सिर्फ ‘न्यूज नेशन’ ही नहीं, ‘इंडिया न्यूज’ और ‘न्यूज24’ के भी खिलाफ हुआ है एफआईआर

भड़ास के एक पाठक ने मेल कर जानकारी दी है कि न्यूज नेशन के अलावा न्यूज24 और इंडिया न्यूज के खिलाफ भी एफआईआर हुई है. इन तीनों ही न्यूज चैनलों के मालिकों, संपादकों, एंकरों, पत्रकारों को पुलिस ने पत्र भेजा है. भड़ास के पाठक पंकज बताते हैं….

Zero FIR in Gurgaon against news channels…

Hi

Details for Zero FIR… The FIR is against three news channels as News Nation, News 24 and India News. Police has registered the names for News Nation management people and anchor etc. but for other two news channel, they have just written as "Against News channel Managements and Published People". Its in Hindi so correct translated might not be here.

However, the request letter was for MD,Chairman, Owner, Editor In-Chief and anchor names for all three news channel. The fabricated CD shown by news channel contains a child of age 10 year and a lady of age 27 around. So, it has POCS for news channel. Other IPC u can get from FB definitely.

Original video is for a family whose home Bapuji visited in July this year and news channel says lady as Shilpi and baby as from Gurukul. Hope this much info is ok for u so far. Let me know if u need more details.

Thanks and Regards,
Pankaj


मूल खबर…

'न्यूज नेशन' की घटिया पत्रकारिता, शैलेश कुमार समेत कइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पत्रकारिता में प्रलोभन : हरियाणा डेस्क के सभी लोगों के पास गुड़गांव में प्लाट है, आप भी ले सकते हैं

भारत में पत्रकारिता एक मिशन के रूप में आरंभ हुई मगर बाद में एक धंधा बन गई। अखबार मालिक जब इससे कमाई करने लगे तो पत्रकार भी फिर क्यों पीछे रहते। सो, उन्होंने भी पत्रकारिता के साथ साथ कई प्रकार के धंधे आरंभ कर दिए। पत्रकारों द्वारा ब्लैकमेल और अवैध वसूली के समाचार आए दिन सुनने पढ़ने को मिलते रहते हैं। कई लोग अपने धतकर्मों को छुपाने के लिए पत्रकारों को खरीदने लगे हैं जिसके चलते पत्रकारों की एक ऐसी पीढ़ी सामने आ गई है जो देखते ही देखते करोड़पति बन गई है।

लंबे पत्रकारीय जीवन में मेरे सामने भी ऐसे कई अवसर आए, मगर एक तो अध्यापन जैसे व्यवसाय से पत्रकारिता में आया था जहां बेईमानी का कोई अवसर नहीं था, दूसरे हमारे जमाने के पत्रकारों के कुछ आदर्श होते थे, सो बेईमानी करने का साहस ही कभी नहीं हुआ। कई लोग ताना भी मारते हैं कि तुम्हारे अमुक अमुक चेले करोड़ों में खेल रहे हैं और एक तुम हो कि खटारा गाड़ी में घूमते हो या रेल बसों में धक्के खाते हो। मेरे सामने कई अवसर आए, आज सोचता हूं, इन पर भी चर्चा कर ली जाए।

पहला अवसर नवभारत में आने के कुछ दिन बाद ही मिला। हुआ यह कि बुलंदशहर में एक एस. पी. ने गणतंत्र दिवस पर पदक प्राप्त करने के लिए एक फर्जी एनकाउंटर कर दिया। रात में एनकाउंटर किया तो दापहर के अखबारों ने एस. पी. साहब का खूब गुणगान किया और शाम को शहर के कुछ सेठों ने एक समारोह कर उन्हें सम्मानित भी कर दिया और उन्हें पदक देने के लिए एक ज्ञापन भी सरकार को भेज दिया। कुछ जानकार मेरे पास आए और एनकाउंटर को फर्जी साबित करने के कुछ सबूत भी दिखाए। मैं तुरंत बुलंदशहर गया और स्थानीय संवाददाता को साथ लेकर पड़ताल आरंभ कर दी।

