यक्ष सुभाष मोहराना ने भी मिश्रा के निधन पर उनके घर जाकर शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और संवेदना जाहिर की।

टेलीग्राफ, कोलकाता ने छापी बिहार-यूपी के कामगारों के खिलाफ़ अभद्र टिप्पणी, लोगों ने फूंकी प्रतियां

 

लगता है कोलकाता से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार 'द टेलीग्राफ' को पाठकों का टोटा पड़ रहा है। शायद इसीलिए उसने बिहार-यूपी से आए आप्रवासी कामगारों खिलाफ़ अखबार के संपादकीय पेज पर ऐसी अपमानजनक टिप्पणी छापी है कि वो विवादों में घिर जाए और लोग उसे खरीदें। अखबार ने बंगालियों के बीच प्रचलित उन चुटकुलों को चटखारे लेकर छापा है जिससे वहां रहनेवाले बिहार व यूपी के लोगों का गुस्सा भड़क उठे। जैसा कि स्वभाविक था, विरोध में उन्होंने सड़कों पर उतर कर अखबार की प्रतियां फूंक डालीं।
 
कोलकाता के कई क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए जिनमें बिहारी समाज, कोलकाता के अध्यक्ष मणि प्रसाद सिंह के नेतृत्व में शनिवार को डलहौज़ी क्षेत्र के इंडिया एक्सचेंज प्लेस व ओल्ड चाइना बाजार चौराहे पर चक्का जाम भी किया गया। बिहार के विधायक छोटे लाल राय खास तौर पर इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता पहुंचे थे। उन्होंने भड़ास4मीडिया को बताया कि उन्हें इस तरह की अभद्र टिप्पणी से व्यक्तिगत तौर पर दुख पहुंचा है। राय के मुताबिक किसी भी समाज, भाषा, जाति व धर्म के खिलाफ टिप्पणी छापना अखबार के लिए सही नहीं है। कोई भी समाचार पत्र ऐसी टिप्पणी को संपादकीय पेज पर नहीं छाप सकता, जिससे समाज में मतभेद या हिंसा होने की आशंका हो। 
 
कोलकाता में सभी अखबार दुर्गा पूजा के कारण चार दिनों तक बंद रहते हैं, इसलिए अखबार के कार्यालय में किसी ने फोन नहीं उठाया। बिहारी समाज के लोगों का कहना है कि इस विरोध को ठंढा नहीं होने दिया जाएगा और विजया दशमी के बाद बिहारी समाज कोलकाता के बैनर तले हजारों लोग टेलीग्राफ के कार्यलय का घेराव करेंगे।
 
बिहारी समाज के अध्यक्ष मणि प्रसाद सिंह ने सभी लोगों और संगठनों से अपील की है कि वे एक मंच पर आकर आवाज उठाएं। श्याम बिहारी सिंह (बंगाली) ने कहा कि आवश्यकता है कि बंगाल में रहनेवाले सभी बिहारी और अन्य प्रांतों के समाज के लोग इस मुद्दे पर एक मंच पर आएं और अपनी आवाज बुलंद करें। विरोध में बिहार के छपरा परसा के विधायक छोटे लाल राय के अलावा स्थानीय पार्षद संतोष पाठक, नरेश सिंह, बालेश्वर सिंह, एसएन राय, सुनील यादव, संजीव दूबे, संजय झा, नागेश्वर शर्मा, उमाशंकर प्रसाद, विजय सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे। 
 
इस मुद्दे पर मिथिला विकास परिषद की ओर से बड़ा बाजार में विरोध सभा कर टेलीग्राफ की सैकड़ों प्रतियां जलायी गयीं। परिषद के अध्यक्ष अशोक झा, बिहारी समाज के संरक्षक राजेश सिन्हा के नेतृत्व इस विरोध में सैकड़ों बिहारी समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। अशोक झा ने कहा है कि यह सांकेतिक विरोध है और विजया दशमी के बाद अखबार से औपचारिक तौर पर माफ़ी मांगने का दबाव बनाया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में अजय चौधरी, निरंजन ठाकुर, प्रताप सिंह, पवन ठाकुर, मदन झा सहित अन्य लोग मौजूद थे। 
 
बिहारी समाज के संरक्षक राजेश सिन्हा ने कहा है कि समाज के लोगों को टेलीग्राफ़ का बहिष्कार करना चाहिए। विश्व में 20 करोड़ से अधिक भोजपुरी भाषाई लोग हैं और शायद संपादक महोदय नहीं जानते हैं कि अगर बिहारी समाज के लोग अपनी मेहनत से आगे बढ़ सकते हैं, तो जब विरोध में सड़क पर उतरेंगे तो अखबार को बंद करवाने का भी माद्दा रखते हैं।  

‘नमो’ और ‘जया’ हैं, तो ‘रागा’ और ‘पीचिद्दी’ भी आ सकते हैं

गुजरात में आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार और भाषणों के प्रसारण के लिए केबल टीवी चैनल ‘नमो’ की शुरुआत हेतु कमर कस रहे हैं। ‘नमो’, श्री मोदी के नाम का संक्षिप्त रूप (नरेन्द्र का ‘न’ और मोदी का ‘मो’) तो है ही, इसके अलावा इसका गुजराती में एक और अर्थ है, ‘नीचे झुकना’, जिसने काफी हलचल पैदा कर दी है। गुजरात की कांग्रेस इकाई महसूस करती है कि चैनल चुनाव आयोग की आचार संहिता का स्पष्ट तौर पर उल्लघंन है और वोट बैंक को लुभाने की तिकड़मबाज़ी, पार्टी के एक प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा।

 उन्होंने बताया कि जब हाल ही में ‘नमो’ चैनल ने एक-दिन का परीक्षण किया, तब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग में इस बावत शिकायत दाखिल की। चुनाव आयोग के प्रकाशित नियमों के मुताबिक आयोग तब हस्तक्षेप कर सकता है, जब आश्वस्त हो कि उम्मीदवार व्यय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखा रहा है। गुजरात के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि उम्मीदवारों को चुनावों के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों के प्रसारण के लिए अमूमन एजेसीं का अनुमोदन प्राप्त करना होता है, लेकिन ये भी कहा कि ‘नमो’ चैनल पर वो विशिष्ट टिप्पणी नहीं कर रहे और मुद्दे से परिचित नहीं हैं।

श्री मोदी के एक सहयोगी ने कहा कि ‘नमो’ को राज्य बीजेपी इकाई और मुख्यमंत्री के समर्थक फंड दे रहे हैं, बजाय कि खुद उम्मीदवार और इसलिए ये व्यय सीमा का विषय नहीं है। सहयोगी ने कहा कि श्री मोदी को चुनाव आयोग से किसी तरह का नोटिस नहीं मिला है। चैनल का जल्द ही लाइव प्रसारण होगा, सहयोगी ने कहा। गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा के चुनाव दिसबंर मध्य में होगें।

पुरानी परंपरा के मुताबिक भाषण का बेहतरीन प्रत्युत्तर और भाषण है, इसी को बरकरार रखते हुए, हम इंडिया रियल टाइम पर विनम्र (और व्यंग्यात्मक) सुझाव देते हैं कि राजनीति के दूसरे कद्दावर नेता भी शायद अब अपना चैनल शुरू करना चाहें। यहां इस संदर्भ में कुछ सुझाव हैं।

-राहुल गांधी: ‘रागा’ चैनल (अनुभवहीनों के लिए, राग भारतीय शास्त्रीय संगीत में सुर या लय से संबद्ध है)।

-ममता बैनर्जी: ‘मंबा’ चैनल (हम इस समय स्वादिष्ट चबाने वाली कैंडीज़ के बारे में सोच रहे हैं, सांपों अथवा राडार व्यवस्था के बारे में नहीं)।

-पलानिअप्पन चिदम्बरम: ‘पीचिद्दी’ चैनल (अगर पृष्ठभूमि की दरकार है, तो कृपया यहां देखें)

–जयपाल रेड्डी: ‘जे-रेड्डी’ चैनल (यह जे-लो का उच्च-ऊर्जा संस्करण है।)

–एल के आडवाणी: ‘लैड’ चैनल।

-सुशील कुमार शिंदे: ‘सुशी’ चैनल

-कमल नाथ: ‘काना’ टीवी (कृपया इसे खाने का चैनल समझने की भूल नहीं करें)

-फारुख अब्दुल्ला: ‘फैब’ चैनल।

-तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता का पहले से ही ‘जया’ टीवी है।

(प्रीतिका राणा का ये पोस्ट मूल रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल के हिंदी पोर्टल इंडिया रीयल टाइम में प्रकाशित हुआ था। वहीं से साभार प्रकाशित।)

खुर्शीद के गांव में पत्रकार और आईएसी कार्यकर्ताओं पर पथराव

केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के गुस्से का असर अब इंडिया अगेंस्ट करप्शन(आईएसी) के कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर दिखने लगा है। फर्रुखाबाद से ख़बर मिली है कि डॉक्टर जाकिर हुसैन ट्रस्ट पर लगे आरोपों से गुस्साए खुर्शीद समर्थकों ने सर्वेक्षण करके लौट रहे आईएसी कार्यकर्ताओं और एक पत्रकार से धक्का-मुक्की की और पथराव भी किया।

सूत्रों ने बताया कि दिल्ली के पत्रकार अभिनंदन सिंह और स्थानीय संयोजक लक्ष्मण सिंह की अगुवाई में आईएसी के सदस्य गुरुवार को केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के कायमगंज क्षेत्र स्थित पैतृक गांव पितौरा से लौट रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन पर पत्थर बरसाए। घटना के शिकार हुए आईएसी सदस्यों का कहना है उन्होंने सीनियर अधिकारियों को इस बारे में बता दिया है।
 
संपर्क किए जाने पर अपर पुलिस अधीक्षक ओ  पी सिंह ने कहा कि उन्हें इस बारे में टेलिफोन पर जानकारी मिली है और उन्होंने आईएसी कार्यकर्ताओं से इस सिलसिले में लिखित शिकायत दर्ज कराने को कहा है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। (नभाटा)

अमेरिकी पत्रिका ने दिखाया टाइम्स ग्रुप के बेशर्म मालिकों को आइना

: जाने माने मीडिया समीक्षक केन ऑलेट्टा ने अमेरिकी पत्रिका न्यूयॉर्कर के 8 अक्टूबर के अंक में टाइम्स ग्रुप के मालिकों के बारे में नौ पन्नों का आलेख लिखा है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे टाइम्स ऑफ इंडिया और टाइम्स नाउ के मालिक देश का नंबर वन मीडिया हाउस अपनी जेब में रखने के बावजूद अपने पाठकों से धोखा कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने इसपर बेबाक टिप्पणी की है। जरा पढ़िये :

टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के प्रमुख जैन बंधु- समीर और विनीत, के बारे में अमेरिकी पाक्षिक पत्रिका न्यूयॉर्कर ने जो कुछ कहा है, वह अधिकांश लोगों को मालूम है। उसका इतना योगदान जरूर है कि उसने संदेहों को दूर कर दिया है और इस बात की पुष्टि कर दी है कि देश का सबसे बड़ा मीडिया मुगल मानता है कि अखबार के पन्नों के लिए पवित्रता नाम की कोई चीज नहीं है और इसका हर कॉलम पैसा लेकर बेचा जा सकता है, क्योंकि उनके लिए अखबार पाउडर या दंत मंजन की तरह केवल एक माल है।

एक पाठक को यह जानकर धक्का लग सकता है कि वह उत्सुकतापूर्वक जिन खबरों को पढ़ता है, वह पैसा लेकर छापी गई खबरें होती हैं। उसकी निराशा और बेबसी और बढ़ जाती है, क्योंकि उसे यह पता नहीं होता कि किसी खबर का कौन सा हिस्सा सही में खबर है और कौन सा फर्जी। संपादकीय मर्यादा को इस तरह तोड़ना जैन बंधुओं को परेशान नहीं करता, क्योंकि वे इस पेशे को पैसा कमाने वाले धंधे की तरह लेते हैं। वे इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि उन्होंने मूल्यों को चिथड़ा-चिथड़ा कर डाला है, फिर भी वे भारत के नंबर एक अखबार बने हुए हैं। इतना ही नहीं, वे संभवत: दुनिया के किसी भी अखबार से यादा पैसा कमा रहे हैं। रूपर्ट मर्डक का साम्राज्य टाइम्स ऑफ इंडिया से 20 गुना बड़ा है, फिर भी उसका मुनाफा कम है।

नौ पेज के लेख में पाक्षिक (न्यूयॉर्कर) ने उल्लेख किया है कि किस तरह जैन बंधु पत्रकारिता को महज जरुरी मुसीबत की तरह देखते हैं और विज्ञापनदाताओं को असली ग्राहक मानते हैं। इसमें आश्चर्य वाली कोई बात नहीं है कि टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रिंट लाइन में संपादक का नाम नहीं छापता, क्योंकि अखबार में कोई संपादक ही नहीं है। जैन बंधुओं ने नहीं, बल्कि किसी और ने बहुत पहले कहा था कि अखबार में लिखना विज्ञापन की पीठ पर लिखने जैसा होता है। जैन बंधु इस कथन का पूरी तरह पालन करते हैं।

''हम जानते थे कि हमलोग श्रेष्ठ पाठकों को जोड़ने के व्यवसाय में हैं। इसके पहले हम सिर्फ विज्ञापन की जगह बेचा करते थे।'' न्यूयॉर्कर के लेख में सीधे जैन बंधुओं की ओर से कहा गया कोई उदाहरण नहीं है। संभवत: उन्होंने इंटरव्यू देने से मना कर दिया होगा। फिर भी, उनके नौकरों ने, शुक्र है इनमें संपादकीय विभाग के कोई भी नहीं थे, ने उनकी सोच की झलक दिखाई। एक पिछलग्गू ने कहा, ''संपादकों की कोशिश ऊंचे मंच पर खड़े हो कर लंबे वाक्य बोलने वाले पाखंडी बनने की रहती है।'' विनीत जैन खुद इस बात को लेकर बिल्कुल साफ हैं कि अखबार के धंधे में कामयाबी के लिए आपको संपादक की तरह नहीं सोचना चाहिए। ''अगर आप संपादक की तरह का दिमाग रखेंगे, तो फिर आप हर निर्णय गलत लेंगे।''

सही है कि जैन बंधुओं ने अखबार को 'खबरं' का कागज बना दिया है। लेकिन ऐसा इस कारण हुआ है कि वे अपने अखबारों की पैकेजिंग, दाम घटाने और इसे पीली पत्रकारिता के स्तर तक नीचे लाने में माहिर बन चुके हैं। फिर भी वे इसकी कोई परवाह नहीं करते, क्योंकि उन्हें पेश को उद्योग में तब्दील करने का गौरव हासिल है। उनके लिए संपादक थोक में सस्ते हैं।  मुझे याद है, टाइम्स ऑफ इंडिया के तत्कालीन संपादक गिरिलाल जैन ने मुझे एक दिन फोन कर अपने मालिक अशोक जैन, जिन्हें मैं अच्छी तरह जानता था, से बात कर कहने को कहा था कि मैं उनसे कहूं कि वे समीर से उनका पीछा छुड़वा दें। गिरि ने कहा था कि अशोक जैन की प्राथमिकताएं भले ही कुछ भी हो, लेकिन वे उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं, लेकिन समीर का व्यवहार अपमानजनक होता है।

मेरे बात करने पर अशोक जैन ने जवाब में कहा कि वे कई गिरिलाल जैन खरीद लेंगे, लेकिन एक भी समीर जैन नहीं खोज पाएंगे, जिसने उनकी आमदनी आठगुना बढ़ा दी है। इसी तरह इंदर मल्होत्रा ने एक बार मुझे बताया था कि किस तरह वरिष्ठ पत्रकारों को समीर जैन अपने कमरे में जमीन पर बैठाते थे और उनसे अखबार की ओर से भेजे जाने वाले कार्डों पर आमंत्रितों का नाम लिखवाते थे।

जैन बंधुओं ने अपने व्यवसाय में पैसा कमाने के लिए जो कुछ किया है, उसके कारण अखबार मात्र एक गप-शप का पन्ना बनकर रह गया है। पत्रकारिता उनके लिए बस अपना धंधा बढ़ाने का माध्यम है। न्यूयॉर्कर के अनुसार इसे पक्का करने के लिए यह अखबार ''हत्या, बलात्कार और सुनामी की घटनाओं के बावजूद खबरों के लिए बनी जगह का इस्तेमाल एक मजबूत आशावाद को बनाए रखने के लिए करता है। यह प्रेरणा देने वाले युवाओं से संवाद बनाने को प्राथमिकता देता है। गरीबी की खबरों को सबसे नीचे रखता है।''

