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पत्रकार अपने पिता की तीमारदारी में लगा रहा और उसकी जमीन पर गांव के दबंगों ने कब्जा कर लिया, पुलिस देखती रही

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गौरव गुलमोहर-

मेरा नाम गौरव गुलमोहर है। मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूँ, उत्तर प्रदेश में रहते हुए लगभग तीन वर्षों से कई राष्ट्रीय संस्थानों के लिए ग्राउंड रिपोर्ट कर रहा हूँ। दो दिन पहले रविवार की रात पिता जी के हृदय में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ और रात में ही परिवार के लोगों ने सुल्तानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। रविवार की रात से ही हमारा परिवार अस्पताल के चक्कर लगा रहा है।

इसी बीच सोमवार को सुबह गांव से ख़बर आई कि पड़ोसी दबंग परिवार ने हमारे घर के सामने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। जबकि इस आबादी पर हमारे परिवार ने तीन साल पहले ही जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। सोमवार से पूर्व भी कई बार न्यायालय में विचाराधीन इस जमीन पर पड़ोसी दबंगों द्वारा कब्जा करने की कोशिश होती रही है।

अमूमन दबंग रविंद्र बहादुर सिंह, शेर बहादुर सिंह, धर्म राज सिंह, राम नारायण सिंह कब्जा करने का ऐसा समय चुनते हैं जब घर में सिर्फ महिलाएं हों और पुरुष कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर गए हों। इन दबंगों के कारण परिवार डर के साये में जी रहा है।

कल दोबारा जब दबंग कई मजदूरों के साथ जमीन पर कब्जा करने के लिए पहुंचे तब घर पर कोई पुरुष नहीं था। परिवार के अधिकांश सदस्य अस्पताल में तीमारदारी कर रहे थे। घर पर मौजूद महिलाओं और बच्चों ने 112 व 1076 नम्बर डायल कर पुलिस को सूचना दी।

सुबह सूचना पाते ही लम्भुआ थाना की पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची तब निर्माण कार्य हो रहा था। थाने से आई पुलिस ने हमारे परिवार से न्यायालय में दर्ज मुकदमें का कागज मांगकर देखा और निर्माण कार्य रोकने के लिए कहा। लेकिन पुलिस के जाते ही दबंगों ने दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया। हमारा परिवार इसी तरह दिनभर में लगभग चार से पांच बार पुलिस को बुलाया, पुलिस आती रोक लगाती और चली जाती। वहीं निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहा।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस को दबंगों द्वारा उठाई गई चार फ़ीट ऊंची दीवार नज़र नहीं आई? यदि आई तो पुलिस उस विवादित जमीन पर निर्माण कार्य रोकने में क्यों असफल रही?

हमने लम्भुआ थाना के एसओ को फोन लगाकर सबकुछ बताने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी। हमने एसओ की शिकायत एडिशनल एसपी से की। उन्होंने उचित कार्यवाई का आश्वासन दिया। इसके बावजूद शाम होने तक कोई कार्यवाई नहीं हुई।

मेरा परिवार जहां एक ओर अस्पताल में तीमारदारी में हलकान है वहीं दूसरी ओर परिवार के कुछ सदस्य थाना, पुलिस, कोर्ट, कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं।

जब हमें हर जगह से न्याय मिलने की नाउम्मीदी नज़र आने लगी तब हमने ट्विटर का सहारा लिया और उत्तर प्रदेश पुलिस से मदद की अपील करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट करने के तीन घण्टे बाद सुल्तानपुर पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी कि थाना लम्भुआ व राजस्व टीम द्वारा प्रकरण का निस्तारण कराया जाएगा।’

देखें ट्वीट-

https://twitter.com/gauravgulmohar/status/1523649319559057409

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  • यह तो बड़ी ही वाहियात घटना है। जाहिलों को उनके अपराध की सजा तत्काल मिलनी चाहिए।

  • प्रशासन के नाकामयाबी की खबरें उत्तर प्रदेश में आए दिन उठ रही हैं।

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