पहला सबूत यह मिला कि जिस आदमी को पुलिस ने दिन में बुलंदशहर से उठाया था, उसके परिवार वालों ने उसी समय टेलीग्राम कर दिया था। उसका कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं था। दूसरा सबूत यह मिला कि पुलिस ने सड़क पर पेड़ काट कर डालने के लिए जो कुल्हाड़ी बरामद दिखाई थी उसे शाम को एक सिपाही पास की दुकान से लाया था। पुलिस ने सड़क रोकने के लिए जो पेड़ दिखाया था वह सफेदा का एक छोटा सा पेड़ दिखाया जिससे साइकिल भी नहीं रोकी जा सकती थी। आस-पास के लोगों के बयान ले कर एस. पी. साहब से मिला। उन्हें भी गोली लगी बताई गई थी। एस. पी. साहब अकेले ही लॉन में धूप सेंक रहे थे। बातचीत के बाद जब उनसे गोली लगने के बारे में पूछा गया तो वह गोलमोल जवाब देने लगे। मैं अपना काम निपटा कर शाम को घर आ गया।

अगली सुबह होते ही बुलंदशहर के तीन सेठ संवाददाता के साथ घर पर आ गए और बताया कि उन्हें एस. पी. साहब ने भेजा है। यह कहते हुए उन्होंने एक ब्रीफकेस मेरी ओर बढाते हुए कहा कि साहब ने यह आपके लिए दिया है। संवाददाता ने भी उसे लेने का आग्रह किया मगर मैंने इंकार कर दिया। इस पर उन लोगों ने कहा कि इसे खोल कर तो देख लें। मगर मैंने यह भी नहीं माना और चाय पिला कर उन्हें विदा कर दिया। अगले दिन फर्जी एनकाउंटर की रपट छप गई। इसके तीसरे दिन लखनऊ से एक टीम जांच के लिए आ गई। इस टीम की सिफारिश पर एस. पी. से लेकर सिपाही तक 22 लोग जो उस एनकाउंटर में शामिल थे, सबका तबादला हो गया। बाद में संवाददाता ने मुझे बताया कि ब्रीफकेस में मोटी रकम थी।

मेरठ से दिल्ली आने के बाद मैंने एक लेखमाला 'सारे दुखिया यमुना पार' शीर्षक से पांच किस्तों में लिखी। यमुना पार उस समय दिल्ली के बेताज बादशाह हरकिशन लाल भगत का चनुाव क्षेत्र था। इस लेखमाला के छपने के बाद भगत जी के दूत मेरे पास आने लगे कि भगत जी आप से मिलना चाहते हैं। उस समय दिल्ली के बहुत सारे पत्रकार भगत जी के दरबार में हाजिरी लगाया करते थे। भगत जी के दूत जब बार बार आने लगे तो एक दिन संसद भवन जाकर उनके कार्यालय में मिला। भगत जी का आग्रह था कि किसी दिन घर पर आएं ताकि विस्तार से बात हो सके। मैंने शनिवार के लिए कहा तो भगत जी ने अपने पी. ए. से कहा कि शनिवार में 11 और 12 बजे के बीच किसी को समय न दें।

मैं तय समय से कुछ पहले पहुंच गया तो भगत जी ने मुझे एक बड़े से कमरे में बिठा दिया। थोड़ी देर बाद वह आ गए और इधर उधर की बातें करते रहे। फिर उठ कर एक सेफ के पास गए। उसे खोला तो नोटों की कई गड्डियां नीचे गिर गईं। भगत जी ने उन्हें उठा कर सेफ में रख दिया और मेरे पास आ कर बैठ गए और बोले- हम तो पत्रकारों का बहुत सम्मान और सेवा करते हैं, आप तो कभी आते ही नहीं। इसी प्रकार एक घंटा बीत गया मगर काम की एक भी बात नही हुई। मैं वापस आ गया। अगले दिन टाइम्स आफ इंडिया के रमन नंदा को भी भगत जी से मिलना था। रमन ने मुझसे पूछा तो मैंने सारी बात बता दी। अगले दिन रमन ने बताया कि उसे भी सेफ खोल कर दिखाई गई थी। इसके बाद भगत जी के दूत आते रहे और सेवा के बारे में पूछते रहे मगर मैंने कभी कोई सेवा नहीं बताई। कुछ दिन बाद मुझे दिल्ली से हटा कर यू. पी. भेज दिया गया। पता यह चला कि भगत जी को मेरा दिल्ली पर रहना रास नहीं आ रहा था।