पिछले कुछ वर्षों में प्रबंधन एवं विज्ञापन विभाग की हैसियत बढ़ गई है। मुझे लगता है कि आपातकाल के दौरान प्रेस का जो पालतू रवैया रहा, उसके कारण भी व्यावसायिक हित आगे हुआ है। जब उसने देख लिया कि पत्रकार बिना संघर्ष के झुक सकते हैं, तो फिर प्रबंधन पत्रकारों की पुरानी अहमियत को कम करने लगा। पत्रकार विज्ञापन वालों के इशारे पर नाचने लगे। हम लोग जिस प्रेस नोट पर 'बिजनेस मस्ट' लिखा रहता था, उसे कूड़ेदान में डाल दिया करते थे।

व्यापार और संपादकीय के बीच का संबंध धुंधला हो जाने के कारण स्वतंत्र अभिव्यक्ति सीमित हो गई है और रोजाना का दखल बढ़ गया है। यह बिल्कुल खुला रहस्य है कि प्रबंधन या व्यापार वाला विभाग अपने आर्थिक एवं राजनीतिक हितों के हिसाब से खबरें लिखवाता है। आज बहुत सारे अखबार मालिक रायसभा सदस्य हैं। लेकिन यह सवाल उतना महत्वपूर्ण नहीं, जितना महत्वपूर्ण यह तथ्य कि ये अखबार लाभ पाने के लिए राजनीतिक पार्टियों से संबंध बनाते हैं।

पार्टी या लाभ देने वाले के प्रति उनकी कृतज्ञता या निकटता अखबारों के कॉलमों में साफ तौर पर झलकती है। यही रिश्ता अब 'पेड न्यूज' में बदल गया है। इस तरीके से खबर लिखवाये जाते हैं कि कोई खास व्यक्तिया दृष्टिकोण को आगे किया जा सके। पाठक को कभी-कभार ही पता चलता है कि खबर में कहां प्रचार घुसा हुआ है या किन हिस्सों में में विज्ञापन लपेट दिया गया है।

हालांकि, अखबार, टेलीविजन और रेडियो के हर पहलुओं पर विचार करने के लिए मीडिया आयोग के गठन का समय आ चुका है। 1977 में जब पिछले प्रेस आयोग का गठन हुआ था, तो हमारे पास टेलीविजन नहीं था,क्योंकि उस वक्त भारत में टीवी नहीं पहुंचा था। मालिक और संपादक, पत्रकार और मालिकों के बीच के संबंध, तथा टीवी और प्रिंट मीडिया के रिश्ते जैसी तमाम बातों को तय करने के लिए मीडिया के हर पहलू पर विचार करने की जरूरत है। अखबार मालिकों ने श्रमजीवी पत्रकार कानून को ठेंगा दिखाने के लिए ठेके पर बहाली की व्यवस्था शुरु कर दी है। आज एक अखबार मालिक टेलीविजन चैनल या रेडियो का भी मालिक हो सकता है। इसके कारण काटर्ल (गुट) बनने लगा है, जिससे अंतत: प्रेस की स्वतंत्रता बाधित हो रही है।

सत्तारूढ़ पार्टी अपने कारणों से मीडिया आयोग बहाल नहीं करना चाहती। क्या इसके पीछे जैन बंधुओं का प्रभाव है, जिन्हें कई सवालों का जवाब देना है? जैन बंधुओं को निश्चित तौर पर समझना होगा कि पत्रकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार इस कारण दिया गया था ताकि वह अपनी बात बिना किसी भय या पक्षपात के कह सके। अगर सिर्फ बांसुरी बजाने वाली स्थिति होगी, तो इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़ा होगा। लोकतंत्र में, जहां स्वतंत्र सूचना पर स्वतंत्र प्रतिक्रिया मिलती है, वहां प्रेस कुछ लोगों की मर्जी के अनुसार नहीं चल सकता। नियंत्रित प्रेस अभिव्यक्ति की संवैधनिक गारंटी की अवहेलना होगी।


ये है अमेरिका पत्रिका में जैन बंधु की छपी स्टोरी का शुरुआती पन्ना…


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ममता ने कहा, टीवी चैनल जबर्दस्ती कर रहे हैं बदनाम

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनकी सरकार को दुष्प्रचार और नकारात्मक समाचारों के जरिए निशाना बनाने का उल्लेख करते हुए मीडिया के एक वर्ग विशेष तौर पर कुछ इलेक्ट्रानिक समाचार चैनलों को आडे हाथों लिया। ममता ने कहा कि ऐसे समाचारों के माध्यम से प्रशासन की गलत छवि पेश की जा रही है।
 
तृणमूल कांग्रेस के पूजा विशेषांक 'जागो बांग्ला' को जारी करने के बाद ममता ने कहा, मीडिया के एक वर्ग विशेष तौर पर कुछ समाचार चैनलों की ओर से गलत और दुष्प्रचार करने वाले समाचार पेश किए जा रहे हैं। 
 
यहां तक कि वे मेरी कही गई बातों को भी तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। यह वर्ग तथ्यों को दबा रहा है और समाचार प्रदूषण फैला रहे हैं। उनका इशारा राज्य में बलात्कार की कुछ घटनाओं को पेश किए जाने की ओर था।
 
उन्होंने कहा, प्रतिदिन बलात्कार की घटनाओं को रेखांकित किया जा रहा है, जैसे कि पूरा प्रदेश बलात्कारियों से भरा है। इन लोगों की ओर से बलात्कार को महिमामंडित किया जा रहा है। इसे लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैं कहना चाहती हूं कि नकारात्मक पत्रकारिता से केवल विनाश होता है। (वेबदुनिया)

मीडिया घरानों पर आतंकी हमला करने की तैयारी में हैं तालिबानी

पाकिस्तान का आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान वहां के सभी मीडिया समूहों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है। चिंता की बात ये है कि पाकिस्तान में काम कर रहे विदेशी मीडिया समूह के दफ्तर भी आतंकियों के निशाने पर होंगे। ख़बर है कि मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला युसूफजई पर हमले के बाद उसे मीडिया कवरेज दिए जाने से आतंकी संगठन खासा नाराज है।

गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को तालिबानियों ने 14 वर्षीय छात्रा मलाला यूसुफजई को गोली मारकर घायल कर दिया था। मलाला ने करीब दो साल पहले अपनी एक रचना में तालिबानी आतंकवाद और उसके खौफ़ के खिलाफ़ आवाज उठाई थी। आतंकियों की इस हरकत की दुनिया भर के अखबारों एवं टीवी चैनलों ने तीखी आलोचना की। उधर, अस्पताल में भर्ती मलाला की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। 
 
पाकिस्तानी तालिबान के सरगना हकीमुल्लाह मेहसूद ने देश के विभिन्न शहरों में मौजूद अपने मातहतों को विशेष निर्देश जारी कर मीडिया समूहों को निशाना बनाने को कहा है। बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट में इस बात जानकारी दी गयी है। पाक गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि मेहसूद और उसके सहायक नदीम अब्बास के बीच फोन पर हुई बातचीत में खुफिया एजेंसियों को यह बात पता चली। 
 
पाक खुफिया सूत्रों ने तालिबानी सरगना के उस फोन को रिकॉर्ड करने का दावा किया है जिसमें वो नदीम अब्बास को मीडिया समूहों पर हमला करने के निर्देश दे रहा था। मेहसूद ने कराची, लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और अन्य शहरों में स्थित मीडिया समूहों के कार्यालयों को निशाना बनाने को कहा। मीडिया समूह एवं ऐसे मीडियाकर्मी जो इस हमले की निंदा कर रहे थे, तालिबान के सीधे निशाने पर होंगे। तालिबानी आतंकी कई देशों में फैले हैं और डर है कि कहीं ये हमले पाकिस्तान के बाहर भी न होने लगें।
 
पाक गृह मंत्रालय ने वहां के मीडिया समूहों के कार्यालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को उस क्षेत्र में  अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करने के आदेश दिए गए हैं जहां मीडिया के दफ्तर हैं। अधिकारियों ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो अर्द्धसैनिक बल की भी मदद ली जाएगी। 
 
इस्लामाबाद के मुख्य कमिश्नर एवं चार प्रांतों के मुख्य सचिवों को मीडिया समूहों के प्रमुखों से मुलाकात कर उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने को कहा गया है। इतना ही नहीं, मंत्रालय ने उन धार्मिक विद्वानों और नेताओं को भी अलर्ट रहने को कहा है, जिन्होंने हमले के बाद तालिबान की निंदा की थी। उधर, पाकिस्तान के कई शहरों में तालिबानी हमले के खिलाफ लोगों के विरोध प्रदर्शन की भी खबरें है।

नरेंद्र मोदी के नाम से बने नमो टीवी के प्रसारण को हरी झंडी

गुजरात के बहुचर्चित चैनल नमो टीवी की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। गुजरात चुनाव से ऐन पहले लांच हुए इस चैनल को आईपीटीवी के तौर पर 2 अक्टूबर को लांच किया गया था, लेकिन 5 अक्टूबर को ही इसे बंद करना पड़ा था। अब चुनाव आयोग ने इसे दोबारा चालू करने के लिए सहमति दे दी है। इस टीवी चैनल को नरेन्द्र मोदी नाम के शुरुआती अक्षरों 'न' और 'मो' से मिलाकर बनाया गया है। 

माना जा रहा है कि गुजरात सरकार इस पर अपनी उपलब्धियों का बखान करेगी, लेकिन चैनल को ब्लैक आउट कर दिया गया था। हालांकि चैनल के संचालकों ने इसे बंद करने की वज़ह तकनीकी बताई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ऐसा तब हुआ जब चुनाव आयोग ने ब्रॉडकास्टर्स की एक मीटिंग बुलाई और उन्हें पेड न्यूज़ के गाइडलाइन्स पर सख्ती से अमल करने को कहा। आयोग ने ब्रॉडकास्टर्स से साफ-साफ कहा है कि जब तक इस चैनल को क्लीयरेंस नहीं मिल जाती तब तक इसका प्रसारण नहीं किया जाए।
 
इसके बाद चैनल के मुख्यालय अहमदाबाद के चुनाव अधिकारी ने चुनाव आयोग से इस मामले पर अपना फैसला सुनाने की अर्ज़ी लगाई थी। यह चैनल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर लॉन्च हुआ था और इस पर मोदी के भाषण चलाए जा रहे थे। मोदी विरोधियों ने इसके खिलाफ मुहिम छेड़ी और कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज़ जताया तब कहीं जाकर इसका प्रसारण बंद हो पाया। कांग्रेस की मांग है कि इस चैनल को मिलने वाली फंड की भी जांच होनी चाहिए।
 
आयोग ने जिला चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया है कि वो चैनल को प्रसारण की इज़ाजत दे सकते हैं, लेकिन उसके पास गुजरात सिनेमा रेग्यूलेशन ऐक्ट, 2004 और केबल टीवी नेटवर्क ऐक्ट 1995 के तहत लाइसेंस होना भी जरूरी है। इसके अलावा, चुनाव के दौरान सभी चैनलों पर प्रसारित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों को मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटि से अनुमति लेनी होगी। आयोग का कहना है कि चुनाव के दौरान मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का पालन करवाने की जिम्मेदारी भी जिला चुनाव अधिकारी की ही होगी।
 
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब नरेन्द्र मोदी ने सिर्फ चुनावी मुहिम के लिए मीडिया को ज़रिया बनाया हो। करीब पांच साल पहले गुजरात चुनाव के दौरान भी उन्होंने वंदे गुजरात नाम से एक इंटरनेट टीवी प्रोटोकॉल लॉन्च किया था पर कई शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने उस पर पाबंदी लगा दी थी। लेकिन इस बार मोदी समर्थकों ने ज्यादा सावधानी बरती है और कोई भी कागजी कार्रवाई ढीला नहीं रख रहे हैं।
 
चैनल को गुजरात के उद्योग मंत्री सौरभ पटेल और भाजपा के राज्य स्तर के एक पदाधिकारी पारिंदु भगत उर्फ काकुभाई के जिम्मे सौंपा गया है। चैनल राज्य भर के केबल नेटवर्कों पर तो दिखेगा ही, राज्य के सैटेलाइट चैनलों पर भी इसके कार्यक्रम प्रसारित होंगे। नमो टीवी ने इस प्रसारण के लिए पांच क्षेत्रीय चैनलों से व्यापारिक करार किया है। जहां केबल और सैटेलाइट की पहुंच नहीं है वहां ये मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी अपनी पहुंच बनाएगा।

बिहार में पत्रकारों पर हमला करने वाला अवैध शराब कारोबारी गिरफ्तार

 

मुजफ्फरपुर से मिली ख़बर के मुताबिक देवरिया पुलिस ने विशुनपुर सरैया चौक पर पत्रकारों पर हमला करने के आरोपी बिहारी सिंह उर्फ ब्रजकिशोर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्राप्त सूचना के अनुसार थानाध्यक्ष शंभू कुमार यादव एवं प्रकाश कौशिक की टीम ने छापेमारी कर उसे विशुनपुर सरैया स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया है। 

 
गौरतलब है कि शराब माफिया बिहारी सिंह ने पारू के नेकनामपुर शराब कांड के बाद समाचार पत्रों में लगातार छप रही खबरों से चिढ़ कर गुंडों के साथ मंगलवार को विशुनपुर सरैया चौक पर पत्रकारों पर हमला करते हुए जिंदा जला देने की धमकी दी थी। ये धमकी उस समय दी गई थी जब पत्रकार नेकनामपुर से रिपोर्टिंग कर वापस लौटते वक्त दुकान पर रुक नाश्ता कर रहे थे। नेकनामपुर में 1 अक्टूबर को जहरीली शराब पीने से सात लोगों की मौत हो गयी थी।
 
इसी बीच बिहारी सिंह अपने गुंडों के साथ वहां पहुंचा और वहां पर पहले से बैठे पत्रकारों को गाली-गलौज करते हुए उनसे मार-पीट करने लगा। जब इलाके के लोग जमा होकर उसका विरोध करने लगे तो वो उसके खिलाफ़ ख़बर छापने वाले पत्रकारों को जिंदा जला देने की धमकी देते हुए चला गया। अचानक हुए इस वारदात पर पुलिस ने फ़ौरी कार्रवाई नहीं की तो गुस्साए लोगों ने स्टेट हाइवे को जाम कर विरोध प्रदर्शन भी किया था।

 

प्रभात शुंगलू से जानिए खबरिया चैनलों के सूरत-ए-हाल ‘न्यूज़रुम लाइव’ में

वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू एक बार फिर एक किताब लेकर आए हैं.. उनका दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर पहला उपन्यास है। लेकिन ये उपन्यास सिर्फ मीडिया जगत ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों और कॉर्पोरेट जगत से उसके अवैध गठजो़ड़ की भी कहानी कहता है। स्टेट्समैन, टाइम्स ऑफ इंडिया, बीआईटीवी, आजतक, स्टार न्यूज़ और आईबीएन जैसे मीडिया घरानों में रह चुके प्रभात शुंगलू पिछले कुछ वर्षों से पत्रकारिता में आ रही बुराइयों के प्रति खासे गंभीर हैं।

उन्होंने कुछ वर्षों पहले हिंदी में एक किताब लिखी थी जिसका शीर्षक था- 'मुखौटे बिकते हैं'। वो किताब प्रभात के पूर्व प्रकाशित आलेखों का संग्रह थी। उन्होंने तभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को बांटने का फैसला किया था। बाद में राज्यसभा टीवी और इसके बाद न्यूज़ एक्सप्रेस ज्वाइन किया। इस बार उन्होंने अंग्रेजी में नॉवेल लिखी है और इसकी कहानी एक हिन्दी न्यूज़ चैनल के इर्द-गिर्द बना कर रखी है।
 
प्रभात बताते हैं, "ये सन् 2006-08 के बीच की काल्पनिक कहानी है जब खबरिया चैनलों में उटपटांग हरकतें चरम पर पहुंच गइ थीं। इस नॉवेल में पॉवर जगत और कॉरपोरेट के अलावे पॉलिटिक्स से मीडिया के गठजोड़ पर कटाक्ष किया गया है। किताब को ओम बुक डिपो ने छापा है और अब ये छप कर बाज़ार में पहुंच चुंकी है। इसका विमोचन दशहरे के बाद होगा। 310 पन्नों के इस किताब की कीमत 195 रुपये है और ये ओम बुक शॉप के अलावे फिल्पकार्ट पर भी उपलब्ध है।"
 
 
प्रभात शुंगूल ने फेसबुक इस किताब का परिचय देते हुए लिखा है, "मेरा जूता फे़क लेदर, दिल छीछा लेदर… कुछ ऐसे ही फेक इंसान आपको मेरे उपन्यास NEWSROOM LIVE में भी टकराएंगे। जिन्होने धंधे की छीछालेदर कर दी।"
 
