गोरखधंधों में लिप्त ‘समाधान’ एनजीओ का सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस कैंसिल

'बिना पंजीकरण के किया जा रहा था एनजीओ का संचालन। मामलो की न्यायिक जांच कर हो कानूनी कार्यवाही।'

देहरादून। उत्तराखण्ड में एनजीओ की आड़ लेकर तमाम गैर कानूनी गतिविधियो को अंजाम देने वाली एक एनजीओ पर राज्य सरकार ने बिना पंजीकरण के सर्विस प्रोवाइडर बनाए पर उसे बाहर का रास्ता दिखाकर कानूनी कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है। बहुगुणा सरकार के शासनकाल में इस एनजीओ पर कई शिकायतें होने के बाद भी किसी प्रकार की कार्यवाही केा अंजाम नहीं दिया गया था और महज जांच के नाम पर काफी समय तक शासन से लेकर प्रशासन तक के अधिकारी एनजीओ को बचाने का खेल खेलते रहे। लेकिन प्रदेश में नए निजाम की कुर्सी पर बैठने के बाद से ही कई मामलेा में लोगो को न्याय देकर उनकी समस्याओ को मुख्यमंत्री हरीश रावत जिस तरह दूर करते जा रहे हैं उससे वह लोग भी कांगेस के साथ जुड़ते जा रहे हैं जो पिछले दो सालो में बहुगुणा सरकार के शसनकाल में दूर चले गए थे क्योंकि प्रदेश में अब जनता को न्याय मिलना भी शुरू हो गया है।

 
बताते चलें कि उत्तराखण्ड के देहरादून स्थित जाखन में रेनूडी सिंह उर्फ रेनू सरकार अपनी समाधान नाम की एनजीओ चलाकर महिला हितो के संरक्षण करने का दावा करती हैं। प्रदेश में पिछले काफी समय से इस एनजीओ की आड़ में कई तरह के गोरखधंधो को अंजाम दिया जा चुका है। इस गोरखधंधो में फर्जी एसिड अटैक के मामले से लेकर बलात्कार जैसे झूठे मुकदमें में फंसाने के उदाहरण है। हालाकि इन मामलेा में पुलिस की जांच के बाद हकीकत सामने आने के साथ ही इन फर्जी मामलो में सच सामने आ चुका है और पुलिस दोनेा ही मामलेा में अपनी अंतिम रिपोर्ट लगाकर मामलों को झूठा साबित कर चुकी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि यह दोनेा मामले गलत थे तो आज तक पुलिस ने झूठे मुकदमे कायम करने पर उन लोगो के खिलाफ कार्यवाही क्यो नही की जिनके द्वारा इस साजिश को अंजाम दिया गया था।

इस मामले में पहला मामला दिल्ली निवासी विजय आनंद शर्मा का सामने आया था और शर्मा पर फर्जी एसिड अटैक को मुकदमा कायम कराने में रेनूडी सिंह की मुख्य भूमिका सामने आई थी। वहीं गर्ड़ी कैन्ट निवासी कृश्ण कुमार कश्यप के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा कायम करवा दिया गया था। बाद में पुलिस की जांच के बाद पीड़िता द्वारा सच बताने पर मामले को गलत साबित किया गया था। दोनो ही मामलो में समाधान की संचालिका रेनूडी सिंह की भूमिका सामने आई थी। इसके अलावा भी प्रदेश के देहरादून में कई अन्य लोगो को भी गैंगरेप जैसे मामलेा में फंसाने का काम किया जा चुका है। अगर पुलिस समाधान एनजीओ की संचालिका रेनूडी सिंह की गतिविधियेा एवं कामो की गोपनीय जांच करे तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर इतने समय तक एक एनजीओ का रजिस्ट्रार के यहां पंजीकरण नही था तो आखिर इस एनजीओ को सर्विस प्रोवाइडर के रूप में किसके इशारे पर लाभ पहुंचाया गया। सरकार को इस मामले में जांच कर उन अधिकारियो के खिलाफ भी कार्यवाही करनी चाहिए जो इस एनजीओ को लाभ देने में उतने ही सहभागी हैं। औऱ जिनके इशारे पर इतने समय तक एनजीओ को सर्विस प्रावाइडर के रूप् में राज्य के भीतर लाभ दिया गया। हालाकि जांच के बाद अब राज्य सरकार ने समाधान एनजीओ को सर्विस प्रोवाइडर के रूप में गलत तरीके से काम करने और बिना पंजीकरण के एनजीओ के संचालन को गलत करार देते हुए कार्यवाही करते हुए नामित एनजीओ को निरस्त कर दिया है। इस बारे में सचिव एस राजू के यहां से बकायदा इसका आदेश भी जारी किया जा चुका है।

अब विभाग एनजीओ समाधान पर कानूनी कार्यवाही करने की तैयारी कर रहा है। वहीं समाधान एनजीओ के खिलाफ कार्यवाही होने पर दिल्ली निवासी विजय आनंद शर्मा का कहना है कि वह पिछले काफी समय से इस एनजीओ की गैरकानूनी गतिविधियो को उजागर करने के साथ इसकी शिकायत कर रहे थे। अब राज्य सरकार ने कार्यवाही की है। उन्होने मांग की है कि समाधान एनजीओ के यहां गैरकानूनी तरीके से रह रही महिलाएं एवं बच्चो को वहां से रिहा कराकर एनजीओ के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए और एनजीओ द्वारा अब तक जितने भी मामले उजागर किए गए हैं उनकी न्यायिक जांच की जानी चाहिए। इस मामले में यह भी नया मोड़ सामने आया है कि अब समाधान की संचालिका रेनू डी सिंह उन लोगो को धमकाने का काम कर रही है जो लोग समाधान के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। देहरादून की एक महिला एवं गड़ी कैन्ट के एक वकील को लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही है और पुलिस में शिकायत के बाद भी उन लोगो के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वहीं देहरादून की कुछ महिलाओं ने समाधान एनजीओ के गोरखधंधे से परदा उठाकर खुलासा भी किया है कि किस तरह एनजीओ की आड़ में गलत कारनामो को अंजाम दिया जाता है।

 

देहरादून से नारायण परगईं की रिपोर्ट।

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