यू. पी. में मजे से कट रही थी। फील्ड और डेस्क दोनों पर काम कर रहा था। यह 1990 की बात है। मुलायम की सरकार थी। मेरे यहां रहने से संघी भाई बहुत परेशान थे। तरह-तरह की शिकायतें करते रहते थे। मगर मुझे कोई कुछ नहीं कहता था। चुनाव हुए। सरकार बदल गई और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बन गए। इसके साथ ही मेरी यू. पी. से विदाई हो गई। कुछ दिन भ्रमण कर खबरें लाता रहा और एक दिन मुझे हरियाणा का इंचार्ज बना दिया गया। सरकार भजन लाल की थी और जनता में बहुत विरोध हो रहा था। संवाददाताओं की खबरें भी इसी प्रकार की आ रहीं थीं। ओम प्रकाश चौटाला आए दिन आंदेालन कर रहे थे, जिनकी खबरें खूब छप रही थीं। एक दिन हरियाणा भवन से बुलावा आया कि मुख्यमंत्री मिलना चाहते हैं।

मैं गया तो मुख्यमंत्री ने बड़ा सत्कार किया। एक अलग कमरे में लेकर बैठ गए और बताया कि उनकी सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। मैं इसकी उपलब्धियों पर लिखूं। मैंने इस बारे में विज्ञापन देने का सुझाव दिया मगर वह मेरे कलम से ही लिखवाना चाहते थे और मैं झिझक रहा था तो मुख्यमंत्री ने सीधे बताया कि हरियाणा डेस्क पर काम कर चुके लगभग सभी लोगों के पास गुड़गांव में प्लाट है, आप भी ले सकते हैं। मैंने इंकार कर दिया और वापस आ गया। मैनेजमेंट फरीदाबाद में एक बैंक खोलना चाहता था। उसके लिए परिसर की आवश्यकता थी तो अधिकारी मुख्यमंत्री से मिले तो मुख्यमंत्री ने लगे हाथों मेरी भी शिकायत कर दी। इसके बाद हरियाणा से भी मेरी विदाई हो गई।

इस प्रकार पत्रकारिता से कमाई के तीन बड़े अवसर मिले मगर मैं किसी का भी लाभ नहीं उठा पाया। अधिकांश मित्र इसे मेरी मूर्खता मानते हैं। हो सकता है वह सही हों मगर जब मैं पत्रकारों के भ्रष्टाचार के बारे में सुनता हूं तो लगता है कि मैं इस काजल की कोठरी से बेदाग निकल आया। बस खुशी इसी बात की है कि मेरी पत्रकारिता की चादर पर कोई दाग नहीं है।

लेखक डॉ. महर उद्दीन खां वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं. रिटायरमेंट के बाद इन दिनों दादरी (गौतमबुद्ध नगर) स्थित अपने घर पर रहकर आजाद पत्रकार के बतौर लेखन करते हैं. उनसे संपर्क 09312076949 या  maheruddin.khan@gmail.com के जरिए किया जा सकता है. डॉ. महर उद्दीन खां का एड्रेस है:  सैफी हास्पिटल रेलवे रोड, दादरी जी.बी. नगर-203207

अन्य संस्मरणों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: भड़ास पर डा. महर उद्दीन खां

 

पत्रिका के संपादक भुवनेश जैन एफआईआर वापस लेने के लिए महिला वकील पर दबाव दे रहे!

जयंती राजेश ने पत्रिका समूह के मालिकों और मालकिनों को दो पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने अखबार के संपादक भुवनेश जैन पर कई आरोप लगाए हैं. सबसे बड़ा आरोप है एफआईआर वापस लेने के लिए दबाव देने का. पूरा पत्र यूं है…

Dear Sir

I, Jayanti Rajesh want to complaint that Mr.Bhuvnesh Jain Editor in your prestigious paper is misusing his position to pressurised me to take back my FIR of assault to modesty of a women advocate under section 354, 452, 509 IPC lodged against his relative Praveen Jain, and influencing the police personals not to take any action against him.