प्रभात की पूर्व सहकर्मी संगीता तिवारी ने किताब पर सबसे पहली प्रतिक्रिया के तौर पर लिखा है- "न्यूजरूम लाईव.. सेंसिबल औऱ सेंसेटिव उपन्यास…थोड़ी देर पहले ही पढ़ कर खत्म की… खबरों की दुनिया पर बेहद खूबसूरती से लिखा गया उपन्यास… एक बार शुरू की पढ़ना तो खत्म करने के बाद ही रखी.. उपन्यास की कहानी संवेदनशील है… आपको बांध कर रखती है.. ना खुद कही भटकती है और ना ही आपको मौका देती है भटकने का.. कहानी में कई मोड़ औऱ ट्विस्ट हैं… शुरू में कई ऐसे मौके हैं जब आप अपनी हंसी पर काबू नही रख पाते… ठहाका लगाते हैं…भरपूर व्यंग है… जो आपको हंसाता तो है लेकिन ठहरकर सोचने पर भी मजबूर करता है…  व्यंग्य में गंभीरता है…कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ती है कई मोड़ पर आपको चौंकाती है… स्तब्ध करती है… झकझोरती है… बेचैन करती है… तो कई मोड़ औऱ पात्र भरोसा और उम्मीद भी देते हैं… पूरी समीक्षा नही करूंगी अभी… क्यूंकि मैं नही चाहती कि मेरी समीक्षा के आधार पर आप अपनी राय बनाएं…. जरूर पढ़ें… उपन्यास की भाषा में प्रवाह है पांडित्य नही….औऱ जिन्हें किताब के हिन्दी में नही होने से निराशा है उन्हें ये जरूर कहूंगी कि किताब की भाषा कहानी पर हावी नही होती…"

 

नक्सली इलाकों में अवैध रूप से घूम रहे चार विदेशी एक देसी पत्रकार समेत धरे गये

 

सुरक्षा कारणों से बुधवार को विदेशी मीडियाकर्मियों के एक चार सदस्यीय दल को झारखंड के लातेहार जिले से वापस रांची भेज दिया गया। इनके साथ हिंदुस्तान टाइम्स का एक पत्रकार भी शामिल था। ये सभी चार दिनों से झारखंड और छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में संदिग्ध अवस्था में घूम रहे थे।
 
खास बात ये है कि इन लोगों ने प्रशासन को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी थी। लातेहार जिला के पुलिस अधीक्षक क्रांति कुमार के मुताबिक ये लोग कुछ आंतरिक इलाकों में जाना चाहते थे लेकिन इसके लिए उन्होंने पहले से सूचना नहीं दी थी। उन्होंने बताया कि इन लोगों को सुरक्षा कारणों से अंदर के इलाकों में जाने की मंजूरी नहीं दी गई।
 
एसपी क्रांति कुमार गडि़देशी ने बताया, "पिछले चार दिनों से लातेहार जिला समेत गढ़वा व छत्तीसगढ़ के संवेदनशील इलाके में चार विदेशी नागरिकों के रांची के एक पत्रकार (हिंदुस्तान टाईम्स) उसीनोर मजुमदार की साथ घूमने की सूचना मिली थी। इसकी सूचना संबंधित जिलों के किसी भी एसपी को नहीं थी। इनके लातेहार पहुंचते ही मुझे इसकी जानकारी मिली। इसके बाद सभी को पूछताछ के लिए बुलाया गया।"
 
पूछताछ में पता चला कि ये चारों विदेशी नागरिक विक्रम कुमार, वेरेन्द जोसेफ, बरगट जालोविली व डफी रेयान बेगनान पिछले चार दिनों से नक्सल इलाकों में घूम रहे थे। आश्चर्य की बात है कि इनके पास टूरिस्ट वीजा तो झारखंड का है, लेकिन ये सभी छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज इलाके में घुम आए हैं। इनके पास से जब्त वीडियो कैमरे में बरगट में 14 जवानों की हत्या के आरोप में बंद नक्सली रविदास मिंज की पत्नी की इंटरव्यू है। पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया है। पूरे प्रकरण की जानकारी गृह विभाग को दे दी गई है और अब आगे की कोई कार्रवाई गृह विभाग के निर्देश पर की जाएगी। 
 
एसपी ने दबाव में आकर चारों विदेशी सैलानियों व पत्रकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची भेज दिया। हालांकि शाम हो जाने के कारण एसपी सभी को लातेहार परिसदन में ही रुकने की बात कह रहे थे, लेकिन वे नहीं रुके। इसके बाद सभी को सदर थानेदार के साथ सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची के लिए रवाना किया गया।
 
हिरासत में लिए गए पांचों पत्रकार कैमरे के सामने आने से कतराते रहे। पूछताछ के बाद एसपी कार्यालय से निकलने के बाद सभी लोग सीधे वाहन में सवार हो गए। उन्होंने पत्रकारों को फोटो लेने व बात करने से साफ मना कर दिया। जिले में प्रवेश करने के बाद चारों विदेशी सैलानियों ने जिले के किसी भी सक्षम पदाधिकारी को सूचना नहीं दी थी। एसपी ने बताया कि नियम है कि कोई विदेशी सैलानी या पत्रकार किसी जिले में प्रवेश करता है, तो इसकी सूचना एसपी या किसी सक्षम पदाधिकारी को देनी होती है। लेकिन इन विदेशी पत्रकारों ने ऐसा नहीं किया।
 
जिस वाहन में सवार होकर चारों विदेशी भ्रमण कर रहे थे, वह बिना नंबर प्लेट की नई गाड़ी थी। इसकी सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की एसपी कार्यालय के सामने भीड़ जुट गई। इस दौरान तरह-तरह की चर्चा होती रही। संभावना जताई जा रही है कि विदेशी मीडियाकर्मी रांची के एक पत्रकार समेत एक शीर्ष नक्सली नेता का साक्षात्कार लेने के लिए चार दिनों से कैमरे के साथ अलग-अलग जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे थे।

कर्नाटक के वरिष्ठ पत्रकार वीएन सुब्बाराव का निधन

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में वरिष्ठ पत्रकार वीएन सुब्बाराव का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। उनके परिवार में दो पुत्र हैं। कर्नाटक मीडिया अकादमी के अध्यक्ष रहे राव 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुख्य संवाददाता रह चुके थे। उन्होंने डेक्कन हेराल्ड और मिड डे में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

उन्होंने कुछ समय तक प्रीलांसर के तौर पर काम किया था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने एक राजनीतिक साप्ताहिक और एक फिल्मी साप्ताहिक भी निकाला था। मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने राव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। (वार्ता)

बिहार में पत्रकारों पर शराब माफ़िया का हमला, जिंदा जला देने की धमकी

बिहार के मुजफ्फरपुर में शराब माफिया और उनके गुंडों ने मंगलवार को विशुनपुर सरैया चौक पर पत्रकारों पर हमला बोल दिया। स्थानीय लोगों के बीचबचाव से ही पत्रकारों की जान बच पायी, लेकिन गुंडे उन्हें जिंदा जला देने की धमकी देते हुए चले गये। अवैध शराब के व्यापारी नेकनामपुर शराब कांड के बाद अखबारों में लगातार प्रकाशित हो रही खबरों से गुस्साए हुए हैं। 

ग़ौरतलब है कि बिहार के नेकनाम गांव में जहरीली शराब पीने से सात लोगों की मौत हो गयी थी।
 
ताजा घटना मंगलवार की है जब कुछ मीडिया घरानों के पत्रकार नेकनामपुर शराब कांड की खबर लेकर कर वापस लौटते समय देवरिया थाने के विशुनपुर सरैया चौक पर मौजूद एक दुकान में नाश्ता कर रहे थे। इसी बीच इलाके का स्प्रिट माफिया बिहारी सिंह अन्य गुंडों के साथ अचानक पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए जिंदा जला देने की धमकी देने लगा। शोरगुल सुन सैकड़ों लोग घटनास्थल पर पहुंच गए और माफियाओं का विरोध शुरू कर दिया। 
 
लोगों का विरोध देख बिहारी सिंह अपने गुंडों समेत भाग निकला। घटना से आक्रोशित लोगों ने स्टेट हाइवे जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। तब तक पारू थानाध्यक्ष शंभू प्रसाद यादव व देवरिया थाने के दरोगा प्रकाश कौशिक घटनास्थल पर पहुंच गए और बदमाशों को तुरंत गिरफ्तार करने का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त कराया। दरोगा ने बताया कि शराब व स्प्रिट माफियाओं द्वारा किए गए हमले के खिलाफ पुलिस फौरी कार्रवाई करेगी।
 
बताया जाता है कि हमलावरों ने साफ-साफ पत्रकारों को धमकी दी और कहा, "तुमलोग शराब के खिलाफ खबर छाप कर अपनी जिंदगी से खेल रहे हैं हम सब जिंदा जला देंगे।" घटना से आक्रोशित अरुण कुमार सिंह, जेपी यादव, शंकर प्रसाद यादव, शिवलाल प्रभात, बसंत कुशवाहा, राजेन्द्र राम, रंजीत कुमार सिंह, मुखिया उषा देवी, मोहन राय, विनोद कुमार समेत कई जनप्रतिनिधियों ने घटना की घोर निंदा करते हुए हमलावरों को अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है।
 
पूर्व मंत्री रामविचार राय ने देवरिया में पत्रकारों पर शराब माफियाओं के हमले की निंदा की है। आरोपी की गिरफ्तारी जल्द सुनिश्चित कर पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग एसएसपी से की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। घटना की निंदा करने वालों में पूर्व जिप मदन प्रसाद, जिला पार्षद डा.शिल्पा चौधरी, विनोद कुमार सिंह, ठाकुर हरिकिशोर सिंह, पूर्व विधायक मिथिलेश प्रसाद यादव, मिशन इंकलाब के डा.अजीमुल्लाह अंसारी, संजय कुमार, मदन प्रसाद सिंह, एसएन यादव, राजधारी राम, जलांधर राम आदि शामिल हैं।
 
साहेबगंज में भी प्रो. अजय कुमार, प्रो. मणिकांत गुप्ता, संजीत कुमार, अनिल कश्यप, केशव केसरी आदि ने पत्रकारों पर हुए हमले की निंदा की है। हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी व नेकनामपुर कांड के दोषियों को फांसी देने की मांग की गई है।
 
(एक पत्रकार द्वारा भेजी गयी ख़बर पर आधारित)

 

इंडिया टीवी के स्टिंग में फंसे कई अंपायर, ग़ौरी ने कहा फर्ज़ी है ऑपरेशन

 

भारतीय टीम भले ही क्रिकेट के टी-20 वर्ल्ड कप से बिना पदक लिये ही वापस आ गयी हो, उसके प्रशंसक मैदान से बाहर रहने के मूड मे नहीं हैं। उसे ताजा समर्थन मिला है इंडिया टीवी से जिसने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिेये साबित कर दिया कि हार और जीत खिलाड़ियों की मेहनत और हुनर की मोहताज़ नही है, बल्कि इसके लिये सटोरियों और बेईमानों को भी क्रेडिट दिया जाना चाहिए। उधर एक पाकिस्तानी अंपायर ने इस ऑपरेशन को झूठा करार दिया है।
 
भारत जैसे देशों में जहां क्रिकेट किसी मज़हब से कम नहीं है, इस स्टिंग ऑपरेशन में बिकता देखना खासा चौंकाने वाला था। इंडिया टीवी ने राजफाश किया है कि हाल में संपन्न हुए टी-20 वर्ल्ड कप व बांग्लादेश प्रीमियर लीग में पाकिस्तान, श्रीलंका व बांग्लादेश के छह अंपायर ऐसे थे, जो रुपये लेकर अपना निर्णय बदलने को तैयार थे। इस न्यूज चैनल ने ‘ऑपरेशन वर्ल्ड कप’ नाम से दिखाए स्पेशल रिपोर्ट में कई राज खोले।
 
चैनल का दावा है कि उसने यह स्टिंग वर्ल्ड कप से पहले जुलाई-अगस्त और सितंबर में किया था। इस दौरान कुछ अंपायरों को चैनल के अंडरकवर रिपोर्टर से रुपयों के बदले फैसले बदलने व अहम जानकारियां देने के लिए हामी भरते देखा गया है। इन अंपायरों में पाकिस्तानी अंपायर नदीम गौरी व अनीस सिद्दीकी, श्रीलंका के सगारा गलागे, गैमिनी दिशानायके, मरिस विन्सटन और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के वर्तमान अंपायर पैनल में मौजूद बांग्लादेशी अंपायर नादिर शाह शामिल हैं।
 
इंडिया टीवी का कहना है कि आईसीसी के बांग्लादेशी अंपायर शर्फूद्दौला इर्बे शाहिद ने उनके अंडरकवर रिपोर्टरों से पैसे लेकर हक में फैसला देने से साफ इंकार कर दिया। हालांकि नादिर शाह अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर के किसी भी मैच में अपने फैसलों को फिक्स करने के लिए तैयार हो गए। इसके अलावा दूसरे अंपायर भी बांग्लादेश प्रीमियर लीग में रिपोर्टर के अनुसार अपने फैसले बदलने को राजी थे। आईसीसी ने न्यूज चैनल से इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा है।
 
उधर पाकिस्तानी अंपायर नदीम ग़ौरी ने दावा किया है कि ये ऑपरेशन फर्ज़ी है। ग़ौरी ने पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनसे ये बातचीत श्रीलंका प्रीमीयर लीग के दौरान की गयी थी और इसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले दो सालों से अंतर्राष्ट्रीय पैनल पर हैं ही नहीं तो इस स्टिंग का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है। ग़ौरी ने आरोप लगाया कि ये रिपोर्टर नहीं, ब्लैकमेलर हैं।

कांडा के खिलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए काफी सुबूत हैं दिल्ली पुलिस के पास

 

पूर्व एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले में पुलिस ने हरियाणा के पूर्व मंत्री और हरियाणा न्यूज़ टीवी के मालिक गोपाल कांडा व उसकी मैनेजर अरुणा चड्ढा के खिलाफ लगभग एक हजार बीस पेज का आरोप पत्र दायर करते हुए दावा किया है कि उनके पास केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। 
 
पुलिस ने अपने आरोप पत्र के साथ गीतिका को भेजे गए ईमेल व स्त्री रोग विशेषज्ञ की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि गीतिका शर्मा के गर्भवती होने के बाद उसका गर्भपात भी कराया गया था। इतना ही नहीं गीतिका के साथ काफी लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए गए थे। पुलिस ने रोहिणी कोर्ट में दायर अपने आरोप पत्र में पुरानी कहानी को दोहराते हुए कहा है कि उनको कांडा के खिलाफ केस चलाने के लिए अधिक्तर सबूत मिल गए हैं। कांडा के 11 दिन भूमिगत रहने के दौरान की गई छापेमारी में ही पुलिस के हाथ पुख्ता सबूत लगे है।
 
गीतिका पर दबाव बनाने एवं मानसिक प्रताडऩा संबंधी दस्तावेज व पुलिस का गवाह बने एमडीएलआर के कर्मचारी मंदीप के खुलासे से कांडा पर शिकंजा कसने में पुलिस को खासी कामयाबी मिली है। मंदीप ने जहां गीतिका और कांडा के संबंधों का खुलासा कियाए वहीं ईमेल व अन्य दस्तावेजों ने साबित किया कि कांडा किसी भी सूरत में गीतिका को अपनी कंपनी से अलग नहीं होने देना चाहता था। यहां तक कि गीतिका को उसने बीएमडब्ल्यू गाड़ी दे रखी थी। उसके नाम पर कुछ संपत्तियां भी की थीं। पुलिस ने अपने आरोप पत्र में बताया कि गीतिका पर दबाव बनाने के लिए उस पर फर्जी ईमेल आईडी से मेल भी भेजे गए।
 
इतना ही नहीं कांडा व अरूणा खुद उससे मिलने दुबई गए। पुलिस को सबूत के तौर पर  गीतिका का दो पेज का सुसाइड नोट कांडा व अरुणा की दो बार दुबई यात्रा का ब्यौरा गीतिका को अलबशीर नामक फर्जी आइडी से भेजी गई धमकी भरी ईमेल की कॉपी व ईमेल एकाउंट बनाने में प्रयुक्त एमडीएलआर कंपनी के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, सनडेल एजुकेशनल सोसायटी व एकेजी कंपनी के दस्तावेज जिनमें गीतिका को पदाधिकारी बनाने संबंधी कागजात मिले हैं। 
 
इसके अलावा पुलिस को एमडीएलआर कंपनी व कांडा के निजी कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क गीतिका का नियुक्ति पत्र जिसमें उसे हर शाम कांडा के पास जाकर रिपोर्ट करने की शर्त  रखी गई थी गीतिका को अरुणा व कांडा द्वारा भेजे गए एक हजार से अधिक एसएमएस व ईमेल का ब्योरा गीतिका,कांडा व अरुणा के बीच बातचीत के मोबाइल कॉल डिटेल्स व कंपनी के कर्मचारी द्वारा सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अदालत में दिया गया बयान भी शामिल है।
 
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले तमाम सबूतों से यह साफ हो जाता है कि अरूणा व कांडा ने ही गीतिका को इतना प्रताडि़त किया कि उसने आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लिया। इतना ही नहीं पुलिस ने इन दोनों पर धोखाधड़ी, सबूत मिटाना, फर्जी कागजात तैयार करना, धमकी देना सहित आईटी एक्ट के तहत भी मामला बनाया है। हालांकि अभी भी पुलिस को अभी भी उस मोबाइल की तलाश है जो कंपनी की तरफ से गीतिका को दिया गया था और नौकरी छोडऩे के बाद गीतिका ने उसे वापिस लौटा दिया था। इसके अलावा कांडा के दो मोबाइल फोन व अरूणा को कंपनी की तरफ से दिया गया मोबाइल भी पुलिस को नहीं मिला है। (पंजाब केसरी)

क्या सचमुच फंस पाएंगे ज़ी न्यूज़ के ब्लैकमेलर संपादक?