I request you to please stop him from doing so as his acts are against the reputation of your prestigious paper. I hope you will take a serious action against the illegal act of the person. The copy of the complaint registered with women commission and other govt. officials is attached with the letter along with the copy of the FIR.

Thanking You

Jayanti Rajesh

Advocate Rajasthan High Court

Jaipur

E-1/144 Chitrakoot Sector 1

Vaishali Nagar Jaipur


इसी प्रकरण से संबंधित एक और शिकायती पत्र इस प्रकार है…

Dear Madam,

I, Jayanti Rajesh, had logged a FIR against Praveen Kumar Jain under section 452, 354, 509 IPC  since he entered my house without my permission when I was alone with my children and  misbehaved with me in front of my 2 year childrens. Earlier also he had done this with me and other women of colony but we ignored it and forgived him since he is our neighbour but instead of leaving it he started to tease me by singing cheap songs whenever he passes by my door. On 6/12/12 he entered our house with bad intention and tried to catch hold my hands.

Now his Brother-in-law Mr.BHUVNESH JAIN who is an editor in Rajasthan Patrika Jaipur is putting pressure on me to take my complain back and he misusing his position to influence the police not to take any action against him So I request you to look into the matter and help me to fight against that low character person so that we can get justice. I am attaching the copy of the FIR along with this mail.

Thanking You
Jayanti Rajesh
Advocate Rajasthan High Court
Jaipur
E-1/144 Chitrakoot Sector 1
Vaishali Nagar Jaipur

हरिभूमि की धमक से भोपाल का अखबारी युद्ध रोचक होने जा रहा

अखबार की दुनिया भी बड़ी गजब है। कोई कहीं सेंध लगाता है तो कोई कहीं खुद सिंध जाता है। जहां एक ओर पटना में भास्कर हिन्दुस्तान और प्रभात खबर के लोगों को तोड़कर अपने पाले में ला रहा है वहीं भोपाल में एक दूसरा अखबार भास्कर ही नहीं पत्रिका और नई दुनिया में सेंध लगाने की तैयारी कर रहा है। भोपाल का अखबारी युद्ध जल्द ही रोचक होने जा रहा है। हरिभूमि जल्द ही यहां दस्तक देने जा रहा है।

कभी भास्कर के संपादक और थिंक टैंक रहे डा. संतोष मानव ने बतौर संपादक अपना कार्यभार हरिभूमि, भोपाल में ग्रहण कर लिया है। जवाहर चौक पर दफ्तर बनकर लगभग तैयार है। नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होने को है। जल्द ही भोपाल से अखबार प्रकाशित होना भी शुरू हो जाएगा। मानव चूंकि लम्बे समय तक भास्कर की विभिन्न यूनिटों में काम कर चुके हैं, इसलिए उन्हें भास्कर के भीतर तक की सारी खबर है। उन्हें पता है कि कब, कहां और कैसे वार करना है।

जानकारी मिली है कि भोपाल में जल्द बड़ी उठापटक देखने को मिल सकती है। भास्कर, पत्रिका और नई दुनिया के बड़े-बड़े नाम मानव के सम्पर्क में हैं और इशारा होते ही पल्टी मार देंगे। ऐसे समय में जब भास्कर प्रबंधन का पूरा ध्यान पटना पर है, मानव के लिए भोपाल में खलबली मचाना आसान हो रहा है। पता चला है कि भोपाल के नतीजों को देखने के बाद हरिभूमि प्रबंधन इंदौर और ग्वालियर के मैदान में भी उतरने की सोच रहा है। तो अच्छे पत्रकारों के लिए एक और मौका सामने है। अच्छा काम करेंगे तो पद तो मिलेगा ही पैसा भी।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Misbehaving for Refund of Caution Money – IMS, Noida Sector 63

Respected President, While writing this email to you I have no other option but to assume that at least you will be doing your job right and hopefully this channel to layout grievances has some sanctity. We have completed our MCA program from IMS, Noida in 2011 but till now we didn't recieved our caution money (which is around 13,000, College+Hostel) back. Actively we are reaching out to the College Administration for last 2.5 yrs, but they are just ignoring us.