ज़ी न्यूज़ के एडीटरों पर ब्लैकमेलिंग के आरोप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दूसरों को सच्चाई और सफाई का पाठ पढ़ाने वाले स्वनामधन्य मेनस्ट्रीम मीडिया का अपना चरित्र कितना झूठा और मैला है। कोयला आवंटन की दलाली की खबरों पर व्यापार घरानों, मंत्रालयों, दलालों और मंत्रियों के दामन पर कालिख पोतने वाली मीडिया का खुद का चेहरा कितना काला है ये भी साफ दिख गया। 

 
जिंदल एक ऐसा व्यापार घराना है जिसके संबंध कभी ज़ी न्यूज़ के मालिकों से बेहद करीबी थे, लेकिन उसी के नौकरों की क्या बिसात थी जो वे अपने मालिक के दोस्तों को ब्लैकमेल करने पहुंच गये। ऐसा तो नहीं हो सकता कि वर्षों से इसी जोड़-तोड़ में रह चुके सुधीर चौधरी और  को इस बात का पता नहीं हो। तो क्या ये सबकुछ मालिकों की जानकारी के बगैर हुआ? अगर ऐसा होता तो अबतक दोनों मीडियाकर्मियों की विदाई हो चुकी होती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ये साफ साबित करता है कि चैनल मालिक और पत्रकार चाय और चीनी की तरह घुले-मिले हैं।  
 
बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि पत्रकारों की संस्था एडीटर्स गिल्ड के आला पदाधिकारी टिप्पणी से क्यों बच रहे हैं? इस एफआईआर की खबर पिछले तीन दिनों से हरेक चैनल के न्यूज़रुम और उनके मालिकों के ड्राइंगरुम में चर्चा का विषय बनी हुई है। देश के चोटी के संपादकों की संस्था एडीटर्स गिल्ड, जो पत्रकारिता के मूल्यों और नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करता है, अपने कोषाध्यक्ष के खिलाफ़ कुछ भी कहने से क्यों हिंचक रहा है? गिल्ड अगर अपने पदाधिकारी के ख़िलाफ नहीं बोल सकता तो कम से कम बचाव में भी तो उतरे। आखिर ऐसी क्या मज़बूरी है जो उसे अपना रुख तक साफ नहीं करने दे रही है?
 
क्या जिंदल ग्रुप ने जो सुबूत पेश किये हैं वो इतने पुख्ता हैं कि एडीटरों पर आरोप साबित हो जाएंगे? होटल के सीसीटीवी कैमरे में ज़ाहिर तौर पर ऑडियो रिकॉर्डिंग स्टिंग कैमरे की तरह साफ नहीं होती। इसे साबित करने के लिए जिंदल के अधिकारियों ने फोन की रिकॉर्डिंग और कॉल रिकॉर्डों का सहारा लिया है। दोनों ही पत्रकारों ने अगर खुद फोन पर बात की होगी तो यकीनन कॉल के दौरान पैसे मांगने की कोशिश नहीं की होगी। ऐसे में आरोपों को कानूनी तौर पर साबित करना मुश्किल हो सकता है। चैनल के पत्रकार ये भी कह कर बच सकते हैं कि उन्होंने ऑफिशियल वर्जन यानि आधिकारिक बयान लेने के लिए अधिकारियों से बात-मुलाक़ात की होगी। लेकिन क्या सुधीर चौधरी, समीर आहलूवालिया और ज़ी न्यूज़ प्रबंधन कभी इस सवाल का जवाब देने की स्थिति में है कि जिंदल के अधिकारियों से मिलने (या फिर रिपोर्ट पर ऑफिशियल बाइट लेने) के लिए चैनल हेड को क्यों जाना पड़ा जबकि उनके रिपोर्टरों पर कथित तौर पर ग्रुप के अधिकारी पहले ही हमला कर चुके हैं? 
 

क्या कोई भी बड़ा पत्रकार इसलिये कुछ कहने से बच रहा है कि उसके साथ भी कभी ऐसी ही स्थिति आ सकती है? सारी तस्वीर साफ होने

धीरज भारद्वाज
धीरज भारद्वाज
और एफआईआर दर्ज होने के बाद आखिर ये बड़े चेहरे खामोश क्यों है। देश का सबसे पुराना चैनल अभी भी अपने एडीटर के साथ क्यों खड़ा है। ये वो सवाल हैं जो पत्रकारिता से जुड़ा हर आदमी पूछता है लेकिन उससे बड़ा सवाल है कि आखिर इनका जवाब देगा कौन?

लेखक धीरज भारद्वाज कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. न्यू मीडिया के सक्रिय जर्नलिस्ट हैं. कई न्यूज वेबसाइटों में संपादक का दायित्व निभाते हुए कई बड़ी खबरें इन्होंने ब्रेक की हैं. इनसे संपर्क dhiraj.hamar@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.


जी-जिंदल ब्लैकमेलिंग प्रकरण का खुलासा भड़ास ने किया, और खुलासे वाली वह खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें..

http://bhadas4media.com/edhar-udhar/6050-2012-10-06-09-52-05.html

जी-जिंदल ब्लैकमेलिंग प्रकरण से संबंधित अन्य खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- zee jindal

महुआ न्यूज़ से भी विदाई हुई भूपेंद्र नारायण भुप्पी की

खबर है कि भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी की महुआ ग्रुप से विदाई हो गयी है। भुप्पी ने पिछले साल अप्रैल में महुआ ग्रुप में बतौर ऑपरेशन हेड ज्वाइन किया था। वे सीधे मालिक पीके तिवारी को रिपोर्ट कर रहे थे और ग्रुप के लायजनिंग के सभी काम देख रहे थे। इसकी ऐवज़ में उन्हें मोटी तनख्वाह भी मिल रही थी लेकिन इसके बावजूद वे तिवारी के जेल जाने और फ्रॉड संबंधित मामलों को निपटाने में कुछ खास नहीं कर पाए।

आजतक में कई राज्यों के ब्यूरोचीफ रह चुके भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और पीके तिवारी, दोनों एक ही गाजीपुर जिले के निवासी हैं और इनके बीच पहले से अच्छे संबंध रहे थे। बताया जाता है कि महुआ चैनल की शुरुआत के वक्त पीके तिवारी ने भुप्पी को ज्वाइन करने का ऑफर दिया था लेकिन तब भुप्पी ने टीवी टुडे जैसे बड़े ग्रुप में कार्य कर रहे होने के कारण ज्वाइन करने से मना कर दिया।
 
सूत्रों के मुताबिक तब भुप्पी ने अंशुमान तिवारी को रिकमेंड किया और पीके तिवारी ने अंशुमान को नियुक्त भी कर दिया था। बाद में उन्हें भी हटा दिया गया। उधर भुप्पी पर हिमाचल के कद्दावर नेता प्रेम कुमार धूमल को ब्लैकमेल करने का आरोप लगा और कथित तौर पर उनके स्टिंग ऑपरेशन की सीडी भी अरुण पुरी के पास पहुंचा दी गयी।
 
कई विवादों के बीच आजतक से निकाले जाने के बाद कमर्शियल पायलट की डिग्री रखे भुप्पी ने हवाई जहाज भी उड़ाया, लेकिन जल्दी ही जमीन पर आना पड़ गया और नौकरी छूट गयी। बेरोजगार होने पर पीके तिवारी के हिलते-डुलते साम्राज्य को बचाने के लिए ऐसे लोगों की जरूरत थी जो शीर्ष स्तर पर दांवपेंच लगा सकें और कंपनी के हर कमजोर मोर्चे को मजबूत बना सकें। पंजाब के एक बड़े पुलिस अधिकारी के परिवार की पुत्री से शादी होने के कारण भुप्पी का कई प्रदेशों के शीर्ष लोगों से अच्छा खासा परिचय रहा है, लेकिन लगता है उनके तमाम दांव-पेच नाकारा साबित हुए।

कई अखबारों में छपे हैं ज़ी न्यूज़ के एडीटरों के ‘ब्लैकमेलिंग’ के किस्से

ज़ी न्यूज़ के एडीटरों पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगने की ख़बर सिर्फ हिन्दुस्तान टाइम्स में ही प्रकाशित नहीं हुई है, बल्कि इसे देश की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने भी प्रसारित की है। टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और बिजनेस स्टैंडर्ड समेत कई अखबारों ने इसे प्रमुखता से छापा है।

हालांकि ये खबर भड़ास4मीडिया पर 6 अक्टूबर को ही प्रकाशित हो गयी थी, लेकिन तब हर किसी ने इसे कंफर्म करने से इंकार कर दिया था। ग़ौरतलब है कि भड़ास4मीडिया पर एफआईआऱ नंबर और दिल्ली पुलिस के विभाग का नाम भी प्रकाशित था, लेकिन किसी भी पक्ष ने टीका-टिप्पणी से इंकार कर दिया था।

सवाल ये भी उठता है कि अब जबकि खबर छप गयी है तब भी ज़ी न्यूज़ प्रबंधन से लेकर एडीटर्स गिल्ड के तमाम तथाकथित बड़े पत्रकारों की जुबान खामोश क्यों है?
 
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर इस प्रकार है:
 
Jindal group alleges Rs 100cr extortion bid by Zee staff
 
NEW DELHI: The crime branch of Delhi Police has registered an FIR against two journalists with the Zee group, as well as a few others, for allegedly trying to extort Rs 100 crore from Congress MP Naveen Jindal's mining company.
 
According to a crime branch officer, the FIR, lodged under sections pertaining to extortion, comes after the HR head of the Jindal company gave a written complaint to the police against Sudhir Chaudhry, business head and editor of the Zee group, and Sameer Ahluwalia, of Zee business, as well as others, alleging they were trying to extort money from the Jindal company through advertisements in lieu of dropping certain stories regarding coal mine allocations.
 
The senior officer confirmed the FIR under appropriate sections of IPC to TOI. DCP, crime branch, however, refused to comment.
 
As per the FIR, the HR head of the Jindal company has alleged that Chaudhry and Ahluwalia met officials of the Jindal group and told them that they had stories against them which could be dropped if a certain amount of money was paid.
 
The official alleged that when the company refused to pay, the channel ran a series of malicious news items targeting the Jindals. Reacting to the charge, Sudhir Chaudhry told TOI, "These allegations are baseless, false and fabricated. The Jindals were the biggest beneficiaries in the coal block allocation scam and we had exposed them. If they are targeting us, they are targeting investigative journalism. It's an attempt to malign us and seems a result of their frustration after being exposed."
 
Chaudhry further said, "All our stories were based on proper documentation and investigations. Every media group ran the stories. Does this mean that all of them were trying to extort money from them? "
 
(एक पत्रकार द्वारा भेजे गये मेल पर आधारित)
 
इस प्रकरण का खुलासा करने वाली भड़ास की खबर को पढ़ने के लिए क्लिक करें… 
 

सही साबित हुई सुधीर चौधरी पर ब्लैकमेलिंग के आरोप वाली खबर

आखिर ज़ी न्यूज़ के एडीटरों के खिलाफ एफआईआर की ख़बर सच साबित हो ही गयी। भड़ास4मीडिया.कॉम ने इस मामले में निर्भीक पत्रकारिता का उदाहरण पेश करते हुए सबसे पहले ये ख़बर छापी थी। आज हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली के आरोप में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ज़ी न्यूज़ के एडीटर सुधीर चौधरी और ज़ी बिजनेस के समीर आहलूवालिया के खिलाफ़ जिंदल ग्रुप के एक अधिकारी की तरफ़ से एफआईआर दर्ज करवाई गयी है। 

 
खबर ये भी है कि इस एफआईआर के साथ पुलिस को फोन की रिकार्डिंग और खुफिया कैमरे में दर्ज वीडियो की सीडी भी दी गयी है जिसमें सुधीर चौधरी और ज़ी बिजनेस के अधिकारी (समीर आहलूवालिया) को घूस मांगने के लिए एक फाइव स्टार होटल में आते हुए और मीटिंग करते हुए बताया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि कोयला कांड में जिंदल ग्रुप के खिलाफ स्टोरी ना चलाने के लिए मोटी रकम (50 से 100 करोड़ रुपए) की मांग की गई थी। ये एफआईआर जिंदल ग्रुप की तरफ से करवाई गई है। 
 
खबर के मुताबिक पुलिस सूत्रों ने सिर्फ यही कहा है कि अभी जांच चल रही है क्योंकि वे सिर्फ शिकायतकर्ता के सुबूतों पर भरोसा नहीं कर सकते। उधर सुधीर चौधरी ने ऐसे किसी एफआईआर की जानकारी होने से इंकार किया है। सुधीर चौधरी ने कहा है कि उनसे अभी तक किसी भी पुलिस अधिकारी ने संपर्क नहीं किया है। हालांकि उन्होंने ये माना है कि कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े घपले को 'बेनकाब' करने के लिये उनके चैनल ने जिंदल ग्रुप के खिलाफ कई रिपोर्ट चलाई थीं और हो सकता है कि उन्हें रुकवाने में नाकाम रहने पर ये एफआईआर दर्ज़ करवाई गयी हो।
 
पुलिस के पास दर्ज़ रिपोर्ट में कहा गया है कि सुधीर चौधरी ने जिंदल ग्रुप से संपर्क साध कर कहा था कि उनके पास ग्रुप के खिलाफ पुख्ता सुबूत हैं। पुलिस के मुताबिक सुधीर चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने जिंदल ग्रुप से खबर न चलाने के लिये मोटी रकम मांगी थी।
 
ये है हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी खबर:
 
Extortion charge against senior TV journalists
 
New Delhi, October 07, 2012
 
A top executive of a company owned by Congress MP Naveen Jindal has filed an FIR against Sudhir Chaudhary, editor of Zee News and another top executive of Zee Business. Sources in Delhi Police’s crime branch said investigation of the case has been given to the Inter-State Cell (ISC).
 
“The complaint of extortion against two top journalists of Zee News for not running the news on Coal blocks allocation was received from a representative of Jindal. After examining the complaint, a case has been registered and we will now be calling both the parties,” said a senior police officer, requesting anonymity.
 
When asked about the extortion amount, the officer refused to quote the exact amount but said it is over R50 crore. “The complaint is supported by call records details and video recording at a hotel, where Jindal had called these two for a meeting. We are examining the evidence,” the officer added.
 
Police said the meeting had taken place at a five-star hotel in New Delhi and apart from the evidence provided by the complainant, they have also contacted hotel authorities for CCTV footage. “We cannot rely on the evidence given by the complainant. The allegation is that Chaudhary contacted them and claimed that he had strong evidence against Jindal’s company in connection with coal scam. He demanded money for not running the story,” the officer added.
 
However, Zee News later ran the story. Sudhir Chaudhary told Hindustan Times that he has no idea about any such complaint as no one from the crime branch has contacted him so far. “We had done a series on coal scam and Jindal’s company’s name was also mentioned. This is nothing but retaliation as they couldn’t stop the stories,” he said. “The allegations are false and fabricated and the intention is just to gag the media,” he added. A spokesperson for Jindal Steel, however, said he is not aware of any such complaint.
 
इस प्रकरण से संबंधित खबर जो सबसे पहले भड़ास पर प्रकाशित हुई, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…….
 
 

 

नहीं रहे मेघालय के वरिष्ठ पत्रकार प्रसाद गुप्ता

पीटीआई से मिली ख़बर के मुताबिक मेघालय के एक वरिष्ठ पत्रकार प्रसाद गुप्ता का शनिवार को गुवाहाटी में दिल का दौरा पड़ने से निधन से हो गया। गुप्ता के परिजन और मित्रों ने उनके निधन की जानकारी दी। 

55 वर्षीय गुप्ता के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बेटे हैं। 

गुप्ता पत्रकार समुदाय और आम लोगों में काफी लोकप्रिय थे और उन्हें उनकी ईमानदारी और मुखर रवैये के लिए जाना जाता था। 

उन्होंने कई मीडिया संगठनों के लिए काम किया। इनमें प्रिंट और ब्रॉडकास्ट मीडिया दोनों शामिल हैं।

महाराष्ट्र में पत्रकार पर धारदार हथियारों से हमला

 

पीटीआई की खबर के मुताबिक महाराष्ट्र के बीड जिले में हथियारों से लैस चार लोगों ने एक पत्रकार पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। 
 
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार रात चार नकाबपोश लोगों ने एक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी एवं एक स्थानीय अखबार से जुड़े संजय मलानी पर हमला किया। 
 
हमले के कारणों का पता नहीं चल पाया है। संजय को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिलाधिकारी सुनील केंद्रेकर ने कहा कि हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गोवा में गांव वालों ने तीस पत्रकारों को बंधक बनाया

 

गोवा के कुरपेम गांव में स्थानीय लोगों ने करीब 30 पत्रकारों को बंधक बना लिया. ये पत्रकार एक समारोह में कवरेज करने गए थे.
 