It seems you are not running an Institute to provide a better education facility to the students instead you are running a business. Now since you have got all the sales you could make from us, you thought why be customer centric to these customers (we have already sucked out blood from him already).

If you have some sense of customer service( I think we are customer for you) and even if there is 1 person in the Institute who has business ethics left and can make a difference might be able to help. Below is the matter :
 
So some months back I guess January /February'13, it was told by college administration (I am not going to take anybody's name here, everyone loves his/her job) that our caution money must be returned to us by July/August'13 for sure and we stupid starts waiting this time but we were sure nothing gonna happen here and that's come true.  Now it was a few days back when I called to Accounts deptt. for the inquiry. I got though a stupid guy of yours who after listening to my concern for 10 minutes and kept me on hold to find the correct resolution never came back and chose to disconnect while I was still holding the line. Anyways I called again and this time around managed to speak to the guy who initially sounded interested in helping me and after keeping me on hold for several minutes and times and upon talking to a few departments and chose to come back with a heavy and distinct pitches thinking that everyone who calls here either the first time or last as then it becomes another problem in his life. So….he says that we will inform it on nortice board. To my surprise and out of hesitation I still chose inquire further regarding this.
Now, he said we can keep all of your money for next 10 years if you can do anything then go and do.(its rocket science that we are dealing with at IMS). I was inquisitive so I asked that what will I do to get my money back. He suggested to take the help of media and start voilence in the campus… now how how intelligent IMS could be!!! Till now I had absolutely forgotten that I am talking to a deptt. of a prestigious institute. This was about little less than 15 minutes that I spent with him on phone. Thanking the unworthy I kept the phone down with a hope that someone will come back with a solution. Abviously, it was not gonna happen. Now agreeing to his words i am going to take the help of media and if required will go with judiciary also.
 
If you could help me with the issue I will be glad but I will not hesitate in circulating the blog with my friends at press and of course all the social media that is available to me.
 
Lets See !!!
 
Regards,

Shashank Mohan Singh

shashanksingh1288@gmail.com

कांग्रेस के तीर-तुक्के : सरकार बनाने के लिए केजरीवाल पर बढ़ा दिया चौतरफा दबाव

चुनावी राजनीति के इतिहास में यहां इन दिनों एक नए किस्म का राजनीतिक प्रयोग शुरू किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी धुर विरोधी आम आदमी पार्टी (आप) पर चौतरफा दबाव बढ़ाया है कि वह किसी तरह से दिल्ली में अपनी सरकार गठित करने के लिए तैयार हो जाए।

विधानसभा के चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस की सबसे ज्यादा पिटाई की है। इस पार्टी को महज 8 सीटों में जीत मिली है। जबकि, नवोदित ‘आप’ को 28 सीटों में ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है। यद्यपि यहां पर 31 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। लेकिन, किसी पार्टी को अकेले बहुमत लायक सीटें नहीं मिलीं। कांग्रेस ने अपने खास रणनीतिक दांव के चलते ‘आप’ को बगैर मांगे बिना शर्त के समर्थन दे दिया है। इसके बावजूद यह पार्टी सरकार बनाने में हिचक रही है। इस स्थिति को लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने केजरीवाल पर तरह-तरह से दबाव बढ़ाया है। यह प्रचारित किया जा रहा है कि वे डर की वजह से सरकार बनाने से भाग रहे हैं।

दिलचस्प मामला यह है कि भाजपा का नेतृत्व भी इस इंतजार में है कि केजरीवाल, कांग्रेस के साथ मिलकर किसी तरह सरकार बना लें। शुरुआती दौर में भाजपा के नेता केजरीवाल से अनुरोध कर रहे थे कि उन्हें सरकार जरूर बना लेनी चाहिए। क्योंकि, उन्हें कांग्रेस का समर्थन बगैर शर्तों के मिल रहा है। जबकि, उनकी पार्टी को कहीं से कोई समर्थन नहीं दे सकता, इसीलिए उन्होंने पहले ही उपराज्यपाल से कह दिया है कि वे सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं। 18 दिसंबर तक दिल्ली में नई सरकार का गठन हो जाना चाहिए था। लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया। उपराज्यपाल नजीब जंग ने भाजपा के बाद ‘आप’ नेतृत्व को सरकार बनाने का न्यौता दिया था। राजभवन में केजरीवाल के नेतृत्व में ‘आप’ के नेता पहुंचे थे। इन लोगों ने सरकार बनाने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। यह अवधि सोमवार को पूरी हो रही है।