आजीविका के लिए खनन पर निर्भर स्थानीय लोगों ने पणजी से करीब 80 किलोमीटर दूर कुरपेम गांव में शुक्रवार को करीब 30 पत्रकारों को बंधक बना लिया.
     
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट (सीएसई) और गोवा मराठी पत्रकार संघ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में हिस्सा लेने के लिए पत्रकार वहां गए हुए थे.
     
आयोजकों में शामिल एक पत्रकार राजू नायक ने कहा कि करीब 80 लोगों के एक समूह ने हमें रोका और हमें दो घंटे तक बंधक बनाए रखा.
     
नायक ने कहा कि पुलिस को सूचित किया गया और पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद ही पत्रकार वहां से रवाना हुए.
     
स्थानीय लोग शायद इस बात से क्षुब्ध थे कि पूरे राज्य के खदानों में फिलहाल काम नहीं हो रहा है.
     
गोवा भारत में लौह अयस्क का बड़ा निर्यातक है. बहरहाल पिछले कुछ वर्षों से अवैध उत्खनन एवं पर्यावरणीय नुकसान चिंता का विषय बन गया है. (समय)

चिन्मयानंद का साथ छोड़ अपने पत्रकार पति के पास लौटीं चिदर्पिता

एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत बहुचर्चित साध्वी चिदर्पिता गुरुवार शाम सामान समेत अपने बदायूं निवासी पत्रकार पति बीपी गौतम के पास लौट आईं। करीब डेढ़ महीने पहले वो गौतम का दामन छोड़ हरिद्वार के परमार्थ आश्रम वापस चली गई थीं। इस आश्रम के अध्यक्ष पूर्व गृहमंत्री स्वामी चिन्मयानंद हैं, जिनपर वो पहले अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज करा चुकी थीं। देर शाम एसपी मंजिल सैनी के निर्देश पर पुलिस ने साध्वी और गौतम से पूछताछ की।

शाहजहांपुर के मुमुक्ष आश्रम के शिक्षण संस्थान की प्रबंधक रहीं साध्वी का नौ अगस्त की रात पति बीपी गौतम से विवाद इतना बढ़ गया था कि उनके दांपत्य जीवन में दरार आ गई थी। साध्वी ने गौतम के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया और हरिद्वार के परमार्थ आश्रम में शरण ली। इस बीच गौतम ने एसपी समेत आईजी को शिकायती पत्र देकर चिदर्पिता के साथ अनहोनी की आशंका भी जताई थी।

 
उधर हरिद्वार से खबर है कि साध्वी चिदर्पिता एक बार फिर अपने गुरु परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम से भाग निकलीं। करीब सवा महीने पहले अपने पति की प्रताड़ना से तंग होकर वह आश्रम में वापस आ गई थीं। इस दौरान वह ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में भी रहीं। वहा उनका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने के लिए इलाज चला था। चंद रोज पहले उन्हें ऋषिकेश में घूमते भी देखा गया। दो दिन पहले वह हरिद्वार के परमार्थ आश्रम पहुंची थीं। गुरुवार अलसुबह सफेद रंग की ज़ायलो गाड़ी (यूपी 24-डी-7576) पर सवार होकर चली गई। वापस न लौटने पर आश्रम प्रबंधन ने वहां सप्तऋषि थाने में इसकी सूचना दी थी। 
 

दैनिक भास्कर ने राजस्थान में की दो संपादकों की अदला-बदली

 

दैनिक भास्कर ने राजस्थान में अपने दो एडीशनों के संपादकों की अदला बदली कर दी है। भीलवाड़ा में स्थानीय संपादक रहे राजेश रवि को अब अलवर संस्करण का संपादक बना दिया गया है। अलवर में अबतक संपादक रहे प्रदीप भटनागर को भीलवाड़ा संस्करण की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।
 
दोनों ही संपादकों ने इस खबर की तस्दीक की है, लेकिन इसे रुटीन ट्रांस्फर बताया। राजेश रवि अलवर के ही रहने वाले हैं जबकि प्रदीप भटनागर इलाहाबाद के निवासी हैं और पत्रकारिता का लंबा कैरीयर है। वे पिछले बारह वर्षों से दैनिक भाष्कर ग्रुप से जुड़े रहै हैं और इसके विभिन्न संस्करणों में अलग-अलग पदों पर रह चुके हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रदीप भटनागर राजस्थान में भास्कर को स्थापित कर ने वाले कुछ चोटी के पत्रकारों में से एक हैं।

 

बंद करो न्यूज़ चैनल, कुछ और लगा दो… दिमाग पक गया है

अब शाम 6 बजे के बाद न्यूज़ चैनल देखने का मन नहीं करता। ये मेरा निज़ी विचार भी है और कुछ यार दोस्तों के मन में भी कुछ ऐसा ही है.. वज़ह, उन नेताओं को शाम को न्यूज़ की जगह राजनीतिक बहस में बिठा दिया जाता है जो देश लूटने के भागीदार हैं। जनता उन्हें देखना पसंद नहीं करती उनकी जनसभाओं में जाना पसंद नहीं करती, जनता का बस चले तो इनका हाल बुरा कर देती। क्या हमने ये ही सब देखने के लिए न्यूज़ चैनल्स को पैसा दिया है? माफ़ करना अब करीब-करीब सभी राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल्स मुफ्त में नहीं देखे जा रहे। केबल टीवी की भाषा में ये पेड चेनल हैं।

शाम की बहस में कांग्रेस, बीजेपी, सपा बसपा और अन्य कई दलों के नेता चीख-चीख कर कान ख़राब कर देते हैं। बेचारा एंकर… उसी पर तरस आता है कि अपनी नौकरी बचाने के लिए उसे इन नेताओं के साथ वक्त बर्बाद करना पड़ रहा है। न्यूज़ चैनलों ने अपनी कॉस्ट कटिंग की वज़ह से खबर से ध्यान हटा कर नेताओं की बहस पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। शाम होते ही हर न्यूज़ चैनल ऐसा कर रहा है, लिहाज़ा दर्शक खीज रहा है खबर की तलाश में दर्शक लोकल चैनल की तरफ रुख कर रहा है.. जहां शहर, प्रदेश की खबर तो कम से कम दिखलाई देती है। कितने दर्शक ऐसे होंगे जो इन बेईमान नेताओं की बहस को सुनना चाहते होंगे। देश बेचने में लगे इन नेताओं की सुबह शाम अपनी कुर्सी बचाने में लगी रहती है। इन नेताओं से कब छुटकारा मिलेगा? उफ़्फ..

 
राष्टीय न्यूज़ चैनल वालों, दर्शको पर रहम करो। एक आध घंटा तो ठीक है, पर तीन चार घंटे दिमाग नहीं झेल पा रहा, दिमाग का दही बन जा रहा है, न्यूज़ चैनल वालों हम आपका न्यूज़ चैनल देखने का पैसा देते हैं। फ्री में नहीं देख रहे, कुछ तो रहम करो.. एंकर को देखना अच्छा लगता है पर ये संजय निरुपम, जगदम्बिका पाल, मुख़्तार अब्बास, मनीष तिवारी और हाँ आँख बंद 
 
कर चिल्ला कर बोलने वाले कांग्रेसी नेता शकील अहमद.. इनसे कब निज़ात दिलाओगे..? खबर दिखाओ… बहस नहीं… अब बात कर लें फटाफट न्यूज़ की, स्पीड न्यूज़ की, गोली से रफ़्तार से तेज़ खबर की.. ट्वेंटी ट्वेंटी, शतक खबर की… ऐसी चलती शॉट कोई और आवाज कोई और… क्या मज़ाक है… एक खबर को चार बार दिखा कर शतक पूरा किया जा रहा है तो फिर सौ खबरें कैसे हुईं..? विद्वान संपादक बताईये ना.. जिम्मेदारी आपकी ही तो है…ऐसी भी क्या कॉस्ट कटिंग…
 
एक टिकर तीन दिन तक चलता है कि भारत ने पाकिस्तान को हराया। अरे भाई जीत गया आप भी 10 घंटे चला दो… सब को पता चल गया, अब कोई दूसरी खबर की टिकर चला दो ना… एक ही लाइन तीन-तीन दिनों तक कोई कैसे सहन करेगा… ये भी क्या दर्शक बताएगा?
 
पहले टिकर का अपना असर होता था अब ये भी बेअसर हो गया है ..समझ  में नहीं आता कि टिकर बदल कर चलाने में क्या खर्चा आता है? एक दौर था जब अपराध, नाग नागिन ,ज्योत्षी खबरें देख कर उबकाई आने लगती थी अब इन कांव-कांव करते नेताओं को देख कर टीवी स्क्रीन फोड़ने का मन करता है… अरे भाई खबर दिखलाओ जरा  ये तो बताओ सोनिया गाँधी ने यूएसए जाकर कौन सी बीमारी का इलाज करवाया, कहाँ करवाया?
 
जनता जानना चाहती है… बताओ ना चुप क्यों हो गए…? क्या कोई पाबन्दी है? खबर कहाँ है? क्या है? क्या ये भी दर्शक बताएगा, संपादक .और उनकी टीम क्यों चुप हो जाती है? क्या नौकरी का डर है या बाज़ारवाद हावी हो गया है खबर दिखलाने के लिए मोटी तनख्वाह जरूरी नहीं होनी चाहिए… मोटी तनख्वाह वाले संपादकों, रिपोर्टरों  का क्या हाल हुआ है? कुछ गर्त में चले गए या लापता हो गए… नाम आप भी जानते हैं… बताने की जरूरत नहीं… खबरों में सुधार करने के लिए क्या क्या करना है आप से बेहतर कोई नहीं जानता कॉस्ट कटिंग इसका हल नहीं है ..खबर दिखाना… दर्शक को अपने चैनल से ना जाने देना ही इसका हल है।
 
कॉस्ट कटिंग करनी है तो अपनी मोटी तन्खवाह में से करो… कंपनी से मिलने वाली दामादों वाली सुविधाओ में करो… क्यों साबुन तेल के बिल लगा देते हो, अपने कपड़ों को प्रेस करने, बच्चों को स्कूल भेजने में कम्पनी की कार का इस्तेमाल करते हो… याद रखो जब तक नौकरी है तब तक मज़े है कहीं ये मज़े आपकी नौकरी लेने कि वज़ह ना बन जाएं.. बहरहाल, हम रास्ता न भटक जाएँ, सीधे खबर पर चले जाएँ तो ज्यादा बेहतर होगा। 
 
खबर… सधे शब्दों में हार्ड न्यूज़… जो सरकार हिला दे… शासन में अफरातफरी ला दे… रिपोर्ट देख दर्शक कहें, "वाह ये है खबर…" न कि न्यूज़ चैनल्स  पर इन नेताओ को देख ये कहे… "कुछ और लगा दो… दिमाग पक गया है…"
 
लेखक दिनेश मानसेरा उत्तराखंड के टीवी जर्नलिस्ट हैं.

हिना के इश्क की ख़बर छपी तो पति हुए चौकन्ने, मंगवाई कॉल डिटेल

 

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और पाकिस्तान पीपुल्‍स पार्टी (पीपीपी) के अध्‍यक्ष बिलावल भुट्टो के 'रोमांस' के मामले में नया मोड़ आ गया है। पाकिस्‍तान में जहां इस 'अफवाह' पर चटखारे लिए जा रहे हैं, वहीं खबर आ रही है कि हिना के पति ने मामले को गंभीरता से लिया है। 

 
हिना के अरबपति शौहर फिरोज गुलजार ने मंगलवार को फेडरल इनवेस्टीगेटन एजेंसी में दो 'संदिग्ध' नंबरों की कॉल डिटेल निकालने के लिए आवेदन किया। गौरतलब है कि बांग्लादेशी सप्ताहिक टैबलॉयड ब्लिट्ज ने हिना और बिलावल के रोमांस और शादी करने की कथित योजना के बारे में बताया था।
 
इसके बाद से इस रोमांस को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। सोशल मीडिया में भी इस पर चर्चा जोरों पर है। सूत्र बताते हैं कि हिना के पति इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि हिना-बिलावल रोमांस की मीडिया में चल रही खबरें सही है या गलत। 
 
इस बीच खबर यह भी है कि बिलावल भुट्टो ने अपने पिता यानी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को दो-टूक कह दिया है कि अगर उनकी शादी हिना रब्बानी से नहीं होती है तो वह पार्टी छोड़ देंगे। सूत्रों के मुताबिक यह दावा किया जा रहा है कि जरदारी अपने बेटे के इस रोमांस और उनकी मांग से बेहद खफा है और उन दोनों में मनमुटाव चल रहा है।
 
पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो के रोमांस की खबरों पर इंटरनेट पर खूब चुटकियां ली जा रही हैं। सोशल मीडिया और कुछ समाचार वेबसाइटों के मुताबिक बिलावल और हिना रब्बानी का इश्क परवान चढ़ रहा है। बांग्लादेशी टैबलाएड 'ब्लिट्ज' ने इस खबर का खुलासा किया।  
 
'वीकली ब्लिट्ज डॉट नेट' वेबसाइट ने रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया था कि बिलावल हिना रब्बानी से शादी करने की जिद पर अड़े हैं और यही जिद उनके और पिता जरदारी के बीच तनाव भी पैदा कर रही है।
 
पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो के रोमांस की खबरों पर इंटरनेट पर खूब चुटकियां ली जा रही हैं। सोशल मीडिया और कुछ समाचार वेबसाइटों के मुताबिक बिलावल और हिना रब्बानी का इश्क परवान चढ़ रहा है। बांग्लादेशी टैबलाएड 'ब्लिट्ज' ने इस खबर का खुलासा किया।
 
'वीकली ब्लिट्ज डॉट नेट' वेबसाइट ने रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया था कि बिलावल हिना रब्बानी से शादी करने की जिद पर अड़े हैं और यही जिद उनके और पिता जरदारी के बीच तनाव भी पैदा कर रही है।
ब्लिट्ज ने पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के हवाले से कहा है कि बिलावल और हिना रब्बानी के बीच चल रहे रोमांस ने जरदारी और बिलावल के बीच तनाव पैदा कर दिया है। 
 
ब्लिट्ज ने खबर में तो यहां यहां तक दावा किया है कि हिना से शादी करने की अपनी बेटे की जिद से परेशान होकर जरदारी ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की मदद से यह खबर फैलाई कि गैलेक्सी टेक्सटाइल मिल्स ने 7 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के बिल में फर्जीवाड़ा किया है। यह कंपनी खार के पति फिरोज गुलजार चलाते हैं। मीडिया में भी खबरें आती रही हैं कि खार और उनके पति ने विवादास्पद एनआरओ कानून की मदद लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को बचाया है।
 
टैबलायड ने यह दावा भी किया है कि अपने पिता के कड़े प्रतिरोध के चलते बिलावल ने पीपीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने तक की बात कह डाली है। 
 
बिलावल के हिना से शादी करने के फैसले से जरदारी नाराज बताए जा रहे हैं। हिना भी फिरोज गुलजार से अपनी शादी खत्म करना चाहती हैं। टैबलायड का दावा है कि जरदारी नहीं चाहते कि बिलावल दो बच्चों की मां हिना से शादी करें। खबर के मुताबिक जरदारी को डर है कि बिलावल का यह फैसला न न केवल बिलावल के राजनीतिक कॅरियर के लिए घातक साबित होगा, बल्कि उनकी पार्टी पीपीपी के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। 
 
खबरों के मुताबिक बिलावल ने जरदारी से कह दिया है कि वे हिना और उनकी बेटियों के साथ स्विट्जरलैंड में सेटल हो जाएंगे। बाद में यह भी कहा गया कि बिलावल ने जरदारी को जानकारी दी कि हिना तलाक के बाद अपनी बेटियों को भी छोड़ने के लिए तैयार हैं। टैबलायड ने दावा किया है कि जरदारी को बिलावल और हिना के रोमांस के बारे में तब पता चला जब राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास में बिलावल और हिना को आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ लिया गया था। बाद में जरदारी ने दोनों के फोन कॉल का ब्योरा मंगवाकर चेक किया और पाया कि दोनों के बीच रिश्ता है। 
 
बिलावल 24 साल के हैं और हिना 35 की। इसी 21 सितंबर को बिलावल ने अपना 24वां जन्मदिन मनाया है। ब्लिट्ज ने दावा किया है कि हिना ने बिलावल के जन्मदिन पर 21 सितंबर को उन्हें एक ग्रीटिंग कार्ड भी भेजा था।
 