‘आप’ के नेता कुमार विश्वास कह रहे हैं कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि कांग्रेस के नेता अपनी राजनीति का कंटीला जाल फैलाने में लगे हैं। ताकि, वे किसी न किसी तरीके से ‘आप’ नेतृत्व को बदनाम कर सकें। इसी मकसद से ये लोग ज्यादा उत्साहित हैं कि दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बन जाए। लेकिन, हम लोगों ने भी जमीनी राजनीति से चंद दिन में ही बहुत कुछ सीख लिया है। ऐसे में, कांग्रेस के नेता ज्यादा चालाक बनने की कोशिश न करें। यह बात अच्छी तरह समझ लें कि वे लोग सीधे-सच्चे जरूर हैं, लेकिन मूर्ख नहीं हैं। कांग्रेस की नीयत अच्छी तरह से आम जनता भी समझ रही है। ऐसे में, सरकार बनाने का फैसला सोच-समझकर ही किया जाएगा। फैसला इस तरह लेंगे कि कांग्रेस वाले कोई चालबाजी करें, तो उनका असली चेहरा जनता के बीच खुद सामने आ जाए।

टीम केजरीवाल ने भी इस पूरे मामले पर चालाक राजनीतिक दांव चलने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने मंगलवार को ही दिल्ली की जनता से राय-शुमारी करानी शुरू कर दी कि कांग्रेस के समर्थन से ‘आप’ को सरकार बनानी चाहिए या नहीं? जनता की राय जानने के लिए 25 लाख चिट्ठियां छपवाई गई हैं, इनका वितरण गुरुवार से पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरी दिल्ली में करना शुरू कर दिया है। इसके पहले ही आनलाइन, आफलाइन वेबसाइट, एसएमएस व फोन के जरिए लोगों की राय मांगी जा रही है। दावा किया जा रहा है कि करीब 5 लाख लोगों ने अपनी राय भेज भी दी है। विधानसभा की सभी 70 सीटों में कार्यकर्ता घर-घर संपर्क करके राय-शुमारी कर रहे हैं। यह अभियान रविवार तक पूरा किया जाना है। इसी के बाद   नेतृत्व फैसला करेगा और अगले दिन उपराज्यपाल को बताएगा। यह तो पार्टी का घोषित एजेंडा है।

लेकिन, अंदर-अंदर कई राजनीतिक दांव-पेच चले और परखे जा रहे हैं। ‘आप’ के एक चर्चित नेता ने अनौपचारिक बातचीत में ‘डीएलए’ से कहा कि कांग्रेस वाले हमारी सरकार बनवाकर हमें उलझाना चाहते हैं। ताकि, लोकसभा के चुनाव में हम लोग कांग्रेस के सामने कोई बड़ी चुनौती न बन सकें। ये लोग यह बात नहीं समझ पा रहे हैं कि छल-फरेब के राजनीतिक हथकंडों से अब आम आदमी को बहकाया नहीं जा सकता। इसीलिए उन लोगों ने इस फैसले में पूरी दिल्ली को एक बार फिर सहभागी बना लिया है। जो फैसला जनता करेगी, उसी हिसाब से नेतृत्व निर्णय लेगा। दबाव की रणनीति के तहत यह प्रचारित किया गया था कि गुरुवार को राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में कैबिनेट अपनी मंजूरी दे सकता है। लेकिन, ऐन वक्त पर केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यही कह दिया कि सरकार इस इंतजार में है कि ‘आप’ यहां सरकार कब तक बनाने की स्थिति में है? शिंदे ने उपराज्यपाल से इस आशय की जानकारी भी मांगी है। जाहिर है कि इस प्रक्रिया के बहाने केंद्र सरकार थोड़ी रस्सी ढीली कर रही है। ताकि केजरीवाल, सरकार बनाने का मन बना लें।