बिलावल की मां बेनजीर जब पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनी थी तब वो तीन महीने के थे। अप्रैल 1999 में वो अपनी मां के साथ पाकिस्तान छोड़कर चले गए थे। उनके पिता आसिफ अली जरदारी भ्रष्टाचार के आरोपों में 1996 से 2004 तक पाकिस्तान की जेल में थे। बिलावल ने अपना बचपना दुबई और लंदन में बिताया है। बिलावल ताईक्वांडो में तो ब्लैक बेल्ट हैं लेकिन वो क्रिकेट खेलना चाहते थे जो वो नहीं खेल पाए। बिलावल ने साल 2007 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से मेट्रिक की पढ़ाई पूरी की लेकिन साल 2007 में ही अपनी मां के कत्ल के बाद वो वापस पाकिस्तान लौट आए। बिलावल इस समय पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चैयरमैन है।
 
पाकिस्तान की 26वीं और पहली महिला विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार का जन्म 19 नवंबर 1977 को पाकिस्तान के एक ताकतवर राजनीतिक परिवार में हुआ था। हिना रब्बानी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 2002 में की थी। वो प्रधानमंत्री शौकत अजीज की सरकार में विदेश राज्य मंत्री और वित्त राज्य मंत्री रहीं। 2008 में हिना फिर से चुनाव जीती और साल 2010 में कुछ दिनों के लिए वित्त मंत्री भी रही। हिन्ना रब्बानी खार जुलाई 2011 में पाकिस्तान की विदेश मंत्री बनी।
 
पंजाब प्रांत के मुल्तान में जन्मी हिना रब्बानी खार ने शुरुआती शिक्षा स्थानीय स्कूल से ही हासिल की। फिर उन्‍होंने लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंस से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गईं।
 
उनके पिता नूर रब्बानी खार पंजाब प्रांत के बड़े जमींदार और राजनेता हैं। उनके मामा गुलाम मुस्तफा खान पंजाब के गवर्नर रह चुके हैं। उनके परिवार के पास पंजाब में काफी जायदाद है। हिना रब्बानी खार की शादी व्यवसायी फिरोज गुलजार से हुई है और उनकी दो बेटियां हैं। (भास्कर) 

पाकिस्तानी अख़बार का शिगूफ़ा: करीना कुबूलेंगी इस्लाम

सैफ-करीना के बारे में अपने देश के अखबार तो कयास लगा कर थक गये, लेकिन अब एक शिगूफ़ा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के एक उर्दू अखबार 'नया अखबार' ने छोड़ा है। उसने अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर में दावा किया है कि करीना कपूर ने इस्लाम कुबूल करने का फैसला कर लिया है। अखबार में छपी रिपोर्ट के मानें तो करीना सैफ के कहने पर इस्लाम कुबूल करने के लिए तैयार हुई हैं।

रिपोर्ट के कहा गया है कि, 'सैफ ने करीना के सामने शादी के लिए यही शर्त रखी थी कि वे इस्लाम धर्म कुबूल करने को राजी हों जाएं। सैफ ने करीना के सामने यही बात कही कि वे उनकी मां शर्मीला टैगोर की राह पर चलते हुए इस्लाम धर्म को स्वीकार करें। इसके बाद करीना कपूर ने इस्लाम अपनाने के लिए हामी भर दी।'

 
दिलचस्प बात यह है कि कई भारतीय अखबारों ने भी पाकिस्तानी अखबार के इस शिगूफे को आधार बना कर अपने यहां खबरें प्राकाशित कर दी हैं। यानी अब तक अपने देश के पत्रकारों से बचती रही करीना को अब पाकिस्तानी मीडिया के शिगूफ़े पर सफाई देनी होगी। हालांकि, अभी तक करीना कपूर या उनके किसी करीबी ने इस बात की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन कि उन्होंने इस्लाम कुबूल कर लिया है या नहीं।
 
गौरतलब है कि शर्मीला टैगोर ने 1969 में मंसूर अली खान पटौदी से शादी के लिए इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया था और अपना नाम बेगम आयशा सुल्ताना रख लिया था।

आर लक्ष्मीपति होंगे पीटीआई के नये अध्यक्ष

 

तमिल दैनिक दिनमालार के प्रकाशक आर लक्ष्मीपति को आज यहां प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के निदेशक मंडल का अध्यक्ष चुन लिया गया। उन्हें पीटीआई की वाषिर्क महासभा (एजीएम) के बाद अध्यक्ष चुना गया। 
 
पहले भी दो बार पीटीआई के चेयरमैन रह चुके लक्ष्मीपति मातृभूमि अखबार समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एम पी वीरेंद्र कुमार की जगह लेंगे। 
 
के एन संत कुमार (डेक्कन हेराल्ड) को बोर्ड का उपाध्यक्ष चुना गया है। 

पटियाला में गठित हुआ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एसोसिएशन

 

गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब में शनिवार को इलेक्ट्रानिक मीडिया कर्मियों की एक बैठक हुई। इस दौरान पटियाला इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोसिएशन गठित कर पदाधिकारियों का चयन किया गया।
 
इस दौरान कुलवंत सिंह प्रधान, रवि आजाद सीनियर उपप्रधान, सुभाष पटियालवी व अनिल ठाकुर उप प्रधान, बलविंदर सिंह महासचिव, इंदरजीत सिंह व अवतार सिंह सहायक सचिव, रमनीश घई प्रेस सचिव, इरविंदर सिंह व मुनीश कौशल वित्त सचिव चुने गए।
 
इसके अलावा रविंदर, मनोज शर्मा, जसपाल, अविनाश कंबोज, वरिंदर सैनी और तेजिंदर सिंह विभिन्न पदों के लिए चुने गए। पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष किरपाल सिंह बडूंगर ने सभी पदाधिकारियों को मुबारकबाद व शुभकामनाएं भी दीं। (दैनिक जागरण)
 

झूठे हैं पाकिस्तानी अख़बार, अब नहीं बिकेंगे अफगानिस्तान में

अफ़ग़ानिस्तान हुकूमत ने पाकिस्तान से वहां पहुंचने वाले सारे अख़बारों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. आंतरिक मंत्रालय ने पुलिस को हुक्म दिया है कि वो मुल्क के पूर्व में पाए जाने वाले सभी पाकिस्तानी अख़बारों की कापियां ज़ब्त कर ले.

 
मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी समाचारपत्र "तालिबान के प्रवक्ताओं के विचारों को फैलाने का एक ज़रिया हैं." अफ़ग़ानिस्तान ने अख़बारों के ख़िलाफ़ ये क़दम तब उठाया है जब पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों में पहले से ही तनाव है.
 
अफ़ग़ान आंतरिक मंत्रालय ने पुलिस से कहा है कि वो तोरखाम सीमा प्रवेश पर विशेष रूप से ध्यान रखे. तोरखाम एक व्यस्त बार्डर है. मंत्रालय ने पुलिस को कहा है कि वो तीन पूर्वी प्रांतो नंगरहार, कुनार, और नूरिस्तान में पाकिस्तानी अखबारों ज़ब्त कर ले.
 
मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी अखबारों में ख़बर "वास्तविकता पर आधारित नहीं है और यह हमारे देश के पूर्वी प्रांतो में रह रहे शहरियों के लिए चिंता पैदा कर रही हैं."
 
संवाददाताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में सीमा पार से होने वाली हिंसा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है, ख़ासतौर पर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान और तालिबान के संबंध पुराने हैं.
 
गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री ज़ल्माई रसूल ने कहा कि सीमा पार से हुए हमलों में काफ़ी नागरिकों की मौतें हुई हैं.
 
 
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीमा के आरपार हुई गोलाबारी से लगभग 4,000 विस्थापित हो गए हैं. पिछले महीने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई और उनके पाकिस्तानी समकक्ष आसिफ अली जरदारी ने गोलीबारी की जांच के लिए एक संयुक्त सैन्य प्रतिनिधिमंडल भेजने पर सहमति जताई थी.
 
पाकिस्तान का कहना है कि उसके इलाक़े में हिंसा तालिबान के उस समूह के ज़रिए की जा रही हैं जिसने अफ़ग़ानिस्तान में पनाह ले रखी है. उसका कहना है कि वो उन चरमपंथियों को निशाना बना रहा है जिन्होंने पड़ोसी मुल्क में ठिकाने बना लिए हैं. (बीबीसी)

दंगे भड़काता, आग लगाता पश्चिमी मीडिया

 

चाहे सोशल मीडिया हो या मेन-स्ट्रीम, पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका में दोनों ही पर इनदिनों दंगे भड़काने के आरोप लग रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ देशों में इसका जवाब भी मीडिया से ही देने की कोशिश जारी है। इस्लाम पर बनी फिल्म से मचा हंगामा अभी ठंढा भी नहीं पड़ा है कि इस बीच फ्रांस की एक पत्रिका में पैगंबर मोहम्मद के मज़ाक उड़ाते कार्टून छापे जाने को लेकर दुनिया के कई देशों में हिंसा की आशंका बढ़ गई है. इन देशों में एहतियाति क़दम उठाए जा रहे हैं.
 
जहां एक ओर अरब मीडिया पैगंबर पर छपे कार्टून की खबरों को संभल कर जारी कर रहा है वहीं ट्यूनिशिया में मामला भड़कने के डर से सभी फ्रांसीसी स्कूल बंद कर दिए गए हैं. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक फ्रांस के खिलाफ़ हिंसा भड़कने के डर से दुनिया भर के 20 से ज्यादा अरब देशों में फ्रांसीसी दूतावास, स्कूल और सामुदायिक-सांस्कृतिक केंद्र बंद कर दिए गए हैं. 
 
मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी ने फेसबुक के अपने पन्ने पर कार्टूनों की आलोचना करते हुए भड़काऊ प्रदर्शनों से दूर रहने की अपील की है वहीं सल्फी समुदाय के कुछ लोगों की ओर से प्रदर्शनों की अपील को अखबारों ने पहले पन्ने पर नहीं बल्कि दूसरे-तीसरे पन्नों पर ही जगह दी है.
 
गुरुवार को सौ से ज्यादा लोगों ने ईरान की राजधानी तेहरान में इस मुद्दे पर फ्रांस के दूतावास के सामने प्रदर्शन किया. इसके बाद सुरक्षा कारणों से दूतावास को बंद कर दिया गया. ईरानी मीडिया ने इस मामले को तूल न देने के नज़रिए से संतुलित रिपोर्टिंग की है. ईरान के कट्टरपंथी अखबार जम्हुरियते-इस्लामी ने इस विवाद के लिए अमरीका को ज़िम्मेदार बताया और कहा है कि फ्रांस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दोहरे मापदंड अपनाने की गुनहगार है क्योंकि वो अपने देश में मुसलमानों के इस अपमान के खिलाफ़ प्रदर्शन नहीं नहीं होने दे रहा है. वहीं पाकिस्तान में इस मुद्दे के खिलाफ़ 21 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की गई है.
 
इस्लाम पर बनी फिल्म ‘इनोसेंस ऑफ़ मुस्लिम्स’ के विरोध के लिए शुक्रवार का दिन 'पैंगंबर के सम्मान' को समर्पित किया जाएगा. वहीं पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने ईश निंदा के खिलाफ़ संयुक्त राष्ट्र की ओर से नियम-कानून बनाए जाने की मांग की है. इस मामले पर हिंसा भड़कने के डर से सिंगापुर ने गूगल से मांग की है कि यू-ट्यूब पर इस फिल्म पर रोक लगा दी जाए.
 
उधर रूस की मीडिया ने कहा है कि फ्रांस में छपे कार्टूनों के मामले में ईश-निंदा से जुड़ा फैसला अदालतों पर छोड़ देना चाहिए वहीं सड़कों पर हो रहे हिंसक प्रदर्शन सही नहीं हैं. रूसी प्रेस ने ये सवाल भी उठाया है कि डचेज़ ऑफ़ कैंब्रिज की टॉपलेस तस्वीरें छापना अगर विनम्रता के लिहाज़ से सही नहीं है तो यही नियम पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों पर लागू क्यों नहीं होता? (बीबीसी)

टूट गई टीम-अन्ना, मीडिया से कहा: “क्यों मार रहे हो?”

 

करीब सवा साल पहले मीडिया के सहारे स्टार बने अन्ना हजारे का मोह अब उन्हें प्रचारित करने वालों से भंग होता दिख रहा है। अन्ना ने राजनीतिक पार्टी न बनाने का फैसला लिया है, लेकिन इसके ऐलान के कुछ ही देर बाद उन्होंने बाबा रामदेव के साथ गुप्त मीटिंग की। महत्वपूर्ण बात ये है कि इस बैठक के बारे में वे किसी को कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। हमेशा लोकशाही और पारदर्शिता की बात करने वाले अन्ना हजारे इस मुलाकात के सवाल पर ही चुप्पी साध लेते हैं।
 
बात सिर्फ इतनी ही नहीं है। अन्ना अपनी बैठक के बारे में खबरें आने के बाद मीडिया से खासे नाराज नजर आ रहे हैं। कल तक कैमरा देखकर जोश से भर जाने वाले अन्ना जहां अपने आंदोलन की सफलता का श्रेय मीडिया को देते नहीं थकते थे वहीं अब वो मीडिया को देखकर ही गुस्सा हो जाते हैं। सवालों को टालते हुए कहते हैं, "क्यों मार रहे हो… क्यों मार रहे हो?"
 
सवाल ये उठता है कि अन्ना आहत हैं या नाराज़ या भड़के हुए? क्या उनकी और रामदेव की गुप्त मुलाकात की खबरें उछालने वाला मीडिया अब उन्हें विलेन नज़र आ रहा है या फिर वो इस खबर को दबाना चाहते थे? बाबा रामदेव के साथ उनकी मीटिंग के दौरान संघ के करीबी एक कारोबारी भी मौजूद थे। ऐसा माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद अन्ना और संघ को लेकर उठ रहे नए सवालों से वो व्यथित हैं।
 
उन्होंने कल तक अपने हनुमान माने जाने वाले अरविंद केजरीवाल से भी किनारा कर लिया है। उन्होंने केजरीवाल से अपने ब्रांडनेम इस्तेमाल करने से भी मना कर दिया है। अब आंदोलन से अलग सियासत की जमीन पर नए विकल्प तलाश रहे अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के खुद के यूं किनारा करने से व्यथित हैं। घंटों बाद चुप्पी तोड़ते हुए वो बोले कि अन्ना का फैसला अप्रत्याशित है। 
 
झटके से उबरते हुए अरविंद अब अन्ना के बिना भी उनके ब्रांडनेम का इस्तेमाल कर राजनीतिक पार्टी बनाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। उन्होंने 'टीम अन्ना' के सदस्य प्रशांत भूषण, संजय सिंह, कुमार विश्वास और 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और बाद में बोले, "अन्ना भले ही अपनी तस्वीर के इस्तेमाल की इजाजत न दें लेकिन अन्ना की तस्वीर हमारे दिल में रहेगी। उनका आशीर्वाद हम हमेशा लेते रहेंगे। वे हमारे गुरु हैं, पिता हैं। अन्ना के पांच सिद्धांत हमारी बुनियाद बनेंगे।"
 
उधर, अन्ना खेमा भी किलेबंदी में जुट गया है। किरण बेदी ने महाराष्ट्र सदन में अन्ना से मुलाकात की। किरण राजनीतिक पार्टी बनाने के अरविंद के फैसले के सख्त खिलाफ थीं। उनकी तल्खी साफ झलकी। उन्होंने कहा कि अरविंद ने खुद ही कहा था कि अन्ना कहेंगे तो पार्टी नहीं बनाएंगे। अब क्यों बना रहे हैं ये उन्हीं से पूछिए।

न्यूज़-11 के न्यूज़रुम में हंगामा, एडीटर ने प्रोड्यूसर को कहा, “खतम करवा दूंगा”

तनख्वाह नहीं मिलने पर कर्मचारियों में मालिक के प्रति असंतोष आम बात है, लेकिन कुछ स्वामी-भक्त कर्मचारी इसे निज़ी मामला मान कर दुश्मनी भी मोल ले लेते हैं। झारखंड के संकट में घिरे चैनल न्यूज़-11 में इनदिनों ऐसा ही माहौल है। खबर है कि चैनल के संपादक स्तर के एक अधिकारी ने तीन महीने से रुकी तनख्वाह मांग रहे प्रोड्यूसर को जम कर हड़काया और जान से मारने की धमकी तक दे डाली।

बताया जाता है कि खुद को झारखंड का सबसे कद्दावर पत्रकार मानने वाले संपादक जो इन दिनों न्यूज़-11 चैनल में अपनी सेवाएं दे रहे है, स्वामी-भक्ति में इस क़दर बह गए हैं कि तनख्वाह मांगने वाले कर्मचारियों को निज़ी तौर पर हड़काने में जुटे हैं। ग़ौरतलब है कि चैनल की आर्थिक हालत बुरी तरह गड़बड़ाई हुई है और अधिकतर मीडियाकर्मियों को तीन महीने से तनख्वाह नहीं मिली है। अपने वेतन को लेकर परेशान एक प्रोड्यूसर ने जब काम करने से मना कर दिया तो एडीटर महोदय ने उसे खूब भला-बुरा कहा। एडीटर महोदय ने तैश में आकर यहां तक कह दिया कि वो प्रोड्यूसर को 'उठवा कर खतम करवा' सकते हैं।