इस बीच मीडिया के एक बड़े हिस्से ने भी इस मामले में बहस तेज करा दी है। यह सवाल किया जा रहा है कि केजरीवाल कहीं सरकार बनाने की जिम्मेदारी से भाग तो नहीं रहे हैं? ‘आप’ नेतृत्व के सामने भी सरकार के सवाल पर दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है। क्योंकि, जो लोग विधायक चुने गए हैं, उन्होंने भी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाया है कि मौका मिल रहा है, तो सरकार गठित कर ली जाए। लेकिन, केजरीवाल के सामने चुनौती है कि वे जिस तरह से लोक लुभावन वायदों को लेकर जीते हैं, उन्हें अल्पमत वाली सरकार कैसे पूरा कर सकती है? खतरा यह भी है कि बाहर से समर्थन देने वाली कांग्रेस ऐसा कोई मौका नहीं चूकेगी कि वह सरकार की फजीहत न कराए। भाजपा नेतृत्व के निशाने पर भी टीम केजरीवाल है।

सरकार गठन के पहले ही भाजपा नेता डॉ. हर्षवर्धन ने ‘आप’ के खिलाफ राजनीतिक प्रहार तेज कर दिए हैं। उन्होंने 14 सवाल ‘आप’ से पूछ लिए हैं। एक बार फिर इस पार्टी ने ‘आप’ को कांग्रेस की ‘बी’ टीम करार किया है। इस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने तो नाराजगी में तमाम तीखी टिप्णियां ही कर दी हैं। उन्होंने कह दिया है कि ‘आप’ वालों की विचारधारा हिंसक नक्सलियों वाली है। जम्मू-कश्मीर के मामले में भी इनके लोग अलगाववादी ताकतों के साथ खड़े नजर आते हैं। इस तरह से इनकी देशभक्ति भी संदेह के घेरे में मानी जा सकती है। भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने तो ‘आप’ के नेतृत्व की ईमानदारी पर भी सवाल खड़ा किया है। यही कहा है कि यदि ये लोग खांटी ईमानदार और राष्ट्रभक्त होते, तो भला गांधीवादी अन्ना हजारे इनसे दूर क्यों हो जाते?

‘आप’ को दिल्ली की जनता से अब तक जो राय मिली है, उसके बारे में आधिकारिक रूप से यह जानकारी नहीं मिल पाई कि लोगों ने क्या-क्या सुझाव दिए हैं? सूत्रों के अनुसार, राय देने वाले करीब तीन-चौथाई लोगों ने ‘आप’ नेतृत्व को सरकार बनाने की चुनौती स्वीकार करने की सलाह दी है। कुछ ने तो यहां तक कहा है कि वे डंके की चोट पर सरकार बनाएं। सबसे पहले शीला दीक्षित सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच कराएं। इसी के साथ दिल्ली नगर निगम के तमाम घपलों की जांच करा दें। ताकि, भाजपा का भी असली चेहरा सामने आए। उल्लेखनीय है कि नगर निगम में सालों से यहां भाजपा सत्तारूढ़ रही है। केजरीवाल ने मीडिया से कल खुलकर कह भी दिया है कि उनकी सरकार बनती है, तो वे नगर निगम और शीला सरकार के पूरे कार्यकाल में हुए घपलों की जांच कराएंगे। वे इस मामले में हर जोखिम लेने को तैयार रहेंगे।