 
हालांकि प्रोड्यूसर भी मूल रूप से बिहार का ही रहने वाला है, लेकिन कुछ साल दिल्ली और दूसरे राज्यों में नौकरी कर चुका है। उधर संपादक महोदय स्थानीय अखबारों में नौकरी करने के साथ-साथ सरकारी ओहदे पर भी रह चुके हैं। बताया जाता है कि उन्हें अपने बाहर न जा सकने का खासा मलाल है और वे 'बाहरी' लोगों पर इसकी खुन्नस निकालते रहते हैं। उन्होंने प्रोड्यूसर को ठेठ गुंडों वाले अंदाज़ में अपने 'लोकल' होने का रुआब झाड़ा और कहा कि वो बाहर से आकर उनसे ऊंची आवाज़ में बात न करे।
 
बात ज्यादा न बिगड़े ये देख कर न्यूज़रुम में मौज़ूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत किया। बाद में गुस्सा ठंढा पड़ने पर संपादक महोदय ने प्रोड्यूसर से हंसी-मज़ाक भी किया और अपने क्रोध पर काबू न रख पाने के लिये शर्मिंदगी भी जताई। अब चैनल में कोई इस मामले पर कुछ भी बताने से बच रहा है।

इंटरनेट पर दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटर हैं सचिन

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की लोकप्रियता भारत ही नहीं, दुनिया भर में नए रिकॉर्ड बना रही है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर दुनिया के नामचीन खिलाड़ियों की लोकप्रियता पर नजर रखने वाली एक प्रमुख वेबसाइट फेमकाउंट ने 'महासेंचुरी' ठोकने वाले भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंडुलकर को सोशल मीडिया के 10 सर्वकालिक लोकप्रिय खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया है।

 
सचिन की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फेमकाउंट द्वारा जारी इस ताजा सूची में वह एकमात्र क्रिकेट खिलाड़ी हैं जो शीर्ष 10 में जगह बनाने कामयाब हुए हैं। बेबसाइट ने तेंडुलकर को सातवें पायदान पर रखा है। फेमकाउंट के मुताबिक, सोशल मीडिया में शीर्ष 10 लोकप्रिय खिलाड़ियों में पांच फुटबाल और चार बास्केटबॉल से हैं।
 
इस सूची में पहले स्थान पर पुर्तगाल के स्टार फुटबाल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं। रोनाल्डो के फेसबुक पर 48,624,597 प्रशसंक, माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर 13,209,767 फॉलोवर हैं। उनके सबसे बड़े यूट्यूब अकाउंट को अब तक 7,754,910 लोगों ने देखा है। फेसकाउंट के मुताबिक रोनाल्डो के सोशल मीडिया में 27 करोड़ से अधिक प्रशंसक हैं।
 
अर्जेंटीना के फुटबाल खिलाड़ी लियोनेल मेसी सोशल मीडिया में लोकप्रियता के मामले में दूसरे नंबर पर हैं। वेबसाइट के मुताबिक सोशल मीडिया में मेसी के 17 करोड से अधिक प्रशंसक हैं। फेसबुक पर उनके सबसे बड़े अकाउंट पर 38,204,281 प्रशसंक हैं और ट्विटर पर उनके 1,189,547 फॉलोवर हैं। यूट्यूब पर उनके अकाउंट को 4,146,072 लोगों ने देखा है।
 
फेमकाउंट के मुताबिक सूची में तीसरे नंबर पर इंग्लैंड के स्टार फुटबाल खिलाड़ी डेविड बैकहम हैं जिनके सोशल मीडिया पर 12 करोड़ से अधिक प्रशंसक हैं। सूची में चौथे स्थान पर ब्राजील के दिग्गज फुटबाल खिलाड़ी रिकार्डो 'काका' हैं जिनके सोशल मीडिया में 11 करोड़ से अधिक चाहने वाले हैं।
 
वेबसाइट के अनुसार पांचवें स्थान पर अमेरिकी बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन, छठें स्थान पर अमेरिकी बास्केट बॉल खिलाड़ी ले बारोन रयमोन, सातवें स्थान पर सचिन तेंडुलकर, आठवें स्थान पर स्पेन के फुटबाल खिलाड़ी अंदेस इनयेस्ता, नौवें स्थान पर अमेरिकी पेशेवर बास्केट बॉल खिलाड़ी कोबे बीन और 10वें पायदान पर अमेरिकी पेशेवर बास्केट बॉल खिलाड़ी दवायने वाडे हैं।
 
फेमकाउंट के मुताबिक तेंडुलकर के सोशल मीडिया पर पांच करोड़ से अधिक प्रशंसक हैं। वेबसाइट के मुताबिक 'लिटिल मास्टर' के फेसबुक पर 8,861,454 प्रशंसक हैं और ट्विटर पर 27 लाख से अधिक फॉलोवर हैं। उसने कहा कि भारतीय क्रिकेट स्टार तेंडुलकर, दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में शामिल किए जाते हैं। 
 

सहारा का विज्ञापन ‘गलतियों से भरा’ और उटपटांग

सहारा समूह के 'क्यू शॉप्स' का विज्ञापन विवादों में घिरता जा रहा है। विज्ञापन न सिर्फ भाषाई अशुद्धियों से भरा है बल्कि एक गैर सरकारी संगठन ने तो  बाकायदा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। जहां विशेषज्ञ इसे गलतियों से भरा बता रहे हैं वहीं संगठन का आरोप है कि इस विज्ञापन के द्वारा लोगों के अंदर भय पैदा किया जा रहा है।

सहारा ने अपनी नयी महत्वाकांक्षी योजना के तहत रिटेल आउटलेट क्यू शॉप्स यानि क्वालिटी की चीजें बेचने के नाम पर शुरु करने की सोची है और इसके लिये जोर-शोर से प्रचार अभियान भी जारी है। टीवी पर जारी इसके कमर्शियल विज्ञापन में वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर समेत कई नामी क्रिकेटर शामिल हैं। लेकिन पता नहीं इसके विज्ञापन की विषयवस्तु और भाषा पर किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया।

विज्ञापन के दूसरे दृश्य में ही कंकड़ को 'कंकर' लिखा गया है जो कई भाषाविदों के नजरिये से गलत है। 'कंकड़' पत्थर के छोटे टुकड़ों को कहते हैं जिसे कुछ दाल विक्रेता मिलावट के तौर पर इस्तेमाल में लाते हैं। इसके बदले 'कंकर' शब्द का प्रयोग अपभ्रंश और क्षेत्रीय भाषा में लिखे कुछ दोहों में जरूर हुआ है लेकिन हिंदी में इस शब्द का कोई अर्थ नहीं है। आश्चर्य की बात ये है कि सहारा समूह के इतने सारे टीवी चैनलों और अखबारों के तथाकथित विद्वानों ने इस मामूली भूल या नासमझी को नजरंदाज़ कैसे कर दिया। आगे देखने पर भी कई भाषायी अशुद्धियां चुभती हैं।
 
इसके अलावा इस विज्ञापन का कॉन्सेप्ट भी कई लोगों के गले से नहीं उतर रहा। उदय नाम के एक गैर सरकारी संगठन ने तो सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी एवं नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स को पत्र लिखकर इस विज्ञापन के खिलाफ उचित कदम उठाने की मांग भी की है।
 
विज्ञापन में क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को अंतिम क्रिया की तैयारी करते दिखाया गया है जबकि एक परिवार नाश्ता कर रहा होता है। इस विज्ञापन में युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग को भी दिखाया गया है। चिकित्सक के परिधान में एक व्यक्ति मिलावटी खाद्य पदार्थ के सेवन से कैंसर, किडनी सम्बंधित रोग एवं मस्तिष्क की क्षति होने जैसी चेतावनी देता है। संगठन के मुताबिक, ''हाल ही में टीवी पर सहारा 'क्यू शॉप्स' के प्रसारित हो रहे विज्ञापन अपना उत्पाद बेचने के लिए लोगों में भय पैदा कर रहे हैं।'' ग़ौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई पहले ही क्रिकेट खिलाड़ियों का प्रयोग करने के कारण सहारा के विज्ञापन पर नाखुशी जाहिर कर चुका है।

अखबार के संपादक को निकाला गया, छापी थी प्रिंसेज़ की भद्दी तस्वीरें

 

डचेस ऑफ कैंब्रिज एवं प्रिंस विलियम की पत्नी केट की टॉपलेस तस्वीर छापने वाला आयरलैंड के एक अखबार का संपादक है. अखबार की कंपनी ने संपादक को निलंबित किया है. अखबार के स्वामित्व वाली कंपनी ‘इंडेपेंडेंट स्टार’ का कहना है कि संपादक माइकल ओ केन को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ आंतरिक जांच शुरु कर दी गयी है.
 
समाचार पत्र ने शनिवार को आयरलैंड संस्करण में इस तस्वीर को प्रकाशित किया था. हालांकि ब्रिटिश संस्करण में इसे नहीं छापा गया था. सबसे पहले एक फ्रांसीसी पत्रिका ने इन तस्वीरों को प्रकाशित किया था. आयरलैंड के न्याय मंत्री ऐलन शैटर का कहना है कि मीडिया हल्कों में कुछ लोग निहित स्वार्थ और जन हित के बीच फर्क नहीं कर पाते.
 
गौरतलब है कि फ्रांस की एक पत्रिका ने ब्रिटिश राजपरिवार का हाल ही में हिस्सा बनी ‘डचेस ऑफ कैंब्रिज’ केट मिडलटन की अर्धनग्न तस्वीर प्रकाशित की थी. इसके बाद बकिंघम पैलेस ने पत्रिका को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी.
 
अखबार ‘द सन’ ने खबर दी है कि ‘क्लोजर’ नामक फ्रांसीसी पत्रिका ने डचेस की निर्वस्त्र तस्वीरें प्रकाशित की है. प्रिंस विलियम और केट, दोनों जब पिछले सप्ताह महारानी के भतीजे के फ्रांसीसी किले में छुट्टियां मना रहे थे तब ये तस्वीरें खींची गई थीं. पत्रिका ने इस दंपत्ति की चार तस्वीरें प्रकाशित की जिनमें केट अर्धनग्न है. उन तस्वीरों का शीर्षक है, ‘‘देखिए, इंगलैंड की भावी रानी क्योंकि आपने उन्हें कभी ऐसे नहीं देखा होगा.’’ 
 
उधर, पत्रिका ने कहा है कि विलियम और केट एशिया प्रशांत क्षेत्र की अपनी यात्रा से पहले महारानी के भतीजे लार्ड लिनली के महल में ठहरे थे और उन्हें इन तस्वीरों को प्रकाशित करने की योजना से अवगत करा दिया गया था.
 
तस्वीरों के प्रकाशन को ‘लाल रेखा का अतिक्रमण’ करार देते हुए सेंट जेम्स पैलेस ने एक बयान में कहा कि पत्रिका का कृत्य बेढंगा है और उसे सही नहीं ठहराया जा सकता. बयान में कहा गया है, ‘‘राजपरिवार यह जानकर बेहद परेशान है कि फ्रांसीसी पत्रिका और फोटोग्राफर ने इस तरह बेढंगे और पूरी तरह अनुचति तरीके से उनकी निजता का उल्लंघन किया.’’ (समय)

अम़ता प्रीतम के बेटे ने बनाए थे कई मशहूर हीरोइनों के अश्लील वीडियो

मुंबई। बहुचर्चित लेखिका अमृता प्रीतम के बेटे और फिल्म फाइनेंसर नवराज क्वात्रा की हत्या के मामले में पुलिस को चौंकाने वाले सुराग हाथ लगे हैं। हालांकि कातिल का पता नहीं चल पाया है, लेकिन हाथ लगे सुरागों ने पुलिस को उलझन में डाल दिया है। पुलिस को नवराज के घर से कई अभिनेत्रियों और मॉडलों के अश्लील वीडियो और फोटोग्राफ मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि कहीं नवराज का कत्ल ब्लैकमेलिंग में तो नहीं हुआ है। ग़ौरतलब है कि क्वात्रा की शुक्रवार को उसके बोरीवली स्थित फ्लैट में दिन-दहाड़े हत्या कर दी गयी थी।

 
65 साल के क्वात्रा के कत्ल की गुत्थी सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। पुलिस के मुताबिक नवराज के घर से मिले सुराग किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। नवराज के बेडरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हैं कई नामचीन हस्तियों के अश्लील वीडियो। इनमें कई अभिनेत्रियां और मॉडलों के अश्लील वीडियो शामिल हैं। उनके बाथरूम में भी सीसीटीवी कैमरा लगा था और बताया जा रहा है कि बाथरूम में कपड़े बदलती मॉडलों को वह सीसीटीवी पर देखा करता था।
 
पुलिस का कहना है कि नवराज के घर से मिले सुराग इस ओर इशारा करते हैं कि वह सिर्फ फोटोग्राफी या फिल्मों में पैसा लगाने का ही काम नहीं करता था। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर तस्वीरें मॉडलों और बार गर्ल्‍स की हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ वीडियो ऐसे भी हैं जिनमें बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियां क्वात्रा के साथ नजर आ रही हैं। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसकी हत्या की वजह क्या हो सकती है। पुलिस का कहना है कि नवराज ने अपने घर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए हुए थे। यहां तक कि बाथरूम में भी सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक क्वात्रा के घर से मिली तस्वीरों में बॉलीवुड की दो जानी-पहचानी अभिनेत्रियां नजर आ रही हैं। इनमें से एक कई सालों से बॉलीवुड में काम कर रही हैं जबकि दूसरी अभिनेत्री की पहली फिल्म हाल ही में रिलीज हुई है।
 
सूत्रों के मुताबिक नवराज के कमरे से सैकड़ों अश्लील फोटोग्राफ भी मिले हैं। नवराज की अलमारी से पुलिस को 102 सीडी मिले हैं। इसके अलावा वियाग्रा की 600 गोलियां और 52 सेक्स टॉयज भी बरामद हुए हैं। क्वात्रा के घर से मिले वीडियो में 19 अलग-अलग मॉडल और अभिनेत्रियां आपत्तिजनक हालत में नजर आ रही हैं, हालांकि पुलिस ने इन लड़कियों का नाम बताने से इनकार किया है।
 
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि क्‍वात्रा अश्‍लील फिल्‍मों के धंधे में भी सक्रिय था। पुलिस को उसके कमरे से कई कंडोम (महिलाओं द्वारा इस्‍तमाल करने वाले) भी मिले हैं। क्‍वात्रा खुद को मॉडल कॉडिनेटर बताता था, लेकिन शक है कि वह बॉलीवुड में हीरोइन बनने का ख्‍वाब लेकर आने वाली युवतियों को पोर्न फिल्‍मों के धंधे में धकेला करता था। हालांकि, इस पर पुलिस का कोई भी अधिकारी कुछ कहने से बच रहा है।
 
पुलिस को शक है कि शायद क्वात्रा अश्लील तस्वीरों के जरिए कुछ लड़कियों को ब्लैकमेल कर रहा था और उन्हीं में से किसी ने उस से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कराई है। पुलिस के मुताबिक क्वात्रा के घर से मिले वीडियो और फोटोग्राफ के आधार पर लोगों से पूछताछ की जा रही है। हत्‍या की जांच के लिए कई टीमें बनाई गईं हैं। क्वात्रा के कॉल रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है। वीडियो में नजर आने वाली अभिनेत्रियों और मॉडलों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
 
पुलिस ने नवराज के मोबाइल नंबरों के प्रिंटआउट निकाले हैं। इन प्रिंट आउट में दर्ज नंबरों के आधार पर अब आगे की जांच की जा रही है। पुलिस ने इस संबंध में कुछ लोगों से जो पूछताछ की है, उससे पता चला है कि उसके घर में पोर्टफोलियो बनवाने आईं महिलाएं जब बाथरूम में कपड़े बदलती थीं तो वह सीसीटीवी से इन्हें देखता था, पर वह इन्हें रिकॉर्ड नहीं करता था।
 
जब नवराज की हत्‍या हुई, उस वक्त वह घर में अकेला था। बिल्डिंग के गार्ड के अनुसार, साढ़े 11 बजे तीन लोग उसके घर आए थे और बाद में वे तीनों बहुत हड़बड़ी में बाहर निकले। वह बोरीवली की एलआईसी कॉलोनी के फ्लैट में अकेले ही रहता था। उसकी पत्नी दिल्ली में रहती हैं जबकि बेटी बैंकॉक में। क्‍वात्रा डिजोल्विंग व्यूज फिल्‍म्‍स का मालिक था। वह लेखक भी था। क्‍वात्रा के घर से बरामद वीडियो में नजर आई एक मॉडल ने पुलिस को बताया कि क्‍वात्रा एक अच्‍छा इंसान था। वह कभी भी किसी गलत काम में शामिल नहीं हो सकता। (दैनिक भास्कर)