दरअसल, यहां कांग्रेस की सरकार लगातार 15 साल तक रही है। लेकिन, इस बार चुनाव में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी अपनी सीट नहीं बचा पाईं। उन्हें केजरीवाल ने भारी मतों से हराया है। हार की हताशा से उबारने के लिए अब कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने कमर कसी है। इसी के तहत कल जेपी अग्रवाल की जगह अरविंदर सिंह लवली को नया अध्यक्ष बना दिया गया है। जबकि, चर्चा शीला दीक्षित को यह जिम्मेदारी देने की चल रही थी। ‘आप’ ने चुनावी राजनीति का प्रयोग दिल्ली से ही शुरू किया है। पहले सफल प्रयोग के बाद ‘आप’ ने ऐलान कर दिया है कि लोकसभा में वे लोग दिल्ली से लेकर कन्याकुमारी तक कांग्रेस और भाजपा को बड़ी चुनौती देंगे। दिल्ली में 7 संसदीय सीटें हैं। कांग्रेस का नेतृत्व इन सीटों के लिए खास तौर पर चिंतित माना जा रहा है। क्योंकि, मौजूदा हालात में कांग्रेस के लिए एक भी सीट एकदम सुरक्षित नहीं लगती। जबकि, पिछले चुनावों ने कांग्रेस ने यहां सभी सीटों पर कब्जा कर लिया था।

कांग्रेस के साथ भाजपा नेतृत्व को भी ‘आप’ अपने लिए एक बड़ा राजनीतिक रोड़ा लगने लगा है। ऐसे में, यह पार्टी भी हर तरह से ‘आप’ नेतृत्व को उलझाने के दांव चलने लगी है। भाजपा के रणनीतिकारों को यह भी आशंका होने लगी है कि कहीं ‘आप’ का अभियान लोकसभा के चुनावों में उसके तमाम मंसूबों पर पानी न फेर दे। क्योंकि, दिल्ली के अलावा उत्तर भारत के कई शहरों में ‘आप’ के कार्यकर्ता तेजी   से सक्रिय हो रहे हैं। इन लोगों ने कांग्रेस के साथ भाजपा की भी जमकर खिलाफत शुरू की है। इनकी राजनीतिक लाइन यही है कि कांग्रेस और भाजपा सांपनाथ और नागनाथ जैसे हैं। ऐसे में, दोनों से खतरा बराबर का है। इस मामले में कांग्रेस के रणनीतिकार थोड़ा होशियारी दिखाने की कोशिश जरूर कर रहे हैं। राहुल गांधी अपने सहयोगियों से कह रहे हैं कि जिस तरह से ‘आप’ ने जमीनी स्तर पर लोगों से सीधा संवाद कायम किया है, उसी तर्ज पर कांग्रेस भी राजनीति करे, तो ही चुनावी वैतरणी को पार किया जा सकता है।

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इस कोशिश में है कि केजरीवाल, सरकार बनाने का मन बना लें। खबरें तो इस आशय की भी आ रही हैं कि नेतृत्व ने दिल्ली के अपने कार्यकर्ताओं को इशारा कर दिया है कि वे राय-शुमारी के दौरान ‘आप’ नेतृत्व से एक नागरिक की हैसियत से यह कहें कि वे लोग सरकार जरूर बनाएं, जिम्मेदारी से भागे नहीं। कनॉट प्लेस स्थित ‘आप’ के केंद्रीय कार्यालय में भी लगातार इस आशय की जानकारियां आ रही हैं कि संघ परिवार के घटकों ने भी अपने लोगों से कह दिया है कि इस आशय के एसएमएस भेजे कि केजरीवाल को सरकार बनानी चाहिए। इस संदर्भ में केजरीवाल ने यही कहा है कि उन्हें अच्छी तरह से पता है कि भाजपा और कांग्रेस के नेता उनकी सरकार बनवाने में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं? लेकिन, जनता के बहुमत ने सरकार बनाने की राय दी, तो वे पीछे नहीं हटने वाले। इसके बाद जो कुछ होगा, वह भी भारतीय राजनीति में एकदम नया प्रयोग होगा। बस, इंतजार कर लीजिए। केजरीवाल, मंद मुस्कान के साथ बड़े आत्मविश्वास से यह टिप्पणी करते हुए अपने कार्यकर्ता के कंधे पर हाथ रखकर कुछ बात करने में रम जाते हैं। भले, यह प्रचारित किया जा रहा हो कि केजरीवाल सरकार बनाने के मुद्दे को लेकर बहुत तनाव में हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत तो यह है कि कल भी वे अपने साथियों के साथ मुस्कराते चने-मुरमुरे खाते दिखाई पड़े। एकदम, रोजमर्रा की तरह।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengardelhi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।