असम के बहाने सोशल मीडिया पर लगाम कसेगा केंद्र

केंद्र सरकार ने हाल में हुए इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए एक त्रिआयामी रणनीति तैयार की है। इसमें एक साइबर सर्विलांस एजेंसी की स्थापना भी शामिल है जो ऐसी परिस्थितियों के बारे में पहले से ही सचेत करेगी। 

 
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में अफवाहों को रोकने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए दिशा निर्देश तैयार करने का निर्णय लिया गया। हाल ही में असम में फैली सांप्रदायिक हिंसा के चलते देश के महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाई गई थीं।
 
इस बैठक में गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, खुफिया एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। इसमें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कुछ आपत्तिजनक सामग्रियों को प्रतिबंधित करने को लेकर सरकार के कदम की वैधता, असर पर भी विचार किया गया। भविष्य में अफवाहों से निपटने के लिए समय रहते मुस्तैदी और बेहतर तरीके से कदम उठाने की जरूरत महसूस की गई। 
 
बैठक में प्रभावी निगरानी तंत्र के साथ ही तकनीकी रूप से सक्षम साइबर निगरानी और सर्विलांस एजेंसी की बात कही गई है, जो कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर समय रहते सरकार को सचेत करेगी। बैठक में एक कानूनी व्यवस्था तैयार करने का फैसला किया गया है जो कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में मौजूदा खामियों को भी पाटने का काम करेगी। (अमर उजाला)

तेल गैस में लगाई आग मीडिया से बुझवाने की तैयारी में है सरकार

डीजल कीमतों में 13 फीसदी से भी अधिक वृद्धि करने और प्रति परिवार रसोई गैस सिलिंडरों की संख्या तय करते हुए सब्सिडी सीमित करने के बाद सरकार अपने इस फैसले को जायज ठहराने के लिए देशभर में मीडिया के जरिये प्रचार अभियान चलाने की योजना बना रही है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार माध्यमों के जरिये अगले कुछ दिनों में प्रचार अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

इंडियन ऑयल के एक अधिकारी ने कहा कि फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और अंतिम निर्णय लेना बाकी है। जून 2011 में सरकार ने जब डीजल, केरोसिन और रसोई गैस कीमतों में वृद्धि की थी, उस समय भी इस कदम के पीछे के कारणों को उजागर करने के लिए ऐसे ही प्रयास किए गए थे।

प्रचार अभियान के तहत सरकार जनता को यह बताने की कोशिश करेगी कि उसे क्यों यह फैसला लेना पड़ा। संभवत: इसमें कच्चे तेल के दाम बढऩे और अंतरराष्ट्रीय उत्पादों के मूल्य में अंतर का हवाला दिया जा सकता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी अवमूल्यन का भी जिक्र किया जा सकता है जिससे तेल आयात काफी महंगा हो गया है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

पुण्य प्रसून बाजपेयी की हिंदी और ‘जड़मति’ होते पाठक

पुण्य प्रसून बाजपेयी हिंदी पत्रकारिता जगत में किसी परिचय के लिये मोहताज़ नहीं हैं। भारतीय मीडिया में उनकी छवि एक जानकार पत्रकार की रही है, लेकिन उनके ब्लॉग पर एक सरसरी निगाह डालने से साफ़ पता चलता है कि भाषा पर उनकी पकड़ कितनी कमजोर है। उनके आलेख में न सिर्फ़ हिज्जे की गलतियों की भरमार है बल्कि दोहे को भी गलत लिखा गया है।

शुक्रवार 14 सितंबर को प्रकाशित उनके आधिकारिक ब्लॉग http://prasunbajpai.itzmyblog.com के ताज़ा आलेख के शीर्षक में ही तुलसी के दोहे का एक हिस्सा गलत लिखा गया है। इस शीर्षक और आलेख में 'सिल' को 'सील' लिखा गया है जिसे पत्थर की बजाय नमी या सीलन के अर्थ में लिखा जाता है। आगे भी इस दोहे को (शायद उसके अपभ्रंश को सुधारने की कोशिश में) गलत लिखा गया है। आलेख में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की देश-विदेश की मीडिया में धूमिल होती छवि के बारे में बताया गया है और उसके कारणों पर सवाल उठाया गया है। ये आलेख कितना सार्थक और प्रभावी है ये एक अलग बहस का मुद्दा है, लेकिन ऐसी भाषा हिंदी के कई जानकारों की नज़र में चुभती है। 
 
उनके ब्लॉग पर उनका परिचय कुछ यूं लिखा है। "पुण्य प्रसून बाजपेयी ज़ी न्यूज़ (भारत का पहला समाचार और समसामयिक चैनल) में प्राइम टाइम एंकर और सम्पादक हैं। पुण्य प्रसून बाजपेयी के पास प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 20 साल से ज़्यादा का अनुभव है। प्रसून देश के इकलौते ऐसे पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी पत्रकारिता में बेहतरीन कार्य के लिए वर्ष 2005 का ‘इंडियन एक्सप्रेस गोयनका अवार्ड फ़ॉर एक्सिलेंस’ और प्रिंट मीडिया में बेहतरीन रिपोर्ट के लिए 2007 का रामनाथ गोयनका अवॉर्ड मिला।"
 
पुण्य प्रसून की ये हिंदी इसलिये भी सोचनीय है कि उनकी पहचान उसी टेलीविजन से बनी है जिसमें टिकर पर हुई इससे भी छोटी गलतियों के लिये कितनों की नौकरी चली जाती है। प्रिंट मीडिया से अपने करीयर की शुरुआत करने वाले पुण्य प्रसून ने नागपुर के लोकमत टाइम्स, दिल्ली के करंट न्यूज़ (अब बंद हो चुका अखबार) और आजतक व एनडीटीवी जैसे कई प्रमुख संस्थानों और चैनलों में काम कर चुके हैं। 
 
मीडिया में उनकी छवि एक गंभीर, पढ़ाकू और ढेर सारा ज्ञान बांटने वाले पत्रकार के तौर पर होती है। कई पत्रकार उन्हें प्रेम और श्रद्धा से 'पुन्नू बाबा' भी कहते हैं और उनके कहे एक-एक शब्द को बाइबिल की पंक्तियों की तरह मानक मानते हैं। देश की कई नामी-गिरामी हस्तियां, जिनमें सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी भी शामिल हैं, खुले मंच पर खुद को पुण्य प्रसून का फैन बता चुकी हैं। उनका ब्लॉग http://prasunbajpai.itzmyblog.com भी पाठकों के बीच खासा लोकप्रिय होता जा रहा है।
 
वैसे तो ये ब्लॉग अंग्रेजी में भी होने का दावा करता है, लेकिन उस हिस्से को 13 अप्रैल 2009 से अबतक अपडेट नहीं किया गया है। बहरहाल, उनका हिंदी ब्लॉग भाषाई अशुद्धियों की भरमार बन हिंदी प्रेमियों को लगातार मुंह चिढ़ा रहा है। किसी ने बताया कि उनका ब्लॉग कोई और डिज़ाइन और मैनेज़ करता है, लेकिन अपने आलेखों की फाइनल कॉपी वही देखते हैं। ऐसे में इन अशुद्धियों को क्या माना जाए… गलती या भूल? एक बड़े भाषा के जानकार ने टिप्पणी की, "वैसे भी 'जड़मति' लोगों को लिखने का प्रयास करते रहना चाहिये तभी तो वे 'सुजान' बनते हैं।"

 

सुप्रीम कोर्ट ने हटाई मीडिया पर से रोक, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर मचा था बवाल

सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सेना के जवानों के दिल्ली कूच की रिपोर्टिंग करने से मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया था। 

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एच.एल. दत्तू और न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद की पीठ ने शुक्रवार को यह सवाल करते हुए उच्च न्यायालय का आदेश रद्द कर दिया कि "उच्च न्यायालय इस तरह का इकतरफा आदेश कैसे दे सकता है?"
 
ग़ौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस वर्ष अप्रैल में इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक सनसनीखेज रिपोर्ट के बाद सैनिकों के दिल्ली कूच की घटना की खबर प्रकाशित करने से मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया था।
 
सैनिकों के दिल्ली कूच की यह घटना उस समय की है, जब तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह का उम्र विवाद अपने चरम पर था। भारतीय प्रेस परिषद ने इस वर्ष मई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

आज, कल और परसों, सबके टीवी पर होगा ब्लैकआउट

 

आज रात आपका टीवी चलते-चलते बिल्कुल ब्लैंक हो जाए तो परेशान न हों। दरअसल लोगों को डिजिटल सेट टॉप बॉक्स के लिए प्रेरित करने के लिए शुक्रवार, शनिवार और रविवार को 2 मिनट तक ब्लैकआउट किया जाएगा।
 
शुक्रवार, शनिवार और रविवार को रात 7:58 pm, 8:58 pm और 9:58 pm बजे सभी ब्रॉडकास्टर्स दो मिनट के लिए ट्रांसमिशन बंद कर देंगे। सभी चैनल अपने प्रोग्राम बंद कर 30 सेकेंड का हिंदी और अंग्रेजी का एक ऐड दिखाएंगे। इसमें अंग्रेजी में 'गो डिजिटल ऑर गो ब्लैंक' और हिंदी में 'सेट टॉप बॉक्स लगाएं या टीवी भूल जाएं' की चेतावनी के साथ लोगों को 31 अक्टूबर तक डिजिटल सेट टॉप बॉक्स लगाने की चेतावनी दी जाएगी।
 
टीवी पर यह ब्लैकआउट फिलहाल चार मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नै के लिए प्लान किया गया है। इन शहरों में डिजिटलीकरण का पहला फेज 1 नवंबर तक पूरा होना है। इसके लिए पहले 30 जून की डेडलाइन तय की गई थी, लेकिन सेट टॉप बॉक्स और कई दूसरे कारणों से इसे लागू नहीं किया जा सका। (एनबीटी)

पीएम की नसीहत: सनसनी फैलाने से बचे मीडिया

 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मीडिया को सनसनी फैलाने से बचना चाहिए और कुछ भी लिखने या प्रसारित करने में संयम बरतना चाहिए. सिंह ने कहा कि सांप्रदायिक सहयोग और अंतरसमूह एवं अंतर सामुदायिक संवाद को आगे बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है और विचारों की रिपोर्टिंग निष्पक्ष, वस्तुपरक एवं संतुलित रूप से किया जाना चाहिए.
 
केरल श्रमजीवी पत्रकार संघ के स्वर्ण जयंती समारोह का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सनसनीखेज होने की आकांक्षा से बचा जाना चाहिए हालांकि यह कई बार लुभावना लगता है. लिखने, प्रसारण एवं प्रसारित करने में संयम बरतना चाहिए जो समाज या देश को बांटने वाला हो.
 
प्रधानमंत्री ने हाल की असम हिंसा और उसका देश के अन्य इलाकों में पड़े प्रभाव का जिक्र करते हुए मीडिया को यह सलाह दी. इस घटना के बाद देश के कई इलाकों से पूर्वोत्तर के लोग अपने गृह राज्यों में पलायन कर गए थे. सिंह ने कहा कि असम का भयावह घटनाक्रम और मुम्बई, पुणे, बेंगलूर, हैदराबाद, चेन्नई एवं अन्य स्थानों इसके प्रभाव से यह बात सामने आई है कि ‘हम सामाजिक शांति और सौहार्द के बारे में निश्चिंत नहीं रह सकते हैं.
 
मीडिया को सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में संविधान में प्रदान की गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का हमें गर्व है. हमारे देश में मीडिया न केवल लोक अभिव्यक्ति का विश्वसनीय पैमाना है बल्कि यह हमारे देश की अंतरात्मा का संरक्षक भी है.
 
सिंह ने कहा कि भारत कई धर्मो, जातियों, भाषाओं और विचारों वाला देश है. उन्होंने कहा कि विविध विचारों की स्वतंत्रता और अक्सर विरोधी विचारों का एक साथ सामंजस्य हमारे समाज और राजनीति का एक विशिष्ट गुण है. स्वतंत्र और जवाबदेह मीडिया ऐसे समाज एवं राजनीति को बनाये रखने की पूर्व शर्त है. (समय)

करीना कपूर ने रिपोर्टर को डांटा, “धर्म पर ‘गलत सवाल’ मत पूछें”

अभिनेत्री करीना कपूर से एक हालिया इंटरव्यू में एक रिपोर्टर ने ऐसा सवाल पूछ लिया कि वे भड़क पड़ीं। दरअसल, करीना से किसी ने यह पूछ लिया था कि क्या वे भी सैफ अली खान से शादी के बाद अपनी भावी सास शर्मिला टैगोर के नक्शेकदम पर चलेंगीं और इस्लाम कबूल कर लेंगी। ग़ौरतलब है कि क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी से शादी करने के बाद शर्मिला ने इस्लाम कबूल कर लिया था और उनका नाम आयशा बेगम रखा गया था।

सवाल सुनते ही बेबो का माथा टनक गया और वे भन्नाते हुए बोलीं, "यह बहुत गलत सवाल है, और मैं इसका जवाब नहीं दूंगी।" एक ओर जहां शर्मिला टैगोर अक्टूबर में सैफ-करीना के शादी की बातें कर रही हैं वहीं दूसरी ओर करीना इस मामले में न हां करती हैं न ना। 
 
जब उनसे इस बारे में पूछा जाता है, उनका जवाब होता है, "मैं नहीं बता सकती। मुझे माफ कीजिएगा। यह प्रेस कांफ्रेंस मेरी शादी को लेकर नहीं है।" लेकिन वे इस बात की तस्दीक करती हैं कि शादी के मौके पर वे लाल कलर पहनेंगी। करीना ने कहा, "लाल मेरा फेवरिट कलर है और आप सब उस दिन मुझे लाल साड़ी में देखेंगे।" 
 
करीना और अभिनेता सैफ अली खान के 16 अक्टूबर को शादी के बंधन में बंधने की खबर हैं लेकिन करीना ने इस पर चुप्पी साध ली हैं। साथ ही उन्होंने शादी के बाद इस्लाम कबूलने के सवाल पर भी कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, मीडिया रपट में सैफ की मां द्वारा यह पुष्टि की गई है कि दोनों 16 अक्टूबर को शादी कर रहे हैं।
 
करीना ने बुधवार को फिल्म 'हीरोइन' के प्रचार के दौरान कहा, "आप सब कुछ जानते हैं, फिर क्यों पूछ रहे हैं।" जब उनसे पूछा गया कि वह अपनी शादी की तारीख पीछे क्यों ठेल रही हैं तो उन्होंने कहा, "बात सिर्फ इतनी है कि अभी यह तय नहीं हुआ कि यह कहां और कब होगा। इसलिए जब भी हम यह तय करेंगे, हम बताएंगे।"
 
जब करीना से शादी के बाद इस्लाम कबूल किए जाने का सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। करीना ने कहा, "यह बहुत ही गलत सवाल है, जिसका जवाब मैं नहीं दूंगी।"

सीबीआई से कराई जाए पत्रकार लोकेश वर्मा की मौत की जांच

राजस्थान पत्रकार संघ ने हनुमानगढ़ के पत्रकार लोकेश वर्मा की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। जांच में  हो रही कोताही के चलते राजस्थान पत्रकार संघ की टीम ने प्रदेश अध्यक्ष उमेंद्र दधीच के निर्देशानुसार अपनी जांच आयोजित की और इस मौत को संदेहास्पद पाया है। ग़ौरतलब है कि हनुमानगढ़ के समाचार पत्र लोकेश केसरी के मालिक लोकेश वर्मा की पिछले दिनों हनुमानगढ़ से संगरिया जाते वक्त सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये सड़क दुर्घटना जान-बूझ कर करवायी गयी थी।

 
दुर्घटना में मारे गये पत्रकार लोकेश वर्मा के पुत्र पंकज ने अपने पिता के पूर्व प्रकाशित लेखों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अपने समाचार पत्र में स्थानीय राजनेता के भ्रष्टाचार संबंधी कई राज खोले थे। पंकज के मुताबिक राजनेता और कुछ माफिया तत्वों ने उनके पिता को कई बार धमकियां दी थीं, लेकिन उन्होंने इसके बावज़ूद अपना अभियान नहीं छोड़ा। उन्होंने इन धमकियों के बारे में स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति तक को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन किसी ने उनकी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया।
 
लोकेश वर्मा की मौत की जांच करने वाले पत्रकारों में संघ के बीकानेर प्रभारी मधुप वशिष्ठ, सुभाष अग्रवाल और तीन अन्य पत्रकार शामिल थे। उन्होंने जांच में पाया कि स्थानीय राजनेता और कुछ माफिया तत्वों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी गोल-मोल भाषा में लिखी गयी है जिससे किसी साज़िश का संदेह और पक्का हो जाता है। संघ की मांग है कि सरकार इस मामले को अति शीघ्र सीबीआई को सौंपे वर्ना माफिया तत्व सुबूतों को मिटाने में कामयाब हो जाएंगे।